# Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह > A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह ## Posts - [इश्क उनसे हुआ देखते देखते...](https://hindigazals.com/ishq-unse-hua-dekhte/): फिर जनाजा उठा देखते देखते..!! - [साथ मुझको ही पाओगे जिधर जाओगे...](https://hindigazals.com/mujhko-hi-paaoge/): दिल से निकले तो मेरी जान किधर जाओगे ? - [चलो मौत को गले लगा कर देखे....](https://hindigazals.com/chalo-maut-ko-gale/): नदामत के चंद आँसू सही बहा कर देखे..!! - [सोचा कि ख़ुद पे ज़रा सी इनायत कर लूँ](https://hindigazals.com/socha-ki-khud-pe/): मैं भी कैसे इस फ़िक्र की हिमायत कर लूँ ? - [मैं सोचो के किस गुमाँ में था....](https://hindigazals.com/main-socho-ke-kis-guman-me-tha/): मैं जिसके प्यार में फ़ना था यारो ! - [सब्ज़ गुम्बद से सदा आती है...](https://hindigazals.com/sabz-gumbad-se-sada-aati-hai/): मुझको आका की दुआ आती है..!! - [एक चिड़ियाँ ने आज ये सवाल किया..](https://hindigazals.com/chidiya-ne-ye-sawal-kiya/): हम तो ठहरे परिंदे, इन्सान ने इन्सान का क्या हाल किया ? - [मेरे मुल्क की तो बिल्कुल खाम है सियासत...](https://hindigazals.com/mere-mulq-ki-kham-hai/): हरामखोरो के लिए तो बस इल्हाम है सियासत..!! - [इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत...](https://hindigazals.com/insan-bhool-chuka/): बाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत..!! - [तन्हाइयो में अश्क बहाने से क्या मिला...](https://hindigazals.com/tanhaaiyo-me-ashk-bahane-se/): ख़ुद को दीया बना के जलाने से क्या मिला ? - [मैंने तुम्हे कितना सोचा ज़रीन कभी सोचा तुमने..](https://hindigazals.com/maine-tumhe-kitna-socha/): तुझसे क्या है मेरा नाता कभी सोचा तुमने ? - [हम शज़र से नहीं साये से वफ़ा करते है...](https://hindigazals.com/shazar-se-nahi-saye-se/): दर्द ओ गम रंज ओ अलम लोग अता करते है..!! - [वो दौर और था वो महबूबा और थी...](https://hindigazals.com/wo-daur-aur-tha/): मरहूम को किसी के चाहने का इनाम मिला है..!! - [कल यूँ ही तेरा तज़किरा निकला...](https://hindigazals.com/kal-yun-hi-jo-tera/): फिर लेकिन हिसाब का निकला..!! - [आँख से फिर न बहेगा दिल ए बर्बाद का दुःख...](https://hindigazals.com/aankh-se-fir-na-bahega/): कैसे कर सकती थी महसूस वो फ़रहाद का दुःख ? - [लम्हे लम्हे के सियासत पर नज़र रखते है](https://hindigazals.com/lamhe-lamhe-ki-siyasat/): इस क़दर हमसे तगाफुल ना बरतिए साहब ! - [बहुत रोया वो हमको याद कर के...](https://hindigazals.com/bahut-roya-wo-hamko/) - [तलाश अपना मैं नाम करूँ...](https://hindigazals.com/talash-apna-main-naam/): तलाश मैं अपना नाम करूँ…. - [ख़ुदा गारत करे ऐसे वतन के दुश्मन को...](https://hindigazals.com/khuda-garat-kare-aise/): जो पूरे करने अपने शौक हज़ार चाहता है..!! - [जो मैं भी रूठा तो सुबह तक तू सजी सजाई पड़ी रहेगी](https://hindigazals.com/jo-main-rutha-to/): तो एक हिस्सा ही झेल पाएगी दो तिहाई पड़ी रहेगी..!! - [तेरे उकताते हुए लम्स से महसूस हुआ...](https://hindigazals.com/bichhadne-ka-waqt-hua/): और इशारे से कहे सबसे जुदा चाहता है..!! - [इससे पहले कि कोई इनको चुरा ले](https://hindigazals.com/isse-pahle-ki-koi/): ज़ख्म गिनने है अगर मेरे बदन के याराँ ! - [किसी ने ज़िस्म, किसी ने ज़मीर बेचा है](https://hindigazals.com/kisi-ne-jism-kisi-ne-zamir/): कि पैरोकारो ने अपना ही पीर बेचा है..!! - [मेरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख्याल करे](https://hindigazals.com/mera-nahi-to-apna-hi/): वो गेसुओ में सजाएँ कि अब पामाल करे..!! - [मुझे ख़बर नहीं कितने ख़सारे रखे गए](https://hindigazals.com/mujhe-khabar-nahi-kitne-sahare/): हमारे वास्ते झूठे सहारे रखे गए..!! - [हाँ, ये ही मुहब्बत है , मुहब्बत एक हकीक़त है...](https://hindigazals.com/haan-ye-hi-muhabbat-hai/): हाँ ये ही मुहब्बत है ! - [मेरी हो के भी तुम मेरी नहीं....](https://hindigazals.com/meri-ho-ke-bhi-tum-meri-nahi/): ये कमाल कैसा कमाल है ! - [जिनकी सूरत पे तुम्हारा सारा शहर मरता है...](https://hindigazals.com/shayri-on-surat-in-hindi/) - [ताअज्ज़ुब है अँधे आईना दिखा रहे है...](https://hindigazals.com/mujh-me-hai-khamiyan/): पत्थर की खातिर लोग हीरे गँवा रहे है..!! - [तू कर ले नज़र अंदाज़ अभी अपने अंदाज़ में](https://hindigazals.com/kar-le-nazar-andaz/): तो हँसती हुई आँखों में से भी आँसू निकल आएँगे..!! - [जब मुझको सब क़ुबूल था, तुम क्यों चले गए ?](https://hindigazals.com/jab-sab-qubool-tha/): ये भी कोई उसूल था ? तुम क्यों चले गए ? - [हसीन रुत में...उदास क्यों हो ?](https://hindigazals.com/shayri-udas-kyo-ho/): मुझे बताओ उदास क्यों हो ? - [सवाल है कि उसको ऐतबार क्यों नहीं रहा ?](https://hindigazals.com/shayri-on-aetbar-in-hind/): सवाल है कि उसको ऐतबार क्यों नहीं रहा ? - [शायद समझ ही न पाए ज़माना मुहब्बत..](https://hindigazals.com/shayad-samjh-hi-na-paye/): बताओ है क्या सूद खाना मुहब्बत ? - [जवाब उसका नहीं है कोई लाज़वाब है वो](https://hindigazals.com/khubsurati-shayri-in-hindi/): कैसे बताऊँ कि सुकुन ए दिल में इज़्तिराब है वो..!! - [ऐसा कोई लम्हा होता जिसमे तन्हा होते हम !](https://hindigazals.com/aisa-koi-lamha-hota/): बन के चाहत इस जहाँ में हर शू पैदा होते हम..!! - [हजारो बार सोचोगे हमें तहरीर करने तक](https://hindigazals.com/shayri-on-tahrir/) - [दोस्तों को आँसूओ का तोहफ़ा मत देना](https://hindigazals.com/dosti-shayri-in-hindi/): दोस्तों को शिकवा का मौका मत देना..!! - [गैरो में तुमने मुझको अपना कहा शुक्रिया](https://hindigazals.com/shayri-on-dosti-in-hindi-3/): कहना आसान कर दिया दिल का पयाम शुक्रिया..!! - [ऐ दोस्त ! तूने दोस्ती का हक़ अदा किया](https://hindigazals.com/shayri-on-dosti-in-hindi-2/): कुछ देर ही गुज़री थी कि घर भी जला दिया..!! - [मुहब्बत सीप का मोती, बहर की पैकरानी है](https://hindigazals.com/muhabbat-shayri-in-hindi/): फ़क़त बाक़ी मुहब्बत है, मुहब्बत जावेदानी है..!! - [हमारे मुल्क में तमाशे अज़ीब हो रहे है](https://hindigazals.com/siyasat-shayri-in-hindi/): हालात देख कर अश्क ख़ूँ के दिल से शकीब हो रहे है..!! - [दोस्ती में कहाँ कोई उसूल होता है](https://hindigazals.com/shayri-on-dosti-in-hindi/): वही दोस्त हक़ ए दोस्ती का महसूल होता है..!! - [वक़्त काटना उससे पूछो हिज़्र में जिसकी गुज़री है](https://hindigazals.com/hizr-me-jiski-guzri-hai/): दिल का पंछी क़ैद में आ कर क्यों इतना हैरान हुआ ? - [समंदर और साहिल प्यास की ज़िन्दा अलामत है](https://hindigazals.com/samandar-aur-sahil/): किसी से क्या कहूँ क्या ज़ात के अन्दर बनाता हूँ..!! - [ऐसा शज़र ए बख्त सूख ही जाए तो बेहतर है,](https://hindigazals.com/shayri-on-bewafai-in-hindi-2/): क्यों वक़्त को किसी के लिए बर्बाद करे हम ? - [तेरे शहर वाले मेरा मौज़ू ए सुखन जानते है](https://hindigazals.com/mauzu-e-sukhan/): कितने लहजों के गिलाफो में छुपाऊँ तुझको ? - [कोई रब से नहीं माँगता](https://hindigazals.com/shayari-on-life-in-hindi/) - [मैं अक्सर भूल जाता हूँ](https://hindigazals.com/hindi-shayri-on-main-aksar-bhool-jata-hoo/): मैं अक्सर भूल जाता हूँ…. - [अजीब लोग थे वो तितलियाँ बनाते थे](https://hindigazals.com/azib-log-the-wo/): नमाज़ियो के लिए वही टोपियाँ बनाते थे..!! - [वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ?](https://hindigazals.com/hindi-shayari-on-muflisi/): वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ? - [तू मेरी रूह का हिस्सा है, तू ही जान मेरी](https://hindigazals.com/shayari-on-love-in-hindi/): क्या मिला और हुआ कितना ख़सारा सोचा ? - [तुझे भूलने की दुआ करूँ](https://hindigazals.com/hindi-shayri-on-shikayat/): मैं भी एक तुझसे गिला करूँ ? - [ख़रीद कर जो परिंदे उड़ाए जाते है](https://hindigazals.com/shayari-on-parinde-in-hindi/): हम ऐसे हैं नहीं जैसे कि बताये जाते हैं..!! - [ये इत्तेफ़ाक थोड़ी है](https://hindigazals.com/bazm-e-shayri-shayari-in-hindi/): सफहा ए क़िताब थोड़ी है..!! - [मुहब्बत की झूठी अदाओं पे साहब](https://hindigazals.com/mohabbat-ki-jhuthi-adaaon/): पर हमें आज़माने की कोशिश न करना..!! - [किसी की आँखों में ऐसा कभी ख़ुमार न था](https://hindigazals.com/kisi-ki-aankhon-me/): न आये गर तेरी गिनती में हम तो क्या शिकवा ? - [मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते](https://hindigazals.com/manzil-pe-naa-pahunche/): और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते..!! - [मुझे गुमनाम रहने का](https://hindigazals.com/mujhe-gumnam-rahne-ka/): तड़पती प्यास हो जैसे..!! - [इख़्तियार ए संजीदगी अक्सर जवानी उजाड़ देती है](https://hindigazals.com/ikhtiyar-e-zindagi-aksar/): अक्सर जवानी उजाड़ देती है..!! - [बेलौस मुफ़्लिसी भी है क़ुबूल मुझे](https://hindigazals.com/belaus-muflis-bhi-hai/): पर किसी का दिखावे का प्यार नहीं..!! - [तड़पता हूँ मैं लैल ओ नहार](https://hindigazals.com/tadapta-hoon-main-lail/): मेरे लिए बर्बाद तो करती होगी..!! - [रूबरू हो कर भी इस ज़माने में](https://hindigazals.com/rubaru-ho-kar-bhi/): किसी पे ऐतबार कहाँ करते है लोग ? - [तुम्हारी तरह सीने में खंज़र छुपाना नहीं आता](https://hindigazals.com/shayri-on-humanity-in-hindi/): तुम्हारी तरह सीने में खंज़र छुपाना नहीं आता..!! - [अपनी खताओ पे शर्मिन्दा भी हो जाता हूँ](https://hindigazals.com/apni-khataao-pe-sharminda/): तुम्हारी तरह सीने में खंज़र छुपाना नहीं आता..!! - [पहले मगफिरत की दुआ कीजिए](https://hindigazals.com/shayri-on-magfirat-in-hindi/): फिर पहले मगफिरत की दुआ कीजिए..!! - [कइयो ने कोशिश कर ली](https://hindigazals.com/kaiyo-ne-koshish-kar/): जो नारी को डुबाने में लगे है..!! - [हसरत ए दीद ओ वस्ल लिए ख्याल मेरा](https://hindigazals.com/hasrat-e-deed-o/): तो इल्ज़ाम फक़त ख्यालात पे क्यों आता है?? - [आते ही चुनाव तुमको हमारा ख्याल आता है](https://hindigazals.com/shayri-on-election-in-hindi/): अगर माँगो चावल तो लेकर पुलाव आता है..!! - [ख़ुदा की नज़र में एक सा हर बशर होता है](https://hindigazals.com/shayri-on-khuda-in-hindi/): मुब्तिलाएमर्ज़ पर दुआओं का असर होता है..!! - [परिंदा समझ कर शिकार कर गई](https://hindigazals.com/shayri-on-bewafai-in-hindi/) - [बहाना गरीबो को अधिकार दिलाना रहेगा](https://hindigazals.com/bahana-shayri-in-hindi/): मौसम ए सर्दी में बारिश ए ख़ास चल रहा है हमारी गलियों में मेढको का आना जाना रहेगा, मयस्सर ना था दीदार बगैर रस्म ए मुँह दिखाई उनका का अब सरेआम मिलना मिलाना रहेगा, हमारे हाथो का पानी तक न था गँवारा जिन्हें उनका ही हमारे साथ खाना, और नहाना रहेगा, गर बनी बात महज़ दिखावे से तो ठीक वरना टेढ़ी उंगलियों से इनका ज़ोर आज़माना रहेगा, सफेदपोशो कि गन्दगी को छुपाने कि खातिर वबा ए कोरोना इनके लिए बेहतर बहाना रहेगा, कर्फ्यू के नाम पर कर के घरो में क़ैद हमको इनके दौर ए हमदर्दी का मौसम सुहाना रहेगा, मक़सद मुल्क को लूट कर अपने खज़ाने भरना पर बहाना गरीबो को अधिकार दिलाना रहेगा..!! - [हम गरीबो के हिस्से ज़वाल आ रहे है](https://hindigazals.com/shayari-on-garib-in-hindi/): ख़ुद खा कर औरो को दलाल बता रहे है..!! - [अमीर ए मुल्क के नसीब है उरूज़ पे](https://hindigazals.com/amir-e-mulq-ke/): अमीर ए मुल्क के नसीब है उरूज़ पे हम गरीबो के हिस्से ज़वाल आ रहे है, मुल्क में मौसम ए इंतेख़ाब आ गया है सियासी शिकारी ले जाल आ रहे है, उम्र भर ना की कद्र ख़ुद के माँ बाप की उन्हें भी हम गरीबो के ख्याल आ रहे है, निवाला ए हराम खाने वाले हराम खोर आज हक़ ओ हलाल का गीत गा रहे है, कदमबोसी की बदौलत ज़िन्दगी जीने वाले अब मेहनत कशो को जीना सीखा रहे है..!! - [है शक्ल तेरी गुलाब जैसी, नज़र है तेरी शराब जैसी..](https://hindigazals.com/shakl-hai-teri-gulab-jaisi/): किसी सफ़र की किताब जैसी..!! - [ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं](https://hindigazals.com/gam-ki-barish-ne/): ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं..!! - [चादर की इज्ज़त करता हूँ](https://hindigazals.com/chadar-ki-izzat-karta/): तुमने कैसे कह डाला ? - [उसे कहना मुहब्बत दिल के ताले तोड़ देती है...](https://hindigazals.com/muhabbat-dil-ke-taale-tod-deti-hai/): उसे कहना मुहब्बत दिल में तुम भर लो मेरे हमदम..!! - [कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहज़े में...](https://hindigazals.com/koi-to-fool-khilaye-dua-ke-lahze-me/): ये वक़्त किसकी रौनत पे खाक़ डाल गया ? - [ख़बर क्या थी कि ऐसे अज़ाब उतरेंगे...](https://hindigazals.com/khabar-kya-thi-aise-azab-utrenge/): यारो ! उनके लिए ज़िन्दगी का पढ़ना क्या ? - [अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो...](https://hindigazals.com/apne-ehsas-se-chhoo-kar-mujhe-sandal-kar-do/): और मिरी ज़ात को सूखा हुआ जंगल कर दो..!! - [अभी तो इश्क़ में ऐसा भी हाल होना है](https://hindigazals.com/abhi-to-ishq-me/): उसे भी अपने किए का मलाल होना है..!! - [अब जो लौटे हो इतने सालों में...](https://hindigazals.com/ab-jo-laute-ho-itne-saalo-me/): रंग उभरे हैं उस के गालों में..!! - [आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जाती...](https://hindigazals.com/aankho-se-mere-is-liye-lali-nahi-jati/): तुम से तो कोई राह निकाली नहीं जाती..!! - [बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमको...](https://hindigazals.com/baandh-le-haath-pe-sine-pe/): हमको बिखरे हुए मिल जाओ संभाले तुमको.!! - [तुम मेरी ख्वाहिश नहीं हो....](https://hindigazals.com/tum-meri-khwahish-nahi-ho/): जिसकी तलब हमेशा इस दिल में ज़िन्दा रहती है..!! - [जो रहता है दिल के क़रीब](https://hindigazals.com/jo-rahta-hai-dil/): उसे ही पाने की दुआ करता है..!! - [संभाला होश है जबसे मुक़द्दर सख्त तर निकला](https://hindigazals.com/sambhala-hosh-hai-jabse/): वो बे मक़सद सफ़र निकला..!! - [तुम्हे बहार की कलियाँ जवाँ पुकारती है...](https://hindigazals.com/tumhe-bahaar-ki-kaliyan-javaan/): तमाम शहर की गलियाँ निहाँ पुकारती है..!! - [होश में रह के बे हवास फिर रहे है आज....](https://hindigazals.com/hosh-me-rah-ke-be-hawaas-fir-rahe-hai/): हैं फ़ासले भी काफी, हम में और तुम में दोस्त ! - [कहे दुनियाँ उसे ऐसे ही बेकार न आये...](https://hindigazals.com/kahe-duniyan-use-aise-hi-bekar-naa-aaye/): अब हश्र में क्यूँ मेरे तलबगार न आये ? - [कर के सारी हदों को पार चला....](https://hindigazals.com/kar-ke-saari-hado-ko-paar-chala/): ले के दोस्तों जो माँ का प्यार चला..!! - [पलकों को तेरी शर्म से झुकता हुआ मैं देखूँ...](https://hindigazals.com/palko-ko-teri-sharm-se-jhukta-hua/): ख़ुशबूओ को संग अपने चलता हुआ मैं देखूँ..!! - [रुख से नक़ाब उनके जो हटती चली गई...](https://hindigazals.com/rukh-se-naqab-unke-jo-hatati/): आये वो मेरे घर पे तो जाने ये क्या हुआ ? - [हर नाला तिरे दर्द से अब और ही कुछ है....](https://hindigazals.com/har-nala-tere-dard-se-ab-aur-hi-kuch-hai/): जो कुछ नज़र आता है वो सब और ही कुछ है..!! - [चर्ख़ से कुछ उमीद थी ही नहीं](https://hindigazals.com/charkh-se-kuchh-ummid/): हँस के बोले वो आदमी ही नहीं..!! - [जिन्हें कर सका न क़ुबूल मैं...](https://hindigazals.com/jinhe-kar-saka-n-qubul-main/) - [कभी ऐसा भी होता है ?](https://hindigazals.com/kabhi-aisa-bhi-hota-hai-ki/): कभी ऐसा भी होता है ? - [दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के](https://hindigazals.com/do-jahan-teri-muhabbat/): मत पूछ वलवले दिल-ए-ना-कर्दा-कार के..!! - [ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा है...](https://hindigazals.com/ye-misra-nahi-wazifa-mera-hai/): तुझे पारसाओं ने बहका दिया है..!! - [वो सिवा याद आए भुलाने के बाद](https://hindigazals.com/wo-siwa-yaad-aaye/): उन के आने से क़ब्ल उन के जाने के बाद ..!! - [वो हमें जिस क़दर आज़माते रहे](https://hindigazals.com/wo-hame-jis-kadar/): का'बा ओ दैर में ख़ाक उड़ाते रहे..!! - [ज़िन्दगी खाक़ न थी बस खाक़ उड़ाते गुज़री](https://hindigazals.com/zindagi-khaaq-na-thi/): किसी की आवाज़ थी ये, किसी को बुलाते गुज़री..!! - [गुरेज़ कर के मुसाफ़िर कोई गुज़र भी गया](https://hindigazals.com/gurez-kar-ke-musafir/): जहाँ जहाँ भी मैं ठहरा, जिधर जिधर भी गया..!! - [ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते है](https://hindigazals.com/zara-see-der-thahar/): हम इस चिराग़ की साँसे बहाल करते है..!! - [महफिले लूट गई जज़्बात ने दम तोड़ दिया...](https://hindigazals.com/mahfil-e-loot-gai/) - [दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता है...](https://hindigazals.com/dil-mera-misr-ka-baazar-bhi/): वहाँ इक़रार भी, इन्कार भी हो सकता है..!! - [नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया](https://hindigazals.com/nakhl-e-mamnooa-ke/): अर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ? - [नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गया](https://hindigazals.com/nakhl-e-mamnua-ke/): अर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ? - [उस ने सुकूत ए शब में भी अपना पयाम रख दिया](https://hindigazals.com/us-ne-sukut-e/): माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया..!! - [उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ](https://hindigazals.com/usko-juda-hue-zamana/): अहमद-'फ़राज़' तुझ से कहा ना बहुत हुआ..!! - [वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे](https://hindigazals.com/wo-dil-hi-kya/): "क़तील" जान से जाये पर इल्तजा न करे..!! - [दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती](https://hindigazals.com/dil-me-n-ho/): कमरे में सजाने को मुसीबत नहीं मिलती..!! - [धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो...](https://hindigazals.com/dhoop-me-niklo/): वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो..!! - [ख़िरद मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है](https://hindigazals.com/khirad-mando-se-kya/): कि मैं इस फ़िक्र में रहता हूँ मेरी इंतिहा क्या है ? - [तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ](https://hindigazals.com/tere-ishq-ki-inteha/): बड़ा बे अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ..!! - [सितारों से आगे जहाँ और भी हैं](https://hindigazals.com/sitaro-se-aage-jahan/): यहाँ अब मिरे राज़-दाँ और भी हैं..!! - [लिखना नहीं आता तो मेरी जान पढ़ा कर...](https://hindigazals.com/likhna-nahi-aata-to/): तू सरवर ए कोनैन के फ़रमान पढ़ा कर..!! - [कुछ दूर हमारे साथ चलो](https://hindigazals.com/kuch-door-hamare-saath/): हम दिल की कहानी कह देंगे..!! - [वतन से दूर आ कर जो बड़ी दौलत कमाते है](https://hindigazals.com/watan-se-door-aa/): कभी आओ हमें देखो कि गम कितना उठाते है..!! - [यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आये](https://hindigazals.com/yun-hi-har-baat/): काश ! फिर वो तितली को पकड़ना वो उड़ाना आये..!! - [अहल ए उल्फ़त के हवालो पे हँसी आती है](https://hindigazals.com/ahle-ulfat-ke-hawalo/): अब तो इन बीमार उजालो पे हँसी आती है..!! - [ज़ी चाहता है फ़लक पे जाऊँ](https://hindigazals.com/jee-chahta-hai-falaq/): फौलाद का दिल मैं कहाँ से लाऊँ ? - [अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की](https://hindigazals.com/ab-to-shaharon-se-2/): काबा दिल की फ़ज़ा है कि सनम खानों की..!! - [अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का था...](https://hindigazals.com/andaz-hoo-ba-hoo-teri-awaz-e-paa-ka/): वो शख्स तो ग़रीब ओ गय्यूर इन्तेहा का था..!! - [जब तेरा हुक्म मिला तर्क ए मुहब्बत कर दी](https://hindigazals.com/jab-tera-huqm-mila/): राख किसने तेरी सोने की सी रंगत कर दी..!! - [तलाशने सुकून को चला था एक रोज़ को](https://hindigazals.com/talashne-sukun-ko-chala/): मुस्कुराहटो में खोट थी, उदास क्यूँ थी ज़िन्दगी ? - [अब पहन लीजिये नक़ाबो को](https://hindigazals.com/ab-pahan-lijiye-naqabo/): देख मैंने लिया है ख़्वाबो को..!! - [किस तरह ये दिल हुआ तुम पर फ़िदा, लिख जाऊँगा](https://hindigazals.com/kis-tarah-ye-dil/): हो कफ़न मेरा फ़क़त उनकी रिदा, लिख जाऊँगा..!! - [शिद्दत से हो रहा है दिल बेक़रार आ जा](https://hindigazals.com/shiddat-se-ho-raha/): आ जाओ कह रहा हूँ मैं बार बार आ जा…!! - [वो दिखी थी आज ख़्वाब में मुझे....](https://hindigazals.com/wo-dikhi-thi-aaj-khwab-me/): वो बरअक्स चौदहवी के चाँद जैसा था..!! - [कुछ लफ्ज़ अगर मुझे मिल जाएँ....](https://hindigazals.com/kuch-lafz-agar-mil-jaayen/): तेरी रूह को अपनी जागीर करूँ..!! - [धनक के रंग चुरा ले हमारा बस जो चले](https://hindigazals.com/dhanak-ke-rang-chura/): तुम्हे लिबास हम बना ले हमारा बस जो चले..!! - [चलो मंज़ूर है मुझको, मुझे कुछ भी सजा दे दो...](https://hindigazals.com/chalo-manzoor-hai-mujhko/): हमारा दोष ही कब था ? - [जब से या रब मैं तेरे इस जहान में हूँ...](https://hindigazals.com/jabse-yaa-rab-main-tere-is-jahan-me-hoon/): लगता है मैं किसी और ही ज़बान में हूँ..!! - [ये तो इस पर है कि कब और कहाँ होने लगे](https://hindigazals.com/ye-to-is-par-hai/): वो जो एक उम्र गुरेजाँ रहे हमसे यारो ! - [ग़ज़ल को फिर सजा के सूरत ए महबूब लाया हूँ...](https://hindigazals.com/gazal-ko-fir-saja-ke-surat-e-mahbub/): सुनो अहल ए सुखन ! - [दिल ए गुमशुदा कभी मिल ज़रा](https://hindigazals.com/dil-e-gumshuda-kabhi/): दिल ए गुमशुदा ! - [आँखों में नींदों के सिलसिले भी नहीं](https://hindigazals.com/aankhon-me-neendon-ke/): वो आये ! आ के चले भी गए ! मिले भी नहीं ! - [यूँ ही उम्मीद दिलाते है ज़माने वाले...](https://hindigazals.com/yun-hi-ummid-dilate-hai/): मुँह से होते नहीं सब राज़ बताने वाले..!! - [कागज़ पर तहरीर दिलचस्प दास्तान हूँ मैं...](https://hindigazals.com/hasraton-se-bhara-qabristan/): कागज़ पर तहरीर दिलचस्प दास्तान हूँ मैं..!! - [तरसती आँखे, उदास चेहरा, नहीफ़ लहज़ा, बगैर तेरे](https://hindigazals.com/tarasti-aankhe-udas-chehra-2/): हाँ गर्दिश में ये आ गया है मेरा सितारा, बगैर तेरे..!! - [तरसती आँखे, उदास चेहरा, नजिफ लहज़े, बगैर तेरे...](https://hindigazals.com/tarasti-aankhe-udas-chehra/): हाँ गर्दिश में ये आ गया है मेरा सितारा, बगैर तेरे..!! - [मेरे जैसा बन जाओगे, जब इश्क़ तुम्हे हो जाएगा...](https://hindigazals.com/jab-ishq-tumhe-ho-jayega/): फिर तुम भी गज़ले गाओगे, जब इश्क़ तुम्हे हो जाएगा..!! - [दर्द का शहर बसाते हुए रो पड़ता हूँ](https://hindigazals.com/dard-ka-shahar-basaate/): अक्सर अब बारिश में नहाते हुए रो पड़ता हूँ..!! - [बहुत सलीक़े से चीख ओ पुकार करते रहे](https://hindigazals.com/bahut-salike-se-chikh/): हमारे जैसे तो फ़क़त इंतज़ार करते रहे..!! - [तुझसे मंसूब रहूँ तेरी कही जाऊँ पिया...](https://hindigazals.com/tujhse-mansub-rahoo/): आसमानों में उडूं उडती चली जाऊँ पिया... - [दर्द से यादो से अश्को से शनासाई है](https://hindigazals.com/dard-se-yaado-se/): जब फ़क़त उनके तस्वीर में ये रअनाई है..!! - [हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ?](https://hindigazals.com/hawa-e-shaam/): हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ? - [अब तेरी याद से वहशत नहीं होती मुझ को...](https://hindigazals.com/ab-teri-yaad-se-wahshat-nahi/): साँस लेने की भी फ़ुर्सत नहीं होती मुझ को..!! - [जाते जाते वो हमको रुला कर चला गया...](https://hindigazals.com/jaate-jaate-wo-humko/): आज वही पीठ में खंज़र लगा कर चला गया..!! - [कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से...](https://hindigazals.com/koi-sipahi-nahi-bach-saka/): ये जंग जीती नहीं जा रही अब तरानों से..!! - [उल्फ़त की नज़र से हमें एक बार तो देखो...](https://hindigazals.com/ulfat-ki-nazar-se-hame/): ऐसा कोई ज़रिया ज़िन्दगी में अब आसार तो देखो..!! - [जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते है...](https://hindigazals.com/jaan-o-dil-unhi-pe-nisar/): फिर भी डूब के उनमे हम ख़ुद को बीमार करते है..?? - [जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते है...](https://hindigazals.com/jaan-o-dil-unhi-pe-nisar/): फिर भी डूब के उनमे हम ख़ुद को बीमार करते है..?? - [भाइयो में फ़साद क्या करूँ मैं...??](https://hindigazals.com/bhaiyo-me-fasad-kya-karoo-main/): आप पर ऐतमाद क्या करूँ मैं ? - [मेरे दिल में मुहब्बत ज़रा देखिए...](https://hindigazals.com/mere-dil-me-muhabbat-zara/): हासिल है नवाब को ये सज़ा देखिए..!! - [जाने कितने रकीब रहते है...](https://hindigazals.com/jaane-kitne-raqib-rahte-hai/): बादशाह भी क़रीब रहते है..!! - [ग़ज़ल की शक्ल में एक बात है सुनाने की](https://hindigazals.com/gazal-ke-shakl-me/): ज़माना छूटता है छूट जाए क्या परवाह ? - [नहीं ऐसे किसी को तड़पाना चाहिए...](https://hindigazals.com/nahi-aise-kisi-ko-tadpana/): वक्त कैसा भी हो सबका गुज़र जाना चाहिए..!! - [रहा हूँ दुश्मनों में ख़ुश हमेशा....](https://hindigazals.com/raha-hoo-dushmano-me/): इधर अपनों का तुमको क्या बताएँ ? - [फ़ासले क़ुर्ब की पहचान हुआ करते है...](https://hindigazals.com/fasle-qurb-ki-pahchan/): घर भी उनके लिए ज़िन्दान हुआ करते है..!! - [नींद ना आये फूलो पे, काँटो पे सोना पड़ता है...](https://hindigazals.com/neend-naa-aaye-phoolo-pe/): हर हाल में जीना पड़ता है..!! - [सर रख कर रोने को शाना चाहिए था...](https://hindigazals.com/sar-rakh-kar-rone-ko/): कौन सा मुझको एक ज़माना चाहिए था ? - [जिस शेर का उन्वान मुहब्बत थी, वो तुम थे...](https://hindigazals.com/jis-sher-ka-unwan-muhabbat-thi/): सदियों से जो पहचान, मुहब्बत थी, वो तुम थे..!! - [चाहा है तुझे मैंने तेरी ज़ात से हट कर...](https://hindigazals.com/chaha-hai-tujhe-teri/): रहना है मुझे हिज़्र के हालात से हट कर..!! - [तुझे ना आयेगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझ..](https://hindigazals.com/tujhe-naa-ayegi-muflis-ki/): क़िताब ए इश्क़ में हर आह ! - [राह से हिज़्र की दीवार हटाने के लिए](https://hindigazals.com/raah-se-hizr-ki/): हमको आना ही पड़ा परदेश कमाने के लिए..!! - [फिर यूँ हुआ कि रास्ते यकज़ा नहीं रहे...](https://hindigazals.com/fir-yun-hua-ki-raste/): फिर यूँ हुआ सुकून का कोई पल नहीं मिला..!! - [रात भी, नींद भी, कहानी भी](https://hindigazals.com/raat-bhi-neend-bhi/) - [खो न जाए कहीं हर ख़्वाब सदाओं की तरह...](https://hindigazals.com/kho-naa-jaaye-kahin/): ज़िंदगी हम से मिली तेरी अदाओं की तरह..!! - [कब तक यूँ बहारों में, पतझड़ का चलन होगा...](https://hindigazals.com/kabtak-yun-baharo-me/): हर रात की मुट्ठी में, सूरज का रतन होगा..!! - [मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँ..](https://hindigazals.com/mere-khuda-mai-apne/): अंधों के इस नगर में उजालों को क्या करूँ ? - [हौसले गम से लड़ गए मेरे...](https://hindigazals.com/hausle-gam-se-lad-gaye/): ज़ख्म फिर से उधड़ गए मेरे..!! - [कभी ख़ामोश रहोगी कभी कुछ बोलोगी...](https://hindigazals.com/kabhi-khamosh-rahogi-kabhi-kuch/): कभी ख़ामोश रहोगी कभी कुछ बोलोगी हमें भुलाना भी चाहो तो भूला ना पाओगी, कोई पूछेगा बे वजह मुस्कुराने का सबब गर बताना चाहोगी भी तो बता न पाओगी, भरी महफ़िल में रहोगी सहेलियों के साथ पर ख़ुद को हमें ही तलाश करती पाओगी, फ़ासले चाहे कितने भी हो हमारे दरमियाँ हम तुम्हे याद आएँगे, तुम हमें याद आओगी..!! - [मुझे इतना प्यार न दो बाबा](https://hindigazals.com/mujhe-itna-pyar-na/): बेटी का दर्द... - [चिड़ियाँ होती है बेटियाँ....](https://hindigazals.com/chidiyan-hoti-hai-betiyan/): चिड़ियाँ होती है बेटियाँ मगर पंख नहीं होते बेटियों के, मायके भी होते है,ससराल भी होते है मगर घर नहीं होते बेटियों के, मायका कहता बेटियाँ पराई है ससराल कहता है पराये घर से आई है, ऐ ख़ुदा अब तू ही बता...... - [फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं](https://hindigazals.com/falaq-pe-chaand-ke/): फ़लक पे चाँद के हाले भी सोग करते हैं जो तू नहीं तो उजाले भी सोग करते हैं, तुम्हारे हाथ की चूड़ी भी बैन करती है हमारे होंट के ताले भी सोग करते हैं, नगर नगर में वो बिखरे हैं ज़ुल्म के मंज़र हमारी रूह के छाले भी सोग करते हैं, उसे कहो कि सितम में वो कुछ कमी कर दे कि ज़ुल्म तोड़ने वाले भी सोग करते हैं, तुम अपने दुख पे अकेले नहीं हो अफ़्सुर्दा तुम्हारे चाहने वाले भी सोग करते हैं..!! - [खून अपना हो या पराया हो....](https://hindigazals.com/khoon-apna-ho-ki-paraya-ho/): ज़ीस्त फाकों से तिलमिलाती है..!! - [बेलौस हँसी दिखाना, दिल से निभाना हर रिश्ता यहाँ](https://hindigazals.com/belaus-hansi-dikhana-dil/): बेलौस हँसी दिखाना, दिल से निभाना हर रिश्ता यहाँ मुस्कान पर अपने पराये सभी का अधिकार होता है, खुदगर्ज़ी का हुनर विरासत में मिलता है हैवानो को झूठी मुस्कान से नफ़रत छुपाने वाला मक्कार होता है, चैन ओ अमन हो ज़िन्दगी में ना रंजिश ओ गम हो कोई दर्द के बदले दुःख ओ तकलीफ देना व्यापार होता है, अपने हिस्से का गम उठाना है ख़ुद ही यही मुक़द्दर है मातम पर मनाएँ जो जश्न उस इसाँ पर धिक्कार होता है, भूल ना जाना बुलंदियों पर पहुँच कर तुम औकात अपनी क्योकि निभाना राजा कभी फ़कीर का क़िरदार होता है..!! - [हिज़्र में खून रुलाते हो, कहाँ होते हो ?](https://hindigazals.com/hizr-me-khoon-rulate-ho-kahan-hote-ho/): हिज़्र में खून रुलाते हो, कहाँ होते हो ? लौट कर क्यूँ नहीं आते हो, कहाँ होते हो ? जब भी मिलता है कोई शख्स बहारो जैसा मुझको तुम कैसे भूलाते हो, कहाँ होते हो ? - [गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले...](https://hindigazals.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%8f-%e0%a4%a8%e0%a5%8c-%e0%a4%ac/): गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले, क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले, कभी तो सुब्ह तिरे कुंज-ए-लब से हो आग़ाज़ कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-बार चले, बड़ा है दर्द का रिश्ता ये दिल ग़रीब सही तुम्हारे नाम पे आएँगे ग़म-गुसार चले, जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ हमारे अश्क तिरी आक़िबत सँवार चले, हुज़ूर-ए-यार हुई दफ़्तर-ए-जुनूँ की तलब गिरह में ले के गरेबाँ का तार तार चले, मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले..!! - [यूँ उम्र भर रहे बेताब देखने के लिये](https://hindigazals.com/yun-umr-bhar-rahe/): यूँ उम्र भर रहे बेताब देखने के लिये किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये, कहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आये वो गुलबदन के वो महताब देखने के लिये, न जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमको न जाने कब से थे बेताब देखने के लिये, छुआ तो जाना हर इक ख़्वाब था धुआँ यारो बचा न कुछ भी यहाँ नायाब देखने के लिये, क़रीब जा के हर एक चीज खोयी है हमने लुटे हैं ज़िंदगी शादाब देखने के लिये, कटी है ज़िंदगी अपनी भी यूँ उसूलों पर फ़ज़ा में रह गया तल्ख़ाब देखने के लिये, हाँ एक बार किया था भरम निग़ाहों पर गये थे दश्त में तालाब देखने के लिये, भटक रहे हैं अभी तक उन्हीं नज़ारों में न मिल सका हमें गुल ख़्वाब देखने के लिये, उजाड़ कर मेरे ख़्वाबों की छोटी सी दुनिया मुझे वो दे गया इक ख़्वाब देखने के लिये, यूँ दे के ज़ख़्म गया कोई ज़िंदगी भर को किसी की आँख को ख़ूँ-नाब देखने के लिये, न जाने ख़ाक हुईं हैं यहाँ कितनी ज़िंदगियाँ सुकून ओ चैन का पायाब देखने के लिये, तमाम ज़िंदगी हमने गुजार दी 'आज़ी' यहाँ तो ख़ुद को ज़फ़रयाब देखने के लिये..!! - [एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब](https://hindigazals.com/ek-arse-se-zamin/): एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब कोई बतलाये कहाँ गायब हुआ है इन्किलाब, एक वो भी वक्त था तनकर चला करता था वो एक ये भी वक्त आया है छुपा है इन्किलाब, खूबसूरत आज दुनिया बन गई है कत्लगाह जालिमों से मिल गया है अब सुना है इन्किलाब, है अगर जिन्दा तो आता क्यों नहीं वो सामने ऐसा लगता है कि शायद मर चुका है इन्किलाब, लोग कहते हैं गलतफहमी है ऐसा है नहीं आज भी बहुतों के सीने में है जिन्दा इन्किलाब..!! - [गुलों में रंग न खुशबू, गरूर फिर भी है...](https://hindigazals.com/gulo-me-rang-n-khushboo-guru-fir-bhi-hai/): गुलों में रंग न खुशबू, गरूर फिर भी है नशे में रूप के वो चूर-चूर फिर भी है, रंगे हैं हाथ गुनाहों से बाँह तक लेकिन शहर में नाम तुम्हारा हजूर फिर भी है, उसे भले ही डकैती का गुर नहीं मालूम गिरहकटी का उसे कुछ शऊर फिर भी है, नई बहू तो हजारों में एक है लेकिन नज़र में सास के वो बेशऊर फिर भी है, कटेगी उम्र हवाओं का रुख बदलने में बुझे चिराग तो मेरा कसूर फिर भी है, वो राम नाम जपेंगे और ये पढ़ेंगे नमाज़ मगर दिमाग में उनके फितूर फिर भी है..!! - [अश्क आँखों में छुपाते हुए थक जाता हूँ](https://hindigazals.com/ashq-aankho-me-chhupate/): अश्क आँखों में छुपाते हुए थक जाता हूँ बोझ पानी का उठाते हुए थक जाता हूँ, पाँव रखते है जो मुझ पर उन्हें एहसास नहीं मैं निशानात मिटाते हुए थक जाता हूँ, बर्फ़ ऐसी कि पिघलती नहीं पानी बन कर प्यास ऐसी कि बुझाते हुए थक जाता हूँ..!! - [तुम जैसे तो लाखो ही थे, है और भी आएँगे...](https://hindigazals.com/tum-jaise-to-lakho-the-hai-aur-ayenge/): तुम जैसे तो लाखो ही थे, है और भी आएँगे मगर हम जैसे तुम्हे बहुत कम ही मिल पाएँगे, बेचते है ज़मीर ओ क़लम जो और लोग है हमारे पैगाम ए हक़ तुम्हे सितारों पे नज़र आएँगे, तुम्हे मुबारक़ हो बद्दुआओ का दरियाँ साहब हम तो मज़लूमो की एक आह से ही मर जाएँगे, हम तुम्हे फूलो की वफ़ाओ में नज़र आएँगे जब भी ढूँढोगे अमन की फिज़ाओ में नज़र आएँगे, जब कभी याद आये तो बस हाथ उठा लेना तुम हम हर एक हक़ परस्त की दुआओं में नज़र आएँगे, मत ढूँढना हमें तुम कभी नफरतो की तपीश में हम तुम्हे सिर्फ़ मुहब्बतों की छाँव में नज़र आएँगे..!! - [आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं](https://hindigazals.com/agaah-apni-maut-se/): आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं सामान सौ बरस के हैं कल की ख़बर नहीं, आ जाएँ रोब-ए-ग़ैर में हम वो बशर नहीं कुछ आप की तरह हमें लोगों का डर नहीं, इक तो शब-ए-फ़िराक़ के सदमे हैं जाँ-गुदाज़ अंधेर इस पे ये है कि होती सहर नहीं, क्या कहिए इस तरह के तलव्वुन-मिज़ाज को वादे का है ये हाल इधर हाँ उधर नहीं, रखते क़दम जो वादी-ए-उल्फ़त में बे-धड़क ‘हैरत’ सिवा तुम्हारे किसी का जिगर नहीं..!! - [तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है...](https://hindigazals.com/tere-badan-se-jo-chhoo-kar/): तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल-ए-रंग वो झोंका नज़र भी आता है, तमाम शब जहाँ जलता है इक उदास दिया हवा की राह में इक ऐसा घर भी आता है, वो मुझ को टूट के चाहेगा छोड़ जाएगा मुझे ख़बर थी उसे ये हुनर भी आता है, उजाड़ बन में उतरता है एक जुगनू भी हवा के साथ कोई हम-सफ़र भी आता है, वफ़ा की कौन सी मंज़िल पे उस ने छोड़ा था के वो तो याद हमें भूल कर भी आता है, जहाँ लहू के समंदर की हद ठहरती है वहीं जज़ीरा-ए-लाल-ओ-गुहर भी आता है, चले जो ज़िक्र फ़रिश्तों की पारसाई का तो ज़ेर-ए-बहस मक़ाम-ए-बशर भी आता है, अभी सिनाँ को सँभाले रहें अदू मेरे के उन सफ़ों में कहीं मेरा सर भी आता है, कभी कभी मुझे मिलने बुलंदियों से कोई शुआ-ए-सुब्ह की सूरत उतर भी आता है, इसी लिए मैं किसी शब न सो सका 'मोहसिन' वो माहताब कभी बाम पर भी आता है..!! - [एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी...](https://hindigazals.com/ek-pagli-mera-naam-jo-le/): एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी, रात गए घर जाने वाली गुमसुम लड़की राहों में अपनी उलझी जुल्फों को सुलझाए भी घबराये भी, कौन बिछड़ कर फिर लौटेगा क्यों आवारा फिरते हो रातों को एक चाँद मुझे समझाये भी घबराये भी, आने वाली रुत का कितना खौफ है उसकी आँखों में जाने वाला दूर से हाथ हिलाए भी घबराये भी..!! - [वही किस्से है वही बात पुरानी अपनी...](https://hindigazals.com/wahi-qisse-hai-wahi-baat-purani-apni/): वही किस्से है वही बात पुरानी अपनी कौन सुनता है भला राम कहानी अपनी, सितमगर को ये हमदर्द समझ लेती है कितनी ख़ुश फ़हम है कमबख्त जवानी अपनी, रोज मिलते है दरीचे में नये फूल मुझे छोड़ जाता है कोई रोज निशानी अपनी, तुझसे बिछड़े है तो पाया है बियाबाँ का सकूत वरना दरियाँओ से मिलती थी रवानी अपनी..!! - [रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो](https://hindigazals.com/ret-par-likh-ke/): रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो आँख सच बोलती हैं प्यार छुपाया न करो, लोग हर बात का अफ़साना बना लेते हैं सबको हालात की रूदाद सुनाया न करो, ये ज़ुरूरी नहीं हर शख़्स मसीहा ही हो प्यार के ज़ख़्म अमानत हैं दिखाया न करो, शहर-ए-एहसास में पथराव बहुत हैं 'मोहसिन' दिल को शीशे के झरोखों में सजाया न करो..!! - [उसे कहना बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती](https://hindigazals.com/use-kahna-bichhdne-se/): उसे कहना बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती बिछड़ जाना मुहब्बत की सदाकत की अलामत है मुहब्बत एक फितरत है, हाँ फितरत कब बदलती है सो, जब हम दूर हो जाएं, नए रिश्तों में खो जाएं तो यह मत सोच लेना तुम, के मुहब्बत मर गई होगी नहीं ऐसे नहीं होगा .. - [नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ](https://hindigazals.com/nahi-darta-main-kaanto/): नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ चुभन दे जाएँ जो दिल को मैं उन बातो से डरता हूँ, मुझे तो नींद भी अच्छी नहीं लगती हकीक़त में दिखाएँ ख़्वाब जो झूठे मैं उन नींदों से डरता हूँ, अना का मैं नहीं कायल मुहब्बत है मुझे सबसे जो दिलो में बुग्ज़ रखते हो मैं उन अपनों से डरता हूँ, मुझे एहसास है सबका मैं सबके काम आता हूँ मगर जो कीना रखते हो मैं उन रिश्तो से डरता हूँ, मैं बन्दा हूँ ख़ुदा का और ख़ुदा का खौफ़ है मुझको जो डरते नहीं रब से मैं उन बन्दों से डरता हूँ..!! - [कभी याद आऊँ तो पूछना ज़रा अपनी फ़ुर्सत ए शाम से...](https://hindigazals.com/kabhi-yaad-aaoon-to-zara-puchna/): कभी याद आऊँ तो पूछना ज़रा अपनी फ़ुर्सत ए शाम से किसे इश्क़ था तेरी ज़ात से किसे प्यार था तेरे नाम से, ज़रा याद कर कि वो कौन था जो कभी तुझे भी अजीज़ था, वो जो जी उठा था तेरे नाम से वो जो मर मिटा था तेरे नाम पे, हमें बेरुखी का नहीं गिला कि यही वफ़ाओ का है सिला, मगर ऐसा ज़ुर्म था कौन सा ? - [जान मेरी जान कोई और है बात मेरी मान कोई और है...](https://hindigazals.com/jaan-meri-jaan-koi-aur-hai/): जान मेरी जान कोई और है बात मेरी मान कोई और है, हो गया हूँ मैं किसी का हमसफ़र अब मेरी पहचान कोई और है, नाज़ तेरे ज़ुल्म पर है आज भी इश्क़ की ये शान कोई और है, अब उम्र भर की जुदाई किस लिए ये तेरा एहसान कोई और है, जी रहा हूँ अब किसी की ज़िन्दगी ज़िस्म में इन्सान कोई और है, रास आई कब रफ़ाक़त मर के भी उसका क़ब्रिस्तान कोई और है..!! - [सुना है इस मुहब्बत में बहुत नुक़सान होता है...](https://hindigazals.com/suna-hai-is-muhabbat-me-bahut/): सुना है इस मुहब्बत में बहुत नुक़सान होता है, महकता झूमता जीवन गमो के नाम होता है, सुना है इस मुहब्बत में कही भी दिल नहीं लगता, बिना उसके निगाहों में कोई मौसम नहीं जँचता, खफ़ा जिससे मुहब्बत हो वो जीवन भर नहीं हँसता, बहुत अनमोल है ये दिल उजड़ कर फिर नहीं बसता, सुना है इस मुहब्बत में बहुत नुक़सान होता है..!! - [वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है](https://hindigazals.com/wo-jo-dil-me/): वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो दिया नहीं, वो जो रिश्ता तुझसे है बन गया किसी और से वो बना नहीं, वो जो प्यार तुझसे हो गया किसी और से वो हुआ नहीं, वो जो राज़ तुझसे है कह दिया किसी और से वो कहा नहीं, वो जो सुख मिला तेरी ज़ात से किसी और से वो मिला नहीं, तू बसा है आँखों में जिस तरह कोई और ऐसे बसा नहीं, तू हुआ है जितना क़रीब तर कोई और इतना हुआ नहीं..!! - [तेरी आँखों के दरीचे से गुज़ारे जाते](https://hindigazals.com/teri-aankho-ke-dariche/): तेरी आँखों के दरीचे से गुज़ारे जाते तो मेरे ख़्वाब यूँ बे मौत न मारे जाते, एक रिवायत की तरह हम भी ज़मीं पर उतरे पुछा जाता तो तेरे दिल पे उतारे जाते, माना थी शर्त ए वफ़ा नाम छुपाया जाता मेरी ज़ानिब मेरी जान कुछ तो इशारे जाते, एक ही दिल था सो उसको तो फ़िदा होना था होते दस बीस भी गर तुम पे ही वारे जाते, ये यकीं हमको है भूला वो नहीं होगा हमें जाने किस नाम से अब हम है पुकारे जाते, ऐ मुहब्बत ! - [बाग़ पा कर ख़फ़क़ानी ये डराता है मुझे...](https://hindigazals.com/baag-paa-khafqaani-ye-darata-hai/): बाग़ पा कर ख़फ़क़ानी ये डराता है मुझे साया-ए-शाख़-ए-गुल अफ़ई नज़र आता है मुझे, जौहर-ए-तेग़ ब-सर-चश्म-ए-दीगर मालूम हूँ मैं वो सब्ज़ा कि ज़हराब उगाता है मुझे, मुद्दआ महव-ए-तमाशा-ए-शिकस्त-ए-दिल है आइना-ख़ाना में कोई लिए जाता है मुझे, नाला सरमाया-ए-यक-आलम ओ आलम कफ़-ए-ख़ाक आसमाँ बैज़ा-ए-क़ुमरी नज़र आता है मुझे, ज़िंदगी में तो वो महफ़िल से उठा देते थे देखूँ अब मर गए पर कौन उठाता है मुझे, बाग़ तुझ बिन गुल-ए-नर्गिस से डराता है मुझे चाहूँ गर सैर-ए-चमन आँख दिखाता है मुझे, शोर-ए-तिम्साल है किस रश्क-ए-चमन का या रब आइना बैज़ा-ए-बुलबुल नज़र आता है मुझे, हैरत-ए-आइना अंजाम-ए-जुनूँ हूँ ज्यूँ शम्अ किस क़दर दाग़-ए-जिगर शोला उठाता है मुझे, मैं हूँ और हैरत-ए-जावेद मगर ज़ौक़-ए-ख़याल ब-फ़ुसून-ए-निगह-ए-नाज़ सताता है मुझे, हैरत-ए-फ़िक्र-ए-सुख़न साज़-ए-सलामत है 'असद' दिल पस-ए-ज़ानू-ए-आईना बिठाता है मुझे..!! - [क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना...](https://hindigazals.com/qayamat-hai-ki-sun-laila/): क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना तअ'ज्जुब से वो बोला यूँ भी होता है ज़माने में, दिल-ए-नाज़ुक पे उस के रहम आता है मुझे 'ग़ालिब' न कर सरगर्म उस काफ़िर को उल्फ़त आज़माने में..!! - [तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो...](https://hindigazals.com/tum-jaano-tumko-gair-se/): तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो मुझ को भी पूछते रहो तो क्या गुनाह हो ? - [नहीं कि मुझको क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं...](https://hindigazals.com/nahi-ki-mujhko-qayamat/): नहीं कि मुझको क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं, कोई कहे कि शब-ए-मह में क्या बुराई है बला से आज अगर दिन को अब्र ओ बाद नहीं, जो आऊँ सामने उन के तो मर्हबा न कहें जो जाऊँ वाँ से कहीं को तो ख़ैर-बाद नहीं, कभी जो याद भी आता हूँ मैं तो कहते हैं कि आज बज़्म में कुछ फ़ित्ना-ओ-फ़साद नहीं, अलावा ईद के मिलती है और दिन भी शराब गदा-ए-कूच-ए-मय-ख़ाना ना-मुराद नहीं, जहाँ में हो ग़म-ओ-शादी बहम हमें क्या काम दिया है हम को ख़ुदा ने वो दिल कि शाद नहीं, तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं..!! - [नहीं कि मुझ को क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं...](https://hindigazals.com/nahi-ki-mujhko-qayamat-ka/): नहीं कि मुझ को क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं, कोई कहे कि शब-ए-मह में क्या बुराई है बला से आज अगर दिन को अब्र ओ बाद नहीं, जो आऊँ सामने उन के तो मर्हबा न कहें जो जाऊँ वाँ से कहीं को तो ख़ैर-बाद नहीं, कभी जो याद भी आता हूँ मैं तो कहते हैं कि आज बज़्म में कुछ फ़ित्ना-ओ-फ़साद नहीं, अलावा ईद के मिलती है और दिन भी शराब गदा-ए-कूच-ए-मय-ख़ाना ना-मुराद नहीं, जहाँ में हो ग़म-ओ-शादी बहम हमें क्या काम दिया है हम को ख़ुदा ने वो दिल कि शाद नहीं, तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं..!! - [नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच...](https://hindigazals.com/nafas-na-anjuman-e-aarzoo-se/): नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच अगर शराब नहीं इंतिज़ार-ए-साग़र खींच, कमाल-ए-गर्मी-ए-सई-ए-तलाश-ए-दीद न पूछ ब-रंग-ए-ख़ार मिरे आइने से जौहर खींच, तुझे बहाना-ए-राहत है इंतिज़ार ऐ दिल किया है किस ने इशारा कि नाज़-ए-बिस्तर खींच, तिरी तरफ़ है ब-हसरत नज़ारा-ए-नर्गिस ब-कोरी-ए-दिल-ओ-चश्म-ए-रक़ीब साग़र खींच, ब-नीम-ग़म्ज़ा अदा कर हक़-ए-वदीअत-ए-नाज़ नियाम-ए-पर्दा-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर से ख़ंजर खींच, मिरे क़दह में है सहबा-ए-आतिश-ए-पिन्हाँ ब-रू-ए-सुफ़रा कबाब-ए-दिल-ए-समंदर खींच, न कह कि ताक़त-ए-रुस्वाई-ए-विसाल नहीं अगर यही अरक़-ए-फ़ित्ना है मुकर्रर खींच, जुनून-ए-आइना मुश्ताक़-ए-यक-तमाशा है हमारे सफ़्हे पे बाल-ए-परी से मिस्तर खींच, ख़ुमार-ए-मिन्नत-ए-साक़ी अगर यही है 'असद' दिल-ए-गुदाख़्ता के मय-कदे में साग़र खींच..!! - [न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता...](https://hindigazals.com/na-tha-kuchh-to-khuda-tha/): न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता, हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस तो ग़म क्या सर के कटने का न होता गर जुदा तन से तो ज़ानू पर धरा होता, हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता..!! - [चलो सागर ए इश्क़ का किनारा ढूँढे](https://hindigazals.com/chalo-sagar-e-ishq/): चलो सागर ए इश्क़ का किनारा ढूँढे डूबने वालो के लिए सहारा ढूँढे, यूँ भी ज़माने में गम है बे शुमार चलो मिल कर इसका कोई चारा ढूँढे, हमारे लिए काफी है तुम्हारी एक झलक तुम्हारे वास्ते आओ नया नज़ारा ढूँढे..!! - [कभी लफ्ज़ भूल जाऊँ, कभी बात भूल जाऊँ...](https://hindigazals.com/kabhi-lafz-bhool-jaaoon-kabhi-baat-bhool-jaaoon/): कभी लफ्ज़ भूल जाऊँ कभी बात भूल जाऊँ तुझे इस क़दर चाहूँ कि अपनी ज़ात भूल जाऊँ उठ कर कभी जो तेरे पास से चल दूँ जाते हुए ख़ुद को तेरे पास भूल जाऊँ कैसे कहूँ तुमसे कि कितना चाह है तुम्हे अगर ये कहने पे तुमको आऊँ अल्फाज़ भूल जाऊँ..!! - [जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ](https://hindigazals.com/jo-tere-pyar-ke/): जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ मेरी हयात के मंज़र ज़दीद हो जाएँ, तुम्हारी चश्म ए मुहब्बत की एक झलक से यहाँ गुलाब लम्हों से सब मुस्तफीद हो जाएँ, एक ज़माने के बाद आई है शाम ए गम शाम ए गम मेरे दर से कहाँ जाएगी ? - [हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है...](https://hindigazals.com/hum-jo-haal-e-zaar-baithe-hai/): हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है दिल की दिल में हार बैठे है, तेरी महफ़िल से तो निकल गए थे मगर तेरी यादे संभाल बैठे है, तेरे अश्क ओ ख़ुमार पे दिल क़ुर्बान तेरी नज़र ए ज़माल पे दिल क़ुर्बान, तू नसीब में नहीं था शायद शुक्र ए ख़ुदा कुछ पल तो गुज़ार बैठे है..!! - [सितारों को जो छू कर देखते है](https://hindigazals.com/sitaro-ko-jo-choo/): सितारों को जो छू कर देखते है सिकंदर है मुक़द्दर देखते है, समन्दर में हमें दिखते है क़तरे वो क़तरों में समन्दर देखते है, दरियाँ से भी कुछ आगे है मंज़िल ज़मीं तुम, हम तो अम्बर देखते है, निकलना भी ज़रूरी है सफ़र पर कभी सहरा कभी घर देखते है, बनाया जब से शीशे का घरौंदा हर एक पत्थर को डर कर देखते है, खज़ाने हैं मुक़द्दर में उन्ही के जो हर सीपी में गौहर देखते है, ना जाने हम मुन्तज़िर किस चीज के है जबकि बे अम्ली को घर घर देखते है..!! - [सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है](https://hindigazals.com/sabke-hote-hue-lagta/): सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है ये तकल्लुफ़ है कि जज़्बात की पामाली है, आसमानों से उतरने का इरादा हो तो सुन शाख़ पर एक परिंदे की जगह ख़ाली है, जिस की आँखों में शरारत थी वो महबूबा थी ये जो मजबूर सी औरत है ये घर वाली है, रात बे-लुत्फ़ है परहेज़ के सालन की तरह दिन भिकारी के कटोरे की तरह ख़ाली है, मुद्दतों ख़ुद को भरोसे में लिया है मैं ने तब कहीं तेरी मोहब्बत ने सिपर डाली है..!! - [खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी...](https://hindigazals.com/khidkiyan-khol-raha-tha-ki-hawa-ayegi/): खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी क्या ख़बर थी कि चिरागों को निगल जाएगी, मुझेको इस वास्ते बारिश नहीं अच्छी लगती जब भी वो आएगी, कोई याद उठा लाएगी, उसने हँसते हुए कर ली है अलाहिदा राहें मैं समझता था कि बिछ्ड़ेगी तो मर जाएगी, मैं मुसाफ़िर हूँ, मैं तो बहर तौर चला जाऊँगा मगर तू मेरे बाद भला कैसे संभल पाएगी ? - [मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ?](https://hindigazals.com/mulaqate-hamari-beirada-kyun/): मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ? - [किस की तलाश है किस के असर में हैं...](https://hindigazals.com/kis-ki-talash-kis-ki-asar-me-hai/): किस की तलाश है किस के असर में हैं जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में हैं, सारे तमाशे ख़त्म हुए सब लोग जा चुके एक हम ही रह गए जो फ़रेब ए सहर में हैं, ऐसी तो कोई ख़ास ख़ता भी नहीं हुई हमसे हाँ ये समझ लिया था कि हम अपने घर में हैं, अब के बहार देखिए क्या नक़्श छोड़ जाए ना आसार बादलों के न पत्ते हरे शजर में हैं, तुझ से बिछड़ना कोई नया हादसा तो नहीं ऐसे हज़ारों क़िस्से अबतक हमारी ख़बर में हैं..!! - [मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते...](https://hindigazals.com/mere-dil-ke-armaan-rahe-raat-jalte/): मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते रहे सब करवट पे करवट बदलते, यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत की हमने बहुत रोया है दिल दहलते दहलते, लगी दिल की है जख्म जाता नहीं ये बहल जाएगा दिल बहलते बहलते, तड़प बेवफा मत जमाने की खातिर चल चले कहीं और टहलते टहलते, अभी इश्क का ये तो पहला कदम है अभी जख्म खाने है कई चलते चलते, है कमज़ोर सीढ़ी मुहब्बत की लेकिन ये चढ़नी भी पड़ेगी, संभलते संभलते, ये ज़ीस्त अब उजाले से डरने लगी है हुई शाम क्यूँ ये दिन के यूँ ढलते ढलते, जवाब आया न तो मुहब्बत क्या करते बुझा दिल का आखिर दिया जलते जलते, न घबरा तेरी जीत ही 'हीर' होगी वो पिघलेंगे एक दिन पिघलते पिघलते..!! - [कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे](https://hindigazals.com/kuch-is-tarah-se/): कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे नमाज़ ए इश्क बहुत कम अदा हुई हमसे, गरीब आँखों में आंसू भी अब नहीं आते इलाही रहम ! - [कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ...](https://hindigazals.com/qashti-chala-raha-hai-magar-kis-ada-ke-saath/): कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ हम भी न डूब जाएँ कहीं ना ख़ुदा के साथ, दिल की तलब पड़ी है तो आया है याद अब वो तो चला गया था किसी दिलरुबा के साथ, जब से चली है आदम ओ यज़्दाँ की दास्ताँ हर बावफ़ा का रब्त है एक बेवफ़ा के साथ, मेहमान मेज़बाँ ही को बहका के ले उड़ा ख़ुश्बू ए गुल भी घूम रही है सबा के साथ, पीर ए मुग़ाँ से हम को कोई बैर तो नहीं थोड़ा सा इख़्तिलाफ़ है मर्द ए ख़ुदा के साथ, शैख़ और बहिश्त कितने तअ'ज्जुब की बात है या रब ये ज़ुल्म ख़ुल्द की आब ओ हवा के साथ, पढ़ता नमाज़ मैं भी हूँ पर इत्तिफ़ाक़ से उठता हूँ निस्फ़ रात को दिल की सदा के साथ, महशर का ख़ैर कुछ भी नतीजा हो ऐ 'अदम' कुछ गुफ़्तुगू तो खुल के करेंगे ख़ुदा के साथ..!! - [ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है](https://hindigazals.com/ye-hai-maykada-yahan/): ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है ये हरम नहीं है ऐ शैख़ जी यहाँ पारसाई हराम है, जो ज़रा सी पी के बहक गया उसे मयकदे से निकाल दो यहाँ तंग-नज़र का गुज़र नहीं यहाँ अहल-ए-ज़र्फ़ का काम है, कोई मस्त है कोई तिश्ना-लब तो किसी के हाथ में जाम है मगर इस पे कोई करे भी क्या ये तो मय-कदे का निज़ाम है, ये जनाब-ए-शैख़ का फ़ल्सफ़ा है अजीब सारे जहान से जो वहाँ पियो तो हलाल है जो यहाँ पियो तो हराम है, इसी काएनात में ऐ 'जिगर' कोई इंक़लाब उठेगा फिर कि बुलंद हो के भी आदमी अभी ख़्वाहिशों का ग़ुलाम है..!! - [न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम](https://hindigazals.com/naa-ibtida-ki-khabar/): न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम, दुआ तो ख़ैर दुआ से उमीद-ए-ख़ैर भी है ये मुद्दआ' है तो अंजाम-ए-मुद्दआ मालूम, हुआ न राज़-ए-रज़ा फ़ाश वो तो ये कहिए मेरे नसीब में थी वर्ना सई-ए-ना-मालूम, मेरी वफ़ा के सिवा ग़ायत-ए-जफ़ा क्यूँ हो तेरी जफ़ा के सिवा हासिल-ए-वफ़ा मालूम, कुछ उन के रहम पे थी यूँ ही ज़िंदगी मौक़ूफ़ कि उन को राज़-ए-मोहब्बत भी हो गया मालूम, तेरे ख़याल के असरार बे-ख़ुदी में खुले हमीं छुपा न सके वर्ना दिल को क्या मालूम, फ़रेब-ए-अम्न में कुछ मस्लहत तो है वर्ना सुकून-ए-कश्ती ओ तौफ़ीक़-ए-ना-ख़ुदा मालूम, वो इल्तिफ़ात कि था उस की इंतिहा भी है ख़ुदा की मार कि दिल को यही न था मालूम, ये ज़िंदगी की है रूदाद-ए-मुख़्तसर 'फ़ानी' वजूद-ए-दर्द मुसल्लम इलाज ना-मालूम..!! - [किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है...](https://hindigazals.com/kisi-se-bhi-nahi-ham-sabr-e-talqin/): किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है हमें मिलती नहीं जो चीज उसको छीन लेते है, बुढ़ापा आ गया लेकिन नहीं बदला मिजाज़ उनका अभी तक कपड़े वो अपने लिए रंगीन लेते है, फ़कीरो को कभी दर से न ख़ाली लौटने देना दुआएँ देते है वो, खैरात जब मिस्कीन लेते है, वो सारे लोग रंज़ ओ गम से पा जाते है आज़ादी जो सुबह ओ शाम वरद सुरह यासिन लेते है, हैरत है क्यूँ अहल ए फिलिस्तीन की सुजाअत पर यज़ीदो से सदा लोहा तो अहल ए दीन लेते है..!! - [आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद](https://hindigazals.com/aankhe-ban-jati-hai/): आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद लौट जाता है अगर कोई खफ़ा शाम के बाद, वो जो टाल जाती रही सर से बला शाम के बाद कोई तो था कि जो देता था दुआ शाम के बाद, आँखे भरती है शब ए हिज़्र यतीमो की तरह सर्द हो जाती है हर रोज़ हवा शाम के बाद, शाम तक क़ैद रहा करते है दिल के अन्दर दर्द हो जाते है सारे ही रिहा शाम के बाद, लोग थक हार के सो जाते है लेकिन जानाँ हम ने ख़ुश हो कर तेरा दर्द सहा शाम के बाद, चाँद जब रो कर सितारों से गले मिलता है एक अज़ब रंग की होती है फिज़ा शाम के बाद, हमने तन्हाई से पूछा कि मिलोगी कबतक ? - [मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा...](https://hindigazals.com/mujhko-pagal-kahne-wala-khud-hi-pagal/): कोई हसीन मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा, पलकों पे उसकी जलेंगे बुझेंगे जूगनू जब मेरी यादो के कमरे में होगी अश्को की बरसातें घर जंगल हो जाएगा, जिस दिन उसकी ज़ुल्फे उसके शानो पर खुल जाएँगी उस दिन शर्म से पानी पानी ख़ुद भी बादल हो जाएगा, जब भी वो पाकीज़ा दामन आ जाएगा कभी हाथ मेरे आँखों का ये मैला पानी ख़ुद ब ख़ुद गँगा जल हो जाएगा, उसकी यादें,उसकी बातें, उसकी वफ़ाएं, उसका प्यार किसको ख़बर थी जीना मुश्किल एक एक पल हो जाएगा, मत घबड़ा ऐ प्यासे दरियाँ सूरज आने वाला है बर्फ पहाड़ो से जो पिघली तुझ मे जल ही जल हो जाएगा..!! - [तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता...](https://hindigazals.com/tabhi-to-main-muhabbat-ka-kahin/): तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता जहाँ अपने सिवा कोई शख्स मुलाक़ाती नहीं होता, गिरफ्तार ए इश्क़ ए वफ़ा का कोई एक मौसम रख जो नाला रोज़ बह निकले वो तो बरसाती नहीं होता, बिछड़ने का इरादा है तो मुझसे मशविरा कर लो मुहब्बत का कोई फ़ैसला तन्हा ओ ज़ाती नहीं होता, तुम्हे इस दिल में जगह दी थी नज़र से दूर क्या करते ? - [मैं रातें जाग कर अक्सर](https://hindigazals.com/main-raaten-jaag-kar/): मैं रातें जाग कर अक्सर वो यादें झाँक कर अक्सर निशाँ जो छोड़ देती है मेरी ही ज़ात पर अक्सर, मैं जिसको खत लिखता था क़िताबे फाड़ कर अक्सर मेरी तजलील करती है वो मुँह पर मार कर अक्सर, वो ऊँगली जो फिरती थी मेरे रुखसार पर अक्सर वही ऊँगली अब उठती है मेरे क़िरदार पर अक्सर, दीदार ए य़ार करता था छतो को टाप कर अक्सर जुदाई ख़ूब सहता हूँ मैं उसको हार कर अक्सर, जब ज़िक्र ए यार चलता है किसी भी बात पर अक्सर मैं तेरा नाम लेता हूँ हमशक्ल काँप कर अक्सर, मैं ख़ुद से रोज़ कहता हूँ न उसको याद कर अक्सर दिल ए बेचैन की ज़िद्द है कि उसकी बात कर अक्सर, ग़ज़लें बेशुमार लिखता हूँ फ़क़त उस चाँद पर अक्सर एक वो कि इन्कार करती है शब ए इक़रार पर अक्सर..!! - [मेरे दोस्त, ऐ मेरे प्यारे अभी बात है अधूरी...](https://hindigazals.com/mere-dost-ae-mere-pyare/): मेरे दोस्त, ऐ मेरे प्यारे अभी बात है अधूरी अभी चाँदनी है बाक़ी अभी रात है अधूरी, वही सहरा का है मंज़र मेरे सामने अभी भी तेरी दीद के सिवा भी तो निज़ात है अधूरी, मैंने देखी सब्ज़ शाखिन किसी बाग़ में थी कहती तू कहाँ है खोया गाफ़िल तेरी ज़ात है अधूरी, कोई दोस्त मुझको मिलता कोई गम ही देता मुझको ये दुआ है नामुक़म्मल कि अभी हयात है अधूरी..!! - [चाँद यूँ कुछ देर को आते हो चले जाते हो](https://hindigazals.com/chaand-yun-kuch-der/): चाँद यूँ कुछ देर को आते हो चले जाते हो मेरी नज़रों से छुप कर बादलो में शरमाते हो, मुझको गरविदा अपने हुस्न का बना कर फिर प्यार से दूरी का हुक्म फ़रमाते हो, चाँद कैसे आफ़ताब की जगह ले कर तुम किस अदा से जलवा नूर अपने सर मनवाते हो, हर दिन मुझसे महव ए गो हो कर तुम किस तरह मनाज़िर ए ख़्वाब दिखाते हो, चाँद हम रोज़ तुम्हारी क़ुर्बत को तरस जाते है और तुम हो कि सितारों में महफ़िल सजाते हो..!! - [एक हकीकी ख़्वाब हुआ तेरा साथ सराब हुआ](https://hindigazals.com/ek-haqiqi-khwab-hua/): एक हकीकी ख़्वाब हुआ तेरा साथ सराब हुआ, सब अंदेशे कमाल थे मुक़म्मल हुए, पैकर ए ज़माल थे, तुम क़ातिल हुए,तो न चर्चा हुआ मेरी आह तक का तमाशा हुआ, अफ़सोस की खैर गुंजाइश नहीं मुझे क़बूल गम की नुमाइश नहीं, लब ज़ख़्मी तब बा ख़ुदा हुए ये कहते हुए कि रस्ते अब जुदा हुए..!! - [मैंने पल भर में यहाँ लोगो को बदलते हुए देखा है](https://hindigazals.com/maine-pal-bhar-me/) - [इस तसल्ली से बरसते है आँसू तेरे सामने](https://hindigazals.com/is-tasalli-se-barasate/): इस तसल्ली से बरसते है आँसू तेरे सामने कि तेरा हाथ मेरे रुखसार को तो आएगा, तेरे चाहने वालो की फ़ेहरिस्त लम्बी है मगर ये उम्मीद है हमारा भी नंबर कभी तो आएगा, हर बार जुदाई पे, लड़ाई पे बहुत रोता हूँ मैं अज़ीज़म ये वक़्त ए मुक़ाफात जल्द ही आएगा, तूने देखा ही नहीं आज तक आँखों में मेरी फिर इश्क़ तुझे खाक़ मुझ में नज़र आएगा, बगैर तस्वीरो के, कपड़ो के गुज़ार दी ये ईद भी दीवाना धीमे से यूँ ही एक दिन विसाल कर जाएगा..!! - [जिधर देखते है हर तरफ गमो के अम्बार देखते है...](https://hindigazals.com/jidhar-dekhte-hai-har-taraf-gamo-ka/): जिधर देखते है हर तरफ गमो के अम्बार देखते है हर किसी को रंज़ ओ अलम में गिरफ्तार देखते है, ख़ुदा जाने ख़ुशियों को किसकी नज़र लग गई ईद पर भी मुल्क में माहौल ना साज़गार देखते है, क्या ये वजह ए ग़ुरबत है या फिर कोई और ही वजह बहरहाल एक अनचाहा सा मुसल्लत आज़ार देखते है, हर एक अपना सा मुँह लिए बैठा है किसी कोने में इस बेरुखी के कारण हर रिश्ते में आई दरार देखते है, छोटे बड़े का अदब मानो जैसे भूल से गए हो सभी नतीजतन हर तरफ गुस्ताखी का गरम बाज़ार देखते है, अब कौन जाए किस की तरफ फ़ुर्सत कहाँ किसी को यानि आप ख़ुद में महदूद हर दोस्त ओ यार देखते है, नफसा नफसी का दौर है आज जहाँ जिस तरफ़ भी देखे हर कोई ख़ुद से ही हो चुका है तंग यानि बेज़ार देखते है..!! - [जानता कोई नहीं आज असूलो की ज़ुबान...](https://hindigazals.com/jaanta-koi-nahi-aaj-asoolo-ki-zuban/): जानता कोई नहीं आज असूलो की ज़ुबान काश ! - [बशर तरसते है उम्दा खानों को...](https://hindigazals.com/bashar-taraste-hai-umda/): बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को, ज़ुर्म आज़ाद फिर रहा है यहाँ बेकसों से भरे ये थानों को, छुप के बैठेगा तू कहाँ हमसे जानते है तेरे हर ठिकाने को, सर पे रखते है हम ज़मी लेकिन ज़ेर ए पा अपने आसमानों को, आये दिन इनके बीच दंगल है देखो गत्ते के इन पहलवानों को, क्या ये कम है कि बोलने को जुबां मिल गई हम जैसे बेजुबानो को, यही धरती का सीना चाक करें और रोटी नहीं किसानो को, एक नया मसला हुआ दरपेश फिर से सहरा के ऊँट बानो को, चारो सू सरफिरी हवा का राज़ तय नहीं रखना बादबानो को, कर के वायदा जो कल नहीं आया बीच लाएगा फिर बहानो को, हमने थोडा क़लम ज़िहाद किया याद रखना है इन तरानों को, हुस्न ए इखलास और रवादारी आओ ढूँढे फिर इन खज़ानो को, ज़िन्दगी क़ैद में गुज़ारी है भूल बैठे है अब उड़ानों को, हमने सीखा है आह भरना बस याद कर के गए ज़मानो को, उसको ज़ुल्फे बिखेरना तो थी शान बख्शी हमारे शानो को, सच को हम सच से ही मापेंगे चाहे वो भले ही तान ले कमानों को..!! - [बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को...](https://hindigazals.com/bashar-taraste-hai-umda-khano-ko/): बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को, ज़ुर्म आज़ाद फिर रहा है यहाँ बेकसों से भरे ये थानों को, छुप के बैठेगा तू कहाँ हमसे जानते है तेरे हर ठिकाने को, सर पे रखते है हम ज़मी लेकिन ज़ेर ए पा अपने आसमानों को, आये दिन इनके बीच दंगल है देखो गत्ते के इन पहलवानों को, क्या ये कम है कि बोलने को जुबां मिल गई हम जैसे बेजुबानो को, यही धरती का सीना चाक करें और रोटी नहीं किसानो को, एक नया मसला हुआ दरपेश फिर से सहरा के ऊँट बानो को, चारो सू सरफिरी हवा का राज़ तय नहीं रखना बादबानो को, कर के वायदा जो कल नहीं आया बीच लाएगा फिर बहानो को, हमने थोडा क़लम ज़िहाद किया याद रखना है इन तरानों को, हुस्न ए इखलास और रवादारी आओ ढूँढे फिर इन खज़ानो को, ज़िन्दगी क़ैद में गुज़ारी है भूल बैठे है अब उड़ानों को, हमने सीखा है आह भरना बस याद कर के गए ज़मानो को, उसको ज़ुल्फे बिखेरना तो थी शान बख्शी हमारे शानो को, सच को हम सच से ही मापेंगे चाहे वो भले ही तान ले कमानों को..!! - [सब गुनाह ओ हराम चलने दो....](https://hindigazals.com/sab-gunah-o-haram-chalne-do/): सब गुनाह ओ हराम चलने दो कह रहे है निज़ाम चलने दो, ज़िद्द है क्या वक़्त को बदलने की यूँ ही सब बे लगाम चलने दो, मुफ़्त मरता नहीं तू राहो में तुझको देते है दाम चलने दो, हक़ को छोड़ो क़िताब को छोड़ो हुक्म ए हाकिम से काम चलने दो, शाह आएँगे शाह जाएँगे तुम रहोगे सदा गुलाम चलने दो..!! - [ज़हालत की तारीकियो में गुम अहल ए वतन को](https://hindigazals.com/zahalat-ki-tarikiyo-me/): ज़हालत की तारीकियो में गुम अहल ए वतन को वो ले कर तालीम की मशाल रास्ता दिखाने चला है, दीदावर तन्हा ही निज़ाम ए शैतान से टकराने चला है ज़ुल्मत पसंद हरीफो को आईना ए हक़ दिखाने चला है, मुद्दतो से मुल्क में बिछाए गए गंदे सियासी जाल को वो अपनी क़लम की ज़ोर से जड़ से मिटाने चला है, हम तो दुआएँ खैर के तलबगार है फ़क़त या अल्लाह सुना है वो अकेला ही ज़ुल्मत के परखचे उड़ाने चला है..!! - [एक शख्स की खातिर ज़बर कर बैठा हूँ...](https://hindigazals.com/ek-shakhs-ki-khatir-zabar-kar-baitha-hoo/): एक शख्स की खातिर ज़बर कर बैठा हूँ मैं ज़िन्दगी को इधर उधर कर बैठा हूँ, उस लम्हे पे तो क़यामत बरपा करनी थी मगर न जाने क्यूँ अब सबर कर बैठा हूँ, अहद था शिद्दत ए अज़ीयत ए फ़िराक से न रोऊँगा अहद टूट गया जानाँ मैं चश्म ए तर कर बैठा हूँ, वो नफ़ीस मिज़ाजी छीन ली ज़माने ने आके देख अब दिल को पत्थर कर बैठा हूँ, तुझ जैसे वायदा शिकन पे ऐतबार नहीं करना चाहिए मगर मैं कर बैठा हूँ, मेरी अब ख्वाहिश ए मुख़्तसर वस्ल नहीं इसी लिए वस्ल को अब हिज़्र कर बैठा हूँ..!! - [मेरे ज़ख्मो की हालात को रफूगर जानता है...](https://hindigazals.com/mere-zakhmo-ki-halat-ko-rafoogar-janta-hai/): ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है मज़ा है नेकियों में क्या कलंदर जानता है, बहुत हमदर्द है मेरे मगर अनजान है सब मेरे ज़ख्मो की हालात को रफूगर जानता है, किसी से मैं नहीं कहता मगर मेरी गरीबी मेरी दीवारों का उखड़ा पलस्तर जानता है, कभी मंदिर कभी मस्ज़िद पे है उसका बसेरा मज़हब इंसानियत का बस कबूतर जानता है, सनम तेरी जुदाई में कटा है वक़्त ए मुश्किल गिने दिन हिज़्र में कितने कैलेंडर जानता है, कही भर पेट रोटी तो कही से हाथ खाली किसी की कैसी है नीयत गदागर जानता है, मैं प्यासा रह के भी मिन्नत नहीं करता किसी से बहुत ख़ुद्दार हूँ मैं ये बात समंदर जानता है, किसी भी वक़्त ये मज़लूम कर देंगे बग़ावत सितम की हो चुकी है हद सितमगर जानता है, रहे अर्थी से बाहर हाथ उसका कौल है ये न कुछ भी साथ जाएगा सिकंदर जानता है, तुम्हारी याद में रातें कटी है मुश्किलों से रहा हूँ कितना मैं बेचैन ये बिस्तर जानता है, न होगा दूसरा पैदा जहाँ में कोई गाँधी बहुत अच्छी तरह से ये पोरबंदर जानता है, यहाँ है भीड़ में भी किस क़दर हर शख्स तन्हा तुम्हारे शहर का हर एक मंज़र जानता है, यूँ जीने को तो सब जी रहे है इस जहाँ में मगर इस ज़ीस्त का मतलब सुखनवर जानता है..!! - [ऐ निगाह ए दोस्त ये क्या हो गया, क्या कर दिया](https://hindigazals.com/ae-nigaah-e-dost/): ऐ निगाह ए दोस्त ये क्या हो गया क्या कर दिया पहले पहले रौशनी दी फिर अँधेरा कर दिया, आदमी को दर्द ए दिल की कद्र करनी चाहिए ज़िन्दगी की तल्खियों में लुत्फ़ पैदा कर दिया, इस निगाह ए शौक़ की तीर अफ़गनी रखी रही मैंने पहले इसको मज़रूह ए तमाशा कर दिया, उनकी महफ़िल के तसव्वुर ने फिर उनकी याद ने मेरे गम खाना की रौनक को दोबाला कर दिया, मयकदे की शाम और काँपते हाथों में ज़ाम तिश्नगी की खैर हो ये किस को रुसवा कर दिया..!! - [दिलो में बस अपने मुहब्बत भरे...](https://hindigazals.com/dilo-me-bas-apne-muhabbat-bhare/): चलो आओ हम एक वायदा करें दिलो में बस अपने मुहब्बत भरे, वो सब काम जिनसे दुखे दिल कोई करें अहद अहम वो न हरगिज़ करे, मिटा दे ज़माने से हम नफरतें मुहब्बत की खातिर जिएँ और मरे, हैं इन्सान की दुश्मन ये सारी नफुर मुहब्बत का हर शू बोला बाला करे, गुनाहों से सारे करें हम इज्तिनाब सभी अमल हम सुन्नतो पर करे, सभी हम पियें ज़ाम ए इश्क़ ए नबी ﷺ किसी से नहीं बस ख़ुदा से हम डरे..!! - [सुरखाब क्या ख़रीदे असबाब क्या ख़रीदे](https://hindigazals.com/surkhab-kya-kharide-asbab/): सुरखाब क्या ख़रीदे असबाब क्या ख़रीदे फ़ितरत फ़कीर जिसकी अलक़ाब क्या ख़रीदे, ले जा इन्हें उठा कर सौदा नहीं है मुमकिन जिस आँख में न नींदे वो ख़्वाब क्या ख़रीदे, बेकार अश्क ले कर सहरा गया था मज़नू जो बूँद को तरसता सैलाब क्या ख़रीदे, बाज़ार है ये दुनियाँ हर शय पे जी ये आये एक कशमकश अज़ब है बेताब क्या ख़रीदे, माना ज़मीं है तेरी पर सोच ले तू नादाँ जब आसमां न तेरा माहताब क्या ख़रीदे, आदत, चलन, तरीक़े ये इश्क़ खाक़ बदले ज़ाहिल हो जो अज़ल का आदाब क्या ख़रीदे, ऐ इन्सान समन्दरो की क्या मिन्नतें करे तू साहिल तुझे डुबोये गर्दाब क्या ख़रीदे..!! - [मत पूछो मुसलमान का हाल...](https://hindigazals.com/mat-pucho-musalman-ka-haal/): मत पूछो मुसलमान का हाल... - [फ़लक पे कितना उदास कितना तन्हा...](https://hindigazals.com/falaq-pe-kitna-udas-kitna-tanha/): फ़लक पे कितना उदास कितना तन्हा कितना बेकस सा लगा हिलाल ए ईद, हम हुजूम ए शहर में भी तन ए तन्हा वहाँ वो कहकशाँ में हो कर भी अकेला, काश ! - [मैं हूँ मेरी चश्म-ए-तर है रात है तन्हाई है...](https://hindigazals.com/main-hoon-meri-chashm-e-tar-hai/): मैं हूँ मेरी चश्म-ए-तर है रात है तन्हाई है दर्द मेरा हम-सफ़र है रात है तन्हाई है, जुगनुओं से साथ चलने की गुज़ारिश कीजिए हिज्र का लम्बा सफ़र है रात है तन्हाई है, फिर वही यादें वही आँसू वही आह-ओ-फ़ुग़ाँ फिर वही दीवार-ओ-दर है रात है तन्हाई है, दोस्तों की भीड़ को मसरूफ़ियत में खो दिया आज फ़ुर्सत बाम पर है रात है तन्हाई है, तुझ को पाने के जुनूँ में हम वहाँ तक आ गए ख़ुद को अब खोने का डर है रात है तन्हाई है..!! - [रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है...](https://hindigazals.com/rawaiye-maar-dete-hai-ye-lahze-maar-dete-hai/): रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है वही जो जान से प्यारे हैं रिश्ते मार देते है, कभी बरसो गुज़रने पर कही भी कुछ नहीं होता कभी ऐसा भी होता है कि लम्हे मार देते है, कभी मंज़िल पे जाने के निशाँ तक भी नहीं मिलते जो रास्तो में भटक जाएँ तो रस्ते मार देते है, कहानी खत्म होती है कभी अंज़ाम से पहले अधूरे ना मुक़म्मल से ये किस्से मार देते है, हजारो वार दुनियाँ के सहे जाते है हँस हँस के मगर अपनों के ताने और शिकवे मार देते है, मुझे अक्सर ये लगता है कि जैसे हूँ नहीं हूँ मैं मुझे होने न होने के ये खदशे मार देते है, कभी मरने से पहले भी बशर को मरना पड़ता है यहाँ जीने के मिलते है जो सदमे मार देते है, बहुत एहसान जताने से ताअल्लुक़ टूट जाता है बहुत इसार ओ क़ुरबानी के जज़्बे मार देते है, कभी तूफान की ज़द से भी सफिने बच निकलते है कभी सालिम सफीनो को किनारे मार देते है, वो हिस्सा काट डाला ज़हर का खादशा रहा जिस में जो बाक़ी रह गए मुझ में वो हिस्से मार देते है, जो आँखों में रहे सदा वही तो ख़्वाब अच्छे है जिन्हें ताबीर मिल जाए वो सपने मार देते है..!! - [आगाज़ ईद है, अंज़ाम ईद है, नेक काम ईद है...](https://hindigazals.com/aagaaz-eid-anzam-eid-hai/): ईद मुबारक़ आगाज़ ईद है, अंज़ाम ईद है, नेक काम ईद है सच्चाई ओ हक़ पे रहे क़ायम तो हर गाम ईद है, ख़िदमत ए ख़ल्क़ और दिल से रब की इबादत जिसने भी की उन सबके लिए इनआम ईद है..!! - [अपनी ज़रूरत के मुताबिक़....](https://hindigazals.com/apni-zarurat-ke-mutabik/): अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ लोगो के जज़्बात बदल जाते है, इंसानों की इन्हें फिक़र नहीं मगर ये हैवानो की खैर मनाते है, इनके रंग बदलने का हुनर देख ख़ुद गिरगिट भी शरमा जाते है, ऐसे इंसानियत के दुश्मन भी अपने आप को इन्सान बताते है, कोठे और दलालों के मालिक भी नारी उत्थान का नारा लगाते है, साडी बाँटते दिन के उजालो में वही रातो में दुशासन बन जाते है..!! - [कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती...](https://hindigazals.com/kahte-hai-eid-hai-aaj-apni-bhi-eid-hoti/): कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती, क़ीमत में दीद-ए-रुख़ की हम नक़्द-ए-जाँ लगाते बाज़ार-ए-नाज़ लगता दिल की ख़रीद होती, कुछ अपनी बात कहते कुछ मेरा हाल सुनते नाज़-ओ-नयाज़ की यूँ गुफ़्त-ओ-शुनीद होती, जल्वे दिखाते जाते वो तर्ज़-ए-दिलबरी के और दिल में याँ हवा-ए-नाज़-ए-मज़ीद होती, तेग़-ए-नज़र से दिल पर वो वार करते जाते और लब पे याँ सदा-ए-हल-मिम-मज़ीद होती, अबरू से उन के ग़म्ज़ा तीर-ए-अदा लगाता ये दिल क़तील होता ये जाँ शहीद होती, कुछ हौसला बढ़ाता अंदाज़-ए-लुत्फ़-ए-जानाँ कुछ दग़दग़ा सा होता कुछ कुछ उमीद होती..!! - [आये जो वो तो दिल के सब अरमान मचल गए...](https://hindigazals.com/aaye-jo-wo-to-dil-ke-sab-armaan/): क्यूँ कर वो अपनी बातों से पहलू बदल गए..!! - [राज़ कहाँ तक राज़ रहेगा मंज़र-ए-आम पे आएगा](https://hindigazals.com/raaj-kahan-tak-raaj-rahega/): चाँद-नगर का रहने वाला चाँद-नगर लिख जाएगा..!! - [पीत करना तो हम से निभाना सजन...](https://hindigazals.com/peet-karna-to-hamse-nibhana-sajan/): अपने 'इंशा' को भी देख आना सजन..!! - [हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर माह-ए-तमाम हुए..](https://hindigazals.com/hilal-e-shaam-se-badh-kar-maah-e-tamam/): बात तुम्हारी मान के हम तो शब भर बे-आराम हुए..!! - [कुछ कहने का वक़्त नहीं कुछ न कहो ख़ामोश रहो](https://hindigazals.com/kuch-kahne-ka-waqt/): 'इंशा'-जी लो धागा लो और लब सी लो ख़ामोश रहो..!! - [किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे](https://hindigazals.com/kis-ko-paar-utara/): कब तक उस के बख़्त के बदले अपने बाल सँवारोगे..!! - [कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा](https://hindigazals.com/kal-chaudawahi-ki-raat/): आशिक़ तेरा रुस्वा तेरा शाइर तेरा 'इंशा' तेरा…!! - [सब झाड़ फूँक सीख गए शेख जी से हम](https://hindigazals.com/sab-jhaad-foonk-sikh/) - [ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में तमाम तेरी हिकायतें हैं...](https://hindigazals.com/ye-meri-gazale-meri-nazme-tamam/): वो थक चुका है और उस का तेशा उसी के सीने में गड़ चुका है..!! - [इब्तिदा ए इश्क़ में मेरा](https://hindigazals.com/ibtida-e-ishq-me/): उलटता है रुख से नक़ाब आधा..!! - [चलो ये इश्क़ नहीं चाहने की आदत है](https://hindigazals.com/chalo-ye-ishq-nahi/): न याद कर कि जिसे भूलने की आदत है..!! - [लानत है तेरी ज़िन्दगी पे नहीं तू किसी काज का...](https://hindigazals.com/lanat-hai-teri-zindagi-pe/): कहती थी तुम्हारी रोटी क्यों न कुत्तो को डाल दूँ ? - [बहार रुत में उजाड़ रस्ते...](https://hindigazals.com/bahar-rut-me-ujad-raste/): दुआ करोगे तो रो पड़ोगे..!! - [किसी के इश्क़ में रस्तों की धूल हो गए हैं...](https://hindigazals.com/kisi-ke-ishq-me-rasto-ki-dhool/): सुना तो ये था कि सारे नुज़ूल हो गए हैं..!! - [धमाल धूल उड़ाए तो इश्क़ होता है...](https://hindigazals.com/dhamaal-dhool-udaye-to-ishq-hota-hai/): वो ख़ुद को ख़ुद से हटाये तो इश्क़ होता है..!! - [इश्क़ ज़न्नत इश्क़ दोज़ख इश्क़ तो मशहूर है...](https://hindigazals.com/ishq-zannat-ishq-dozakh-ishq-to-mashahoor-hai/): इश्क़ अव्वल इश्क़ आख़िर इश्क़ साहिल ए बा ख़ुदा..!! - [हिसार-ए-दीद में रोईदगी मालूम होती है...](https://hindigazals.com/hisaar-e-deed-me-roidagi-malum-hoti-hai/): मुझे ये बेबसी भी ज़िंदगी मालूम होती है…!! - [हर एक दर्द मुहब्बत के नाम होता है...](https://hindigazals.com/her-ek-dard-muhabbat-ke-naam/): हमारे प्यार का सारे जहाँ को सलाम होता है..!! - [तुमको बेलौस प्यार करता हूँ....](https://hindigazals.com/tumko-be-laus-pyar-karta-hoo/): इस लिए कॉल यार करता हूँ..!! - [मतलब परस्तो को क्या पता कि दोस्ती क्या है](https://hindigazals.com/matlab-parasto-ko-kya/): इन अमीरों को क्या मालूम कि सादगी क्या है..!! - [मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता है...](https://hindigazals.com/muqaddar-ka-chamakta-sitara/): जो मौका सामने है वो हमारा हो भी सकता है..!! - [एक मैं और इतने लाखों सिलसिलों के सामने](https://hindigazals.com/ek-main-aur-itne/): कान-ए-ज़र की बंद हैबत मशअ'लों के सामने..!! - [इक मसाफ़त पाँव शल करती हुई सी ख़्वाब में](https://hindigazals.com/ek-mashafat-paanv-shal/): ये सिफ़त आई कहाँ से पारा-ए-सीमाब में..!! - [एक नगर के नक़्श भुला दूँ एक नगर ईजाद करूँ...](https://hindigazals.com/ek-nagar-ke-naqsh-bhula-doon/): या फिर काम ये नज़्म-ए-जहाँ का शाम ढले के ब'अद करूँ..!! - [एक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गया](https://hindigazals.com/ek-tez-teer-tha/): एक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया..!! - [ग़ैरों से मिल के ही सही बे-बाक तो हुआ...](https://hindigazals.com/gairo-se-mil-ke-hi-sahi/): शहर-ए-ख़ुदा सितम से मगर पाक तो हुआ..!! - [अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए...](https://hindigazals.com/ana-se-tark-e-ana-tak-safar/): बहुत कठिन ही सही मगर किया जाए अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए, जब अपनी बात पे रहना है तुम्हे और हमें तो फिर मुकालमा तो मुख़्तसर किया जाए, तेरी जुदाई के दिन काँटे से बेहतर है ज़माने भर के दुखो को बसर किया जाए, है उससे तर्क ए ताअल्लुक़ का फ़ैसला ऐ दिल फिर ये फ़ैसला तो बहुत सोच कर किया जाए, गुज़ारा जाए कोई धूप में झुलसता दिन फिर ऐसा हो कि ऐतराज़ मेरे रंग पर किया जाए, चटख तो सकती है बुनियाद उसके घर की भी वो जो ये चाहता है कि मुझे दरबदर किया जाए, बज़ाहिर कमी तो आयेगी उनके वक़ार में भी गर हिसाब गुज़रे हुए दिनों का कर दिया जाए..!! - [मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने...](https://hindigazals.com/main-jo-mahka-to-meri-shaakh/): मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने सब्ज़ मौसम में मुझे ज़र्द हवा दी उसने, पहले एक लम्हे की जंज़ीर से बाँधा मुझको और फिर वक़्त की रफ़्तार बढ़ा दी उसने, जानता था कि मुझे मौत सुकूं बख्शेगी वो सितमगर था सो जीने की दुआ दी उसने, जिसके होने से थीं साँसे मेरी दोगुनी वो जो बिछड़ा तो मेरी उम्र घटा दी उसने..!! - [नग्मो से भरे दरिया थे रवां गीतों से भरी हरियाली थी...](https://hindigazals.com/nagmo-se-bhare-dariya-the-ravan-geeto-se/): इस देस का रंग अनोखा था इस देस की बात निराली थी नग्मो से भरे दरिया थे रवां गीतों से भरी हरियाली थी, उस शहर से हम आ जाएँगे अश्को के दीप जलाएँगे ये दर्द भी आने वाला था ये बात भी होने वाली थी, वो रौशन गलियाँ याद आएँ वो फूल वो कलियाँ याद आएँ सुन्दर मन छलियाँ याद आएँ, हर आँख मधुर मतवाली थी, किस बस्ती में आ पहुँचे हम हर गाम पे मिलते है सौ गम फिर चल उस नगरी में हमदम हर शाम जहाँ उजियाली थी, वो बाम ओ दर वो रहगुज़र, दिल खाक़ बसर जाँ खाक़ बसर जालिब वो परेशां हाली भी क्या ख़ूब परेशां हाली थी..!! - [एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं...](https://hindigazals.com/ek-wada-hai-kisi-ka-jo-wafa-hota-nahi/): एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं, जी में आता है उलट दें उन के चेहरे से नक़ाब हौसला करते हैं लेकिन हौसला होता नहीं, शम्अ जिस की आबरू पर जान दे दे झूम कर वो पतंगा जल तो जाता है फ़ना होता नहीं, अब तो मुद्दत से रह ओ रस्म ए नज़ारा बंद है अब तो उन का तूर पर भी सामना होता नहीं, हर शनावर को नहीं मिलता तलातुम से ख़िराज हर सफ़ीने का मुहाफ़िज़ नाख़ुदा होता नहीं, हर भिखारी पा नहीं सकता मक़ाम ए ख़्वाजगी हर कस ओ ना कस को तेरा ग़म अता होता नहीं, हाए ये बेगानगी अपनी नहीं मुझ को ख़बर हाए ये आलम कि तू दिल से जुदा होता नहीं, बारहा देखा है 'साग़र' रहगुज़ार इश्क़ में कारवाँ के साथ अक्सर रहनुमा होता नहीं..!! - [मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं...](https://hindigazals.com/mere-nagmat-ko-andaz-e-nava-yaad-nahi/): है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं, मैं ने पलकों से दर ए यार पे दस्तक दी है मैं वो साइल हूँ जिसे कोई सदा याद नहीं, मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहू हम से कहते हैं वही अहद ए वफ़ा याद नहीं, कैसे भर आईं सर ए शाम किसी की आँखें कैसे थर्राई चराग़ों की ज़िया याद नहीं, सिर्फ़ धुँधलाए सितारों की चमक देखी है कब हुआ कौन हुआ किस से ख़फ़ा याद नहीं, ज़िंदगी जब्र ए मुसलसल की तरह काटी है जाने किस जुर्म की पाई है सज़ा याद नहीं, आओ इक सज्दा करें आलम ए मदहोशी में लोग कहते हैं कि 'साग़र' को ख़ुदा याद नहीं..!! - [चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है...](https://hindigazals.com/charag-e-toor-jalaao-bada-andhera-hai/): चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है ज़रा नक़ाब उठाओ बड़ा अँधेरा है, अभी तो सुब्ह के माथे का रंग काला है अभी फ़रेब न खाओ बड़ा अँधेरा है, वो जिन के होते हैं ख़ुर्शीद आस्तीनों में उन्हें कहीं से बुलाओ बड़ा अँधेरा है, मुझे तुम्हारी निगाहों पे ऐतमाद नहीं मेरे क़रीब न आओ बड़ा अँधेरा है, फ़राज़ ए अर्श से टूटा हुआ कोई तारा कहीं से ढूँढ के लाओ बड़ा अँधेरा है, बसीरतों पे उजालों का ख़ौफ़ तारी है मुझे यक़ीन दिलाओ बड़ा अँधेरा है, जिसे ज़बान ए ख़िरद में शराब कहते हैं वो रौशनी सी पिलाओ बड़ा अँधेरा है, बनाम ए ज़ोहरा जबीनान ए ख़ित्ता ए फ़िर्दौस किसी किरन को जगाओ बड़ा अँधेरा है..!! - [भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए...](https://hindigazals.com/bhooli-hui-sada-hoon-mujhe/): भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए, मंज़िल नहीं हूँ ख़िज़्र नहीं राहज़न नहीं मंज़िल का रास्ता हूँ मुझे याद कीजिए, मेरी निगाह ए शौक़ से हर गुल है देवता मैं इश्क़ का ख़ुदा हूँ मुझे याद कीजिए, नग़्मों की इब्तिदा थी कभी मेरे नाम से अश्कों की इंतिहा हूँ मुझे याद कीजिए, गुमसुम खड़ी हैं दोनों जहाँ की हक़ीक़तें मैं उन से कह रहा हूँ मुझे याद कीजिए, 'साग़र' किसी के हुस्न ए तग़ाफ़ुल शिआर की बहकी हुई अदा हूँ मुझे याद कीजिए..!! - [ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं...](https://hindigazals.com/gam-ke-muzrim-khushi-ke/): ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं, और कोई गुनाह याद नहीं सज्दा ए बेख़ुदी के मुजरिम हैं, इस्तिग़ासा है राह ओ मंज़िल का राहज़न रहबरी के मुजरिम हैं, मयकदे में ये शोर कैसा है बादाकश बंदगी के मुजरिम हैं, दुश्मनी आप की इनायत है हम फ़क़त दोस्ती के मुजरिम हैं, हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा ख़िदमत ए आदमी के मुजरिम हैं, कुछ ग़ज़ालान ए आगही 'साग़र' नग़्मा ओ शायरी के मुजरिम हैं..!! - [सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले...](https://hindigazals.com/sohni-dharti-ke-rakhwale-ye-pyare-vardiwale/): सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले, हर बाप का फ़ख्र ओ गुरुर है ये हर माँ की आँख का नूर है ये, हर बहन के सर की चादर है मुल्क की सरहद के मुहाफ़िज़ है, इस मुल्क की मिट्टी के मतवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले, अल्लाह रखे आबाद वतन को ताहश्र रखे शाद वतन को, और बन के ये निगेहबान रहे तेगों के साये में पाले, ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले..!! - [हारे हुए नसीब का मयार देख कर](https://hindigazals.com/haare-hue-nasib-ka/): हारे हुए नसीब का मयार देख कर वो चल पड़ा है इश्क़ का अख़बार देख कर, आयेंगी काम देखना कागज़ की कश्तियाँ हाथों में एक यकीन का पतवार देख कर, करतास पर सजा दिया अपने ही दुःख का फन उस अहद ए कुर्बनाक का फ़नकार देख कर, पहले की तरह आज भी तन्हा तो हूँ मगर कद बढ़ गया है बाप की दस्तार देख कर, इन्सान की तो खू है ये इन्सान नोचना दुनियाँ में मुफ़्लिसी का अज़ादार देख कर, दश्त ए वफ़ा में रक्स के जलते है कुछ चिराग़ आँखों में उनके अपना ही अक्स बार बार देख कर..!! - [अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है...](https://hindigazals.com/azab-hi-mere-mulq/): अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है यहाँ सस्ता खून पर महँगा पानी है, खिले है फूल कागज़ पर यहाँ हर सू चमन के गुल खिज़ा की निशानी है, फ़ख्र से चलता दौलतमंद यहाँ पर यहाँ अफ्लास क्यूँ सिफ़त ए नादानी है, है सच मय्यूब हर सू तुम ज़रा देखो वतन में झूठ ओ फ़रेब की हुक्मरानी है, उगलता ज़र है आँगन मेरे ही घर का बरहना फिर यहाँ की क्यों जवानी है..?? - [छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो...](https://hindigazals.com/chhod-ke-sab-kuch-faqat/): बना के भेजा था उस रब ने अपना तर्जुमान तुम्हे छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो, ये रुस्वाइयाँ और तल्खियाँ क्यों बिखेर रहे हो ? - [उसमें कोई रईस मुज़रिम था](https://hindigazals.com/usme-koi-raies-muzrim/): उसमें कोई रईस मुज़रिम था जो कहानी नहीं सुनाई गई, एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं उठाई गई, एक रक्कासा का रक्स क्या देखा एक मुल्ला की पारसाई गई, ज़िन्दगी ख़ुद सवाल करती है ज़िन्दगी किस लिए बिताई गई, मौत आएगी और बताएगी ज़िन्दगी किस लिए बनाई गई, शेर आते रहे रवानी से नींद कमबख्त है कि आई गई..!! - [दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं...](https://hindigazals.com/dua-to-door-abtak-salam-aya-nahi/): तेरी तरफ से कोई भी पयाम आया नहीं दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं, मुझे तो तुझ पे यकीं था भरे ज़माने में मगर ये दुःख है मेरे तू भी काम आया नहीं, उजड़ गए है तेरे बाद हसरतो के महल कोई भी शमअ जलाने गुलाम आया नहीं, उसे तो सोचा मुक़म्मल हर घड़ी मैंने वो आधा हिस्से में ही आया तमाम आया नहीं, किस के इश्क़ का ऐसा नशा चढ़ा मुझ पर कि अक्ल ओ ज़ेहन में कोई क़लाम आया नहीं, तमाम उम्र सफ़र में गुज़र गई मेरी लेकिन चले थे जिसके लिए कभी वो मुक़ाम आया नहीं..!! - [तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम](https://hindigazals.com/tumhari-soch-tumhare-gumaan/): तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम खड़े हुए है सफ ए दोस्तां से बाहर हम, हमें ही रास न आया मुहब्बतों का चलन सो कर दिए गए दिल की दुकां से बाहर हम, हमारी अपनी कहानी में हम कहीं भी न थे और अब पड़े है तेरी दास्ताँ से बाहर हम, हमारा इश्क़ हमें उस मुक़ाम पर लाया पहुँच गए है कही दो जहाँ से बाहर हम, हमारा रिश्ता है मिट्टी से इस कदर गहरा कि जा ही सकते नहीं खाक़दां से बाहर हम, हमारी सोच पर पहरे बिठाने वाले सुन तुझे ही कर देंगे हर इम्तिहाँ से बाहर हम, बना सके न ताअल्लुक़ जो जाने वालो से शुमार होने लगे रिफ़तगाँ से बाहर हम, सितारा साज़ी में इतने हुए मगन हम निकल गए है हद ए कहकशाँ से बाहर हम..!! - [पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब](https://hindigazals.com/pucho-agar-to-karte/): पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब सच ये कि है हयात से बेज़ार सब के सब, अपनी ख़बर किसी को नहीं फिर भी जाने क्यूँ ? - [कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए](https://hindigazals.com/kahin-qaba-to-kahin/): कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए मैं मर गया हूँ वफादारियाँ निभाते हुए, अज़ीब रात थी आँखे ही ले गई मेरी मैं बुझ गया था चिराग़ ए सहर जलाते हुए, अज़ीब शख्स है क़ुर्बत के ख़्वाब दे के मुझे बिछड़ गया है अचानक ही मुस्कुराते हुए, सज़ा के तौर पे आँखे निकाल ली उसने मैं रो पड़ा था उसे कोई दास्ताँ सुनाते हुए, अज़ब नहीं था कि दरिया लपेट लेता मुझे मैं भाग आया हूँ तिश्ना लबी बचाते हुए, अज़ब उदासी तबीयत में भर गई है मियाँ तुम्हारे शहर से अपना सफ़र उठाते हुए, ख़ुदा ज़मीं पे होता तो फिर ऐ दुनियाँ वालो कहीं दिखाई तो देता वो आते जाते हुए..!! - [वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई](https://hindigazals.com/wafadari-pe-de-di/): वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई, ख़ुदा का शुक्र सोहबत का असर होता नहीं हम पर अदाकारों में रह कर भी अदाकारी नहीं आई, अमीर ए शहर हो कर भी नहीं कोई तेरी इज्ज़त तेरे हिस्से में कभी गैरत और ख़ुद्दारी नहीं आई, हमारी दरस गाहो की निज़ामत ऐसी बिगड़ी है क़िताबे पढ़ के भी बच्चो में होशियारी नहीं आई, लगाई आग उसने शहर में इतनी सफ़ाई से कि उसके घर पे उड़ के एक भी चिंगारी नहीं आई, अभी से किस लिए बेटे को भेजें नौकरी करने हमारे दस्त ओ पा में इतनी लाचारी नहीं आई, मैं नादानी पे अपनी आज तक हैरान हूँ दाना कि दुनियाँ को समझने की समझदारी नहीं आई..!! - [वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं](https://hindigazals.com/wo-kaun-hai-jo-2/): वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं बस दूसरों के दर्द को ही पहचानते नहीं, इस ज़ब्र ए मसलहत से रुस्वाइयाँ भली जैसे कि हम उन्हें और वो हमें जानते नहीं, कमबख्त आँख उठी न कभी उनके रूबरू हम उनको जानते तो है, पहचानते नहीं, वाइज़ ख़ुलूस है तेरे अंदाज़ ए फ़िकर में हम तेरी गुफ़्तगू का कभी बुरा मानते नहीं, हद से बढ़े तो अलम भी है झेल दोस्तों सब कुछ जो जानते है, वो कुछ जानते नहीं, रहते है आफ़ियत से वही लोग जहाँ में जो ज़िन्दगी में दिल का कहा मानते नहीं..!! - [आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ?](https://hindigazals.com/awaam-bhookh-se-dekho/): आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ? हर एक चेहरे से ज़ाहिर मलाल है कि नहीं ? तमाम चीजों की क़ीमत बढ़ाई जाती रही गरीबो को मारने की ये चाल है कि नहीं ? - [बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो](https://hindigazals.com/bas-ek-hi-hal/): बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो जो हुक्मराँ बिक जाए वो बकवास है लोगो, किस भूख से गुज़रे है, हमें प्यास बला की पुछा है कभी, उनको ये एहसास है लोगो ? - [चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार...](https://hindigazals.com/chunav-se-pahle-mashroof-hote-hai/): चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार दिन रात मीटिंगे होती है इन सबके प्यादे और लोटो की, फिर वोट पड़ने के बाद चुनाव खत्म होता है जैसे ही तो फिर पहली गिनती शुरू होती है पड़े हुए वोटो की, अगर जनता का फ़ैसला न क़ुबूल हो इनमे किसी को तो फिर दूसरी गिनती शुरू होती है कड़क कड़क नोटों की, बाद इसके भी सरकारी नतीज़ा न माने जब कोई तो तीसरी गिनती यहाँ शुरू होती है लट्ठ और सोटो की, सब लाठी और डंडे ले कर आ जाते है मैदान ए जंग में फिर तो सामत सी आ ही जाती है यहाँ हर छोटो मोटो की, जब मार काट से फ़ारिग होते है इन सबके चाहने वाले तो फिर चौथी गिनती शुरू होती है ज़ख्मो और चोटों की, इनके इस घमासान में कोई शरीफ़ जादा क्या करे ? - [जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं](https://hindigazals.com/ashna-hote-hue-bhi/): आशना होते हुए भी आशना कोई नहीं जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं, तन्हा मेरे ज़िम्मे क्यूँ है कार ए एहतिजाज़ बोलना सब जानते है, बोलता कोई नहीं, मयकशी की भी सजा है, ख़ुदकुशी की भी सजा कौन किस मुश्किल में है, ये देखता कोई नहीं, मुख्तलिफ़ लफ्ज़ो में ये है अब मिजाज़ ए दोस्ती राब्ता सबसे है, लेकिन वास्ता कोई नहीं, हमने ख़ुद पैदा किये है ज़िन्दगी में मसअले वरना सच्ची बात ये है मसअला कोई नहीं, ख़ुद क़लामी थी जिसे मैं गुफ़्तगू समझा किया मैं अकेला था, यहाँ आया गया कोई नहीं, हुस्न हो ना मेहरबाँ या इश्क़ ख़ुद बे मेहर हो हार दोनों की है इसमें जीतता कोई नहीं, एक पत्थर आज मेरी आँख पर आ कर लगा मैं गलत समझा, मुझे पहचानता कोई नहीं..!! - [ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या](https://hindigazals.com/zinda-rahe-to-kya/): ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या दुनियाँ से ख़ामोशी से गुज़र जाएँ हम तो क्या, हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने एक ख़्वाब है जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या, अब कौन मुन्तज़िर है हमारे लिए वहाँ शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या, दिल की ख़लिश तो साथ रहेगी तमाम उम्र दरिया ए गम के पार उतर जाएँ हम तो क्या..!! - [वतन की सर ज़मी से इश्क़ ओ उल्फ़त ही नहीं](https://hindigazals.com/watan-ki-sar-zamin/): वतन की सर ज़मी से इश्क़ ओ उल्फ़त ही नहीं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते है, वतन पर मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते है ये ज़ुर्रत, ये शुज़ाअत, ये बसालत हम भी रखते है, दुनियाँ को हिला देने के खोखले दावे बाँधने वालो दुनियाँ को हिला देने की ताक़त बस हम ही रखते है, बला से हो अगर सारे फ़सादी हिमायती तुम्हारे ख़ुदा ए हर दो आलम की हिमायत हम भी रखते है, बहार ए गुलशन अमीद भी सिरात हो जाए करम की आरज़ू ऐ अब्र ए रहमत हम भी रखते है, गिला ना मेहरबानी का तो सबसे सुन लिया तुमने तुम्हारी मेहरबानी की शिकायत हम भी रखते है, भलाई ये कि आज़ादी से उल्फ़त तुम भी रखते है बुराई ये कि आज़ादी से उल्फ़त हम भी रखते है..!! - [कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए...](https://hindigazals.com/kitne-hi-ped-khauf-e-khiza-se/): कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए कुछ बर्ग ए सब्ज़ वक़्त से पहले ही झड़ गए, कुछ आँधियाँ भी अपनी मुआविन सफ़र में थीं थक कर पड़ाव डाला तो ख़ेमे उखड़ गए, अब के मेरी शिकस्त में उन का भी हाथ है वो तीर जो कमान के पंजे में गड़ गए, सुलझी थीं गुत्थियाँ मेरी दानिस्त में मगर हासिल ये है कि ज़ख़्मों के टाँके उखड़ गए, निरवान क्या बस अब तो अमाँ की तलाश है तहज़ीब फैलने लगी जंगल सुकड़ गए, इस बंद घर में कैसे कहूँ क्या तिलिस्म है खोले थे जितने क़ुफ़्ल वो होंटों पे पड़ गए, बे सल्तनत हुई हैं कई ऊँची गर्दनें बाहर सरों के दस्त ए तसल्लुत से धड़ गए..!! - [हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और](https://hindigazals.com/ho-jayegi-jab-tum/): हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और बढ़ जाएगी शायद मेरी तन्हाई ज़रा और, क्यूँ खुल गए लोगों पे मेरी ज़ात के असरार ऐ काश कि होती मेरी गहराई ज़रा और, फिर हाथ पे ज़ख़्मों के निशाँ गिन न सकोगे ये उलझी हुई डोर जो सुलझाई ज़रा और, तरदीद तो कर सकता था फैलेगी मगर बात इस तौर भी होगी तेरी रुस्वाई ज़रा और, क्यूँ तर्क ए तअ'ल्लुक़ भी किया लौट भी आया ? - [जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते...](https://hindigazals.com/jivan-ko-dukh-dukh-ko-aag/): जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते बच्चे लेकिन सोए हुए थे किस से कहानी कहते ? - [दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए...](https://hindigazals.com/duniyan-ke-log-khushiyan-manane-me/): दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए हम बदनसीब अश्क बहाने में रह गए, कुछ जाँ निसार ऐसे भी गुज़रे है दहर में मिट कर भी जिनके नाम ज़माने में रह गए, मिस्मार हो गया था मेरा घर फ़साद में ता उम्र हम अपना घर ही बनाने में रह गए, आँसू छलक पड़े तो ख़बर सबको हो गई हम अपने दिल का दाग़ छुपाने में रह गए, ख़ुद सर बुलन्द हो न सके उम्र भर कभी अपने हरीफ़ को जो सिर्फ झुकाने में रह गए, सीखा नहीं ज़माने से छोटा सा एक सबक़ ता उम्र हम दूसरों को ही सिखाने में रह गए, अपने हुनर से और तो ज़रदार बन गए हम लोग खोटे सिक्के फ़कत चलाने में रह गए, इन्सान भी जलाये गए लकड़ियों के साथ हम है कि बस अपनी जान बचाने में रह गए..!! - [मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो](https://hindigazals.com/muhabbat-aazmati-hai-mujhe/): मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो जुदाई अब सताती है, मुझे तुम याद आते हो, मुहब्बत के सुनहरे बाग़ में है चैन से कोयल कोई जब गीत गाती है, मुझे तुम याद आते हो, अज़ीयत हो कि राहत हो, कोई कैसी भी मंज़िल हो तुम्हारी याद आती है, मुझे तुम याद आते हो, कोई तश्कीन शुदा चेहरा नहीं भाता,निगाह लेकिन तुम्हे रो कर बुलाती है, मुझे तुम याद आते हो, नहीं जब तुम यहाँ होते, उदासी ज़ुल्म ढहाती है मुझे इतना रुलाती है, मुझे तुम याद आते हो, मुझे लोरी सुनाती है मेरी तन्हाईयाँ शब भर उदासी गुनगुनाती है, मुझे तुम याद आते हो, किसी मासूम हसरत पर कोई रोती हुई लड़की कभी जब मुस्कुराती है, मुझे तुम याद आते हो..!! - [अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए](https://hindigazals.com/arz-e-gam-kabhi/): अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए शायरी तो होती है, कभी गुफ़्तगू भी हो जाए, ज़ख्म ए हिज़्र भरने से याद तो नहीं जाती कुछ निशाँ तो रहते है, दिल रफू भी हो जाए, रिंद है भरे बैठे और है मयकदा ख़ाली क्या बने जो ऐसे में एक "हू" भी हो जाए, पहली नामुरादी का दुःख कहीं बिसरता है बाद में अगर कोई सुर्खुरू भी हो जाए, दीन ओ दिल तो खो बैठे अब फ़राज़ क्या गम है कु ए यार में गारत आबरू भी हो जाए..!! - [हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है](https://hindigazals.com/hamse-qimat-to-ye/): हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है ज़िन्दगी ख़्वाब अधूरे ही दिया करती है, हर मुहब्बत ने अँधेरो को किया है रौशन रौशनी तेज भी अँधा ही किया करती है, ख़ोज मुश्किल में ही तू मुश्किलों का हल अपनी हाँ मुसीबत भी बहुत से ज़ख्म सिया करती है, मिलो अच्छा है ज़माने से ज़माना बन कर खून के घूँट भी मुरौत ही पिया करती है, क्या बुरा इसमें अगर जीत नहीं पाया तो हार ये जीत से पुरअज्म जिया करती है, क्यूँ ये उम्मीद कि हम चाल चले दुनियाँ से राह ख़ुद्दारी तो अपनी ही लिया करती है..!! - [मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले](https://hindigazals.com/muhabbat-kahan-ab-gharo/): मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले यहाँ फूल भी पत्थरो में मिले, जो फिरते रहे दनदनाते हुए वही लोग अब मकबरों में मिले, मुहब्बत, मुरौत, ख़ुलूस ओ वफ़ा कहाँ अब हमें रहबरों में मिले ? - [चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो...](https://hindigazals.com/chand-sikko-ke-evaz-har-zurm-ke/): चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो इक्तिदार के नशे में धूत, लोगो पे ज़ुल्म ढहाने वालो, हर चढ़ते सूरज के बनावटी नगमात गाने वालो किसी ग़रीब की इज्ज़त ख़राब कर के इतराने वालो, रखना याद, एक दिन तुम्हारा हिसाब होगा..... - [सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है...](https://hindigazals.com/suno-daur-e-behis-me-jab/): सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता है, जहाँ बागों की डाली पर बरसना छोड़ दे बादल वहाँ बाग़ो की रखवाली पे माली हार जाता है, जो कर लेते है सौदे खुदगर्ज़ अपने ज़मीरो के तो लोटे जीत जाते है, खिलाड़ी हार जाता है, यकीन जिसको हो इंसाफ़ ए ख़ुदा पर देखा है मैंने जहाँ में मात खा कर भी वो बाज़ी मार जाता है..!! - [ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की](https://hindigazals.com/khabren-huqumat-ki-qabren/): ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की हमको नहीं है लालच तुम्हारे इनाम की, बोया है तुमने जो भी काटोगे भी तुम ही पूरी ना होगी ख्वाहिश अपने दवाम की, लोटे लौट आये है वापस अपने घर को कहानी है ये पुरानी, पुराने हमाम की, मुहब्बत करते हो तो करते रहो तुम ख़बर नहीं है तुमको इसके अंज़ाम की..!! - [एक ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है](https://hindigazals.com/ek-to-zalim-uspe-qahar/): एक तो ज़ालिम उसपे क़हर आँखे दिखा रहा है अंज़ाम ए बेहया शायद अब नज़दीक आ रहा है, गुजिस्तां कुछ वक़्त से पापी आकाइयों का सब जानते हो तुम यारो क़िरदार क्या रहा है, धरती है एक ढाँचा, कर्गस है चार ज़ानिब एक मरकज़ में है नोचे,एक सूबे को खा रहा है, हकीम की बे ज़ियाफ़त चौतीस लाख की और इस शहर का मुअल्लिम टुकड़े चबा रहा है, क्या तजरुबे को तुझको ये सरज़मी मिली थी ? - [गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा](https://hindigazals.com/gam-e-wafa-ko/): गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा खटक रहा है जो काँटा निकालना होगा, फ़कीर ए इश्क़ हूँ कुछ दे के टालना होगा बस एक निगाह का सिक्का उछालना होगा, सवाल दोस्तों अज़मत का है सरो का नहीं हमें वक़ार का परचम संभालना होगा, गज़ब की प्यास लगी सामना सराब का है सो रेग ए सहरा से पानी निकालना होगा, उसे बताओ कि फाका है आज अपना भी मगर फ़कीर को इज्ज़त से टालना होगा, ये इंतज़ार सलामत रहे वो आएगा मगर है शर्त कि दिल को संभालना होगा, तुम्हारे दिल की ज़मी जल चुकी मगर हमदम इसी से नख्ल ए मुहब्बत निकालना होगा..!! - [गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम](https://hindigazals.com/gulab-chaandni-raton-pe/): गुलाब चाँदनी रातों पे वार आये हम तुम्हारे होंठों का सदका उतार आये हम, वो एक झील थी शफ्फाक़ नील पानी की उसमें डूब के ख़ुद को निखार आये हम, तेरे ही लम्स से उनका खराज़ मुमकिन है तेरे बगैर जो उम्रे गुज़ार आये हम, फिर उस गली से गुज़रना पड़ा तेरी खातिर फिर उस गली से बहुत बे क़रार आये हम, ये क्या सितम है कि इस नशा ए मुहब्बत में तेरे सिवा भी किसी को पुकार आये हम..!! - [हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते](https://hindigazals.com/hui-na-khatm-teri/): हुई न खत्म तेरी रह गुज़ार क्या करते तेरे हिसार से ख़ुद को फ़रार क्या करते ? सफ़ीना गर्क़ ही करना पड़ा हमें आख़िर तेरे बगैर समन्दर को पार क्या करते ? - [एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है](https://hindigazals.com/ek-lafz-e-mohabbat/): एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल ए आशिक़ फैले तो ज़माना है, ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है, हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है, वो और वफ़ा दुश्मन मानेंगे न माना है सब दिल की शरारत है आँखों का बहाना है, क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है हम ख़ाक नशीनों की ठोकर में ज़माना है, वो हुस्न ओ जमाल उनका ये इश्क़ ओ शबाब अपना जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है, या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम थे ख़फ़ा उनसे कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है, अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में मासूम मोहब्बत का मासूम फ़साना है, आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है, ऐ इश्क़े जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़े जुनूँ पेशा आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है, ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे एक आग का दरिया है और डूब के जाना है, आँसू तो बहुत से हैं आँखों में 'जिगर' लेकिन बंध जाये सो मोती है रह जाये सो दाना है..!! - [इसी चमन में ही हमारा भी एक ज़माना था](https://hindigazals.com/isi-chaman-me-hi/): इसी चमन में ही हमारा भी एक ज़माना था यहीं कहीं कोई सादा सा आशियाना था, नसीब अब तो नहीं शाख़ भी नशेमन की लदा हुआ कभी फूलों से आशियाना था, तेरी क़सम अरे ओ जल्द रूठनेवाले गुरूर ए इश्क़ न था नाज़ ए आशिक़ाना था, तुम्हीं गुज़र गये दामन बचाकर वर्ना यहाँ वही शबाब वही दिल वही ज़माना था..!! - [आदमी आदमी से मिलता है](https://hindigazals.com/aadmi-aadmi-se-milta/): आदमी आदमी से मिलता है दिल मगर कम किसी से मिलता है, भूल जाता हूँ मैं सितम उस के वो कुछ इस सादगी से मिलता है, आज क्या बात है के फूलों का रंग तेरी हँसी से मिलता है, मिल के भी जो कभी नहीं मिलता टूट कर दिल उसी से मिलता है, कार ओ बार ए जहाँ सँवरते हैं होश जब बेख़ुदी से मिलता है..!! - [आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था](https://hindigazals.com/aankho-ka-tha-qusoor/): आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था, वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था आता न था नज़र को नज़र का क़ुसूर था, कोई तो दर्दमंदे दिल ए नासुबूर था माना कि तुम न थे, कोई तुमसा ज़रूर था, लगते ही ठेस टूट गया साज़ ए आरज़ू मिलते ही आँख शीशा ए दिल चूर चूर था, ऐसा कहाँ बहार में रंगीनियों का जोश शामिल किसी का ख़ून ए तमन्ना ज़रूर था, साक़ी की चश्म ए मस्त का क्या कीजिए बयान इतना सुरूर था कि मुझे भी सुरूर था, जिस दिल को तुमने लुत्फ़ से अपना बना लिया उस दिल में एक छुपा हुआ नश्तर ज़रूर था, देखा था कल जिगर को सर ए राह ए मयकदा इस दर्ज़ा पी गया था कि नशे में चूर था..!! - [अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं](https://hindigazals.com/allah-agar-taufiq-na/): अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इन्सान के बस का काम नहीं फ़ैज़ान ए मोहब्बत आम सही, इर्फ़ान ए मोहब्बत आम नहीं, ये तूने कहा क्या ऐ नादाँ फ़ैयाज़ी ए क़ुदरत आम नहीं तू फ़िक्र ओ नज़र तो पैदाकर, क्या चीज़ है जो इनआम नहीं, या रब ये मुकाम ए इश्क़ है क्या गो दीदा ओ दिल नाकाम नहीं तस्कीन है और तस्कीन नहीं आराम है और आराम नहीं, आना है जो बज़्म ए जानाँ में पिन्दार ए ख़ुदी को तोड़ के आ ऐ होश ओ ख़िरद के दीवाने ये होश ओ ख़िरद का काम नहीं, इश्क़ और गवारा ख़ुद कर ले बेशर्त शिकस्त ए फ़ाश अपनी दिल की भी कुछ उनके साज़िश है तन्हा ये नज़र का काम नहीं, सब जिसको असीरी कहते हैं वो तो है असीरी ही लेकिन वो कौन सी आज़ादी है जहाँ, जो आप ख़ुद अपना दाम नहीं..!! - [बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की...](https://hindigazals.com/badi-qadim-riwayat-hai-ye/): बड़ी क़दीम रिवायत है ये सताने की करो कुछ और ही तदबीर आज़माने की, कभी तो फूट कर रो लो हमारे शाने पर हमेशा सोचते हो क्यों हमें ही रुलाने की, चलो चले कही ऐसी जगह मेरे हमदम जहाँ न शर्त हो रस्म ए कुहन निभाने की, हजार आरज़ू पूरी करो तुम ज़माने की कमी रहेगी मगर फिर भी और पाने की, गम ओ अलम का भरम तोड़ना ज़रूरी है हर आदमी को ज़रूरत है मुस्कुराने की, उठाये रखते है जो पत्थर अपने हाथों में मशाल आप ही बन जाते है ज़माने की, न जाने चाँद मेरे घर में किस तरह उतरा आख़िर ख़बर हुई उसे कैसे मेरे ठिकाने की ? - [जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम](https://hindigazals.com/jise-tum-pyar-samjhe/): जिसे तुम प्यार समझे थे वो कारोबार था हमदम यहाँ सब अपने मतलब में मुहब्बत साथ रखते है, जो हर पल हँसते रहते हो, उन्हें तुम ख़ुश समझते हो ? अरे नादाँ ! - [जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ](https://hindigazals.com/jo-mila-usse-guzara/): कोई भी अल्लाह को प्यारा न हुआ..!! - [पास आओ कि एक इल्तज़ा सुन लो](https://hindigazals.com/paas-aao-ki-ek/): पास आओ कि एक इल्तज़ा सुन लो हाँ प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को तो ख़ुदा से माँगा है जब भी रब से माँगी कोई दुआ सुन लो, इब्तिदा ए इश्क़ ही हुई तुमसे और तुम्ही हो चाहत की इन्तेहा सुन लो, बगैर तेरे अब जी नहीं सकते हम हो सके तो लौट आओ, मेरी सदा सुन लो, देख बिन तेरे ये ज़िन्दगी अधूरी है ना रहो तुम अब यूँ खफ़ा और जुदा सुन लो, तुम सिर्फ तुम ही हो बस ज़िन्दगी मेरी सोलह आने है ये सच, तुम बा ख़ुदा सुन लो..!! - [मालूम है इस दुनियाँ में मशहूर नहीं है](https://hindigazals.com/malum-hai-is-duniyan/): मालूम है इस दुनियाँ में मशहूर नहीं है ये गाँव तेरे दिल से तो अब दूर नहीं है, ये उसकी मशीयत है हमें मिलने न आये वरना वो किसी तौर भी मज़बूर नहीं है, मशरूफ़ रहा करता है वो शख्स हमेशा वैसे तो मेरा आईना है मगरूर नहीं है, तस्वीर ए मुहब्बत हूँ ज़रा गौर से देखो इस दुनियाँ में मुझ जैसा कोई चूर नहीं है, इस शहर ए ज़फ़ा जू में तुझे छोड़ दूँ कैसे हर बात है मंज़ूर मुझे, पर ये मंज़ूर नहीं है..!! - [माना कि अब तुम्हारा दिल भर गया होगा...](https://hindigazals.com/mana-ki-ab-tumahra-dil-bhar/): माना कि अब तुम्हारा दिल भर गया होगा हमसे ना सही, प्यार कही और हो गया होगा, ये जो तुम आहिस्ता आहिस्ता से दूर जा रहे हो यक़ीनन कोई और तुम्हे मिल गया होगा, तुमने जो सिखाए है हमें आदाब ए मुहब्बत तो फिर उनको उन्ही पर लागू कर दिया होगा, हमारे साथ जो तुमने कुछ देर सफ़र किया है अब उसमे मजीद इज़ाफा कर लिया होगा, न जाने तुम रातों को सुकून से सोते हो मुझे तो लगता है इरादा कर लिया होगा, आज तक हम तुम्हारी जान थे, है न ? - [हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले](https://hindigazals.com/hazaro-khwahishe-aisi-ki/): हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले, डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले, निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले, भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले, मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले, हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले, हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले, मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले, कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़ पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले..!! - [शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है](https://hindigazals.com/shaam-tak-subah-kee/): शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है इतने समझौतों पे जीते है कि मर जाते है, हम तो बेनाम इरादों के मुसाफ़िर ठहरे कुछ पता हो तो बताये कि किधर जाते है, घर की गिरती हुई दीवार है हमसे अच्छी रास्ता चलते हुए लोग ठहर जाते है, एक जुदाई का वो लम्हा कि जो मरता ही नहीं लोग कहते थे सभी वक़्त गुज़र जाते है, फिर वही तल्खी हालात मुक़द्दर ठहरी नशे कैसे भी हो कुछ दिन में उतर जाते है..!! - [ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था](https://hindigazals.com/khwab-ke-jaziro-par/): ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था और फिर हवाओं को रास्ता बताना था, दर्द की फ़सिलो तक, ये चिराग़ ए जान ले कर हमसफ़र के धोखे में हमको तन्हा जाना था, अपने सर की चादर को थाम कर मुझे तन्हा सर उठा के चलना था, ठोकरे भी खाना था, उसने रोती आँखों को चूम कर क़सम दी थी अब तो मुझको जीवन भर सिर्फ़ मुस्कुराना था, जिसकी सुर्ख ईंटों से नाग लिपटे रहते थे मुझको उस हवेली में आशियाँ बनाना था, क्या ख़बर थी बरसों से जल रहा है जो दिल में उस चिराग़ ने आख़िर मेरा घर जलाना था, इश्क़ की मुसाफत में बे रिया मुहब्बत को हमने याद रखना था, तुमने भूल जाना था, उसका साथ क्या मिलता हम फ़कीर लोगो को ! - [उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना](https://hindigazals.com/udas-shamo-ka-tum/): उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना, दिल ए हज़ीं में मुहब्बत का बाब रख लेना, न बैठना कभी तन्हा उदास मौसम में, नज़र के सामने तुम दिल की क़िताब रख लेना..!! - [बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर](https://hindigazals.com/barish-kee-barasti-boondo/): बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर महसूस हुआ तुम आये हो, अंदाज़ तुम्हारे जैसा था, हवा के हलके झोंके की जब आहट पाई खिड़की पर महसूस हुआ तुम गुज़रे हो, एहसास तुम्हारे जैसा था, मैंने जो गिरती बूँदों को जब रोकना चाहा हाथो में एक सर्द सा फिर एहसास हुआ, वो लम्स तुम्हारे जैसा था, तन्हा मैं चला जब बारिश में तब एक झोंके ने साथ दिया मैं समझा तुम हो साथ मेरे, वो एहसास तुम्हारे जैसा था, फिर रुक सी गई वो बारिश भी बाक़ी न रही एक आहट भी मैं समझा मुझे तुम छोड़ गए, वो अंदाज़ तुम्हारे जैसा था..!! - [अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है](https://hindigazals.com/abhi-to-chaand-nikla/): अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है दिल को दिल से कहनी है, अभी वो बात बाक़ी है, तुम्हारे वस्ल में कबसे, ज़मीं प्यासी थी इस दिल की अभी तो अब्र छाए है, अभी बरसात बाक़ी है, वो बचपन की हसीं बाते, जवानी की खुराफ़ातें कहाँ वो अब हसीं लम्हे, कहाँ वो बात बाक़ी है, गुज़र जाएगी ये गम की, जो काली रात छाई है सहर भी होगी ख़ुशियों की, जो तेरा साथ बाक़ी है, मेरे दिल की तमन्नाएँ, जो थीं सारी हुई पूरी अधूरी कोई ख्वाहिश है, न कोई बात बाक़ी है, फ़साना बीती बातों का, न छेड़ो तुम अभी हमदम कि देखो हुस्न ए जानां तुम, अभी तो रात बाक़ी है..!! - [वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे](https://hindigazals.com/wo-log-jo-kuch/): वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे हर शाम वो फिर तेरी कहानी में मिलेंगे, ढूँढो न हमें दुनियाँ की रंगीन फिज़ा में हम जैसे किसी याद पुरानी में मिलेंगे, हालात की तपती हुई दोपहर में बिछड़े ये तय है किसी शाम सुहानी में मिलेंगे, दावा नहीं, उम्मीद नहीं, रखते यक़ीन है हम फिर से इसी कूचा ए फ़ानी में मिलेगें, मिलना है गर हमसे तो पढ़ लीजिये हमको हम जैसे तेरी आँख के पानी में मिलेंगे..!! - [एक वो इतने खूबरू तौबा](https://hindigazals.com/ek-wo-itne-khoobroo/): एक वो इतने खूबरू तौबा उसपे छूने की आरज़ू तौबा ! हाथ काँपेंगे रूह मचलेगी जब वो आएँगे रूबरू तौबा ! चाँद तारो से रात सजती हुई तेरी आवाज़ और तू तौबा ! - [यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है](https://hindigazals.com/yun-hi-tanhaai-me/): यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है नाम लिखते है तेरा लिख के मिटा देते है, जब भी नाक़ाम ए मुहब्बत का कोई ज़िक्र करे लोग हँसते है मेरा नाम बता देते है, अब ख़ुशी की कोई तरक़ीब न सूझे अब ये आलम है कि गम ही मज़ा देते है, क्या ज़रूरत है कि देते हो ख़ुद को ये ज़हमत लाओ हम ख़ुद ही नशेमन को जला देते है, अब तसल्ली नहीं दी जाती मरीज़ ए गम को अब तो देखने वाले भी मरने की दुआ देते है..!! - [क्या मिला और हुआ कितना ख़सारा सोचा](https://hindigazals.com/kya-mila-aur-hua/): क्या मिला और हुआ कितना ख़सारा सोचा बाद मुद्दत के यही क़िस्सा दोबारा सोचा, रात फिर देर तलक नींद न आई मुझको रात फिर देर तलक तुझको ही यारा सोचा, मैं तो मर जाऊँगा तुझसे जुदा हो कर कैसे होगा मेरे बिन फिर तेरा गुज़ारा सोचा, अब मेरी सोच भी हैरान है, कैसे मैंने इतनी फ़ुर्सत से तुझे सारा का सारा सोचा, ये भी मुमकिन है कि ज़न्नत में ही मिले शायद जैसा घर मैंने कभी अपना तुम्हारा सोचा, आज आ जा कि तुझे शेर में अपने लिख लूँ तू भी तो देखे कि तुझे कितना प्यारा सोचा, तू मेरी रूह का हिस्सा है तभी जान मेरी जब भी सोचा कभी अपना तो हमारा सोचा, रो दिया आज तो दरियाँ भी सितम पर अपने मरने वालो ने ऐसी हसरत से किनारा सोचा, हम तुझे सोच के फिर और किसे सोचेंगे बस यही सोच कर फिर तुझको ही दोबारा सोचा..!! - [इश्क़ जब एक मगरूर से हुआ तो फिर...](https://hindigazals.com/ishq-jab-ek-magrur-se-hua/): इश्क़ जब एक मगरूर से हुआ तो फिर छोड़ कर अना ख़ुद को झुकाना पड़ा मुझे, उसने खेला था खिलौना समझ कर दिल को ना चाह कर इश्क़ का रोग लगाना पड़ा मुझे, देख कर बेवफ़ाई में उसकी बुलंदियाँ नवाब ख़ुद को उसकी निगाहों में गिराना पड़ा मुझे, उसकी ख़ुशी की खातिर छुपा कर अश्क़ भी दिल की लगी को दिल्लगी बताना पड़ा मुझे, ख़ुदा ना करे उसे भी मिले वो दर्द ओ अलम जिन दर्द ओ गम को इश्क़ में उठाना पड़ा मुझे, दिल तोड़ कर हर बार इशारा तो किया उसने फिर भी आख़िरी सितम समझ निभाना पड़ा मुझे..!! - [लरज़ती छत शिकस्ता बाम ओ दर से बात करनी है](https://hindigazals.com/larzati-chhat-shikasta-baam/): लरज़ती छत शिकस्ता बाम ओ दर से बात करनी है मुझे तन्हाई में कुछ अपने घर से बात करनी है, बिखरने के मराहिल में सहारा क्यूँ दिया मुझ को मेरी मिट्टी ने दस्त ए कूज़ा गर से बात करनी है, किया था जान दे के हम ने कार ए आशियाँ बंदी जलाया किस लिए बर्क़ ओ शरर से बात करनी है, मुक़ाबिल हुस्न जब आए सितमज़ादों की महफ़िल में ज़बाँ को क़ैद करना है नज़र से बात करनी है, बदल डाला है दुनिया को जो फ़िरऔनों की बस्ती में ख़ुदा ने आज शायद फिर बशर से बात करनी है..!! - [उदास चाँद खुले पानियों में छोड़ गया](https://hindigazals.com/udas-chaand-khule-paaniyo/): उदास चाँद खुले पानियों में छोड़ गया वो अपना चेहरा मेरे आँसूओ में छोड़ गया, हवा के झोंके से लरजी थी एक शाख़ ए गुल किसी का ध्यान मुझे ख़ुशबूओ में छोड़ गया, गले मिले थे मुहब्बत की तेज धूप में हम ये कौन उड़ते हुए बादलो में छोड़ गया, सफ़र के पहले पड़ाव में मरने वाला शख्स अज़ीब खौफ़ हमारे दिलो में छोड़ गया, ये किसने हमको बनाया शिकस्ता मिट्टी से फिर उसके बाद घनी बारिशो में छोड़ गया, इस एहतिमाम से बिखरे हुए है फूल यहाँ निशानी जैसे कोई रास्तों में छोड़ गया..!! - [तेरे फ़िराक़ के लम्हे शुमार करते हुए](https://hindigazals.com/tere-firaq-ke-lamhe/): तेरे फ़िराक़ के लम्हे शुमार करते हुए बिखर गए हैं तेरा इंतिज़ार करते हुए, तुम्हें ख़बर ही नहीं है कि कोई टूट गया मोहब्बतों को बहुत पाएदार करते हुए, मैं मुस्कुराता हुआ आइने में उभरूँगा वो रो पड़ेगी अचानक श्रृंगार करते हुए, वो कह रही थी समुंदर नहीं हैं आँखें हैं मैं उन में डूब गया ऐतबार करते हुए, भँवर जो मुझ में पड़े हैं वो मैं ही जानता हूँ तुम्हारे हिज्र के दरिया को पार करते हुए..!! - [सोचता हूँ कि उसे नींद भी आती होगी](https://hindigazals.com/sochta-hoon-ki-use/): सोचता हूँ कि उसे नींद भी आती होगी या मेरी तरह फ़क़त अश्क बहाती होगी, वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी, इस ज़मीं पर भी है सैलाब मेरे अश्कों से मेरे मातम की सदा अर्श हिलाती होगी, शाम होते ही वो चौखट पे जला कर शमएँ अपनी पलकों पे कई ख़्वाब सुलाती होगी, उसने सिलवा भी लिए होंगे सियह रंग लिबास अब मोहर्रम की तरह ईद भी मनाती होगी, मेरे तारीक ज़मानों से निकलने वाली रौशनी तुझको मेरी याद तो दिलाती होगी, रूप दे कर मुझे इस में किसी शहज़ादे का अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी..!! - [समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं](https://hindigazals.com/samandar-me-utarta-hoon/): समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है तेरे ग़म में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, न जाने हो गया हूँ इस क़दर हस्सास मैं कब से किसी से बात करता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूँ मगर ज्योहीं क़दम चौखट पे रखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, हर एक मुफ़्लिस के माथे पर अलम की दास्तानें हैं कोई चेहरा भी पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, बड़े लोगों के ऊँचे बद-नुमा और सर्द महलों को ग़रीब आँखों से तकता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरे कूचे से अब मेरा तअ'ल्लुक़ वाजिबी सा है मगर जब भी गुज़रता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मेरे दिल पर मैं जब भी हँसता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं..!! - [महफ़िल से मुझको उठाने के बाद](https://hindigazals.com/mahfil-se-mujhko-uthane/): महफ़िल से मुझको उठाने के बाद क्या मिलेगा दिल दुखाने के बाद, आज तो देख लूँ मैं तुम्हे गौर से आज देखा है हमने ज़माने के बाद, मैं समंदर की मन्नत ही करता रहा रेत का एक घरौंदा बनाने के बाद, नाचती है हवा अब मेरे सामने घर के सारे दीयो को बुझाने के बाद, यूँ न हो अपने हाथो गँवा दो मुझको मुझ सा तुमको मिलेगा ज़माने के बाद, सिसकियाँ रोकता ही रहा देर तक दर्द की इन्तेहा वो बताने के बाद, रौशनी के तलबगार रोते है क्यूँ घर चिरागों से अपने जलाने के बाद..!! - [अपने हो कर भी जो नहीं मिलते](https://hindigazals.com/apne-ho-kar-bhi/): अपने हो कर भी जो नहीं मिलते दिल ये जा कर है क्यूँ वही मिलते ? - [यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे](https://hindigazals.com/yun-baat-baat-pe/): यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे वो खुल रहा है मुसलसल ज़रा ज़रा मुझसे, मैं शाख ए उमर पे बस सूखने ही वाला था लिपट गया कोई आ कर हरा भरा मुझसे, मैं उसके पहले वरक पर रुका हुआ हूँ अभी सो खत्म होगा कहाँ अब मुताअला मुझसे, पसंद आ गई कैसे उसे ये खाक़ मेरी वो आसमान भला कैसे आ लगा मुझसे, वो गुल बदन है तो मैं गुलबदन ही लिखूँगा कि सच तो ये है न होगा मुबालग़ा मुझसे, ये शायरी तो कोई और कर रहा है कही मैं लिख रहा हूँ वही जो कहा गया मुझसे..!! - [तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं](https://hindigazals.com/tere-liye-sab-chhod/): तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं दुनियाँ भी गई इश्क़ में, तुझसे भी गया मैं, एक सोच में गुम हूँ, तेरी दीवार से लग कर मंज़िल पे पहुँच कर भी, ठिकाने न लगा मैं, इस दर्ज़ा मुझे खोखला कर रखा था गम ने लगता था गया अब के, गया अब के गया मैं, एक धोखे में दुनियाँ ने मेरी राय तलब की कहते थे कि पत्थर हूँ, मगर बोल पड़ा मैं..!! - [इस मुहब्बत के करम से पहले](https://hindigazals.com/is-muhabbat-ke-karam/): इस मुहब्बत के करम से पहले ख़ुद को जीता था मैं तुमसे पहले, हसरत ओ यास ओ अलम से पहले दिल ये मगरूर था गम से पहले, चोट लाज़िम है शिफ़ा याब़ी को कौन समझा है सितम से पहले, तुमको जाना तो हमने जाना तुम भी पत्थर हो सनम से पहले, जाने वालों को भला रोके क्या ? - [तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है](https://hindigazals.com/tumhe-kya-bataaoon-ae/): तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है मुझे जुस्तुजू है फ़क़त तेरी मुझे सिर्फ़ तेरा ख़याल है, है नज़र में मेरी तो तू ही तू मेरा साँस तेरा ही गीत है मैं भुला सकूँ तुझे दिलरुबा भला कब ये मेरी मजाल है मेरे जिस्म में तू है हर जगह मेरे होश में तू मुक़ीम है मैं मुतीअ हूँ तेरा ही दिलरुबा मेरे ग़म की रात हिलाल है, मैं तो ज़िंदा तेरे ही दम से हूँ मेरी आरज़ू की तू ज़िंदगी तेरी बेवफ़ाई की एक नज़र मेरी ज़िंदगी का सवाल है, तेरी क़ुर्बतों की तलब मुझे तेरी दीद की मुझे जुस्तुजू कि बग़ैर जिस के ऐ माह-रू मेरी ज़िंदगी भी मुहाल है, सर-ए-शाम ही से न जाने क्यों है जिगर में टीस सी दर्द की तेरे हिज्र ही में ऐ दिलरुबा यही इश्क़ का ज़र-ओ-माल है, तेरे ग़म में 'ग़म' को मिला है ग़म तुझे किस तरह से सुकूँ कहूँ तेरे ग़म में ऐसी ख़ुशी मिली जो कि ग़म की ज़िंदा मिसाल है..!! - [ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया](https://hindigazals.com/jah-e-qismat-agar/): ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया मगर ये दाग़ क्यूँ कर ऐ मह-ए-कामिल पसंद आया, किया है क़त्ल लेकिन देखिए जाँ कब निकलती है कि उन को रक़्स-ए-बेताबाना-ए-बिस्मिल पसंद आया, वो मोमिन भी है माँगेगा दुआ सिद्क़-तनासुख़ की तेरे हाथों से मरना जिस को ऐ क़ातिल पसंद आया, न पूछो कब से मैं शामिल हुआ हूँ तीरा-बख़्तों में किसी के आरिज़-ए-रौशन का जब से तिल पसंद आया, ये गुस्ताख़ी है ऐ महरूम अपनी हद से बढ़ता है कि ता-हद्द-ए-ज़मीन-ए-ग़ालिब-ए-मुश्किल-पसंद आया..!! - [ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू](https://hindigazals.com/khud-ko-n-ae/): ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू दरिया की तेज धार को हिम्मत से मोड़ तू, इस ज़िंदगी की राह में दुश्वारियाँ भी हैं रहबर का हाथ छोड़ न रिश्तों को तोड़ तू, दुनिया की हर बुलंदी को है तेरा इंतिज़ार एहसास-ए-ना-रसाई की गर्दन मरोड़ तू, मेहनत के दम पे क्या नहीं कर सकता आदमी अपने लहू का आख़िरी क़तरा निचोड़ तू, जो कुछ है तेरे पास वही काम आएगा बारिश की आस में कभी मटकी न फोड़ तू, मन की ख़ुशी मिलेगी तू ये नेक काम कर टूटे हुए दिलों को किसी तरह जोड़ तू, दो-गज़ कफ़न ही अंत में सबका नसीब है अब छोड़ भी दे दुनियावी दौलत की होड़ तू..!! - [सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं...](https://hindigazals.com/suna-kar-haal-qismat-aazma-kar/): सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं उन्हें कुछ और बेगाना बना कर लौट आए हैं, फिर एक टूटा हुआ रिश्ता फिर एक उजड़ी हुई दुनियाँ फिर एक दिलचस्प अफ़्साना सुना कर लौट आए हैं, फ़रेब-ए-आरज़ू अब तो न दे ऐ मर्ग-ए-मायूसी हम उम्मीदों की एक दुनिया लुटा कर लौट आए हैं, ख़ुदा शाहिद है अब तो उन सा भी कोई नहीं मिलता ब-ज़ोम-ए-ख़्वेश उन को आज़मा कर लौट आए हैं, बिछे जाते हैं या रब क्यूँ किसी काफ़िर के क़दमों में वो सज्दे जो दर-ए-का'बा पे जा कर लौट आए हैं..!! - [हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा...](https://hindigazals.com/haath-uthe-jo-dua-ko-to-dil-aise-rakha/): हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा ख्वाहिशे बाद में रखी तुझे पहले रखा, वक़्त ने आजिज़ी इस दर्जा सिखाई थी हमें अपनी औकात को औकात से नीचे रखा, ज़िन्दगी ख़्वाब के दरबार से बाहर निकली हमने हर तल्ख़ हकीक़त को जब आगे रखा, आख़िरी वक़्त उतारी गई थी बंद घड़ी उसने ता उम्र मेरी याद को पहने रखा, खत के एक कोने में कुछ दिल थे, मगर हाय दिल उसने हर एक में था तीर पिरो के रखा, ये अगर इश्क़ है जो तुझको मेरी रूह से है क्या था वो रिश्ता जो उस शख्स ने मुझसे रखा ? - [दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए](https://hindigazals.com/dard-ho-dukh-ho/): दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए फट पड़े आसमां तो क्या कीजिए ? नहीं इलाज़ ए गम हिज़्र ए यार क्या कीजिए ? तड़प रहा है दिल ए बेक़रार क्या कीजिए ? - [जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी...](https://hindigazals.com/jab-lahze-badal-jaayen-to/): जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी नयी मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल में गुज़रे लम्हे है अनमोल यादें हिज़्र में सुख, खुशियाँ, रहतें कैसी ? - [जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो...](https://hindigazals.com/jab-bhi-tum-chaho-mujhe-zakhm/): जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो, ठीक से सोच समझ कर मुझे रुखसत करना ये न हो बाद में रो रो के सदा देते रहो, ठीक है मान लिया है कि खता थी मेरी जैसे तुम चाहो, मैं हाज़िर हूँ, सज़ा देते रहो, छोड़ जाओगे तो रो धो के संभल जाऊँगा पास रह कर मुझे गम हद से ज्यादा देते रहो, रूठ कर वो जो तुम्हे ख़ुद ही मना लेता है तुम उसी को दुआ सबसे जुदा देते रहो..!! - [इश्क़ में जान से गुज़रते है गुज़रने वाल](https://hindigazals.com/ishq-me-jaan-se/): इश्क़ में जान से गुज़रते है गुज़रने वाले मौत की राह नहीं देखते मरने वाले, आखिरी वक़्त भी पूरा न किया वायदा ए वस्ल आप आते ही रहे मर गए मरने वाले, उठे और कूचा ए महबूब में पहुँचे आशिक़ ये मुसाफ़िर नहीं रस्ते में ठहरने वाले, जान देने का कहा मैंने तो हँस कर बोले तुम सलामत रहो हर रोज़ के मरने वाले, आसमां पे जो सितारे नज़र आते है याद आये मुझे दाग अपने उभरने वाले..!! - [ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो...](https://hindigazals.com/gazal-ka-husn-hai-aur-geet-ka/): ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो नशा है जिसमे सुखन का वही शराब है वो, उसे न देख महकता हुआ गुलाब है वो न जाने कितनी निगाहों का इंतिखाब है वो, मिसाल मिल न सकी क़ायनात में उसकी जवाब उसका नहीं कोई ला जवाब है वो, मेरी इन आँखों को ताबीर मिल नहीं पाती जिसे मैं देखता रहता हूँ ऐसा ख़्वाब है वो, न जाने कितने हिज़ाबों में वो छुपा है मगर निगाह ए दिल से जो देखो तो बे हिज़ाब है वो, उजाले अपने लुटा कर वो डूब जाएगा हसीन सुबह का रख़्शंदा आफ़ताब है वो, वो मुझसे पूछने आया है मेरा हाल ए दिल जिसे बता न सकूँ दिल में इज़्तराब है वो..!! - [अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है...](https://hindigazals.com/ab-bhi-kahta-hoo-ki-tumhe/): अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है घबरा कर कोई गलत क़दम उठाना नहीं है, हुनूज़ ज़िन्दा हूँ अभी मैं मरा नहीं हूँ दुश्मन के आगे सर अपना झुकाना नहीं है, क्या हुआ ? - [सोचता हूँ लहू तुम्हारा मैं गरमाऊँ किस तरह... ?](https://hindigazals.com/sochta-hoon-lahoo-tumhara-main/): सोचता हूँ लहू तुम्हारा मैं गरमाऊँ किस तरह ? ऐ मेरी कौम तुम्हे आख़िर मैं जगाऊँ किस तरह ? क्या दलील पेश करूँ ? कौन गलत कौन सही ? - [रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह...](https://hindigazals.com/raat-pighli-hai-tere-surmai-aanchal-ki-tarah/): रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह चाँद निकला है तुझे ढूँढने पागल की तरह, ख़ुश्क पत्तों की तरह लोग उड़े जाते है शहर भी अब नज़र आता है जंगल की तरह, फिर ख्यालों में तेरे क़ुर्ब की ख़ुशबू जागी फिर बरसने लगी आँखे मेरी बादल की तरह, बे वफ़ाओ से वफ़ा कर के गुज़ारी है हयात मैं बरसता रहा वीरानों में भी बादल की तरह..!! - [तुमको वहशत तो सीखा दी है गुज़ारे लायक](https://hindigazals.com/tumko-wahshat-to-sikha/): तुमको वहशत तो सीखा दी है गुज़ारे लायक और कोई हुक्म ? कोई काम हमारे लायक ? माज़रत ! - [एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर](https://hindigazals.com/ek-ankahi-khamosh-muhabbat/): एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर जो कर सके तो बाप की चाहत पे बात कर, रखता है जिस ख़ुलूस से बच्चो के सर पे हाथ उस बेपनाह प्यार पे, शफ़क़त पे बात कर, माँ की फ़ज़ीलत से तो वाकिफ़ है सब यहाँ दिल है कि आज बाप की अजमत पे बात कर, औलाद को जो पालता है आन बान से उस बा वक़ार शख्स की उल्फत पे बात कर, करता नहीं है कोई यहाँ जिसका तज़किरा तू रब की उस अज़ीम इनायत पे बात कर, बेटी की रुखसती पे जो होता है अश्क बार उस आब दीदा बाप की राहत पे बात कर, औलाद की ख़ुशी में जो मिलती है उसको भी वालिद की उस कमाल ए मुसर्रत पे बात कर, इस बज़्म में सभी ने की है माँ पे गुफ़्तगू ऐ दिल चल उठ तू बाप की रहमत पे बात कर..!! - [मुझे तन्हाई अपनी अब तुम्हारे नाम करना है...](https://hindigazals.com/mujhe-tanhai-apni-ab-tumhare/): मुझे तन्हाई अपनी अब तुम्हारे नाम करना है बहुत मैं थक चुका हूँ अब मुझे आराम करना है, अभी तो रात बाक़ी है सुना है दिन भी आएगा अब हमको अपनी ज़िन्दगी को शाम करना है, तुम्हारा नाम ले कर अब ज़माना हमसे मिलता है मक़सद इस ख़राबे का तुम्हे बदनाम करना है, क़िताब ए ज़ीस्त मैं अपनी तुम्हारे नाम लिखूँगा जो दिल में राज़ ए पनाह है उन्हें अब आम करना है, भला कैसे ये कोई रहबरों से अपने पूछेगा है मंज़िल कौन सी अपनी, कहाँ क़याम करना है, अज़ीब सी एक उलझन है मुझको तेरी बस्ती में सलाम किसको करना है ? - [शादी से पहले हीरो नंबर वन शादी के बाद....](https://hindigazals.com/shadi-se-pahle-hero-number-one/): शादी से पहले हीरो नंबर वन शादी के बाद कुली नंबर वन शादी से पहले मैंने प्यार किया शादी के बाद ये मैंने क्या किया ? - [सियासत ने बदला मेंयार मुल्क में हुक्मरानी का](https://hindigazals.com/siyasat-ne-badla-meyar/): सियासत ने बदला मेंयार मुल्क में हुक्मरानी का देश चलने लगा है पा कर इशारे अमीर घरानों से, इन्सान पहचाने जाने लगे अब रंगों और हैवानो से यकज़हती की क़ीमत पूछो आज़ादी के दीवानों से, हरामखोरो ने जकड़ रखा है निज़ाम ए ज़म्हुरियत और तुम उम्मीद ए इंसाफ़ रखते हो ऐसे शैतानो से ? - [है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए...](https://hindigazals.com/hai-bahut-andhera-ab-suraj-nikalna/): है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए जैसे भी हो अब ये मौसम बदलना चाहिए, रोज़ जो चेहरे बदलते है लिबासों की तरह अब जनाज़ा ज़ोर से उनका निकलना चाहिए, अभी कुछ ही लोगो ने ही बेचा है अपना ज़मीर ये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिए, फूल बन कर जो भी जिया वो यहाँ मसला गया जीस्त को अब फ़ौलाद के साँचे में ढलना चाहिए, छिनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो आँख से आँसू नहीं शोला निकलना चाहिए, दिल जवां, सपने जवाँ, मौसम जवाँ, शब् भी जवाँ तुझको मुझसे इस समय सूने में मिलना चाहिए..!! - [संग ए मरमर से तराशा हुआ ये शोख़ बदन....](https://hindigazals.com/sang-e-marmar-se-tarasha-hua-ye-shokh/): संग ए मरमर से तराशा हुआ ये शोख़ बदन इतना दिलकश है कि अपनाने को जी चाहता है, सुर्ख होठों से छलकती है वो रंगीन शराब जिसको पी पी कर बहक जाने को जी चाहता है, नरम सीने में धड़कते है वो नाज़ुक तूफान जिनकी लहरों में उतर जाने को जी चाहता है, तुमसे क्या रिश्ता है कब से है मालूम नहीं लेकिन इस हुस्न पे मर जाने को जी चाहता है, बेख़बर वो सोये है लूट के नींद मेरी जज़्ब ए दिल पे तरस खाने को जी चाहता है, कब से ख़ामोश हो ऐ जान ए जहाँ कुछ तो बोलो क्या अभी और भी सितम ढहाने को जी चाहता है ? - [वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें...](https://hindigazals.com/wo-nawazishe-wo-inayate/): वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें कभी रूठना कभी मनाना वो बिखरी सिमटी ख्वाहिशे, वो झुकाव सा वो खिंचाव सा वो आना बीच तनाव सा, तेरे साथ गुजरें जो साअतें समाअतो के ख़ाली सहन में, कर रही है सर गोशियाँ मुहब्बतें भी कमाल होती है..!! - [उसे मैं क्यूँ बताऊँ...???](https://hindigazals.com/use-main-kyun-bataaoon/): उसे मैं क्यूँ बताऊँ ??? - [अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना...](https://hindigazals.com/agar-chahte-ho-tum-sada-muskurana/): कभी अपना गुस्सा न माँ को दिखाना..!! - [वो ख़ुद आँसू बहाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो](https://hindigazals.com/wo-khud-aansoo-bahayega/): वो ख़ुद आँसू बहाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो मुझे वापस बुलाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, मैं तेरा था मैं तेरा हूँ, तेरा ताउम्र रहना है बड़ी कसमे वो खाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, वो जिन बातो पे हँसता है मुझे दीवाना कह कर वो सब बाते बताएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, अगर मैं ज़िन्दा रहता तो मुझे वो ख़ुश बहुत रखता ये सबसे कहता जाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, जिसे फ़ुर्सत नहीं फ़ुर्सत में मुझको याद करने की न मुझको भूल पाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, जो अब तम्हीद करता है मेरी शायर मिजाज़ी पर गज़ल मेरी सुनाएगा ज़रा तुम मर तो जाने दो, अभी तो रूठ कर मुझसे वो मिलो दूर बैठा है मुझे आकर मनायेगा ज़रा तुम मर तो जाने दो..!! - [फिर झूम उठा सावन फिर काली घटा छाई...](https://hindigazals.com/fir-jhoom-utha-sawan-fir-kaali/): फिर झूम उठा सावन फिर काली घटा छाई फिर दर्द ने करवट ली फिर याद तेरी आई, होंठो पे हवाओ के फिर गीत उभर आये सब तीर तेरे गम के इस दिल में उतर आये फिर ज़ख्म सुलग उठे फिर जान पे बन आई, फिर बाग़ वफ़ाओ के फूलो से महक उठे फिर तेरी जुदाई के सब दाग दाहक उठे फिर मेरे शबिस्ताँ में रोटी रही तन्हाई, एक पल में यूँ ही जान से हम जाने लगे जानाँ सब दर्द पुराने भी याद आने लगे जानाँ बर्बाद उमंगो की फिर चढ़ के घटा आई..!! - [चेहरे का ये निखार मुक़म्मल तो कीजिए...](https://hindigazals.com/chehre-ka-ye-nikhar-muqammal-to-kijiye/): चेहरे का ये निखार मुक़म्मल तो कीजिए ये रूप ये सिंगार मुक़म्मल तो कीजिए, रहने ही दे हुज़ूर नशेमन की बात अब दो दिन की ये बहार मुक़म्मल तो कीजिए, ख़्वाबो की ईंट ईंट जोड़ी थी आपने सपनो की वो दीवार मुक़म्मल तो कीजिए, काटी तभी जाग जाग के हमने फ़िराक में रातों का वो शुमार मुक़म्मल तो कीजिए, अब और कितना खून बहेगा ज़मीन पर लाशों का क़ारोबार मुक़म्मल तो कीजिए, किस्से सुने थे आपके इंसाफ़ के हुज़ूर कैसे हुआ फ़रार ? - [किसी तरंग किसी सर ख़ुशी में रहता था...](https://hindigazals.com/kisi-tarang-kisi-sar/): किसी तरंग किसी सर ख़ुशी में रहता था ये कल की बात है दिल ज़िन्दगी में रहता था, कि जैसे चाँद के चेहरे पे आफ़ताब की लौ खुला कि मैं भी किसी रौशनी में रहता था, सरशत ए आदम खाक़ी ज़रा नहीं बदली फ़लक पे पहुँचा मगर गार ही में रहता था, कहा ये किसी ने कि रहता था मैं ज़माने में हुज़ूम ए दर्द गम अ बेकसी में रहता था, कलाम करता था क़ौस ए क़ुज़ह के रंगों में वो एक ख्याल था और शायरी में रहता था, गुलो पे डोलता फिरता था ओस की सूरत सदा की लहर था और नगमगी में रहता था, नहीं थी हुस्न ए नज़र की भी कुछ उसे परवाह वो एक ऐसी अज़ब दिलकशी में रहता था, वहाँ पे अब भी सितारे तवाफ़ करते है वो जिस मकान में जिस भी गली में रहता था, बस एक शाम बड़ी ख़ामोशी से टूट गया हमें जो मान तेरी दोस्ती में रहता था, खिला जो फूल तो बर्बाद हो गया अब तो तिलस्म रंग मगर गुंचगी में रहता था..!! - [ज़िन्दगी पाँव न धर ज़ानिब ए अंज़ाम अभी...](https://hindigazals.com/zindagi-paanv-na-dhar-zanib-e-anzam/): ज़िन्दगी पाँव न धर ज़ानिब ए अंज़ाम अभी मेरे ज़िम्मे है अधूरे से कई काम अभी, अभी ताज़ा है बहुत घाव बिछड़ जाने का घेर लेती है तेरी याद सर ए शाम अभी, एक नज़र और इधर देख मसीहा मेरे तेरे बीमार को आया नहीं आराम अभी, रात आई है तो क्या, तुम तो नहीं आये हो मेरी क़िस्मत में कहाँ लिखा है आराम अभी, जान देने में करूँ देर, ये मुमकिन है कहाँ मुझ तक आया है मेरी जान तेरा पैगाम अभी, तायर ए दिल के ज़रा पर तो निकल लेने दो इस परिंदे को भी आना है तय दाम अभी, तोड़ सकता है मेरा दिल ये ज़माना कैसे मेरे सीने में धड़कता है तेरा नाम अभी, मेरे हाथो में है मौज़ूद तेरे हाथ का लम्स दिल में बरपा है उसी शाम का कोहराम अभी, मैं तेरा हुस्न ए सुखन में ढालूँ कैसे मेरे अशआर बने है कहाँ इल्हाम अभी, मेरी नज़रे करे कैसे तेरे चेहरे का तवाफ़ मेरी आँखों ने तो बाँधे नहीं एहराम अभी, याद के अब्र से आँखे मेरी भीगी है अभी एक धुंध लगा सा है भीगी तो नहीं शाम अभी..!! - [नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते...](https://hindigazals.com/nasibo-par-nahi-chalte/): नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते, नियम, क़ानून, जितने है गरीबो के लिए है नियम क़ानून भी अक्सर अमीरों पर नहीं चलते, चलेंगे हिन्दुओ पर भी, चलेंगे मुस्लिमो पर भी जो मज़हब के शिकंज़े है क़बीरो पर नहीं चलते, समन्दर ने बनाए है जज़ीरे अपने सीने पर समन्दर के नियम लेकिन जज़ीरो पर नहीं चलते, कोई जादू हो दौलत का, कोई टोना हो शोहरत का ये जादू और टोने भी फ़कीरो पर नहीं चलते..!! - [फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह...](https://hindigazals.com/falsafe-ishq-me-pesh/): फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे रहे ज़िक्र ए मसीहा ले कर और हम टूट गए काँच के प्यालो की तरह, जब भी अंज़ाम ए मुहब्बत ने पुकारा ख़ुद को वक़्त ने पेश किया हमें मिशालो की तरह, ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं याद हम आएँगे दुनियाँ को हवालो की तरह..!! - [हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है...](https://hindigazals.com/haqiqat-me-nahi-kuch/): हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है क़िताबो में मगर सब कुछ लिखा है, मुझे समझा के वो मज़हब का मतलब डर ओ लालच में आए दिन बिका है, जो रात और दिन पढ़ा करते हो पोथी कभी उनका असर ख़ुद पर दिखा है ? - [बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है...](https://hindigazals.com/basa-basaya-shahar-ab/): बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है चारो ओर उदासियो का मंज़र लग रहा है, जाने अंजाने से लोग क़ातिल हो जैसे हर एक कि साँसों में खंज़र लग रहा है, बड़ी मुश्किलों से बनाया था बरसो में अब काटने को दौड़ता हुआ घर लग रहा है, कौन बचेगा, कैसे बचेगा ख़ुदा ही जाने ? - [रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है...](https://hindigazals.com/roz-jab-raat-ko-barah-ka/): रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है यातनाओं के अँधेरे में सफ़र होता है, कोई रहने की जगह है मेरे सपनो के लिए वो घरौंदा ही सही, मिट्टी का भी घर होता है, सर से सीने में कभी पेट से पाँव में कभी एक जगह हो तो कहें दर्द इधर होता है, ऐसा लगता है कि उड़कर भी कहाँ पहुँचेंगे हाथ में जब कोई टूटा हुआ पर होता है, सैर के वास्ते सड़को पे निकल आते थे अब तो आकाश से पथराव का डर होता है..!! - [आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो...](https://hindigazals.com/aansoo-ho-udasi-ho/): आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो गज़ल कहनी हो तो पहले किसी से प्यार हो, कलम लिखती हो हर दुकानदार ग़ालिब होता गज़ल के लिए ज़रूरी है कि इश्क़ में हार हो, पहले चाँद मिले फिर बादल छीन ले जाए उसे गज़ल की अगवानी के लिए बस अंधकार हो, जो आदमी ख़ुश है वो गज़ल कह नहीं सकता तुम ख़ुद देख लो ग़ालिब हो कि गुलज़ार हो, हज़ारों लब वाह वाह कहे जा रहे थे दिल तोड़ने वाले के लिए दिल में आभार हो..!! - [हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था...](https://hindigazals.com/halaat-the-kharab-yaa-main/): हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था मेरे सवाल में शामिल जवाब था, ख़ुशी मेरी क़िस्मत ने छिनी मगर दर्द मेरा अपना इंतेखाब था, अमल की दुनियाँ में आगे नहीं तो क्या हुआ ? - [कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला...](https://hindigazals.com/kabhi-log-badle-kabhi/): कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला कभी सनम कभी सनम खाना बदला, साक़ी न मिल सका फिर भी उसे रिंद ने आख़िर में मैख़ाना बदला, पहले तो समझा कि तुम समझ में आओगे मगर उसके बाद फिर समझ में आना बदला, पहले तुझे तन्हाई में देखा करते थे फिर हम ने वही वीराना बदला, बदलते सब कुछ मिलते तुम फिर भी खता हुई हमसे जो यार का पैमाना बदला..!! - [ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है...](https://hindigazals.com/ae-dil-ye-teri-zidd/): ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है उसे पाने की उम्मीद अब बेमानी लगती है, क्यों खोया तू उसके ख़्वाबो ख्यालो में ? - [बदन पे जिसके शराफ़त का पैरहन देखा...](https://hindigazals.com/badan-pe-jiske-sharafat-ka/): बदन पे जिसके शराफ़त का पैरहन देखा वो आदमी भी यहाँ हमने बदचलन देखा, ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत ए दुनियाँ किसी फ़कीर की मुट्ठी में वो रतन देखा, मुझे दिखा है वहाँ अपना ही बदन ज़ख़्मी कहीं जो तीर से घायल कोई हिरन देखा, बड़ा न छोटा कोई फ़र्क बस नज़र का है सभी पे चलते समय एक सा कफ़न देखा, ज़बाँ है और , बयाँ और, उसका मतलब और अज़ीब आज की दुनियाँ का व्याकरन देखा, लुटेरे डाकू भी अब अपने पे नाज़ करने लगे उन्होंने आज जो संतो का आचरन देखा, जो सादगी है कुहन में हमारे ऐ नीरज किसी पे और भी क्या ऐसा बाँकपन देखा..!! - [सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा...](https://hindigazals.com/sitam-sitam-na-raha/): सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा कुछ ऐसे दर्द ने घेरा कि गम भी गम न रहा, न तोड़ दें ये मेरा ज़र्फ़ ज़माने वाले कि था कभी जो एक चट्टान सा वो अज्म न रहा, तू आ के झाँक और बता क्या मेरी आँखों में ? - [जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया...](https://hindigazals.com/jaate-jaate-wo-mujhe-achchi/): जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया, उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी गम भी शायद वो बरा ए मेहरबानी दे गया, सब हवाएँ ले गया मेरे समन्दर की कोई और मुझको एक कश्ती बादबानी दे गया, खैर मैं प्यासा रहा पर उसने इतना तो किया मेरी पलकों की क़तारों को वो पानी दे गया..!! - [सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे...](https://hindigazals.com/soye-kahan-the-aankho-ne/): सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे हम भी कभी किसी के लिए ख़ूब रोये थे, अँगनाई में खड़े हुए बेरी के पेड़ से वो लोग चलते वक़्त गले मिल के रोये थे, हर साल ज़र्द फूलों का एक काफ़िला रुका उसने जहाँ पे धूल अटे पाँव धोये थे, इस हादसे से मेरा ताअल्लुक़ नहीं कोई मेले में एक साथ कई बच्चे खोये थे, आँखों की कश्तियों में सफ़र कर रहे है वो जिन दोस्तों ने दिल के सफ़ीने डुबोये थे, कल रात मैं था मेरे अलावा कोई न था शैतान मर गया था फ़रिश्ते भी सोये थे..!! - [विसाल ऐसे भी महँगा पड़ेगा दोनों को...](https://hindigazals.com/vishal-aise-bhi-mahnga-padega/): विसाल ऐसे भी महँगा पड़ेगा दोनों को बिछड़ने के लिए मिलना पड़ेगा दोनों को, फिर ऐसे तर्क ए तअ'ल्लुक़ का फ़ाएदा क्या है ? - [उसने यूँ रास्ता दिया मुझको...](https://hindigazals.com/usne-yun-rasta-diya-mujhko/): उसने यूँ रास्ता दिया मुझको रास्ते से ही हटा दिया मुझको, दूर करने के वास्ते ख़ुद से ख़ुद का ही वास्ता दिया मुझको, मौत ही कुछ सुकून दे शायद ज़िंदगी ने तो थका दिया मुझको, जब मेरे बाल ओ पर शिकस्ता हुए तब क़फ़स से उड़ा दिया मुझको, जिस हवा ने मुझे जलाए रखा फिर उसी ने बुझा दिया मुझको..!! - [उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा...](https://hindigazals.com/umr-bhar-sine-me-ek-dard/): उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम ओ गुमाँ कि वो फ़क़त मेरी है और उसने भी ये भरम मेरा बनाए रखा, आँधियाँ शर्म से हो जाएँ न पानी पानी सर यही सोच के पेड़ों ने झुकाए रखा, वैसे हर बात से रखा उसे वाक़िफ़ हमने लेकिन अफ़्साना ए उल्फ़त को छुपाए रखा, एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम एक रिश्ता जिसे ताउम्र निभाए रखा, कूज़ा गर तुझ को बनाना ही नहीं था जब कुछ किस लिए चाक पे ता उम्र चढ़ाए रखा..?? - [कुछ एक रोज़ में मैं चाहतें बदलता हूँ...](https://hindigazals.com/kuch-ek-roz-me-main-chahte/): कुछ एक रोज़ में मैं चाहतें बदलता हूँ अगर न सीट मिले तो बसें बदलता हूँ, हर एक रोज़ वो पहचान कैसे लेती है ? - [जुदाई में तेरी आँखों को झील करते हुए...](https://hindigazals.com/judai-me-teri-aankho-ko/): जुदाई में तेरी आँखों को झील करते हुए सुबूत ज़ाएअ' किया है दलील करते हुए, मैं अपने आप से ख़ुश भी नहीं हूँ जाने क्यों ? - [झूठ का बोलना आसान नहीं होता है...](https://hindigazals.com/jhooth-bolna-aasaan-nahi/): झूठ का बोलना आसान नहीं होता है ये दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बा'द यही पूछते रहते हैं मुझे अब किसी बात पे हैरान नहीं होता है, कैसे तुम भूल गए हो मुझे आसानी से इश्क़ में कुछ भी तो आसान नहीं होता है, हिज्र का ज़ायका लीजिए ज़रा धीरे धीरे सब की थाली में ये पकवान नहीं होता है, कोई किरदार मज़ा देता नहीं है उसका जिस कहानी का तू उन्वान नहीं होता है, होने को क्या नहीं होता है जहाँ में लेकिन तुमसे मिलने का ही इम्कान नहीं होता है..!! - [क़िताब ए ज़ीस्त में ज़हमत के बाब इतने है...](https://hindigazals.com/kitab-e-zist-me-zahmat/): क़िताब ए ज़ीस्त में ज़हमत के बाब इतने है ज़रा सी उम्र मिली है अज़ाब इतने है, ज़फ़ा, फ़रेब, तड़प, दर्द ओ गम, कसक,आँसू हमारे सामने भी इंतिखाब इतने है, समन्दरों को भी पल में बहा के ले जाए हमारी आँख में आँसू ज़नाब इतने है, नक़ाबपोशो की बस्ती में शख्सियात कहाँ ? - [हरगिज़ किसी भी तौर किसी के न हो सके...](https://hindigazals.com/hargiz-kisi-bhi-taur-kisi/): हरगिज़ किसी भी तौर किसी के न हो सके हम उसके बाद और किसी के न हो सके, आया था ऐसा दौर सभी के हुए थे हम फिर आया ऐसा दौर किसी के न हो सके, अफ़सोस तुमको इतनी भी फ़ुर्सत नहीं मिली तुम मुझ पे करते ग़ौर किसी के न हो सके, या'नी हम उम्र भर रहे बर्बाद ख़ुद में ही या'नी ठिकाना ठोर किसी के न हो सके, जो लोग सब का ख़ास बने फिर रहे थे 'अक्स' वो लोग ख़ास तौर किसी के न हो सके..!! - [एक रात लगती है एक सहर बनाने में...](https://hindigazals.com/ek-raat-lagti-hai-ek/): एक रात लगती है एक सहर बनाने में हमने क्यों नहीं सोचा हमसफ़र बनाने में ? - [दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे...](https://hindigazals.com/din-raat-uske-hizr-ka/): दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे दिल के तमाम ख़ाने मुझे खोखले लगे, महफ़िल में नाम उस का पुकारा गया था और सब लोग थे कि मेरी तरफ़ देखने लगे, अफ़सोस फ़िक्र ए जाँ ही नहीं रहती है हमें अफ़सोस आप जान हमें मानने लगे, जो कहते थे कोई तुझे ठुकरा न पाएगा जब बात ख़ुद पे आई तो वो सोचने लगे, मैं आज तक न ठीक से ख़ुद को समझ सका एक ही दफ़ा में आप मुझे जानने लगे..!! - [छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे...](https://hindigazals.com/chhod-kar-aise-gaya-hai/): छोड़ कर ऐसे गया है छोड़ने वाला मुझे दोस्तो उसने कहीं का भी नहीं छोड़ा मुझे, बोलबाला इस क़दर ख़ामोशियों का है यहाँ काटने को दौड़ता है मेरा ही कमरा मुझे, हाँ वही तस्वीर जो खींची थी मैंने साथ में हाँ वही तस्वीर कर जाती है अब तन्हा मुझे, बात तो ये बा'द की है कुछ बनूँगा या नहीं कूज़ागर तू चाक पे तो रक़्स करवाता मुझे, बस इसी उम्मीद पे होता गया बर्बाद मैं गर कभी बिखरा तो आ कर तू सँभालेगा मुझे, आठवीं शब भी महज़ कुछ घंटों की मेहमान है गर मनाना होता तो अब तक मना लेता मुझे..!! - [अब दरमियाँ कोई भी शिकायत नहीं बची...](https://hindigazals.com/ab-darmiyan-koi-bhi/): अब दरमियाँ कोई भी शिकायत नहीं बची या'नी क़रीब आने की सूरत नहीं बची, अब और कोई सदमा नहीं झेल सकता मैं अब और मेरी आँखों में हैरत नहीं बची, ख़ामोशियों ने अपना असर कर दिया शुरू अब रिश्ते को सदा की ज़रूरत नहीं बची, हर सिम्त सिर्फ़ बात मोहब्बत की है रवाँ या'नी जहाँ में आज मोहब्बत नहीं बची, फ़ुर्सत के वक़्त इश्क़ से महरूम मैं रहा फिर ऐसा वक़्त आया कि फ़ुर्सत नहीं बची..!! - [अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं...](https://hindigazals.com/agar-jo-pyar-khata-hai/): अगर जो प्यार ख़ता है तो कोई बात नहीं क़ज़ा ही इसकी सज़ा है तो कोई बात नहीं, तू सिर्फ़ मेरी है इस का ग़ुरूर है मुझको अगर ये वहम मेरा है तो कोई बात नहीं, मुआ'फ़ करने की आदत नहीं है वैसे तो अगर ये तीर तेरा है तो कोई बात नहीं, बिना बदन के तअ'ल्लुक़ बचा नहीं सकते यही जो रस्ता बचा है तो कोई बात नहीं, हाँ मेरे बा'द किसी और का न हो जाना तू आज मुझ से जुदा है तो कोई बात नहीं..!! - [पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते...](https://hindigazals.com/pathara-gai-aankhe-tera/): पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार करने की अदा उसकी कर देता है इन्कार वो इज़हार करते करते, इतना भी आसाँ नहीं ज़िस्म के पार जाना लोग डूबे ही है ये ज़िस्म पार करते करते, न जाने कब बिछड़ गए तुझसे ऐ ज़िन्दगी ख़्वाब पूरे होने का ऐतबार करते करते, ज़माना ये कि ग़र लिख दूँ कागज़ पे सच हर्फ़ बौखला जाते है तकरार करते करते..!! - [टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ?](https://hindigazals.com/tut-kar-bikhre-hue/): टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ? दूर तक सन्नाटा है नादान कहाँ जाएँगे ? रिश्ते जो खाक़ हुए नफ़रत की आग में अपनों में रहने के अरमान कहाँ जाएँगे ? - [किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए...](https://hindigazals.com/kise-khabar-thi-hawa/): किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए मेरा तवाफ़ करेगी तवाफ़ करते हुए, मैं ऐसा हँस रहा था एतराफ़ करते हुए कि वो रो पड़ा मुझको माफ़ करते हुए, इससे बढ़ के मुहब्बत का सिला क्या होगा ? - [रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना...](https://hindigazals.com/ret-bhari-hai-in-aankho-me/): रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से लिपट के रो लेना, उसके बा'द बहुत तन्हा हो जैसे जंगल का रस्ता जो भी तुम से प्यार से बोले साथ उसी के हो लेना, कुछ तो रेत की प्यास बुझाओ जनम जनम की प्यासी है साहिल पर चलने से पहले अपने पाँव भिगो लेना, मैं ने दरिया से सीखी है पानी की ये पर्दादारी ऊपर ऊपर हँसते रहना गहराई में रो लेना, रोते क्यूँ हो दिल वालों की क़िस्मत ऐसी होती है सारी रात यूँही जागोगे दिन निकले तो सो लेना..!! - [फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे...](https://hindigazals.com/fool-barse-kahin-shabnam/): फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे, कोई बादल हो तो थम जाए मगर अश्क मेरे एक रफ़्तार से दिन रात बराबर बरसे, बर्फ़ के फूलों से रौशन हुई तारीक ज़मीं रात की शाख़ से जैसे मह ओ अख़्तर बरसे, प्यार का गीत अँधेरों पे उजालों की फुवार और नफ़रत की सदा शीशे पे पत्थर बरसे, बारिशें छत पे खुली जगहों पे होती हैं मगर ग़म वो सावन है जो उन कमरों के अंदर बरसे..!! - [नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह...](https://hindigazals.com/nazar-se-guftagoo-lab/): नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह, जो प्यास तेज़ हो तो रेत भी है चादर ए आब दिखाई दूर से देते हैं सब तुम्हारी तरह, बुला रहा है ज़माना मगर तरसता हूँ कोई पुकारे मुझे बेसबब तुम्हारी तरह, हवा की तरह मैं बेताब हूँ कि शाख़ ए गुलाब लहकती है मेरी आहट पे अब तुम्हारी तरह, मिसाल ए वक़्त में तस्वीर ए सुब्ह ओ शाम हूँ अब मेरे वजूद पे छाई है शब तुम्हारी तरह, सुनाते हैं मुझे ख़्वाबों की दास्ताँ अक्सर कहानियों के पुर असरार लब तुम्हारी तरह..!! - [न जी भर के देखा न कुछ बात की...](https://hindigazals.com/naa-ji-bhar-ke-dekha/): न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की, उजालों की परियाँ नहाने लगीं नदी गुनगुनाई ख़यालात की, मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई ज़बाँ सब समझते हैं जज़्बात की, मुक़द्दर मेरी चश्म ए पुर आब का बरसती हुई रात बरसात की, कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की..!! - [मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे...](https://hindigazals.com/musafir-ke-raste-badalte-rahe/): मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे मुक़द्दर में चलना था चलते रहे, कोई फूल सा हाथ काँधे पे था मेरे पाँव शोलों पे चलते रहे, मेरे रास्ते में उज़ाला रहा दीये उस की आँखों के जलते रहे, वो क्या था जिसे हमने ठुकरा दिया मगर उम्र भर हाथ मलते रहे, मुहब्बत, अदावत, वफ़ा, बेरुखी सब किराये के घर थे बदलते रहे, सूना है उन्हें भी हवा लग गई हवाओं के जो रुख़ बदलते रहे, लिपट के चरागों से वो सो गए जो फूलों पे करवट बदलते रहे..!! - [एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं...](https://hindigazals.com/ek-bhatke-hue-lashkar/): एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं ज़िन्दगानी मेरी ठोकर के सिवा कुछ भी नहीं, आप दामन को सितारों से सजाए रखिये मेरी क़िस्मत में तो पत्थर के सिवा कुछ भी नहीं, तेरा दामन तो छुड़ा ले गए दुनियाँ वाले अब मेरे हाथ में सागर के सिवा कुछ भी नहीं, मेरी टूटी हुई कश्ती का ख़ुदा हाफिज़ है दूर तक गहरे समन्दर के सिवा कुछ भी नहीं..!! - [प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी...](https://hindigazals.com/pyas-jo-umr-bhar-na-bujhi/): प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी कभी तो आख़िर वो प्यास बुझानी होगी, उम्र गुज़ार दी इंतज़ार में ही बस उसने राधा जैसी ही कोई वो भी दीवानी होगी, आख़िर क्या बात थी कि तुम बेवफ़ा हो गए वो बात तुम्हे आख़िर कभी तो बतानी होगी, रस्म ए उल्फ़त निभाने का वादा किया था ज़फ़ा ही सही रस्म कोई तो निभानी होगी, महफ़िल से कोई प्यासा ही न चला जाए कोई कम माँगे या ज्यादा पिलानी होगी, कोई नहीं आने वाला तुम्हारे जनाज़े में लाश तुम्हे अपनी ख़ुद ही उठानी होगी..!! - [गुल तेरा रंग चुरा लाए है गुलज़ारो में...](https://hindigazals.com/gul-tera-rang-chura-laye-hai/): गुल तेरा रंग चुरा लाए है गुलज़ारो में जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारों में, मुझसे कतरा के निकल जा मगर ऐ जान ए हया दिल की लौ देख रहा हूँ तेरी रुखसारो में, हुस्न ए बेगाना ए एहसास ज़माल अच्छा है गुन्चे खिलते है तो बिक जाते है बाज़ारों में, ज़िक्र करते है तेरा मुझसे बाउन्वान ए ज़फ़ा चारागर फूल पिरो लाए है तलवारों में, ज़ख्म छुप सकते है लेकिन मुझे फन ही सौगंध गम की दौलत भी है शामिल मेरे शहकारो में, मुझको नफ़रत से नहीं प्यार से मसलूब करो मैं तो शामिल हूँ मुहब्बत के गुनाहगारो में..!! - [आओ बाँट ले सब दर्द ओ अलम...](https://hindigazals.com/aao-baant-le-sab-dard-o-alam/): आओ बाँट ले सब दर्द ओ अलम कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले अब पोंछ ले हम अपने आँसू कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले, हम साथ रहे और हम साथ चले हम साथ जिएँ और साथ मरे इस राह ए वफ़ा पे अपने क़दम कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले, माना कि दुखो से तुम हो भरे और हम भी ख़ाली हाथ नहीं ये ज़ुल्म ओ सितम तुम्हे मेरी क़सम कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले, बे दर्द ज़माने वाले जो कुछ कहते है तो इनको कहने दो बेलौस तमन्नाओ का भरम कुछ तुम रख लो, कुछ हम रख ले..!! - [वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी...](https://hindigazals.com/wo-mere-haal-pe-roya-bhi/): वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी अजीब शख़्स है अपना भी है पराया भी, ये इंतिज़ार सहर का था या तुम्हारा था दीयाजलाया भी मैंने दीया बुझाया भी, मैं चाहता हूँ ठहर जाए चश्म ए दरिया में लरज़ता अक्स तुम्हारा भी मेरा साया भी, बहुत महीन था पर्दा लरज़ती आँखों का मुझे दिखाया भी तू ने मुझे छुपाया भी, बयाज़ भर भी गई और फिर भी सादा है तुम्हारे नाम को लिखा भी और मिटाया भी..!! - [ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और...](https://hindigazals.com/ye-qarz-to-mera-hai/): ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और दुख मुझ को है और नीर बहाएगा कोई और, क्या फिर यूँ ही दी जाएगी उजरत पे गवाही क्या तेरी सज़ा अब के भी पाएगा कोई और ? - [मेरे लोग ख़ेमा ए सब्र में मेरा शहर गर्द ए मलाल में...](https://hindigazals.com/mere-log-khema-e-sabr-me/): मेरे लोग ख़ेमा ए सब्र में मेरा शहर गर्द ए मलाल में अभी कितना वक़्त है ऐ ख़ुदा इन उदासियो के ज़वाल में ? - [दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है...](https://hindigazals.com/dost-kya-khoob-wafa-ka-sila/): दोस्त क्या ख़ूब वफ़ा का सिला देते है हर नये मोड़ पर एक ज़ख्म नया देते है, तुमसे तो खैर घड़ी भर की मुलाक़ात रही लोग बरसो की रफ़ाक़त को भूला देते है, कैसे मुमकिन है कि धुँआ भी न हो और दिल भी जले चोट पड़ती है तो पत्थर भी सदा देते है, कौन होता है मुसीबत में किसका ऐ सनम आग लगती है तो पत्ते भी हवा देते है, जिन पर होता है बहुत दिल का भरोसा जाने क्यूँ वक़्त पड़ने पर वही लोग दगा देते है..!! - [निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है...](https://hindigazals.com/nihatthe-aadmi-ke-hath-me/): निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है हवा का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी है, ज़रूरत ही नहीं अहसास को अल्फाज़ की कोई समंदर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफी है, मुबारक़ हो तुम्हे जीने के अंदाज़ शहरों में हमें तो गाँवों में मरने की बस राहत ही काफी है, बड़े हथियार लिए जंग में शामिल हुए लोगो बुराई से निपटने के लिए क़ुदरत ही काफी है, किसी दिलदार की दीवार क़िस्मत में नहीं तो क्या ? - [हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में...](https://hindigazals.com/ho-mubaraq-tumhe-tumhari/): हो मुबारक़ तुम्हे तुम्हारी उड़ान पिंजरे में अता हुए है तुम्हे दो जहाँ पिंजरे में, है सैरगाह भी और उसमे आब ओ दाना भी रखा गया है कितना ध्यान पिंजरे में, यहीं हलाक़ हुआ था परिंदा ख्वाहिश का तभी तो है ये लहू के निशान पिंजरे में, फ़लक पे जब भी परिंदों की सफ़ नज़र आये कर लेना तुम अपनी यादे जवान पिंजरे में, इसी लिए तुम्हे रटाए गए सबक़ तरह तरह के कि तुम भूल जाओ खुला आसमान पिंजरे में..!! - [फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है...](https://hindigazals.com/fasana-ab-koi-anzam/): फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है तअल्लुक़ टूटने को एक बहाना चाहता है, जहाँ एक शख़्स भी मिलता नहीं है चाहने से वहाँ ये दिल हथेली पर ज़माना चाहता है, मुझे समझा रही है आँख की तहरीर उस की वो आधे रास्ते से लौट जाना चाहता है, ये लाज़िम है कि आँखें दान कर दे इश्क़ को वो जो अपने ख़्वाब की ताबीर पाना चाहता है, बहुत उकता गया है बेसुकूनी से वो अपनी समंदर झील के नज़दीक आना चाहता है, वो मुझ को आज़माता ही रहा है ज़िंदगी भर मगर ये दिल अब उस को आज़माना चाहता है, उसे भी ज़िंदगी करनी पड़ेगी 'मीर' जैसी सुख़न से गर कोई रिश्ता निभाना चाहता है..!! - [बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो...](https://hindigazals.com/barish-ke-qatre-ke-dukh/): बारिश के क़तरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो तुम हँसते चेहरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो, तुम ने सिर्फ़ बिछड़ जाने का कर्ब सहा है पा कर खो देने के दुख से ना वाक़िफ़ हो, एक ही छत के नीचे रहते हैं हम लेकिन तुम मेरे लहजे के दुख से ना वाक़िफ़ हो, साथ किसी के रह कर जो तन्हा कटता है तुम ऐसे लम्हे के दुख से ना वाक़िफ़ हो, हाथों की चूड़ी की ज़बान समझ लेते हो फैले हुए गजरे के दुख से ना वाक़िफ़ हो, जो मंज़िल तक जा के और कहीं मुड़ जाए तुम ऐसे रस्ते के दुख से ना वाक़िफ़ हो..!! - [सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता...](https://hindigazals.com/sazde-ke-siwa-sar-ko/): रूठे हुए लोगो को मनाना नहीं आता सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता, पत्थर तो चलाना मुझे आता है दोस्तों ! - [सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो...](https://hindigazals.com/savan-ko-zara-khul-ke/): सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो हर फूल को गुलशन में महकने की दुआ दो, मन मार के बैठे है जो सहमे हुए डर से उन सारे परिंदों को चहकने की दुआ दो, वो लोग जो उजड़े है फ़सादो से बला से लो साथ उन्हें फिर से पनपने की दुआ दो, कुछ लोग जो ख़ुद अपनी निगाहों से गिरे है भटके है वो ख्यालात बदलने की दुआ दो, जिन लोगो ने डरते हुए दरपन नहीं देखा उनको भी ज़रा सजने सँवरने की दुआ दो, बादल है कि कोहसार पिघलते ही नहीं है आज़ाद इन्हें अब तो बरसने की दुआ दो..!! - [रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है](https://hindigazals.com/raste-jo-hamesha-sahal/): रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है हो न हो वो सराबो में जल ढूँढ़ते है, जब भी लगता है अब इम्तेहाँ है ज़रूरी उलझने हम खड़ी कर के हल ढूँढ़ते है, जिनके चलने से हो जाएँ राहे मुअत्तर आदमी ऐसा हम आजकल ढूँढ़ते है, बीज ऊसर में जो फेकते है हमेशा कितनी शिद्दत से उसमे फ़सल ढूँढ़ते है, धड़कनो से भरी बस्तियाँ छोड़ आये पत्थरो के नगर में गज़ल ढूँढ़ते है..!! - [आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो...](https://hindigazals.com/aaj-jo-tumhari-nazar-me/): आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो तुम्हारी ही तो बनाई हुई बेअदब रिवायत सी है वो, कभी ज़माने से जो अपने दिल की कहती ही नहीं लबो पे अनकही ठहरी हुई शिकायत सी है वो, किसी के लिए देखो तो इस जहाँ में नफ़रत सी है और किसी के लिए शायद एक इबादत सी है वो, ऐसा सबक़ जिसको हर कोई यहाँ पढ़ नहीं सकता तक़दीर के हाथों लिखी हुई दर्द की इबारत सी है वो, उसके ग़मों की दास्ताँ कोई समझेगा भी तो कैसे ? - [हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए...](https://hindigazals.com/har-qadam-kahta-hai/): हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल ए हस्ती नहीं है दिल लगाने के लिए, क्या मुझे ख़ुश आए ये हैरत सरा ए बे सबात होश उड़ने के लिए है जान जाने के लिए, दिल ने देखा है बिसात ए क़ुव्वत ए इदराक को क्या बढ़े इस बज़्म में आँखें उठाने के लिए, ख़ूब उम्मीदें बंधीं लेकिन हुईं हिरमाँ नसीब बदलियाँ उठी मगर बिजली गिराने के लिए, साँस की तरकीब पर मिट्टी को प्यार आ ही गया ख़ुद हुई क़ैद उस को सीने से लगाने के लिए, जब कहा मैं ने भुला दो ग़ैर को हँस कर कहा याद फिर मुझ को दिलाना भूल जाने के लिए, दीदा बाज़ी वो कहाँ आँखें रहा करती हैं बंद जान ही बाक़ी नहीं अब दिल लगाने के लिए, मुझ को ख़ुश आई है मस्ती शैख़ जी को फ़रबही मैं हूँ पीने के लिए और वो हैं खाने के लिए, अल्लाह अल्लाह के सिवा आख़िर रहा कुछ भी न याद जो किया था याद सब था भूल जाने के लिए, सुर कहाँ के साज़ कैसा कैसी बज़्म ए सामईन जोश ए दिल काफ़ी है 'अकबर' तान उड़ाने के लिए..!! - [ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे...](https://hindigazals.com/kharab-logo-se-bhi-rasm-o-raah/): ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे पुराने लोग गज़ब की निगाह रखते थे, ये और बात कि करते थे गुनाह मगर गुनाहगारो से मिलने की चाह रखते थे, वो बादशाह भी साँसों की जंग हार गए जो अपने गिर्द हमेशा सिपाह रखते थे, हमारे शेरो पे होती थी वाह वाह बहुत हम अपने सीने में जब दर्द ओ आह रखते थे, बरहना सर है मगर एक वक़्त वो भी था हम अपने सर पे भी ज़रीं कुलाह रखते थे..!! - [सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ...](https://hindigazals.com/sikhaya-jo-sabaq-maa-ne/): सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ मुसीबत लाख आये सब्र दिल को सिखाता हूँ, सहे है दुःख तो मैंने भी मगर ज़ाहिर न कर पाया मुझे देखो मैं हर हाल में ख़ुशी से मुस्कुराता हूँ, अँधेरी रात गर आई तो उजाला दिन भी आएगा कभी तो दिन फिरेंगे ख़ुद को ये सपने दिखाता हूँ, जो अच्छा है भला उसका बुरा है तो भला उसका मेरी फ़ितरत में है शामिल गले सबको लगाता हूँ, ज़माने की दलीलों को मैं हँस कर टाल देता हूँ मैं ख़ुश हूँ देख लो कितना सभी को यूँ जताता हूँ, करोगे गर उम्मीद औरो से तो उम्मीद टूट जाएगा भरोसा रख ख़ुदा पर बस यही सबको सिखाता हूँ..!! - [खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं...](https://hindigazals.com/khul-ke-milne-ka-saliqa/): खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं और मेरे क़रीब तो कोई चोर दरवाज़ा नहीं, वो समझते है उन्हें पा कर ही मैं रह जाऊँगा उनको मेरी प्यास की शिद्दत का अंदाज़ा नहीं, दुनियाँ को दिखाएँ, मुझको क्या दिखाना गुरुर गर वो समन्दर है तो है, मैं तो मगर प्यासा नहीं, कोई भी दस्तक दे, आहट करे कि आवाज़ दे मेरे हाथो में मेरा घर तो है मगर दरवाज़ा नहीं, अपनों को अपना कहा, चाहे किसी दर्ज़े के हो और जब ऐसा किया मैंने तो कभी शरमाया नहीं, उनकी महफ़िल में उन्ही की रौशनी जिनके चिराग़ मैं भी कुछ होता, तो मेरा भी दीया होता नहीं, उनसे क्या बिछड़ा, मेरी सारी हकीक़त खुल गई अब कोई मौसम मिले, तो मुझसे शरमाता नहीं..!! - [अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं...](https://hindigazals.com/ashaar-mere-yun-to/): अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फकत उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये भी नहीं ठीक के हर दर्द मिटा दे कुछ दर्द कलेजें से लगाने के लिए हैं, आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगे ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं, देखूँ तेरे हाथों को तो लगता हैं तेरे हाथ मंदिर फकत दीप जलाने के लिए हैं, सोचो तो बड़ी चीज़ हैं तहज़ीब बदन की वरना तो बदन आग बुझाने के लिए हैं, ये इल्म का सौदा ये रिसालें ये किताबें एक शख्स की यादों को भुलाने के लिए हैं..!! - [कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें...](https://hindigazals.com/koi-chehra-n-hua-raushan/): कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें आइना देख रही थीं मेरी पत्थर आँखें, ले उड़ी वक्त की आँधी जिन्हें अपने हमराह आज फिर ढूँढ रही हैं वही मंज़र आँखें, फूट निकली तो कई शहर ए तमन्ना डूबे एक कतरे को तरसती हुयी बंज़र आँखें, उसको देखा है तो अब शक का वो आलम है अपने हलकों से निकल आयीं हैं बाहर आँखें, तू निगाहों की जुबां खूब समझता होगा तेरी जानिब तो उठा करती हैं अक्सर आँखें, लोग मरते न दर ओ बाम से टकरा के कभी देख लेते जो "कमाल" उसकी समंदर आँखें..!! - [इस तरह सताया है परेशान किया है...](https://hindigazals.com/is-tarah-sataya-hai/) - [न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है...](https://hindigazals.com/naa-shab-o-roz-hi-badle/): न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है किस ब्राह्मण ने कहा था कि ये साल अच्छा है ? - [सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से...](https://hindigazals.com/sab-jal-gaya-jalte-hue/): सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से, आज उस के जनाज़े में है एक शहर सफ़ आरा कल मर गया जो आदमी तन्हाई के डर से, कब तक गए रिश्तों से निभाता मैं तअ'ल्लुक़ इस बोझ को ऐ दोस्त उतार आया हूँ सर से, जो आइना ख़ाना मेरी हैरत का सबब है मुमकिन है मेरे बाद मेरी दीद को तरसे, इस अहद ए ख़िज़ाँ में किसी उम्मीद के मानिंद पत्थर से निकल आऊँ मगर अब्र तो बरसे, रूठे हुए सूरज को मनाने की लगन में हम लोग सर ए शाम निकल पड़ते हैं घर से, उस शख़्स का अब फिर से खड़ा होना है मुश्किल इस बार गिरा है वो ज़माने की नज़र से, लगता है कि इस दिल में कोई क़ैद है 'अश्फ़ाक़' रोने की सदा आती है यादों के खंडर से..!! - [एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा...](https://hindigazals.com/ek-din-mulq-ke-har-ghar-me/): एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा हर शख्स यहाँ सबका भला चाहने वाला होगा, इंसानों को होगी इंसानियत से मुहब्बत जब मिटेंगी नफरते, अमन का ही बोलबाला होगा, मेरा हमदम, मेरा हमदर्द, हमसफ़र जो है वक़्त ए गम में दुआएँ खैर माँगने वाला होगा, राम ओ रहीम गमगुसार होंगे एक दूसरे के वो भी लौटेगा जिसे नफ़रत ने निकाला होगा, कोई ठिठुरेगा नहीं मौसम ए सरमा में कही हर एक ज़िस्म पे लिबास ओ दुशाला होगा, आदमी आदमी होगा, ना रहेगा कोई फ़र्क ना कोई गोरा ही रहेगा ना कोई काला होगा, न किसी की ज़िन्दगी गुज़रेगी गम के साये में न दिलो में किसी के रंज ओ गम का छाला होगा, बयाँ कर सकेंगे खुल के एक दिन हाल ए दिल न होंगी बंदिशे न ख्यालात पे कोई ताला होगा..!! - [लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ?](https://hindigazals.com/log-kaise-hai-yahan-ke/): लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ? उनकी जादू भरी बातों में असर कैसा है ? डूबने वाले को बाहर तो निकल आने दो बाद में पूछते रहना कि भँवर कैसा है ? - [गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन...](https://hindigazals.com/guzre-jo-apne-yaaro-ki/): गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन, उम्र ए ख़िज़र की उस को तमन्ना कभी न हो इंसान जी सके जो मोहब्बत में चार दिन, जब तक जिए निभाएँगे हम उन से दोस्ती अपने रहे जो दोस्त मुसीबत में चार दिन, ऐ जान ए आरज़ू वो क़यामत से कम न थे काटे तेरे बग़ैर जो ग़ुर्बत में चार दिन, फिर उम्र भर कभी न सुकूँ पा सका ये दिल कटने थे जो भी कट गए राहत में चार दिन, जो फ़क़्र में सुरूर है शाही में वो कहाँ हम भी रहे हैं नशा ए दौलत में चार दिन, उस आग ने जला के ये दिल राख कर दिया उठते थे 'जोश' शोले जो वहशत में चार दिन..!! - [वो दिल की झील में उतरा था एक साअ'त को...](https://hindigazals.com/wo-dil-ki-jheel-me-utra-tha/): वो दिल की झील में उतरा था एक साअ'त को ये उम्र हो गई है सहते इस मलामत को, कहीं तो साया ए दीवार ए आगही मिल जाए कोई तो आए करे ख़त्म इस मसाफ़त को, तुम्हीं से मिल के मेरी दिल से आश्नाई हो तुम्हारे बाद ही जाना है इस क़यामत को, वो एक शख़्स मुझे कर गया सभी से जुदा तरस रहा हूँ मैं जिस शख़्स की रिफ़ाक़त को, अजीब लोग हैं इस शहर के ब नाम ए वफ़ा हवाएँ देते हैं हर शोला ए अदावत को, जवाज़ भी तो कोई हो मेरी तबाही का छुपा रहे हो तबस्सुम में क्यों नदामत को, गए दिनों का मनाते हो सोग फिर 'आबिद' हमें यक़ीं है न बदलोगे अपनी आदत को..!! - [ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी...](https://hindigazals.com/gairat-e-ishq-salamat-thi/): ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी वो भी दिन थे कि रह ओ रस्म ए वफ़ा ज़िंदा थी, क़ैस को दोश न दो रखियो न फ़रहाद को नाम इन्ही लोगों से मोहब्बत की अदा ज़िंदा थी, शहर ए बीमार के हर कूचा ओ बाम ओ दर पर हम भी मरते थे कि जब ख़ल्क़ ए ख़ुदा ज़िंदा थी, बुझ गईं शमएँ तो दम तोड़ गए झोंके भी जिस तरह ज़हर ए रक़ाबत से हवा ज़िंदा थी, याद ए अय्याम कि सहरा ए मोहब्बत में 'फ़राज़' जरस ए क़ाफ़िला ए दिल की सदा ज़िंदा थी..!! - [उसे हम पा ही लेते बस ज़रा सा और चलते तो...](https://hindigazals.com/use-ham-paa-hi-lete-bas/): उसे हम पा ही लेते बस ज़रा सा और चलते तो सफ़र आसान था लेकिन ज़रा रस्ते संभलते तो, जो टूटे हम तो कोई भी हमें संभाल न पाया समेट लेता मैं उनको अगर जब वो बिखरते तो, बहुत मुश्किल था मेरी ज़िन्दगी का रास्ता लेकिन सफ़र आसान हो जाता अगर वो साथ चलते तो, उसे हम चाहते है किस क़दर मालूम नहीं है ख़ुशी से मर ही जाते हम अगर वो हम पे मरते तो, मुहब्बत करता है लेकिन उसे मेरी जीत का डर है मैं सब कुछ हार देता वो ज़रा इज़हार करते तो..!! - [तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की...](https://hindigazals.com/tinka-tinka-kaante-tode/): तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की ? - [सहमा सहमा डरा सा रहता है...](https://hindigazals.com/sahma-sahma-dara-saa-rahta-hai/): सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है, काई सी जम गई है आँखों पर सारा मंज़र हरा सा रहता है, एक पल देख लूँ तो उठता हूँ जल गया घर ज़रा सा रहता है, सर में जुम्बिश ख़याल की भी नहीं ज़ानुओं पर धरा सा रहता है..!! - [शाम से आज साँस भारी है...](https://hindigazals.com/shaam-se-aaj-sans-bhari-hai/): शाम से आज साँस भारी है बे क़रारी सी बे क़रारी है, आपके बाद हर घड़ी हमने आपके साथ ही गुज़ारी है, रात को दे दो चाँदनी की रिदा दिन की चादर अभी उतारी है, शाख पर कोई कहकहा तो खिले कैसी चुप सी चमन पे तारी है, कल का हर वाकया तुम्हारा था आज की दास्ताँ हमारी है..!! - [ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है...](https://hindigazals.com/zahar-ke-ghoont-bhi/): हाल का ठीक है 'इक़बाल' न फ़र्दा का यकीं जाने क्या बात है हम फिर भी जिए जाते हैं..!! - [किसी के वायदे पे क्यों ऐतबार हमने किया ?](https://hindigazals.com/kisi-ke-wayde-pe-kyo/): किसी के वायदे पे क्यों ऐतबार हमने किया ? न आने वालो का क्यों इंतज़ार हमने किया ? - [रोग ऐसे भी गम ए यार से लग जाते है...](https://hindigazals.com/rog-aise-bhi-gam-e-yaar-se/): रोग ऐसे भी गम ए यार से लग जाते है दर से उठते है तो दीवार से लग जाते है, इश्क़ आगाज़ में हल्की सी ख़लिश रखता है बाद में सैकड़ो आज़ार से लग जाते है, पहले पहले होस एक आध दुकां खोलती है फिर तो बाज़ार के बाज़ार से लग जाते है, बे बसी भी कभी क़ुर्बत का सबब बनती है रो न पाएँ तो गले यार से लग जाते है, कतरनें गम की जो गलियों में उड़ी फिरती है घर में ले आओ तो अंबार से लग जाते है, दाग दामन के हों, दिल के हों कि चेहरे के कुछ निशाँ उम्र की रफ़्तार से लग जाते है..!! - [किस्से मेरी उल्फ़त के जो मर्क़ूम है सारे...](https://hindigazals.com/qisse-meri-ulfat-ke-jo/): किस्से मेरी उल्फ़त के जो मर्क़ूम है सारे आ देख तेरे नाम से मौसम है सारे, बस इस लिए हर काम अधूरा ही पड़ा है ख़ादिम भी मेरी कौम के मखदूम है सारे, अब कौन मेरे यादों की जंज़ीर को खोले हाकिम मेरी बस्ती के महकूम है सारे, शायद ये ज़र्फ है जो ख़ामोश हूँ अब तक वरना तो तेरे ऐब भी मालूम है सारे, हर ज़ुर्म मेरी ज़ात से मंसूब है क्या मेरे सिवा शहर में मासूम है सारे ?? - [ये इश्क़ पे सब दुनियाँ वाले बेकार की बातें करते है...](https://hindigazals.com/ye-ishq-pe-sab-duniya-wale/): ये इश्क़ पे सब दुनियाँ वाले बेकार की बातें करते है पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते है, हर दिल में छुपा है तीर कोई हर पाँव में है जंज़ीर कोई पूछे कोई उनसे गम के मज़े जो प्यार की बातें करते है, उल्फ़त के नये दीवानों को किस तरह से कोई समझाए नज़रों पे जिनके लगी है पाबंदी दीदार की बातें करते है, भँवरे है अगर मदहोश तो क्या परवाने भी है ख़ामोश तो क्या ? - [कोई नहीं आता समझाने अब आराम से हैं दीवाने...](https://hindigazals.com/koi-nahi-aata-samjhane/): कोई नहीं आता समझाने अब आराम से हैं दीवाने, तय न हुए दिल के वीराने थक कर बैठ गए दीवाने, मजबूरी सब को होती है मिलना हो तो लाख बहाने, बन न सकी अहबाब से अपनी वो दाना थे हम दीवाने, नई नई उम्मीदें आ कर छेड़ रही हैं ज़ख़्म पुराने, जल्वा ए जानाँ की तफ़्सीरें एक हक़ीक़त लाख फ़साने, दुनिया भर का दर्द सहा है हम ने तेरे ग़म के बहाने, फिर वहशत आई सुलझाने होश ओ ख़िरद के ताने बाने, फिर अपने आँचल से हवा दी शो'ला ए गुल को बाद ए सबा ने, फिर वो डाल गए दामन में दर्द की दौलत ग़म के ख़ज़ाने, आज फिर आँखों में फिरते हैं अहद ए तमन्ना के वीराने, फिर तन्हाई पूछ रही है कौन आए दिल को बहलाने, 'सैफ़' वो ग़म भी तिश्ना ए ख़ूँ है हम ज़िंदा हैं जिस के बहाने..!! - [कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है...](https://hindigazals.com/kitna-bekar-tamanna-ka-safar/): कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है कल की उम्मीद पे हर आज बसर होता है, यूँ मैं सहमा हुआ घबराया हुआ रहता हूँ जैसे हर वक़्त किसी बात का डर होता है, दिन गुज़रता है तो लगता है बड़ा काम हुआ रात कटती है तो इक माअरका सर होता है, लोग कहते हैं मुक़द्दर का नविश्ता जिसको हम नहीं मानते हर चंद मगर होता है, 'सैफ़' इस दौर में इतना भी ग़नीमत समझो क़ैद में रौज़न ए दीवार भी दर होता है..!! - [इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या...](https://hindigazals.com/insha-ji-utha-ab-kooch-karo/): इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या मतलब, जोगी का नगर में ठिकाना क्या ? - [शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है...](https://hindigazals.com/shikwa-bhi-zafa-ka-kaise/): शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है आगाज़ ए वफ़ा ख़ुद हमने किया था पहली भूल हमारी है, दुःख तुमको जब जब पहुँचा है ख़ुद हमने आँसू पोछें है अब दिल पे हमारे चोट लगी है अबके तुम्हारी बारी है, बिन खेले बाज़ी जीत के भी तुम हमसे शाकी रहते हो और हमको देखो हमने तो ख़ुद जान के बाज़ी हारी है, कुछ दर्द ए तन्हा, कुछ फ़िक्र ए जहाँ कुछ शर्म ए खता, कुछ खौफ़ ए सज़ा एक बोझ उठाये फिरता हूँ और बोझ भी कितना भारी है, जो ज़ख्म ए कारी लगा है दिल पर, पहले उसकी फ़िक्र करो ये बाद में देखा जाएगा, ये किस की कार गुज़ारी है, जो साहब घर घर मेरे बाबत ज़हर उगलते फिरते है वो सिर्फ मेरे हमसाये नहीं है, उनसे क़राबतदारी है..!! - [उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली](https://hindigazals.com/urdu-hai-mera-naam/): उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज़ हूँ ग़ालिब की सहेली, दक्कन के वाली ने मुझे गोदी में खिलाया सौदा के क़सीदो ने मेरा हुस्न बढ़ाया, है मीर की अज़मत कि मुझे चलना सिखाया मैं दाग के आँगन में खिली बन के चमेली, ग़ालिब ने बुलंदी का सफ़र मुझको सिखाया हाली ने मुरव्वत का सबक़ याद दिलाया, इक़बाल ने आईना ए हक़ मुझको दिखाया मोमिन ने सजाई मेरे ख़्वाबो की हवेली, जौक की अज़मत कि दिए मुझको सहारे चकबस्त की उल्फ़त ने मेरे ख़्वाब सँवारे, फ़ानी ने सजाए मेरी पलकों पे सितारे अकबर ने रचाई मेरी बे रंग हथेली, क्यूँ मुझको बनाते हो तअस्सुब का निशाना ? - [क़र्ज़ जाँ का उतारने के लिए](https://hindigazals.com/qarz-jaan-utarne-ke/): मैं हूँ तैयार उससे हारने के लिए..!! - [ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं...](https://hindigazals.com/ye-zard-patton-ki-barish/): ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं मेरे बदन पे किसी दूसरे की शाल नहीं, उदास हो गई एक फ़ाख़्ता चहकती हुई किसी ने क़त्ल किया है ये इंतिक़ाल नहीं, तमाम उम्र ग़रीबी में बा वक़ार रहे हमारे अहद में ऐसी कोई मिसाल नहीं, वो ला शरीक है उस का कोई शरीक कहाँ वो बे मिसाल है उस की कोई मिसाल नहीं, मैं आसमान से टूटा हुआ सितारा हूँ कहाँ मिली थी ये दुनिया मुझे ख़याल नहीं, वो शख़्स जिसको दिल ओ जाँ से बढ़ के चाहा था बिछड़ गया तो ब ज़ाहिर कोई मलाल नहीं..!! - [वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है...](https://hindigazals.com/wo-chandani-ka-badan/): वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है, उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है, कहाँ से आई ये ख़ुशबू ये घर की ख़ुशबू है इस अजनबी के अँधेरे में कौन आया है, महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है, उसे किसी की मोहब्बत का ए'तिबार नहीं उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है, तमाम उम्र मेरा दिल उसी धुएँ में घुटा वो इक चराग़ था मैं ने उसे बुझाया है..!! - [वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है...](https://hindigazals.com/wahi-taaz-hai-wahi-takht-hai/): वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है ये वही ख़ुदा की ज़मीन है ये वही बुतों का निज़ाम है, बड़े शौक़ से मेरा घर जला कोई आँच तुझ पे न आएगी ये ज़बाँ किसी ने ख़रीद ली ये क़लम किसी का ग़ुलाम है, यहाँ एक बच्चे के ख़ून से जो लिखा हुआ है उसे पढ़ें तेरा कीर्तन अभी पाप है अभी मेरा सज्दा हराम है, मैं ये मानता हूँ मेरे दीये तेरी आँधियों ने बुझा दिए मगर एक जुगनू हवाओं में अभी रौशनी का इमाम है, मेरे फ़िक्र ओ फ़न तेरी अंजुमन न उरूज था न ज़वाल है मेरे लब पे तेरा ही नाम था मेरे लब पे तेरा ही नाम है..!! - [थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली...](https://hindigazals.com/thi-jiski-justazoo-wo-haqiqat-nahi/): थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली इन बस्तियों में हमको रफ़ाक़त नहीं मिली, अबतक हूँ इस गुमाँ में कि हम भी है दहर में इस वहम से निज़ात की सूरत नहीं मिली, रहता था उसके साथ बहुत देर तक मगर उन रोज़ ओ शब में मुझको ये फ़ुर्सत नहीं मिली, कहना था जिसको उससे किसी वक़्त में मुझे उस बात के कलाम की मोहलत नहीं मिली, कुछ दिन के बाद उससे जुदा हो गए मुनीर उस बेवफ़ा से अपनी तबीयत नहीं मिली..!! - [अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी...](https://hindigazals.com/ab-jo-bichhde-hai-to-bichhadne-ki/): अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत कैसी ? - [कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है...](https://hindigazals.com/kaun-kahta-hai-shararat-se-tumhe-dekhte-hai/): कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है जान ए मन हम तो मुहब्बत से तुम्हे देखते है, तुमको मालूम नहीं तुम हो मुक़दस कितने देखते है तो हम अक़ीदत से तुम्हे देखते है, देख के तुमको किसी और की याद आती है हम किसी और ही निस्बत से तुम्हे देखते है, साथ गैरो के नज़र आओ तो जी कुढ़ता है क्या कहे कैसी अज़ीयत से हम तुम्हे देखते है, झोकनी पड़ती है ये जान अज़ाबो में हमें कौन कहता है हम सहूलत से तुम्हे देखते है, जाने क्या लिखते हो क्या सोचते रहते हो वसी रात को जब भी कभी छत से तुम्हे देखते है..!! - [तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे...](https://hindigazals.com/tu-samjhta-hai-ki-rishto-ki-duhai-denge/): तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम को महसूस किया जाए है ख़ुश्बू की तरह हम कोई शोर नहीं हैं जो सुनाई देंगे, फ़ैसला लिखा हुआ रखा है पहले से ख़िलाफ़ आप क्या ख़ाक अदालत में सफ़ाई देंगे, पिछली सफ़ में ही सही है तो इसी महफ़िल में आप देखेंगे तो हम क्यूँ न दिखाई देंगे..!! - [तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता...](https://hindigazals.com/tahrir-se-warna-meri-kya-ho-nahi/): तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता एक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता, आँखों में ख़यालात में साँसों में बसा है चाहे भी तो मुझ से वो जुदा हो नहीं सकता, जीना है तो ये जब्र भी सहना ही पड़ेगा क़तरा हूँ समुंदर से ख़फ़ा हो नहीं सकता, गुमराह किए होंगे कई फूल से जज़्बे ऐसे तो कोई राहनुमा हो नहीं सकता, क़द मेरा बढ़ाने का उसे काम मिला है जो अपने ही पैरों पे खड़ा हो नहीं सकता, ऐ प्यार तेरे हिस्से में आया तेरी क़िस्मत वो दर्द जो चेहरों से अदा हो नहीं सकता..!! - [जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त...](https://hindigazals.com/jo-pattharo-me-zuban-dhoondhe/): जो पत्थरो में जुबां ढूँढे हम वो चीज है दोस्त है मर्ज़ ख़्वाब सजाना तो हम मरीज़ है दोस्त, हमें कहानियाँ लिखने दो बहते पानी पर ये बेवकूफियाँ हमको बहुत अजीज़ है दोस्त, जुनूँ के रास्ते में जिसने भी ठोकरे खाई हो उसे पता है कि ये ठोकरे बहुत लजीज़ है दोस्त, नसीहते नहीं सुनते न सबक़ लेते है मैं क्या करूँ कि मेरे ख़्वाब बड़े बदतमीज़ है दोस्त, नहीं है हम कोई ज़ेवर मगर पहन लो हमें बदन ढकेंगे तेरा हम तेरी कमीज़ है दोस्त..!! - [दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे...](https://hindigazals.com/dosto-se-rasaai-sochenge/): दोस्तों से रसाई सोचेंगे सबसे हो आशनाई सोचेंगे, सोचती चाहे जो रहे दुनियाँ हम तो सबकी भलाई सोचेंगे, प्यार करते रहे है मुखलिस जो कैसे फिर बेवफ़ाई सोचेंगे, बेवफ़ाई की गर मेरे जानाँ फिर कभी हम जुदाई सोचेंगे, नाचना तो नहीं मुझे आता जब मैं नाचूँगा भाई सोचेंगे, लिख गज़ल इसलिए रहा हूँ मैं फिर ख़ुदा की खुदाई सोचेंगे, जब हमारी क़िताब आयेगी हम भी फिर रुनुमाई सोचेंगे, मिल न इंसाफ़ गर सका मुझको जब ये गोली चलाई सोचेंगे, हम किसी को दुःख नहीं देते जब कभी सर पे आई सोचेंगे..!! - [तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त...](https://hindigazals.com/tere-me-ab-to-rahi-baat-wo-nahi/): तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त हुई ये अपनी मुलाक़ात वो नहीं है दोस्त, चले ही आओ पुकारा है याद भी किया है मेरी तो आने की औक़ात वो नहीं है दोस्त, नसीब में लिखी थी ख़ुशी गई थी मिल कि आनी ज़ीस्त में फिर रात वो नहीं है दोस्त, ख़ुलूस भी था बहुत प्यार से ही लाये थे ये पहली वाली मराआत वो नहीं है दोस्त, था इश्तियाक़ मुहब्बत हो कम गई है क्यूँ ? - [हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी...](https://hindigazals.com/hizr-e-gam-qurb-me-tanhaai/): हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी याद मेरी भी उसे फिर तो सताती होगी, ऐ हवा जा के ख़बर मेरे सनम की लाना पास तू उसके गुज़र के ही तो जाती होगी, कोई मुखलिस मिल जाए तो फिर क्या कहने अपने चेहरे को वो आँचल से छुपाती होगी, होती होगी कभी दस्तक कोई दरवाज़े पर दौड़ कर भागते हुए दरवाज़े पे जाती होगी, प्यार से तोहफ़े दिए थे तो गनीमत समझे तीर अपनी तो वो नज़रों के चलाती होगी, खून से ख़त ही लिखे थे कभी उसने तो मुझे कटी हुई ऊँगली कभी याद तो दिलाती होगी, प्यार के दीप जलाए थे कभी चाहत से अश्क आँखों से तो हर वक़्त बहाती होगी, किस तरह सुकूं होता होगा मयस्सर उसको हाथ पे अपने मेरा नाम लिख के मिटाती होगी..!! - [किसी की आह सुनते ही जो फ़ौरन काँप जाते है...](https://hindigazals.com/kisi-ki-aah-sunte-hi-jo-kaanp/): किसी की आह सुनते ही जो फ़ौरन काँप जाते है वही इंसानियत के दर्द में आँसू बहाते है, न जाने कौन सी दुनियाँ मेरे हिस्से में आई है वफ़ा का नाम सुनते ही सभी पत्थर उठाते है, उन्हें इंसानियत के दर्द का एहसास क्या होगा ? - [नफ़रत को छोड़ द तू मुहब्बत की बात कर...](https://hindigazals.com/nafrat-ko-chhod-de-tu-muhabbat-ki/): नफ़रत को छोड़ द तू मुहब्बत की बात कर इत्तिहाद ओ अमन ओ शराफ़त की बात कर, मत कर हमारे मुल्क में गन्दी सियासते एक दूसरे के दर्द में शिरकत की बात कर, क्यूँ मस्लकी लड़ाई में उलझा हुआ है तू ? - [अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं...](https://hindigazals.com/apni-marzi-se-kahan-apne-safar/): अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं, पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं, वक़्त के साथ है मिटी का सफ़र सदियों से किस को मालूम कहाँ के हैं किधर के हम हैं, चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब सोचते रहते हैं किस राहगुज़र के हम हैं, हम वहाँ हैं जहाँ कुछ भी नहीं रस्ता न दयार अपने ही खोए हुए शाम ओ सहर के हम हैं, गिनतियों में ही गिने जाते हैं हर दौर में हम हर क़लमकार कि बेनाम ख़बर के हम हैं..!! - [कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने...](https://hindigazals.com/kahaniyo-ne-zara-khich-kar-badan/): कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें खुले गले के फ़िराक़ ये लड़कियाँ हैं बदलती हैं पैरहन अपने, ग़दर के फूल सजाती हैं ऐसे बालों में सँभाल सकती हों जैसे भरे बदन अपने, अजब भड़क है शराबों की और आँखों की बला है हुस्न बिदकने लगे हैं बन अपने, पराए दर्द की ठिकरी से घर करें रौशन कि सिफ़्लगी की रियाज़त में हैं मगन अपने, ये इंकिसार के पुतले ये सीम-ओ-ज़र की सना ये मस्ख़रे हैं कि चोले में गोरकन अपने, हमें निकालो घरों की कमीन गाहों से लहू के रम से दहकने लगे ख़ुतन अपने, हम एहतियाज के हुजरों से रिज़्क़ चुनते हुए ज़मीं के ख़्वान पे रखने लगे लगन अपने, ये आरज़ूओं के चक़माक़ से जले सीने जो आतिशीं हैं मगर नोचते हैं तन अपने, यहाँ ज़मीन पे बलवे यहाँ ज़मीं पे फ़साद निकाल रखते हैं संदूक़ से कफ़न अपने, वो बास दूर के ख़तों की औरतों में उड़ी जिसे जहाज़ों में लाए थे हम-सुख़न अपने..!! - [अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है](https://hindigazals.com/ada-hai-khwab-hai/): अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बेतहाशा है, ज़रा सी चाय गिरी और दाग़ दाग़ वरक़ ये ज़िंदगी है कि अख़बार का तराशा है, तुम्हारा बोलता चेहरा पलक से छू छू कर ये रात आईना की है ये दिन तराशा है, तेरे वजूद से बारादरी दमक उठी कि फूल पल्लू सरकने से इर्तिआशा है, मैं बेज़बाँ नहीं जो बोलता हूँ लिख लिख कर मेरी ज़बान तले ज़हर का बताशा है, तुम्हारी याद के चर्कों से लख़्त लख़्त है जी कि ख़ंजरों से किसी ने बदन को क़ाशा है, जहान भर से जहाँ गर्द देखने आएँ कि पुतलियों का मेरे मुल्क में तमाशा है..!! - [तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़...](https://hindigazals.com/tumhe-n-fir-se-satayenge-ham/): तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़ कि अब न लौट के आएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, रखेंगे तुमको बहुत दूर अपनी नज़रों से मगर न दिल से भूला पाएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, हमारी ज़ात से तकलीफ हो रही है तुम्हे एक और ही शहर बसाएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, बिछड़ते वक़्त उदासी है आखिरी हद पर मगर न अब अश्क बहाएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, अगर मिलेंगी न खुशियाँ तुम्हारी निस्बत से तो ग़मों का जश्न ही मनाएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, निकाल दो ये परस्तिश की आरज़ू दिल से अब तुम्हे ख़ुदा न बनाएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़..!! - [दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया...](https://hindigazals.com/dil-ne-jab-jab-tujh-pe-inhisar-kiya/): दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया तुमने ख़ुद को और भी बे ऐतबार किया, तू चल दिया नये रंगों के जहाँ में हर पल बस मैंने तेरा ही इन्तिज़ार किया, तेरे दिए दुखो का बन गया मैं आदी बेसबब मुस्तक़िल ग़मों को इख़्तियार किया, तुम पस ए पर्दा ही रहे मुहब्बतों के बाद हमें नाहक़ ज़माने में, इश्तिहार किया, सबक़ सब ही सिखा दिए फ़रेब के तुझ से जब से रिश्ता उस्तुवार किया, मुनाफिक़त का बे मिसाल शाहकार था वो गले लग के मेरे, मुझ पे वार किया, आदी न था उसका, तो वो मेरा था बे ऐतबार हुआ जब उस पे ऐतबार किया, एक ज़रा सी क़ीमत पे बेच कर मुहब्बत तुमने साबित ख़ुद को बे किरदार किया..!! - [नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है...](https://hindigazals.com/nadaan-na-ban-itna-tu-har/): नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है मेरी नींदे चुराने वाले तू मेरा हर ख़्वाब जानता है, मत कर कज़ा मेरे सज़दे इस तरह ख्यालो में आ कर तू तो हर गुनाह और हर सवाब जानता है, तेरी सादगी और तेरे ज़ुल्म की मिसाल क्या दूँ ज़माने को मुझे सब काँटे और तुझे हर गुलाब जानता है, अंजान समझ के और बदनाम न कर मुझको बाज़ार ए मुहब्बत में तू तो तिज़ारत ए इश्क़ का हर एक हिसाब जानता है, शक़ हो अगर मेरी वफ़ा पे तो कभी साक़ी से पूछ लेना मैख़ाने में किस को ज्यादा शराब जानता है, मेरी मुहब्बत और सब्र की इन्तेहा और क्या होगी ये तो तेरा दिया हुआ हर एक अज़ब जानता है, नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है मेरी नींदे चुराने वाले तू मेरा हर ख़्वाब जानता है..!! - [वही बहाना बना है उदास होने का...](https://hindigazals.com/wahi-bahana-bana-hai-udas-hone-ka/): बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया ज़ख्म के गुलाबो से तो शौक़ पूरा किया ख़ुश लिबास होने का, फ़ज़ा महकने लगे रौशनी झलकने लगे तो ये निशाँ है तेरे आस पास होने का, गुलो के बीच वो चेहरा खिला तो हर तितली तमाशा करने लगी बदहवास होने का, उसे भी शौक़ था बेवजह दिल दुखाने का सो हमने खेल रचाया उदास होने का, नये सफ़र पे रवाना तो हम भी हो जाते बस इंतज़ार था मौसम के रास होने का, नज़र में खाक़ हुए हम भी जब से हमें शर्फ़ मिला है तेरे रु शनास होने का..!! - [अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन...](https://hindigazals.com/ab-ke-rut-badlito-khushboo/): अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन ? - [इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है...](https://hindigazals.com/is-tarah-muhabbat-me-dil/): इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है दिल नहीं मेरा गोया उनकी राजधानी है, घास के घरौंदे से ज़ोर आज़माई क्या ? - [बेतकल्लुफ़ मेरा है जान बनाता है मुझे...](https://hindigazals.com/betakalluf-mera-hai-jaan-batata/): बेतकल्लुफ़ मेरा है जान बनाता है मुझे सामने तेरे कहाँ बोलना आता है मुझे, वो उदासी कि बिखरने से नहीं बच सकता और तेरा लम्स कि चुनता चला जाता है मुझे, अब मेरे लौट के आने का कोई वक़्त नहीं यूँ भी अब घर से सिवा कौन बुलाता है मुझे, गीत ही सिर्फ़ लबों पर हो तो आ जाए भी नींद वो कोई और कहानी भी सुनाता है मुझे, क़त्अ कर के भी तअ'ल्लुक़ वो कहाँ चैन से है इसके अस्बाब ओ दलाएल भी गिनाता है मुझे, ख़ुद से वो कौन से शिकवे हैं कि जाते ही नहीं अपने जैसों पे यक़ीं क्यूँ नहीं आता है मुझे ? - [एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने...](https://hindigazals.com/ek-din-khud-ko-apne-paas/): एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने पहले यार बनाया फिर समझाया हमने, ख़ुद भी आख़िर कार उन्ही वा'दों से बहले जिनसे सारी दुनिया को बहलाया हमने, भीड़ ने यूँही रहबर मान लिया है वर्ना अपने अलावा किस को घर पहुँचाया हमने, मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हमने, घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह जगह बिखराया हमने, इन लम्हों में किसकी शिरकत कैसी शिरकत उसे बुला कर अपना काम बढ़ाया हमने, दुनिया के कच्चे रंगों का रोना रोया फिर दुनिया पर अपना रंग जमाया हमने, जब 'शारिक़' पहचान गए मंज़िल की हक़ीक़त फिर रस्ते को रस्ते भर उलझाया हमने..!! - [बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है...](https://hindigazals.com/barso-junoon-sahra-bhatkata-hai/): बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है घर में रहना यूँही नहीं आ जाता है, प्यास और धूप के आदी हो जाते हैं हम जब तक दश्त का खेल समझ में आता है, आदत थी सो पुकार लिया तुम को वर्ना इतने कर्ब में कौन किसे याद आता है, मौत भी एक हल है तो मसाइल का लेकिन दिल ये सुहुलत लेते हुए घबराता है, एक तुम ही तो गवाह हो मेरे होने के आईना तो अब भी मुझे झुटलाता है, उफ़ ये सज़ा ये तो कोई इंसाफ़ नहीं कोई मुझे मुजरिम ही नहीं ठहराता है, कैसे कैसे गुनाह किए हैं ख़्वाबों में क्या ये भी मेरे ही हिसाब में आता है ? - [जाते जाते मुझे इल्ज़ाम तो देते जाओ...](https://hindigazals.com/jaate-jaate-mujhe-ilzam-to/): जाते जाते मुझे इल्ज़ाम तो देते जाओ दिल के रिश्ते को कोई नाम तो देते जाओ, दम निकल जाए न घुट कर शब ए तन्हाई में मुझको वापस दिल ए नाक़ाम तो देते जाओ, मैं किसी और का एहसान नहीं ले सकता मेरी क़िस्मत मेरा अंज़ाम तो देते जाओ, फूल महकाऊँ कि दामन में सजाऊँ काँटे मेरे हिस्से का मुझे काम तो देते जाओ, जाते जाते मुझे इल्ज़ाम तो देते जाओ दिल के रिश्ते को कोई नाम तो देते जाओ..!! - [वो इस अंदाज़ की मुझसे मोहब्बत चाहता है...](https://hindigazals.com/wo-is-andaz-ki-mujhse-mohabbat/): वो इस अंदाज़ की मुझसे मोहब्बत चाहता है मेरे हर ख़्वाब पर अपनी हुकूमत चाहता है, मेरे हर लफ़्ज़ में जो बोलता है मुझसे बढ़ कर मेरे हर लफ़्ज़ की मुझसे वज़ाहत चाहता है, बहाना चाहिए उसको भी अब तर्क ए वफ़ा का मैं ख़ुद उससे करूँ कोई शिकायत चाहता है, उसे मालूम है मेरे परों में दम नहीं है मेरा सय्याद अब मुझ से बग़ावत चाहता है, वो कहता है कि मैं उसकी ज़रूरत बन चुका हूँ तो गोया वो मुझे हस्ब ए ज़रूरत चाहता है, कभी उस के सवालों से मुझे लगता है ऐसे कि जैसे वो ख़ुदा है और क़यामत चाहता है, उसे मालूम है मैं ने हमेशा सच लिखा है वो फिर भी झूठ की मुझसे हिमायत चाहता है..!! - [आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते...](https://hindigazals.com/aankhe-mujhe-talwo-se-wo/): आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते, ख़ातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते सच है कि हमीं दिल को सँभलने नहीं देते, किस नाज़ से कहते हैं वो झुँझला के शब ए वस्ल तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते, परवानों ने फ़ानूस को देखा तो ये बोले क्यूँ हमको जलाते हो कि जलने नहीं देते, हैरान हूँ किस तरह करूँ अर्ज़ ए तमन्ना दुश्मन को तो पहलू से वो टलने नहीं देते, दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते, गर्मी ए मोहब्बत में वो हैं आह से माने' पंखा नफ़स ए सर्द का झलने नहीं देते..!! - [देसों में सब से अच्छा हिन्दोस्तान मेरा...](https://hindigazals.com/deso-me-sabse-achcha-hindustan-mera/): देसों में सब से अच्छा हिन्दोस्तान मेरा रू ए ज़मीं पे जन्नत, जन्नत निशान मेरा, वो प्यारा प्यारा मंज़र, वो मोहनी फ़ज़ाएँ वो ऊँचे ऊँचे पर्बत वो दिलफ़ज़ा गुफाएँ, तीनों तरफ़ समुंदर, चौथी तरफ़ हिमाला है पासबान इसका, इसका बनाने वाला, ग़ुंचों का वो चटकना, फूलों का वो महकना पंछी पखेरुओं का वो सुबह दम चहकना, धीमे सुरों में गंगा ये गीत गा रही है जमुना भी अपने मुँह में ये गुनगुना रही है, गोकुल का एक ग्वाला बंसी बजा रहा है बंसी की लय में वो भी इक गीत गा रहा है, दुनिया के सारे मेवे इस गुलिस्तान में हैं सब नेमतें मयस्सर हिन्दोस्तान में हैं, मेरा निशाँ यही है, मेरा जहाँ यही है जन्नत मेरी यही है, मेरा मकाँ यही है, देसों में सब से अच्छा हिन्दोस्तान मेरा रू ए ज़मीं पे जन्नत, जन्नत निशान मेरा..!! - [हुस्न ए मह गरचे ब हंगाम ए कमाल अच्छा है...](https://hindigazals.com/husn-e-mah-garche-ba-hangam/): हुस्न ए मह गरचे ब हंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद ज़माल अच्छा है, बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह जी में कहते है कि मुफ़्त में आये तो माल अच्छा है, उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक वो समझते है कि बीमार का हाल अच्छा है, देखिए पाते है उश्शाक़ बुतों से क्या फैज़ ? - [तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न](https://hindigazals.com/teri-khushiyo-ka-sabab/): तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न दोस्ती मुझ से और प्यार कोई और है न ? जो तेरे हुस्न पे मरते हैं बहुत से होंगे पर तेरे दिल का तलबगार कोई और है न ? - [ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से...](https://hindigazals.com/ye-chubhan-akelepan-ki/): ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से मैं हवा से लड़ रहा हूँ, तुझे क्या बताऊँ कब से ? - [जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला...](https://hindigazals.com/jinke-gharo-me-aaj-chulha-nahi/): जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला खाना गर हम उनको खिलाएँ तो ईद है, पानी नहीं नसीब है कितनो को देखिए प्यासे लबो की प्यास बुझाएँ तो ईद है, जिनके लबो की छीन ली हालात ने हँसी मुस्कान उन लबो पे सजाएँ तो ईद है, वक़्त ने कितनो को कर दिया है बे मकीं प्यार से मकाँ उनका बनाएँ तो ईद है, बेरहम ज़माने ने दिए ज़ख्म जिन्हें गहरे मरहम उनके ज़ख्मो पे लगाएँ तो ईद है..!! - [मुबारक़ हो ! अहल ए वतन क्या ख़ूब...](https://hindigazals.com/mubarak-ho-ahl-e-watan/): दौर ए ज़म्हुरियत के ज़दीद पैरोकारो ने..!! - [आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को...](https://hindigazals.com/aaya-hi-nahi-koi-bojh-uthane-ko/): आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को कब तक मैं छुपा रखता इस ख़्वाब ख़ज़ाने को ? - [अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना...](https://hindigazals.com/ab-is-maqan-me-naya-koi/): अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना ये काम सहल बहुत है मगर नहीं करना, ज़रा ही देर में क्या जाने क्या हो रात का रंग सो अब क़याम सर ए रहगुज़र नहीं करना, बयाँ तो कर दूँ हक़ीक़त उस एक रात की सब प शर्त ये है किसी को ख़बर नहीं करना, रफ़ूगरी को ये मौसम है साज़गार बहुत हमें जुनूँ को अभी जामा दर नहीं करना, ख़बर है गर्म किसी क़ाफ़िले के लुटने की ये वाक़िआ है तो सैर ओ सफ़र नहीं करना..!! - [छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ...](https://hindigazals.com/chhodo-ab-us-charag-ka/): छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ अपना तो सब के हाथों ख़सारा बहुत हुआ, क्या बेसबब किसी से कहीं ऊबते हैं लोग बावर करो कि ज़िक्र तुम्हारा बहुत हुआ, बैठे रहे कि तेज़ बहुत थी हवा ए शौक़ दश्त ए हवस का गरचे इरादा बहुत हुआ, आख़िर को उठ गए थे जो एक बात कह के हम सुनते हैं फिर उसी का इआदा बहुत हुआ, मिलने दिया न उससे हमें जिस ख़याल ने सोचा तो इस ख़याल से सदमा बहुत हुआ, अच्छा तो अब सफ़र हो किसी और सम्त में ये रोज़ ओ शब का जागना सोना बहुत हुआ..!! - [सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं...](https://hindigazals.com/sawad-e-sham-n-rang-e-sahar/): सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं बस एक सितारा ए वहशत असर को देखते हैं, किसी के आने की जिससे ख़बर भी आती नहीं न जाने कब से उसी रहगुज़र को देखते हैं, ख़ुदा गवाह कि आईना ए नफ़स ही में हम ख़ुद अपनी ज़िंदगी ए मुख़्तसर को देखते हैं, तो क्या बस एक ठिकाना वही है दुनिया में वो दर नहीं तो किसी और दर को देखते हैं, सुना है शहर का नक़्शा बदल गया 'महफ़ूज़' तो चल के हम भी ज़रा अपने घर को देखते हैं..!! - [लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का...](https://hindigazals.com/log-kahte-the-wo-mausam/): लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का अब के देखा तो नया रंग है वीराने का, बनने लगती है जहाँ शेर की सूरत कोई ख़ौफ़ रहता है वहीं बात बिगड़ जाने का, हमको आवारगी किस दश्त में लाई है कि अब कोई इम्काँ ही नहीं लौट के घर जाने का, दिल के पतझड़ में तो शामिल नहीं ज़र्दी रुख़ की रंग अच्छा नहीं इस बाग़ के मुरझाने का, खा गई ख़ून की प्यासी वो ज़मीं हमको ही शौक़ था कूचा ए क़ातिल की हवा खाने का..!! - [किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए...](https://hindigazals.com/kisi-se-kya-kahe-sune/): किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए हम ही हवा की ज़द में थे हम ही शिकार हो गए, सियाह दश्त ख़ार से कहाँ दो चार हो गए कम शौक पैरहन तमाम तार तार हो गए, यहाँ जो दिल में दाग था वही तो एक चराग़ था वो रात ऐसा गुल हुआ कि शर्मसार हो गए, अज़ीज़ क्यूँ न जान से हो शिकस्त ए आईना हमें वहाँ तो एक अक्स था यहाँ हज़ार हो गए, हमें तो एक उम्र से पड़ी है अपनी जान की अभी जो साहिलों पे थे कहाँ से पार हो गए..!! - [अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे](https://hindigazals.com/ab-wo-jhonke-kahan-saba-jaise/): अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे, शब सुलगती है दोपहर की तरह चाँद, सूरज से जल बुझा जैसे, मुद्दतों बाद भी ये आलम है आज ही तू जुदा हुआ जैसे इस तरह मंज़िलों से हूँ महरूम मैं शरीक़े सफ़र न था जैसे, अब भी वैसी है दूरी ए मंज़िल साथ चलता हो रास्ता जैसे..!! - [दोस्ती को आम करना चाहता है...](https://hindigazals.com/dosti-ko-aam-karna-chahta-hai/): दोस्ती को आम करना चाहता है ख़ुद को नीलाम करना चाहता है, बेंच आया है घटा के हाथ सूरज दोपहर को शाम करना चाहता है, नौकरी पे बस नहीं जान पे तो होगा अब वो कोई काम करना चाहता है, उम्र भर ख़ुद से रहा नाराज़ लेकिन दूसरों को राम करना चाहता है, बेचता है सच भरे बाज़ार में वो ज़हर पी कर नाम करना चाहता है, मक़ता बे रंग कह कर महफ़िल में वो हुज्जत इतमाम करना चाहता है..!! - [मिलते है दोस्त क़िस्मत से ज़माने में...](https://hindigazals.com/milte-hai-dost-qismat-se/): मिलते है दोस्त क़िस्मत से ज़माने में हर एक होता नहीं क़ाबिल ए ऐतबार ज़माने में, ख़ुलूस के रिश्तों को जो निभाते है इखलास से पाते है वही खुशियाँ जहाँ भर की ज़माने में, खो देते है जो पुरखुलुस दोस्तों को बे ऐतबारी मे रहते है वो सदा बे सुकुन तिश्ना बाम ज़माने में, निभा कर तो देखो एक बार वफ़ा से दोस्ती का रिश्ता जान दे कर भी निभा देंगे रिश्ता वफ़ा का ज़माने में..!! - [हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है](https://hindigazals.com/hum-ek-khuda-ke-bande-hai/): हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है, रब भी जब चाहे हम साथ रहे फिर क्यों आपस में लड़ते है ? - [झूठी हँसी तेरा मुस्कुराना झूठा...](https://hindigazals.com/jhuthi-hansi-tera-muskurana-jhutha/): झूठी हँसी तेरा मुस्कुराना झूठा यार तेरा तो हर एक बहाना झूठा, कैसे ऐतबार करूँ फिर से तुझ पे तेरी दोस्ती झूठी तेरी याराना झूठा, तुझको क्या फ़र्क कोई जिये या मरे तेरा फ़िक्र ए फ़ाका यानि बेमानी झूठा, तेरा क्या ता'अल्लुक़ गम ए तन्हाई से तेरा पल पल अफ़सुर्दा बताना झूठा हमारी बर्बादी का रंज़ और तू करे झूठे अश्क तेरे मातम मनाना झूठा..!! - [आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है...](https://hindigazals.com/aaj-ke-mahaul-me-insaniyat/): आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है ये इनाद ए बाहमी का ही फ़क़त अंजाम है, हक़ शनासी का चलन हम में नहीं बाक़ी रहा सुब्ह अपनी पुर अलम है पुर ख़तर हर शाम है, हैफ़ बर्बादी ए गुलशन अपने ही हाथों हुई मुफ़्त में बाद ए ख़िज़ाँ के सर पे क्यूँ इल्ज़ाम है ? - [तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी...](https://hindigazals.com/tukhm-e-nafrat-bo-raha-hai/): तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी आदमियत खो रहा है आदमी, ज़िंदगी का नाम है जेहद ए मुदाम सो रहा है सो रहा है आदमी, आगही है शर्त जीने के लिए फिर भी ग़ाफ़िल हो रहा है आदमी, चल सका न राह पर अस्लाफ़ की नक़्श ए पा अब खो रहा है आदमी, काशिफ़ ए ज़ात ए ख़ुदा था सरबसर अब नहीं है जो रहा है आदमी, अपने ही आ'माल पर पछता के अब रो रहा है रो रहा है आदमी, क़ंद गुफ़्तारी ऐ 'मोहसिन' अब कहाँ ज़हर आसा हो रहा है आदमी..!! - [ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो...](https://hindigazals.com/zindagi-ye-to-nahi-tujhko/): ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा ही न हो, दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी चौंक उठता हूँ कहीं तू ने पुकारा ही न हो, कभी पलकों पे चमकती है जो अश्कों की लकीर सोचता हूँ तेरे आँचल का किनारा ही न हो, ज़िंदगी एक ख़लिश दे के न रह जा मुझको दर्द वो दे जो किसी तरह गवारा ही न हो, शर्म आती है कि उस शहर में हम हैं कि जहाँ न मिले भीक तो लाखों का गुज़ारा ही न हो..!! - [ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने...](https://hindigazals.com/zindagi-tujhko-bhulaya-hai/): ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने वक़्त ख़्वाबों में गँवाया है बहुत दिन हमने, अब ये नेकी भी हमें जुर्म नज़र आती है सब के ऐबों को छुपाया है बहुत दिन हमने, तुम भी इस दिल को दुखा लो तो कोई बात नहीं अपना दिल आप दुखाया है बहुत दिन हमने, मुद्दतों तर्क ए तमन्ना पे लहू रोया है इश्क़ का क़र्ज़ चुकाया है बहुत दिन हमने, क्या पता हो भी सके इसकी तलाफ़ी कि नहीं शायरी तुझ को गँवाया है बहुत दिन हमने..!! - [अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले...](https://hindigazals.com/agar-safar-me-mere-sath/): अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले तवाफ़ करता हुआ मौसम ए बहार चले, लगा के वक़्त को ठोकर जो ख़ाकसार चले यक़ीं के क़ाफ़िले हमराह बेशुमार चले, नवाज़ना है तो फिर इस तरह नवाज़ मुझे कि मेरे बाद मेरा ज़िक्र यहाँ बार बार चले, ये जिस्म क्या है, कोई पैरहन उधार का है यहीं संभाल के पहना और यहीं उतार चले, ये जुगनुओं से भरा आसमां जहाँ तक है वहाँ तलक तेरी नज़रों का इक़्तिदार चले, यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले..!! - [बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..](https://hindigazals.com/boodha-tapra-tuta-chhappar/): बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होंगी, लंबी लंबी रातें सच, लफ़्जों की दुनियादारी में आँखों की सच्चाई क्या ? - [ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ?](https://hindigazals.com/ye-nafrato-kee-sadayen/): ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ? हवा में आग बही, तो चमन का क्या होगा ? सफर नसीब मुसाफिर से ये सवाल न कर कहाँ सुकूं मिलेगा थकन का क्या होगा ? - [ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई...](https://hindigazals.com/le-gaya-dil-me-daba-kar/): ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई पानियों पे लिख गया आवाज़ कोई, बाँध कर मेरे परो में मुश्किलों को हौसलों को दे गया परवाज़ कोई, नाम से जिसके है ये पहचान मेरी मुझमें उस जैसा भी हो अंदाज़ कोई, जिनका तारा था वो आँखे खो गई है अब कहाँ करता है मुझ पे नाज़ कोई, रोज़ उसको अपने अंदर खोजता हूँ रोज़ आना दिल से एक आवाज़ कोई..!! - [सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में...](https://hindigazals.com/sata-le-hamko-dilchaspi-jo-hai/): सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में, लड़ाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजा नतीज़ा चाहे जो कुछ हो मुक़द्दर आज़माने में, जिसे भी देखिए है गर्दिश ए हालात से नाला सुकुन ए दिल नहीं हासिल किसी को इस ज़माने में, वो गुलचीं हो कि बिजली सबकी आँखों में खटकते है यही दो चार तिनके जो है मेरे आशियाने में, है कुछ लोगो की खसलत नौ ए इंसा की दिल आज़ारी मज़ा मिलता है उनको दूसरो का दिल दुखाने में, अज़ब दस्तूर ए दुनियाँ ए मुहब्बत है, अरे तौबा कोई रोने में है मशगूल कोई मुस्कुराने में, पतंगों को जला कर शमअ ए महफ़िल ऐ बर्की दिखाने के लिए मसरूफ़ है आँसू बहाने में..!! - [हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है...](https://hindigazals.com/hizrato-ka-zamana-bhi-kya/): हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है कि मेरे घर से फोन आया है सितम ये है कि मुझे खैरियत बताना है, हमें ये बात बहुत देर में समझ आई वही तो जाल बिछा है जहाँ भी दाना है, हमें जला नहीं सकती है धूप हिज़रत की हमारे सर पे ज़रूरत का शामियाना है, नमाज़ ईद की पढ़ कर मैं ढूँढता ही रहा कहीं दिखे कोई अपना गले लगाना है, वहीँ वहीँ लिए फिरती है गर्दिश ए दौराँ जहाँ जहाँ भी लिखा मेरा आब ओ दाना है..!! - [समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ...](https://hindigazals.com/samjh-rahe-the-ki-apni-sudhar/): समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ हमें तो मुफ़्त में बदनाम कर गई दुनियाँ, मुतालबों से नहीं मिल सकी नजात कभी हवस के ज़िंदा तक़ाज़ों से भर गई दुनियाँ, हर एक आँख में चढ़ता हुआ अना का नशा हर एक हर्फ़ ए वफ़ा से मुकर गई दुनियाँ, असीर कर के तबाही के मुझ को दलदल में बताए कौन ये मुझ को किधर गई दुनियाँ, वो क्या हुए मेरे पुर कैफ़ पुर सुकूँ लम्हे मुझे तलाश है जिस की किधर गई दुनियाँ, कटी हुई है हर एक शाख़ पेड़ से 'मोहसिन' लो बर्ग ए ख़ुश्क सी अब के बिखर गई दुनियाँ..!! - [बीते रिश्ते तलाश करती है...](https://hindigazals.com/bite-rishte-talash-karti-hai/): बीते रिश्ते तलाश करती है ख़ुशबू गुंचे तलाश करती है, जब गुज़रती है उस गली से सबा ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है, अपने माज़ी की जुस्तज़ू में बहार पीले पत्ते तलाश करती है, एक उम्मीद बार बार आ कर अपने टुकड़े तलाश करती है, बूढ़ी पगडंडी शहर तक आ कर अपने बेटे तलाश करती है..!! - [अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है...](https://hindigazals.com/ashk-o-khoon-ghulte-hai/): अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है दास्ताँ इश्क़ में मरने से अमर बनती है, चीख़ पड़ता है मुसव्विर सभी रंगों के साथ कैनवस पर मेरी तस्वीर अगर बनती है, इतना आसान नहीं होता है दिन का आना डूब जाते है सितारे तो सहर बनती है, सबको हासिल तो है बीनाई की दौलत लेकिन देखने वाली तो मुश्किल से नज़र बनती है, टकटकी बाँध के बैठे है वही रातो में तेरी तस्वीर दीवारों पे जिधर बनती है, पूछते फिर रहे है शहर में अब तो जानी यार ! - [सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी...](https://hindigazals.com/sabhi-kahen-mere-gamkhwar-ke/): सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करो यार के अलावा भी, बहुत से ऐसे सितमगर थे अब जो याद नहीं किसी हबीब दिल ए आज़ार के अलावा भी, ये क्या कि तुम भी सरेराह हाल पूछते हो कभी मिलो हमें बाज़ार के अलावा भी, उजाड़ घर में ये ख़ुशबू कहाँ से आई है कोई तो है दर ओ दीवार के अलावा भी, सो देख कर तेरे रुखसार ओ लब यकीं आया कि फूल खिलते है गुलज़ार के अलावा भी, कभी हमसे भी आ कर मिलो जो वक़्त मिले हमरा वज़ूद है अश'आर के अलावा भी..!! - [हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से...](https://hindigazals.com/har-mulaqat-me-lagte-hai/): हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से फ़ाएदा क्या है भला ऐसों के याराने से, कुछ जो समझा तो मुझे सब ने ही आशिक़ समझा बात ये ख़ूब निकाली मेरे अफ़्साने से, ज़िंदगी अपनी नज़र आने लगी सिर्फ़ सराब कभी गुज़रे जो दिल ए ज़ार के वीराने से, एक पल भी न ठहर पाओगे ऐ संगज़नो कोई पत्थर कभी लौट आया जो दीवाने से, तुम को मरना है तो मरना मेरे गुल होने पर शम्अ' कहती रही शबभर यही परवाने से, फिर न देखा तुझे ऐ 'जोश' सुकूँ से बैठा जब से उठा है तू इस शोख़ के काशाने से..!! - [तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए...](https://hindigazals.com/tum-ho-jab-mere-liye/): तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए ये ज़मीं मेरे लिए ये आसमाँ मेरे लिए, इस तरह जज़्बात ए आज़ादी बहल जाएँगे क्या बन रहा है क्यूँ क़फ़स में आशियाँ मेरे लिए, मैं चला जाऊँ न गुलशन छोड़ कर क़ब्ल अज़ बहार क्यूँ गिरीं सारे चमन पर बिजलियाँ मेरे लिए , रो रहा हूँ आज मैं सारे जहाँ के वास्ते रोएगा कल देखना सारा जहाँ मेरे लिए, इज़्तिराब ए शौक़ से क्या क्या हुई हैं लग़्ज़िशें इल्तिफ़ात ए यार ने जब इम्तिहाँ मेरे लिए, है मोहब्बत कब रहीन ए राह ओ रस्म ए ताहिरी बंदगी है बेनियाज़ ए आस्ताँ मेरे लिए, बेपनाही है यही 'बिस्मिल' जो हुस्न ओ इश्क़ की होगी नाकाफ़ी हयात ए जाविदाँ मेरे लिए..!! - [सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते...](https://hindigazals.com/sar-jis-pe-na-jhuk/): सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते, का'बे में मुसलमान को कह देते हैं काफ़िर बुतख़ाने में काफ़िर को भी काफ़िर नहीं कहते, रिंदों को डरा सकते हैं क्या हज़रत ए वाइ'ज़ जो कहते हैं अल्लाह से डर कर नहीं कहते, का'बे ही में हर सज्दे को कहते हैं इबादत मयख़ाने में हर जाम को साग़र नहीं कहते, हर बार नए शौक़ से है अर्ज़ ए तमन्ना सौ बार भी हम कह के मुकर्रर नहीं कहते, मयख़ाने के अंदर भी वो कहते नहीं मयख़्वार जो बात कि मयख़ाने के बाहर नहीं कहते, क्या अहल ए जहाँ तुझ को सितमगर नहीं कहते कहते तो हैं लेकिन तेरे मुँह पर नहीं कहते, कहते हैं मोहब्बत फ़क़त उस हाल को 'बिस्मिल' जिस हाल को हम उन से भी अक्सर नहीं कहते..!! - [मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है...](https://hindigazals.com/main-dahshatgard-tha-marne-pe/): मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है हुकूमत के इशारे पे तो मुर्दा बोल सकता है, यहाँ पर नफ़रतों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं लुटी अस्मत बता देगी दुपट्टा बोल सकता है, हुकूमत की तवज्जो चाहती है ये जली बस्ती अदालत पूछना चाहे तो मलबा बोल सकता है, कई चेहरे अभी तक मुँहज़बानी याद हैं इसको कहीं तुम पूछ मत लेना ये गूंगा बोल सकता है, बहुत सी कुर्सियाँ इस मुल्क में लाशों पे रखी हैं ये वो सच है जिसे झूठे से झूठा बोल सकता है, सियासत की कसौटी पर परखिये मत वफ़ादारी किसी दिन इंतक़ामन मेरा गुस्सा बोल सकता है..!! - [मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है...](https://hindigazals.com/muhabbat-karne-walo-me/): मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है, तवायफ़ की तरह अपने ग़लत कामों के चेहरे पर हुकूमत मंदिर ओ मस्जिद का पर्दा डाल देती है, हुकूमत मुँह भराई के हुनर से ख़ूब वाक़िफ़ है ये हर कुत्ते के आगे शाही टुकड़ा डाल देती है, कहाँ की हिजरतें कैसा सफ़र कैसा जुदा होना किसी की चाह पैरों में दुपट्टा डाल देती है, ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है कहीं भी शाख़े गुल देखे तो झूला डाल देती है, भटकती है हवस दिन रात सोने की दुकानों में ग़रीबी कान छिदवाती है तिनका डाल देती है, हसद की आग में जलती है सारी रात वह औरत मगर सौतन के आगे अपना जूठा डाल देती है..!! - [ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता...](https://hindigazals.com/ye-sansad-hai-yahan-bhagwan/): ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता जहाँ पीतल ही पीतल हो वहाँ पारस नहीं चलता, यहाँ पर हारने वाले की जानिब कौन देखेगा सिकन्दर का इलाक़ा है यहाँ पोरस नहीं चलता, दरिन्दे ही दरिन्दे हों तो किसको कौन देखेगा जहाँ जंगल ही जंगल हो वहाँ सरकस नहीं चलता, हमारे शहर से गंगा नदी हो कर गुज़रती है हमारे शहर में महुए से निकला रस नहीं चलता, कहाँ तक साथ देंगी ये उखड़ती टूटती साँसें बिछड़ कर अपने साथी से कभी सारस नहीं चलता, ये मिट्टी अब मेरे साथी को क्यों जाने नहीं देती ये मेरे साथ आया था क्यों वापस नहीं चलता..!! - [अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं..](https://hindigazals.com/azab-duniyan-hai-naa-shayar/): अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी चादर उठाते हैं, तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते हमारे गाँव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं, इन्हें फ़िरक़ापरस्ती मत सिखा देना कि ये बच्चे ज़मीं से चूमकर तितली के टूटे पर उठाते हैं, समुन्दर के सफ़र से वापसी का क्या भरोसा है तो ऐ साहिल, ख़ुदा हाफ़िज़ कि हम लंगर उठाते हैं, ग़ज़ल हम तेरे आशिक़ हैं मगर इस पेट की ख़ातिर क़लम किस पर उठाना था क़लम किसपर उठाते हैं, बुरे चेहरों की जानिब देखने की हद भी होती है सँभलना आईनाख़ानो, कि हम पत्थर उठाते हैं..!! - [उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं...](https://hindigazals.com/unse-miliye-jo-yahan/): उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़ लिबासों में नज़र आते हैं कौन मानेगा की ये सब वही कल वाले हैं, लूटने वाले उसे क़त्ल न करते लेकिन उसने पहचान लिया था की बग़ल वाले हैं, अब तो मिल जुल के परिंदों को रहना होगा जितने तालाब हैं सब नील कमल वाले हैं, यूँ भी एक फूस के छप्पर की हक़ीक़त क्या थी अब उन्हें ख़तरा है जो लोग महल वाले हैं, बेकफ़न लाशों के अम्बार लगे हैं लेकिन फ़ख्र से कहते हैं हम ताजमहल वाले हैं..!! - [हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है..](https://hindigazals.com/har-ek-awaz-ab-urdu-ko/): हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है यह पगली फिर भी अब तक ख़ुद को शहज़ादी बताती है, कई बातें मुहब्‍बत सबको बुनियादी बताती है जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है, जहाँ पिछले कई बरसों से काले नाग रहते हैं वहाँ एक घोंसला चि‍ड़‍ियों का था दादी बताती है, अभी तक यह इलाक़ा है रवादारी के क़ब्‍ज़े में अभी फ़‍िरक़ापरस्‍ती कम है आबादी बताती है, यहाँ वीरानियों की एक मुद्दत से हुकूमत है यहाँ से नफ़रतें गुज़री है बरबादी बताती है, लहू कैसे बहाया जाय यह लीडर बताते हैं लहू का ज़ायक़ा कैसा है यह खादी बताती , ग़ुलामी ने अभी तक मुल्‍क का पीछा नहीं छोड़ा हमें फिर क़ैद होना है ये आज़ादी बताती है, ग़रीबी क्‍यों हमारे शहर से बाहर नहीं जाती अमीर ए शहर के घर की हर एक शादी बताती है, मैं उन आँखों के मयख़ाने में थोड़ी देर बैठा था मुझे दुनिया नशे का आज तक आदी बताती है..!! - [चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे...](https://hindigazals.com/charag-apni-thakan-ki/): चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे वो तीरगी है कि अब ख़्वाब तक दिखाई न दे, मसर्रतों में भी जागे गुनाह का एहसास मेरे वजूद को इतनी भी पारसाई न दे, बहुत सताते हैं रिश्ते जो टूट जाते हैं ख़ुदा किसी को भी तौफ़ीक़ ए आश्नाई न दे, मैं सारी उम्र अँधेरों में काट सकता हूँ मेरे दीयो को मगर रौशनी पराई न दे, अगर यही तेरी दुनिया का हाल है मालिक तो मेरी क़ैद भली है मुझे रिहाई न दे, दुआ ये माँगी है सहमे हुए मुअर्रिख़ ने कि अब क़लम को ख़ुदा सुर्ख़ रौशनाई न दे..!! - [एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम...](https://hindigazals.com/ek-tuti-hui-zanjir-ki/): एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम और दुनिया ये समझती है कि आज़ाद हैं हम, क्यूँ हमें लोग समझते हैं यहाँ परदेसी एक मुद्दत से इसी शहर में आबाद हैं हम, काहे का तर्क ए वतन काहे की हिजरत बाबा इसी धरती की इसी देश की औलाद हैं हम, हम भी तामीर ए वतन में हैं बराबर के शरीक दर ओ दीवार अगर तुम हो तो बुनियाद हैं हम, हम को इस दौर ए तरक़्क़ी ने दिया क्या 'मेराज' कल भी बर्बाद थे और आज भी बर्बाद हैं हम..!! - [जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए...](https://hindigazals.com/zism-ka-bojh-uthaye-hue/): जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए धूप में बर्फ़ की मानिंद पिघलते रहिए, ये तबस्सुम तो है चेहरों की सजावट के लिए वर्ना एहसास वो दोज़ख़ है कि जलते रहिए, अब थकन पाँव की ज़ंजीर बनी जाती है राह का ख़ौफ़ ये कहता है कि चलते रहिए, ज़िंदगी भीक भी देती है तो क़ीमत ले कर रोज़ फ़रियाद का अंदाज़ बदलते रहिए..!! - [दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है...](https://hindigazals.com/duniyan-kahin-jo-banti-hai/): दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है परदे के पीछे कोई न कोई ज़रूर है, जाते है लोग जा के फिर आते नहीं कभी दीवार के उस पार कोई बस्ती ज़रूर है, मुमकिन नहीं कि दर्द ए मुहब्बत अयाँ न हो खिलती है जब कली तो महकती ज़रूर है, ये जानते हुए कि पिघलता है रात भर ये शमअ का ज़िगर है कि जलती ज़रूर है, नागिन ही जानिए उसे दुनियाँ है जिसका नाम लाख आस्तीं में पालिए डसती ज़रूर है, जाँ दे भी ख़रीदो तो दुनियाँ न आये हाथ ये मुश्त ए खाक़ कहने को सस्ती ज़रूर है..!! - [तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए...](https://hindigazals.com/tu-gazal-ban-ke-utar/): तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए, उम्र भर मिलते रहे फिर भी न मिलने पाए इस तरह मिल कि मुलाक़ात मुकम्मल हो जाए, दिन में बिखरा हूँ बहुत रात समेटेगी मुझे तू भी आ जा तो मेरी ज़ात मुकम्मल हो जाए, नींद बन कर मेरी आँखों से मेरे ख़ूँ में उतर रतजगा ख़त्म हो और रात मुकम्मल हो जाए, मैं सरापा हूँ दुआ तू मेरा मक़सूद ए दुआ बात यूँ कर कि मेरी बात मुकम्मल हो जाए, अब्र आँखों से उठे हैं तेरा दामन मिल जाए हुक्म हो तेरा तो बरसात मुकम्मल हो जाए, तेरे सीने से मेरे सिने में आयात उतरें सूर ए कश्‍फ़ ओ करामात मुकम्मल हो जाए, तुझ को पाए तो ‘वहीद’अपने ख़ुदा को पा ले काविश ए मारफ़त ए ज़ात मुकम्मल हो जाए..!! - [हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल...](https://hindigazals.com/haal-e-dil-pe-hi-shayar/): हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल जो बात दिल की समझते है वो सुनते है गज़ल, लिख दे जो मचल कर दास्ताँ ए दिल कोई कहने वाले यहाँ उसे ही तो कहते है गज़ल, दर्द जब अश्को से बयाँ न होने पाए ऐसे हालात को बयाँ करने को लिखते है गज़ल, क्या करना किसी बदगुमाँ दिल पे मर के अब मरते नहीं किसी पे हम जीते है गज़ल, कोई भी नशा रहता ही नहीं दो पल भी अब तो दीवान ए मीर से दीवाने पीते है गज़ल..!! - [दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह...](https://hindigazals.com/dard-se-mera-daman-bhar-de/): दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह, मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे रौशन दिल बेदार नज़र दे या अल्लाह, सूरज सी एक चीज़ तो हम सब देख चुके सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह, या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह..!! - [बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन...](https://hindigazals.com/bikhre-bikhre-sahme-sahme/): बिखरे बिखरे सहमे सहमे रोज़ ओ शब देखेगा कौन लोग तेरे जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन ? - [ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो...](https://hindigazals.com/ye-visal-o-hizr-ka-masala/): ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो मेरी समझ में न आ सका कभी कोई मुझको न पा सका कभी मैं किसी को न पा सका, कई बस्तियों को उलट चुका कोई ताब इसकी न ला सका मगर आँधियों का ये सिलसिला तेरा नक्श ए पा न मिटा सका, मेरी दास्ताँ भी अज़ीब है वो क़दम क़दम मेरे साथ था जिसे राज़ ए दिल न बता सका जिसे दाग़ ए दिल न दिखा सका, न ही बिजलियाँ न ही बारिशें न ही दुश्मनों की वो साजिशें भला क्या सबब है बता ज़रा जो तू आज भी नहीं आ सका, कभी रौशनी की तलब रही कभी हौसलों की कमी रही मैं चराग़ को तेरे नाम के न जला सका न बुझा सका, वो जो अक्स रंग ए हिलाल थी वो जो आप अपनी मिसाल थी मुझे आज तक है ख़लिश यही तुझे वो गज़ल न सुना सका..!! - [हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते...](https://hindigazals.com/ham-gazal-me-tera/): हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते तेरी यादों को भी रुस्वा नहीं होने देते, कुछ तो हम ख़ुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते, अज़मते अपने चराग़ों की बचाने के लिए हम किसी घर में उजाला नहीं होने देते, आज भी गाँव में कुछ कच्चे मकानों वाले घर में हम साए के फ़ाक़ा नहीं होने देते, ज़िक्र करते हैं तेरा नाम नहीं लेते हैं हम समुंदर को जज़ीरा नहीं होने देते, मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़ मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते..!! - [मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया...](https://hindigazals.com/mere-thake-hue-shano-se/): मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया बहुत तवील था ये दिन मगर गुज़र तो गया, लगा के दाव पे साँसों की आख़िरी पूँजी वो मुतमइन है चलो हारने का डर तो गया, कसी गुनाह की परछाइयाँ थीं चेहरे पर समझ न पाया मगर आइने से डर तो गया, ये और बात कि काँधों पे ले गए हैं उसे किसी बहाने से दीवाना आज घर तो गया..!! - [थकी हुई मामता की क़ीमत लगा रहे हैं...](https://hindigazals.com/thaki-hui-mamta-ki/): थकी हुई मामता की क़ीमत लगा रहे हैं अमीर बेटे दुआ की क़ीमत लगा रहे हैं, मैं जिन को उँगली पकड़ के चलना सिखा चुका हूँ वो आज मेरे असा की क़ीमत लगा रहे हैं, मेरी ज़रूरत ने फ़न को नीलाम कर दिया है तो लोग मेरी अना की क़ीमत लगा रहे हैं, मैं आँधियों से मुसालहत कैसे कर सकूँगा चराग़ मेरे हवा की क़ीमत लगा रहे हैं, यहाँ पे 'मेराज' तेरे लफ़्ज़ों की आबरू क्या ये लोग बाँग ए दरा की क़ीमत लगा रहे हैं..!! - [तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं...](https://hindigazals.com/tum-pucho-aur-main-naa/): तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं, किस को ख़बर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं सावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं, टूट गया जब दिल तो फिर ये साँस का नग़्मा क्या मा'नी गूँज रही है क्यूँ शहनाई जब कोई बारात नहीं, ग़म के अँधियारे में तुझको अपना साथी क्यूँ समझूँ ? - [आज कुछ बात है जो ज़िद पे अड़े हैं कुत्ते...](https://hindigazals.com/aaj-kuch-baat-hai-jo/): आज कुछ बात है जो ज़िद पे अड़े हैं कुत्ते जाने क्यूँ अपने ही मालिक पे चढ़े हैं कुत्ते, बज़्म अदबी तो नज़ाक़त से शराफ़त से भी उस मुहल्ले से मुहल्ले के लड़े हैं कुत्ते, ये तो अच्छा है सनद् इनको नहीं मिल पाया वरना एल.एल.बी. - [ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है...](https://hindigazals.com/zaride-me-chhapi-hai/): ज़रीदे में छपी है एक ग़ज़ल दीवान जैसा है ग़ज़ल का फ़न अभी भी रेत के मैदान जैसा है, मिला मैं उससे हाँ साया मेरा बढ़ता रहा आगे सफ़र में हमसफ़र भी आजतक हैरान जैसा है, नहीं दिखते उछलते, खेलते, हंसते हुए बच्चे मोहल्ला इस नई तहज़ीब में शमशान जैसा है, नज़र को देखकर ये दाद भी अच्छी नहीं लगती मुकर्रर लफ़्ज़ तेरे होंठ पे एक दान जैसा है, नई बस्ती, नये मौसम मगर हूँ कौल का पक्का यहां पे गुफ़्तगू करना मुझे अपमान जैसा है, फिसल जाता है पल भर में चमक को देखकर पीली तेरा ईमान भी लगता है बेईमान जैसा है..!! - [ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया...](https://hindigazals.com/zindagi-bas-ek-ye-lamha/): ज़िन्दगी बस एक ये लम्हा मुझे भी भा गया आज बेटे के बदन पर कोट मेरा आ गया, भोर की पहली किरन बरगद तले झोंका नया जिस्म सारा ओस की बूंदों से यूँ नहला गया, हूँ बहुत ही खुश बुढ़ापे में बहू बेटों के संग चाहतों का एक नया मौसम मुझे हर्षा गया, दुश्मनी मुझको विरासत में मिली थी, खेत भी क़ातिलों से मिलके लौटा गांवभर में छा गया, ये अलग है खिल नहीं पाया चमन पूरी तरह मेरा जादू शाख़ पर कुछ सुर्खियां तो ला गया, बेवकूफी जल्दबाजी में चुना सरदार था खेत की ही मेड़ जैसा खेत को ही खा गया..!! - [समझता खूब है वो भी बयान की कीमत...](https://hindigazals.com/samjhta-khoob-hai-wo-bhi/): समझता खूब है वो भी बयान की कीमत चुका रहा है जो अब भी ज़ुबान की कीमत, इसी मुकाम पे समझा तमाम रिश्तों को लगा रहा हूँ जब अपने मकान की कीमत, बड़ा ग़ुरूर, बड़ी हैसियत, बड़ी बातें अकाल हो तो समझते हैं धान की कीमत, किसी ने माना किसी ने कभी नहीं माना गिराई फिर भी सभी ने पुरान की कीमत, नहीं चला सके एक तीर भी निशाने पर वही लगाते हैं अक्सर कमान की कीमत, लहू बहाओ भले रोज़ रोज़ कितना ही तुम्हें चुकाना ही होगा क़ुरान की कीमत, तुम्हारे वास्ते एक वोट हैं महज़ अब भी लगा रहे हैं यहाँ पर वो जान की कीमत..!! - [ज़िन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना...](https://hindigazals.com/zindagi-dee-hai-to-jine-ka/): ज़िन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना पाँव बख्शे है तो तौफ़ीक ए सफ़र भी देना, गुफ़्तगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना, मैं तो इस खाना बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन अगली नस्ले तो भटके उन्हें घर भी देना, ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुक़म्मल हो जाए उसको खंज़र जो दिया है मुझे सर भी देना..!! - [काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं...](https://hindigazals.com/kaante-hi-chubhan-de/): काँटे ही चुभन दे ज़रूरी तो नहीं फूल भी नश्तर चभोते है, बारिश ही भिगोए तन मन ज़रूरी तो नहीं आँसू भी दामन भिगोते है, तूफान ही डुबोए कश्ती ज़रूरी तो नहीं माझी भी नाव डुबोते है, हमेशा साथ हो कारवाँ ज़रूरी तो नहीं रास्ते भी हमसफ़र होते है, हर मुसाफ़िर को मिले मंज़िल ज़रूरी तो नहीं कुछ ताउम्र मुसाफ़िर ही रहते है, दिल की बात पहुँचे लबो तक ज़रूरी तो नहीं ख़ामोश लम्हे भी बोलते है, गुम्बदो की ही हो पूजा ज़रूरी तो नहीं नीव के पत्थर भी इबादत के क़ाबिल होते है..!! - [दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था...](https://hindigazals.com/dushman-meri-khushiyo-ka/): दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था तुमने भी कभी अपना तो जाना ही नहीं था, क्या करते अकेले में सजा कर महफ़िल जब शहर में किसी ने पहचाना ही नहीं था, दिल ने तो बहुत चाहा मगर किस तरह जीते ? - [ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी...](https://hindigazals.com/zakhm-e-tanhai-me/): ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी साया दीवार पे मेरा था, सदा किसकी थी ? आँसूओ से ही सही भर गया दामन मेरा हाथ तो मैंने उठाए थे, दुआ किसकी थी ? - [ना जाने कैसी तक़दीर पाई है...](https://hindigazals.com/naa-jaane-kaisi-taqdeer/): ना जाने कैसी तक़दीर पाई है जो आया आज़मा के चला गया, कल तक गले लगाने वाला भी आज बस हाथ हिला के चला गया, क्या अपना कहे उसे जो हमें रोता देख मुस्कुरा के चला गया, हमने पूछा कि कब आओगे वापस बस हल्का सा सर हिला के चला गया, वो मेरा जिसे मैं सुकून कहता था मेरी ज़िन्दगी में आग लगा के चला गया, ये कैसा चारासाज़ मिला हमें जो इलाज़ के नाम पर रोग लगा के चला गया..!! - [कभी राहो में मिली होगी तू...](https://hindigazals.com/kabhi-raaho-me-mili-hogi/): कभी राहो में मिली होगी तू तुझे मैंने कभी देखा तो होगा, हर दिल कुछ कहता है इस दिल ने भी कुछ कहा तो होगा, कुछ अरमान निकले होंगे इस दिल से कुछ तुमने सुना तो होगा, याद कभी आई तो होगी मेरी तेरा दिल भी कभी तड़पा तो होगा, आशियाना कभी बन न सका हमारा तेरा महल भी कभी टूटा तो होगा, कभी देखा तो होगा तुमने भी मुझे पलट के दिल तुम्हारा दोबारा कभी धड़का तो होगा, क्या कहे तेरी ज़ालिमाना अदाओं को इन अदाओ से किसी का दम निकला तो होगा..!! - [सफ़र है धूप का इसमें क़याम थोड़ी है...](https://hindigazals.com/safar-hai-dhoop-ka/): सफ़र है धूप का इसमें क़याम थोड़ी है बला है इश्क़ ये बच्चों का काम थोड़ी है, किसी को वस्ल है बोझल कोई फ़िराक़ में ख़ुश दिलों के खेल में कोई निज़ाम थोड़ी है, हमारे दिल में धड़कता है नाम उस का अभी है ये शुरू ए मोहब्बत तमाम थोड़ी है, जो अहल ए इश्क़ हैं मंज़िल का ग़म नहीं करते ये ख़ास लोगों का रस्ता है आम थोड़ी है, हम अपने मन की करेंगे बुरा लगे कि भला हमारा दिल है तुम्हारा ग़ुलाम थोड़ी है, तुम्हारी याद जो आई तो आ गए मिलने वरना तुम से हमें कोई काम थोड़ी है, बढ़ा जो दर्द तो काग़ज़ पे ख़ुद उतर आया समझ के सोच के लिखा कलाम थोड़ी है..!! - [तनाव में जब आ जाए तो धागे टूट जाते है...](https://hindigazals.com/tanav-me-jab-aa-jaaye/): तनाव में जब आ जाए तो धागे टूट जाते है ज़रा सी बात पर पुराने रिश्ते टूट जाते है, तुम्हे इस बात पर हैरत कि टूटा है हमारा दिल मुक़ाबिल जब के हो पत्थर तो शीशे टूट जाते है, गुज़रते वक़्त से चीजें पुरानी हो ही जाती है दिलो में मैल पड़ती है तो जज़्बे टूट जाते है, हज़ारों ख्वाहिशे तरतीब पाती है ख्यालो में मगर जब आँख खुलती है तो सपने टूट जाते है, उमड़ आते है झुर्रियो में हज़ारों दुःख ज़माने के गुज़र के उम्र के हिस्से से चेहरे टूट जाते है, ना जाने क्यों तुम्हारी याद आती है मुझे उस दम मेरे आँगन में जब बेलो के पत्ते टूट जाते है, दुखो में तो निकल आते है आँखों से हज़ार आँसू ख़ुशी के मौसम में भी किनारे टूट जाते है..!! - [अंधेरा ज़ेहन का सम्त ए सफ़र जब खोने लगता है...](https://hindigazals.com/andhera-zehan-ka-samt/): अंधेरा ज़ेहन का सम्त ए सफ़र जब खोने लगता है किसी का ध्यान आता है उजाला होने लगता है, वो जितनी दूर हो उतना ही मेरा होने लगता है मगर जब पास आता है तो मुझ से खोने लगता है, किसी ने रख दिए ममता भरे दो हाथ क्या सर पर मेरे अंदर कोई बच्चा बिलक कर रोने लगता है, मोहब्बत चार दिन की और उदासी ज़िंदगी भर की यही सब देखता है और 'कबीरा' रोने लगता है, समझते ही नहीं नादान कै दिन की है मिल्कियत पराए खेतों पे अपनों में झगड़ा होने लगता है, ये दिल बच कर ज़माने भर से चलना चाहे है लेकिन जब अपनी राह चलता है अकेला होने लगता है..!! - [दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है...](https://hindigazals.com/duniyan-jise-kahte-hai/): दुनियाँ जिसे कहते है जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है, अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम हर वक़्त आये रोना तो बेकार का रोना है, बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने ? - [कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं...](https://hindigazals.com/koi-dard-koi-khushi-koi/): कोई दर्द कोई ख़ुशी कोई अरमान अब नहीं ज़िस्म तो है मगर जान अब नहीं, जिस कदर था साथ वो उस कदर जुदा हुआ कोई फ़ासलो के भी दरमियान अब नहीं, है सफ़र वही, है रस्ते भी वही मेरे साथ तेरे कदमो के निशान अब नहीं, इश्क़ के जूनून में एक बागपन तो था अब गिला है कि कोई इम्तिहान अब नहीं, कौन साथ देता है यहाँ मौत के सिवा इतना वफ़ादार तो इन्सान अब नहीं..!! - [ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा...](https://hindigazals.com/zindagi-yun-hui-basar/): ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा काफ़िला साथ और सफ़र तन्हा, अपने साये से चौक जाते है उम्र गुज़री है इस कदर तन्हा, रात भर बोलते है सन्नाटे रात काटे कोई किधर तन्हा, दिन गुज़रता नहीं है लोगो में रात होती नहीं बसर तन्हा, हमने दरवाज़े तक तो देखा था फिर न जाने गए किधर तन्हा..!! - [काँटो की चुभन पे फूलो का मज़ा भी...](https://hindigazals.com/kaanto-kee-chubhan-pe/): काँटो की चुभन पे फूलो का मज़ा भी दिल दर्द के मौसम में रोया भी हँसा भी, आने का सबब याद न जाने की ख़बर है वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी, हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी, दोस्तों कभी अपनों से जो गम हुए हासिल कुछ याद रहा उनमे कुछ भूल गया भी..!! - [कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते...](https://hindigazals.com/kuch-bhi-ho-wo-ab/): कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते हम मुजरिम ए तौहीन ए वफ़ा हो नहीं सकते, ऐ मौज ए हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या हम अहल ए मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते, इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते, एक आप का दर है मेरी दुनिया ए अक़ीदत ये सज्दे कहीं और अदा हो नहीं सकते, अहबाब पे दीवाने 'असद' कैसा भरोसा ये ज़हर भरे घूँट रवा हो नहीं सकते..!! - [जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई...](https://hindigazals.com/jab-zindagi-sukun-se/): जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई उन की निगाह और भी मासूम हो गई, हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई, क़ल्ब ओ ज़मीर बेहिस ओ बेजान हो गए दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द से महरूम हो गई, उन की नज़र के कोई इशारे न पा सका मेरे जुनूँ की चारों तरफ़ धूम हो गई, कुछ इस तरह से वक़्त ने लीं करवटें 'असद' हँसती हुई निगाह भी मग़्मूम हो गई..!! - [तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा...](https://hindigazals.com/tum-door-ho-to-pyar/): तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा किसकी ज़ुल्फ़ घटाओं को देख कर एक जुर्म ए ख़ुश गवार का मौसम न आएगा, छलके शराब बर्क़ गिरे या जलें चराग़ ज़िक्र ए निगाह ए यार का मौसम न आएगा, वादा ख़िलाफ़ियों को तरस जाएगा यक़ीं रातों को इंतिज़ार का मौसम न आएगा, तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी हो जाएगी तवील एहसास के निखार का मौसम न आएगा..!! - [ज़िंदगी का हर नफ़स मम्नून है तदबीर का...](https://hindigazals.com/zindagi-ka-har-nafas/): ज़िंदगी का हर नफ़स मम्नून है तदबीर का वाइज़ो धोखा न दो इंसान को तक़दीर का, अपनी सन्नाई की तुझ को लाज भी है या नहीं ऐ मुसव्विर देख रंग उड़ने लगा तस्वीर का, आप क्यूँ घबरा गए ये आप को क्या हो गया ? - [गर हक़ चाहते हो तो फिर जंग लड़ो...](https://hindigazals.com/gar-haq-chahte-ho-to-fir/): गर हक़ चाहते हो तो फिर जंग लड़ो गुहार लगाने से कहाँ ये निज़ाम बदलेगा, छाँव ढूँढ़ते हो, बड़े परेशां धूप से हो दरख़्त लगाओ तो ये इंतजाम बदलेगा, हमेशा यूँ ही रहेंगे तख़्तनशी देखो हुक्मरानों का यहाँ फ़क़त नाम बदलेगा, अब कोई क़िरदार नया तलाश करो तो इस कहानी का अब अंज़ाम बदलेगा, पोशाक ज़रा कीमती तुम पहन के आओ फिर देखना साक़ी तुम्हारा ज़ाम बदलेगा, ये दौर सौदेबाज़ी है इसका ख्याल रखना चेहरा देख कर हर बार यहाँ ईनाम बदलेगा, जगह इबादत की बदल देने से यकीं जानो ना अल्लाह बदला है, ना कभी राम बदलेगा..!! - [जाने क्यूँ अब शर्म से चेहरे गुलाब नहीं होते...](https://hindigazals.com/jaane-kyun-ab-sharm-se/): जाने क्यूँ अब शर्म से चेहरे गुलाब नहीं होते जाने क्यूँ अब मस्त मौला मिजाज़ नहीं होते, पहले बता दिया करते थे दिल की बातें जाने क्यूँ अब चेहरे खुली क़िताब नहीं होते, सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे, तब ना फेसबुक था ना समार्ट फोन ना ट्विटर एक ख़त से ही दिलो के जज़्बात समझ लेते थे, सोचता हूँ हम कहाँ से कहाँ आ गए व्यावहारिकता सोचते सोचते भावनाओं को खा गए, अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहाँ पूछता है ? - [मुफ़लिसी में दिन बिताते है यहाँ...](https://hindigazals.com/muflisi-me-din-bitate-hai/): मुफ़लिसी में दिन बिताते है यहाँ फिर भी सपने हम सजाते है यहाँ, मज़हबी बातें उठा कर लोग कुछ आपसी झगड़े बढ़ाते है यहाँ, दूसरो के गम को है कम आँकते अपने गम में छटपटाते है यहाँ, झूठी बातों का ढिंढोरा पिट कर सच से कैसे मुँह छुपाते है यहाँ, ज़िन्दगी भर साथ रह कर भी अलग रिश्ते इस तरह भी निभाते है यहाँ, अपने गिरेबाँ में कोई झाँकता नहीं बस गैरो पे सब मुस्कुराते है यहाँ..!! - [झूठी बाते झूठे लोग, सहते रहेंगे सच्चे लोग...](https://hindigazals.com/jhuthi-baaten-jhuthe-log/): झूठी बाते झूठे लोग, सहते रहेंगे सच्चे लोग हरियाली पर बोलेंगे, सावन के सब अँधे लोग, दो कौड़ी में महँगे है, किरदारों के सस्ते लोग मेरी गुज़ारिश क्या सुनते ? - [न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले...](https://hindigazals.com/na-mili-chhavn-kahi-yun/): न मिली छाँव कहीं, यूँ तो कई शज़र मिले वीरान ही मिले सफ़र में जो भी शहर मिले, मंज़िल मिले न मिले मुझे कोई परवाह नहीं मुझे तलाश है जिसकी उसको ख़बर मिले, हर गुनाह इन्सान के चेहरे पर दर्ज़ रहता है देखना अगर किसी रोज़ आईने से नज़र मिले, छोटी सी बात का लोग फ़साना बना देते है अब कैसे यहाँ किसी से कोई खुल कर मिले, सबको मिला कुछ न कुछ ख़ास क़ुदरत से फूलो को मिली ख़ुशबू, परिंदों को पर मिले, बहुत मुश्किल से मिलता है कोई चाहने वाला खोना मत, तुम्हे कोई शख्स ऐसा अगर मिले..!! - [रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की...](https://hindigazals.com/raunak-tumhare-dam-se/): रौनक तुम्हारे दम से है लैल ओ नहार की तुम आबरू हो आमद ए फ़सल ए बाहर की, लफ्ज़ो में हम बयाँ नहीं कर पाएँगे कभी कैसे सहर हुई है शब ए इंतज़ार की, आ जा कि तेरे अहद ए वफ़ा का भरम रहे रह जाए आबरू भी मेरे ऐतबार की, हर मौज़ पर लिखा है मेरा हाल जान ए मन क्या कैफ़ियत बताऊँ दिल ए बेक़रार की, हम तुम से दूर रह के तुम्हारे है आज भी हमने तो ऐसी रित निभाई है प्यार की, अहल ए चमन की आँख से आँसू निकल पड़े मौसम ने रुखसती जो सुनाई बहार की, जो सब पे रहम करते है इस क़ायनात में रहमत उन्ही पे नहीं होती परवरदिगार की, उनके बगैर दिल का ये आलम है अब बुझती हुई शमा हो जैसे मज़ार की..!! - [हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है...](https://hindigazals.com/har-rishta-yahan-bas/): हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा का सिला आँखों से बहता पानी है, उफ्फ ये इश्क़ के किस्से ये दोस्ती के नग्मे रेत की दीवारे है सब एक दिन ढह ही जानी है, लुटाओ जो लुटा सको मुस्कुराहटे तुम यहाँ उधार की है ये ज़िन्दगी और साँसे आनी जानी है, पानी पर खींची लकीरें है या ये तकदीरे है ना ये बनती है कभी ना रहती कोई निशानी है, हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा का सिला आँखों से बहता पानी है..!! - [तलब की राहों में सारे आलम नए नए से...](https://hindigazals.com/talab-ki-raaho-me-saare/): तलब की राहों में सारे आलम नए नए से शजर हजर लोग शहर मौसम नए नए से, चमक रहा था फ़लक पे सूरज नया नया सा लुटा चुकी थी ख़ज़ाने शबनम नए नए से, हैं अब भी आँखों के दीदबानों में अपनी वो दिन लगे दियार ए सहर को जब हम नए नए से, तमव्वुजों की रगों में शोरिश नई नई सी लहू के झगड़े बदन में पैहम नए नए से, पुराने होते हुए सहीफ़े दरख़्त इंसाँ ये चाँद सूरज सितारे हर दम नए नए से, कभी तो आएँगे शाख़ ए दिल पर गुलाब ताज़ा मिलेंगे 'असद' हमें भी मौसम नए नए से..!! - [सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ...](https://hindigazals.com/sukhanwari-ka-bahana/): सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से शर्मिंदा हूँ न दुनिया से जो दिल में आता है होठों पे लाता रहता हूँ, पुराने घर की शिकस्ता छतों से उकता कर नए मकान का नक़्शा बनाता रहता हूँ, मेरे वजूद में आबाद हैं कई जंगल जहाँ मैं हूँ की सदाएँ लगाता रहता हूँ, मेरे ख़ुदा यही मसरूफ़ियत बहुत है मुझे तेरे चराग़ जलाता बुझाता रहता हूँ..!! - [सियाह रात से हम रौशनी बनाते हैं...](https://hindigazals.com/siyah-raat-se-ham-raushni/): सियाह रात से हम रौशनी बनाते हैं पुरानी बात को अक्सर नई बनाते हैं, कल एक बच्चे ने हमसे कहा बनाओ घर सो हम ने कह दिया ठहरो अभी बनाते हैं, हम एक और ही मंज़र की ताक में हैं मियाँ ये धूप छाँव के नक़्शे सभी बनाते हैं, मुसव्विरान ए फ़ना अपने कैनवस पे कभी न कोई शहर न कोई गली बनाते हैं, हम उस दयार में ज़िंदा हैं जिस के सारे लोग कभी फ़तीला कभी लबलबी बनाते हैं..!! - [शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है...](https://hindigazals.com/shakh-se-fool-se-kya-uska/): शाख़ से फूल से क्या उसका पता पूछती है या फिर इस दश्त में कुछ और हवा पूछती है, मैं तो ज़ख़्मों को ख़ुदा से भी छुपाना चाहूँ किस लिए हाल मेरा ख़ल्क़ ए ख़ुदा पूछती है, चश्म ए इंकार में इक़रार भी हो सकता था छेड़ने को मुझे फिर मेरी अना पूछती है, तेज़ आँधी को न फ़ुर्सत है न ये शौक़ ए फ़ुज़ूल हाल ग़ुंचों का मोहब्बत से सबा पूछती है, किसी सहरा से गुज़रता है कोई नाक़ा सवार और मिज़ाज उसका हवा सब से जुदा पूछती है..!! - [भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ?](https://hindigazals.com/bhookh-hai-to-sabr-kar/): भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ? - [परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं...](https://hindigazals.com/parinde-ab-bhi-par-tole/): परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं हवा में सनसनी घोले हुए हैं, तुम्हीं कमज़ोर पड़ते जा रहे हो तुम्हारे ख़्वाब तो शोले हुए हैं, ग़ज़ब है सच को सच कहते नहीं वो क़ुरान ओ उपनिषद् खोले हुए हैं, मज़ारों से दुआएँ माँगते हो अक़ीदे किस क़दर पोले हुए हैं, हमारे हाथ तो काटे गए थे हमारे पाँव भी छोले हुए हैं, कभी किश्ती, कभी बतख़, कभी जल सियासत के कई चोले हुए हैं, हमारा क़द सिमट कर मिट गया है हमारे पैरहन झोले हुए हैं, चढ़ाता फिर रहा हूँ जो चढ़ावे तुम्हारे नाम पर बोले हुए हैं..!! - [इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है...](https://hindigazals.com/is-nadi-ki-dhaar-se-thandi/): इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है, एक चिंगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो इस दीये में तेल से भीगी हुई बाती तो है, एक खँडहर के हृदय सी एक जंगली फूल सी आदमी की पीर गूँगी ही सही गाती तो है, एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी यह अँधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है, निर्वसन मैदान में लेटी हुई है जो नदी पत्थरों से ओट में जा जा के बतियाती तो है, दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर और कुछ हो या न हो, आकाश सी छाती तो है..!! - [कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं...](https://hindigazals.com/kaise-manzar-samne-aane/): कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं, अब तो इस तालाब का पानी बदल दो ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं, वो सलीबों के क़रीब आए तो हमको क़ायदे क़ानून समझाने लगे हैं, एक क़ब्रिस्तान में घर मिल रहा है जिसमें तहख़ानों में तहख़ाने लगे हैं, मछलियों में खलबली है अब सफ़ीने उस तरफ़ जाने से क़तराने लगे हैं, मौलवी से डाँट खा कर अहले मक़तब फिर उसी आयत को दोहराने लगे हैं, अब नई तहज़ीब के पेश ए नज़र हम आदमी को भूल कर खाने लगे हैं..!! - [मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी...](https://hindigazals.com/maine-to-bahut-dekhe/): मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी कुछ ज़िन्दगी भी देखी कुछ मौत के साये भी, इस दिल में तुम्हे रखा था मैंने बड़े दिल से पर तुमने मेरे दिल पर इल्ज़ाम लगाए भी, मिल जाए ख़ुदा मुझसे ये इल्तज़ा रहेगी शिकवे है बहुत उसके मुझसे तो बताये भी, इन्सान की ज़न्नत में क़िस्मत न बदलती है वो ख़ुद को मिटाए और वो ख़ुद को बनाये भी, इस बुत से क़सम खाई उस बुत से रहम माँगा हर बुत ने अपनी मुझे हर चाल दिखाई भी, हर एक समय दिल में रंगते नसीम बाक़ी वो ख़ुद को जलाये भी वो ख़ुद को बुझाए भी..!! - [फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए...](https://hindigazals.com/fatah-ki-sun-ke-khabar/): फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए रूठे हुए थे हमसे यार रिश्तेदार मनाने आए, अच्छे दिन आए तो मैंने गज़ब तमाशा देखा मेरे दुश्मन भी मुझको गले लगाने आए, आज वो मेरे दुश्मन का पता पूछ रहे थे जैसे मुझसे ना मिलने वो, मिलने के बहाने आए, फूल ही फूल खिले जिन दोस्तों की बदौलत दुआ है उनके हिस्से में नेमतो के खज़ाने आए, रो दिए वो भी, मुझे धोखा देने के बाद याद जब उनको मेरी वफ़ाओ के फ़साने आए..!! - [नसीबो पर नहीं चलते नजीरों पर नहीं चलते...](https://hindigazals.com/nasibo-par-nahi-chalte-2/): नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते, नियम, क़ानून, जितने है गरीबो के लिए है नियम क़ानून भी अक्सर अमीरों पर नहीं चलते, चलेंगे हिन्दुओ पर भी, चलेंगे मुस्लिमो पर भी जो मज़हब के शिकंज़े है क़बीरो पर नहीं चलते, समन्दर ने बनाए है जज़ीरे अपने सीने पर समन्दर के नियम लेकिन जज़ीरो पर नहीं चलते, कोई जादू हो दौलत का, कोई टोना हो शोहरत का ये जादू और टोने भी फ़कीरो पर नहीं चलते..!! - [ऐ मेरी क़ौम के लोगो ज़रा होशियार हो जाओ](https://hindigazals.com/ae-meri-qaum-ke/): वगरना जंग कोई भी हो उस में हार जाएँगे..!! - [कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं](https://hindigazals.com/kuch-chalega-zanab-kuch/): कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं चाय, कॉफ़ी, शराब, कुछ भी नहीं, चुप रहे तो कली लगे वो होंठ हँस पड़े तो गुलाब कुछ भी नहीं, जो ज़मीं पर है सब हमारा है सब है अच्छा, ख़राब कुछ भी नहीं, इन अमीरों की सोच तो ये है हम गरीबो के ख़्वाब कुछ भी नहीं, मन की दुनियाँ में सब ही उरियाँ है दिल के आगे हिज़ाब कुछ भी नहीं, उम्र अब अपनी अस्ल शक्ल में आ क्रीम, पाउडर, खिज़ाब कुछ भी नहीं, ज़िन्दगी भर का लेन देन अना और हिसाब ओ क़िताब कुछ भी नहीं..!! - [हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है](https://hindigazals.com/har-rishta-yahan-bas-chaar-din/): हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा आँखों से बहता हुआ पानी है, उफ़्फ़ ये इश्क़ के किस्से ये दोस्ती के नग्मे रेत की दीवारें है एक दिन तो ढह जानी है, लुटाओ जो लुटा सको मुस्कुराहटे तुम यहाँ उधार की ज़िन्दगी और साँसे आनी जानी है, पानी पर खींची लकीरें है या ये तक़दीरें है ना बनती कभी न रहती कोई निशानी है, हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा आँखों से बहता हुआ पानी है..!! - [जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा](https://hindigazals.com/jee-chahe-to-shisha/): जी चाहे तो शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा शीशा पैमाना क्या बनना ? - [घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती](https://hindigazals.com/ghane-baadlo-se-jo-kabhi/): घने बादलो से जो कभी थोड़ी धूप निकलती रहती आसरे उम्मीद के मुमकिन है ज़िन्दगी चलती रहती, हुस्न ओ अदा के बाज़ार में सुकून जो मिलता अगर तलाश ए वफ़ा में मुहब्बत ना शहर बदलती रहती, धोखा फ़ितरत है इंसानी, क्या और सबूत दूँ हर खूबसुरत चीज पर क्यूँ नज़र फ़िसलती रहती, मैख़ाने के पास घर हो तो क्या बात है सुरूर ए हवा से ही ये तबीयत बहलती रहती, आफ़ताब की किरनो से तो हमने निभा लिया लेकिन चाँदनी की आँच से ज़िन्दगी पिघलती रहती, जो मिटा कर वज़ूद रौशन हो जाती महफ़िले शबनम ना बनती आस सुबह तक जलती रहती..!! - [क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर](https://hindigazals.com/kya-karenge-aap-mere-dil-ka/): क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर ख़ामखा हैरान होंगे एक समन्दर देख कर, ये अमीरों की है बस्ती, है अलग इनका चलन लोग मिलते है गले लोगो का पैकर देख कर, साथ चलने का किया था आपने जब फ़ैसला रुक गए फिर क्यूँ भला राहों में पत्थर देख कर ? - [हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है...](https://hindigazals.com/hamne-suna-tha-farishte/): हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है खैर छोड़ो ! - [खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है](https://hindigazals.com/khud-hi-jawab-deta/): खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है जमाना तेरा मेरे मौला कमाल करता है, भूले से भी पूछ लेता है हाल ए दिल हमारा हमको लगता है कि हमारा ख़्याल करता है, मरने भी नहीं देता बसर करने भी नहीं देता ये जमाना भी जीना कैसे मुहाल करता है, जाने किस की दुआ से चल रहा है ये जहाँ ज़माना ज़ुल्म ओ सितम बेमिसाल करता है, हक़ बयानी की गोया खाई है कसम बशर हर सू हर बार हर बात गोलमाल करता है..!! - [अमीरों को मिलती है हर जगह इज्ज़त](https://hindigazals.com/amiro-ko-milti-hai-har-jagah/) - [इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते](https://hindigazals.com/itna-ehsan-to-ham/): इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथो से ज़िगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द ए जुदाई से ही मर जाना था चंद रोज़ और न क़ातिल को इशारा करते, ले के जाते न अगर साथ वो यादे अपनी याद करते उन्हें और वक़्त गुज़ारा करते, ज़िन्दगी मिलती जो सौ बार हमें दुनियाँ में हम तो हर बार इसे आप पे वारा करते, जोश धुंधलाता न हरगिज़ ये मेरा शीशा ए दिल गर्द उसकी जो वो अगर रोज़ उतारा करते..!! - [खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती](https://hindigazals.com/khoon-me-dubi-siyasat/): खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती हमसे अब देश की हालत नहीं देखी जाती, उनके चेहरों से उठाना ही पड़ेगा पर्दा जिन शरीफ़ो से शराफ़त नहीं देखी जाती, ऐसा लगता है पलट आया है दौर ए यूसुफ़ भाई से भाई की सूरत नहीं देखी जाती, हमको तलवार उठाना ही पड़ेगा शायद बेगुनाहों की शहादत नहीं देखी जाती, पी लिया जिसने भी दरिया ए वफ़ा का पानी उस क़बीले में अदावत नहीं देखी जाती, हम तो बेताब फ़िदा होते है किरदारों पर दिल के बाज़ारों में दौलत नहीं देखी जाती..!! - [आ जाओ मैं लोरी गा के सुना देता हूँ...](https://hindigazals.com/aa-jaao-mai-lori-gaa-ke/): आ जाओ मैं लोरी गा के सुना देता हूँ चाँद अपना है उसे छत पे बुला लेता हूँ, तुम भटके हुए मुसाफ़िर हो तो क्या हुआ बैठो तुम्हे थोड़ा पानी ही पिला देता हूँ, कुछ ख़ास नहीं मेरे पास जो तुम्हे दे सकूँ चलो तुम्हे तुम्हारा रास्ता ही बता देता हूँ, सताता है जब भी ये दर्द ए जानाँ मुझको थोड़ा सा लिखता हूँ और गुनगुना लेता हूँ, हर तरफ जल रहे है ये जो चिराग़ नफरतों के कुछ तुम बुझाओ और कुछ मैं बुझा देता हूँ..!! - [दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे](https://hindigazals.com/darinde-khoon-bahne-ka/): दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे भरे पेट वाले अब भूखो पे वार करेंगे, वतन में क़त्ल ए आम की तैयारी है कुछ लोग नफ़रत का कारोबार करेंगे, जो हमेशा से वतन ही जलाते आए है वही अब फिर शहर को रेगज़ार करेंगे, पहले वतन की ज़मीं को ज़ख्मी करेंगे और फिर आसमां को तार तार करेंगे, मगर हम तो इनसे न कभी बात करेंगे और न कभी अब इनका ऐतबार करेंगे..!! - [हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे](https://hindigazals.com/har-ek-rooh-me-ek-gam/): हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िन्दगी तो कोई बद्दुआ लगे है मुझे, पसंद ए ख़ातिर ए अहल ए वफ़ा है मुद्दत से ये दिल का दाग़ जो ख़ुद भी भला लगे है मुझे, जो आँसू में कभी रात भीग जाती है बहुत क़रीब वो आवाज़ ए पा लगे है मुझे, मैं सो भी जाऊँ तो मेरी बंद आँखों में तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे, मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे, मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह ये मेरा गाँव तो पहचानता लगे है मुझे, न जाने वक़्त की रफ़्तार क्या दिखाती है कभी कभी तो बड़ा ख़ौफ़ सा लगे है मुझे, बिखर गया है कुछ इस तरह आदमी का वजूद हर एक फ़र्द कोई सानेहा लगे है मुझे, अब एक आध क़दम का हिसाब क्या रखिए ? - [हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता](https://hindigazals.com/har-waqt-kisi-ko/): हर वक़्त किसी को मुकम्मल नज़ारा नहीं मिलता उम्मीद जब रखो तो कहीं किनारा नहीं मिलता, वफाओं के किस्से तो बस किताबों में रह गए साफ नीयत के आदमी को सहारा नहीं मिलता, गम न कर कि रह गए तेरे अरमां कुछ अधूरे ख्वाहिशें छूट भी जाती है हक़ सारा नहीं मिलता, जो शय है मयस्सर तुझे उसे सीने से लगा ले यूँ हाथ आसमां में उठाने से सितारा नहीं मिलता, लोग करीब आएँगे भी तो मतलब की ही खातिर हर किसी को ज़िंदगी मे शख्स प्यारा नहीं मिलता, हुनरमंद बनने की खातिर देनी पड़ती है कुर्बानियाँ यूँ ही तो ज़माने में तज़ुर्बे का पिटारा नहीं मिलता..!! - [हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है](https://hindigazals.com/har-shakhs-ka-jina/): हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है मुश्किल से मिले वो जो परेशान नहीं है, हर शख्स से रखो न तुम उम्मीद ए वफ़ा हर शख्स यहाँ पेशे से इन्सान नहीं है, वो शहर बसाया जो कभी पुरखो ने मेरे अब उस शहर में मेरी कोई पहचान नहीं है, होने को तो हो सकता है हो जाए मुहब्बत ऐसा भी मगर होने का इम्कान नहीं है, उस शख्स से अच्छे की तवक्को नहीं साहब जो अपनी ही गलती पे पशेमान नहीं है, माँ बाप की इज्ज़त न लगे दाँव पे जिससे उस मुहब्बत से मुझे कोई भी नुकसान नहीं है, इस ज़माने में ज़रा रुक के संभल कर चलना आगे का सफ़र इतना भी आसान नहीं है..!! - [हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे](https://hindigazals.com/har-ek-shakhs-pareshan/): हर एक शख़्स परेशान ओ दर बदर सा लगे ये शहर मुझको तो यारो कोई भँवर सा लगे, अब उसके तर्ज़ ए तजाहुल को क्या कहे कोई वो बेख़बर तो नहीं फिर भी बेख़बर सा लगे, हर एक ग़म को ख़ुशी की तरह बरतना है ये दौर वो है कि जीना भी एक हुनर सा लगे, नशात ए सोहबत ए रिंदाँ बहुत ग़नीमत है कि लम्हा लम्हा पुर आशोब ओ पुरख़तर सा लगे, किसे ख़बर है कि दुनिया का हश्र क्या होगा ? - [रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर...](https://hindigazals.com/rozmarra-wahi-sab-khabar/): रोज़मर्रा वही सब ख़बर देख कर अब तो पत्थर हुआ ये ज़िगर देखिए, सड़के चलने लगी आदमी रुक गया हो गया यूँ अपाहिज़ सफ़र देखिए, सारा आकाश अब इनके सीने में है काट कर इन परिंदों के पर देखिए, मैं हकीक़त न कह दूँ कही आप से रात दिन मुझको खाता ये डर देखिए, धूप आती है न इनमे अब ठंडी हवा खिड़कियाँ हो गई यूँ बेअसर देखिए..!! - [ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा...](https://hindigazals.com/zindagi-ka-bojh-uthana/): ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा गर ज़िन्दा हो तो दिखाना पड़ेगा, लगने लगे जो मसला ये ज़िन्दगी तो ख़ुद से ही सुलझाना पड़ेगा, ज़िन्दगी है ज़िन्दगी में कभी कभी तुम्हे रोते हुए भी मुस्कुराना पड़ेगा, कर ले कमाई वक़्त रहते हुए नहीं तो उम्र भर पछताना पड़ेगा, कैसे ज़िन्दा रहना है जहाँ में तुम्हे हुनर ये ख़ुद को सिखाना पड़ेगा, मज़बूरी में या ख़ुशी से ही सही हर फ़र्ज़ तुम्हे अपना निभाना पड़ेगा, उजड़ा उजड़ा हुआ जँचता ही नहीं दिल की बगिया को भी सजाना पड़ेगा..!! - [अश्क जब हम बहाने लगते हैं](https://hindigazals.com/ashk-jab-ham-bahane/) - [तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में](https://hindigazals.com/tamam-umr-kati-uski/): तमाम उम्र कटी उसकी मेज़बानी में बिछड़ गया था कभी जो भरी जवानी में, हमारे होने तलक सब को मुश्किलात रहें हमारे बाद सभी ख़ुश रहे कहानी में, ख्याल, ख़्वाब, तेरी याद हम उठा लाये मिली न चीज कोई और जब निशानी में, फुसूं था ऐसा कोई उसकी मुस्कराहट में दो चार दिन तो रहे हम भी ख़ुश गुमानी में, सवाल याद नहीं पर जवाब अज़बर है तुम्हारे जैसे हज़ारों है राजधानी में, शिकस्त खुर्दा हूँ लेकिन ख़बर ये रखता हूँ गँवाएँ बैठा है क्या क्या तू कामरानी में, ज़माना यूँ ही नहीं हम ख्याल है मेरा कि उसके साथ गुज़ारी है बेज़ुबानी में, गुज़र गई है तो अब बैठ कर ये सोचते है यही गुज़ारने आये थे दार ए फ़ानी में, अज़ल की प्यास का अब्रक हुआ मदावा हूँ हमारी आँख को रखा गया है पानी में..!! - [किसी कमज़ोर की जब भी दुआएँ गूँज उठती है](https://hindigazals.com/kisi-kamzor-ki-jab/): किसी कमज़ोर की जब भी दुआएँ गूँज उठती है अबाबीलों के लश्कर से फज़ाएँ गूँज उठती है, ख़ामोशी में भी रह कर भी गूँजते है गूँजने वाले जुबां ख़ामोश रहती है अदाएँ गूँज उठती है, अगरचे दास्ताँ के मरकज़ी किरदार बदले है सदाएँ हक़ से अब भी कर्बलाएँ गूँज उठती है, मैं अपनी ज़ात के गुम्बद में जब आवाज़ देता हूँ तो मेरी ज़ात में तेरी ज़फाएँ गूँज उठती है, चिरागों को जलाने का इरादा जब भी करते है कहीं नज़दीक ही सरकश हवाएँ गूँज उठती है, अगर हम हद में रहने की कोई कोशिश करें तबीयत में हज़ारों इन्तेहाएँ गूँज उठती है..!! - [तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है](https://hindigazals.com/tu-is-qadar-mujhe/): तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचू अजीब लगता है, जिसे ना हुस्न से मतलब ना इश्क़ से सरोकार वो शख्स मुझको बहुत बदनसीब लगता है, हदूद ए ज़ात से बाहर निकल के देख ज़रा ना कोई गैर, ना कोई रक़ीब लगता है, ये दोस्ती, ये मरासिम, ये चाहते ये खुलूस कभी कभी ये सब कुछ अजीब लगता है, उफक़ पे दूर चमकता हुआ कोई तारा मुझे चिराग ए दयार ए हबीब लगता है, ना जाने कब कोई तूफान आयेगा यारो बुलंद मौज से साहिल क़रीब लगता है..!! - [मुश्किल चाहे लाख हो लेकिन एक दिन तो हल होती है](https://hindigazals.com/mushkil-chahe-laakh-ho/): मुश्किल चाहे लाख हो लेकिन एक दिन तो हल होती है ज़िन्दा लोगों की दुनिया में अक्सर हलचल होती है, जीना है तो मरने का ये ख़ौफ़ मिटाना लाज़िम है डरे हुए लोगों की समझो मौत तो पल पल होती है, कफ़न बाँध कर निकल पड़े तो मुश्किल या मजबूरी क्या कहीं पे काँटे कहीं पे पत्थर कहीं पे दलदल होती है, जिस बस्ती में नफ़रत को परवान चढ़ाया जायेगा सँभल के रहना उस बस्ती की हवा भी क़ातिल होती है, इतना लूटा, इतना छीना, इतने घर बरबाद किये लेकिन मन की ख़ुशी कभी क्या इनसे हासिल होती है ? - [हमें कुछ पता नहीं है हम क्यूँ बहक रहे हैं ?](https://hindigazals.com/hame-kuch-pata-nahi/): हमें कुछ पता नहीं है हम क्यूँ बहक रहे हैं ? - [लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ?](https://hindigazals.com/lena-dena-hi-kya/): लेना देना ही क्या फिर ऐसे यारो से ? - [हिज़ाब तेरे चेहरे पर मैं सजा दूँ...](https://hindigazals.com/hizab-tere-chahre-par/): आ तुझे मैं हर एक दर्द की दवा दूँ..!! - [अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें...](https://hindigazals.com/ab-zindagi-pe-ho-gai-bhaari/): अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें तन्हाइयो ने छीन ली सारी शरारतें, होंठो के गुलिस्तान पे लाली न जब रही आँखों ने खेल खेल में हारी शरारतें, कुछ तो गले का तौक है यादों की राह में कुछ आँसूओ में है अभी ज़ारी शरारतें, सीने से आरज़ूओ के मौसम गुज़र गए बस रह गई है दर्द की मारी शरारतें, उड़ने न पाए देखना आह ओ फ़ुगा की धुल हों जो कभी गुमान पे तारी शरारतें, दुश्मनों में इश्क का इम्कान अब कहाँ हमने गम ए जहाँ पे है वारी शरारतें..!! - [जब दुश्मनों के चार सू लश्कर निकल पड़े](https://hindigazals.com/jab-dushmano-ke-chaar/): जब दुश्मनों के चार सू लश्कर निकल पड़े हम भी कफ़न बाँध के सर पर निकल पड़े, जिन दोस्तों पे नाज़ था हमको बहुत मियाँ उनकी ही आस्तीन में खंज़र निकल पड़े, बाहर के दुश्मनोसे तो महफूज़ थे मगर दुश्मन हमारे घर के ही अंदर निकल पड़े, सहराओ में ढूँढते है दुआओं के वास्ते शायद कोई फ़कीर कलंदर निकल पड़े, उस कौम का वज़ूद नहीं कुछ जहान में गद्दार जिसमे कौम का रहबर निकल पड़े, हम तुम्हारी याद में रो दे तो आज भी आँखों से आँसूओ का समन्दर निकल पड़े..!! - [मुमकिन ही न थी ख़ुद से शनासाई यहाँ तक...](https://hindigazals.com/mumkin-hi-na-thi-khud-se/): मुमकिन ही न थी ख़ुद से शनासाई यहाँ तक ले आया मुझे मेरा तमाशाई यहाँ तक, रस्ता हो अगर याद तो घर लौट भी जाऊँ लाई थी किसी और की बीनाई यहाँ तक, शायद तह ए दरिया में छुपा था कहीं सहरा मेरी ही नज़र देख नहीं पाई यहाँ तक, महफ़िल में भी तन्हाई ने पीछा नहीं छोड़ा घर में न मिला मैं तो चली आई यहाँ तक, सहरा है तो सहरा की तरह पेश भी आए आया है इसी शौक़ में सौदाई यहाँ तक, एक खेल था और खेल में सोचा भी नहीं था जुड़ जाएगा मुझ से वो तमाशाई यहाँ तक, ये उम्र है जो उस की ख़तावार है 'शारिक़' रहती ही नहीं बातों में सच्चाई यहाँ तक..!! - [वो एक लम्हा मुहब्बत भरा तेरे साथ...](https://hindigazals.com/wo-ek-lamha-muhabbat-bhara/): वो एक लम्हा मुहब्बत भरा तेरे साथ ज़िन्दगी भर की ख़ुशियों पर भारी है, हम ही नहीं दिल भी आजतक तेरा है इस पर आज भी तेरी ही दावेदारी है, इश्क़ ज़िन्दगी जीने का सलीक़ा है बेवकूफ़ है जो कहते है इश्क़ बीमारी है, क़िस्मत वालो को इश्क़ आज़माता है हमें इश्क़ आज़माएँ ये आरज़ू हमारी है, इश्क़ ही है जो खुले आसमान सा है बाक़ी तो जहाँ में बंधन है, चारदीवारी है, ये कशमकश, ये तड़प यही तो इश्क है वरना मज़ा ही क्या जिसमे ना बेक़रारी है..!! - [तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे](https://hindigazals.com/teri-surat-nigaho-me/): तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ? कोई इतना तो आ कर बता दे मुझे जब तेरी याद आए तो मैं क्या करूँ ? - [अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए...](https://hindigazals.com/ab-shauq-se-ki-jaan-se/): अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए बोल ऐ हवा ए शहर किधर जाना चाहिए ? - [नाज़ उसके उठाता हूँ रुलाता भी मुझे है](https://hindigazals.com/naaz-uske-uthata-hoo/): नाज़ उसके उठाता हूँ रुलाता भी मुझे है ज़ुल्फो में सुलाता भी, जगाता भी मुझे है, आता है बहुत उसपे मुझे गुस्सा भी लेकिन प्यार उसपे कभी टूट के आता भी मुझे है, दर पे है मेरी जान के जो पीछे पड़ा है वो दुश्मन ए जाँ दोस्तों भाता भी मुझे है, अंजान बना रहता है बेज़ार देख कर वहशत में वो तन्हाई में पाता भी मुझे है, गर आए ज़फ़ा करने पे, तौबा मेरी तौबा ! - [वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं...](https://hindigazals.com/wafa-e-wada-nahi-wada-e-digar/): वफ़ा ए वादा नहीं वादा ए दिगर भी नहीं वो मुझसे रूठे तो थे लेकिन इस क़दर भी नहीं, बरस रही है हरीम ए हवस में दौलत ए हुस्न गदा ए इश्क़ के कासे में एक नज़र भी नहीं, न जाने किस लिए उम्मीदवार बैठा हूँ एक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं, निगाह ए शौक़ सर ए बज़्म बेहिजाब न हो वो बेख़बर ही सही इतने बेख़बर भी नहीं, ये अहद ए तर्क ए मोहब्बत है किस लिए आख़िर ? - [लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी...](https://hindigazals.com/log-sah-lete-the/) - [कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ](https://hindigazals.com/kuch-qadam-aur-mujhe/): कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ साथ लाया हूँ उसी को जिसे खोना है यहाँ, भीड़ छट जाएगी पल में ये ख़बर उड़ते ही अब कोई और तमाशा नहीं होना है यहाँ, ये भँवर कौन सा मोती मुझे दे सकता है बात ये है कि मुझे ख़ुद को डुबोना है यहाँ, क्या मिला दश्त में आ कर तेरे दीवाने को घर के जैसा ही अगर जागना सोना है यहाँ, कुछ भी हो जाए न मानूँगा मगर जिस्म की बात आज मुजरिम तो किसी और को होना है यहाँ, यूँ भी दरकार है मुझ को किसी बीनाई का लम्स अब किसी और का होना मेरा होना है यहाँ, अश्क पलकों पे सजा लूँ मैं अभी से 'शारिक़' शब है बाक़ी तो तेरा ज़िक्र भी होना है यहाँ..!! - [कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है](https://hindigazals.com/kuch-roz-se-roz/): कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है बीती हुई यादो की शमाँ मेरे सिरहाने जल जाती है, चेहरा तो छुपा लेता है मेरी हर के तकलीफ़ को दर्द और ख़ामोशी मगर आँखों में पिघल जाती है, मैं बीते कल को तलाश करता हूँ मौजूदा आज में और इन्ही कोशिशो में रोज़ तारीख़ बदल जाती है, एक आरज़ू है मेरे दिल में कि ऐसा मुक़ाम आए ज़िन्दगी में अपनी भी कोई एक ऐसी शाम आए, जब अपना हर कोई अपने क़रीब नज़र आए हमने देखे है जो भी ख़्वाब वो हकीक़त बन जाए, बस यही ख्यालात लिए रात तन्हा चली आती है कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है..!! - [शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले...](https://hindigazals.com/shaam-aai-teri-yaado-ke-sitare/) - [ताज़ा मोहब्बतों का नशा जिस्म ओ जाँ में है](https://hindigazals.com/taza-mohabbato-ka-nasha/): ताज़ा मोहब्बतों का नशा जिस्म ओ जाँ में है फिर मौसम ए बहार मिरे गुल्सिताँ में है, इक ख़्वाब है कि बार ए दिगर देखते हैं हम इक आशना सी रौशनी सारे मकाँ में है, ताबिश में अपनी महर ओ मह ओ नज्म से सिवा जुगनू सी ये ज़मीं जो कफ़ ए आसमाँ में है, इक शाख़ ए यासमीन थी कल तक ख़िज़ाँ असर और आज सारा बाग़ उसी की अमाँ में है, ख़ुशबू को तर्क कर के न लाए चमन में रंग इतनी तो सूझ बूझ मिरे बाग़बाँ में है, लश्कर की आँख माल ए ग़नीमत पे है लगी सालार ए फ़ौज और किसी इम्तिहाँ में है, हर जाँ निसार याद दहानी में मुंहमिक नेकी का हर हिसाब दिल ए दोस्ताँ में है, हैरत से देखता है समुंदर मिरी तरफ़ कश्ती में कोई बात है या बादबाँ में है..!! - [तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा...](https://hindigazals.com/tere-sath-safar-main/): तेरे साथ सफ़र मैं कुछ इस तरह करता रहा दूर हो कर भी महसूस तुम्हे हरदम करता रहा, मैं किस्से रूहानी मुहब्बत के लिखता ही रहा मैं हर किस्से में तेरा ही ज़िक्र करता रहा, प्यार का दरिया मेरे अंदर निरंतर बहता रहा तेरी मुहब्बत में मैं हर पल सँवरता ही रहा, तेरा गुस्सा, तेरा दर्द और तेरी नज़र अंदाज़ी सब सहकर भी मैं तुझ पर ऐतबार करता रहा, तू हर रोज़ मेरे सपनो में आ मुझे सताता रहा मैं मुहब्बत का हर गम सहकर मुस्कुराता रहा, तुम्हे सोचना फ़िर तुम्हे लिखना आदत बन गई रूहानी किस्सों में मैं तेरे साथ सफ़र करता रहा..!! - [आंधियाँ भी चले और दीया भी जले...](https://hindigazals.com/aandhiyan-bhi-chale-aur-diya-bhi/): आंधियाँ भी चले और दीया भी जले होगा कैसे भला आसमां के तले ? - [ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है...](https://hindigazals.com/zami-sukhi-hai-aur-pani-ke-bhi/): ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है इन्सान ही आज इन्सान के निवाले है जिनके दिलो में खून ख़राबे बसे हुए है निज़ाम ए दुनियाँ अब उन्ही के हवाले है जो कर के बेआबरू घरो को फूँक देते है वही लोग आज बस्तियों के रखवाले है उम्र भर इक़रार उल्फ़त कर न सके उनका दावा है कि वो बड़े दिलवाले है, हुनर ये नये ज़माने के हमें नहीं आते हम तो सीधे सादे लोग वही पुराने है..!! - [बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है...](https://hindigazals.com/badnam-mere-pyar-ka-afsana/): बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते है कि दीवाना हुआ है, रिश्ता था तभी तो किसी बेदर्द ने तोड़ा अपना था तभी तो कोई बेगाना हुआ है, बादल की तरह आ के बरस जाए एक दिन दिल उसके होते हुए भी वीराना हुआ है, बजते है ख्यालो में तेरी याद के घूँघरू कुछ दिन से मेरा घर भी परी खाना हुआ है, मौसम ने बनाया है निगाहो को शराबी जिस फूल को देखू वही पैमाना हुआ है, तन्हाई ज़िन्दगी की सज़ा हो गई है दोस्तों ! - [अज़ब मअमूल है आवारगी का...](https://hindigazals.com/azab-maamul-hai-aawargi-ka/): अज़ब मअमूल है आवारगी का गिरेबाँ झाँकती है हर गली का, न जाने किस तरह कैसे ख़ुदा ने भरोसा कर लिया था आदमी का ? - [हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं...](https://hindigazals.com/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a2/): हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे इख़्लास के अफ़्सूँ तिरे वादों के तिलिस्म टूट जाते हैं तो कुछ और मज़ा देते हैं, कू ए महबूब से चुपचाप गुज़रने वाले अरसा ए ज़ीस्त में एक हश्र उठा देते हैं, हाँ यही ख़ाक बसर सोख़्ता सामाँ ऐ दोस्त तेरे क़दमों में सितारों को झुका देते हैं, सीना चाकान ए मोहब्बत को ख़बर है कि नहीं शहर ए ख़ूबाँ के दर ओ बाम सदा देते हैं, हम ने उस के लब ओ रुख़्सार को छू कर देखा हौसले आग को गुलज़ार बना देते हैं..!! - [हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए..](https://hindigazals.com/hairato-ke-silsile-soz-e-hihan/): हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए हम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक आ गए, नामुरादी अपनी क़िस्मत गुमराही अपना नसीब कारवाँ की ख़ैर हो हम कारवाँ तक आ गए, उनकी पलकों पर सितारे अपने होंटों पे हँसी क़िस्सा ए ग़म कहते कहते हम कहाँ तक आ गए, ज़ुल्फ़ में ख़ुशबू न थी या रंग आरिज़ में न था आप किस की आरज़ू में गुल्सिताँ तक आ गए, रफ़्ता रफ़्ता रंग लाया जज़्बा ए ख़ामोश ए इश्क़ वो तग़ाफ़ुल करते करते इम्तिहाँ तक आ गए, ख़ुद तुम्हें चाक ए गरेबाँ का शुऊ'र आ जाएगा तुम वहाँ तक आ तो जाओ हम जहाँ तक आ गए, आज 'क़ाबिल' मयकदे में इंक़लाब आने को है अहल ए दिल अंदेशा ए सूद ओ ज़ियाँ तक आ गए ..!! - [मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत...](https://hindigazals.com/maine-kaha-ki-dil-me/): मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत उस ने कहा कि आप तो नादान हैं बहुत, मैंने कहा कि मुझ को है जन्नत की आरज़ू उस ने कहा कि वाक़िफ़ ए ईमान हैं बहुत, मैंने कहा कि महका हुआ एक गुलाब हूँ उस ने कहा ज़मीं पे गुलिस्तान हैं बहुत, मैंने कहा कि मेरी पनाहों में आइए उस ने कहा कि मेरे निगहबान हैं बहुत, मैंने कहा कि एक मुरस्सा ग़ज़ल हूँ मैं उस ने कहा कि ऐसे तो दीवान हैं बहुत, मैंने कहा कि तर्क ए वफ़ा से हूँ शर्मसार उस ने कहा कि हम भी पशेमान हैं बहुत, मैं ने कहा कि रखेगा 'मोहसिन' अदब की लाज उस ने कहा कि वैसे तो इम्कान हैं बहुत..!! - [मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ](https://hindigazals.com/main-takiye-par-sitare/): मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ जन्म दिन है अकेला रो रहा हूँ, किसी ने झाँक कर देखा न दिल में कि मैं अंदर से कैसा हो रहा हूँ ? - [मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी](https://hindigazals.com/muhtaz-hamsafar-ki-masafat/): मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी सब साथ थे किसी से रिफ़ाक़त न थी मेरी, हक़ किस से माँगता कि मकीनों के साथ साथ दीवार ओ बाम ओ दर को ज़रूरत न थी मेरी, सच बोल के भी देख लिया उनके सामने लेकिन उन्हें पसंद सदाक़त न थी मेरी, मैं जिनपे मर मिटा था वो काग़ज़ के फूल थे रस्मी मुकालमे थे मोहब्बत न थी मेरी, जो दूसरों के दुख थे वही मेरे दुख भी थे कुछ ऐसी मुख़्तलिफ़ भी हिकायत न थी मेरी, बस कुछ उसूल थे जो ब हर हाल थे अज़ीज़ जानम किसी से वर्ना अदावत न थी मेरी..!! - [मुझे ऐसा लुत्फ़ अता किया कि जो हिज़्र था न विसाल था..](https://hindigazals.com/mujhe-aisa-lutf-ataa-kiya/): मुझे ऐसा लुत्फ़ अता किया कि जो हिज्र था न विसाल था मेरे मौसमों के मिज़ाज दाँ तुझे मेरा कितना ख़याल था, किसी और चेहरे को देख कर तेरी शक्ल ज़ेहन में आ गई तेरा नाम ले के मिला उसे मेरे हाफ़िज़े का ये हाल था, कभी मौसमों के सराब में कभी बाम ओ दर के अज़ाब में वहाँ उम्र हम ने गुज़ार दी जहाँ साँस लेना मुहाल था, कभी तू ने ग़ौर नहीं किया कि ये लोग कैसे उजड़ गए कोई 'मीर' जैसा गिरफ़्ता दिल तेरे सामने की मिसाल था, तेरे बा'द कोई नहीं मिला जो ये हाल देख के पूछता मुझे किस की आग जला गई मेरे दिल को किसका मलाल था, कहीं ख़ून ए दिल से लिखा तो था तेरे साल ए हिज्र का सानेहा वो अधूरी डायरी खो गई वो न जाने कौन सा साल था..!! - [मेरे ख़्वाबों में यादों मे हो सिर्फ तुम...](https://hindigazals.com/mere-khwabo-me-yaado-me/) - [ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे](https://hindigazals.com/thokare-khaa-ke-sambhlna/): ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे चल मेरे साथ कि चलना नहीं आता है मुझे, अपनी आँखों से बहा दे कोई मेरे आँसू अपनी आँखों से निकलना नहीं आता है मुझे, अब तेरी गर्मी ए आग़ोश ही तदबीर करे मोम हो कर भी पिघलना नहीं आता है मुझे, शाम कर देता है अक्सर कोई ज़ुल्फ़ों वाला वर्ना वो दिन हूँ कि ढलना नहीं आता है मुझे, कितने दिल तोड़ चुका हूँ इसी बेहुनरी से जाल में फँस के निकलना नहीं आता है मुझे, बीच दरिया के मैं दरिया तो बदल सकता हूँ अपनी कश्ती को बदलना नहीं आता है मुझे, अपने मा'नी को बदलना तो मुझे आता है इनके लफ़्ज़ों को बदलना नहीं आता है मुझे, 'फ़रहत-एहसास' तरक़्क़ी नहीं करनी मुझको इतनी रफ़्तार से चलना नहीं आता है मुझे..!! - [तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता...](https://hindigazals.com/tu-mujhko-jo-is-shahar-me/): तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता मैं बे सर ओ सामाँ कभी रुस्वा नहीं होता, उस की तो ये आदत है किसी का नहीं होता फिर इस में अजब क्या कि हमारा नहीं होता, कुछ पेड़ भी बे-फ़ैज़ हैं इस राहगुज़र के कुछ धूप भी ऐसी है कि साया नहीं होता, ख़्वाबों में जो एक शहर बना देता है मुझको जब आँख खुली हो तो वो चेहरा नहीं होता, किस की है ये तस्वीर जो बनती नहीं मुझसे मैं किस का तक़ाज़ा हूँ कि पूरा नहीं होता, मैं शहर में किस शख़्स को जीने की दुआ दूँ जीना भी तो सब के लिए अच्छा नहीं होता..!! - [तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम...](https://hindigazals.com/tum-kuch-bhi-karo-hosh-me/): तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम हैं इश्क़ घराने के ज़माने के नहीं हम, हम और मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं करते वो रूठ गया है तो मनाने के नहीं हम, दरिया है मोहब्बत तो मिले जिस्म का मैदान एक जिस्म प्याले में समाने के नहीं हम, हम पर भी कभी अपनी हलाकत की नज़र डाल सच जान कि जान अपनी बचाने के नहीं हम, कितना ही करे शोर यहाँ आ के ज़माना तुझ पर से मगर ध्यान हटाने के नहीं हम, ये जिस्म फ़क़त एक तरफ़ का है मुसाफ़िर जा कर फिर उसी जिस्म में आने के नहीं हम, पास आओ कि हम खा तो नहीं जाएँगे तुमको बस दाँत दिखाने के हैं खाने के नहीं हम, 'एहसास' मियाँ पीर हैं मुर्शिद हैं हमारे अब उठ के यहाँ से कहीं जाने के नहीं हम..!! - [तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते...](https://hindigazals.com/tumhe-usse-mohabbat-hai-to/): तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते किसी दिन उसके दर पे रक़्स ए वहशत क्यूँ नहीं करते ? - [राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी...](https://hindigazals.com/raah-e-ishq-ke-har-mod-pe/): राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी बहारे ना सही मगर सदा ही वीरानियाँ होंगी, कहीं गम थाम लेगा और कही लाचारियाँ होंगी तमन्नाओं की बस्ती में बहुत दुश्वारियाँ होंगी, भड़क उठी ये कैसी आग मेरे दिल की बस्ती में मेरे सीने में ही शायद कहीं चिंगारियाँ होंगी, सुनो ! - [पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो...](https://hindigazals.com/paas-aao-ek-iltaza-sun-lo/): पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को ख़ुदा से माँगा है जब भी माँगी कोई दुआ सुन लो, इब्तदा इश्क़ की हुई तुमसे तुम हो चाहत की इन्तेहा सुन लो, बिन तेरे जी नहीं सकते हम लौट आओ मेरी सदा सुन लो, देख लो ज़िन्दगी अधूरी है न रहो और अब जुदा सुन लो, तुम सिर्फ तुम हो ज़िन्दगी मेरी सच है ये ज़रीन बा ख़ुदा सुन लो..!! - [मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती...](https://hindigazals.com/muhabbat-jo-haqiqi-ho-to/): मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती मुहब्बत जो मिजाज़ी हो तो उलझन औद कर आती, सुना है लैला मजनू का तो क़िस्सा जो मिजाज़ी था वो क़िस्सा गर हकीकी होता तो शोहरत न हो पाती, मुहब्बत गर मिजाज़ी हो तो दीवानगी ही दीवानगी मुहब्बत गर हकीकी हो तो दीवानगी नहीं लाती, हमारी ज़िन्दगी तो बस मुहब्बत ही मुहब्बत है हकीकी या मिजाज़ी हो ये अपना रंग दिखलाती, किसी की आरज़ू में अपनी चाहत भी मिटा देना यही नवाब की हसरत यही उल्फ़त भी सिखलाती..!! - [मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे...](https://hindigazals.com/mera-dil-burai-se-tu-saaf/): ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!! - [राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया...](https://hindigazals.com/raahe-wahi-khadi-thi-musafir/): राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की वो छाँव में खेला बड़ा हुआ क्या रोग लग गया कि उसी से लटक गया, दिल से उतर गया वो जो चाहे जिधर गया कानपुर गया हो कि फिर कटक गया, किसको जला रहे हो मेरा हाथ थाम कर लगता है कोई हाथ तेरा भी झटक गया, जिसको नवाब लफ्ज़ मेरा हर अजीज़ था क्यूँ उसको आज लफ्ज़ ए मुहब्बत खटक गया..!! - [ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें...](https://hindigazals.com/ye-sach-hai-ki-ham-log/): ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी में रहे, उसकी याद कितनी देर तक साथ रही क्या कहे गम था तो घर हो कर भी ला मकानी में रहे, हम अपने जीवन में कभी भी न हुए तस्लीम हम सदा किसी मुक़म्मल मिसाल के सानी में रहे, अपनी ज़ुबान हमें अज़ीज़ और न अपनी ज़मीं गुलामी से हम निकले तो ज़िन्दानी में रहे, वो मेरा सोचता तो है मगर किसी और के बाद यानि कि हम एक मौहूम से यानि में रहे, थक हार के शल हो भी गया बूढ़ा ज़िस्म अरमां कि जवाँ थे और जवानी में रहे, जिनको सहरा दिया वो तिश्ना लबी को रोते रहे जिनको दरिया मिला वो शाकी है कि पानी में रहे, गम ए इश्क़ और गम ए जहाँ का हसीन समझौता दोनों मेरे दिल में अपनी रवानी में रहे, एक बार उस बेवफ़ा से दिल लगा कर हम तो फिर सारी उम्र ही पशेमानी में रहे..!! - [कोई अज़्म ओ इरादा नहीं चाहिए](https://hindigazals.com/koi-azm-o-irada/) - [तू कभी आ देख कभी साथ तों चल](https://hindigazals.com/tu-kabhi-aa-dekh/): कभी रिमझिम कभी मस्त ठंडी हवाएं..!! - [कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए...](https://hindigazals.com/kabhi-dadi-kabhi-naani-se/): कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए, कच्ची उम्रो में हमें काम पर लगा दिया गया हम वो बच्चे जो जवानी से अलग कर दिए गए, जंग लड़ने के लिए सीन में लाये गए हम अमन होते ही कहानी से अलग कर दिए गए, हम वो अल्फाज़ जिन्हें ठीक से समझा न गया जब भी लिखे गए मानी से अलग कर दिए गए, पहले दुनियाँ ने सिखाया हमें तैराकी का फन तैरना आया तो पानी से अलग कर दिए गए, चिड़िया घर ने किया जंगल को नगर में आबाद जानवर पानी के पानी से अलग कर दिए गए, टूटे चश्मों से ख़रीदे गए टूटा चश्मी आँख वाले निगेहबानी से अलग कर दिए गए..!! - [कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से...](https://hindigazals.com/kuch-khud-bhi-the-afsurda/): कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से कुछ लोग भी हमसे रूठ गए, कुछ ख़ुद भी ज़ख्म के आदी थे कुछ शीशे हाथ से टूट गए, कुछ ख़ुद भी थे हस्सास बहुत कुछ अपने मुक़द्दर रूठ गए, कुछ ख़ुद भी इतने मोहतात न थे कुछ लोग भी हमको लूट गए, कुछ तल्ख़ हकीक़तें थी इतनी कि ख़्वाब ही सारे टूट गए..!! - [काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए...](https://hindigazals.com/kaam-is-dil-ki-tabahi-se/): काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए सोचता हूँ कि ख़राबे में किया क्या जाए ? ऐ किसी याद की खिड़की से गुज़रते मौसम क्या दिया जाए तुझे और लिया क्या जाए ? - [इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने...](https://hindigazals.com/ishq-sahra-hai-ki-dariya/): इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने तुझसे क्या है मेरा नाता कभी सोचा तुमने ? हाँ मैं तन्हा हूँ ये इक़रार भी करता हूँ मगर किसने किया है तन्हा कभी सोचा तुमने ? - [दोस्तों ! आज दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ...](https://hindigazals.com/dosto-aaj-dil-me-chhupe-kuch/): दोस्तों ! आज मैं दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ दुःख से जुड़े ग़ुरबत के दिनों के लम्हात बयाँ करता हूँ, वो दिन भी क्या दिन थे जब हम भूख से लड़ा करते थे एक बार नहीं हर बार हर रोज़ पल पल मरा करते थे, वो लम्हे जब माँ बड़े प्यार से सर को सहलाया करती थी ख़ुद भूखी रह कर भी माँ हम सबको खिलाया करती थी, बाबा भी जब आते तो दीवारों से लिपट कर रोया करते थे मेहनत से कमाए हुए सिक्को को आँसूओ से धोया करते थे, छोटी छोटी बातों में बड़ी बड़ी खुशियाँ ढूँढ लिया करते थे हर दर्द ओ तकलीफ को हम मिल कर बाँट लिया करते थे, खिलौनों से खेलने की उम्र में हम उम्मीदों से खेला करते थे पर हर दिन नयी उमंग के संग बड़े सुकुन से जिया करते थे, मुफ़्लिसी में भी कहाँ किसी से कम हमारे ठाठ हुआ करते थे माँ के लिए हीरा मोती और बाबा के तो नवाब हुआ करते थे, ये सब सुन कर ना सोच लेना कि बहुत ग़रीब हुआ करते थे उन दिनों भी पानी में कागज़ के सही हमारे नाव चला करते थे..!! - [एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया...](https://hindigazals.com/ek-manzar-yun-nazar-aaya/): एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया हाथ में रोटी थी जिसके वो भिखारी मर गया, हादसा तो हो नहीं सकता कि सीधी बात थी मौत का आया फ़रिश्ता काम अपना कर गया, पर समझ में ये न आया लाश उसकी देख कर कि भूख उसकी मर गई या भूख से वो मर गया..!! - [वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए...](https://hindigazals.com/wo-muhabbat-gayi-wo-fasane/): वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए जो खज़ाने थे अपने खज़ाने गए, चाहतो का वो दिलकश ज़माना गया सारे मौसम थे कितने सुहाने गए, रेत के वो घरौंदे कहीं गुम हुए अपने बचपन के सारे ठिकाने गए, वो गुलेले तो फिर भी बना ले मगर अब वो नज़रे गई अब वो नज़ारे गए, अपने नामो के सारे शज़र कट गए वो परिंदे गए आशियाने गए, ज़िद्द में सूरज को तकने की वो ज़ुर्रते यार आज़ाद अब वो ज़माने गए..!! - [दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना...](https://hindigazals.com/dil-jab-ghabraye-to-khud-ko/): दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना ज़िन्दगी कितनी भी मुश्किल क्यूँ ना हो मुस्कुरा देना, आसानी से सब कुछ हासिल हो तो उसकी कद्र कहाँ ? - [तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है...](https://hindigazals.com/tasvir-ka-rukh-ek-nahi/): तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है खैरात जो देता है वही लूटता भी है, ईमान को अब लेके किधर जाइएगा आप बेक़ार है ये चीज, कोई पूछता भी है ? - [यही कम नहीं है ज़िन्दगी के लिए...](https://hindigazals.com/yahi-kam-nahi-hai-zindagi-ke-liye/): यही कम नहीं है ज़िन्दगी के लिए यहाँ चैन मिल जाए दो घड़ी के लिए, दिल ए ज़ार यहाँ कौन है तेरा ? - [आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो...](https://hindigazals.com/aapse-kisne-kaha/): आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखो, चल पड़ो तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो और अगर बैठो कहीं पर तो मील का पत्थर दिखो, सिर्फ़ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं आदमी हो तुम अगर तो आदमी बनकर दिखो, ज़िंदगी की शक्ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं पत्थरों के शहर में वो आईना बनकर दिखो, तुम्हे महसूस होगी तब हर एक दिल की जलन जब किसी धागे सा जलकर मोम के भीतर दिखो, एक जुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ वक़्त की इस धुँध में तुम रोशनी बनकर दिखो, डर जाए फूल बनने से कोई नाज़ुक कली तुम ना खिलते फूल पर तितली के टूटे पर दिखो, कोई ऐसी शक्ल तो मुझको दिखे इस भीड़ में मैं जिसे देखूँ उसी में तुम मुझे अक्सर दिखो..!! - [जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता...](https://hindigazals.com/jab-talak-lagti-nahi-hai-boliyan/): जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता तब तलक उठती नहीं है डोलिया मेरे पिता, आज भी पगड़ी मिलेगी बेकसी के पाँव में ठोकरों में आज भी है पसलियाँ मेरे पिता, बेघरो का आसरा थे जो कभी बरसात में उन दरख्तों पर गिरी है बिजलियाँ मेरे पिता, आग से कैसे बचाएँ खुबसूरत ज़िन्दगी एक माचिस में कई है तीलियाँ मेरे पिता, जब तलक ज़िन्दा रहेगी जाल बुनने की प्रथा तब तलक फँसती रहेंगी मछलियाँ मेरे पिता, जिसका जी चाहे नचाएँ और एक दिन फूँक दे हम नहीं है काठ की वो पुतलियाँ मेरे पिता, मैंने बचपन में खिलौना तक कभी माँगा नहीं मेरा बेटा माँगता है गोलियाँ मेरे पिता..!! - [ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है...](https://hindigazals.com/ae-sanam-wasl-ki-tadbiro-se/): ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है वही होता है जो मंज़ूर ए ख़ुदा होता है, नहीं बचता नहीं बचता नहीं बचता आशिक़ पूछते क्या हो शब ए हिज्र में क्या होता है, बेअसर नाले नहीं आप का डर है मुझको अभी कह दीजिए फिर देखिए क्या होता है, क्यूँ न तश्बीह उसे ज़ुल्फ़ से दें आशिक़ ए ज़ार वाक़ई तूल ए शब ए हिज्र बला होता है, यूँ तकब्बुर न करो हम भी हैं बंदे उसके सज्दे बुत करते हैं हामी जो ख़ुदा होता है, 'बर्क़' उफ़्तादा वो हूँ सल्तनत ए आलम में ताज ए सर इज्ज़ से नक़्श ए कफ़ ए पा होता है..!! - [क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में...](https://hindigazals.com/qamar-ki-wo-khurshid-tasveer-hai/): क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में सितारों की ज़ंजीर है, कहाँ पा ए जानाँ कहाँ मेरा सर ये तालेअ् ये क़िस्मत ये तक़दीर है, ख़फ़ा आप से आप होते हो क्यूँ ? - [किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता...](https://hindigazals.com/kis-tarah-mile-koi-bahana-nahi/) - [घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर](https://hindigazals.com/ghar-jab-bana-liya/): घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बग़ैर, कहते हैं जब रही न मुझे ताक़त ए सुख़न जानू किसी के दिल की मैं क्यूँकर कहे बग़ैर, काम उससे आ पड़ा है कि जिसका जहान में लेवे न कोई नाम सितमगर कहे बग़ैर, जी में ही कुछ नहीं है हमारे वगरना हम सर जाए या रहे न रहें पर कहे बग़ैर, छोड़ूँगा मैं न उस बुत ए काफ़िर का पूजना छोड़े न ख़ल्क़ गो मुझे काफ़र कहे बग़ैर, मक़्सद है नाज़ ओ ग़म्ज़ा वले गुफ़्तुगू में काम चलता नहीं है दशना ओ ख़ंजर कहे बग़ैर, हर चंद हो मुशाहिदा ए हक़ की गुफ़्तुगू बनती नहीं है बादा ओ साग़र कहे बग़ैर, बहरा हूँ मैं तो चाहिए दूना हो इल्तिफ़ात सुनता नहीं हूँ बात मुकर्रर कहे बग़ैर, 'ग़ालिब' न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़ ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर..!! - [वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता...](https://hindigazals.com/wo-jiska-aks-lahoo-ko-jaga-diya/): वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता मैं ख़्वाब ख़्वाब में उस को सदा दिया करता, क़रीब आती जो तारीख़ उस के मिलने की वो अपने वादे की मुद्दत बढ़ा दिया करता, मैं ज़िंदगी के सफ़र में था मश्ग़ला उसका वो ढूँढ ढूँढ के मुझ को गँवा दिया करता, उसे समेटता मैं जब भी एक नुक़्ते में वो मेरे ध्यान में तितली उड़ा दिया करता, उसी के गाँव की राहों में बैठ कर हर रोज़ मैं दिल का हाल हवा को सुना दिया करता, मुझे वो आँख में रख कर 'शुमार' पिछली शब अजब ख़ुमार में पलकें गिरा दिया करता, न छेड़ मुझ को ज़माना वो और था जिसमें फ़क़ीर गाली के बदले दुआ दिया करता..!! - [अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला...](https://hindigazals.com/ab-to-bas-ye-jaan-hai-maula/): अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला, गम का कोई निशाँ नहीं है आँसू तो एहसान है मौला, आख़िर तू ये कब बोलेगा सबसे बड़ा ईमान है मौला, बच जाओगे दुनियाँ से तुम दुनियाँ का दीवान है मौला, ज़न्नत की क्या मन्नत करना पास में क़ब्रिस्तान है मौला, हर सू मेरे ख़ुदा ही बसते कौन यहाँ इन्सान है मौला, ये दुनियाँ रंगीन बनी थी रंगत ही अरमान है मौला, सबसे सच्ची इस दुनियाँ में बस बच्चो की मुस्कान है मौला..!! - [क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है....](https://hindigazals.com/kya-aandhiyan-badi-aane-wali-hai/): क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है क्या कुछ बुरा होने वाला है ? इन्सान पहले से कुछ नहीं सीखा क्या क्या ये फिर से जानवर होने वाला है ? - [क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा'लूम...](https://hindigazals.com/kya-batate-hai-siharaat-tumhe/): क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा'लूम कितने मश्कूक हैं हालात तुम्हें क्या मा'लूम ? - [उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं...](https://hindigazals.com/uske-nazdik-gam-e-tark-e-wafa/): उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी नहीं, अब तो हाथों से लकीरें भी मिटी जाती हैं उसको खो कर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं, चार दिन रह गए मेले में मगर अब के भी उसने आने के लिए ख़त में लिखा कुछ भी नहीं, कल बिछड़ना है तो फिर अहद ए वफ़ा सोच के बाँध अभी आग़ाज़ ए मोहब्बत है गया कुछ भी नहीं, मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने तू समझता है मुझे तुझसे गिला कुछ भी नहीं, ऐ 'शुमार' आँखें इसी तरह बिछाए रखना जाने किस वक़्त वो आ जाए पता कुछ भी नहीं..!! - [उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला...](https://hindigazals.com/uski-chaah-me-naam-nahi-aane/): उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला अब मेरा अंजाम नहीं आने वाला, हुस्न से काम पड़ा है आख़िरी साँसों में और वो किसी के काम नहीं आने वाला, मेरी सदा पर वो नज़दीक तो आएगा लेकिन ज़ेर ए दाम नहीं आने वाला, एक झलक से प्यास का रोग बढ़ेगा और इससे मुझे आराम नहीं आने वाला, इश्क़ के नाम पे तेरा रंग न बदले यार तुझ पर कुछ इल्ज़ाम नहीं आने वाला, काम को बैठे हैं और सर पर आई शाम लगता है अब काम नहीं आने वाला, क्यूँ बेकार उस शख़्स का रस्ता देखते हो वो तो 'शुमार' इस शाम नहीं आने वाला..!! - [ज़िन्दगी से एक दिन मौसम खफ़ा हो जाएँगे...](https://hindigazals.com/zindagi-se-ek-din-mausam-khafa/): ज़िन्दगी से एक दिन मौसम खफ़ा हो जाएँगे रंग ए गुल और बू ए गुल दोनों हवा हो जाएँगे, आँख से आँसू निकल जाएँगे और टहनी से फूल वक़्त बदलेगा तो सब क़ैदी रिहा हो जाएँगे फूल से ख़ुशबू बिछड़ जाएगी सूरज से किरन साल से दिन वक़्त से लम्हे जुदा हो जाएँगे, कितने पुरउम्मीद कितने खूबसूरत है ये लोग क्या ये सब बाज़ू ये सब चेहरे फ़ना हो जाएँगे..!! - [कभी बहार का मौसम नया दिखाई दे...](https://hindigazals.com/kabhi-bahar-ka-mausam-naya/): कभी बहार का मौसम नया दिखाई दे गुलाब बातें करें और सबा दिखाई दे, शब ए जुनूँ है कोई मो'जिज़ा दिखाई दे किसी मकाँ का कोई दर खुला दिखाई दे, मैं चाहूँ तिश्नालबी क्या से क्या दिखाई दे तमाम जू ए रवाँ आबला दिखाई दे, तमाम शब के अँधेरे लें इंतिक़ाम अगर चराग़ छीनने वाली हवा दिखाई दे, हिसार ए तीरा शबी पर नज़र जमाए रहो अजब नहीं कि कोई रास्ता दिखाई दे, बताए कौन हमें कर्ब ज़र्द मौसम का शजर में कोई तो पत्ता हरा दिखाई दे, तू मेरे ज़ेहन पे छा जाए ख़ुशबुओं की तरह मैं फूल देखूँ सरापा तिरा दिखाई दे, मिज़ाज ऐसा बने आप ही की आँखों को बहे किसी का लहू आपका दिखाई दे, वहाँ तलाश न करना कभी मुझे 'काज़िम' जहाँ किसी का कोई नक़्श ए पा दिखाई दे..!! - [मरीज़ ए इश्क़ का मर्ज़ वो बुखार बताते हैं...](https://hindigazals.com/mariz-e-ishq-ka-marz-wo/): मरीज़ ए इश्क़ का मर्ज़ वो बुखार बताते हैं शख़्स एक है पर क़ातिल बेशुमार बताते हैं, नशा छलकता है उनकी निगाहों में हरदम इन मयकदों के नशे को वो खुमार बताते हैं, इख़्तियार नहीं अपनी खिलाफ़त जताने का और मेरी ख़ामोशी को वो इक़रार बताते हैं, सुना है कहीं मोहब्बत के सौदे किए जाते हैं और इन पैसों के सट्टे को ये बाज़ार बताते हैं, नज़रे ही काफ़ी होती हैं इश्क़ पढ़ने के लिए लफ़्ज़ों में किए हुए को वो इज़हार बताते हैं, बड़ा सुकून मिला है उससे मुलाकात होने पे और ये लोग आशिक़ को बेक़रार बताते हैं, इस उधार की ज़िंदगी पर ही तो जीते हैं सब वो महज़ पैसों के कर्ज़ों को उधार बताते हैं, है कुछ तो रंजिश इन मकानों की आपस में और फिर दूरियों की वजह दीवार बताते हैं, बहुत नाज़ आने लगा है आजकल लोगों में जिनसे हम ख़फ़ा हैं वहीं हमें बेज़ार बताते हैं, बड़े नादान हैं ये हमारे जहाँ वाले 'आबशार ' जिसमें वफ़ा ही न हो उसे भी प्यार बताते हैं..!! - [ज़िंदगी दर्द की कहानी है चश्म ए अंजुम में भी तो पानी है...](https://hindigazals.com/zindagi-dard-ki-kahani-hai/): ज़िंदगी दर्द की कहानी है चश्म ए अंजुम में भी तो पानी है, बेनियाज़ाना सुन लिया ग़म ए दिल मेहरबानी है मेहरबानी है, वो भला मेरी बात क्या माने उसने अपनी भी बात मानी है ? - [अचानक दिलरुबा मौसम का दिल आज़ार हो जाना...](https://hindigazals.com/achanak-dilruba-mausam-ka-dil/): अचानक दिलरुबा मौसम का दिल आज़ार हो जाना दुआ आसाँ नहीं रहना सुख़न दुश्वार हो जाना, तुम्हें देखें निगाहें और तुम को ही नहीं देखें मोहब्बत के सभी रिश्तों का यूँ नादार हो जाना, अभी तो बेनियाज़ी में तख़ातुब की सी ख़ुशबू थी हमें अच्छा लगा था दर्द का दिलदार हो जाना, अगर सच इतना ज़ालिम है तो हमसे झूट ही बोलो हमें आता है पतझड़ के दिनों गुलबार हो जाना, अभी कुछ अन-कहे अल्फ़ाज़ भी हैं कुंज ए मिज़्गाँ में अगर तुम इस तरफ़ आओ सबा रफ़्तार हो जाना, हवा तो हमसफ़र ठहरी समझ में किस तरह आए हवाओं का हमारी राह में दीवार हो जाना, अभी तो सिलसिला अपना ज़मीं से आसमाँ तक था अभी देखा था रातों का सहर आसार हो जाना, हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है कभी अख़बार पढ़ लेना कभी अख़बार हो जाना..!! - [अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं...](https://hindigazals.com/abhi-kuch-aur-karishme-gazal-ke/): अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं 'फ़राज़' अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं, जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान ए सफ़र कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं, रह ए वफ़ा में हरीफ़ ए ख़िराम कोई तो हो सो अपने आप से आगे निकल के देखते हैं, तू सामने है तो फिर क्यूँ यक़ीं नहीं आता ये बार बार जो आँखों को मल के देखते हैं, ये कौन लोग हैं मौजूद तेरी महफ़िल में जो लालचों से तुझे मुझको जल के देखते हैं, ये क़ुर्ब क्या है कि यक जाँ हुए न दूर रहे हज़ार एक ही क़ालिब में ढल के देखते हैं, न तुझ को मात हुई है न मुझ को मात हुई सो अब के दोनों ही चालें बदल के देखते हैं, ये कौन है सर ए साहिल कि डूबने वाले समुंदरों की तहों से उछल के देखते हैं, अभी तलक तो न कुंदन हुए न राख हुए हम अपनी आग में हर रोज़ जल के देखते हैं, बहुत दिनों से नहीं है कुछ उस की ख़ैर ख़बर चलो 'फ़राज़' को ऐ यार चल के देखते हैं..!! - [कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता...](https://hindigazals.com/kabhi-kisi-ko-muqammal-jahan/): कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता, तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता, कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता, ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलता, चराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है ख़ुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता..!! - [ज़रा सी देर थी बस एक दिया जलाना था...](https://hindigazals.com/zara-see-der-thi-bas-ek-diya/): ज़रा सी देर थी बस एक दिया जलाना था और इसके बाद फ़क़त आँधियों को आना था, मैं घर को फूँक रहा था बड़े यक़ीन के साथ कि तेरी राह में पहला क़दम उठाना था, वरना कौन उठाता ये जिस्म ओ जाँ के अज़ाब ये ज़िंदगी तो मोहब्बत का एक बहाना था, ये कौन शख़्स मुझे किर्चियों में बाँट गया ये आइना तो मेरा आख़िरी ठिकाना था, पहाड़ भाँप रहा था मेरे इरादे को वो इस लिए भी कि तेशा मुझे उठाना था, बहुत सँभाल के लाया हूँ एक सितारे तक ज़मीन पर जो मेरे इश्क़ का ज़माना था, मिला तो ऐसे कि सदियों की आश्नाई हो तआरुफ़ उससे भी हालाँकि ग़ाएबाना था, मैं अपनी ख़ाक में रखता हूँ जिसको सदियों से ये रौशनी भी कभी मेरा आस्ताना था, मैं हाथ हाथों में उसके न दे सका था 'शुमार' वो जिसकी मुट्ठी में लम्हा बड़ा सुहाना था..!! - [डूब कर भी न पड़ा फ़र्क़ गिराँ जानी में...](https://hindigazals.com/doob-kar-bhi-na-pada-farq/): डूब कर भी न पड़ा फ़र्क़ गिराँ जानी में मैं हूँ पत्थर की तरह बहते हुए पानी में, ये मोहब्बत तो बहुत बा'द का क़िस्सा है मियाँ मैंने उस हाथ को पकड़ा था परेशानी में, रफ़्तगाँ तुम ने अबस ढोंग रचाया वर्ना इश्क़ को दख़्ल नहीं मौत की अर्ज़ानी में, ये मोहब्बत भी विलायत की तरह रखती है हालत ए हाल में ये हालत ए हैरानी में, इस लिए जल के कभी राख नहीं होता दिल ये कभी आग में होता है कभी पानी में, एक मोहब्बत ही पे मौक़ूफ़ नहीं है 'ताबिश' कुछ बड़े फ़ैसले हो जाते हैं नादानी में..!! - [दी है वहशत तो ये वहशत ही मुसलसल हो जाए...](https://hindigazals.com/dee-haiwahshat-to-ye-wahshat/): दी है वहशत तो ये वहशत ही मुसलसल हो जाए रक़्स करते हुए अतराफ़ में जंगल हो जाए, ऐ मेरे दश्त मिज़ाजो ये मेरी आँखें हैं इनसे रूमाल भी छू जाए तो बादल हो जाए, चलता रहने दो मियाँ सिलसिला दिलदारी का आशिक़ी दीन नहीं है कि मुकम्मल हो जाए, हालत ए हिज्र में जो रक़्स नहीं कर सकता उसके हक़ में यही बेहतर है कि पागल हो जाए, मेरा दिल भी किसी आसेबज़दा घर की तरह ख़ुद ब ख़ुद खुलने लगे ख़ुद ही मुक़फ़्फ़ल हो जाए, डूबती नाव में सब चीख़ रहे हैं 'ताबिश' और मुझे फ़िक्र ग़ज़ल मेरी मुकम्मल हो जाए..!! - [गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं...](https://hindigazals.com/garm-raftar-hai-teri-ye/): गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं दम बदम लौ तेरे नक़्श ए कफ़ ए पा देते हैं, हिज्र से करते हैं नाशाद हमें वस्ल से शाद ख़ुद मरज़ देते हैं और आप शिफ़ा देते हैं, दिल की तुम बात समझते हो ज़बाँ गो न हिले ख़ूब सुनते हो जो चुपके से सदा देते हैं, कम न समझें मेरी आहों के शरारों को हुज़ूर आग अभी सारे ज़माने में लगा देते हैं, तुमने एहसान किया है कि नमक छिड़का है अब मुझे ज़ख़्म ए जिगर और मज़ा देते हैं, उन की तक़दीर में है मेरे लहू में भरना ख़ून की बू तेरे दामान ए क़बा देते हैं, साफ़ करते हैं अभी ग़ैर ये वो तेग़ ए अदा दोस्त आ के मुझे पैग़ाम ए क़ज़ा देते हैं, जागो ऐ मुम्लिकत ए इश्क़ के सोने वालो शब को दरबान ए दर ए यार सदा देते हैं, जितने शाइ'र हैं उन्हों ने हमें इज़्ज़त दी है हम 'रशीद' उन को शब ओ रोज़ दुआ देते हैं..!! - [कोई नई चोट फिर से खाओ ! उदास लोगो...](https://hindigazals.com/koi-nayi-chot-fir-se/): कोई नई चोट फिर से खाओ ! उदास लोगो कहा था किसने कि मुस्कुराओ ! उदास लोगो, गुज़र रही है गली से फिर मातमी हवाएँ किवाड़ खोलो दिए बुझाओ ! - [जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना...](https://hindigazals.com/jo-chal-sako-to-koi-aisi/): जो चल सको तो कोई ऐसी चाल चल जाना मुझे गुमाँ भी ना हो और तुम बदल जाना, ये शोलगी हो बदन की तो क्या किया जाये सो लाजमी है तेरे पैरहन का जल जाना, तुम्हीं करो कोई दरमाँ, ये वक्त आ पहुँचा कि अब तो चारागरों का भी हाथ मल जाना, अभी अभी जो जुदाई की शाम आई थी हमें अजीब लगा ज़िन्दगी का ढल जाना, सजी सजाई हुई मौत ज़िन्दगी तो नहीं मुअर्रिखों ने मकाबिर को भी महल जाना, ये क्या कि तू भी इसी साअते जवाल में है कि जिस तरह है सभी सूरजों को ढल जाना, हर एक इश्क के बाद और उसके इश्क के बाद फ़राज़ इतना आसाँ भी ना था संभल जाना..!! - [किताबों में मेरे फ़साने ढूँढते हैं...](https://hindigazals.com/kitabo-me-mere-fasane/): किताबों में मेरे फ़साने ढूँढते हैं नादां हैं गुज़रे ज़माने ढूँढते हैं, जब वो थे तलाश ए ज़िंदगी भी थी अब तो मौत के ठिकाने ढूँढते हैं, कल ख़ुद ही अपनी महफ़िल से निकाला था आज हुए से दीवाने ढूँढते हैं, मुसाफ़िर बेख़बर हैं तेरी आँखों से तेरे शहर में मैख़ाने ढूँढते हैं, तुझे क्या पता ऐ सितम ढाने वाले हम तो रोने के बहाने ढूँढते हैं, उनकी आँखों को यूँ ना देखो ’फ़राज़’ नए तीर हैं, निशाने ढूँढते हैं..!! - [ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है](https://hindigazals.com/zindagi-ki-kashmaksh-se/): ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है दिल को न उलझाओ ये नादान बहुत है, यूँ सामने आ जाने पर कतरा के गुज़रना वादे से मुकर जाना उसे आसान बहुत है, यादें भी है, तल्खी भी है, और है मुहब्बत तू ने जो दिया दर्द का सामान बहुत है, अश्क कभी, लहू कभी, आँख से बरसे बेदाग़ मुहब्बत का ये अंज़ाम बहुत है, तूने तो सुना होगा मेरे दिल का धड़कना छू कर भी देख लेना ये बेज़ुबान बहुत है, बहुत तड़प लिए अब तुमसे बिछड़ कर पा जाएँ खोने वाले को अरमान बहुत है..!! - [गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए](https://hindigazals.com/gile-fuzul-the-ahad/): गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए सो चुप रहा सितम ए नारवां के होते हुए, ये क़ुर्बतों में अजब फ़ासले पड़े कि मुझे है आशना की तलब आशना के होते हुए, वो हिलागर हैं जो मजबूरियाँ शुमार करें चिराग़ हम ने जलायें हवा के होते हुये, न कर किसी पे भरोसा के कश्तियाँ डूबीं हैं ख़ुदा के होते हुये नाख़ुदा के होते हुये, किसे ख़बर है कि कासा ब दस्त फिरते हैं बहुत से लोग सरों पर हुमा के होते हुए, "फ़राज़" ऐसे भी लम्हें कभी कभी आये कि दिल गिरिफ़्ता रहा दिलरुबा के होते हुए..!! - [किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में](https://hindigazals.com/kisi-darbar-ki-aamin/): किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में ऐन मुमकिन है तुम्हे मेरा पता मिल जाए, ये भी हो सकता है मैं तुमको मिलूँ या न मिलूँ लेकिन इस खोज़ में ख़ुद तुमको ख़ुदा मिल जाए, सख्त बुझदिल है कि जो इश्क़ में थक जाते है मैं तो हाँ ! - [महफ़िले ख़्वाब हुई रह गए तन्हा चेहरे](https://hindigazals.com/mahfile-khwab-hui-rah/): महफ़िले ख़्वाब हुई रह गए तन्हा चेहरे वक़्त ने छीन लिए कितने शनासा चेहरे, सारी दुनियाँ के लिए एक तमाशा चेहरे दिल तो पर्दे में रहे हो गए रुस्वा चेहरे, तुम वो बेदर्द कि मुड़ कर भी न देखा उनको वरना करते रहे क्या क्या न तकाज़ा चेहरे, कितने हाथों ने तराशे ये हसीं ताज़ महल झाँकते है दर ओ दीवार से क्या क्या चेहरे, सोए पत्तो की तरह जागती कलियों की तरह खाक़ में गुम तो कभी खाक़ से पैदा चेहरे, ख़ुद ही वीरानी ए दिल ख़ुद ही चराग ए महफ़िल कभी महरूम ए तमन्ना कभी शैदा चेहरे, खाक़ उड़ती भी रही अब्र बरसता भी रहा हमने देखे कभी सहरा कभी दरिया चेहरे, यही इमरोज़ भी हंगामा ए फ़र्दा भी यही पेश करते रहे हर दौर का नक्शा चेहरे, दीप जलते ही रहे ताक़ पे अरमानो के कितनी सदियों से है हर घर का उजाला चेहरे, ख़त्म हो जाएँ जिन्हें देख के बीमारी ए दिल ढूँढ कर लाए कहाँ से वो मसीहा चेहरे, दास्ताँ ख़त्म न होगी कभी चेहरों की ज़मील हुस्न ए युसुफ़ तो कभी इश्क़ ए ज़ुलेखा चेहरे..!! - [दिल से उतर जाने में एक लम्हा लगता है](https://hindigazals.com/dil-se-utar-jane/): दिल से उतर जाने में एक लम्हा लगता है दिल के बदल जाने में एक लम्हा लगता है, देखना ख्याल रहे क़ायम अपना हाल रहे यूँ कि पिघल जाने में एक लम्हा लगता है, यूँ कभी तो सदियाँ भी कम लगें और कभी ख़ुद को आज़माने में एक लम्हा लगता है, सोचते रहें तो फिर वक़्त ठहर जाता है वरना गुज़र जाने में एक लम्हा लगता है, बहुत देख भाल के चलना पड़ता है यहाँ नहीं तो फ़िसल जाने में एक लम्हा लगता है..!! - [दर्द कई होते है दिल में छुपाने के लिए](https://hindigazals.com/dard-kai-hote-hai/): दर्द कई होते है दिल में छुपाने के लिए सब के सब आँसू नहीं होते दिखाने के लिए, उम्र तन्हा काट दी वादा निभाने के लिए अहद बाँधा था किसी ने आज़माने के लिए, कुछ दीये दीवार पर रखे हैं वक़्त ए इंतज़ार कुछ दीये लाया हूँ पलकों पे सज़ाने के लिए, लोग ज़ेर ए खाक़ भी तो डूब ही जाते है एक समन्दर ही नहीं है डूब जाने के लिए, वो बज़ाहिर मिला तो था एक लम्हे को मगर उम्र सारी चाहिए उसको भुलाने के लिए, कोई गम हो, कोई दुःख हो या कि दर्द हो मुस्कुराना पड़ ही जाता है ज़माने के लिए..!! - [काश ! तुम मेरी होती तो क्या गज़ब ज़िन्दगी होती](https://hindigazals.com/kash-tum-meri-hoti/): काश ! तुम मेरी होती तो क्या गज़ब ज़िन्दगी होती फिर ना ज़िन्दगी में हमारी कभी कोई कमी होती, तुमने सिर्फ़ शिकवे, गिले ही पढ़े मेरे अश'आरो में कभी उनमे छुपे प्यार पढ़े होते तो तुम्हे ख़ुशी होती, माना तुम्हे ख़ुदा ने नवाज़ा है ज़र ए इर्तिफा ए हुस्न से जो करते हम पे भी इनायत तो दिल में रौशनी होती, बुरी आदत है मयकशी मगर कितनो को ज़िन्दा रखा ना होती शराब तो सोचो फिर कितनी ख़ुदकुशी होती..!! - [वो बड़े बनते हैं अपने नाम से](https://hindigazals.com/wo-bade-bante-hai/): वो बड़े बनते हैं अपने नाम से हम बड़े बनते है अपने काम से, वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से, एक नज़र महफ़िल में देखा था जिसे हम तो खोए है उसी में शाम से, दोस्ती चाहत वफ़ा इस दौर में काम रख ऐ दोस्त अपने काम से, जिन से कोई वास्ता तक है नहीं क्यूँ वो जलते है हमारे नाम से ? - [ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं](https://hindigazals.com/khwab-ke-phoolo-ki/): ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं ख़ून ठंडा पड़ गया आँखें पुरानी हो गईं, जिस का चेहरा था चमकते मौसमों की आरज़ू उस की तस्वीरें भी औराक़ ए ख़िज़ानी हो गईं, दिल भर आया काग़ज़ ए ख़ाली की सूरत देख कर जिन को लिखना था वो सब बातें ज़बानी हो गईं, जो मुक़द्दर था उसे तो रोकना बस में न था उन का क्या करते जो बातें ना गहानी हो गईं, रह गया 'मुश्ताक़' दिल में रंग ए याद ए रफ़्तगाँ फूल महँगे हो गए क़ब्रें पुरानी हो गईं..!! - [अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री](https://hindigazals.com/azib-karb-me-guzri/): अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालो के दरमियाँ गुज़री, तमाम उम्र चिराग़ ए उम्मीद जलाते रहे तमाम उम्र उम्मीदों के दरमियाँ गुज़री, गुज़र गई जो तेरे साथ वो यादगार रही बिना तेरे जो गुज़री, वबाल ए जाँ गुज़री, मुझे सुकूं मयस्सर नहीं तो क्या गम है ? - [तेरी यादें, तेरी बातें, तेरी ख़ामोशी, तेरा फ़िक्र](https://hindigazals.com/teri-yaaden-teri-baaten/): तेरी यादें, तेरी बातें, तेरी ख़ामोशी, तेरा फ़िक्र तेरा ज़िक्र, अब सब कुछ आसान सा लगता है, तू मुझ में रहे या मैं तुझ में रहूँ एक ही बात है यूँ तेरा छोड़ के जाना मुझे नादान सा लगता है, कुछ बोलते नहीं लब ये तेरे ख़ामोश से रहते है वो लफ्ज़ ज़िन्दा तो है मगर बेज़ुबान सा लगता है, क्या खोया, क्या पाया, क्या से क्या हुए इश्क़ में जाने क्या ज़ुल्म हुआ, दिल ये बेज़ान सा लगता है, अब कुछ होश नहीं रहता, न कुछ ख़बर है रहती तेरी यादो में खोया मेरा ये दिल हैरान सा लगता है, वो थी कभी हमारी, अब किसी और की मुहब्बत है इस वजह से वो शख्स बड़ा परेशान सा लगता है, ज़रा देखो उस रकीब की बाँहों में कौन है छुपी बैठी उसका चेहरा मुझे क्यूँ न जाने मेरी जान सा लगता है, जल गए मकाँ मेरा, यूज़ कोई फ़िक्र ही नहीं है मेरी उसका आशियाँ भी अब मुझे आसमान सा लगता है..!! - [गम से वो मेरे आशना न हुआ कभी](https://hindigazals.com/gam-se-wo-mere/): गम से वो मेरे आशना न हुआ कभी और दुःख मेरा मुझ से जुदा न हुआ कभी, ज़िन्दगी के सफ़र में साथ चलता रहा मगर शनासाई हो कर भी वो शनासा न हुआ कभी, ज़ख्मो पे उसने मरहम न रखा कभी यूँ उस दर्द का कोई मदावा न हुआ कभी, आशियाने में रह कर भी सायेबा न मिला कभी हिस्से में उसके भी सुख न आया कभी, गुज़रे बहुत मराहिल ज़िन्दगी के सफ़र में मगर न कर सका मुहब्बत का इज़हार कभी..!! - [अंज़ाम नहीं मिलता, उन्वान नहीं मिलता](https://hindigazals.com/anzam-nahi-milta-unwan/): अंज़ाम नहीं मिलता, उन्वान नहीं मिलता कम इश्क़ के दरिया में तूफ़ान नहीं मिलता, रोते है लिपट के वो मजबूरियाँ कह कह के शायद उन्हें हम जैसा नादान नहीं मिलता, शायद ये वफ़ाओ का मेरी ही सिला है कि हम जैसा शहर भर में बदनाम नहीं मिलता, मेरी ये तमन्ना है अब मौत मिले लेकिन साँसों की ये ज़िद्द उनका पैगाम नहीं मिलता, मैं भूल कर भी उसे जी लूँ मुश्किल है मगर यारो ख़ुद को जो दगा दे वो ईमान नहीं मिलता..!! - [मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए](https://hindigazals.com/meri-ek-chhoti-si/): मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए, रेत मेरी उम्र, मैं बच्चा, निराले मेरे खेल मैंने दीवारे उठाई ही है गिराने के लिए, वक़्त होंठो से मेरे वो भी खुरच के ले गया एक तबस्सुम जो था दुनियाँ को दिखाने के लिए, आसमां ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से इतनी बारिश, महज़ एक शोले को बुझाने के लिए, छत टपकती थी अगरचे फिर भी आ जाती थी नींद मैं नए घर में बहुत रोया पुराने के लिए, देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना तजरुबे आये थे हमें संज़ीदा बनाने के लिए, मैं ज़फर ता ज़िन्दगी बिकता रहा परदेस में अपनी घर वाली को एक कंगन दिलाने के लिए..!! - [अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है](https://hindigazals.com/adhure-khwab-ki-anokhi/): अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है हर हाथों में मुहब्बत की लकीर होती है, जरूरी तो नहीं होता क़त्ल हथियार से हो निगाह ए यार भी अज़ब शमशीर होती है, मुहब्बत की राह में हायल अपने ही रहते है हमारे पैरो में रिश्तो की जंज़ीर होती है, अक्सर हार जाते है सिकंदर भी, खिलाड़ी भी यानि जो जीत होती है वही तक़दीर होती है, मुहब्बत ख़ुदफ़रामोशी, मुहब्बत ख़्वाब ए जज़ीरा नहीं फिर ख़त्म चाहत की तफ़सीर होती है, रखा ऐसा सहर नवाब मुहब्बत में ख़ुदा ने गरूर बे नियाज़ी वगरना कहाँ असीर होती है..!! - [मौत तो एक दिन आनी ही है](https://hindigazals.com/maut-to-ek-din-aani-hi/): मौत तो एक दिन आनी ही है ज़िन्दगी जो मिली फ़ानी ही है, शख्स वो है अक्लमंद ओ दाना जिस ने कुछ फ़िक्र की ठानी है, बाद पछताने से हो भला क्या जान कर के भी मन मानी ही है, हाय ! - [किसी दिन तो तू भी मुहब्बत हक़ीक़ी कर के देख](https://hindigazals.com/kisi-din-to-tu/): किसी दिन तो तू भी मुहब्बत हक़ीक़ी कर के देख कैसे जीते है तेरे बगैर तू भी तो हम पर मर के देख, यूँ कश्ती ए दिल के किनारे बैठ तू अंदाज़ा न लगा किसी दिन इसकी गहराइयो में उतर कर के देख, मुरझाई हुई सी तू एक दिन गुलो सा खिल जाएगी एक बार महबूब की बाँहों में तू बिखर कर के देख, पिघल कर तो देख किसी के प्यार में मोम की तरह किसी के इंतज़ार में दीये की तरह जल कर के देख, समझ आ जाएगी तुझे भी धड़कनो की सदा ज़रीन किसी दिन इश्क़ की गली से तू गुज़र कर के देख..!! - [ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है](https://hindigazals.com/aise-mausam-me-bhala/): ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है जैसे मौसम में तू हर रोज़ खफ़ा होता है, रोज़ छीन जाता है जीने का सहारा हमसे रोज़ आँखों से कोई ख़्वाब दफ़ा होता है, आओ तारिक गुज़रगाहो में ढूँढ़ें उनको जिनकी पलकों पे मुहब्बत का दीया होता है, और बढ़ जाता है नादान मुहब्बत पे यकीं जब किसी बात पे वो शख्स खफ़ा होता है, तुमको मालूम है दुनियाँ में फ़कीरो का ज़रीन उनका और कोई भी नहीं सिर्फ़ ख़ुदा होता है..!! - [तेरे और मेरे बारे में जो मशहूर एक कहानी है](https://hindigazals.com/tere-aur-mere-baare/): तेरे और मेरे बारे में जो मशहूर एक कहानी है वही कहानी अब ज़माने के ज़हन से मिटानी है, हमारे बारे में जो तुम पूछती फिरती हो गैरो से ये कोई खैरियत आगाही नहीं ये बदगुमानी है, किया है राह ए मुहब्बत में खाक़ ख़ुद को मैंने हमारी तरह भला कब तुमने खाक़ छानी है ? - [मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ](https://hindigazals.com/main-subah-bechta-hoo/): मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ नहीं मैं महज़ अपना काम बेचता हूँ, इन बूढ़े दरख्तों को बेज़ान न समझो मैं अभी तक पिता का नाम बेचता हूँ, हुई सस्ती ये दुनियाँ, महँगा रहा मैं अब दे इश्तिहार नया दाम बेचता हूँ, सियासत का शौक़ जो पाला है मैंने कभी रहीम तो कभी राम बेचता हूँ, मुफ़लिसी भी क्या क्या रंग दिखाती है मुँह से लगा हुआ मैं ज़ाम बेचता हूँ..!! - [पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे](https://hindigazals.com/ped-mujhe-tab-hasrat/): पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे जब मैं जंगल में पानी लाया करता था, थक जाता था बादल साया करते करते और फिर मैं बादलो पे साया करता था, बैठा रहता था मैं साहिल पे सारा दिन दरियाँ भी मुझसे जान छुड़ाया करता था, बिन्त ए सहरा रूठा करती थी मुझ से मैं सहरा से जब रेत चुराया करता था..!! - [शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा](https://hindigazals.com/shor-karunga-aur-na/): शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा ख़ामोशी से अपना रोना रो लूँगा, सारी उम्र इसी ख्वाहिश में गुज़री है दस्तक होगी और दरवाज़ा खोलूँगा, तन्हाई में ख़ुद से बातें करनी है मेरे मुँह में जो आएगा वही बोलूँगा, रात बहुत है तुम चाहो तो सो जाओ मेरा क्या मैं दिन में भी सो लूँगा, तुमको दिल की बात बतानी है लेकिन आँखे बंद करो तो मुट्ठी खोलूँगा..!! - [थक गया है मुसलसल सफ़र उदासी का](https://hindigazals.com/thak-gaya-hai-musalsal/): थक गया है मुसलसल सफ़र उदासी का और अब भी है मेरे शाने पे सर उदासी का, वो कौन कीमियागर था के जो बिखेर गया तेरे गुलाब से चेहरे पे ज़र उदासी का, मेरे वजूद के खि़ल्वतक़दे में कोई तो था जो रख गया है दीया ताक़ पर उदासी का, मैं तुझसे कैसे कहूँ ऐ यार ए मेहरबां मेरे के तू ही इलाज़ है मेरी हर उदासी का, ये अब जो आग का दरिया मेरे वजूद में है यही तो पहले पहल था शरार उदासी का, ना जाने आज कहाँ खो गया सितार ए शाम वो मेरा दोस्त, मेरा हमसफ़र उदासी का, ‘फ़राज़’ दीदा ए पुराब में ना ढूंढ उसे, के दिल की तह में कहीं है गोहर उदासी का..!! - [दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला](https://hindigazals.com/dost-ban-kar-bhi/): दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला, अब उसे लोग समझते हैं गिरफ़्तार मेरा सख़्त नादिम है मुझे दाम में लाने वाला, सुबह दम छोड़ गया निकहत ए गुल की सूरत रात को ग़ुंचा ए दिल में सिमट आने वाला, क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से वो जो एक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला, तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया आज तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला, मुंतज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला, क्या ख़बर थी जो मेरी जाँ में घुला है इतना है वही मुझ को सर ए दार भी लाने वाला, मैं ने देखा है बहारों में चमन को जलते है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला, तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़' दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला..!! - [कर्ब हरे मौसम को तब तक सहना पड़ता है](https://hindigazals.com/karb-hare-mausam-ko/): कर्ब हरे मौसम को तब तक सहना पड़ता है पतझड़ में तो पात को आख़िर झड़ना पड़ता है, कब तक औरो के साँचे में ढलते जाएँगे ? - [कैसे कहे, क्या कहे इसी कशमकश में रह गए](https://hindigazals.com/kaise-kahe-kya-kahe/): कैसे कहे, क्या कहे इसी कशमकश में रह गए हम अल्फाज़ ढूँढ़ते रहे, वो बात अपनी कह गए, लोगो ने क्या कुछ न कहा, सब गँवारा कर लिया हम इश्क़ की खातिर ज़माने के सितम भी सह गए, बाक़ी न रही कोई तमन्ना न कुछ आरज़ू अपनी सैलाब कुछ ऐसा चला कि अरमान भी सारे बह गए, गुलशन में तो गवाह है हर शज़र उस तूफ़ान का शाखों पे अब बस सहमे हुए से चंद पत्ते ही रह गए, बड़ी उम्मीद से हमने गढ़े थे जो महल सपनो के वो इमारत खंडहर बनी, खंडहर भी आख़िर ढह गए..!! - [दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें](https://hindigazals.com/dukh-fasana-nahi-ki/): दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें दिल भी माना नहीं कि तुझ से कहें, आज तक अपनी बेकली का सबब ख़ुद भी जाना नहीं कि तुझ से कहें, बे तरह हाल ए दिल है और तुझ से दोस्ताना नहीं कि तुझ से कहें, एक तू हर्फ़ ए आश्ना था मगर अब ज़माना नहीं कि तुझ से कहें, क़ासिदा हम फ़क़ीर लोगों का एक ठिकाना नहीं कि तुझ से कहें, ऐ ख़ुदा दर्द ए दिल है बख़्शिश ए दोस्त आब ओ दाना नहीं कि तुझ से कहें, अब तो अपना भी उस गली में 'फ़राज़' आना जाना नहीं कि तुझ से कहें..!! - [जंगल काट दिए और फिर शहर भी जला दिए](https://hindigazals.com/jungle-kaat-diye-aur/): जंगल काट दिए और फिर शहर भी जला दिए अपने घरो के चिराग़ लोगो ने ख़ुद बुझा दिए, चाँद छुआ मंगल पर भी बस पहुँचने ही वाले है मगर ज़मीं पे चलना न आया सागर सुखा दिए, मगर कुछ ऐसे भी हुनरदां निकले कि ज़मीं को ही मंगल कर दिया और सभी मंगल भूला दिए, जाने किन किन खज़ानो से ख़ुदा ने नवाज़ा था न जाने किस ख्याल से सभी खज़ाने लुटा दिए, ज़मीं की क्या बात कहें हवस के मारे इन्साँ ने धूल और धुएँ में तमाम आसमाँ तक उड़ा दिए..!! - [पगडंडी पर छाँवो जैसा कुछ नहीं दिखता](https://hindigazals.com/pagdandi-par-chhanvo-jaisa/): पगडंडी पर छाँवो जैसा कुछ नहीं दिखता गाँवों में अब गाँवों जैसा कुछ नहीं दिखता, कथनी सबकी कड़वी कड़वी, करनी टेढ़े मेढ़े बरक़त और दुआओं जैसा कुछ नहीं दिखता, बिछुआ, पैरी, लाल महावर, रुनझुन करती पायल गोरी के गोरे गोरे पाँवो जैसा कुछ नहीं दिखता, राधा, मुनिया, धनिया, सीता जींस पहनती है अब उन शोख़ अदाओं जैसा कुछ नहीं दिखता, बरगद, ईमली, महुआ, पीपल, शीशम, नीम के अब शीतल मंद हवाओ जैसा कुछ नहीं दिखता, जब से पंचायत में सियासत की गहरी पैठ हुई तबसे इनमे ग्राम सभाओ जैसा कुछ नहीं दिखता..!! - [सीधे सादे से है कुछ पेंच ओ ख़म नहीं रखते](https://hindigazals.com/sidhe-saade-se-hai/): सीधे सादे से है कुछ पेंच ओ ख़म नहीं रखते जी भर आता है तो रो लेते है गम नहीं रखते, खुली क़िताब है हम, पर्दादारी नहीं है कोई जो कहना है साफ़ कह देते है, भ्रम नहीं रखते, दर्द किसी का हो छलकती है आँख अपनी भी हो दुआ या कि मुहब्बत हो कम नहीं रखते, दुश्मनी, नफ़रत, गिला या कि शिकवा दिल में रखने वाले छुपा के रखते है, हम नहीं रखते, ख़ुश हो लेते है हम याद कर के मुरव्व्ते उनकी संगदिली को भूल जाते है, आँख नम नहीं रखते..!! - [चीखते है दर ओ दीवार नहीं होता मैं](https://hindigazals.com/chikhte-hai-dar-o/): चीखते है दर ओ दीवार नहीं होता मैं आँख खुलने पे भी बेदार नहीं होता मैं, ख़्वाब देखना हो सफ़र करना या रोना हो मुझ में ख़ूबी है बेज़ार नहीं होता मैं, अब भला अपने लिए बनना सँवरना कैसा ख़ुद से मिलना हो तो तैयार नहीं होता मैं, कौन आएगा भला मेरी अयादत के लिए बस इसी खौफ़ से बीमार नहीं होता मैं, मंज़िल ए इश्क़ पे निकला तो कहा रस्ते ने हर किसी के लिए हमवार नहीं होता मैं, तेरी तस्वीर से तस्कीन नहीं होती मुझे तेरी आवाज़ से सरशार नहीं होता मैं, लोग कहते है मैं कि मैं बारिश की तरह हूँ अक्सर अवक़ात लगातार नहीं होता मैं..!! - [क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा](https://hindigazals.com/qubul-hai-ab-to/): क़ुबूल है अब तो ज़िन्दगी का हर तोहफ़ा मैंने ख्वाहिशो का नाम बताना छोड़ दिया, जो दिल के क़रीब है वही मेरे अजीज़ है मैंने अब गैरो पे हक़ जाताना छोड़ दिया, जो समझ ही न सके हाल ए दिल मेरा मैंने अब उन्हें ज़ख्म दिखाना छोड़ दिया, जो गुज़रती है इस दिल पे वही हकीक़त है मैंने दिखावे के लिए मुस्कुराना छोड़ दिया, जो महसूस ही न करे सके कैफ़ियत मेरी मैंने उनके साथ वक़्त बिताना छोड़ दिया, फ़ितरत में ही हो शुमार जिनके नाराज़गी मैंने अब उन्हें बार बार मानना छोड़ दिया, गर कोई होगा अपना तो मिलेगा ज़रूर मैंने अब बे वजह बंदिशे लगाना छोड़ दिया..!! - [जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी](https://hindigazals.com/zuban-kadwi-halak-sukha/): जुबां कड़वी, हलक सूखा, हैं साँसे मुनज़मिद मेरी ज़हर ने किया क्या आख़िर ज़रा सी चासनी दे कर, बने मेरी भला क्यूँ कर गुलों से फूलो कलियों से डसा है मुझको बहारो ने फ़रेब ए ज़िन्दगी दे कर, इनायत ये कैसी की है मुझ पे इन कुंद साँपों ने लो देखो बन गया पत्थर मैं अपनी सादगी दे कर..!! - [अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता](https://hindigazals.com/azab-qatib-hai-insa/): अज़ब क़ातिब है इन्साँ में फ़रावानी नहीं भरता दगाबाज़ी तो भरता है वफ़ादारी नहीं भरता, भरोसा था तभी तो साथ तेरा दे रहा था मैं ज़रा भी शक़ अगर होता तो मैं हामी नहीं भरता, बहुत ख़ुद्दार होना भी अना का एक पहलू है घड़े का मुँह अगर उल्टा हो तो पानी नहीं भरता, कोई तो है यक़ीनन जिसने ये मेला लगाया है खिलौना कैसा भी हो ख़ुद ब ख़ुद चाभी नहीं भरता..!! - [गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है](https://hindigazals.com/gam-e-tanhai-me/): गम ए तन्हाई में राहत ए दिल का सबब है एक ये चंचल सी हवा और अँधेरी रात, कौन बेगाना है और कौन मेरा अपना है सब का अंदाज़ है यकज़ा और अँधेरी रात, मौत तो बर हक़ है एक दिन आनी है महव ए गुफ़्तार हूँ ख़ुद से और अँधेरी रात, मंज़िल की तरह खफ़ा आज की शब चाँद भी है गवाह फ़लक के है बादल और अँधेरी रात, तुम तो क्या मेरी ज़ात भी मेरी तलाश में है मगर गुमशुदा अयनी नवाब है और अँधेरी रात..!! - [सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है](https://hindigazals.com/sahraaon-se-aane-wali/): सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है हिज़रत करूँगा गाँव से गाँवो में रेत है, ऐ कैस तेरे दश्त को इतनी दुआएं दें कुछ भी नहीं है मेरी दुआओं में रेत है, सहराओं से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को हाथों में फूल है मेरे पांवो में रेत है, मुद्दत से मेरी आँख में एक ख़्वाब है मुकीम पानी में पेड़ पेड़ की छावों में रेत है, मुझ सा कोई फ़कीर नहीं है कि जिसके पास कशकोल रेत का है सदाओं में रेत है..!! - [ये एक बात समझने में रात हो गई है](https://hindigazals.com/ye-ek-baat-samjhne/): ये एक बात समझने में रात हो गई है मैं उससे जीत गया हूँ कि मात हो गई है ! - [यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस](https://hindigazals.com/yahan-kise-khabar-hai/): यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस इसी पे गौर करने में कट रही है, कि ये उदासियाँ किस सबब से बस हमसे ही लिपट रही है, दुःख तो ये है कि उसके हो कर भी हम उसको छूने से डर रहे है, अज़ीब दुःख है कि हमारे हिस्से की आग भी अब औरो में बट रही है, मैं उसको हर रोज़ बस यही एक झूठ सुनने को फोन करता हूँ, सुनो ! - [वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है](https://hindigazals.com/wo-jo-dikh-raha-hai/): वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है वो जो तुम कहते हो हक़ हो ज़रूरी तो नहीं है, अगर अधूरी रहे कहानी तो रहने दो अधूरी ही हमेशा पूरी हो हर कहानी ये ज़रूरी तो नहीं है, जब फिराक़ ही है हासिल इस ज़िन्दगी का तो हर बार ही हो वस्ल ये ज़रूरी तो नहीं है, जो ढल रहा है अगर सूरज तो ढलने दो उसे शब ओ रोज़ हो रौशनी कोई ज़रूरी तो नहीं है, कम हो रही है अब मेरे इन आँखों की बिनाई याद रहे हर चेहरा ओ शख्स ज़रूरी तो नहीं है, अमूमन बे मुरौत होना भी ज़रूरी है मुहब्बत में हमेशा हम ही रखे रवादारी ये ज़रूरी तो नहीं है, दे दिया करो कभी इमदाद मुफ़लिस को भी ज़रा सिर्फ़ मस्ज़िद में ही हो इमदाद ये ज़रूरी तो नहीं है, शिकस्त भी ज़रूरी है सबक़ ए ज़िन्दगी के लिए हर बार मिले फक़त फ़तह ये ज़रूरी तो नहीं है..!! - [संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है](https://hindigazals.com/sangdil-kahan-kisi-ka/): संगदिल कहाँ किसी का गमगुसार करते है ये मुर्दा ज़मीर कब मज़लूमो से प्यार करते है, ना फ़िक्र ए आलम, न खौफ़ ए परवरदिगार ये सरमाया ए मुल्क को भी तार तार करते है, हो जाए जो काबिज़ आईन ओ अदलिया पे तो फिर सब फ़ैसले भी दिल फ़िगार करते है, हाथों में आते ही तीर निहत्थो पे वार करते है ये भरे पेट वाले ही भूखो का शिकार करते है, माँ कह कर जो खाते है कसमे सुबह ओ शाम वही नालायक फिर जमीं को शर्मसार करते है, दावा ये कि बेगैरती आँखों से डर गई दुनियाँ झूठे,हम कहाँ तेरी बातों का ऐतबार करते है..!! - [जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है](https://hindigazals.com/jo-puchti-ho-to/): जो पूछती हो तो सुनो ! - [ये न पूछो कि कैसा ये हिन्दुस्तान होना चाहिए](https://hindigazals.com/ye-naa-pucho-ki-kaisa/): ये न पूछो कि कैसा ये हिन्दुस्तान होना चाहिए खत्म पहले मज़हब का घमासान होना चाहिए, इन्सान को अब तक मयस्सर नहीं इंसा होना अब तो मयस्सर इन्सान को इन्सान होना चाहिए, गर तुम चाहते हो कि ये वतन ये हिन्दुस्तान न मरे तो यहाँ न कोई हिन्दू, न मुसलमान होना चाहिए, ज़मीं पे मुश्किलों के सिवा कुछ भी दिखता ही नहीं इतनी बड़ी ज़मीं पे कुछ तो आसान होना चाहिए, मुहब्बत तो दुनियाँ में किसी को भी मिल सकती है दिल में बस प्यार का एक तूफान होना चाहिए, सदियों से इन्सान ज़मीं पर कभी बैठा ही नहीं थोड़ा तो इस ज़मीं पे भी आसमान होना चाहिए, ईद मुस्लिम नहीं होती न होली हिन्दू होती है सबकी इज्ज़त अपने का स्वाभिमान होना चाहिए..!! - [आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो](https://hindigazals.com/aankh-me-paani-rakho/): आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो, राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो, एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो, आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में कूच का ऐलान होने को है तैयारी रखो, ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो, ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो, ले तो आए शाइरी बाज़ार में 'राहत' मियाँ क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो..!! - [ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है](https://hindigazals.com/ye-aasmaa-zaruri-hai/): ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है ज़िन्दगी के वास्ते कुछ कमी भी ज़रूरी है, हर जगह मुस्कुराना भी वाज़िब नहीं होता कभी कभी तो आँखों में नमी भी ज़रूरी है, चुप रहे तो लोग समझेंगे ख़तावार तुमको यारो वक़्त बेवक्त बात करना भी ज़रूरी है, शराफ़त से नहीं बनते हर काम आज कल कभी कभी तो लहज़े में गरमी भी ज़रूरी है, गर हलचल न हो तो जीने का मज़ा ही क्या ? - [चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे](https://hindigazals.com/chehra-dekhen-tere-honth/): चेहरा देखें तेरे होंठ और पलकें देखे दिल पे आँखे रखे और तेरी साँसे देखें, सुर्ख लबो से सब्ज़ दुआएँ फूटी है पीले फूलो तुमको नीली आँखे देखे, साल होने को आया है वो कब लौटेगा ? - [न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है](https://hindigazals.com/naa-neend-aur-naa/): न नींद और न ख़्वाब से आँख भरनी है कि तुझे देख कर हसरत पूरी करनी है, किसी दरख्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना है किसी चिराग़ की छाँव में रात करनी है, वो फूल और किसी शाख पर नहीं खिलता वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मेरे हाथों से सँवरनी है, तमाम ना ख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ अब समन्दर से अकेले में बात करनी है, हमारे गाँव का हर फूल अब मरने वाला है अब इस गली से वो ख़ुशबू नहीं गुज़रनी है..!! - [अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी](https://hindigazals.com/azib-khwab-tha-uske/): अज़ीब ख़्वाब था उसके बदन पे काई थी वो एक परी जो मुझे सब्ज़ करने आई थी, वो एक चरागकदा जिसमे कुछ नहीं था मेरा जो जल रही थी वो कंदील भी पराई थी, न जाने कितने परिंदों ने उसमे शिरकत की कल एक पेड़ की तकरीब रौ नुमाई थी, हवाओं आओ अब मेरे गाँव की तरफ़ देखो जहाँ पे अब रेत पड़ी है पहले यहाँ तराई थी, सिपाह ए सल्तनत ने ख़ेमे लगा दिए है वहाँ जहाँ पे कभी मैंने निशानी तेरी दबाई थी, गले मिला था कभी दुःख भरे दिसम्बर से तब मेरे वज़ूद के अंदर भी धुंध छाई थी..!! - [ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है](https://hindigazals.com/khud-ho-gafil-to/): ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है कि ख़ुदा सब देख रहा है वो अंजान नहीं है, चाहे तुम कण कण में कहो या ज़र्रे ज़र्रे में ना हो वो मौज़ूद ऐसा तो कोई मकान नहीं है, अपना ही वादा वफ़ा नहीं करते ये बदबख्त आख़िर है तो इन्सान ही कोई हैवान नहीं है, तुझे अपना कहने से भी अब कतराने लगे है मगर एक तू है जो अब भी पशेमान नहीं है, वाकिफ़ थे तेरी हरकतों से पहले से ही हम गिर गया जो कुछ और मेयार तो हैरान नहीं है, वक़्त तो लगा तेरे शराफ़त का चोला उतरने में मगर ना पहचानते हम इतने बदगुमान नहीं है, रंगों के भरम से गीदड़ो को भी शेर समझ ले साहब अब हम लोग इतने भी नादान नहीं है, कोई भी फूट डाले और राज करता रहे हम पे बाबू अब ये वो अंग्रेजो वाला हिन्दुस्तान नहीं है, किसी भी आंडू पांडू की पहुँच हो जाए इस तक ये मेरा वतन है किसी ग़रीब का गिरेबान नहीं है, फ़र्क तो समझो हरामखोरी और सरफ़रोशी में जान देना वतन पे फर्ज़ है कोई एहसान नहीं है..!! - [बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है](https://hindigazals.com/bade-bade-shaharo-ki/): बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है ऊँची इमारतें और छोटे छोटे इन्सान है, अहल ए शहर हो चुका है तंगदिल यहाँ हर शख्स ख़ुद के हालात से परेशान है, दौड़ते भागते ही ज़िस्म देखने को मिले पल भर का न यहाँ किसी को आराम है, मोबाइल में क़ैद हुआ पड़ा है बचपन पार्क और गलियाँ यहाँ सभी सुनसान है, धुँआ, मिट्टी और भीड़ में धक्का मुक्की ये सब इनको मिले अनमोल वरदान है, यूँ तो कहने को आबादी बड़ी शहरों की पर हर एक अपने ही पड़ोसी से अंजान है, देखने को तो चहल पहल है इन शहरों में मगर ज़िन्दगी शहरियों की बड़ी वीरान है..!! - [काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था](https://hindigazals.com/kaali-raat-ke-sahraao/): काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था जिस ने शहर की दीवारों पर पहला ना'रा लिखा था, लाश के नन्हे हाथ में बस्ता और एक खट्टी गोली थी ख़ून में डूबी इक तख़्ती पर ग़ैन ग़ुबारा लिखा था, आख़िर हम ही मुजरिम ठहरे जाने किन किन जुर्मों के फ़र्द ए अमल थी जाने किस की नाम हमारा लिखा था, सब ने माना मरने वाला दहशतगर्द और क़ातिल था माँ ने फिर भी क़ब्र पे उसकी राज दुलारा लिखा था..!! - [शबनम है कि धोखा है कि झरना है कि तुम हो](https://hindigazals.com/shabnam-hai-ki-dhokha/): शबनम है कि धोखा है कि झरना है कि तुम हो दिल दश्त में एक प्यास तमाशा है कि तुम हो, एक लफ़्ज़ में भटका हुआ शायर है कि मैं हूँ एक ग़ैब से आया हुआ मिस्रा है कि तुम हो, दरवाज़ा भी जैसे मेरी धड़कन से जुड़ा है दस्तक ही बताती है पराया है कि तुम हो, एक धूप से उलझा हुआ साया है कि मैं हूँ एक शाम के होने का भरोसा है कि तुम हो, मैं हूँ भी तो लगता है कि जैसे मैं नहीं हूँ तुम हो भी नहीं और ये लगता है कि तुम हो..!! - [जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई](https://hindigazals.com/jis-se-mil-baithe/): जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई आज तक हमसे यही बस एक नादानी हुई, सैकड़ों पर्दे उठा लाए थे हम बाज़ार से गुत्थियाँ कुछ और उलझीं और हैरानी हुई, हम तो समझे थे कि उस से फ़ासले मिट जाएँगे ख़ुद को ज़ाहिर भी किया लेकिन पशेमानी हुई, क्या बताएँ फ़िक्र क्या है और क्या है जुस्तुजू हाँ तबीअत दिन ब दिन अपनी भी सैलानी हुई, क्यूँ खिलौने टूटने पर आब दीदा हो गए अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई..?? - [मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने](https://hindigazals.com/maine-duniya-se/): मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने सैकड़ो बार बेवफ़ाई की, आसमां चूमता है मेरे क़दम दाद दीजिए शिकश्तापाई की, आज वो टूट कर मिला मुझसे ये शुरुआत है जुदाई की, खुले रहते है सारे दरवाज़े कोई सूरत नहीं रिहाई की, मेरे कमरे में दो परिंदों ने इन्तेहाँ कर दी बेहयाई की..!! - [दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ](https://hindigazals.com/dil-chahe-ki-aaj/): दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ मैं ज़ात पे मेरी एक पैरा लिखूँ, मैं लिखूँ हयात सारी एक ही गज़ल में समन्दर लिखूँ और फिर सेहरा लिखूँ, तवील मुद्दत तक कोई पढ़ता रहे मुझे मैं हकीक़त लिखूँ और फिर ठहर जा लिखूँ, ख्याल ओ हालात क्या है अपने आजकल मैं क़ल्ब लिखूँ और फिर चेहरा लिखूँ, समझ आ ना सकूं किसी ना फ़हम को इसलिए मैं शऊर लिखूँ और फिर गहरा लिखूँ, अदावतें तो है हसदकारो को हमसे बहुत मैं हाल आप लिखूँ और फिर पहरा लिखूँ..!! - [उधर की शय इधर कर दी गई है](https://hindigazals.com/udhar-ki-shay-idhar/): उधर की शय इधर कर दी गई है ज़मीं ज़ेर ओ ज़बर कर दी गई है, ये काली रात है दो-चार पल की ये कहने में सहर कर दी गई है, तआरुफ़ को ज़रा फैला दिया है कहानी मुख़्तसर कर दी गई है, न पूछो कैसे गुज़री उम्र सारी ज़रा में उम्र भर कर दी गई है, इबादत में बसर करनी थी लेकिन ख़राबों में बसर कर दी गई है, कई ज़र्रात बाग़ी हो चुके हैं सितारों को ख़बर कर दी गई है, वो मेरी हमक़दम होने न पाई जो मेरी हमसफ़र कर दी गई है, हमारी जुगनुओं से दुश्मनी थी ज़रा पहले सहर कर दी गई है..!! - [तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन](https://hindigazals.com/tum-saath-chale-the/): तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन तुम राह से बिछड़े थे कि बस डूब गया दिन, जो तुम से महक जाए एक ऐसी न मिली रात जो तुम से चमक जाए एक ऐसा न मिला दिन, एक रंगी ए हालात से पथरा गईं आँखें जिस तरह कटी रात उसी तरह कटा दिन, वो और मसाफ़त थी जिसे झेल चुके हम ये और मसाफ़त है जिसे झेल रहा दिन..!! - [किस तवक़्क़ो' पे क्या उठा रखिए ?](https://hindigazals.com/kis-tavaqqo-pe-kya/): किस तवक़्क़ो' पे क्या उठा रखिए ? दिल सलामत नहीं तो क्या रखिए ? - [किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले](https://hindigazals.com/kis-ko-malum-hai/): किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले होगा कोई भी जहाँ ज़ात ए बशर से पहले ? कौन इस राज़ से है मावरा क्या जानते हो कौन मौजूद सदफ़ में था गुहर से पहले ? - [क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता](https://hindigazals.com/qadam-rakhta-hai-jab/): क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता तो छट जाता है सब गर्द ओ ग़ुबार आहिस्ता आहिस्ता, भरी आँखों से हो के दिल में जाना सहल थोड़ी है चढ़े दरियाओं को करते है पार आहिस्ता आहिस्ता, नज़र आता है तो यूँ देखता जाता हूँ मैं उसको कि चल पड़ता है जैसे क़ारोबार आहिस्ता आहिस्ता, इधर कुछ औरतें दरवाजों पर दौड़ी हुई आई उधर घोड़ो से उतरे शहसवार आहिस्ता आहिस्ता, किसी दिन कारखाना ए गज़ल में काम निकलेगा पलट आएँगे सब बेरोज़गार अहिस्ता आहिस्ता, तेरा पैकर ख़ुदा ने भी तो फ़ुर्सत में बनाया था बनाएगा तेरे ज़ेवर भी सुनार आहिस्ता आहिस्ता, मेरी गोशा नशीनी भी एक दिन बाज़ार देखेगी ज़रूरत कर रही है बेक़रार अहिस्ता आहिस्ता..!! - [सवालो के बदले लहज़े ऐसे...](https://hindigazals.com/sawalo-ke-badle-lahze/): सवालो के बदले लहज़े ऐसे कि हमें जानते ही न हो जैसे, मिजाज़ मौसम भी न बदले वो आजकल बदल गए ऐसे, न वो ख़ुलूस रहा न मुरौवत न वो हमदर्द रहे पहले जैसे, ख्याल ए यार था जो पहले यकायक बदल गया है ऐसे, रकीब तो खैर गैर थे नवाब दोस्त भी तो ना रहे दोस्तों जैसे..!! - [फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने](https://hindigazals.com/fuga-hai-ya-dua/): फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने सदाए दर्द क्या है कौन जाने ? ख़िरद पहना न दे जब तक मआ'नी कोई क्या बोलता है कौन जाने ? - [खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है](https://hindigazals.com/khafa-mat-ho-abhi/): खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है इब्तिदा ए मुहब्बत में अभी मल्हार के दिन है, क्यूँ अभी से बाहम नफ़रत के बीज बोयें ? - [जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में](https://hindigazals.com/jitne-haramkhor-the-kurb/): जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ जिनका रिकॉर्ड था वे चौधरी बने हैं उमर के उतार में, फ़ौरन खजूर छाप के परवान चढ़ गई जो भी ज़मीन ख़ाली पड़ी थी कछार में, बंजर ज़मीन पट्टे में जो दे रहे हैं आप ये रोटी का टुकड़ा है मियादी बुख़ार में, जब दस मिनट की पूजा में घंटों गुज़ार दें समझो कोई ग़रीब फँसा है शिकार में..!! - [आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे](https://hindigazals.com/aankh-par-patti-rahe/): आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाह ए वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे पढ़ने को मिले उन्हें टेलीप्राम्प्टर की आँख सोचने को कोई बाबा पौने दो आँख वाला रहे तालिब ए शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रियजनों का घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छै चमचे रहें माइक रहे और माला रहे..!! - [ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी](https://hindigazals.com/ye-amiro-se-hamari/): ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ? - [शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं](https://hindigazals.com/shab-e-hizraan-kee/): शब ए हिज्राँ की तवालत से घबरा गया हूँ मैं उसके अंदाज़ ए मुहब्बत से घबरा गया हूँ मैं, तू सराब ही सही मगर नज़र तो आ मुझको कि प्यास की शिद्दत से घबरा गया हूँ मैं, खिज़ां की तल्खियाँ सहने को तन्हा पत्ते छोड़ गए शज़र को अपनों की ऐसी ही हालत से घबरा गया हूँ मैं, कोई पहचान न सकेगा किसी को बरोज़ ए हश्र तेरे बाद तसव्वुर ए क़यामत से घबरा गया हूँ मैं, ख़ुदकुशी तो किसी मसले का हल नहीं है नवाब ये और बात कि खलुत से घबरा गया हूँ मैं..!! - [कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया](https://hindigazals.com/kuch-baat-hai-ki/): कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया एक बार नहीं बल्कि बार बार आया, भूल चुका था सब चोटें मैं इस दिल की ये क्या कि फिर वो ज़ख्म फ़िगार आया, वो ज़माने की साज़िश, वो अपनों का सितम कुछ नहीं बस याद एक एक वार आया, बताये तो कोई जा कर उस सितमगर को चलते चलते यहाँ तक उसका तलबगार आया, नवाब न कर जीत की लगन अब तू न जाने कब का है तू अपना दिल हार आया..!! - [न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे](https://hindigazals.com/na-jaane-kaisa-jaadoo/): न जाने कैसा जादू कर गई है तेरी मुक़द्दस आँखे तेरे सिवा और किसी की तरफ़ अब देखा जाता नहीं, नशे में चूर कर गई है, ये तेरी मुक़द्दस आँखे जब तक देख न लूँ तुझे, चैन मुझे कही आता नहीं, रंगीन दिलकश अंदाज़ रखती है तेरी मुक़द्दस आंखे जिसको शायरी में बयान मुझसे तो किया जाता नहीं, इश्क़ ए जुनून है मेरे इस दिल का तेरी ये मुक़द्दस आँखे किसी और का तसव्वुर भी अब मेरे दिल में आता नहीं, ये समन्दर से भी गहरी है तेरी मुक़द्दस आँखे डूब चुका हूँ उस गहराई में बाहर अब निकला जाता नहीं, देती है बे पनाह मुहब्बत भी तेरी ये मुक़द्दस आँखे ठुकराने के बाद भी उसे नवाब बे वफ़ा कहा जाता नहीं..!! - [भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे](https://hindigazals.com/bhala-gamo-se-kahan/): भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने कर दिया ऐलान ए गुमरही वर्ना हमारे पीछे बहुत लोग आने वाले थे, उन्हें तो ख़ाक में मिलना ही था कि मेरे थे ये अश्क कौन से ऊँचे घराने वाले थे, उन्हें क़रीब न होने दिया कभी मैं ने जो दोस्ती में हदें भूल जाने वाले थे, मैं जिन को जान के पहचान भी नहीं सकता कुछ ऐसे लोग मेरा घर जलाने वाले थे, हमारा अलमिया ये था कि हमसफ़र भी हमें वही मिले जो बहुत याद आने वाले थे, 'वसीम' कैसी तअल्लुक़ की राह थी जिसमें वही मिले जो बहुत दिल दुखाने वाले थे..!! - [उदास एक मुझी को तो कर नही जाता](https://hindigazals.com/udas-ek-mujhi-ko/): उदास एक मुझी को तो कर नही जाता वह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता, वह दिन गये कि मुहबबत थी जान की बाज़ी किसी से अब कोई बिछडे तो मर नही जाता, तुमहारा प्यार तो सांसों मे सांस लेता है जो होता नशा तो एक दिन उतर नही जाता, पुराने रिश्तों की बेग़रिज़यां न समझेगा वह अपने ओहदे से जब तक उतर नही जाता, 'वसीम' उसकी तडप है, तो उसके पास चलो कभी कुआं किसी प्यासे के घर नही जाता..!! - [भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?](https://hindigazals.com/bharosa-kaise-kare-koi/): भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? - [अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है](https://hindigazals.com/apne-thake-hue-dast/): अपने थके हुए दस्त ए तलब से माँगते है जो माँगते नहीं रब से वो सब से माँगते है, वो भीख माँगता है हाकिमों के लहज़े में हम अपने बच्चो का हक़ भी अदब से माँगते है, मेरे ख़ुदा उन्हें तौफ़ीक ए खुदशनासी दे चराग हो के उजाला जो शब से माँगते है, वो बादशाह इधर मुड़ के देखता ही नहीं हम अपने हिस्से की खैरात कब से माँगते है, मैं शाहज़ादा ए ग़ुरबत, अमीर ए दस्त ए अना ये लोग क्या मेरे नाम ओ नसब से माँगते है ? - [जो होने वाला है वो हादसा दिखाई तो दे](https://hindigazals.com/jo-hone-wala-hai-wo-hadsa/) - [हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है](https://hindigazals.com/har-gam-se-muskurane/): हर गम से मुस्कुराने का हौसला मिलता है ये दिल ही तो है जो गिरता और संभलता है, जलते दिल की रौशनी में तुम ढूँढ लो मंज़िल चिराग़ को देखो जो बड़े शौक से जलता है, दर्द भरी दुनियाँ में ख़ुद को पत्थर बना डालो ऐसा दिल न रखो जो मुहब्बत में पिघलता है, तुम समझ लेना उम्मीदों की शहनाइयाँ उसे कोई आह गर तुम्हारे दिल से निकलता है, किसी की याद सताए तो शाम का दिल देखो जो अपनी सुबह के लिए कई रंग बदलता है, ज़िन्दगी शय है जीने की जी लो ऐ दोस्तों ! - [क्या सरोकार अब किसी से मुझे](https://hindigazals.com/kya-sarokar-ab-kisi/): क्या सरोकार अब किसी से मुझे वास्ता था तो था बस तुझी से मुझे, बेहिसी का भी अब नहीं एहसास क्या क्या न हुआ बेरुखी से मुझे, मौत की आरज़ू भी कर के देखूँ क्या उम्मीदें है ज़िन्दगी से मुझे ? - [रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने](https://hindigazals.com/rakha-na-ab-kahin/): रखा न अब कहीं का दिल ए बेक़रार ने बर्बाद कर दिया ग़म ए बे इख़्तियार ने, दिल तो कभी का नज़्र किया जाँनिसार ने एक जाँ है वो भी आप का सदक़ा उतारने, इस फ़ित्नागर को जीत लिया हार मान कर क्या क्या मज़ा दिया हमें इस जीत हार ने, पहलू बदल बदल के मज़े दर्द के लिए वो करवटें दिखाईं दिल ए बेक़रार ने, अब ख़्वाब में भी दीद को आँखें तरस गईं बे ख़्वाब कर दिया ग़म ए शब ज़िंदादार ने, वो फ़स्ल ए गुल में दिल को जला कर चले गए इस मर्तबा तो आग लगा दी बहार ने, ख़ामोश भी हूँ मैं तो मुझे सुन रहे हैं वो इतना तो कर दिया मेरे दिल की पुकार ने, सौ सौ तरह की मौत से पाला पड़ा हमें क्या क्या करम किया है तेरे इंतिज़ार ने, दुनिया ए नुत्क़ बह गई सैलाब ए अश्क में पूछा जो हम से हाल किसी ग़मगुसार ने, नादाँ पुकार उस को जो सुनता है तेरी बात तू उसको छोड़ किस को चला है पुकारने, 'कामिल' निगाह उसकी जमी जिस पे जम गई चाहा जिसे पसंद किया चश्म ए यार ने..!! - [तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है](https://hindigazals.com/tamanna-do-dilo-ki/): तमन्ना दो दिलों की एक ही मालूम होती है अब उनकी हर ख़ुशी अपनी ख़ुशी मालूम होती है, दिलों पर सब के एक अफ़्सुर्दगी मालूम होती है तेरी महफ़िल में ये किसकी कमी मालूम होती है, समझ की चाल चल जाता है दीवाना मोहब्बत का बज़ाहिर वो भी एक दीवानगी मालूम होती है, बजा हँसता है गर हँसता है कोई मेरे जीने पर मुझे ख़ुद ज़िंदगी अपनी हँसी मालूम होती है, जहाँ क़ुदरत किसी से फेर लेती है नज़र अपनी वहीं इंसान की बेमाएगी मालूम होती है, यक़ीं मोहकम अज़ाएम आहनी सई ओ अमल पैहम उन्हीं से आदमी की ज़िंदगी मालूम होती है, कमीने रुख़ बदलते हैं हवा पर तो कमीने हैं शरीफ़ों में ये कमज़ोरी बुरी मालूम होती है, ज़रा ठहरो मेरे आँसू तो पूरे ख़ुश्क होने दो अभी आँखों में थोड़ी सी नमी मालूम होती है, उधर तो आ ज़रा मुँह चूम लूँ क़ुर्बान हो जाऊँ अदा ए बरहमी भी क्या भली मालूम होती है, यही दिल की लगी क्या जाने क्या क्या रंग लाएगी अभी तो आपको एक दिललगी मालूम होती है, किसी का हर तबस्सुम दिल के हक़ में घाव है ताज़ा पुरानी चोट भी उभरी हुई मालूम होती है, खिलौना है दिल ए मजबूर ए उलफ़त उनके हाथों का मोहब्बत की उसी से सादगी मालूम होती है, घसीटे जाते हैं काँटों में उन के चाहने वाले ख़ुदा जाने मोहब्बत क्यूँ बुरी मालूम होती है, जबीन ए शौक़ का जब राब्ता हो उनके क़दमों से उन्हीं सज्दों में शान ए बंदगी मालूम होती है, तसर्रुफ़ दीद के क़ाबिल है 'कामिल' चश्म ए साक़ी का नज़र मिलते ही दुनिया दूसरी मालूम होती है..!! - [तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है](https://hindigazals.com/tark-e-gam-ganvara/): तर्क ए ग़म गवारा है और न ग़म का यारा है अब तो दिल की हर धड़कन आ'लम ए आश्कारा है, हम जैसे बेसहारों को आपका सहारा है आप ही को दुख सुख में उम्र भर पुकारा है, मौज ख़ुद सफ़ीना है बहर ख़ुद किनारा है नाख़ुदा से क्या मतलब जब ख़ुदा हमारा है, हो चला यक़ीन जब से वो हसीं हमारा है ये ख़ुश ए'तिमादी भी एक बड़ा सहारा है, ये तो कहिए क्या उसको आप छोड़ सकते हैं जिसने मरते मरते भी आप ही को पुकारा है, लुत्फ़ ए बंदगी तुमसे और मेरी ज़िंदगी तुमसे तुम नहीं तो फिर किस को ज़िंदगी गवारा है, किस ख़ता पे झोंकी है ख़ाक मेरी आँखों में क्या मक़ाम था मेरा और कहाँ उतारा है, हासिल ए मुराद ए दिल चश्म ए इल्तिफ़ाफ़ उसकी सारी काएनात अपनी वो अगर हमारा है, फिर उसी पे मरने को जी उठूँगा महशर में फिर वही जिलाएगा जिस ने मुझको मारा है, बच के सब की नज़रों से हमने आँखों आँखों में अपने यार का सदक़ा बारहा उतारा है, ये तो साफ़ ज़ाहिर है हम उसी के बंदे हैं कोई उससे जा पूछे वो भी क्या हमारा है ? - [रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ?](https://hindigazals.com/rango-ki-aad-me/): रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ? हरा, भगवा में डूबे हुए केसरिया का मोल क्या जाने ? - [इश्क़ कर के मुक़र गई होगी...](https://hindigazals.com/ishq-kar-ke-muqar/): इश्क़ कर के मुक़र गई होगी वो तो लड़की है डर गई होगी, आदतें सब ख़राब कर के मेरी आप वो ख़ुद सुधर गई होगी, कर के वादे भूला दिए होंगे खा के कसमे मुक़र गई होगी, उसकी बस एक अदा ही महफ़िल में सबको दीवाना कर गई होगी, रूबरू है पर इश्तियाक़ नहीं नियत शौक़ भर गई होगी, मैं था पत्थर वो काँच की गुड़ियाँ टूट कर ही बिखर गई होगी, मैं जो उससे बिछड़ा हूँ यक़ीनन वो तो जीते जी मर गई होगी..!! - [बाद मरने के मेरे किसी केलब पे तो मेरा नाम होगा](https://hindigazals.com/baad-marne-ke-mere/) - [आग बहते हुए पानी में लगाने आई](https://hindigazals.com/aag-bahte-hue-paani/): आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई, फिर तेरी याद नए ख़्वाब दिखाने आई चाँदनी झील के पानी में नहाने आई, दिन सहेली की तरह साथ रहा आँगन में रात दुश्मन की तरह जान जलाने आई, मैं ने भी देख लिया आज उसे ग़ैर के साथ अब कहीं जा के मेरी अक़्ल ठिकाने आई, ज़िंदगी तो किसी रहज़न की तरह थी 'अंजुम' मौत रहबर की तरह राह दिखाने आई..!! - [होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे](https://hindigazals.com/hona-nahi-ab-usne/): होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे, कितनी उठाए हमने मशक्त तेरे लिए कितने अकेले झेले थे तूफान छोड़ दे, हम सा भी कोई मुफ़लिस ओ नादार न होगा जिसको कोई भी इश्क़ के दौरान छोड़ दे, तुम इतने दिल फ़रेब नहीं इत्तिफ़ाक से कि कोई तुमको देख कर ईमान छोड़ दे, तुमसे न चल सकेगा मुहब्बत का कारोबार ऐ दोस्त ! - [पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियाँ](https://hindigazals.com/padhti-rahti-hoon-main/): सब ने पढ़ ली है तुम्हारी चिट्ठियां..!! - [वो जो दिल के क़रीब होते है...](https://hindigazals.com/wo-jo-dil-ke-qarib-hote-hai/): वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न हो शहर में वो अदीब होते है, हर बीमारी के जो मुआलिज़ हो दिल के कब वो तबीब होते है, ज़िन्दगी बसर कर चुके हम लोग आजकल बस ग़रीब होते है, जिनकी सुनते है कारवाँ वाले काफिलो के नकीब होते है, अहल ए दुनिया को जो मयस्सर हो कब हमें वो नसीब होते है, फ़ितना परवर जो दोस्त हो नवाब वो दर हक़ीक़त रकीब होते है..!! - [हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे](https://hindigazals.com/ham-waqt-e-maut-ko-to/): हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ जाएँगे, जो भी है दुनियाँ में एक दिन सब फ़ना होगा जो महव ए आराइश है वो भी मिट्टी हो जाएँगे, ज़रा देखो जहाँ से शान वाले मिट गए कितने ना उनके नाम बाक़ी है न पूरे हो सके सपने, जो आजिज़ हो औरो के कभी क्या काम आएँगे अज़ाब ए क़ब्र से बचाने को बस आमाल जाएँगे, बदी वो खोटे सिक्के है जो बदनामी दिलाएँगे आखिरत में बस नेकी के सिक्के ही काम आएँगे, जो तोशे आखिरत के होंगे वही बस रंग लाएँगे रहेगी ज़ात ख़ुदा की बाक़ी सब फ़ना हो जाएँगे..!! - [हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है](https://hindigazals.com/hamne-kaise-yahan-guzari/): हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे उनको तो ज़िन्दगी प्यारी है, मुस्कुराना तो मेरी फ़ितरत है खून ए दिल खिलवतो में ज़ारी है, रास्ते बंद कर दे ये सब का दिल को उसकी गली भी प्यारी है, बाक़ी दुनिया के गम भी, गम होंगे तेरी फुर्क़त, सभी पे भारी है, क़त्ल ए दिल को ज़माने बीत गए कैसी अब तक ये बेक़रारी है ? - [याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला](https://hindigazals.com/yaad-aata-hai-mujhe-chhod-ke/): याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर वो हसीं पलकें भिगो देता है मेरे हालात पे दुनियाँ को हँसाने वाला, ये न सोचा था कभी तुम भी बदल सकते हो कैसे अपना लिया हर रंग ज़माने वाला ? - [मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर](https://hindigazals.com/maine-mana-ki-tum/): मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद सताती रही जो रात भर मुझे शब ए हिज़्र से बिछड़ के किधर जाएँगे, तेरी तहरीर जो पड़ी है मेरे सिरहाने उन वरकों के लफ्ज़ो पर बिखर जाएँगे, यादों की गारों में जो बिखरे अल्फाज़ उन लफ्ज़ो की रौनक में ठिठुर जाएँगे, क़ब्ल इससे कि दाद सुनो तुम हमसे इसी वास्ते हम तुमसे मुकर जाएँगे..!! - [बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह](https://hindigazals.com/baat-karte-hai-yahan/): बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई मंज़िल न कोई राह, ना मक़सद ही कोई है ये लोकतंत्र भी यतीमो के मुक़द्दर की तरह, अब तो वही लोग बचा सकते है इस कश्ती को डूब सकते है जो लोग मंझधार में लंगर की तरह, मैंने ख़ुशबू सा बसाया था जिसे अपने तन मन में वही बैठा है मेरे पहलू में किसी खंज़र की तरह, मेरा ये दिल झील के पानी की तरह काँपा था उसने बात ही कुछ यूँ उछाली कंकर की तरह, जिनकी ठोकरों से कभी किले काँप के ढह जाते थे कल की आँधी में उड़े वही लोग छप्पर की तरह..!! - [क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब](https://hindigazals.com/kyun-ranva-rakhte-ho/): क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब बीच में लाना पड़े थाना कचहरी बे सबब, मैंने उस रुख से इसे जितना अलग रखा अबस आँख थी गुस्ताख़ मेरी जा के ठहरी बे सबब, ना किसी पायल की छन छन ना दस्तक कोई कर रही है वार गहरे ये रात गहरी बे सबब, पेड़ से रिश्ता है उसका और ज़मीं के साथ भी दे रही फिर भी दुहाई है गिलहरी बे सबब, अपने हक़ के वास्ते सब ही वहाँ मौज़ूद थे आ गया ज़द में मगर नवाब शहरी बे सबब, सच को सुनने का भला कब हौसला इनमे रहा बन रही है क्यूँ हुकुमत ऐसी बहरी बे सबब..?? - [दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते](https://hindigazals.com/duniya-me-karne-padte/): दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते कि मौत से पहले कई बार मर जाते है हम, ज़िन्दगी में ऐसे ऐसे हालातो से गुज़रते है कि जो नहीं चाहते वो भी कर जाते है हम, आवारगी का ख़्वाब पाल कर कुँवारेपन में शादी के बाद अचानक ही ठहर जाते है हम, रिश्तो में इस कदर साज़िशो को झेलते है कि अपनों को देख कर भी डर जाते है हम, हम ख़ुद अपना दर्द किसी से कह नहीं पाते कितने गम दिल में लिए ही मर जाते है हम..!! - [बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से](https://hindigazals.com/bas-itni-si-baat-bibi-khafa-hai/): बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से कि माँ के हाथ पे ला कर दिहाड़ी रखता है, अभी तो क़ब्रे भी यहाँ महफूज़ ना रही नवाब किसी को दफ़न जो करता है, झाड़ी रखता है, उतारा शीशे में उसने, फ़रेब दे के मुझे वो एक शख्स जो ख़ुद को अनाड़ी रखता है, बना लिया है जो कच्चा मकाँ किसी ने यहाँ वो झोपड़ा भी अगर है तो माड़ी रखता है, कभी नवाब के मन को टटोल कर तो देखो ये दिल का मोम है, चेहरा पहाड़ी रखता है..!! - [राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है](https://hindigazals.com/rabta-zism-ka-jab/): राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है आदमी मुख्तलिफ़ हालात में बँट जाता है, देख कर साहिल दरिया का सकूत पैहम चढ़ के आया हुआ तूफ़ान भी पलट जाता है, आईना देख कर होता है तौहम का असीर क़द तो वही होता है पर आदमी घट जाता है, कोई ख़ुशबू गम ए हालात को मिलती होगी साँप बन के जो रग ए जाँ से लिपट जाता है, फिर उसे मिलती नहीं मंज़िल ए मक़सूद कभी जादा ए इश्क़ से एक गाम जो हट जाता है, दिल भी क्या शय है भला देता है सारे मज़मून और एक लफ्ज़ जो मक़सूद है रट जाता है, हर नई सुबह का मज़मून नया है नवाब हर नई सुबह को एक सफहा पलट जाता है..!! - [उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है](https://hindigazals.com/umr-kahte-hai-jise-saanso-ki/): उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है चश्म ए बीना में हर के लम्हा नई तस्वीर है, ज़िन्दगी इनआम की सूरत में एक ताज़ीर है जो कभी देखा न था उस ख़्वाब की ताबीर है, जो पस ए पर्दा है उसको चाहे जो कह लीजिए पेश जो आए यहाँ, वही इन्सान की तक़दीर है, कोई मंज़र यूँ नहीं जिसका कि पस मंज़र नहीं ज़ात का इज़हार गोया ज़ात की तशहीर है, रात खाएफ़ है कि तहलील सहर हो जाएगी सुबह को ये फिक्र ला हक़ शाम दामन गीर है..!! - [दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए](https://hindigazals.com/dastras-me-na-ho-halaat/): दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए वक़्त दिखलाए करिश्मात तो फिर क्या कीजिए, साहब ए वक़्त है जो उनकी तबीयत चाहे ज़ुल्म को कह दे मुक़ाफात तो फिर क्या कीजिए, तीरगी गम ए हस्ती का तसलसुल टूटे चलिए ये कट भी गई रात तो फिर क्या कीजिए, ज़िन्दा रहने के लिए शर्त ए तहम्मुल ठहरी उस पे क़ायल न हुई ज़ात तो फिर क्या कीजिए, ज़ीस्त के लम्हों को रखता है सजा कर शायर माँग ले कोई हिसाबात तो फिर क्या कीजिए..!! - [हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले](https://hindigazals.com/hame-koi-gam-na/): हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से पहले, ये है मेरी बदनसीबी, तेरा क्या कुसूर इसमें ? - [जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत](https://hindigazals.com/jaane-kyun-aajkal-tumhari/): जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत यादो के बंद कमरे में ज़िन्दगी सिसकती है बहुत, पनपने ही नहीं देता कभी बेदर्द सी ख्वाहिश को महसूस तुम्हे जो करने की कोशिश करती है बहुत, दावे करती है ये ज़िन्दगी जो हर दिन तुझे भुलाने के किसी न किसी बहाने से याद तुझे करती है बहुत, आहट से भी चौक जाए, मुस्कुराने से भी कतराए जाने क्यूँ अब ये ज़िन्दगी जीने से डरती है बहुत..!! - [ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे...](https://hindigazals.com/ye-socha-nahi-hai-ki/): ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे मगर हम अब यहाँ से गुज़र जाएँगे, इसी खौफ़ से रातों को नींद आती नहीं कि हम ख़्वाब देखेंगे तो डर जाएँगे, डराता बहुत है ये समन्दर हमें समन्दर में एक दिन उतर जाएँगे, जो रोकेंगी रास्ता कभी ये मंज़िले तो घड़ी दो घड़ी को ठहर जाएँगे, कहाँ देर तक रात ठहरती है कोई उसी तरह ये दिन भी गुज़र जाएँगे, इसी खुशगुमानी ने तन्हा किया है जिधर हम जाएँगे, हमसफ़र जाएँगे, बदलता है सब कुछ कभी न कभी एक दिन ये सितारे भी बिखर जाएँगे..!! - [भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है](https://hindigazals.com/bhitar-bhitar-aag-bhari/): भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है तेरी मेरी, मेरी तेरी सब की यही कहानी है, ये हलचल, ये खेल तमाशे सब रोटी की माया है पेट भरा है तो फिर प्यारे ऋतु हर एक सुहानी है, इल्म का कोई मान नहीं दौलत का बस सम्मान यहाँ गर दौलत है पास तुम्हारे तो मैली चादर धानी है, ये हिन्दू है, वो मुस्लिम है, ये सिख वो ईसाई है सब के सब है ये वो पर कोई न यहाँ हिन्दुस्तानी है, जिसके कारण गले कटे और लोगो के ईमान बिके इस छोटी सी कुर्सी की तो अदभुत बड़ी कहानी है, हंस जहाँ पर भूखो मरते, बगुले करते राज जहाँ वो ही देश है भारत जिसका जग में कोई न सानी है, सौ सौ बार यहाँ जन्मा मैं सौ सौ बार मरा हूँ मैं रंग नया है, रूप नया है सूरत मगर पुरानी है..!! - [काम उसके सारे ही सय्याद वाले है...](https://hindigazals.com/kaam-uske-saare-hi/): काम उसके सारे ही सय्याद वाले है मगर मैं उसे बहेलिया नहीं लिखता सर्दियाँ जितनी हो सब सह लेता हूँ कमज़र्फ धूप को अर्ज़ियाँ नहीं लिखता शहर भी अब मुझे याद नहीं करता गाँव भी हमको चिठ्ठियाँ नहीं लिखता सफ़हे सादा ही छोड़ दिया करता हूँ मगर कभी मैं तल्खियाँ नहीं लिखता..!! - [हमसे तो किसी काम की बुनियाद न होवे](https://hindigazals.com/hamse-to-kisi-kaam-ki/): हम से तो किसी काम की बुनियाद न होवे जब तक कि उधर ही से कुछ इमदाद न होवे, हम को भी नहीं चैन तेरे ग़मज़ों से दिलबर जब तक कि नया एक सितम ईजाद न होवे, ऐ आह ज़रा उठियो तो आहिस्ता कि वो जो थोड़ा सा असर है कहीं बर्बाद न होवे, दी थी ये दुआ किस ने मिरे दिल को इलाही उजड़े ये घर ऐसा कि फिर आबाद न होवे, देखा न किसी वक़्त मैं हँसते हुए उसको ये भी कोई दिल है जो कभी शाद न होवे, भूले से भी भूलो न कभी ग़ैरों का तुम नाम और नाम हमारा ही तुम्हें याद न होवे, क्यूँ देखो हो उस का क़द ओ रू बुलबुल ओ क़ुमरी क्या समझे हो तुम ये गुल ओ शमशाद न होवे, मर जाएँ क़फ़स में यूँ ही हम आह तड़प कर इतनी जो ख़बर लेने को सय्याद न होवे, दिल जल के जहाँ सुर्मा हुआ क़ैस का अब तक उस जा पे जरस पहुँचे तो फ़रियाद न होवे, मेरे लिए क़ातिल भी अगर होवे तो होवे पर ग़ैर के हक़ में तो वो जल्लाद न होवे, वारस्ता जो हो क़ैद से हस्ती के तो बेहतर पर दाम से तेरे 'हसन' आज़ाद न होवे..!! - [हम न निकहत हैं न गुल हैं जो महकते जावें](https://hindigazals.com/ham-na-nikhat-hai/): हम न निकहत हैं न गुल हैं जो महकते जावें आग की तरह जिधर जावें दहकते जावें, ऐ ख़ुशा मस्त कि ताबूत के आगे जिसके आब पाशी के बदल मय को छिड़कते जावें, जो कोई आवे है नज़दीक ही बैठे है तेरे हम कहाँ तक तेरे पहलू से सरकते जावें, ग़ैर को राह हो घर में तेरे सुब्हान अल्लाह और हम दूर से दर को तेरे तकते जावें, वक़्त अब वो है कि एक एक 'हसन' हो के ब तंग सब्र ओ ताब ओ ख़िरद ओ होश खिसकते जावें..!! - [अपने घर की चारदीवारी में अब...](https://hindigazals.com/apne-ghar-ki-chaardeewari/): अपने घर की चारदीवारी में अब लिहाफ़ में भी सिहरन होती है जिस दिन से किसी को गुर्बत में सड़को पर ठिठुरते देखा है, पहले छोटी छोटी ख़ुशियों को सब मिल कर साथ मनाते थे आज कल छोटे छोटे आँगन में रिश्तो को सिमटते देखा है, तुम आज भी मेरे अपने हो शायद इन्सान हो और ज़माने के वरना यहाँ मौसम से पहले हमने अपनों को बदलते देखा है, किस बात पे तू इतराता है ? - [ज़िस्म क्या है ? रूह तक सब कुछ....](https://hindigazals.com/zism-kya-hai-ruh-tak/): ज़िस्म क्या है ? - [अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना...](https://hindigazals.com/andhera-safar-hai-khabardar/): अँधेरा सफ़र है ख़बरदार रहना लुटेरा शहर है ख़बरदार रहना, गला काटतें है बड़ी सादगी से ये इनका हुनर है ख़बरदार रहना, गज़ल कह रहे हो जो कम काफ़ियो की कठिन ये बहर है ख़बरदार रहना, हुई बर्फ़ बारी ये ठंडी हवाएँ उसी का असर है ख़बरदार रहना, यहाँ सल्तनत है घनी तीरगी की जो तंग ए नज़र है ख़बरदार रहना..!! - [जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे](https://hindigazals.com/jo-dalhauji-na-kar/): जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे, सुरा व सुंदरी के शौक़ में डूबे हुए रहबर दिल्ली को रंगीलेशाह का हम्माम कर देंगे, ये वंदेमातरम् का गीत गाते हैं सुबह उठकर मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे, सदन को घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे अगली योजना में घूसख़ोरी आम कर देंगे..!! - [यूँ बे दर्द बन कर ना रहा कीजिए...](https://hindigazals.com/yun-bedard-ban-kar/): यूँ बेदर्द बन कर ना रहा कीजिए मेरे मर्ज़ की भी तो कोई दवा कीजिए, आप मुहब्बत लिए घूमते है अगर इस दिल के लिए भी दुआ कीजिए, दर्द दे कर किसी को भूलना ही है तो यादो में फिर यूँ ना फिरा कीजिए, यहाँ काँटो से बच कर चले या नहीं बेवफाओं से बच कर चला कीजिए, जान ओ दिल से है जो आप ही के लिए इस कदर तो न उसको छला कीजिए, मिले मुझको तसल्ली और ख़ुद को सुकूं अब इतना तो ग़रीब का भला कीजिए..!! - [घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है](https://hindigazals.com/ghar-me-thande-chulhe/): घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है ? - [उनका दावा मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया](https://hindigazals.com/unka-daava-muflisi-ka/): उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया पर हकीक़त ये है मौसम और बदतर हो गया, बंद कल को क्या किया मुखिया के खेतो में बेगार अगले दिन ही एक होरी और बेघर हो गया, जब हुई नीलाम कोठे पर किसी की आबरू फिर अहिल्या का सरापा ज़िस्म पत्थर हो गया, रंग रोगन से पुता, पहलू में लेकिन दिल नहीं आज का इन्सान भी काग़ज का पैकर हो गया, माफ़ करिए, सच कहूँ तो आज हिन्दुस्तान में कोख़ ही ज़रखेज़ है अहसास बंज़र हो गया..!! - [सियासी महाभारत में इसके पात्र सारे आ गए](https://hindigazals.com/siyasi-mahabharat-me-iske/): सियासी महाभारत में इसके पात्र सारे आ गए योगगुरु भागे कहीं तो कहीं अन्ना हजारे आ गए, ठाकरे जो भी कहे वही तो बॉलीवुड दोहराएगा इस लिए पण्डाल में सारे फ़िल्मी सितारे आ गए, बाबा के चरणों में है सभी खाते विदेशी बैंक के कैसे कैसे भक्त गण जमुना जी के किनारे आ गए, आडवानी, अडानी, गडकरी आये तो पर्दा उठ गया सौदागर है ये सारे ही वोट के दामन पसारे आ गए..!! - [शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं](https://hindigazals.com/shaam-ko-jis-waqt/): शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं मुस्कुरा देते है बच्चे और मर जाता हूँ मैं, जानता हूँ रेत पर वो चिलचिलाती धूप है जाने किस उम्मीद में फिर भी उधर जाता हूँ मैं, सारी दुनियाँ से अकेले जूझ लेता हूँ कभी और कभी अपने ही साये से भी डर जाता हूँ मैं, ज़िन्दगी जब मुझ से मजबूती की रखती है उम्मीद फ़ैसले की उस घड़ी में क्यूँ बिखर जाता हूँ मैं ? - [कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में बह गए](https://hindigazals.com/kuch-adhuri-hasraten-ashk/): कुछ अधूरी हसरतें अश्क ए रवाँ में बह गए क्या कहें इस दिल की हालत, शिद्दत ए गम सह गए, गुफ़्तगू में फूल झड़ते थे जिनके कभी होंठ से यादों के कारवाँ अब ख़ार बन दिल में चुभ कर रह गए, जब मिले हम से कभी एक अज़नबी की तरह पर तिरछी निगाहों से वो मेरे दिल की कहानी कह गए, यूँ तो वस्ल के हर लम्हे यादों के नग़मे बन गए वही नग़मे अब घुट के सोंज़ ओ साज़ दिल में रह गए, जिस दिल के आईने में सिर्फ़ उसका ही अक्स था तोड़ डाला शीशा ए दिल, हम ये सितम भी सह गए, दो क़दम ही दूर थे, मंज़िल को जाने क्या हुआ ? - [तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ](https://hindigazals.com/tumhe-pujta-tha-diya/): तुम्हे पूजता था दीया वो बुझा दूँ तुम्हारे बिना भी दुनियाँ बसा दूँ, सुनो इश्क़ में अब यही चाहता हूँ मुझे तुम भुलाओ तुम्हे मैं भूला दूँ, अगर है लकीरे तेरे नाम की तो यही आरज़ू अब इन्हें मैं मिटा दूँ, कभी तू मिला था इबादत के बदले यही सोचता हूँ अब दुआ में भूला दूँ, सारी यादे वो वादे जी दिल में है मेरे उन्हें एक पल में मैं दिल से हटा दूँ, मिले जो समन्दर कोई राह में तो तेरी याद को मैं नदी सा बहा दूँ, गुमाँ था मुझे कि यही रस्म होगी वफ़ा ही मिलेगी अगर मैं वफ़ा दूँ, यही है तमन्ना कि मैं भी तुम्हे अब दिया है जो तुमने वही बस सिला दूँ, मेरी ख्वाहिशे बस यही आजकल है मिले कोई तुमसा तो तुमसे मिला दूँ..!! - [ज़माना आया है बेहिजाबी का आम दीदार ए यार होगा](https://hindigazals.com/zamana-aaya-hai-behizabi/): ज़माना आया है बेहिजाबी का आम दीदार ए यार होगा सुकूत था पर्दादार जिसका वो राज़ अब आश्कार होगा, गुज़र गया अब वो दौर साक़ी कि छुप के पीते थे पीने वाले बनेगा सारा जहान मयख़ाना हर कोई बादा ख़्वार होगा, कभी जो आवारा ए जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसेंगे बरहना पाई वही रहेगी मगर नया ख़ार ज़ार होगा, सुना दिया गोश ए मुंतज़िर को हिजाज़ की ख़ामुशी ने आख़िर जो अहद सहराइयों से बाँधा गया था फिर उस्तुवार होगा, निकल के सहरा से जिस ने रूमा की सल्तनत को उलट दिया था सुना है ये क़ुदसियों से मैं ने वो शेर फिर होशियार होगा, किया मिरा तज़्किरा जो साक़ी ने बादा ख़्वारों की अंजुमन में तो पीर ए मयख़ाना सुन के कहने लगा कि मुँह फट है ख़ार होगा, दयार ए मग़रिब के रहने वालो ख़ुदा की बस्ती दुकाँ नहीं है खरा जिसे तुम समझ रहे हो वो अब ज़र ए कम अयार होगा, तुम्हारी तहज़ीब अपने ख़ंजर से आप ही ख़ुदकुशी करेगी जो शाख़ ए नाज़ुक पे आशियाना बनेगा ना पाएदार होगा, सफ़ीना ए बर्ग ए गुल बना लेगा क़ाफ़िला मोर ए ना तावाँ का हज़ार मौजों की हो कशाकश मगर ये दरिया से पार होगा, चमन में लाला दिखाता फिरता है दाग़ अपना कली कली को ये जानता है कि इस दिखावे से दिलजलों में शुमार होगा, जो एक था ऐ निगाह तू ने हज़ार कर के हमें दिखाया यही अगर कैफ़ियत है तेरी तो फिर किसे ए'तिबार होगा, कहा जो क़मरी से मैं ने इक दिन यहाँ के आज़ाद पा ब गिल हैं तो ग़ुंचे कहने लगे हमारे चमन का ये राज़दार होगा, ख़ुदा के आशिक़ तो हैं हज़ारों बनों में फिरते हैं मारे मारे मैं उस का बंदा बनूँगा जिस को ख़ुदा के बंदों से प्यार होगा, ये रस्म ए बरहम फ़ना है ऐ दिल गुनाह है जुम्बिश ए नज़र भी रहेगी क्या आबरू हमारी जो तू यहाँ बेक़रार होगा, मैं ज़ुल्मत ए शब में ले के निकलूँगा अपने दरमाँदा कारवाँ को शह निशाँ होगी आह मेरी नफ़स मिरा शो'ला बार होगा, नहीं है ग़ैर अज़ नुमूद कुछ भी जो मुद्दआ तेरी ज़िंदगी का तू इक नफ़स में जहाँ से मिटना तुझे मिसाल ए शरार होगा, न पूछ 'इक़बाल' का ठिकाना अभी वही कैफ़ियत है उस की कहीं सर ए रहगुज़ार बैठा सितम कश ए इंतिज़ार होगा..!! - [जाने किस करनी का फल होगा](https://hindigazals.com/jaane-kis-karni-ka/): जाने किस करनी का फल होगा कैसी फिजा, कैसे मौसम में जागे हम ? - [ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है](https://hindigazals.com/naa-maszide-naa-shiwale/): ना मस्ज़िदे ना शिवाले तलाश करते है ये भूखे पेट निवाले तलाश करते है, हमारी सादा दिली देखो इस ज़माने में दुखो को बाँटने वाले तलाश करते है, मुझे तो इस पे ताअज्ज़ुब है अक्ल के अंधे दीये बुझा के उजाले तलाश करते है, किसी के काम न आये कभी ज़माने में और अपने चाहने वाले तलाश करते है, राह ए वफ़ा में अभी दो क़दम चले भी नहीं अभी से पाँव के छाले तलाश करते है, निगाह रखते है साक़ी वो तेरी आँखों पर सुकूं ए दिल जो प्याले तलाश करते है..!! - [तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार बरसो से](https://hindigazals.com/tumhare-hizr-me-hai/): तुम्हारे हिज़्र में है ज़िन्दगी दुश्वार बरसो से तुम्हे मालूम क्या तुम हो समन्दर पार बरसों से, चले आओ तुम्हारे बिन न जीते है न मरते है बनी है ज़िन्दगी जैसे गले का हार बरसों से, कभी दुनियाँ से हम हारे, कभी तुमसे, कभी ख़ुद से हमारी इश्क़ में होती रही है हार बरसों से, निकलना कश्ती ए उम्मीद तूफानों से मुश्किल है एक ऐसे नाख़ुदा के हाथ है पतवार बरसों से, इसी मिल्लत के गहवारे को हिन्दुस्तान कहते है कहीं रौशन शिवाले और कहीं मीनार बरसों से, दिन रात किस की मुन्तज़िर रहती है ये आँखे ये किस की राह तकते है दर ओ दीवार बरसों से..!! - [राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल अच्छा है](https://hindigazals.com/rahat-e-jaan-se/): राहत ए जाँ से तो ये दिल का वबाल अच्छा है उस ने पूछा तो है इतना तेरा हाल अच्छा है, माह अच्छा है बहुत ही न ये साल अच्छा है फिर भी हर एक से कहता हूँ कि हाल अच्छा है, तेरे आने से कोई होश रहे या न रहे अब तलक तो तेरे बीमार का हाल अच्छा है, ये भी मुमकिन है तेरी बात ही बन जाए कोई उसे दे दे कोई अच्छी सी मिसाल अच्छा है, दाएँ रुख़्सार पे आतिश की चमक वजह ए जमाल बाएँ रुख़्सार की आग़ोश में ख़ाल अच्छा है, आओ फिर दिल के समंदर की तरफ़ लौट चलें वही पानी वही मछली वही जाल अच्छा है, कोई दीनार न दिरहम न रियाल अच्छा है जो ज़रूरत में हो मौजूद वही माल अच्छा है, क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को 'अदीम' होंठ अच्छे हों तो समझो के सवाल अच्छा है..!! - [किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए](https://hindigazals.com/kis-or-ye-safar/): किस ओर ये सफ़र है, संभल जाइए कौन कब किस डगर है, संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते हुए आज कल हर आदमी दर ब बदर है, संभल जाइए, चाहे कहिए सड़क इसको या एक नदी इस कदर ये रह गुज़र है, संभल जाइए, क्या गिनना ? - [तसव्वुर में भी जिसकी जुस्तुजू करता है दिल मेरा](https://hindigazals.com/tasavvur-me-bhi-jiski/): तसव्वुर में भी जिसकी जुस्तुजू करता है दिल मेरा उसी से हिज्र में भी गुफ़्तुगू करता है दिल मेरा, नदामत से गुनाहों पर जो रोती हैं कभी आँखें इन्ही पाकीज़ा अश्कों से वुज़ू करता है दिल मेरा, तेरी यादों के ख़ंजर ज़ेहन को जब चाक करते हैं उसे झूठी तसल्ली से रफ़ू करता है दिल मेरा, जसारत देखने की जिस को कोई भी नहीं करता उसी से दो दो बातें रूबरू करता है दिल मेरा, गुज़ारे थे जो मदहोशी के आलम में कभी 'साहिल' उन्ही लम्हों की फिर से आरज़ू करता है दिल मेरा..!! - [हासिल हुई जब से आरज़ी शोहरते...](https://hindigazals.com/haasil-hui-jab-se/): हासिल हुई जब से आरज़ी शोहरते माल ओ ज़र के नशे में चूर हो गया, पा के ऊँचा रूतबा वो दूर हो गया बेटा ना रहा अब वो हुज़ूर हो गया, माँ बाप को समझने लगा है एक बोझ कहता है ढोते ढोते मज़दूर हो गया, क़ाबिल बनाने में ख़ूँ पानी कर दिया रिश्ता खून वाला उसे नामंज़ूर हो गया, इल्ज़ाम देता है वो जलते है देख कर इल्ज़ाम देना अब उसका दस्तूर हो गया..!! - [रोज़मर्रा वही एक ख़बर देखिए](https://hindigazals.com/rozmarra-wahi-ek-khabar/): रोज़मर्रा वही एक ख़बर देखिए अब तो पत्थर हुआ काँचघर देखिए, सड़के चलने लगी आदमी रुक गया हो गया यूँ अपाहिज़ सफ़र देखिए, सारा आकाश अब इनके सीने में है काट कर इन परिंदों के पर देखिए, मैं हकीक़त न कह दूँ कही आपसे मुझको खाता है हरदम ये डर देखिए, धूप आती है इनमे न ठंडी हवाएँ खिड़कियाँ भी हो गई बेअसर देखिए..!! - [एक निहत्थे आदमी के हाथ में क़िस्मत ही काफी है](https://hindigazals.com/ek-nihatthe-aadmi-ke/): एक निहत्थे आदमी के हाथ में क़िस्मत ही काफी है हवाओं का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी है, ज़रूरत ही नहीं अहसासों को अल्फाज़ की कोई समंदर की तरह अहसासों में शिद्दत ही काफी है, मुबारक़ हो तुम्हे शहर वालो जीने के अंदाज़ शहरों में हमें तो हमारे गाँवों में मरने की बस राहत ही काफी है, नफ़रत को हथियार बना कर इंसानियत मिटाने वालो तुम जैसो से निपटने के लिए एक क़ुदरत ही काफी है, मुफ़लिस की क़िस्मत में पक्की दीवार नहीं तो क्या ? - [आदमी केवल वहम में तानता है](https://hindigazals.com/aadmi-kewal-vaham-me/): आदमी केवल वहम में तानता है शर्तियाँ औकात वो अपनी जानता है, रहनुमाई झूठ की कर ले मगर वो वक़्त की सच्चाइयाँ पहचानता है, जानता है हश्र उसके बाद का भी गन्दगी में पैर बरबस ही सानता है, चार दिन का है तमाशा ए ज़िन्दगी मस्तियाँ फिर भी हमेशा छानता है, है उसे मालूम शिखरों की ढलाने वो बुलंदी की हसरते यूँ ही ठानता है, कोई नहीं छोटा कभी ख़ुद से यहाँ पर अफ़सोस कोई ख़ुद को ख़ुदा मानता है..!! - [क़ुदरत का करिश्मा भी क्या बेमिसाल है](https://hindigazals.com/qudrat-ka-karishma-bhi/): क़ुदरत का करिश्मा भी क्या बेमिसाल है चेहरे सफ़ेद काले पर खून सबका लाल है, हिन्दू है यहाँ कोई, तो कोई मुसलमान है कितना फरेबकार ये मज़हब का जाल है, क़ायम न हो सके यकज़हती हमारे मुल्क में सदा दूरी बने रहे ये सियासत की चाल है, ज़मीं पे इन्सान ने बसा तो ली है बस्तियां पर इंसानियत का आज भी जग में अकाल है, दिन ईद का है, आ के गले से लगा ले मुझे हर होली पे जैसे तू मुझे मलता गुलाल है..!! - [ये क़ुदरत भी अब तबाही की हुई शौक़ीन लगती है](https://hindigazals.com/ye-qudrat-bhi-ab/): ये क़ुदरत भी अब तबाही की हुई शौक़ीन लगती है ऐ दौर ए ज़दीद साज़िश तेरी बहुत संगीन लगती है, अदब, तहज़ीब, रिश्तो की नहीं है फ़िक्र अब कोई आजकल दुनियाँ ख़ुद पसंदी में हुई तल्लीन लगती है, हर एक शख्स अब यहाँ हैरान है ज़ायका ए ज़िन्दगी से ये कभी खट्टी, कभी मीठी तो कभी नमकीन लगती है, अँधेरा ए गम दिल के तहखानो में उनके क़ैद रहते है जिनकी ज़िन्दगी देखने में अक्सर बहुत रंगीन लगती है, ख़ुदा, मज़हब, ज़मीं, इन्सान तक तो तक़सीम कर डाले फ़ज़ा इस मुल्क की अब तो बहुत ग़मगीन लगती है..!! - [बात अब करते है क़तरे भी समंदर की तरह](https://hindigazals.com/baat-ab-karte-hai/): बात अब करते है क़तरे भी समंदर की तरह लोग ईमान बदलते है कलेंडर की तरह, कोई मंज़िल न कोई राह न मकसद कोई है ये जनतंत्र यतीमो के मुक़द्दर की तरह, बस वही लोग बचा सकते है इस कश्ती को डूब सकते है जो मंझधार में लंगर की तरह, मैंने ख़ुशबू सा बसाया था जिसे तन मन में मेरे पहलू में वही बैठा है खंज़र की तरह, मेरा दिल झील के पानी की तरह काँपा था तुमने वो बात उछाली थी जो कंकर की तरह, जिनकी ठोकर से किले काँप के ढह जाते थे कल की आँधी में उड़े लोग वो छप्पर की तरह..!! - [हम प्यास के मारों का इस तरह गुज़ारा है](https://hindigazals.com/ham-pyas-ke-maaro-ka/): हम प्यास के मारों का इस तरह गुज़ारा है आँखों में नदी लेकिन हाथो में किनारा है, दो चार क़दम चल कर दो चार घड़ी रुकना मंज़िल भी तुम्हारी है रस्ता भी तुम्हारा है, पलकों के नशेमन से होंठों के गुलिस्ताँ तक कुछ हुस्न तुम्हारा है कुछ इश्क़ हमारा है, फूलों के महकने का कोई तो सबब होगा या ज़ुल्फ़ परेशाँ है या लब का इशारा है, बर्फ़ाब सी दुनियाँ में बस इश्क़ को थामे रख ये आग का दरियाँ ही तिनके का सहारा है, ऐ पीर ए मुगाँ तेरे मयखाने में तो हम ने एक मय ही नहीं पी है जीवन भी गुज़ारा है, ये शय जो शब ए हिज्राँ जलती है न बुझती है अब आ के तुम्ही देखो जुगनू है कि तारा है..!! - [ये दिल टूट न जाए इस बात पर](https://hindigazals.com/ye-dil-tut-na/): ये दिल टूट न जाए इस बात पर एक तरफ़ा ही ज़ोर लगाया मैंने, मेरे दिल की आवाज़ सुन सको इस क़दर ख़ुद को रुलाया मैंने, शिकस्ता ए दिल लिए फिरता रहा पर कभी फ़ायदा नहीं उठाया मैंने, कोई ऊँगली न उठ सके ज़माने में तुम्हे इस क़दर अच्छा बताया मैंने, तुम से, सब से, और ना जाने कब से अपना दर्द ए दिल यूँ छुपाया मैंने, खत्म ए मुहब्बत हुई आख़िर तुम पे तुम पे ख़ुद को इतना लुटाया मैंने..!! - [क्यूँ खौफ़ इस क़दर है तुम्हे हादसात का ?](https://hindigazals.com/kyun-khauf-is-qadar/): क्यूँ खौफ़ इस क़दर है तुम्हे हादसात का ? - [वो एक लफ़्ज़ जो बेसदा जाएगा](https://hindigazals.com/wo-ek-lafz-jo/): वो एक लफ़्ज़ जो बेसदा जाएगा वही मुद्दतों तक सुना जाएगा, कोई है जो मेरे तआक़ुब में है मुझे मेरा चेहरा दिखा जाएगा, वो एक शख़्स जो दुश्मन ए जाँ सही मगर फिर भी अपना कहा जाएगा, जलेगी कोई मिशअल ए जाँ अभी मगर फिर अंधेरा सा छा जाएगा, नफ़ी ए जुरअत ए हक़ नुमाई सही मगर कब किसी से कहा जाएगा, यहाँ एक शजर मुंतज़िर सा भी है अब आख़िर कहाँ तक चला जाएगा ? - [मुक़द्दर ने कहाँ कोई नया पैग़ाम लिखा है](https://hindigazals.com/muqaddar-ne-kahan-koi/): मुक़द्दर ने कहाँ कोई नया पैग़ाम लिखा है अज़ल ही से वरक़ पर दिल के तेरा नाम लिखा है, क़दम में जानिब ए मंज़िल बढ़ाऊँ क्या कि क़िस्मत ने जहाँ आग़ाज़ लिखा था वहीं अंजाम लिखा है, शिकायत क्या करूँ साक़ी से मैं उसके तग़ाफ़ुल की मेरे होंठो के हिस्से ही में ख़ाली जाम लिखा है, हमें हैं मुंतख़ब रोज़ ए अज़ल से दर्द की ख़ातिर हमारे नामा ए क़िस्मत में हर इल्ज़ाम लिखा है, मुसलसल ग़म मुसलसल दर्द से तंग आ के ऐ 'साहिल' हम ऐसे अहल ए फ़ुर्क़त ने सहर को शाम लिखा है..!! - [शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर....](https://hindigazals.com/shariq-e-alam-e/): शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर मैं भी था कि रात जश्न में तेरे हुज़ूर मैं भी था, अज़ीब वक़्त था दुनियाँ क़रीब थी मेरे गज़ब ये था तेरे दामन से दूर मैं भी था, गमो के घेरे में जब रक्स कर रही थी हयात तमाश बीं की तरह बे शुऊर मैं भी था, न रुकना राह में शर्त ए सफ़र में शामिल था थकन से वरना बहुत चूर चूर मैं भी था, उतर रहा था लहू किस बला का आँखों में तेरे ख़याल में उस दम ज़रूर मैं भी था, गुज़रते वक़्त ने पहरे बैठा दिए मुझ पर खताएँ उनकी न थी बे क़सूर मैं भी था..!! - [मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो अच्छा था](https://hindigazals.com/mujhe-tanhaai-ke-gam/): मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो अच्छा था सफ़र में हमसफ़र अपना बना लेते तो अच्छा था, शिकस्त ए फ़ाश का ग़म ज़िंदगी जीने से बदतर है झुकाने की बजाए सर कटा लेते तो अच्छा था, कभी अश्कों पे इतना ज़ब्त भी अच्छा नहीं होता ये चश्मा फिर ज़रर देगा बहा लेते तो अच्छा था, भला क्या फ़ाएदा अब क़ब्र पे आँसू बहाने से अगर माँ बाप की पहले दुआ लेते तो अच्छा था, शिकायत से भला 'साहिल' हुआ है फ़ाएदा किस का ? - [सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से](https://hindigazals.com/subah-tak-sochta-hoon/): सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से जी रहा है कौन मेरे नाम से, शहर में सच बोलता फिरता हूँ मैं लोग ख़ाइफ़ हैं मेरे अंजाम से, रात भर जागेगा चौकीदार एक और सब सो जाएँगे आराम से, सौ बरस का हो गया मेरा मज़ार अब नवाज़ा जाऊँगा इनआम से, साथ लाऊँगा थकन बेकार की घर से बाहर जा रहा हूँ काम से, नाम ले उसका सफ़र आग़ाज़ कर दूर रख दिल को ज़रा औहाम से, ज़िंदगी की दौड़ में पीछे न था रह गया वो सिर्फ़ दो एक गाम से..!! - [नदी के पार उजाला दिखाई देता है](https://hindigazals.com/nadi-ke-paar-ujala/): नदी के पार उजाला दिखाई देता है मुझे ये ख़्वाब हमेशा दिखाई देता है, बरस रही हैं अक़ीदत की बदलियाँ लेकिन शुऊर आज प्यासा दिखाई देता है, चराग़ ए मंज़िल ए फ़र्दा जलाएगा एक रोज़ वो राहगीर जो तन्हा दिखाई देता है, तेरी निगाह ने हल्का सा नक़्श छोड़ा था मगर ये ज़ख़्म तो गहरा दिखाई देता है, किसी ख़याल की मिश्अल किसी सदा का चराग़ हर एक सम्त अंधेरा दिखाई देता है, 'अमीर' पूछ रहा हूँ ग़म ए ज़माना से हमारे घर में तुझे क्या दिखाई देता है..!! - [ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है](https://hindigazals.com/zaban-hai-magar-be/): ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है नसीहत कोई उसके कानों में है, चलो साहिलों की तरफ़ रुख़ करें अभी तो हवा बादबानों में है, ज़मीं पर हो अपनी हिफ़ाज़त करो ख़ुदा तो मियाँ आसमानों में है, न जाने ये एहसास क्यूँ है मुझे वो अब तक मेरे पासबानों में है, सजा तो लिए हम ने दीवार ओ दर उदासी अभी तक मकानों में है, हवा रुख़ बदलती रहे भी तो क्या परिंदा तो अपनी उड़ानों में है..!! - [वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे](https://hindigazals.com/wo-sar-firi-hawa/): वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे मैं आख़िरी चराग़ था जलना पड़ा मुझे, महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास अपना ख्याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे, सूरज ने छुपते छुपते उजागर किया तो था लेकिन तमाम रात पिघलना पड़ा मुझे, मौज़ू ए गुफ़्तुगू थी मेरी ख़ामोशी कहीं जो ज़हर पी चुका था उगलना पड़ा मुझे, कुछ दूर तक तो जैसे कोई मेरे साथ था फिर अपने साथ आप ही चलना पड़ा मुझे..!! - [सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले](https://hindigazals.com/suna-hai-ye-jahan/): सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन आता इस जहाँ में किसे दुनिया का अंदाज़ा था पहले, बड़ी तस्वीर लटका दी है अपनी जहाँ छोटा सा आईना था पहले, समझ में कुछ नहीं आता अब उसकी वो जो औरों को समझाता था पहले, किया ईजाद जिस ने भी ख़ुदा को वो ख़ुद को कैसे बहलाता था पहले, बहुत कुछ भी नहीं काफ़ी यहाँ अब बहुत थोड़े से चल जाता था पहले, ये दीवारें तो हैं इस दौर का सच खुला हर दिल का दरवाज़ा था पहले..!! - [न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़](https://hindigazals.com/na-jism-saath-hamare/): न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े हैं प्यासे अना के इसी भरोसे पर कि चल के आएगा एक दिन कुआँ हमारी तरफ़, बिछड़ते वक़्त वो तक़्सीम कर गया मौसम बहार उसकी तरफ़ है ख़िज़ाँ हमारी तरफ़, इसी उमीद पे किरदार हम निभाते रहे कि रुख़ करेगी कभी दास्ताँ हमारी तरफ़, कहाँ कहाँ न छुपे बस्तियाँ जला के मगर जहाँ जहाँ गए आया धुआँ हमारी तरफ़, लगा के जान की बाज़ी जिसे बचाया था खिंची हुई है उसी की कमाँ हमारी तरफ़, उछाल देते हैं पत्थर ख़ला में हम जो कभी पलट के देखता है आसमाँ हमारी तरफ़..!! - [मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है](https://hindigazals.com/mere-dil-me-jab/): मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है तुम क्या जानो मेरा कैसा हाल होता है, मेरी हर सोच में तुम होते हो शुमार मुझे फक़त तुम्हारा ही ख्याल होता है, अज़नबी हो कर भी अपने से लगते हो क्या मुहब्बत में ऐसा भी कमाल होता है ? - [ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ](https://hindigazals.com/ye-kab-chaha-ki/): ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही है अक़्ल कब से कि मैं दीवानगी से दूर हो जाऊँ, न बोलूँ सच तो कैसा आईना मैं जो बोलूँ सच तो चकना चूर हो जाऊँ, है मेरे हाथ में जब हाथ तेरा अजब क्या है जो मैं मग़रूर हो जाऊँ, बहाना कोई तो ऐ ज़िंदगी दे कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊँ, सराबों से मुझे सैराब कर दे नशे में तिश्नगी के चूर हो जाऊँ, मेरे अंदर से गर दुनिया निकल जाए मैं अपने आप में भरपूर हो जाऊँ..!! - [शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका](https://hindigazals.com/shaksiyat-e-lakht-e/): शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका ज़न्नत के धनी क़दमों को मैं सहला न सका, दूध पिलाया जिसने छाती से निचोड़ कर मैं निकम्मा एक गिलास पानी पिला न सका, हूँ बुढ़ापे का सहारा अहसास दिला न सका सीने पे सुलाने वाली को मखमल पे सुला न सका, बहू के डर से भूखी ही सो गई एक बार माँग कर मैं सुकूं के दो निवाले तक उसे खिला न सका, उन बूढ़ी आँखों से मैं नज़रे कभी मिला न सका दर्द वो सहती रही मैं जुबां तक हिला न सका, जो हर रोज़ ही ममता के नए रंग पहनाती रही उसे ईद पर भी एक जोड़े कपड़े सिला न सका, बीमार बिस्तर से उसे मैं शिफ़ा दिला न सका खर्च के डर से बड़े अस्पताल मैं ले जा न सका, बेटा कह कर दम तोड़ने के बाद से सोच रहा हूँ दवाई इतनी भी महँगी न थी कि मैं ला न सका..!! - [ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है](https://hindigazals.com/gamo-ka-sailab-aya/): ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द समझते ही नहीं पर मेरी आँखों ने तो बताया ज़रूर है, मौसम सुहाना क्यूँ जब तू पास नहीं ऐसे मौसमो ने हमें सताया ज़रूर है, तुमसे इश्क़ का इज़हार नहीं किया पर इस दिल में तुम्हे बसाया ज़रूर है, एक तुम्हे ही देखने को बेक़रार है आँखे इन धड़कनो को भी समझाया ज़रूर है, माना कि तुमने ही दी है तमाम खुशियाँ मगर सच ये भी है कि रुलाया ज़रूर है..!! - [जो नेकी कर के फिर दरिया में उसको डाल जाता है](https://hindigazals.com/jo-neqi-kar-ke/): जो नेकी कर के फिर दरिया में उसको डाल जाता है वो जब भी दुनिया से जाता है तो माला माल जाता है, सँभल कर ही क़दम रखना बयाबान ए मोहब्बत में यहाँ से जो भी लौटता है बड़ा बेहाल जाता है, कभी भूखे पड़ोसी की ख़बर तो ली नहीं उसने मगर करने वो उमरा और हज हर साल जाता है, मनाऊँ हर बरस जश्न ए विलादत किस लिए आख़िर यहाँ हर साल मेरी उम्र का एक साल जाता है, है दुनिया तक ही अपनी दस्तरस में दौलत ए दुनिया फ़क़त हमराह अपने नामा ए आमाल जाता है, बिना देखे ख़ुदा को मानता हूँ इस लिए 'साहिल' कोई तो है जो हम को रोज़ दाना डाल जाता है..!! - [कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिए](https://hindigazals.com/kuch-parindo-ko-to/): कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिए कुछ को लेकिन आसमानों के खज़ाने चाहिए, दोस्तों का क्या है वो तो यूँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त रोज़ एक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ, तुम हक़ीक़त को लिए बैठे हो तो बैठे रहो ये ज़माना है इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ, रोज़ इन आँखों के सपने टूट जाते हैं तो क्या ? - [लेता हूँ उस का नाम भी आह ओ बुका के साथ](https://hindigazals.com/leta-hoon-uska-naam/): लेता हूँ उस का नाम भी आह ओ बुका के साथ कितना हसीन रिश्ता है मेरा ख़ुदा के साथ, उस की क़ुबूलियत में कोई शक नहीं रहा भेजे हैं हम ने अश्क भी अब के दुआ के साथ, बुझते हुए चराग़ को हाथों में ले लिया इस बार बाज़ी जीत ली मैं ने हवा के साथ, आ के बचा ले मौत मुझे ज़िंदगी से तू कितनी गुज़ारूँ और मैं इस बेवफ़ा के साथ, तूफ़ाँ में मुझ को बनना पड़ा उस के दस्त ओ पा 'साहिल' वगर्ना बनती न थी ना ख़ुदा के साथ..!! - [मेरे दिन की तरह रौशन मेरी हर...](https://hindigazals.com/mere-din-ki-tarah/): मेरे दिन की तरह रौशन मेरी हर रात होती है दुआ माँ की हर एक मौसम में मेरे साथ होती है, अजब दस्तूर है ये भी इज़हार ए मोहब्बत का ज़बाँ ख़ामोश रहती है नज़र से बात होती है, तलाश ए रिज़्क़ में जब भी कभी घर से निकलता हूँ मेरे हमराह पैहम गर्दिश ए हालात होती है, भला इल्ज़ाम कोई दुश्मनी पर क्या रखा जाए ? - [आख़िर वो मेरे क़द की भी हद से गुज़र गया](https://hindigazals.com/aakhir-wo-mere-qad/): आख़िर वो मेरे क़द की भी हद से गुज़र गया कल शाम में तो अपने ही साये से डर गया, मुठ्ठी में बंद किया हवा बच्चो के खेल में जुगनू के साथ उसका उजाला भी मर गया, कुछ ही बरस के बाद तो उससे मिला था मैं देखा जो मेरा अक्स तो आईना डर गया, ऐसा नहीं कि गम ने बढ़ा ली हो अपनी उम्र मौसम ख़ुशी का वक़्त से पहले गुज़र गया, लिखना मेरे मज़ार के कुतबे पे ये हरूफ़ मरहूम ज़िन्दगी की हिरासत में मर गया..!! - [इस दिल में आह, आँखों में नाले है](https://hindigazals.com/is-dil-me-aah/): इस दिल में आह, आँखों में नाले है हमें न सताओ हम तुम्हारे चाहने वाले है, मुहब्बत भरे ख़त जो लिखे थे तुमने वो अपनी जान की तरह हम ने संभाले है, कभी वस्ल हुआ तो दिखाएँगे तुम्हे हमारे इस दिल में हिज़्र के जितने छाले है, अंजाने में तुमसे प्यार कर बैठे क्या इल्म था कि तुम्हारे इतने चाहने वाले है, हमने तो जिस किसी को दोस्त जाना है उसी ने हमारे लिए नफरतों के नाग पाले है, वक़्त ए आख़िर तो आ के मिल जाओ यूँ लगता है हम दुनियाँ से जाने वाले है..!! - [चलो अब यूँ भी आज़माए कभी](https://hindigazals.com/chalo-ab-yun-bhi/): चलो अब यूँ भी आज़माए कभी तुम कह दो तो भूल जाए कभी, ज़िस्म मुर्दा हुआ तो ये जाना चैन मर कर भी हम न पाए कभी, कोई सूरत कभी न देख सकें ज़ख्म आँखों को अब लगाये कभी, अब तो आँखे भी वा नहीं करती हाथ पहले भी कब मिलाए कभी, अपनी दुनियाँ का तुम भरम रखना अपनी दुनियाँ से हम तो जाए कभी, नवाब मंदिरनुमा से इस दिल में बुत बनाये है फिर गिराए कभी..!! - [आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी](https://hindigazals.com/aahista-chal-ae-zindagi/): आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाक़ी है, कुछ दर्द मिटाना बाक़ी है कुछ फर्ज़ निभाना बाक़ी है, रफ़्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गए, कुछ छूट गए, रूठों को मनाना बाक़ी है रोतों को हँसाना बाक़ी है, कुछ हसरतें अभी अधूरी है कुछ काम भी और ज़रूरी है, ख्वाहिशे जो घुट गई इस दिल में उनको दफनाना बाक़ी है, कुछ रिश्ते बन के टूट गए कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए, आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाक़ी है..!! - [इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी](https://hindigazals.com/insan-me-haiwan-yahan/): इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी, हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी, रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी, उठता है दिल ओ जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही ये 'मीर' का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी..!! - [अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो](https://hindigazals.com/azib-saneha-mujh-par/): अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो, हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुँदला हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो, भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क़ ए आब हुई चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो, वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो, मैं जिस को लिखने के अरमान में जिया अब तक वरक़ वरक़ वो फ़साना बिखर गया यारो..!! - [बीच सफ़र में छोड़ गया हमसफ़र हमसफ़र ना रहा](https://hindigazals.com/bich-safar-me-chhod/): बीच सफ़र में छोड़ गया हमसफ़र हमसफ़र ना रहा इतना दर्द दिया हमदर्द ने कि हमदर्द हमदर्द ना रहा, तेरे गाल के तिल ने लगवाई इतनी तोहमते कलंक सा लगने लगा अब तिल तिल ना रहा, दिल में दफ़न हुए मेरे दिल के सब अरमां यादो का क़ब्र बन गया दिल, दिल दिल ना रहा..! - [अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता](https://hindigazals.com/agar-tu-saath-chal/): अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता ख़ुशी से उम्र भर जीने का एक सामान हो जाता, न जा कर क्यूँ जताता है जो जाना था चला जाता बहुत होता तो ये होता कि मैं हैरान हो जाता, जो मेरी सिम्त तू दो गाम भी हँस कर चला आता मैं तेरे और तू मेरे लिए ईमान हो जाता, ख़ुशी से मुझ पे फिर क्या जाने गुज़र जानी थी हमीद घड़ी भर को भी तू मुझ पर जो कुर्बान हो जाता..!! - [तू अपनी खूबियाँ ढूँढ...](https://hindigazals.com/tu-apni-khubiyan-dhoondh/): तू अपनी खूबियाँ ढूँढ कमियां निकालने के लिए लोग हैं, अगर रखना ही है कदम तो आगे रख पीछे खींचने के लिए लोग हैं, सपने देखने ही हैं तो ऊंचे देख नीचा दिखाने के लिए लोग हैं, अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का, जलने के लिए लोग हैं, अगर बनानी है तो यादें बना बातें बनाने के लिए लोग हैं, प्यार करना है तो खुद से कर दुश्मनी करने के लिए लोग हैं, रहना है तो बच्चा बनकर रह समझदार बनाने के लिए लोग हैं, भरोसा रखना है तो ख़ुद पर रख शक करने के लिए लोग हैं, तू बस संवार ले खुद को आईना दिखाने के लिए लोग हैं, खुद की अलग पहचान बना भीड़ में चलने के लिए लोग हैं, तू कुछ करके दिखा दुनिया को बस कुछ करके दिखा.... - [ज़नाब शेख़ की हर्ज़ा सराई ज़ारी है](https://hindigazals.com/janab-shekh-ki-harza/): ज़नाब शेख़ की हर्ज़ा सराई ज़ारी है इधर से ज़ुल्म उधर से दुहाई ज़ारी है, बिछड़ गया हूँ मगर याद करता रहता हूँ क़िताब छोड़ चुका हूँ पढ़ाई ज़ारी है, तेरे अलावा कहीं और भी मुलव्वस है तेरी वफ़ा से उनकी बेवफ़ाई ज़ारी है, वो क्यूँ कहेंगे कि दोनों में अम्न हो जाए हमारी जंग से जिनकी कमाई ज़ारी है, अज़ीब ख़ब्त ए मसीहाई है कि हैरत है मरीज़ मर भी चुका है दवाई ज़ारी है..!! - [हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही...](https://hindigazals.com/hizr-ki-shab-ghadi-ghadi/): हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही सवाल है जिसके ख़याल में हूँ गुम उसको भी कुछ ख़याल है ? - [ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ लिखता है ?](https://hindigazals.com/ae-likhne-wale-aakhir/): ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ लिखता है ? है ये दर्द सबको फिर तुझे ही क्यूँ दिखता है ? - [अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए'तिबार नहीं](https://hindigazals.com/ab-apne-deeda-o/): अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए'तिबार नहीं उसी को प्यार किया जिस के दिल में प्यार नहीं, नहीं कि मुझ को तबीअ'त पे इख़्तियार नहीं हर एक जाम से पी लूँ वो बादा ख़्वार नहीं, हर एक गाम पे काँटों की हैं कमीं गाहें शबाब आह शगूफ़ों की रहगुज़ार नहीं, भरी हुई है वो काम ओ दहन में तल्ख़ी ए ज़ीस्त कि लब पे जाम ए मोहब्बत भी ख़ुशगवार नहीं, न मेरे अश्कों से दामन पे तेरे आएगी आँच ये शो'ला रू हैं मगर फ़ितरत ए शरार नहीं, कहीं छुपाए से छुपती भी है हक़ीक़त ए ग़म वो ग़म ही क्या जो मसर्रत से आश्कार नहीं, मैं तेरी याद से बहका चुका हूँ यूँ दिल को कि अब मुझे तेरी फ़ुर्क़त भी नागवार नहीं, मेरे सुकूँ के लिए क्यूँ ये कोशिश ए पैहम क़रार छीनने वाले तुझे क़रार नहीं, जहान ए अक़्ल के नफ़रतकदों में बट जाता हज़ार शुक्र मोहब्बत पे इख़्तियार नहीं, किसी की लूट के राहत ख़ुशी नहीं मिलती ख़िज़ाँ के हाथ में सर्माया ए बहार नहीं, निगाह ए दोस्त को इसकी भी है ख़बर लेकिन वो राज़ जिस का अभी दिल भी राज़दार नहीं..!! - [ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो](https://hindigazals.com/ye-dil-aavezi-e-hayat-na/): ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो अगर आहंग ए हादसात न हो, तेरी नाराज़गी क़ुबूल मगर ये भी क्या भूल कर भी बात न हो, ज़ीस्त में वो घड़ी न आए कि जब हाथ में मेरे तेरा हाथ न हो, हँसने वाले रुला न औरों को सुबह तेरी किसी की रात न हो, इश्क़ भी काम की है चीज़ अगर यही बस दिल की काएनात न हो, कौन उस की जफ़ा की लाए ताब गाहे ब गाहे जो इल्तिफ़ात न हो, रिंद कुछ कर रहे हैं सरगोशी ज़िक्र ए साक़ी से ख़ुशसिफ़ात न हो..!! - [आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया](https://hindigazals.com/aarzoo-ko-dil-hi/): आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को रंज सहना आ गया, पूछता कोई नहीं अब मुझ से मेरा हाल ए दिल शायद हाल ए दिल अब मुझ को कहना आ गया, सब की सुनता जा रहा हूँ और कुछ कहता नहीं वो ज़बाँ हूँ अब जिसे दाँतों में रहना आ गया, ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं हो के लहरों के रुख़ पर हम को बहना आ गया, लाख पर्दे इज़्तिराब ए शौक़ पर डाले मगर फिर वो एक मचला हुआ आँसू बरहना आ गया, पी के आँसू सी के लब बैठा हूँ यूँ तेरे बज़्म में दर हक़ीक़त जैसे मुझको रंज सहना आ गया, एक ना शुक्र ए चमन को रंग ओ बू देता रहा आ गया हाँ आ गया काँटों में रहना आ गया, लब पे नग़्मा और रुख़ पर एक तबस्सुम की नक़ाब अपने दिल का दर्द अब हमको तो कहना आ गया..!! - [जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके](https://hindigazals.com/jataye-haq-na-kaise/): जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे उनके, ख़बर उनको भी तो होगी कभी हालात की अपने हमें तो फ़ुर्सत लुटानी है हर एक इतवार पे उनके, भले रूठे रहे हमसे वो सालो साल तक लेकिन नमी ये आँखों की न जाए कभी रुखसार पे उनके, अगर करना है तो या ख़ुदा इतना ही करम करना रहे फक़त हक़ हमारा ही सदा दीदार पे उनके, छुपा कर हाल ए दिल हमसे वो कब तक जी लेंगे एक दिन उतर आएँगे फ़रिश्ते भी इज़हार पे उनके..!! - [ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना](https://hindigazals.com/zindagi-di-hai-to/): ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़ ए सफ़र भी देना, गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना, मैं तो इस ख़ाना बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना, ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुकम्मल हो जाए उस को ख़ंजर जो दिया है मुझे सर भी देना..!! - [इस बहते हुए लहू में मुझे तो](https://hindigazals.com/is-bahte-hue-lahoo/) - [किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा](https://hindigazals.com/kis-simt-chal-padi/): किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा नफ़रत ही अब दे रही है दिखाई मेरे ख़ुदा, अम्न ओ अमां से ख़ाली दुनिया क्यूँ हो गई ? - [जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है](https://hindigazals.com/jisne-bhi-muhabbat-ka/) - [दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी](https://hindigazals.com/duniya-me-yun-bhi/): दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी, आवाज़ मुझको ना दे ऐ गुज़रे वक़्त सुन मुश्किल से हमने अपनी सवारी है ज़िन्दगी, कोई ख़ुशी भी पहलू में ई नहीं कभी मेरी नज़र में अब भी कुँवारी है ज़िन्दगी, सोचो तो जी रहे है तुम्हारे ही वास्ते जब चाहो माँग लेना तुम्हारी है ज़िन्दगी, हर एक तन्हा छोड़ के कहता है अलविदा कितनी ये बदनसीब, बेचारी है ज़िन्दगी, कैसा ये बोझ दिल पे तेरे है ज़रा बता ऐ यार आज इतनी क्यूँ भारी है ज़िन्दगी..?? - [संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है](https://hindigazals.com/sansar-ki-har-shay/): संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना है, ये राह कहाँ से है ये राह कहाँ तक है ? - [मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है](https://hindigazals.com/mar-chuka-hoo-kai/): मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग में भरना है, अज़ब शर्त है समन्दर की कहता है किनारे पर पहुँचना है तो ज़ेर ए समन्दर कश्ती से उतरना है, ताउम्र गया रोज़ उनकी गली में मैं क़यामत है उनकी गली से अभी भी कई दफ़ा गुज़रना है, जहाँ हर रोज़ मैं जाता रहा हूँ यारो वहाँ भी पहुँचने के लिए अभी न जाने क्या क्या करना है, जिनको तालीम दी मैंने, तहज़ीब दे कर सुधारा वही कह रहे है तुम्हे अभी बहुत कुछ सुधरना है..!! - [घबराने से मसले हल नहीं होते](https://hindigazals.com/ghabrane-se-masle-hal/): घबराने से मसले हल नहीं होते जो आज है वो कल नहीं होते, याद रखना हमेशा इस बात को कीचड़ में सब कमल नहीं होते, फ़ायदा पहुँचाएँ जो ज़िस्मो को मीठे अक्सर वो फल नहीं होते, जुगत भी लगानी पड़ती है सदा रस्ते तो कभी सरल नहीं होते, दर्द की सर्द हवा से बनते है जो वो ठोस कभी तरल नहीं होते, नफ़रत की खाद से जो उगे पेड़ मीठे कभी उनके फल नहीं होते, जो आपको आपसे ज्यादा समझे ऐसे लोग दरअसल नहीं होते..!! - [दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है](https://hindigazals.com/duniya-jise-kahte-hai/): दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है, अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है, बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है, ये वक़्त जो तेरा है ये वक़्त जो मेरा है हर गाम पे पहरा है फिर भी इसे खोना है, ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है, आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आँगन को आकाश की चादर है धरती का बिछौना है..!! - [बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा सकती है](https://hindigazals.com/baat-idhar-udhar-to/): बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा सकती है पर सच्चाई भला कब तक छुपाई जा सकती है ? खून से बना कर माँ बच्चे को जो पिलाती है उस दूध की क़ीमत कैसे चुकाई जा सकती है ? - [अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है](https://hindigazals.com/ab-muhabbat-ka-irada/): अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है उन्हें खोना भी मुश्किल,उन्हें पाना भी मुश्किल है, ज़रा सी बात पर आँखे भिगो कर बैठ जाते है वो उन्हें तो अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है, यहाँ लोगो ने दिल ओ चेहरे पे इतने परदे डाल रखे है किसी के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है, सोचता हूँ कभी ख़्वाबो में तो उनसे मुलाक़ात होगी पर यहाँ तो उनके बिना नींद आना भी मुश्किल है, गैरो से गिला क्या करे अब ख़ुद का ही आलम ये है हाल ए ज़िन्दगी ख़ुद का ख़ुद को समझाना भी मुश्किल है, ऐसे दौर ए मुश्किल में जो हमदर्द बन कर साथ दे मेरा अब यहाँ उस हमसफ़र को ढूँढ पाना भी मुश्किल है..!! - [रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया](https://hindigazals.com/rah-ke-makkaro-me/): रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया मेरे दुश्मन की तरफ़दार हुई है दुनिया, पाक दामन थी ये जब तक थी मेरे हुजरे में छोड़ के मुझको गुनहगार हुई है दुनिया, ऐन मुमकिन है के बदनाम मुझे भी कर दे मेरी शोहरत से जो बेज़ार हुई है दुनिया, तू नहीं था तो ये रौनक़ भी कहाँ थी पहले तेरे आने से ही गुलज़ार हुई है दुनिया, अपनी पलकों से झटकते हुए कुछ ख़्वाबों को ले के अंगड़ाइयाँ बेदार हुई है दुनिया, कुछ दिनों से ये ख़बर गूँज रही है 'मोहसिन' एक शाइ'र की तलबगार हुई है दुनिया..!! - [ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी महसूस हो](https://hindigazals.com/aisa-apnapan-bhi-kya/): ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी महसूस हो साथ रह कर भी गर मुझे तेरी कमी महसूस हो, आग ख़ुद बस्ती में लगा कर बोलते हो यूँ जलो कि दूर से देखने वालों को तो रौशनी महसूस हो, भीड़ के लोगो सुनो, ये हुक्म है दरबार ए आम का गर भूख से भी गिरो तो ऐसे गिरो बंदगी महसूस हो, नाम था उसका बगावत इसी लिए उसे क़ातिलो ने क़त्ल भी ऐसे किया कि क़त्ल ख़ुदकुशी महसूस हो, शाख ए शज़र पे बैठे परिंदे कह रहे थे कानो में ये कैसी रिहाई है जिसमे हर घड़ी बेबसी महसूस हो ? - [गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं](https://hindigazals.com/garmi-e-hasrat-e/): गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं, शम्अ' जिस आग में जलती है नुमाइश के लिए हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं, बच निकलते हैं अगर आतिश ए सय्याल से हम शोला ए आरिज़ ए गुलफ़ाम से जल जाते हैं, ख़ुदनुमाई तो नहीं शेवा ए अरबाब ए वफ़ा जिनको जलना हो वो आराम से जल जाते हैं, रब्त ए बाहम पे हमें क्या न कहेंगे दुश्मन आश्ना जब तेरे पैग़ाम से जल जाते हैं, जब भी आता है मेरा नाम तेरे नाम के साथ जाने क्यूँ लोग मेरे नाम से जल जाते हैं..!! - [गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है](https://hindigazals.com/gareban-dar-gareban-nuqta/): गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है बहार आए तो दीवानों की रुस्वाई भी होती है, हम उन की बज़्म तक जा ही पहुँचते हैं किसी सूरत अगरचे राह में दीवार ए तन्हाई भी होती है, बिखरती है वही अक्सर ख़िज़ाँ-परवर बहारों में चमन में जो कली पहले से मुरझाई भी होती है, बनाम ए कुफ्र ओ ईमाँ बेमुरव्वत हैं जहाँ दोनों वहाँ शैख़ ओ बरहमन की शनासाई भी होती है, चमकती है कोई बिजली तो शम ए रहगुज़र बन कर निगाह ए बरहम इन की कुछ तो शर्माई भी होती है, 'क़तील' उस दम भी रहता है यही एहसास ए महरूमी जब उन शानों पे ज़ुल्फ़ों की घटा छाई भी होती है..!! - [इस नहीं का कोई इलाज नहीं](https://hindigazals.com/is-nahi-ka-koi/): इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं, कल जो था आज वो मिज़ाज नहीं इस तलव्वुन का कुछ इलाज नहीं, आइना देखते ही इतराए फिर ये क्या है अगर मिज़ाज नहीं, ले के दिल रख लो काम आएगा गो अभी तुम को एहतियाज नहीं, हो सकें हम मिज़ाज दाँ क्यूँकर हमको मिलता तेरा मिज़ाज नहीं, चुप लगी लाल ए जाँ फ़ज़ा को तेरे इस मसीहा का कुछ इलाज नहीं, दिल ए बेमुद्दआ ख़ुदा ने दिया अब किसी शय की एहतियाज नहीं, खोटे दामों में ये भी क्या ठहरा ? - [जो दिख रहा है उसी के अंदर जो...](https://hindigazals.com/jo-dikh-raha-hai/): जो दिख रहा है उसी के अंदर जो अनदिखा है वो शायरी है, जो कह सका था वो कह चुका हूँ जो रह गया है वो शायरी है, ये शहर सारा तो रौशनी में खिला पड़ा है सो क्या लिखूँ मैं ? - [गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने](https://hindigazals.com/ganvai-kis-ki-tamanna/): गँवाई किस की तमन्ना में ज़िन्दगी मैं ने वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने, तेरा ख्याल तो है पर तेरा वज़ूद नहीं तेरे लिए तो ये महफ़िल सजाई थी मैं ने, तेरे अदम को गँवारा न था वज़ूद मेरा सो अपनी बीख कनी में कमी न की मैं ने, हैं मेरे ज़ात से मंसूब सद फ़साना ए इश्क़ और एक सतर भी अब तक नहीं लिखी मै ने, ख़ुद अपने इशवा ओ अंदाज़ का शहीद हूँ मैं ख़ुद अपनी ज़ात से बरती है बेरुखी मैं ने, ख़राश नगमा से सीना छिला हुआ है मेरा फुगाँ कि तर्क न की नगमा परवरी मैं ने, दवा से फ़ायेद मक़सूद था ही कब कि फक़त दवा के शौक़ में सेहत तबाह की मैं ने, सरुर ए मय पे भी ग़ालिब रहा शऊर मेरा कि हर रियायत ए गम ज़हन में रखी मैं ने, गम ए शऊर कोई दम तो मुझको मोहलत दे तमाम उम्र जलाया है अपना जी मैं ने, इलाज़ ये है कि मज़बूर कर दिया जाऊँ वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने, रहा मैं सदा ही तन्हा नशीन ए मसनद ए गम और अपने क़रीब अना से गरज़ रखी मैं ने..!! - [अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो](https://hindigazals.com/azab-e-hizr-badha/): अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो एक और ज़ख्म खा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारे आरिज़ ओ लब की जुदाई के दिन है मैं जाम मुँह से लगा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारा हुस्न तुम्हारे ख्याल का चेहरा शबाहतों में छुपा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्ही से है मेरे हर ख़्वाब ए शौक़ का रिश्ता एक और ख़्वाब कमा लूँ अगर इजाज़त हो, थका दिया है तुम्हारे फ़िराक ने मुझको कहीं मैं ख़ुद को गिरा लूँ अगर इजाज़त हो, बराए नाम बनाम ए शब ए विसाल यहाँ शब ए फ़िराक मना लूँ अगर इजाज़त हो..!! - [पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा](https://hindigazals.com/paani-ke-utarne-me/): पानी के उतरने में अभी वक़्त लगेगा हालात सँवरने में अभी वक़्त लगेगा, मच्छर से, कोरोना से अभी लोग मरेंगे इफ़्लास से मरने में अभी वक़्त लगेगा, जो लोग आकाओं से डरते है अभी तक अल्लाह से डरने में उन्हें वक़्त लगेगा, शायद नहीं बदलेगा यहाँ तर्ज़ ए हुकुमत शायद कि सुधरने में अभी वक़्त लगेगा, ऐ अहल ए वतन तुम कभी मायूस न होना पुर ज़ख्मो को भरने में अभी वक़्त लगेगा, मुफ़लिस ओ शरीफ़ यूँ ही मरते रहेंगे बदकारो को मरने में अभी वक़्त लगेगा..!! - [फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें](https://hindigazals.com/farsudgi-ka-mudawa-kare/): फ़सुर्दगी का मुदावा करें तो कैसे करें वो लोग जो तेरे क़ुर्ब ए जमाल से भी डरें, एक ऐसी राह पे डाला है तेरे ग़म ने कि हम किसी भी शक्ल को देखें तो रुक के आह भरें, ये क्या कि बेसबब आए क़ज़ा जवानी में ये क्यूँ न हो कि तुम्हारी किसी अदा पे मरें ? - [एक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है](https://hindigazals.com/ek-zaam-khanakta-zaam/): एक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है एक होश रुबा इनआ'म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है, वो देख सितारों के मोती हर आन बिखरते जाते हैं अफ़्लाक पे है कोहराम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है, गो देख चुका हूँ पहले भी नज़ारा दरिया नोशी का एक और सला ए आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है, ये वक़्त नहीं है बातों का पलकों के साए काम में ला इल्हाम कोई इल्हाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है, मदहोशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे इस वक़्त न मुझ को थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है..!! - [दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था](https://hindigazals.com/door-tak-chhaye-the/): दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था, सुर्ख़ आहन पर टपकती बूँद है अब हर ख़ुशी ज़िंदगी ने यूँ तो पहले हम को तरसाया न था, क्या मिला आख़िर तुझे सायों के पीछे भाग कर ऐ दिल ए नादाँ तुझे क्या हम ने समझाया न था ? - [जो हम पे गुज़रे थे रंज़ सारे, जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे](https://hindigazals.com/jo-ham-pe-guzre/): जो हम पे गुज़रे थे रंज़ सारे, जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी मुहब्बतों के अज़ाब झेले तो लोग समझे, वो जिन दरख्तों की छाँव में से मुसाफिरों को उठा दिया था उन्ही दरख्तों पे अगले मौसम जो फल न उतरे तो लोग समझे, उस एक कच्ची सी उम्र वाली के फ़लसफ़े को कोई न समझा जब उस के कमरे से लाश निकली, ख़ुतूत निकले तो लोग समझे, वो ख़्वाब थे ही चम्बेलियों से सो सब ने हाकिम की कर ली बैअत फिर एक चम्बेली की ओट में से जो साँप निकले तो लोग समझे, वो गाँव का एक ज़ईफ़ दहक़ाँ सड़क के बनने पे क्यूँ ख़फ़ा था जब उन के बच्चे जो शहर जाकर कभी न लौटे तो लोग समझे..!! - [नसीम ए सुबह गुलशन में गुलो से खेलती होगी](https://hindigazals.com/nasim-e-subah-gulshan/): नसीम ए सुबह गुलशन में गुलो से खेलती होगी किसी की आख़िरी हिचकी किसी की दिल्लगी होगी, तुम्हे दानिस्ता महफ़िल में जो देखा हो तो मुज़रिम हूँ नज़र आख़िर नज़र है बे इरादा उठ गई होगी, मज़ा आ जाएगा महशर में कुछ सुनने सुनाने का ज़ुबां होगी हमारी और कहानी आप की होगी, सर ए महफ़िल बता दूँगा सर ए महशर दिखा दूँगा हमारे साथ तुम होगे ये दुनियाँ देखती होगी, यही आलम रहा पर्दानशीनो का तो ज़ाहिर है ख़ुदाई आप से होगी न बंदगी हम से होगी..!! - [किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है](https://hindigazals.com/kis-ehtiyat-se-usne/): किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है ज़माना अब भी समझता है आशनाई है, मेरे अज़ीज़ है इसका इलाज़ ना मुमकिन यह चोट वो है जो अपनों से मैंने खाई है, ये दिन भी देख लिया आपकी मुहब्बत में हमारी ही चीज अब हमारी नहीं पराई है, ख़ामोशी का मतलब है ख़ुदकशी करना और एक लफ्ज़ भी बोलो तो बे वफ़ाई है, ये चंद अश'आर जो लोगो को याद है तेरे ऐ मेरे दोस्त ! - [उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर](https://hindigazals.com/umr-bhar-chalte-rahe/): उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर, चाहने वाले की एक ग़लती से बरहम हो गया फ़ख़्र था कितना उसे ख़ुद प्यार के मेआ'र पर, रात गहरी मेरी तन्हाई का सागर और फिर तेरी यादों के सुलगते दीप हर मंझधार पर, शाम आई और सब शाख़ों की गलियाँ सो गईं मौत का साया सा मंडलाने लगा अश्जार पर, ख़ल्वत ए शब में ये अक्सर सोचता क्यूँ हूँ कि चाँद नूर का बोसा है गोया रात के रुख़्सार पर, साल ए नौ आता है तो महफ़ूज़ कर लेता हूँ मैं कुछ पुराने से कैलेंडर ज़ेहन की दीवार पर, ज़िंदगी आज़ाद पहले यूँ कभी तन्हा न थी आदमी बहता था यूँही वक़्त की रफ़्तार पर..!! - [जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी](https://hindigazals.com/jis-taraf-chahoon-pahunch/): जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों की समाअत गई गोयाई भी क़िस्सा गो तूने सुनाई थी हिकायत कैसी ? - [किए वादों का निभाना बाक़ी है](https://hindigazals.com/kiye-waado-ka-nibhana/): किए वादों का निभाना बाक़ी है और अभी उनको मनाना बाक़ी है, मुझे अपना भी समझना बाक़ी है और उनका भी संभलना बाक़ी है, ये तो सबको है पता हम उनके है ये बात बस उनको बताना बाक़ी है, हमने तो सोच समझ कर वोट दिया अब बस उनका चोट लगाना बाक़ी है, न जान सके सेवक है या शासक है ? - [बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ](https://hindigazals.com/baat-karte-hai-khushi/): बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ वो हँसाते भी है ऐसा कि रुला देते है, मैंने माँगा जो कभी दूर से दिल डर डर कर उसने धमका के कहा पास तो आ देते है, आ के बाज़ार ए मुहब्बत में ज़रा सैर करो लोग क्या करते है, क्या लेते है, क्या देते है ? - [कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को](https://hindigazals.com/kabhi-kaha-na-kisi/): कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को न जाने कैसे ख़बर हो गई ज़माने को, दुआ बहार की मांगी तो इतने फूल खिले कहीं जगह न रही मेरे आशियाने को, मेरी लहद पे पतंगों का ख़ून होता है हुज़ूर शमाँ न लाया करें जलाने को, सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे कहो तो आज सजा लूं ग़रीब ख़ाने को, दबा के क़ब्र में सब चल दिए दुआ न सलाम ज़रा सी देर में क्या हो गया ज़माने को ? - [साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं](https://hindigazals.com/saath-chalte-aa-rahe/): साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं एक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं, देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं, उसकी भी मजबूरियाँ हैं, मेरी भी मजबूरियाँ हैं रोज मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं, आदमी क्या है गुजरते वक्त की तस्वीर है जाने वाले को सदा देकर बुला सकते नहीं, किस ने किस का नाम ईंट पे लिखा है खून से इश्तिहारों से ये दीवारें छुपा सकते नहीं, उसकी यादों से महकने लगता है सारा बदन प्यार की खुशबू को सीने में छुपा सकते नहीं, राज जब सीने से बाहर हो गया अपना कहाँ रेत पे बिखरे हुए आँसू उठा सकते नहीं, शहर में रहते हुए हमको जमाना हो गया कौन रहता है कहाँ कुछ भी बता सकते नहीं, पत्थरों के बर्तनों में आँसू को क्या रखें ? - [हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है](https://hindigazals.com/husn-e-mah-garche/): हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद जमाल अच्छा है, बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है, और बाज़ार से ले आए अगर टूट गया साग़र ए जम से मेरा जाम ए सिफ़ाल अच्छा है, बेतलब दें तो मज़ा उसमें सिवा मिलता है वो गदा जिसको न हो ख़ू ए सवाल अच्छा है, उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है, देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ एक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है, हमसुख़न तेशा ने फ़रहाद को शीरीं से किया जिस तरह का कि किसी में हो कमाल अच्छा है, क़तरा दरिया में जो मिल जाए तो दरिया हो जाए काम अच्छा है वो जिस का कि मआल अच्छा है, ख़िज़्र सुल्ताँ को रखे ख़ालिक़ ए अकबर सरसब्ज़ शाह के बाग़ में ये ताज़ा निहाल अच्छा है, हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है..!! - [जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे](https://hindigazals.com/juz-tere-koi-bhi/): जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे तू कहाँ है मगर ऐ दोस्त पुराने मेरे ? - [यकुम जनवरी है नया साल है](https://hindigazals.com/yakum-janwari-hai-naya/): यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है, बचाए ख़ुदा शर की ज़द से उसे बेचारा बहुत नेक आमाल है, बताने लगा रात बूढ़ा फ़क़ीर ये दुनिया हमेशा से कंगाल है, है दरिया में कच्चा घड़ा सोहनी किनारे पे गुमसुम महिवाल है, मैं रहता हूँ हर शाम शिकवा ब लब मेरे पास दीवान ए 'इक़बाल' है..!! - [शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़...](https://hindigazals.com/shaam-apni-bemaza-jaati-hai/): शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़ और सितम ये है कि आ जाती है रोज़, कोई दिन आसाँ नहीं जाता मेरा कोई मुश्किल आज़मा जाती है रोज़, मुझ से पूछे कोई क्या है ज़िंदगी मेरे सर से ये बला जाती है रोज़, जाने किस की सुर्ख़रूई के लिए ख़ूँ में ये धरती नहा जाती है रोज़, गीत गाते हैं परिंदे सुब्ह ओ शाम या समाअ'त चहचहा जाती है रोज़, देखने वालों को 'अजमल' ज़िंदगी रंग कितने ही दिखा जाती है रोज़..!! - [सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की](https://hindigazals.com/suni-hai-chaap-bahut-waqt-ke/): सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिसके भरने की, हमारे सर पे तो ये आसमान टूट पड़ा घड़ी जब आई सितारों से माँग भरने की, गिरह में दाम तो रखते हैं ज़हर खाने को ये और बात कि फ़ुर्सत नहीं है मरने की, बहुत मलाल है तुझ को न देख पाने का बहुत ख़ुशी है तेरी राह से गुज़रने की, बताओ तुम से कहाँ राब्ता किया जाए कभी जो तुम से ज़रूरत हो बात करने की..!! - [अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती...](https://hindigazals.com/akele-rahne-ki-saza-qubul/): अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती तुमने की है मुझ पर यूँ ऐतबार न करने में भी तुमने ही भूल की है, कभी ये भी एहसास हुआ ख्याल ओ ख्वाबों में तुझे भूल जाएंगे तेरी जिद में ज़िन्दगी हमने फिजूल की है, न जाने कौन सा लम्हा तेरे लिए करार ए सबब होगा बस वही सबब समझने में हमने बार बार भूल की है, हमें भरोसा था कि एक दिन वापस लौट के आ जाएगा ज़िन्दगी की किताब में हमने तेरी तस्वीर कबूल की है, कई दिनों तक अपनी आँखे खुली रखी तेरे इंतजार में मेरा दिल कह रहा है हमने तुझे समझने में भूल की है..!! - [ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो](https://hindigazals.com/khwab-dikhane-wale-se/): ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो जादूगर की चालो से होशियार रहो, गाफ़िल ज़रा हुए तो सर कट जाएगा लकड़ी की इन ढालो से होशियार रहो, जाने कब ये ऊँगली काट के ले जाएँ हाथ मिलाने वालो से होशियार रहो, आज़ादी के पंख जकड़ने वाली है इस मकड़ी के जालो से होशियार रहो..!! - [मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए](https://hindigazals.com/mujhe-apne-bank-ki-kitab/): मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, गाँव गाँव ज़ख़्मी फिजाएँ हो गई ज़हरीली घर की हवाएँ हो गई, महँगी शराब से दवाएँ हो गई जाइए आवाम को जवाब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, लोग जो ग़रीब थे हक़ीर हो गए आप तो ग़रीब से अमीर हो गए यानि हुज़ूर बेज़मीर हो गए ख़ुद को बेज़मीरी का ख़िताब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, जेब है आवाम की सफाई कीजिए लूट के गरीबो की भलाई कीजिए कुछ तो निगाहों को हिजाब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, कैसी कैसी देखो योजनायें खा गए बेच कर ये अपनी आत्माएँ खा गए मार के मरीज़ों की दवाएँ खा गए इन्हें पद्मश्री का ख़िताब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए..!! - [जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे...](https://hindigazals.com/jise-ho-khwahish-e-duniyan/): जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे संसार मिल जाए मुझे तो फक़त तुम और तुम्हारा प्यार मिल जाए, तुम्हारे नाम मैं लिख दूँ चाँद, सितारा और सूरज मुझे नसीब लिखने का अगर अधिकार मिल जाए, मुझे कोयल नहीं भाये, मुझे बुलबुल नहीं भाये तुम्हारे बोल सुनने को अगर एक बार मिल जाए, ना कश्ती की, न साहिल की हो मुझे ख्वाहिश तुम्हारे प्यार की गहरी गर मुझे मंझधार मिल जाए, ना जीने की, ना मरने की फ़िक्र बाक़ी रहे कोई तुम्हारे चाँद सी सूरत का अगर दीदार मिल जाए..!! - [सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको](https://hindigazals.com/saari-basti-me-ye-jaadoo/): सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको, सदियों का रत जगा मेरी रातों में आ गया मैं एक हसीन शख़्स की बातों में आ गया, जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए, गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर उड़ जाए दुपट्टा तो खनक ओढ़ लिया कर, तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं, रात के सन्नाटे में हमने क्या क्या धोखे खाए हैं अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए हैं..!! - [दुनियाँ बदल गई है, ज़माना बदल गया है](https://hindigazals.com/duniyan-badal-gai-hai/): दुनियाँ बदल गई है, ज़माना बदल गया है यहाँ जीने का अंदाज़ पुराना बदल गया है, दोस्त अहबाब सारे ख़ुद गर्ज़ बने है जब से वक़्त के साथ साथ ही याराना बदल गया है, दौर में ज़दीद में खून के रिश्ते पानी हो रहे है हर एक रिश्ता ख़ुद से ही बेगाना हो गया है, फिर ये न कहना कि लैला तंग थी मजनू से एक गलत फ़हमी है सब बयाना बदल गया है, जब इश्क़ वही है तो आशिक़ न हो क्यूँ कर सुन बे अक्ल के अंधे अब ज़माना बदल गया है, हर एक दिल हुस्न के आगे घुटने टेक रहा है टेके भी न क्यूँ कर कि माशिकाना बदल गया है, ढूँढता फिरू कहाँ ? - [अब दावत पे भी बारात पे भी टैक्स लगेगा](https://hindigazals.com/ab-dawat-pe-bhi-baarat-pe-bhi/): अब दावत पे भी बारात पे भी टैक्स लगेगा अब शादी की रसुमात पे भी टैक्स लगेगा, अब यार की मुलाक़ात पे भी टैक्स लगेगा अब इज़हार की हर बात पे भी टैक्स लगेगा, अहसान ज़रा सोच के तुम करना किसी पे अब बे लौस इनायात पे भी टैक्स लगेगा, अब अपने असासे कभी ज़ाहिर नहीं करना अब इन तोहफ़े मराआत पे भी टैक्स लगेगा, मस्ज़िद का तक़द्दुस भी नहीं अब रहेगा वो अब सभी फर्ज़ इबादात पे भी टैक्स लगेगा, बातें करेगा गैर मुनासिब जो भी यहाँ पर उसकी हर एक सवालात पे भी टैक्स लगेगा, अब इश्क़ मुहब्बत पे भी पाबन्दी है यहाँ पर अब नज़रों की हर हरकात पे भी टैक्स लगेगा, तरकारी, फवाकह पे घी गोश्त और आटा पे अब घर के सभी समानात पे भी टैक्स लगेगा, कोई भी बुरा सोचे न ज़ालिम हुक्काम के बारे में वरना अब हर हक़ ख्यालात पे भी टैक्स लगेगा..!! - [गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है](https://hindigazals.com/gunge-lafzon-ka-ye-besamt/): गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है गुफ़्तुगू उसकी है लहजे में असर मेरा है, मैं ने खोए हैं यहाँ अपने सुनहरे शब ओ रोज़ दर ओ दीवार किसी के हों ये घर मेरा है, मेरा अस्लाफ़ से रिश्ता तो न तोड़ ऐ दुनिया सब महल तेरे हैं लेकिन ये खंडहर मेरा है, आती जाती हुई फ़सलों का मुहाफ़िज़ हूँ मैं फल तो सब उस की अमानत हैं शजर मेरा है, मेरे आँगन के मुक़द्दर में अँधेरा ही सही एक चराग़ अब भी सर ए राहगुज़र मेरा है, दूर तक दार ओ रसन दार ओ रसन दार ओ रसन ऐसे हालात में जीना भी हुनर मेरा है, जब भी तलवार उठाता हूँ कि छेड़ूँ कोई जंग ऐसा लगता है कि हर शाने पे सर मेरा है..!! - [भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है](https://hindigazals.com/bhid-me-koi-shanasa-bhi-nahi/): भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है ज़िंदगी मुझको अकेला भी नहीं छोड़ती है, आफ़ियत का कोई गोशा भी नहीं छोड़ती है और दुनिया मेरा रस्ता भी नहीं छोड़ती है, मुझको रुस्वा भी बहुत करती है शोहरत की हवस और शोहरत मेरा पीछा भी नहीं छोड़ती है, हम को दो घूँट की ख़ैरात ही दे दो वर्ना प्यास पागल हो तो दरिया भी नहीं छोड़ती है, आबरू के लिए रोती है बहुत पिछले पहर एक औरत कि जो पेशा भी नहीं छोड़ती है, डूबने वाले के हाथों में ये पागल दुनिया एक टूटा हुआ तिनका भी नहीं छोड़ती है, अब के जब गाँव से लौटे तो ये एहसास हुआ दुश्मनी ख़ून का रिश्ता भी नहीं छोड़ती है, क्या मुकम्मल है जुदाई कि बिछड़ जाने के बाद तुझसे मिलने का बहाना भी नहीं छोड़ती है, जानते सब थे कि नफ़रत की ये काली आँधी दश्त तो दश्त हैं दरिया भी नहीं छोड़ती है..!! - [ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ...](https://hindigazals.com/ae-yaqino-ke-khuda-shahar/): ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ किस का है नूर तेरा है चराग़ों में धुआँ किस का है ? - [उस गुल को भेजना है मुझे ख़त...](https://hindigazals.com/us-gul-ko-bhejna-hai/): उस गुल को भेजना है मुझे ख़त सबा के हाथ इस वास्ते लगा हूँ चमन की हवा के हाथ, बर्ग ए हिना ऊपर लिखो अहवाल ए दिल मेरा शायद कि जा लगे वो किसी मीरज़ा के हाथ, आज़ाद हो रहा हूँ दो आलम की क़ैद से मीना लगा है जब से कि कुछ बेनवा के हाथ, मरता हूँ मीरज़ाइ ए गुल देख हर सहर सूरज के हाथ चुनरी तो पंखा सबा के हाथ, 'मज़हर' छुपा के रख दिल ए नाज़ुक को अपने तू ये शीशा बेचना है किसी मीरज़ा के हाथ..!! - [मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है](https://hindigazals.com/maine-muddat-se-koi-khwab/): मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है रात खिलने का गुलाबों से महक आने का, ओस की बूंदों में सूरज के समा जाने का चाँद सी मिट्टी के ज़र्रों से सदा आने का, शहर से दूर किसी गाँव में रह जाने का खेत खलियानों में बाग़ों में कहीं गाने का, सुबह घर छोड़ने का देर से घर आने का बहते झरनों की खनकती हुई आवाज़ों का, चहचहाती हुई चिड़ियों से लदी शाख़ों का नर्गिसी आँखों में हँसती हुई नादानी का, मुस्कुराते हुए चेहरे की ग़ज़ल ख़्वानी का तेरा हो जाने तेरे प्यार में खो जाने का, तेरा कहलाने का तेरा ही नज़र आने का मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है, हाथ रख दे मेरी आँखों पे कि नींद आ जाए..!! - [हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ...](https://hindigazals.com/haay-logo-ki-karam/): हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ तोहमतें बदनामियाँ रुस्वाइयाँ, ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ, क्या ज़माने में यूँ ही कटती है रात करवटें, बेताबियाँ, अंगड़ाइयाँ, क्या यही होती है शाम ए इंतिज़ार आहटें, घबराहटें, परछाइयाँ, एक रिंद ए मस्त की ठोकर में हैं शाहियाँ, सुल्तानियाँ, दाराइयाँ, एक पैकर में सिमट कर रह गईं ख़ूबियाँ, ज़ेबाइयाँ, रानाइयाँ, रह गईं एक तिफ़्ल ए मकतब के हुज़ूर हिकमतें, आगाहियाँ, दानाइयाँ, ज़ख़्म दिल के फिर हरे करने लगीं बदलियाँ, बरखा, रुतें, पुरवाइयाँ, दीदा ओ दानिस्ता उन के सामने लग़्ज़िशें, नाकामियाँ, पसपाइयाँ, मेरे दिल की धड़कनों में ढल गईं चूड़ियाँ, मौसीक़ियाँ, शहनाइयाँ, उनसे मिल कर और भी कुछ बढ़ गईं उलझनें फ़िक्रें, क़यास, आराइयाँ, 'कैफ़' पैदा कर समुंदर की तरह वुसअतें, ख़ामोशियाँ, गहराइयाँ..!! - [फूल,खुशबू, कली की बात करें](https://hindigazals.com/fool-khushboo-kali-ki-baat/): फूल,खुशबू, कली की बात करें प्यार की, आशिकी की बात करें मौत का खौफ़ भूल कर यारो क्यूँ न हम ज़िन्दगी की बात करें दुश्मनी से हुआ न कुछ हासिल अब चलो दोस्ती की बात करें ज़िन्दगी इसको तो नही कहते हर समय बेबसी की बात करें मंजिलें किस तरह मिलें यारो रात-दिन हम उसी की बात करें चाहते हो सुकूँ मिले गर तो ग़ुम हुई उस ख़ुशी की बात करें चाहता है सुखनवर यही या रब सब मेरी शायरी की बात करें..!! - [क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे](https://hindigazals.com/kya-zamana-tha-ki-ham/): क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ तन्हाइयाँ सर फोड़ के सो जाती हैं इन मकानों में अजब लोग रहा करते थे, कर दिया आज ज़माने ने उन्हें भी मजबूर कभी ये लोग मेरे दुख की दवा करते थे, देख कर जो हमें चुप चाप गुज़र जाता है कभी उस शख़्स को हम प्यार किया करते थे, इत्तिफ़ाक़ात ए ज़माना भी अजब हैं नासिर आज वो देख रहे हैं जो सुना करते थे..!! - [जब से तेरी हर बात में रहने लगे](https://hindigazals.com/jab-se-teri-har-baat-me/): जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको गँवारा कैसे हो ? - [कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से...](https://hindigazals.com/kahani-dard-o-gam-ki/): कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी से क्या कहता ? - [दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया...](https://hindigazals.com/dil-ki-basti-pe-kisi-dard-ka/): दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं, हम किसी और ही आलम में रहा करते हैं अहल ए दुनिया ने जहाँ आके सताया भी नहीं, हम पे इस आलम ए ताज़ा में गुज़रती क्या है तुम ने पूछा भी नहीं हम ने बताया भी नहीं, कब से हूँ ग़र्क़ किसी झील की गहराई में राज़ ए अय्याम मगर अक़्ल ने पाया भी नहीं, बेज़मीनी का ये दुख और ज़मीं भी अपनी बेबसी ऐसी कि नुक्ता ये उठाया भी नहीं, बेजिहत उठते हुए ठोकरें खाते ये क़दम रहबर मेरा मुझे राह पे लाया भी नहीं, उस ने हमदर्दी के पैमाँ तो बहुत बाँधे थे आ पड़ी है तो मेरा हाथ बटाया भी नहीं, दिल की दीवारों से लिपटी है किसी शाम की याद जाने वाला तो कभी लौट के आया भी नहीं, सर्द मेहरी कि जिगर छलनी किए देती है उसने यूँ देखने में हाथ छुड़ाया भी नहीं, उससे उम्मीद ए वफ़ा बाँध रखी है 'शाहिद' जिसने ये बार मोहब्बत का उठाया भी नहीं..!! - [फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता...](https://hindigazals.com/firaq-o-vasl-se-hat-kar/): फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा हो, निकल आए जो हम घर से तो सौ रस्ते निकल आए अबस था सोचना घर में कोई ग़ैबी इशारा हो, न इस ढब की भी ज़ुल्मत हो कि सब मिल कर दुआ माँगें कोई जुगनू ही आ निकले न गर कोई सितारा हो, ज़ियाँ की ज़द पे दुनिया में कई लोग और भी होंगे तो फिर ऐ नामुरादी तू मेरे ग़म का सहारा हो, तक़ाबुल कसरत ओ क़िल्लत का कुछ मअनी नहीं रखता अंधेरा चीर कर निकले अगरचे एक शरारा हो, पुराने ग़म तेरे तो जुज़्व ए जाँ हम ने बना डाले बिसात ए दिल की ख़्वाहिश है नए ग़म का उतारा हो, फ़सील ए शहर पे रौशन अगर हों हुस्न की शमएँ तो एक एक लफ़्ज़ 'शाहिद' रौशनी का इस्तिआरा हो..!! - [किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया](https://hindigazals.com/kiya-ishq-tha-jo-baaise/): किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया यारो तमाम शहर तमाशाई बन गया, बिन माँगे मिल गए मेरी आँखों को रतजगे मैं जब से एक चाँद का शैदाई बन गया, देखा जो उसका दस्त ए हिनाई करीब से अहसास गूँजती हुई शहनाई बन गया, बरहम हुआ था मेरी किसी बात पर कोई वो हादसा ही वजह ए शानासाई बन गया, करता रहा जो रोज़ मुझे उस से बदगुमाँ वो शख्स भी अब उसका तमन्नाई बन गया, वो तेरी भी तो पहली मुहब्बत न थी क़तील फिर क्या हुआ अगर कोई हरजाई बन गया..!! - [तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है](https://hindigazals.com/tazrube-ke-dam-par/): तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात मुझे समझ आई नहीं, उसके बेरुखी के सबब हो गई तन्हाइयों से दोस्ती बाद बज़्म ए जानाँ हमने कोई महफ़िल सजाई नहीं, दुनियाँ की नज़र में हमारा हो कर भी जो हमारा नहीं उस ला हासिल तमन्ना को खोने में कोई बुराई नहीं, एक एक कर के राख हो गई उसकी याद ए रफ़्तगाँ फक़त एक उसकी तस्वीर हमने बटुए से हटाई नहीं..!! - [बस एक बार किसी ने गले लगाया था](https://hindigazals.com/bas-ek-baar-kisi-ne-gale/): बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया था, गली में लोग भी थे मेरे उसके दुश्मन लोग वो सब पे हँसता हुआ मेरे दिल में आया था, उस एक दश्त में सौ शहर हो गए आबाद जहाँ किसी ने कभी कारवाँ लुटाया था, वो मुझसे अपना पता पूछने को आ निकले कि जिनसे मैंने ख़ुद अपना सुराग़ पाया था, मेरे वजूद से गुलज़ार हो के निकली है वो आग जिस ने तेरा पैरहन जलाया था, मुझी को ताना ए ग़ारत गरी न दे प्यारे ये नक़्श मैंने तेरे हाथ से मिटाया था, उसी ने रूप बदल कर जगा दिया आख़िर जो ज़हर मुझ पे कभी नींद बन के छाया था, 'ज़फ़र' की ख़ाक में है किस की हसरत ए तामीर ख़याल ओ ख़्वाब में किस ने ये घर बनाया था..!! - [किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा](https://hindigazals.com/kis-simt-chal-padhi-hai/): किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा, अम्न ओ आमाँ से ख़ाली दुनियाँ क्यूँ हो गई ? - [एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में...](https://hindigazals.com/ehsas-e-ishq-dil-ki/): एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में आ गया बादल सिमट के चाँद की बाहोँ में आ गया, इज़हार ए इश्क़ मैं ने किसी से नहीं किया और बेसबब जहाँ की निगाहों में आ गया, वो मुस्कुरा के देख रहे हैं मेरी तरफ़ इतना असर तो अब मेरी आहों में आ गया, क्या पूछते हो अज़्म ए सफ़र की करामातें मंज़िल का नक़्श ख़ुद मेरी राहों में आ गया, हैं इब्तिदाई मरहले ये इश्क़ के अभी 'साहिल' ये सोज़ क्यूँ तेरी आहों में आ गया..!! - [हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है](https://hindigazals.com/haqir-jaanta-hai-iftikhar/): हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख दिया जिसने ख़ुद ही गैरो के बीबी का हक़ वो ख़्वार मांगता है, कर दिया हवाले उसके वतन की लाज गिरेबाँ जो सब के ही तार तार माँगता है, बिछा रखा है जिसने सबकी राह में काँटे सिले में लोगो से फूलो का हार माँगता है, ख़ुद के वायदे भी अपने जो निभा न सका माफ़ी तक ना कभी वो शर्मसार माँगता है, छीन कर मुफलिसों के मुँह का निवाला फिर वो अमीर ए शहर ऐतबार माँगता है, अहल ए सियासत के बस का ये रोग नहीं अब मुल्क ज़दीद कोई शहसवार माँगता है, वैसे तो रोज़ ही ज़ुल्फे तेरी सँवारा करता है है ये ख़्वाब अच्छा मगर इंतज़ार माँगता है, नवाब उन पे मेरा नगमा कारगर ही नहीं ये गीत वो है कि जो दिल के तार माँगता है..!! - [कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं...](https://hindigazals.com/karb-e-furqat-ruh-se/): कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये इंसान को जो गुज़र जाता है वो पल आता नहीं, मिट गया शिकवे से लुत्फ़ ए इंतिज़ार अब हमें वो राह दिखलाता नहीं, हम वफ़ाएँ कर के भी हैं शर्मसार वो जफ़ाएँ कर के भी शरमाता नहीं, दर्द वो इनआ'म है 'साहिल' कि जो हर किसी इंसाँ को रास आता नहीं..!! - [ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो](https://hindigazals.com/ye-bediyan-mere-paanv-me/): ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो फिर अहद भी ख़ुद ही तोड़ के जा रहे हो, पलकों की मुंडेरों पे परिंदों को उड़ाओ तस्लीम किया तुम मुझे समझा तो रहे हो, पछतावा न हो कल, क़दम सोच के लेना जज़्बात में उल्फ़त की क़सम खा तो रहे हो, समझाया था कल कितना मगर बाज़ न आये क्या होगा अभी माना कि पछता तो रहे हो, रहने भी अभी दीजिए अश्को का तक़ल्लुफ़ जब जानते हो दिल पे सितम ढा तो रहे हो, अब एक नये तर्ज़ ए रिफाक़त पे अमल हो तुम बीच में लोगों के भी तन्हा तो रहे हो, कल ठोकरों में जग की कहीं छोड़ न देना एक दर्द ज़दा शख्स को अपना तो रहे हो, इन्सान कभी रिज्क से भी सेर हुआ है ? - [हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर...](https://hindigazals.com/haalaat-e-zindagi-se-hue/): हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर क्या करे ? ज़ख्म ए ज़िगर भी हो गए नासूर क्या करे ? जहाँ में जिन पे नाज़ था हमको बहुत यारो ! मानिंद ए दुनियाँ हो गए मगरूर क्या करे ? - [आँखें यूँ बरसीं पैराहन भीग गया...](https://hindigazals.com/aankhe-yun-barsi-pairahan/): आँखें यूँ बरसीं पैरहन भीग गया तेरे ध्यान में सारा सावन भीग गया, ख़ुश्क महाज़ो बढ़ के मुझे सलामी दो मेरे लहू की छींटों से रन भीग गया, तुम ने मय पी चूर चूर मैं नश्शे में किस ने निचोड़ा किस का दामन भीग गया, क्या नमनाक हँसी दीवार ओ दर पर थी बचा खुचा सब रंग ओ रोग़न भीग गया, सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका बिन होली खेले ही साजन भीग गया..!! - [ये तसव्वुर का वार झूठा है...](https://hindigazals.com/ye-tasavvur-ka-vaar-jhutha-hai/): ये तसव्वुर का वार झूठा है ख़्वाब झूटे हैं सार झूठा है, फूल तुम तोड़ लाए शाख़ों से क्या बहारों से प्यार झूठा है ? - [ये न समझो ये ख्याल है मेरा...](https://hindigazals.com/ye-naa-samjho-ye-khyal-hai/): ये न समझो ये ख्याल है मेरा जो सुनाता हूँ वो हाल है मेरा, ऐसा गम हूँ मैं अपनी दुनिया में ख़ुद से मिलना मुहाल है मेरा, जिसको समझा गया उरूज़ मेरा दर हकीक़त वो ज़वाल है मेरा, क्या करूँ गैर से गिले शिकवे जिस में अटका वो जाल है मेरा, ये मुहब्बत कभी मुहब्बत थी जो बचा अब उबाल है मेरा, गर ये मैं हूँ तो फिर कहाँ तुम हो कितना सादा ये सवाल है मेरा..!! - [सारे मौसम बदल गए शायद...](https://hindigazals.com/saare-mausam-badal-gaye/): सारे मौसम बदल गए शायद और हम भी सँभल गए शायद, झील को कर के माहताब सुपुर्द अक्स पा कर बहल गए शायद, एक ठहराव आ गया कैसा ? - [ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने](https://hindigazals.com/zinda-rahne-ki-ye-tarqib/): ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने अपने होने की ख़बर सब से छुपा ली मैं ने, जब ज़मीं रेत की मानिंद सरकती पाई आसमाँ थाम लिया जान बचा ली मैं ने, अपने सूरज की तमाज़त का भरम रखने को नर्म छाँव में कड़ी धूप मिला ली मैं ने, मरहला कोई जुदाई का जो दरपेश हुआ तो तबस्सुम की रिदा ग़म को ओढ़ा ली मैं ने, एक लम्हे को तेरी सम्त से उठा बादल और बारिश की सी उम्मीद लगा ली मैं ने, बा'द मुद्दत मुझे नींद आई बड़े चैन की नींद ख़ाक जब ओढ़ ली जब ख़ाक बिछा ली मैं ने, जो 'अलीना' ने सर-ए-अर्श दुआ भेजी थी उस की तासीर यहीं फ़र्श पे पा ली मैं ने..!! - [बहुत कुछ मेहनतों से एक ज़रा...](https://hindigazals.com/bahut-kuch-mehnaton-se/): बहुत कुछ मेहनतों से एक ज़रा इज़्ज़त कमाई है अंधेरे झोंपड़े में रौशनी जुगनू से आई है, तसद्दुक़ ज़िंदगी फ़ाक़ों पे उसके अहद ए हाज़िर में कि जिसने जान दे कर आबरू अपनी बचाई है, हमें इंकार है बातिल परस्तों की क़यादत से हमारी ज़िंदगी की हर तमन्ना कर बलाई है, ख़ुद अपने शहर में अपना शनासाई नहीं कोई न जाने जुस्तुजू अपनी ये किस मंज़िल पे लाई है, अजब दस्तूर है साहिल कि इस अहद ए तरक़्क़ी में भलाई में बुराई और बुराई में भलाई है..!! - [मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते](https://hindigazals.com/manzil-pe-naa-pahunche-use/): मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते, एक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना एक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते, कम हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते, बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते..!! - [बेकार जब दुआ है दवा क्या करेगी आज](https://hindigazals.com/bekar-jab-duaa-hai-dawa-kya/): बेकार जब दुआ है दवा क्या करेगी आज ऐसे में ज़िंदगी भी वफ़ा क्या करेगी आज ? ये दौर सख़्त ओ तल्ख़ कलामी का दौर है लहजों की नर्म तर्ज़ ए अदा क्या करेगी आज ? - [सामने तू है लम्हा लम्हा मेरे...](https://hindigazals.com/saamne-tu-hai-lamha-lamha/): सामने तू है लम्हा लम्हा मेरे और ज़मीं आसमां की दूरी है, कोई मंतक, कोई दलील नहीं तू ज़रूरी तो बस ज़रूरी है, जैसे क़िस्मत पे इख़्तियार नहीं ये मुहब्बत भी ला शु'ऊरी है, कौन सीखा है सिर्फ़ बातों से सब को एक हादसा ज़रूरी है, एक बस तू ही रही मेरी हसरत बाक़ी हर आरज़ू तो पूरी है, लिखते लिखते अरसा गुज़र गया मगर दास्ताँ आज भी अधूरी है..!! - [उदास दिल है कि उनकी नज़र नहीं होती](https://hindigazals.com/udas-dil-hai-ki-unki-nazar/): उदास दिल है कि उनकी नज़र नहीं होती बग़ैर शम्स के ताब ए क़मर नहीं होती, कुछ ऐसे लोग भी दुनिया में हम ने देखे हैं समा भी जाते हैं दिल में ख़बर नहीं होती, उठो तो दस्त ब साग़र चलो तो शीशा ब दोश ये मयकदा है यहाँ यूँ गुज़र नहीं होती, कभी कभी मुझे उन का ख़याल आता है कभी कभी मुझे अपनी ख़बर नहीं होती, शब ए हयात है साग़र में डूब जा ऐ दिल ये ऐसी रात है जिस की सहर नहीं होती..!! - [बेवजह कहीं आना जाना क्या](https://hindigazals.com/bewajah-kahin-aana-jana-kya/): बेवजह कहीं आना जाना क्या बिन बात के मुस्कुराना क्या हर शख्स दानिशमंद मिलेगा यहाँ किसी को समझाना क्या दर्द तुम्हारा कम न कर सके ज़ख्म उसको दिखलाना क्या दौलत और जवानी ठहरे कब आरज़ी चीजो पे इतराना क्या ज़िन्दगी फ़रेबी मौत है सच्ची फिर मरने से घबराना क्या..?? - [धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल...](https://hindigazals.com/dharti-par-jab-khoon-bahta-hai/): धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता है, लाख करे वो ज़ब्त का दा'वा वक़्त ए रुख़्सत सब बेकार आँखें चाहें रोएँ न रोएँ काजल रोने लगता है, बेटी की ज़िद के आगे माँ चुप हो जाती है लेकिन नंगे सर की महरूमी पर आँचल रोने लगता है, ख़ुश्बू ख़ुश्बू लिपटे रहना साँपों की मजबूरी है वर्ना अपनी बे क़दरी पर संदल रोने लगता है, तुझ से बिछड़ कर ग़ैर के आगे रोए हों तो हम मुजरिम दिल का क्या है दिल पागल है पागल रोने लगता है..!! - [दिल धड़कता है तो आती हैं सदाएँ तेरी](https://hindigazals.com/dil-dhadakta-hai-to-aati-hai/): दिल धड़कता है तो आती हैं सदाएँ तेरी मेरी साँसों में महकने लगीं साँसें तेरी, चाँद ख़ुद महव ए तमाशा था फ़लक पर उस दम जब सितारों ने उतारीं थीं बलाएँ तेरी, शे'र तो रोज़ ही कहते हैं ग़ज़ल के लेकिन आ कभी बैठ के तुझ से करें बातें तेरी, ज़ेहन ओ दिल तेरे तसव्वुर से घिरे रहते हैं मुझ को बाहोँ में लिए रहती हैं यादें तेरी, क्यूँ मेरा नाम मेरे शे'र लिखे हैं इन में चुग़लियाँ करती हैं मुझ से ये किताबें तेरी, बेख़बर ओट से तू झाँक रहा हो हम को और हम चुपके से तस्वीर बना लें तेरी..!! - [उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम...](https://hindigazals.com/udasi-ka-ye-patthar-aansooon/): उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता, कभी बरसात में भी शादाब बेलें सूख जाती हैं हरे पेड़ों के गिरने का कोई मौसम नहीं होता, बहुत से लोग दिल को इस तरह महफूज़ रखते हैं कोई बारिश हो ये कागज़ ज़रा भी नम नहीं होता, बिछुड़ते वक़्त कोई बदगुमानी दिल में आ जाती उसे भी ग़म नहीं होता, मुझे भी ग़म नहीं होता, ये आँसू हैं इन्हें फूलों में शबनम की तरह रखना ग़ज़ल एहसास है एहसास का मातम नहीं होता..!! - [दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद](https://hindigazals.com/do-chaar-kya-hai-saare-zamaane/): दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद हम मिट नहीं सकेंगे मिटाने के बावजूद, ये राज़ काश बाद ए मुख़ालिफ़ तू जान ले क्यूँ जल रहे हैं तेरे बुझाने के बावजूद, अब भी बहुत ग़ुरूर है एक हाथ पर उसे एक हाथ हादसे में गँवाने के बावजूद, बुज़दिल था मुस्तहिक़ था मैं मुझको सज़ा मिली बख़्शा न उस ने हाथ उठाने के बावजूद, ख़्वाबों के शौक़ में कहीं आँखें गँवा न दें हम सो रहे हैं नींद न आने के बावजूद..!! - [हाल ए दिल सब से छुपाने में...](https://hindigazals.com/haal-e-dil-sab-se-chhupane/): हाल ए दिल सब से छुपाने में मज़ा आता है आप पूछें तो बताने में मज़ा आता है, रौशनी बोझ सी लगती है शब ए हिज्राँ में हाँ मगर दिल को जलाने में मज़ा आता है, जिसके कुछ तार उलझ जाते हैं दिल की सूरत बस उसी साज़ पे गाने में मज़ा आता है, जाँ बचाने का तसव्वुर भी बुरा लगता है इश्क़ में जान गँवाने में मज़ा आता है, याद कर कर के वो गर्मी की भरी दोपहरें पहली बारिश में नहाने में मज़ा आता है..!! - [बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस...](https://hindigazals.com/bada-besharm-zalim-hai/): बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस फ़ितरत है उसको कहाँ पता हया क्या ? - [कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में](https://hindigazals.com/kahin-pade-naa-mohabbat-ki/): कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में अदा से प्रेम करो दिल से प्यार होली में, गले में डाल दो बाँहों का हार होली में उतारो एक बरस का ख़ुमार होली में, मिलो गले से गले बार बार होली में लगा के आग बढ़ी आगे रात की जोगन, नए लिबास में आई है सुब्ह की मालन नज़र नज़र है कुँवारी अदा अदा कमसिन, हैं रंग रंग से सब रंग-बार होली में मिलो गले से गले बार बार होली में, हवा हर एक को चल फिर के गुदगुदाती है नहीं जो हँसते उन्हें छेड़ कर हंसाती है, हया गुलों को तो कलियों को शर्म आती है बढ़ाओ बढ़ के चमन का वक़ार होली में, मिलो गले से गले बार बार होली में ये किस ने रंग भरा हर कली की प्याली में, गुलाल रख दिया किस ने गुलों की थाली में कहाँ की मस्ती है मालन में और माली में, यही हैं सारे चमन की पुकार होली में मिलो गले से गले बार बार होली में, तुम्हीं से फूल चमन के तुम्हीं से फुलवारी सजाए जाओ दिलों के गुलाब की क्यारी, चलाए जाओ नशीली नज़र से पिचकारी लुटाए जाओ बराबर बहार होली में, मिलो गले से गले बार बार होली में मिले हो बारा महीनों की देखभाल के बाद, ये दिन सितारे दिखाते हैं कितनी चाल के बाद ये दिन गया तो फिर आएगा एक साल के बाद, निगाहें करते चलो चार यार होली में मिलो गले से गले बार बार होली में, बुराई आज न ऐसे रहे न वैसे रहे सफ़ाई दिल में रहे आज चाहे जैसे रहे, ग़ुबार दिल में किसी के रहे तो कैसे रहे अबीर उड़ती है बन कर ग़ुबार होली में, मिलो गले से गले बार बार होली में हया में डूबने वाले भी आज उभरते हैं, हसीन शोख़ियाँ करते हुए गुज़रते हैं जो चोट से कभी बचते थे चोट करते हैं, हिरन भी खेल रहे हैं शिकार होली में मिलो गले से गले बार बार होली में ..!! - [अगर आज भी बोली ठोली न होगी](https://hindigazals.com/agar-aaj-bhi-boli/): अगर आज भी बोली ठोली न होगी तो होली ठिकाने की होली न होगी, बड़ी गालियाँ देगा फागुन का मौसम अगर आज ठट्ठा ठिठोली न होगी, वो खोलेंगे आवारा मौसम के झोंके जो खिड़की शराफ़त ने खोली न होगी, है होली का दिन कम से कम दोपहर तक किसी के ठिकाने की बोली न होगी, अभी से न चक्कर लगा मस्त भँवरे कली ने अभी आँख खोली न होगी ये बोटी परी बन के उड़ने लगेगी ज़रा घोलिए फिर से घोली न होगी, इसी जेब में होगी फ़ित्ने की पुड़िया ज़रा फिर टटोलो टटोली न होगी, 'नज़ीर' आज आएँगे मिलने यक़ीनन न आए तो आज उन की होली न होगी..!! - [दिल में उठती है मसर्रत की लहर होली में](https://hindigazals.com/dil-me-uthti-hai-masarrat-ki/): दिल में उठती है मसर्रत की लहर होली में मस्तियाँ झूमती हैं शाम ओ सहर होली में, सारे आलम की फ़ज़ा गूँजती है नग़्मों से कैफ़ ओ मस्ती के बरसते हैं गुहर होली में, दुश्मन और दोस्त सभी मलते हैं आपस में गुलाल सारे बेकार हुए तेग़ ओ तबर होली में, मोहतसिब मस्त है और हज़रत ए वाइज़ सरशार मयकदा बन गया है ऐश नगर होली में, किस की मख़मूर निगाहों ने पिलाए साग़र मस्त ओ बे ख़ुद हुए सब अहल ए नज़र होली में, आज क्यूपिड भी लिए हाथों में पिचकारी है उस से बच कर भला जाओगे किधर होली में, ख़ुम के ख़ुम तू भी लुंढाने की क़सम खा ले आज देख ज़ाहिद कहीं रखियो न कसर होली में, तू समझता है कि है तू ही निराला ज़ाहिद अरे आते हैं यहाँ तेरे ख़ुसर होली में, कपड़े लत पत किए कीचड़ में चले आते हैं शैख़ साहब के पिसर लख़्त ए जिगर होली में, बूढे बूढे भी खड़े तकते हैं लकड़ी टीके बंद हैं रास्ते और राहगुज़र होली में, और बस्ती नहीं ये हिन्द है सुन खोल के कान बच के चलते हैं यहाँ ख़्वाजा ख़िज़र होली में, मयकदा है यहाँ सामान ए मसर्रत हैं ज़रीफ़' आ भी जाओ मियाँ बेख़ौफ़ ओ ख़तर होली में..!! - [ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा](https://hindigazals.com/ye-noor-utrega-aakhir/): ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा जनाब उतरेगा बंदा हुज़ूर उतरेगा, जो चढ़ गया है वो ऊपर नहीं निकलने का उतर ही जाएगी फिर वो ज़ुरूर उतरेगा, ज़मीन सोख़्ता सामाँ है ख़ाक कर देगी नशा गुमान तकब्बुर सुरूर उतरेगा, वजूद पञ्चमहाभूत में उतर लेगा हुनर उलूम अदा का उबूर उतरेगा, ख़ला में ताहिर ए दरमादा बोलता होगा जहाँ सवाब रुकेंगे क़ुसूर उतरेगा..!! - [समंदरों में हमारा निशान फैला है](https://hindigazals.com/samandaro-me-hamara-nishan/): समंदरों में हमारा निशान फैला है पलट के देख मुए आसमान फैला है, मुक़ाबला है ख़ुराफ़ात का अँधेरों से हद ए उलूम के आगे बयान फैला है, किसी जमाल ए हुनर का कोई निशाँ होता यज़िदियो का ये ख़ाली मकान फैला है, जिसे डिबेट बताते हैं मीडिया वाले वहाँ ग़ुरूर खड़ा है गुमान फैला है, किसू के बाप का हिंदोस्तान क्या पूछो ? - [तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते](https://hindigazals.com/tabib-ho-ke-bhi-dil-ki/): तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते हम अपने ज़ख़्मों से कोई दग़ा नहीं करते, परिंदे उड़ने लगे हैं ग़ुरूर के तेरे हवा में काग़ज़ी पर से उड़ा नहीं करते, नकेल डालनी है नफ़्स के इरादों पर बिना लगाम के घोड़े थमा नहीं करते, दुआ को हाथ उठाते नहीं हर इक के लिए तो ये भी सच है कि हम बद्दुआ नहीं करते, ये सुर्ख़ आँधियाँ क्या 'चाँद' का बिगाड़ेंगी बुलंद पेड़ हवा से गिरा नहीं करते..!! - [दो चार गाम राह को हमवार देखना](https://hindigazals.com/do-chhar-gaam-raah-ko/): दो चार गाम राह को हमवार देखना फिर हर क़दम पे एक नई दीवार देखना, आँखों की रौशनी से है हर संग आईना हर आइने में ख़ुद को गुनहगार देखना, हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी जिसको भी देखना हो कई बार देखना, मैदाँ की हार जीत तो क़िस्मत की बात है टूटी है किस के हाथ में तलवार देखना, दरिया के इस किनारे सितारे भी फूल भी दरिया चढ़ा हुआ हो तो उस पार देखना, अच्छी नहीं है शहर के रस्तों से दोस्ती आँगन में फैल जाए न बाज़ार देखना..!! - [दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ](https://hindigazals.com/duniya-ki-riwayat-se-begana/): दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ, इस कसरत ए ग़म पर भी मुझे हसरत ए ग़म है जो भर के छलक जाए वो पैमाना नहीं हूँ, रूदाद ए ग़म ए इश्क़ है ताज़ा मेरे दम से उनवान ए हर अफ़्साना हूँ अफ़्साना नहीं हूँ, इल्ज़ाम ए जुनूँ दें न मुझे अहल ए मोहब्बत मैं ख़ुद ये समझता हूँ कि दीवाना नहीं हूँ, मैं क़ाएल ए ख़ुद्दारी ए उल्फ़त सही लेकिन आदाब ए मोहब्बत से तो बेगाना नहीं हूँ, है बर्क़ ए सर ए तूर से दिल शोला ब दामाँ शम ए सर ए महफ़िल हूँ मैं परवाना नहीं हूँ, है गर्दिश ए साग़र मेरी तक़दीर का चक्कर मोहताज ए तवाफ़ ए दर ए मयख़ाना नहीं हूँ, काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ, लज़्ज़त कश ए नज़्ज़ारा 'शकील' अपनी नज़र है महरूम ए जमाल ए रुख़ ए जानाना नहीं हूँ..!! - [यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का](https://hindigazals.com/yahi-haal-raha-saaqi-tere/): यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का तो ढेर लग जाएगा टूटे हुए पैमानों का, क़हत दुनियाँ में है अब ऐसे मुसलमानों का ज़ोर जो तोड़ दिया करते थे तूफानों का, कोई खालिद है न तारीक है, न इब्न ए कासिम अब रास्ता साफ़ है बढ़ते हुए शैतानो का, जिस जगह चाहो जहाँ चाहो बहा दो इसको खून इस दौर में सस्ता है मुसलमानों का, जिनके होते हुए लूट जाए ग़रीबों के मकाँ मर्सियाँ आओ पढ़े ऐसे निगहबानो का..!! - [अब तरसते हो कि बच्चे मेरे बोले उर्दू](https://hindigazals.com/ab-taraste-ho-ki-bachche-mere/): अब तरसते हो कि बच्चे मेरे बोले उर्दू उन्हें अफरंग बनाने की ज़रूरत क्या थी ? आज रोते हो कि अल्लाह मदद को आये आख़िर असनाम बनाने की ज़रूरत क्या थी ? काश ! - [औरों की प्यास और है और उसकी...](https://hindigazals.com/auro-ki-pyas-aur-hai-aur/): औरों की प्यास और है और उसकी प्यास और कहता है हर गिलास पे बस एक गिलास और, ख़ुद को कई बरस से ये समझा रहे हैं हम काटी है इतनी उम्र तो दो चार मास और, पहले ही कम हसीन कहाँ था तुम्हारा ग़म पहना दिया है उस को ग़ज़ल का लिबास और, टकरा रही है साँस मेरी उस की साँस से दिल फिर भी दे रहा है सदा और पास और, अल्लाह उस का लहजा ए शीरीं कि क्या कहूँ वल्लाह उस पे उर्दू ज़बाँ की मिठास और, बाँधा है अब नक़ाब तो फिर कस के बाँध ले इक घूँट पी के ये न हो बढ़ जाए प्यास और, 'ग़ालिब' हयात होते तो करते ये ए'तिराफ़ दौर ए चराग़ में है ग़ज़ल का क्लास और..!! - [जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए](https://hindigazals.com/jung-jitni-ho-sake-dushwar/): जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए जीत हासिल हो तो लज़्ज़तदार होनी चाहिए, एक आशिक़ कल सलामत शहर में देखा गया ये ख़बर तो सुर्ख़ी ए अख़बार होनी चाहिए, कह रही है आजकल ग़ज़लें किसी के इश्क़ में वो कि जो ख़ुद ज़ीनत ए अशआर होनी चाहिए, इश्क़ दोनों ने किया था ख़ुदकुशी बस मैं करूँ वो भी मरने के लिए तय्यार होनी चाहिए, दिल की नादानी ही बस काफ़ी नहीं है इश्क़ में अक़्ल भी थोड़ी बहुत बीमार होनी चाहिए, प्यार है तो हाथ उस का थाम अपने हाथ में जंग है तो हाथ में तलवार होनी चाहिए..!! - [अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है...](https://hindigazals.com/agarche-zor-hawaao-ne-daal/): अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है मगर चराग़ ने लौ को सँभाल रखा है, मोहब्बतों में तो मिलना है या उजड़ जाना मिज़ाज ए इश्क़ में कब ए'तिदाल रखा है, हवा में नशा ही नशा फ़ज़ा में रंग ही रंग ये किस ने पैरहन अपना उछाल रखा है, भले दिनों का भरोसा ही क्या रहें न रहें सो मैं ने रिश्ता ए ग़म को बहाल रखा है, हम ऐसे सादा दिलों को वो दोस्त हो कि ख़ुदा सभी ने वादा ए फ़र्दा पे टाल रखा है, हिसाब ए लुत्फ़ ए हरीफ़ाँ किया है जब तो खुला कि दोस्तों ने ज्यादा ख़याल रखा है, भरी बहार में एक शाख़ पर खिला है गुलाब कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रखा है, 'फ़राज़' इश्क़ की दुनिया तो ख़ूबसूरत थी ये किस ने फ़ित्ना ए हिज्र ओ विसाल रखा है..!! - [वो हँस के देखती होती तो उस से बात...](https://hindigazals.com/wo-hans-ke-dekhti-hoti-to/): वो हँस के देखती होती तो उस से बात करते कोई उम्मीद भी होती तो उससे बात करते, हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ वो लड़की अजनबी होती तो उससे बात करते, हमारे जाम आधी हौसला अफ़ज़ाई कर पाए अगर उस ने भी पी होती तो उससे बात करते तवज्जोह से बहुत शरमाती है आवाज़ अपनी अगर वो सो रही होती तो उससे बात करते, किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था किसी ने बात की होती तो उससे बात करते, ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तुगू की इंतिहा है कोई बात अनकही होती तो उससे बात करते..!! - [उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं](https://hindigazals.com/udte-hai-girte-hai-fir-se/): उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं, कोई उस बूढे पीपल से कह आओ पिंजरे में हम ख़ूब मज़े से उड़ते हैं, हाए वो चिड़िया उड़ मैना उड़ के झगड़े और फिर साबित करना बकरे उड़ते हैं, पिंजरे में दाना पानी सब रक्खा है और परिंदे भूखे प्यासे उड़ते हैं, देख रहे हैं हम भी जवानी के मौसम बंद हवा में कैसे दुपट्टे उड़ते हैं, इस तोते का पिंजरा खोलो फिर देखो कैसे इस तोते के तोते उड़ते हैं..!! - [तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है](https://hindigazals.com/titli-se-dosti-na-gulabo-ka/): तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है, वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त आँखों को सिर्फ़ उसके ख़्वाबों का शौक़ है, हम आशिक़ ए ग़ज़ल हैं तो मग़रूर क्यों न हों ? - [तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहाँ बनाया](https://hindigazals.com/tarif-us-khuda-ki-jisne/): तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहाँ बनाया कैसी हसीं ज़मीं बनाई क्या आसमां बनाया, मिट्टी से बेल बूटे क्या ख़ुश नुमा उगाया पहना के सब्ज़ ख़िलअत उनको जवाँ बनाया, ख़ुश रंग और ख़ुशबू गुल फूल हैं खिलाएँ इस खाक़ के खंडहर को क्या गुलिस्ताँ बनाया, मेवे लगाये क्या क्या ख़ुश ज़ायका रसीले चखने से जिनके मुझको शीरीं दहाँ बनाया, सूरज बना के तूने रौनक जहाँ को बख्शी रहने को फिर हमारे महफूज़ मकाँ बनाया, प्यासी ज़मीं के मुँह में मीना का टपकाया पानी और बादलों को तू ने मीना का निशाँ बनाया, ये प्यारी प्यारी चिड़ियाँ फिरती है जो चहकती क़ुदरत ने तेरी उनको तस्बीह ख़्वाँ बनाया, तिनके उठा उठा कर लाएँ कहाँ कहाँ से किस खूबसूरती से फिर आशियाँ बनाया, ऊँची उड़े हवा में बच्चो को पर ना भूले उन बे परों का इनको रोज़ी रसां बनाया, रहमत से तेरी क्या क्या हैं नेमते मयस्सर उन नेमतो का मुझ को है कद्र दां बनाया, आब ए रवां के अंदर मछली बनाई तू ने मछली के तैरने को आब ए रवाँ बनाया, हर चीज से है तेरी कारीगरी टपकती ये कारखाना तू ने था कब रायगाँ बनाया..!! - [जी भर कर रोने को करता है दिल...](https://hindigazals.com/jee-bhar-kar-rone-ko-karta-hai/): जी भर कर रोने को करता है दिल आज पलकें भिगोने को करता है दिल, नहीं मालूम कुछ भी सबब इसका बस दुखी होने को करता है दिल, किसी की याद सता रही है बहुत शब गए भी न सोने को करता है दिल, क्या ही खून रुलाता है गम ए हिज्राँ में तन्हाई में फूट के रोने को करता है दिल, कोई हद भी है सितम ज़रीफ़ी की ? - [इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले...](https://hindigazals.com/ilaz-e-shisha-e-dil-karoon/): इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले जो शीशा गर कोई कोई मिला नहीं इधर, मिलेगा क्या उधर कोई ? - [जब इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी...](https://hindigazals.com/jab-ikkis-baras-guzre/): जब इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी ए कामिल को तब जा के कहीं हमको 'ग़ालिब' का ख़याल आया, तुर्बत है कहाँ उस की मस्कन था कहाँ उसका अब अपने सुख़न परवर ज़ेहनों में सवाल आया, सौ साल से जो तुर्बत चादर को तरसती थी अब उस पे अक़ीदत के फूलों की नुमाइश है, उर्दू के तअ'ल्लुक़ से कुछ भेद नहीं खुलता ये जश्न ये हंगामा ख़िदमत है कि साज़िश है, जिन शहरों में गूँजी थी ग़ालिब की नवा बरसों उन शहरों में अब उर्दू बेनाम ओ निशाँ ठहरी, आज़ादी ए कामिल का एलान हुआ जिस दिन मा'तूब ज़बाँ ठहरी ग़द्दार ज़बाँ ठहरी, जिस अहद ए सियासत ने ये ज़िंदा ज़बाँ कुचली उस अहद ए सियासत को मरहूम का ग़म क्यूँ है ? - [वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम...](https://hindigazals.com/wo-insaan-jo-shikar/): वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम होता है भला करता है दुनिया का मगर बदनाम होता है, जो देखो ग़ौर से हर शे'र एक इल्हाम होता है सभी अशआ'र से ज़ाहिर कोई पैग़ाम होता है, दहल जाते हैं दिल कलियों के गुलशन थरथराता है चमन में जब कोई ताइर असीर ए दाम होता है, ख़िरद हाइल हुआ करती है जब भी राह ए उल्फ़त में जुनून ए इश्क़ ए सादिक़ मुफ़्त में बदनाम होता है, जब आ जाता है ग़ालिब ज़ोर ए बातिल हक़परस्तों पर निज़ाम ए जब्र से हरसू बपा कोहराम होता है, ये दुनिया है अजब इसमें भला क्या क्या नहीं होता ? - [सूरमाओं को सर ए आम से डर लगता है](https://hindigazals.com/soormaaon-ko-sar-e/): सूरमाओं को सर ए आम से डर लगता है अब इंक़लाब को अवाम से डर लगता है, हमीं हैं ज़ेर ए बहस और हमीं ख़ुदा ए बहस फिर हमें किसलिए अंजाम से डर लगता है, वज़ीफ़ाख़ोर रवायत ने मार डाला है हुनर को गर्दिश ए अय्याम से डर लगता है, हमारे वर्ग से संघर्ष गया शक़ आया जैसे अखरोट को बादाम से डर लगता है, हमीं हैं रश्क़ ए मलाइक हमीं नबी अव्वल हमीं को नींद में इल्हाम से डर लगता है..!! - [ज़िक्र उस परीवश का और फिर बयां अपना](https://hindigazals.com/ziqr-us-pariwash-ka/): ज़िक्र उस परीवश का और फिर बयां अपना बन गया रकीब आख़िर था जो राज़दां अपना, मय वो क्यूँ बहुत पीते बज़्म ए ग़ैर में, या रब आज ही हुआ मंज़ूर उनको इम्तेहाँ अपना, मंज़र एक बुलन्दी पर और हम बना सकते अरश से उधर होता काश के मकां अपना, दे वो जिस कदर ज़िल्लत हम हंसी में टालेंगे बारे आशना निकला उनका पासबां अपना, दर्द ए दिल लिखूं कब तक, जाऊं उन को दिखला दूं उंगलियां फ़िगार अपनी ख़ामा ख़ूंचकां अपना, घिसते घिसते मिट जाता आप ने अबस बदला नंग ए सिजदा से मेरे संग ए आसतां, अपना, ता करे न ग़म्माज़ी, कर लिया है दुशमन को दोस्त की शिकायत में हम ने हमज़बां अपना, हम कहां के दाना थे, किस हुनर में यकता थे बेसबब हुआ 'ग़ालिब' दुशमन आसमां अपना..!! - [दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ...](https://hindigazals.com/dard-minnat-kash-e/): दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ मैं न अच्छा हुआ, बुरा न हुआ, जमा करते हो क्यूँ रकीबों को ? - [यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने...](https://hindigazals.com/yahan-kisi-ko-aawaz/): यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने देता है कोई ज़रा सी आवाज़ करो तो गला दबा देता है हर कोई, प्यास से मरते हुए को पानी की बूँद नहीं मिलती ज़रा सी आग लग जाए तो हवा देता है हर कोई, जिसके पास कुछ नहीं उसे कुछ नहीं मिलता ख़ाली बर्तन को पीछे खिसका देता है हर कोई, ये जुमला बड़ा मशहूर है ज़माने भर में कि जिसके पास है उसे ही सहारा देता है हर कोई, नसीहत करने वाले लाखो मिल जाते है लेकिन ज़रूरत पड़ने पर किनारा कर लेता है हर कोई, तुम काम आए तो ये तुम्हारी खुशनसीबी वरना जहाँ में तन्हा भी गुज़ारा कर लेता है हर कोई..!! - [तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है](https://hindigazals.com/teri-har-baat-chal/): तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है कि जैसे याद की ख़ुशबू किसी हिचकी से आती है, कहाँ से और आएगी अक़ीदत की वो सच्चाई जो जूठे बेर वाली सरफिरी सबरी से आती है, बदन से तेरे आती है मुझे ऐ माँ वही ख़ुशबू जो एक पूजा के दीपक में पिघलते घी से आती है, उसी ख़ुशबू के जैसी है महक पहली मुहब्बत की जो दुल्हन की हथेली पर रची मेहँदी से आती है, हज़ारों खुशबुएँ दुनियाँ में है पर उस से छोटी है किसी भूखे को जो सिकती हुई रोटी से आती है, मेरे घर में मेरी पुरवाईयाँ घायल पड़ी है अब कोई पछवा न जाने कौन सी खिड़की से आती है, ये माना आदमी में फूल जैसे रंग है लेकिन अदब ओ तहज़ीब की ख़ुशबू मुहब्बत से ही आती है..!! - [समझे वही इसको जो हो दीवाना...](https://hindigazals.com/samjhe-wahi-isko-jo/): समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का अकबर ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का, गर शैख़ ओ बहरमन सुनें अफ़साना किसी का माबद न रहे काबा ओ बुतख़ाना किसी का, अल्लाह ने दी है जो तुम्हे चाँद सी सूरत रौशन भी करो जाके सियहख़ाना किसी का, अश्क आँखों में आ जाएँ एवज़ नींद के साहब ऐसा भी किसी शब सुनो अफ़साना किसी का, इशरत जो नहीं आती मेरे दिल में, न आए हसरत ही से आबाद है वीराना किसी का, करने जो नहीं देते बयां हालत ए दिल को सुनिएगा लब ए ग़ौर से अफ़साना किसी का, कोई न हुआ रूह का साथी दम ए आख़िर काम आया न इस वक़्त में याराना किसी का, हम जान से बेज़ार रहा करते हैं अकबर जब से दिल ए बेताब है दीवाना किसी का..!! - [कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में...](https://hindigazals.com/kahan-le-jaaoon-dil/): कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है, इलाही कैसी कैसी सूरतें तूने बनाई हैं ? - [ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को...](https://hindigazals.com/gazalon-ka-hunar-apni/): ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे, कह देना समुंदर से हम ओस के मोती हैं दरिया की तरह तुझ से मिलने नहीं आएँगे, वो धूप के छप्पर हों या छाँव की दीवारें अब जो भी उठाएँगे मिलजुल के उठाएँगे, जब साथ न दे कोई आवाज़ हमें देना हम फूल सही लेकिन पत्थर भी उठाएँगे..!! - [ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है](https://hindigazals.com/ye-jo-hasil-hame/): ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है ये भी तो अपनी जगह एक परेशानी है, ज़िंदगी का ही नहीं ठोर ठिकाना मालूम मौत तो तय है कि किस वक़्त कहाँ आनी है, कोई करता ही नहीं ज़िक्र वफ़ादारी का इन दिनों इश्क़ में आसानी ही आसानी है, कब ये सोचा था कभी दोस्त कि यूँ भी होगा तेरी सूरत तेरी आवाज़ से पहचानी है, चैन लेने ही नहीं देती किसी पल मुझको रोज़ ए अव्वल से मेरे साथ जो हैरानी है, ये भी मुमकिन है कि आबादी हो इससे आगे ये जो ता हद्द ए नज़र फैलती वीरानी है, क्यूँ सितारे हैं कहीं और कहीं आँसू हैं आँख वालों ने यही रम्ज़ नहीं जानी है, तख़्त से तख़्ता बहुत दूर नहीं होता है बस यही बात हमें आप को बतलानी है, दोस्त की बज़्म ही वो बज़्म है 'अमजद' कि जहाँ अक़्ल को साथ में रखना बड़ी नादानी है..!! - [बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते](https://hindigazals.com/bujh-gayi-aankh-tera/): बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार करने की अदा उसकी कर देती है इंकार वो इज़हार करते करते, इतना भी आसां नहीं ज़िस्म के पार जाना लोग डूबे ही है ये ज़िस्म पार करते करते, न जाने कब बिछड़ गए तुझ से ऐ ज़िन्दगी ख़्वाब पूरे होने का ऐतबार करते करते, ज़माना ये कि गर लिख दूँ कागज़ पे सच हर्फ़ बौखला जाते है तकरार करते करते..!! - [ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते](https://hindigazals.com/ye-aur-baat-hai/): ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते, हज़ार जाल लिए घूमती फिरे दुनिया तेरे असीर किसी के हुआ नहीं करते, ये आइनों की तरह देख भाल चाहते हैं कि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते, वफ़ा की आँच सुख़न का तपाक दो इनको दिलों के चाक रफ़ू से सिला नहीं करते, जहाँ हो प्यार ग़लत फ़हमियाँ भी होती हैं सो बात बात पे यूँ दिल बुरा नहीं करते, हमें हमारी अनाएँ तबाह कर देंगी मुकालमे का अगर सिलसिला नहीं करते, जो हम पे गुज़री है जानाँ वो तुम पे भी गुज़रे जो दिल भी चाहे तो ऐसी दुआ नहीं करते, हर एक दुआ के मुक़द्दर में कब हुज़ूरी है तमाम ग़ुंचे तो 'अमजद' खिला नहीं करते..!! - [थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी](https://hindigazals.com/the-khwab-ek-hamare/): थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी, ये ज़िंदगी है यहाँ इस तरह ही होता है सभी ने बोझ से लादे हैं कुछ उतारे भी, सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी, किसी का अपना मोहब्बत में कुछ नहीं होता कि मुश्तरक हैं यहाँ सूद भी ख़सारे भी, बिगाड़ पर है जो तन्क़ीद सब बजा लेकिन तुम्हारे हिस्से के जो काम थे सँवारे भी, बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले जो साहिलों पे खड़े थे बहुत पुकारे भी, जैसे रेल में दो अजनबी मुसाफ़िर हों सफ़र में साथ रहे यूँ तो हम तुम्हारे भी, यही सही तेरी मर्ज़ी समझ न पाए हम ख़ुदा गवाह कि मुबहम थे कुछ इशारे भी, यही तो एक हवाला है मेरे होने का यही गिराती है मुझको यही उतारे भी, इसी ज़मीन में एक दिन मुझे भी सोना है इसी ज़मीं की अमानत हैं मेरे प्यारे भी, वो अब जो देख के पहचानते नहीं 'अमजद' है कल की बात वो लगते थे कुछ हमारे भी..!! - [तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो](https://hindigazals.com/tera-ye-lutf-kisi/): तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो ये जो साहिल सा नज़र आता है तूफ़ान न हो, क्या बला शहर पे टूटी है ख़ुदा ख़ैर करे यूँ सर ए शाम कोई दश्त भी वीरान न हो, रंग ख़ुश्बू से जुदा हो तो बिखर जाता है देखने वाले मेरे हाल पे हैरान न हो, बात बनती है तो फिर आप ही बन जाती है इतनी मायूस मुक़द्दर से मेरी जान न हो, सीख इस शहर में जीने का सलीक़ा 'अमजद' कोई मरता है मरे, आप का नुक़सान न हो..!! - [वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे...](https://hindigazals.com/wo-gazal-walo-ka-usloob/): वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे, इतनी मिलती है मेरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मेरा महबूब समझते होंगे, मैं समझता था मोहब्बत की ज़बाँ ख़ुशबू है फूल से लोग उसे ख़ूब समझते होंगे, देख कर फूल के औराक़ पे शबनम कुछ लोग तेरा अश्कों भरा मक्तूब समझते होंगे, भूल कर अपना ज़माना ये ज़माने वाले आज के प्यार को मायूब समझते होंगे..!! - [जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे...](https://hindigazals.com/jahan-ped-par-chaar/): जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे, हुई शाम यादों के एक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे, घड़ी दो घड़ी मुझको पलकों पे रख यहाँ आते आते ज़माने लगे, कभी बस्तियाँ दिल की यूँ भी बसीं दुकानें खुलीं, कारख़ाने लगे, वहीं ज़र्द पत्तों का कालीन है गुलों के जहाँ शामियाने लगे, पढाई लिखाई का मौसम कहाँ किताबों में ख़त आने-जाने लगे..!! - [है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र...](https://hindigazals.com/hai-azib-shahar-ki/): है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बदमिज़ाज सी शाम है, यूँही रोज़ मिलने की आरज़ू बड़ी रख रखाव की गुफ़्तुगू ये शराफ़तें नहीं बेग़रज़ इसे आप से कोई काम है, कहाँ अब दुआओं की बरकतें वो नसीहतें वो हिदायतें ये मुतालबों का ख़ुलूस है ये ज़रूरतों का सलाम है, वो दिलों में आग लगाएगा मैं दिलों की आग बुझाऊंगा उसे अपने काम से काम है मुझे अपने काम से काम है, न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर कई साल बा'द मिले हैं हम तेरे नाम आज की शाम है, कोई नग़्मा धूप के गाँव सा कोई नग़्मा शाम की छाँव सा ज़रा इन परिंदों से पूछना ये कलाम किस का कलाम है..!! - [वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी...](https://hindigazals.com/wahshate-bikhri-padi-hai/): वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी जाऊँ मैं घूम फिर आया हूँ अपना शहर तेरा गाँव मैं, किस को रास आया है इतनी देर तक का जागना वो जो मिल जाए तो उसको भी यही समझाऊँ मैं, अब तो आँखों में उतर आई है दिल की वहशतें आईना देखूँ तो अपने आप से डर जाऊँ मैं, कुछ तो बता ऐ मातमी रातों की धुँधली चाँदनी ! - [क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त...](https://hindigazals.com/kya-shart-e-muhabbat/): क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त ए ज़माना है ! - [काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया](https://hindigazals.com/kaanto-ka-ek-maqan/): काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया एक फूल सा निशान मेरे पास रह गया, सामान तू ने रख लिया जाते हुए तमाम लेकिन तेरा ध्यान मेरे पास रह गया, जाते हुए यकीन की दौलत वो ले गया एक वहम और गुमान मेरे पास रह गया, सूरज चला गया मुझे सहरा में छोड़ के किरनो का सायेबां मेरे पास रह गया, हमको भुलाने पर है कहाँ उसको इख़्तियार कितना हसीन गुमान मेरे पास रह गया..!! - [मुश्किल दिन भी आए लेकिन फ़र्क़....](https://hindigazals.com/mushkil-din-bhi-aaye/): मुश्किल दिन भी आए लेकिन फ़र्क़ न आया यारी में हम ने पूरी जान लगाई उस की ताबेदारी में, बेईमानी करते तो फिर शायद जीत के आ जाते चाहे हार के वापस आए खेले अपनी बारी में, मीठे मीठे होंठ हिलाए कड़वी कड़वी बातें की कीकर और गुलाब लगाया उस ने एक कियारी में, तेरी जानिब उठने वाली आँखों का रुख़ मोड़ लिया हम ने अपने ऐब दिखाए तेरी पर्दादारी में, जाने अब वो किस के साथ निकलता होगा रातों को जाने कौन लगाता होगा दो घंटे तय्यारी में..!! - [दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं](https://hindigazals.com/dasht-ki-dhoop-hai/): दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं इस कहानी में बहर हाल कई बातें हैं, गो तेरे साथ मेरा वक़्त गुज़र जाता है शहर में और भी लोगों से मुलाक़ातें हैं, जितने अशआर हैं उन सब पे तुम्हारा हक़ है जितनी नज़्में हैं मिरी नींद की सौग़ातें हैं, क्या कहानी को इसी मोड़ प रुकना होगा रौशनी है न समुंदर है न बरसातें हैं..!! - [दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है](https://hindigazals.com/door-hote-hue-qadmo/): दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है ख़ुश्क पत्ते को लिए गर्द ए सफ़र जाती है, पास आते हुए लम्हात पिघल जाते हैं अब तो हर चीज़ दबे पाँव गुज़र जाती है, रात आ जाए तो फिर तुझ को पुकारूँ या रब मेरी आवाज़ उजाले में बिखर जाती है, दोस्तो तुम से गुज़ारिश है यहाँ मत आओ इस बड़े शहर में तन्हाई भी मर जाती है..!! - [उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी...](https://hindigazals.com/use-bechain-kar-jaaoounga/): उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी, मुझे छूने की ख़्वाहिश कौन करता है कि पल भर में बिखर जाऊँगा मैं भी, बहुत पछताएगा वो बिछड़ कर ख़ुदा जाने किधर जाऊँगा मैं भी, ज़रा बदलूंगा इस बे मंज़री को फिर उसके बाद मर जाऊँगा मैं भी, किसी दीवार का ख़ामोश साया पुकारे तो ठहर जाऊँगा मैं भी, पता उस का तुम्हें भी कुछ नहीं है यहाँ से बेख़बर जाऊँगा मैं भी..!! - [महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम तोड़ दिया](https://hindigazals.com/mahfile-loot-gai-jazbat/): महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम तोड़ दिया साज़ ख़ामोश हैं नग़्मात ने दम तोड़ दिया, हर मसर्रत ग़म ए दीरोज़ का उन्वान बनी वक़्त की गोद में लम्हात ने दम तोड़ दिया, अनगिनत महफ़िलें महरूम ए चराग़ाँ हैं अभी कौन कहता है कि ज़ुल्मात ने दम तोड़ दिया, आज फिर बुझ गए जल जल के उमीदों के चराग़ आज फिर तारों भरी रात ने दम तोड़ दिया, जिनसे अफ़्साना ए हस्ती में तसलसुल था कभी उन मोहब्बत की रिवायात ने दम तोड़ दिया, झिलमिलाते हुए अश्कों की लड़ी टूट गई जगमगाती हुई बरसात ने दम तोड़ दिया, हाए आदाब ए मोहब्बत के तक़ाज़े 'साग़र' लब हिले और शिकायात ने दम तोड़ दिया..!! - [चेहरे पे सारे शहर के गर्द ए मलाल है...](https://hindigazals.com/chehre-pe-saare-shahar/): चेहरे पे सारे शहर के गर्द ए मलाल है जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है, उलझन घुटन हिरास तपिश कर्ब इंतिशार वो भीड़ है के साँस भी लेना मुहाल है, आवारगी का हक़ है हवाओं को शहर में घर से चराग़ ले के निकलना मुहाल है, बे चेहरगी की भीड़ में गुम है हर एक वजूद आईना पूछता है कहाँ ख़द्द ओ ख़ाल है, जिनमें ये वस्फ़ हो कि छुपा लें हर एक दाग़ उन आइनों की आज बड़ी देख भाल है, परछाइयाँ क़दों से भी आगे निकल गईं सूरज के डूब जाने का अब एहतिमाल है, कश्कोल ए चश्म ले के फिरो तुम न दरबदर 'मंज़ूर' क़हत-ए-जिंस-ए-वफ़ा का ये साल है..!! - [जो वफ़ा का रिवाज रखते हैं...](https://hindigazals.com/jo-wafa-ka-riwaz/): जो वफ़ा का रिवाज रखते हैं साफ़ सुथरा समाज रखते हैं, क़ाबिल ए रहम हैं वो इंसाँ जो ख़ाहिश ए तख़्त ओ ताज रखते हैं, भेज कर हम जहेज़ पर ला'नत अहल ए ग़ुर्बत की लाज रखते हैं, दिल कुशादा भी हैं उन्ही के जो सर पे ग़ुर्बत का ताज रखते हैं, बरकत अल्लाह देता है 'साहिल' लाख हम कम अनाज रखते हैं..!! - [इलाज ए ज़ख़्म ए दिल होता है ग़मख़्वारी भी होती है](https://hindigazals.com/ilaz-e-zakhm-e/): इलाज ए ज़ख़्म ए दिल होता है ग़मख़्वारी भी होती है मगर मक़्तल की मेरे ख़ूँ से गुलकारी भी होती है, वही क़ातिल वही मुंसिफ़ अदालत उसकी वो शाहिद बहुत से फ़ैसलों में अब तरफ़दारी भी होती है, ये है तुर्फ़ा तमाशा कर्बला ए अस्र ए हाज़िर का घरों में क़ातिलों के अब अज़ादारी भी होती है, तअल्लुक़ उन से टूटा था न टूटा है न टूटेगा बहुत मज़बूत ज़ंजीर ए वफ़ादारी भी होती है, वो मेरा दोस्त है 'मंज़ूर' लेकिन जब भी मिलता है ख़ुलूस ए दिल में शामिल कुछ रियाकारी भी होती है..!! - [ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए](https://hindigazals.com/khwab-ka-rishta-haqiqat/): ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए आईना है इसे पत्थर से न तोड़ा जाए, अब भी भर सकते हैं मयख़ाने के सब जाम ओ सुबू मेरा भीगा हुआ दामन जो निचोड़ा जाए, हर क़दम मरहला ए मर्ग ए तमन्ना है मगर ज़िंदगी फिर भी तेरा साथ न छोड़ा जाए, आओ फिर आज कुरेदें दिल ए अफ़सुर्दा की राख आओ सोई हुई यादों को झिंझोड़ा जाए, हो वो तौबा के हो साग़र के हो पैमान ए वफ़ा कुछ न कुछ आज तो मयख़ाने में तोड़ा जाए, ज़ुल्फ़ ओ रुख़ आज भी उनवान ए ग़ज़ल हैं 'मंज़ूर' रुख़ उधर गर्दिश ए अय्याम का मोड़ा जाए ..!! - [दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़ लटकते है](https://hindigazals.com/duniyan-me-shatir-nahi/): दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़ लटकते है अब सच्चो की बात छोड़ो वो तो सर पटकते है, पहले मरते थे लोग और भटकती थी रूहें यारो पर अब तो मरती है रूहें और लोग भटकते है, नहीं है किसी को गँवारा किसी का आगे बढ़ना हमेशा अपने ही बन के रोड़ा राहो में अटकते है, देख कर आती है हमें घिन मक्कार अफसरानो से जो पाते है हज़ारों लाखो मगर रिश्वत भी झटकते है, अब बदल गया है यहाँ इंसान कुछ इस तरह से कि दिल में आए हुए नेक ख्यालात भी खटकते है..!! - [रंग ए नफ़रत तेरे दिल से उतरता है कभी ?](https://hindigazals.com/rang-e-nafrat-tere/): रंग ए नफ़रत तेरे दिल से उतरता है कभी ? एक रवैया है मुरव्वत, उसे बरता है कभी ? - [यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ?](https://hindigazals.com/yahan-marne-ki-duaayen/): यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ? यहाँ जीने की तमन्ना कौन करे ? ये दुनियाँ हो या कि वो दुनियाँ अब ख्वाहिश ए दुनियाँ कौन करे ? - [मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ](https://hindigazals.com/main-jab-bhi-koi-achhuta/): मैं जब भी कोई अछूता कलाम लिखता हूँ तो पहले एक गज़ल तेरे नाम लिखता हूँ, बदन की आँच से संवला गए है पैरहन मैं फिर भी सुबह के चेहरे पे शाम लिखता हूँ, चले तो टूटे चट्टानें, रुके तो आग लगे शमीम ए गुल को नाज़ुक खिराम लिखता हूँ, घटाएँ झूम के बरसीं झुलस गई खेती ये हादसा है ब सद ए एहतिराम लिखता हूँ, ज़मीं प्यासी है बूढ़ा गगन भी भूखा है मैं अपने अहद के किस्से तमाम लिखता हूँ, चमन को औरो ने लिखा है मयकदा बर दोश मैं फूल फूल को आतिश ब जाम लिखता हूँ, न राब्ता, न कोई रब्त ही रहा बेकल उस अज़नबी को मगर मैं सलाम लिखता हूँ..!! - [ये किन ख़यालों में खो रहे हो नई है...](https://hindigazals.com/ye-kin-khyalo-me-kho-rahe-ho/): ये किन ख़यालों में खो रहे हो नई है बुनियाद ए आशियाना चमन की तामीर इस तरह हो कि रश्क तुम पर करे ज़माना, ये जान लो किस मक़ाम पर हो चुना है किस रहगुज़र को तुमने उठो कि तहज़ीब ए नौ ने बढ़ कर बदल दिया दहर का फ़साना, तुम्हारे अज़्म ओ अमल में पिन्हाँ फ़रोग़ ए आलम की क़ुव्वतें हैं बदल दो तदबीर से मुक़द्दर हनूज़ हालात का निशाना, जो दिल में मंज़िल की आरज़ू है तो सीख लो तुम ऐ नौजवानो हर एक आफ़त का रुख़ बदलना हर एक मुसीबत पर मुस्कुराना, तुम्हें ख़बर है कि अहद ए माज़ी में दौर ऐसे भी आ चुके हैं पड़े रहे तुम ही ग़फ़लतों में पुकारता रह गया ज़माना, नया ज़माना नई है महफ़िल नए हैं बरबत नई तरंगें पुराने रागों को बंद कर दो फ़ज़ा को दे दो नया तराना, न अह्ल ए दुनिया की सम्त देखो जुदा जुदा है मफ़ाद सब का अगरचे कोशिश करोगे दिल से बनेगा फ़िरदौस आशियाना, मज़ा तो जब है ऐ नौजवानो कहे तुम्हें आफ़रीं मूअर्रिख़ अभी तो है वक़्त सब्त कर दो तुम अपना तारीख़ में फ़साना..!! - [रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई](https://hindigazals.com/rahne-ko-sada-dahar-me-aata/): रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई, डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई, एक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई, माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे बे रात ढले शम्अ बुझाता नहीं कोई, साक़ी से गिला था तुम्हें मयख़ाने से शिकवा अब ज़हर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई, हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई, अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के नाज़ ए दिल ए बेताब उठाता नहीं कोई..!! - [वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं](https://hindigazals.com/wo-dil-nawaz-hai-lekin/): वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ पर कई सवाल मगर मेरे लिए कोई शायान ए इल्तिमास नहीं, तेरे जिलौ में भी दिल काँप काँप उठता है मेरे मिज़ाज को आसूदगी भी रास नहीं, कभी कभी जो तेरे क़ुर्ब में गुज़ारे थे अब उन दिनों का तसव्वुर भी मेरे पास नहीं, गुज़र रहे हैं अजब मरहलों से दीदा ओ दिल सहर की आस तो है ज़िंदगी की आस नहीं, मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए बहुत दिनों से तबीअ'त मेरी उदास नहीं..!! - [वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न...](https://hindigazals.com/wo-is-ada-se-jo-aaye-to/): वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न लगे, कभी वो ख़ास इनायत कि सौ गुमाँ गुज़रीं कभी वो तर्ज़ ए तग़ाफ़ुल कि महरमाना लगे, वो सीधी सादी अदाएँ कि बिजलियाँ बरसें वो दिल बराना मुरव्वत कि आशिक़ाना लगे, दिखाऊँ दाग़ ए मोहब्बत जो नागवार न हो सुनाऊँ क़िस्सा ए फ़ुर्क़त अगर बुरा न लगे, बहुत ही सादा है तू और ज़माना है अय्यार ख़ुदा करे कि तुझे शहर की हवा न लगे, बुझा न दें ये मुसलसल उदासियाँ दिल को वो बात कर कि तबीअ'त को ताज़ियाना लगे, जो घर उजड़ गए उन का न रंज कर प्यारे वो चारा कर कि ये गुलशन उजाड़ सा न लगे, इ'ताब ए अहल ए जहाँ सब भुला दिए लेकिन वो ज़ख़्म याद हैं अब तक जो ग़ाएबाना लगे, वो रंग दिल को दिए हैं लहू की गर्दिश ने नज़र उठाऊँ तो दुनिया निगार ख़ाना लगे, अजीब ख़्वाब दिखाते हैं ना ख़ुदा हम को ग़रज़ ये है कि सफ़ीना किनारे जा न लगे, लिए ही जाती है हर-दम कोई सदा नासिर ये और बात सुराग़ ए निशान ए पा न लगे..!! - [वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए](https://hindigazals.com/wo-sahilo-pe-gaane-wale/): वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए ? वो सुब्ह आते आते रह गई कहाँ जो क़ाफ़िले थे आने वाले क्या हुए ? - [जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर...](https://hindigazals.com/jab-bhi-is-shahar-me-kamare-se/): जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला मेरे स्वागत को हर एक जेब से खंजर निकला, तितलियों फूलों का लगता था जहाँ पर मेला प्यार का गाँव वो बारूद का दफ़्तर निकला, डूब कर जिसमे उबर पाया न मैं जीवन भर एक आँसू का वो कतरा तो समुंदर निकला, मेरे होठों पे दुआ उसकी जुबाँ पे ग़ाली जिसके अन्दर जो छुपा था वही बाहर निकला, ज़िंदगी भर मैं जिसे देख कर इतराता रहा मेरा सब रूप वो मिट्टी की धरोहर निकला, वो तेरे द्वार पे हर रोज़ ही आया लेकिन नींद टूटी तेरी जब हाथ से अवसर निकला, रूखी रोटी भी सदा बाँट के जिसने खाई वो भिखारी तो शहंशाहों से बढ़ कर निकला, क्या अजब है इंसान का दिल भी नीरज मोम निकला ये कभी तो कभी पत्थर निकला..!! - [ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते](https://hindigazals.com/ye-aarzoo-thi-tujhe-gul-ke/): ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते हम और बुलबुल ए बेताब गुफ़्तुगू करते, पयाम्बर न मयस्सर हुआ तो ख़ूब हुआ ज़बान ए ग़ैर से क्या शरह ए आरज़ू करते, मेरी तरह से मह ओ मेहर भी हैं आवारा किसी हबीब की ये भी हैं जुस्तुजू करते, हमेशा रंग ए ज़माना बदलता रहता है सफ़ेद रंग हैं आख़िर सियाह मू करते, लुटाते दौलत ए दुनिया को मय कदे में हम तिलाई साग़र ए मय नुक़रई सुबू करते, हमेशा मैं ने गरेबाँ को चाक चाक किया तमाम उम्र रफ़ूगर रहे रफ़ू करते, जो देखते तेरी ज़ंजीर ए ज़ुल्फ़ का आलम असीर होने की आज़ाद आरज़ू करते, बयाज़ ए गर्दन ए जानाँ को सुब्ह कहते जो हम सितारा ए सहरी तकमा ए गुलू करते, ये काबे से नहीं बेवजह निस्बत ए रुख़ ए यार ये बे सबब नहीं मुर्दे को क़िबला रू करते, सिखाते नाला ए शबगीर को दर अंदाज़ी ग़म ए फ़िराक़ का उस चर्ख़ को अदू करते, वो जान ए जाँ नहीं आता तो मौत ही आती दिल ओ जिगर को कहाँ तक भला लहू करते, न पूछ आलम ए बरगश्ता तालई आतिश बरसती आग जो बाराँ की आरज़ू करते..!! - [कुछ भी था सच के तरफ़दार हुआ...](https://hindigazals.com/kuch-bhi-tha-sach-ke-tarafdaar/): कुछ भी था सच के तरफ़दार हुआ करते थे तुम कभी साहब ए किरदार हुआ करते थे, सुनते हैं ऐसा ज़माना भी यहाँ गुज़रा है हक़ उन्हें मिलता जो हक़दार हुआ करते थे, तुझको भी ज़ोम सा रहता था मसीहाई का और हम भी तेरे बीमार हुआ करते थे, एक नज़र रोज़ कहीं जाल बिछाए रखती और हम रोज़ गिरफ़्तार हुआ करते थे, हमको मालूम था आना तो नहीं तुझको मगर तेरे आने के तो आसार हुआ करते थे, इश्क़ करते थे फ़क़त पास ए वफ़ा रखने को लोग सच मुच के वफ़ादार हुआ करते थे, आईना ख़ुद भी सँवरता था हमारी ख़ातिर हम तेरे वास्ते तैयार हुआ करते थे, हम गुल ए ख़्वाब सजाते थे दुकान ए दिल में और फिर ख़ुद ही ख़रीदार हुआ करते थे, कूचा ए मीर की जानिब निकल आते थे सभी वो जो ग़ालिब के तरफ़दार हुआ करते थे, जिनसे आवारगी ए शब का भरम था वो लोग इस भरे शहर में दो चार हुआ करते थे, ये जो ज़िंदाँ में तुम्हें साए नज़र आते हैं ये कभी रौनक़ ए दरबार हुआ करते थे, मैं सर ए दश्त ए वफ़ा अब हूँ अकेला वर्ना मेरे हमराह मेरे यार हुआ करते थे, वक़्त रुक रुक के जिन्हें देखता रहता है सलीम ये कभी वक़्त की रफ़्तार हुआ करते थे..!! - [मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैं](https://hindigazals.com/musafir-bhi-safar-me/): मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैं मोहब्बत क्या करेंगे वो जो जाँ देने से डरते हैं, तेरी यादों के मौसम भी तुझे रुस्वा नहीं करते सुलगते हैं दिल ओ जाँ और धुआँ देने से डरते हैं, शरीक ए ज़िंदगी है एतिबार ए ज़िंदगी वर्ना मकाँ मालिक किराए पर मकाँ देने से डरते हैं, बुज़ुर्गों की कोई सुनता नहीं है इस ज़माने में बड़े छोटों के बारे में ज़बाँ देने से डरते हैं , मेरे क़ातिल की मेरे घर से ही इमदाद होती है मेरे भाई मेरे हक़ में बयाँ देने से डरते हैं..!! - [नींदों का बोझ पलकों पे ढोना पड़ा मुझे](https://hindigazals.com/neendon-ka-bojh-palkon-pe/): नींदों का बोझ पलकों पे ढोना पड़ा मुझे आँखों के इल्तिमास पे सोना पड़ा मुझे, ता उम्र अपने काँधों पे बे गोर बे कफ़न अपनी अना की लाश को ढोना पड़ा मुझे, कमज़र्फ़ ना ख़ुदाओं के एहसाँ से बच गया हालाँ कि कश्तियों को डुबोना पड़ा मुझे, वो मेरी बेबसी पे कुछ इतना हँसा नवाज़ हँसने के एहतिराम में रोना पड़ा मुझे..!! - [सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे](https://hindigazals.com/sach-bolne-ke-taur-tarike/): सच बोलने के तौर तरीक़े नहीं रहे पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे, वैसे तो हम वही हैं जो पहले थे दोस्तो हालात जैसे पहले थे वैसे नहीं रहे, ख़ुद मर गया था जिन को बचाने में पहले बाप अब के फ़साद में वही बच्चे नहीं रहे, दरिया उतर गया है मगर बह गए हैं पुल उस पार आने जाने के रस्ते नहीं रहे, सर अब भी कट रहे हैं नमाज़ों में दोस्तो अफ़्सोस तो ये है कि वो सज्दे नहीं रहे..!! - [एक ही धरती हम सब का घर जितना...](https://hindigazals.com/ek-hi-dharti-ham-sab-ka/): एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा दुख सुख का ये जंतर मंतर जितना तेरा उतना मेरा, गेहूँ चावल बाँटने वाले झूटा तौलें तो क्या बोलें यूँ तो सब कुछ अंदर बाहर जितना तेरा उतना मेरा, हर जीवन की वही विरासत आँसू सपना चाहत मेहनत साँसों का हर बोझ बराबर जितना तेरा उतना मेरा, साँसें जितनी मौजें उतनी सब की अपनी अपनी गिनती सदियों का इतिहास समुंदर जितना तेरा उतना मेरा, ख़ुशियों के बटवारे तक ही ऊँचे नीचे आगे पीछे दुनिया के मिट जाने का डर जितना तेरा उतना मेरा..!! - [वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं...](https://hindigazals.com/wo-shakhs-ki-main-jis-se/): वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा ही गया हूँ तो मुझे दार पे खींचो सच्चा हूँ मगर अपनी वकालत नहीं करता, क्यूँ बख़्श दिया मुझ से गुनहगार को मौला मुंसिफ़ तो किसी से भी रिआ'यत नहीं करता, घर वालों को ग़फ़लत पे सभी कोस रहे हैं चोरों को मगर कोई मलामत नहीं करता, किस क़ौम के दिल में नहीं जज़्बात ए बराहीम किस मुल्क पे नमरूद हुकूमत नहीं करता ? - [वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो...](https://hindigazals.com/wo-dil-hi-kya-tere-milne-ki/): वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे, रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िंदगी बन कर ये और बात मेरी ज़िंदगी वफ़ा न करे, ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे, सुना है उस को मोहब्बत दुआएँ देती है जो दिल पे चोट तो खाए मगर गिला न करे, अगर वफ़ा पे भरोसा रहे न दुनिया को तो कोई शख़्स मोहब्बत का हौसला न करे, बुझा दिया है नसीबों ने मेरे प्यार का चाँद कोई दिया मेरी पलकों पे अब जला न करे, ज़माना देख चुका है परख चुका है इसे 'क़तील' जान से जाए पर इल्तिजा न करे..!! - [उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना](https://hindigazals.com/use-mana-kar-gurur-us-ka/): उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना वो सामने आए भी तो उस को सदा न देना, ख़ुलूस को जो ख़ुशामदों में शुमार कर लें तुम ऐसे लोगों को तोहफ़तन भी वफ़ा न देना, वो जिस की ठोकर में हो सँभलने का दर्स शामिल तुम ऐसे पत्थर को रास्ते से हटा न देना, सज़ा गुनाहों की देना उस को ज़रूर लेकिन वो आदमी है तुम उस की अज़्मत घटा न देना, जहाँ रिफ़ाक़त हो फ़ित्ना पर्दाज़ मौलवी की बहिश्त ऐसी किसी को मेरे ख़ुदा न देना, 'क़तील' मुझ को यही सिखाया मेरे नबी ने कि फ़त्ह पा कर भी दुश्मनों को सज़ा न देना..!! - [नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है](https://hindigazals.com/nek-logo-me-mujhe-nek/): नेक लोगो में मुझे नेक गिना जाता है गुनाहगार गुनाहगार समझते है मुझे मैं तो ख़ुद बाज़ार में बिकने को आया हूँ लोग है कि ख़रीदार समझते है मुझे मैं बदलते हुए हालात में ढल जाता हूँ देखने वाले अदाकार समझते है मुझे, वो जो उस पार है इस पार जानते है जो इस पार है उस पार समझते है मुझे..!! - [दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है](https://hindigazals.com/dil-soz-se-khaali-hai/): दिल सोज़ से खाली है, निगह पाक नहीं है फिर इसमें अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है, है ज़ौक ए तजल्ली भी इसी ख़ाक में पिनहां ग़ाफ़िल ! - [अफ़लाक से आता है नालों का जवाब...](https://hindigazals.com/aflaq-se-aata-hai-naalo-ka/): अफ़लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर, अहवाल ए मुहब्बत में कुछ फ़रक नहीं ऐसा सोज़ ओ तब ओ ताब अव्वल, सोज़ ओ तब ओ ताब आख़िर, मैं तुझको बताता हूँ तकदीर ए उमस कया है शमशीर ए सनां अव्वल, ताऊस ओ रबाब आख़िर, मैख़ाना ए यूरोप के दसतूर निराले हैं लाते हैं सुरूर अव्वल, देते हैं शराब आख़िर, क्या दबदबा ए नादिर, क्या शौकत ए तैमूरी हो जाते हैं सब दफ़तर गरके मये नाब आख़िर, था ज़ब्त बहुत मुश्किल इस मील मुआनी का कह डाले कलन्दर ने इसरार ए किताब आख़िर..!! - [अब भला छोड़ के घर क्या करते...](https://hindigazals.com/ab-bhala-chhod-ke-ghar/): अब भला छोड़ के घर क्या करते शाम के वक़्त सफ़र क्या करते, तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं अपने आने की ख़बर क्या करते, जब सितारे ही नहीं मिल पाए ले के हम शम्स ओ क़मर क्या करते, वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का था साए फैला के शजर क्या करते, ख़ाक ही अव्वल ओ आख़िर ठहरी कर के ज़र्रे को गुहर क्या करते, राय पहले से बना ली तू ने दिल में अब हम तेरे घर क्या करते, इश्क़ ने सारे सलीक़े बख़्शे हुस्न से कस्ब ए हुनर क्या करते..!! - [तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद](https://hindigazals.com/tune-dekha-hai-kabhi/): तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद, इतने चुप चाप कि रस्ते भी रहेंगे ला इल्म छोड़ जाएँगे किसी रोज़ नगर शाम के बाद, मैं ने ऐसे ही गुनह तेरी जुदाई में किए जैसे तूफ़ाँ में कोई छोड़ दे घर शाम के बाद, शाम से पहले वो मस्त अपनी उड़ानों में रहा जिस के हाथों में थे टूटे हुए पर शाम के बाद, रात बीती तो गिने आबले और फिर सोचा कौन था बाइस ए आग़ाज़ ए सफ़र शाम के बाद, तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद, लौट आए न किसी रोज़ वो आवारा मिज़ाज खोल रखते हैं इसी आस पे दर शाम के बाद..!! - [हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें](https://hindigazals.com/haadso-ki-zad-pe-hai-to/): हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें ? - [अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं](https://hindigazals.com/anokhi-vazaa-hai-saare-zamane-se/): अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं ये आशिक कौन सी बस्ती के या रब ! रहने वाले हैं ? - [अजब वायज़ की दींदारी है या रब !](https://hindigazals.com/azab-wayaz-ki-deedari-hai/): अजब वायज़ की दींदारी है या रब ! अदावत है इसे सारे जहाँ से, कोईअब तक न यह समझा, कि इंसा कहाँ जाता है ? आता है कहाँ से ? - [दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही...](https://hindigazals.com/darog-ke-imtihan-kade-me/): दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही कारोबार होगा जो बढ़ के ताईद ए हक़ करेगा वही सज़ावार ए दार होगा, बिला ग़रज़ सादा सादा बातों से डाल दें रस्म दोस्ती की जो सिलसिला इस तरह चलेगा वो लाज़िमन पाएदार होगा, चलो मोहब्बत की बेख़ुदी के हसीन ख़ल्वत कदे में बैठें अजीब मसरूफ़ियत रहेगी न ग़ैर होगा न यार होगा, तेरे गुलिस्ताँ की आबरू है महक तेरी इन्फ़िरादियत की तू कस्मपुर्सी से बुझ भी जाए तो ग़ैरत ए नौ बहार होगा, जहाँ न तू हो न कोई हमदर्द हो न कोई शरीफ़ दुश्मन मैं सोचता हूँ मुझे वो माहौल किस तरह साज़गार होगा, बहिश्त में भी जनाब ए ज़ाहिद तुम्हें न तरजीह मिल सकेगी वहाँ भी ख़ुश ज़ौक़ आसियों का तपाक से इंतज़ार होगा, 'अदम' की शब ख़ेज़ियों के अहवाल यूँ सुनाते हैं उस के महरम कि सुनने वाले ये मान जाएँ कोई तहज्जुद गुज़ार होगा..!! - [मिलना न मिलना एक बहाना है और बस](https://hindigazals.com/milna-na-milna-ek-bahana-hai/): मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस, लोगों को रास्ते की ज़रूरत है और मुझे एक संग ए रहगुज़र को हटाना है और बस, मसरूफ़ियत ज्यादा नहीं है मेरी यहाँ मिट्टी से एक चराग़ बनाना है और बस, सोए हुए तो जाग ही जाएँगे एक दिन जो जागते हैं उन को जगाना है और बस, तुम वो नहीं हो जिन से वफ़ा की उम्मीद है तुम से मेरी मुराद ज़माना है और बस, फूलों को ढूँढता हुआ फिरता हूँ बाग़ में बाद ए सबा को काम दिलाना है और बस, आब ओ हवा तो यूँ भी मेरा मसअला नहीं मुझ को तो एक दरख़्त लगाना है और बस, नींदों का रतजगों से उलझना यूँ ही नहीं एक ख़्वाब ए राएगाँ को बचाना है और बस, एक वादा जो किया ही नहीं है अभी सलीम मुझ को वही तो वादा निभाना है और बस..!! - [सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ](https://hindigazals.com/sukhan-vari-ka-bahana/): सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से शर्मिंदा हूँ न दुनिया से जो दिल में आता है होंठों पे लाता रहता हूँ, पुराने घर की शिकस्ता छतों से उकता कर नए मकान का नक़्शा बनाता रहता हूँ, मेरे वजूद में आबाद हैं कई जंगल जहाँ मैं हू की सदाएँ लगाता रहता हूँ, मेरे ख़ुदा यही मसरूफ़ियत बहुत है मुझे तेरे चराग़ जलाता बुझाता रहता हूँ..!! - [मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी...](https://hindigazals.com/masrufiyat-usi-ki-hai/): मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी की है इस सरज़मीन ए दिल पे हुकूमत उसी की है, मिलता है वो भी तर्क ए तअल्लुक़ के बावजूद मैं क्या करूँ कि मुझको भी आदत उसी की है, जो उम्र उस के साथ गुज़ारी उसी की थी बाक़ी जो बच गई है मसाफ़त उसी की है, होता है हर किसी पे उसी का गुमाँ मुझे लगता है हर किसी में शबाहत उसी की है, लिखूँ तो उसके इश्क़ को लिखना है शायरी सोचूँ तो ये सुख़न भी इनायत उसी की है, दर ए आस्ताँ कोई हो ब ज़ाहिर सर ए सुजूद लेकिन पस ए सुजूद इबादत उसी की है, वो जिस के हक़ में झूटी गवाही भी मैं ने दी 'रूही' मेरे ख़िलाफ़ शहादत उसी की है..!! - [जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी...](https://hindigazals.com/jis-sar-ko-gurur-aaj-hai/): जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी का कल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का, शर्मिंदा तेरे रुख़ से है रुख़्सार परी का चलता नहीं कुछ आगे तेरे कब्क ए दरी का, आफ़ाक़ की मंज़िल से गया कौन सलामत अस्बाब लुटा राह में याँ हर सफ़री का, ज़िंदाँ में भी शोरिश न गई अपने जुनूँ की अब संग मुदावा है इस आशुफ़्ता सरी का, हर ज़ख़्म ए जिगर दावर ए महशर से हमारा इंसाफ़ तलब है तेरी बेदाद गरी का, अपनी तो जहाँ आँख लड़ी फिर वहीं देखो आईने को लपका है परेशाँ नज़री का, सद मौसम ए गुल हम को तह ए बाल ही गुज़रे मक़्दूर न देखा कभू बे बाल ओ परी का, इस रंग से झमके है पलक पर कि कहे तू टुकड़ा है मेरा अश्क अक़ीक़ ए जिगरी का, कल सैर किया हम ने समुंदर को भी जा कर था दस्त ए निगर पंजा ए मिज़्गाँ की तरी का, ले साँस भी आहिस्ता कि नाज़ुक है बहुत काम आफ़ाक़ की इस कारगह ए शीशागरी का, टुक मीर ए जिगर सोख़्ता की जल्द ख़बर ले क्या यार भरोसा है चराग़ ए सहरी का..!! - [पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था](https://hindigazals.com/pee-li-to-kuchh-pata-na-chala/): पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था वो उस का साया था कि वही रश्क ए हूर था, कल मैं ने उस को देखा तो देखा नहीं गया मुझ से बिछड़ के वो भी बहुत ग़म से चूर था, रोया था कौन कौन मुझे कुछ ख़बर नहीं मैं उस घड़ी वतन से कई मील दूर था, शाम ए फ़िराक़ आई तो दिल डूबने लगा हम को भी अपने आप पे कितना ग़ुरूर था, चेहरा था या सदा थी किसी भूली याद की आँखें थीं उस की यारो कि दरिया ए नूर था, निकला जो चाँद आई महक तेज़ सी 'मुनीर' मेरे सिवा भी बाग़ में कोई ज़रूर था..!! - [ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है](https://hindigazals.com/ye-hai-to-sab-ke-liye-ho/): ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग जारी है, उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है, मैं क़तरा हो के भी तूफ़ाँ से जंग लेता हूँ मुझे बचाना समुंदर की ज़िम्मेदारी है, इसी से जलते हैं सहरा ए आरज़ू में चराग़ ये तिश्नगी तो मुझे ज़िंदगी से प्यारी है, कोई बताए ये उस के ग़ुरूर ए बेजा को वो जंग मैं ने लड़ी ही नहीं जो हारी है, हर एक साँस पे पहरा है बेयक़ीनी का ये ज़िंदगी तो नहीं मौत की सवारी है, दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है..!! - [अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री](https://hindigazals.com/azab-karb-me-guzari-jahan-jahan/): अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालों के दरम्याँ गुज़री, तमाम उम्र चराग ए उम्मीद जलाते रहे तमाम उम्र उम्मीदों के दरम्याँ गुज़री, गुज़र गई जो तेरे साथ वो यादगार रही बिना तेरे जो गुज़री वबाल ए जाँ गुज़री, मुझे सुकूं मयस्सर नहीं तो क्या गम है गुलों की उम्र तो काँटों के दरम्याँ गुज़री, अज़ब चीज है ये गर्दिश ए हालात मोहसिन कभी ज़मीं तो कभी मस्ल ए आसमां गुज़री..!! - [खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो](https://hindigazals.com/khanzar-se-karo-baat-na/): खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो, फर्ज़ अपना मसीहा ने अदा कर दिया लेकिन किस तरह कटी रात ये बीमार से पूछो, कुछ भूल हुई है तो सज़ा भी कोई होगी सब कुछ मैं बता दूँगा ज़रा प्यार से पूछो, आँखों ने तो चुप रह के भी रुदाद सुना दी क्यूँ खुल न सके ये लब इज़हार से पूछो, रौनक है मेरे घर में तसव्वुर ही से जिस के वो कौन था ये इन दर ओ दीवार से पूछो..!! - [नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है...](https://hindigazals.com/naam-likhte-hai-tera-aur/): नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है यूँ इस दिल को मुहब्बत की सज़ा देते है, उम्र भर जिन को प्यार न करना आया आज वही लोग हम को दरस ए वफ़ा देते है, हमने सीखा नहीं प्यार में रुसवा करना दिल तो क्या चीज है हम जान भी लुटा देते है, कितना ख़ुश रंग था वो प्यार का मौसम यारो याद आते है वो लम्हे तो रुला देते है, उसके आने की झूठी तसल्ली मत दो ये दिलासे तो मेरा दर्द बढ़ा देते है..!! - [ज़ख़्म का मरहम दर्द का अपने दरमाँ...](https://hindigazals.com/zakhm-ka-marham-dard-ka/) - [मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल...](https://hindigazals.com/mustakil-mahrumiyon-par-bhi/): मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं लाख समझाया कि इस महफ़िल में अब जाना नहीं, ख़ुद फ़रेबी ही सही क्या कीजिए दिल का इलाज तू नज़र फेरे तो हम समझें कि पहचाना नहीं, एक दुनिया मुंतज़िर है और तेरी बज़्म में इस तरह बैठे हैं हम जैसे कहीं जाना नहीं, जी में जो आती है कर गुज़रो कहीं ऐसा न हो कल पशेमाँ हों कि क्यूँ दिल का कहा माना नहीं, ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़' उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं..!! - [क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे](https://hindigazals.com/kya-aise-kam-sukhan-se/): क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे जो मुस्तक़िल सुकूत से दिल को लहू करे, अब तो हमें भी तर्क ए मरासिम का दुख नहीं पर दिल ये चाहता है कि आग़ाज़ तू करे, तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी ख़ुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तुजू करे, अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख़्म खाइए ता ज़िंदगी ये दिल न कोई आरज़ू करे, तुझ को भुला के दिल है वो शर्मिंदा ए नज़र अब कोई हादसा ही तेरे रू ब रू करे, चुप चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़' दुनिया तो अर्ज़ ए हाल से बे आबरू करे..!! - [धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने...](https://hindigazals.com/dharti-par-jab-khoon/): धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता है, लाख करे वो ज़ब्त का दा'वा वक़्त ए रुख़्सत सब बेकार आँखें चाहें रोएँ न रोएँ काजल रोने लगता है, बेटी की ज़िद के आगे माँ चुप हो जाती है लेकिन नंगे सर की महरूमी पर आँचल रोने लगता है, ख़ुश्बू ख़ुश्बू लिपटे रहना साँपों की मजबूरी है वर्ना अपनी बेक़दरी पर संदल रोने लगता है, तुझ से बिछड़ कर ग़ैर के आगे रोए हों तो हम मुजरिम दिल का क्या है दिल पागल है पागल रोने लगता है..!! - [नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी](https://hindigazals.com/nashaat-e-gam-bhi-mila/): नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी भी मगर वो लम्हे बहुत मुख़्तसर थे फ़ानी भी, खुली है आँख कहाँ कौन मोड़ है यारो दयार ए ख़्वाब की बाक़ी नहीं निशानी भी, रगों में रेत की इक और तह जमी देखो कि पहले जैसी नहीं ख़ून में रवानी भी, भटक रहे हैं तआ'क़ुब में अब सराबों के मिला न जिन को समुंदर से बूँद पानी भी, ज़मीं भी हम से बहुत दूर होती जाती है डरा रही है ख़लाओं की बे करानी भी, तवील होने लगी हैं इसी लिए रातें कि लोग सुनते सुनाते नहीं कहानी भी..!! - [मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली](https://hindigazals.com/mashal-e-dard-fir-ek-baar/): मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली जाए जश्न हो जाए ज़रा धूम मचा ली जाए, ख़ून में जोश नहीं आया ज़माना गुज़रा दोस्तो आओ कोई बात निकाली जाए, जान भी मेरी चली जाए तो कुछ बात नहीं वार तेरा न मगर एक भी ख़ाली जाए, जो भी मिलना है तेरे दर ही से मिलना है उसे दर तेरा छोड़ के कैसे ये सवाली जाए ? - [नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों](https://hindigazals.com/nahi-rok-sakogezism-ki/): नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों को बड़ी भूल हुई जो छेड़ दिया कई साज़ों को, कोई नया मकीन नहीं आया तो हैरत क्या कभी तुमने खुला छोड़ा ही नहीं दरवाज़ों को, कभी पार भी कर पाएँगी सुकूत के सहरा को दरपेश है कितना और सफ़र आवाज़ों को, मुझे कुछ लोगों की रुस्वाई मंज़ूर नहीं नहीं आम किया जो मैं ने अपने राज़ों को, कहीं हो न गई हो ज़मीन परिंदों से ख़ाली खुले आसमान पर देखता हूँ फिर बाज़ों को..!! - [छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे](https://hindigazals.com/chhoti-chhoti-baaton-par/): छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे वक़्त ए ज़रूरत सब यार बदलते देखे, अब तो यकीन उठ सा गया है ज़माने से अक्सर अपनों के किरदार बदलते देखे, जितना दिया ख़ुदा ने उतनी हवस बढ़ी हर रोज़ लोगो के व्यापार बदलते देखे, ख़बरों में छपना था नापाक इरादों को ज़र की बदौलत अख़बार बदलते देखे..!! - [वही फिर मुझे याद आने लगे हैं...](https://hindigazals.com/wahi-fir-mujhe-yaad-aane/): वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं, वो हैं पास और याद आने लगे हैं मोहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं, सुना है हमें वो भुलाने लगे हैं तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं, हटाए थे जो राह से दोस्तों की वो पत्थर मेरे घर में आने लगे हैं, ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझको ये कहने में मुझको ज़माने लगे हैं, हवाएँ चलीं और न मौजें ही उठी अब ऐसे भी तूफ़ान आने लगे हैं, क़यामत यक़ीनन क़रीब आ गई है 'ख़ुमार' अब तो मस्जिद में जाने लगे हैं..!! - [हादसों का शहर है संभल जाइए](https://hindigazals.com/haadso-ka-shahar-hai/): हादसों का शहर है संभल जाइए कौन कब किस डगर है संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते हुए आज कल यहाँ आदमी दर ब दर है संभल जाइए, चाहे कहिए सड़क इसको या एक नदी इस कदर रह गुज़र है संभल जाइए, दर्द कितने दिए है आपने मुझे ये कोई शराफ़त नहीं है संभल जाइए, जान सस्ती मगर चीजे महँगी यहाँ बाक़ी सब बे असर है संभल जाइए..!! - [क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?](https://hindigazals.com/kyun-zamin-hai-aaj-pyasi/): क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ? हो रही नदियाँ सियासी इस तरह, जान की परवाह किसे है आजकल फैली हुई है हर सू उदासी इस तरह, रो रहे है माँ बाप क्यूँ तन्हाइयों में ? - [लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार...](https://hindigazals.com/laga-jab-aks-e-abroo-dekhne/): लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में, नहाना मत तू ऐ रश्क ए परी ज़िन्हार पानी में हबाब ऐसा न हो शीशा बने एक बार पानी में, सुना ऐ बहर ए ख़ूबी तेरी अठखेली से चलने की उड़ाई रफ़्ता रफ़्ता मौज ने रफ़्तार पानी में, झलक इस तेरे कफ़्श ए पुश्त ए माही की अगर देखे करे क़ालिब तही माही भी फिर लाचार पानी में, नहीं लख़्त ए जिगर ये चश्म में फिरते कि मर्दुम ने चराग़ अब कर के रौशन छोड़े हैं दो चार पानी में, लब ए दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में, कहूँ क्या साथ ग़ैरों के तो उस बेदीद ने हमदम नहाने के लिए हरगिज़ न की तकरार पानी में, कहा मैं ने जो इतना रख क़दम इस दीदा ए तर पर लगा कहने कि आती है मेरी पैज़ार पानी में, 'नसीर' आसाँ नहीं ये बात पानी सख़्त मुश्किल है उठाई रेख़्ते की तू ने क्या दीवार पानी में..!! - [मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे](https://hindigazals.com/mere-khuda-mujhe-wo/): मेरे ख़ुदा मुझे वो ताब ए नय नवाई दे मैं चुप रहूँ भी तो नग़्मा मेरा सुनाई दे, गदा ए कू ए सुख़न और तुझ से क्या माँगे यही कि मम्लिकत ए शेर की ख़ुदाई दे, निगाह ए दहर में अहल ए कमाल हम भी हों जो लिख रहे हैं वो दुनिया अगर दिखाई दे, छलक न जाऊँ कहीं मैं वजूद से अपने हुनर दिया है तो फिर ज़र्फ़ ए किबरियाई दे, मुझे कमाल ए सुख़न से नवाज़ने वाले समाअतों को भी अब ज़ौक़ ए आश्नाई दे, नुमू पज़ीर है ये शोला ए नवा तो इसे हर आने वाले ज़माने की पेशवाई दे, कोई करे तो कहाँ तक करे मसीहाई कि एक ज़ख़्म भरे दूसरा दुहाई दे, मैं एक से किसी मौसम में रह नहीं सकता कभी विसाल कभी हिज्र से रिहाई दे, जो एक ख़्वाब का नश्शा हो कम तो आँखों को हज़ार ख़्वाब दे और जुरअत ए रसाई दे..!! - [किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं](https://hindigazals.com/kis-ke-naam-likhoon-jo-alam/): किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं मेरे शहर जल रहे हैं मेरे लोग मर रहे हैं, कोई ग़ुंचा हो कि गुल हो कोई शाख़ हो शजर हो वो हवा ए गुलिस्ताँ है कि सभी बिखर रहे हैं, कभी रहमतें थीं नाज़िल इसी ख़ित्ता ए ज़मीं पर वही ख़ित्ता ए ज़मीं है कि अज़ाब उतर रहे हैं, वही ताएरों के झुरमुट जो हवा में झूलते थे वो फ़ज़ा को देखते हैं तो अब आह भर रहे हैं, बड़ी आरज़ू थी हम को नए ख़्वाब देखने की सो अब अपनी ज़िंदगी में नए ख़्वाब भर रहे हैं, कोई और तो नहीं है पस ए ख़ंजर आज़माई हमीं क़त्ल हो रहे हैं हमीं क़त्ल कर रहे हैं..!! - [मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन...](https://hindigazals.com/main-kaise-jiyoon-gar-ye-duniya/): मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन नई तस्वीर न हो ये आते जाते रंग न हों और लफ़्ज़ों की तनवीर न हो, ऐ राह ए इश्क़ के राही सुन चल ऐसे सफ़र की लज़्ज़त में तेरी आँखों में नए ख़्वाब तो हों पर ख़्वाबों की ताबीर न हो, घर आऊँ या बाहर जाऊँ हर एक फ़ज़ा में मेरे लिए एक झूठी सच्ची चाहत हो रस्मों की कोई ज़ंजीर न हो, जैसे ये मेरी अपनी सूरत मेरे सामने हो और कहती हो मेरे शायर तेरे साथ हूँ मैं मायूस न हो दिलगीर न हो, कोई हो तो मोहब्बत ऐसी हो मुझे धूप और साए में जिस के किसी जज़्बे का आज़ार न हो किसी ख़्वाहिश की ताज़ीर न हो..!! - [परिंदों के चोंच भर लेने से...](https://hindigazals.com/parindo-ke-chonch-bhar-lene-se/): परिंदों के चोंच भर लेने से कभी सागर सूखा नहीं करते, हवाओं के रुख सूखे पत्तो से अपना रास्ता पूछा नहीं करते, गुमान है जिन्हें कि वो बुझा देंगे फूकों से हमें, कोई बता दे उन्हें, कि ख़ुद के ख़ूँ से जलने वाले चिराग़ यूँ ही बुझा नहीं करते..!! - [क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते...](https://hindigazals.com/qismat-ka-likha-mita-nahi/): क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते अनहोनी को होनी बना नहीं सकते, ज़माने में हस्ब ए आरज़ू किसी को चाह तो सकते है मगर पा नहीं सकते, जो रखते है दिल के दरीचों को बंद वो ख़ुद किसी दिल में समा नहीं सकते, चाहे जितनी शिद्दत से तराश ले कोई किसी पत्थर को हीरा बना नहीं सकते, हकीक़त ये भी है कि इश्क़ और सुकूं कभी दिल में एक साथ समा नहीं सकते..!! - [वही आँगन वही खिड़की वही दर...](https://hindigazals.com/wahi-aangan-wahi-khidki/): वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है अकेला जब भी होता हूँ मुझे घर याद आता है, मेरी बेसाख़्ता हिचकी मुझे खुल कर बताती है तेरे अपनों को गाँव में तो अक्सर याद आता है, जो अपने पास हों उन की कोई क़ीमत नहीं होती हमारे भाई को ही लो बिछड़ कर याद आता है, सफलता के सफ़र में तो कहाँ फ़ुर्सत कि कुछ सोचें मगर जब चोट लगती है मुक़द्दर याद आता है, मई और जून की गर्मी बदन से जब टपकती है नवम्बर याद आता है दिसम्बर याद आता है..!! - [वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र...](https://hindigazals.com/vatan-ko-kuchh-nahi-khatra/): वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में, जो बैठा है सफ़ ए मातम बिछाए मर्ग ए ज़ुल्मत पर वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश वर है ख़तरे में, अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में, जहाँ 'इक़बाल' भी नज़्र ए ख़त ए तनसीख़ हो 'जालिब' वहाँ तुझ को शिकायत है तेरा जौहर है ख़तरे में..!! - [न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों !](https://hindigazals.com/naa-zarurat-hai-dawa-ki/): न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों ! - [दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है](https://hindigazals.com/daur-e-zadid-me-gunaah/): दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है वतन में अब जुबां, क़लम ज़नाब बिकते है, पहले मुफ़लिस ओ मज़बूर बिका करते थे आज कल हर सू इज्ज़त ए माअब बिकते है, बे ज़मीर ओ बेईमानो की गन्दी सियासत में अदल,मुंसिफ़ ए मुंसिफाँ के ख़िताब बिकते है, शैख़ ओ वाइज़, वज़ीर, ख़तीब ओ क़ातिब सहाफ़ी,शायर सब यहाँ पर ज़नाब बिकते है..!! - [ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम](https://hindigazals.com/ye-aur-baat-door-rahe/) - [ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं](https://hindigazals.com/ye-sochna-galat-hai-ki/): ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं, अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया मैं आप का रहूँगा मगर उम्र भर नहीं, आ ही गए हैं ख़्वाब तो फिर जाएँगे कहाँ आँखों से आगे उन की कोई रहगुज़र नहीं, कितना जिएँ कहाँ से जिएँ और किस लिए ये इख़्तियार हम पे है तक़दीर पर नहीं, माज़ी की राख उलटीं तो चिंगारियाँ मिलीं बेशक किसी को चाहो मगर इस क़दर नहीं..!! - [आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक](https://hindigazals.com/aa-jaaye-wo-milne-to-mujhe/): आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक मत आए ब हर हाल उसे ईद मुबारक, ऐसा हो सब इंसान हों ख़ुश इतने कि हर रोज़ एक दूसरे से कहता फिरे ईद ए मुबारक, हाँ मुझ से जिसे जिससे मुझे जो भी गिला हो आबाद रहे शाद रहे ईद ए मुबारक, तन्हाई सी तन्हाई कि दीवार भी शश्दर अब खुल के कहे या न कहे ईद ए मुबारक, सरगोशी ने पत्थर को सबक़ याद दिलाया पानी ने लिखा आईने पे ईद ए मुबारक, तुम जो मेरे शेरों के मुख़ातिब थे न होगे आख़िर में तुम्हें सिर्फ़ तुम्हे ईद मुबारक..!! - [एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले](https://hindigazals.com/ek-tarikh-muqarrar-pe-to/): एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले जैसे दफ़्तर में किसी शख़्स को तनख़्वाह मिले, रंग उखड़ जाए तो ज़ाहिर हो प्लस्तर की नमी क़हक़हा खोद के देखो तो तुम्हें आह मिले, जमा थे रात मेरे घर तेरे ठुकराए हुए एक दरगाह पे सब रांदा ए दरगाह मिले, मैं तो एक आम सिपाही था हिफ़ाज़त के लिए शाहज़ादी ये तेरा हक़ था तुझे शाह मिले, एक उदासी के जज़ीरे पे हूँ अश्कों में घिरा मैं निकल जाऊँ अगर ख़ुश्क गुज़रगाह मिले, एक मुलाक़ात के टलने की ख़बर ऐसे लगी जैसे मज़दूर को हड़ताल की अफ़वाह मिले, घर पहुँचने की न जल्दी न तमन्ना है कोई जिस ने मिलना हो मुझे आए सर ए राह मिले..!! - [हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं...](https://hindigazals.com/har-ek-hazaar-me-bas/): हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग निसाब ए इश्क़ पे वाजिब ज़कात हैं हम लोग, दबाओ में भी जमात कभी नहीं बदली शुरू दिन से मोहब्बत के साथ हैं हम लोग, जो सीखनी हो ज़बान ए सुकूत बिस्मिल्लाह ख़मोशियों की मुकम्मल लुग़ात हैं हम लोग, कहानियों के वो किरदार जो लिखे न गए ख़बर से हज़्फ़ शुदा वाक़िआत हैं हम लोग, ये इंतिज़ार हमें देख कर बनाया गया ज़ुहूर ए हिज्र से पहले की बात हैं हम लोग, किसी को रास्ता दे दें किसी को पानी न दें कहीं पे नील कहीं पर फ़ुरात हैं हम लोग, हमें जला के कोई शब गुज़ार सकता है सड़क पे बिखरे हुए काग़ज़ात हैं हम लोग..!! - [खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े](https://hindigazals.com/khel-dono-ka-chale-teen-ka/): खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े सीढ़ियाँ आती रहें साँप का ख़ाना न पड़े, देख मेमार परिंदे भी रहें घर भी बने नक़्शा ऐसा हो कोई पेड़ गिराना न पड़े, मेरे होंठों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े, इस तअल्लुक़ से निकलने का कोई रास्ता दे इस पहाड़ी पे भी बारूद लगाना न पड़े, नम की तर्सील से आँखों की हरारत कम हो सर्दख़ानों में कोई ख़्वाब पुराना न पड़े, रब्त की ख़ैर है बस तेरी अना बच जाए इस तरह जा कि तुझे लौट के आना न पड़े. - [तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ](https://hindigazals.com/tu-kaash-mile-mujhko/): तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ सुलझे मेरी क़िस्मत की पहेली तो बताऊँ, आने से तेरे पहले ख़बर दे दी हवा ने आँखों पे मेरे रख तू हथेली तो बताऊँ, महके हैं तेरे जिस्म की ख़ुशबू से फ़ज़ाएँ नाराज़ न हों चम्पा चमेली तो बताऊँ, क्यों तेरे मुक़द्दर में नहीं मेरी मोहब्बत दिखलाए तू बेरंग हथेली तो बताऊँ, वीरानियाँ तन्हाइयाँ मौसम है ख़िज़ाँ का अनवार करो दिल की हवेली तो बताऊँ, चेहरे पे मेरे राज़ टटोला न करो तुम हमराज़ बने आँख नशीली तो बताऊँ, इज़हार ए मोहब्बत की तलब दिल में लिए हूँ तन्हा जो मिले तेरी सहेली तो बताऊँ, आँखों में तेरी याद कहीं ज़ख़्म न कर दे निकले ये अगर फाँस नुकीली तो बताऊँ..!! - [रास्ते की धूल ने पैरों को ज़ख़्मी कर दिया](https://hindigazals.com/raaste-ki-dhool-ne-pairon-ko/): रास्ते की धूल ने पैरों को ज़ख़्मी कर दिया बहर से माही अलग करना मुझे आता नहीं, बैठ जाऊँ दो घड़ी आराम से यारो कहीं ज़िंदगी के दश्त में ऐसा कोई साया नहीं, ख़्वाब सा सुंदर बदन था बिस्तर ए कमख़ाब पर रात भर फिर भी मेरे दिल ने सुकूँ पाया नहीं, छा गई है ख़ामुशी की बर्फ़ मेरे ज़ेहन पर कल्पना के देश में सूरज कभी मरता नहीं, नर्म जिस्मों की ख़ुशी आँखों में भर कर रात को सब्ज़ा ए ख़ुद रौ पे 'अख़्तर' मैं कभी सोया नहीं..!! - [ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है](https://hindigazals.com/zulf-o-rukh-ke-saaye-me/): ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़मगुसार चेहरों पर ए'तिबार मत करना शहर में सियासत के दोस्त भी शिकारी है, मोड़ लेने वाली है, ज़िंदगी कोई शायद अब के फिर हवाओं में एक बेक़रारी है, हाल ख़ूँ में डूबा है कल न जाने क्या होगा अब ये ख़ौफ ए मुस्तक़बिल ज़ेहन ज़ेहन तारी है, मेरे ही बुज़ुर्गों ने सर बुलंदियाँ बख़्शीं मेरे ही क़िबले पर मश्क़ ए संग बारी है, एक अजीब ठंडक है इसके नर्म लहजे में लफ़्ज़ लफ़्ज़ शबनम है बात बात प्यारी है, कुछ तो पाएँगे उस की क़ुर्बतों का खामियाज़ा दिल तो हो चुके टुकड़े अब सरों की बारी है, बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुँवारी है, कह दो 'मीर' ओ 'ग़ालिब' से हम भी शेर कहते हैं वो सदी तुम्हारी थी ये सदी हमारी है, कर्बला नहीं लेकिन झूट और सदाक़त में कल भी जंग जारी थी अब भी जंग जारी है, गाँव में मोहब्बत की रस्म है अभी 'मंज़र' शहर में हमारे तो जो भी है मदारी है..!! - [और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना](https://hindigazals.com/aur-sab-bhool-gaye/): और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना हमने सीखा नहीं प्यारे ब इजाज़त लिखना, न सिले की न सताइश की तमन्ना हमको हक़ में लोगों के हमारी तो है आदत लिखना, हमने जो भूल के भी शह का क़सीदा न लिखा शायद आया इसी ख़ूबी की बदौलत लिखना, इससे बढ़ कर मेरी तहसीन भला क्या होगी पढ़ के ना ख़ुश हैं मेरा साहब ए सरवत लिखना, दहर के ग़म से हुआ रब्त तो हम भूल गए सर्व क़ामत को जवानी को क़यामत लिखना, कुछ भी कहते हैं कहीं शह के मुसाहिब जालिब रंग रखना यही अपना इसी सूरत लिखना..!! - [अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं](https://hindigazals.com/apno-ne-wo-ranz-diye-hai/): अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद आते हैं, उस नगरी में क़दम क़दम पे सर को झुकाना पड़ता है उस नगरी में क़दम क़दम पर बुतख़ाने याद आते हैं, आँखें पुरनम हो जाती हैं ग़ुर्बत के सहराओं में जब उस रिमझिम की वादी के अफ़्साने याद आते हैं, ऐसे ऐसे दर्द मिले हैं नए दयारों में हमको बिछड़े हुए कुछ लोग पुराने याराने याद आते हैं, जिनके कारन आज हमारे हाल पे दुनिया हँसती है कितने ज़ालिम चेहरे जाने पहचाने याद आते हैं, यूँ न लुटी थी गलियों दौलत अपने अश्कों की रोते हैं तो हमको अपने ग़म ख़ाने याद आते हैं, कोई तो परचम ले कर निकले अपने गरेबाँ का जालिब चारों जानिब सन्नाटा है दीवाने याद आते हैं..!! - [अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है](https://hindigazals.com/afsos-tumhe-kaar-ke-shishe-ka/): अफ़सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है, होता है असर तुम पे कहाँ नाला ए ग़म का बरहम जो हुई बज़्म ए तरब इसका गिला है, फ़िरऔन भी नमरूद भी गुज़रे हैं जहाँ में रहता है यहाँ कौन यहाँ कौन रहा है, तुम ज़ुल्म कहाँ तक तह ए अफ़्लाक करोगे ये बात न भूलो कि हमारा भी ख़ुदा है, आज़ादी ए इंसान के वहीं फूल खिलेंगे जिस जा पे ज़हीर आज तेरा ख़ून गिरा है, ता चंद रहेगी ये शब ए ग़म की सियाही रस्ता कोई सूरज का कहीं रोक सका है, तू आज का शाइ'र है तो कर मेरी तरह बात जैसे मेरे होंठों पे मेरे दिल की सदा है..!! - [आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह](https://hindigazals.com/aag-hai-faili-hui-kaali/): आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह बद दुआएँ हैं लबों पर अब दुआओं की जगह, इंतिख़ाब ए अहल ए गुलशन पर बहुत रोता है दिल देख कर ज़ाग़ ओ ज़ग़्न को ख़ुश नवाओं की जगह, कुछ भी होता पर न होते पारा पारा जिस्म ओ जाँ राहज़न होते अगर उन रहनुमाओं की जगह, लुट गई इस दौर में अहल ए क़लम की आबरू बिक रहे हैं अब सहाफ़ी बेश्याओ की जगह, कुछ तो आता हम को भी जाँ से गुज़रने का मज़ा ग़ैर होते काश जालिब आश्नाओं की जगह..!! - [ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है](https://hindigazals.com/ye-kis-rashq-e-masiha-ka/): ये किस रश्क ए मसीहा का मकाँ है ज़मीं याँ की चहारुम आसमाँ है, ख़ुदा पिन्हाँ है आलम आश्कारा निहाँ है गंज वीराना अयाँ है, दिल ए रौशन है रौशनगर की मंज़िल ये आईना सिकंदर का मकाँ है, तकल्लुफ़ से बरी है हुस्न ए ज़ाती क़बा ए गुल में गुलबूटा कहाँ है, पसीजेगा कभी तो दिल किसी का हमेशा अपनी आहों का धुआँ है, ब रंग ए बू हूँ गुलशन में मैं बुलबुल बग़ल ग़ुंचे के मेरा आशियाँ है, शगुफ़्ता रहती है ख़ातिर हमेशा क़नाअ'त भी बहार ए बेख़िज़ाँ है, चमन की सैर पर होता है झगड़ा कमर मेरी है दस्त ए बाग़बाँ है, बहुत आता है याद ऐ सब्र ए मिस्कीं ख़ुदा ख़ुश रखे तुझको तू जहाँ है, इलाही एक दिल किस किस को दूँ मैं हज़ारों बुत हैं याँ हिन्दोस्ताँ है, यक़ीं होता है ख़ुशबूई से इस के किसी गुलरू का ग़ुंचा इत्र दाँ है, वतन में अपने अहल ए शौक़ की तरह सफ़र में रोज़ ओ शब रेग ए रवाँ है, सहर होवे कहीं शबनम करे कूच गुल ओ बुलबुल का दरिया दरमियाँ है, सआदत मंद क़िस्मत पर हैं शाकिर हुमा को मग़्ज़ ए बादाम उस्तुख़्वाँ है, दिल ए बेताब जो इस में गिरे हैं ज़क़न जानाँ का पारा का कुआँ है, जरस के साथ दिल रहते हैं नालाँ मेरे यूसुफ़ का आशिक़ कारवाँ है, न कह रिंदों को हर्फ़ ए सख़्त वाइ'ज़ दुरुश्त अहल ए जहन्नुम की ज़बाँ है, क़द ए महबूब को शाएर कहें सर्व क़यामत का ये ऐ 'आतिश' निशाँ है..!! - [वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी](https://hindigazals.com/vatan-nasib-kahan-apni/): वतन नसीब कहाँ अपनी क़िस्मतें होंगी जहाँ भी जाएँगे हम साथ हिजरतें होंगी, कभी तो साहिब ए दीवार ओ दर बनेंगे हम कभी तो सर पे हमारे नई छतें होंगी, ये अश्क तेरे मेरे राएगाँ न जाएँगे उन्हीं चराग़ों से रौशन मोहब्बतें होंगी, तेरी अदा में है इंकार भी इजाज़त भी जो हम मिलेंगे तो दूरी न क़ुर्बतें होंगी, अमल दुरुस्त करें अपने रहनुमाए किराम कहूँगा साफ़ तो सब को शिकायतें होंगी, हम उन के सामने सच बोलने के मुजरिम हैं हमीं पे वक़्त की सारी इनायतें होंगी, हमें तो अपने मसाइल का हल भी है दरकार तुम्हारे पास तो ख़ाली बशारतें होंगी, वहाँ पे क़ाफ़िले भटकेंगे तय है ये 'मंज़र' जहाँ उसूल से ख़ाली क़यादतें होंगी, अभी तो क़ैद हैं जज़्बों की आँधियाँ दिल में हमारा सब्र जो तोड़ा क़यामतें होंगी..!! - [दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता...](https://hindigazals.com/dil-me-rakhta-hai-na/): दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे फिर भी एक शख्स में क्या क्या नज़र आता है मुझे, रात का वक़्त है सूरज है मेरा राह नुमा देर से दूर से ये कौन बुलाता है मुझे, मेरी इन आँखों को ख़्वाबों से पशेमानी है नींद के नाम से जो हौल सा आता है मुझे, तेरा मुंकिर नहीं ऐ वक़्त मगर देखना है बिछड़े लोगों से कहाँ कैसे मिलाता है मुझे, क़िस्सा ए दर्द में ये बात कहाँ से आई मैं बहुत हँसता हूँ जब कोई सुनाता है मुझे..!! - [हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना...](https://hindigazals.com/hizr-ke-mausam-me-ye-barish/): हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना कैसा ? एक सहरा में समन्दर का गुज़रना कैसा ? ऐ मेरे दिल न परेशां हो तन्हा हो कर वो तेरे साथ चला कब था, बिछड़ना कैसा ? - [ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना...](https://hindigazals.com/zulf-angdaai-tabassum-chaand/): ज़ुल्फ़, अँगड़ाई, तबस्सुम, चाँद, आईना, गुलाब भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इन सब का शबाब, पेट के भूगोल में उलझा हुआ है हर आदमी इस अहद में किसको फुरसत है पढ़े दिल की क़िताब, इस सदी की तिश्नगी का ज़ख़्म होंठों पर लिए बेयक़ीनी के सफ़र में ज़िंदगी है एक अज़ाब, डाल पर मज़हब की पैहम खिल रहे दंगों के फूल सभ्यता रजनीश के हम्माम में है बेनक़ाब, चार दिन फुटपाथ के साए में रहकर देखिए डूबना आसान है आँखों के सागर में जनाब..!! - [तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है](https://hindigazals.com/teer-par-teer-lagaao/): तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है सीना किस का है मेरी जान जिगर किस का है, ख़ौफ़ ए मीज़ान ए क़यामत नहीं मुझको ऐ दोस्त तू अगर है मेरे पल्ले में तो डर किस का है, कोई आता है अदम से तो कोई जाता है सख़्त दोनों में ख़ुदा जाने सफ़र किस का है, छुप रहा है क़फ़स ए तन में जो हर ताइर ए दिल आँख खोले हुए शाहीन ए नज़र किस का है, नाम ए शाइर न सही शेर का मज़मून हो ख़ूब फल से मतलब हमें क्या काम शजर किस का है, सैद करने से जो है ताइर ए दिल के मुंकिर ऐ कमाँदार तेरे तीर में पर किस का है, मेरी हैरत का शब ए वस्ल ये बाइ'स है अमीर सर ब ज़ानू हूँ कि ज़ानू पे ये सर किस का है..!! - [चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना...](https://hindigazals.com/chaand-hai-zer-e-nazar/): चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया, शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले कोठियों की लॉन का मंज़र सलोना हो गया, ढो रहा है आदमी काँधे पे ख़ुद अपनी सलीब जिंदगी का फ़लसफ़ा जब बोझ ढोना हो गया, यूँ तो आदम के बदन पर भी था पत्तों का लिबास रूह उरियाँ क्या हुई मौसम घिनौना हो गया, अब किसी लैला को भी इक़रार ए महबूबी नहीं इस अहद में प्यार का सिंबल तिकोना हो गया..!! - [क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ?](https://hindigazals.com/kyun-patthar-ko-dil-me/): क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ? - [धड़कन धड़कन यादों की बारात...](https://hindigazals.com/dhadkan-dhadkan-yaadon-ki/): धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा मैं और मेरे ज़ख़्मी एहसासात अकेला कमरा, गए दिनों की तस्वीरों के बुझते हुए नुक़ूश ताज़ा तर्क ए तअल्लुक़ के सदमात अकेला कमरा, दोश ए हवा पर उड़ने वाले ख़िज़ाँ के आख़िरी पत्ते अपनी अकेली जान ग़म ए हालात अकेला कमरा, आख़िरी शब के चाँद से करना बालकनी में बातें उस के शहर में होटल की ये रात अकेला कमरा, मेरी सिसकती आवाज़ों से गूँजती हैं दीवारें सुनता है दिन रात मरे नग़्मात अकेला कमरा, सब सामान बहम हैं 'साजिद' लिखने लिखाने के ख़ून ए जिगर और आँसू दिल की दवात अकेला कमरा..!! - [आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है](https://hindigazals.com/aaj-sealing-fain-se-latki-hui-hai/): आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है ये मुहब्बत किस कदर भटकी हुई है, गैरो के कंधो पर उठी है माँ की अर्थी भाइयो में इस क़दर खटकी हुई है, कौन गलती मान ले झुक जाए पहले बात तो इस बात पर अटकी हुई है, लाज़ सिर खोले खड़ी है देहरी पर आज फिर तौहीन घूँघट की हुई है, ऐ ख़ुशी तू साथ क्या देगी हमारा लहर कब कोई किसी तट की हुई है, जो सदी इंसानियत के नाम पर थी वो सदी मक्कार लम्पट की हुई है...!! - [ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी](https://hindigazals.com/dhoondhte-kya-ho-in-aankhon-me/): ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी ख़ुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी, भीड़ में भी तुम्हें मिल जाऊँगा आसानी से खोया खोया हुआ रहना है निशानी मेरी, मैं ने एक बार कहा था कि बहुत प्यासा हूँ तब से मशहूर हुई तिश्ना दहानी मेरी, यही दीवार ओ दर ओ बाम थे मेरे हमराज़ इन्ही गलियों में भटकती थी जवानी मेरी, तू भी इस शहर का बासी है तो दिल से लग जा तुझ से वाबस्ता है एक याद पुरानी मेरी, कर्बला दश्त ए मोहब्बत को बना रक्खा है क्या ग़ज़ल गोई है क्या मर्सिया ख़्वानी मेरी, धीमे लहजे का सुख़नवर हूँ न सहबा हूँ न जोश मैं कहाँ और कहाँ शोला बयानी मेरी..!! - [भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न...](https://hindigazals.com/bhookh-ke-ehsas-ko/): भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो, जो ग़ज़ल माशूक के जलवों से वाक़िफ़ हो गई उसको अब बेवा के माथे की शिकन तक ले चलो, मुझको नज़्म ओ ज़ब्‍त की तालीम देना बाद में पहले अपनी रहबरी को आचरन तक ले चलो, गंगाजल अब बुर्जुआ तहज़ीब की पहचान है तिश्नगी को वोदका के आचरन तक ले चलो, ख़ुद को ज़ख्मी कर रहे हैं ग़ैर के धोखे में लोग इस शहर को रोशनी के बाँकपन तक ले चलो..!! - [आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी](https://hindigazals.com/aap-kahte-hai-saraapa/): आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी हम ग़रीबों की नज़र में क़हर है जिंदगी, भुखमरी की धूप में कुम्हला गई अस्मत की बेल मौत के लम्हात से भी तल्ख़तर है जिंदगी, डाल पर मज़हब की पैहम खिल रहे दंगों के फूल ख़्वाब के साए में फिर भी बेख़बर है ज़िंदगी, रोशनी की लाश से अब तक जिना करते रहे ये वहम पाले हुए शम्स ओ क़मर है ज़िंदगी, दफ़्न होता है जहाँ आ कर नई पीढ़ी का प्यार शहर की गलियों का वो गंदा असर है ज़िंदगी..!! - [हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं...](https://hindigazals.com/har-shakhs-ko-allah-ki/): हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं मिलती हाँ रिज्क तो मिल जाता है बरक़त नहीं मिलती, किस लिए तुम्हारी शमशीरे नियामों में पड़ी है बिना तलवार उठाये तो शुजाअत नहीं मिलती अब अपने ही अपनों के गले के काट रहे है दिलों में अब वो पहली सी मुहब्बत नहीं मिलती, रश्क़ ओ हसद ने इस क़दर किया हमें गाफ़िल भाई को भाई से मिलने की फ़ुर्सत नहीं मिलती..!! - [वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई...](https://hindigazals.com/wo-jiske-haath-me-chhale-hai/): वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है, इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है, कोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर ले हमारा मुल्क इस माने में बुधुआ की लुगाई है, रोटी कितनी महँगी है ये वो औरत बताएगी जिसने जिस्म गिरवी रख के ये क़ीमत चुकाई है..!! - [न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के...](https://hindigazals.com/naa-mahalon-ki-bulandi-se/): न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से, कि अब मर्क़ज़ में रोटी है,मुहब्बत हाशिये पर है उतर आई ग़ज़ल इस दौर में कोठी के ज़ीने से, अदब का आइना उन तंग गलियों से गुज़रता है जहाँ बचपन सिसकता है लिपट कर माँ के सीने से, बहार ए बेकिराँ में ताक़यामत का सफ़र ठहरा जिसे साहिल की हसरत हो उतर जाए सफ़ीने से, अदीबों की नई पीढ़ी से मेरी ये गुज़ारिश है सँजो कर रक्खें धूमिल की विरासत को क़रीने से..!! - [बज़ाहिर प्यार की दुनियाँ में जो नाकाम...](https://hindigazals.com/bazaahir-pyar-ki-duniyan-me/): बज़ाहिर प्यार की दुनियाँ में जो नाकाम होता है कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है, ज़हर देते हैं उसको हम कि ले जाते हैं सूली पर यही हर दौर के मंसूर का अंजाम होता है, जुनून ए शौक में बेशक लिपटने को लिपट जाएँ हवाओं में कहीं महबूब का पैगाम होता है, सियासी बज़्म में अक्सर ज़ुलेखा के इशारों पर हकीकत ये है कि युसुफ आज भी नीलाम होता है..!! - [मुझे हयात के साँचों में ढालने वाले...](https://hindigazals.com/mujhe-hayat-ke-saancho-me/): मुझे हयात के साँचों में ढालने वाले कहाँ गए वो समुंदर खंगालने वाले, लुढ़क रहा हूँ ढलानों से प्यार के मैं तो न आएँ राह में मुझको सँभालने वाले, हमारे शौक़ ए फ़रावाँ ने डस लिया हमको कि आस्तीं में थे हम साँप पालने वाले, हवा में फेंक न मुझ को समझ के खेल कोई तुझी को आ के लगूँगा उछालने वाले, ज़रा सा काम हूँ मैं फिर भी नामुकम्मल हूँ यहाँ मिले हैं सभी मुझ को टालने वाले, कुआँ हवस का था गहरा कुछ इस क़दर अख़्तर कि ख़ुद ही गिर गए मुझ को निकालने वाले..!! - [सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ...](https://hindigazals.com/sitamgaro-ke-sitam-ki-udaan/): सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ कम है अभी ज़मीं के लिए आसमान कुछ कम है, जो इस ख़याल को भूले तो मारे जाओगे कि अपनी सम्त क़यामत का ध्यान कुछ कम है, हमारे शहर में सब ख़ैर ओ आफ़ियत है मगर यही कमी है कि अम्न ओ अमान कुछ कम है, बना रहा है फ़लक भी अज़ाब मेरे लिए तेरी ज़मीन पे क्या इम्तिहान कुछ कम है ? - [कोई बचने का नहीं सब का पता जानती है](https://hindigazals.com/koi-bachne-ka-nahi-sab-ka/): कोई बचने का नहीं सब का पता जानती है किस तरफ़ आग लगाना है हवा जानती है, उजले कपड़ों में रहो या कि नक़ाबें डालो तुम को हर रंग में ये ख़ल्क़ ए ख़ुदा जानती है, रोक पाएगी न ज़ंजीर न दीवार कोई अपनी मंज़िल का पता आह ए रसा जानती है, टूट जाऊँगा बिखर जाऊँगा हारूँगा नहीं मेरी हिम्मत को ज़माने की हवा जानती है, आप सच बोल रहे हैं तो पशेमाँ क्यूँ हैं ? - [हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत...](https://hindigazals.com/hindu-ya-muslim-ke-ahsas/): हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए अपनी कुर्सी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए, हम में कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िए, ग़लतियाँ बाबर की थी, जुम्‍मन का घर फिर क्‍यों जले ? - [नूर ए नज़र, चाँद, और आफ़ताब है बच्चे](https://hindigazals.com/noor-e-nazar-chaand-aur/): नूर ए नज़र, चाँद, और आफ़ताब है बच्चे रौशन चेहरे लिए खुली क़िताब है बच्चे, स्कूल की यूनिफार्म में सज कर निकलते है तो ऐसा लगता है खिलता गुलाब है बच्चे, गंगा, जमुना,सतलज सरीखे कितने नायाब है सच कहूँ तो रावी, झेलम, चिनाब है बच्चे, अपनी मासूमियत और मस्ती की राजधानी में फ़रेब से दूर मन मर्ज़ी के नबाब है बच्चे, छोटी छोटी खुशियाँ पर जब ये खिलखिलाते है ऐसा लगता है मधुर धुन ए रबाब है बच्चे, नफरती दुनियाँ में किस किस ने फ़रिश्ते देखे है ? - [ज़ुल्म के तल्ख़ अंधेरो के तलबगार हो तुम](https://hindigazals.com/zulm-ke-talkh-andhero-ke/) - [मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ...](https://hindigazals.com/main-jise-odhta-bichhata-hoon/): मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ, एक जंगल है तेरी आंखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ, तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ, हर तरफ़ ऐतराज़ होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ, एक बाज़ू उखड़ गया जबसे और ज़्यादा वज़न उठाता हूँ, मैं तुझे भूलने की कोशिश में आज कितने क़रीब पाता हूँ, कौन ये फ़ासला निभाएगा मैं फ़रिश्ता हूँ सच बताता हूं..!! - [कुछ देर का है रोना, कुछ देर की हँसी है](https://hindigazals.com/kuch-der-ka-hai-rona-kuch/): कुछ देर का है रोना, कुछ देर की हँसी है कहीं ठहरती नहीं इसी का नाम ज़िन्दगी है, कुछ देर का है मिलना, कुछ देर का बिछड़ना कुछ पल की धूप है तो कुछ पल की चाँदनी है, कहीं जान हो ज़रूरी तो क्यूँ वक़्त से न पहुंचे ? - [पा सके न सुकूं जो जीते जी वो मर के...](https://hindigazals.com/paa-saken-n-sukun-jo/): पा सके न सुकूं जो जीते जी वो मर के कहाँ पाएँगे शहर के बेचैन परिंदे फिर लौट के शहर में आएँगे, ज़न्नत का दावा और खौफ़ ए ज़हन्नुम ये सब बातें है जिसको जो पाना खोना है यही पाएँगे यहीं लुटाएँगे, हर साज़िश ए सियासी ऐश ए दुनियाँ की खातिर है इंसानियत का तकाज़ा फक़त इन्सान की खातिर है, इस दश्त ए जहाँ का आज ये कैसा कायदा क़ानून है क़ैद हो चुके है नेक सलाखों में हत्यारे मुल्क बचाएँगे..!! - [नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो...](https://hindigazals.com/nahi-hoti-agar-barish-to/): नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते ये सारे लहलहाते खेत बंज़र हो गए होते, तेरे दामन ने सरे शहर हो सैलाब से रोका नहीं तो मेरे ये आँसू समंदर हो गए होते, तुम्हे अहल ए सियासत ने कहीं का भी नहीं रखा हमारे साथ रहते तो सुखनवर हो गए होते, अगर आदाब कर लेते तो मसनद मिल गई होती अगर लहज़ा बदल लेते गवर्नर हो गए होते..!! - [सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा](https://hindigazals.com/sahar-ne-andhi-gali-ki-taraf/): सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा जिसे तलब थी उसी की तरफ़ नहीं देखा, क़लक़ था सब को समुंदर की बेक़रारी का किसी ने मुड़ के नदी की तरफ़ नहीं देखा, कचोके के देती रहीं ग़ुर्बतें मुझे लेकिन मेरी अना ने किसी की तरफ़ नहीं देखा, सफ़र के बीच ये कैसा बदल गया मौसम कि फिर किसी ने किसी की तरफ़ नहीं देखा, तमाम उम्र गुज़ारी ख़याल में जिस के तमाम उम्र उसी की तरफ़ नहीं देखा, यज़ीदियत का अंधेरा था सारे कूफ़े में किसी ने सिब्त ए नबी की तरफ़ नहीं देखा, जो आईने से मिला आईने पे झुँझलाया किसी ने अपनी कमी की तरफ़ नहीं देखा, मिज़ाज ए ईद भी समझा तुझे भी पहचाना बस एक अपने ही जी की तरफ़ नहीं देखा..!! - [ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है](https://hindigazals.com/ye-jo-pal-hai-ye-pichle-pal-se/): ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है हमसे पूछो हमने ज़िन्दगी कैसे गुज़ारी है, ये दुनियाँ आज तक कौन जीत सका है ? - [हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है](https://hindigazals.com/hamare-dil-pe-jo-zakhmo-ka/): हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है इसी में वक़्त का सारा हिसाब लिखा है, कुछ और काम तो हम से न हो सका लेकिन तुम्हारे हिज्र का एक एक अज़ाब लिखा है, सुलूक नश्तरों जैसा न कीजिए हम से हमेशा आप को हम ने गुलाब लिखा है, तेरे वजूद को महसूस उम्र भर होगा तेरे लबों पे जो हम ने जवाब लिखा है, हुआ फ़साद तो इस में नहीं किसी का क़ुसूर हवा ए शहर ने मौसम ख़राब लिखा है, अगर यक़ीन नहीं तो उठाइए तारीख़ हमारा नाम ब सद आब ओ ताब लिखा है..!! - [एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया](https://hindigazals.com/ek-maqaan-aur-bulandi-pe/): एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया हमको परवाज़ का मौक़ा ही हवा ने न दिया, तू ख़ुदा बन के मिटाएगा हमें ही एक दिन सर तेरे दर पे इसी डर ने झुकाने न दिया, मुत्तहिद होने का जज़्बा था सभी में लेकिन मुत्तहिद होने का मौक़ा ही हवा ने न दिया, तुम पे छा जाते शजर बनते जो नन्हे पौधे तुम ने अच्छा ही किया पाँव जमाने न दिया, वो तो आमादा था बंदों की शिकायत सुन कर कुछ फ़रिश्तों ने ज़मीं पर उसे आने न दिया, आप डरते हैं कि खुल जाए न असली चेहरा इस लिए शहर को आईना बनाने न दिया..!! - [आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई](https://hindigazals.com/aankhe-bhar-aai-kisi-se-jo/): आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी डूबा कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं जिस जगह बुझ गए आँखों के दिए रात हुई, कोई हसरत कोई अरमाँ कोई ख़्वाहिश ही न थी ऐसे आलम में मेरी ख़ुद से मुलाक़ात हुई, हो गया अपने पड़ोसी का पड़ोसी दुश्मन आदमिय्यत भी यहाँ नज़्र ए फ़सादात हुई, इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं जीतने का जहाँ मौक़ा था वहीं मात हुई, इस तरह गुज़रा है बचपन कि खिलौने न मिले और जवानी में बुढ़ापे से मुलाक़ात हुई..!! - [मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है](https://hindigazals.com/maine-ae-dil-tujhe-sine-se/): मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मेरी जान को आया हुआ है, बस इसी बोझ से दोहरी हुई जाती है कमर ज़िंदगी का जो ये एहसान उठाया हुआ है, क्या हुआ गर नहीं बादल ये बरसने वाला ये भी कुछ कम तो नहीं है जो ये आया हुआ है, राह चलती हुई इस राहगुज़र पर अजमल हम समझते हैं क़दम हमने जमाया हुआ है, हम ये समझे थे कि हम भूल गए हैं उसको आज बे तरह हमें याद जो आया हुआ है, वो किसी रोज़ हवाओं की तरह आएगा राह में जिस की दिया हमने जलाया हुआ है, कौन बतलाए उसे अपना यक़ीं है कि नहीं वो जिसे हमने ख़ुदा अपना बनाया हुआ है, यूँ ही दीवाना बना फिरता है वर्ना अजमल दिल में बैठा हुआ है ज़ेहन पे छाया हुआ है..!! - [दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है](https://hindigazals.com/duniya-e-akidat-me/): दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है जो दश्त में मजनूँ था वो मरकज़ मे वली है, तहज़ीब ए गुलिस्ताँ का अजब रंग है यारों वो फूल है बातिन में जो ज़ाहिर में कली है, क्या तुझको पता अपनी रिहाइश का बताऊँ उस शहर में हूँ जिस मे मुहल्ला न गली है, वो दिन जो हम गरीबों का भरम तोड़ने आए उस दिन से तो ऐ मेरे ख़ुदा ये रात भली है...!! - [बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ](https://hindigazals.com/be-niyazi-ke-silsile/): बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ मैं कहाँ अब तेरे नशे में हूँ, हिज्र तेरा मुझे सताता है और बाक़ी तो बस मज़े में हूँ, ढूँढ मत इन उदास आँखों में ग़ौर कर तेरे क़हक़हे में हूँ, वो मुझे अब भी चाहता होगा मैं अभी तक मुग़ालते में हूँ, हर तरफ़ महफ़िलें ख़यालों की इश्क़ के शाही महकमे में हूँ, तोड़ कर ही निकाल ले कोई क़ैद मैं अपने दाएरे में हूँ, उस को मंज़िल भी मिल गई अपनी और मैं हूँ कि रास्ते में हूँ...!! - [देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते](https://hindigazals.com/dekh-lete-hai-ab/): देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते ये भी आज़ार चला जाएगा जाते जाते, दिल के सब नक़्श थे हाथों की लकीरों जैसे नक़्श ए पा होते तो मुमकिन था मिटाते जाते, थी कभी राह जो हमराह गुज़रने वाली अब हज़र होता है उस राह से आते जाते, शहर ए बे मेहर! - [मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता](https://hindigazals.com/milne-ki-tarah-mujh/) - [वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी](https://hindigazals.com/wo-humsafar-tha-magar/): वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी कि धूप छांव का आलम रहा जुदाई न थी, न अपना रंज न औरों का दुख न तेरा मलाल शब ए फ़िराक़ कभी हमने यूँ गँवाई न थी, मुहब्बतों का सफ़र इस तरह भी गुज़रा था शिकस्ता दिल थे मुसाफ़िर शिकस्ता पाई न थी, अदावतें थीं, तगाफ़ुल था, रंजिशें थीं बहुत बिछड़ने वाले में सब कुछ था, बेवफ़ाई न थी, बिछड़ते वक़्त उन आँखों में थी हमारी गज़ल गज़ल भी वो जो किसी को अभी सुनाई न थी, किसे पुकार रहा था वो डूबता हुआ दिन ? - [कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से](https://hindigazals.com/kitna-naadaan-hai-wo/): कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से ख़ुद का दिल दुखाता है ख़ुद के सवाल से, दीवारों पे ना जाने कहाँ से आ गया रंग ये दरारे थी पड़ी इस पे पहले मेरे ख़्याल से, हम ख़ुद को खाक़ में मिला कर चल दिए ख़ुशबू गैर की जो आई उसके रुमाल से, अपने सिवा कभी सोच हमारे बारे में भी हर बार ही क़त्ल होते है हम तेरे जमाल से, दर पर तेरी आ रुकी भटक कर हवाएँ भी सनम तेरी ही भीगी ज़ुल्फों के कमाल से, क्या क्या ना तुझको मिला ऐ दिल ए नादां मुहब्बत दर्द ओ गम उसका इस साल से...!! - [तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा](https://hindigazals.com/teri-aankhon-ne-aankhon/): तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा, नहीं देखा अभी तुमने मेरी तन्हाई का मंज़र कि अपने आप से मेरा उलझना भी नहीं देखा, अभी तुमने तुम्हारे बिन मेरी हालत नही देखी अभी तुमने मेरा गम बिलकना भी नहीं देखा, अभी तुमने दुआओं में मेरे आँसू नहीं देखे ख़ुदा के सामने मेरा सिसकना भी नहीं देखा, अभी तुमने नहीं देख कोई मंज़र जुदाई का अभी पत्तों का शाखों से बिखरना भी नहीं देखा...!! - [जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो](https://hindigazals.com/jina-mushkil-hai-ki/): जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो हर शख़्स लगता है परेशान ज़रा देख तो लो, यूँ तो आज ये नया शहर है ख़ूब बसाया तुम ने मगर क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो, इन चिरागों के तले आज ऐसे अँधेरे क्यूँ हैं ? - [जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ](https://hindigazals.com/javan-ho-khush-adaa/): जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ हसीं हो दिलरुबा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ, अगरचे फूल शबनम चाँदनी सब खूबसूरत है तुम उन सबसे जुदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ, हज़ारों हुस्न वाले मैंने इस दुनियाँ में देखे है तुम उन सब से जुदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ, फ़ज़ाओं में महक तुम से ज़मीं पे तुम से शादाबी गुलिस्ताँ हो सबा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ...!! - [झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी](https://hindigazals.com/jhagadna-kaahe-ka-mere/): झगड़ना काहे का ? - [मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है...](https://hindigazals.com/maut-bhi-kya-azib/): मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है जो ज़िंदगी के लिए तरसती है, दिल तो एक शहर है जुदाई का आँख तो आँसूओं की बस्ती है, इश्क़ में भी हो मरतबे का ख़्याल ये बुलंदी नहीं है पस्ती है, हम उदासी पे अपनी हैं मगरूर हम को अपने दुखों की मस्ती है, याद आया है जाने क्या उसको ? - [पिछले बरस तुम साथ थे मेरे...](https://hindigazals.com/pichhle-baras-tum-saath/): पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था, चाँदनी रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था, बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था, भीगी ज़ुल्फ़ें भीगा आँचल नींद थी आँखों में कुछ ऐसे हालात थे मेरे और दिसम्बर था, धीरे धीरे भड़क रही थी आतिशदान की आग बहके हुए जज़्बात थे मेरे और दिसम्बर था, प्यार भरी नज़रों से फ़रह जब उसने देखा था बस वो ही लम्हात थे मेरे और दिसम्बर था...!! - [ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए](https://hindigazals.com/gam-e-jahan-ko/): ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए वो सारी उम्र इंतिज़ार करने वाले क्या हुए ? बहम हुए बग़ैर जो गुज़र गईं वो साअतें वो एक एक पल शुमार करने वाले क्या हुए ? - [हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत](https://hindigazals.com/harf-e-galat-na-tha/): हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत लिखा गया गलत कभी बोला गया गलत, मैं भी गलत न था मेरी बातें गलत न थीं मुझको मेरे कलाम को जाँचा गया गलत, मिज़ान ठीक था पलड़े दुरुस्त थे लेकिन ये कौन देखता है कि तोला गया गलत, मुझ में नहीं थे ऐब कसौटी में ऐब था मेरा था ये क़ुसूर कि परखा गया गलत, तूफ़ान के बाद अहल ए तदब्बुर को है ये फ़िक्र साहिल का क़ुसूर था कि दरिया गया गलत ? - [दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं](https://hindigazals.com/dil-me-auro-ke-liye/): दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं वही लोग इख़्लास के पर्दे में हसद रखते हैं, आप से हाथ मिलाते हुए डर लगता है आप तो प्यार के रिश्तों में भी हद रखते हैं, ये ज़रूरी नहीं दिल उनके हों हक़ से मामूर वो जो चेहरों पे इबादत की सनद रखते हैं, क्या पता कब किसी रिश्ते का भरोसा टूटे ऐसे लोगों से न मिलिए जो हसद रखते हैं, दफ़्न हो जाए न एहसास ए मोहब्बत दिल में अब कहाँ दिल का ख़याल अहल ए ख़िरद रखते हैं, कौन होता है मुसीबत में किसी का सलीम हम अबस आप से उम्मीद ए मदद रखते हैं..!! - [इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है](https://hindigazals.com/insan-ko-waqt-ke/): इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है बाद ठोकर ही सही आख़िर संभलना पड़ता है, हमदर्द बने अपने जब औक़ात बताने लगते है उम्मीदों के झूठे ख़्वाबों से निकलना पड़ता है, जब ईमां ओ ज़मीर का सौदा आम हो जाता है नुकसान हक़ बोलने वालों को उठाना पड़ता है...!! - [सरहदों पर है अपने जवानों का गम](https://hindigazals.com/sarhadon-par-hai-apne/): सरहदों पर है अपने जवानों का गम और बस्ती में जलते मकानों का गम, फिर से ये गंदी सियासत हवा दे गई हमने देखा है जलती दुकानों का गम, बस्तियाँ जल गई,कारवां भी लूट गए और वो रह गए सुनाते बेगानों का गम, देखले कोई मज़लूमों का दिल चीर कर इस ज़मीं को तो है आसमानों का गम...!! - [जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है](https://hindigazals.com/jis-tarah-chadhta-hai/): जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है चोटियों पर सदा के लिए कौन ठहरता है ? - [दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की](https://hindigazals.com/dukh-aur-tarah-ke-hai/): दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की और दामन ए क़ातिल की हवा और तरह की, दीवार पे लिखी हुई तहरीर है कुछ और देती है ख़बर ख़ल्क़ ए ख़ुदा और तरह की, किस दाम उठाएँगे ख़रीदार कि इस बार बाज़ार में है जिंस ए वफ़ा और तरह की, बस और कोई दिन कि ज़रा वक़्त ठहर जाए सहराओं से आएगी सदा और तरह की, हम कू ए मलामत से निकल आए तो हमको रास आई न फिर आब ओ हवा और तरह की...!! - [ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है](https://hindigazals.com/ae-waqt-zara-tham-jaa/): ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है आँखों में अभी बाक़ी एक ख्वाब ए जवानी है, क्या क़िस्सा सुनाएँ हम उस उम्र ए गुरेज़ा का फुर्सत है बहुत थोड़ी और लम्बी कहानी है, एक राज़ है सीने में रखा नहीं जाता अब आ कर कभी सुन जाओ एक बात पुरानी है, सच्चे थे तेरे वायदे सच्चे है बहाने भी बस हमको शिकायत की आदत ही पुरानी है, जो कुछ भी कहा तुमने तुमको ही ख़बर होगी हमने तो सुना जो कुछ दुनिया की जुबानी है, गुज़री जो बिना तेरे उस उम्र का अफ़साना होंठों की ख़ामोशी है आँखों का ये पानी है, ऐ याद ए शब ए उल्फ़त ! - [दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों](https://hindigazals.com/dil-bhi-bujha-ho/): दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों मर जाइये जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों, आँखों की सुर्ख़ लहर है मौज ए सुपरदगी ये क्या ज़रूर है कि अब अंगड़ाइयाँ भी हों, हर हुस्न ए सादा लौ न दिल में उतर सका कुछ तो मिज़ाज ए यार में गहराइयाँ भी हों, दुनिया के तज़किरे तो तबियत ही ले बुझे बात उस की हो तो फिर सुख़न आराइयाँ भी हों, पहले पहल का इश्क़ अभी याद है फ़राज़ दिल ख़ुद ये चाहता है के रुस्वाइयाँ भी हों...!! - [उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले है](https://hindigazals.com/unse-miliye-jo-yahan-2/): उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले है हमसे मत बोलिए हम लोग गज़ल वाले है, कैसे शफ़्फ़ाफ लिबासों में नज़र आते है कौन मानेगा कि ये सब वही कल वाले है, लूटने वाले उसे क़त्ल न करते लेकिन उसने पहचान लिया था कि बगल वाले है, अब तो मिलजुल के परिंदों को रहना होगा जितने तालाब है सब नील कमल वाले है, यूँ भी फ़ूस के छप्पर की हक़ीक़त क्या थी अब उन्हे ख़तरा है जो लोग महल वाले है, बे कफ़न लाशों के अम्बार लगे है लेकिन फ़ख्र से कहते है वो हम ताजमहल वाले है...!! - [नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा](https://hindigazals.com/nazar-fareb-e-qaza-khaa/): नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा ? ब ज़ोम ए होश तजल्ली की जुस्तुजू बे सूद जुनूँ की ज़द पे ख़िरद आ गई तो क्या होगा ? - [चाँद पर बस्तियाँ तो बसा लोगे...](https://hindigazals.com/chaand-par-bastiyan-to/): चाँद पर बस्तियाँ तो बसा लोगे मगर चाँदनी कहाँ से लाओगे ? सलब कर लीं समाअतें सबकी किस को अब दास्ताँ सुनाओगे ? - [धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है](https://hindigazals.com/dhadkate-saans-lete-rukte/) - [आज ज़रा फुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया](https://hindigazals.com/aaj-zara-fursat-paai-thi/): आज ज़रा फुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को आज फिर आबाद किया, खोल के खिड़की चाँद हँसा फिर चाँद ने दोनों हाथों से रंग उड़ाए फूल खिलाए चिड़ियों को आज़ाद किया, बड़े बड़े गम खड़े हुए थे रस्ता रोके राहों में छोटी छोटी खुशियों से ही हमने दिल को शाद किया, बात बहुत मामूली सी थी उलझ गई तकरारों में एक ज़रा सी ज़िद्द ने आख़िर दोनों को बर्बाद किया, दानाओं की बात न मानी काम आई नादानी ही सुना हवा को पढ़ा नदी को मौसम को उस्ताद किया...!! - [दुख दर्द के मारों से मेरा ज़िक्र न करना](https://hindigazals.com/dukh-dard-ke-maaron-se/): दुख दर्द के मारों से मेरा ज़िक्र न करना घर जाऊँ तो यारों से मेरा ज़िक्र न करना, वो मेरी कहानी को गलत रंग न दे दें अफ़साना निगारों से मेरा ज़िक्र न करना, शायद वो मेरे हाल पे बे साख्ता रो दें इस बार बहारों से मेरा ज़िक्र न करना, ले जाएंगे गहराई में तुमको भी बहा कर दरिया के किनारों से मेरा ज़िक्र न करना, वो शख़्स मिले तो उसे हर बात बताना तुम सिर्फ़ इशारों से मेरा ज़िक्र न करना..!! - [दयार ए नूर में तीरा शबों का साथी हो](https://hindigazals.com/dayaar-e-noor-me-teera/): दयार ए नूर में तीरा शबों का साथी हो कोई तो हो जो मेरी वहशतों का साथी हो, मैं उससे झूठ भी बोलूँ तो मुझसे सच बोले मेरे मिज़ाज के सब मौसमों का साथी हो, मैं उसके हाथ न आऊँ वो मेरा हो के रहे मैं गिर पड़ूँ तो मेरी पस्तियों का साथी हो, वो मेरे नाम की निस्बत से मोतबर ठहरे गली गली मेरी रुस्वाइयों का साथी हो, करे कलाम जो मुझसे तो मेरे लहजे में मैं चुप रहूँ तो मेरे तेवरों का साथी हो, मैं अपने आप को देखूँ वो मुझको देखे जाए वो मेरे नफ़्स की गुमराहियों का साथी हो, वो ख़्वाब देखे तो देखे मेरे हवाले से मेरे ख़याल के सब मंज़रों का साथी हो..!! - [बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मेरा है](https://hindigazals.com/basti-bhi-samndar-bhi/) - [अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है](https://hindigazals.com/apni-tasveer-ko-aankhon/): अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है एक नज़र मेरी तरफ़ भी तेरा जाता क्या है ? - [अहल ए मोहब्बत की मजबूरी बढ़ती जाती है](https://hindigazals.com/ahal-e-mohabbat-ki/) - [अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया](https://hindigazals.com/azaab-ye-bhi-kisi/) - [अज़ाब ए वहशत ए जाँ का सिला न माँगे कोई](https://hindigazals.com/azaab-e-wahshat-e-jaan-ka/) - [मज़लूमों के हक़ मे अब आवाज़...](https://hindigazals.com/mazlumo-ke-haq-me/): मज़लूमों के हक़ मे अब आवाज़ उठाये कौन ? जल रही बस्तियाँ,आह ओ सोग मनाये कौन ? कौन करे पासदारी अब बेत अल मुक़दस की ? सलाहुद्दीन अयुबी सा अब मुज़ाहिद लाये कौन ? - [ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं](https://hindigazals.com/thik-hai-khud-ko/): ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद देखने वाले हाथ मलते हैं, है वो जान अब हर एक महफ़िल की हम भी अब घर से कम निकलते हैं, क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में जो भी ख़ुश है हम उससे जलते हैं, है उसे दूर का सफ़र दरपेश हम सँभाले नहीं सँभलते हैं, तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं, मैं उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जिस तरह बहलते हैं, है अजब फ़ैसले का सहरा भी चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं..!! - [ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है](https://hindigazals.com/zulm-ki-had-e-inteha-ko/): ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है अब मज़लूमों का साथ निभाने का वक़्त है, वो जो सोये हुए हैं ख़्वाब ए ख़रगोश की नींद उन मुर्दा ज़मीरों को फिर से जगाने का वक़्त है, वो जो बने बैठे हैं आज ठेकेदार सारे आलम के उनकी ठेकेदारी फिर आज़माने का वक़्त है, वो जिन्हें परवाह नहीं किसी के जीने मरने की उन्हे मौत का एहसास याद दिलाने का वक़्त है, क्यूँ डरे सहमे जिये हम मौत के खौफ़ से ? - [कभी झूठे सहारे ग़म में रास आया...](https://hindigazals.com/kabhi-jhuthe-sahare-gam-me/): कभी झूठे सहारे ग़म में रास आया नहीं करते ये बादल उड़ के आते हैं मगर साया नहीं करते, यही काँटे तो कुछ ख़ुद्दार हैं सेहन ए गुलिस्ताँ में कि शबनम के लिए दामन तो फैलाया नहीं करते, वो ले लें गोशा ए दामन में अपने या फ़लक चुन ले मेरी आँखों में आँसू बार बार आया नहीं करते, सलीक़ा जिन को होता है ग़म ए दौराँ में जीने का वो यूँ शीशे को हर पत्थर से टकराया नहीं करते, जो क़ीमत जानते हैं गर्द ए राह ए ज़िंदगानी की वो ठुकराई हुई दुनिया को ठुकराया नहीं करते, क़दम मयख़ाना में रखना भी कार ए पुख़्ताकाराँ है जो पैमाना उठाते हैं वो थर्राया नहीं करते, नुशूर अहल ए ज़माना बात पूछो तो लरज़ते हैं वो शा'इर हैं जो हक़ कहने से कतराया नहीं करते..!! - [पैगम्बरों की राह पर चल कर न देखना](https://hindigazals.com/paigambaron-ki-raah-par/) - [एक पल के लिए एक घड़ी के लिए](https://hindigazals.com/ek-pal-ke-liye-ek-ghadi-ke-liye/) - [गमों का लुत्फ़ उठाया है खुशी...](https://hindigazals.com/gamon-ka-lutf-uthaya-hai/) - [आँख से टूट कर गिरी थी नींद](https://hindigazals.com/aankh-se-tut-kar-giri-thi/): आँख से टूट कर गिरी थी नींद वो जो मदहोश हो चुकी थी नींद, मेरी आँखों के क्यूँ झरोके तक आ के चुप चाप सी खड़ी थी नींद ? किस ने छेड़ा हवा के लहजे में ? - [नक़ाब चेहरों पे सजाये हुए आ जाते है](https://hindigazals.com/naqab-chehro-pe-sajaaye-hue/): नक़ाब चेहरों पे सजाये हुए आ जाते है अपनी करतूत छुपाये हुए आ जाते है, घर निकले कोई औरत तो हवस के पैकर हर तरफ घात लगाये हुए आ जाते है, जब भी यारों की इनायत का चर्चा हो तो हम ज़ख्म सीनों पे सजाये हुए आ जाते है, काम करने पे इन्हे मौत नज़र आती है क्या ? - [कहीं पे सूखा कहीं चारों सिम्त पानी है](https://hindigazals.com/kahin-pe-sukha-kahin-pe/): कहीं पे सूखा कहीं चारों सिम्त पानी है गरीब लोगों पे क़ुदरत की मेहरबानी है, हर एक शख्स की अपनी अज़ब कहानी है ये लग रहा है कि अब सर से ऊपर पानी है, वो लोग भी तो महल पे महल बनाते रहे जिन्हें ख़बर थी कि ये क़ायनात फ़ानी है, लगी हुई है उसी की तलाश में दुनियाँ पता है जिसका न जिसकी कोई निशानी है, ये और बात है कि हम साथ साथ रहते है दिलों में दुश्मनी लेकिन बहुत पुरानी है..!! - [यूँ अपनी गज़लों में न जताता कि...](https://hindigazals.com/yun-apni-gazalon-me-na/): यूँ अपनी गज़लों में न जताता कि मोहब्बत क्या है गर मिलते तो कर के दिखाता कि मोहब्बत क्या है, कैसे सीने से लगा लूँ मैं तुझे, तू किसी और की है काश !मेरी होती तो मैं बताता कि मोहब्बत क्या है, ख़ूब समझाता मैं तुझे तेरी ही मिसालें दे दे कर तुझ में भी मैं एहसास जगाता कि मोहब्बत क्या है, दीवानों के मानिंद बना देता मैं हालत तेरी फिर तुझे ख़ुद समझ आता कि मोहब्बत क्या है, इश्क़ की आग खद ओ खाल भी गम कर देती तुझे आईना याद दिलाता कि मोहब्बत क्या है, ये तो अक्सर मैं याद दिला जाता हूँ आते जाते वरना तू तो भूल ही जाती कि मोहब्बत क्या है..!! - [आयत ए हिज्र पढ़ी और रिहाई पाई](https://hindigazals.com/ayat-e-hizr-padhi-aur/): आयत ए हिज्र पढ़ी और रिहाई पाई हमने दानिस्ता मुहब्बत में जुदाई पाई, जिस्म ओ इस्म था जो किसी शब न खुला इश्क़ वो ज़र था कि लगता था खुदाई पाई, यार ता उम्र तेरा हिज्र संभाले रखा तूने क्या चीज भला मुझ में पराई पाई ? - [लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे](https://hindigazals.com/laai-hai-kis-muqam-pe/): लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे, देखो तुम आज मुझ को बुझाते तो हो मगर कल ढूँढती फिरेगी बहुत रौशनी मुझे, तय कर रहा हूँ मैं भी ये राहें सलीब की आवाज़ ऐ हयात न देना अभी मुझे, सूखे शजर को फेंक दूँ कैसे निकाल कर देता रहा है साया शजर जो कभी मुझे, क्यूँ कर रही है मुझ से सवालात ज़िंदगी कह दो जवाब की नहीं फ़ुर्सत अभी मुझे, क्या चाहता था वक़्त पे लिखना न पूछिए हुर्मत क़लम की अपनी बचानी पड़ी मुझे, दिलदारियाँ भी रह गईं पर्दे में ऐ अली लहजा बदल बदल के सदा दी गई मुझे..!! - [ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है](https://hindigazals.com/khushi-ne-mujhko-thukraya/): ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है गुलो ने बे रुखी की है तो काँटों ने संभाला है, मोहब्बत में ख़याल ए साहिल ओ मंज़िल है नादानी जो इन राहों में लुट जाए वही तक़दीर वाला है, जहाँ भर को मता ए लाला ओ गुल बख़्शने वालो हमारे दिल का काँटा भी कभी तुम ने निकाला है, किनारों से मुझे ऐ ना ख़ुदाओ दूर ही रखना वहाँ ले कर चलो तूफ़ाँ जहाँ से उठने वाला है, चराग़ाँ कर के दिल बहला रहे हो क्या जहाँ वालो अंधेरा लाख रौशन हो उजाला फिर उजाला है, नशेमन ही के लुट जाने का ग़म होता तो ग़म क्या था यहाँ तो बेचने वालों ने गुलशन बेच डाला है..!! - [दरबार ए वतन में जब एक दिन सब...](https://hindigazals.com/darbar-e-watan-me-jab/): दरबार ए वतन में जब एक दिन सब जाने वाले जाएँगे कुछ अपनी सज़ा को पहुँचेंगे,कुछ अपनी जज़ा ले जाएँगे, ऐ ख़ाक नशीनो उठ बैठो वो वक़्त क़रीब आ पहुँचा है जब तख़्त गिराए जाएँगे जब ताज उछाले जाएँगे, अब टूट गिरेंगी ज़ंजीरें अब ज़िंदानों की ख़ैर नहीं जो दरिया झूम के उठे हैं तिनकों से न टाले जाएँगे, कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं सर भी बहुत चलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे, ऐ ज़ुल्म के मातो लब खोलो चुप रहने वालो चुप कब तक कुछ हश्र तो उन से उठेगा कुछ दूर तो नाले जाएँगे..!! - [सज़ा पे छोड़ दिया, कुछ जज़ा पे छोड़ दिया](https://hindigazals.com/saza-pe-chhod-diya/): सज़ा पे छोड़ दिया, कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को अब मैंने ख़ुदा पे छोड़ दिया, वो मुझको याद रखेगा या फिर भूल जाएगा उसी का काम था उसकी रज़ा पे छोड़ दिया, अब उसकी मर्ज़ी जलाए या फिर बुझाए रखे चिराग़ हमने जला कर हवा पे छोड़ दिया, उस से बात भी करते तो किस तरह करते ये मसला था अना का, अना पे छोड़ दिया, इसी लिए तो वो कहते है बे वफ़ा हमको कि हम ने सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया..!! - [उसको जाते हुए देखा था पुकारा था कहाँ](https://hindigazals.com/usko-jaate-hue-dekha-tha/): उसको जाते हुए देखा था पुकारा था कहाँ रोकते किस तरह वो शख़्स हमारा था कहाँ, थी कहाँ रब्त में उस के भी कमी कोई मगर मैं उसे प्यारा था पर जान से प्यारा था कहाँ, बेसबब ही नहीं मुरझाए थे जज़्बों के गुलाब तू ने छू कर ग़म ए हस्ती को निखारा था कहाँ, बीच मझंदार में थे इस लिए हम पार लगे डूबने के लिए कोई भी किनारा था कहाँ, आख़िर ए शब मेरी पलकों पे सितारे थे कई लेकिन आने का तेरे कोई इशारा था कहाँ, ये तमन्ना थी कि हम उस पे लुटा दें हस्ती ऐ ज़िया उस को मगर इतना गवारा था कहाँ..!! - [जब भी तुझ को याद किया...](https://hindigazals.com/jab-bhi-tujh-ko-yaad-kiya/): जब भी तुझ को याद किया ख़ुद को ही नाशाद किया, दिल की बस्ती उजड़ी तो दर्द से उसे आबाद किया, अदावत मैं हम नाक़ाम रहे मुहब्बत ने हमें बर्बाद किया, ख़ुद ही अपना चैन लुटा कर मैंने तक़दीर से फ़रियाद किया, डोर साँसों की ज़ंजीर थी एक हिचकी ने हमें आज़ाद किया, वो रूठ के ख़ुद ही लौट आया जब सितम नया कोई इज़ाद किया, इश्क़ ओ अक्ल दोनों में नवाब मैंने क़ायम एक अल्हाद किया..!! - [दर्द अब वो नहीं रहें जो ऐ दिल ए नादां पहले था](https://hindigazals.com/dard-ab-wo-nahi-rahe-jo/): दर्द अब वो नहीं रहें जो ऐ दिल ए नादां पहले था खुले सर पर मेरे भी कभी कोई सायेबान पहले था, तुम्हारे गुमशुदा जो ख़्वाब है मैं सब ढूँढ लाऊँगा मगर क्या इनआम वही है, जो ऐलान पहले था ? - [देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी](https://hindigazals.com/dekhoge-hamen-roz-magar/): देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी एक शहर में रह कर भी मुलाक़ात न होगी, कहना है जो कह डालो अभी वक़्त है बाक़ी कल हम तो होंगें मगर सूरत ए हालात न होगी, जो पूछना है तुमको अभी पूछ लो वरना कल शहर में फिर रस्म ए सवालात न होगी, दिन इतने होंगें तवील हिज्र के लोगो तड़पोगे सर ए शाम मगर रात न होगी, ये सोच के भी दिल तड़प उठता है बिछड़ेंगे इस तरह कि कभी मुलाक़ात न होगी..!! - [इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में](https://hindigazals.com/ishq-maine-likh-daala/): इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में और तेरा दिल लिखा शहरियत के ख़ाने में, मुझको तजरबों ने ही बाप बन के पाला है सोचता हूँ क्या लिखूँ वलदियत के ख़ाने में, मेरा साथ देती है मेरे साथ रहती है मैंने लिखा तन्हाई ज़ौजिय्यत के ख़ाने में, दोस्तों से जा कर जब मशवरा किया तो फिर मैंने कुछ नहीं लिखा हैसियत के ख़ाने में, इम्तिहाँ मोहब्बत का पास कर लिया मैंने अब यही मैं लिखूँगा अहलियत के ख़ाने में, जब से आप मेरे हैं फ़ख़्र से मैं लिखता हूँ नाम आप का अपनी मिलकियत के ख़ाने में..!! - [नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी](https://hindigazals.com/nadee-me-bahte-the-neelam/): नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी तुम्हारे वायदे की रंगत जो आसमानी थी, वफ़ा को दे गई धोखा क़तार कसमों की नई थी डार मगर कुंज तो पुरानी थी, वहां तो आज भी खिलते है धड़कनों के महाज़ जहाँ निगाह ने पहली शिकस्त मानी थी, सरों पे तेरी मुहब्बत का सायेबां भी न था जब आफ़ताब ए क़यामत ने धूप तानी थी, बदन मिलाप को बेताब और रूहों पर न मिलने वाले सितारों की हुक्मरानी थी, मैं वो दीया भी हवाओं के नज़दीक कर बैठा जो मेरे पास तेरी आख़िरी निशानी थी, तमाम वुसअ'तें गहराइयों में डूब गई समन्दरों पे किनारों की मेहरबानी थी..!! - [माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है](https://hindigazals.com/maana-ki-yahan-apni-shanasaai/): माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है पर तेरे यहाँ रस्म ए पज़ीराई भी कम है, हाँ ताज़ा गुनाहों के लिए दिल भी है बेताब और पिछले गुनाहों की सज़ा पाई भी कम है, कुछ कार ए जहाँ जाँ को ज़ियादा भी लगे हैं कुछ अब के बरस याद तेरी आई भी कम है, कुछ ग़म भी मयस्सर हमें अब के हैं ज़ियादा कुछ ये कि मसीहा की मसीहाई भी कम है, कुछ ज़ुल्म ओ सितम सहने की आदत भी है हमको कुछ ये है कि दरबार में सुनवाई भी कम है..!! - [राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर](https://hindigazals.com/rahat-e-vasl-bina-hizr-ki/): राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर ज़िंदगी कैसे बसर होगी मोहब्बत के बग़ैर, अब के ये सोच के बीमार पड़े हैं कि हमें ठीक होना ही नहीं तेरी अयादत के बग़ैर, इश्क़ के मारों को आदाब कहाँ आते हैं तेरे कूचे में चले आए इजाज़त के बग़ैर, हम से पूछो तो कि हम कैसे हैं ऐ हमवतनो अपने यारों के बिना अपनी मोहब्बत के बग़ैर, मुल्क तो मुल्क घरों पर भी है क़ब्ज़ा उसका अब तो घर भी नहीं चलते हैं सियासत के बग़ैर, अक्स किस का ये उतर आया है आईने में कौन ये देख रहा है मुझे हैरत के बग़ैर, हासिल ए इश्क़ अगर कुछ है तो वहशत है ज़िया और इंसान मुकम्मल नहीं वहशत के बग़ैर..!! - [कोई ज़ब्त दे न जलाल दे...](https://hindigazals.com/koi-zabt-de-na-jalal-de/): कोई ज़ब्त दे न जलाल दे मुझे सिर्फ़ इतना कमाल दे, मुझे अपनी राह पे डाल दे कि ज़माना मेरी मिसाल दे, तेरी रहमतों का नज़ूल हो मुझे मेहनतों के सिला मिले, माल ओ ज़र की हवस न हो मुझे तू बस रिज्क ए हलाल दे, मेरे ज़हन में तेरी फ़िक्र हो मेरी हर साँस में तेरा ज़िक्र हो, तेरा खौफ़ ही मेरी निज़ात हो बाक़ी खौफ़ दिल से निकाल दे, तेरी बारगाह में ऐ मेरे ख़ुदा मेरी रोज़ ओ शब है यही दुआ, तू रहीम है तू करीम है मुझे हर मुश्किलों से निकाल दे..!! - [मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता...](https://hindigazals.com/main-khyal-hoon-kisi-aur-ka/): मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर ए आईना मेरा अक्स है पस ए आईना कोई और है, मैं किसी के दस्त ए तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़ ए दुआ में हूँ मैं नसीब हूँ किसी और का मुझे माँगता कोई और है, अजब ऐतिबार ओ बे ऐतिबारी के दरमियान है ज़िंदगी मैं क़रीब हूँ किसी और के मुझे जानता कोई और है, मेरी रौशनी तेरे ख़द्द ओ ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है, तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं तेरी दास्ताँ कोई और थी मेरा वाक़िआ कोई और है, वही मुंसिफ़ों की रिवायतें वही फ़ैसलों की इबारतें मेरा जुर्म तो कोई और था पर मेरी सज़ा कोई और है, कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं देखना उन्हें ग़ौर से जिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोई और है, जो मेरी रियाज़त ए नीमशब को सलीम सुब्ह न मिल सकी तो फिर इस के मअ'नी तो ये हुए कि यहाँ ख़ुदा कोई और है..!! - [हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे](https://hindigazals.com/har-ek-baat-na-kyun/): हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे कि हमको दस्त ए ज़माना से ज़ख़्मकारी लगे, उदासियाँ हों मुसलसल तो दिल नहीं रोता कभी कभी हो तो ये कैफ़ियत भी प्यारी लगे, बज़ाहिर एक ही शब है फ़िराक़ ए यार मगर कोई गुज़ारने बैठे तो उम्र सारी लगे, इलाज इस दिल ए दर्द आश्ना का क्या कीजे कि तीर बन के जिसे हर्फ़ ए ग़मगुसारी लगे, हमारे पास भी बैठो बस इतना चाहते हैं हमारे साथ तबीअत अगर तुम्हारी लगे, फ़राज़ तेरे जुनूँ का ख़याल है वर्ना ये क्या ज़रूर वो सूरत सभी को प्यारी लगे..!! - [ज़िन्दा है जब तक मुझे बस गुनगुनाने है](https://hindigazals.com/zinda-hai-jab-tak/): ज़िन्दा है जब तक मुझे बस गुनगुनाने है क्यूँकि गीत तेरे नाम के बड़े ही सुहाने है, है सज़्दा, कभी रुकूअ, तो क़याम कभी ये सब तो बस तुमसे मिलने के बहाने है, कुछ लोग है कि पहचान से भी है आरी एक आप है कि हाल ए दिल भी जाने है, मुझको इन बादलों की चाल ये बताती है तूने इन्हें आज खाकशारों पे बरसाने है, हम तो समझ बैठे थे दुनिया को सब कुछ बाद इसके आने अभी और भी ज़माने है, दौर ए ऐतबार ओ बे ऐतबारी के दरमियाँ हम तो बस तुझे ही अपना सबकुछ माने है, एक नशा तेरे जाम का ही खींचता है मुझे वरना तो इस शहर में और भी मैख़ाने है, तेरे ही जाम की तलब हर तिश्ना लब को फिर क्यूँ बना रखे यहाँ और भी पैमाने हैं ? - [हमने उसकी आँखे पढ़ ली...](https://hindigazals.com/hamne-uski-aankhe-padh/): हमने उसकी आँखे पढ़ ली छुपा कोई चेहरा है शायद ! वो हर बात पे हँस देती है ज़ख्म बहुत गहरा है शायद ! - [कितना बुलंद मर्तबा पाया हुसैन ने](https://hindigazals.com/kitna-buland-martba-paya/): कितना बुलंद मर्तबा पाया हुसैन ने राह ए ख़ुदा में घर को लुटाया हुसैन ने, कैसे बयाँ हो हज़रत ए शब्बीर का मुक़ाम बे हद बुलंद मर्तबा पाया हुसैन ने, छोड़ी न वक़्त ए नज़अ भी शब्बीर ने नमाज़ सज़दे में रख के सर को कटाया हुसैन ने, जारी थी लब ए हुसैन पे तिलावत क़ुरआन की कलाम ए ख़ुदा इस हाल में सुनाया हुसैन ने, आल ए नबी की शान ए तिलावत तो देखिये नेज़े की नोक पे क़ुरआन सुनाया हुसैन ने, करबल की खाक़ पे निसार जाऊँ मैं बार बार खून ए रसूल इसको पिलाया हुसैन ने, चेहरे का देख के सुकून होता है ये गुमाँ नाना का वायदा ख़ूब निभाया हुसैन ने..!! - [हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे](https://hindigazals.com/ham-taraste-hi-taraste-hi/): हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे वो फ़लाने से फ़लाने से फ़लाने से मिले, ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता क्या मिले आप जो लोगो के मिलाने से मिले, माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज हम को दुनियाँ में ये दो वक़्त सुहाने से मिले, कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए हम हसीनों से इसी हिले ओ बहाने से मिले, एक नया ज़ख्म मिला एक नई उम्र मिली जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले, एक हम ही नहीं फिरते है लिए क़िस्सा ए गम उनके ख़ामोश लबों पर भी फ़साने से मिले, कैसे माने कि उन्हें भूल गया है तू ऐ कैफ़ उनके ख़त आज हमें तेरे सिरहाने से मिले..!! - [ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है](https://hindigazals.com/ye-muhabbaton-ke-qisse/): ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है बेवफ़ा ही इसमें अक्सर अज़ीज़ होते है, चाहों में कोई और, बाँहों में कोई और ऐसे आशिक़ ओ माशूक़ बदनसीब होते है, कर तो लेते है तस्लीम ख़ुदा इश्क़ में लोग दरअसल दुश्मन ए जाँ वही रकीब होते है, चंद दिनों तक रहते है ये खुशियों के साये बाद ताउम्र गम आशिको के क़रीब होते है, कोशिशे लाख करो रोकने की अश्को को पर यादो के लम्हे अश्को के मुज़ीब होते है, मुफलिसों से कौन करता है सच्ची दोस्ती जितनी पास हो दौलत उतने हबीब होते है, न पैदा होते है और ना कहीं बनाए जाते है ज़ख्म दिल पर खा कर लोग अदीब होते है..!! - [आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो](https://hindigazals.com/aadam-ki-jaat-ho-kar/): आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो क्यूँ मज़लूम ओ गरीब को बेवजह सता रहे हो ? - [दूर कर देगा कभी साथ नहीं होने देगा](https://hindigazals.com/door-kar-dega-kabhi-saath/): दूर कर देगा कभी साथ नहीं होने देगा ये वक़्त बेदर्द मुलाक़ात नहीं होने देगा, गम की वो आँख में सौगात लिए फिरता है दर्द की कोई भी बरसात नहीं होने देगा, उसने सीखा है कोई कता क़लामी का हुनर इस लिए ढंग से कभी बात नहीं होने देगा, तूने सौंपी है जिसे एक अँधेरी नगरी वो तेरे दिन को कभी रात नहीं होने देगा, तुमको मालूम है फ़ितरत है मगर ख़ुश गोई अपने लहजे को कभी धात नहीं होने देगा, हमने सोचा था कि आसान रहेगी मंज़िल पर हरीफ़ ऐसा है बदज़ात नहीं होने देगा, दिल अज़ीब चीज है ये ख़ुद तो रहे शिकवा कुनाँ मैं करूँ तुम से शिकायत नहीं होने देगा, साँप की तरह मेरा भाग बदलता है खाल तेरे हाथों में मगर मेरा हाथ नहीं होने देगा, जिसकी बेटी की कभी लूट गई हो हसरत ख़ाली लुटे कोई बारात नहीं होने देगा..!! - [इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है](https://hindigazals.com/insani-soch-ka-mausam/): इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है फ़ितूरी दिमाग बेकाम भी चलता रहता है, ज़रा सी ओट ही बचाती है उसको बुझने से हवा के दरमियाँ भी दीया जलता रहता है, चल पड़े वही पहुँचते है अपनी मंज़िल तक सफ़र को टालते रहने से टलता रहता है, आलम ए ज़म्हुरियत में अब सोचना है शेरो को दहाड़ने से भी जंगल दहलता रहता है..!! - [आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है](https://hindigazals.com/aarzi-taaqte-tumhari-hai/): आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है अपने अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, तेरी रज़ा की खातिर गुलामी का बोझ न ढोयेंगे क्यों कि आबरू से मरने का फ़ैसला हमारा है, ज़िन्दगी भर तो कोई भी जंग लड़ नहीं सकता एक दिन तुम भी टूट जाओगे तजरुबा हमारा है, अपनी बेतरतीब रहनुमाई पर गुरुर मत करना क्यों कि तुम से बहुत आगे नक्श ए पा हमारा है, गैरत ए जिहाद अपनी ज़ख्म खा कर ही जागेगी बेशक पहला वार तुम कर लो दूसरा हमारा है..!! - [उम्र तमाम गुज़र जाती है आशियाँ बनाने में](https://hindigazals.com/umr-tamam-guzar-jati-hai/): उम्र तमाम गुज़र जाती है आशियाँ बनाने में ज़ालिम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में, और जाम टूटेंगे इस शराब ख़ाने में मौसमों के आने में मौसमों के जाने में, हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में, फ़ाख़्ता की मजबूरी ये भी कह नहीं सकती कौन साँप रखता है उसके आशियाने में, दूसरी कोई लड़की ज़िंदगी में आएगी कितनी देर लगती है उसको भूल जाने में..!! - [मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे](https://hindigazals.com/main-sun-raha-hoon-jo/): मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे हँसी तो अपनी ख़ामोशी पे आ रही है मुझे, मेरे वजूद की मिट्टी में ज़र नहीं कोई ये एक चराग की लौ जगमगा रही है मुझे, ये कैसे ख़्वाब की ख्वाहिश में घर से निकला हूँ कि दिन में चलते हुए नींद आ रही है मुझे, कोई सहारा मुझे कब संभाल सकता है मेरी ज़मीन अगर डगमगा रही है मुझे, मैं इस जहान में खुश हूँ मगर कोई आवाज़ नए जहान की जानिब बुला रही है मुझे..!! - [कैसी महफ़िल है ज़ालिम तेरे शहर में...](https://hindigazals.com/kaisi-mahfil-hai-zalim/): कैसी महफ़िल है ज़ालिम तेरे शहर में यहाँ हर कोई ही डूबा हुआ है ज़हर में, एक बच्ची तलक तो यहाँ महफूज़ नहीं इन वहशी और उन दरिंदो के क़हर में, खेल तो बस चलता सियासत का यहाँ डूबते है सिर्फ़ हम ही यहाँ हर लहर में, ज़िस्म क्या हर एक रूह तक में ज़ख्म है जिधर देखो भेड़िये ही भेड़िये है हर नज़र में, उस पर सियासी चाल की अपनी ग़ज़ल हर एक सुनाता है शफ़क़ अपनी ही बहर में..!! - [चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है...](https://hindigazals.com/chehre-ki-hasi-bhi-dikhwat/): चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है असल ज़िन्दगी भी बनावट सी हो रही है, अनबन बढ़ती जा रही है रिश्तो में भी अब अपनों से भी बग़ावत सी हो रही है, पहले ऐसा था नहीं जैसा हूँ मैं आज कल मेरी कहानी कोई कहावत सी हो रही है, दूरियाँ बढ़ती ही जा रही है मंज़िल से मेरी चलते चलते भी थकावट सी हो रही है, शब्द कम पड़ रहे है मेरी बातों में भी ख़ामोशी की जैसे मिलावट सी हो रही है, और मशवरे की भी आदत न रही लोगो में अब गुज़ारिश भी शिकायत सी हो रही है..!! - [सच ये है कि बेकार का ही हमें गम...](https://hindigazals.com/sach-ye-hai-ki-bekar-ka/): सच ये है कि बेकार का ही हमें गम होता है जैसा हम चाहे दुनियाँ में वो बहुत कम होता, ढलता हुआ सूरज, फैला जंगल रास्ता गुम हमारे दिल से पूछो कैसा आलम होता है, गैरो को कहाँ फ़ुर्सत किसी को दुःख दे सबब तो हर बार ही कोई हमदम होता है, ज़ख्म देने वाले दस्त हमने देखे है आँखों से हाँ ज़माने वालो से सुना है मरहम होता है..!! - [अमूमन मेरी हसरत को चाहत का...](https://hindigazals.com/amuman-meri-hasrat-ko/): अमूमन मेरी हसरत को चाहत का नाम दे गये लोग जीश्त को इन्तेहा ए आशिकी का पैग़ाम दे गये लोग, क्या खूब चली थी वो दौर ए दीदार ओ इश्क की मगर रिश्तों के शक्ल में जिम्मेदारियां तमाम दे गये लोग, जुबान से तो यूँ कभी कोई झूठा वादा न किया मगर - बस एक को ख़ास बनाने में मुझे बदनाम दे गये लोग, अब जो खलाओं पे चलने की आदत न रही मुझको नासूर ए ज़ख्म मेरे तलवों को सर ए आम दे गये लोग, वो सुबह मेरी होती थी हर रोज़ गुलफ़ामों के भीड़ में तन्हाई के इस महफ़िल में ये क्या शाम दे गये लोग..!! - [ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे](https://hindigazals.com/khwabo-ko-mere-pyar-ki/): ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे दिल को मेरे इश्क़ की ज़ागीर बख्श दे, कब से ज़ेर ए खिज़ा है ये मेरी ज़िन्दगी अब मौसम ए बहार को तौक़ीर बक्श दे, फ़ैली हुई है आँख में जो शाम ए ज़िन्दगी उस दास्ताँ ए इश्क़ को तनवीर बख्श दे, मैं थक गया हूँ इश्क़ में आँखों से बोलते अब तो लबो को प्यार की तहरीर बख्श दे, बारिश की बूँद बूँद से लिपटी है उसकी याद यादों के गुलिस्ताँ की तस्वीर बख्श दे, भटका सके न कोई भी मंज़िल से ऐ ख़ुदा मेरे गुमाँ को नवाब की तक़दीर बख्श दे..!! - [उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से...](https://hindigazals.com/uljhe-kaanto-se-ki-khele/): उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से पहले फ़िक्र ये है कि सबा आए किधर से पहले, जाम ओ पैमाना ओ साक़ी का गुमाँ था लेकिन दीदा ए तर ही था याँ दीदा ए तर से पहले, अब्र ए नैसाँ की न बरकत है न फ़ैज़ान ए बहार क़तरे गुम हो गए ता'मीर ए गुहर से पहले, जम गया दिल में लहू सूख गए आँखों में अश्क थम गया दर्द ए जिगर रंग ए सहर से पहले, क़ाफ़िले आए तो थे नारों के परचम ले कर सर निगूँ हो गई हर आह असर से पहले, ख़ून ए सर बह गया मौत आ गई दीवानों को बारिश ए संग से तूफ़ान ए शरर से पहले, सुर्ख़ी ए ख़ून ए तमन्ना की महक आती है दिल कोई टूटा है शायद गुल ए तर से पहले, मक़तल ए शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले..!! - [वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है](https://hindigazals.com/wahi-husn-e-yaar-me-hai/): वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है वो जो कैफ़ियत नशे की मय ए ख़ुशगवार में है, ये चमन की आरज़ू है कोई लूट ले चमन को ये तमाम रंग ओ निकहत तेरे इख़्तियार में है, तेरे हाथ की बुलंदी में फ़रोग़ ए कहकशाँ है ये हुजूम ए माह ओ अंजुम तेरे इंतिज़ार में है, बस उसी को तोड़ना है ये जुनून ए नफ़अ ख़ोरी यही एक सर्द ख़ंजर दिल ए रोज़गार में है, अभी ज़िंदगी हसीं है अभी ज़िक्र ए मौत कैसा अभी फूल खिल रहे हैं अभी तो कनार में है, अभी मयकदा जवाँ है अभी मौज में है साक़ी अभी जाम रक़्स में है अभी मय बहार में है, यही मेरा शेर ओ नग़्मा यही मेरी फिक्र ओ हिकमत जो सुरूर ओ दर्द मंदी दिल ए बेक़रार में है..!! - [वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर...](https://hindigazals.com/wahi-hai-wahshat-wahi-hai/): वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब ? इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है इंसाँ इंसाँ बनेगा कब ? - [वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे...](https://hindigazals.com/wahi-dard-hai-wahi-bebasi/): वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे शहर में बे गमो की भीड़ में आदमी तेरे गाँव में मेरे शहर में, यहाँ हर क़दम पे सवाल है वहां हर क़दम पे मलाल है बड़ी उलझनों में है ज़िन्दगी तेरे गाँव में मेरे शहर में, किसे दोस्त अपना बनाएँ हम किसे हाल ए दिल सुनाएँ हम ? - [ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं...](https://hindigazals.com/khushi-jaante-hai-na-gam/): ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं जो उनकी रज़ा हो वो हम जानते हैं, जो कुछ चार तिनकों को हम जानते हैं वो गुलचीन ओ सय्याद कम जानते हैं, तुम्हारे ही जल्वों की हम रौशनी को तजल्ली ए दैर ओ हरम जानते हैं, मैं क़ातिल न महशर में समझूँ भी तो क्या तुम्हें सब ख़ुदा की क़सम जानते हैं, मेरे ख़ाक ए दिल का पता भी नहीं है वो इतने सितम को भी कम जानते हैं, ख़ुदा को ख़ुदा हम समझते हैं वाइ'ज़ मगर हाँ सनम को सनम जानते हैं, करेंगे न अर्ज़ ए तमन्ना कि हम ख़ुद मोहब्बत का अपनी भरम जानते हैं, वही कुछ समझते हैं असरार ए हस्ती जो हस्ती को अपनी अदम जानते हैं, मता ए दो आलम समझते हैं हम भी मगर चार तिनकों से कम जानते हैं, कहीं राज़ ए उल्फ़त भी होता है ज़ाहिर कहें क्यों जो कुछ तुमको हम जानते हैं, ख़ुदा को वही ख़ूब पहचानते हैं तुम्हें जो ख़ुदा की क़सम जानते हैं, खुली हैं दम ए नज़अ आँखें जो अफ़्क़र अभी तक वो आँखों में दम जानते हैं..!! - [ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए](https://hindigazals.com/ye-marhale-bhi-mohabbat-ke/): ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए बिछड़ गए थे जो हमसे वो ख़्वाब में आए, वो जिसकी राह में हमने बिछाए ग़ुंचा ओ गुल उसी मकान से पत्थर जवाब में आए , न जिसको दस्त ए हिनाई का तेरे लम्स मिले कहाँ से बू ए वफ़ा उस गुलाब में आए, तुम्हारे हुस्न ए नज़र से हैं मोतबर हम भी जो हम किसी निगह ए इंतिख़ाब में आए, अगरचे मिस्ल है आब ए रवाँ के रेग ए सराब कहाँ से शोरिश ए दरिया सराब में आए, तेरे ख़याल का पैकर सजा है सीने में हम इस तरह तेरी चश्म ए ख़ुश आब में आए, हवा के दोश पे उसने लिखा है नाम ए रईस ये सुन के लोग बहुत पेच ओ ताब में आए..!! - [उसे भुला के भी यादों के सिलसिले न गए](https://hindigazals.com/use-bhula-ke-bhi-yaado-ke/): उसे भुला के भी यादों के सिलसिले न गए दिल ए तबाह तेरे उससे राब्ते न गए, किताब ए ज़ीस्त के उनवाँ बदल गए लेकिन निसाब ए जाँ से कभी उस के तज़्किरे न गए, मुझे तो अपनी ही सादा दिली ने लूटा है कि मेरे दिल से मुरव्वत के हौसले न गए, मैं चाँद और सितारों के गीत गाता रहा मेरे ही घर से अँधेरों के क़ाफ़िले न गए, रईस जुरअत ए इज़हार मेरा विर्सा है क़सीदे मुझ से किसी शाह के लिखे न गए..!! - [तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी](https://hindigazals.com/tere-paikar-si-koi/): तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी दिल के बहलाने की ये सूरत निकाली जाएगी, कौन कह सकता था ये क़ौस ए क़ुज़ह को देख कर एक ही आँचल में ये रंगत समा ली जाएगी, काग़ज़ी फूलों से जब मानूस होंगी तितलियाँ आशिक़ी की रस्म दुनिया से उठा ली जाएगी, आइने में बाल पड़ जाए तो जा सकता नहीं रेत की दीवार तो फिर से बना ली जाएगी, हम जो कार ए आज़री में बेहुनर ठहरे तो क्या उनकी सूरत शेर के क़ालिब में ढाली जाएगी, ख़ुद परस्ती के नशे में जिनको है ज़ोम ए जमाल आइना देखें तो उनकी ख़ुश ख़याली जाएगी, इश्क़ की फ़ितरत में है परवान ही चढ़ना रईस हुस्न वो दौलत नहीं जो फिर कमा ली जाएगी..!! - [ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर](https://hindigazals.com/gam-ke-har-ek-rang-se/): ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर गया वो मेरा मोहसिन मुझे पत्थर से हीरा कर गया, घूरता था मैं ख़ला में तो सजी थीं महफ़िलें मेरा आँखों का झपकना मुझको तन्हा कर गया, हर तरफ़ उड़ने लगा तारीक सायों का ग़ुबार शाम का झोंका चमकता शहर मैला कर गया, चाट ली किरनों ने मेरे जिस्म की सारी मिठास मैं समुंदर था वो सूरज मुझ को सहरा कर गया, एक लम्हे में भरे बाज़ार सोने हो गए एक चेहरा सब पुराने ज़ख़्म ताज़ा कर गया, मैं उसी के राब्ते में जिस तरह मल्बूस था यूँ वो दामन खींच कर मुझ को बरहना कर गया, रात भर हम रौशनी की आस में जागे अदीम और दिन आया तो आँखों में अँधेरा कर गया..!! - [ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया](https://hindigazals.com/gam-hai-wahi-pa-gam/): ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया दरिया ठहर गया है किनारा गुज़र गया, बस ये सफ़र हयात का इतनी सी ज़िंदगी क्यूँ इतनी जल्दी रास्ता सारा गुज़र गया, वो जिस की रौशनी से चमकना था बख़्त को किस आसमान से वो सितारा गुज़र गया, क्या ज़िक्र उस घड़ी का कड़ी थी कि सहल थी जो वक़्त जिस तरह भी गुज़ारा गुज़र गया, तफ़्हीम ए दोस्ती में बड़ी भूल हो गई फिर दूर से ही दोस्त हमारा गुज़र गया, कर के यक़ीन फिर से कि मैं मुश्किलों में हूँ ठहरा नहीं वो शख़्स दोबारा गुज़र गया, एक वक़्त ख़ुशनसीब सा आया तो था अदीम मद्धम सी एक सदा में पुकारा गुज़र गया, मुजरिम हुआ था आँख झपकने का मैं अदीम जो ज़ेहन में बसा था नज़ारा गुज़र गया..!! - [दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए](https://hindigazals.com/dil-ke-bahlane-ka-samaan/): दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए मुझको अब इतना भी आसान न समझा जाए, मैं भी दुनिया की तरह जीने का हक़ माँगती हूँ इसको ग़द्दारी का एलान न समझा जाए, अब तो बेटे भी चले जाते हैं हो कर रुख़्सत सिर्फ़ बेटी को ही मेहमान न समझा जाए, मेरी पहचान को काफ़ी है अगर मेरी शनाख़्त मुझको फिर क्यूँ मेरी पहचान न समझा जाए, मैं ने ये कब कहा रूही कि मेरे जीवन में मेरे साईं को मेरी जान न समझा जाए..!! - [मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था](https://hindigazals.com/main-ek-kaanch-ka-paikar-wo/): मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था सो पाश पाश तो होना मेरा मुक़द्दर था, तमाम रात सहर की दुआएँ माँगी थीं खुली जो आँख तो सूरज हमारे सर पर था, चराग़ ए राह ए मोहब्बत ही बन गए होते तमाम उम्र का जलना अगर मुक़द्दर था, फ़सील ए शहर पे कितने चराग़ थे रौशन सियाह रात का पहरा दिलों के अंदर था, अगरचे ख़ानाबदोशी है ख़ुशबुओं का मिज़ाज मेरा मकान तो कल रात भी मोअत्तर था, समुंदरों के सफ़र में वो प्यास का आलम कि फ़र्श ए आब पे एक कर्बला का मंज़र था, इसी सबब तो बढ़ा एतिबार ए लग़्ज़िश ए पा हमारा जोश ए जुनूँ आगही का रहबर था, जो माहताब हिसार ए शब ए सियाह में है कभी वो रात के सीने पे मिस्ल ए ख़ंजर था, मैं उस ज़मीं के लिए फूल चुन रहा हूँ रईस मेरा नसीब जहाँ बे अमाँ समुंदर था..!! - [ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है](https://hindigazals.com/khud-aagahi-ka-azab-rog/): ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है मुझे कि अपनी ज़ात पे धोका तेरा हुआ है मुझे, पुकारती है हवाओं की नग़्मगी तुझको सुकूत झील का आवाज़ दे रहा है मुझे, अजीब ज़ौक़ ए मोहब्बत अता किया तूने वजूद ए संग भी तहज़ीब ए आईना है मुझे, मैं अपने नाम से ना आश्ना सही लेकिन तुम्हारे नाम से हर शख़्स जानता है मुझे, मैं अपने घर के दिए भी भुलाए बैठा हूँ तेरे ख़याल ने ये हौसला दिया है मुझे, कहाँ ये फ़ुर्सत ए काविश कि तुझको याद करूँ शुऊर ए ज़ात का दरपेश मरहला है मुझे, रईस शेर की दुनिया से क्या ग़रज़ मुझको किसी की याद ने शाइर बना दिया है मुझे..!! - [सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ?](https://hindigazals.com/sabab-e-chashm-e-tar-kaise/): सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ? ज़ख़्म ए दिल ओ जाँ कैसे दिखाऊं तुझे ? तू सोचता है मेरे आँसू है ख़ुशी के आँसू ग़म में रोया हूँ बार बार कैसे समझाऊँ तुझे ? - [दिल किस के तसव्वुर में जाने...](https://hindigazals.com/dil-kis-ke-tasavvur-me/): दिल किस के तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है ये हुस्न ए तलब की बात नहीं होता है मेरी जाँ होता है, हम तेरी सिखाई मंतिक़ से अपने को तो समझा लेते हैं एक ख़ार खटकता रहता है सीने में जो पिन्हाँ होता है, फिर उनकी गली में पहुँचेगा फिर सहव का सज्दा कर लेगा इस दिल पे भरोसा कौन करे हर रोज़ मुसलमाँ होता है, वो दर्द कि उसने छीन लिया वो दर्द कि उसकी बख़्शिश था तन्हाई की रातों में इंशा अब भी मिरा मेहमाँ होता है..!! - [दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब...](https://hindigazals.com/dil-hizr-ke-dard-se-bojhal-hai/): दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँ कर हो, एक भीख के दोनों कासे हैं एक प्यास के दोनो प्यासे हैं हम खेती हैं तुम बादल हो हम नदियाँ हैं तुम सागर हो, ये दिल है कि जलते सीने में एक दर्द का फोड़ा अल्लहड़ सा ना गुप्त रहे ना फूट बहे कोई मरहम हो कोई निश्तर हो, हम साँझ समय की छाया हैं तुम चढ़ती रात के चन्द्रमाँ हम जाते हैं तुम आते हो फिर मेल की सूरत क्यूँ कर हो, अब हुस्न का रुत्बा आली है अब हुस्न से सहरा ख़ाली है चल बस्ती में बंजारा बन चल नगरी में सौदागर हो, जिस चीज़ से तुझको निस्बत है जिस चीज़ की तुझको चाहत है वो सोना है वो हीरा है वो माटी हो या कंकर हो, अब इंशा जी को बुलाना क्या अब प्यार के दीप जलाना क्या जब धूप और छाया एक से हों जब दिन और रात बराबर हो, वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो..!! - [दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो](https://hindigazals.com/dil-ishq-me-be-payaan-sauda/): दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो ऐसा हो, एक ख़ाल ए सुवैदा में पहनाई ए दो आलम फैला हो तो ऐसा हो सिमटा हो तो ऐसा हो, ऐ क़ैस ए जुनूँ पेशा इंशा को कभी देखा वहशी हो तो ऐसा हो रुस्वा हो तो ऐसा हो, दरिया ब हुबाब अंदर तूफ़ाँ ब सहाब अंदर महशर ब हिजाब अंदर होना हो तो ऐसा हो, हमसे नहीं रिश्ता भी हमसे नहीं मिलता भी है पास वो बैठा भी धोखा हो तो ऐसा हो, वो भी रहा बेगाना हम ने भी न पहचाना हाँ ऐ दिल ए दीवाना अपना हो तो ऐसा हो, इस दर्द में क्या क्या है रुस्वाई भी लज़्ज़त भी काँटा हो तो ऐसा हो चुभता हो तो ऐसा हो, हमने यही माँगा था उसने यही बख़्शा है बंदा हो तो ऐसा हो दाता हो तो ऐसा हो..!! - [वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया](https://hindigazals.com/wo-ek-raat-ki-gardish-me/): वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया लिबास पहने रहा और बदन उतार गया, हसब नसब भी किराए पे लोग लाने लगे हमारे हाथ से अब ये भी कारोबार गया, उसे क़रीब से देखा तो कुछ शिफ़ा पाई कई बरस मेरे जिस्म से बुख़ार गया, तुम्हारी जीत का मतलब है जंग फिर होगी हमारे हार का मतलब है इंतिशार गया, तू एक साल में एक साँस भी न जी पाया मैं एक सज्दे में सदियाँ कई गुज़ार गया..!! - [ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है](https://hindigazals.com/khud-ko-itna-jo-hawadar/): ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रखा है, हमने किरदार को कपड़ों की तरह पहना है तुम ने कपड़ों ही को किरदार समझ रखा है, मेरी संजीदा तबीअत पे भी शक है सब को बाज़ लोगों ने तो बीमार समझ रखा है, उसको ख़ुद्दारी का क्या पाठ पढ़ाया जाए भीख को जिसने पुरस्कार समझ रखा है, तू किसी दिन कहीं बे मौत न मारा जाए तू ने यारों को मददगार समझ रखा है..!! - [दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर...](https://hindigazals.com/dard-aasaani-se-kab-pahlu/): दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर निकला आँख का तिनका बहुत आँख मसल कर निकला, तेरे मेहमान के स्वागत का कोई फूल थे हम जो भी निकला हमें पैरों से कुचल कर निकला, शहर की आँखें बदलना तो मेरे बस में न था ये किया मैं ने कि मैं भेस बदल कर निकला, मेरे रस्ते के मसाइल थे नोकिले इतने मेरे दुश्मन भी मेरे पैरों से चल कर निकला, डगमगाने ने दिए पाँव रवादारी ने मैं शराबी था मगर रोज़ सँभल कर निकला..!! - [फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था](https://hindigazals.com/faasle-aise-bhi-honge-ye-kabhi/): फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था, वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था, रात भर पिछली सी आहट कान में आती रही झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था, मैं तेरी सूरत लिए सारे ज़माने में फिरा सारी दुनिया में मगर कोई तेरे जैसा न था, आज मिलने की ख़ुशी में सिर्फ़ मैं जागा नहीं तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया न था, ये सभी वीरानियाँ उस के जुदा होने से थीं आँख धुँदलाई हुई थी शहर धुँदलाया न था, सैंकड़ों तूफ़ान लफ़्ज़ों में दबे थे ज़ेर ए लब एक पत्थर था ख़मोशी का कि जो हटता न था, याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी अदीम भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था, मस्लहत ने अजनबी हमको बनाया था अदीम वर्ना कब एक दूसरे को हम ने पहचाना न था..!! - [जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख...](https://hindigazals.com/jina-mushkil-hai-ki-aasaan/): जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो, फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सर ए मिंबर है किस के है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो, ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम ने क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो, इन चराग़ों के तले ऐसे अँधेरे क्यूँ है तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो, तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो..!! - [गर मयकश हूँ तो जाम का मै तलबगार हूँ](https://hindigazals.com/gar-maykash-hoon-to/): गर मयकश हूँ तो जाम का मै तलबगार हूँ शिकस्तादिल हूँ मगर गम का खरीदार हूँ, काफिलों की बेरूखी से डर क्यूँ लगे मुझे ? - [ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया](https://hindigazals.com/zabt-e-gam-par-jawal-kyo/): ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया शिद्दतों में उबाल क्यों आया ? गुल से खिलवाड़ कर रही थी हवा दिल को तेरा ख़याल क्यों आया ? - [मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है](https://hindigazals.com/mugaalta-hai-uroozo-zawal/): मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है हमारी आँख के शीशे में बाल थोड़ी है, हमारे दिल में कबूतर नमाज़ पढ़ते हैं हमारे दिल में तअस्सुब का जाल थोड़ी है, लबादा बर्फ़ का ओढ़े हुए है ज्वालामुखी ज़मीं के लावे में अब के उबाल थोड़ी है, हैं हम हुसैनी हमें सर कटाना आता है हमारे पास यज़ीदाना चाल थोड़ी है, मेरे हबीब की तमसील ढूँढने वालो वो बेमिसाल है उसकी मिसाल थोड़ी है, हर एक शाख़ से जाड़े की बर्फ़ लिपटी है अभी दरख़्त पे पत्तों की शाल थोड़ी है, ब रोज़ ए ईद भी रोज़े के जैसी हालत है अमीर ए शहर से लेकिन सवाल थोड़ी है, कमाल जितना भी है आग के बदन में है धुआँ धुआँ है धुएँ में कमाल थोड़ी है, अज़ल से चाँद में चर्ख़ा चला रही है मगर नवाज़ अब भी वो बुढ़िया निढाल थोड़ी है..!! - [दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं](https://hindigazals.com/dil-e-naadaan-ki/): दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं मुहब्बत स्याह रात थी और कुछ भी नहीं, आसानियों की आस में तल्खियों के बीच गुज़री तमाम हयात थी और कुछ नहीं, एक मोड़ पे मिले थे आँखों ही आँखों में बस नज़रों की मुलाक़ात थी और कुछ नहीं, वो छोड़ के जहाँ भी गया है बस ख़ुश रहे यही रब से मुनाजात थी और कुछ नहीं..!! - [वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद](https://hindigazals.com/wo-dard-wo-wafa/): वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद लिए दिल में तेरे क़ुर्ब की हसरत तमाम शुद, ये बाद में खुलेगा कि किस किस का खून हुआ हर एक बयान खत्म अदालत तमाम शुद, तू अब तो दुश्मनी के भी क़ाबिल नहीं रहा उठती थी जो कभी वो अदावत तमाम शुद, अब रब्त एक नया मुझे आवारगी से है पाबन्दी ख्याल की आदत तमाम शुद, जायज़ थी या नहीं तेरे हक़ में थी मगर करता था जो कभी वो वक़ालत तमाम शुद, वो रोज़ रोज़ मरने का क़िस्सा हुआ तमाम वो रोज़ दिल को चीरती वहशत तमाम शुद..!! - [रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल](https://hindigazals.com/riha-kar-mujhe-yaa/): रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल कोई तो फ़ैसला तू सुना दे ऐ आदिल, यूँ असीरी में जीना तो है तौहीन मेरी चाहे मुझे दार पर चढ़ा दे ऐ आदिल, कहाँ अदल मुझको ज़मीन पर मिलेगा कोई रास्ता ही तू दिखा दे ऐ आदिल, मुझे अगली तारीख में अब या ख़ुदारा क़यामत का दिन ही बता दे ऐ आदिल, वो मुज़रिम है उसकी जगह है जेल अब तो उसे तख़्त से हटा दे ऐ आदिल, रियाया पे जो क़वानीन चल रहे हैं यहाँ वही इन हाकिमों पे चला दे ऐ आदिल, फक़त जो क़िताबों में दम ले रहे हैं ऐसे क़वानीन कुल जला दे ऐ आदिल, कहीं अब मैं न अपनी अदालत लगा लूँ मेरे मुज़रिमों को तू सज़ा दे ऐ आदिल, इन वकीलों का बकना बहुत हो चुका है अब अपनी हक़ीक़त दिखा दे ऐ आदिल, कभी भाग पायें न जिस से दौर ए ग़ासिब अब कोई जेल ऐसी तू बना दे ऐ आदिल..!! - [जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो](https://hindigazals.com/jab-bhi-tum-chaho/): जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो, ठीक से सोच समझ कर मुझे रुख्सत करना ये न हो बाद में रो रो कर सदा देते रहो, ठीक है मान लिया है कि खता थी मेरी जैसे तुम चाहो मैं हाज़िर हूँ सज़ा देते रहो, छोड़ जाओगे तो रो धो के संभल जाऊँगा पास रह के मुझे गम हद से सिवा देते रहो, रूठ कर वो जो तुम्हें ख़ुद ही मना लेता है तुम उसको दुआ सब से जुदा देते रहो..!! - [सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई](https://hindigazals.com/sau-baar-chaman-mahka/): सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई, एक लहज़ा बहे आँसू एक लहज़ा हँसी आई सीखे हैं नए दिल ने अंदाज़ ए शकेबाई, इस मौसम ए गुल ही से बहके नहीं दीवाने साथ अब्र ए बहाराँ के वो ज़ुल्फ़ भी लहराई, हर दर्द ए मोहब्बत से उलझा है ग़म ए हस्ती क्या क्या हमें याद आया जब याद तेरी आई, चरके वो दिए दिल को महरूमी ए क़िस्मत ने अब हिज्र भी तन्हाई और वस्ल भी तन्हाई, देखे हैं बहुत हम ने हंगामे मोहब्बत के आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई, ये बज़्म ए मोहब्बत है इस बज़्म ए मोहब्बत में दीवाने भी शैदाई फ़रज़ाने भी शैदाई..!! - [हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया](https://hindigazals.com/haq-mehar-kitna-hoga/): हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया शहज़ादियों को बाम पे लाया नहीं गया, कमज़ोर सी हदीस सुना दी गई कोई इंसाफ़ का तराज़ू उठाया नहीं गया, मैं अपने साथ साथ हूँ वो अपने साथ साथ हमज़ाद आप हम को बनाया नहीं गया, प्याले में प्यास और दरीचे में चाँद था वो सो रहा था मुझ से जगाया नहीं गया, एक ख़्वाब देखने में ही हम सर्फ़ हो गए अंगार ज़िंदगी का जलाया नहीं गया, हर बार छोड़ आती हूँ दरिया में लहर को चुल्लू में भर के मुझ से उठाया नहीं गया..!! - [मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो](https://hindigazals.com/muskura-kar-chalo-khilkhila/): मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो दिल किसी का मगर ना दुखा कर चलो, जिसकी ख़ुशबू जहाँ में हमेशा रहे फूल ऐसा चमन में खिला कर चलो, जिस से सारे जहाँ में उजाला रहे दीप ऐसा कोई एक जला कर चलो, क़ामयाबी फक़त रब के हाथों में है तुम वसीलों बस आज़मा कर चलो, बंद आँखों से तुम पर करें सब यक़ीं अपना ऐसा भरोसा बना कर चलो, ज़िन्दगी ख़ूबसूरत लगेगी तुम्हें रंजिशें अपने दिल से भूला कर चलो, सरहदें नफ़रतों की मिटा कर सभी रास्ते पुर अमन के बना कर चलो, हो गए है मुक़ल्लिद जो शैतान के उन से राहें तुम अपनी जुदा कर चलो, जिसने हर शय से है तुमको नवाज़ा यहाँ राह में सब उसी की लुटा कर चलो..!! - [उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है](https://hindigazals.com/uski-khaatir-rona-hasna/): उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है जैसे धूप में बारिश होना अच्छा लगता है, ख़्वाब की कच्ची मलमल में जब आँखें लिपटी हों यादें ओढ़ के सोते रहना अच्छा लगता है, साँझ सवेरे खुलते हैं जब तीतरियों के पर उस मंज़र में मंज़र होना अच्छा लगता है, बारिश आ कर बरस रहेगी मौसम आने पर फिर भी अपना दर्द छुपाना अच्छा लगता है, बादल ख़ुश्बू और जोगी से आख़िर कौन कहे मुझे तुम्हारा आना जाना अच्छा लगता है..!! - [दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं](https://hindigazals.com/daman-e-sad-chaak/): दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं तुम अगर कहते हो तो कुछ रोज़ जी लेता हूँ मैं, बेसबब पीना मेरी आदात में शामिल नहीं मस्त आँखों का इशारा हो तो पी लेता हूँ मैं, गेसुओं का हो घना साया कि शिद्दत धूप की वो मुझे जिस रंग में रखता है जी लेता हूँ मैं, आते आते आ गए अंदाज़ जीने के मुझे अब तो ख़ून के आँसू भी पी लेता हूँ मैं..!! - [फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं](https://hindigazals.com/fana-ke-teer-hawa/): फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं कि हम घरों की जगह मक़बरों में रखे है, पाँव से लिपटा है ख्वाहिशों का सफ़र हमारे सर हैं कि बस खंजरों में रखे हैं, हमारे अहद का अंजाम देखे क्या हो हम आईने हैं अगर पत्थरों में रखे है, बुझा गया है कोई यूँ चिराग़ आँखों के खिज़ां के फूल ही अब मंजरों में रखे हैं, ऐ ज़िन्दगी न गुजरना हमारी गलियों से अभी हमारे जनाज़े घरों में रखे हैं, जवाज़ क्या दे अदालत को बे गुनाही का हमारे फ़ैसले दानिश्वरों में रखे हैं, हमारें सर पे हकायेक़ की धूप है नसरीन हसीन ख़्वाब तो बस चादरों में रखे हैं..!! - [आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं](https://hindigazals.com/aansoo-bhi-jo-mil/): आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं बेटियाँ तो बड़ी मासूम हैं जज़्बाती हैं, ख़िदमत से उतर जाती हैं दिल में सब के हर नई नस्ल को तहज़ीब सीखलाती हैं, इनसे क़ायम है तक़द्दुस हमारे घर का सुबह को अपनी नमाज़ों से ये महकाती है, लोग बेटों से ही रखते है तवक्को लेकिन बेटियाँ अपनी बुरे वक़्त में काम आती हैं, बेटियाँ होती हैं पुरनूर चिरागों की तरह रौशनी करती हैं जिस घर में चली जाती हैं, अपनी ससुराल का हर ज़ख्म छुपा लेती हैं सामने माँ के जब आती हैं तो मुस्काती हैं..!! - [उसने कहा कि मुझसे तुम्हें कितना प्यार है ?](https://hindigazals.com/usne-kaha-ki-mujhse/): उसने कहा कि मुझसे तुम्हें कितना प्यार है ? मैंने कहा सितारों का भी कोई शुमार है, उसने कहा कि कौन तुम्हें है बहुत अज़ीज़ ? - [मुझे यकीं है अब हमारा जहान बदलेगा](https://hindigazals.com/mujhe-yaqin-hai-ab/): मुझे यकीं है अब हमारा जहान बदलेगा ज़मीन बदलेगी और आसमान बदलेगा, ये खार बदलेंगे और खारज़ाद बदलेगा सियासतों का भी ये कारोबार बदलेगा, ख़बासतों का ये सारा ज़माना बदलेगा फ़रेब ओ मकर का कारखाना बदलेगा, खबीस लोगो का तर्ज़ ए कलाम तो देखो जलील लोगो का तर्ज़ ए खुराम तो देखो, गुरुर ओ कुब्र का सारा खुमार उतरेगा मुनाफिकत का ये सारा गुबार उतरेगा, सुराही बदलेगी मीना ओ जाम बदलेगा नज़र ये आता है सारा निज़ाम बदलेगा..!! - [तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों](https://hindigazals.com/tum-soz-e-tamanna/): तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों तुम दर्द ए मुहब्बत क्या समझों ? तुम दिल का तड़पना क्या जानों ? - [वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता](https://hindigazals.com/wo-mere-ghar-nahi/): वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से ताअल्लुक़ मर नहीं जाता, बुरे अच्छे हो जैसे भी हों सब रिश्ते यहीं के हैं किसी को साथ दुनियाँ से कोई ले कर नहीं जाता, घरों की तरबीयत क्या आ गई टीवी के हाथों में कोई बच्चा अब अपने बाप के ऊपर नहीं जाता, खुले थे शहर में सौ दर मगर एक हद के अन्दर ही कहाँ जाता अगर मैं लौट के फिर घर नहीं जाता, मुहब्बत के ये आँसूं है इन्हें आँखों में रहने दो शरीफों के घरों का मसअला बाहर नहीं जाता, वसीम उस से कहो दुनियाँ बहुत महदूद है मेरी किसी दर का जो हो जाए वो फिर दर दर नहीं जाता..!! - [जब लहजे बदल जाएँ तो वज़ाहतें कैसी ?](https://hindigazals.com/jab-lahje-badal-jaayen/): जब लहजे बदल जाएँ तो वज़ाहतें कैसी ? नई मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल में गुज़रे लम्हे हैं अनमोल यादें हिज़्र में सुख, खुशियाँ, राहतें कैसी ? - [सोच के ख़ुद ही बताएं ये बताने वाले](https://hindigazals.com/soch-ke-khud-hi/): सोच के ख़ुद ही बताएं ये बताने वाले तूने सीखे हैं जो अंदाज़ ज़माने वाले, आधे रस्ते से पलटने की अज़ीयत क्या है तूने सोचा ही नहीं हाथ छुड़ाने वाले, तुझ पे उस वक़्त खुलेगा कि अज़ीयत क्या है तुझ से जब रूठ गए तुझको मनाने वाले, तू जो कहता था कि तू वक़्त बदल देगा क्या ले के आ सकता है तू दिन वो सुहाने वाले ? - [दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी](https://hindigazals.com/dil-e-betab-ki/): दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी मुझे आज़ाद रहना हैं मुहब्बत अब नहीं करनी, गिला शिकवा जो करता हूँ तो अपने रूठ जाते हैं मुझे ख़ामोश रहना है, शिकायत अब नहीं करनी, ज़रा सी चोट लगती है ये दिल फिर टूट जाता है शिकस्ता दिल को रहने दो मरम्मत अब नहीं करनी, शराफ़त ओढ़ रखी थी बहुत कुछ सह लिया अब तक बुरे बन जाएँगे हम भी रियायत अब नहीं करनी, नहीं कुछ भी हुआ हासिल लुटा कर प्यार की दौलत कभी बे फैज़ लोगों से रफ़ाक़त अब नहीं करनी..!! - [कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना](https://hindigazals.com/kaise-hota-hai-mumkin/): कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना दिल में बसे हुए लोगो से किनारा करना, कुछ मुहब्बत के भी क़ानून हुआ करते हैं किस को मंज़ूर है चाहत में ख़सारा करना, ज़िन्दगी होती है मीरास मुहब्बत दिल की यूँ नहीं होता है नफ़रत में गुज़ारा करना, उसकी बख्शीश का भी इम्कान तो होता होगा जिस किसी शख्स की आदत है कफारा करना, जान हाज़िर है मुनव्वर जो तू क़ातिल समझे जब ज़रूरत हो तो हल्का सा इशारा करना..!! - [मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है](https://hindigazals.com/magrur-parindon-ko-ye/): मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है सय्याद नशेमन का पता जान गया है, यानि जिसे दीमक लगी जाती थी वो मैं था अब आ के मेरा मेरी तरफ ध्यान गया है, शीशे में भले उसने मेरी नक़ल उतारी ख़ुश हूँ कि मुझे कोई तो पहचान गया है, अब बात तेरी कुन पर है कुछ कर मेरे मौला एक शख्स तेरे दर से परेशान गया है, ये नाम ओ नसब जा के ज़माने को बताओ दरवेश तो दस्तक से ही पहचान गया है..!! - [सब की कहानी एक तरफ़ है...](https://hindigazals.com/sabki-kahani-ek-taraf/): सबकी कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़ एक तरफ़ सैराब हैं सारे और मैं प्यासा एक तरफ़, एक तरफ़ तुम्हें जल्दी है उसके दिल में घर करने की एक तरफ़ वो कर देता है रफ़्ता रफ़्ता एक तरफ़, मेरी मर्ज़ी थी मैं ज़र्रे चुनता या लहरें चुनता उसने सहरा एक तरफ़ रखा और दरिया एक तरफ़, मैं ने अब तक जितने भी लोगों में ख़ुद को बाँटा है बचपन से रखता आया हूँ तेरा हिस्सा एक तरफ़, जब से उस ने खींचा है खिड़की का पर्दा एक तरफ़ उसका कमरा एक तरफ़ है बाक़ी दुनिया एक तरफ़, यूँ तो आज भी तेरा दुख दिल दहला देता है लेकिन तुझसे जुदा होने के बाद का पहला हफ़्ता एक तरफ़..!! - [ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है](https://hindigazals.com/khaali-hath-hi-jaana/): ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है चाहे जितने नाते जोड़ें एक दिन टूट ही जाना है, जाने कितने किरदारों से मिल कर बनी कहानी है पन्ना पन्ना पढ़ता चल ये दुनियाँ एक अफसाना है, उसकी आँख में थोड़े आँसूं मेरी याद के रहतें हैं हो सकता है भूल गया हो दिल भी तो बहलाना है, जाने क्या क्या भूल गए हम तू ही तू बस याद रहा तुझे भूलाने की कोशिश है जोग तो एक बहाना है, यादों को पलटा तो ये जाना बीच के पन्ने गायब है तेरे पास तो होंगे ही फिर क्या पढ़ना पढ़वाना हैं, मुझ से बिछड़ कर मुझको ढूँढा उम्र गँवाई रस्ते में जल्दी वापस आ जा जोगी दीपक तो बुझ जाना है..!! - [ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को](https://hindigazals.com/zindagi-bhar-azaab-sahne/): ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को दिल मिला है उदास रहने को, एक चुप के हज़ारहा मफ़हूम और क्या रह गया है कहने को ? - [अदाएँ हश्र जगाएँ वो इतना दिलकश है](https://hindigazals.com/adayen-hashr-jagayen-wo/): अदाएँ हश्र जगाएँ वो इतना दिलकश है ख्याल हर्फ़ न पाएँ वो इतना दिलकश है, बहिश्ती गूंचों से गूंधा गया सुराही बदन गुलाब ख़ुशबू चुराएँ वो इतना दिलकश है, बना के ख़ुश हुआ इतना कि अब भी लेता है ख़ुदा ख़ुद अपनी बलाएँ वो इतना दिलकश है, क़दम इरम में धरे ख़ुश क़दम तो हूर ओ गुलाम चिराग़ घी के जलाएं वो इतना दिलकश है, जिन्होंने साया भी देखा वो हूर का घूँघट मुहाल है कि उठाएँ वो इतना दिलकश है, ख़ुदा ने इसलिए उसे बहिश्त से भेजा फ़रिश्ते करते खताएँ वो इतना दिलकश है, चमन को जाए तो दस लाख नरगिसी गूंचे ज़मीं पे पलकें बिछाएँ वो इतना दिलकश है, हसीन परियां हैं हमराह खोले बंद ए क़बा उसे नज़र से बचाएँ वो इतना दिलकश है, उदास गूंचों ने जाँ की अमान पा के कहा लबो से तितली उड़ाएँ वो इतना दिलकश है, वो पंखुड़ी पे अगर चलते चलते थक जो जाए तो परियां पैर दबाएँ वो इतना दिलकश है, ये शोख़ तितलियाँ बारिश में उसको देखें तो उखाड़ फेके क़बायें वो इतना दिलकश है, वो चाँद ईद का उतरे जो दिल के आँगन में हम ईद रोज़ मनाएं वो इतना दिलकश है..!! - [ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते है](https://hindigazals.com/ye-jo-deewane-se/): ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते है उनमे कुछ साहिब ए असरार नज़र आते है, तेरी महफ़िल का भरम रखते हैं सो जाते हैं वरना ये लोग तो बेदार नज़र आते हैं, दूर तक कोई सितारा है न कोई जुगनू मर्ग ए उम्मीद के आसार नज़र आते है, मेरे दामन में शरारों के सिवा कुछ भी नहीं आप फूलों के ख़रीदार नज़र आते है, कल जिन्हें छू नहीं सकती थी फरिश्तों की नज़र आज वो रौनक ए बाज़ार नज़र आते है, हश्र में कौन गवाही मेरी देगा सागर सब तुम्हारे ही तरफ़दार नज़र आते है..!! - [कभी यूँ भी आ मेरी आँख में...](https://hindigazals.com/kabhi-yun-bhi-aa/): कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उस रात की कभी सहर न हो, वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे गर तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआओं में असर न हो, मेंरे बाज़ुओं में थकी थकी अभी महव ए ख़्वाब है चाँदनी न उठे सितारों की पालकी अभी आहटों का गुज़र न हो, ये ग़ज़ल कि जैसे हिरन की आँख में पिछली रात की चाँदनी न बुझे ख़राबे की रौशनी कभी बे चराग़ ये घर न हो, कभी दिन की धूप में झूम के कभी शब के फूल को चूम के यूँ ही साथ साथ चलें सदा कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो..!! - [नये कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ...](https://hindigazals.com/naye-kapade-badal-kar/): नये कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए वो शख्स तो शहर ही छोड़ गया अब मैं बाहर जाऊँ किस के लिए, जिस धूप की दिल में ठंडक थी वो धूप उसी के साथ गई इन जलती बलती गलियों में अब खाक़ उड़ाऊँ किस के लिए, वो शहर में था तो उसके लिए औरो से भी मिलना पड़ता था अब ऐसे वैसे लोगो के मैं नाज़ उठाऊँ किस के लिए, अब शहर में उसका बदल ही नहीं कोई वैसा जान ए ग़ज़ल ही नहीं उन्वान ए ग़ज़ल में लफ़्ज़ों के गुलदान सजाऊँ किस के लिए, मुद्दत से कोई आया न गया सुनसान पड़ी है घर की फिज़ा इन ख़ाली कमरों में नासीर अब शमअ जलाऊँ किस के लिए..!! - [लाख रहे शहरों में फिर भी अन्दर से देहाती थे](https://hindigazals.com/laakh-rahe-shaharon-me/): लाख रहे शहरों में फिर भी अन्दर से देहाती थे दिल के अच्छे लोग थे लेकिन थोड़े से जज़्बाती थे, अब भी अक्सर ख़्वाब में वो धुँधले चेहरे आते है मेरी नन्ही गुड़िया की शादी में जो नन्हे बाराती थे, अपने गिर्द लकीरें खींची और फिर उनमें क़ैद हुए इस दुनियाँ में खेल थे जितने सारे ही तबक़ाती थे, झोपड़ियों में रहने वाले उनकी फ़ितरत जान गए कभी कभी यूँ चढ़ आने वाले नाले जो बरसाती थे, जिन बादलो ने सुख बरसाया, जिनसे छाँव मिली आँखें खोल के देखा तो वो सब मौसम लम्हाती थे, जिनको बड़ा माना था मैंने फ़रहत वो क्यूँ भूल गए ? - [कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर](https://hindigazals.com/kaun-munsaf-kahan-insaf/): कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर अब ये मिज़ान सजावट के सिवा कुछ भी नहीं, अदालत की ईमारत, ये सुतून ओ दर ओ बाम सब एक बेकार बनावट के सिवा कुछ भी नही, सच वकीलों की भी उजरत नहीं देने पाता झूठ के लाख गवाहान खड़े बोलते हैं, और हकायेक़ की जगह शहर के आली मुन्सफ़ अद्ल ओ इंसाफ़ की मिज़ान में रोज़ तौलते हैं, अब तो मुन्सफ़ के हथौड़े की धमक भी शायद ज़र की झंकार से ऊँचीं नहीं होने पाती, और कानून की गर्दन में वो ख़म आया है अब ये दस्तार से ऊँचीं नहीं होने पाती, अब तो तीसरी नस्ल दर ए अदल पे बैठी हुई है वो जो मज़लूम हुआ करते थे क़ब्रों में पड़े सोते हैं, काज़ी ए शहर है अरबाब ए हुकुमत का गुलाम कौन कहता है कि मुफ़लिस के भी हक़ होते है, नुक्ता चीनी को बग़ावत ही गिना जाता है और बस सब्र की तलकीन हुई जाती है, जो किसी तरह मोअजज़ भी नहीं मेरे लिए उस अदालत की भी तौहीन हुई जाती है..!! - [अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते](https://hindigazals.com/apni-khuddari-to-pamaal/): अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते, सीम जाएगा तो फिर नक़्श उभारेंगे कोई काम दीवार पे फ़िलहाल नहीं कर सकते, रह भी सकता है तेरा नाम कहीं लिखा हुआ सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते, दोस्त तस्वीर बहुत दूर से खींची गई है हम उजागर ये ख़द ओ ख़ाल नहीं कर सकते, रोती आँखों पे मियाँ हाथ तो रख सकते हैं पेश अगर आप को रूमाल नहीं कर सकते, दे न दे काम की उजरत ये है मर्ज़ी उस की पेशा ए इश्क़ में हड़ताल नहीं कर सकते, दश्त आए जिसे वहशत की तलब हो नादिर ये ग़िज़ा शहर हम इर्साल नहीं कर सकते..!! - [होशियारी ये दिल ए नादान बहुत करता है](https://hindigazals.com/hoshiyari-ye-dil-e/): होशियारी ये दिल ए नादान बहुत करता है रंज कम सहता है पर ऐलान बहुत करता है, रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़ कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है, आज कल अपना सफ़र तय नहीं करता कोई हाँ सफ़र का सर ओ सामान बहुत करता है..!! - [बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना](https://hindigazals.com/baaraha-tujh-se-kaha/): बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना अब मुझे छोड़ के दुनिया में तमाशा न बना, एक यही गम मेरे मरने के लिए काफी है जैसा तू चाहता था मुझको मैं वैसा न बना, एक और बात पते की मैं बताऊँ तुझको आख़िरत बनती चली जाएगी, दुनिया न बना, ये ख़ुदा बन के रियायत नहीं करते हैं यारो हुस्न वालों को कभी किब्ला ओ क़ाबा न बना..!! - [अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता](https://hindigazals.com/ab-bewajah-besabab-din/): अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता फ़ुर्सत मिले भी तो किसी से बात नहीं करता, वक़्त, ऐतबार, ख़ुलूस, वफ़ा के दावेदारों को सुपुर्द सब कर देता हूँ अपनी ज़ात नहीं करता, लहज़ा नरम रख कर मिलता हूँ आजिज़ी के साथ मगर हर फ़र्द पे जाया सब जज़्बात नहीं करता, तजलील ए मुहब्बत है बेहिसों से मुहब्बत करना पत्थरों पे अयाँ अपने एहसासात नहीं करता, हार जाता हूँ सब से ही अब जान बुझ कर मैं किसी के नसीब में अब मात नहीं करता..!! - [याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए](https://hindigazals.com/yaad-e-maazi-me/): याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए उस से बेहतर है कि हर बात भूला दी जाए, जिस से थोड़ी सी भी उम्मीद ज़्यादा हो कभी ऐसी हर शमअ सर ए शाम बुझा दी जाए, मैंने अपनों के रवैये से ये महसूस किया दिल के आँगन में भी दीवार उठा दी जाए, मैंने यारों के बिछड़ने से ये सीखा है सबक़ अपने दुश्मन को भी जीने की दुआ दी जाए..!! - [इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा](https://hindigazals.com/insaaf-se-na-mahrum/): इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा दुनियाँ में जो जैसा करेगा, वो वैसा ही भरेगा, कागज़ की जो हो नाव वो कब तलक चलेगी ? - [ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे](https://hindigazals.com/khuda-se-waqt-e/): ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे वो बुत भी दिल को ज़रा अब संभाल कर बैठे, किया है आँख की गर्दिश से पीस कर सुर्मा वो बे चले ही मुझे पाएमाल कर बैठे, तमाम उम्र परेशाँ रखा दम ए आख़िर बला से मेरी परेशाँ वो बाल कर बैठे, चले हैं तूर को मूसा मगर हमें मतलब कि हम बुतों ही में ये देखभाल कर बैठे, रवाँ हैं अश्क किसी के फ़िराक़ में या रब कोई न पुर्सिश ए वजह ए मलाल कर बैठे, बुरा हो उल्फ़त ए ख़ूबाँ का हमनशीं हम तो शबाब ही में बुरा अपना हाल कर बैठे, न इल्म है न ज़बाँ है तो किस लिए महरूम तुम अपने आपको शाइर ख़याल कर बैठे..!! - [ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर](https://hindigazals.com/khoon-se-likhta-hai/): ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर वक़्त करता है अजब सिफली अमल काग़ज़ पर, रंज मिटने का नहीं फिर भी तसल्ली के लिए मिसरा ए दर्द की तरतीब बदल काग़ज़ पर, ये तख़य्युल है कि उमडा हुआ दरिया कोई मौजा ए आब ए रवाँ है कि ग़ज़ल काग़ज़ पर, कितने जज़्बे तेरी बे राह रवी ने कुचले हर्फ़ ए आवारा ज़रा देख के चल काग़ज़ पर, खेतियाँ क्या क्या उगाता हूँ सर ए दश्त ए ख़याल लहलहाता है कोई फूल न फल काग़ज़ पर, लफ़्ज़ जब आ के चमकता है सर ए नोक ए क़लम रौशनी देता है महताब ए अज़ल काग़ज़ पर, जब कभी चाहा लिखूँ झील तेरी आँखों को तैरने लगते हैं ख़ुशबू के कँवल काग़ज़ पर, एक तस्वीर बना कर मैं तेरे होंटों की सब्त कर दूँगा किसी याद के पल काग़ज़ पर, तितलियाँ आने लगीं पुर्सा ए ग़म की ख़ातिर तुझसे ये किसने कहा फूल मसल काग़ज़ पर, रौशनाई को हमा गीर उजाले में बदल अपनी फ़ितरत की सियाही तू न मल काग़ज़ पर, और कुछ देर में ये रंग निकालेगी कई ये जो बिखरी सी है नौख़ेज़ ग़ज़ल काग़ज़ पर..!! - [कोई आहट कोई सरगोशी...](https://hindigazals.com/koi-aahat-koi-sargoshi/): कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं घर में एक बेहिस ख़मोशी के सिवा कुछ भी नहीं, नाम एक नायाब सा लिखा था वो भी मिट गया अब हथेली पर लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं, बेछुए एक लम्स का एहसास एक ख़ामोश बात उस के मेरे बीच आख़िर था भी क्या कुछ भी नहीं ? - [मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं](https://hindigazals.com/mat-bura-usko-kaho/): मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी नहीं, जानता था कि सितमगर है मगर क्या कीजे दिल लगाने के लिए और कोई था भी नहीं, जैसा बेदर्द हो वो फिर भी ये जैसा महबूब ऐसा कोई न हुआ और कोई होगा भी नहीं, वही होगा जो हुआ है जो हुआ करता है मैंने इस प्यार का अंजाम तो सोचा भी नहीं, हाए क्या दिल है कि लेने के लिए जाता है उस से पैमान ए वफ़ा जिसपे भरोसा भी नहीं, बारहा गुफ़्तुगू होती रही लेकिन मेरा नाम उसने पूछा भी नहीं मैंने बताया भी नहीं, तोहफ़ा ज़ख़्मों का मुझे भेज दिया करता है मुझसे नाराज़ है लेकिन मुझे भूला भी नहीं, दोस्ती उससे निबह जाए बहुत मुश्किल है मेरा तो वादा है उसका तो इरादा भी नहीं, मेरे अशआर वो सुन सुन के मज़े लेता रहा मैं उसी से हूँ मुख़ातिब वो ये समझा भी नहीं, मेरे वो दोस्त मुझे दाद ए सुख़न क्या देंगे जिनके दिल का कोई हिस्सा ज़रा टूटा भी नहीं, मुझको बनना पड़ा शाइर कि मैं अदना ग़म ए दिल ज़ब्त भी कर न सका फूट के रोया भी नहीं, शाइरी जैसी हो आजिज़ की भली हो कि बुरी आदमी अच्छा है लेकिन बहुत अच्छा भी नहीं..!! - [ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो](https://hindigazals.com/zakhm-e-waahid-ne/): ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो हरगिज़ ना दुखाना दिल जो चोट खाया हो, जिसे हासिल ही नहीं उसे अहमियत क्या ? - [ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़](https://hindigazals.com/zindgani-ke-kaam-ek/): ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़ अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़, हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़ साज़ो सामां तमाम एक तरफ़, हुस्न पत्थर मिज़ाज ख़ूब रहे हुस्न का एहतराम एक तरफ़, एक तरफ़ है अदालतों की क़तार हाकिम ए बेलगाम एक तरफ़, मेरी तनहाईयां वहीं की वहीं शहर का इंतज़ाम एक तरफ़, दुश्मनों का मिज़ाज और कहीं दोस्त का इंतक़ाम एक तरफ़, साथ तेरा मिला है जब से मुझे रख दिया हर निज़ाम एक तरफ़, आक़िलों की मिसाल और सही बे ख़ुदी का कलाम एक तरफ़, लुत्फ़ क्या है ख़्याल तू ही बता रख दो गर बाद ओ जाम एक तरफ़..!! - [रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं](https://hindigazals.com/rishton-ke-jab-taar/): रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में झाँक के देखूँ तो कुछ चेहरे हर बार उलझने लगते हैं, साल में एक ऐसा मौसम भी आता है फूलों से ही ख़ार उलझने लगते हैं, घर की तन्हाई में अपने आप से हम बन कर एक दीवार उलझने लगते हैं, ये सब तो दुनिया में होता रहता है हम ख़ुद से बेकार उलझने लगते हैं, कब तक अपना हाल बताएँ लोगों को तंग आ कर बीमार उलझने लगते हैं, जब दरिया का कोई छोर नहीं मिलता कश्ती से पतवार उलझने लगते हैं, कुछ ख़बरों से इतनी वहशत होती है हाथों से अख़बार उलझने लगते हैं, कोई कहानी जब बोझल हो जाती है नाटक के किरदार उलझने लगते हैं..!! - [चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं](https://hindigazals.com/chaman-me-jab-bhi/): चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं तुम्हारी आँख का अहवाल ख़्वाब पूछते हैं, कहाँ कहाँ हुए रौशन हमारे बाद चिराग़ ? - [हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है](https://hindigazals.com/haris-dil-ne-zamana/): हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है किसी ने जिस्म किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशीरत की ख़ूबी इंसा में आसास ए अनस का सब ने ख़मीर बेचा है, मज़ाक उड़ा मज़हब का अहल ए इल्म ने जब से आयतों को सर ए बाज़ार बेचा है, इरम भी न मिली जिस के हसूल की खातिर समझ कर ईमां को सब ने हक़ीर बेचा है, बस एक ओहदे की ख़ातिर अमीर ए लश्कर ने मुखालफिन को एक एक तीर बेचा है, बुजुर्ग के हुआ फैज़ान का यहाँ सौदा कि पैरोकारों ने अपना ही पीर बेचा है..!! - [असर उसको ज़रा नहीं होता](https://hindigazals.com/asar-usko-zara-nahi/): असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत फिज़ा नहीं होता, बेवफा कहने की शिकायत है तो भी वादा वफा नहीं होता, जिक़्र ए अग़ियार से हुआ मालूम हर्फ़ ए नासेह बुरा नहीं होता, तुम हमारे किसी तरह न हुए वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता, उसने क्या जाने क्या किया लेकर दिल किसी काम का नहीं होता, नारसाई से दम रुके तो रुके मैं किसी से खफ़ा नहीं होता, तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई दूसरा नहीं होता, हाल ए दिल यार को लिखूँ क्यूँकर ? - [बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का](https://hindigazals.com/buland-darza-hai-duniyan/): बुलंद दर्ज़ा है दुनियाँ में माँ बाप का इनके जैसा तो कोई और प्यारा नहीं, इतने एहसान है हम पर माँ बाप के जिनका होता कभी भी उतारा नहीं, जिनका पा कर सहारा बड़ा तू हुआ उनको देता अब क्यूँ तू सहारा नहीं, कर ले जीते जी ख़िदमत तू माँ बाप की ज़िन्दगी फिर ये मिलती दोबारा नहीं, जन्म जिसने दिया कद्र उनकी तू कर ले वो भूखे है प्यासे फ़िक्र उनकी तू कर ले, गम ए ज़िन्दगी को तू ख़ुशियों से भर ले वालिदैन की ख़िदमत मन से तू कर ले..!! - [शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते](https://hindigazals.com/shikast-e-zarf-ko/): शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते जो मांगे से मिले हम उसको पैमाना नहीं कहते, जहाँ साक़ी के पा ए नाज़ पर सज़्दा ज़रूरी हो वो बुतखाना है उसको रिंद मयखाना नहीं कहते, जुनूं की शर्त ए अव्वल ज़ब्त है और ज़ब्त मुश्किल है जो दामन चाक कर ले उसको दीवाना नहीं कहते, जो हो जाए किसी का मुस्तकिल बे शिरकत ए ग़ैरे वो दिल काबा है उस दिल को सनमखाना नहीं कहते, निहायत शुक्रिया इस पुर्सिश ए अहवाल का लेकिन हमें आदत नहीं, हम अपना अफ़साना नहीं कहते, जहाँ हर वक़्त एक महफ़िल सजी हो तेरी यादों की उसे इशरत कदा कहते हैं गमखाना नहीं कहते, गरज़ कुछ भी हो हमको याद तो रखता है हर लहज़ा अदू ए जाँ को भी अपने हम कभी बेगाना नहीं कहते..!! - [मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते](https://hindigazals.com/milne-ka-bhi-aakhir/): मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते मुश्किल थी अगर कोई तो आसान बनाते, रखते कहीं खिड़की कहीं गुलदान बनाते दीवार जहाँ है वहाँ दालान बनाते, थोड़ी है बहुत एक मसाफ़त को ये दुनिया कुछ और सफ़र का सर ओ सामान बनाते, करते कहीं एहसास के फूलों की नुमाइश ख़्वाबों से निकलते कोई विज्दान बनाते, तस्वीर बनाते जो हम इस शोख़अदा की लाज़िम था कि मुस्कान ही मुस्कान बनाते, उस जिस्म को कुछ और समेटा हुआ रखते ज़ुल्फ़ों को ज़रा और परेशान बनाते, कुछ दिन के लिए काम से फ़ुर्सत हमें मिलती कुछ दिन के लिए ख़ुद को भी मेहमान बनाते, दो जिस्म कभी एक बदन हो नहीं सकते मिलती जो कोई रूह तो यक जान बनाते..!! - [दिल दे कर संगदिल को...](https://hindigazals.com/dil-de-kar-sangdil/): दिल दे कर संगदिल को ज़िन्दगी दुश्वार नहीं करना यूँ हर किसी से अपने इश्क़ का इजहार नहीं करना, माना बेलौस मुहब्बत तेरी नज़रों में है दो कौड़ी की पर हवस की चाह में हर किसी से प्यार नहीं करना, दिल ए नादां की खता थी हो गया एक दफा तुझसे मगर गुनाह ये मुझे हरगिज़ बार बार नहीं करना..!! - [सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ](https://hindigazals.com/satate-ho-tum-mazlumon/): सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ मगर ये समझ के ज़रा ज़ुल्म ढहाओ मज़ालिम का लबरेज़ जब जाम होगा तो हिटलर के जैसा ही अंज़ाम होगा, तुम्हे है हम को मिटाने की ख्वाहिश तो हमें भी है सर कटाने की ख्वाहिश..!! - [तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी...](https://hindigazals.com/taqdeer-ki-gardish-kya/): तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी उस पर ये क़यामत कर बैठे, बेताबी ए दिल जब हद से बढ़ी घबड़ा के मुहब्बत कर बैठे, आँखों में छलकते है आँसूं दिल चुपके चुपके रोता है, वो बात हमारे बस की न थी जिस बात की हिम्मत कर बैठे, गम हमने ख़ुशी से मोल लिया उस पर भी हुई ये नादानी, जब दिल की उम्मीदें टूट गई क़िस्मत से शिकायत कर बैठे..!! - [पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही...](https://hindigazals.com/pichle-zakhmon-ka-izala/): पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही वहशत करेगा तुझ से वाक़िफ़ हूँ मेरी जाँ तू मोहब्बत करेगा, मैं चला जाऊँगा दुनिया से सिकंदर की तरह अगली सदियों पे मेरा नाम हुकूमत करेगा, पेश है दूसरे आलम में भी तन्हा रहना मैं ने सोचा था तू दुनिया से बग़ावत करेगा, दिल तेरी राह ए अज़िय्यत से पलटने को है क्या तू अब भी न मेरा ख़्वाब हक़ीक़त करेगा, तू मेरी मौत की तस्दीक़ नहीं कर सकता छुएगा तो मुझे और दिल मेरा हरकत करेगा, वाहिमा सहरा नवर्दी का मुदल्लल नहीं है कोई होगा मेरे दिल में तभी हिजरत करेगा, वो जो आफ़ाक़ चराग़ों की लवें तोड़ता है अपना सूरज भी उसी हाथ पे बैअत करेगा..!! - [अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो](https://hindigazals.com/azab-riwayat-hai-qaatilon/): अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो गुनाह के बोझ से लदे काँधों को सलाम करो, पहचान गर बनानी हो तुम्हें अपनी इस भीड़ में ख़ुद को न दो तवज्जों दूसरों को बदनाम करो, कोई सिक्को का कोई कुर्सी का है गुलाम यहाँ जो आ ही गए हो तुम भी तो कुछ काम करो, गर चाहत है तुम्हे भी चाभी ए तरक्की की तो रोज़ सुबह ख़ुद से और यारों से धोखे शाम करो, यारों तुम को क्यूँ पड़ गया गैरत का दौरा अभी शाम रंगीन है महफ़िल जवाँ चलो जाम भरो..!! - [दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ](https://hindigazals.com/dard-ki-dhoop-dhale/): दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ देखिए रूह से कब दाग़ पुराने जाएँ, हम को बस तेरी ही चौखट पे पड़े रहना है तुझसे बिछ्ड़ें न किसी और ठिकाने जाएँ, अपनी दीवार ए अना आप ही कर के मिस्मार अपने रूठों को चलो आज मनाने जाएँ, जाने क्या राज़ छुपा है तेरी सालारी में तू जहाँ जाए तेरे पीछे ज़माने जाएँ, रहें गुमनाम तो बस तुझ से ही मंसूब रहें जाने जाएँ तो तेरे नाम से जाने जाएँ, देख पाएँगे उन आँखों में उदासी कैसे अपने दुखड़े न उन को सुनाने जाएँ..!! - [धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए](https://hindigazals.com/dhokhe-pe-dhokhe-is/): धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए हम दुश्मनों को दोस्त बनाते चले गए, हर ज़ख्म ज़िंदगी का गले से लगा लिया हम ज़िंदगी से यूँ ही निभाते चले गए, वो नफ़रतों का बोझ लिए घूमते रहे हम चाहतों को उन पे लुटाते चले गए, जो ख़्वाब ज़िंदगी की हक़ीक़त न बन सका उसके ही हसीं फ़रेब में आते चले गए, दर्द ए दिल को छुपाना आसाँ न था मगर हम आड़ मे हँसी की छुपाते चले गए..!! - [अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती](https://hindigazals.com/apno-se-koi-baat/): अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती ग़ैरों को कभी दिल की बताई नहीं जाती, लग जाती है ग़लती से कभी आग व लेकिन ना दीदा ओ दानिस्ता बुझाई नहीं जाती, तालीम सिखाती नहीं आलिम को सलीक़ा तहज़ीब तो जाहिल को सिखाई नहीं जाती, रुख़ हवाओं का मुआफ़िक़ भी हो फिर भी तूफ़ान में क़िंदील जलाई नहीं जाती, सीधी सी है ये बात मियाँ ऐसे मुसलसल रोने से मुक़द्दर की बुराई नहीं जाती, ऐ साहिब ए तदबीर इशारों से तो हरगिज़ दीवार कराहत की गिराई नहीं जाती, मज़लूम के बहते हुए पुर जोश लहू से तस्वीर मोहब्बत की बनाई नहीं जाती, अबरार समझते नहीं आसान है बिल्कुल मुश्किल में पड़ी जान छुड़ाई नहीं जाती..!! - [हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब](https://hindigazals.com/hamare-haafize-bekar-ho/): हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब जवाब और भी दुश्वार हो गए साहिब, उसे भी शौक़ था तस्वीर में उतरने का तो हम भी शौक़ से दीवार हो गए साहिब, तीरे लिबास के रंगों में खो गई फ़ितरत ये फूल शूल तो बेकार हो गए साहिब, गले लगा के उसे ख़्वाब में बहुत रोए और इतना रोए कि बेदार हो गए साहिब, हमारी रूह परिंदों को सौंप दी जाए कि ये बदन तो गुनाहगार हो गए साहिब, नज़र मिलाई तो एक आग ने लपेट लिया बदन जला ये तो गुलज़ार हो गए साहिब, चराग दफ्न किए थे नदीम क़ब्रों में ज़मीं से चाँद नमूदार हो गए साहिब..!! - [तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे](https://hindigazals.com/tera-lahja-teri-pahchan/): तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे तेरी वहशत तेरा हैजान मुबारक हो तुझे, मैं मोहब्बत का पुजारी हूँ सो मैं जाता हूँ यानि नफ़रत का ये सामान मुबारक हो तुझे, आँख में तंज़ ओ रऊनत की चमक बाक़ी रहे लब पे ये तल्ख़ सी मुस्कान मुबारक हो तुझे, मैं दुआ करता हूँ तू शहर ए चराग़ाँ में रहे तेरा हर ख़्वाब ए गुलिस्तान मुबारक हो तुझे, तू हुकूमत का है शौक़ीन तेरा बनता है बेबसी शहर की सुल्तान मुबारक हो तुझे, मैं तो मर कर भी मेंरी जान बचा लूँगा उसे तुझ में मरता हुआ इंसान मुबारक हो तुझे, जा रहा हूँ मैं तेरे शहर से तेरी यादें ले कर मेरे दिलबर तेरा ये गुलशन मुबारक हो तुझे, ये बिछड़ना ही अगर हल है तो रंजिश कैसी ? - [मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं](https://hindigazals.com/mujhe-aarzoo-jiski-hai/): मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं नज़रअंदाज़ कर दूँ ऐसी मेरी कोई नज़र नहीं, मना पाबंदियाँ हज़ार है इक़रार ए इश्क़ पर लेकिन असरार ए इश्क़ में कोई असर नहीं, कभी तो सुकूं की नींद सोए हम भी सारी रात मगर उसके जैसा तो और कोई सितमगर नहीं, आरज़ू है कि बहक जाऊँ उसकी आग़ोश में उसके दिल के सिवा और कोई मेरा घर नहीं..!! - [इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो](https://hindigazals.com/is-shahar-men-kahin/): इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो बाज़ार है तो हम पे कभी मेहरबाँ भी हो, जागें तो आस पास किनारा दिखाई दे दरिया हो पुरसुकून खुला बादबाँ भी हो, एक दोस्त ऐसा हो कि मेंरी बात बात को सच मानता हो और ज़रा बदगुमाँ भी हो, रस्ते में एक पेड़ हो तन्हा खड़ा हुआ और उसकी एक शाख़ पे एक आशियाँ भी हो, उससे मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो, हम उस जगह चले हैं जहाँ ये ज़मीं नहीं अच्छा हो गर वहाँ पे नया आसमाँ भी हो..!! - [वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना...](https://hindigazals.com/watan-se-ulfat-hai/): वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना ये जुर्म ता ज़िन्दगी करेंगे है किस की गर्दन पे खून ए ना हक़ फ़ैसला लोग करेंगे, वतनपरस्तों को कह रहे हो वतन का दुश्मन डरो ख़ुदा से जो आज हम से खता हुई है यही खता कल सभी करेंगे, वज़ीफ़ा ख्वारों से क्या शिकायत, हज़ार दें शाह को दुआएँ मदार जिनका है नौकरी पर वो लोग तो नौकरी करेंगे, लिए जो फिरते हैं तमगा ए फन रहे है जो हम ख्याल ए रहजन हमारी आज़ादियों के दुश्मन हमारी क्या रहबरी करेंगे ? - [घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे](https://hindigazals.com/ghar-se-nikale-agar/): घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे, हमने अल्फ़ाज़ को आइना कर दिया छपने वाले ग़ज़ल में चमक जाएँगे, दुश्मनी का सफ़र एक क़दम दो क़दम तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे, रफ़्ता रफ़्ता हर एक ज़ख़्म भर जाएगा सब निशानात फूलों से ढक जाएँगे, नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा लिखते लिखते तेरे हाथ थक जाएँगे, ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे, दिन में परियों की कोई कहानी न सुन जंगलों में मुसाफ़िर भटक जाएँगे..!! - [बसा तो लेते नया दिल में हम मकीं लेकिन](https://hindigazals.com/basa-to-lete-naya/): बसा तो लेते नया दिल में हम मकीं लेकिन मिला न आप से बढ़ कर कोई हसीं लेकिन, किसी के बाद ब ज़ाहिर तो कुछ नहीं बदला हमारे पाँव तले अब नहीं ज़मीं लेकिन, जहान ए इश्क़ से बाहर भी एक दुनिया है दिलाया दिल को बहुत हमने ये यकीं लेकिन, यकीं मुझे है मेरे साथ साँप कोई नहीं हर एक हाथ की होती है आस्तीन लेकिन, सब ही फ़रेब था लेकिन वो आख़िरी जुमला कभी मिलेंगे दोबारा यहीं कहीं लेकिन, ये और बात ख़ुशी साथ साथ है अबरक हमारें बीच कोई राब्ता नहीं लेकिन..!! - [मुख़्तसर बात, बात काफी है...](https://hindigazals.com/mukhtasar-baat-baat-kaafi/): मुख़्तसर बात, बात काफी है एक तेरा साथ, साथ काफी है, वो जो गुज़र जाए तेरे पहलू में हमको इतनी हयात काफी है, मैं हूँ तेरा और मेरा वज़ूद है तू कुल यही क़ायनात काफी है, लाख कीजिए मगर मुहब्बत में कब कोई एहतियात काफी है, अब नहीं कोई जीतने में नशा तुम से पाई जो मात काफी है..!! - [सूरज से यूँ आँख मिलाना...](https://hindigazals.com/suraj-se-yun-aankh/): सूरज से यूँ आँख मिलाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, दुनियाँ से इस्लाम मिटाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, मुशरिको को दीन सिखाना शायद मुमकिन हो लेकिन, कंकर से क़लमा पढ़वाना मुश्किल क्या ना मुमकिन है, कोई चाहे सारी उम्र लगा दे अपने माँ की ख़िदमत में लोगो, माँ की दूध का क़र्ज़ चुकाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, पल में आना पल में जाना फ़र्श से ज़मीं से अर्श तलक, डूबता सूरज वापस लाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, सूरज से यूँ आँख मिलाना मुश्किल क्या नामुमकिन है..!! - [इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल](https://hindigazals.com/ishq-ne-bakhshi-hai/): जहाँ मेरी ज़ात में रहती है तेरी ज़ात मुसलसल..!! - [तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम...](https://hindigazals.com/taalluq-tark-karne-se/): तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम नहीं होती भड़कती है ये आतिश दिन ब दिन मद्धम नहीं होती, निभाना आश्नाई कर के मुश्किल तो नहीं लेकिन किसी से भी मोहब्बत ना गहाँ यक दम नहीं होती, तुम्हारी सोच पर हैं मुनहसिर रंगीनियाँ दिल की ये महफ़िल बेवफ़ाई से कभी दरहम नहीं होती, उतर जाए जो पूरा इम्तिहान ओ आज़माईश में वो चश्म ए दिल कभी फिर आँसुओं से नम नहीं होती, ज़माना चाहे जितने रंग ओ रुख़ बदले हक़ीक़त में निडरता मर्द ए मैदाँ मोम की मरियम नहीं होती, अजब दस्तूर है अबरार इस दुनिया ए बे पर का शिकस्ता-रंग पत्तों पर फ़िदा शबनम नहीं होती..!! - [पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो](https://hindigazals.com/pahle-janab-koi-shigufa/): पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ गर्दन पर डाल दो, रिश्वत को हक़ समझ के जहाँ ले रहे हों लोग है और कोई मुल्क तो उसकी मिसाल दो, औरत तुम्हारे पाँव की जूती की तरह है जब बोरियत महसूस हो घर से निकाल दो, चीनी नहीं है घर में लो मेहमान आ गए महँगाई की भट्ठी में शराफ़त उबाल दो..!! - [एक बेवा की आस लगती है](https://hindigazals.com/ek-beva-ki-aas/): एक बेवा की आस लगती है ज़िंदगी क्यों उदास लगती है, हर तरफ़ छाई घोर तारीकी रौशनी की असास लगती है, पी रहा हूँ हनूज़ अश्क ए ग़म बहर ए ग़म को भी प्यास लगती है, लाख पहनाओ दोस्ती की क़बा दुश्मनी बे लिबास लगती है, मौत के सामने हयात असद सूरत ए इल्तिमास लगती है..!! - [हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा](https://hindigazals.com/haqiqaton-men-badalta-saraab/): हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा जो बन सका न हक़ीक़त वो ख़्वाब चुभने लगा, सवाल सख़्त हमारा था पर ख़ुलूस बहुत तुम्हारा फूल सा लेकिन जवाब चुभने लगा, जवान बेटी जहेज़ और बढ़ती महँगाई ज़ईफ़ बाप के दिल में शबाब चुभने लगा, ज़रा सा ज़िक्र भी जिस में नहीं था मंज़िल का हमें वो राहनुमा का ख़िताब चुभने लगा, किताब ए अस्र में अग़राज़ की वजह से असद जो लिख सका न मुसन्निफ़ वो बाब चुभने लगा..!! - [ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र...](https://hindigazals.com/zaban-kuch-aur-kahti/): ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र कुछ और कहती है मगर ये ज़िंदगी की रहगुज़र कुछ और कहती है, बयाँ ये बाग़बाँ का है उजाड़ा बाग़ आँधी ने मगर कटी हुई शाख़ ए शजर कुछ और कहती है, ये उजड़ा जिस्म ज़ख़्मी रूह और सहमी हुई लड़की ज़माना मार डालेगा अगर कुछ और कहती है, दबाव था कि लालच था लगा अख़बार ये पढ़ कर हक़ीक़त और ही कुछ थी ख़बर कुछ और कहती है, निशानी छोड़ जाती हैं असद ये उम्र की राहें मुसाफ़िर कुछ कहे गर्द ए सफ़र कुछ और कहती है..!! - [सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश](https://hindigazals.com/sino-men-agar-hoti/): सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश हाथों में निकलती क्यूँ तलवार की गुंजाइश, पिछड़े हुए गाँव का शायद है वो बाशिंदा जो शहर में ढूंढें है ईसार की गुंजाइश, नफ़रत की तअस्सुब की यूँ रखी गईं ईंटें पैदा हुई ज़ेहनों में दीवार की गुंजाइश, पाकीज़गी रूहों की नीलाम हुई जब से जिस्मों में निकल आई बाज़ार की गुंजाइश, इस तरह खुले दिल से इक़रार नहीं करते रख लीजिए थोड़ी सी इंकार की गुंजाइश, गर अज़्म मुसम्मम हो और जेहद ए मुसलसल भी सहरा में निकल आए गुलज़ार की गुंजाइश, समझें कि न समझें वो हम ने तो असद रख दी अशआर के होंटों पे इज़हार की गुंजाइश..!! - [बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना](https://hindigazals.com/baadshahon-ko-sikhaya-hai/): बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना आप आसान समझते हैं मुनव्वर होना, एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है तुमने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना, सिर्फ़ बच्चों की मोहब्बत ने क़दम रोक लिए वर्ना आसान था मेरे लिए बे घर होना, हम को मालूम है शोहरत की बुलंदी हमने क़ब्र की मिट्टी का देखा है बराबर होना, इसको क़िस्मत की ख़राबी ही कहा जाएगा आपका शहर में आना मेरा बाहर होना, सोचता हूँ तो कहानी की तरह लगता है रास्ते से मेरा तकना तेरा छत पर होना, मुझको क़िस्मत ही पहुँचने नहीं देती वर्ना एक एज़ाज़ है उस दर का गदागर होना, सिर्फ़ तारीख़ बताने के लिए ज़िंदा हूँ अब मेरा घर में भी होना है कैलेंडर होना..!! - [यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं...](https://hindigazals.com/yahan-shor-bachche-machaate/): यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं, वफ़ा के फ़लक पर मोहब्बत के तारे ख़ुदा जाने क्यूँ झिलमिलाते नहीं हैं, दिलासा न दे यूँ हमें शैख़ सादी दिलों में समुंदर समाते नहीं हैं विरासत में वाइ'ज़ लक़ब पाने वाले मोहल्ले की मस्जिद में जाते नहीं हैं, मुसव्विर ने तस्वीर-ए-फ़ुर्सत बना कर कहा वक़्त को हम बचाते नहीं हैं, ख़स-ओ-ख़ार से घोंसला शह कड़ी पर अबाबील क्यूँ अब बनाते नहीं हैं, हमें तुम सिखाओ तुम्हें हम सिखाएँ सभी काम तो हम को आते नहीं हैं, ये दुनिया ए दो रंग ओ रोज़ा के मंज़र कि अबरार अब दिल लुभाते नहीं हैं..!! - [सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं](https://hindigazals.com/sau-men-sattar-aadmi/): सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है ? - [ख़ुद्दार मेरे शहर का फाक़ो से मर गया](https://hindigazals.com/khuddar-mere-shahar-ka/): ख़ुद्दार मेरे शहर का फाक़ो से मर गया राशन जो आ रहा था वो अफ़सर के घर गया, चढ़ती रही मज़ार पे चादरें तो बे शुमार बाहर जो एक फ़कीर था सर्दी से मर गया, रोटी अमीर ए शहर के कुत्तों ने छीन ली फाक़ा गरीब ए शहर के बच्चों में बट गया, चेहरा बता रहा था कि मारा है भूख़ ने हाकिम ने कह दिया कि कुछ खा के मर गया..!! - [होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं](https://hindigazals.com/honthon-pe-uske-jumbish/): होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं आँखों में कोई शोख़ी ए इक़रार भी नहीं, बस्ती में कोई मूनिस ओ ग़म ख़्वार भी नहीं ग़ालिब का हाए कोई तरफ़दार भी नहीं, कश्ती बुरी तरह है भँवर में फँसी हुई लेकिन हमारे हाथ में पतवार भी नहीं, उन को सज़ाएँ दी हैं ज़माने ने बारहा मुल्ज़िम भी जो नहीं हैं गुनाहगार भी नहीं, तोहफ़ा अजब दिया है चमन को बहार ने फूलों का ज़िक्र क्या है कोई ख़ार भी नहीं, शायद तअ'ल्लुक़ात में अब इंजिमाद है पहली सी बात बात पे तकरार भी नहीं, शो पीस तो बना दिया हालात ने असद कोई मगर हमारा ख़रीदार भी नहीं..!! - [बिस्तर ए मर्ग पर ज़िंदगी की तलब](https://hindigazals.com/bistar-e-marg-par/): बिस्तर ए मर्ग पर ज़िंदगी की तलब जैसे ज़ुल्मत में हो रौशनी की तलब, कल तलक कमतरी जिन की तक़दीर थी आज उन को हुई बरतरी की तलब, उम्र भर अपनी पूजा कराता रहा अब हुई उस को भी बंदगी की तलब, चीख़ते थे बहुत हम हर एक बात पर हो गई अब मगर ख़ामुशी की तलब, प्यास दुनिया की जिस ने बुझाई सदा उस समुंदर को है तिश्नगी की तलब, चार पैसे जो आए ज़रा हाथ में उन को भी हो गई रहबरी की तलब, देख कर ये नुमाइश की दुनिया असद हम ने महसूस की सादगी की तलब..!! - [हर आह ग़म ए दिल की ग़म्माज़ नहीं होती](https://hindigazals.com/har-aah-gam-e-dil/): हर आह ग़म ए दिल की ग़म्माज़ नहीं होती और वाह मसर्रत का आग़ाज़ नहीं होती, जो रोक नहीं पाती अश्कों की रवानी को वो आँख ग़म ए दिल की हमराज़ नहीं होती, हर अश्क ए शहंशाही एक ताज नहीं बनता हर मलका ज़माने में मुमताज़ नहीं होती, मिलती है ख़मोशी से ज़ालिम को सज़ा यारो अल्लाह की लाठी में आवाज़ नहीं होती, एक ठोस हक़ीक़त है अल्फ़ाज़ के पैकर में ये शाइरी शाइर का एजाज़ नहीं होती, यूँ उम्र की क़ैंची ने पर मेरे कतर डाले अब लाख करूँ कोशिश परवाज़ नहीं होती, दौलत की बदौलत जो बँधती है असद सर पर दस्तार ए फ़ज़ीलत वो एज़ाज़ नहीं होती..!! - [हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही](https://hindigazals.com/ham-se-deewanon-ko/): हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही खोखली तहज़ीब की फ़र्ज़ानगी डसती रही, शोला ए नफ़रत तो भड़का एक लम्हे के लिए मुद्दतों फिर शहर को एक तीरगी डसती रही, मौत की नागिन से अब हरगिज़ वो डर सकता नहीं जिस को सारी उम्र ख़ुद ये ज़िंदगी डसती रही, मैं न जाने कितने जन्मों का हूँ प्यासा दोस्तो रह के दरिया में भी मुझ को तिश्नगी डसती रही, आप के होंटों पे जो मुद्दत से है छाई हुई दर्द में डूबी हुई वो ख़ामुशी डसती रही, एक तुम हो दुश्मनी भी रास आई है जिसे और एक मैं हूँ कि जिस को दोस्ती डसती रही, हर घड़ी चेहरे पे जो चेहरे लगाता ही रहा उम्र भर उस को असद बे चेहरगी डसती रही..!! - [राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है](https://hindigazals.com/raahen-dhuaan-dhuaan-hai/): राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है ये मंज़िल ए मुराद तो बस दर्द दर्द है, अपने पड़ोसियों को भी पहचानता नहीं महसूर अपने ख़ोल में अब फ़र्द फ़र्द है, इस मौसम ए बहार में ऐ बाग़बाँ बता चेहरा हर एक फूल का क्यूँ ज़र्द ज़र्द है ? - [ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी](https://hindigazals.com/gairat-e-ishq-salamat/): ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी वो भी दिन थे कि रह ओ रस्म ए वफ़ा ज़िंदा थी, क़ैस को दोश न दो रखियो न फ़रहाद को नाम इन्ही लोगों से मोहब्बत की अदा ज़िंदा थी, शहर ए बीमार के हर कूचा ओ बाम ओ दर पर हम भी मरते थे कि जब ख़ल्क़ ए ख़ुदा ज़िंदा थी, बुझ गईं शमएँ तो दम तोड़ गए झोंके भी जिस तरह ज़हर ए रक़ाबत से हवा ज़िंदा थी, याद ए अय्याम कि सहरा ए मोहब्बत में फ़राज़ जरस ए क़ाफ़िला ए दिल की सदा ज़िंदा थी..!! - [क्यूँ न फिर से दौर ए क़दीम में जाया जाए ?](https://hindigazals.com/kyun-na-fir-se-daur-e/): क्यूँ न फिर से दौर ए क़दीम में जाया जाए ? - [बहुत ख़राब रहा इस दौर मे](https://hindigazals.com/bahut-kharab-raha-is-daur-men/): बहुत ख़राब रहा इस दौर मे एक क़ौम का अच्छा होना, रास ना आया मनहूसों को क़ौम का इतना सच्चा होना, दोस्तों अच्छा भी नहीं होता इस दिल का यूँ बच्चा होना, सोगवार होता है बारिश मे अपने मकाँ का कच्चा होना, बात बात पे हर बार सही नहीं किसी एक नाम पे चर्चा होना..!! - [धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था](https://hindigazals.com/dhadkane-ban-ke-jo/): धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था क्या अजब शख़्स था जो मुझ में जिया करता था, नाख़ुन ए वक़्त ने हर नक़्श खुरच डाला है मेरा चेहरा मेंरी पहचान हुआ करता था, काई होंठों पे हमा वक़्त जमी रहती थी एक दरिया मेंरी आँखों में थमा करता था, एक तलातुम था तह ए आब सुकूत ए दरिया दिल ए ख़ामोश में एक शोर रहा करता था, मुर्तइश होता था जब ख़ामा ए अंगुश्त कभी क्या क्या क़िर्तास ए ख़ला पर मैं लिखा करता था, ज़ेहन ओ दिल इस लिए सरगर्म ए अमल रहते थे रहनुमाई मेंरी हर वक़्त ख़ुदा करता था, आबला पाइयाँ करती थीं अगर दिल शिकनी हौसला फिर रह ए उम्मीद को वा करता था, हो गया नज़्र बिल आख़िर मेंरी हक़गोई की एक सर जो कभी शानों पे सजा करता था, क्या हुआ आज ऐ सालिम वो शुऊर ए बालिग़ जो क़लम ज़द तेरी तहरीर किया करता था...!! - [किसी झूठीं वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता](https://hindigazals.com/kisi-jhuthin-wafa-se/): किसी झूठीं वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता मुझे घर काग़ज़ी फूलों से महकाना नहीं आता, मैं जो कुछ हूँ वही कुछ हूँ जो ज़ाहिर है वो बातिन है मुझे झूठे दर ओ दीवार चमकाना नहीं आता, मैं दरिया हूँ मगर बहता हूँ मैं कोहसार की जानिब मुझे दुनिया की पस्ती में उतर जाना नहीं आता, ज़र ओ माल ओ जवाहर ले भी और ठुकरा भी सकता हूँ कोई दिल पेश करता हो तो ठुकराना नहीं आता, परिंदा जानिब ए दाना हमेशा उड़ के आता है परिंदे की तरफ़ उड़ कर कभी दाना नहीं आता, अगर सहरा में हैं तो आप ख़ुद आए हैं सहरा में किसी के घर तो चल कर कोई वीराना नहीं आता, हुआ है जो सदा उस को नसीबों का लिखा समझा अदीम अपने किए पर मुझ को पछताना नहीं आता...!! - [मौसम बदल गए ज़माने बदल गए](https://hindigazals.com/mausam-badal-gaye-zamane/): मौसम बदल गए ज़माने बदल गए लम्हों में दोस्त बरसों पुराने बदल गए, दिन भर रहे जो मेरी मुहब्बत की छांव में वो लोग धूप ढलते ही ठिकाने बदल गए, कल जिनके लफ़्ज़ लफ़्ज़ में चाहत थी प्यार था लो आज उन्ही लबों के तराने बदल गए, एक शख़्स क्या गया मेरा शहर छोड़ कर जीने के सारे ढंग पुराने बदल गए...!! - [दिल की इस दौर में क़ीमत नहीं होती शायद](https://hindigazals.com/dil-ki-is-daur-men/): दिल की इस दौर में क़ीमत नहीं होती शायद सब की क़िस्मत में मुहब्बत नहीं होती शायद, फ़ैसला आखिरी लम्हे में बदल सकता है हारने वालों में हिम्मत नहीं होती शायद, कौन जज़्बात को बाज़ार में ले आया है ऐसी चीजों की तिज़ारत नहीं होती शायद, भागते दौड़ते इस शहर में कुछ लोगो को ख़ुद से मिलने की भी फ़ुर्सत नहीं होती शायद, जी हुजूरी मेरी फ़ितरत में जो शामिल होती मुझ से लोगो को शिकायत नहीं होती शायद, मैं भी औरों की तरह अपने लिए जीता अगर ग़म की यूँ मुझ पे इनायत नहीं होती शायद..!! - [सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी](https://hindigazals.com/safar-e-wafa-ki/): सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी कागज़ का घर बना के भी ख्वाहिश हवा की थी, थी जुगनुओं के शहर में तारों से दुश्मनी मा'शूक़ चाँद था और तमन्ना सुब्ह की थी, तुम ने तो इबादत का तमाशा बना दिया चाहत नमाज़ की थी पर आदत क़ज़ा की थी, मैनें तो ज़िन्दगी को तेरे नाम लिखा था शायद मगर कुछ और ही मर्ज़ी ख़ुदा की थी, दर्द ही देना था तो पहले बता देते हम को भी अज़ल से ही तमन्ना सज़ा की थी..!! - [ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है ?](https://hindigazals.com/ae-naye-saal-bata/): ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है ? - [भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे](https://hindigazals.com/bhookh-chehre-pe-liye/): भूख़ चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे, इन हवाओं से तो बारूद की बू आती है इन फ़ज़ाओं में तो मर जाएँगे सारे बच्चे, क्या भरोसा है समुंदर का ख़ुदा ख़ैर करे सीपियाँ चुनने गए हैं मेरे सारे बच्चे, हो गया चर्ख़ ए सितमगर का कलेजा ठंडा मर गए प्यास से दरिया के किनारे बच्चे, ये ज़रूरी है नए कल की ज़मानत दी जाए वर्ना सड़कों पे निकल आएँगे सारे बच्चे...!! - [बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं](https://hindigazals.com/baithen-hai-chain-se/): बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं, तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू ब हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं, अहद ए वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं, वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं, दुनिया हम अहल ए इश्क़ पे क्यूँ फेंकती है जाल हम ने तेरे फ़रेब में आना तो है नहीं, वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के फ़ारिस वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं...!! - [आपकी याद आती रही रात भर](https://hindigazals.com/aapki-yaad-aati-rahi/): आपकी याद आती रही रात भर चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर, गाह जलती हुई गाह बुझती हुई शम ए ग़म झिलमिलाती रही रात भर, कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन कोई तस्वीर गाती रही रात भर, फिर सबा साया ए शाख़ ए गुल के तले कोई क़िस्सा सुनाती रही रात भर, जो न आया उसे कोई ज़ंजीर ए दर हर सदा पर बुलाती रही रात भर, एक उम्मीद से दिल बहलता रहा एक तमन्ना सताती रही रात भर..!! - [कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे](https://hindigazals.com/kashti-hawas-hawaaon-ke/): कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए हुओं से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त की उड़ान है शोख़ी शबाब की उस छत पे आज तू ये कबूतर उतार दे, मैं इतना बदमाश नहीं यानि खुल के बैठ चुभने लगी है धूप स्वेटर उतार दे, दिन रात यूँ न ख़ौफ़ का गट्ठर उठाए फिर ये बोझ अपने सर से झटक कर उतार दे, उसकी ही आब ओ ताब से रौशन हो रेग ए दिल ये तेग़ मेरे सीने के अंदर उतार दे, चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें दीवार से पुराना कैलेंडर उतार दे, ये बात ज़र्फ़ की नहीं है मावरा ए ज़र्फ़ चाहे तो इस कुएँ में समुंदर उतार दे, लोगों के साथ मेरी लड़ाई है आजकल बेहतर है मुझ को शहर से बाहर उतार दे, तू ख़ुद तो सात पर्दों में मस्तूर है ज़फ़र मल्बूस तेरे आगे वो क्यूँकर उतार दे..!! - [पहले जो ख़ुद माँ के आंचल में छुप...](https://hindigazals.com/pahle-jo-khud-maan/): पहले जो ख़ुद माँ के आंचल में छुप जाया करती थी आज वो ख़ुद किसी को आंचल में छुपाया करती है, पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी आज पूरा हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है, पहले जो छोटी छोटी बातों पे रूठ जाया करती थी आज वो बड़ी बड़ी बातों को भी ज़हन में छुपाया करती है, माँ माँ कहते हुए जो सारा दिन हो पूरे घर में खेला करती थी आज वो लफ्ज़ ए माँ सुन कर धीरे से मुस्कुराया करती है, जिसका दस बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था आज वो सात बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती है, सारा दिन फ़ारिग रह कर भी ख़ुद को बिजी बताया करती थी आज पूरे दिन काम कर के भी काम चोर कहलाया करती है, ना जाने कब वो किसी माँ के बेटी, किसी की माँ बन गई ना जाने कब एक बेटी माँ के सफ़र में तब्दील हो गई..!! - [इस नये साल पे ये सदा है ख़ुदा से](https://hindigazals.com/is-naye-saal-pe/): इस नये साल पे ये सदा है ख़ुदा से सलामत रहे वतन हर एक बला से, न पलकों पे हों गम के कोई सितारे न अधूरे रहें अब ख़्वाब कोई हमारें, या इलाही मुहब्बत दिलों में जगा दे अम्न ओ अमान का शज़र खिला दे, या इलाही रहमतों की हर सू झड़ी हो राह ए ज़िन्दगी की न कोई कड़ी हो, रहें सब रंज ओ गम सदा अब परे ही अदु के सब अज़ायेम रह जाएँ धरे ही, नवाब उरूज़ पे हो नया साल अपना सारे जहाँ में रहे राज हर हाल अपना..!! - [एक मुसलसल से इम्तेहान में हूँ](https://hindigazals.com/ek-musalsal-se-imtehan/): एक मुसलसल से इम्तेहान में हूँ जब से रब मैं तेरे जहाँ में हूँ, सिर्फ़ इतना सा है क़ुसूर मेरा ! - [जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा..](https://hindigazals.com/jidhar-jaate-hai-sab/): जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता, ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता, मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता, बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की ख़ुश्बू तक नहीं आती ये वो शाख़ें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता, ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश ज़नो ये भी जला डालो कि सब बेघर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता..!! - [कहते हो तुम्हें हस्ब ए तमन्ना नहीं मिलता](https://hindigazals.com/kahte-ho-tumhe-hasb/): कहते हो तुम्हें हस्ब ए तमन्ना नहीं मिलता कम दाम लगाने से तो सौदा नहीं मिलता, वो धूप हक़ीक़त में कोई धूप नहीं है जिस से किसी इंसाँ को पसीना नहीं मिलता, ग़ुर्बत ने अता की है मुझे इल्म की दौलत मकतब नहीं जाता जो वज़ीफ़ा नहीं मिलता, सब मंसब ए फ़रहाद है तेशे के सबब से वर्ना ये उसे इश्क़ में रुत्बा नहीं मिलता, बदनाम ए ज़माना हूँ मैं सच्चाई की ख़ातिर अब तो मेंरे बच्चे को भी रिश्ता नहीं मिलता, अल्लाह ग़नी है वो जिसे चाहे नवाज़े मेहनत से हर एक शख़्स को पैसा नहीं मिलता..!! - [मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा](https://hindigazals.com/mere-jaise-ban-jaaoge/): मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा, हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे तावीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा, तन्हाई के झूले खोलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे आईने से तुम घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा, जब सूरज भी खो जाएगा और चाँद कहीं सो जाएगा तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा, बेचैनी बढ़ जाएगी और याद किसी की आएगी तुम मेरी ग़ज़लें गाअओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा..!! - [दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते](https://hindigazals.com/duniya-e-tasavvur-ham/): दुनिया ए तसव्वुर हम आबाद नहीं करते याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते, वो जौर ए मुसलसल से बाज़ आ तो गए लेकिन बेदाद ये क्या कम है बेदाद नहीं करते, साहिल के तमाशाई हर डूबने वाले पर अफ़सोस तो करते हैं इमदाद नहीं करते, कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास ए मोहब्बत है हम आह तो करते हैं फ़रियाद नहीं करते, सहरा से बहारों को ले आए चमन वाले और अपने गुलिस्ताँ को आबाद नहीं करते..!! - [कौन आता है बुझाने प्यास प्यासा देख कर](https://hindigazals.com/kaun-aata-hai-bujhaane/): कौन आता है बुझाने प्यास प्यासा देख कर घर चले जाते है सब के सब तमाशा देख कर, बात तेरी मान ली मैंने कभी टोका ही नहीं लौट आता हूँ तुझे बस बेतहाशा देख कर, ज़िन्दगी की मुश्किलें तो ना डरा पाई मगर डर गया हूँ आज मैं ख़ुद को डरा सा देख कर, मैं बड़ा तो हो गया पर माँ मेरी बदली ही नहीं आज वो रो पड़ी मुझ को रुआँसा देख कर..!! - [वो इश्क़ जो हम से रूठ गया...](https://hindigazals.com/wo-ishq-jo-ham/): वो इश्क़ जो हम से रूठ गया अब उस का हाल बताएँ क्या ? कोई मेहर नहीं कोई क़हर नहीं फिर सच्चा शेर सुनाएँ क्या ? एक हिज्र जो हम को लाहक़ है ता देर उसे दोहराएँ क्या ? - [एक हम दोनों को ये हालात नहीं कर सकते](https://hindigazals.com/ek-hum-dono-ko/): एक हम दोनों को ये हालात नहीं कर सकते ख़ुद को वग्फ़ ए मुज़ाफ़ात नहीं कर सकते, तेरे शहर में न रहने का ही नतीज़ा है कि चाह कर भी तुझसे मुलाक़ात नहीं कर सकते, वक़्त की धूप में जलता है मेरा दिल लेकिन अपने साये से भी खुल के बात नहीं कर सकते, रुसवाई ए ज़माना मेरे पाँव की ज़ंजीर बनी है वरना यूँ अपने प्यार को खैरात नहीं कर सकते, मेरी रातों का सहारा तो एक ख़्वाब ए सितारा है हम चाँद के साथ तो बसर रात नहीं कर सकते..!! - [लहू ने क्या तेरे ख़ंजर को दिलकशी दी है](https://hindigazals.com/lahoo-ne-kya-tere/): लहू ने क्या तेरे ख़ंजर को दिलकशी दी है कि हम ने ज़ख़्म भी खाए हैं दाद भी दी है, लिबास छीन लिया है बरहनगी दी है मगर मज़ाक़ तो देखो कि आँख भी दी है, हमारी बात पे किस को यक़ीन आएगा ख़िज़ाँ में हम ने बशारत बहार की दी है, धरा ही क्या था तेरे शहर ए बेज़मीर के पास मेरे शुऊर ने ख़ैरात ए आगही दी है, हयात तुझ को ख़ुदा और सर बुलंद करे तेरी बक़ा के लिए हम ने ज़िंदगी दी है, कहाँ थी पहले ये बाज़ार ए संग की रौनक़ सर ए शिकस्ता ने कैसी हमाहमी दी है, चराग़ हूँ मेरी किरनों का क़र्ज़ है सब पर बक़द्र ए ज़र्फ़ नज़र सब को रौशनी दी है, चली न फिर किसी मज़लूम के गले पे छुरी हमारी मौत ने कितनों को ज़िंदगी दी है, तेरे निसाब में दाख़िल थी आस्ताँ बोसी मेरे ज़मीर ने तालीम ए सरकशी दी है, कटेगी उम्र सफ़र जादा ए आफ़रीनी में तेरी तलाश ने तौफ़ीक़ ए गुमरही दी है, हज़ार दीदा तसव्वुर हज़ार रंग ए नज़र हवस ने हुस्न को बिसयार चेहरगी दी है..!! - [ये जो ज़िंदगी की किताब है](https://hindigazals.com/ye-jo-zindagi-ki/): ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है, कहीं एक हसीन सा ख़्वाब है कहीं एक जान लेवा अज़ाब है, कहीं छाँव है ये कहीं ये धूप है कहीं ये और ही कोई रूप है, कई चेहरे इस में छुपे हुए एक अजीब सी ये नक़ाब है, कहीं खो दिया कहीं पा लिया कहीं रो लिया कहीं गा लिया, कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी कहीं मेहरबाँ बे हिसाब है, कहीं आँसुओं की है दास्ताँ कहीं मुस्कुराहटों का है बयाँ, कहीं बरकतों की हैं बारिशें कहीं तिश्नगी बे हिसाब है, ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है..!! - [कहीं दिरहम कहीं डॉलर कहीं दीनार का झगड़ा](https://hindigazals.com/kahin-diraham-kahin-dollor/): कहीं दिरहम कहीं डॉलर कहीं दीनार का झगड़ा कहीं लहँगा कहीं चोली कहीं शलवार का झगड़ा, वतन में आज कल इस ज़ात से उस ज़ात को शिकवा लगा होने कहीं इस पार से उस पार का झगड़ा, वो मस्जिद हो कि मंदिर हो अदब हो या सियासत हो वही है जंग कुर्सी की वही दस्तार का झगड़ा, ज़माने की रविश से कर लिया है सब ने समझौता कोई मअनी नहीं रखता यहाँ किरदार का झगड़ा, किसी की टाँग टूटे या किसी अहमक़ का सर फूटे अगर होने लगे होश्यार से होश्यार का झगड़ा, यही इंसाँ खिलौनों के लिए बचपन में लड़ता है बड़े होने पे करता है दर ओ दीवार का झगड़ा, ये दुनिया ए मोहब्बत भी अनोखी चीज़ है साहब कभी इंकार पर नालिश कभी इक़रार का झगड़ा, छिड़ा जब उन के घर झगड़ा तो उन की अक़्ल चकराई जो सुलझाते रहे थे उम्र भर बाज़ार का झगड़ा, अमीरों की लड़ाई में कोई लज़्ज़त नहीं होती मज़ा आता है जब हो मुफ़लिस ओ नादार का झगड़ा, अगर जाहिल बने आलिम तो कर ताईद तू उस की ज़फ़र अच्छा नहीं होता है ये बेकार का झगड़ा..!! - [नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है](https://hindigazals.com/naam-se-gaandhi-ke-chidh/): नाम से गाँधी के चिढ़ और बैर आज़ादी से है नफ़रतों की खाद हैं उल्फ़त मगर खादी से है, आलिमों का इल्म से वो रब्त है इस दौर में रब्त धोबी के गधे का जिस तरह लादी से है, ख़्वाब ए ग़फ़लत से वही निस्बत है मेरी क़ौम को आशिक़ों का जो तअल्लुक़ दिल की बर्बादी से है, जैसे सय्यादों को सय्यादी से रहती है ग़रज़ काम उस्तादों को वैसे अपनी उस्तादी से है, बाप दादा के ही नुस्ख़े में है अपनी भी शिफ़ा हम को देरीना तअल्लुक़ ख़ाना दामादी से है, शर्म से होता नहीं है वास्ता बे शर्म को जो मुख़न्नस हो उसे क्या वास्ता शादी से है, दोस्तों की दोस्ती देखी है जब से ऐ ज़फ़र इश्क़ वीराने से है तो वहशत आबादी से है..!! - [कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे](https://hindigazals.com/kabhi-khamosh-baithoge-kabhi/): कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे मैं उतना ही याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे, कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुम से बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा न पाओगे, कभी दुनियाँ मुक़म्मल बन के आएगी निगाहों में कभी मेरी कमी दुनियाँ की हर शय में पाओगे, कहीं पर भी रहें हम और तुम मुहब्बत फिर मुहब्बत है तुम्हें हम याद आएँगे हमें तुम याद आओगे..!! - [और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने](https://hindigazals.com/aur-kya-karta-bayan/): और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने मेरी आँखें हो गई पुरनम तुम्हारे सामने, हम जुदाई में तुम्हारी मर भी सकते हैं मगर चाहते ये हैं कि निकले दम तुम्हारे सामने, जिसमें हम दोनों के बचपन की भी एक तस्वीर है ढूँढ कर लाया हूँ वो एल्बम तुम्हारे सामने, आते आते लब पे रह जाती हैं दिल की हसरतें खोलते हैं हम जुबां कम कम तुम्हारे सामने, तुम समन्दर की तरह आग़ोश वा करते नहीं हम तो बन जाते हैं मौज ए यम तुम्हारे सामने, किस लिए तुम नींद में शरमा रहे हो इस तरह ख़्वाब में क्या आ गए हैं हम तुम्हारे सामने..!! - [तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ](https://hindigazals.com/talash-e-zannat-o/): तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ ज़मीं पे रोज़ मनाता है कायनात का दुःख, तमाम दिन की मुसीबत तो बाँट ली हम ने कभी कहा नहीं अपनी अपनी रात का दुःख, गए दिनों का कोई ख्वाब दफ़न है शायद अब भी आँख से रिसता है बाकियात का दुःख, न जाने मालिक ए कुन किस तरह निभाता है ? - [जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया](https://hindigazals.com/jab-bhi-hansi-ki/): जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया बे लौस दोस्ती का बड़ा ही मज़ा लिया, एक लम्हा ए सुकूँ तो मिला था नसीब से लेकिन किसी शरीर सदी ने चुरा लिया, काँटे से भी निचोड़ ली ग़ैरों ने बू ए गुल यारों ने बू ए गुल से भी काँटा बना लिया, असलम बड़े वक़ार से डिग्री वसूल की और इस के बाद शहर में ख़्वांचा लगा लिया..!! - [कौन है नेक ? कौन बद है यहाँ ?](https://hindigazals.com/kaun-hai-nek/): कौन है नेक ? कौन बद है यहाँ ? किसी के हाथों में ये सनद है कहाँ ? - [बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत](https://hindigazals.com/buri-hai-kijiye-nafarat/): बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत मिटाए दिल से सदियों की अदावत चलो हम एक हो जाएँ, वो क्या दिन थे जब हम दो जिस्म एक जाँ होते थे किस ने घोल दी हम में सियासत चलो हम एक हो जाए, मुहब्बत की जमीं पे बीज बोया किसने नफ़रत का न हो फिर से अमानत में खयानत चलो हम एक हो जाएँ, वो बाबर था कि औरंगजेब सारे बन के रह गए हिकायत चलो हम एक हो जाएँ, अगर मैं परेशान हूँ तो तुम भी तो परेशान हो करे तो किस से करे शिकायत चलो हम एक हो जाएँ..!! - [हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती](https://hindigazals.com/hamesha-sath-rahne-ki/): हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती जो लम्हा मिल गए जी लो, रियाज़त कुछ नहीं होतीं, जिसे महरूमियाँ मिली हों वही जान सकता है ज़बानी हौसला, झूठी मुरव्वत कुछ नहीं होती, कई रिश्तों को जब परखा, नतीजा एक ही निकला ज़रूरत ही सब कुछ है, मुहब्बत कुछ नहीं होती, किसी ने छोड़ के जाना हो तो फिर छोड़ ही जाता है बिछड़ना हो तो फिर सदियों की मुहब्बत कुछ नहीं होती, ताअल्लुक़ टूट जाए तो सफीने डूब जाते हैं सब कहने की बातें हैं, हकीक़त कुछ नहीं होती..!! - [तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?](https://hindigazals.com/teri-zulfen-bikhrane-ko/): तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ? तेरे आँचल के उड़ने को सबा कह दूँ तो कैसा हो ? - [एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए](https://hindigazals.com/ek-pal-men-ek/): एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए, भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हम से पूछिए, आग़ाज़ ए आशिक़ी का मज़ा आप जानिए अंजाम ए आशिक़ी का मज़ा हम से पूछिए, जलते दियों में जलते घरों जैसी ज़ौ कहाँ सरकार रौशनी का मज़ा हम से पूछिए, वो जान ही गए कि हमें उन से प्यार है आँखों की मुख़बिरी का मज़ा हम से पूछिए, हँसने का शौक़ हम को भी था आप की तरह हँसिए मगर हँसी का मज़ा हम से पूछिए, हम तौबा कर के मर गए बेमौत ऐ ख़ुमार तौहीन ए मयकशी का मज़ा हम से पूछिए..!! - [चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए](https://hindigazals.com/chauk-chauk-uthti-hai/): चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए कौन देता है ये गलियों में सदा रात गए, ये हक़ाएक़ की चटानों से तराशी दुनिया ओढ़ लेती है तिलिस्मों की रिदा रात गए, चुभ के रह जाती है सीने में बदन की ख़ुश्बू खोल देता है कोई बंद ए क़बा रात गए, आओ हम जिस्म की शम्ओं से उजाला कर लें चाँद निकला भी तो निकलेगा ज़रा रात गए, तू न अब आए तो क्या आज तलक आती है सीढ़ियों से तिरे क़दमों की सदा रात गए..!! - [ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का](https://hindigazals.com/zamana-aaj-nahi-dagmaga/): ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का सम्भल भी जा कि अभी वक़्त है सम्भलने का, बहार आये चली जाये फिर चली आये मगर ये दर्द का मौसम नहीं बदलने का, ये ठीक है कि सितारों पे घूम आये हैं मगर किसे है सलिक़ा ज़मीं पे चलने का, फिरे हैं रातों को आवारा हम तो देखा है गली गली में समाँ चाँद के निकलने का तमाम नशा-ए-हस्ती तमाम कैफ़ ए वजूद वो एक लम्हा तेरे जिस्म के पिघलने का..!! - [ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो](https://hindigazals.com/zindagi-ye-to-nahi/): ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा ही न हो, दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी चौंक उठता हूँ कहीं तू ने पुकारा ही न हो, कभी पलकों पे चमकती है जो अश्कों की लकीर सोचता हूँ तेरे आँचल का किनारा ही न हो, ज़िंदगी एक ख़लिश दे के न रह जा मुझ को दर्द वो दे जो किसी तरह गवारा ही न हो, शर्म आती है कि उस शहर में हम हैं कि जहाँ न मिले भीक तो लाखों का गुज़ारा ही न हो..!! - [तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए](https://hindigazals.com/tujh-se-bichhad-ke/): तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए फिर जो भी दर मिला है उसी दर के हो गए, फिर यूँ हुआ कि ग़ैर को दिल से लगा लिया अंदर वो नफ़रतें थीं कि बाहर के हो गए, क्या लोग थे कि जान से बढ़ कर अज़ीज़ थे अब दिल से महव नाम भी अक्सर के हो गए, ऐ याद यार तुझ से करें क्या शिकायतें ऐ दर्द ए हिज्र हम भी तो पत्थर के हो गए, समझा रहे थे मुझ को सभी नासेहान ए शहर फिर रफ़्ता रफ़्ता ख़ुद उसी काफ़र के हो गए, अब के न इंतिज़ार करें चारागर कि हम अब के गए तो कू ए सितमगर के हो गए, रोते हो एक जज़ीरा ए जाँ को फ़राज़ तुम देखो तो कितने शहर समुंदर के हो गए..!! - [तुझे है मश्क़ ए सितम का मलाल वैसे ही](https://hindigazals.com/tujhe-hai-mashq-e-sitam/): तुझे है मश्क़ ए सितम का मलाल वैसे ही हमारी जान थी जाँ पर वबाल वैसे ही, चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही, हम आ गए हैं तह ए दाम तो नसीब अपना वगरना उस ने तो फेंका था जाल वैसे ही, मैं रोकना ही नहीं चाहता था वार उस का गिरी नहीं मेरे हाथों से ढाल वैसे ही, ज़माना हम से भला दुश्मनी तो क्या रखता सो कर गया है हमें पाएमाल वैसे ही, मुझे भी शौक़ न था दास्ताँ सुनाने का फ़राज़ उस ने भी पूछा था हाल वैसे ही..!! - [वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं](https://hindigazals.com/wo-log-hi-har-daur/): वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं जो इश्क़ में तालिब नहीं मतलूब रहे हैं, तूफ़ान की आवाज़ तो आती नहीं लेकिन लगता है सफ़ीने से कहीं डूब रहे हैं, उन को न पुकारो ग़म ए दौराँ के लक़ब से जो दर्द किसी नाम से मंसूब रहे हैं, हम भी तेरी सूरत के परस्तार हैं लेकिन कुछ और भी चेहरे हमें मर्ग़ूब रहे हैं, अल्फ़ाज़ में इज़हार ए मोहब्बत के तरीक़े ख़ुद इश्क़ की नज़रों में भी मायूब रहे हैं, इस अहद ए बसीरत में भी नक़्क़ाद हमारे हर एक बड़े नाम से मरऊब रहे हैं, इतना भी न घबराओ नई तर्ज़ ए अदा से हर दौर में बदले हुए उस्लूब रहे हैं..!! - [मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना](https://hindigazals.com/mera-khamosh-rah-kar/): मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना ज़बाँ से कुछ न कहना देख कर आँसू बहा देना, नशेमन हो न हो ये तो फ़लक का मश्ग़ला ठहरा कि दो तिनके जहाँ पर देखना बिजली गिरा देना, मैं इस हालत से पहुँचा हश्र वाले ख़ुद पुकार उठे कि कोई फ़रियाद वाला आ रहा है रास्ता देना, इजाज़त हो तो कह दूँ क़िस्सा ए उल्फ़त सर ए महफ़िल मुझे कुछ तो फ़साना याद है कुछ तुम सुना देना, मैं मुजरिम हूँ मुझे इक़रार है जुर्म ए मोहब्बत का मगर पहले तो ख़त पर ग़ौर कर लो फिर सज़ा देना, हटा कर रुख़ से गेसू सुब्ह कर देना तो मुमकिन है मगर सरकार के बस में नहीं तारे छुपा देना, ये तहज़ीब ए चमन बदली है बैरूनी हवाओं ने गरेबाँ चाक फूलों पर कली का मुस्कुरा देना, क़मर वो सब से छुप कर आ रहे हैं फ़ातिहा पढ़ने कहूँ किस से कि मेरी शम ए तुर्बत को बुझा देना..!! - [ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल](https://hindigazals.com/ae-mere-ham-nashin/): ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं, बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काँटों पे भी हक़ हमारा नहीं, आज आए हो तुम कल चले जाओगे ये मोहब्बत को अपनी गवारा नहीं, उम्र भर का सहारा बनो तो बनो दो घड़ी का सहारा सहारा नहीं, दी सदा दार पर और कभी तूर पर किस जगह मैं ने तुम को पुकारा नहीं ? - [एक अजनबी ख़याल में ख़ुद से जुदा रहा](https://hindigazals.com/ek-ajnabi-khyal-me/): एक अजनबी ख़याल में ख़ुद से जुदा रहा नींद आ गई थी रात मगर जागता रहा, संगीन हादसों में भी हँसती रही हयात पत्थर पे एक गुलाब हमेशा खिला रहा, दुनिया को उस निगाह ने दीवाना कर दिया मैं वो सितम ज़रीफ़ कि बस देखता रहा, एक अजनबी महक सी लहू में रची रही नग़्मा सा जान ओ तन में कोई गूँजता रहा, अब जा के ये खुला कि हर एक शख़्स दोस्तो हर शख़्स को लिबास से पहचानता रहा, फ़िक्र ए सुख़न में रात जो आया ख़याल ए मीर ता देर डाइरी पे क़लम काँपता रहा, साग़र तमाम उम्र की गर्दिश के बावजूद मैं उस निगाह ए नाज़ से ना आश्ना रहा..!! - [आइने का मुँह भी हैरत से खुला रह जाएगा](https://hindigazals.com/aaeene-ka-munh-bhi/): आइने का मुँह भी हैरत से खुला रह जाएगा जो भी देखेगा तुझे वो देखता रह जाएगा, हम ने सब कुछ तज दिया तेरी रिफ़ाक़त के लिए तुझ से बिछड़े तो हमारे पास क्या रह जाएगा ? - [मोहब्बत के सिवा हर्फ़ ओ बयाँ से कुछ नहीं होता](https://hindigazals.com/mohabbat-ke-siwa-harf/): मोहब्बत के सिवा हर्फ़ ओ बयाँ से कुछ नहीं होता हवा साकिन रहे तो बादबाँ से कुछ नहीं होता, चलूँ तो मस्लहत ये कह के पाँव थाम लेती है वहाँ जाना भी क्या हासिल जहाँ से कुछ नहीं होता, ज़रूरतमँद है सैद अफगनी मश्शाक़ हाथों की फ़क़त यकजाई ए तीर ओ कमाँ से कुछ नहीं होता, मुसलसल बारिशें भी सब्ज़ा ओ गुल ला नहीं सकतीं ज़मीं जब बेनुमू हो आसमाँ से कुछ नहीं होता, तलाफ़ी के लिए दरकार है आईना साज़ी भी शिकस्त ए शीशा पर ज़िक्र ए ज़बाँ से कुछ नहीं होता, ख़ला में तीर अंदाज़ी से क्या गुलज़ार पाओगे मयस्सर इस जुनून ए राएगाँ से कुछ नहीं होता..!! - [जब से उनका ख्याल रखा है](https://hindigazals.com/jab-se-unka-khyal/): जब से उनका ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, उन पर दिल ये आ गया वरना उन में क्या कमाल रखा है ? - [कहो तो आज दिल ए बे क़रार कैसे हो ?](https://hindigazals.com/kaho-to-aaj-dil/): कहो तो आज दिल ए बे क़रार कैसे हो ? शब ए अलम के सताए नज़ार कैसे हो ? हवस यही है कि पूछे वो आ के हम से कभी हमारी दीद के उम्मीद वार कैसे हो ? - [भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है](https://hindigazals.com/bhiga-hua-hai-aanchal/): भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है फैला हुआ है काजल आँखों में भी नमी है, बरसेगा आज खुल कर बेचैन ओ मुज़्तरिब हूँ छाया है ग़म का बादल आँखों में भी नमी है, कैसी अजीब हालत तारी हुई है दिल पर हूँ मुंतज़िर मुसलसल आँखों में भी नमी है, मुद्दत के बाद आया दुनिया ए दिल में कोई सहरा हुआ है जल थल आँखों में भी नमी है, ये ख़ुद सुपुर्दगी का है एक अजीब आलम ख़्वाबों का जैसे जंगल आँखों में भी नमी है, महसूस हो रहा है इक जाल में हूँ कब से ये इश्क़ है कि दलदल आँखों में भी नमी है, एक हर्फ़ ए हक़ के बदले चढ़ते हैं कितने सूली शहर ए वफ़ा है मक़्तल आँखों में भी नमी है, एक दिन सुख़न की मलिका बन जाओगी सबीला फिर आज क्यूँ हो बे कल आँखों में भी नमी है..!! - [अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग](https://hindigazals.com/apne-saye-se-bhi/): अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग जाने अनजाने में गुनाह कर जाते है लोग, लिखी होती है उम्र ए बेहिसाब भी कभी मौत के खौफ़ से कई बार मर जाते है लोग, होता नहीं आसान हर एक वादा निभाना दे कर जुबां भी अक्सर मुकर जाते है लोग, उम्रे गुज़र जाती है कभी आदतों के सुधरने में कभी एक ठोकर से भी सुधर जाते है लोग..!! - [ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा](https://hindigazals.com/zindagi-ne-liye-hai/): ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा सदा ही साथ रहा है गम ए दौराँ मेरा, दिन ओ रात रहता है दिल परेशाँ मेरा फक़त उस पे ही नहीं है हाल अयाँ मेरा, उस से बातें तो बहुत कहनी होती है लेकिन रूबरू साथ नहीं देता जुबां मेरा, जो शख्स मुझे सारी दुनियाँ से अजीज़ था वही लूट कर ले गया सारा जहाँ मेरा, ज़ालिम आंधियाँ हर सिम्त मंडरा रही है कहीं गिरा न दें ये आशियाँ मेरा..!! - [दुनियाँ की बुलंदी के तलबगार नहीं हैं](https://hindigazals.com/duniya-ki-bulandi-ke/): दुनियाँ की बुलंदी के तलबगार नहीं हैं हम अहल ए ख़िरद तेरे परस्तार नहीं हैं, बरगद की तरह क़दम अपने जमाए है हर आन जो गिर जाए वो दीवार नहीं हैं, हैं दफ़न कई नस्लें इसी खाक़ में यारों हम अहल ए वतन हैं कोई ग़द्दार नहीं हैं, जो दुश्मनों को भी यहाँ सीने से लगाएँ हम जैसे कोई साहब ए किरदार नहीं हैं, चेहरों की ये ज़र्दी है फ़क़त खौफ़ ए खुदा की आलिम ये वली अल्लाह हैं बीमार नहीं हैं..!! - [जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे](https://hindigazals.com/jis-waqt-validain-ne/): जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे उस वक़्त कितने खून के आँसू बहाए होंगे, मुंसफ सज़ा कहाँ ज़ालिमों को सुनाएगा जिसने गरीब ए शहर के सपने चुराए होंगे, दिखा अजीब शहर के हाकिम का मशगला इन्सान क़त्ल कर के कबूतर उड़ाए होंगे, ज़ालिम हवाओं से अब ये ज़रूरी है पूछना क्यूँ राह के दीये सभी उसने बुझाए होंगे ? - [बताओ दिल की बाज़ी में भला क्या बात गहरी थी ?](https://hindigazals.com/bataao-dil-ki-baazi/): बताओ दिल की बाज़ी में भला क्या बात गहरी थी ? कहा, यूँ तो सभी कुछ ठीक था पर मात गहरी थी, सुनो, बारिश कभी ख़ुद से कोई बढ़ के देखा है ? - [अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो](https://hindigazals.com/apne-andaj-men-auro/): अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो सब बला लगते हैं तुम रद ए बला लगते हो, किस क़दर मान से रोका था उसे जाने से जिसने पूछा है जवाबां मेरे क्या लगते हो ? - [नाम ए मुहब्बत का यही इस्तिआरा है](https://hindigazals.com/naam-e-muhabbat-ka/): नाम ए मुहब्बत का यही इस्तिआरा है जो नहीं है हासिल वही होता हमारा है, माज़ी में छोड़ आये जिस मोहल्ले को दौर ए हाज़िर में वही होता गुज़ारा है, लब ए महबूब बेशक़ रहे ख़ामोश मगर आँखें समझतीं हैं कि आँखों ने पुकारा है, नाम देती है दुनियाँ जिसे शादी का यहाँ उसने भी बहुतो को मौत के घाट उतारा है..!! - [कुछ इस लिए भी तह ए आसमान मारा गया](https://hindigazals.com/kuch-is-liye-bhi/): कुछ इस लिए भी तह ए आसमान मारा गया मैं अपने वक़्त से पहले यहाँ उतारा गया, ये कैसे मोड़ पे ले आया उम्र का दरिया कि पहले नाव शिकस्ता थी अब किनारा गया, गुज़र रहा था मैं जब आसमां बनाते हुए कहीं से चाँद कहीं से मेरा सितारा गया, ये कार ए उम्र तो एक कार ए रायेगानी था मगर वो दिन जो तुझे देख कर गुज़ारा गया, चिराग़ बुझने लगा तो हवा ये कहने लगी कि उसके हाथ से अब आख़िरी सहारा गया, कुछ ऐसे ख्वाब मेरे गिर गए थे रास्तों में सो मैं जिधर से भी गुज़रा वहां दोबारा गया..!! - [हमें ये खौफ़ था एक दिन यहीं से टूटेंगे](https://hindigazals.com/hamen-ye-khauf-tha/): हमें ये खौफ़ था एक दिन यहीं से टूटेंगे हमारे ख्वाब तुम्हारी तहीं से टूटेंगे, बददुआ तो नहीं है, मगर लिख लो तुम हमें जो तोड़ रहे हैं आज, वो भी टूटेंगे, तुम्हारे जैसे सितारे फ़लक से टूटते हैं हमारी पहुँच ज़मीं तक, ज़मीं से टूटेंगे, जो दे रहे है मुहब्बत में मशवरे मुझको ये सब ज़हीन किसी माह जबीं से टूटेंगे, जहाँ से मैंने लगाई है गाँठ रिश्तों में मुझे ये वहम है रिश्ते वहीँ से टूटेंगे..!! - [ये ज़हमत भी तो रफ़्ता रफ़्ता रहमत हो ही जाती है](https://hindigazals.com/ye-jahmat-bhi-to/): ये ज़हमत भी तो रफ़्ता रफ़्ता रहमत हो ही जाती है मुसलसल गम से गम सहने की आदत हो ही जाती है, मसीहा हो अगर तुम सा तो ज़रूरत क्या है मरहम की कि काँटों से भी तो ज़ख्मों की जराहत हो ही जाती है, ताअल्लुक़ जिन से हो गिला उन पे आया ही करता है मुहब्बत जिन से उनसे शिकायत हो ही जाती है, ये ज़रूरी तो नहीं सूरज सवा नेज़े पर आ जाए बदल जाए कोई अपना तो क़यामत हो ही जाती है..!! - [दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के](https://hindigazals.com/door-khwabon-se-muhabbat/): दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के जैसे गुजरेगी गुजारेंगे गुज़ारा कर के, अब तो दावा भी वो पहले सा नहीं है हम को क्या करें इश्क मेरी जान दोबारा कर के, कैसी उठती है कसक वही समझ सकता है जिस ने देखा हो मुहब्बत में खसारा कर के, तुम से कुछ और ताअल्लुक़ तो तो नहीं इस के सिवा ताने देते है मुझे लोग तुम्हारा कह के, जान का रोग बनेगा वही लिख देता हूँ जिसको चाहोगे बहुत जान से प्यारा कर के, तुम समझते हो भूलाने से कोई भूल सकता है ? - [लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल](https://hindigazals.com/likhte-hai-dil-ka/): लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल तुम आते हो बहुत याद, सुबह ओ शाम मुसलसल, थक जाते हैं कर के कोशिशे सुलझते नहीं हैं गम होते हैं कुछ यूँ नाकाम सुबह ओ शाम मुसलसल, हम लाख जतन कर लें खुल ही जाते हैं बे धड़क दिल के ये दर ओ बाम सुबह ओ शाम मुसलसल, अब तो जंग सी छिड़ गई है दिल और दिमाग की होते हैं कुछ यूँ बे आराम सुबह ओ शाम मुसलसल, मुमकिन नहीं यारो कि अब होश में आएँ पीते हैं भर भर के जाम सुबह ओ शाम मुसलसल..!! - [ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं](https://hindigazals.com/zaabte-aur-hi-misdaaq/): ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं आजकल सिदक़ ओ सफ़ा ताक़ पे रखे हुए हैं, वो जो ख़ुद मारका ए इश्क़ में उतरे भी नहीं शिकवा पस्पाई का उश्शाक़ पे रखे हुए हैं, बाँध रखे है मोहब्बत ने अज़ल से हमको सो तवज्जोह इसी मीसाक़ पे रखे हुए हैं, दख़्ल आँखों का उलझने में बहुत है लेकिन तोहमतें सब दिल ए मुश्ताक़ पे रखे हुए हैं, जाने कब सिलसिला ए ख़ैर ओ ख़बर का हो ज़ुहूर ध्यान हम अन्फ़ुस ओ आफ़ाक़ पे रखे हुए हैं, देखिए कौन सा मफ़्हूम लिया जाएगा बात कर के नज़र इतलाक़ पे रखे हुए हैं, ताबिश ए शौक़ से अल्फ़ाज़ हैं रौशन गुलज़ार या सितारे कफ़ ए औराक़ पे रखे हुए हैं..!! - [कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं](https://hindigazals.com/kitni-sadiyan-naa-rasi/): कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं बे जहत नस्लों की आवाज़ें ख़ला में खो गईं, रंग ओ बू का शौक़ आशोब ए हवा में ले गया तितलियाँ घर से निकल कर इब्तिला में खो गईं, कौन पस मंज़र में उजड़े पैकरों को देखता शहर की नज़रें लिबास ए ख़ुशनुमा में खो गईं, मुंतज़िर चौखट पे ताबीरों के शहज़ादे रहे ख़्वाब की शहज़ादियाँ क़स्र ए दुआ में खो गईं, साँप ने उनके नशेमन में बसेरा कर लिया पेड़ से चिड़ियों की महकारें फ़ज़ा में खो गईं, कोई क्या बाब ए अमाँ आफ़तज़दों पर खोलता दस्तकें गुलज़ार तूफ़ाँ की सदा में खो गईं..!! - [जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है](https://hindigazals.com/jo-hoga-sab-thik/): जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है मुँह देखे की बातें है सब किस ने किस को रोना है, दिल किस से दुःख बाँटे अपना किस से अपनी बात कहे दिल ही है एक जिस ने यारो दर्द मुक़म्मल ढोना है, हम भी मिट्टी तुम भी मिट्टी पुतले है सब मिट्टी के अव्वल मिट्टी आखिर मिट्टी मिट्टी ही में जाना है, मिल कर बैठे नफ़रत छोड़े प्यार वफ़ा की बात करे बाग़ ए वफ़ा में हमने यारो बीज उल्फ़त का बोना है, ऐसा काम करे ही क्यूँ हम जिसको कर के पछताए पहले दाग लगाएं क्यूँ हम जब अश्को से धोना है..!! - [फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए](https://hindigazals.com/fir-aaeena-e-alam/): फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए फिर अपनी नज़र शायद ताहद्द ए नज़र जाए, सहरा पे लगे पहरे और क़ुफ़्ल पड़े बन पर अब शहर बदर हो कर दीवाना किधर जाए, ख़ाक ए रह ए जानाँ पर कुछ ख़ूँ था गिरौ अपना इस फ़स्ल में मुमकिन है ये क़र्ज़ उतर जाए, देख आएँ चलो हम भी जिस बज़्म में सुनते हैं जो ख़ंदा ब लब आए वो ख़ाक बसर जाए, या ख़ौफ़ से दर-गुज़रें या जाँ से गुज़र जाएँ मरना है कि जीना है एक बात ठहर जाए..!! - [नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं](https://hindigazals.com/nasib-aazmane-ke-din/): नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं, जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है सब उन को सुनाने के दिन आ रहे हैं, अभी से दिल ओ जाँ सर ए राह रख दो कि लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं, टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं, सबा फिर हमें पूछती फिर रही है चमन को सजाने के दिन आ रहे हैं, चलो फ़ैज़ फिर से कहीं दिल लगाएँ सुना है ठिकाने के दिन आ रहे हैं..!! - [हँसी में हक़ जता कर घर जमाई छीन लेता है](https://hindigazals.com/hansi-me-haque-jata/): हँसी में हक़ जता कर घर जमाई छीन लेता है मेरे हिस्से की टूटी चारपाई छीन लेता है, उसे मौक़ा मिले तो पाई पाई छीन लेता है यहाँ भाई की ख़ुशियाँ उस का भाई छीन लेता है, भला फ़ुर्सत किसे है जो यहाँ रिश्तों को पहचाने ये दौर ए ख़ुद फ़रेबी आश्नाई छीन लेता है, जहालत में वो कामिल है मोअल्लिम बन गया कैसे पढ़ाता है कि बच्चों की पढ़ाई छीन लेता है ? - [दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं](https://hindigazals.com/darakhton-se-gire-sukhe/): दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं जिन्हें कल तक मुहब्बत थी वो अब इंकार करते हैं, अज़ब दस्तूर ए दुनियाँ है, यहाँ मंतक निराली है रसाई जिनकी मुश्किल हो उन्हीं से प्यार करते हैं, कभी तो ऐ ज़िन्दगी रुक जा कोई है मुन्तज़िर तेरा तेरी खातिर कज़ा से झगड़ा जो हर बार करते हैं, यहाँ से जाने वाले चले जाते मगर पीछे जो रहते हैं उन्ही को याद कर कर के वो दिन शुमार करते हैं, खिज़ां की रुत में जाते हैं पलट कर फिर नहीं आते यहाँ परिंदे भी तो फूलों से अज़ब ही प्यार करते हैं, अगर फिर भी कोई मुसाफ़िर यहाँ लौट आये तो स्वागत उनके आने का हम ही हर बार करते हैं..!! - [ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से](https://hindigazals.com/zakhmon-ko-rafoo-kar/): ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से ख़्वाबों की कोई दुनिया आबाद करें फिर से, मुद्दत हुई जीने का एहसास नहीं होता दिल उन से तक़ाज़ा कर बेदाद करें फिर से, मुजरिम के कटहरे में फिर हम को खड़ा कर दो हो रस्म ए कोहन ताज़ा फ़रियाद करें फिर से, ऐ अहल ए जुनूँ देखो ज़ंजीर हुए साए हम कैसे उन्हें सोचो आज़ाद करें फिर से, अब जी के बहलने की है एक यही सूरत बीती हुई कुछ बातें हम याद करें फिर से..!! - [सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो](https://hindigazals.com/saj-sanvar-kar-raha/): सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो झुमके, बालियाँ, पाज़ेब पहना करो अच्छी लगती हो, मुस्कुराते लब हैं तुम्हारे ख़ुशबू भरे गुलाब जैसे इन से हर वक़्त महका करो अच्छी लगती हो, कोयल को ज़ेब नहीं देता यूँ ख़ामोश रहना तुम कुछ न कुछ कहा करो अच्छी लगती हो, जुल्फें हैं तुम्हारी रिमझिम अब्रकी इन्हें यूँ खोले रखा करो अच्छी लगती हो, तुम्हारी क़ुर्बतें हैं मेरे लिए सुकून ए जाँ जानाँ मेरे पहलू में बैठा करो अच्छी लगती हो, वज़ूद है तुम्हारा जैसा क़ौस ए क़ुज़हमेरी जाँ ! - [ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर](https://hindigazals.com/khijaan-rasidaa-chaman-me/): ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर खिला खिला सा गुलाब देखा, गज़ब का हुस्न ओ शबाब देखा ज़मीन पर मैंने माहताब देखा, किसी के रुख पे परी सा गेसू किसी के रुख पे नक़ाब देखा, वो आये मिलने यकीन कर लो कि मेरी आँखों ने ख़्वाब देखा, जो टूटी तौबा तो छलके सागर जो उनको पीते शराब देखा, न देखो रोज़ ए हिसाब या रब ज़मीं पे जितना अज़ाब देखा, मिलेगा इंसाफ़ कैसे किसी को सदाक़तों पे नक़ाब देखा..!! - [आसमान से इनायतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं](https://hindigazals.com/aasmaan-se-inayaten-naa/): आसमान से इनायतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं मुहब्बतों से राहतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, हमें आशिक़ी में सच मिला हमें ज़िन्दगी में सब मिला मगर बेवफ़ाई की आदतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, इधर तू दुआ में लगा रहा उधर मैं दुआ में लगा रहा पर मन्नतों से हाजतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, थी आरज़ू कभी साहिलों पे तेरे साथ साथ हम चल सकें पर समंदरों से इजाज़तें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, जिस ज़िन्दगी की ख्वाहिशों में सौ रतजगो में सजूद किये उस ज़िन्दगी की बशारतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, हसरतों के दीयों को आग कभी तू ने दी कभी मैं ने दी मगर रौशनी की अलामतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, न तो तेरे दर्द रुके कहीं न मेरे ज़ख्म भरे कभी सब्र ओ शुक्र की हालतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, तेरी मंज़िलें कहीं और थी मेरी मंज़िलें कहीं और थी किसी एक सिम्त की मुसाफ़तें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, तू ठहर गया किसी और के घर मैं रुक गया किसी और के दर मन पसंद सी चाहतें न तुझे मिलीं न मुझे मिलीं, हमारी पुरखुलुस नीयतों से मंज़िलें क्यूँ छीन गई ? - [किस क़दर साहब ए क़िरदार समझते हैं मुझे](https://hindigazals.com/kis-qadar-sahab-e/): किस क़दर साहब ए क़िरदार समझते हैं मुझे मुझको था ज़ो'म मेरे यार समझते हैं मुझे, अब तो कुछ और भी गहरी हैं मेरी बुनियादें अब तो घर वाले भी दीवार समझते हैं मुझे, मैं तो बाज़ार में उतरा था कि रौनक है यहाँ और ये लोग ख़रीदार समझते हैं मुझे, ऐ मेरे इश्क़ ! - [बार ए गम ए हयात उठाया तो रो पड़े](https://hindigazals.com/baar-e-gam-ehayat/): बार ए गम ए हयात उठाया तो रो पड़े जब ज़ीस्त ने मजाक उड़ाया तो रो पड़े, रहता है सोगवार ये दिल जाने किस लिए हमको यही ख्याल जो आया तो रो पड़े, लहज़े की तल्खियाँ वो सुनी हैं कि बस हमें जब प्यार से किसी ने बुलाया तो रो पड़े, फूलों को यूँ ही देख के काँटों के दरम्याँ हमने भी गम ख़ुशी में मिलाया तो रो पड़े, तन्हाई के अँधेरे में हमने जो आज शब यादों का एक चिराग़ जलाया तो रो पड़े, ढलते ही जा रहे हैं यहाँ रफ़्तगाँ में लोग हमने भी जब किसी को भूलाया तो रो पड़े, लिखे गए थे हम किसी सहरा की रेत पर इन बेरहम हवाओं ने जब मिटाया तो रो पड़े..!! - [बताओ कौन कहता है ? मुहब्बत बस कहानी है](https://hindigazals.com/bataao-kaun-kahta-hai/): बताओ कौन कहता है ? - [नींद नहीं आती कितनी अकेली हो गई](https://hindigazals.com/neend-nahi-aati-kitni/): नींद नहीं आती कितनी अकेली हो गई रफ़ू करते करते ज़िन्दगी पहेली हो गई, ये हसरतें भी ख़्वाब भी लगने लगे ऐसे चाय जैसे कप में देर की उड़ेली हो गई, सोता हूँ जागता हूँ रहती है साथ साथ ये ग़म की दुनिया पक्की सहेली हो गई, अब ढूँढने क्या जाना कन्नौज में ख़ुशबू मेरी तन्हाई की बस्ती नई नवेली हो गईं, इधर तूफ़ान आये हैं ना कोई ज़लज़ला मगर ज़र्ज़र कैसे गाँव की हवेली हो गई ? - [हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो](https://hindigazals.com/har-ek-ghar-men/): हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो, रहेगी वादों में कब तक असीर ख़ुशहाली हर एक बार ही कल क्यूँ कभी तो आज भी हो, न करते शोर शराबा तो और क्या करते ? - [नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है](https://hindigazals.com/nayi-nayi-aakhen-ho/): नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है, मिलने जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे हैं जिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है, मेरे आँगन में आए या तेरे सर पर चोट लगे सन्नाटों में बोलने वाला पत्थर अच्छा लगता है, चाहत हो या पूजा सब के अपने अपने साँचे हैं जो मौत में ढल जाए वो पैकर अच्छा लगता है, हम ने भी सो कर देखा है नए पुराने शहरों में जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है..!! - [आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी...](https://hindigazals.com/aaj-zara-fursat-paai/): आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को खोल के फिर आबाद किया, खोल के खिड़की चाँद हँसा फिर चाँद ने दोनों हाथों से रंग उड़ाए फूल खिलाए चिड़ियों को आज़ाद किया, बड़े बड़े ग़म खड़े हुए थे रस्ता रोके राहों में छोटी छोटी ख़ुशियों से ही हम ने दिल को शाद किया, बात बहुत मामूली सी थी उलझ गई तकरारों में एक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बरबाद किया, दानाओं की बात न मानी काम आई नादानी ही सुना हवा को पढ़ा नदी को मौसम को उस्ताद किया..!! - [मुँह की बात सुने हर कोई...](https://hindigazals.com/munh-ki-baat-sune/): मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन ? - [हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी](https://hindigazals.com/har-taraf-har-jagah/): हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी, सुब्ह से शाम तक बोझ ढोता हुआ अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी, हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी, रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ हर नए दिन नया इंतिज़ार आदमी, घर की दहलीज़ से गेहूँ के खेत तक चलता फिरता कोई कारोबार आदमी, ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र आख़िरी साँस तक बेक़रार आदमी..!! - [जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता](https://hindigazals.com/jo-ho-ek-baar/): जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा नहीं होता, हर एक कश्ती का अपना तजरबा होता है दरिया में सफ़र में रोज़ ही मंझधार हो ऐसा नहीं होता, कहानी में तो किरदारों को जो चाहे बना दीजे हक़ीक़त भी कहानी कार हो ऐसा नहीं होता, कहीं तो कोई होगा जिस को अपनी भी ज़रूरत हो हर एक बाज़ी में दिल की हार हो ऐसा नहीं होता, सिखा देती हैं चलना ठोकरें भी राहगीरों को कोई रस्ता सदा दुश्वार हो ऐसा नहीं होता..!! - [तुम अपने अक़ीदों के नेज़े...](https://hindigazals.com/tum-apne-akido-ke/): तुम अपने अक़ीदों के नेज़े हर दिल में उतारे जाते हो, हम लोग मोहब्बत वाले हैं तुम ख़ंजर क्यूँ लहराते हो ? - [तू ख़ुश है गर मुझ से जुदा होने पर](https://hindigazals.com/tu-khush-hai-gar/): तू ख़ुश है गर मुझ से जुदा होने पर कोई गिला नहीं फिर तेरे बे वफ़ा होने पर, जब जिस्म नहीं तेरी रूह से मुहब्बत की है तो फिर गम क्या तेरे और किसी का होने पर, है ख़ुशी कि तेरे हिस्से में गुलिस्तान आये नहीं दुःख अपने मुकीम ए सहरा होने पर, तू जो देखे मुस्कुरा कर तो जान आती है मगर जान जाती है तुम्हारे खफ़ा होने पर, जब तक थे ज़िन्दां में सब गायब थे अहबाब अब आये हैं साथ निभाने रिहा होने पर, दस्त ए ज़ालिम को तो रोकना मुमकिन है क्या कीजिए मगर आँखों से जफ़ा होने पर..!! - [बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना](https://hindigazals.com/bechain-bahut-firna-ghabraye/): बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना एक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना, छलकाए हुए चलना ख़ुशबू लब ए लालीं की एक बाग़ सा साथ अपने महकाए हुए रहना, उस हुस्न का शेवा है जब इश्क़ नज़र आए पर्दे में चले जाना शरमाए हुए रहना, एक शाम सी कर रखना काजल के करिश्मे से एक चाँद सा आँखों में चमकाए हुए रहना, आदत ही बना ली है तुम ने तो मुनीर अपनी जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना..!! - [पर्बत तेरे पहलू में अगर खाई नहीं है](https://hindigazals.com/parbat-tere-pahlu-men/): पर्बत तेरे पहलू में अगर खाई नहीं है काहे की बुलंदी जहाँ गहराई नहीं है, अब कोई वहाँ इस लिए होता नहीं रुस्वा कूचे में तेरे कोई तमाशाई नहीं है, हज़रत जो रवादारी नज़र आप में आई क्यों आप के बच्चों में नज़र आई नहीं है, दुनिया ने तो उसमें भी कई नक़्स निकाले तस्वीर जो मैंने अभी बनवाई नहीं है, इस वास्ते भी रौशनी है बाइस ए वहशत आँखों की चराग़ों से शनासाई नहीं है, ख़ुद बाँट के आएँगे वहाँ अपनी सदा हम जिस सम्त हवाओं ने ये पहुँचाई नहीं है, शायद कि हर एक शख़्स को होती है मोहब्बत और सब ही ये कहते हैं कि दानाई नहीं है, लोगों से हसन कर के कई बार किनारा देखा है किसी काम की तन्हाई नहीं है..!! - [सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था](https://hindigazals.com/sidhe-saadhe-log-the/): सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था कमरे कम होते थे और दालान कुशादा होता था, देख के वो घर गाँव वाले सोग मनाया करते थे सहन में जो दीवार उठा कर आधा आधा होता था, मुस्तक़बिल और हाल के आज़ारों के साथ निमटने को चौपालों में माज़ी की यादों का इआदा होता था, दुख चाहे जिसका भी हो वो मिल कर बाँटा जाता था ग़म तो आज के जैसे थे एहसास ज़ियादा होता था, लड़के बाले मीलों पैदल पढ़ने जाया करते थे पास है जो स्कूल वो पहले दूर उफ़्तादा होता था, थक जाता कोई तो मिल कर बोझ को बाँटा करते थे दोस्त ने दोस्त का बस्ता अपने ऊपर लादा होता था, इतनी शर्म तो होती थी आँखों में पहले वक़्तों में गली में सर नीचा रखता जो बाहर दादा होता था, सोच समझ कर होते थे तब साथ निभाने के वादे लेकिन जो कर लेते थे वो वादा पूरा होता था, ख़त में दिल और तीर बना कर मिन्नत करनी पड़ती थी यार बहुत मुश्किल से मिलने पर आमादा होता था, देख हसन किस मंसब से ले आया इश्क़ फ़क़ीरी तक जिस से पूछा अपने दौर में वो शहज़ादा होता था..!! - [मशवरे पर न कहीं धूप के चलने लग जाएँ](https://hindigazals.com/mashware-par-na-kahin/): मशवरे पर न कहीं धूप के चलने लग जाएँ आदमी मोम बनें और पिघलने लग जाएँ, जैसे माहौल बदल देती है मुस्कान तेरी पैरहन देख के मौसम न बदलने लग जाएँ, इस क़दर बुग़्ज़ दिलों में है कि मालूम नहीं लोग कब किसके लिए ज़हर उगलने लग जाएँ, देख कर रौनक़ ए बाज़ार में बच्चों का सब्र अब ये ख़तरा है खिलौने न मचलने लग जाएँ, हम भी गुलशन से निकल जाएँगे ख़ामोशी से नए पौदे तो ज़रा फूलने फलने लग जाएँ, मौत है भूक है कर्तब है कि क्या है जब लोग दो सुतूनों से बंधी तार पे चलने लग जाएँ, तुम बताना कि हसन ख़्वाब नहीं सच है ये हम तुम्हें देख के जब आँख मसलने लग जाएँ..!! - [हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की](https://hindigazals.com/har-din-hai-muhabbat/): हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की हम अहल ए मुहब्बत में, हर बात मुहब्बत की, सीनों में उतरते हैं इल्हाम मुहब्बत के आँखों से बरसती है बरसात मुहब्बत की, हम दर्द के मारों का इतना सा हवाला है तन्हाई है घर अपना, और ज़ात मुहब्बत की, दौलत के ख़ुदाओं ने देखी ही नहीं शायद दामन में ग़रीबों के, बहुतात मुहब्बत की, इन ख़ाक नशीनों से रौनक है ज़माने की जो बाँटते फिरते है, खैरात मुहब्बत की, होती है मुकम्मल ये ईमान ब हर सूरत क्या जीत मुहब्बत की, क्या मात मुहब्बत की, हम लोग उठा लेगे, हर बोझ अज़ीयत का हम लोग समेटेंगे, सौगात मुहब्बत की..!! - [मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे](https://hindigazals.com/mujhe-ilm-hai-tum/): मुझे इल्म है तुम रास्ते से पलट जाओगे फिर तुम्हारे साथ सफ़र की इब्तिदा क्या करना ? - [दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं](https://hindigazals.com/diljalon-se-dillagi-achchi/): दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं, मुँह बनाता है बुरा क्यूँ वक़्त ए वाज़ आज वाइज़ तू ने पी अच्छी नहीं, ज़ुल्फ़ ए यार इतना न रख दिल से लगाओ दोस्ती नादान की अच्छी नहीं, बुतकदे से मयकदा अच्छा मेरा बेख़ुदी अच्छी ख़ुदी अच्छी नहीं, मुफ़लिसों की ज़िंदगी का ज़िक्र क्या मुफ़्लिसी की मौत भी अच्छी नहीं, इस क़दर खिंचती है क्यूँ ऐ ज़ुल्फ़ ए यार ले के दिल इतनी कजी अच्छी नहीं, आएँ मेरी बज़्म ए मातम में वो क्या हाथ में मेंहदी रची अच्छी नहीं, शैख़ को दे दो मय ए बेरंग ओ बू उसकी क़िस्मत से खिंची अच्छी नहीं, एक हसीं हो दिल के बहलाने को रोज़ रोज़ की ये दिल्लगी अच्छी नहीं, ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब ए हश्र है हश्र अच्छा वो गली अच्छी नहीं, अहल ए महशर से न उलझो तुम रियाज़ हश्र में दीवानगी अच्छी नहीं..!! - [मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है](https://hindigazals.com/meri-tanhaai-badhaate-hai/): मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं, इसलिए अब मैं किसी को नहीं जाने देता जो मुझे छोड़ के जाते हैं चले जाते हैं, मेरी आँखों से बहा करती है उनकी ख़ुश्बू रफ़्तगाँ ख़्वाब में आते हैं चले जाते हैं, शादी ए मर्ग का माहौल बना रहता है आप आते हैं रुलाते हैं चले जाते हैं, कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हमने हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं, आप को कौन तमाशाई समझता है यहाँ आप तो आग लगाते हैं चले जाते हैं, हाथ पत्थर को बढ़ाऊँ तो सगान ए दुनिया हैरती बन के दिखाते हैं चले जाते हैं..!! - [पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है](https://hindigazals.com/paani-aankh-me-bhar/): पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है, एक मोहब्बत और वो भी नाकाम मोहब्बत लेकिन इस से काम चलाया जा सकता है, दिल पर पानी पीने आती हैं उम्मीदें इस चश्मे में ज़हर मिलाया जा सकता है, मुझ गुमनाम से पूछते हैं फ़रहाद ओ मजनूँ इश्क़ में कितना नाम कमाया जा सकता है, ये महताब ये रात की पेशानी का घाव ऐसा ज़ख़्म तो दिल पर खाया जा सकता है, फटा पुराना ख़्वाब है मेरा फिर भी ताबिश इस में अपना आप छुपाया जा सकता है..!! - [जब से तेरा ख्याल रखा है](https://hindigazals.com/jab-se-tera-khyal/): जब से तेरा ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, आप पर दिल ये आ गया वरना आप में क्या कमाल रखा है, अब किसी काम की कहाँ फ़ुर्सत आप का गम जो पाल रखा है, ख़ुद वो मेरे ही दिल में रहते है मुझको दिल से निकाल रखा है, ख़ुशी अपनी थी बाँट दी हम ने गम तेरा था संभाल रखा है, लौट जाएँ या जाएँ उसकी गली हम ने सिक्का उछाल रखा है, ख़ुद हमारी जगह नहीं बनती घर में इतना मलाल रखा है, हम ने हर फ़ैसला मुहब्बत में रोज़ ए महशर पे टाल रखा है..!! - [ये तमन्ना थी कि तकमील ए तमन्ना करते](https://hindigazals.com/ye-tamanna-thi-ki/): ये तमन्ना थी कि तकमील ए तमन्ना करते सामने तुझ को बिठा के हम तेरी पूजा करते, कुछ न होता जो मोहब्बत में तो ऐसा करते हम तेरे हुस्न से ईमान का सौदा करते, सब नमाज़ें ही एक सज्दे में अदा हो जातीं बेख़ुदी में जो दर ए यार पे सज्दा करते, इश्क़ बख़्शा था तो फिर ऐसी नज़र की होती दिल के आईने में जल्वा तेरा देखा करते, सज्दा करने को अगर मिलता तेरा नक़्श ए क़दम हरम और दैर में आ कर तुझे सज्दा करते, काश इस तरह से तकमील ए इबादत होती शौक़ ए सज्दा में क़दम यार के चूमा करते, ऐ फ़ना यार का दीदार अगर हो जाए जान क्या चीज़ है ईमान का सौदा करते..!! - [खींच कर रात की दीवार पे मारे होते](https://hindigazals.com/khich-kar-raat-ki/): खींच कर रात की दीवार पे मारे होते मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते, यार ! - [उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा](https://hindigazals.com/uske-najdik-gam-e/): उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी नहीं, अब तो हाथों से लकीरें भी मिटी जाती हैं उसको खो कर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं, चार दिन रह गए मेले में मगर अब के भी उसने आने के लिए ख़त में लिखा कुछ भी नहीं, कल बिछड़ना है तो फिर अहद ए वफ़ा सोच के बाँध अभी आग़ाज़ ए मोहब्बत है गया कुछ भी नहीं, मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं, ऐ शुमार आँखें इसी तरह बिछाए रखना जाने किस वक़्त वो आ जाए पता कुछ भी नहीं...!! - [हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से](https://hindigazals.com/ho-charag-e-ilm/): हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से लोग वाक़िफ़ हों नई तकनीक से, इल्म से रौशन तो है उन का दिमाग़ दिल के गोशे हैं मगर तारीक से, राय उस पर मत करो क़ाएम कोई जानते जिस को नहीं नज़दीक से, मर्तबा किस का है कैसा क्या पता बाज़ आना चाहिए तज़हीक से, हाथ फैलाना मुक़द्दर बन न जाए पेट भरना छोड़ दीजे भीक से, जुड़ गया शीशा भरोसे का मगर रह गए हैं बाल कुछ बारीक से, जिसका मक़्सद अदल ओ अम्न ओ आतिशी दिल है वाबस्ता उसी तहरीक से, बेसबब राग़िब तड़प उठता है दिल दिल को समझाना पड़ेगा ठीक से..!! - [मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं](https://hindigazals.com/mod-tha-kaisa-tujhe/): मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं रो ही पड़ा हूँ कभी न रोने वाला मैं, क्या झोंका था चमक गया तन मन सारा पता न था फिर राख था होने वाला मैं, लहर थी कैसी मुझे भँवर में ले आई नदी किनारे हाथ भिगोने वाला मैं, रंग कहाँ था फूल की पत्ती पत्ती में किरन किरन सी धूप पिरोने वाला मैं, क्या दिन बीता सब कुछ आँख में फिरता है जाग रहा हूँ मज़े में सोने वाला मैं, शहर ए ख़िज़ाँ है ज़र्दी ओढ़े खड़े हैं पेड़ मंज़र मंज़र नज़र चुभोने वाला मैं, जो कुछ है इस पार वही उस पार भी है नाव अब अपनी आप डुबोने वाला मैं..!! - [कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है](https://hindigazals.com/kabhi-kabhi-kitna-nuksan/): कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है ऐरों ग़ैरों का एहसान उठाना पड़ता है, टेढ़े मेढ़े रस्तों पर भी ख़्वाबों का पश्तारा तेरी ख़ातिर मेरी जान उठाना पड़ता है, कब सुनता है नाला कोई शोर शराबे में मजबूरी में भी तूफ़ान उठाना पड़ता है, कैसी हवाएँ चलने लगी हैं मेरे बाग़ों में फूलों को भी अब सामान उठाना पड़ता है, गुलदस्ते की ख़्वाहिश रखने वालों को अक्सर कोई ख़ार भरा गुलदान उठाना पड़ता है, याँ कोई तफ़रीक़ नहीं है शाह गदा सब को अपना बोझ दिल ए नादान उठाना पड़ता है, यूँ मायूस नहीं होते हैं कोई न कोई ग़म अच्छे अच्छों को हर आन उठाना पड़ता है, मक्कारों की इस दुनिया में कभी कभी आलम अच्छे लोगों को बोहतान उठाना पड़ता है..!! - [एक रात आती है एक रात जाती है](https://hindigazals.com/ek-raat-aati-hai/): एक रात आती है एक रात जाती है गेसुओं के साए में किस को नींद आती है, सिलसिला ग़म ए दिल का बेसबब नज़र आया शम से कोई पूछे क्यों लहू जलाती है, हुस्न से भी कुछ बढ़ कर बेनियाज़ है ये ग़म दाग़ ए दिल मोहब्बत भी गिन के भूल जाती है, नाम पड़ गया उस का कूचा ए हरम लेकिन ये गली भी ऐ ज़ाहिद मयकदे को जाती है, चलते चलते नब्ज़ ए ग़म डूबती है यूँ अक्सर एक थके मुसाफ़िर को जैसे नींद आती है, हाथ रखती जाती है यास दिल के दाग़ों पर मैं दिया जलाता हूँ वो दिया बुझाती है, मिट गए नुशूर आ कर ज़ेहन में हज़ारों ग़म शेरियत का आलम भी रम्ज़ ए बेसबाती है..!! - [जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में](https://hindigazals.com/jaag-uthenge-dard-puraane/): जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में दिल की चोट उभर आएगी मत निकलो पुर्वाई में, कोयल कूकी मौज ए सबा ने पाँव में घुंघरू बाँध लिए प्यार का नग़्मा छेड़ रहा है आज कोई शहनाई में, जो पहले बदनाम हुए थे उन को दुनिया भूल गई हम ने कैसे रंग भरे हैं इश्क़ तेरी रुस्वाई में, कौन तुम्हारे दुख बाँटेगा कौन ये नाज़ उठाएगा हम जिस वक़्त न होंगे जानाँ तड़पोगे तन्हाई में, आज फ़ना के पीछे पीछे ख़ाक उड़ाते फिरते हैं लोगों ने क्या देख लिया है आज तेरी सौदाई में..!! - [बा वक़्त ए शाम सूरज से हुकुमत छीन लेता है](https://hindigazals.com/baa-waqt-e-shaam/): बा वक़्त ए शाम सूरज से हुकुमत छीन लेता है सहर होते ही सितारों से क़यादत छीन लेता है, क़रीने सीख लो उसकी ज़मीं पे चलने फिरने के तकव्वुर करने वालों से वो क़ुव्वत छीन लेता है, कुर्सी की बुलंदी पे यूँ मगरूर न हो तू ऐ नादां वो चाहे तो फिरऔन से भी हुकुमत छीन लेता है, हर एक दाने में उसके फैज़ की मो'जिज़ा नुमाई है ना कद्रों के निवालो से वो लज्ज़त छीन लेता है, बड़ी मुश्किल से मिलती है ये सिफ़त नेकनामी की ज़रा सा बहक जाओ तो वो इज्ज़त छीन लेता है, कभी कश्ती बचा लेता है समन्दर में भी तूफानों से कभी साहिल पर तैराको से वो हिम्मत छीन लेता है, उसके अद्ल पर क़ायम है पूरी तारीख़ ए इंसानी अक्सर कमज़र्फों से वो ऐवान ए हुकुमत छीन लेता है, सबक़ सीखो कुछ तारीख ए हिज़रत की कहानी से गर वो चाहे तो आँख वालों से भी बसारत छीन लेता है..!! - [बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है](https://hindigazals.com/bahut-udaas-hai-dil/) - [सुकुन के दिन फ़रागत की रात से भी गए](https://hindigazals.com/sukun-ke-din-faragat/): सुकुन के दिन फ़रागत की रात से भी गए तुझे गँवा के हम भारी कायनात से भी गए, जुदा तो हुए थे मगर दिल कभी टूटा न था जो खफ़ा हुए तो तेरे इल्तिफ़ात से भी गए, चले तो झील की गहराइयाँ थी आँखों में पलट के आये तो मौज ए फ़रात से भी गए, ख्याल था कि तुझको पा के ख़ुद को ढूंढेगे तू मिल गया तो ख़ुद अपनी ज़ात से भी गए, बिछड़ के ख़त भी न लिखे उदास यारों ने अब कभी कभी अधूरी सी बात से भी गए..!! - [कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है](https://hindigazals.com/koi-mahbub-sitamgar-bhi/): कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है फूल के हाथ में खंजर भी तो हो सकता है, एक मुद्दत से जिसे लोग ख़ुदा कहते है छु के देखो कि वो पत्थर भी तो हो सकता है, मुझको आवारगी ए इश्क़ का इल्ज़ाम न दो कोई इस शहर में बेघर भी तो हो सकता है, कैसे मुमकिन कि उसे जान के बराबर समझूँ वो मेरी जान से बढ़ कर भी तो हो सकता है, सिर्फ़ सावन ही तो नहीं आग लगाने वाला जून की तरह दिसम्बर भी तो हो सकता है, चाक दामन से मेरे मुझको बुरा मत समझो कोई युसुफ सा पयम्बर भी तो हो सकता है, सिर्फ़ चेहरों पे लताफ़त कोई मौकुफ़ नहीं चाँद जैसा कोई पत्थर भी तो हो सकता है, तुम सरे राह मिले थे तो कभी फिर से मिलो हादसा शहर में अक्सर भी तो हो सकता है, सारा इल्ज़ाम ए जफा उस पे कहाँ तक रखूँ ये मेरा अपना मुक़द्दर भी तो हो सकता है, क्या ज़रूरी है कि हम सर को झुकाएँ ज़ख़्मी एक सजदा मेरे अन्दर भी तो हो सकता है..!! - [जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है](https://hindigazals.com/jiske-saath-apni-maan/): जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है उसके मुक़द्दर में जन्नत की हवा होती है, जिन्हें माँ की गोद से अच्छा दरस मिला हो वही जानता है कि माँ की कद्र क्या होती है, औलाद ग़मों को कभी छुपा नहीं सकती माँ बच्चों की हर बात से आगाह होती है, जिन लोगो की माएँ इस दुनियाँ में नहीं है कभी उनसे पूछों कि माँ क्या होती है, जिस बेटी को माँ से हया का ज़ेवर मिला हो ज़िन्दगी की सफ़र में वो बा हया होती है, दुनियाँ ए फ़ानी में माँ की दुआ मिल जाए ऐसे औलादों के साथ रब की रज़ा होती है..!! - [फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है](https://hindigazals.com/phool-ka-shaakh-pe/): फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है तू नहीं है तो ज़माना भी बुरा लगता है, ऊब जाता हूँ ख़मोशी से भी कुछ देर के बाद देर तक शोर मचाना भी बुरा लगता है, इतना खोया हुआ रहता हूँ ख़यालों में तेरे पास मेरे तेरा आना भी बुरा लगता है, ज़ाइक़ा जिस्म का आँखों में सिमट आया है अब तुझे हाथ लगाना भी बुरा लगता है, मैंने रोते हुए देखा है अली बाबा को बाज़ औक़ात ख़ज़ाना भी बुरा लगता है, अब बिछड़ जा कि बहुत देर से हम साथ में हैं पेट भर जाए तो खाना भी बुरा लगता है..!! - [हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए](https://hindigazals.com/har-ghadi-chashm-e/): हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए, मैं ने देखा है जो मर्दों की तरह रहते थे मस्ख़रे बन गए दरबार में रहने के लिए, ऐसी मजबूरी नहीं है कि चलूँ पैदल मैं ख़ुद को गर्माता हूँ रफ़्तार में रहने के लिए, अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग नंगे हो जाते हैं अख़बार में रहने के लिए..!! - [मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल](https://hindigazals.com/mujhpe-hai-saikdo-ilzam/): मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मेंरे साथ न चल, तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन मैं हूँ एक धूल भरी शाम मेंरे साथ न चल, अपनी ख़ुशियाँ मेरे आलाम से मंसूब न कर मुझ से मत माँग मेरा नाम मेरे साथ न चल, तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह देख ऐ गर्दिश ए अय्याम मेरे साथ न चल, मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा शकील टूटता रहता हूँ हर गाम मेरे साथ न चल..!! - [परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है](https://hindigazals.com/paro-ko-khol-zamana/): परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है, कनीज़ हो कोई या कोई शाहज़ादी हो जो इश्क़ करता है कब ख़ानदान देखता है, घटाएँ उठती हैं बरसात होने लगती है जब आँख भर के फ़लक को किसान देखता है, यही वो शहर जो मेरे लबों से बोलता था यही वो शहर जो मेरी ज़बान देखता है, मैं जब मकान के बाहर क़दम निकालता हूँ अजब निगाह से मुझ को मकान देखता है..!! - [इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है](https://hindigazals.com/ishq-se-jaam-se/): इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है, इश्क़ है इश्क़ कोई खेल नहीं बच्चों का वो चला जाए जिसे मात से डर लगता है, मैं तेरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता रोज़ बटती हुई ख़ैरात से डर लगता है, हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी अब बदलते हुए हालात से डर लगता है, दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ यासिर घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है..!! - [सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी](https://hindigazals.com/sabhi-kahen-mere-gamkhwar/): सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करूँ यार के अलावा भी, बहुत से ऐसे सितमगर थे अब जो याद नहीं किसी हबीब ए दिलआज़ार के अलावा भी, ये क्या कि तुम भी सर ए राह हाल पूछते हो कभी मिलो हमें बाज़ार के अलावा भी, उजाड़ घर में ये ख़ुशबू कहाँ से आई है कोई तो है दर ओ दीवार के अलावा भी, सो देख कर तेरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी, कभी फ़राज़ से आ कर मिलो जो वक़्त मिले ये शख़्स ख़ूब है अशआर के अलावा भी..!! - [वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था](https://hindigazals.com/wo-dushman-e-jaan/): वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था अब किस से कहें कोई हमारा भी कभी था, उतरा है रग ओ पै में तो दिल कट सा गया है ये ज़हर ए जुदाई कि गवारा भी कभी था, हर दोस्त जहाँ अब्र ए गुरेज़ाँ की तरह है ये शहर कभी शहर हमारा भी कभी था, तितली के तआक़ुब में कोई फूल सा बच्चा ऐसा ही कोई ख़्वाब हमारा भी कभी था, अब अगले ज़माने के मिलें लोग तो पूछें जो हाल हमारा है तुम्हारा भी कभी था, हर बज़्म में हम ने उसे अफ़्सुर्दा ही देखा कहते हैं फ़राज़ अंजुमन आरा भी कभी था..!! - [ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए](https://hindigazals.com/ye-jo-nang-the/): ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे मुझे खा गए, कभी अपनी आँख से ज़िंदगी पे नज़र न की वही ज़ाविए कि जो आम थे मुझे खा गए, मैं अमीक़ था कि पला हुआ था सुकूत में ये जो लोग महव ए कलाम थे मुझे खा गए, वो जो मुझ में एक इकाई थी वो न जुड़ सकी यही रेज़ा रेज़ा जो काम थे मुझे खा गए, ये अयाँ जो आब ए हयात है इसे क्या करूँ ? - [पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे](https://hindigazals.com/pabandiyo-se-apni-nikalte/): पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे सब रास्ते खुले थे मगर हम पे वा न थे, ये और बात शौक़ से हम को सुना गया फिर भी वही सुनाया सुना एक फ़साना थे, एक आग साएबान था सर पर तना हुआ पल पल ज़मीं सरकती थी और हम रवाना थे, दरिया में रह के कोई न भीगे तो किस तरह हम बे नियाज़ तेरी तरह ऐ ख़ुदा न थे, हरगिज़ गिला नहीं है कि तू मेहरबाँ न था कब हम भी अपने आप से बेहद ख़फ़ा न थे, क्यूँ सब्र आश्ना न हुआ ना मुराद दिल तेरे करम के हाथ तो यूँ बे अता न थे, वो और हम से पूछे कि बिल्क़ीस कुछ तो कह कमबख़्त हम कि होश ही अपने बजा न थे..!! - [इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो](https://hindigazals.com/is-naaz-is-andaz/): इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो रोज़ एक ग़ज़ल हमसे कहलवाए चलो हो, रखना है कहीं पाँव तो रखो हो कहीं पाँव चलना ज़रा आया है तो इतराए चलो हो, दीवाना ए गुल क़ैदी ए ज़ंजीर हैं और तुम क्या ठाट से गुलशन की हवा खाए चलो हो, मय में कोई ख़ामी है न साग़र में कोई खोट पीना नहीं आए है तो छलकाए चलो हो, हम कुछ नहीं कहते हैं कोई कुछ नहीं कहता तुम क्या हो तुम्हीं सब से कहलवाए चलो हो, ज़ुल्फ़ों की तो फ़ितरत ही है लेकिन मेंरे प्यारे ज़ुल्फ़ों से ज़ियादा तुम्हीं बल खाए चलो हो, वो शोख़ सितमगर तो सितम ढाए चले है तुम हो कि कलीम अपनी ग़ज़ल गाए चलो हो..!! - [ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ](https://hindigazals.com/ae-junoon-kuch-to/): ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ हूँ जवार ए यार मैं या कूचा ए क़ातिल में हूँ ? - [और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात](https://hindigazals.com/aur-koi-dam-kee/): और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात ढलते ढलते आप अपनी मौत मर जाएगी रात, ज़िंदगी में और भी कुछ ज़हर भर जाएगी रात अब अगर ठहरी रग ओ पै में उतर जाएगी रात, जो भी हैं पर्वर्दा ए शब जो भी हैं ज़ुल्मत परस्त वो तो जाएँगे उसी जानिब जिधर जाएगी रात, अहल ए तूफ़ाँ बेहिसी का गर यही आलम रहा मौज ए ख़ूँ बन कर हर एक सर से गुज़र जाएगी रात, है उफ़ुक़ से एक संग ए आफ़्ताब आने की देर टूट कर मानिंद ए आईना बिखर जाएगी रात, हम तो जाने कब से हैं आवारा ए ज़ुल्मत मगर तुम ठहर जाओ तो पल भर में गुज़र जाएगी रात, रात का अंजाम भी मालूम है मुझ को सुरूर लाख अपनी हद से गुज़रे ता सहर जाएगी रात..!! - [तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना](https://hindigazals.com/to-kya-ye-tay/): तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना तो फिर ये उम्र भी क्यों तुम से गर नहीं मिलना ? - [बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता](https://hindigazals.com/bata-ae-abr-musavat/): बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता ? महाज़ ए इश्क़ से कब कौन बच के निकला है तू बच गया है तो ख़ैरात क्यूँ नहीं करता ? - [बिछड़ कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा](https://hindigazals.com/bichhad-kar-uska-dil/): बिछड़ कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा, मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या न आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा, मैं जिस कोशिश से उसको भूल जाने में लगा हूँ ज्यादा भी अगर लग जाए तो हफ़्ता लगेगा, मेरे हाथों से लग कर फूल मिट्टी हो रहे हैं मेरी आँखों से दरिया देखना सहरा लगेगा, मेरा दुश्मन सुना है कल से भूखा लड़ रहा है ये पहला तीर उसको नाश्ते में जा लगेगा, कई दिन उस के भी सहराओं में गुज़रे हैं हाफ़ी सो इस निस्बत से आईना हमारा क्या लगेगा..!! - [पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा](https://hindigazals.com/parai-aag-pe-roti/): पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा, अगर ख़ुदा ने बनाने का इख़्तियार दिया अलम बनाऊँगा बर्छी नहीं बनाऊँगा, फ़रेब दे के तेरा जिस्म जीत लूँ लेकिन मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊँगा, गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ नए मकान में खिड़की नहीं बनाऊँगा, मैं दुश्मनों से अगर जंग जीत भी जाऊँ तो उन की औरतें क़ैदी नहीं बनाऊँगा, तुम्हें पता तो चले बेज़बान चीज़ का दुख मैं अब चराग़ की लौ ही नहीं बनाऊँगा, मैं एक फ़िल्म बनाऊँगा अपने 'सरवत' पर और इस में रेल की पटरी नहीं बनाऊँगा..!! - [देखो अभी लहू की एक धार चल रही है](https://hindigazals.com/dekho-abhi-lahoo-ki/): देखो अभी लहू की एक धार चल रही है बाज़ू कटे हैं फिर भी तलवार चल रही है, तहज़ीब ने ये कैसा मुख़्बिर लगा रखा है हर लम्हा साथ घर की दीवार चल रही है, कुछ तो मेरी उदासी हंगामा भी किया कर तू आज साथ मेरे बाज़ार चल रही है, तुम साथ हो तो कैसा चिपका पड़ा है दरिया और ये हवा भी कैसी हमवार चल रही है, कर लो अयादत उसकी तुम भी तो फ़रहत एहसास दुनिया बहुत दिनों से बीमार चल रही है..!! - [बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है](https://hindigazals.com/badan-aur-rooh-me/): बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है कि हिस्सा इश्क़ में किस का बड़ा है ? - [हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है](https://hindigazals.com/har-gali-kuche-me/): हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है शहर में जो भी हुआ है वो ख़ता मेरी है, ये जो है ख़ाक का इक ढेर बदन है मेरा वो जो उड़ती हुई फिरती है क़बा मेरी है, वो जो इक शोर सा बरपा है अमल है मेरा ये जो तन्हाई बरसती है सज़ा मेरी है, मैं न चाहूँ तो न खिल पाए कहीं एक भी फूल बाग़ तेरा है मगर बाद ए सबा मेरी है, एक टूटी हुई कश्ती सा बना बैठा हूँ न ये मिट्टी न ये पानी न हवा मेरी है..!! - [दिल की बात लबों पर ला कर...](https://hindigazals.com/dil-ki-baat-labo/): दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं, बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदलीं लेकिन इन प्यासी आँखों से अब तक आँसू बहते हैं, एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं, जिन की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिन के लिए बदनाम हुए आज वही हम से बेगाने बेगाने से रहते हैं, वो जो अभी इस राहगुज़र से चाक गरेबाँ गुज़रा था उस आवारा दीवाने को जालिब जालिब कहते हैं..!! - [अगर न रोये तो आँखों पे बोझ पड़ता है](https://hindigazals.com/agar-na-royen-to/): अगर न रोये तो आँखों पे बोझ पड़ता है करें जो गिर्या तो रातों पे बोझ पड़ता है, परिंदे छोड़ के तन्हा अगर चले जाएँ तो फिर दरख़्त की शाखों पे बोझ पड़ता है, खता ए इश्क को अब सिर्फ़ सोचने भर से हमारी रूह के छालों पे बोझ पड़ता है, ये चाँद करता है आराम जब अमावस में स्याह रात में तारों पे बोझ पड़ता है, तुम उनको इल्म दो लेकिन ये एहतियात रखो हो भारी बस्ता तो बच्चों पे बोझ पड़ता है, सुकूत इतना हमें रास आ गया है कि अब जो कुछ सुने भी तो कानों पे बोझ पड़ता है, तुम्हारी याद की उजड़ी हुई हवेली में है इतनी धूल की साँसों पे बोझ पड़ता है, हम इस ख्याल से हिजरत भी कर नहीं सकते क़दम बढायें तो राहों पे बोझ पड़ता है..!! - [आइए आसमाँ की ओर चलें](https://hindigazals.com/aaiye-aasmaan-ki-or/): आइए आसमाँ की ओर चलें साथ ले कर ज़मीं का शोर चलें, चाँद उल्फ़त का इस्तिआरा है जिस की जानिब सभी चकोर चलें, यूँ दबे पाँव आई तेरी याद जैसे चुपके से शब में चोर चलें, दिल की दुनिया अजीब दुनिया है अक़्ल के उस पे कुछ न ज़ोर चलें, सब्ज़ रुत छाई यूँ उन आँखों की जिस तरह नाच नाच मोर चलें, तुम भी यूँ मुझ को आ के ले जाओ जैसे ले कर पतंगें डोर चलें..!! - [ख़िज़ाँ में ओढ़ के क़ौल ओ...](https://hindigazals.com/khija-men-odh-ke/): ख़िज़ाँ में ओढ़ के क़ौल ओ क़रार का मौसम बहार ढूँढ रही है बहार का मौसम, वो मेरे साथ नहीं हैं तो दिल के सहरा पर समय बिखेर रहा है बहार का मौसम, फ़रेब ख़ुद को ना देगा तो और क्या देगा ना रास आए जिसे एतिबार का मौसम, तुम्हारे क़ुर्ब की मद्धम सी एक हरारत से है ढेर राख तले इंतिज़ार का मौसम..!! - [आँखों पर पलकों का बोझ नहीं होता](https://hindigazals.com/aankhon-par-palko-ka/): आँखों पर पलकों का बोझ नहीं होता दर्द का रिश्ता अपनी आन नहीं खोता, बस्ती के हस्सास दिलों को चुभता है सन्नाटा जब सारी रात नहीं होता, मन नगरी में धूम धड़क्का रहता है मेरा मैं जब मेरे साथ नहीं होता, बन जाते हैं लम्हे भी कितने संगीन वक़्त कभी जब अपना बोझ नहीं ढोता, रिश्ते नाते टूटे फूटे लगते हैं जब भी अपना साया साथ नहीं होता, दिल को हनीफ़ उधार नहीं मिलता जब तक आँखों का पथरीला दर्द नहीं रोता..!! - [रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम](https://hindigazals.com/rang-pairahan-ka-khushboo/): रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम मौसम ए गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम, दोस्तो उस चश्म ओ लब की कुछ कहो जिस के बग़ैर गुलसिताँ की बात रंगीं है न मयख़ाने का नाम, फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम, दिलबरी ठहरा ज़बान ए ख़ल्क़ खुलवाने का नाम अब नहीं लेते परीरू ज़ुल्फ़ बिखराने का नाम, अब किसी लैला को भी इक़रार ए महबूबी नहीं इन दिनों बदनाम है हर एक दीवाने का नाम, मोहतसिब की ख़ैर ऊँचा है उसी के फ़ैज़ से रिंद का साक़ी का मय का ख़ुम का पैमाने का नाम, हम से कहते हैं चमन वाले ग़रीबान ए चमन तुम कोई अच्छा सा रख लो अपने वीराने का नाम, फ़ैज़ उनको है तक़ाज़ा ए वफ़ा हम से जिन्हें आश्ना के नाम से प्यारा है बेगाने का नाम..!! - [मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो](https://hindigazals.com/mere-hi-lahoo-par/): मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन एक सितम एक सितम रात करो हो वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो, हम ख़ाकनशीं तुम सुख़न आरा ए सर ए बाम पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो, हमको जो मिला है वो तुम्हीं से तो मिला है हम और भुला दें तुम्हें क्या बात करो हो, यूँ तो कभी मुँह फेर के देखो भी नहीं हो जब वक़्त पड़े है तो मुदारात करो हो, दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़ तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो, बकने भी दो आजिज़ को जो बोले है बके है दीवाना है दीवाने से क्या बात करो हो..!! - [मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा](https://hindigazals.com/mere-junoon-ka-natija/): मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा, गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा, उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा, यक़ीं न आए तो एक बात पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा, उस आस्तीन से अश्कों को पोछने वाले उस आस्तीन से ख़ंजर ज़रूर निकलेगा..!! - [हसीं चेहरों से सूरत आश्नाई होती रहती है](https://hindigazals.com/hasin-chehron-se-soorat/): हसीं चेहरों से सूरत आश्नाई होती रहती है समझ लो इब्तिदाई कारवाई होती रहती है, हमारी बीवी और महँगाई दोनों हैं सगी बहनें हमारी जेब की अक्सर सफ़ाई होती रहती है, कहा मैंने कि मिलते हो बिछड़ जाने की नियत से कहा उस ने मोहब्बत में जुदाई होती रहती है, कहा मैं ने मेरी दरख़्वास्तों का क्या बना आख़िर कहा उस ने कि उन पर कारवाई होती रहती है, कहा लड़के की अम्मी ने रहेगी ख़ुश सदा बेटी कि ऊपर से भी लड़के की कमाई होती रहती है, तेरे पंद ओ नसाएह का नतीजा सिफ़्र है नासेह बुराई होती रहती थी बुराई होती रहती है..!! - [इश्क़ का नास करोगी मुझे मालूम न था](https://hindigazals.com/ishq-ka-naas-karogi/): इश्क़ का नास करोगी मुझे मालूम न था मेरे पल्ले ही पड़ोगी मुझे मालूम न था, एक महीने में कमाता हूँ जो तनख़्वाह उसे ख़र्च हफ़्ते में करोगी मुझे मालूम न था, मैं ने खाई थी क़सम खाऊँगा बस रिज़्क़ ए हलाल तुम भी अहमक़ ही कहोगी मुझे मालूम न था, शेर की तरह सदा अर्ज़ करूँगा ख़ुद को तुम सदा हुक्म ही दोगी मुझे मालूम न था, जो सुनाओगी सुनूँगा मैं हमेशा लेकिन शेर तक तुम न सुनोगी मुझे मालूम न था, ज़िंदगी ही में मुझे देखना होगा ये दिन मुझ को मरहूम लिखोगी मुझे मालूम न था सारी दफ़आत ही हो जाएँगी लागू मुझ पर इतने इल्ज़ाम धरोगी मुझे मालूम न था, ईद के दिन भी वही जंग का नक़्शा होगा ईद के दिन भी लड़ोगी मुझे मालूम न था, सख़्त-जानी में भी निकलोगी मिसाली यानी मार कर मुझ को मरोगी मुझे मालूम न था, पता होता तो न करता कभी कोई नेकी तुम्हीं जन्नत में मिलोगी मुझे मालूम न था..!! - [हो मोमिनों को हमेशा ही पयाम ए ईद मुबारक](https://hindigazals.com/ho-momino-ko-hamesha/): हो मोमिनों को हमेशा ही पयाम ए ईद मुबारक गगन के पार से आया है सलाम ए ईद मुबारक, कभी भी आये न गुलशन पे मेरे गम का कोई पल खुदा करे यूँ ही रहे चलता निज़ाम ए ईद मुबारक, इबादतों में रहें रात दिन यूँ ही सदा मशरूफ़ हो मुसलमानों को ये एहतिमाम ए ईद मुबारक, अफ़क पे जैसे ही आया नज़र हिलाल का ये चाँद ज़माने में हो गया हर्फ़ ए आम ईद मुबारक, यूँ ही सजे रहें पलकों पे ख़्वाब आप के हरदम चराग खुशियों के जलाती रहें बनाम ए ईद मुबारक, हर बार ही अपनी दुआओं में खुदा से यही माँगा है हो प्यारों को मेरे सुबह ओ शाम ईद मुबारक, तुम्हारी ख्वाहिशें पूरी हो सनम सारी की सारी मिले हयात में खुशियाँ तमाम मादाम ईद मुबारक, अदाएँ हुस्न ओ शबाब दिखा दिखा कर मनाओ निगाह ए नाज़ से पेश करो सलाम ए ईद मुबारक..!! - [हम वो बुझदिल नहीं जो यलगार से डर जाएँगे](https://hindigazals.com/hum-wo-bujhdil-nahin/): हम वो बुझदिल नहीं जो यलगार से डर जाएँगे तुम ने ये समझा कि हम तलवार से डर जाएँगे, तुम जैसे कायरो को यूँ चुटकियों में मसल दें तुम ने क्या समझा कि एक वार से डर जाएँगे ? - [सियासत मुफ़ादात में खो गई है](https://hindigazals.com/siyasat-mufadaat-me-kho/): सियासत मुफ़ादात में खो गई है हुकुमत न जाने कहाँ सो गई है ? - [मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें](https://hindigazals.com/mujhse-behtar-to-mil/): मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें और अल्लह से क्या गिला है तुम्हें, हम इकट्ठे नहीं रहेंगे कभी मेरे बच्चों का तो पता है तुम्हें, मैं तुम्हें देख भी नहीं सकता देखना भी तो मसअला है तुम्हें, यानी तुम इतनी ख़ूबसूरत हो छोटा बच्चा भी देखता है तुम्हें, मैं तुम्हारा अगर बता भी दूँ लोग पूछेंगे और क्या है तुम्हें, जो किसी को कभी नहीं होता कितनी आसानी से हुआ है तुम्हें..!! - [दुनिया को शानदार का मतलब नहीं पता](https://hindigazals.com/duniya-ko-shandar-ka/): दुनिया को शानदार का मतलब नहीं पता मतलब हमारे यार का मतलब नहीं पता, मैं ने कहा तलाश करूँगा कहाँ तुम्हें उस ने कहा क़तार का मतलब नहीं पता, वो वक़्त पर मिले न मिले फ़ाएदे में हूँ वो यूँ कि इंतिज़ार का मतलब नहीं पता, अल्लह करे तुम आँखें दिखाओ कभी उसे जिस शख़्स को ख़ुमार का मतलब नहीं पता, बेबाक आदमी हूँ मगर हूँ तो आदमी शर्म आ रही है प्यार का मतलब नहीं पता..!! - [किस को रौशन बना रहे हो तुम](https://hindigazals.com/kis-ko-raushan-bana/): किस को रौशन बना रहे हो तुम इतना जो बुझते जा रहे हो तुम लोग पागल बनाए जा चुके हैं अब नया क्या बना रहे हो तुम गाँव की झाड़ियाँ बता रही हैं शहर में गुल खिला रहे हो तुम एक तो हम उदास हैं उस पर शाइरों को बुला रहे हो तुम और किस ने तुम्हें नहीं देखा और किस के ख़ुदा रहे हो तुम फूल किस ने क़ुबूल करने हैं जब तलक मुस्कुरा रहे हो तुम..!! - [अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा](https://hindigazals.com/abhi-to-zinda-hai/): अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा हमारे बाद न जाने तुम्हारा क्या होगा हमारा ख़ुद पे गुज़ारा नहीं है मुद्दत से हमारे साथ किसी का गुज़ारा क्या होगा वो मेरे साथ ग़रीबी में भी बहुत ख़ुश है शब ए सियाह जब आई सितारा क्या होगा ये देखने के लिए क्यों न एक दिन मर जाएँ हमारे साथ उसी दिन दोबारा क्या होगा वो जिस के निस्फ़ ने पागल किया है दुनिया को मैं सोचता हूँ हक़ीक़त में सारा क्या होगा हमारे नक़्श ए क़दम से क़दम मिलाओ मगर हमारा कुछ न बना तो तुम्हारा क्या होगा ज़बान लिपटी हुई है गले से मुर्दे की सवाल ये नहीं कैसे पुकारा क्या होगा वो मिल के जाए तो लगता नहीं मिला है कभी अगर किनारा करे तो किनारा क्या होगा जिन्हें पता था सभी कुछ वो लोग भी न रहे हमें पता ही नहीं कुछ हमारा क्या होगा पहन लिया है उसे आँख मूँद कर मैं ने वगर्ना सोचता रहता उतारा क्या होगा..!! - [होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी](https://hindigazals.com/hoti-hai-tere-naam/): होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबीअत कभी कभी, ऐ दिल किसे नसीब ये तौफ़ीक़ ए इज़्तिराब मिलती है ज़िंदगी में ये राहत कभी कभी, तेरे करम से ऐ अलम ए हुस्न आफ़रीं दिल बन गया है दोस्त की ख़ल्वत कभी कभी, जोश ए जुनूँ में दर्द की तुग़्यानियों के साथ अश्कों में ढल गई तेरी सूरत कभी कभी, तेरे क़रीब रह के भी दिल मुतमइन न था गुज़री है मुझ पे ये भी क़यामत कभी कभी, कुछ अपना होश था न तुम्हारा ख़याल था यूँ भी गुज़र गई शब ए फ़ुर्क़त कभी कभी, ऐ दोस्त हम ने तर्क ए मोहब्बत के बावजूद महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी..!! - [वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं](https://hindigazals.com/wo-dilnawaz-hai-lekin/): वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ पर कई सवाल मगर मेरे लिए कोई शायान ए इल्तिमास नहीं, तेरे जिलौ में भी दिल काँप काँप उठता है मेरे मिज़ाज को आसूदगी भी रास नहीं, कभी कभी जो तेरे क़ुर्ब में गुज़ारे थे अब उन दिनों का तसव्वुर भी मेरे पास नहीं, गुज़र रहे हैं अजब मरहलों से दीदा ओ दिल सहर की आस तो है ज़िंदगी की आस नहीं, मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए बहुत दिनों से तबीअत मेरी उदास नहीं..!! - [कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें](https://hindigazals.com/kuch-yaadgaare-shahare-sitamgar/): कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं उस की गली में तो पत्थर ही ले चलें, यूँ किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफ़र ? - [झूठ का बोलना आसान नहीं होता है](https://hindigazals.com/jhuth-ka-bolna-aasaan/): झूठ का बोलना आसान नहीं होता है दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बाद यही पूछते रहते हैं मुझे अब किसी बात पे हैरान नहीं होता है, कैसे तुम भूल गए हो मुझे आसानी से ? - [उस ने यूँ रास्ता दिया मुझको](https://hindigazals.com/usne-yun-raasta-diya/): उस ने यूँ रास्ता दिया मुझको रास्ते से हटा दिया मुझको दूर करने के वास्ते ख़ुद से ख़ुद का ही वास्ता दिया मुझको मौत ही कुछ सुकून दे शायद ज़िंदगी ने थका दिया मुझको जब मेरे बाल ओ पर शिकस्ता हुए तब क़फ़स से उड़ा दिया मुझको, जिस हवा ने मुझे जलाए रखा फिर उसी ने बुझा दिया मुझको..!! - [उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा](https://hindigazals.com/umr-bhar-sine-me/): उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम ओ गुमाँ कि वो फ़क़त मेरी है और उसने भी भरम मेरा बनाए रखा, आँधियाँ शर्म से हो जाएँ न पानी पानी सर यही सोच के पेड़ों ने झुकाए रखा, वैसे हर बात से रखा उसे वाक़िफ़ हम ने लेकिन अफ़्साना ए उल्फ़त को छुपाए रखा, एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम एक रिश्ता जिसे ताउम्र निभाए रखा, कूज़ा-गर तुझ को बनाना ही नहीं था जब कुछ किस लिए चाक पे ता-उम्र चढ़ाए रखा..!! - [मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश](https://hindigazals.com/main-sozish-e-gam/): मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश कि जैसे बज़्म में जलता हो एक दिया ख़ामोश, ये और बात कि होंठों पे लफ़्ज़ बिखरे थे मगर था बोलने वालों का मुद्दआ ख़ामोश, अभी न छेड़िए ख़्वाबीदा मौसमों का मिज़ाज अभी है रात के आँचल में हर फ़ज़ा ख़ामोश, मेरी सरिश्त में ख़ामोशियों का ज़हर न घोल न रह सकेगा मिरा ज़ौक़ ए हक़नवा ख़ामोश, बदन की क़ैद में चीख़ें न घुट के मर जाएँ सिसकते कर्ब को क्यूँ तुम ने कर दिया ख़ामोश, लहकती आँख धड़कते दिलों के पास न ला गुज़र न जाए कहीं कोई हादिसा ख़ामोश हर एक सम्त है बिखरा हुआ सुकूत आज़र इधर हैं देवता पत्थर उधर ख़ुदा ख़ामोश..!! - [फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा](https://hindigazals.com/faasla-jab-mujhe-ehsas/): फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा पाँव को फूल भी काँटों की चुभन बख़्शेगा, कितने सूरज इसी जज़्बे से उगाए मैं ने कोई सूरज तो मेरे घर को किरन बख़्शेगा, चाहता हूँ कि कभी मुझको भी बिस्तर हो नसीब जाने किस रोज़ ख़ुदा मुझ को बदन बख़्शेगा, लोग कहते हैं कि सहरा को गुलिस्ताँ कह दो उस के बदले में वो चाँदी के समन बख़्शेगा, बेलिबासी का करें भी तो गिला किस से करें ? - [अपनी सोचें शिकस्त ओ ख़ाम न कर](https://hindigazals.com/apni-sochen-shikast-o/): अपनी सोचें शिकस्त ओ ख़ाम न कर चल पड़ा है तो फिर क़याम न कर, मैं भी हस्सास दिल का मालिक हूँ सारे एहसास अपने नाम न कर, जिस्म चाहे ग़ुलाम हो जाए लेकिन ज़ेहनियत को अपनी ग़ुलाम न कर, मैं ख़ुद अपनी नज़र से गिर जाऊँ तू मेरा इतना एहतिराम न कर, तेरे पीछे ग़ुबार उड़ने लगे ख़ुद को तू इतना तेज़ गाम न कर, लोग मश्कूक हो चले आज़र अब हर एक शख़्स को सलाम न कर..!! - [लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर](https://hindigazals.com/log-baithe-hain-yahan/): लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर तुम कहाँ आ गए ये शाख़ ए गुल ए तर ले कर, भीगे भीगे से मेरे घर के दर ओ बाम मिले शायद आया था यहाँ कोई समुंदर ले कर, अब मुझे और किसी शय की तमन्ना न रही मुतमइन हूँ तेरी दहलीज़ का पत्थर ले कर, मेरी क़िस्मत में सुलगने के सिवा कुछ भी नहीं क्या करोगे भला तुम मेरा मुक़द्दर ले कर, ख़ुश्क होंठों ने मेरे जिस्म का रस चूस लिया अब कोई आए तो क्या फ़ाएदा साग़र ले कर, सीधे रस्ते कोई आता ही नहीं मेरी तरफ़ गर्दिश ए वक़्त भी आती है तो चक्कर ले कर, अपने दिल को न करे अब कोई हल्का आज़र वर्ना मैं जाऊँगा एक बोझ सा दिल पर ले कर..!! - [दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ](https://hindigazals.com/deewana-hoon-main-bikhre/): दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ लम्हा लम्हा जोड़ के सदियाँ बुनता हूँ, तन्हा कमरे सूना आँगन रात उदास फिर भी घर में सरगोशी सी सुनता हूँ, मुझको दीमक चाट रही है सोचों की मैं अपने अंदर ही अंदर घुनता हूँ, हँसते फूल कहाँ हैं मेरी क़िस्मत में मैं तो बस मुरझाई कलियाँ चुनता हूँ, कहने को ख़ामोश है मेरी ज़ात मगर सुनने को तो सब की बातें सुनता हूँ, आज़र एक मौहूम सी है उम्मीद अभी जिस के सहारे ख़्वाब सुनहरे बुनता हूँ..!! - [तेरे जहाँ से अलग एक जहान चाहता हूँ](https://hindigazals.com/tere-jahan-se-alag/): तेरे जहाँ से अलग एक जहान चाहता हूँ नई ज़मीन नया आसमान चाहता हूँ, बदन की क़ैद से बाहर तो जा नहीं सकता इसी हिसार में रह कर उड़ान चाहता हूँ, ख़मोश रहने पे अब दम सा घुटने लगता है मेरे ख़ुदा मैं दहन में ज़बान चाहता हूँ, कोई शजर ही सही धूप से नजात तो हो ये तुम से किस ने कहा साएबान चाहता हूँ, ये टुकड़ा टुकड़ा ज़मीनें न कर अता मुझको मैं पूरे सहन का पूरा मकान चाहता हूँ, फिर एक बार मेरी अहमियत को लौटा दे तेरी निगाह को फिर मेहरबान चाहता हूँ, मेरी तलब कोई दुश्वार कुन नहीं आज़र इसी ज़मीन पे हिफ़्ज़ ओ अमान चाहता हूँ..!! - [अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो](https://hindigazals.com/apne-hi-bhai-ko/): अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो अपने सहन के बीच में दीवार लगाते क्यूँ हो ? - [कुएँ जो पानी की बिन प्यास चाह रखते हैं](https://hindigazals.com/kuyen-jo-paani-ki/): कुएँ जो पानी की बिन प्यास चाह रखते हैं मगर नहंग भी दरिया की थाह रखते हैं, शहादत अपनी गवाही पे अब भी है शाहिद शहीद वो हैं जो हक़ को गवाह रखते हैं, ये जान लीजिए पहचान दोनों की है यही जो ताज राजा तो कश्कोल शाह रखते हैं, वो ख़ाक धूल चटाएँगे अपने दुश्मन को जो दिल न क़ल्ब ए अमीर ए सिपाह रखते हैं, हैं दंग अपनी ही दहशत के डर से दहशतगर्द ये काले नाग हैं दिल भी सियाह रखते हैं, जो लोग अच्छे हैं रखते हैं ठीक घर को वही ख़राब लोग तो घर को तबाह रखते हैं, हमारी उन की सियासत का रंग ख़ूब है वाह कि हम इमाम तो वो सरबराह रखते हैं, जो अंधे आँखों के हैं और नैन मुझको है नाम वो कोर चश्म भी हम पर निगाह रखते हैं, बना के क़स्र ए वफ़ा शेर बोला हैदर का कटा के हाथ भी हम दस्तगाह रखते हैं, वक़ार हिल्म अली वालों से ख़ुदा की क़सम पुल सिरात के रस्ते भी राह रखते हैं..!! - [जब भी बैठता हूँ लिखने](https://hindigazals.com/jab-bhi-baithta-hoon/): जब भी बैठता हूँ लिखने कुछ लिखा जाता नहीं, एक उसके सिवा कोई मौज़ूअ मुझे याद आता नहीं, बगैर जिसके मुमकिन ही न था ये मेरा वज़ूद, बाद उसके क्या होगा सोच कर जीया जाता नहीं, माँ की अज़मत लिख सकूँ वो हुनर मुझे आता नहीं, उसके ममता का खज़ाना तो पन्नो में समाता नहीं..!! - [दूसरा फ़ैसला नहीं होता](https://hindigazals.com/dusra-faisla-nahi-hota/): दूसरा फ़ैसला नहीं होता इश्क़ में मशवरा नहीं होता, ख़ुद ही सौ रास्ते निकलते हैं जब कोई रास्ता नहीं होता, जब तलक रूबरू न हो कोई आइना आइना नहीं होता, अपना समझा तो कह दिया वर्ना ग़ैर से तो गिला नहीं होता, कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है मुफ़्त में तजरबा नहीं होता..!! - [वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे](https://hindigazals.com/wo-bewafa-hai-use/): वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे बुरा ज़रूर है लेकिन बुरा कहूँ कैसे ? जो कश्तियों को डुबोता है ला के साहिल पर तुम्ही बताओ उसे नाख़ुदा कहूँ कैसे ? - [चश्म ए तर है सहाब है क्या है](https://hindigazals.com/chashme-tar-hai-sahaab/): चश्म ए तर है सहाब है क्या है अश्क गौहर है आब है क्या है ? मरना जीना जनाब है क्या है हरनफ़स इंक़लाब है किया है ? - [ये किस ने कहा तुम कूच करो](https://hindigazals.com/ye-kis-ne-kaha/): ये किस ने कहा तुम कूच करो बातें न बनाओ इंशा जी ये शहर तुम्हारा अपना है इसे छोड़ न जाओ इंशा जी, जितने भी यहाँ के बासी हैं सब के सब तुमसे प्यार करें क्या उन से भी मुँह फेरोगे ये ज़ुल्म न ढाओ इंशा जी, क्या सोच के तुम ने सींची थी ये केसर क्यारी चाहत की तुम जिनको हँसाने आए थे उनको न रुलाओ इंशा जी, तुम लाख सियाहत के हो धनी एक बात हमारी भी मानो कोई जा के जहाँ से आता नहीं उस देस न जाओ इंशा जी, बिखराते हो सोना हर्फ़ों का तुम चाँदी जैसे काग़ज़ पर फिर इनमें अपने ज़ख़्मों का मत ज़हर मिलाओ इंशा जी, एक रात तो क्या वो हश्र तलक रखेगी खुला दरवाज़े को कब लौट के तुम घर आओगे सजनी को बताओ इंशा जी, नहीं सिर्फ़ क़तील की बात यहाँ कहीं साहिर है कहीं आली है तुम अपने पुराने यारों से दामन न छुड़ाओ इंशा जी..!! - [खो गया है जो उस को खोने दो](https://hindigazals.com/kho-gaya-hai-jo/): खो गया है जो उस को खोने दो फिर नया ख़्वाब मुझ को बोने दो, सुनों ऐ बस्तियों को उजाड़ने वालो अब मदारी का खेल होने दो, ख़्वाहिशों ख़्वाब देखना छोड़ो अब नींद आई है मुझको सोने दो, रौशनाई न ख़त्म हो जाए काग़ज़ों को सियाह होने दो, हर घड़ी ये ख़याल आता है ज़िंदगी के हैं सिर्फ़ कोने दो, झूठ बुनियाद ही नहीं रखता रूबरू सच से सब को होने दो, आँसुओं से धुली ज़मीनों पर अब ज़रा धूप को भी रोने दो, चाँद क्यों जागता है साथ मेरे रात के बज रहे हैं पौने दो..!! - [नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत](https://hindigazals.com/nayi-poshak-pahne-hai/): नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत मैं हँस कर टाल देती हूँ दिल ए बेताब की हसरत, मोहब्बत और क्या है एक सराब ए तिश्नगी तो है वही सहरा की चमचम में चमकते आब की हसरत, नया किरदार गढ़ कर मैं कहानी ही बदल देती मगर पूरी न हो पाई नए एक बाब की हसरत, तुम्हारी याद का गहरा तअल्लुक़ आँसुओं से है मेरी पलकों को क्या होगी किसी सैलाब की हसरत, बस इतना सोच कर इस ओर कश्ती मोड़ दी मैंने निकल जाए न क्यों कर इस दफ़ा गिर्दाब की हसरत, ज़मीं पे थक के गिर जाऊँ तो शायद नींद आ जाए कि इन आँखों को है एक उम्र से एक ख़्वाब की हसरत..!! - [वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे](https://hindigazals.com/wo-kash-maan-leta/): वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे तो रास्तो के पेच का होता न डर मुझे, बेशक ये आइना मुझे जी भर सँवार दे पर देखती नहीं है अब उसकी नज़र मुझे, दीवार जो गिरी है तो इल्ज़ाम किस को दूँ ? - [ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है](https://hindigazals.com/ye-mohabbat-jo-mohabbat/): ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक वही फूल मयस्सर न हुआ दामन को जिसकी ख़ुशबू मेरी रग रग में समाई हुई है, जब भी आँखों ने सजाए है तुम्हारे सपने ज़ेहन और दिल में बहुत देर लड़ाई हुई है, दिल की चौखट पे जला रखे है आँखों ने चराग़ किस की आमद की अभी आस लगाई हुई है ? - [कभी इस से कभी उस से मिला देता है](https://hindigazals.com/kabhi-isse-kabhi-usse/): कभी इस से कभी उस से मिला देता है मे'यार अपना क्यूँ नज़रों से गिरा देता है ? - [वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता](https://hindigazals.com/wo-kaun-hai-jo/) - [मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे](https://hindigazals.com/maraj-e-ishq-jise/): मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे, तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे न ख़ुदाई की हो परवा न ख़ुदा याद रहे, लोटते सैकड़ों नख़चीर हैं क्या याद रहे चीर दो सीने में दिल को कि पता याद रहे, रात का वादा है बंदे से अगर बंदानवाज़ बंद में दे लो गिरह ता कि ज़रा याद रहे, क़ासिद ए आशिक़ ए सौदाज़दा क्या लाए जवाब जब न मालूम हो घर और न पता याद रहे, देख भी लेना हमें राह में और क्यूँ साहब हम से मुँह फेर के जाना ये भला याद रहे, तेरे मदहोश से क्या होश ओ ख़िरद की हो उम्मीद ? - [अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे](https://hindigazals.com/ab-to-ghabra-ke/): अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे ? - [कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा](https://hindigazals.com/kabhi-nazaren-mila-ke/): कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा कभी हँस के तो कभी मुस्कुरा के लूटा, मौज ए तबस्सुम में डूबता गया मैं कभी गुफ्तगू की कभी शरमा के लूटा, कभी कर के इंकार कभी इक़रार से सोए हुए अरमानो को जगा जगा के लूटा, मस्ती ए अब्सार में है वो नशा वल्लाह कभी अपना के तो कभी ठुकरा के लूटा, आपके लूटने की वो बारिकियाँ वल्लाह कभी नक़ाब गिरा के कभी उठा के लूटा..!! - [धूप सरों पर और दामन में साया है](https://hindigazals.com/dhoop-saro-par-aur/): धूप सरों पर और दामन में साया है सुन तो सही जो पेड़ो ने फ़रमाया है, कैसे कह दूँ बीच अपने दीवार है जब छोड़ने कोई दरवाज़े तक आया है, उससे आगे जाओगे तब ही जान पाओगे मंज़िल तक तो रास्ता ही तुमको लाया है, बादल बन कर चाहे कितना ऊँचा हो पानी आख़िर मिट्टी का ही सरमाया है, आख़िर ये नाक़ाम मुहब्बत काम आई तुझको खो कर ही मैंने ख़ुद को पाया है, मुहब्बत को अपनाना कोई खेल नहीं अपने ही हाथो से अपना हाथ छुड़ाया है..!! - [बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते](https://hindigazals.com/bair-duniya-se-kabile/): बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते, आबले अपने ही अँगारों के ताज़ा हैं अभी लोग क्यूँ आग हथेली पे पराई लेते, बर्फ़ की तरह दिसम्बर का सफ़र होता है हम उसे साथ न लेते तो रज़ाई लेते, कितना मानूस सा हमदर्दों का ये दर्द रहा इश्क़ कुछ रोग नहीं था जो दवाई लेते, चाँद रातों में हमें डसता है दिन में सूरज शर्म आती है अँधेरों से कमाई लेते, तुम ने जो तोड़ दिए ख़्वाब हम उनके बदले कोई क़ीमत कभी लेते तो ख़ुदाई लेते..!! - [ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है](https://hindigazals.com/ye-baat-fir-mujhe/): ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है अज़ल से मेरे तआ'क़ुब में मेरा साया है, बुलंद होती चली जा रही हैं दीवारें असीर ए दर है वो जिसने मुझे बुलाया है, मैं ला ज़वाल था मिट मिट के फिर उभरता रहा गँवा गँवा के मुझे ज़िंदगी ने पाया है, वो जिस के नैन हैं गहरे समुंदरों जैसे वो अपनी ज़ात में मुझको डुबोने आया है, मिली है उसको भी शोहरत क़तील मेरी तरह जब उस ने अपने लबों पर मुझे सजाया है..!! - [तेरा हाथ हाथ में हो अगर](https://hindigazals.com/tera-hath-hath-me/): तेरा हाथ, हाथ में हो अगर तो सफर ही असल ए हयात है, मेरे हर कदम पे हैं मंज़िलें तेरा प्यार गर मेरे साथ है, मेरी बात का मेरी हमनफस तू जवाब दे कि न दे मुझे, तेरी एक चुप में जो है छुपी वो हज़ार बातों की बात है, मेरी ज़िंदगी का हर एक पल एक तुम्हीं से तो है वाबस्ता, तेरे होंठ थिरके तो सुबह है तेरी जुल्फ बिखरे तो रात है..!! - [जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब](https://hindigazals.com/jaane-kab-kis-ke/): जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब मेरी मुट्ठी में है दरिया साग़र ओ जोश ए शबाब, दीदा ओ दिल का पियाला भी गँवा आए मज़ीद दीदा ए ख़म्मार की ख़्वाहिश में हम ख़ाना ख़राब, रक़्स ए वहशत के लिए कोई तो महवर चाहिए पाँव बेज़ंजीर हैं और ख़ेमा बेचोब ओ तनाब, अब से इन जंग ओ जदल में दानापानी के सिवा साथ में तब्ल ओ अलम हो और ताऊस ओ रबाब, मेरी बातों में भी राज़ ए आगही आ ही गया जैसे रम्ज़ ए रू ए जानाँ जैसे असरार ए किताब..!! - [ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था](https://hindigazals.com/thik-hai-ki-ye/): ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था पर किसे यूँ नाज़ कल तक चाक दामानी पे था, तीरगी ए आब ओ गिल ने ध्यान तोड़ा यकबयक वर्ना कल शब चाँद अपनी पूरी ताबानी पे था, डूब कर ऐसे तख़य्युल में खुला वो माहरू गाहे गाहे एक शिकन उस ख़ंदा पेशानी पे था, सब ज़ुहूर ए इब्न ए मरियम की दुआ करते रहे ध्यान उन सब का मगर तख़्त ए सुलैमानी पे था, हम हुजूम ए दहर में होते हैं ऐसे आजकल जैसे यूसुफ़ भाइयों में चाह ए कनआनी पे था..!! - [दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है](https://hindigazals.com/dil-mers-raksan-hai/): दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है लर्ज़िश ए पा आसमाँ या ये जहाँ लर्ज़िश में है, आज से पहले ज़मीं की चाल तो ऐसी न थी तुम ज़रा रफ़्तार देखो किस क़दर गर्दिश में है, ठीक है तुझको मिला है मुझको भटकाने का काम ये मगर क्या तू तो हर दम दावत ए लग़्ज़िश में है, किस क़दर फिर एक हो जावें ज़मीन ओ आसमाँ हम ज़मीन ओ आसमाँ वाले इसी साज़िश में हैं, मुंतज़िर हैं तिश्नालब ये कौसर ओ तसनीम का एक ज़ंजीर ए कशिश भी साक़ी ए महवश में है..!! - [जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है](https://hindigazals.com/jaane-kyun-barbad-hona/): जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है सूरत ए फ़रहाद होना चाहता है, ज़ेहन से आख़िर में अब थक हार कर मेरा दिल आबाद होना चाहता है, आसमाँ वाले ये सुन कर हँस पड़े आदमी आज़ाद होना चाहता है, हर जगह तामीर कर के एक इरम हर कोई शद्दाद होना चाहता है, सानेहा ये है कि एक बुलबुल का दिल दामन ए सय्याद होना चाहता है, हो के मुंसिफ़ तख़्त पे अब जल्वा-गर वाक़िफ़ ए रूदाद होना चाहता है..!! - [मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे](https://hindigazals.com/main-na-kahta-tha/): मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे सोंधी मिट्टी ही में होती है वफ़ा यार मेरे, कोई टूटे हुए ख़्वाबों से कहाँ मिलता है हर जगह दर्द का बिस्तर न लगा यार मेरे, सिलसिला फिर से जुड़ा है तो जुड़ा रहने दे दिल के रिश्तों को तमाशा न बना यार मेरे, अपनी चाहत के शब ओ रोज़ मुकम्मल कर ले जा ये सूरज भी तेरे नाम किया यार मेरे, तुझ से मिलता हूँ तो रिश्ता कोई याद आता है सिलसिला मुझ से ज़ियादा न बढ़ा यार मेरे, ऐसा लगता है कि कुछ टूट रहा है मुझ में छोड़ के तू मुझे इस वक़्त न जा यार मेरे, ख़ुशनसीबी से ये साअत तेरे हाथ आई है आसमाँ झुकने लगा हाथ बढ़ा यार मेरे..!! - [आधुनिक युग में विकसित साहित्यिक विधा](https://hindigazals.com/adhunik-yug-ki-kavita/) - [रीति काव्य विधा व इसकी विशेषताएँ](https://hindigazals.com/riti-kavy-madhyakalin-kaal/) - [भक्ति कविताएँ और इसकी विशेषताएँ](https://hindigazals.com/bhakti-poetries-and-its/) - [हिंदी कविता और ग़ज़लें](https://hindigazals.com/hindi-kavita-aur-gazals/) - [दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही](https://hindigazals.com/dard-khamosh-raha-tutati/): दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही मेरी हर शाम तेरी याद की हमराज़ रही, शहर में जब भी चले ठंडी हवा के झोंके तपते सहरा की तबीअत बड़ी ना साज़ रही, आइने टूट गए अक्स की सच्चाई पर और सच्चाई हमेशा की तरह राज़ रही, एक नए मोड़ पे उसने भी मुझे छोड़ दिया जिसकी आवाज़ में शामिल मेरी आवाज़ रही, सुनता रहता हूँ बुज़ुर्गों से मैं अक्सर ताहिर वो समाअत ही रही और न वो आवाज़ रही..!! - [मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो](https://hindigazals.com/mere-labo-pe-usi/): मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये तिश्नगी तो मिली है हमें विरासत में हमारे वास्ते दरिया कोई उदास न हो, तमाम दिन के दुखों का हिसाब करना है मैं चाहता हूँ कोई मेरे आस पास न हो, मुझे भी दुख है ख़ता हो गया निशाना तेरा कमान खींच मैं हाज़िर हूँ तू उदास न हो, ग़ज़ल ही रह गई ताहिर फ़राज़ अपने लिए जहाँ में कोई ऐसा भी बे असास न हो..!! - [जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी](https://hindigazals.com/jab-mere-honthon-pe/): जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी तेरी आँखों में भी थोड़ी सी नमी रह जाएगी, सरफिरा झोंका हवा का तोड़ देगा शाख़ को फूल बनने की तमन्ना में कली रह जाएगी, ख़त्म हो जाएगा जिस दिन भी तुम्हारा इंतिज़ार घर के दरवाज़े पे दस्तक चीख़ती रह जाएगी, क्या ख़बर थी आएगा एक रोज़ ऐसा वक़्त भी मेरी गोयाई तेरा मुँह देखती रह जाएगी, वक़्त ए रुख़्सत आएगा और ख़त्म होगा ये सफ़र मेरे दिल की बात मेरे दिल में ही रह जाएगी..!! - [जो शजर बे लिबास रहते हैं](https://hindigazals.com/jo-shajar-be-libas/): जो शजर बे लिबास रहते हैं उन के साए उदास रहते हैं, चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए लोग बरसों उदास रहते हैं, इत्तिफ़ाक़न जो हँस लिए थे कभी इंतिक़ामन उदास रहते हैं, मेरी पलकें हैं और अश्क तेरे पेड़ दरिया के पास रहते हैं, उन के बारे में भी सोचिए ज़रा जो मुसलसल उदास रहते हैं..!! - [ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया](https://hindigazals.com/gam-iska-kuch-nahi/): ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया ग़म ये है कि क़ातिलों में तेरा नाम आ गया, जुगनू जले बुझे मेरी पलकों पे सुब्ह तक जब भी तेरा ख़याल सर ए शाम आ गया, महसूस कर रहा हूँ मैं ख़ुशबू की बाज़गश्त शायद तेरे लबों पे मेरा नाम आ गया, कुछ दोस्तों ने पूछा बताओ ग़ज़ल है क्या ? - [नए मौसम को क्या होने लगा है](https://hindigazals.com/naye-mausam-ko-kya/): नए मौसम को क्या होने लगा है कि मिट्टी में लहू बोने लगा है, कोई क़ीमत नहीं थी जिस की यारो अब उस का मोल भी होने लगा है, बहुत मुश्किल है अब उस को जगाना वो आँखें खोल कर सोने लगा है, जहाँ होता नहीं था कुछ भी कल तक वहाँ भी कुछ न कुछ होने लगा है, हवा का क़द कोई किस तरह नापे जिसे देखो वही कोने लगा है, अभी तो पाँव में काँटे ही चुभे हैं अभी से हौसला खोने लगा है, नई तहज़ीब दम तोड़ेगी एक दिन नहीं होना था जो होने लगा है..!! - [भूले से किसी और का रस्ता नहीं छूते](https://hindigazals.com/bhule-se-kisi-aur/): भूले से किसी और का रस्ता नहीं छूते अपनी तो हर एक शख़्स से रफ़्तार जुदा है, उस रिंद ए बला नोश को सीने से लगा लो मयख़ाने का ज़ाहिद से पता पूछ रहा है, मंजधार से टकराए हैं हिम्मत नहीं हारे टूटी हुई पतवार पे ये ज़ो'म रहा है, घर अपना किसी और की नज़रों से न देखो हर तरह से उजड़ा है मगर फिर भी सजा है, मयकश किसी तफ़रीक़ के क़ाइल ही नहीं हैं वाइज़ के लिए भी दर ए मयख़ाना खुला है, ये दौर भी क्या दौर है इस दौर में यारो सच बोलने वालों का ही अंजाम बुरा है..!! - [अगर ये ज़िद है कि मुझ से दुआ सलाम न हो](https://hindigazals.com/agar-ye-zidd-hai-ki/): अगर ये ज़िद है कि मुझ से दुआ सलाम न हो तो ऐसी राह से गुज़रो जो राह ए आम न हो, सुना तो है कि मोहब्बत पे लोग मरते हैं ख़ुदा करे कि मोहब्बत तुम्हारा नाम न हो, बहार ए आरिज़ ए गुल्गूँ तुझे ख़ुदा की क़सम वो सुब्ह मेरे लिए भी कि जिस की शाम न हो, मेरे सुकूत को नफ़रत से देखने वाले यही सुकूत कहीं बाइस ए कलाम न हो, इलाही ख़ैर कि उन का सलाम आया है यही सलाम कहीं आख़िरी सलाम न हो, मुझे तो रास न आई हयात ए नौ लेकिन ख़ता मुआफ़ तुम्हारा भी ये मक़ाम न हो, जमील उन से तआरुफ़ तो हो गया लेकिन अब उन के बाद किसी से दुआ सलाम न हो..!! - [मसअला हुस्न ए तख़य्युल का है न इल्हाम का है](https://hindigazals.com/masala-husn-e-takhyyul/): मसअला हुस्न ए तख़य्युल का है न इल्हाम का है ये फ़साना ज़रा मुश्किल दिल ए नाकाम का है, रात दिन पहरों पहर उस की अदा के चर्चे ये तमाशा भी मेरे वास्ते किस काम का है ? - [हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है](https://hindigazals.com/hamari-wajah-e-jawal/): हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है हराम क्या है, हलाल क्या है ? सवाल ये है, तुम्हारे ताज़ों के हीरे मोती तुम्हें हो मुबारक़ मगर रियाया का हाल क्या है ? - [बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही](https://hindigazals.com/bugz-e-islam-me/): बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही यहाँ कितनो के क़िरदार गिरे है, सभी मुन्सफ़ गिरे, मनसब गिरे और ना जाने कितने सालार गिरे है, सियासत ए दरबाँ के इशारों पर अदलिया के ऊँचें मीनार गिरे है, जिन्हें न था वास्ता दैर ओ हरम से ऐसे भी मज़हब के ठेकेदार गिरे है.!! - [कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया](https://hindigazals.com/kitni-mohabbaton-se-pahla/): कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया मैं कुछ न जानता था सब कुछ मुझे सिखाया, अनपढ़ था और जाहिल क़ाबिल मुझे बनाया दुनिया ए इल्म ओ दानिश का रास्ता दिखाया, ऐ दोस्तो मिलें तो बस एक पयाम कहना उस्ताद ए मोहतरम को मेरा सलाम कहना, मुझ को ख़बर नहीं थी आया हूँ मैं कहाँ से ? - [नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का](https://hindigazals.com/nek-bachche-dil-se/): नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का बाप की उल्फ़त से बेहतर है ग़ज़ब उस्ताद का, आम लोगों की जहालत दूर करने के लिए हक़ तआ'ला ने बनाया है सबब उस्ताद का, उस की बरकत से जहाँ में फैलती हैं नेकियाँ क्यों न फिर उस्ताद से राज़ी हो रब उस्ताद का, कुछ न कुछ उम्दा सबक़ देती है उसकी ज़िंदगी ख़ुल्क़ से ख़ाली नहीं है कोई ढब उस्ताद का, जिस घड़ी नादान बच्चों को सिखाता है वो इल्म चूम लेते हैं फ़रिश्ते आ के लब उस्ताद का, बस उसे पढ़ने पढ़ाने से हमेशा काम है कितना अच्छा मश्ग़ला है रोज़ ओ शब उस्ताद का, ख़्वाह सारी उम्र उस के पाँव धो धो कर पिए आदमी से हक़ अदा होता है कब उस्ताद का, इम्तिहाँ में हल न हो जिस दम कोई मुश्किल सवाल ख़ुद पसंदों को पता चलता है तब उस्ताद का, शुक्र के जज़्बात से गर्दन झुका लेता हूँ मैं याद आता है मुझे एहसान जब उस्ताद का, कल ज़माने की निगाहों में वो इज़्ज़त पाएगा मर्तबा पहचान जाएगा जो अब उस्ताद का, उसकी आलमगीर हैसिय्यत है शाहों की तरह कुल अजम उस्ताद का है कुल अरब उस्ताद का, चल रहे हैं आज दुनिया में हज़ारों महकमे सच अगर पूछो तो है ये फ़ैज़ सब उस्ताद का..!! - [दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना](https://hindigazals.com/dariya-ka-shor-machana/): दरियाँ का शोर मचाना और समंदर का ख़ामोश रहना वक़्त आने पर हर एक के हुनर ए खास बदल जाते है, जब मैं ख़ामोश रहूँ तो बहस करते है मेरी परवरिस पर और मेरी चुप्पी टूटते ही उनके सवालात बदल जाते है, ये दौलत, ये हुकूमत, ये दबदबा, ये नशा, ये तक़व्वुर मुसाफिर है, वक़्त-बेवक़्त इनके घरबार बदल जाते है, ना कर तू यहाँ ऐ नादाँ किसी से भी उम्मीदें बेहिसाब मतलबी दुनियाँ में वक़्त के साथ जज़्बात बदल जाते हैं, अगर ठुकराता है तुझे कोई तो निराश मत हो ऐ इंसान गर दुआएँ कबूल न हो तो यहाँ भगवान बदल जाते है, तुझे ठोकरे ही सिखाती है मुसीबतों से लड़ने का हुनर गर हवाएँ हो जाए तेज़ तो क्या कभी बाज़ बदल जाते है ? - [दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं](https://hindigazals.com/dil-ke-loot-jaane/): दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं ये तमाशा सर ए बाज़ार ज़रूरी तो नहीं, मुझे था इश्क़ तेरी रूह से और अब भी है जिस्म से हो कोई सरोकार ये ज़रूरी तो नहीं, मैं तुझे टूट के चाहूं ये तो मेरी फ़ितरत है तू भी हो मेरा तलबगार ये ज़रूरी तो नहीं, ऐ सितमगर कभी तो झाँक मेरी आँखों में जुबां से ही हो प्यार का इज़हार ज़रूरी तो नहीं..!! - [हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर](https://hindigazals.com/hamare-sabr-ke-daman/): हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर निगाह ए जोक तलब इतना बे क़रार न कर, बड़े ख़ुलूस से आये हैं तेरी महफ़िल में हमारा खून ए तमन्ना ऐ पर्दादार न कर, ये एतमाद ए मुहब्बत ये ऐतबार ए वफ़ा कज़ा को देख मगर उनका इंतज़ार न कर, कफ़स में ताने बहारों के दे न ऐ सय्याद सितमज़दा पे सितम ऐ सितम सितम शि'आर न कर, चमन को तर्क किए मुद्दतें हुई आदिल हमारे सामने अब क़िस्सा ए बहार न कर..!! - [मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं](https://hindigazals.com/meri-mohabbat-mere-jazbat/): मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं मेरे हमदम मेरी क़ायनात सिर्फ तुम से हैं, गैर महरम से पूछने का हक़ नहीं रखता मेरे सवालात मेरे जवाबात सिर्फ़ तुम से हैं, तुम को मालुम नहीं मेरी तन्हाई का दुःख मेरी हर फिक्र मेरे ख्यालात सिर्फ़ तुम से हैं, तुम सामने हो तो मुक़द्दर पे हुकुमत अपनी मेरे हर रिश्ते की सौगात फक़त तुम से है, गर कभी बिखर जाऊँ तो समेट लेना मुझ को है मुक़म्मल जो ये मेरी ज़ात सिर्फ़ तुम से है..!! - [फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है](https://hindigazals.com/falak-ka-har-sitara/): फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है जिसे शबनम सहर की शोख़ किरनों में पिरोती है, वही मस्ती मेरी धड़कन है मेरे दिल की जोती है जो तेरी नीलगूँ आँखों में गहरी नींद सोती है, ज़मीन ए दर्द में चाहत वफ़ा के बीज बोती है तो क्या क्या जावेदाँ लम्हात की तख़्लीक़ होती है, तड़पती है मेरे सीने में ऐसे आरज़ू तेरी कोई जोगन घने जंगल में जैसे छुप के रोती है, ये मेरी सोच हर ज़र्रे में सूरज की तमन्नाई ये दिल की रौशनी को लम्हे लम्हे में समोती है, गए वक़्तों की पहनाई छलक जाती है आँखों से अँधेरी रात में जब क़तरा क़तरा ओस रोती है, कहाँ मिलती है वो राहत नए यख़बस्ता चेहरों में पुराने दोस्तों से मिल के जो तस्कीन होती है..!! - [सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से](https://hindigazals.com/sab-jal-gaya-jalte/): सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से, आज उस के जनाज़े में है एक शहर सफ़ आरा कल मर गया जो आदमी तन्हाई के डर से, कब तक गए रिश्तों से निभाता मैं तअ'ल्लुक़ इस बोझ को ऐ दोस्त उतार आया हूँ सर से, जो आइना ख़ाना मेरी हैरत का सबब है मुमकिन है मेरे बाद मेरी दीद को तरसे, इस अहद ए ख़िज़ाँ में किसी उम्मीद के मानिंद पत्थर से निकल आऊँ मगर अब्र तो बरसे, रूठे हुए सूरज को मनाने की लगन में हम लोग सर ए शाम निकल पड़ते हैं घर से, उस शख़्स का अब फिर से खड़ा होना है मुश्किल इस बार गिरा है वो ज़माने की नज़र से, लगता है कि इस दिल में कोई क़ैद है अश्फ़ाक़ रोने की सदा आती है यादों के खंडहर से..!! - [बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ](https://hindigazals.com/bekhabar-duniya-ko-rahne/): बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ दोस्तो मेरे दुखों को मुश्तहर करते हो क्यूँ ? - [नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त](https://hindigazals.com/nahi-badalta-yahan-kuchh/): नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त नहीं बदलता यहाँ कुछ भी जुस्तजू से फ़क़त, मुझे यक़ीन है हमारा जहाँ बदलेगा ज़मीन बदलेगी और आसमान बदलेगा, ये ख़ार बदलेंगे ये खारज़ार बदलेगा सियासतों का भी कारोबार बदलेगा, खबासतों का ये सारा ज़माना बदलेगा फ़रेब ओ मकर का ये कारख़ाना बदलेगा, ख़बीस लोगो का तर्ज़ ए कलाम तो देखो ज़लील लोगो का तर्ज़ ए खराम तो देखो, गुरूर ओ किब्र का सारा ख़ुमार उतरेगा मुनाफिकत का ये सारा गुबार उतरेगा, सुराही बदलेगी मीना ओ जाम बदलेगा नज़र ये आता है सारे गुलाम बदलेंगे, ये साक़ी बदलेगी ये इंतज़ाम बदलेगा मुझे यकीं है कि सारा निज़ाम बदलेगा, जो सुर फूँका है तेरे लहू ने ऐ नवाब जो नूर फैला है तेरे कलम से ऐ नवाब मुझे यकीं है ये ज़ुल्मत को दूर कर देगा ये फ़ैलती हुई वहशत को दूर कर देगा, किसी भी रात उनको सुकूँ नहीं मिलना किसी भी बात से सोज़ ए दरूँ नहीं मिटना, किसी भी पहलू से उनके लिए क़रार नहीं कोई बहार भी अब उनके लिए बहार नहीं, खुदाया उसको तो अब ज़िंदगी नहीं मिलनी हमें भी अब कहीं आसूदगी नहीं मिलनी, जो उसके हक़ मे उठे हाथ उनको देख ज़रा कि किस ने किस का दिया साथ उनको देख ज़रा, उठा है लोगो का जम्म ए गफ़ीर देखो तो अभी तो जागा है उनका ज़मीर देखो तो..!! - [कभी फूलों कभी खारों से बचना](https://hindigazals.com/kabhi-foolo-kabhi-khaaro/): कभी फूलों कभी खारों से बचना कभी रक़ीब कभी यारों से बचना, जान बुझ कर धोखा न खा लेना राख़ मे दबे हुए अंगारों से बचना, साहिल पे भी कश्ती डूब जाती है यकीन ना कर किनारो से बचना, मौसम तो बदलते ही रहते है यहाँ कभी ख़िज़ाँ कभी बहारों से बचना, बीच राह मे तन्हा छोड़ जाते है लोग यार तुम ऐसे दिलदारों से बचना, जो गिरगिट की तरह रंग बदले ज़िंदगी मे ऐसे किरदारों से बचना..!! - [हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे](https://hindigazals.com/hamare-jaise-tumhe-kharabo/): हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे धुल पड़ी कहीं किताबो में मिलेंगे, ज़फागर से किये वफ़ाओ में मिलेंगे ना की हुई अपनी खताओ में मिलेंगे, दोस्तों ! - [ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी](https://hindigazals.com/ye-kiska-kar-raha/): ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी जब ख़ुद ही ला सकता है बहार आदमी, मिलता नहीं मुफ़्त में कुछ भी यहाँ पर फिर भी चाहता है चमत्कार आदमी, दो पल के लिए ही तो जन्नत की चाह नहीं फिर क्यूँ करता है बलात्कार आदमी, सुना है इंसानों की बस्ती है यहां पर फिर क्यूँ रखता है हाथों में हथियार आदमी ? - [दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो](https://hindigazals.com/dard-ho-yaa-ki/): दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो गैरों की ख़ुशी की खातिर रस्म ए दुनिया निभाते चलो, अहल ए सियासत ने इंसानियत को मौक़ूफ़ बना रखा है तुम अहल ए वतन को इंसानियत का सबक़ पढ़ाते चलो, मुक़ाबला ही क्या मुर्दा ज़मीरो से अहल ए ईमां वालो का तुम हर हाल में अहल ए ईमां बनो ईमान जगाते चलो..!! - [जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले](https://hindigazals.com/jala-ke-mishal-e/): जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार ए शाम नहीं मंज़िल ए सहर भी नहीं अजब नगर है यहाँ दिन चले न रात चले, हमारे लब न सही वो दहान ए ज़ख़्म सही वहीं पहुँचती है यारो कहीं से बात चले, सुतून ए दार पे रखते चलो सरों के चराग़ जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले, हुआ असीर कोई हमनवा तो दूर तलक ब पास ए तर्ज़ ए नवा हम भी साथ साथ चले, बचा के लाए हम ऐ यार फिर भी नक़्द ए वफ़ा अगरचे लुटते रहे रहज़नों के हाथ चले, फिर आई फ़स्ल कि मानिंद बर्ग ए आवारा हमारे नाम गुलों के मुरासलात चले, क़तार ए शीशा है या कारवान ए हम-सफ़राँ ख़िराम ए जाम है या जैसे काएनात चले, भुला ही बैठे जब अहल ए हरम तो ऐ मजरूह बग़ल में हम भी लिए एक सनम का हाथ चले..!! - [यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो](https://hindigazals.com/yaaro-kisi-qaatil-se/): यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो अपने ही गले के लिए तलवार न माँगो, गिर जाओगे तुम अपने मसीहा की नज़र से मर कर भी इलाज ए दिल ए बीमार न माँगो, खुल जाएगा इस तरह निगाहों का भरम भी काँटों से कभी फूल की महकार न माँगो, सच बात पे मिलता है सदा ज़हर का प्याला जीना है तो फिर जीने का इज़हार न माँगो, उस चीज़ का क्या ज़िक्र जो मुमकिन ही नहीं है सहरा में कभी साया ए दीवार न माँगो..!! - [ये दौर ए ख़िरद है दौर ए जुनूँ](https://hindigazals.com/ye-daur-e-khirad/): ये दौर ए ख़िरद है दौर ए जुनूँ इस दौर में जीना मुश्किल है अँगूर की मय के धोके में ज़हराब का पीना मुश्किल है, जब नाख़ुन ए वहशत चलते थे रोके से किसी के रुक न सके अब चाक ए दिल ए इन्सानिय्यत सीते हैं तो सीना मुश्किल है, इक सब्र के घूँट से मिट जाती तब तिश्ना लबों की तिश्ना लबी कमज़र्फी ए दुनिया के सदक़े ये घूँट भी पीना मुश्किल है, वो शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से बुझने का सलीक़ा आसाँ है जलने का क़रीना मुश्किल है, करने को रफ़ू कर ही लेंगे दुनिया वाले सब ज़ख़्म अपने जो ज़ख़्म दिल ए इंसाँ पे लगा उस ज़ख़्म का सीना मुश्किल है, वो मर्द नहीं जो डर जाए माहौल के ख़ूनी मंज़र से इस हाल में जीना लाज़िम है जिस हाल में जीना मुश्किल है, मिलने को मिलेगा बिल आख़िर ऐ अर्श सुकून ए साहिल भी तूफ़ान ए हवादिस से लेकिन बच जाए सफ़ीना मुश्किल है..!! - [हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो](https://hindigazals.com/hamko-junoon-kya/): हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़्यादा चाक ए जिगर मोहताज ए रफ़ू है आज तो दामन सर्फ़ ए लहू है एक मौसम था हम को रहा है शौक़ ए बहाराँ तुम से ज़्यादा, अहद ए वफ़ा यारों से निभाएँ नाज़ ए हरीफ़ाँ हँस के उठाएँ जब हमें अरमाँ तुम से सिवा था अब हैं पशेमाँ तुम से ज़्यादा, हम भी हमेशा क़त्ल हुए और तुम ने भी देखा दूर से लेकिन ये न समझना हम को हुआ है जान का नुक़साँ तुम से ज़्यादा, जाओ तुम अपने बाम की ख़ातिर सारी लवें शम्ओं की कतर लो ज़ख़्म के मेहर ओ माह सलामत जश्न ए चराग़ाँ तुम से ज़्यादा, देख के उलझन ज़ुल्फ़ ए दोता की कैसे उलझ पड़ते हैं हवा से हम से सीखो हम को है यारो फ़िक्र ए निगाराँ तुम से ज़्यादा, ज़ंजीर ओ दीवार ही देखी तुम ने तो मजरूह मगर हम कूचा कूचा देख रहे हैं आलम ए ज़िंदाँ तुम से ज़्यादा..!! - [कभी ख़ुद कभी औरो को हटाते रहिए](https://hindigazals.com/kabhi-khud-kabhi-auron/): कभी ख़ुद कभी औरो को हटाते रहिए बस यूँ ही रास्तो को सहल बनाते रहिए, कही उठ जाइए किसी का हाथ थाम के कभी औरो को दे कर हाथ उठाते रहिए, एक दिन पानी हर हाल में ऊपर आएगा बस शिद्दत से पत्थर घड़े में गिराते रहिए, कभी न कभी जा कर निशाने पर लगेगा बिना थके कोशिशो के तीर चलाते रहिए, अपने ही नहीं बेगाने भी हो जाएँगे कायल आप बस बेलौस यूँ ही रिश्ते निभाते रहिए..!! - [यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं](https://hindigazals.com/yun-to-aapas-me/): यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं ? - [कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा](https://hindigazals.com/koi-hamdam-na-raha/): कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे ? - [किताब सादा रहेगी कब तक ?](https://hindigazals.com/kitab-saada-rahegi-kabtak/): किताब सादा रहेगी कब तक ? - [अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की](https://hindigazals.com/ab-to-shaharon-se/) - [तख़्लीक़ पे फ़ितरत की गुज़रता है गुमाँ और](https://hindigazals.com/takhliq-pe-fitrat-ki/): तख़्लीक़ पे फ़ितरत की गुज़रता है गुमाँ और इस आदम ए ख़ाकी ने बनाया है जहाँ और, ये सुब्ह है सूरज की सियाही से अँधेरी आएगी अभी एक सहर महर चकाँ और, बढ़नी है अभी और भी मज़लूम की ताक़त घटनी है अभी ज़ुल्म की कुछ ताब ओ तवाँ और, तर होगी ज़मीं और अभी ख़ून ए बशर से रोएगा अभी दीदा ए ख़ूनाबा फ़िशाँ और, बढ़ने दो ज़रा और अभी कुछ दस्त ए तलब को बढ़ जाएगी दो चार शिकन ए ज़ुल्फ़ ए बुताँ और, करना है अभी ख़ून ए जिगर सर्फ़ ए बहाराँ कुछ देर उठाना है अभी नाज़ ए ख़िज़ाँ और, हम हैं वो बला कश कि मसाइब से जहाँ के हो जाते हैं शाइस्ता ए ग़म हा ए जहाँ और..!! - [हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल ही गई](https://hindigazals.com/halat-e-haal-ke/): हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल ही गई शौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी गई, तेरा फ़िराक़ जान ए जाँ ऐश था क्या मेंरे लिए यानी तेरे फ़िराक़ में ख़ूब शराब पी गई, तेरे विसाल के लिए अपने कमाल के लिए हालत ए दिल कि थी ख़राब और ख़राब की गई उसकी उमीद ए नाज़ का हम से ये मान था कि आप उम्र गुज़ार दीजिए उम्र गुज़ार दी गई, एक ही हादसा तो है और वो ये कि आज तक बात नहीं कही गई बात नहीं सुनी गई, बाद भी तेरे जान ए जाँ दिल में रहा अजब समाँ याद रही तेरी यहाँ फिर तेरी याद भी गई, उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुख़न में और फिर उस के बदन के वास्ते एक क़बा भी सी गई, मीना ब मीना मय ब मय जाम ब जाम जम ब जम नाफ़ पियाले की तेरे याद अजब सही गई, कहनी है मुझ को एक बात आप से यानी आप से आप के शहर ए वस्ल में लज़्ज़त ए हिज्र भी गई, सेहन ए ख़याल ए यार में की न बसर शब ए फ़िराक़ जब से वो चाँदना गया जब से वो चाँदनी गई..!! - [तुम आए हो न शब ए इंतिज़ार गुज़री है](https://hindigazals.com/tum-aye-ho-na/): तुम आए हो न शब ए इंतिज़ार गुज़री है तलाश में है सहर बार बार गुज़री है, जुनूँ में जितनी भी गुज़री ब कार गुज़री है अगरचे दिल पे ख़राबी हज़ार गुज़री है, हुई है हज़रत ए नासेह से गुफ़्तुगू जिस शब वो शब ज़रूर सर ए कू ए यार गुज़री है, वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था वो बात उन को बहुत ना गवार गुज़री है, न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है, चमन पे ग़ारत ए गुल चीं से जाने क्या गुज़री क़फ़स से आज सबा बे क़रार गुज़री है..!! - [कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी](https://hindigazals.com/kab-thahrega-dard-e/): कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी, कब जान लहू होगी कब अश्क गुहर होगा किस दिन तेरी शुनवाई ऐ दीदा ए तर होगी, कब महकेगी फ़स्ल ए गुल कब बहकेगा मयख़ाना कब सुब्ह ए सुख़न होगी कब शाम ए नज़र होगी, वाइज़ है न ज़ाहिद है नासेह है न क़ातिल है अब शहर में यारों की किस तरह बसर होगी ? - [नया एक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ?](https://hindigazals.com/naya-ek-rishta-paida/): नया एक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ? बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम ? ख़मोशी से अदा हो रस्म ए दूरी कोई हंगामा बरपा क्यूँ करें हम ? - [बे क़रारी सी बे क़रारी है](https://hindigazals.com/be-qarari-see-be/): बे क़रारी सी बे क़रारी है वस्ल है और फ़िराक़ तारी है, जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है, निघरे क्या हुए कि लोगों पर अपना साया भी अब तो भारी है, बिन तुम्हारे कभी नहीं आई क्या मेंरी नींद भी तुम्हारी है, आप में कैसे आऊँ मैं तुझ बिन साँस जो चल रही है आरी है, उस से कहियो कि दिल की गलियों में रात दिन तेरी इंतिज़ारी है, हिज्र हो या विसाल हो कुछ हो हम हैं और उस की यादगारी है, एक महक सम्त ए दिल से आई थी मैं ये समझा तेरी सवारी है, हादसों का हिसाब है अपना वर्ना हर आन सब की बारी है, ख़ुश रहे तू कि ज़िंदगी अपनी उम्र भर की उमीद वारी है..!! - [गुलाबी होंठों पे मुस्कराहट](https://hindigazals.com/gulabi-honthon-pe-muskurahat/): गुलाबी होंठों पे मुस्कराहट सजा के मिलते तो बात बनती, वो चाँद चेहरे से काली ज़ुल्फें हटा के मिलते तो बात बनती, मुझे भी ख़ुद पे गुरुर होता मुझे भी हासिल सुरूर होता, अगर वो आँखों से रोज़ मुझ को पिला के मिलते तो बात बनती, दुखो की तारीकियों में जानां न मैं भटकता न वो भटकते दीये वफ़ा के दिल ओ निगाह में जला के मिलते तो बात बनती, बहार की इस सुहानी रुत में मुझे भी चैन ओ क़रार मिलता अगर वो दाँतों में सुर्ख आँचल दबा के मिलते तो बात बनती..!! - [मेरे नसीब का लिखा बदल भी सकता था](https://hindigazals.com/mere-nasib-ka-likha-badal/): मेरे नसीब का लिखा बदल भी सकता था वो चाहता तो मेंरे साथ चल भी सकता था, ये तू ने ठीक किया अपना हाथ खींच लिया मेंरे लबों से तेरा हाथ जल भी सकता था, उड़ाती रहती है दुनिया ग़लत सलत बातें वो संगदिल था तो एक दिन पिघल भी सकता था, उतर गया तेरा ग़म रूह की फ़ज़ाओं में रगों में होता तो आँखों से ढल भी सकता था, मैं ठीक वक़्त पे ख़ामोश हो गया वर्ना मेंरे रफ़ीक़ों का लहजा बदल भी सकता था, अना को धूप में रहना पसंद था वर्ना तेरे ग़ुरूर का सूरज तो ढल भी सकता था, रगड़ सकी न मेंरी प्यास एड़ियाँ वर्ना हर एक ज़र्रे से चश्मा उबल भी सकता था, पसंद आई न टूटी हुई फ़सील की राह मैं शहर ए तन की घुटन से निकल भी सकता था, वो लम्हा जिस ने मुझे रेज़ा रेज़ा कर डाला किसी के बस में जो होता तो टल भी सकता था..!! - [लोग कहते हैं ज़माने में मुहब्बत कम है](https://hindigazals.com/log-kahte-hain-zamane/): लोग कहते हैं ज़माने में मुहब्बत कम है ये अगर सच है तो इस में हकीक़त कम है, चंद लोगों ने अगर महल बना रखें हैं इसका मतलब नहीं कि शहर में गुर्बत कम है, एक हम ही न थे जो यूँ फ़रामोश हुए वरना भूल जाने की उस शख्स को आदत कम है, क्यूँ न हम छोड़ चलें शहर की रौनक सागर वैसे भी अब इसे अपनी ज़रूरत कम है..!! - [कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ...](https://hindigazals.com/kuch-gam-e-jaanaan/): कुछ ग़म ए जानाँ कुछ ग़म ए दौराँ दोनों मेरी ज़ात के नाम एक ग़ज़ल मंसूब है उससे एक ग़ज़ल हालात के नाम, मौज ए बला दीवार ए शहर पे अब तक जो कुछ लिखती रही मेरी किताब ए ज़ीस्त को पढ़िए दर्ज हैं सब सदमात के नाम, गिरते ख़ेमे जलती तनाबें आग का दरिया ख़ून की नहर ऐसे मुनज़्ज़म मंसूबों को दूँ कैसे आफ़ात के नाम, उस की गली से मक़्तल ए जाँ तक मस्जिद से मयख़ाने तक उलझन प्यास ख़लिश तन्हाई कर्बज़दा लम्हात के नाम, सहरा ज़िंदाँ तौक़ सलासिल आतिश ज़हर और दार ओ रसन क्या क्या हमने दे रखे हैं आप के एहसानात के नाम, रौशन चेहरा भीगी ज़ुल्फ़ें दूँ किसको किस पर तरजीह एक क़सीदा धूप का लिखूँ एक ग़ज़ल बरसात के नाम, जिनके लिए मर मर के जिए हम क्या पाया उनसे 'मंज़ूर' कुछ रुस्वाई कुछ बदनामी हमको मिली सौग़ात के नाम..!! - [चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है](https://hindigazals.com/chupke-chupke-raat-din/): चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बा हज़ाराँ इज़्तिराब ओ सद हज़ाराँ इश्तियाक़ तुझ से वो पहले पहल दिल का लगाना याद है, बार बार उठना उसी जानिब निगाह ए शौक़ का और तेरा ग़ुर्फ़े से वो आँखें लड़ाना याद है, तुझ से कुछ मिलते ही वो बेबाक हो जाना मेंरा और तेरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है, खींच लेना वो मेंरा पर्दे का कोना दफ़अतन और दुपट्टे से तेरा वो मुँह छुपाना याद है, जान कर सोता तुझे वो क़स्द ए पा बोसी मेंरा और तेरा ठुकरा के सर वो मुस्कुराना याद है, तुझ को जब तन्हा कभी पाना तो अज़ राह ए लिहाज़ हाल ए दिल बातों ही बातों में जताना याद है, जब सिवा मेरे तुम्हारा कोई दीवाना न था सच कहो कुछ तुम को भी वो कारख़ाना याद है, ग़ैर की नज़रों से बच कर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ वो तेरा चोरी छुपे रातों को आना याद है, आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र ए फ़िराक़ वो तेरा रो रो के मुझको भी रुलाना याद है, दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए वो तेरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है, आज तक नज़रों में है वो सोहबत ए राज़ ओ नियाज़ अपना जाना याद है तेरा बुलाना याद है, मीठी मीठी छेड़ कर बातें निराली प्यार की ज़िक्र दुश्मन का वो बातों में उड़ाना याद है, देखना मुझ को जो बरगश्ता तो सौ सौ नाज़ से जब मना लेना तो फिर ख़ुद रूठ जाना याद है, चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है, शौक़ में मेहंदी के वो बे दस्त ओ पा होना तेरा और मेंरा वो छेड़ना वो गुदगुदाना याद है, बावजूद ए इद्दिया ए इत्तिक़ा हसरत मुझे आज तक अहद ए हवस का वो फ़साना याद है..!! - [ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता](https://hindigazals.com/ye-na-thi-humari/): ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता, तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना कि ख़ुशी से मर न जाते अगर एतिबार होता, तेरी नाज़ुकी से जाना कि बँधा था अहद बोदा कभी तू न तोड़ सकता अगर उस्तुवार होता, कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर ए नीमकश को ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता, ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह कोई चारासाज़ होता कोई ग़म गुसार होता, रग ए संग से टपकता वो लहू कि फिर न थमता जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता, ग़म अगरचे जाँ गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है ग़म ए इश्क़ गर न होता ग़म ए रोज़गार होता, कहूँ किस से मैं कि क्या है शब ए ग़म बुरी बला है मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता, हुए मर के हम जो रुस्वा हुए क्यूँ न ग़र्क़ ए दरिया न कभी जनाज़ा उठता न कहीं मज़ार होता, उसे कौन देख सकता कि यगाना है वो यकता जो दुई की बू भी होती तो कहीं दो चार होता, ये मसाईल ए तसव्वुफ़ ये तेरा बयान ग़ालिब तुझे हम वली समझते जो न बादा ख़्वार होता..!! - [आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा](https://hindigazals.com/aankhon-me-raha-dil/): आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा, बेवक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे एक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा, जिस दिन से चला हूँ मेंरी मंज़िल पे नज़र है आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा, ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुम ने मेंरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा, यारों की मोहब्बत का यक़ीं कर लिया मैंने फूलों में छुपाया हुआ ख़ंजर नहीं देखा, महबूब का घर हो कि बुज़ुर्गों की ज़मीनें जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा, ख़त ऐसा लिखा है कि नगीने से जड़े हैं वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा, पत्थर मुझे कहता है मेंरा चाहने वाला मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा..!! - [आह को चाहिए एक उम्र असर होते तक](https://hindigazals.com/aah-ko-chahiye-ek/): आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक, दाम ए हर मौज में है हल्क़ा ए सद काम ए नहंग देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक, आशिक़ी सब्र तलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ून ए जिगर होते तक, ताक़यामत शब ए फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होते तक, हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक, परतव ए ख़ुर से है शबनम को फ़ना की तालीम मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होते तक, यक नज़र बेश नहीं फ़ुर्सत ए हस्ती ग़ाफ़िल गर्मी ए बज़्म है एक रक़्स ए शरर होते तक, ग़म ए हस्ती का असद किस से हो जुज़ मर्ग इलाज शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक..!! - [कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे](https://hindigazals.com/kitne-aish-se-rahte/): कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे, शाम हुए ख़ुशबाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे, वो जो न आने वाला है ना उस से मुझको मतलब था आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे, उसकी याद की बाद ए सबा में और तो क्या होता होगा यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे, यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उसकी क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उनमें वो तो मर जाते होंगे, मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे यानी मेरे बाद भी यानी साँस लिए जाते होंगे..!! - [गूंगी हो गई आज कुछ ज़ुबान कहते कहते](https://hindigazals.com/goongi-ho-gayi-aaj/): गूंगी हो गई आज कुछ ज़ुबान कहते कहते हिचकिचा गया मैं ख़ुद को मुसलमान कहते कहते, ये बात नहीं कि मुझ को रब पर यकीन नहीं बस डर गया ख़ुद को साहब ए ईमान कहते कहते, तौफ़ीक न हुई मुझे एक वक़्त की नमाज़ की जब कि चुप हुआ मुअज़्ज़िन अज़ान कहते कहते, किसी काफ़िर ने जो पूछा कि ये क्या है महीना शर्म से पानी हाथ से गिर गया रमज़ान कहते कहते, मेरी अलमारी में गर्द से अटी किताब का जो पूछा मैं गड़ ही गया ज़मीन में क़ुरआन कहते कहते, ये सुन के चुप साध ली इक़बाल उस ने यूँ लगा जैसे रुक गया वो मुझे हैवान कहते कहते..!! - [कोई उम्मीद बर नहीं आती](https://hindigazals.com/koi-ummid-bar-nahin/): कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती, मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँ रात भर नहीं आती ? - [तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो](https://hindigazals.com/tum-apne-shikwe-ki/): तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो हज़र करो मेंरे दिल से कि इस में आग दबी है, दिला ये दर्द ओ अलम भी तो मुग़्तनिम है कि आख़िर न गिर्या ए सहरी है न आह ए नीम शबी है, नज़र ब नक़्स ए गदायाँ कमाल ए बे अदबी है कि ख़ार ए ख़ुश्क को भी दावा ए चमन नसबी है, हुआ विसाल से शौक़ ए दिल ए हरीस ज़ियादा लब ए क़दह पे कफ़ ए बादा जोश ए तिश्ना लबी है, ख़ुशा वो दिल कि सरापा तिलिस्म ए बेख़बरी हो जुनून ओ यास ओ अलम रिज़्क़ ए मुद्दआ तलबी है, चमन में किस के ये बरहम हुइ है बज़्म ए तमाशा कि बर्ग बर्ग ए समन शीशा रेज़ा ए हलबी है, इमाम ए ज़ाहिर ओ बातिन अमीर ए सूरत ओ मअनी अली वली असदुल्लाह जानशीन ए नबी है ..!! - [रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो](https://hindigazals.com/rahiye-ab-aisi-jagah/): रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो हम सुख़न कोई न हो और हम ज़बाँ कोई न हो, बे दर ओ दीवार सा एक घर बनान चाहिए कोई हम साया न हो और पासबाँ कोई न हो, पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार और अगर मर जाइए तो नौहा ख़्वाँ कोई न हो ..!! - [इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना](https://hindigazals.com/ishrat-e-qatra-hai/): इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना, तुझ से क़िस्मत में मेंरी सूरत ए क़ुफ़्ल ए अबजद था लिखा बात के बनते ही जुदा हो जाना, दिल हुआ कशमकश ए चारा ए ज़हमत में तमाम मिट गया घिसने में इस उक़दे का वा हो जाना, अब जफ़ा से भी हैं महरूम हम अल्लाह अल्लाह इस क़दर दुश्मन ए अरबाब ए वफ़ा हो जाना, ज़ोफ़ से गिर्या मुबद्दल ब दम ए सर्द हुआ बावर आया हमें पानी का हवा हो जाना, दिल से मिटना तेरी अंगुश्त ए हिनाई का ख़याल हो गया गोश्त से नाख़ुन का जुदा हो जाना, है मुझे अब्र ए बहारी का बरस कर खुलना रोते रोते ग़म ए फ़ुर्क़त में फ़ना हो जाना, गर नहीं निकहत ए गुल को तेरे कूचे की हवस क्यूँ है गर्द ए रह ए जौलान ए सबा हो जाना, बख़्शे है जल्वा ए गुल ज़ौक़ ए तमाशा ग़ालिब चश्म को चाहिए हर रंग में वा हो जाना, ता कि तुझ पर खुले एजाज़ ए हवा ए सैक़ल देख बरसात में सब्ज़ आइने का हो जाना ..!! - [इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही](https://hindigazals.com/ishq-mujh-ko-nahin/): इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही, क़त्अ कीजे न तअल्लुक़ हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही, मेरे होने में है क्या रुस्वाई ऐ वो मज्लिस नहीं ख़ल्वत ही सही, हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने ग़ैर को तुझ से मोहब्बत ही सही, अपनी हस्ती ही से हो जो कुछ हो आगही गर नहीं ग़फ़लत ही सही, उम्र हर चंद कि है बर्क़ ए ख़िराम दिल के ख़ूँ करने की फ़ुर्सत ही सही, हम कोई तर्क ए वफ़ा करते हैं न सही इश्क़ मुसीबत ही सही, कुछ तो दे ऐ फ़लक ए ना इंसाफ़ आह ओ फ़रियाद की रुख़्सत ही सही, हम भी तस्लीम की ख़ू डालेंगे बेनियाज़ी तेरी आदत ही सही, यार से छेड़ चली जाए असद गर नहीं वस्ल तो हसरत ही सही ..!! - [ग़म ए दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की](https://hindigazals.com/gam-e-duniya-se/): ग़म ए दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की फ़लक का देखना तक़रीब तेरे याद आने की, खुलेगा किस तरह मज़मूँ मेरे मक्तूब का या रब क़सम खाई है उस काफ़िर ने काग़ज़ के जलाने की, लिपटना पर्नियाँ में शोला ए आतिश का पिन्हाँ है वले मुश्किल है हिकमत दिल में सोज़ ए ग़म छुपाने की, उन्हें मंज़ूर अपने ज़ख़्मियों का देख आना था उठे थे सैर ए गुल को देखना शोख़ी बहाने की, हमारी सादगी थी इल्तिफ़ात ए नाज़ पर मरना तेरा आना न था ज़ालिम मगर तम्हीद जाने की, लकद कूब ए हवादिस का तहम्मुल कर नहीं सकती मेंरी ताक़त कि ज़ामिन थी बुतों की नाज़ उठाने की, कहूँ क्या ख़ूबी ए औज़ा ए अब्ना ए ज़माँ ग़ालि बदी की उसने जिस से हम ने की थी बारहा नेकी..!! - [लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है](https://hindigazals.com/likh-likh-ke-aansoo/): लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर हटा दीं हम ने भी ज़ेहन से किताबें हम ने भी अपना जीना आसान कर लिया है, दुनिया में आँखें खोली हैं मूँदने की ख़ातिर आते ही लौटने का सामान कर लिया है, सब लोग इस से पहले कि देवता समझते हमने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है, जिन नेकियों पे चल कर अज्दाद कितने ख़ुश थे हमने उन्ही पे चल कर नुक़सान कर लिया है, हर बार अपने दिल की बातें ज़बाँ पे ला कर हम ने मुसीबतों को मेहमान कर लिया है, अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ फिर हमने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है, एक दिल के टूटने पर रोता है कोई इतना झोंके को ख़ुद हमीं ने तूफ़ान कर लिया है, सोचा भी है कि दाना बनने की कोशिशों में क्या हाल अपना तू ने नादान कर लिया है, कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हमने जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है..!! - [न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी](https://hindigazals.com/naa-ghar-hai-koi/): न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी नहीं है कोई भी दुनिया में सिलसिला बाक़ी, ये खेल ख़त्म करो, इक़्तिदार का ये खेल कि है क़रीब अजल के तेरा गला बाक़ी, मक़ाम ए इबरत ए फ़ानी से कौन है महफ़ूज़ कि कौन हाकिम ए अस्बाब रह गया बाक़ी ? - [हर्फ़ ए ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है](https://hindigazals.com/harf-e-taza-nayi/): हर्फ़ ए ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है बाब एक और मोहब्बत का खुला चाहता है, एक लम्हे की तवज्जोह नहीं हासिल उसकी और ये दिल कि उसे हद से सिवा चाहता है, एक हिजाब ए तह ए इक़रार है माने वर्ना गुल को मालूम है क्या दस्त ए सबा चाहता है, रेत ही रेत है इस दिल में मुसाफ़िर मेरे और ये सहरा तेरा नक़्श ए कफ़ ए पा चाहता है, यही ख़ामोशी कई रंग में ज़ाहिर होगी और कुछ रोज़ कि वो शोख़ खुला चाहता है, रात को मान लिया दिल ने मुक़द्दर लेकिन रात के हाथ पे अब कोई दिया चाहता है, तेरे पैमाने में गर्दिश नहीं बाक़ी साक़ी और तेरी बज़्म से अब कोई उठा चाहता है..!! - [हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया](https://hindigazals.com/hum-ne-hi-lautne/): हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया उसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया, दुख ओढ़ते नहीं कभी बज़्म ए तरब में हम मल्बूस ए दिल को तन का लबादा नहीं किया, जो ग़म मिला है बोझ उठाया है उस का ख़ुद सर ज़ेर ए बार ए साग़र ओ बादा नहीं किया, कार ए जहाँ हमें भी बहुत थे सफ़र की शाम उस ने भी इल्तिफ़ात ज़ियादा नहीं किया, आमद पे तेरी इत्र ओ चराग़ ओ सुबू न हों इतना भी बूद ओ बाश को सादा नहीं किया..!! - [चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया](https://hindigazals.com/chalne-ka-hausla-nahi/): चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर दिया, ऐ मेरी गुलज़मीं तुझे चाह थी एक किताब की अहल ए किताब ने मगर क्या तेरा हाल कर दिया, मिलते हुए दिलों के बीच और था फ़ैसला कोई उस ने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया, अब के हवा के साथ है दामन ए यार मुंतज़िर बानू ए शब के हाथ में रखना सँभाल कर दिया, मुमकिना फ़ैसलों में एक हिज्र का फ़ैसला भी था हम ने तो एक बात की उस ने कमाल कर दिया, मेरे लबों पे मोहर थी पर मेरे शीशा रू ने तो शहर के शहर को मेरा वाक़िफ़ ए हाल कर दिया, चेहरा ओ नाम एक साथ आज न याद आ सके वक़्त ने किस शबीह को ख़्वाब ओ ख़याल कर दिया, मुद्दतों बाद उसने आज मुझ से कोई गिला किया मंसब ए दिलबरी पे क्या मुझ को बहाल कर दिया..!! - [कू ब कू फैल गई बात शनासाई की](https://hindigazals.com/ku-ba-ku-fail-gai/): कू ब कू फैल गई बात शनासाई की उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की, कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की, वो कहीं भी गया लौटा तो मेरे पास आया बस यही बात है अच्छी मेरे हरजाई की, तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे तुझ पे गुज़रे न क़यामत शब ए तन्हाई की, उसने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की, अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की..!! - [कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी](https://hindigazals.com/kuch-to-hawa-bhi/): कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी, बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की चाँद भी ऐन चैत का उस पे तेरा जमाल भी, सब से नज़र बचा के वो मुझको कुछ ऐसे देखता एक दफ़अ तो रुक गई गर्दिश ए माह ओ साल भी, दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तरश के देख लें शीशा गिरान ए शहर के हाथ का ये कमाल भी, उसको न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था अब जो पलट के देखिए बात थी कुछ मुहाल भी, मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी, उस की सुख़न तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं उसकी हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी, गाह क़रीब ए शाह रग गाह बईद ए वहम ओ ख़्वाब उसकी रफ़ाक़तों में रात हिज्र भी था विसाल भी, उस के ही बाज़ुओं में और उस को ही सोचते रहे जिस्म की ख़्वाहिशों पे थे रूह के और जाल भी, शाम की ना समझ हवा पूछ रही है एक पता मौज ए हवा ए कू ए यार कुछ तो मेरा ख़याल भी..!! - [फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह](https://hindigazals.com/falsafe-ishq-me-pesh-2/): फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह, शीशागर बैठे रहे ज़िक्र ए मसीहा ले कर और हम टूट गए काँच के प्यालों की तरह, जब भी अंजाम ए मोहब्बत ने पुकारा ख़ुद को वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह, ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह..!! - [ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं](https://hindigazals.com/zindagi-tujh-ko-jiya/): ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं ज़हर ख़ुद मैं ने पिया है कोई अफ़्सोस नहीं, मैंने मुजरिम को भी मुजरिम न कहा दुनिया में बस यही जुर्म किया है कोई अफ़्सोस नहीं, मेरी क़िस्मत में लिखे थे ये उन्हीं के आँसू दिल के ज़ख़्मों को सिया है कोई अफ़्सोस नहीं, अब गिरे संग कि शीशों की हो बारिश फ़ाकिर अब कफ़न ओढ़ लिया है कोई अफ़्सोस नहीं..!! - [अहल ए उल्फ़त के हवालों पे हँसी आती है](https://hindigazals.com/ahl-e-ulfat-ke/): अहल ए उल्फ़त के हवालों पे हँसी आती है लैला मजनूँ की मिसालों पे हँसी आती है, जब भी तकमील ए मोहब्बत का ख़याल आता है मुझ को अपने ही ख़यालों पे हँसी आती है, लोग अपने लिए औरों में वफ़ा ढूंढ़ते हैं उन वफ़ा ढूँढने वालों पे हँसी आती है, देखने वालो तबस्सुम को करम मत समझो उन्हें तो देखने वालों पे हँसी आती है, चाँदनी रात मोहब्बत में हसीं थी फ़ाकिर अब तो बीमार उजालों पे हँसी आती है..!! - [पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं](https://hindigazals.com/patthar-ke-khuda-patthar/): पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं तुम शहर ए मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं, बुतख़ाना समझते हो जिसको पूछो न वहाँ क्या हालत है हम लोग वहीं से लौटे हैं बस शुक्र करो लौट आए हैं, हम सोच रहे हैं मुद्दत से अब उम्र गुज़ारें भी तो कहाँ ? - [शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया](https://hindigazals.com/shayad-main-zindagi-ki/): शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया, ता उम्र ढूँढता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की अंजाम ये कि गर्द ए सफ़र ले के आ गया, नश्तर है मेरे हाथ में काँधों पे मयकदा लो मैं इलाज ए दर्द ए जिगर ले के आ गया, फ़ाकिर सनम कदे में न आता मैं लौट कर एक ज़ख़्म भर गया था इधर ले के आ गया..!! - [किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी](https://hindigazals.com/kisi-ranjish-ko-hawa/): किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझको एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी, मेरे रुकते ही मेरी साँसें भी रुक जाएँगी फ़ासले और बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी, ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालो अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी, चलती राहों में यूँही आँख लगी है फ़ाकिर भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी..!! - [मेरे दुख की कोई दवा न करो](https://hindigazals.com/mere-dukh-ki-koi/): मेरे दुख की कोई दवा न करो मुझको मुझ से अभी जुदा न करो, नाख़ुदा को ख़ुदा कहा है तो फिर डूब जाओ ख़ुदा ख़ुदा न करो, ये सिखाया है दोस्ती ने हमें दोस्त बन कर कभी वफ़ा न करो, इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं चंद लम्हों में फ़ैसला न करो, आशिक़ी हो कि बंदगी फ़ाकिर बेदिली से तो इब्तिदा न करो..!! - [सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं](https://hindigazals.com/samne-hai-jo-use/): सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं, ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं, फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा देती है जाने क्यूँ लोग उसे फिर भी दवा कहते हैं, चंद मासूम से पत्तों का लहू है फ़ाकिर जिस को महबूब की हाथों की हिना कहते हैं..!! - [कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया](https://hindigazals.com/kuch-to-duniya-ki/): कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी ए हालात ने दिल तोड़ दिया, हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया, दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया, वो मेरे हैं मुझे मिल जाएँगे आ जाएँगे ऐसे बेकार ख़यालात ने दिल तोड़ दिया, आप को प्यार है मुझसे कि नहीं है मुझसे जाने क्यूँ ऐसे सवालात ने दिल तोड़ दिया..?? - [अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें](https://hindigazals.com/agar-hum-kahe-aur/): अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें, हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें, अगर ख़ुद को भूले तो कुछ भी न भूले कि चाहत में उनकी ख़ुदा को भुला दें, कभी ग़म की आँधी जिन्हें छू न पाए वफ़ाओं के हम वो नशेमन बना दें, क़यामत के दीवाने कहते हैं हम से चलो उनके चेहरे से पर्दा हटा दें, सज़ा दें सिला दें बना दें मिटा दें मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें..!! - [बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच](https://hindigazals.com/boodha-tapara-tuta-chhapra/): बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ? अल्फाज़ की दुनियादारी में आँखों की सच्चाई क्या ? - [इश्क़ में ग़ैरत ए जज़्बात ने रोने न दिया](https://hindigazals.com/ishq-me-gairat-e/): इश्क़ में ग़ैरत ए जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया, आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया, रोने वालों से कहो उन का भी रोना रो लें जिनको मजबूरी ए हालात ने रोने न दिया, तुझ से मिल कर हमें रोना था बहुत रोना था तंगी ए वक़्त ए मुलाक़ात ने रोने न दिया, एक दो रोज़ का सदमा हो तो रो लें फ़ाकिर हम को हर रोज़ के सदमात ने रोने न दिया..!! - [सज़ा पे छोड़ दिया कुछ जज़ा पे छोड़ दिया](https://hindigazals.com/saza-pe-chod-diya/): सज़ा पे छोड़ दिया कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को मैं ने ख़ुदा पे छोड़ दिया, वो मुझ को याद रखेगा या फिर भूला देगा उसी का काम था उसकी रज़ा पे छोड़ दिया, अब उसकी मर्ज़ी जलाये रखे या फिर बुझाये रखे चिराग़ हम ने जला कर हवा पे छोड़ दिया, उस से बात भी करते तो किस तरह करते ये मसला था अना का, अना पे छोड़ दिया, इसी लिए तो वो कहते हैं बे वफ़ा हम को कि हम ने सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया..!! - [तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी](https://hindigazals.com/tasveer-teri-dil-mera/): तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी ये तेरी तरह मुझ से तो शरमा न सकेगी, मैं बात करूँगा तो ये ख़ामोश रहेगी गर सीने से लगाऊँगा तो ये कुछ न कहेगी, आराम वो क्या देगी जो तड़पा न सकेगी तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी, आँखों में ठहरी हुई चंचल वो निगाहें ये हाथ में सहमे हुए और मस्त वो बाहें, परछाई तो इन्सान के काम आ न सकेगी तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी, उलझी हुई रातों को ये सुलझा न सकेगी तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी..!! - [काश ! एक तो ख्वाइश पूरी हो मेरी इबादत के बगैर](https://hindigazals.com/kash-ek-to-khwahish/): काश ! एक तो ख्वाइश पूरी हो मेरी इबादत के बगैर वो मुझे अपने गले से लगाए मेरी इजाजत के बगैर, मेरी जंग किस किस से है उससे बेखबर हो तुम, मेरा दिन गुजरे तो गुजरे कैसे तेरी शरारत के बगैर, तेरी ख्वाइशों की राहों में चलते चलते थक रहा हूँ मैंने तो खुद को खो दिया है तेरी तलाश के बगैर, जब तक है ज़िंदगी, चाहता हूँ तुझे अपना बना लूँ, मगर ये ख्वाहिश रहती है, सिर्फ हकीकत के बगैर, मैं तो आग का दरिया हूँ और तू शोला है ज़माने का, मिलने से पहले ही जल जाऊँ अपने मिलन के बगैर..!! - [मेरी एक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए](https://hindigazals.com/meri-ek-chhoti-si-2/): मेरी एक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए, रेत मेरी उम्र मैं बच्चा निराले मेरे खेल मैं ने दीवारें उठाई हैं गिराने के लिए, वक़्त होंटों से मेरे वो भी खुरच कर ले गया एक तबस्सुम जो था दुनिया को दिखाने के लिए, आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए, छत टपकती थी अगरचे फिर भी आ जाती थी नींद मैं नए घर में बहुत रोया पुराने के लिए, देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए, मैं ज़फ़र ताज़िंदगी बिकता रहा परदेस में अपनी घरवाली को एक कंगन दिलाने के लिए..!! - [अकेले छोड़ जाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते](https://hindigazals.com/akele-chod-jate-ho/): अकेले छोड़ जाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते हमारा दिल दुखाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते, कहा भी था मुहब्बत है मुहब्बत ही इसे रखो तमाशा जो बनाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते, उठाते हो सर ए महफ़िल फ़लक तक तुम हमें लेकिन उठा कर जो गिराते हो ये तुम अच्छा नहीं करते, कोई जो पूछ ले तुमसे कि रिश्ता क्या है अब हम से ? - [क़िस्से मेरी आशुफ़्ता नवाई के बहुत थे](https://hindigazals.com/qisse-meri-ashufta-nawai/): क़िस्से मेरी आशुफ़्ता नवाई के बहुत थे चर्चे तेरी अंगुश्त नुमाई के बहुत थे, दुनिया की तलब ही से न फ़ुर्सत हुई वर्ना अरमान तेरे दर की गदाई के बहुत थे, कुछ दिल ही न माइल हुआ इस राह पे वर्ना सामान तो जन्नत की कमाई के बहुत थे, कल शब मेरे किरदार पे तन्क़ीद की शब थी किरदार में पहलू भी बुराई के बहुत थे, आज़ार की ख़सलत भी थी लोगों में नुमायाँ कुछ शौक़ भी इस दिल को भलाई के बहुत थे, अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर' एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे..!! - [दिल से मंज़ूर तेरी हम ने क़यादत नहीं की](https://hindigazals.com/dil-se-manzoor-teri/): दिल से मंज़ूर तेरी हम ने क़यादत नहीं की ये अलग बात अभी खुल के बग़ावत नहीं की, हम सज़ावार जो ठहरे तो सबब है इतना हुक्म ए हाकिम पे कभी हम ने इताअत नहीं की, हम ने मालिक तुझे माना है तो सच्चा माना इस लिए तेरी कभी झूटी इबादत नहीं की, दोस्ती में भी फ़क़त एक चलन रखा है दिल ने इंकार किया है तो रिफ़ाक़त नहीं की, तू ने ख़ुद छोड़ा मोहब्बत का सफ़र याद तो कर मैं ने तो तुझ से अलग हो के मसाफ़त नहीं की, झूम उठेगा अगर उस को सुनाऊँ जा कर ये ग़ज़ल मैं ने अभी नज़्र ए समाअत नहीं की, उस को भी अपने रवय्ये पे कोई उज़्र न था हम भी थे अपनी अना में सो रिआयत नहीं की, ये तो फिर तुझ से मोहब्बत का था क़िस्सा मेरी जाँ मेरे किस फ़ेल पे दुनिया ने मलामत नहीं की, तू ने चर्चे किए हर जा मेरी रुस्वाई के मैंने ख़ुद से भी कभी तेरी शिकायत नहीं की, दोस्तों को भी रही वक़्त की क़िल्लत अख़्तर हाल ए दिल हम ने सुनाने की भी आदत नहीं की..!! - [नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया](https://hindigazals.com/nazar-nazar-se-mila/): नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया ग़ुलाम शाह की नींदें हराम कर आया, कई चराग़ हवा के असर में आए थे मैं एक जुगनू को उन का इमाम कर आया, ये किस की प्यास के छींटे पड़े हैं पानी पर ये कौन जब्र का क़िस्सा तमाम कर आया, उतरती शाम के साए बहुत मलूल से थे सो एक शब मैं वहाँ भी क़याम कर आया, ये और बात मेरे पाँव कट गए लेकिन मैं शाहराह को एक राह ए आम कर आया, करूँ कलाम किसी और से मैं क्या तारिक़ कि अपने लफ़्ज़ तो सब उस के नाम कर आया..!! - [वो मेरे ख़्वाब की ताबीर तो बताए मुझे](https://hindigazals.com/wo-mere-khwab-ki/): वो मेरे ख़्वाब की ताबीर तो बताए मुझे मैं धूप में हूँ मगर ढूँढते हैं साए मुझे, मैं रौशनी की किसी सल्तनत का शहज़ादा मगर चराग़ मिले हैं बुझे बुझाए मुझे, वो जा चुका है तो नक़्श ए क़दम भी मिट जाएँ बिछड़ गया है तो अब याद भी न आए मुझे, किसी जवाज़ का होना ही क्या ज़रूरी है ? - [मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से](https://hindigazals.com/mushkil-hai-ki-ab/): मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से दस्तार पे बात आ गई होती हुई सर से, बरसा भी तो किस दश्त के बेफ़ैज़ बदन पर एक उम्र मेंरे खेत थे जिस अब्र को तरसे, कल रात जो ईंधन के लिए कट के गिरा है चिड़ियों को बड़ा प्यार था उस बूढ़े शजर से, मेहनत मेंरी आँधी से तो मंसूब नहीं थी रहना था कोई रब्त शजर का भी समर से, ख़ुद अपने से मिलने का तो यारा न था मुझ में मैं भीड़ में गुम हो गई तन्हाई के डर से, बेनाम मसाफ़त ही मुक़द्दर है तो क्या ग़म मंज़िल का तअ'य्युन कभी होता है सफ़र से, पथराया है दिल यूँ कि कोई इस्म पढ़ा जाए ये शहर निकलता नहीं जादू के असर से, निकले हैं तो रस्ते में कहीं शाम भी होगी सूरज भी मगर आएगा इस रहगुज़र से..!! - [है हकीक़त अज़ाब रहने दो](https://hindigazals.com/hai-haqiqat-azab-rahne/): है हकीक़त अज़ाब रहने दो टूट जाएगा ख़्वाब रहने दो, कब सज़ावार हूँ इनायत का यूँ ही ज़ेर ए इताब रहने दो, तुम जला दो किताब ए बस्ती को एक मुहब्बत का बाब रहने दो, बे खुदी में सवाल कर बैठा चुप ही रहो, लाजवाब रहने दो, या उतारो ज़मीं पे चाँद कोई या उन्हें ही बेनक़ाब रहने दो, लोग रखे हैं अब नज़र हम पर फ़रिश्तों तुम हिसाब रहने दो, देख बैठे है पारसाओं को हम को यूँ ही ख़राब रहने दो, मर न जाएँ सुकून के मारे दिल में कुछ इज़्तिराब रहने दो..!! - [बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और एक जान हो जाते](https://hindigazals.com/bahut-mumkin-tha-ham/): बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और एक जान हो जाते मगर दो जिस्म सिर्फ़ एक जान से हलकान हो जाते, तुम आते तो दिलों से खेलने का शौक़ था तुम को तो मेरे जिस्म ओ जाँ उस खेल का मैदान हो जाते, हम उस के वस्ल के चक्कर में ग़ारत हो गए आख़िर किया होता जो हिज्र अच्छे भले इंसान हो जाते..!! - [तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ](https://hindigazals.com/tu-phool-ki-manind/): तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ, हर मर्तबा आता है मह ए नौ की तरह तू इस बार ज़रा मेरी शब ए ग़म की तरह आ, हल करने हैं मुझ को कई पेचीदा मसाइल ऐ जान ए वफ़ा गेसू ए पुरख़म की तरह आ, ज़ख़्मों को गवारा नहीं यकरंगी ए हालात नश्तर की तरह आ कभी मरहम की तरह आ, नज़दीकी ओ दूरी की कशाकश को मिटा दे इस जंग में तू सुल्ह के परचम की तरह आ, माना कि मिरा घर तेरी जन्नत तो नहीं है दुनिया में मेरी लग़्ज़िश ए आदम की तरह आ, तू कुछ तो मेरे ज़ब्त ए मोहब्बत का सिला दे हंगामा ए फ़ना दीदा ए पुरनम की तरह आ..!! - [दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है](https://hindigazals.com/dua-ka-tuta-hua/): दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है तेरी जुदाई का मंज़र अभी निगाह में है, तेरे बदलने के बा वस्फ़ तुझ को चाहा है ये एतिराफ़ भी शामिल मेंरे गुनाह में है, अज़ाब देगा तो फिर मुझ को ख़्वाब भी देगा मैं मुतमइन हूँ मेंरा दिल तेरी पनाह में है, बिखर चुका है मगर मुस्कुरा के मिलता है वो रख रखाव अभी मेरे कज कुलाह में है, जिसे बहार के मेहमान ख़ाली छोड़ गए वो एक मकान अभी तक मकीं की चाह में है, यही वो दिन थे जब एक दूसरे को पाया था हमारी सालगिरह ठीक अब के माह में है, मैं बच भी जाऊँ तो तन्हाई मार डालेगी मेंरे क़बीले का हर फ़र्द क़त्ल गाह में है..!! - [बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे](https://hindigazals.com/bakhsh-de-kuch-to/): बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे प्यार से देख चश्म ए यार मुझे, रात भी चाँद भी समुंदर भी मिल गए कितने ग़म गुसार मुझे, रौशनी और कुछ बढ़ा जाऊँ सोज़ ए ग़म और भी निखार मुझे, कुछ ही दिन में बहार आ जाती और करना था इंतिज़ार मुझे, देख दुनिया ये पैंतरे न बदल देख शीशे में मत उतार मुझे, आइने में नज़र नहीं आता अपना चेहरा कभी कभार मुझे, किस क़दर शोख़ हो के तकता था रात बंद ए क़बा ए यार मुझे, देख मैं साअत ए मसर्रत हूँ इतनी उजलत से मत गुज़ार मुझे, मरकब ए ख़ाक पर सवार हूँ मैं देख ऐ शहर ए ज़र निगार मुझे, रिज़्क ए मक़्सूम खा के जीना था खा गई फ़िक्र ए रोज़गार मुझे..!! - [ज़ख़्म पुराने फूल सभी बासी हो जाएँगे](https://hindigazals.com/zakhm-purane-phool-sabhi/): ज़ख़्म पुराने फूल सभी बासी हो जाएँगे दर्द के सब क़िस्से याद ए माज़ी हो जाएँगे, साँसें लेती तस्वीरों को चुप लग जाएगी सारे नक़्श करिश्मों से आरी हो जाएँगे, आँखों से मस्ती न लबों से अमृत टपकेगा शीशा ओ जाम शराबों से ख़ाली हो जाएँगे, खुली छतों से चाँदनी रातें कतरा जाएँगी कुछ हम भी तन्हाई के आदी हो जाएँगे, कूचा ए जाँ पर गहरे बादल छाए रहेंगे ज़ेब उस की खिड़की के पर्दे भारी हो जाएँगे..!! - [मैं छू सकूँ तुझे मेरा ख़याल ए ख़ाम है क्या](https://hindigazals.com/main-chhoo-sakoon-tujhe/): मैं छू सकूँ तुझे मेरा ख़याल ए ख़ाम है क्या तेरा बदन कोई शमशीर ए बे नियाम है क्या, मेरी जगह कोई आईना रख लिया होता न जाने तेरे तमाशे में मेरा काम है क्या, असीर ए ख़ाक मुझे कर के तू निहाल सही निगाह डाल के तो देख ज़ेर ए दाम है क्या, ये डूबती हुई क्या शय है तेरी आँखों में तेरे लबों पे जो रौशन है उस का नाम है क्या, मुझे बता मैं तेरी ख़ाक अब कहाँ रख दूँ कि ज़ेब अर्ज़ ओ समा में तेरा मक़ाम है क्या..!! - [तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ?](https://hindigazals.com/teri-surat-nigahon-me/): तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ? कोई इतना तो आ कर बता दे मुझे जब तेरी याद आए तो मैं क्या करूँ ? - [तन्हा सफ़र में खुद को यूँ ही चलते देखा](https://hindigazals.com/tanha-safar-me-khud/): तन्हा सफ़र में खुद को यूँ ही चलते देखा भीड़ भरी दुनियाँ में खुद को संभलते देखा, ना मंदिर की घंटी से दिल का है नाता ना मस्जिद की अज़ान से कोई है वास्ता, धर्म के पिंजरे में जज़्बात को जलते देखा इंसान को इंसान से लड़ते झगड़ते देखा, मैं तो एक परिंदा हूँ उड़ता हूँ आसमानों में ना सरहद की रेखा है ना बंदिश उनवानों में, ना हिंदू, ना मुस्लिम, ना कोई सिख कहाता ना इसाई, ना जैन किसी मज़हब से न नाता, मैं मजहब की जंजीरों से दूर ही रहता हूँ बस खुले आसमानों में, आज़ाद मैं बहता हूँ, जहाँ मन करे, वहीं मैं उड़ जाता हूँ हर रंग, हर रूप में खुद को ही पाता हूँ, ना पूजा, ना नमाज़ की कोई ज़रूरत है मेरे लिए तो बस मोहब्बत ही इबादत है, मैं एक परिंदा हूँ मेरी बस यही पहचान है मेरा मज़हब इंसानियत मेरा धर्म उड़ान है..!! - [तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे](https://hindigazals.com/teri-judai-ne-ye/): तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे मैं भी जिस्म था साया बना दिया है मुझे, समन्दरों से कोई कम न थी मेरी औक़ात बस एक दर्द ने सहरा बना दिया है मुझे, पुराने लोग समझते थे कुछ नया हूँ मैं नये दिनों ने पुराना बना दिया है मुझे, जो उस से रिश्ता था सब को बताये जाता है गये दिनों का हवाला बना दिया है मुझे, हसन जमील उन आँखों की क्या करूँ तारीफ़ खुदा को मानने वाला बना दिया है मुझे..!! - [न वो मिलता है न मिलने का इशारा कोई](https://hindigazals.com/na-wo-milta-hai-na/): न वो मिलता है न मिलने का इशारा कोई कैसे उम्मीद का चमकेगा सितारा कोई ? - [युसुफ़ न थे मगर सर ए बाज़ार आ गए](https://hindigazals.com/yusuf-na-the-magar/): युसुफ़ न थे मगर सर ए बाज़ार आ गए ख़ुश फहमियाँ ये थी कि ख़रीदार आ गए, आवाज़ दे के छिप गई हर बार ज़िन्दगी हम ऐसे सादा दिल थे कि हर बार आ गए, अब दिल में हौसला न सकत बाज़ूओं में है अब के मुक़ाबले में मेरे यार आ गए, और सूरज की दोस्ती पे जिन्हें नाज़ था फराज़ वो भी तो ज़ेर ए साया ए दीवार आ गए..!! - [एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा](https://hindigazals.com/ek-suraj-tha-ki/): एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा, किस से पूछूँ तेरे आक़ा का पता ऐ रहवार ये अलम वो है न अब तक किसी शाने से उठा, हल्क़ा ए ख़्वाब को ही गिर्द ए गुलू कस डाला दस्त ए क़ातिल का भी एहसाँ न दिवाने से उठा, फिर कोई अक्स शुआ'ओं से न बनने पाया कैसा महताब मेंरे आइना-ख़ाने से उठा, क्या लिखा था सर ए महज़र जिसे पहचानते ही पास बैठा हुआ हर दोस्त बहाने से उठा..!! - [जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे](https://hindigazals.com/justazoo-khoye-huo-ki/): जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे चाँद के हमराह हर शब सफ़र करते रहे, रास्तों का इल्म था हम को न सम्तों की ख़बर शहर ए ना मालूम की चाहत मगर करते रहे, हम ने ख़ुद से भी छुपाया और सारे शहर को तेरे जाने की ख़बर दीवार ओ दर करते रहे, वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे, आज आया है हमें भी उन उड़ानों का ख़याल जिन को तेरे ज़ो'म में बे बाल ओ पर करते रहे..!! - [वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है](https://hindigazals.com/wo-jo-dil-me-tera-muqam-hai/): वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो देना नहीं, वो जो रिश्ता तुझ से है बन गया किसी और से वो बना नहीं, वो जो प्यार तुझ से हो गया किसी और से वो हुआ नहीं, वो जो राज़ तुझ से है कह दिया किसी और से वो कहा नहीं, वो जो सीख मिला तेरी ज़ात से किसी और से वो मिला नहीं, तू बसा है आँखों में जिस तरह कोई और ऐसे बसा नहीं, तू हुआ है जितना क़रीब तर कोई और इतना हुआ नहीं..!! - [दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी](https://hindigazals.com/dil-ki-dunia-me/): दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी मेरे मौला ये दुनिया न भाये कभी, जिस को क़ुरआँ ने मकड़ी का जाला कहा अपनी जानिब मुझे न बुलाये कभी, मोमिनो के लिए मिस्ल ए ज़िन्दान है नफ़स जन्नत उसे न दिखाए कभी, ऐसे देखो कि घर को ये नादान दिल एक पल के लिए न बसाये कभी, बे अमल हो मगर ऐ खुदा ज़िन्दगी हुब ए दुनिया की ज़द में न आये कभी..!! - [लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना](https://hindigazals.com/libas-tan-se-utaar/): लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना फिर उसके जज़्बों को मार देना, अगर मुहब्बत यही है जाना ? - [मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है](https://hindigazals.com/muqammal-do-hi-daano/): मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है जो आये तीसरा दाना ये डोरी टूट जाती है, मुक़र्रर वक़्त होता है मुहब्बत की नमाज़ों का अदा जिनकी निकल जाए क़ज़ा भी छूट जाती है, मुहब्बत की नमाज़ों में इमामत एक को सौंपों इसे तकने उसे तकने से नियत टूट जाती है, मुहब्बत दिल का सज़्दा है जो है तो हैद पे क़ायम नज़र के शिर्क वालो से मुहब्बत रूठ जाती है..!! - [तुझे पुकारा है बे इरादा](https://hindigazals.com/tujhe-pukaara-hai-be/): तुझे पुकारा है बे इरादा जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा, नदीम हो तेरा हर्फ़ ए शीरीं तो रंग पर आए रंग ए बादा, अता करो इक अदा ए दैरीं तो अश्क से तर करें लिबादा, न जाने किस दिन से मुंतज़िर है दिल ए सर ए रह गुज़र फ़ितादा, कि एक दिन फिर नज़र में आए वो बाम ए रौशन वो दर कुशादा, वो आए पुर्सिश को फिर सजाए क़बा ए रंगीं अदा ए सादा..!! - [फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे](https://hindigazals.com/fir-harif-e-bahar/): फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे, थी मगर इतनी राएगाँ भी न थी आज कुछ ज़िंदगी से खो बैठे, तेरे दर तक पहुँच के लौट आए इश्क़ की आबरू डुबो बैठे, सारी दुनिया से दूर हो जाए जो ज़रा तेरे पास हो बैठे, न गई तेरी बेरुख़ी न गई हम तिरी आरज़ू भी खो बैठे, फ़ैज़ होता रहे जो होना है शेर लिखते रहा करो बैठे..!! - [हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने](https://hindigazals.com/har-samt-pareshan-teri/): हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने धोके दिए क्या क्या हमें बाद ए सहरी ने, हर मंजिल ए ग़ुरबत पे गुमाँ होता है घर का बहलाया है हर गाम बहुत दर ब दरी ने, थे बज़्म में सब दूद ए सर ए बज़्म से शादाँ बेकार जलाया हमें रौशन नज़री ने, मयख़ाने में आजिज़ हुए आज़ुर्दा दिली से मस्जिद का न रखा हमें आशुफ़्ता सरी ने, ये जामा ए सद चाक बदल लेने में क्या था मोहलत ही न दी फ़ैज़ कभी बख़ियागरी ने..!! - [हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है](https://hindigazals.com/ham-par-tumarhi-chaah/): हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है, करते हैं जिस पे तान कोई जुर्म तो नहीं शौक़ ए फ़ुज़ूल ओ उल्फ़त ए नाकाम ही तो है, दिल मुद्दई के हर्फ़ ए मलामत से शाद है ऐ जान ए जाँ ये हर्फ़ तिरा नाम ही तो है, दिल नाउम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है, दस्त ए फ़लक में गर्दिश ए तक़दीर तो नहीं दस्त ए फ़लक में गर्दिश ए अय्याम ही तो है, आख़िर तो एक रोज़ करेगी नज़र वफ़ा वो यार ए ख़ुश ख़िसाल सर ए बाम ही तो है, भीगी है रात फ़ैज़ ग़ज़ल इब्तिदा करो वक़्त ए सरोद दर्द का हंगाम ही तो है..!! - [हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई](https://hindigazals.com/ham-saada-hi-aise/): हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई जिस बार ख़िज़ाँ आई समझे कि बहार आई, आशोब ए नज़र से की हम ने चमन आराई जो शय भी नज़र आई गुल रंग नज़र आई, उम्मीद ए तलत्तुफ़ में रंजीदा रहे दोनों तू और तिरी महफ़िल मैं और मिरी तंहाई, यक जान न हो सकिए अंजान न बन सकिए यूँ टूट गई दिल में शमशीर ए शनासाई, उस तन की तरफ़ देखो जो क़त्ल गह ए दिल है क्या रखा है मक़्तल में ऐ चश्म ए तमाशाई..!! - [गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था](https://hindigazals.com/go-sab-ko-baham/): गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था ये शहर उदास इतना ज़ियादा तो नहीं था, गलियों में फिरा करते थे दो चार दिवाने हर शख़्स का सद चाक लबादा तो नहीं था, मंज़िल को न पहचाने रह ए इश्क़ का राही नादाँ ही सही ऐसा भी सादा तो नहीं था, थक कर यूँही पल भर के लिए आँख लगी थी सो कर ही न उठे ये इरादा तो नहीं था, वाइज़ से रह ओ रस्म रही रिंद से सोहबत फ़र्क़ इन में कोई इतना ज़ियादा तो नहीं था..!! - [सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले](https://hindigazals.com/sitam-ki-rasme-bahut/): सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले सज़ा ख़ता ए नज़र से पहले इताब जुर्म ए सुख़न से पहले, जो चल सको तो चलो कि राह ए वफ़ा बहुत मुख़्तसर हुई है मक़ाम है अब कोई न मंज़िल फ़राज़ ए दार ओ रसन से पहले, नहीं रही अब जुनूँ की ज़ंजीर पर वो पहली इजारादारी गिरफ़्त करते हैं करने वाले ख़िरद पे दीवानापन से पहले, करे कोई तेग़ का नज़ारा अब उन को ये भी नहीं गवारा ब ज़िद है क़ातिल कि जान ए बिस्मिल फ़िगार हो जिस्म ओ तन से पहले, ग़ुरूर ए सर्व ओ समन से कह दो कि फिर वही ताजदार होंगे जो ख़ार ओ ख़स वाली ए चमन थे उरूज ए सर्व ओ समन से पहले, इधर तक़ाज़े हैं मस्लहत के उधर तक़ाज़ा ए दर्द ए दिल है ज़बाँ सँभालें कि दिल सँभालें असीर ज़िक्र ए वतन से पहले..!! - [न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है](https://hindigazals.com/na-kisi-pe-zakhm/): न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है न करम है हम पे हबीब का न निगाह हम पे अदू की है, साफ़ ए ज़ाहिदाँ है तो बेयक़ीं सफ़ ए मै कशाँ है तो बेतलब न वो सुब्ह विर्द ओ वुज़ू की है न वो शाम जाम ओ सुबू की है, न ये ग़म नया न सितम नया कि तिरी जफ़ा का गिला करें ये नज़र थी पहले भी मुज़्तरिब ये कसक तो दिल में कभू की है, कफ़ ए बाग़बाँ पे बहार ए गुल का है क़र्ज़ पहले से बेशतर कि हर एक फूल के पैरहन में नुमूद मेरे लहू की है, नहीं ख़ौफ़ ए रोज़ ए सियह हमें कि है फ़ैज़ ज़र्फ़ ए निगाह में अभी गोशागीर वो एक किरन जो लगन उस आईना रू की है..!! - [सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं](https://hindigazals.com/socha-badal-jaati-hai/): सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं वक्त के साथ,लोगो के ख्यालात बदल जाते हैं, इस तरह चेहरे बदलती है जिंदगी दिल बदल जाते हैं,जज्बात बदल जाते हैं, कितनी मुश्किलों से हल होती है एक पहेली तब तक दुनियाँ के सवालात बदल जाते हैं, घबरा के मुँह मत मोड़ लेना जिंदगानी से ताउम्र एक जैसे नहीं रहते हालात बदल जाते हैं, किसी के जाने से नहीं रुकती जिन्दगी रूह वही रहती है बस जिस्मात बदल जाते हैं..!! - [उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह](https://hindigazals.com/ujde-hue-haddapa-ke/): उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह ज़िन्दा हैं लोग वक़्त की रफ़्तार की तरह, क्या रहना ऐसे शहर में मजबूरियों के साथ बिकते हैं लोग शाम के अख़बार की तरह, कातिल बिराजमान हैं मुन्सफ़ के साये में मक़तूल फिर रहे हैं अज़ादार की तरह, वायदे ज़रुरतों की नज़र कर दिए गए रिश्ते हैं सारे रेत की दीवार की तरह, मोहसिन मेरे वज़ूद को संगसार करते वक़्त शामिल था सारा शहर एक त्यौहार की तरह..!! - [निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती](https://hindigazals.com/nigaah-e-yaar-ke/): निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती हसीं ख़्वाबों के जलने में कुछ देर नहीं लगती, इश्क़ ओ मुहब्बत का मिजाज़ है हवाओं जैसा हवा के रुख बदलने में कुछ देर नहीं लगती, शब ए हिज्राँ तो गुजरती है सदियों की तरह शब ए वस्ल के ढलने में कुछ देर नहीं लगती, निगाह ए इश्क़ में अगर हो ख़ुलूस की हरारत बर्फ़ ए हुस्न के पिघलने में कुछ देर नहीं लगती..!! - [मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को](https://hindigazals.com/main-abhi-dekh-ke-aaya/): मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को सब्ज़ पेड़ों में भी वीरानी बहुत होती है, उन दिनों मैं नज़र अंदाज़ हुआ होता हूँ जिन दिनों मेरी निगहबानी बहुत होती है, फ़ासला रखे मुनासिब सा खरद मंदी से अक्ल आ जाए तो नादानी बहुत होती है, दिल तरसता है जिसे मिलने को मक़सूद ए वफ़ा मिल भी जाए तो परेशानी बहुत होती है..!! - [वफ़ा की आरज़ू करना, सफ़र की जुस्तजू करना](https://hindigazals.com/wafa-ki-aarzoo-karna/): वफ़ा की आरज़ू करना, सफ़र की जुस्तजू करना जो तुम मायूस हो जाओ, तो रब से गुफ़्तगू करना, ये अक्सर हो भी जाता है कि कोई खो भी जाता है मुक़द्दर को सताओगे तो फिर ये सो भी जाता है, अगर तुम हौसला रखो वफ़ा का सिलसिला रखो जिसे तुम खालिक़ कहते हो, तो उससे राब्ता रखो, मैं ये दावे से कहता हूँ कभी नाक़ाम ना होगे इश्क़ ए हकीकी को समझ जाओ, कभी बदनाम ना होगे..!! - [हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा](https://hindigazals.com/har-ek-baat-pe/): हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा कोई गम तो है जो छुपाता है झूठा, सब ख़ुश है, सब राज़ी है मुल्क में ये काहे का नाटक दिखाता है झूठा, कोई घर पे जैसे उसका मुन्तज़िर हो हर भरी बज़्म यूँ छोड़ जाता है झूठा, हुए खत्म जिनसे है सब के मरासिम क्यूँ अहवाल उनके सुनाता है झूठा, वो सूरत किसी की भी सूरत नहीं है जो सूरत जहाँ को दिखाता है झूठा, कहीं असली चेहरा न उसका दिखा दे हमेशा नज़र आइनों से चुराता है झूठा..!! - [मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए](https://hindigazals.com/maut-ke-sun-ke/): मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए रूठे दुनिया से जो हम यार मनाने आए अच्छे दिन आए तो मैं ने ये तमाशा देखा मेरे दुश्मन भी गले मुझ को लगाने आए आज मिल कर मिरे दुश्मन का पता पूछते हैं मुझ से मिलने वो न मिलने के बहाने आए दर्द-ओ-ग़म और उदासी के सिवा कौन आता जिन को भेजा था मिरे घर में ख़ुदा ने आए फूल ही फूल खिले जिन की बदौलत ऐ दोस्त उन के हिस्से में न फूलों के ख़ज़ाने आए एधी वालों के सिवा कोई नहीं था उस का लोग मुफ़्लिस का जनाज़ा न उठाने आए रो दिए वो भी मिरी मौत के बा'द ऐ 'पुरनम' याद जब मेरी वफ़ाओं के फ़साने आए..!! - [ये कह के आग वो दिल में लगाए जाते हैं](https://hindigazals.com/ye-kah-ke-aag/) - [रात सुनती रही मैं सुनाता रहा](https://hindigazals.com/raat-sunti-rahi-main/): रात सुनती रही मैं सुनाता रहा दर्द की दास्ताँ मैं बताता रहा, लोग लोगो से चाहत निभाते रहें एक वो था मेरा दिल दुखाता रहा, धूप छाँव सी उसकी तबीयत रही निगाहें मिलाता रहा वो चुराता रहा, दिल के मेहमान खाने में रौनक रही कोई आता रहा कोई जाता रहा, हम मक्तब ने सारे सबक़ पढ़ लिए मैं तेरा नाम लिखता और मिटाता रहा..!! - [कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ](https://hindigazals.com/koi-sunta-hi-nahin/): कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ दर्द अगर उठे तो क्या शोर मचाने लग जाएँ, भेद ऐसा कि गिरह जिस की तलब करती है उम्र रम्ज़ ऐसा कि समझने में ज़माने लग जाएँ, आ गया वो तो दिल ओ जान बिछे हैं हर सू और नहीं आए तो क्या ख़ाक उड़ाने लग जाएँ, तेरी आँखों की क़सम हम को ये मुमकिन ही नहीं तू न हो और ये मंज़र भी सुहाने लग जाएँ, वहशतें इतनी बढ़ा दे कि घरौंदे ढा दें सब्ज़ शाख़ों से परिंदों को उड़ाने लग जाएँ, ऐसा दारू हो रह ए इश्क़ से बाज़ आएँ क़दम ऐसा चारा हो कि बस होश ठिकाने लग जाएँ..!! - [जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई](https://hindigazals.com/jaanta-hoon-ki-tujhe/): जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई ? शब बसर करनी है,महफूज़ ठिकाना है कोई ? कोई जंगल है यहाँ पास में ? सेहरा है कोई ? - [मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस](https://hindigazals.com/mere-uske-darmiyan-ye/): मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस उम्र भर एक दूसरे को सोचना है और बस, ज़िन्दगी वायदा है मैं वापस पलट कर आऊँगा मैं ने बस एक बार उसको देखना है और बस, यार तूने मंज़िलों का सोच भी कैसे लिया इश्क बस एक रास्ता है रास्ता है और बस, खिड़कियाँ सब बंद है अहबाब सारे सो चुके मैं हूँ या फिर एक कलंदर जागता है और बस, रात दीवारों से सर टकरा रही है आज भी आज भी कमरे में मैं, मैं हूँ एक दीया है और बस, ख़्वाब ज़ादी आ कभी ख़्वाबों से हट कर भी मिले ख़्वाब तो हैं ख़्वाब इनको टूटना है और बस, ऐ शब ए गिर्या मेरी आँखें मुक़म्मल रो चुकी आख़िरी एक अश्क पलकों पर खड़ा है और बस, ज़िन्दगी सब कुछ सलामत है मेरा उसके बगैर हाँ मगर एक दिल मेरा टूटा पड़ा है और बस..!! - [चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या](https://hindigazals.com/chal-nikalti-hai-gam/): चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या हम ने भी कीं दर ओ दीवार से बातें क्या क्या, बात बन आई है फिर से कि मेरे बारे में उस ने पूछीं मेरे ग़मख़्वार से बातें क्या क्या, लोग लब बस्ता अगर हों तो निकल आती हैं चुप के पैराया ए इज़हार से बातें क्या क्या, किसी सौदाई का क़िस्सा किसी हरजाई की बात लोग ले आते हैं बाज़ार से बातें क्या क्या, हम ने भी दस्त शनासी के बहाने की हैं हाथ में हाथ लिए प्यार से बातें क्या क्या, किस को बिकना था मगर ख़ुश हैं कि इस हीले से हो गईं अपने ख़रीदार से बातें क्या क्या, हम हैं ख़ामोश कि मजबूर ए मोहब्बत थे फ़राज़ वर्ना मंसूब हैं सरकार से बातें क्या क्या..!! - [ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते](https://hindigazals.com/aisa-hai-ki-sab/): ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते, अंदर की फ़ज़ाओं के करिश्मे भी अजब हैं मेंह टूट के बरसे भी तो बादल नहीं होते, कुछ मुश्किलें ऐसी हैं कि आसाँ नहीं होतीं कुछ ऐसे मुअम्मे हैं कभी हल नहीं होते, शाइस्तगी ए ग़म के सबब आँखों के सहरा नमनाक तो हो जाते हैं जल थल नहीं होते, कैसे ही तलातुम हों मगर क़ुल्ज़ुम ए जाँ में कुछ याद जज़ीरे हैं कि ओझल नहीं होते, उश्शाक़ के मानिंद कई अहल ए हवस भी पागल तो नज़र आते हैं पागल नहीं होते, सब ख़्वाहिशें पूरी हों फ़राज़ ऐसा नहीं है जैसे कई अशआर मुकम्मल नहीं होते..!! - [अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए](https://hindigazals.com/ab-tak-yahi-suna/): अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए उनकी गली गए तो ख़रीदार बिक गए, लगने लगी हैं मुझ से भी नाक़स की बोलियाँ यानि जहाँ के सारे ही शहकार बिक गए, जिसने हमें ख़रीदा मुनाफ़ा कमा लिया अपना है ये कमाल कि हर बार बिक गए, अंजाम ये नहीं था कहानी का असल में क्या कीजिए कि बीच में किरदार बिक गए, जंगल की धूप में भी न साया हमें मिला क़ीमत लगी तो देखिये अश्जार बिक गए, इतना तो फ़र्क है चलो अपनों में गैर में अपने थे शर्मसार, मगर यार बिक गए, मत पूछ उनका बिकते मुहब्बत के मोल जो रोये तमाम उम्र कि बेकार बिक गए..!! - [जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका](https://hindigazals.com/jaisa-nazar-ka-shauk/): जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका शहर करिश्मा साज़ तमाशा न कर सका, दुनिया ने घोल दी मेरे लहजे में तल्खियाँ मैं गुफ्तगू का शौक़ भी पूरा न कर सका, एक सब्ज़ रौशनी थी फ़ज़ाओं में खो गई जाने मैं कहाँ खो गया पीछा न कर सका, इस शहर ए दिल फ़रेब ने चाहा बहुत मगर दे कर तवील हिज्र भी तन्हा न कर सका, जादू ए इश्क के इस खेल में मुझे मारा गया फिर यूँ हुआ कि कोई भी जिंदा न कर सका..!! - [ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं](https://hindigazals.com/ye-zamane-ki-wafayen/): ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं मुझे उसकी वफ़ा चाहिए किसी आम की नहीं, उसकी तो एक मुस्कराहट भी अनमोल थी ये तमाम मुस्कुराहटें किसी दाम की नहीं, मुझे गम है तो उस के छीन जाने का है परवाह मुझ पर लगे हुए इलज़ाम का नहीं, मेरा हाथ देख कर नजूमी ये बोला.... - [असर उस को ज़रा नहीं होता](https://hindigazals.com/asar-us-ko-zara/): असर उस को ज़रा नहीं होता रंज राहत फ़ज़ा नहीं होता, बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी वादा वफ़ा नहीं होता, ज़िक्र ए अग़्यार से हुआ मालूम हर्फ़ ए नासेह बुरा नहीं होता, किस को है ज़ौक़ ए तल्ख़कामी लेक जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता, तुम हमारे किसी तरह न हुए वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता, उस ने क्या जाने क्या किया ले कर दिल किसी काम का नहीं होता, इम्तिहाँ कीजिए मेरा जब तक शौक़ ज़ोर आज़मा नहीं होता, एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता, आह तूल ए अमल है रोज़फ़ुज़ूँ गरचे एक मुद्दआ नहीं होता, तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई दूसरा नहीं होता, हाल ए दिल यार को लिखूँ क्यूँकर ? - [वो जो हम में तुम में क़रार था...](https://hindigazals.com/wo-jo-ham-me/): वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो, वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मेरे हाल पर मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो, वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो, कभी बैठे सब में जो रू ब रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो, हुए इत्तिफ़ाक़ से गर बहम तो वफ़ा जताने को दम ब दम गिला ए मलामत ए अक़रिबा तुम्हें याद हो कि न याद हो, कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगी तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो, कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो, सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया एक आप ने वादा था सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो, कहा मैं ने बात वो कोठे की मेरे दिल से साफ़ उतर गई तो कहा कि जाने मेरी बला तुम्हें याद हो कि न याद हो, वो बिगड़ना वस्ल की रात का वो न मानना किसी बात का वो नहीं नहीं की हर आन अदा तुम्हें याद हो कि न याद हो, जिसे आप गिनते थे आश्ना जिसे आप कहते थे बा वफ़ा मैं वही हूँ मोमिन ए मुब्तला तुम्हें याद हो कि न याद हो..!! - [रह वफ़ा में कोई साहिब ए जुनूँ न मिला](https://hindigazals.com/rah-e-wafa-me/): , गुलों के रुख़ पे वही ताज़गी का आलम है न जाने उन को ग़म ए रोज़गार क्यूँ न मिला, कहाँ से लाए वो एक बुल हवस मज़ाक़ ए सलीम जिसे नज़र तो मिली जज़्बा ए दरूँ न मिला, मिली थीं तर्क ए मोहब्बत के बाद भी आँखें मगर वो कैफ़ वो एजाज़ वो फ़ुसूँ न मिला, फ़लक शिगाफ़ था इस दर्जा इज़्तिराब ए अमल कि बंदगी में फ़रिश्तों को भी सुकूँ न मिला, न जाने किस के सहारे रुका हुआ है फ़लक हमें तो फ़र्श ए ज़मीं पर कोई सुतूँ न मिला..!! - [हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो](https://hindigazals.com/haal-me-apne-magan/): हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो ये उसी इंसान से मुमकिन है जो ज़िंदा न हो, कम से कम हर्फ़ ए तमन्ना की सज़ा इतनी तो दे जुरअत ए जुर्म ए सुख़न भी मुझ को आइंदा न हो, बेगुनाही जुर्म था अपना सो इस कोशिश में हूँ सुर्ख़रू मैं भी रहूँ क़ातिल भी शर्मिंदा न हो, ज़ुल्मतों की मद्हख़्वानी और इस अंदाज़ से ये किसी पर्वर्दा ए शब का नुमाइंदा न हो, मैं बहर सूरत तेरा कर्ब ए तग़ाफ़ुल सह गया अब मुझे इस का सिला दे सिर्फ़ शर्मिंदा न हो, ज़िंदगी तिश्ना भी है बेरंग भी लेकिन सुरूर जब तलक चेहरा फ़रोग़ ए मय से ताबिंदा न हो..!! - [कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के](https://hindigazals.com/kabhi-apne-ishq-pe/): कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के यूँही बीत जाएँगे ये भी दिन जो ख़िज़ाँ के हैं न बहार के, ये तिलिस्म ए हुस्न ए ख़याल है कि फ़रेब तेरे दयार के सर ए बाम जैसे अभी अभी कोई छुप गया है पुकार के, सियो चाक ए दामन ओ आस्तीं कि वो सरगिराँ न हो फिर कहीं यही रुत है इशरत ए दीद की यही दिन हैं आमद ए यार के, अभी और मातम ए रंग ओ बू कि चमन को है तलब ए नुमू तेरे अश्क हों कि मेरा लहू ये अमीं हैं फ़स्ल ए बहार के, ग़म ए रोज़ ओ शब की अमीन है ये हयात फिर भी हसीन है कहीं धूप आरज़ ए दोस्त की कहीं साए गेसू ए यार के..!! - [हिन्द का आज़ाद हो जाना कोई आसाँ नहीं](https://hindigazals.com/hind-ka-azaad-ho/): हिन्द का आज़ाद हो जाना कोई आसाँ नहीं देखना तुम को अभी क्या क्या दिखाया जाएगा, देखना तुम से अभी कितने किए जाएँगे मक्र किस तरह तुम को अभी चक्कर में लाया जाएगा, तुम में डाला जाएगा एक सख़्त ओ नाज़ुक तफ़रक़ा तुम को शह दे दे के आपस में लड़ाया जाएगा, पेशवायान ए मज़ाहिब को मिलेंगी रिश्वतें ढोंग तब्लीग़ और शुद्धि का रचाया जाएगा, धर्म रक्षा के लिए तुम से लिए जाएँगे अहद तुम को मज़हब अपना ख़तरे में दिखाया जाएगा, लीडरों से होंगे वादे ख़िलअत ओ इनआम के क़िल्लत ओ कसरत का हंगामा उठाया जाएगा, तुम को परवाना अता होगा ख़िताब ओ जाह का तुम को ओहदे दे के लालच में फँसाया जाएगा, गर ये तदबीरें मुक़द्दर से न रास आएँ तो फिर दूसरी सूरत से तुम को डगमगाया जाएगा, इंतिहाई बरबरियत से लिया जाएगा काम बंद कर के तुम को जेलों में सड़ाया जाएगा, दाना पानी कर दिया जाएगा बिल्कुल तुम पे बंद तुम को भूखों मार के क़ब्ज़े में लाया जाएगा, गर्म लोहे से तुम्हारे जिस्म दागे़ जाएँगे तुम को कोड़े मार कर उल्लू बनाया जाएगा, जाएदादें सब तुम्हारी ज़ब्त कर ली जाएँगी बाल बच्चों पर तुम्हारे ज़ुल्म ढाया जाएगा, बावजूद उस के भी तुम क़ाएम रहे ज़िद पर अगर बे तअम्मुल तुम को फाँसी पर चढ़ाया जाएगा, इस तरह भी तुम अगर लाए न अबरू पर शिकन सर तुम्हारे पाँव पर आख़िर झुकाया जाएगा..!! - [भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ](https://hindigazals.com/bharat-ke-ae-sapooto/): भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ, मुर्दादिली का झंडा फेंको ज़मीन पर तुम ज़िंदादिली का हर सू परचम उड़ाए जाओ, लाओ न भूल कर भी दिल में ख़याल ए पस्ती ख़ुशहाली ए वतन का बेड़ा उठाए जाओ, तन मन मिटाए जाओ तुम नाम ए क़ौमीयत पर राह ए वतन में अपनी जानें लड़ाए जाओ, कम हिम्मती का दिल से नाम ओ निशाँ मिटा दो जुरअत का लौह ए दिल पर नक़्शा जमाए जाओ, ऐ हिंदूओ मुसलमाँ आपस में इन दिनों तुम नफ़रत घटाए जाओ उल्फ़त बढ़ाए जाओ, बिक्रम की राजनीती अकबर की पॉलीसी की सारे जहाँ के दिल पर अज़्मत बिठाए जाओ, जिस कश्मकश ने तुम को है इस क़दर मिटाया तुम से हो जिस क़दर तुम उस को मिटाए जाओ, जिन ख़ाना जंगियों ने ये दिन तुम्हें दिखाए अब उन की याद अपने दिल में भुलाए जाओ, बेख़ौफ़ गाए जाओ हिन्दोस्ताँ हमारा और वंदे मातरम के नारे लगाए जाओ, जिन देश सेवकों से हासिल है फ़ैज़ तुम को इन देश सेवकों की जय जय मनाए जाओ, जिस मुल्क का हो खाते दिन रात आब ओ दाना उस मुल्क पर सरों की भेटें चढ़ाए जाओ, फाँसी का जेल का डर दिल से फ़लक मिटा कर ग़ैरों के मुँह पे सच्ची बातें सुनाते जाओ..!! - [हम भारत के रखवाले हैं](https://hindigazals.com/ham-bharat-ke-rakhwale/) - [भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है](https://hindigazals.com/bharat-pyara-desh-hamara/): भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है हर रुत हर एक मौसम इसका कैसा प्यारा प्यारा है, कैसा सुहाना कैसा सुंदर प्यारा देश हमारा है दुख में सुख में हर हालत में भारत दिल का सहारा है, भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है सारे जग के पहाड़ों में बेमिस्ल पहाड़ हिमाला है, पर्बत सब से ऊँचा है ये पर्बत सब से निराला है भारत की रक्षा करता है भारत का रखवाला है, लाखों चश्मे बहते हैं इसमें लाखों नदियों वाला है भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है, गंगा जी की प्यारी लहरें गीत सुनाती जाती हैं सदियों की तहज़ीब हमारी याद दिलाती जाती हैं, भारत की गुलज़ारों को सरसब्ज़ बनाती जाती हैं खेतों को हरियाली देती फूल खिलाती जाती हैं, भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है हरे भरे हैं खेत हमारे दुनिया को अन्न देते हैं, चाँदी सोने की खानों से हम जग को धन देते हैं प्रेम के प्यारे फूल की ख़ुशबू गुलशन गुलशन देते हैं, अम्न ओ अमाँ की नेमत सब को भर भर दामन देते हैं भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है, कृष्ण की बंसी ने फूंकी है रूह हमारी जानों में गौतम की आवाज़ बसी है महलों में मैदानों में, चिश्ती ने जो दी थी मय वो अब तक है पैमानों में नानक की तालीम अभी तक गूँज रही है कानों में, भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है मज़हब कुछ हो हिन्दी हैं हम सारे भाई भाई हैं, हिन्दू हैं या मुस्लिम हैं या सिख हैं या ईसाई हैं प्रेम ने सब को एक किया है प्रेम के हम शैदाई हैं, भारत नाम के आशिक़ हैं हम भारत के सौदाई हैं भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है..!! - [जिस का है सब को ज्ञान यही है](https://hindigazals.com/jis-ka-hai-sab/): जिस का है सब को ज्ञान यही है सारे जहाँ की जान यही है जिस से है अपनी आन यही है मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, हँसता पर्बत हँसमुख झरना पाँव पसारे गंगा जमुना गोदी खोले धरती माता मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, एक तो ऊँचा सब से हिमाला उस पर मेरे देश का झंडा धरती पर आकाश का धोका मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, पर्बत कितना जम के अड़े हैं कैसे कैसे भीम खड़े हैं झरने गिर गिर पाँव पड़े हैं मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, पर्बत ऊँची चोटी वाले बाँके तिरछे नोक निकाले अर्जुन जैसे बान सँभाले मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, आरती उस की चाँद उतारे ऊषा उस की माँग सँवारे सूरज उस पर सब कुछ वारे मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, झूमती गाएँ नाचते पंछी सारी दुनिया रक़्स ओ मस्ती कृष्ण की बंसी हाए रे बंसी मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, जाल बिछाए जाल सँभाले कमसिन सड़कें माँग निकाले बाल बिखेरे नदी नाले मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, रात की नारी डूब गई है सुब्ह की देवी जाग चुकी है पनघट पर एक भीड़ लगी है मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, सुंदर नारी नार सँभाले घूँघट काढ़े और हटाए चलते फिरते प्रेम शिवाले मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, धरती की पोशाक नई है खेती जैसे सब्ज़ परी है मेहनत अपने बल पे खड़ी है मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, पड़ती बूँदें बजती पायल धरती जल थल पंछी घाएल बोले पपीहा कूके कोयल मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, देश का एक एक नयन कटोरा सारे जहाँ पर डाले डोरा अपना जनता अपना एलोरा मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, ताजमहल बेमिस्ल हसीना इस में मिला कितनों का पसीना जब कहीं चमका है ये नगीना मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, अहद ए वफ़ा की लाज तो देखो शाह के दिल पर राज तो देखो प्रेम के सर पर ताज तो देखो मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, भारत की तक़दीर को देखो जन्नत की तस्वीर को देखो आओ ज़रा कश्मीर को देखो मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, एक इसी कश्मीर का दर्शन कितनों के दुख दर्द का दर्पन आस नहाए बरसे जीवन मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, एक तरफ़ बंगाल का जादू सर से कमर तक गेसू ही गेसू फैली हुई टैगोर की ख़ुशबू मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, काली बलाएँ सर पर पाले शाम अवध की डेरा डाले ऐसे में कौन अपने को सँभाले मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, हुस्न की तस्कीन इश्क़ की ढारस वाह रे अपनी सुब्ह ए बनारस घाट के पत्थर जैसे पारस मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, मंदिर मस्जिद और शिवाले मानौता का भार सँभाले कितने युगों को देखे भाले मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है, फूलों के मुखड़े चूम रहे हैं काले भँवरे घूम रहे हैं अम्न के बादल झूम रहे हैं मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है..!! - [रंग ओ बू के जहाँ के थे ही नहीं](https://hindigazals.com/rang-o-boo-ke/): रंग ओ बू के जहाँ के थे ही नहीं इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं, राह ओ मंज़िल अलग रहे अपने हम किसी कारवाँ के थे ही नहीं, बर्क़ को भी रहा यही अफ़्सोस हम किसी आशियाँ के थे ही नहीं, हमने समझा था उनको क्यों अपना वो जो मेहमाँ यहाँ के थे ही नहीं, मंज़िलें आसमाँ से आगे थीं हम ज़माँ ओ मकाँ के थे ही नहीं, रंग ओ बू इख़्तियार क्यों करते ? - [दुश्मनों से रह ख़फ़ा एक हद तलक](https://hindigazals.com/dushmanon-se-rah-khafa/): दुश्मनों से रह ख़फ़ा एक हद तलक दोस्तों से भी निभा एक हद तलक, हम निवाला हम पियाला कोई हो राज़ उस को भी बता एक हद तलक, जान दे कर वास्ते माँ बाप के क़र्ज़ होता है अदा एक हद तलक, दूरियाँ माना बहुत अच्छी नहीं क़ुर्बतें फिर भी बढ़ा एक हद तलक, हक़ में है बीमार के लाज़िम दुआ काम आती है दवा एक हद तलक, जिस को तू समझे हुआ है राज़दार राज़ उस को भी बता एक हद तलक, हम वफ़ादारों की ख़ातिर ऐ सनम चाहिए तुम को जफ़ा एक हद तलक, कौन साहिल जान पाया उस का राज़ तुम को भी बस है पता एक हद तलक..!! - [कोई दुश्मन भला भाता किसे है](https://hindigazals.com/koi-dushman-bhala-bhaata/): कोई दुश्मन भला भाता किसे है बनाना दोस्त भी आता किसे है फ़ना हो कर बक़ा पाता है इंसाँ हुनर जीने का ये आता किसे है अभी तक एक थे और एक हैं हम अरे नादाँ तू बहकाता किसे है तू पहले ख़ुद अमल पैरा तो हो जा अबस ये वा'ज़ फ़रमाता किसे है हमारा काम तो कार ए जुनूँ है ख़िरद के साथ उलझाता किसे है हैं हिन्दू सिख मुसलमाँ भाई भाई धरम मज़हब पे लड़वाता किसे है बदल देगा ज़माना राह साहिल सिवाए दिल के बहलाता किसे है..!! - [हम तो शायद यहाँ के थे ही नहीं](https://hindigazals.com/ham-to-shayad-yahan-ke/): हम तो शायद यहाँ के थे ही नहीं इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं, तन्हा तन्हा ही तय किया है सफ़र हम किसी कारवाँ के थे ही नहीं, अपने दिल में न दी जगह उस ने हम मकीं उस मकाँ के थे ही नहीं, मौसम ए गुल में भी न खुल पाए फूल जो गुल्सिताँ के थे ही नहीं, तुम को साहिल अमाँ वो क्या देते ? - [अपना ख़ुर्शीद और अपना ही क़मर पैदा कर](https://hindigazals.com/apna-khurshid-aur-apna/): अपना ख़ुर्शीद और अपना ही क़मर पैदा कर तू मोहब्बत का शजर है तो समर पैदा कर, हर बशर तुझ को नज़र आने लगे अपनी तरह अपने अंदर तू वो ही क़ल्ब ओ नज़र पैदा कर, ये तो मुमकिन ही नहीं है वो न चाहे तुझ को हाँ मगर उस के लिए तू भी जिगर पैदा कर, मुंतज़िर होगा तेरे वास्ते साहिल ऐ दोस्त पहले तूफ़ान से लड़ने का हुनर पैदा कर, तेरी आहें भी पहुँच जाएँगी रब तक एक दिन आहों में अपनी वो दिल दोज़ असर पैदा कर, रात तारीक अगर है तो तुझे डर क्या है ? - [बदहवासी बदगुमानी बेनियाज़ी आप की](https://hindigazals.com/badhawasi-badgumani-beniyazi-aap/): बदहवासी बदगुमानी बेनियाज़ी आप की मुश्किलों में डाल देगी ज़िंदगानी आप की, देख कर हैरत है सब को झूठ के दरबार में आज भी क़ाएम है कैसे हक़ बयानी आप की ? - [चर्चा है आज बस यही हर एक ज़बान पर](https://hindigazals.com/charcha-hai-aaj-bas/): चर्चा है आज बस यही हर एक ज़बान पर जल्दी बनेगी फ़िल्म मेंरी दास्तान पर, मैंने जमा के रखे हैं धरती पे अपने पाँव नज़रें टिकी हुईं हैं भले आसमान पर, इस ओर रुख़ भी करते हुए डर रहे थे लोग क़ब्ज़ा न कर सका कोई दिल के मकान पर, इस बात पर रिसर्च करेंगे कि आख़िरश क्यों तीर का निशाँ है दिल के निशान पर, अगयात जब से ग़म ने है घुसपैठ दिल में की बन आई है तभी से तो ख़ुशियों की जान पर..!! - [दीदार माहताब का शब भर नहीं हुआ](https://hindigazals.com/deedar-mahtab-ka-shab/): दीदार माहताब का शब भर नहीं हुआ रौशन मेंरे नसीब का अख़्तर नहीं हुआ, हर दम वही हुआ न थी उम्मीद जिसकी कुछ होना जो लाज़मी था वो अक्सर नहीं हुआ, क्या फ़ाएदा चराग़ जलाने से रोज़ रोज़ किरदार ही मेंरा जो मुनव्वर नहीं हुआ, अशआर की कुछ आज भी आमद है हो रही ये ज़ह्न मेरा आज भी बंजर नहीं हुआ, बरसों से कितने दरिया हैं इसमें समा रहे मीठा मगर अभी भी समुंदर नहीं हुआ, कोशिश तो उस ने ख़ूब की जी जान से मगर पंजों के बल भी वो मेरे हम सर नहीं हुआ, ऐ ज़िंदगी कहूँ मैं तुझे कैसे अलविदा तुझ से अभी हिसाब बराबर नहीं हुआ, अगयात ग़म न कर हैं अगर तुझ में ख़ामियाँ दुनिया में कोई शख़्स भी यकसर नहीं हुआ..!! - [हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं](https://hindigazals.com/hizr-ki-dhoop-me/): हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं आँसू भी तो माओं जैसी बातें करते हैं, रस्ता देखने वाली आँखों के अनहोने ख़्वाब प्यास में भी दरियाओं जैसी बातें करते हैं, ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं, एक ज़रा सी जोत के बल पर अँधियारों से बैर पागल दिए हवाओं जैसी बातें करते हैं, रंग से ख़ुशबूओं का नाता टूटता जाता है फूल से लोग ख़िज़ाओं जैसी बातें करते हैं, हम ने चुप रहने का अहद किया है और कमज़र्फ़ हम से सुख़न आराओं जैसी बातें करते हैं..!! - [इंसाफ ज़ालिमों की हिमायत में जायेगा](https://hindigazals.com/insaf-zalimo-ki-himayat/): इंसाफ ज़ालिमों की हिमायत में जायेगा ये हाल है तो कौन अदालत में जायेगा ? - [हर सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँढते हैं हम](https://hindigazals.com/har-soo-jahan-me/): हर सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँढते हैं हम जो दिल में घर करे वो नज़र ढूँढते हैं हम, इन बस्तियों को फूँक के ख़ुद अपने हाथ से अपने नगर में अपना वो घर ढूँढते हैं हम, जुज़ रेगज़ार कुछ भी नहीं ता हद निगाह सहरा में सायादार शजर ढूँढते हैं हम, तस्लीम है कि जुड़ता नहीं है शिकस्ता दिल फिर भी दुकान ए आईनागर ढूँढते हैं हम, जिस की अदा अदा पे हो इंसानियत को नाज़ मिल जाए काश ऐसा बशर ढूँढते हैं हम, कुछ इम्तियाज़ ए मज़हब ओ मिल्लत नहीं हमें एक मोतबर रफ़ीक़ ए सफ़र ढूँढते हैं हम, इस दौर में जो फ़न को हमारे परख सके वो साहब ए ज़बान ओ नज़र ढूँढते हैं हम, हाथ आएगा न कुछ भी ब जुज़ संग ए बेबिसात उथले समुंदरों में गुहर ढूँढते हैं हम, आजिज़ तलाश ए शम्अ में परवाने महव हैं हैरत उन्हें है उन को अगर ढूँढते हैं हम..!! - [चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया](https://hindigazals.com/charag-khud-hi-bujhaya/): चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया वो ग़ैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया, हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया, मैं अपनी जाँ में उसे जज़्ब किस तरह करता उसे गले से लगाया लगा के छोड़ दिया, मैं जा चुका हूँ मेंरे वास्ते उदास न हो मैं वो हूँ तू ने जिसे मुस्कुरा के छोड़ दिया, किसी ने ये न बताया कि फ़ासला क्या है हर एक ने मुझे रस्ता दिखा के छोड़ दिया, हमारे दिल में है क्या झाँक कर न देख सके ख़ुद अपनी ज़ात से पर्दा उठा के छोड़ दिया, वो तेरा रोग भी है और तेरा इलाज भी है उसी को ढूँढ जिसे तंग आ के छोड़ दिया, वो अंजुमन में मिला भी तो उस ने बात न की कभी कभी कोई जुमला छुपा के छोड़ दिया, रखूँ किसी से तवक़्क़ो तो क्या रखूँ शहज़ाद ख़ुदा ने भी तो ज़मीं पर गिरा के छोड़ दिया..!! - [कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ](https://hindigazals.com/kutiya-me-kaun-ayega/): कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ अब ये किवाड़ बंद करो ख़ामोशी के साथ, साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ, चलते हैं बच के शैख़ ओ बरहमन के साए से अपना यही अमल है बुरे आदमी के साथ, शाइस्तगान ए शहर मुझे ख़्वाह कुछ कहें सड़कों का हुस्न है मेरी आवारगी के साथ, शायर हिकायतें न सुना वस्ल ओ इश्क़ की इतना बड़ा मज़ाक़ न कर शायरी के साथ, लिखता है ग़म की बात मसर्रत के मूड में मख़्सूस है ये तर्ज़ फ़क़त कैफ़ ही के साथ..!! - [बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है](https://hindigazals.com/bura-bure-ke-alawa/): बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है, तुम अपने देस की सौग़ात हो हमारे लिए कि हुस्न तोहफ़ा ए आब ओ हवा भी होता है, मुक़ाबले पे कमर बस्ता हम नहीं होते अगर शिकस्त का ख़तरा ज़रा भी होता है, तुम्हारे शहर में है जी लगा हुआ वर्ना मुसाफ़िरों के लिए रास्ता भी होता है, वो चेहरा एक तसव्वुर भी है हक़ीक़त भी दरीचा बंद भी होता है वा भी होता है, हम ऐ शुऊर अकेले कभी नहीं होते हमारे साथ हमारा ख़ुदा भी होता है..!! - [गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया](https://hindigazals.com/girja-me-mandiron-me/): गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, एक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया, पहले तलाशा खेत फिर दरिया की खोज की बाक़ी का वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया, जब तक था आसमान में सूरज सभी का था फिर यूँ हुआ वो चंद मकानों में बट गया, हैं ताक में शिकारी निशाना हैं बस्तियाँ आलम तमाम चंद मचानों में बट गया, ख़बरों ने की मुसव्वरी ख़बरें ग़ज़ल बनीं ज़िंदा लहू तो तीर कमानों में बट गया..!! - [अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक](https://hindigazals.com/azal-hoti-rahegi-ishq/): अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक मुक़द्दर में है या रब आरज़ू ए ख़ुदकुशी कब तक तड़पने पर हमारे आप रोकेंगे हँसी कब तक ये माथे की शिकन कब तक ये अबरू की कजी कब तक किरन फूटी उफ़ुक़ पर आफ़्ताब ए सुब्ह ए महशर की सुनाए जाओ अपनी दास्तान ए ज़िंदगी कब तक दयार ए इश्क़ में एक क़ल्ब ए सोज़ाँ छोड़ आए थे जलाई थी जो हम ने शम्अ रस्ते में जली कब तक जो तुम पर्दा उठा देते तो आँखें बंद हो जातीं तजल्ली सामने आती तो दुनिया देखती कब तक तह ए गिर्दाब की भी फ़िक्र कर ऐ डूबने वाले नज़र आती रहेगी साहिलों की रौशनी कब तक कभी तो ज़िंदगी ख़ुद भी इलाज ए ज़िंदगी करती अजल करती रहे दरमान ए दर्द ए ज़िंदगी कब तक वो दिन नज़दीक हैं जब आदमी शैताँ से खेलेगा खिलौना बन के शैताँ का रहेगा आदमी कब तक कभी तो ये फ़साद ए ज़ेहन की दीवार टूटेगी अरे आख़िर ये फ़र्क़ ए ख़्वाजगी ओ बंदगी कब तक दयार ए इश्क़ में पहचानने वाले नहीं मिलते इलाही मैं रहूँ अपने वतन में अजनबी कब तक मुख़ातब कर के अपने दिल को कहना हो तो कुछ कहिए सबा उस बेवफ़ा के आसरे पर शायरी कब तक..?? - [जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है](https://hindigazals.com/jo-hamare-safar-ka/): जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है वो तेरी रहगुज़र का क़िस्सा है, सुब्ह तक ख़त्म हो ही जाएगा ज़िंदगी रात भर का क़िस्सा है, दिल की बातें ज़बाँ पे क्यूँ लाओ घर में रहने दो घर का क़िस्सा है, कोई तलवार क्या बताएगी दोश का और सर का क़िस्सा है, होश आ जाए तो सुनाऊँगा चश्म ए दीवाना गर का क़िस्सा है, चलते रहना तो कोई बात न थी सिर्फ़ सम्त ए सफ़र का क़िस्सा है, जीते जी ख़त्म हो नहीं सकता ज़िंदगी उम्र भर का क़िस्सा है, शाम को हम सुनाएँगे तुम को शब ए ग़म की सहर का क़िस्सा है, तेरे नक़्श ए क़दम की बात नहीं सिर्फ़ शम्स ओ क़मर का क़िस्सा है, दामन ए ख़ुश्क लाओ फिर सुनना ये मेंरी चश्म ए तर का क़िस्सा है, चंद तिनके न थे नशेमन के बाग़ ओ शाख़ ओ शजर का क़िस्सा है, हल्क़ में चुभ रहे हैं काँटे से लब पे गुल हा ए तर का क़िस्सा है, मेरी बर्बादियों का हाल न पूछ एक नीची नज़र का क़िस्सा है, उसी बेदाद गर से कह दे सबा उसी बेदाद गर का क़िस्सा है..!! - [जवानी ज़िंदगानी है न तुम समझे न हम समझे](https://hindigazals.com/jawani-zindagani-hai-na/): जवानी ज़िंदगानी है न तुम समझे न हम समझे ये एक ऐसी कहानी है न तुम समझे न हम समझे, हमारे और तुम्हारे वास्ते में एक नयापन था मगर दुनिया पुरानी है न तुम समझे न हम समझे, अयाँ कर दी हर एक पर हम ने अपनी दास्तान ए दिल ये किस किस से छुपानी है न तुम समझे न हम समझे, जहाँ दो दिल मिले दुनिया ने काँटे बो दिए अक्सर यही अपनी कहानी है न तुम समझे न हम समझे, मोहब्बत हम ने तुम ने एक वक़्ती चीज़ समझी थी मोहब्बत जावेदानी है न तुम समझे न हम समझे, गुज़ारी है जवानी रूठने में और मनाने में घड़ी भर की जवानी है न तुम समझे न हम समझे, मता ए हुस्न ओ उल्फ़त पर यक़ीं कितना था दोनों को यहाँ हर चीज़ फ़ानी है न तुम समझे न हम समझे, अदा ए कम निगाही ने किया रुस्वा मोहब्बत को ये किस की मेहरबानी है न तुम समझे न हम समझे..!! - [उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं](https://hindigazals.com/us-ko-bhi-ham/): उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं इश्क़ ही इश्क़ की क़ीमत हो ज़रूरी तो नहीं, एक दिन आप की बरहम निगही देख चुके रोज़ एक ताज़ा क़यामत हो ज़रूरी तो नहीं, मेरी शम्ओं को हवाओं ने बुझाया होगा ये भी उन की ही शरारत हो ज़रूरी तो नहीं, अहल ए दुनिया से मरासिम भी बरतने होंगे हर नफ़स सिर्फ़ इबादत हो ज़रूरी तो नहीं, दोस्ती आप से लाज़िम है मगर इस के लिए सारी दुनिया से अदावत हो ज़रूरी तो नहीं, पुर्सिश ए हाल को तुम आओगे उस वक़्त मुझे लब हिलाने की भी ताक़त हो ज़रूरी तो नहीं, सैकड़ों दर हैं ज़माने में गदाई के लिए आप ही का दर ए दौलत हो ज़रूरी तो नहीं, बाहमी रब्त में रंजिश भी मज़ा देती है बस मोहब्बत ही मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं, ज़ुल्म के दौर से इकराह ए दिली काफ़ी है एक ख़ूँ रेज़ बग़ावत हो ज़रूरी तो नहीं, एक मिस्रा भी जो ज़िंदा रहे काफ़ी है सबा मेरे हर शेर की शोहरत हो ज़रूरी तो नहीं..!! - [सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया](https://hindigazals.com/saadgi-to-hamari-zara/): सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया बात तो सिर्फ़ एक रात की थी मगर इंतिज़ार आप का उम्र भर कर लिया, इश्क़ में उलझनें पहले ही कम न थीं और पैदा नया दर्द ए सर कर लिया लोग डरते हैं क़ातिल की परछाईं से हम ने क़ातिल के दिल में ही घर कर लिया, ज़िक्र एक बेवफ़ा और सितमगर का था आप का ऐसी बातों से क्या वास्ता आप तो बेवफ़ा और सितमगर नहीं आप ने किस लिए मुँह उधर कर लिया, ज़िंदगी भर के शिकवे गिले थे बहुत वक़्त इतना कहाँ था कि दोहराते हम एक हिचकी में कह डाली सब दास्ताँ हम ने क़िस्से को यूँ मुख़्तसर कर लिया, बेक़रारी मिलेगी मुझे न सुकूँ चैन छिन जाएगा नींद उड़ जाएगी अपना अंजाम सब हम को मालूम था आप ने दिल का सौदा मगर कर लिया, ज़िंदगी के सफ़र में बहुत दूर तक जब कोई दोस्त आया न हम को नज़र हम ने घबरा के तन्हाइयों से सबा एक दुश्मन को ख़ुद हमसफ़र कर लिया..!! - [बिछड़ के उन के हम इस एहतिमाल से भी गए](https://hindigazals.com/bichhad-ke-un-ke/): बिछड़ के उन के हम इस एहतिमाल से भी गए बयान ए ग़म से गए अर्ज़ ए हाल से भी गए, थी जिन की याद से रौशन ख़याल की दुनिया वो ऐसे रूठे बिसात ए ख़याल से भी गए, निगाहें मिलने से मुमकिन है प्यार आ जाए हम उन की बज़्म में कुछ इस ख़याल से भी गए, उन्होंने आ के कोई हाल तक नहीं पूछा बनावटी ही सही इंदिमाल से भी गए, दिल उन को दे के बहुत मुतमइन हुए हम भी कि रोज़ रोज़ की अब देख भाल से भी गए, निगाह ए लुत्फ़ नहीं तो निगाह ए क़हर सही सितम तो ये है हम इस एहतिमाल से भी गए, वो आए चीं ब जबीं इस लिए सर ए महफ़िल हम उन से अब तो जवाब ओ सवाल से भी गए, दिल एक पियाला था मिट्टी का वो भी टूट गया निगाह मिलते ही जाम ए सिफ़ाल से भी गए, ख़ुदा पे छोड़ के ऐ मौज कश्ती ए उल्फ़त सुकून पा गए फ़िक्र ए मआल से भी गए..!! - [जज़्बात का ख़ामोश असर देख रहा हूँ](https://hindigazals.com/jazbaat-ka-khamosh-asar/): जज़्बात का ख़ामोश असर देख रहा हूँ बेचैन है दिल आँख को तर देख रहा हूँ, ख़ाकिस्तर ए परवाना है बुझती हुई शमएँ रंगीन मोहब्बत की सहर देख रहा हूँ, मौहूम हुआ जाता है अब मक़्सद ए हस्ती बातिल को हक़ीक़त पे ज़बर देख रहा हूँ, छाए हैं कुछ इस तरह मेंरे दीदा ओ दिल पर हर सम्त वही हैं मैं जिधर देख रहा हूँ, मंज़िल का पता है न मक़ामात सफ़र का तैयार है अब रख़्त ए सफ़र देख रहा हूँ, जिस राह से गुज़रे थे मोहब्बत के मुसाफ़िर सुनसान वही राहगुज़र देख रहा हूँ, ऐ मौज बला ख़ेज़ है दरिया ए मोहब्बत तूफ़ान का आलम है जिधर देख रहा हूँ..!! - [ख़ुशबू गुलों में तारों में ताबिंदगी नहीं](https://hindigazals.com/khushboo-gulon-me-taaron/): ख़ुशबू गुलों में तारों में ताबिंदगी नहीं तुम बिन किसी भी शय में कोई दिलकशी नहीं, जब तुम नहीं हो पास ख़ुशी भी ख़ुशी नहीं जलती है शम्अ शम्अ में भी रौशनी नहीं, उल्फ़त में भी सुकून की दौलत मिली नहीं जीता तो हूँ ज़रूर मगर ज़िंदगी नहीं, वो क्या समझ सकेगा मोहब्बत की अज़्मतें जिस को कभी किसी से मोहब्बत हुई नहीं, तुम मुझ को बेवफ़ाई के ताने हज़ार दो इल्ज़ाम ए बेवफ़ाई से तुम भी बरी नहीं, जब से लगी है आँख मेंरी हुस्न ए यार से सच पूछिए तो आँख अभी तक लगी नहीं, इस तरह राह ए इश्क़ में सज्दे अदा किए मेरी जबीन ए शौक़ झुकी फिर उठी नहीं..!! - [जहाँ ग़म है न अब कोई ख़ुशी है](https://hindigazals.com/jahan-gam-hai-na/): जहाँ ग़म है न अब कोई ख़ुशी है मोहब्बत उस जगह पर आ गई है, जिसे देखो उसे अपनी पड़ी है ज़माने की बहुत हालत गिरी है, मुसलसल फ़िक्र ए दुनिया फ़िक्र ए उक़्बा अब ऐसी ज़िंदगी क्या ज़िंदगी है ? - [नज़रों का मोहब्बत भरा पैग़ाम बहुत है](https://hindigazals.com/nazaron-ka-mohabbat-bhara/): नज़रों का मोहब्बत भरा पैग़ाम बहुत है मजबूर ए वफ़ा के लिए इनआम बहुत है, कुछ बादा ओ साग़र की ज़रूरत नहीं मुझ को आँखों से छलकती मय ए गुलफ़ाम बहुत है, क्या हाल हो क्या जाने शब ए ग़म की सहर का बेताबी ए दिल आज सर ए शाम बहुत है, तौहीन ए मोहब्बत हैं मोहब्बत में ये शिकवे लगता है अभी हुस्न ए तलब ख़ाम बहुत है, बेवजह मुझे बेवफ़ा कहते तो हो लेकिन तुम पर भी इसी क़िस्म का इल्ज़ाम बहुत है, नादान रह ए इश्क़ को आसान न समझें इस राह में कठिनाई ब हर गाम बहुत है, इस शौक़ अदाओं को कोई कुछ नहीं कहता चर्चा मेंरी उल्फ़त का सर ए आम बहुत है, कुछ आ ही गया दोस्त का दुश्मन का सलीक़ा एहसान तेरा गर्दिश ए अय्याम बहुत है, अफ़्कार ए ज़माना कभी अफ़्कार ए मोहब्बत है ज़िंदगी थोड़ी सी मगर काम बहुत है, ऐ मौज सुकूँ बख़्श हैं अमवाज ए मोहब्बत आग़ोश में तूफ़ाँ के भी आराम बहुत है..!! - [जब हम हुदूद ए दैर ओ हरम से गुज़र गए](https://hindigazals.com/jab-ham-hudu-e/): जब हम हुदूद ए दैर ओ हरम से गुज़र गए हर सम्त उन का जल्वा अयाँ था जिधर गए, इस तरह वो निगाह ए करम आज कर गए दिल को सुरूर ए बादा ए उलफ़त से भर गए, वो हम को अपने दिल के ही अंदर निहाँ मिला जिस की तलाश करते हुए दर ब दर गए, कुछ अहल ए ज़र्फ़ देखते हैं उस के नूर को महरूम दीदियों को बहुत दीदा वर गए, दिल ले गया हमें फिर उसी बेवफ़ा के पास जाना नहीं था हम को जहाँ हम मगर गए, वो आ गए तो जल उठे उम्मीद के चराग़ वो हंस दिए तो बज़्म में मोती बिखर गए, आँखों में अश्क ए ग़म लिए हम वक़्त ए अल्विदा नज़रों से उन के साथ ता हद्द ए नज़र गए, देखा हमें तो गर्म निगाही पिघल गई मिज़्गाँ के तीर भौं की कमाँ से उतर गए, उन के मज़ीद वादों पे कैसे यक़ीन हो ? - [दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले](https://hindigazals.com/dil-me-bando-ke/): दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले, राम के राज की तस्वीर थी अपनी धरती मसलक ए फ़िक्र ओ अमल उन्स ओ वफ़ा था पहले, एक इंसान से बेवजह हो इंसान को बैर ये वतीरा कभी देखा न सुना था पहले, हिंदू ओ मुस्लिम ओ ईसाई ओ सिख मेल से थे आपसी प्रेम का उल्फ़त का मज़ा था पहले, क़ौमी यकजेहती का आदर्श था ये भारतवर्ष हम ने पैग़ाम ए विला सब को दिया था पहले, बादशाह और गदा सब के बराबर थे हुक़ूक़ न्याय में कोई भी छोटा न बड़ा था पहले, रास्तगोई थी यहाँ ग़ैर मुक़फ़्फ़ल थे मकाँ देश में ऐसा भी एक दौर रहा था पहले, देश में फिर से मोहब्बत हो रवादारी हो काश आ जाए ज़माना जो रहा था पहले, मौजज़न रहता था तूफ़ान ए उख़ूवत ऐ मौज दिल में तूफ़ान मोहब्बत का बसा था पहले..!! - [कहाँ कहाँ न गई मेहरबान की ख़ुशबू](https://hindigazals.com/kahan-kahan-na-gayi/): कहाँ कहाँ न गई मेहरबान की ख़ुशबू ज़माने भर में है उर्दू ज़बान की ख़ुशबू, बदन से जिस घड़ी निकलेगी जान की ख़ुशबू मिलेगी ख़ाक में तब आन बान की ख़ुशबू, क़दम बहकते हैं जज़्बात के अँधेरों में तो खींच लाती है मुझ को मकान की ख़ुशबू, जो हक़ के वास्ते देना पड़े ज़माने में अजीब होती है इस इम्तिहान की ख़ुशबू, यहाँ पे प्यार है यकजेहती भाई चारा है बड़ी ही ख़ूब है हिन्दोस्तान की ख़ुशबू, जवान होंगे जो साज़िश की गोद में फ़ित्ने कहाँ से आएगी अम्न ओ अमान की ख़ुशबू, वफ़ा ख़ुलूस दियानत हया सदाक़त प्यार निसार हम भी लुटाते हैं शान की ख़ुशबू..!! - [हर फ़ित्ना ओ तफ़रीक़ से बेज़ार हैं हम लोग](https://hindigazals.com/har-fitna-o-tafriq/): हर फ़ित्ना ओ तफ़रीक़ से बेज़ार हैं हम लोग साइल हैं मोहब्बत के तलबगार हैं हम लोग, हिन्दू न मुसलमान न ईसाई न सिख हैं इस मुल्क की तहज़ीब के मीनार हैं हम लोग, तामीर ए गुलिस्ताँ में लहू सब का है शामिल है फ़ख़्र कि इस मुल्क के मेमार हैं हम लोग, तफ़रीक़ ओ तअस्सुब के जो हामी हैं अभी तक अब उन के लिए बरसर ए पैकार हैं हम लोग, जो बात कही जब भी सर ए दार कही है ग़द्दार नहीं साहिब ए किरदार हैं हम लोग, तक़्सीम हमें करने की जुरअत भी न करना ऐ फ़ित्नागरो अज़्म की दीवार हैं हम लोग, हम ने ही जिन्हें रस्म ए वफ़ादारी सिखाई अब वो हमें कहने लगे ग़द्दार हैं हम लोग, मज़हब न किसी ज़ात न सरहद से है मतलब मज़लूम कोई भी हो मददगार हैं हम लोग, यकजेहती की ताक़त पे तरब नाज़ है हम को वक़्त आने दो दिखलाएँगे तैयार हैं हम लोग..!! - [मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान ?](https://hindigazals.com/musalmaan-aur-hindu-ki/): मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान ? - [मुश्किल में है जान बहुत](https://hindigazals.com/mushkil-me-hai-jaan/): पर मरना है आसान बहुत..!! - [अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा](https://hindigazals.com/agar-hai-manzar-ye/): अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा तो आ लिपटिए गले से ऐ जाँ झमक से कर झप चराग़ ठंडा, हम और तुम जाँ अब इस क़दर तो मोहब्बतों में हैं एक तन मन लगाया तुम ने जबीं पे संदल हुआ हमारा दिमाग़ ठंडा, लबों से लगते ही हो गई थी तमाम सर्दी दिल-ओ-जिगर में दिया था साक़ी ने रात हम को कुछ ऐसे मय का अयाग़ ठंडा, दरख़्त भीगे हैं कल के मेंह से चमन चमन में भरा है पानी जो सैर कीजे तो आज साहब अजब तरह का है बाग़ ठंडा, वही है कामिल नज़ीर इस जा वही है रौशन दिल ऐ अज़ीज़ो हवा से दुनिया की जिस के दिल का न होवे हरगिज़ चराग़ ठंडा..!! - [लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में](https://hindigazals.com/lagta-nahin-hai-dil/): लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम ए ना पाएदार में, इन हसरतों से कह दो कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल ए दाग़दार में, काँटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़बाँ ये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में, बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल ए बहार में, कितना है बद-नसीब ज़फ़र दफ़्न के लिए दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू ए यार में..!! - [कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया](https://hindigazals.com/koshish-ke-bavjood-ye/): कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया, छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था आग़ाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया, उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए दहशत गरों के हाथ में इस्लाम रह गया, उस का क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया, अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया..!! - [कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है](https://hindigazals.com/koi-hindu-koi-muslim/): कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ-ख़ार न थीं पहले इबादत-गाहें ये अक़ीदे हैं कि इंसान की तन्हाई है, तीन चौथाई से ज़ाइद हैं जो आबादी में उन के ही वास्ते हर भूक है महँगाई है, देखे कब तलक बाक़ी रहे सज-धज उस की आज जिस चेहरा से तस्वीर उतरवाई है, अब नज़र आता नहीं कुछ भी दुकानों के सिवा अब न बादल हैं न चिड़ियाँ हैं न पुरवाई है..!! - [कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा](https://hindigazals.com/kahan-aa-ke-rukne/): कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा, वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं दिल ए बे ख़बर मेंरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा, मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में तेरी आस तेरे गुमान में सबा कह गई मेंरे कान में मेंरे साथ आ उसे भूल जा, किसी आँख में नहीं अश्क ए ग़म तेरे बअ'द कुछ भी नहीं है कम तुझे ज़िंदगी ने भुला दिया तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा, कहीं चाक ए जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहीं कि शहीद ए राह ए मलाल का नहीं ख़ूँ बहा उसे भूल जा, क्यूँ अटा हुआ है ग़ुबार में ग़म ए ज़िंदगी के फ़िशार में वो जो दर्द था तेरे बख़्त में सो वो हो गया उसे भूल जा, तुझे चाँद बन के मिला था जो तेरे साहिलों पे खिला था जो वो था एक दरिया विसाल का सो उतर गया उसे भूल जा..!! - [चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है](https://hindigazals.com/chaand-ka-khwab-ujaalo/): चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है तू जिधर हो के गुज़र जाए ख़बर लगता है, उस की यादों ने उगा रखे हैं सूरज इतने शाम का वक़्त भी आए तो सहर लगता है, एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरत उम्र भर आँख की क़िस्मत में सफ़र लगता है, मैं नज़र भर के तेरे जिस्म को जब देखता हूँ पहली बारिश में नहाया सा शजर लगता है, बेसहारा था बहुत प्यार कोई पूछता क्या तू ने काँधे पे जगह दी है तो सर लगता है, तेरी क़ुर्बत के ये लम्हे उसे रास आएँ क्या सुब्ह होने का जिसे शाम से डर लगता है..!! - [शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं](https://hindigazals.com/sham-tak-subah-ki/): शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं, फिर वही तल्ख़ी ए हालात मुक़द्दर ठहरी नश्शे कैसे भी हों कुछ दिन में उतर जाते हैं, इक जुदाई का वो लम्हा कि जो मरता ही नहीं लोग कहते थे कि सब वक़्त गुज़र जाते हैं, घर की गिरती हुई दीवारें ही मुझ से अच्छी रास्ता चलते हुए लोग ठहर जाते हैं, हम तो बेनाम इरादों के मुसाफ़िर हैं वसीम कुछ पता हो तो बताएँ कि किधर जाते हैं..!! - [ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है](https://hindigazals.com/zara-saa-qatara-kahin/): ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है समुंदरों ही के लहजे में बात करता है, खुली छतों के दिए कब के बुझ गए होते कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है, शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं किसी का कुछ न बिगाड़ो तो कौन डरता है, ये देखना है कि सहरा भी है समुंदर भी वो मेरी तिश्ना-लबी किस के नाम करता है, तुम आ गए हो तो कुछ चाँदनी सी बातें हों ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है, ज़मीं की कैसी वकालत हो फिर नहीं चलती जब आसमाँ से कोई फ़ैसला उतरता है..!! - [दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता](https://hindigazals.com/dukh-apna-agar-hum/): दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता, पहुँचा है बुज़ुर्गों के बयानों से जो हम तक क्या बात हुई क्यूँ वो ज़माना नहीं आता, मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पाया उस को भी मुझे छोड़ के जाना नहीं आता, इस छोटे ज़माने के बड़े कैसे बनोगे लोगों को जब आपस में लड़ाना नहीं आता, ढूँढे है तो पलकों पे चमकने के बहाने आँसू को मिरी आँख में आना नहीं आता, तारीख़ की आँखों में धुआँ हो गए ख़ुद ही तुम को तो कोई घर भी जलाना नहीं आता..!! - [वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता](https://hindigazals.com/wo-mere-ghar-nahin/): वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से तअ'ल्लुक़ मर नहीं जाता, बुरे अच्छे हों जैसे भी हों सब रिश्ते यहीं के हैं किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नहीं जाता, घरों की तरबियत क्या आ गई टीवी के हाथों में कोई बच्चा अब अपने बाप के ऊपर नहीं जाता, खुले थे शहर में सौ दर मगर एक हद के अंदर ही कहाँ जाता अगर मैं लौट के फिर घर नहीं जाता, मोहब्बत के ये आँसू हैं उन्हें आँखों में रहने दो शरीफ़ों के घरों का मसअला बाहर नहीं जाता, वसीम उस से कहो दुनिया बहुत महदूद है मेरी किसी दर का जो हो जाए वो फिर दर दर नहीं जाता..!! - [अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे](https://hindigazals.com/apne-chehre-se-jo/): अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे ? घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो कि इस घर को बचाएँ कैसे ? - [क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता](https://hindigazals.com/kya-dukh-hai-samundar/): क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता, तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस में तेरी क्या हर शख़्स मेंरा साथ निभा भी नहीं सकता, प्यासे रहे जाते हैं ज़माने के सवालात किस के लिए ज़िंदा हूँ बता भी नहीं सकता, घर ढूँढ रहे हैं मेंरा रातों के पुजारी मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता, वैसे तो एक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता..!! - [मोहब्बत ना समझ होती है समझाना ज़रूरी है](https://hindigazals.com/mohabbat-na-samajh-hoti/): मोहब्बत ना समझ होती है समझाना ज़रूरी है जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना ज़रूरी है, उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है, नई उम्रों की ख़ुद मुख़्तारियों को कौन समझाए कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है, थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ा मंद शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है, बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मोहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है, सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है, मेंरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बाद भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है..!! - [अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा](https://hindigazals.com/apne-har-har-lafz/): अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा, तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं मैं गिरा तो मसअला बन कर खड़ा हो जाऊँगा, मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा, सारी दुनिया की नज़र में है मेंरा अहद ए वफ़ा एक तेरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊँगा..?? - [इन्सान हूँ इंसानियत की तलब है](https://hindigazals.com/insan-hoon-insaniyat-ki/): पर शुक्र ए ख़ुदा है गुनाहगार नहीं हूँ..!! - [मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने](https://hindigazals.com/mohabbat-tark-ki-mai/): मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैं ने, अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने, उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खो कर जी लिया मैं ने, बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने..!! - [दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ](https://hindigazals.com/door-rah-kar-na/): दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ, एक मुद्दत से तमन्ना थी तुम्हें छूने की आज बस में नहीं जज़्बात क़रीब आ जाओ, सर्द झोंकों से भड़कते हैं बदन में शो'ले जान ले लेगी ये बरसात क़रीब आ जाओ, इस क़दर हम से झिजकने की ज़रूरत क्या है ज़िंदगी भर का है अब साथ क़रीब आ जाओ..!! - [देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से](https://hindigazals.com/dekha-hai-zindagi-ko/): देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से, ऐ रूह-ए-अस्र जाग कहाँ सो रही है तू आवाज़ दे रहे हैं पयम्बर सलीब से, इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से, हर गाम पर है मजमा-ए-उश्शाक़ मुंतज़िर मक़्तल की राह मिलती है कू-ए-हबीब से, इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से..!! - [मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी](https://hindigazals.com/milti-hai-zindagi-me/): मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी, शर्मा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर लाती है ऐसे मोड़ पे क़िस्मत कभी कभी, खुलते नहीं हैं रोज़ दरीचे बहार के आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी कभी, तन्हा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते पेश आएगी किसी की ज़रूरत कभी कभी, फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी..!! - [हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें](https://hindigazals.com/har-tarah-ke-zajbat/): हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें शबनम कभी शो'ला कभी तूफ़ान हैं आँखें, आँखों से बड़ी कोई तराज़ू नहीं होती तुलता है बशर जिस में वो मीज़ान हैं आँखें, आँखें ही मिलाती हैं ज़माने में दिलों को अंजान हैं हम तुम अगर अंजान हैं आँखें, लब कुछ भी कहें इस से हक़ीक़त नहीं खुलती इंसान के सच झूट की पहचान हैं आँखें, आँखें न झुकीं तेरी किसी ग़ैर के आगे दुनिया में बड़ी चीज़ मिरी जान! - [तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो](https://hindigazals.com/tum-apna-ranj-o/): तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो, ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में बुरा क्या है अगर ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो, मैं देखूँ तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो, वो दिल जो मैं ने माँगा था मगर ग़ैरों ने पाया है बड़ी शय है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो..!! - [चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है](https://hindigazals.com/chehre-pe-khushi-chha/): चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है, तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है, हम पास से तुम को क्या देखें तुम जब भी मुक़ाबिल होते हो बेताब निगाहों के आगे पर्दा सा ज़रूर आ जाता है, जब तुम से मोहब्बत की हम ने तब जा के कहीं ये राज़ खुला मरने का सलीक़ा आते ही जीने का शुऊ'र आ जाता है..!! - [तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम](https://hindigazals.com/tang-aa-chuke-hai/): तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम, मायूसी-ए-मआल-ए-मोहब्बत न पूछिए अपनों से पेश आए हैं बेगानगी से हम, लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम, उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले गो दब गए हैं बार-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी से हम, गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम, अल्लाह-रे फ़रेब-ए-मशिय्यत कि आज तक दुनिया के ज़ुल्म सहते रहे ख़ामुशी से हम..!! - [ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा](https://hindigazals.com/ye-zulf-agar-khul/): ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा, जिस तरह से थोड़ी सी तिरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा, दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा, वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा..!! - [मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया](https://hindigazals.com/main-zindagi-ka-saath/): मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया, बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया, जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया, ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया..!! - [कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया](https://hindigazals.com/kabhi-khud-pe-kabhi/): कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया, हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया ? - [अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें](https://hindigazals.com/ab-ahal-e-dard/): अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें, फ़रेब खा के उन आँखों का कब तलक ऐ दिल शराब ए ख़ाम पिएँ रक़्स ए ना तमाम करें, ग़म ए हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तेरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें, न माँगूँ बादा ए गुल गूँ से भीख मस्ती की अगर तेरे लब ए लालीं मेंरा ये काम करें, न देखें दैर ओ हरम सू ए रह रवान ए हयात ये क़ाफ़िले तो न जाने कहाँ क़याम करें ? - [दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ](https://hindigazals.com/dushman-ki-dosti-hai/): दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के साथ, सर पर हवा ए ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ, किस ने कहा कि टूट गया ख़ंजर ए फ़रंग सीने पे ज़ख़्म ए नौ भी है दाग़ ए कुहन के साथ, झोंके जो लग रहे हैं नसीम ए बहार के जुम्बिश में है क़फ़स भी असीर ए चमन के साथ, मजरूह क़ाफ़िले की मेंरे दास्ताँ ये है रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ..!! - [मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है](https://hindigazals.com/mujh-se-kaha-jibril/): मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए दिल है बाक़ी सब गुमराही है, वो जो हुए फ़िरदौस बदर तक़्सीर थी वो आदम की मगर मेरा अज़ाब ए दर बदरी मेरी ना कर्दा गुनाही है, संग तो कोई बढ़ के उठाओ शाख़ ए समर कुछ दूर नहीं जिस को बुलंदी समझे हो उन हाथों की कोताही है, फिर कोई मंज़र फिर वही गर्दिश क्या कीजे ऐ कू ए निगार मेरे लिए ज़ंजीर ए गुलू मेरी आवारा निगाही है, बहर ए ख़ुदा ख़ामोश रहो बस देखते जाओ अहल ए नज़र क्या लग़ज़ीदा क़दम हैं उस के क्या दुज़दीदा निगाही है, दीद के क़ाबिल है तो सही मजरूह तेरी मस्ताना रवी गर्द ए हवा है रख़्त ए सफ़र रस्ते का शजर हमराही है..!! - [रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह](https://hindigazals.com/rahte-the-kabhi-jin/): रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह बैठे हैं उन्ही के कूचे में हम आज गुनहगारों की तरह, दावा था जिन्हें हमदर्दी का ख़ुद आ के न पूछा हाल कभी महफ़िल में बुलाया है हम पे हँसने को सितमगारों की तरह, बरसों के सुलगते तुम मन पर अश्कों के तो छींटे दे न सके तपते हुए दिल के ज़ख़्मों पर बरसे भी तो अंगारों की तरह, सौ रूप भरे जीने के लिए बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिए ठोकर न लगाना हम ख़ुद हैं गिरती हुई दीवारों की तरह..!! - [मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते](https://hindigazals.com/masarraton-ko-ye-ahal/): मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो देते, कहाँ वो शब कि तेरे गेसुओं के साए में ख़याल ए सुब्ह से हम आस्तीं भिगो देते, बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते, बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना किनारे वाले सफ़ीना मेंरा डुबो देते, जो देखते मेंरी नज़रों पे बंदिशों के सितम तो ये नज़ारे मेंरी बेबसी पे रो देते, कभी तो यूँ भी उमड़ते सरिश्क ए ग़म मजरूह कि मेरे ज़ख़्म ए तमन्ना के दाग़ धो देते..!! - [ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें](https://hindigazals.com/ye-ruke-ruke-se/): ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें, कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश ए दश्त ए रहबर कहीं जगमगा उठी हैं मेंरे नक़्श ए पा से राहें, तेरे ख़ानुमाँ ख़राबों का चमन कोई न सहरा ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इन की बारगाहें, कभी जादा ए तलब से जो फिरा हूँ दिल शिकस्ता तेरी आरज़ू ने हँस कर वहीं डाल दी हैं बाँहें, मेंरे अहद में नहीं है ये निशान ए सरबुलंदी ये रंगे हुए अमामे ये झुकी झुकी कुलाहें..!! - [किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे](https://hindigazals.com/kisi-ne-bhi-to/): किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर के मुझे, सबा भी लाई न कोई पयाम अपनों का सुना रही है फ़साने इधर उधर के मुझे, मुआफ़ कीजे जो मैं अजनबी हूँ महफ़िल में कि रास्ते नहीं मालूम इस नगर के मुझे, वो दर्द है कि जिसे सह सकूँ न कह पाऊँ मिलेगा चैन तो अब जान से गुज़र के मुझे..!! - [मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए](https://hindigazals.com/mujhe-sahal-ho-gai/): मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया कि चराग़ राह में जल गए, वो लजाए मेरे सवाल पर कि उठा सके न झुका के सर उड़ी ज़ुल्फ़ चेहरे पे इस तरह कि शबों के राज़ मचल गए, वही बात जो वो न कह सके मेंरे शेर ओ नग़्मा में आ गई वही लब न मैं जिन्हें छू सका क़दह ए शराब में ढल गए, वही आस्ताँ है वही जबीं वही अश्क है वही आस्तीं दिल ए ज़ार तू भी बदल कहीं कि जहाँ के तौर बदल गए, तुझे चश्म ए मस्त पता भी है कि शबाब गर्मी ए बज़्म है तुझे चश्म ए मस्त ख़बर भी है कि सब आबगीने पिघल गए, मेंरे काम आ गईं आख़िरश यही काविशें यही गर्दिशें बढ़ीं इस क़दर मेंरी मंज़िलें कि क़दम के ख़ार निकल गए..!! - [आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख](https://hindigazals.com/aah-e-jaan-soz/): आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न देख, हादसे और भी गुज़रे तेरी उल्फ़त के सिवा हाँ मुझे देख मुझे अब मेरी तस्वीर न देख, ये ज़रा दूर पे मंज़िल ये उजाला ये सुकूँ ख़्वाब को देख अभी ख़्वाब की ताबीर न देख, देख ज़िंदाँ से परे रंग ए चमन जोश ए बहार रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख, कुछ भी हूँ फिर भी दुखे दिल की सदा हूँ नादाँ मेरी बातों को समझ तल्ख़ी ए तक़रीर न देख, वही मजरूह वही शाइर ए आवारा मिज़ाज कोई उठा है तेरी बज़्म से दिलगीर न देख..!! - [ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो](https://hindigazals.com/ae-dil-mujhe-aisi/): ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न हो, जा कर कहीं खो जाऊँ मैं नींद आए और सो जाऊँ मैं दुनिया मुझे ढूँढे मगर मेरा निशाँ कोई न हो, उल्फ़त का बदला मिल गया वो ग़म लुटा वो दिल गया चलना है सब से दूर दूर अब कारवाँ कोई न हो..!! - [तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेंरा हाल है](https://hindigazals.com/tujhe-kya-sunaaoon-main/): तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेंरा हाल है तेरी एक निगाह की बात है मेंरी ज़िंदगी का सवाल है, मेंरी हर ख़ुशी तेरे दम से है मेंरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है तेरे दर्द से रहे बे ख़बर मेंरे दिल की कब ये मजाल है, तेरे हुस्न पर है मेंरी नज़र मुझे सुब्ह शाम की क्या ख़बर मेंरी शाम है तेरी जुस्तुजू मेरी सुब्ह तेरा ख़याल है, मेंरे दिल जिगर में समा भी जा रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला ? - [कौन देखेगा भला इस में है रुस्वाई क्या](https://hindigazals.com/kaun-dekhega-bhala-is/): कौन देखेगा भला इस में है रुस्वाई क्या ख़्वाब में आने की भी तुम ने क़सम खाई क्या, उस का घर छोड़ के हम तो न किसी दर पे गए पर समझता है उसे वो बुत ए हरजाई क्या, सुनते ही जिस के हुई जान हवा तन से मेरे इस गली से ये ख़बर बाद ए सबा लाई क्या, वाह मैं और न आने को कहूँगा तौबा मैं तो हैराँ हूँ ये बात आप ने फ़रमाई क्या, बह चला चश्म से यकबार जो एक दरिया सा बैठे बैठे मुझे क्या जाने ये लहर आई क्या, हर्फ़ ए मतलब को मेंरे सुन के ब सद नाज़ कहा हम समझते नहीं बकता है तो सौदाई क्या, शैख़ जी हम तो हैं नादाँ पर उसे आने दो हम भी पूछेंगे हुई आप की दानाई क्या, कैफ़ियत महफ़िल ए ख़ूबाँ की न उस बिन पूछो उस को देखूँ न तो फिर दे मुझे दिखलाई क्या, आज दम अपना ठहरता नहीं क्या जानिए आह मस्लहत लोगों ने वाँ बैठ के ठहराई क्या, बर में वो शोख़ था और सैर ए शब ए माह थी रात अपने घर क्या कहें थी अंजुमन आराई क्या, पर गया सुब्ह से वो घर तो यही धड़का है देखें आज उस का एवज़ ले शब ए तन्हाई क्या, देखने का जो करूँ उस के मैं दावा जुरअत मुझ में जुरअत ये कहाँ और मेंरी बीनाई क्या..!! - [बदन को काटता है दुख, मलाल नोचते हैं](https://hindigazals.com/badan-ko-kaatta-hai/): बदन को काटता है दुख, मलाल नोचते हैं ये दर्द भेड़िए हैं और खाल नोचते हैं, अज़ाब ए हिज्र में आँखें उजड़ गईं जिनकी वो बेबसी है कि अपने अपने बाल नोचते हैं, यहाँ के लोगों की आदत है कूफ़ियों जैसी रिदायें छीनते हैं और छाल नोचते हैं, जवाज़ कौन सा दूँगी बिछड़ के लोगों को तुम्हारे बाद तो सबके सवाल नोचते हैं, तुम्हारी याद यूँ लेती हैं चुटकियां दिल में के जैसे प्यार से बच्चों के गाल नोचते हैं..!! - [कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है](https://hindigazals.com/kabhi-wo-haath-na/): कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है वो एक शख़्स जो सचमुच ख़ुदाओं जैसा है, हमारी शम ए तमन्ना भी जल के ख़ाक हुई हमारे शोलों का आलम चिताओं जैसा है, वो बस गया है जो आ कर हमारी साँसों में जभी तो लहजा हमारा दुआओं जैसा है, तुम्हारे बाद उजाले भी हो गए रुख़्सत हमारे शहर का मंज़र भी गाँवों जैसा है, वो एक शख़्स जो हम से है अजनबी अब तक ख़ुलूस उस का मगर आश्नाओं जैसा है, हमारे ग़म में वो ज़ुल्फ़ें बिखर गईं नासिर जभी तो आज का मौसम भी छाँवों जैसा है..!! - [ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए](https://hindigazals.com/ae-dost-kahin-tujh/): ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए इस मेरी तबाही में तेरा नाम न आए, ये दर्द है हमदम उसी ज़ालिम की निशानी दे मुझ को दवा ऐसी कि आराम न आए, काँधे पे उठाए हैं सितम राह ए वफ़ा के शिकवा मुझे तुम से है कि दो गाम न आए, लगता है कि फैलेगी शब ए ग़म की सियाही आँसू मेरी पलकों पे सर ए शाम न आए, मैं बैठ के पीता रहूँ बस तेरी नज़र से हाथों में कभी मेरे कोई जाम न आए, बैठा हूँ दिया घर का जो नासिर मैं जला के ऐसा न हो फिर वो दिल ए नाकाम न आए..!! - [इश्क़ कर के देख ली जो बेबसी देखी न थी](https://hindigazals.com/ishq-kar-ke-dekh/): इश्क़ कर के देख ली जो बेबसी देखी न थी इस क़दर उलझन में पहले ज़िंदगी देखी न थी, ये तमाशा भी अजब है उन के उठ जाने के बाद मैंने दिन में इस से पहले तीरगी देखी न थी, आप क्या आए कि रुख़्सत सब अँधेरे हो गए इस क़दर घर में कभी भी रौशनी देखी न थी, आप से आँखें मिली थीं फिर न जाने क्या हुआ लोग कहते हैं कि ऐसी बेख़ुदी देखी न थी, मुझ को रुख़्सत कर रहे हैं वो अजब अंदाज़ से आँख में आँसू लबों पर ये हँसी देखी न थी, किस क़दर ख़ुश हूँ मैं नासिर उनको पा लेने के बाद ऐसा लगता है कभी ऐसी ख़ुशी देखी न थी..!! - [ज़िंदगी को न बना लें वो सज़ा मेरे बाद](https://hindigazals.com/zindagi-ko-na-bana/): ज़िंदगी को न बना लें वो सज़ा मेरे बाद हौसला देना उन्हें मेरे ख़ुदा मेरे बाद, कौन घूँघट को उठाएगा सितमगर कह के और फिर किस से करेंगे वो हया मेरे बाद, फिर मोहब्बत की ज़माने में न पुर्सिश होगी रोएगी सिसकियाँ ले ले के वफ़ा मेरे बाद, हाथ उठते हुए उन के न कोई देखेगा किस के आने की करेंगे वो दुआ मेरे बाद, किस क़दर ग़म है उन्हें मुझ से बिछड़ जाने का हो गए वो भी ज़माने से जुदा मेरे बाद, वो जो कहता था कि नासिर के लिए जीता हूँ उस का क्या जानिए क्या हाल हुआ मेरे बाद..!! - [जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है](https://hindigazals.com/jab-se-tu-ne/): जब से तू ने मुझे दीवाना बना रखा है संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रखा है, उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रखा है, पत्थरो आज मेंरे सर पे बरसते क्यूँ हो ? - [फूल जैसी है कभी ये ख़ार की मानिंद है](https://hindigazals.com/phool-jaisi-hai-kabhi/): फूल जैसी है कभी ये ख़ार की मानिंद है ज़िंदगी सहरा कभी गुलज़ार की मानिंद है, तुम क़लम की धार को कम मत समझना दोस्तो ये क़लम तो है मगर तलवार की मानिंद है, चार दिन के वास्ते सब को मिली है दहर में ज़िंदगी भी रेत की दीवार की मानिंद है, पास पैसा है नहीं फिर भी जहाँ में मस्त हूँ ज़िंदगी अपनी किसी फ़नकार की मानिंद है, ज़िंदगी किस वक़्त धोका दे दे अंबर क्या पता ? - [दिल की हर बात तेरी मुझ को बता देती है](https://hindigazals.com/dil-ki-har-baat/): दिल की हर बात तेरी मुझ को बता देती है तेरी ख़ामोश नज़र मुझ को सदा देती है, दूर रहना मुझे मंज़ूर नहीं है तुझ से ज़िंदगी साथ तेरे मुझ को मज़ा देती है, अपनी कुटिया के अँधेरे को मिटाऊँ कैसे ? - [ग़म ए उल्फ़त में डूबे थे उभरना भी ज़रूरी था](https://hindigazals.com/gam-e-ulfat-me/): ग़म ए उल्फ़त में डूबे थे उभरना भी ज़रूरी था हमें राह ए मोहब्बत से गुज़रना भी ज़रूरी था, हक़ीक़त सामने आई बहुत हैरत हुई मुझ को तेरे चेहरे से पर्दे का उतरना भी ज़रूरी था, हमें मंज़िल को पाना था तभी तो राह ए हस्ती में हमें पथरीले रस्तों से गुज़रना भी ज़रूरी था, लुटाते ही रहे जो कुछ भी अपने पास था यारो कि ख़ुशबू की तरह अपना बिखरना भी ज़रूरी था, हमें वो भूल बैठे हैं उन्हें फिर याद क्या करना उन्हें राह ए मोहब्बत में बिसरना भी ज़रूरी था, हमारी ज़िंदगी में हादसे होते रहे अंबर उन्हें सहते हुए अपना निखरना भी ज़रूरी था..!! - [अब ख़ाक तो किया है दिल को जला जला कर](https://hindigazals.com/ab-khaaq-to-kiya/): अब ख़ाक तो किया है दिल को जला जला कर करते हो इतनी बातें क्यूँ तुम बना बना कर ? - [हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें](https://hindigazals.com/hum-tujh-se-kis/): हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें दिल ही नहीं रहा है कि कुछ आरज़ू करें, मिट जाएँ एक आन में कसरत नुमाइयाँ हम आइने के सामने जब आ के हू करें, तर दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वुज़ू करें, सर ता क़दम ज़बान हैं जूँ शम्अ गो कि हम पर ये कहाँ मजाल जो कुछ गुफ़्तुगू करें, हर चंद आइना हूँ पर इतना हूँ ना क़ुबूल मुँह फेर ले वो जिस के मुझे रू ब रू करें, ने गुल को है सबात न हम को है एतिबार किस बात पर चमन हवस ए रंग ओ बू करें, है अपनी ये सलाह कि सब ज़ाहिदान ए शहर ऐ दर्द आ के बैअत ए दस्त ए सुबू करें..!! - [सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं](https://hindigazals.com/sar-me-sauda-bhi/): सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं लेकिन इस तर्क ए मोहब्बत का भरोसा भी नहीं, दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में लेकिन उस जल्वा गह ए नाज़ से उठता भी नहीं, मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त आह अब मुझ से तेरी रंजिश ए बेजा भी नहीं, एक मुद्दत से तेरी याद भी आई न हमें और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं, आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा आज ही ख़ातिर ए बीमार शकेबा भी नहीं, बात ये है कि सुकून दिल ए वहशी का मक़ाम कुंज ए ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ'त ए सहरा भी नहीं, अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं, आह ये मजमा ए अहबाब ये बज़्म ए ख़ामोश आज महफ़िल में फ़िराक़ ए सुख़न आरा भी नहीं, ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर ये भी सच है कि तेरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं, यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना ए इश्क़ मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं, फ़ितरत ए हुस्न तो मालूम है तुझ को हमदम चारा ही क्या है ब जुज़ सब्र सो होता भी नहीं, मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि फ़िराक़ है तेरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं..!! - [ज़िंदगी वादी ओ सहरा का सफ़र है क्यूँ है ?](https://hindigazals.com/zindagi-vaadi-o-sahra/): ज़िंदगी वादी ओ सहरा का सफ़र है क्यूँ है ? इतनी वीरान मेरी राह गुज़र है क्यूँ है ? तू उजाले की तरह आ के लिपट जा मुझ से एक अंधेरा सा इधर और उधर है क्यूँ है ? - [मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं](https://hindigazals.com/mutthi-bhar-logo-ke/): मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन ज़ंजीरें हैं, आज और कल की बात नहीं है सदियों की तारीख़ यही है हर आँगन में ख़्वाब हैं लेकिन चंद घरों में ताबीरें हैं, जब भी कोई तख़्त सजा है मेरा तेरा ख़ून बहा है दरबारों की शान ओ शौकत मैदानों की शमशीरें हैं, हर जंगल की एक कहानी वो ही भेंट वही क़ुर्बानी गूँगी बहरी सारी भेड़ें चरवाहों की जागीरें हैं..!! - [तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे](https://hindigazals.com/tanha-tanha-dukh-jhelenge/) - [अज़ीज़ो न पूछो कहाँ रह गया](https://hindigazals.com/azizo-na-pucho-kahan/): अज़ीज़ो न पूछो कहाँ रह गया जहाँ जी लगा बस वहाँ रह गया, जो रहना था बर्क़ ए तपाँ रह गया क़फ़स जल गया आशियाँ रह गया, हुआ मुंदमिल ज़ख़्म ए तीर ए नज़र मगर दिल पे उस का निशाँ रह गया, गया आशियाना ज़माना हुआ फ़क़त अब ग़म ए आशियाँ रह गया, ये दोनों भी मंज़िल पे पहुँचे मगर ग़ुबार उड़ गया कारवाँ रह गया, जहाँ कारवाँ का हुआ था क़ियाम वहाँ कारवाँ का निशाँ रह गया, इधर वहशत ए दिल मुझे ले उड़ी उधर होश दामन कशाँ रह गया, कहो बंदा परवर हो किस सोच में अभी क्या कोई इम्तिहाँ रह गया ? - [मुकम्मल मोहब्बत का दस्तूर देखा](https://hindigazals.com/muqammal-mohabbat-ka-dastur/): मुकम्मल मोहब्बत का दस्तूर देखा यहीं सारी दुनिया को मजबूर देखा, हर एक सम्त मैंने नया तूर देखा जिधर आँख उठाई उधर नूर देखा, फ़रेब आश्नाओं को मुख़्तार पाया सदाक़त पसंदों को मजबूर देखा, हर एक दौर के साथ दस्तूर बदला अटल एक क़ुदरत का दस्तूर देखा, क़दम राह ए उल्फ़त में रखते ही मैंने हुज़ूर अच्छे अच्छों को मजबूर देखा, जिन आँखों ने देखी हैं आँखें तुम्हारी हमेशा उन आँखों को मख़मूर देखा, किसी ने सर ए तूर दिल में किसी ने हर एक ने उसे ता ब मक़्दूर देखा, मोहब्बत के इक़बाल से हुस्न को भी मोहब्बत का मम्नून ओ मशकूर देखा, ख़ुदा की क़सम मैंने देखा जहाँ तक ख़ुदा के सिवा सब को मजबूर देखा, हुई बाद मुर्दन भी ऐ क़द्र हैरत जो बनते हुए रूह को हूर देखा..!! - [तेग़ ए जफ़ा को तेरी नहीं इम्तिहाँ से रब्त](https://hindigazals.com/teg-e-zafa-ko/): तेग़ ए जफ़ा को तेरी नहीं इम्तिहाँ से रब्त मेरी सुबुकसरी को है बार ए गराँ से रब्त, दुनिया को हम से काम न दुनिया से हम को काम ख़ातिर से तेरी रखते हैं सारे जहाँ से रब्त, उड़ते ही गर्द जाती है जो सू ए आसमाँ है कुछ न कुछ ज़मीन को भी आसमाँ से रब्त, इज़हार ए हाल के लिए सूरत सवाल है है गुफ़्तुगू से काम न हम को ज़बाँ से रब्त, चश्मे की तरह रहती हैं जारी मुदाम ये आँखों को हो गया है जो आब ए रवाँ से रब्त, बे रब्तियों ने क़द्र मिटाई जो रब्त की है गोश्त को भी अपने न अब उस्तुख़्वाँ से रब्त..!! - [ख़ामोश इस तरह से न जल कर धुआँ उठा](https://hindigazals.com/khamosh-is-tarah-se/): ख़ामोश इस तरह से न जल कर धुआँ उठा ऐ शम्अ कुछ तो बोल कभी तो ज़बाँ उठा, बुत बन के चुपके फ़ित्ने न यूँ मेरी जाँ उठा मुँह में अगर ज़बाँ है तो लुत्फ़ ए ज़बाँ उठा, है कोसों दूर मंज़िल ए अंजाम ए गुफ़्तुगू तेज़ी के साथ अपने क़दम ऐ ज़बाँ उठा, डर है यही कि कश्ती ए मज़मूँ न डूब जाए रह रह के इतनी मौजें न बहर ए ज़बाँ उठा, अब दौर में है रिंदों के पैमाना ए कलाम फिर आ गई बहार फिर अब्र ए ज़बाँ उठा, कर इस क़दर न ज़ौक़ ए तकल्लुम को शर्मसार अपना सर ए नियाज़ कभी तो ज़बाँ उठा, कहता है क़द्र देख के तेरे सुकूत को कुछ फ़ाएदा कलाम से भी ऐ ज़बाँ उठा..!! - [मुश्किल है पता चलना क़िस्सों से मोहब्बत का](https://hindigazals.com/mushkil-hai-pata-chalna/): मुश्किल है पता चलना क़िस्सों से मोहब्बत का अंदाज़ा मुसीबत में होता है मुसीबत का, है नज़अ के आलम में बीमार मोहब्बत का मुश्किल है सँभलना अब बिगड़ी हुई हालत का, अफ़सोस कि हम सो कर जागे भी तो कब जागे मरने पे खुला उक़्दा जीने की हक़ीक़त का, वो आए हैं ख़ुद अपने दीवाने को समझाने ऐ जज़्बा ए दिल देखा इक़बाल मोहब्बत का, ऐ चश्म ए हक़ीक़त बीं दिल की है बिसात इतनी एक छोटा सा टुकड़ा है आईना ए हसरत का, क्यूँ इश्क़ के झगड़े को ले जाता है उक़्बा में कर ख़ात्मा दुनिया में दुनिया की मुसीबत का, ऐ क़द्र हसीनों को मैं दिल से न क्यूँ चाहूँ ? - [है आम अज़ल ही से फ़ैज़ान मोहब्बत का](https://hindigazals.com/hai-aam-azal-hi/): है आम अज़ल ही से फ़ैज़ान मोहब्बत का इम्कान मुसल्लम है इम्कान मोहब्बत का, तोड़ा नहीं जा सकता पैमान मोहब्बत का नुक़सान ख़ुद अपना है नुक़सान मोहब्बत का, फिर उन की निगाहों से टकराई मेरी नज़रें फिर बढ़ने लगा दिल में तूफ़ान मोहब्बत का, एक एक तमन्ना में लाखों हैं तमन्नाएँ अरमानों की दुनिया है अरमान मोहब्बत का, इस वास्ते मुस्लिम की फ़ितरत में मोहब्बत है देता है सबक़ उसको क़ुरआन मोहब्बत का, बरबाद ए मोहब्बत की हालत है अजब हालत है बे सर ओ सामानी सामान मोहब्बत का, जज़्बात मोहब्बत के मैं लाख छुपाता हूँ करती हैं मेरी नज़रें एलान मोहब्बत का, गोया मेंरे सीने में मीज़ान ए मोहब्बत है यूँ दिल में जिगर में है पैकान मोहब्बत का, वो नूर का परतव है या हुस्न का परतव है है दीन मोहब्बत का ईमान मोहब्बत का, जो दर्द का हामिल है वो ज़ौक़ में कामिल है बेहिस को नहीं होता ईक़ान मोहब्बत का, इज्माल ये बेशक है तफ़्सील का आईना मज़मून पे हावी है उन्वान मोहब्बत का, हैं उस के तसव्वुर को घेरे हुए अरमाँ सब रहता है फ़क़ीरों में सुल्तान मोहब्बत का, आती है नज़र उस में इख़्लास की हर सूरत आईना है आईना इंसान मोहब्बत का, नैरंग मोहब्बत का हर शेर से ज़ाहिर है है क़द्र का दीवाँ भी दीवान मोहब्बत का..!! - [कुछ देर काली रात के पहलू में लेट के](https://hindigazals.com/kuch-der-kaali-raat/): कुछ देर काली रात के पहलू में लेट के लाया हूँ अपने हाथों में जुगनू समेट के, दो चार दाँव खेल के वो सर्द पड़ गया अब क्या करोगे ताश के पत्तों को फेट के, उस साँवले से जिस्म को देखा ही था कि बस घुलने लगे ज़बाँ पे मज़े चाकलेट के, जैसे कोई लिबास न हो उस के जिस्म पर यूँ रास्ता चले है बदन को समेट के, मैं उस के इंतिज़ार में बैठा ही रह गया कपड़ों में रख गया वो बदन को लपेट के, हर फ़लसफ़े को वक़्त ने ऐसे मिटा दिया जैसे कोई नुक़ूश मिटा दे सलेट के, वो हँस रहा था दूर खड़ा और चंद लोग ले जा रहे थे उस को कफ़न में लपेट के..!! - [कर्ब चेहरे से मह ओ साल का धोया जाए](https://hindigazals.com/karb-chehre-se-mah/): कर्ब चेहरे से मह ओ साल का धोया जाए आज फ़ुर्सत से कहीं बैठ के रोया जाए, फिर किसी नज़्म की तम्हीद उठाई जाए फिर किसी जिस्म को लफ़्ज़ों में समोया जाए, कुछ तो हो रात की सरहद में उतरने की सज़ा गर्म सूरज को समुंदर में डुबोया जाए, बज गए रात के दो अब तो वो आने से रहे आज अपना ही बदन ओढ़ के सोया जाए, नर्म धागे को मसलता है कोई चुटकी में सख़्त हो जाए तो मोती में पिरोया जाए, इतनी जल्दी तो बदलते नहीं होंगे चेहरे गर्द आलूद है आईने को धोया जाए, मौत से ख़ौफ़ज़दा जीने से बेज़ार हैं लोग इस अलमिये पे हँसा जाए कि रोया जाए..?? - [तुम से मिलते ही बिछड़ने के वसीले हो गए](https://hindigazals.com/tum-se-milte-hi/): तुम से मिलते ही बिछड़ने के वसीले हो गए दिल मिले तो जान के दुश्मन क़बीले हो गए, आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गए मेरी आँखें सुर्ख़ तेरे हाथ पीले हो गए, अब तेरी यादों के निश्तर भी हुए जाते हैं कुंद हमको कितने रोज़ अपने ज़ख़्म छीले हो गए, कब की पत्थर हो चुकी थीं मुंतज़िर आँखें मगर छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए, अब कोई उम्मीद है शाहिद न कोई आरज़ू आसरे टूटे तो जीने के वसीले हो गए..!! - [नींद से आँख खुली है अभी देखा क्या है](https://hindigazals.com/neend-se-aankh-khuli/): नींद से आँख खुली है अभी देखा क्या है देख लेना अभी कुछ देर में दुनिया क्या है, बाँध रखा है किसी सोच ने घर से हम को वर्ना अपना दर ओ दीवार से रिश्ता क्या है, रेत की ईंट की पत्थर की हो या मिट्टी की किसी दीवार के साए का भरोसा क्या है ? - [ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया](https://hindigazals.com/zamin-pe-chal-na/): ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया कटा के पर को परिंदा उड़ान से भी गया, किसी के हाथ से निकला हुआ वो तीर हूँ जो हदफ़ को छू न सका और कमान से भी गया, भुला दिया तो भुलाने की इंतिहा कर दी वो शख़्स अब मेंरे वहम ओ गुमान से भी गया, तबाह कर गई पक्के मकान की ख़्वाहिश मैं अपने गाँव के कच्चे मकान से भी गया, पराई आग में कूदा तो क्या मिला शाहिद उसे बचा न सका अपनी जान से भी गया..!! - [हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है](https://hindigazals.com/hume-barbadiyon-pe-muskurana/): हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है अँधेरी रात में दीपक जलाना ख़ूब आता है, ग़लत फ़हमी तुम्हें कुछ और आता हो न आता हो अचानक आग पानी में लगाना ख़ूब आता है, ज़रा सी बात पे दीवार खिंचवाने लगा है वो उसे भी राई का पर्बत बनाना ख़ूब आता है, तेरे हर झूठ को सच मान लेते हैं हमेशा हम हमें भी रस्म ए उल्फ़त को निभाना ख़ूब आता है, किसी के सामने सर को झुकाते हम नहीं लेकिन ख़ुदा के सामने सर को झुकाना ख़ूब आता है, तुम्हारे ग़म ने ही बख़्शी है हम को ये हुनर मंदी हमें अश्को को अब मोती बनाना ख़ूब आता है..!! - [मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली](https://hindigazals.com/mujhe-talash-thi-jis/): मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी तलाश में पैरों में पड़ गए छाले मगर ऐ मंज़िल ए मक़्सूद तू कभी न मिली, ख़ुशी से दोस्ती मेरी भी थी मगर एक दिन ख़फ़ा हुई वो कुछ ऐसी कि फिर कभी न मिली, वो जिस चराग़ के दम से मकान रौशन था उसी चराग़ को ख़ुद अपनी रौशनी न मिली, तुम्हारे हिज्र में ऐसा भी वक़्त आया है बदन टटोल के देखा तो नब्ज़ ही न मिली, ये जिस्म है कि फ़क़त शोर गुल है साँसों का ये आँख है कि कोई ख़्वाब देखती न मिली, दिल ओ दिमाग़ पे हावी रहा ग़म ए दौराँ ख़ुशी के साथ भी रह कर मुझे ख़ुशी न मिली, मुझे न मिल सका सूरज मेरे मुकद्दर का तेरा नसीब तुझे मेरी चाँदनी न मिली..!! - [जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते](https://hindigazals.com/jale-chirag-bujhaane-ki/): जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते अब आ गए हो तो जाने की ज़िद नहीं करते, किसी की आँख में आँसू हमें पसंद नहीं दिलों के ज़ख़्म दिखाने की ज़िद नहीं करते, तुम्हारे नाम का भी ज़िक्र हो न जाए कहीं ग़ज़ल के शेर सुनाने की ज़िद नहीं करते, हमारे साए भी रस्ते में छोड़ जाते है हमारा साथ निभाने की ज़िद नहीं करते, ख़ला में कोई इमारत कभी नहीं टिकती वहाँ मकान बनाने की ज़िद नहीं करते, ये शहर ए संग है पत्थर के लोग रहते हैं यहाँ पे फ़ूल खिलाने की ज़िद नहीं करते, ज़मीन जैसा कहीं चाँद भी न हो जाए ज़मीं पे चाँद को लाने की ज़िद नहीं करते..!! - [उफ़ुक़ अगरचे पिघलता दिखाई पड़ता है](https://hindigazals.com/ufooq-agarche-pighalta-dikhaai/): उफ़ुक़ अगरचे पिघलता दिखाई पड़ता है मुझे तो दूर सवेरा दिखाई पड़ता है, हमारे शहर में बे चेहरा लोग बसते हैं कभी कभी कोई चेहरा दिखाई पड़ता है, चलो कि अपनी मोहब्बत सभी को बाँट आएँ हर एक प्यार का भूखा दिखाई पड़ता है, जो अपनी ज़ात से एक अंजुमन कहा जाए वो शख़्स तक मुझे तन्हा दिखाई पड़ता है, न कोई ख़्वाब न कोई ख़लिश न कोई ख़ुमार ये आदमी तो अधूरा दिखाई पड़ता है, लचक रही हैं शुआओं की सीढ़ियाँ पैहम फ़लक से कोई उतरता दिखाई पड़ता है, चमकती रेत पे ये ग़ुस्ल ए आफ़्ताब तेरा बदन तमाम सुनहरा दिखाई पड़ता है..!! - [जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो](https://hindigazals.com/jism-ki-har-baat-hai/): जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो हम भी कर सकते हैं ऐसी शायरी ये मत कहो, उस नज़र की उस बदन की गुनगुनाहट तो सुनो एक सी होती है हर एक रागनी ये मत कहो, हम से दीवानों के बिन दुनिया सँवरती किस तरह अक़्ल के आगे है क्या दीवानगी ये मत कहो, कट सकी हैं आज तक सोने की ज़ंजीरें कहाँ हम भी अब आज़ाद हैं यारो अभी ये मत कहो, पाँव इतने तेज़ हैं उठते नज़र आते नहीं आज थक कर रह गया है आदमी ये मत कहो, जितने वादे कल थे उतने आज भी मौजूद हैं उन के वादों में हुई है कुछ कमी ये मत कहो, दिल में अपने दर्द की छिटकी हुई है चाँदनी हर तरफ़ फैली हुई है तीरगी ये मत कहो..!! - [परेशाँ रात सारी है सितारो तुम तो सो जाओ](https://hindigazals.com/pareshaan-raat-saari-hai/): परेशाँ रात सारी है सितारो तुम तो सो जाओ सुकूत ए मर्ग तारी है सितारो तुम तो सो जाओ, हँसो और हँसते हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में हमीं पे रात भारी है सितारो तुम तो सो जाओ, हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा यही क़िस्मत हमारी है सितारो तुम तो सो जाओ, तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया ये बाज़ी हम ने हारी है सितारो तुम तो सो जाओ, कहे जाते हो रो रो कर हमारा हाल दुनिया से ये कैसी राज़दारी है सितारो तुम तो सो जाओ, हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे अभी कुछ बे क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ..!! - [तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मेरे दिल से बोझ उतार दो](https://hindigazals.com/tumhen-jab-kabhi-milen/): तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मेरे दिल से बोझ उतार दो मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो, मुझे अपने रूप की धूप दो कि चमक सकें मेरे ख़ाल ओ ख़द मुझे अपने रंग में रंग दो मेरे सारे रंग उतार दो, किसी और को मेरे हाल से न ग़रज़ है कोई न वास्ता मैं बिखर गया हूँ समेट लो मैं बिगड़ गया हूँ सँवार दो..!! - [तेरे आने का धोखा सा रहा है](https://hindigazals.com/tere-aane-ka-dhokha/): तेरे आने का धोखा सा रहा है दिया सा रात भर जलता रहा है, अजब है रात से आँखों का आलम ये दरिया रात भर चढ़ता रहा है, सुना है रात भर बरसा है बादल मगर वो शहर जो प्यासा रहा है, वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का जो पिछली रात से याद आ रहा है, किसे ढूँढोगे इन गलियों में नासिर चलो अब घर चलें दिन जा रहा है..!! - [समंद ए शौक़ पे ख़त उस का ताज़ियाना हुआ](https://hindigazals.com/samand-e-shauq-pe/): समंद ए शौक़ पे ख़त उस का ताज़ियाना हुआ मिले हुए भी तो उस से हमें ज़माना हुआ, ये सोचता हूँ कि आख़िर वो मस्लहत क्या थी कि जिस से तर्क ए तअल्लुक़ का एक बहाना हुआ, अब आ भी जाओ कि एक दूसरे में गुम हो जाएँ विसाल ओ हिज्र का क़िस्सा बहुत पुराना हुआ, वो जिस से मिलने की दिल में तड़प ज़्यादा है हमारा उस से तआरुफ़ भी ग़ाएबाना हुआ, सदाक़तों पे यक़ीं कोई किस तरह कर ले ? - [कभी सुकूँ तो कभी इज़्तिराब जैसा है](https://hindigazals.com/kabhi-sukoon-to-kabhi/): कभी सुकूँ तो कभी इज़्तिराब जैसा है अब उसका मिलना मिलाना भी ख़्वाब जैसा है, ये तिश्नगी ए मोहब्बत न बुझ सकेगी कभी ये मत कहो कि ये दरिया सराब जैसा है, ग़मों की धूप में उम्मीद के भी साए हूँ तू ज़िंदगी में यही इंक़लाब जैसा है, कभी ख़याल से बाहर कभी ख़याल में है वो एक चेहरा जो दिल में गुलाब जैसा है, कोई मिले न मिले बे क़रार रहता है कि दिल का हाल भी एक मौज ए आब जैसा है, हमारे दिल में वही है जो सब पे ज़ाहिर है कि अपना चेहरा खुली एक किताब जैसा है, वो जिस की ज़ात से जीने का लुत्फ़ था नादिर बिछड़ गया तो ये जीना अज़ाब जैसा है..!! - [कटा न कोह ए अलम हम से कोहकन की तरह](https://hindigazals.com/kata-na-koh-e/): कटा न कोह ए अलम हम से कोहकन की तरह बदल सका न ज़माना तेरे चलन की तरह, हज़ार बार किया ख़ून ए आरज़ू हमने जबीन ए दहर पे फिर भी रहे शिकन की तरह, सवाद ए शब की ये तन्हाइयाँ भी डसती हैं ये चाँदनी भी नज़र आती है कफ़न की तरह, तमाम शहर है बेगाना लोग ना मानूस वतन में अपने हैं हम एक बे वतन की तरह, ख़याल ए दोस्त न हसरत न आरज़ू न उम्मीद ये दिल है अब किसी उजड़े हुए चमन की तरह, सुकून ए क़ल्ब तो क्या है क़रार ए जाँ भी लुटा तुम्हारी याद भी आई तो राहज़न की तरह, अजब नहीं कि सर ए शहर ए आरज़ू नादिर हमारा दिल भी जले शम ए अंजुमन की तरह..!! - [हमारे हाल से कोई जो बा ख़बर रहता](https://hindigazals.com/humare-haal-se-koi/): हमारे हाल से कोई जो बा ख़बर रहता ख़याल उसका हमें भी तो उम्र भर रहता, जिसे भी ख़्वाहिश ए दीवार ओ दर हो सहरा में वो कम नसीब तो अच्छा था अपने घर रहता, हवा से टूट के गिरना मेरा मुक़द्दर था कि ज़र्द पत्ता था क्यूँ कर मैं शाख़ पर रहता ? - [करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या](https://hindigazals.com/karta-main-ab-kisi/): करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या मरने का ग़म नहीं है तो जीने की आस क्या जब तुझ को मुझ से दूर ही रहना पसंद है साए की तरह रहता है फिर आस पास क्या तुझ से बिछड़ के हम तो यही सोचते रहे ये गर्दिश ए हयात न आएगी रास क्या अब तर्क ए दोस्ती ही तक़ाज़ा है वक़्त का तेरा क़यास गर है यही तो क़यास क्या माना कि तेरा मिलना है मुश्किल बहुत मगर हर लम्हा टूट जाए अब ऐसी भी आस क्या एक उम्र हो गई है यही सोचते हुए अपनी किताब ए ज़ीस्त का है इक़्तिबास क्या नादिर कहीं तो सैर को बाहर भी जाइए हरदम किसी की याद में रहना उदास क्या..?? - [चमन लहक के रह गया घटा मचल के रह गई](https://hindigazals.com/chaman-lahak-ke-rah/): चमन लहक के रह गया घटा मचल के रह गई तेरे बग़ैर ज़िंदगी की रुत बदल के रह गई, ख़याल उन के साथ साथ देर तक चला किया नज़र तो उन के साथ थोड़ी दूर चल के रह गई, वो एक निगाह ए मेहरबाँ का इल्तिफ़ात ए मुख़्तसर अंधेरे घर में जैसे कोई शम्अ जल के रह गई, कहाँ चमन की सुब्ह में चमन का हुस्न ए नीम शब कँवल बिखर के रह गए कली मसल के रह गई, जलाई थी तो जो दो दिलों ने एक हसीन रात में वो शम्अ अब भी है जवाँ वो रात ढल के रह गई, चमन का प्यार मिल सका न दश्त की बहार को कली बिकस के रह गई सबा मचल के रह गई, वो मेरा दिल था जो पराई आग में जला किया वो शम्अ थी जो अपनी आँच में पिघल के रह गई, हर एक जाँ गुदाज़ ग़म का मा हसल यही रहा कि ग़म के मशग़लों में ज़िंदगी बहल के रह गई, शमीम उनकी इक झलक भी ता सहर न मिल सकी निगाह ए शौक़ करवटें बदल बदल के रह गई..!! - [हर शेर से मेरे तेरा पैकर निकल आए](https://hindigazals.com/har-sher-se-mere/): हर शेर से मेरे तेरा पैकर निकल आए मंज़र को हटा कर पस ए मंज़र निकल आए, ये कौन निकल आया यहाँ सैर ए चमन को ? - [कुछ इस अदा से वो मेरे दिल ओ नज़र में रहा](https://hindigazals.com/kuch-is-ada-se/): कुछ इस अदा से वो मेरे दिल ओ नज़र में रहा ब क़ैद ए होश भी मैं आलम ए दिगर में रहा, ख़ुद अपनी ज़ात पे मुझको भी इख़्तियार न था तमाम उम्र मैं एक हल्क़ा ए असर में रहा, वो इश्क़ जिसकी ज़माने को भी ख़बर न रही तेरे बिछड़ने से रुस्वा नगर नगर में रहा, रह ए हयात में तेरी रिफाक़तें न सही तेरा ख़याल तो हरदम मुझे सफ़र में रहा, ग़म ए ज़माना ने किस को मफ़र है ऐ नादिर सुकून ए क़ल्ब कहाँ अब किसी हुनर में रहा..?? - [ख़बर नहीं कि सफ़र है कि है क़याम अभी](https://hindigazals.com/khabar-nahin-ki-safar/): ख़बर नहीं कि सफ़र है कि है क़याम अभी तिलिस्म ए शहर में खोए हैं ख़ास ओ आम अभी, सदा भी देगा कभी तो सुकूत का सहरा किसी को होने तो दो ख़ुद से हम कलाम अभी, जो देखिए तो ज़माना है तेज़ रौ कितना तुलू ए सुब्ह अभी है तो वक़्त ए शाम अभी, वो क़हत ए आब है दरिया भी सारे ख़ुश्क हुए रवाँ जो अब्र है करता नहीं क़याम अभी, अब इत्तिफ़ाक़ से बच कर निकल गए तो क्या रह ए तलब में तो नादिर हैं कितने दाम अभी..!! - [अलबेली कामनी कि नशीली घड़ी है शाम](https://hindigazals.com/albeli-kaamni-ki-nashili/): अलबेली कामनी कि नशीली घड़ी है शाम सर मस्तियों की सेज पे नंगी पड़ी है शाम, बेकल किए है रैन के रसिया का इंतिज़ार ग़मगीं है हुस्न ए शोख़ कि हैराँ खड़ी है शाम, चमका दिया है इस के शरारों ने फ़िक्र को एहसास ए इशक़ ओ हुस्न की एक फुलझड़ी है शाम, ताबाँ है तेरा चेहरा कि है जल्वा ए सहर रख़्शाँ है तेरी माँग कि तारों जड़ी है शाम, रूठे हुए दिलों को भी इस ने मना लिया मनमोहनी है कामनी चंचल बड़ी है शाम, जाने कब आए आज सा हंगाम ए दिल नवाज़ यारो उठाओ जाम घड़ी दो घड़ी है शाम..!! - [अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को](https://hindigazals.com/apne-haathon-ki-lakiron/): अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को, मैं जो काँटा हूँ तो चल मुझ से बचा कर दामन मैं हूँ गर फूल तो जूड़े में सजा ले मुझ को, तर्क ए उल्फ़त की क़सम भी कोई होती है क़सम तू कभी याद तो कर भूलने वाले मुझ को, मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मानी ये तेरी सादा दिली मार न डाले मुझ को, मैं समुंदर भी हूँ मोती भी हूँ ग़ोता ज़न भी कोई भी नाम मेरा ले के बुला ले मुझ को, तू ने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी ख़ुद परस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझ को, बाँध कर संग ए वफ़ा कर दिया तू ने ग़र्क़ाब कौन ऐसा है जो अब ढूँढ निकाले मुझ को ? - [उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या](https://hindigazals.com/umr-guzregi-imtihaan-me/): उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या मेरी हर बात बे असर ही रही नुक़्स है कुछ मेरे बयान में क्या मुझ को तो कोई टोकता भी नहीं यही होता है ख़ानदान में क्या अपनी महरूमियाँ छुपाते हैं हम ग़रीबों की आन बान में क्या ख़ुद को जाना जुदा ज़माने से आ गया था मेरे गुमान में क्या शाम ही से दुकान ए दीद है बंद नहीं नुक़सान तक दुकान में क्या ऐ मेरे सुब्ह ओ शाम ए दिल की शफ़क़ तू नहाती है अब भी बान में क्या बोलते क्यूँ नहीं मेरे हक़ में आबले पड़ गए ज़बान में क्या ख़ामुशी कह रही है कान में क्या आ रहा है मेरे गुमान में क्या दिल कि आते हैं जिस को ध्यान बहुत ख़ुद भी आता है अपने ध्यान में क्या वो मिले तो ये पूछना है मुझे अब भी हूँ मैं तेरी अमान में क्या यूँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या है नसीम ए बहार गर्द आलूद ख़ाक उड़ती है उस मकान में क्या ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या ..?? - [रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ](https://hindigazals.com/ranjish-hi-sai-dil/): रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ, कुछ तो मेरे पिंदार ए मोहब्बत का भरम रख तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ, पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो रस्म ओ रह ए दुनिया ही निभाने के लिए आ, किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ, एक उम्र से हूँ लज़्ज़त ए गिर्या से भी महरूम ऐ राहत एजाँ मुझ को रुलाने के लिए आ, अब तक दिल ए ख़ुश फ़ह्‌म को तुझ से हैं उमीदें ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ..!! - [हर बज़्म में मौज़ू ए सुख़न दिल ज़दगाँ का](https://hindigazals.com/har-bazm-me-mauzoo/): हर बज़्म में मौज़ू ए सुख़न दिल ज़दगाँ का अब कौन है शीरीं है कि लैला है कि तुम हो ? - [सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं](https://hindigazals.com/sab-humare-liye-zanjeer/): सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं हम सर ए ज़ुल्फ़ ए गिरह गीर लिए फिरते हैं, कौन था सैद ए वफ़ादार कि अब तक सय्याद बाल ओ पर उस के तेरे तीर लिए फिरते हैं, तू जो आए तो शब ए तार नहीं याँ हर सू मिशअलें नाला ए शब गीर लिए फिरते हैं, तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं, मोतकिफ़ गरचे ब ज़ाहिर हूँ तसव्वुर में मगर कू ब कू साथ ये बे पीर लिए फिरते हैं, रंग-ए ख़ूबान ए जहाँ देखते ही ज़र्द किया आप ज़ोर आँखों में तस्वीर लिए फिरते हैं, जो है मरता है भला किस को अदावत होगी आप क्यूँ हाथ में शमशीर लिए फिरते हैं, सर कशी शम्अ की लगती नहीं गर उन को बुरी लोग क्यूँ बज़्म में गुलगीर लिए फिरते हैं ? - [जान हम तुझ पे दिया करते हैं](https://hindigazals.com/jaan-hum-tujh-pe/): जान हम तुझ पे दिया करते हैं नाम तेरा ही लिया करते हैं, चाक करने के लिए ऐ नासेह हम गरेबान सिया करते हैं, साग़र ए चश्म से हम बादा परस्त मय ए दीदार पिया करते हैं, ज़िंदगी ज़िंदादिली का है नाम मुर्दादिल ख़ाक जिया करते हैं, संग ए असवद भी है भारी पत्थर लोग जो चूम लिया करते हैं, कल न देगा कोई मिट्टी भी उन्हें आज ज़र जो कि दिया करते हैं, दफ़्न महबूब जहाँ हैं नासिख़ क़ब्रें हम चूम लिया करते हैं..!! - [जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो](https://hindigazals.com/jis-simt-bhi-dekhoon/): जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो ऐ जान ए जहाँ ये कोई तुम सा है कि तुम हो ? - [तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे](https://hindigazals.com/tumhare-shahar-ka-mausam/): तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे, तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ मुझे तुम्हें भुलाने में शायद मुझे ज़माना लगे, जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो कि आस पास की लहरों को भी पता न लगे, वो फूल जो मेरे दामन से हो गए मंसूब ख़ुदा करे उन्हें बाज़ार की हवा न लगे, न जाने क्या है किसी की उदास आँखों में वो मुँह छुपा के भी जाए तो बेवफ़ा न लगे, तू इस तरह से मेरे साथ बेवफ़ाई कर कि तेरे बाद मुझे कोई बेवफ़ा न लगे, तुम आँख मूँद के पी जाओ ज़िंदगी क़ैसर कि एक घूँट में मुमकिन है बद मज़ा न लगे..!! - [रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया](https://hindigazals.com/rukhsat-hua-to-aankh/): रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया, वो यूँ गया कि बाद ए सबा याद आ गई एहसास तक भी हम को दिला कर नहीं गया, यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आएगा जाते हुए चराग़ बुझा कर नहीं गया, बस एक लकीर खींच गया दरमियान में दीवार रास्ते में बना कर नहीं गया, शायद वो मिल ही जाए मगर जुस्तुजू है शर्त वो अपने नक़्श ए पा तो मिटा कर नहीं गया, घर में है आज तक वही ख़ुश्बू बसी हुई लगता है यूँ कि जैसे वो आ कर नहीं गया, तब तक तो फूल जैसी ही ताज़ा थी उस की याद जब तक वो पत्तियों को जुदा कर नहीं गया, रहने दिया न उस ने किसी काम का मुझे और ख़ाक में भी मुझ को मिला कर नहीं गया, वैसी ही बे तलब है अभी मेरी ज़िंदगी वो ख़ार ओ ख़स में आग लगा कर नहीं गया, शहज़ाद ये गिला ही रहा उस की ज़ात से जाते हुए वो कोई गिला कर नहीं गया..!! - [सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं](https://hindigazals.com/suna-hai-log-use/): सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं, सुना है रब्त है उस को ख़राब हालों से सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं, सुना है दर्द की गाहक है चश्म ए नाज़ उस की सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं, सुना है उस को भी है शेर ओ शायरी से शग़फ़ सो हम भी मोजिज़े अपने हुनर के देखते हैं, सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं, सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है सितारे बाम ए फ़लक से उतर के देखते हैं, सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं, सुना है हश्र हैं उस की ग़ज़ाल सी आँखें सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं, सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं, सुना है उस की सियह चश्मगी क़यामत है सो उस को सुरमा फ़रोश आह भर के देखते हैं, सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं, सुना है आइना तिमसाल है जबीं उस की जो सादा दिल हैं उसे बन सँवर के देखते हैं, सुना है जब से हमाइल हैं उस की गर्दन में मिज़ाज और ही लाल ओ गुहर के देखते हैं, सुना है चश्म ए तसव्वुर से दश्त ए इम्काँ में पलंग ज़ाविए उस की कमर के देखते हैं, सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं, वो सर्व क़द है मगर बे गुल ए मुराद नहीं कि उस शजर पे शगूफ़े समर के देखते हैं, बस एक निगाह से लुटता है क़ाफ़िला दिल का सो रह रवान ए तमन्ना भी डर के देखते हैं, सुना है उस के शबिस्ताँ से मुत्तसिल है बहिश्त मकीं उधर के भी जल्वे इधर के देखते हैं, रुके तो गर्दिशें उस का तवाफ़ करती हैं चले तो उस को ज़माने ठहर के देखते हैं, किसे नसीब कि बे पैरहन उसे देखे कभी कभी दर ओ दीवार घर के देखते हैं, कहानियाँ ही सही सब मुबालग़े ही सही अगर वो ख़्वाब है ताबीर कर के देखते हैं, अब उस के शहर में ठहरें कि कूच कर जाएँ फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं..!! - [क़ैद शीशे में रहूँ अक्स बनूँ शाद रहूँ](https://hindigazals.com/qaid-shishe-me-rahoon/): क़ैद शीशे में रहूँ अक्स बनूँ शाद रहूँ या कि फिर फोड़ के ये आइना आज़ाद रहूँ यूँ ही जीता रहूँ गुमनाम अँधेरों में कहीं या करूँ सुब्ह कोई ऐसी कि मैं याद रहूँ या तो ईजाद करूँ अपने जहान ए नौ की या तो खंडर में मेरे अपने ही बर्बाद रहूँ घोंट दूँ अपनी समाअत का गला तो कुछ हो वर्ना दिल की फ़ुग़ाँ में कैसे मैं आबाद रहूँ है निदा बन के निकलना सो ज़बाँ से तेरी जो रहूँ अपनी ज़बाँ पे ही तो फ़रियाद रहूँ ऐ मेरे दोस्त ये अशआर सँभाले रखना आरज़ू है मैं तेरे साथ मेरे बाद रहूँ..!! - [किसी को नींद मिली तो किसी को ख़्वाब मिला](https://hindigazals.com/kisi-ko-neend-mili/): किसी को नींद मिली तो किसी को ख़्वाब मिला हर एक बशर को याँ मौक़ा ए इंतिख़ाब मिला, वो नाप तौल के पाया थी आरज़ू जिस की नहीं थी आरज़ू जिस की वो बे हिसाब मिला, खुला मिला कोई चेहरा ढका मिला कोई सभी की ज़ात पे हम को मगर हिजाब मिला, नक़ाब इतने हैं चेहरा ही भूल जाएँगे अगर वो शीशा ए दिल में न बेनक़ाब मिला, रहे सवाल तो बेख़ौफ़ ही हमारे मगर सवाल से हमें सहमा सा हर जवाब मिला, सभी अज़ाबों से पहले ये ज़िंदगी थी मिली सभी अज़ाबों से पहले यही अज़ाब मिला, इस इज़्तिराब के सहरा में है सुकूँ का गुमाँ मिला भी तिश्नगी को तो यही सराब मिला..!! - [हम अब क्या बताएँ कहाँ तक गए](https://hindigazals.com/hum-ab-kya-batayen/): हम अब क्या बताएँ कहाँ तक गए गुमाँ के मुसाफ़िर गुमाँ तक गए, हिसार ए जहाँ तक है दश्त ए अना दिखा बस ये मंज़र जहाँ तक गए, न जज़्बात से ये सफ़र तय हुआ न दिल से कभी ये ज़बाँ तक गए, कि हासिल यही मौसमों का रहा बहारों के पत्ते ख़िज़ाँ तक गए, मसाफ़त किसी की यहीं तक रही मकाँ से चले तो दुकाँ तक गए, बताओ क़ज़ा पर करें और क्या अज़ा से बढ़ें तो फ़ुग़ाँ तक गए, जिन्हें आगही में मिला आसरा न फिर वो किसी भी अमाँ तक गए, यूँ ही बार ए हस्ती उठाए फिरें हुए ख़ाक तो आसमाँ तक गए..!! - [ये जिस्म मेरा थक के बहुत चूर हुआ है](https://hindigazals.com/ye-zism-mera-thak/): ये जिस्म मेरा थक के बहुत चूर हुआ है किस कार ए मुसलसल पे ये मामूर हुआ है ? - [कोई हसरत कोई अरमान नहीं रखते हैं](https://hindigazals.com/koi-hasrat-koi-armaan/): कोई हसरत कोई अरमान नहीं रखते हैं हम तो मुद्दत से ये सामान नहीं रखते हैं, ज़ख़्म रखते हैं न रखते हैं निशाँ अब कोई चाक हो ऐसा गरेबान नहीं रखते हैं, बेहिसी का ये हमारी ज़रा आलम देखो जिस्म रखते है मगर जान नहीं रखते हैं, हम से अग़्यार की पहचान कहाँ सँभलेगी जब हम अपनों की ही पहचान नहीं रखते हैं, हम समुंदर को तो महकूम नहीं रख सकते हाँ मगर कश्ती में तूफ़ान नहीं रखते हैं, जब से मुश्किल हुए हैं तब से सुकूँ है सो अब ख़ुद को दानिस्ता ही आसान नहीं रखते हैं..!! - [वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं](https://hindigazals.com/wo-zakhm-chhodo-ab/): वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं सो मेरे हक़ में कोई भी बयान बाक़ी नहीं, बच्चे हैं फ़ासले बीच अपने सो निभाएँगे सिवाए उन के तो कुछ दरमियान बाक़ी नहीं, करेंगे क्या भला किरदार वो पुराने सब पुरानी आज वो जब दास्तान बाक़ी नहीं, ज़मीं ने पैर मेरे बाँध कर नहीं रखे मेरी उड़ान में ही आसमान बाक़ी नहीं..!! - [दोस्ती है धर्म मेरा ज़ात मेरी](https://hindigazals.com/dosti-hai-dharm-mera/): दोस्ती है धर्म मेरा ज़ात मेरी दुश्मनों से पूछिए औक़ात मेरी, इश्क़ क्या है जाल है मैं ने कहा था तुम मगर सुनते कहाँ हो बात मेरी, सामने था वो मगर कुछ फ़ासले पर सोचिए कैसे कटी है रात मेरी ? - [दुश्मन है कौन और मेरा यार कौन है](https://hindigazals.com/dushman-hai-kaun-aur/): दुश्मन है कौन और मेरा यार कौन है खुलता नहीं कि बरसर ए पैकार कौन है ? दरिया ए आगही में भी मुझ पर नहीं खुला किस की मुझे तलाश है उस पार कौन है ? - [हर घड़ी आफ़ियत हर घड़ी शुक्रिया](https://hindigazals.com/har-ghadi-aafiyat-har/): हर घड़ी आफ़ियत हर घड़ी शुक्रिया हासिल ए ज़िंदगी आगही शुक्रिया, मुझ को मर कर भी एक ज़िंदगी मिल गई दोस्तों को दुआ शायरी शुक्रिया, घर की दीवार बातें समझने लगी अब ज़रूरत नहीं आप की शुक्रिया, फ़िक्र ए दुनिया ओ दीं अब न उलझा मुझे आख़िरी दरगुज़र आख़िरी शुक्रिया, दर मुक़फ़्फ़ल हुए चिलमनें गिर गईं एक खिड़की खुली रह गई शुक्रिया, हो चला है यक़ीं गुल्सिताँ है मेरा फूल ख़ुशबू सबा चाँदनी शुक्रिया, ढूँढ लाया हूँ इक़रार पाताल से एक क़ौस ए क़ुज़ह रौशनी शुक्रिया..!! - [सरबुरीदा कोई लश्कर नहीं देखा जाता](https://hindigazals.com/sarburida-koi-lashkar-nahin/): सरबुरीदा कोई लश्कर नहीं देखा जाता हम से ये ज़ुल्म का मंज़र नहीं देखा जाता, अपनी आँखों को यही कह के सुला देता हूँ अपनी औक़ात से बढ़ कर नहीं देखा जाता, अपने काँधों पे उठा लेते हैं लाशा अपना बोझ अपना किसी सर पर नहीं देखा जाता, देखने को तो उसे बार नहीं है मुझ को बात ये है कि बराबर नहीं देखा जाता, लौटना हो तो उन आँखों से किनारा कर लो डूबना हो तो समुंदर नहीं देखा जाता, आइना हूँ न चुरा मुझ से तू नज़रें अपनी देख आईने से बाहर नहीं देखा जाता, हम बुरे हैं तो कोई बात नहीं है इक़रार उन से तो कोई सुख़नवर नहीं देखा जाता..!! - [बदला मिज़ाज मैं ने जो अपना हवा के साथ](https://hindigazals.com/badla-mizaj-mai-ne/): बदला मिज़ाज मैं ने जो अपना हवा के साथ दरिया था मेरे साथ किनारा हवा के साथ, फिर यूँ हुआ कि ख़्वाबसरा में हवा चली फिर यूँ हुआ कि उड़ गया सपना हवा के साथ, मैं बुझ गया हूँ आप की सिर्फ़ एक फूँक से सदियों लड़ा हूँ वर्ना मैं तन्हा हवा के साथ, दुनिया से इख़्तिलाफ़ है इस बात पर मुझे जिस सम्त की हवा चले दुनिया हवा के साथ, तेरे बदन को छू के गुज़रती है किस लिए बस इस पे इख़्तिलाफ़ है मेरा हवा के साथ, मंज़िल ख़ुलूस की न मुझे आज तक मिली इस रास्ते पे काश न चलता हवा के साथ, इक़रार क्या कहूँ कि वो ख़ुशबू सा एक शख़्स चारों तरफ़ वो और भी महका हवा के साथ..!! - [बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता](https://hindigazals.com/be-soz-e-nihaan/): बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता जब तक न लगे आग धुआँ हो नहीं सकता, वादे को निभाएँगे ये वादा है हमारा क़ौल अपना कभी तेरी ज़बाँ हो नहीं सकता, हैं सैंकड़ों दिल ताजमहल आज भी लेकिन नज़्ज़ारा तुझे शाह ए जहाँ हो नहीं सकता, आँखें ही नहीं क़ाबिल ए दीदार वगर्ना उस यार का दीदार कहाँ हो नहीं सकता, जुज़ तेरे कोई राहत ए दिल राहत ए जाँ और ऐ राहत ए दिल राहत ए जाँ हो नहीं सकता, पुरनम अभी अरमाँ हैं बहुत ख़ाना ए दिल में ख़ाली ये मकीनों से मकाँ हो नहीं सकता..!! - [ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए](https://hindigazals.com/gairo-ke-jab-bhi/): ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए अपनों ने जो किए थे सितम याद आ गए, अह्द ए वफ़ा किसी ने किया जब किसी के साथ हम को तुम्हारे क़ौल ओ क़सम याद आ गए, रह रह के आ रही हैं ये क्यों आज हिचकियाँ किस को पराए देस में हम याद आ गए, फिर दिल उदास उदास है माज़ी की याद से जो ग़म भुला चुके थे वो ग़म याद आ गए, बादल जो बरसे टूट के ऐ पुरनम ए हज़ीं उन को हमारे दीदा ए नम याद आ गए..!! - [ग़म ए जानाँ से दिल मानूस जब से हो गया मुझ को](https://hindigazals.com/gam-e-jaanaan-se/): ग़म ए जानाँ से दिल मानूस जब से हो गया मुझ को हँसी अच्छी नहीं लगती ख़ुशी अच्छी नहीं लगती, यक़ीनन ज़ुल्म की हर बात सुन कर कहने वाले से कहेगा ये हर अच्छा आदमी अच्छी नहीं लगती, गली तेरी बुरी लगती नहीं थी जान ए जाँ लेकिन नहीं है जब से तू तेरी गली अच्छी नहीं लगती, ख़ुशी से मौत आए अब मुझे मरना गवारा है गए वो जब से मुझ को ज़िंदगी अच्छी नहीं लगती, न छेड़ो हम नशीनों शाम ए ग़म पुरनम को रोने दो मुसीबत में किसी की दिललगी अच्छी नहीं लगती..!! - [ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं](https://hindigazals.com/aisa-toofaan-hai-ki/): ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं, की दुआ दुश्मन ने आख़िर मैं न कहता था तुम्हें दोस्त जो मेरा नहीं है वो तुम्हारा भी नहीं, डूबते देखा जो तूफ़ाँ में निगाहें फेर लीं दोस्तों ने मुझ को साहिल से पुकारा भी नहीं, ऐ निगाह ए शौक़ नज़्ज़ारा ये नज़्ज़ारा है क्या आश्कारा भी है जल्वा आश्कारा भी नहीं, आस रखता है करम की हो के महरूम ए करम बे सहारा भी है पुरनम बे सहारा भी नहीं..!! - [गेसू रुख़ ए रौशन से वो टलने नहीं देते](https://hindigazals.com/gesu-rukh-e-raushan/): गेसू रुख़ ए रौशन से वो टलने नहीं देते दिन होते हुए धूप निकलने नहीं देते, आँचल में छुपा लेते हैं शम् ए रुख़ ए रौशन परवाने तो जल जाएँ वो जलने नहीं देते, बिखरा दी वहीं ज़ुल्फ़ ज़रा रुख़ से जो सरकी क्या रात ढले रात वो ढलने नहीं देते, किस दर्जा हैं बे दर्द तेरे हिज्र के सदमे दिल को तेरी यादों से बहलने नहीं देते, देखा है जिसे भी वो गिराते हैं नज़र से चाहे भी सँभलना तो सँभलने नहीं देते, गुलशन पे उदासी की फ़ज़ा देख रहा हूँ वो दर्द के मौसम को बदलने नहीं देते, बे राह न क्यूँ कर हों भला रह रव ए मंज़िल जब राहनुमा राह पे चलने नहीं देते, वो सामने होते हैं तो होता है ये आलम अरमान मचलते हैं मचलने नहीं देते..!! - [दोस्तों के सितम की बात करो](https://hindigazals.com/doston-ke-sitam-ki/): दोस्तों के सितम की बात करो बात ग़म की है ग़म की बात करो सच्ची बातों के हो अगर क़ाइल अपनी झूटी क़सम की बात करो अपना काबा है कूचा ए जानाँ हम से कू ए सनम की बात करो, चाहते हो जो तुम दिलों का मिलाप छोड़ के मैं को हम की बात करो, जिन के नक़्श ए क़दम हैं राहनुमा उन के नक़्श ए क़दम की बात करो, दर्द जिस ने दिया है बहर ए ख़ुदा उस निगाह ए करम की बात करो, बात अश्क ए वफ़ा की है यारो पुरनम ए दीदा नम की बात करो..!! - [वक़्त जब साज़गार होता है](https://hindigazals.com/waqt-jab-saazgaar-hota/): वक़्त जब साज़गार होता है सच है दुश्मन भी यार होता है, बाँट ले ग़म जो ग़म के मारों का वो बड़ा ग़म गुसार होता है, लोग उस को भी काट देते हैं पेड़ जो साया दार होता है, जिस का कोई नहीं ज़माने में उस का परवर दिगार होता है, जिस के आग़ाज़ का हो नेक अंजाम काम वो शानदार होता है, आप गुलशन में जब नहीं होते गुल भी नज़रों में ख़ार होता है, दिल की बाज़ी वो हार के बोले जीत का नाम हार होता है, वो बड़ा ख़ुश नसीब है यारो यार को जिस से प्यार होता है चश्म ए बीमार बंद होने लगी ख़त्म अब इंतिज़ार होता है, उस का लाशा कोई न हो जिस का बे कफ़न बे मज़ार होता है, दीदा ए अहल ए दर्द में पुरनम अश्क दिल की पुकार होता है..!! - [दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है](https://hindigazals.com/dono-aalam-se-wo/): दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है जो तेरे इश्क़ में दीवाना नज़र आता है, इश्क़ ए बुत काबा ए दिल में है ख़ुदाया जब से तेरा घर भी मुझे बुत ख़ाना नज़र आता है, शोला ए इश्क़ में देखे कोई जलना दिल का शम्अ के भेस में परवाना नज़र आता है, मिस्र का चाँद भी शैदा है अज़ल से उन का हुस्न का हुस्न भी दीवाना नज़र आता है, बाग़बाँ बाग़ में किस शोख़ की तहरीर है ये वरक़ ए गुल पे जो अफ़्साना नज़र आता है, है अजब हुस्न ए तसव्वुर तेरे दीवाने का तेरे जैसा तेरा दीवाना नज़र आता है, उनकी मस्त आँख मेरे दिल में है रक़्साँ पुरनम ख़ूब पैमाने में पैमाना नज़र आता है..!! - [मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो](https://hindigazals.com/mujhe-ranj-hoga-na/): मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो मेरा दम जो निकले तो ऐ ख़ुदा मेरे पास मेरा हबीब हो, है अबस दवाओं का सोचना न तू फ़िक्रमंद तबीब हो तू इलाज उस का करेगा क्या जो मरीज़ ए इश्क़ ए हबीब हो, कर असीर मुझ को ब सद ख़ुशी मगर इतनी अर्ज़ भी सुन मेरी वहाँ क़ैद कर कि क़फ़स मेरा मेरे आशियाँ के क़रीब हो, जिसे तेरे हुस्न की हो ख़बर वही चश्म ए इश्क़ है मोतबर बड़ी ख़ुश नसीब है वो नज़र तेरी दीद जिस को नसीब हो, शब ओ रोज़ पुरनम ए ग़म ज़दा रहे दर्द ए दिल में जो मुब्तला वो क़रार पाए तो किस तरह उसे चैन कैसे नसीब हो..!! - [आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है](https://hindigazals.com/aag-bhi-dil-me/): आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है इश्क़ कहते हैं जिसे शोला भी है शबनम भी है, वक़्त ए आख़िर चारागर जितनी ख़ुशी है ग़म भी है यार की सूरत भी है आँखों में मेरा दम भी है, बाइस ए तकलीफ़ भी है बाइस ए आराम भी याद ए जानाँ ज़ख़्म भी है ज़ख़्म का मरहम भी है, फिर ख़ता जन्नत में होगी बावजूद ए एहतियात सिर्फ़ आदत ही नहीं ये फ़ितरत ए आदम भी है, सब के आँसू पोंछने वाले इधर भी देख ले आब दीदा तेरी महफ़िल में तेरा पुरनम भी है..!! - [यार के सामने अग़्यार बुरे लगते हैं](https://hindigazals.com/yaar-ke-saamne-agyaar/): यार के सामने अग़्यार बुरे लगते हैं फूल होता है जहाँ ख़ार बुरे लगते हैं रात के फूल गले से अब उतारें सरकार बासी हो जाते हैं जो हार बुरे लगते हैं जिन के फूलों से न आती हो वफ़ा की ख़ुशबू वो महकते हुए गुलज़ार बुरे लगते हैं, तूर पे होश उड़ाने से पता चलता है हुस्न को तालिब ए दीदार बुरे लगते हैं, इन मसीहाओं से क्या दर्द का दरमाँ होगा जिन मसीहाओं को बीमार बुरे लगते हैं, अच्छे लगते नहीं जिस दिन से गए हो मिल के अपने घर के दर ओ दीवार बुरे लगते हैं, ऐसे लगते हैं शब ए हिज्र के आसार मुझे जिस तरह मौत के आसार बुरे लगते हैं..!! - [आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में](https://hindigazals.com/aayega-koi-chal-ke/): आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में सदियाँ गुज़र गई हैं इसी इंतिज़ार में, छिड़ते ही साज़ ए बज़्म में कोई न था कहीं वो कौन था जो बोल रहा था सितार में, ये और बात है कोई महके कोई चुभे गुलशन तो जितना गुल में है उतना है ख़ार में, अपनी तरह से दुनिया बदलने के वास्ते मेरा ही एक घर है मेरे इख़्तियार में, तिश्नालबी ने रेत को दरिया बना दिया पानी कहाँ था वर्ना किसी रेग ज़ार में, मसरूफ़ गोरकन को भी शायद पता नहीं वो ख़ुद खड़ा हुआ है क़ज़ा की क़तार में..!! - [नील गगन में तैर रहा है उजला उजला पूरा चाँद](https://hindigazals.com/neel-gagan-me-tair/): नील गगन में तैर रहा है उजला उजला पूरा चाँद माँ की लोरी सा बच्चे के दूध कटोरे जैसा चाँद, मुन्नी की भोली बातों सी चटकीं तारों की कलियाँ पप्पू की ख़ामोशी शरारत सा छुप छुप कर उभरा चाँद, मुझ से पूछो कैसे काटी मैं ने पर्बत जैसी रात तुम ने तो गोदी में ले कर घंटों चूमा होगा चाँद, परदेसी सूनी आँखों में शोले से लहराते हैं भाभी की छेड़ों सा बादल आपा की चुटकी सा चाँद, तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद..!! - [यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है](https://hindigazals.com/yun-lag-raha-hai/): यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास है, मुमकिन है लिखने वाले को भी ये ख़बर न हो क़िस्से में जो नहीं है वही बात ख़ास है, माने न माने कोई हक़ीक़त तो है यही चर्ख़ा है जिस के पास उसी की कपास है, इतना भी बन सँवर के न निकला करे कोई लगता है हर लिबास में वो बे लिबास है, छोटा बड़ा है पानी ख़ुद अपने हिसाब से उतनी ही हर नदी है यहाँ जितनी प्यास है..!! - [सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना](https://hindigazals.com/safar-ko-jab-bhi/): सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना, जो साथ है वही घर का नसीब है लेकिन जो खो गया है उसे भी मकान में रखना, जो देखती हैं निगाहें वही नहीं सब कुछ ये एहतियात भी अपने बयान में रखा, वो एक ख़्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता बना के चाँद उसे आसमान में रखना, चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना..!! - [अच्छी नहीं ये ख़ामुशी शिकवा करो गिला करो](https://hindigazals.com/achchi-nahin-ye-khamushi/): अच्छी नहीं ये ख़ामुशी शिकवा करो गिला करो यूँ भी न कर सको तो फिर घर में ख़ुदा ख़ुदा करो, शोहरत भी उस के साथ है दौलत भी उस के हाथ है ख़ुद से भी वो मिले कभी उस के लिए दुआ करो, देखो ये शहर है अजब दिल भी नहीं है कम ग़ज़ब शाम को घर जो आऊँ मैं थोड़ा सा सज लिया करो, दिल में जिसे बसाओ तुम चाँद उसे बनाओ तुम वो जो कहे पढ़ा करो जो न कहे सुना करो, मेरी नशिस्त पे भी कल आएगा कोई दूसरा तुम भी बना के रास्ता मेरे लिए जगह करो..!! - [उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है](https://hindigazals.com/us-ko-kho-dene/): उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है जो हुआ वो न हुआ होता ये ग़म बाक़ी है, अब न वो छत है न वो ज़ीना न अंगूर की बेल सिर्फ़ एक उस को भुलाने की क़सम बाक़ी है, मैंने पूछा था सबब पेड़ के गिर जाने का उठ के माली ने कहा उस की क़लम बाक़ी है, जंग के फ़ैसले मैदाँ में कहाँ होते हैं जब तलक हाफ़िज़े बाक़ी हैं अलम बाक़ी है, थक के गिरता है हिरन सिर्फ़ शिकारी के लिए जिस्म घायल है मगर आँखों में रम बाक़ी है..!! - [मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ](https://hindigazals.com/main-apne-ikhtiyar-me/): मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ, तेरी ही जुस्तुजू में लगा है कभी कभी मैं तेरे इंतिज़ार में हूँ भी नहीं भी हूँ, फ़िहरिस्त मरने वालों की क़ातिल के पास है मैं अपने ही मज़ार में हूँ भी नहीं भी हूँ, औरों के साथ ऐसा कोई मसअला नहीं एक मैं ही इस दयार में हूँ भी नहीं भी हूँ, मुझ से ही है हर एक सियासत का एतिबार फिर भी किसी शुमार में हूँ भी नहीं भी हूँ..!! - [तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ](https://hindigazals.com/tu-qareeb-aaye-to/): तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ आइना सामने रख कर तेरा दीदार करूँ, सामने तेरे करूँ हार का अपनी एलान और अकेले में तेरी जीत से इंकार करूँ, पहले सोचूँ उसे फिर उस की बनाऊँ तस्वीर और फिर उस में ही पैदा दर ओ दीवार करूँ, मेरे क़ब्ज़े में न मिट्टी है न बादल न हवा फिर भी चाहत है कि हर शाख़ समर बार करूँ, सुब्ह होते ही उभर आती है सालिम हो कर वही दीवार जिसे रोज़ मैं मिस्मार करूँ..!! - [उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा](https://hindigazals.com/uske-dushman-hai-bahut/): उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना सच बोल कि होंठों का तबस्सुम न बुझे रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा, प्यास जिस नहर से टकराई वो बंजर निकली जिसको पीछे कहीं छोड़ आए वो दरिया होगा, मेरे बारे में कोई राय तो होगी उसकी उसने मुझ को भी कभी तोड़ के देखा होगा, एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा..!! - [बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे](https://hindigazals.com/baat-aisi-to-karo/): बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे बिन तेरे कैसे जीया तुझ को ख़बर कोई करे, सब फ़रिश्ते ही बने बैठे हैं दुनियाँ में यहाँ मैं ही इन्सान बचा, मुझ पे नज़र कोई करे, है कठिन राह मुहब्बत की सभी जानते हैं हो जो आसाँ तो फिर इस पे सफ़र सभी करे, तेरा मुजरिम हूँ तो फिर मुझको सज़ा तुम से मिले हाँ बुरा लगता जब इसकी फ़िकर कोई करे, मुझ से होता ही नहीं अब तो गँवारा ये ज़िन्दगी मेरी हो और इसको बसर कोई करे..!! - [हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर](https://hindigazals.com/hum-ne-kaati-hai/): हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर दिल से गुज़री हैं सितारों की बरातें अक्सर, और तो कौन है जो मुझ को तसल्ली देता हाथ रख देती हैं दिल पर तेरी बातें अक्सर, हुस्न शाइस्ता ए तहज़ीब ए अलम है शायद ग़मज़दा लगती हैं क्यूँ चाँदनी रातें अक्सर ? - [तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है](https://hindigazals.com/tu-is-qadar-mujhe-2/): तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचूँ अजीब लगता है, जिसे न हुस्न से मतलब न इश्क़ से सरोकार वो शख़्स मुझ को बहुत बदनसीब लगता है, हुदूद ए ज़ात से बाहर निकल के देख ज़रा न कोई ग़ैर न कोई रक़ीब लगता है, ये दोस्ती ये मरासिम ये चाहतें ये ख़ुलूस कभी कभी मुझे सब कुछ अजीब लगता है, उफ़ुक़ पे दूर चमकता हुआ कोई तारा मुझे चराग़ ए दयार ए हबीब लगता है..!! - [जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये](https://hindigazals.com/jab-lage-zakhm-to/): जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये, तिश्नगी कुछ तो बुझे तिश्नालब ए ग़म की एक नदी दर्द के शहरों में बहा दी जाये, दिल का वो हाल हुआ ऐ ग़म ए दौराँ के तले जैसे एक लाश चट्टानों में दबा दी जाये, हम ने इंसानों के दुख दर्द का हल ढूँढ लिया क्या बुरा है जो ये अफ़वाह उड़ा दी जाये, हम को गुज़री हुई सदियाँ तो न पहचानेंगी आने वाले किसी लम्हे को सदा दी जाये, फूल बन जाती हैं दहके हुए शोलों की लवें शर्त ये है के उन्हें ख़ूब हवा दी जाये, कम नहीं नशे में जाड़े की गुलाबी रातें और अगर तेरी जवानी भी मिला दी जाये, हम से पूछो ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या है चन्द लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाये..!! - [है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ](https://hindigazals.com/hai-justazoo-ki-khoob/): है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ हैं दौर ए जाम ए अव्वल ए शब में ख़ुदी से दूर होती है आज देखिए हम को सहर कहाँ या रब इस इख़्तिलात का अंजाम हो ब ख़ैर था उसको हम से रब्त मगर इस क़दर कहाँ एक उम्र चाहिए कि गवारा हो नीश ए इश्क़ रखी है आज लज़्ज़त ए ज़ख़्म ए जिगर कहाँ बस हो चुका बयाँ कसल ओ रंज ए राह का ख़त का मेंरे जवाब है ऐ नामा बर कहाँ कौन ओ मकाँ से है दिल ए वहशी कनारा गीर इस ख़ानुमाँ ख़राब ने ढूँढा है घर कहाँ हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क ए इश्क़ की दिल चाहता न हो तो ज़बाँ में असर कहाँ हाली नशात ए नग़्मा ओ मय ढूँढते हो अब आए हो वक़्त ए सुब्ह रहे रात भर कहाँ ?? - [बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा](https://hindigazals.com/bigadne-wala-kisi-din/): बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा मिज़ाज ए दोस्त बिल आख़िर सुधर ही जाएगा, मरीज़ ए इश्क़ अभी बेकली में है लेकिन बुख़ार एक दिन उसका उतर ही जाएगा, जो फूल आज सर ए शाख़ है महकता हुआ वो एक मौज ए सबा में बिखर ही जाएगा, गुज़र रही है परेशान ज़िंदगी लेकिन चले चलो कि ये रस्ता गुज़र ही जाएगा, इसी ख़याल से नेकी ज़रूर करती हूँ कि बूँद बूँद से तालाब भर ही जाएगा, जो गिर के राह में उठने का अज़्म रखता है वो पार आग का दरिया भी कर ही जाएगा, ये सोच कर ही रवाबित में इज्ज़ भी रखना है जिस की ख़ाक जहाँ की उधर ही जाएगा, सबीला ख़्वाब में वो सैर को अगर निकले उड़न खटोले पे परियों के घर ही जाएगा..!! - [सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े](https://hindigazals.com/sahara-ke-sangeen-safar/): सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े सारी आँखें भर कर रखना देखो पानी कम न पड़े, ज़ेहन मुसलसल क़िस्से सोचें होंठ मुसलसल ज़िक्र करें सुब्ह तलक ज़िंदा रहना है कहीं कहानी कम न पड़े, इश्क़ ने सौंपा है मुझ को एक सहरा की तामीर का काम और हिदायत की है ज़र्रा भर वीरानी कम न पड़े, मेरी शह रग काटी उसने और कहा शोख़ी के साथ तू सच्चा आशिक़ है तो फिर देख रवानी कम न पड़े, थोड़ा थोड़ा मरता भी रहता हूँ मैं जीने के साथ ताकि वक़्त ए ज़रूरत मरने की आसानी कम न पड़े, सज्दा करने को होता हूँ एक बहुत ही बड़े बुत का और फिर सोचता हूँ ये छोटी सी पेशानी कम न पड़े, हमें छुपाने को दुनिया ने खोल दिए कपड़ों के थान चाक गरेबानी ये तेरा ज़ोर ए उर्यानी कम न पड़े, तुम फ़रहत एहसास बस अपने आप को मरने मत देना ताकि दफ़्तर ए दुनिया में दख़्ल ए इंसानी कम न पड़े..!! - [शेर बनाना मेंरा ख़ुद को बनाना भी है](https://hindigazals.com/sher-banana-mera-khud/): शेर बनाना मेंरा ख़ुद को बनाना भी है ये जो है अल्फ़ाज़ में मेरा ज़माना भी है, तुझको है इस दश्त को शहर बनाने की धुन देख इसी दश्त में तेरा दिवाना भी है, सुब्ह के शोले के साथ ख़ुद को लगानी है आग शाम के पानी के साथ ख़ुद को बुझाना भी है, उस को तो मेरे सिवा और भी कितने हैं काम सो उसे आना तो है फिर कहीं जाना भी है, इश्क़ से बाज़ आए हम उससे चलो कह के आएँ अब तो मुलाक़ात का एक बहाना भी है..!! - [तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं](https://hindigazals.com/tamam-shahar-ki-khatir/): तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं, हम उन लबों से लगा कर रहेंगे लब अपने सुख़न तमाम उसी अंजुमन से आते हैं, पड़ा हूँ उस के बदन के बिदेस में कब से मैं क्या पढ़ूँ जो ये नामे वतन से आते हैं, कि जैसे तपता तवा और बूँद पानी की ज़मीं पे हम भी उसी तरह छन से आते हैं, हम आपबीती सुनाते हैं सादा लफ़्ज़ों में ये सारे शेर हमें तर्क ए फ़न से आते हैं, ज़माने भर से है एहसास जी की चाल अलग हर एक बज़्म में वो बदचलन से आते हैं..!! - [तेरा भला हो तू जो समझता है मुझ को ग़ैर](https://hindigazals.com/tera-bhala-ho-tu/): तेरा भला हो तू जो समझता है मुझ को ग़ैर आँखों पे आँखें रख तो कि कर लूँ मैं अपनी सैर, ख़ुद पर हमारे जिस्म की चादर ही डाल ले बच आप अपनी धूप से तेरे बदन की ख़ैर, काबे के सारे बुत मेंरे सीने में आ बसे इस आशिक़ी में सारा हरम हो गया है दैर, जीना तेरे बग़ैर नहीं आ सका अभी मरना तो मैंने सीख लिया है तेरे बग़ैर, तब दाख़िला मिलेगा तुझे दश्त ए हुस्न में जब अहल ए शहर कहने लगें तुझको ग़ैर ग़ैर, एहसास जी के हल्क़ा ए ग़ुर्बत में आ रहो करनी अगर हो अपने हक़ीक़ी वतन की सैर..!! - [तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त](https://hindigazals.com/tujh-se-mil-kar/): तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त तू मेंरी पहली मोहब्बत थी मेंरी आख़िरी दोस्त , लोग हर बात का अफ़्साना बना देते हैं ये तो दुनिया है मेंरी जाँ कई दुश्मन कई दोस्त, तेरे क़ामत से भी लिपटी है अमरबेल कोई मेरी चाहत को भी दुनिया की नज़र खा गई दोस्त, याद आई है तो फिर टूट के याद आई है कोई गुज़री हुई मंज़िल कोई भूली हुई दोस्त, अब भी आए हो तो एहसान तुम्हारा लेकिन वो क़यामत जो गुज़रनी थी गुज़र भी गई दोस्त, तेरे लहजे की थकन में तेरा दिल शामिल है ऐसा लगता है जुदाई की घड़ी आ गई दोस्त, बारिश ए संग का मौसम है मेंरे शहर में तो तू ये शीशे सा बदन ले के कहाँ आ गई दोस्त, मैं उसे अहद शिकन कैसे समझ लूँ जिसने आख़िरी ख़त में ये लिखा था फ़क़त आपकी दोस्त..!! - [तेरे हुस्न की ख़ैर बना दे एक दिन का सुल्तान मुझे](https://hindigazals.com/tere-husn-ki-khair/): तेरे हुस्न की ख़ैर बना दे एक दिन का सुल्तान मुझे आँखों को बस देखने दे और होंठों से पहचान मुझे, वस्ल में उस के मर जाने की हसरत मेरे दिल में है और बिछड़ कर जीने का भी बाक़ी है अरमान मुझे, ख़ून रगों में रुक जाएगा लेकिन साँस न उखड़ेगी किस को भूल के ख़ुश बैठा हूँ जब आएगा ध्यान मुझे, मैं हूँ एक और बीस सदी का मेरी माँग मलँगों सी हर एक पल की ख़बर भी दे और बरसों का सामान मुझे, कैसे फूल और कौन से काँटे याद की झोली ख़ाली है अब तो तसव्वुर लगने लगा है वीराना वीरान मुझे..!! - [ख़ुशी देखते हैं न ग़म देखते हैं](https://hindigazals.com/khushi-dekhte-hai-na/): ख़ुशी देखते हैं न ग़म देखते हैं हम अंदाज़ ए अहल ए करम देखते हैं, हर एक शय में जज़्ब ए तसव्वुर के सदक़े तुम्हीं को तुम्हारी क़सम देखते हैं, सबा सुब्ह दम जाने क्या कह गई है गुलों की भी आँखों को नम देखते हैं, झुका देते हैं हम जबीन ए अक़ीदत जहाँ उन का नक़्श ए क़दम देखते हैं, तेरी चश्म ए मय गूँ के मयख़्वार हैं जो वो कब जानिब ए जाम ए जम देखते हैं, ये अहल ए मोहब्बत का तर्ज़ ए नज़र है सितम में भी रंग ए करम देखते हैं, तरब जादा पैमा ए उल्फ़त जहाँ में कहाँ राह के पेच ओ ख़म देखते हैं..!! - [आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है](https://hindigazals.com/aaye-hai-saraye-me/) - [माशूक़ अजब चीज़ है दे जिसको ख़ुदा दे](https://hindigazals.com/mashooq-azab-chij-hai/): माशूक़ अजब चीज़ है दे जिसको ख़ुदा दे हँसते को रुला दे यही रोते को हँसा दे, मशहूर तो ये है जिसे जो चाहे ख़ुदा दे हम किस से कहें दर्द दिया है तो दवा दे, फिर मुझ को सताना मगर ऐ दीदा ए पुर ख़ूँ इस बज़्म में भी आज ज़रा रँग जमा दे, या मौत मुझे आए कि ये हाल न देखूँ या ऐ दिल ए बीमार ख़ुदा तुझ को शिफ़ा दे, तस्वीर वो तस्वीर नज़र जिस पे फ़िदा हो आवाज़ वो आवाज़ जो कानों को मज़ा दे, हाँ अपने करम पर तो बहुत नाज़ है लेकिन तेरा ही जो तालिब हो बता फिर उसे क्या दे, तासीर ए सुख़न कस्ब से हासिल नहीं होती ये देन ख़ुदा की है सफ़ी जिस को ख़ुदा दे..!! - [कुछ अब की बार तो ऐसा बिफर गया पानी](https://hindigazals.com/kuch-ab-ki-bar/): कुछ अब की बार तो ऐसा बिफर गया पानी बहा के ले गया हर शय जिधर गया पानी, ये अलमिया भी अजब है कि दश्त से दरिया पलट के पूछ रहा है किधर गया पानी, किसी भी नल में नहीं कोई एक बूँद मगर हर एक मकान के कमरों में भर गया पानी, धनक के रंग उभर आए क़तरे क़तरे में तुम्हारे जिस्म को छू कर निखर गया पानी, है आम शहर में दस्तूर बे हिजाबी का हर एक शख़्स की आँखों का मर गया पानी, मैं तिश्ना बख़्त उसे हाथ भी लगा न सका मेंरे क़रीब से हो के गुज़र गया पानी, किसी बदन में हुनर ज़ीस्त का नहीं आसिम हुआ भी क्या जो सरों से उतर गया पानी..!! - [फ़क़ीराना तबीअत थी बहुत बेबाक लहजा था](https://hindigazals.com/faqeerana-tabiyat-thi-bahut/): फ़क़ीराना तबीअत थी बहुत बेबाक लहजा था कभी मुझ में भी हँसता खेलता एक शख़्स रहता था, बगूले ही बगूले हैं मेंरी वीरान आँखों में कभी इन रहगुज़ारों में कोई दरिया भी बहता था, तुझे जब देखता हूँ तो ख़ुद अपनी याद आती है मेंरा अंदाज़ हँसने का कभी तेरे ही जैसा था, कभी परवाज़ पर मेरी हज़ारों दिल धड़कते थे दुआ करता था कोई तो कोई ख़ुश बाश कहता था, कभी ऐसे ही छाई थीं गुलाबी बदलियाँ मुझ पर कभी फूलों की सोहबत से मेंरा दामन भी महका था, मैं था जब कारवाँ के साथ तो गुलज़ार थी दुनिया मगर तन्हा हुआ तो हर तरफ़ सहरा ही सहरा था, बस इतना याद है सोया था एक उम्मीद सी ले कर लहू से भर गईं आँखें न जाने ख़्वाब कैसा था..!! - [हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही](https://hindigazals.com/hum-ko-kis-ke/): हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही, दिल के लुटने का सबब पूछो न सब के सामने नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही, नफ़रतों के तीर खा कर दोस्तों के शहर में हम ने किस किस को पुकारा ये कहानी फिर सही, क्या बताएँ प्यार की बाज़ी वफ़ा की राह में कौन जीता कौन हारा ये कहानी फिर सही..!! - [पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का](https://hindigazals.com/padhiye-sabaq-yahi-hai/): पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का काँटे करा रहे हैं तआरुफ़ गुलाब का, कैसा ये इंतिशार दियों की सफ़ों में है कुछ तो असर हुआ है हवा के ख़िताब का, ये तय किया जो मैंने जुनूँ तक मैं जाऊँगा ये मरहला अहम है मेंरे इज़्तिराब का, माना बहुत हसीन था वो उम्र का पड़ाव क़िस्सा मगर न छेड़िए अहद ए शबाब का, अज़हर कहीं से नींद का अब कीजे इंतिज़ाम यूँही निकल न जाए ये मौसम भी ख़्वाब का..!! - [उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है](https://hindigazals.com/udaasi-aasmaan-hai-dil/): उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंठ रख देना यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है, तुम्हारे शहर के सारे दिए तो सो गए कब के हवा से पूछना दहलीज़ पे ये कौन जलता है, अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना हर एक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है, कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा मुझे मालूम है क़िस्मत का लिखा भी बदलता है..!! - [घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे](https://hindigazals.com/ghar-se-nikale-agar-ham/): घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे, हम ने अल्फ़ाज़ को आइना कर दिया छपने वाले ग़ज़ल में चमक जाएँगे, दुश्मनी का सफ़र एक क़दम दो क़दम तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे, रफ़्ता रफ़्ता हर एक ज़ख़्म भर जाएगा सब निशानात फूलों से ढक जाएँगे, नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा लिखते लिखते तेरे हाथ थक जाएँगे, ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे, दिन में परियों की कोई कहानी न सुन जंगलों में मुसाफ़िर भटक जाएँगे..!! - [दिल करे जब आप का मुझ को रुलाया कीजिए](https://hindigazals.com/dil-kare-jab-aap/): दिल करे जब आप का मुझ को रुलाया कीजिए आप ग़म की ये दवा मेरे ख़ुदारा कीजिए, लुत्फ़ आए आप को सारे जहाँ से जीत का मेरे जैसे जान कर ख़ुद से ही हारा कीजिए, क्या करोगी ख़्वाब में मुझ को बुला कर सोच लो हो रहा है जिस तरह अपना गुज़ारा कीजिए, आइना गर से जो पूछा देखी है सूरत कभी मुस्कुरा कर बोला इस को पारा पारा कीजिए, शिकवा ए बेदाद ख़ुद से कीजिए अब और क्या जब किया मैंने यक़ीं तो आप धोका कीजिए, मैं तो इक शाइर हूँ आख़िर आप के किस काम का गर समझ में कुछ न आए इस्तिख़ारा कीजिए, रू ब रू ग़म से कराया आप को तो ख़ुश रहें जी में आए आप के अब जो भी यारा कीजिए..!! - [अपने लिए रहा कभी उस के रहा ख़िलाफ़](https://hindigazals.com/apne-liye-raha-kabhi/): अपने लिए रहा कभी उस के रहा ख़िलाफ़ मेरा मिज़ाज सब के लिए एक सा ख़िलाफ़, ऐसे भी यार होता है कोई भला ख़िलाफ़ होती है जूँ चराग़ के यारो हवा ख़िलाफ़, हम लोग करते आए हैं उसकी मुख़ालिफ़त किस के हुआ है आज तलक वो ख़ुदा ख़िलाफ़, आईना नाक़िसों को दिखाया है जब कभी फिर कैसे कैसे हो गए हैं पारसा ख़िलाफ़, मैंने कहा कि इश्क़ इबादत है दोस्तो मुझ बा वफ़ा से हो गए सब बेवफ़ा ख़िलाफ़, सच बोल के बता तुझे इरशाद क्या मिला सब आश्ना ख़िलाफ़ हैं ना आश्ना ख़िलाफ़, इरशाद देखिए तो मेरे साथ है मगर कम्बख़्त वो हमेशा ही मेरे रहा ख़िलाफ़, इरशाद साथ रहते हैं बन कर जहाँ में दोस्त दुश्मन हुए हैं जब से हुई है हवा ख़िलाफ़..!! - [देखे हैं दिल नशीन मनाज़िर हिजाब के](https://hindigazals.com/dekhe-hain-dil-nashin/): देखे हैं दिल नशीन मनाज़िर हिजाब के होते हैं रंग सैंकड़ों पागल जो ख़्वाब के, ख़ुशबू जिसे समझते हो है ख़ून ए ज़ख़्म ए गुल देखे नहीं हैं ज़ख़्म किसी ने गुलाब के, ये क्या हुआ कि ग़ौर से देखा था उनको बस रंग उड़ गए हैं देखिए कैसे जनाब के, मिलती है रौशनी उन्हें एहसास से मेंरे दीवाने हैं वो इस लिए मेरी किताब के, उनको मिला है देखिए आसान था जिन्हें क्या मअनी रह गए हैं भला इस ख़िताब के..!! - [चलिए मुश्किल है अगर जीना तो मर जाते हैं](https://hindigazals.com/chaliye-mushkil-hai-agar/): चलिए मुश्किल है अगर जीना तो मर जाते हैं बोझ हम रूह पे अपनी हैं उतर जाते हैं, ख़ुद को आईना बना रखा है जब से हम ने उस तरफ़ देखने क्या अहल ए नज़र जाते हैं, बा वफ़ा हों तो मेंरे साथ वो चल कर देखें राह ए ईसार से हम कैसे गुज़र जाते हैं, लाज़मी दिल के लिए दीदा ए बीना करना तेरे एहसास मेंरे दिल में उतर जाते हैं, हम अनागीर हैं ख़ुद अपनी तमन्नाओं के कौन पूछे उन्हें जाएँ वो जिधर जाते हैं, यार इरशाद कहाँ चल दिए मंज़िल भी नहीं पूछ लेते हैं अभी ख़ुद से किधर जाते हैं..!! - [जलता रहा मैं रात की तन्हाइयों के साथ](https://hindigazals.com/jalta-raha-main-raat/): जलता रहा मैं रात की तन्हाइयों के साथ और तुम रहे हो सुब्ह की रानाइयों के साथ, ऐ ज़िंदगी बता दे ज़रा इतना तू मुझे कब तक रहेगी भागती परछाइयों के साथ ? - [दिल में बस जान सा मैं रहता हूँ](https://hindigazals.com/dil-me-bas-jaan/): दिल में बस जान सा मैं रहता हूँ ख़ुद में मेहमान सा मैं रहता हूँ, कितने आबाद दिल किए मैंने ख़ुद में वीरान सा मैं रहता हूँ, दिल दुखाते हो तुम मेंरा जब भी हाँ परेशान सा मैं रहता हूँ, एक उजड़े मकान में जैसे बिखरे सामान सा मैं रहता हूँ, जंग लड़ता हूँ रात दिन ख़ुद से देख सुल्तान सा मैं रहता हूँ, तुम नहीं समझे मुझ को हैरत है कितना आसान सा मैं रहता हूँ, तुम गए जब से छोड़ कर मुझ को तब से अंजान सा मैं रहता हूँ..!! - [उस से मिला तो दिल मेंरा सरशार हो गया](https://hindigazals.com/us-se-mila-to/): उस से मिला तो दिल मेंरा सरशार हो गया और फिर बिछड़ के ख़ुद से ही बेज़ार हो गया, कौड़ी के भाव बिकता है इस दौर में ज़मीर इंसान का वजूद ही बाज़ार हो गया, रिश्ते हवस की आग में ऐसे जले के बस अब तो यक़ीन अपनों पे दुश्वार हो गया, हिर्स ओ हवस की आग थी हर सू जली हुई लेकिन ज़मीर मेरा मददगार हो गया, पत्थर की चोट सह गया कुछ भी हुआ नहीं लफ़्ज़ों का तीर दिल के मेंरे पार हो गया, आँखों से तेरी याद का सावन बरस पड़ा सपना मेंरी हयात का साकार हो गया..!! - [चराग़ इश्क़ के दिल में जलाए जाते हैं](https://hindigazals.com/charag-ishq-ke-dil/): चराग़ इश्क़ के दिल में जलाए जाते हैं बड़े ही शौक़ से सदमे उठाए जाते हैं, उन्हें सुकून मिले एक यही तमन्ना है अगरचे हम को वो जी भर रुलाए जाते हैं, फ़रेब उन की अदा और अदा फ़रेब लगे यक़ीन ए इश्क़ वो फिर भी दिलाए जाते हैं, भुला दिया है हमें ख़ैर कोई बात नहीं वो याद आ के मगर क्यों रुलाए जाते हैं ? - [बड़ी मुश्किल हैं राहें सुन मोहब्बत की ज़माने में](https://hindigazals.com/badi-mushkil-hain-raahen/): बड़ी मुश्किल हैं राहें सुन मोहब्बत की ज़माने में कि पल पल मरना पड़ता है इसे दिल से निभाने में, मोहब्बत से मिले ज़ख़्मों को मैं गौहर समझता हूँ इज़ाफ़ा ही इज़ाफ़ा है मेंरे दिल के ख़ज़ाने में, ज़रूरत ये नहीं है तुम जिसे चाहो तुम्हें चाहे कोई तुम शर्त मत रखना मोहब्बत आज़माने में, कोई शिद्दत से चाहे तो कभी मग़रूर मत होना दिखावे की मोहब्बत का चलन है इस ज़माने में, ज़रूरत की मोहब्बत में कोई शिद्दत नहीं होती छलावा ही छलावा है उसे अपना बनाने में, मोहब्बत गर नहीं मुझ से तो ख़्वाबों में भी मत आओ मज़ा आता है क्या तुम को मेंरा दिल यूँ जलाने में ? - [दोनों में थी हवस कि मोहब्बत तो थी नहीं](https://hindigazals.com/dono-me-thi-hawas/): दोनों में थी हवस कि मोहब्बत तो थी नहीं यानी वफ़ा की उनको ज़रूरत तो थी नहीं, अच्छा तो चाहती थीं ज़माने से तुम मुझे लब पर कभी तुम्हारे शिकायत तो थी नहीं, हाँ ले गई वो तुम को परेशानी क्यों भला दिल मेरा था किसी की अमानत तो थी नहीं, सीखा है आप ही से कि मुँहतोड़ दो जवाब घर में हमारे ऐसी रिवायत तो थी नहीं, यूँही वो खेलते थे खिलौना था उन का बस यानी कि उन को मेरी ज़रूरत तो थी नहीं, तुम हो जहाँ पे उसके भी लाएक़ हो तुम कहो यानी तुम्हारी अपनी वो मेहनत तो थी नहीं, मजरूह था मैं अपनों की बातों से अब भी हूँ हँसता हूँ अब भी रोने की आदत तो थी नहीं, हम ही रहे शरीफ़ हिदायत की राह पर उन लोगों में ज़रा सी शराफ़त तो थी नहीं, वो वर्ज़िशों के शौक़ में सज्दे किया किए दिल में ख़ुदा का ख़ौफ़ इबादत तो थी नहीं, अब क्यों करो किसी से मुरव्वत जहान में लोगों को भी तुम्हारे मुरव्वत तो थी नहीं, बस नाम ये बड़े थे अदब की बिसात पर अपने किए पे उन को नदामत तो थी नहीं, सच बोलने की ख़ू मुझे विर्से में है मिली मेरी किसी से कोई अदावत तो थी नहीं, हँस कर के जी रहे थे बलाओं के दौर में इरशाद अपने क़ल्ब को राहत तो थी नहीं..!! - [इश्क़ की राह में यूँ हद से गुज़र मत जाना](https://hindigazals.com/ishq-ki-raah-me/): इश्क़ की राह में यूँ हद से गुज़र मत जाना हों घड़े कच्चे तो दरिया में उतर मत जाना, पाँचवीं सम्त नुजूमी ने इशारा कर के शाहज़ादे से कहा था कि उधर मत जाना, हम इन्ही तपती हुई राहों में मिल जाएँगे कोई साया तुम्हें रोके तो ठहर मत जाना, घर के जैसा कहीं आराम नहीं पाओगे कोई कहता है कि अब छोड़ के घर मत जाना, सर उठाए हुए चलना न कभी दुनिया में कभी मक़्तल में झुकाए हुए सर मत जाना, इश्क़ के तुम तो तरफ़दार बहुत हो वाली बात पड़ जाए तो ऐ यार मुकर मत जाना..!! - [फूल से मासूम बच्चों की ज़बाँ हो जाएँगे](https://hindigazals.com/phool-se-masum-bachcho/): फूल से मासूम बच्चों की ज़बाँ हो जाएँगे मिट भी जाएँगे तो हम एक दास्ताँ हो जाएँगे, मैंने तेरे साथ जो लम्हे गुज़ारे थे कभी आने वाले मौसमों में तितलियाँ हो जाएँगे, क्या ख़बर किस सम्त में पागल हवा ले जाएगी जब पुराने कश्तियों के बादबाँ हो जाएँगे, तुझ को शोहरत की तलब ऊँचा उड़ा ले जाएगी दूर तुझ से ये ज़मीन ओ आसमाँ हो जाएँगे, याद आएगी उन्हें क्या क्या हमारी बेहिसी ? - [सुनो ये ग़म की सियह रात जाने वाली है](https://hindigazals.com/suno-ye-gam-ki/): सुनो ये ग़म की सियह रात जाने वाली है अभी अज़ान की आवाज़ आने वाली है, तुझे यक़ीन तो शायद न आएगा लेकिन ये सुब्ह कोई करिश्मा दिखाने वाली है, किसे ख़बर है कि आँधी चलाए पेड़ गिराए यही हवा जो पतंगें उड़ाने वाली है, समेट बिखरे हुए काग़ज़ात को अपने कोई सदा तुझे वापस बुलाने वाली है, तुझे भी ज़ुल्म से फ़ुर्सत न मिल सकेगी कभी मेंरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है, मेंरी ग़ज़ल पे नए लोग क्यूँ तड़पते हैं ? - [भूले बिसरे हुए ग़म याद बहुत करता है](https://hindigazals.com/bhoole-bisre-hue-gam/): भूले बिसरे हुए ग़म याद बहुत करता है मेरे अंदर कोई फ़रियाद बहुत करता है, रोज़ आता है जगाता है डराता है मुझे तंग मुझ को मेंरा हमज़ाद बहुत करता है, मुझसे कहता है कि कुछ अपनी ख़बर ले बाबा देख तू वक़्त को बर्बाद बहुत करता है, निकली जाती है मेंरे पाँव के नीचे से ज़मीं आसमाँ भी सितम ईजाद बहुत करता है, कुछ तो हम सब्र ओ रज़ा भूल गए हैं शायद और कुछ ज़ुल्म भी सय्याद बहुत करता है, उस के जैसा तो कोई चाहने वाला ही नहीं कर के पाबंद जो आज़ाद बहुत करता है, बस्तियों में वो कभी ख़ाक उड़ा देता है कभी सहराओं को आबाद बहुत करता है, ग़म के रिश्तों को कभी तोड़ न देना वाली ग़म ख़याल ए दिल ए नाशाद बहुत करता है..!! - [ज़िंदगी से यही गिला है मुझे](https://hindigazals.com/zindagi-se-yahi-gila/): ज़िंदगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे, तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे, दिल धड़कता नहीं टपकता है कल जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे, हमसफ़र चाहिए हुजूम नहीं एक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे, कोहकन हो कि क़ैस हो कि फ़राज़ सब में एक शख़्स ही मिला है मुझे..!! - [ज़माने की हवा बदली उधर रंग ए चमन बदला](https://hindigazals.com/zamane-ki-hawa-badli/): ज़माने की हवा बदली उधर रंग ए चमन बदला गुलों ने जब रविश बदली अनादिल ने वतन बदला, तरीक़ा आश्नाई का कभी ऐसा न बदला था कि चाल उश्शाक़ ने बदली हसीनों ने चलन बदला, बदलते आए हैं यूँ तो हमेशा दौर गर्दूं के न ऐसा भी कि हम बदले हमारा कुल जतन बदला, मक़ासिद मज़हब ओ मिल्लत के बदले दौर ए आलम ने सहाइफ़ की शरह बदली किताबों का मतन बदला, बदल डाला है ऐसा मग़रिबी तहज़ीब ने हम को मज़ाक़ ए ख़वान ए निअमत और तर्ज़ ए पैरहन बदला, पुरानी चाल बेढंगी हमारी देखें कब बदले अभी तक जुग ही बदले थे ग़ज़ब ये है क़रन बदला, न बदला पर न बदला हाए तर्ज़ ए मअशरत क़ौमी अगरचे सारी दुनिया का हुनर और इल्म ओ फ़न बदला, निज़ाम ए शाएरी में हाए आया इंक़लाब ऐसा कि शान ए नज़्म बदली और अंदाज़ ए सुख़न बदला, सलीक़ा इंतिक़ाद ए जिंस ए हिरफ़त का नहीं हमको ज़र ए ख़ालिस से अबरेशम नुमा यूरोप ने सन बदला, न बदला है न बदलेगा फ़क़त क़ानून ए इस्लामी क़मर जब तक कि क़ुदरत ने न ये चर्ख़ ए कुहन बदला..!! - [हर तरफ़ महकी हुई मेरे चमन की ख़ुशबू](https://hindigazals.com/har-taraf-mahki-hui/): हर तरफ़ महकी हुई मेरे चमन की ख़ुशबू है फ़ज़ाओ में अज़ानों की भजन की ख़ुशबू, मुझ को विर्से में मिली गंग ओ जमन की ख़ुशबू मेरी हर साँस में बस्ती है वतन की ख़ुशबू, छाई रहती है मेंरे सर पे घटाओं की तरह हाँ ये ख़ुशबू है मेंरी माँ की दुआओं की तरह, दिल की दुनिया हुई गुलज़ार इसी ख़ुशबू से शायरी है मेंरी सरशार इसी ख़ुशबू से, है ये रानाई ए अफ़्कार इसी ख़ुशबू से है मोअत्तर मेंरा किरदार इसी ख़ुशबू से, एक दिन मैं इसी ख़ुशबू ही में खो जाऊँगी ओढ़ कर ख़ाक ए वतन ख़ाक में सो जाऊँगी..!! - [आओ मनाएँ हम सब मिल कर अब जश्न ए आज़ादी](https://hindigazals.com/aao-manayayen-ham-sab/) - [अहिंसा की शमशीर चमकी इसी दिन](https://hindigazals.com/ahinsa-ki-shamshir-chamki/): अहिंसा की शमशीर चमकी इसी दिन ग़ुलामी की ज़ंजीर टूटी इसी दिन, गुलिस्ताँ की तक़दीर बदली इसी दिन उठो आज ख़ुशियों के हम गीत गाएँ, चलो अपनी धरती को दुल्हन बनाएँ खुले कैसे कैसे भरम दुश्मनों के, रहे फिर न बाक़ी सितम दुश्मनों के मिटे इस ज़मीं से क़दम दुश्मनों के, उठो आज ख़ुशियों के हम गीत गाएँ चलो अपनी धरती को दुल्हन बनाएँ, इसी दिन की ख़ातिर बड़े ग़म उठाए ज़मीं आसमाँ के क़ुलाबे मिलाए, ज़रा भी न अपने क़दम डगमगाए उठो आज ख़ुशियों के हम गीत गाएँ, ये वो दिन है हम जिस की बरकत को समझें यही दिन है वो जिस की क़ीमत को समझें यही दिन है वो जिस की अज़्मत को समझें, तिरंगे को हम और ऊँचा उठा दें चराग़ों से हर बाम ओ दर को सजा दें, ज़माने को ये सरख़ुशी भी दिखा दें उठो आज ख़ुशियों के हम गीत गाएँ चलो अपनी धरती को दुल्हन बनाएँ..!! - [फ़र्द फ़र्द मस्त है आज पंद्रह अगस्त है](https://hindigazals.com/fard-fard-mast-hai/): फ़र्द फ़र्द मस्त है, आज पंद्रह अगस्त है जोश है उबाल है, रंग है गुलाल है, गली गली हैं रौनक़ें, अजीब सी हैं रौनक़ें हम कभी ग़ुलाम थे, भारती ग़ुलाम थे, ज़िंदगी की शाम थी, साँस तक ग़ुलाम थी फ़िरंगियों के जौर से, भारती निढाल थे, ज़ुल्म जब बहुत हुआ, अपनी हद से बढ़ गया भारती बिफर गए, हम सभी बिफर गए, जान ओ माल तज दिया, घर अयाल तज दिया एक हो गए जो हम,दूर हो गया अलम, हुर्रियत मिली हमें, आफ़ियत मिली हमें फ़र्द फ़र्द मस्त है, आज पंद्रह अगस्त है..!! - [इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही](https://hindigazals.com/ilm-o-hunar-se-qaum-ko-ragbat-nahin-rahi/): इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही इस पर शिकायतें कि फ़ज़ीलत नहीं रही, बदलेगा क्या निज़ाम कब आएगा इंक़िलाब जब नौजवाँ लहू में हरारत नहीं रही, मज़लूम को दिलाए जो हर ज़ुल्म से नजात ऐसी जहाँ में कोई अदालत नहीं रही, सज्दे में जा के माँगना बे कार नेमतें कुछ भी कहो उसे ये इबादत नहीं रही, फ़तवे लिए हैं शैख़ से पीर ए मुग़ाँ ने ख़ास पीने में अब ज़रा भी क़बाहत नहीं रही, मस्जिद का रुख़ किया है जनाब ए फ़रोग़ ने लगता है अब गुनाह में लज़्ज़त नहीं रही..!! - [पिछले किसी सफ़र का सितारा न ढूँढ ले](https://hindigazals.com/pichhle-kisi-safar-ka-sitara-naa-dhoondh-le/): पिछले किसी सफ़र का सितारा न ढूँढ ले फिर से कहीं वो साथ हमारा न ढूँढ ले, जिस को कि ढूँढती हैं समुंदर की वुसअतें देखो कहीं वो शख़्स किनारा न ढूँढ ले, मंज़िल है उस के नाम बस इतना रहे ख़याल रस्ते में नक़्श ए पा वो हमारा न ढूँढ ले, मानी थी एक बार जो दिल ने ख़िरद की बात वैसा ये एतिदाल दोबारा न ढूँढ ले, होता नहीं किसी से हक़ इस का अदा फ़रोग़ क्यूँ ज़िंदगी अजल का सहारा न ढूँढ ले..?? - [दिल के अंदर एक ज़रा सी बे कली है आज भी](https://hindigazals.com/dil-ke-andar-ek-zara-see-be-kali-hai/): दिल के अंदर एक ज़रा सी बे कली है आज भी जो मेरे अफ़्कार में रस घोलती है आज भी, यूँ तो वो दीवार बन के आ गया है दरमियाँ मेरी अपने आप से कुछ दोस्ती है आज भी, पत्थरों पर चल के सब ने पाँव ज़ख़्मी कर लिए जबकि उस के दर का रस्ता मख़मली है आज भी, रुख़ हवाओं का बदलना जानते हैं लोग जो बस उन्हीं के हर दिए में रौशनी है आज भी, जिन सवालों का नहीं होता कोई मुसबत जवाब उन सवालों से उलझता आदमी है आज भी, सीखता है यूँ तो इंसाँ हर तरीक़े की ज़बाँ सब से आसाँ सब से बेहतर ख़ामुशी है आज भी, जिस के चलते मैं ने ढूँढे थे कई रस्ते नए ढूँढती मुझ को वही आवारगी है आज भी, कितने डूबे कितने उभरे क्या ख़बर उन को फ़रोग़ बह रही चुप चाप यूँ ही हर नदी है आज भी..!! - [मेरे चेहरे में कोई और ही चेहरा देखे](https://hindigazals.com/mere-chehre-me-koi-aur-hi/): मेरे चेहरे में कोई और ही चेहरा देखे वक़्त माथे की लकीरों में वो ठहरा देखे, सब को देती है अलग रंग ये तस्वीर ए हयात सब्ज़ गुलशन तो कोई धूल का सहरा देखे, उस के हाथों में जो रहती है वो ताबीर रहे क्यूँ मगर दे के मेरे ख़्वाब पे पहरा देखे, उस को एहसास की नायाब गुहर मिलते हैं डूब कर बहर ए तख़य्युल में जो गहरा देखे, नाम लिखा है अनोखा सा कहीं एक फ़रोग़ दिल मोहब्बत का हर एक बाब सुनहरा देखे..!! - [कहता रहे ज़माना गुनहगार ज़िंदगी](https://hindigazals.com/kahta-rahe-zamana-gunahgaar-zindagi/): कहता रहे ज़माना गुनहगार ज़िंदगी कुछ लोग जी रहे हैं मज़ेदार ज़िंदगी, किरदार अपना अपना निभाते हैं सब यहाँ समझो न तुम किसी की है बे कार ज़िंदगी, एक वक़्फ़ा ए अजल भी तो आता है दरमियाँ चलती नहीं किसी की लगातार ज़िंदगी, आगे निकल चुके थे हम अपने वुजूद से फिर भी हुई न कम तेरी रफ़्तार ज़िंदगी, रस्ते कई हसीन निकलते जहाँ से थे लाई थी ऐसे मोड़ पे एक बार ज़िंदगी, है ज़िंदगी से शिकवा उन्हें भी बहुत फ़रोग़ हिस्से में जिन के आई है गुलज़ार ज़िंदगी..!! - [हर किसी की है ज़बानी दोस्ती](https://hindigazals.com/har-kisi-ki-hai-zabani-dosti/): हर किसी की है ज़बानी दोस्ती क्या किसी की आज़मानी दोस्ती, थे मुसाफ़िर दो अलग रस्तों के हम हो गई बस ना गहानी दोस्ती, ढूँढता है हर रिफ़ाक़त में नई दिल हमेशा एक पुरानी दोस्ती, दफ़्न है सीने में मेरे आज भी उस की मेरी आँ जहानी दोस्ती, दोस्तों को दिल दुखाना आ गया आ गई हम को निभानी दोस्ती, कुछ तो तेरी भी ख़ता होगी फ़रोग़ गर हुई है सरगिरानी दोस्ती..!! - [मिल के बैठें तो हम कहीं पहले](https://hindigazals.com/mil-ke-baithe-to-hum-kahin-pahle/): मिल के बैठें तो हम कहीं पहले बाँट लेते हैं क्यूँ ज़मीं पहले ? - [अक़्ल की ऐसी ताबेदारी है](https://hindigazals.com/akl-ki-aisi-taabedari-hai/): अक़्ल की ऐसी ताबेदारी है ख़्वाहिशों में भी इंकिसारी है, चल पड़ी है अजल की राहों पर ज़िंदगी बे ख़बर सवारी है, दिल से अपने जो हार जाते हैं सारी दुनिया उन्हीं से हारी है, इस मईशत में कामयाबी का राज़ कौन कितना बड़ा जुआरी है, दीन समझे हैं जिस को आप फ़रोग़ शैख़ जी की दुकानदारी है..!! - [हैं मेरी परवाज़ के तेवर नए](https://hindigazals.com/hain-meri-parwaz-ke-tewar-naye/): हैं मेरी परवाज़ के तेवर नए साथ मेरे देखिए मंज़र नए, एक पुराने मयकदे में तिश्नगी ढूँढती है साक़ी ओ साग़र नए, बचपने का घर न भूलेगा कभी चाहे जितने आप के हों घर नए, कीजिए हर इल्म से आरास्ता बच्चियों के हैं यही ज़ेवर नए, एक नए फ़ुटपाथ पर मज़दूर था मुफ़्लिसी ने जब दिए बिस्तर नए, अब ज़रा ताबीर भी बदले फ़रोग़ देखता हूँ ख़्वाब तो अक्सर नए..!! - [कोई काबा न कलीसा न सनम मेरा है](https://hindigazals.com/koi-qaaba-na-kalisa-na-sanam-mera-hai/): कोई काबा न कलीसा न सनम मेरा है एक नए ख़्वाब की धरती पे क़दम मेरा है, सारी दुनिया से हमा वक़्त जुड़ा रहता हूँ राब्ता ख़ुद से मगर आज भी कम मेरा है, दिल को एहसास के उस मोड़ पे लाई है हयात अब न मेरी है ख़ुशी और न ग़म मेरा है, अब भी डरता हूँ हर एक बात में लिखने से फ़रोग़ तुम ये कहते हो कि आज़ाद क़लम मेरा है..!! - [अब आप रह ए दिल जो कुशादा नहीं रखते](https://hindigazals.com/ab-aap-rah-e-dil-jo-kushaada-nahin/): अब आप रह ए दिल जो कुशादा नहीं रखते हम भी सफ़र ए जाँ का इरादा नहीं रखते, पीना हो तो एक जुरआ ए ज़हराब बहुत है हम तिश्ना दहन तोहमत ए बादा नहीं रखते, अश्कों से चराग़ाँ है शब ए ज़ीस्त सो वो भी कोताही ए मिज़्गाँ से ज़ियादा नहीं रखते, ये गर्द ए रह ए शौक़ ही जम जाए बदन पर रुस्वा हैं कि हम कोई लबादा नहीं रखते, हर गाम पे जुगनू सा चमकता है जो दिल में हम इस के सिवा मिशअल ए जादा नहीं रखते, सुर्ख़ी नहीं फूलों की तो ज़ख़्मों की शफ़क़ है दामान ए तलब हम कभी सादा नहीं रखते..!! - [इस ख़ाकदाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से](https://hindigazals.com/is-khaaqdaan-me-ab-tak-baaqi-hai/): इस ख़ाकदाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से दामन बचा के गुज़रो यादों की रहगुज़र से, हर हर क़दम पे आँखें थीं फ़र्श ए राह लेकिन वो रौशनी का हाला उतरा न बाम पर से, क्यूँ जादा ए वफ़ा पर मिशअल ब कफ़ खड़े हो इस सैल ए तीरगी में निकलेगा कौन घर से ? - [गूँजता है नाला ए महताब आधी रात को](https://hindigazals.com/goonjta-hai-naalaa-e-maahtab/): गूँजता है नाला ए महताब आधी रात को टूट जाते हैं सुहाने ख़्वाब आधी रात को, भागते सायों की चीख़ें टूटते तारों का शोर मैं हूँ और एक महशर ए बे ख़्वाब आधी रात को, शाम ही से बज़्म ए अंजुम नश्शा ए ग़फ़लत में थी चाँद ने भी पी लिया ज़हराब आधी रात को, एक शिकस्ता ख़्वाब की कड़ियाँ मिलाने आए हैं देर से बिछड़े हुए अहबाब आधी रात को, दौलत ए एहसास ए ग़म की इतनी अर्ज़ानी हुई नींद सी शय हो गई नायाब आधी रात को..!! - [पर्दा ए शब की ओट में ज़ोहरा जमाल खो गए](https://hindigazals.com/parda-e-shab-ki-ot-me-zohra-zamal/): पर्दा ए शब की ओट में ज़ोहरा जमाल खो गए दिल का कँवल बुझा तो शहर तीरा ओ तार हो गए, एक हमें ही ऐ सहर नींद न आई रात भर ज़ानू ए शब पे रख के सर सारे चराग़ सो गए, राह में थे बबूल भी रूद ए शरर भी धूल भी जाना हमें ज़रूर था गुल के तवाफ़ को गए, दीदावरो बताएँ क्या तुम को यक़ीं न आएगा चेहरे थे जिन के चाँद से सीने में दाग़ बो गए, दाग़ ए शिकस्त दोस्तो देखो किसे नसीब हो बैठे हुए हैं तेज़ रौ सुस्त ख़िराम तो गए, अहल ए जुनूँ के दिल शकेब नर्म थे मोम की तरह तेशा ए यास जब चला तूदा ए संग हो गए..!! - [दिल के वीराने में एक फूल खिला रहता है](https://hindigazals.com/dil-ke-veerane-me-ek-phool-khila/): दिल के वीराने में एक फूल खिला रहता है कोई मौसम हो मेरा ज़ख़्म हरा रहता है, शब को होगा उफ़ुक़ ए जाँ से तेरा हुस्न तुलूअ ये वो ख़ुर्शीद है जो दिन को छुपा रहता है, यही दीवार ए जुदाई है ज़माने वालो हर घड़ी कोई मुक़ाबिल में खड़ा रहता है, कितना चुप चाप ही गुज़रे कोई मेरे दिल से मुद्दतों सब्त निशान ए कफ़ ए पा रहता है, सारे दर बंद हुए शहर में दीवाने पर एक ख़्वाबों का दरीचा ही खुला रहता है..!! - [मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन](https://hindigazals.com/maan-le-ab-bhi-meri-jaan-e-adaa/): मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन काम आती नहीं फिर कोई दुआ दर्द न चुन, और कुछ देर में मुझ को चले जाना होगा और कुछ देर मुझे ख़्वाब दिखा दर्द न चुन, एक भी दर्द न कम होगा कई सदियों में अब भी कहता हूँ तुझे वक़्त बचा दर्द न चुन, वो जो लिखा है किसी तौर नहीं टल सकता आ मेरे दिल में कोई दीप जला दर्द न चुन, मैं तेरे लम्स से महरूम न रह जाऊँ कहीं आख़िरी बार मुझे ख़ुद से लगा दर्द न चुन, अब तो ये रेशमी पोरें भी छिदी जाती हैं ख़ुद को अब बख़्श भी दे ज़ुल्म न ढह दर्द न चुन, ये नहीं होंगे तो खाए नहीं हो जाऊँगा मैं मेरे ज़ख़्मों से कोई गीत बना दर्द न चुन, कुछ न देगा ये मसाइल से उलझते रहना छोड़ सब कुछ मेरी बाँहों में समा दर्द न चुन..!! - [डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त](https://hindigazals.com/doobta-saaf-nazar-aaya-kinara-koi/): डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त फिर भी कश्ती से नहीं हम ने उतारा कोई दोस्त, जब भी नेकी का कोई काम किया है हम ने दे दिया रब ने हमें आप से प्यारा कोई दोस्त, जीत पर ख़ुश हो तुझे इस से ग़रज़ क्या मेरे यार तेरी ख़ुशियों के लिए जान से हारा कोई दोस्त, कैसे जी पाएँगे इस शहर ए परेशाँ में जहाँ कोई दुश्मन है हमारा न हमारा कोई दोस्त, कुछ तो जीने के लिए हम को भी दे रब्ब ए करीम साग़र ओ मीना किसी ग़म का सहारा कोई दोस्त, रूठ जाए मेरी आँखों से भले बीनाई काश रूठे न वसी आँख का तारा कोई दोस्त..!! - [तेरी जानिब अगर चले होते](https://hindigazals.com/teri-zanib-agar-chale-hote/): तेरी जानिब अगर चले होते हम न यूँ दर ब दर हुए होते, सारी दुनिया है मेरी मुट्ठी में कौन आएगा अब तेरे होते ? - [कितनी ज़ुल्फ़ें उड़ीं कितने आँचल उड़े चाँद को क्या ख़बर](https://hindigazals.com/kitni-zulfen-udi-kitne-aanchal-ude/): कितनी ज़ुल्फ़ें उड़ीं कितने आँचल उड़े चाँद को क्या ख़बर कितना मातम हुआ कितने आँसू बहे चाँद को क्या ख़बर ? - [गली में दर्द के पुर्ज़े तलाश करती थी](https://hindigazals.com/gali-me-dard-ke-purje-talash-karti-thi/): गली में दर्द के पुर्ज़े तलाश करती थी मेरे ख़ुतूत के टुकड़े तलाश करती थी, कहाँ गई वो कुँवारी उदास बी आपा जो गाँव गाँव में रिश्ते तलाश करती थी, भुलाए कौन अज़िय्यत पसंदियाँ उस की ख़ुशी के ढेर में सदमे तलाश करती थी, अजीब हिज्र परस्ती थी उस की फ़ितरत में शजर के टूटते पत्ते तलाश करती थी, क़याम करती थी वो मुझ में सूफ़ियों की तरह उदास रूह के गोशे तलाश करती थी, तमाम रात को पर्दे हटा के चाँद के साथ जो खो गए थे वो लम्हे तलाश करती थी, कुछ इस लिए भी मेरे घर से उस को थी वहशत यहाँ भी अपने ही प्यारे तलाश करती थी, घुमा फिरा के जुदाई की बात करती थी हमेशा हिज्र के हरबे तलाश करती थी, तमाम रात वो ज़ख़मा के अपने पोरों को मेरे वजूद के रेज़े तलाश करती थी, दुआएँ करती थी उजड़े हुए मज़ारों पर बड़े अजीब सहारे तलाश करती थी, मुझे तो आज बताया है बादलों ने वसी वो लौट आने के रस्ते तलाश करती थी..!! - [हम ने जो दीप जलाए हैं तेरी गलियों में](https://hindigazals.com/hum-ne-jo-deep-jalayae-hain/): हम ने जो दीप जलाए हैं तेरी गलियों में अपने कुछ ख़्वाब सजाए हैं तेरी गलियों में, जाने ये इश्क़ है या कोई करामत अपनी चाँद ले कर चले आए हैं तेरी गलियों में, तज़्किरा हो तेरी गलियों का तो डर जाता है दिल ने वो ज़ख़्म उठाए हैं तेरी गलियों में, इस लिए भी तेरी गलियों से हमें नफ़रत है हम ने अरमान गँवाए हैं तेरी गलियों में, क्यूँ हर एक चीज़ अधूरी सी हमें लगती है जाने क्या छोड़ के आएँ हैं तेरी गलियों में..!! - [वो ख़ुश अंदाज़ ओ ख़ुश अतवार कहीं मिलते हैं](https://hindigazals.com/wo-khush-andaz-o-khush-avtar-kahin-milte/): वो ख़ुश अंदाज़ ओ ख़ुश अतवार कहीं मिलते हैं ज़िंदगी तेरे परस्तार कहीं मिलते हैं, जैसे एक मोड़ पे मिलते हैं कहीं शाम ओ सहर उस तरह भी दिल ओ दिलदार कहीं मिलते हैं, जैसी आँखें हैं तेरी और ये दिल है जैसा ऐसे शर्मिंदा ए इज़हार कहीं मिलते हैं, एक दीवाना ए दुनिया का था जन्नत से सवाल क्या यहाँ दिरहम ओ दीनार कहीं मिलते हैं, किसी बाज़ार में मिलती है जुनूँ नाम की शय हौसले इश्क़ के तैयार कहीं मिलते हैं, ढूँढ़ ले ढूँढ़ सके कोई अगर राह ए फ़रार एक जानिब दर ओ दीवार कहीं मिलते हैं, तुम से मिलना भी है मिलना भी नहीं है तुम से आओ तुम से सर ए बाज़ार कहीं मिलते हैं, या तेरी बज़्म में हैं या मेरे दिल में अजमल ज़िंदगी के अगर आसार कहीं मिलते हैं..!! - [इश्क़ से अक़्ल का फ़ुक़्दान ख़रीदा हम ने](https://hindigazals.com/ishq-se-aql-ka-fuqdaan-kharida-ham-ne/): इश्क़ से अक़्ल का फ़ुक़्दान ख़रीदा हम ने और वो भी अलल ऐलान ख़रीदा हम ने, हम ने पत्थर भी ख़रीदा तो वो आईना था कभी याक़ूत न मरजान ख़रीदा हम ने, भूलने के लिए वो साअत ए पैमान ए अलस्त वक़्त से एक नया पैमान ख़रीदा हम ने, शोर उठा था कि नाबूद हुआ है कोई जब तेरे वस्ल का अरमान ख़रीदा हम ने, कितने लम्हात को अपने लिए दुश्वार किया तब कोई लम्हा ए आसान ख़रीदा हम ने, बंद होने को दुकाँ है तो ख़याल आया है फ़ाएदा छोड़ के नुक़्सान ख़रीदा हम ने, फ़ीस भरने के लिए जेब में पैसे भी न थे जिन दिनों मीर का दीवान ख़रीदा हम ने..!! - [दुश्वार है इस अंजुमन आरा को समझना](https://hindigazals.com/dushwaar-hai-is-anjuman-aara-ko-samjhna/): दुश्वार है इस अंजुमन आरा को समझना तन्हा न कभी तुम दिल ए तन्हा को समझना, हो जाए तो हो जाए इज़ाफ़ा ग़म ए दिल में क्या अक़्ल से सौदा ए तमन्ना को समझना, एक लम्हा ए हैरत के सिवा कुछ भी नहीं है कुछ और न इस तुंदी ए दरिया को समझना, कुछ तेज़ हवाओं ने भी दुश्वार किया है क़दमों के निशानात से सहरा को समझना..!! - [वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी](https://hindigazals.com/wahi-bebaki-e-ushshaaq-hai-darkar-ab-bhi/): वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी है वही सिलसिला ए आतिश ओ गुलज़ार अब भी, अब भी मौजूद है वो बैअत ए फ़ासिक़ का सवाल और मतलूब है वो जुरअत ए इंकार अब भी, हैं कहाँ इश्क़ में घर बार लुटाने वाले ख़ू ए ईसार से मग़लूब हैं अंसार अब भी, कोई यूसुफ़ तो ज़माना करे पैदा अजमल नज़र आ सकती है वो गर्मी ए बाज़ार अब भी..!! - [मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता](https://hindigazals.com/maaal-e-ahal-e-zamin-bar-sar-e-zamin/): मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता जो बे यक़ीन हैं उन को भी फिर यक़ीं आता, कहीं तो हम भी ठहरते जो हमनशीनी को निकल के ख़्वाब से वो यार ए दिलनशीं आता, वो जब तलक नहीं आता पुकारते रहते तो देख लेते कि वो कब तलक नहीं आता, ख़याल आया तो ये भी ख़याल आया है यही ख़याल अगर रोज़ ए अव्वलीं आता, चलो अब उस की ख़ुशी वो जहाँ भी मिल जाए मज़ा तो जब था कि मिलने को वो यहीं आता, बस एक बात हमारी समझ में आती है समझ में वर्ना हमारी भी कुछ नहीं आता..!! - [गुज़र गई है अभी साअत ए गुज़िश्ता भी](https://hindigazals.com/guzar-gayi-hai-abhi-saaat-e-guzishta/): गुज़र गई है अभी साअत ए गुज़िश्ता भी नज़र उठा कि गुज़र जाएगा ये लम्हा भी, बहुत क़रीब से हो कर गुज़र गई दुनिया बहुत क़रीब से देखा है ये तमाशा भी, गुज़र रहे हैं जो बार ए नज़र उठाए हुए ये लोग महव ए तमाशा भी हैं तमाशा भी, वो दिन भी थे कि तेरी ख़्वाबगीं निगाहों से पुकारती थी मुझे ज़िंदगी भी दुनिया भी, जो बे सबाती ए आलम पे बहस थी सर ए बज़्म मैं चुप रहा कि मुझे याद था वो चेहरा भी, कभी तो चाँद भी उतरेगा दिल के आँगन में कभी तो मौज में आएगा ये किनारा भी, निकाल दिल से गए मौसमों की याद अजमल तेरी तलाश में इमरोज़ भी है फ़र्दा भी..!! - [हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे](https://hindigazals.com/hum-pas-e-waham-o-gumaan-bhi-dekh/): हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे देखने वाले यहाँ भी देख लेते हैं तुझे, देख लेते हैं तुझे दिल के दरीचे खोल कर तोड़ कर दीवार ए जाँ भी देख लेते हैं तुझे, देख लेते हैं तुझे हम तो तह ए गिर्दाब भी और पस ए मौज ए रवाँ भी देख लेते हैं तुझे, देख लेते हैं तुझे हम क़हक़हों की गूँज में आँसुओं के दरमियाँ भी देख लेते हैं तुझे, देखते हैं जब तुझे हम तो हमारे साथ साथ ये ज़मीन ओ आसमाँ भी देख लेते हैं तुझे, चलते रहते हैं जहाँ तक तू नज़र आता नहीं ठहर जाते हैं जहाँ भी देख लेते हैं तुझे, बात तो ये है कि अजमल तू कहाँ होता नहीं तू कहीं भी हो कहाँ भी देख लेते हैं तुझे..!! - [हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे](https://hindigazals.com/ham-apne-aap-me-rahte-hain/): हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे हमारे साथ हों दो चार भी जो हम जैसे, किसे दिमाग़ जुनूँ की मिज़ाज पुर्सी का सुनेगा कौन गुज़रती है शाम ए ग़म जैसे, भला हुआ कि तेरा नक़्श ए पा नज़र आया ख़िरद को रास्ता समझे हुए थे हम जैसे, मेरी मिसाल तो ऐसी है जैसे ख़्वाब कोई मेरा वजूद समझ लीजिए अदम जैसे, अब आप ख़ुद ही बताएँ ये ज़िंदगी क्या है ? - [जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब](https://hindigazals.com/jo-ashk-barsa-rahe-hai-sahib/): जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब ये राएगाँ जा रहे हैं साहिब, यही तग़य्युर तो ज़िंदगी है अबस घुले जा रहे हैं साहिब, जो हो गया है सो हो गया है फ़ुज़ूल पछता रहे हैं साहिब, ये सिर्फ़ गिनती के चार दिन हैं बड़े मज़े आ रहे हैं साहिब, अभी तो ये ख़ाक हो रहेगा जो जिस्म चमका रहे हैं साहिब, कोई इरादा न कोई जादा कहाँ किधर जा रहे हैं साहिब, इधर ज़रा ग़ौर से तो देखें ये फूल मुरझा रहे हैं साहिब, जहाँ की नायाफ़्त के सबब में जहाँ का ग़म खा रहे हैं साहिब, ये मैं नहीं हूँ ये मेरा दिल है ये किस को समझा रहे हैं साहिब, सुकून की नींद सोइएगा वो दिन भी बस आ रहे हैं साहिब, जो आप के हिज्र में मिले हैं ये दिन गिने जा रहे हैं साहिब, बस अब नहीं कुछ भी याद मुझ को बस आप याद आ रहे हैं साहिब..!! - [नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम](https://hindigazals.com/nazar-aa-rahe-hai-jo-tanha-se-ham/): नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम, न परवाह हमें हाल ए बेहाल की न शर्मिंदा उम्र ए गुज़िश्ता से हम, भला कोई करता है मुर्दों से बात कहें क्या दिल ए बे तमन्ना से हम, नज़र में है जब से सरापा तेरा जभी से हैं कुछ बे सर ओ पा से हम, कोई जल-परी क्या परी भी न आई मगर ख़ुश हुए रात दरिया से हम, तमाशाई शश जिहत हैं सो हैं ख़ुद अपने लिए भी तमाशा से हम, समझना था दुनिया को यूँ भी मुहाल समझते थे दुनिया को दुनिया से हम..!! - [ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा](https://hindigazals.com/zamin-par-aasmaan-kab-tak-rahega/): ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा ये हैरत का मकाँ कब तक रहेगा ? नज़र कब आश्ना ए रंग होगी तमाशा ए ख़िज़ाँ कब तक रहेगा ? - [जिसके साथ अपनी माँ की दुआएँ होती है](https://hindigazals.com/jiske-saath-apni-maa-ki-duaayen-hoti-hai/): जिसके साथ अपनी माँ की दुआएँ होती है उसके मुक़द्दर में जन्नत की हवाएँ होती है, जिसे माँ की गोद से अच्छा दरस मिला हो वही जानता है कि माँ की क़दर क्या होती है, औलाद ग़मों को कभी छिपा नहीं सकती माँ बच्चों की हर बात से आगाह होती है, जिन लोगों की माएँ दुनियाँ में नहीं हैं कभी उनसे पूछो कि माँ क्या होती है ? - [जो कहीं ना मिले वो ख़ुशी चाहिए](https://hindigazals.com/jo-kahin-naa-mile-wo-khushi-chahiye/): जो कहीं ना मिले वो ख़ुशी चाहिए दर्द चाहे कैसा भी हो बंदगी चाहिए, मुझे अब ख्वाहिश ए दुनिया नहीं आख़िरत की मुझे ज़िन्दगी चाहिए, फक़त तेरे ही आगे हाथ फैलाऊँ या अल्लाह मुझे ऐसी बेबसी चाहिए, मैं भटक जाऊँ तो आसरा दे मुझे या अल्लाह मुझे तेरी रहबरी चाहिए, गर मैं सज़दे में गिरू तो गिरा ही रहूँ इबादत में बस ऐसी आज़िज़ी चाहिए..!! - [एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है](https://hindigazals.com/ek-chehre-par-roz-guzara-hota-hai/): एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है प्यार किसी को कब दोबारा होता है मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है, तुम मेरे इस दिल को पागल मत कहना अपना बच्चा सब को प्यारा होता है, तुम जाओ पर यादों को तो रहने दो यादों का भी एक सहारा होता है, उस पंछी का हाल सचिन किसने समझा जो पिंजरे में क़ैद दोबारा होता है..!! - [ये नहर ए आब भी उस की है मुल्क ए शाम उस का](https://hindigazals.com/ye-nahar-e-aab-bhi-us-ki-hai/): ये नहर ए आब भी उस की है मुल्क ए शाम उस का जो हश्र मुझ पे बपा है वो एहतिमाम उस का, सिपाह ए ताज़ा भी उस की सफ़ ए निगाह से है सफ़ा ए सीन ए शमशीर पर है नाम उस का, अमान ख़ेमा ए रम ख़ुर्दगाँ में बाक़ी है कि ना तमाम है एक शौक़ ए क़त्ल ए आम उस का, किताब ए उम्र से सब हर्फ़ उड़ गए मेरे कि मुझ असीर को होना है हम कलाम उस का, दिल ए शिकस्ता को लाना है रू ब रू उस के जो मुझ से नर्म हुआ कोई बंद दाम उस का, मैं उस के हाथ से किस ज़ख़्म में कमी रखूँ शुरू ए नाज़ भी उस का है इख़्तिताम उस का..!! - [वो बख्शता है गुनाह ए अज़ीम भी लेकिन](https://hindigazals.com/wo-bakhshta-hai-gunaah-e-azim-bhi/) - [किसी की ना सुनिए ख़ुद की सुनाते जाइए](https://hindigazals.com/kisi-ki-naa-suniye-khud-ki-sunaate-jaaiye/): किसी की ना सुनिए ख़ुद की सुनाते जाइए आप जो है ख़ुद वही सबको बनाते जाइए, मुर्दा ज़मीरो का भी कुछ तो निशाँ बाक़ी रहे काम किसी का भी हो अपना बताते जाइए, लानतो का अंबार हो या कि हो आह ओ बुका आप बस हर क़दम क़ौमी तराना गाते जाइए, तल्खियों से रूबरू होता रहे अहल ए चमन मगर आप हर सू नफरतो के बीज बोते जाइए..!! - [तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे](https://hindigazals.com/tumhare-aansoo-kabhi-bahne-na-denge/): तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे तुम्हे इस तरह उदास रहने न देंगे, तेरी नज़रों में हम बेवफ़ा ही सही किसी और को ये बात कहने न देंगे, तेरे क़दमों पे लुटा देंगे अपनी खुशियाँ पर तेरी ज़ीस्त में कोई गम रहने न देंगे, चुपके से चले आएँगे तेरे शहर हम दिल को तेरी जुदाई सहने न देंगे, किसी बात की तुमसे शिकायत न करेंगे अपनी चाहतो के तुम्हे गहने हम देंगे..!! - [क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ?](https://hindigazals.com/kya-kare-meri-masihaai-bhi-karne-wala/): क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ? - [मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में](https://hindigazals.com/main-shaakh-se-uda-tha-sitaron-ki/): मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में मुरझा के आ गिरा हूँ मगर सर्द घास में, सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो एक शिकन भी नहीं है लिबास में, सहरा की बूद ओ बाश है अच्छी न क्यूँ लगे सूखी हुई गुलाब की टहनी गिलास में, चमके नहीं नज़र में अभी नक़्श दूर के मसरूफ़ हूँ अभी अमल ए इनइकास में, धोखे से उस हसीं को अगर चूम भी लिया पाओगे दिल का ज़हर लबों की मिठास में, तारा कोई रिदा ए शब ए अब्र में न था बैठा था मैं उदास बयाबान ए यास में, जू ए रवान ए दश्त अभी सूखना नहीं सावन है दूर और वही शिद्दत है प्यास में, रहता था सामने तेरा चेहरा खुला हुआ पढ़ता था मैं किताब यही हर क्लास में, काँटों की बाड़ फाँद गया था मगर शकेब रस्ता न मिल सका मुझे फूलों की बास में..!! - [तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई](https://hindigazals.com/tujhe-kaise-ilm-na-ho-saka/): तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तेरे शहर ही की ये शाएरा तेरे इंतिज़ार में मर गई, कोई बातें थीं कोई था सबब जो मैं वादा कर के मुकर गई तेरे प्यार पर तो यक़ीन था मैं ख़ुद अपने आप से डर गई, वो तेरे मिज़ाज की बात थी ये मेरे मिज़ाज की बात है तू मेरी नज़र से न गिर सका मैं तेरी नज़र से उतर गई, है ख़ुदा गवाह तेरे बिना मेरी ज़िंदगी तो न कट सकी मुझे ये बता कि मेरे बिना तेरी उम्र कैसे गुज़र गई ? - [क्या ? खज़ूर के पेड़ो में झुकाव आ गया](https://hindigazals.com/kya-khazoor-ke-pedo-me-jhukaav-aa-gaya/): क्या ? खज़ूर के पेड़ो में झुकाव आ गया ज़नाब ! लगता है शहर में चुनाव आ गया, ग़रीब की थाली में भी आज पुलाव आ गया ज़नाब ! - [गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें](https://hindigazals.com/gulami-me-kaam-aati-shamshiren/): गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें जो हो ज़ौक ए यकीं पैदा तो कट जाती हैं जंज़ीरें, कोई अन्दाज़ा कर सकता है उसके ज़ोरे बाज़ू का निगाह मरद ए मोमिन से बदल जाती हैं तकदीरें, विलायत, पादशाही, इलम, अशया की जहांगीरी यह सब कया हैं फ़कत एक नुकता ए इमां की तफ़सीरें, बराहीमी नज़र पैदा मगर बड़ी मुश्किल से होती है हवस छुप छुप के सीने में बना लेती है तस्वीरें, तमीज़ बन्द ओ आका, फ़साद आदमीयत है हज़र ए चीरा ए दासतां सख़त हैं फ़ितरत की ताज़ीरें, हकीकत एक है हर शै की ख़ाकी हो के नूरी हो लहू खुरशीद का टपके, अगर ज़र्रे का दिल चीरें, यकीं मुहकम, अमल पैहम, मोहब्बत फ़ातहे आलम जेहाद ए ज़िन्दगानी में यह मरदों की शमशीरें..!! - [लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है](https://hindigazals.com/log-kya-khoob-wafaaon-ka-sila-dete-hain/): लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है ज़िन्दगी के हर मोड़ पे ज़ख्म नया देते है, कैसे मुमकिन है, दर्द हो और दिल ना जले चोट पड़ती है तो पत्थर भी सदा देते है, कौन होता है मुसीबत में किसी का ऐ दोस्त ! - [दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा](https://hindigazals.com/dil-ke-har-dard-ne-ashaar-me-dhalna-chaha/): दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा अपना पैराहन ए बे रंग बदलना चाहा, कोई अनजानी सी ताक़त थी जो आड़े आई वर्ना हम ने तो बहर गाम सँभलना चाहा, चाहते तो किसी पत्थर की तरह जी लेते हम ने ख़ुद मोम की मानिंद पिघलना चाहा, आँखें जलने लगीं तपते हुए बाज़ारों में दिल ने जब भी किसी मंज़र पे मचलना चाहा, सिर्फ़ हम ही नहीं हर एक ने जीने के लिए एक न एक झूठे सहारे से बहलना चाहा, कौन है ये जो सिसकता है मेरे सीने में कौन है जिस ने मेरे ख़ून पे पलना चाहा..!! - [जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया](https://hindigazals.com/jab-chhaai-ghata-lahraai-dhanak-ek-husn-e-muqammal/): जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया उन हाथों की मेहंदी याद आई उन आँखों का काजल याद आया, सौ तरह से ख़ुद को बहला कर हम जिस को भुलाए बैठे थे कल रात अचानक जाने क्यूँ वो हम को मुसलसल याद आया ? - [कोई सनम तो हो कोई अपना ख़ुदा तो हो](https://hindigazals.com/koi-sanam-to-ho-koi-apna-khuda-to-ho/): कोई सनम तो हो कोई अपना ख़ुदा तो हो इस दश्त ए बेकसी में कोई आसरा तो हो, कुछ धुँदले धुँदले ख़्वाब हैं कुछ काँपते चराग़ ज़ाद ए सफ़र यही है कुछ इस के सिवा तो हो, सूरज ही जब न चमके तो पिघलेगी बर्फ़ क्या ? - [अक्स हर रोज़ किसी ग़म का पड़ा करता है](https://hindigazals.com/aks-har-roz-kisi-gam-ka-pada-karta-hai/): अक्स हर रोज़ किसी ग़म का पड़ा करता है दिल वो आईना कि चुप चाप तका करता है, बहते पानी की तरह दर्द की भी शक्ल नहीं जब भी मिलता है नया रूप हुआ करता है, मैं तो बहरूप हूँ उस का जो है मेरे अंदर वो कोई और है जो मुझ में जिया करता है, रंग सा रोज़ बिखर जाता है दीवारों पर कुछ दिए जैसा दरीचे में जला करता है, जाने वो कौन है जो रात के सन्नाटे में कभी रोता है कभी ख़ुद पे हँसा करता है, रोज़ राहों से गुज़रता है सदाओं का जुलूस दिल का सन्नाटा मगर रोज़ बढ़ा करता है..!! - [घटती बढ़ती रौशनियों ने मुझे समझा नहीं](https://hindigazals.com/ghatti-badhti-raushniyo-ne-mujhe/): घटती बढ़ती रौशनियों ने मुझे समझा नहीं मैं किसी पत्थर किसी दीवार का साया नहीं, जाने किन रिश्तों ने मुझ को बाँध रखा है कि मैं मुद्दतों से आँधियों की ज़द में हूँ बिखरा नहीं, ज़िंदगी बिफरे हुए दरिया की कोई मौज है एक दफ़ा देखा जो मंज़र फिर कभी देखा नहीं, हर तरफ़ बिखरी हुई हैं आइने की किर्चियाँ रेज़ा रेज़ा अक्स हैं सालिम कोई चेहरा नहीं, कहते कहते कुछ बदल देता है क्यूँ बातों का रुख़ क्यूँ ख़ुद अपने आप के भी साथ वो सच्चा नहीं..?? - [बहुत था ख़ौफ़ जिस का फिर वही क़िस्सा निकल आया](https://hindigazals.com/bahut-khauf-tha-jis-ka-fir-wahi/): बहुत था ख़ौफ़ जिस का फिर वही क़िस्सा निकल आया मेरे दुख से किसी आवाज़ का रिश्ता निकल आया, वो सर से पाँव तक जैसे सुलगती शाम का मंज़र ये किस जादू की बस्ती में दिल ए तन्हा निकल आया, जिन आँखों की उदासी में बयाबाँ साँस लेते हैं उन्हीं की याद में नग़्मों का ये दरिया निकल आया, सुलगते दिल के आँगन में हुई ख़्वाबों की फिर बारिश कहीं कोंपल महक उठी कहीं पत्ता निकल आया, पिघल उठता है एक एक लफ़्ज़ जिन होंठों की हिद्दत से मैं उन की आँच पी कर और भी सच्चा निकल आया, गुमाँ था ज़िंदगी बेसम्त ओ बेमंज़िल बयाबाँ है मगर एक नाम पर फूलों भरा रस्ता निकल आया..!! - [चुपचाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो](https://hindigazals.com/chupchap-sulgata-hai-diya-tum-bhi/): चुपचाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो, महताब ब कफ़ रात किसे ढूँढ रही है ? - [रोज़ कहाँ से कोई नया पन अपने आप में लाएँगे](https://hindigazals.com/roz-roz-kahan-se-koi-naya-pan/): रोज़ कहाँ से कोई नया पन अपने आप में लाएँगे तुम भी तंग आ जाओगे एक दिन हम भी उक्ता जाएँगे, चढ़ता दरिया एक न एक दिन ख़ुद ही किनारे काटेगा अपने हँसते चेहरे कितने तूफ़ानों को छुपाएँगे ? - [समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं](https://hindigazals.com/samndar-me-utarta-hoon-to-aankhen/): समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है तेरे ग़म में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, न जाने हो गया हूँ इस क़दर हस्सास मैं कब से ? - [आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती](https://hindigazals.com/aankhon-se-meri-is-liye-laali-nahi/): आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती यादों से कोई रात जो ख़ाली नहीं जाती, अब उम्र न मौसम न वो रस्ते कि वो पलटे इस दिल की मगर ख़ाम ख़याली नहीं जाती, माँगे तो अगर जान भी हँस के तुझे दे दें तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती, आए कोई आ कर ये तेरे दर्द सँभाले हम से तो ये जागीर सँभाली नहीं जाती, मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से पर बात तेरी हम से उछाली नहीं जाती, हमराह तेरे फूल खिलाती थी जो दिल में अब शाम वही दर्द से ख़ाली नहीं जाती, हम जान से जाएँगे तभी बात बनेगी तुम से तो कोई राह निकाली नहीं जाती..!! - [मुझे बताया गया था यहाँ मोहब्बत है](https://hindigazals.com/mujhe-bataya-gaya-tha/): मुझे बताया गया था यहाँ मोहब्बत है मैं आ गया हूँ दिखाओ कहाँ मोहब्बत है ? - [लिपट के सोच से नींदें हराम करती है](https://hindigazals.com/lipat-ke-soch-se-neende-haram-karti-hai/): लिपट के सोच से नींदें हराम करती है तमाम शब तेरी हसरत कलाम करती है, हमी वो इल्म के रौशन चराग़ हैं जिन को हवा बुझाती नहीं है सलाम करती है, किसी भी तौर सिखाती नहीं है आज़ादी मेरे हुज़ूर मोहब्बत ग़ुलाम करती है, ये सर ब सज्दा कहा नेक दिल तवाइफ़ ने ख़ुदाया शुक्र कि बेटी भी काम करती है, फ़ना की झील में जिस तरह वक़्त रहता है कुछ इस तरह से वो मुझ में क़ियाम करती है, चराग़ ए मुफ़्लिस ओ बेबस का हाल हो जैसे हमारे साथ कुछ ऐसा ही शाम करती है, हवा ओ हिर्स की लानत का क्या करें ख़ालिद तेरी तलब को सलीक़े से राम करती है..!! - [राजनीति की राह में तो ये करते है वादे हज़ार](https://hindigazals.com/rajniti-ki-raah-me-to-ye-karte-hai/): राजनीति की राह में तो ये करते है वादे हज़ार निभाने की बारी जब भी आये हो जाते है बेज़ार, झूठे सपने बेच जनता को लुटते है सर ए बाज़ार फक़त चुनावी मौसम में बनते है रहनुमा ये यार, विकास की बातें करते फिरते गाँव में चौपाल में फिर ऐसे ग़ायब हो दिखे ही नहीं अगले पाँच साल में, वोट पाते ही ये यूँ रंग बदल लेते है जैसे हो गिरगिट शायद हम ही भूल जाते हैं यही है इनकी हक़ीक़त, सत्ता की कुर्सी पर जब सियासतदाँ बैठाये जाते हैं ग़रीब ओ मुफ़्लिस की थाली से निवाले चुराए जाते हैं, यही है क़िस्सा इनका यही है इनकी सच्ची कहानी बस चुनाव तक ही ज़िंदा है, इनका फेकना ज़ुबानी..!! - [न है बुतकदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है](https://hindigazals.com/na-hai-butqada-ki-talab-mujhe/): न है बुतकदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है जहाँ लुट गया है सुकून ए दिल उसी रहगुज़र की तलाश है, मेरे ज़ौक़ ए सज्दा ए बंदगी को अता हुई है ये बे ख़ुदी तेरे संग ए दर पे पहुँचे भी तेरे संग ए दर की तलाश है, तू हरम में जिस को है ढूँढता मुझे बुतकदा वो मिल गया तुझे क्या मलाल है ज़ाहिदा ये नज़र नज़र की तलाश है, ऐ तबीब हट जा परै ज़रा मैं मरीज़ ए इश्क़ हूँ ला दवा मुझे जिस ने दर्द अता किया उसी चारागर की तलाश है, जो ग़म ए हयात को लूट ले उसी राहज़न की है जुस्तुजू जो चराग़ ए मंज़िल ए इश्क़ हो उसी राहबर की तलाश है, मेरी ज़िंदगी है ये ज़िंदगी तेरे इश्क़ की न बुझे लगी तेरे ढूँढने में जो गुम हुई मुझे उस नज़र की तलाश है, ये है वो मक़ाम कि जिस जगह ये अमीर ए साबरी खो गया न रही है जल्वों की आरज़ू न ही जल्वागर की तलाश है..!! - [अब तो कोई भी किसी की बात नहीं समझता](https://hindigazals.com/ab-to-koi-bhi-kisi-ki-baat-nahin/): अब तो कोई भी किसी की बात नहीं समझता अब कोई भी किसी के जज़्बात नहीं समझता, अपने मज़े में ग़ाफ़िल पत्थर दिल हैं सब के सब अब तो कोई भी किसी के हालात नहीं समझता, हम किस से करें बयाँ अपने दिल की बातें यारो अब तो कोई भी किसी की आवाज़ नहीं समझता, भांप लेते थे लोग कभी चेहरे से ही दिल की बातें अब तो कोई भी किसी के अल्फाज़ नहीं समझता, तड़पते घायल को देखते हैं तमाशे की तरह बस अब तो कोई भी किसी की दरकार नहीं समझता, क्या से क्या हो गयी है ये दुनिया न जाने दोस्तों ! - [हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़ ए सफ़र जाएँगे](https://hindigazals.com/ham-musafir-yun-hi-masroof-e-safar/): हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़ ए सफ़र जाएँगे बे निशाँ हो गए जब शहर तो घर जाएँगे, किस क़दर होगा यहाँ मेहर ओ वफ़ा का मातम हम तेरी याद से जिस रोज़ उतर जाएँगे, जौहरी बंद किए जाते हैं बाज़ार ए सुख़न हम किसे बेचने अलमास ओ गुहर जाएँगे, नेमत ए ज़ीस्त का ये क़र्ज़ चुकेगा कैसे ? - [तेरी उम्मीद तेरा इंतिज़ार जब से है](https://hindigazals.com/teri-ummid-tera-intizar-jab-se-hai/): तेरी उम्मीद तेरा इंतिज़ार जब से है न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है, किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म गिला है जो भी किसी से तेरे सबब से है, हुआ है जब से दिल ए ना सुबूर बेक़ाबू कलाम तुझ से नज़र को बड़े अदब से है, अगर शरर है तो भड़के जो फूल है तो खिले तरह तरह की तलब तेरे रंग ए लब से है, कहाँ गए शब ए फ़ुर्क़त के जागने वाले सितारा ए सहरी हम कलाम कब से है..!! - [हर एक ने कहा क्यूँ तुझे आराम न आया](https://hindigazals.com/har-ek-ne-kaha-kyun-tujhe/): हर एक ने कहा क्यूँ तुझे आराम न आया सुनते रहे हम लब पे तेरा नाम न आया, दीवाने को तकती हैं तेरे शहर की गलियाँ निकला तो इधर लौट के बदनाम न आया, मत पूछ कि हम ज़ब्त की किस राह से गुज़रे ये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया, क्या जानिए क्या बीत गई दिन के सफ़र में वो मुंतज़िर ए शाम सर ए शाम न आया, ये तिश्नगियाँ कल भी थीं और आज भी ज़ैदी उस होंठ का साया भी मेरे काम न आया..!! - [तेरे चेहरे की तरह और मेरे सीने की तरह](https://hindigazals.com/tere-chehre-ki-tarah-aur-mere/): तेरे चेहरे की तरह और मेरे सीने की तरह मेरा हर शेर दमकता है नगीने की तरह, फूल जागे हैं कहीं तेरे बदन की मानिंद ओस महकी है कहीं तेरे पसीने की तरह, ऐ मुझे छोड़ के तूफ़ान में जाने वाली दोस्त होता है तलातुम में सफ़ीने की तरह, ऐ मेरे ग़म को ज़माने से बताने वाली मैं तेरा राज़ छुपाता हूँ दफ़ीने की तरह, तेरा वादा था कि इस माह ज़रूर आएगी अब तो हर रोज़ गुज़रता है महीने की तरह..!! - [यूँ तो वो हर किसी से मिलती है](https://hindigazals.com/yun-to-wo-har-kisi-se-milti-hai/): यूँ तो वो हर किसी से मिलती है हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है, सेज महकी बदन से शर्मा कर ये अदा भी उसी से मिलती है, वो अभी फूल से नहीं मिलती जूहिए की कली से मिलती है, दिन को ये रखरखाव वाली शक्ल शब को दीवानगी से मिलती है, आजकल आप की ख़बर हम को ग़ैर की दोस्ती से मिलती है, शैख़ साहिब को रोज़ की रोटी रात भर की बदी से मिलती है, आगे आगे जुनून भी होगा शेर में लौ अभी से मिलती है..!! - [ज़बान ए ग़ैर से क्या शरह ए आरज़ू करते](https://hindigazals.com/zabaan-e-gair-se-kya-sharah/): ज़बान ए ग़ैर से क्या शरह ए आरज़ू करते वो ख़ुद अगर कहीं मिलता तो गुफ़्तुगू करते, वो ज़ख़्म जिस को किया नोक ए आफ़्ताब से चाक उसी को सोज़न ए महताब से रफ़ू करते, सवाद ए दिल में लहू का सुराग़ भी न मिला किसे इमाम बनाते कहाँ वज़ू करते ? - [ग़म ए दौराँ ने भी सीखे ग़म ए जानाँ के चलन](https://hindigazals.com/gam-e-dauraan-ne-bhi-sikhe/): ग़म ए दौराँ ने भी सीखे ग़म ए जानाँ के चलन वही सोची हुई चालें वही बे साख़्तापन, वही इक़रार में इंकार के लाखों पहलू वही होंठों पे तबस्सुम वही अबरू पे शिकन, किस को देखा है कि पिंदार ए नज़र के बा वस्फ़ एक लम्हे के लिए रुक गई दिल की धड़कन, कौन सी फ़स्ल में इस बार मिले हैं तुझ से कि न परवा ए गरेबाँ है न फ़िक्र ए दामन, अब तो चुभती है हवा बर्फ़ के मैदानों की उन दिनों जिस्म के एहसास से जलता था बदन, ऐसी सूनी तो कभी शाम ए ग़रीबाँ भी न थी दिल बुझे जाते हैं ऐ तीरगी ए सुब्ह ए वतन..!! - [फ़नकार ख़ुद न थी मेरे फ़न की शरीक थी](https://hindigazals.com/fanqaar-khud-na-thi-mere-fan-ki/): फ़नकार ख़ुद न थी मेरे फ़न की शरीक थी वो रूह के सफ़र में बदन की शरीक थी, उतरा था जिस पे बाब ए हया का वरक़ वरक़ बिस्तर के एक एक शिकन की शरीक थी, मैं एक एतिबार से आतिश परस्त था वो सारे ज़ावियों से चमन की शरीक थी, वो नाज़िश ए सितारा ओ तन्नार ए माहताब गर्दिश के वक़्त मेरे गहन की शरीक थी, वो हम जलीस ए सानिहा ए रहमत ए नशात आसाइश ए सलीब ओ रसन की शरीक थी, ना क़ाबिल ए बयान अँधेरों के बावजूद मेरी दुआ ए सुब्ह वतन की शरीक थी..!! - [तेरी तलाश में हर रहनुमा से बातें कीं](https://hindigazals.com/teri-talash-me-har-rahnuma-se/): तेरी तलाश में हर रहनुमा से बातें कीं ख़ला से रब्त बढ़ाया हवा से बातें कीं, कभी सितारों ने भेजा हमें कोई पैग़ाम तो मुद्दतों में किसी आश्ना से बातें कीं, हमारी ख़ैर मनाओ कि आज ख़ुद उस ने बड़े ख़ुलूस बड़ी इल्तिजा से बातें कीं, गुनाहगार तो रम्ज़ ए हरीम तक पहुँचे सवाब वालों ने बाँग ए दरा से बातें कीं, बहुत से वो थे जिन्हों ने बुतों से फ़ैज़ उठाए बहुत से वो थे जिन्हों ने ख़ुदा से बातें कीं, न जाने कब से सुनाते थे उस को हम अहवाल नज़र उठाई तो फिर इब्तिदा से बातें कीं, हज़ार शेर कहे यूँ तो कहने वालों ने किसी किसी ने दिल ए मुब्तला से बातें कीं..!! - [अब जी हुदूद ए सूद ओ ज़ियाँ से गुज़र गया](https://hindigazals.com/ab-jee-hudud-e-sood-o-ziyan/): अब जी हुदूद ए सूद ओ ज़ियाँ से गुज़र गया अच्छा वही रहा जो जवानी में मर गया, पलकों पे आ के रुक सी गई थी हर एक मौज कल रो लिए तो आँख से दरिया उतर गया, तुझ से तो दिल के पास मुलाक़ात हो गई मैं ख़ुद को ढूँढने के लिए दर ब दर गया, शाम ए वतन कुछ अपने शहीदों का ज़िक्र कर जिन के लहू से सुब्ह का चेहरा निखर गया, आख़िर बहार को तो जो करना था कर गई इल्ज़ाम ए एहतियात गिरेबाँ के सर गया, ज़ंजीर मातमी है तुम ऐ आक़िलान ए शहर अब किस को पूछते हो दिवाना तो मर गया..!! - [वो अहद अहद ही क्या है जिसे निभाओ भी](https://hindigazals.com/wo-ahad-ahad-hi-kya-hai/): वो अहद अहद ही क्या है जिसे निभाओ भी हमारे वादा ए उलफ़त को भूल जाओ भी भला कहाँ के हम ऐसे गुमान वाले हैं हज़ार बार हम आएँ हमें बुलाओ भी, बिगड़ चला है बहुत रस्म ए ख़ुदकुशी का चलन डराने वालो किसी रोज़ कर दिखाओ भी, नहीं कि अर्ज़ ए तमन्ना पे मान ही जाओ हमें इस अहद ए तमन्ना में आज़माओ भी, फ़ुग़ाँ कि क़िस्सा ए दिल सुन के लोग कहते हैं ये कौन सी नई उफ़्ताद है हटाओ भी, तुम्हारी नींद में डूबी हुई नज़र की क़सम हमें ये ज़िद है कि जागो भी और जगाओ भी..!! - [क़िस्सा अभी हिजाब से आगे नहीं बढ़ा](https://hindigazals.com/qissa-abhi-hijab-se-aage-nahi-badha/): क़िस्सा अभी हिजाब से आगे नहीं बढ़ा मैं आप, वो जनाब से आगे नहीं बढ़ा, मुद्दत हुई किताब ए मुहब्बत शुरू किये लेकिन मैं पहले बाब से आगे नहीं बढ़ा, लम्बी मुसाफतें हैं मगर उस शहसवार का पाँव अभी रकाब से आगे नहीं बढ़ा, तूल ए कलाम के लिए मैंने किये सवाल वो मुख़्तसर जवाब से आगे नहीं बढ़ा, लोगो ने संग ओ ख़िश्त किले बना लिए अपना महल तो ख़्वाब से आगे नहीं बढ़ा, वो तेरी चाल ढाल के बारे में क्या कहे ? - [हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए](https://hindigazals.com/hum-tumhare-gam-se-bahar/): हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए हिज्र से बचने के मंतर आ गए, मैं ने तुम को अंदर आने का कहा तुम तो मेरे दिल के अंदर आ गए, एक ही औरत को दुनिया मान कर इतना घूमा हूँ कि चक्कर आ गए, इम्तिहान ए इश्क़ मुश्किल था मगर नक़्ल कर के अच्छे नंबर आ गए..!! - [जब किसी एक को रिहा किया जाए](https://hindigazals.com/jab-kisi-ek-ko-riha-kiya-jaaye/): जब किसी एक को रिहा किया जाए सब असीरों से मशवरा किया जाए, रह लिया जाए अपने होने पर अपने मरने पे हौसला किया जाए, इश्क़ करने में क्या बुराई है ? - [जाने वाले से राब्ता रह जाए](https://hindigazals.com/jaane-waale-se-raabta-rah-jaaye/): जाने वाले से राब्ता रह जाए घर की दीवार पर दिया रह जाए, एक नज़र जो भी देख ले तुझ को वो तेरे ख़्वाब देखता रह जाए, इतनी गिर्हें लगी हैं इस दिल पर कोई खोले तो खोलता रह जाए, कोई कमरे में आग तापता हो कोई बारिश में भीगता रह जाए, नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए ख़्वाब ऐसा कि मुँह खुला रह जाए, झील सैफ़ उल मुलूक पर जाऊँ और कमरे में कैमरा रह जाए..!! - [अश्क ज़ाएअ हो रहे थे देख कर रोता न था](https://hindigazals.com/ashk-zaya-ho-rahe-the/): अश्क ज़ाएअ हो रहे थे देख कर रोता न था जिस जगह बनता था रोना मैं उधर रोता न था, सिर्फ़ तेरी चुप ने मेरे गाल गीले कर दिए मैं तो वो हूँ जो किसी की मौत पर रोता न था, मुझ पे कितने सानहे गुज़रे पर इन आँखों को क्या मेरा दुख ये है कि मेरा हमसफ़र रोता न था, मैं ने उस के वस्ल में भी हिज्र काटा है कहीं वो मेरे काँधे पे रख लेता था सर रोता न था, प्यार तो पहले भी उस से था मगर इतना नहीं तब मैं उस को छू तो लेता था मगर रोता न था, गिर्या ओ ज़ारी को भी एक ख़ास मौसम चाहिए मेरी आँखें देख लो मैं वक़्त पर रोता न था..!! - [तारीकियों को आग लगे और दिया जले](https://hindigazals.com/tarikiyon-ko-aag-lage-aur/): तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले, उसकी ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब वो रौशनी की बात करे और दिया जले, तुम चाहते हो तुम से बिछड़ के भी ख़ुश रहूँ यानी हवा भी चलती रहे और दिया जले, क्या मुझ से भी अज़ीज़ है तुम को दिए की लौ फिर तो मेरा मज़ार बने और दिया जले, सूरज तो मेरी आँख से आगे की चीज़ है मैं चाहता हूँ शाम ढले और दिया जले, तुम लौटने में देर न करना कि ये न हो दिल तीरगी में घेर चुके और दिया जले..!! - [फिर रफ़ूगर ने भी ये कह के मुझे मोड़ दिया](https://hindigazals.com/fir-rafoogar-ne-bhi-ye-kah-ke/): फिर रफ़ूगर ने भी ये कह के मुझे मोड़ दिया जा यहाँ पर तो कोई ज़ख़्म नहीं सिलते अब, तुमने उस बाग़ के बारे में सुना ही होगा जिसमें पौधे तो हैं,पर फूल नहीं खिलते अब, ज़ुल्म भी होगा भला इससे ज़्यादा कोई दर्द क़ायम है मगर अश्क़ नहीं मिलते अब, तेरे हिज्रां में नाक़ाहत का है ऐसा आलम तश्नगी आती है पर होंठ नहीं हिलते अब, मेरी आंखों में फ़क़त आब है बेफ़िक्र रहो मेरे आंसू तो लहू बनके नहीं गिरते अब..!! - [किसी से ख़ुश है किसी से ख़फ़ा ख़फ़ा सा है](https://hindigazals.com/kisi-se-khush-hai-kisi-se-khafa/): किसी से ख़ुश है किसी से ख़फ़ा ख़फ़ा सा है वो शहर में अभी शायद नया नया सा है, न जाने कितने बदन वो पहन के लेटा है बहुत क़रीब है फिर भी छुपा छुपा सा है, सुलगता शहर नदी ख़ून कब की बातें हैं कहीं कहीं से ये क़िस्सा सुना सुना सा है, सरों के सींग तो जंगल की देन होते हैं वो आदमी तो है लेकिन डरा डरा सा है, कुछ और धूप तो हो ओस सूख जाने तक वो पेड़ अब के बरस भी हरा हरा सा है..!! - [जहाँ न तेरी महक हो उधर न जाऊँ मैं](https://hindigazals.com/jahan-na-teri-mahak-ho-udhar-na/): जहाँ न तेरी महक हो उधर न जाऊँ मैं मेरी सरिश्त सफ़र है गुज़र न जाऊँ मैं, मेरे बदन में खुले जंगलों की मिट्टी है मुझे सँभाल के रखना बिखर न जाऊँ मैं, मेरे मिज़ाज में बे मानी उलझनें हैं बहुत मुझे उधर से बुलाना जिधर न जाऊँ मैं, कहीं पुकार न ले गहरी वादियों का सुकूत किसी मक़ाम पे आ कर ठहर न जाऊँ मैं, न जाने कौन से लम्हे की बददुआ है ये क़रीब घर के रहूँ और घर न जाऊँ मैं..!! - [राक्षस था न ख़ुदा था पहले](https://hindigazals.com/rakshas-tha-na-khuda-tha-pahle/): राक्षस था न ख़ुदा था पहले आदमी कितना बड़ा था पहले, आसमाँ खेत समुंदर सब लाल ख़ून काग़ज़ पे उगा था पहले, मैं वो मक़्तूल जो क़ातिल न बना हाथ मेरा भी उठा था पहले, अब किसी से भी शिकायत न रही जाने किस किस से गिला था पहले, शहर तो बाद में वीरान हुआ मेरा घर ख़ाक हुआ था पहले..!! - [तेरा सच है तेरे अज़ाबों में](https://hindigazals.com/tera-sach-hai-tere-azaabon-me/): तेरा सच है तेरे अज़ाबों में झूठ लिखा है सब किताबों में, एक से मिल के सब से मिल लीजे आज हर शख़्स है नक़ाबों में, तेरा मिलना तेरा नहीं मिलना एक रस्ता कई सराबों में, उन की नाकामियों को भी गिनिए जिन की शोहरत है कामयाबों में, रौशनी थी सवाल की हद तक हर नज़र खो गई जवाबों में..!! - [कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं](https://hindigazals.com/kachche-bakhiye-ki-tarah-rishte/): कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं लोग मिलते हैं मगर मिल के बिछड़ जाते हैं, यूँ हुआ दूरियाँ कम करने लगे थे दोनों रोज़ चलने से तो रस्ते भी उखड़ जाते हैं, छाँव में रख के ही पूजा करो ये मोम के बुत धूप में अच्छे भले नक़्श बिगड़ जाते हैं, भीड़ से कट के न बैठा करो तन्हाई में बे ख़याली में कई शहर उजड़ जाते हैं..!! - [कितनी तरकीबें कीं बातिन के लिए](https://hindigazals.com/kitni-tarkiben-ki-baatin-ke/): कितनी तरकीबें कीं बातिन के लिए नून साकिन मीम साकिन के लिए, मेरे अपने मुझ से जब बरहम हुए मैं रहूँ ज़िंदा भला किन के लिए ? - [क्या ग़म के साथ हम जिएँ और क्या ख़ुशी के साथ](https://hindigazals.com/kya-gam-ke-sath-hum-jiye/): क्या ग़म के साथ हम जिएँ और क्या ख़ुशी के साथ जो दिल को दे सुकून गुज़र हो उसी के साथ, काग़ज़ की नाव मेरी पलट कर न आ सकी बचपन में मेरा दिल भी बहा था उसी के साथ, आँखों के सोते ख़ुश्क हुए रौशनी गई लेकिन नज़र का रिश्ता वही है नमी के साथ, क्या मौत ही इलाज है ग़म से नजात का क्यों ज़िंदगी की बनने लगी ख़ुदकुशी के साथ, लोगों को क्या पड़ी है जो पूछें किसी से हाल हर आदमी मगन है ग़म ए ज़िंदगी के साथ, जिन के नसीब में नहीं दुनिया की राहतें देखो तो कैसे जीते हैं वो हर कमी के साथ, मजबूरों बेकसों की यहाँ फ़िक्र है किसे बेमौत कितने मरते हैं फ़ाक़ाकशी के साथ, फ़ुर्सत है किस के पास जो सोचे ये बैठ कर किस की बनी किसी से या बिगड़ी किसी के साथ, रिश्तों की भीड़ में जो मैं साबित क़दम रही दिल के तमाम जब्र सहे ख़ुशदिली के साथ, लाएँ कहाँ से ढूँढ के अपना कहें जिसे ? - [तू मुझ को सुन रहा है तो सुनाई क्यूँ नहीं देता](https://hindigazals.com/tu-mujh-ko-sun-raha-hai/): तू मुझ को सुन रहा है तो सुनाई क्यूँ नहीं देता ये कुछ इल्ज़ाम हैं मेरे सफ़ाई क्यूँ नहीं देता ? - [दिल ए बरहम की ख़ातिर मुद्दआ कुछ भी नहीं होता](https://hindigazals.com/dil-e-barham-kee-khatir/): दिल ए बरहम की ख़ातिर मुद्दआ कुछ भी नहीं होता अजब हालत है अब शिकवा गिला कुछ भी नहीं होता, कोई सूरत उभरती है न मैं मिस्मार होता हूँ मैं वो पत्थर कि जिस का फ़ैसला कुछ भी नहीं होता, किसी को साथ ले लेना किसी के साथ हो लेना फ़क़ीरों के लिए अच्छा बुरा कुछ भी नहीं होता, कभी चलना मेरे आगे कभी रहना मेरे पीछे रह ए उल्फ़त में छोटा या बड़ा कुछ भी नहीं होता, कभी दिल में मेरे तेरे सिवा हर बात होती है कभी दिल में मेरे तेरे सिवा कुछ भी नहीं होता, वही टूटी हुई कश्ती वही पागल हवाएँ हैं हमारे साथ दुनिया में नया कुछ भी नहीं होता, ये सौदा है निगाहों का तिजारत दिल की है लेकिन मोहब्बत में ख़सारा फ़ाएदा कुछ भी नहीं होता, कभी दो चार क़दमों का सफ़र तय हो नहीं पाता कभी मीलों से लम्बा फ़ासला कुछ भी नहीं होता, फ़क़त किरदार का मारा हुआ है हर बशर वर्ना कोई इंसान अच्छा या बुरा कुछ भी नहीं होता, फ़लक पर ही सितारों का कोई उन्वान होता है किसी टूटे सितारे का पता कुछ भी नहीं होता, भले ख़्वाहिश करूँ तेरी किसी भी शक्ल में लेकिन मेरा मक़्सद परस्तिश के सिवा कुछ भी नहीं होता, अगर देखूँ तो ख़ामी ही दिखाई दे हर एक शय में अगर सोचूँ तो ख़ुद से बदनुमा कुछ भी नहीं होता, ब ज़ाहिर उम्र भर यूँ तो हज़ारों काम करते हैं हक़ीक़त में मगर हम ने किया कुछ भी नहीं होता..!! - [किसी भी शय पे आ जाने में कितनी देर लगती है](https://hindigazals.com/kisi-bhi-shay-pe-aa-jaane-me/): किसी भी शय पे आ जाने में कितनी देर लगती है मगर फिर दिल को समझाने में कितनी देर लगती है, ज़रा सा वक़्त लगता है कहीं से उठ के जाने में मगर फिर लौट कर आने में कितनी देर लगती है, बला का रूप ये तेवर सरापा धार हीरे की किसी के जान से जाने में कितनी देर लगती है, फ़क़त आँखों की जुम्बिश से बयाँ होता है अफ़्साना किसी को हाल बतलाने में कितनी देर लगती है, सभी से ऊब कर यूँ तो चले आए हो ख़ल्वत में मगर ख़ुद से भी उकताने में कितनी देर लगती है, शुऊर ए मयकदा इस की इजाज़त ही नहीं देता वगर्ना जाम छलकाने में कितनी देर लगती है, ये शीशे का बदन ले कर निकल तो आए हो लेकिन किसी पत्थर से टकराने में कितनी देर लगती है..!! - [है बहुत मूड में इस वक़्त दिल ए ज़ार चलो](https://hindigazals.com/hai-bahut-mood-me/): है बहुत मूड में इस वक़्त दिल ए ज़ार चलो तुम मेरे साथ चलो और लगातार चलो, भाड़ में डालो हर एक वक़्त की दीवार चलो कहीं गुमराह न हो जाए यहाँ प्यार चलो, हम हैं जब दोनों मोहब्बत में गिरफ़्तार चलो चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, ये जो दुनिया है ये हम को नहीं मिलने देगी उम्र भर अपनी जगह से न ये हिलने देगी, इश्क़ के चाक ए गरेबाँ को न सिलने देगी प्यार के ग़ुंचों को हरगिज़ नहीं खिलने देगी, ऐसे आलम में मुनासिब नहीं इंकार चलो चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, डालते रहते हैं डोरे ये ज़माने के हसीं अपनी नज़रों में हैं ऐसे कई ग़ारत गर ए दीं, तुम को इस बात का एहसास कोई है कि नहीं दिल न पड़ जाए किसी और के चक्कर में कहीं, मेरी मानो तो अभी छोड़ के घर बार चलो चलो दिलदार चलो चाँद के पास चलो, रह के इस दुनिया में तुम ने अभी देखा क्या है ? - [पहली बार आई दुल्हन ससुराल वो भी बेनक़ाब](https://hindigazals.com/pahli-baar-aayi-dulhan/): पहली बार आई दुल्हन ससुराल वो भी बेनक़ाब शर्म आँखों से झलकती है न है चेहरे पे आब, जैसे रुख़ पर झुर्रियाँ हों जैसे बालों में ख़िज़ाब किरकिरा सा हो गया शादी का हासिल क्या करूँ ? - [एक बीवी कई साले हैं ख़ुदा ख़ैर करे](https://hindigazals.com/ek-bibi-kai-saale-hai-khuda-khair-kare/): एक बीवी कई साले हैं ख़ुदा ख़ैर करे खाल सब खींचने वाले हैं ख़ुदा ख़ैर करे, तन के वो उजले नज़र आते हैं जितने यारो मन के वो इतने ही काले हैं ख़ुदा ख़ैर करे, कूचा ए यार का तय होगा सफ़र अब कैसे ? - [चौथी शादी कर के मुल्ला जी बहुत शादाँ हुए](https://hindigazals.com/chauthi-shaadi-kar-ke-mulla-ji/): चौथी शादी कर के मुल्ला जी बहुत शादाँ हुए अपनी क़िस्मत की बुलंदी देख कर नाज़ाँ हुए, यूँ जवानों की तरह लाए दुल्हन को साथ में आ गई हो जैसे सुल्ताना कहीं की हाथ में, पहले ही दिन सारे घर का जाएज़ा उस ने लिया अपने शौहर की नज़र का जाएज़ा उस ने लिया, चार कीलें ख़ास कमरे में नज़र आईं उसे तीन कीलों पर दुपट्टे भी नज़र आए टँगे, मुल्ला जी से उस ने पूछा ये दुपट्टे किस के हैं ? - [जैसा हूँ स्वीकार तुम्हीं तो करती हो](https://hindigazals.com/jaisa-hoon-sweekaar-tumhin-to/): जैसा हूँ स्वीकार तुम्हीं तो करती हो बिना शर्त के प्यार तुम्हीं तो करती हो, अपनी दिलकश अदा दिखा कर अक्सर ही तीर जिगर के पार तुम्हीं तो करती हो, क्या महँगा, क्या सस्ता कुछ परवाह नहीं मेरा बंटाधार तुम्हीं तो करती हो, घर में जो भी अच्छा है वो तुमसे है सबकुछ हे सरकार! - [ज़ख़्मों ने मुझ में दरवाज़े खोले हैं](https://hindigazals.com/zakhmon-ne-mujh-me-darwaze/): ज़ख़्मों ने मुझ में दरवाज़े खोले हैं मैंने वक़्त से पहले टाँके खोले हैं, बाहर आने की भी सकत नहीं हम में तूने किस मौसम में पिंजरे खोले हैं, बरसों से आवाज़ें जमती जाती थीं ख़ामोशी ने कान के पर्दे खोले हैं, कौन हमारी प्यास पे डाका डाल गया किस ने मश्कीज़ों के तस्मे खोले हैं, वर्ना धूप का पर्बत किस से कटता था उसने छतरी खोल के रस्ते खोले हैं, ये मेरा पहला रमज़ान था उसके बग़ैर मत पूछो किस मुँह से रोज़े खोले हैं, यूँ तो मुझ को कितने ख़त मौसूल हुए एक दो ऐसे थे जो दिल से खोले हैं, मन्नत मानने वालों को मालूम नहीं किस ने आ कर पेड़ से धागे खोले हैं, दरिया बंद किया है कूज़े में तहज़ीब एक चाबी से सारे ताले खोले हैं..!! - [वैसे मैंने दुनिया में क्या देखा है](https://hindigazals.com/waise-maine-duniya-me-kya/): वैसे मैंने दुनिया में क्या देखा है तुम कहते हो तो फिर अच्छा देखा है, मैं उस को अपनी वहशत तोहफ़े में दूँ हाथ उठाए जिस ने सहरा देखा है, बिन देखे उस की तस्वीर बना लूँगा आज तो मैंने उस को इतना देखा है, एक नज़र में मंज़र कब खुलते हैं दोस्त तूने देखा भी है तो क्या देखा है, इश्क़ में बंदा मर भी सकता है मैंने दिल की दस्तावेज़ में लिखा देखा है, मैं तो आँखें देख के ही बतला दूँगा तुम में से किस किस ने दरिया देखा है, आगे सीधे हाथ पे एक तराई है मैंने पहले भी ये रस्ता देखा है, तुम को तो इस बाग़ का नाम पता होगा तुम ने तो इस शहर का नक़्शा देखा है..!! - [मैंने ये कब कहा है कि वो मुझ को तन्हा नहीं छोड़ता](https://hindigazals.com/maine-ye-kab-kaha-ki-wo/): मैंने ये कब कहा है कि वो मुझ को तन्हा नहीं छोड़ता छोड़ता है मगर एक दिन से ज़्यादा नहीं छोड़ता, कौन सहराओं की प्यास है इन मकानों की बुनियाद में बारिशों से अगर बच भी जाएँ तो दरिया नहीं छोड़ता, दूर उम्मीद की खिड़कियों से कोई झाँकता है यहाँ और मेरे गली छोड़ने तक दरीचा नहीं छोड़ता, मैं जिसे छोड़ कर तुम से छुप कर मिला हूँ अगर आज वो देख लेता तो शायद वो दोनों को ज़िंदा नहीं छोड़ता, कौन ओ इमकान में दो तरह के ही तो शोबदाबाज़ हैं एक पर्दा गिराता है और एक पर्दा नहीं छोड़ता, सच कहूँ मेरी क़ुर्बत तो ख़ुद उस की साँसों का वरदान है मैं जिसे छोड़ देता हूँ उस को क़बीला नहीं छोड़ता, तयशुदा वक़्त पर वो पहुँच जाता है प्यार करने वसूल जिस तरह अपना क़र्ज़ा कभी कोई बनिया नहीं छोड़ता, पहले मुझ पर बहुत भौंकता है कि मैं अजनबी हूँ कोई और अगर घर से जाने का बोलूँ तो कुर्ता नहीं छोड़ता, लोग कहते हैं तहज़ीब हाफ़ी उसे छोड़ कर ठीक है हिज्र इतना ही आसान होता तो तौंसा नहीं छोड़ता..!! - [न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है](https://hindigazals.com/naa-neend-aur-naa-khwabon-se/): न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है कि उस से हम ने तुझे देखने की करनी है, किसी दरख़्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना है किसी चराग़ की छाँव में रात करनी है, वो फूल और किसी शाख़ पर नहीं खुलना वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मेरे हाथ से सँवरनी है, तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ समुंदरों से अकेले में बात करनी है, हमारे गाँव का हर फूल मरने वाला है अब उस गली से वो ख़ुश्बू नहीं गुज़रनी है, तेरे ज़ियाँ पे मैं अपना ज़ियाँ न कर बैठूँ कि मुझ मुरीद का मुर्शिद उवैस क़रनी है..!! - [तूने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी](https://hindigazals.com/tune-kya-kindil-jala-dee/): तूने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी सुर्ख़ हुई जाती है वादी शहज़ादी, शीश-महल को साफ़ किया तेरे कहने पर आईनों से गर्द हटा दी शहज़ादी, अब तो ख़्वाब कदे से बाहर पाँव रख लौट गए हैं सब फ़रियादी शहज़ादी, तेरे ही कहने पर एक सिपाही ने अपने घर को आग लगा दी शहज़ादी, मैं तेरे दुश्मन लश्कर का शहज़ादा कैसे मुमकिन है ये शादी शहज़ादी..!! - [ज़िंदगी की यही कहानी है](https://hindigazals.com/zindagi-ki-yahi-kahani/): ज़िंदगी की यही कहानी है साँस आनी है और जानी है, तुम जो होते तो बात कुछ होती अब कि बारिश तो सिर्फ़ पानी है, एक तरफ़ उस की बोलती आँखें एक तरफ़ मेरी बे ज़बानी है, यूँ ही सुनते रहें अगर दिल की याद रखिए कि जान जानी है, धूप लगती है बादलो जैसी ये मोहब्बत की साएबानी है, बहती जाती हूँ एक समुंदर में उस की यादो की बादबानी है, हर तरफ़ ख़ार ख़ार है गुलशन बाग़बाँ ख़ूब बाग़बानी है, आश्ना हूँ मैं अब सराबों से मैं ने सहरा की ख़ाक छानी है, चाँदनी की ग़ज़ल वज़ल साहब उस के ख़्वाबों की तर्जुमानी है..!! - [ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है](https://hindigazals.com/ye-mohabbat-jo-mohabbat-2/): ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक वही फूल मयस्सर न हुआ दामन को जिस की ख़ुशबू मेरी रग रग में समाई हुई है, जब भी आँखों ने सजाए है तुम्हारे सपने ज़ेहन और दिल में बहुत देर लड़ाई हुई है, दिल की चौखट पे जला रक्खे है आँखों ने चराग़ किस की आमद की अभी आस लगाई हुई है, उस की यादो से मुनव्वर है मेरे दिल का जहाँ आंसुओं से मेरी आँखों की सफ़ाई हुई है, ऐ मोहब्बत तेरे चेहरे पे उदासी क्यूँ है ? - [ख़ुश्क मिट्टी में लहू की जो नमी आएगी](https://hindigazals.com/khushq-mitti-me-lahoo-ki-jo-nami-aayegi/): ख़ुश्क मिट्टी में लहू की जो नमी आएगी देखना बाग़ में फिर सब्ज़ परी आएगी, कट गई उम्र इसी धुन में सफ़र करते हुए दो क़दम और अभी छाँव घनी आएगी, सच्चे अल्फ़ाज़ बरतने लगे अशआर में हम अपने हिस्से में भी हीरे की कनी आएगी, दम ब दम ख़ूँ की रवानी में भँवर पड़ते हैं ऐसा लगता है कोई सख़्त घड़ी आएगी, देख कर सख़्ती ए हालात गुमाँ है अंजुम अपने बाद आएगी जो नस्ल जरी आएगी..!! - [मैं चुप हूँ और दुनिया सुन रही है](https://hindigazals.com/main-chup-hoon-aur-duniya-sun-rahi-hai/): मैं चुप हूँ और दुनिया सुन रही है ख़मोशी दास्तानें बुन रही है, तअज्जुब है कि एक सोने की चिड़िया बयाबानों में तिनके चुन रही है, कहाँ नेकी गुनाहों से ही बच लें हमें तो बस यही एक धुन रही है, तुझे महसूस करते भी तो कैसे ? - [हैरान हूँ नसीब की बख़्शिश को देख कर](https://hindigazals.com/hairan-hoon-nasib-ki-bakhshish-ko-dekh-kar/): हैरान हूँ नसीब की बख़्शिश को देख कर साए से अपने धूप में महरूम हैं शजर, क़ब्ज़े में अपने होती फ़ज़ाओं की मम्लिकत उड़ते अगर हवाओं की रफ़्तार देख कर, उन से मिले तो ख़ुद से भी पहचान हो गई वर्ना हम अपनी ज़ात से अब तक थे बे ख़बर, हर टुकड़े में बस एक ही तस्वीर पाओगे देखो तो अपनी ज़ात का आईना तोड़ कर, नश्तर से लोग करते हैं ज़ख़्म ए जिगर रफ़ू ये रस्म तो कहाँ से चली मेरे चारागर, अंजुम ज़मीं से जिन की जड़ें रिश्ता तोड़ लें देखा है सब ने सूख के गिरते हैं वो शजर..!! - [ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने](https://hindigazals.com/zard-patton-pe-mera-naam-likha-hai-us-ne/): ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने सब्ज़ ख़्वाबों का ये अंजाम लिखा है उस ने, कोई मिलता नहीं जो पढ़ के सुना दे मुझ को बर्ग ए गुल पर कोई पैग़ाम लिखा है उस ने, सच है तन्हाई में इंसान सनक जाता है रोज़ ए रौशन को सियह फ़ाम लिखा है उस ने, मेहर ओ मह दीप हुआ अब्र समुंदर ख़ुशबू किस की तक़दीर में आराम लिखा है उस ने, सर उछलते हैं ज़बाँ कटती है जिस में अंजुम मेरे ज़िम्मे वही एक काम लिखा है उस ने..!! - [क्या ख़बर थी ये दिन भी देखेंगे](https://hindigazals.com/kya-khabar-thi-ye-din-bhi-dekhenge/): क्या ख़बर थी ये दिन भी देखेंगे ख़ून बोएँगे सब्र काटेंगे, किस को मुंसिफ़ कहें किसे क़ातिल बच रहे कल तलक तो सोचेंगे, मैं अगर यूँ ही सर उठाता रहा लोग अपने ही बुत को पूजेंगे, आप अपना भी जाएज़ा ले लें हम तो अपनी सज़ा को पहुँचेंगे, क़ौम मज़हब ज़मीन रंग ज़बाँ यूँही कब तक लकीरें खींचेंगे ? - [ख़ुश हूँ कि मेरा हुस्न ए तलब काम तो आया](https://hindigazals.com/khush-hoon-ki-mera-husn-e-talab-kaam-to-aaya/): ख़ुश हूँ कि मेरा हुस्न ए तलब काम तो आया ख़ाली ही सही मेरी तरफ़ जाम तो आया, काफ़ी है मेरे दिल की तसल्ली को यही बात आप आ न सके आप का पैग़ाम तो आया, अपनों ने नज़र फेरी तो दिल तू ने दिया साथ दुनिया में कोई दोस्त मेरे काम तो आया, वो सुब्ह का एहसास हो या मेरी कशिश हो डूबा हुआ ख़ुर्शीद लब ए बाम तो आया, लोग उन से ये कहते हैं कि कितने हैं शकील आप उस हुस्न के सदक़े में मेरा नाम तो आया..!! - [इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे](https://hindigazals.com/ishq-ki-chingaariyon-ko-fir-hawa-dene-lage/): इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे मेरे पास आ कर वो दुश्मन को दुआ देने लगे, मयकदे का मयकदा ख़ामोश था मेरे बग़ैर मैं हुआ वारिद तो पैमाने सदा देने लगे, ख़त्म करनी ही पड़ेंगी शाम ए ग़म की उलझनें अब वो अपने गेसुओं का वास्ता देने लगे, एतिराफ़ ए औज का जज़्बा नहीं अहबाब में हर तरक़्क़ी पर तरक़्क़ी की दुआ देने लगे, दोस्तों की कजअदाई मैं भी लज़्ज़त है शकील दोस्त वो है दोस्त बन कर जो दग़ा देने लगे..!! - [दिल के बहलाने की तदबीर तो है](https://hindigazals.com/dil-ke-bahlaane-ki-tadbeer-to-hai/): दिल के बहलाने की तदबीर तो है तू नहीं है तेरी तस्वीर तो है, हमसफ़र छोड़ गए मुझ को तो क्या साथ मेरे मेरी तक़दीर तो है, क़ैद से छूट के भी क्या पाया आज भी पाँव में ज़ंजीर तो है, क्या मजाल उन की न दें ख़त का जवाब बात कुछ बाइस ए ताख़ीर तो है, पुर्सिश ए हाल को वो आ ही गए कुछ भी हो इश्क़ में तासीर तो है, ग़म की दुनिया रहे आबाद शकील मुफ़्लिसी में कोई जागीर तो है..!! - [हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे](https://hindigazals.com/hui-hum-se-ye-nadaani-teri-mahfil-me-aa-baithe/): हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे ज़मीं की ख़ाक हो कर आसमाँ से दिल लगा बैठे, हुआ ख़ून ए तमन्ना उस का शिकवा क्या करें तुम से न कुछ सोचा न कुछ समझा जिगर पर तीर खा बैठे, ख़बर की थी गुलिस्तान ए मोहब्बत में भी ख़तरे हैं जहाँ गिरती है बिजली हम उसी डाली पे जा बैठे, न क्यूँ अंजाम ए उल्फ़त देख कर आँसू निकल आएँ जहाँ को लूटने वाले ख़ुद अपना घर लुटा बैठे..!! - [याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं](https://hindigazals.com/yaad-me-teri-jaag-jaag-ke-hum-raat-bhar-karwaten-badalte-hai/): याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं हर घड़ी दिल में तेरी उल्फ़त के धीमे धीमे चराग़ जलते हैं, जब से तू ने निगाह फेरी है दिन है सूना तो रात अँधेरी है चाँद भी अब नज़र नहीं आता अब सितारे भी कम निकलते हैं, लुट गई वो बहार की महफ़िल छुट गई हम से प्यार की मंज़िल ज़िंदगी की उदास राहों में तेरी यादों के साथ चलते हैं, तुझ को पा कर हमें बहार मिली तुझ से छुट कर मगर ये बात खुली बाग़बाँ ही चमन के फूलों को अपने पैरों से ख़ुद मसलते हैं, क्या कहें तुझ से क्यों हुई दूरी हम समझते हैं अपनी मजबूरी तुझ को मालूम क्या कि तेरे लिए दिल के ग़म आँसुओं में ढलते हैं..!! - [दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ](https://hindigazals.com/dukho-me-us-ke-izaafa-bhi-main-hi-karta-hoon/): दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ और इस कमी का इज़ाला भी मैं ही करता हूँ, ज़रा बहुत मेरी झुंझलाहटें भी जाएज़ हैं कि मदह ए साहब ए वाला भी मैं ही करता हूँ, ख़ुशी के ख़्वाब सजाता ज़रूर हूँ लेकिन सफ़ ए मलाल को सीधा भी मैं ही करता हूँ, न अपने फ़ेअल का ग़म है न अपने क़ौल का दुख निबाहता हूँ तो वअदा भी मैं ही करता हूँ, तेरे विसाल की ख़ुशबू भी सिर्फ़ मेरी है तेरे बग़ैर गुज़ारा भी मैं ही करता हूँ..!! - [ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं](https://hindigazals.com/ye-teri-khalq-nawazi-ka-takaza-bhi-nahin/): ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं कहीं दरिया है रवाँ और कहीं क़तरा भी नहीं, अपने आक़ाओं के ऐबों को महासिन समझे इतनी पाबंद ए अक़ीदत तो रेआया भी नहीं, इख़्तियारात से हक़ तक हैं ज़बानी बातें दस्तख़त क्या किसी काग़ज़ पे अँगूठा भी नहीं, कोई इम्कान नहीं है किसी ख़ुशफ़हमी का चारागर तुम हो तो फिर ज़ख़्म को भरना भी नहीं, इश्तिहारात लगे हैं मेरी ख़ुशहाली के और थाली में मेरी ख़ुश्क निवाला भी नहीं, ये उजाला कोई साज़िश है ये जुगनू है फ़रेब सुब्ह से पहले चराग़ों को बुझाना भी नहीं..!! - [मसअला ख़त्म हुआ चाहता है](https://hindigazals.com/masla-khatm-hua-chahta-hai/): मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है, कब तलक लोग अंधेरे में रहें अब ये माहौल दीया चाहता है, मसअला मेरे तहफ़्फ़ुज़ का नहीं शहर का शहर ख़ुदा चाहता है, मेरी तन्हाइयाँ लब माँगती हैं मेरा दरवाज़ा सदा चाहता है, घर को जाते हुए शर्म आती है रात का एक बजा चाहता है..!! - [सारे भूले बिसरों की याद आती है](https://hindigazals.com/saare-bhule-bisro-ki-yaad-aati-hai/): सारे भूले बिसरों की याद आती है एक ग़ज़ल सब ज़ख़्म हरे कर जाती है, पा लेने की ख़्वाहिश से मोहतात रहो महरूमी की बीमारी लग जाती है, ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या ? - [कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा](https://hindigazals.com/kitne-akhbaar-faroshon-ko-sahafi-likha/): कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा ना मुकम्मल को भी ख़ादिम ने इज़ाफ़ी लिखा, तू ने भूले से न समझी मेरे जज़्बे की कसक मैं ने बरसों तेरी आँखों को ग़िलाफ़ी लिखा, हाथ उठा सकते थे मेरे भी बग़ावत का अलम मैं ने हर ज़ुल्म के ख़ाने मैं मुआफ़ी लिखा, इश्क़ की ख़ैर हो अल्लाह कि ना शुक्रों ने एक अधूरी सी मुलाक़ात को काफ़ी लिखा, आप दुनिया को समझते रहें सामान ए तरब मैं ने साँसों को गुनाहों की तलाफ़ी लिखा, वो ही करता रहा अंदर से मलामत मुझ को मैं ने जो लफ़्ज़ उसूलों के मुनाफ़ी लिखा, बेवक़ूफ़ों ने मेरी आबला पाई का इलाज हँसी आती है कि हमदर्द की साफ़ी लिखा..!! - [पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं](https://hindigazals.com/pet-ki-aag-bujhaane-ka-sabab-kar-rahe-hai/): पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं इस ज़माने के कई मीर मतब कर रहे हैं, कोई हमदर्द भरे शहर में बाक़ी हो तो हो इस कड़े वक़्त में गुमराह तो सब कर रहे हैं, कहीं ख़तरे में न पड़ जाए बुज़ुर्गी अपनी लोग इस ख़ौफ़ से छोटों का अदब कर रहे हैं, सब लिफ़ाफ़े की हुसूली के लिए हो रहा है हम जो ये शग़्ल जो ये कार ए अदब कर रहे हैं, हर कोई जान हथेली पे लिए फिर रहा है इन दिनों वो लब ओ रुख़्सार ग़ज़ब कर रहे हैं..!! - [झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया](https://hindigazals.com/jhooth-sachchai-ka-hissa-ho-gaya/): झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया एक तरह से ये भी अच्छा हो गया, उस ने एक जादू भरी तक़रीर की क़ौम का नुक़सान पूरा हो गया, शहर में दो चार कम्बल बाँट कर वो समझता है मसीहा हो गया, ये तेरी आवाज़ नम क्यूँ हो गई ग़मज़दा मैं था तुझे क्या हो गया ? - [दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है](https://hindigazals.com/dilon-ke-maabain-shaq-kee-deewar-ho-rahi-hai/): दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है तो क्या जुदाई की राह हमवार हो रही है ? - [फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम](https://hindigazals.com/faraz-e-ishq-teri-intiha-nahi-hue-hum/): फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम किसी पे क़र्ज़ थे लेकिन अदा नहीं हुए हम, तेरी गली के सिवा और क्या ठिकाना है यहीं मिलेंगे अगर लापता नहीं हम, तुम्हारे बाद बड़ा फ़र्क़ आ गया हम में तुम्हारे बाद किसी पर ख़फ़ा नहीं हुए हम, तअल्लुक़ात में शर्तें कभी नहीं रखी कभी किसी के लिए मसअला नहीं हुए हम, अभी हमारी मोहब्बत नहीं खुली तुम पर अभी तुम्हारे मरज़ की दवा नहीं हुए हम..!! - [रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे](https://hindigazals.com/rishton-ki-daldal-se-kaise-nikalenge/): रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे, चाँद सितारे गोद में आ कर बैठ गए सोचा ये था पहली बस से निकलेंगे, सब उम्मीदों के पीछे मायूसी है तोड़ो ये बादाम भी कड़वे निकलेंगे, मैं ने रिश्ते ताक़ पे रख कर पूछ लिया एक छत पर कितने परनाले निकलेंगे ? - [थोड़ा सा माहौल बनाना होता है](https://hindigazals.com/thoda-saa-maahaul-banana-hota-hai/): थोड़ा सा माहौल बनाना होता है वर्ना किसी के साथ ज़माना होता है, सच्चा शेर सुनाने वाले ख़त्म हुए अब तो ख़ाली खेल दिखाना होता है, आँसू पहली शर्त है इस समझौते की ग़म तो साँसों का जुर्माना होता है, लालक़िले की दीवारों पर लिखवा दो दिल सब से महफ़ूज़ ठिकाना होता है, दुनिया में भरमार है नक़ली लोगों की सौ में कोई एक दिवाना होता है, रात हमारे घर जल्दी आ जाया कर हमें सवेरे काम पे जाना होता है, ऐसी कोई बात नहीं मायूसी की सच में थोड़ा सा अफ़्साना होता है, सब की अपनी एक इकाई होती है सब का अपना एक ज़माना होता है, हम ने तो उन को भी लुटते देखा है जिन के चार क़दम पर थाना होता है, आज बिछड़ते वक़्त मुझे मालूम हुआ लोगों में एहसास का ख़ाना होता है..!! - [सफ़र से लौट जाना चाहता है](https://hindigazals.com/safar-se-laut-jaana-chahta-hai/): सफ़र से लौट जाना चाहता है परिंदा आशियाना चाहता है, कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है, उसे रिश्ते थमा देती है दुनिया जो दो पैसे कमाना चाहता है, यहाँ साँसों के लाले पड़ रहे हैं वो पागल ज़हर खाना चाहता है, जिसे भी डूबना हो डूब जाए समुंदर सूख जाना चाहता है, हमारा हक़ दबा रखा है जिस ने सुना है हज को जाना चाहता है..!! - [अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए](https://hindigazals.com/ashk-peene-ke-liye-khaaq-udaane-ke-liye/): अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए अब मेरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए, ऐसी दफ़अ न लगा जिस में ज़मानत मिल जाए मेरे किरदार को चुन अपने निशाने के लिए, किन ज़मीनों पे उतारोगे अब इमदाद का क़हर कौन सा शहर उजाड़ोगे बसाने के लिए, मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए, हो गई है मेरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए, नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए, जी तो कहता है कि बिस्तर से न उतरूँ कई रोज़ घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए..!! - [खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है](https://hindigazals.com/khaane-ko-to-zahar-bhi-khaya-ja-sakta-hai/): खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है लेकिन उस को फिर समझाया जा सकता है, इस दुनिया में हम जैसे भी रह सकते हैं इस दलदल पर पाँव जमाया जा सकता है, सब से पहले दिल के ख़ालीपन को भरना पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है, मैं ने कैसे कैसे सदमे झेल लिए हैं इस का मतलब ज़हर पचाया जा सकता है, इतना इत्मीनान है अब भी उन आँखों में एक बहाना और बनाया जा सकता है, झूठ में शक की कम गुंजाइश हो सकती है सच को जब चाहो झुठलाया जा सकता है..!! - [लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं](https://hindigazals.com/log-kahte-hai-ki-is-khel-me-sar-jaate-hain/): लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं, मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज अपने बच्चों की तरफ देख के डर जाते हैं, ज़िन्दगी ऐसे भी हालात बना देती है लोग साँसों का कफ़न ओढ़ के मर जाते हैं, पाँव में अब कोई ज़ंजीर नहीं डालते हम दिल जिधर ठीक समझता है उधर जाते है, क्या जुनूँ ख़ेज़ मसाफ़त थी तेरे कूचे की और अब यूँ है कि ख़ामोश गुज़र जाते हैं, ये मोहब्बत की अलामत तो नहीं है कोई तेरा चेहरा नज़र आता है जिधर जाते हैं..!! - [तेरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा](https://hindigazals.com/teri-anjuman-me-zaalim-azab-ehtimam-dekha/): तेरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा कहीं ज़िंदगी की बारिश कहीं क़त्ल ए आम देखा, मेरी अर्ज़ ए शौक़ पढ़ लें ये कहाँ उन्हें गवारा वहीं चाक कर दिया ख़त जहाँ मेरा नाम देखा, बड़ी मिन्नतों से आ कर वो मुझे मना रहे हैं मैं बचा रहा हूँ दामन मेरा इंतिक़ाम देखा, ऐ शकील रूह परवर तेरी बेख़ुदी के नग़्मे मगर आज तक न हम ने तेरे लब पे जाम देखा..!! - [हंगामा ए ग़म से तंग आ कर इज़हार ए मसर्रत कर बैठे](https://hindigazals.com/hungaam-e-gam-se-tang-aa-kar/): हंगामा ए ग़म से तंग आ कर इज़हार ए मसर्रत कर बैठे मशहूर थी अपनी ज़िंदादिली दानिस्ता शरारत कर बैठे, कोशिश तो बहुत की हम ने मगर पाया न ग़म ए हस्ती से मफ़र वीरानी ए दिल जब हद से बढ़ी घबरा के मोहब्बत कर बैठे, हस्ती के तलातुम में पिन्हाँ थे ऐश ओ तरब के धारे भी अफ़्सोस हमी से भूल हुई अश्कों पे क़नाअत कर बैठे, ज़िंदान ए जहाँ से ये नफ़रत ऐ हज़रत ए वाइज़ क्या कहना अल्लाह के आगे बस न चला बंदों से बग़ावत कर बैठे, गुलचीं ने तो कोशिश कर डाली सूनी हो चमन की हर डाली काँटों ने मुबारक काम किया फूलों की हिफ़ाज़त कर बैठे, हर चीज़ नहीं है मरकज़ पर एक ज़र्रा इधर एक ज़र्रा उधर नफ़रत से न देखो दुश्मन को शायद वो मोहब्बत कर बैठे, अल्लाह तो सब की सुनता है जुरअत है शकील अपनी अपनी हाली ने ज़बाँ से उफ़ भी न की इक़बाल शिकायत कर बैठे..!! - [जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं](https://hindigazals.com/jine-wale-kaza-se-darte-hai/): जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं ज़हर पी कर दवा से डरते हैं, ज़ाहिदों को किसी का ख़ौफ़ नहीं सिर्फ़ काली घटा से डरते हैं, आप जो कुछ कहें हमें मंज़ूर नेक बंदे ख़ुदा से डरते हैं, दुश्मनों को सितम का ख़ौफ़ नहीं दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं, अज़्म ओ हिम्मत के बावजूद शकील इश्क़ की इब्तिदा से डरते हैं..!! - [वो हम से दूर होते जा रहे हैं](https://hindigazals.com/wo-hum-se-door-hote-jaa-rahe-hai/): वो हम से दूर होते जा रहे हैं बहुत मग़रूर होते जा रहे हैं, बस एक तर्क ए मोहब्बत के इरादे हमें मंज़ूर होते जा रहे हैं, मनाज़िर थे जो फ़िरदौस ए तसव्वुर वो सब मस्तूर होते जा रहे हैं, बदलती जा रही है दिल की दुनिया नए दस्तूर होते जा रहे हैं, बहुत मग़्मूम थे जो दीदा ओ दिल बहुत मसरूर होते जा रहे हैं, वफ़ा पर मुर्दनी सी छा चली है सितम का नूर होते जा रहे हैं, कभी वो पास आए जा रहे थे मगर अब दूर होते जा रहे हैं, फ़िराक़ ओ हिज्र के तारीक लम्हे सरापा नूर होते जा रहे हैं, शकील एहसास ए गुमनामी से कह दो कि हम मशहूर होते जा रहे हैं..!! - [मेरी ज़िंदगी है ज़ालिम तेरे ग़म से आश्कारा](https://hindigazals.com/meri-zindagi-hai-zalim-tere-gam-se-ashkaara/): मेरी ज़िंदगी है ज़ालिम तेरे ग़म से आश्कारा तेरा ग़म है दर हक़ीक़त मुझे ज़िंदगी से प्यारा, वो अगर बुरा न मानें तो जहान ए रंग ओ बू में मैं सुकून ए दिल की ख़ातिर कोई ढूँढ लूँ सहारा, मुझे तुझ से ख़ास निस्बत मैं रहीन ए मौज ए तूफ़ाँ जिन्हें ज़िंदगी थी प्यारी उन्हें मिल गया किनारा, मुझे आ गया यक़ीं सा कि यही है मेरी मंज़िल सर ए राह जब किसी ने मुझे दफ़अतन पुकारा, ये ख़ुनुक ख़ुनुक हवाएँ ये झुकी झुकी घटाएँ वो नज़र भी क्या नज़र है जो समझ न ले इशारा, मैं बताऊँ फ़र्क़ नासेह जो है मुझ में और तुझ में मेरी ज़िंदगी तलातुम तेरी ज़िंदगी किनारा, मुझे फ़ख़्र है इसी पर ये करम भी है मुझी पर तेरी कम निगाहियाँ भी मुझे क्यूँ न हों गवारा ? - [कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है](https://hindigazals.com/koi-aarzoo-nahin-hai-koi-muddaa-nahi-hai/): कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है तेरा ग़म रहे सलामत मेरे दिल में क्या नहीं है ? - [ग़म ए इश्क़ रह गया है ग़म ए जुस्तुजू में ढल कर](https://hindigazals.com/gam-e-ishq-rah-gaya-hai-gam-e-justazoo-me-dhal-kar/): ग़म ए इश्क़ रह गया है ग़म ए जुस्तुजू में ढल कर वो नज़र से छुप गए हैं मेरी ज़िंदगी बदल कर, तेरी गुफ़्तुगू को नासेह दिल ए गम ज़दा से जल कर अभी तक तो सुन रहा था मगर अब सँभल सँभल कर, न मिला सुराग़ ए मंज़िल कभी उम्र भर किसी को नज़र आ गई है मंज़िल कभी दो क़दम ही चल कर, ग़म ए उम्र ए मुख़्तसर से अभी बेख़बर हैं कलियाँ न चमन में फेंक देना किसी फूल को मसल कर, हैं किसी के मुंतज़िर हम मगर ऐ उमीद ए मुबहम कहीं वक़्त रह न जाए यूँही करवटें बदल कर, मेरे दिल को रास आया न जुमूद ओ ग़ैर फ़ानी मिली राह ए ज़िंदगानी मुझे ख़ार से निकल कर, मेरी तेज़ गामियों से नहीं बर्क़ को भी निस्बत कहीं खो न जाए दुनिया मेरे साथ साथ चल कर, कभी यकबयक तवज्जोह कभी दफ़अतन तग़ाफ़ुल मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर, हैं शकील ज़िंदगी में ये जो वुसअतें नुमायाँ इन्हीं वुसअतों से पैदा कोई आलम ए ग़ज़ल कर..!! - [मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं](https://hindigazals.com/meri-zindagi-pe-na-muskura-mujhe-zindagi-ka-alam-nahin/): मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं जिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ाँ बहार से कम नहीं, मेरा कुफ़्र हासिल ए ज़ोहद है मेरा ज़ोहद हासिल ए कुफ़्र है मेरी बंदगी वो है बंदगी जो रहीन ए दैर ओ हरम नहीं, मुझे रास आएँ ख़ुदा करे यही इश्तिबाह की साअतें उन्हें ऐतबार ए वफ़ा तो है मुझे ऐतबार ए सितम नहीं, वही कारवाँ वही रास्ते वही ज़िंदगी वही मरहले मगर अपने अपने मक़ाम पर कभी तुम नहीं कभी हम नहीं, न वो शान ए जब्र ए शबाब है न वो रंग ए क़हर ए इताब है दिल ए बेक़रार पे इन दिनों है सितम यही कि सितम नहीं, न फ़ना मेरी न बक़ा मेरी मुझे ऐ शकील न ढूँढिए मैं किसी का हुस्न ए ख़याल हूँ मेरा कुछ वजूद ओ अदम नहीं..!! - [रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क़ का सितारा](https://hindigazals.com/raha-gardisho-me-hardam-mere-ishq-ka-sitaara/): रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क़ का सितारा कभी डगमगाई कश्ती कभी खो गया किनारा, कोई दिल के खेल देखे कि मोहब्बतों की बाज़ी वो क़दम क़दम पे जीते मैं क़दम क़दम पे हारा, ये हमारी बदनसीबी जो नहीं तो और क्या है कि उसी के हो गए हम जो न हो सका हमारा ? - [अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे](https://hindigazals.com/ab-to-khushi-ka-gam-hai-na-gam-ki-khushi/): अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बेहिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे, वो वक़्त भी ख़ुदा न दिखाए कभी मुझे उन की नदामतों पे हो शर्मिंदगी मुझे, रोने पे अपने उन को भी अफ़्सुर्दा देख कर यूँ बन रहा हूँ जैसे अब आई हँसी मुझे, यूँ दीजिए फ़रेब ए मोहब्बत कि उम्र भर मैं ज़िंदगी को याद करूँ ज़िंदगी मुझे, रखना है तिश्ना काम तो साक़ी बस एक नज़र सैराब कर न दे मेरी तिश्नालबी मुझे, पाया है सब ने दिल मगर इस दिल के बावजूद एक शय मिली है दिल में खटकती हुई मुझे, राज़ी हों या ख़फ़ा हों वो जो कुछ भी हों शकील हर हाल में क़ुबूल है उन की ख़ुशी मुझे..!! - [कुछ भी उन पर असर नहीं देखा](https://hindigazals.com/kuch-bhi-un-par-asar-nahi-dekha/): कुछ भी उन पर असर नहीं देखा इश्क़ सा बे हुनर नहीं देखा, उन के जोबन को देख लिया जिस ने सर्व को बारवर नहीं देखा, एक बिजली नज़र में कौंद गई उन को देखा मगर नहीं देखा, जो किसी दूसरे के साथ चले हम ने वो हमसफ़र नहीं देखा, ख़ाक छानी जहान की क्या क्या कोई अहल ए नज़र नहीं देखा, हम ने अज़हर को लाख समझाया फिर भी उस पर असर नहीं देखा..!! - [हमें दावा था देखेंगे वो क्यूँकर याद आते हैं](https://hindigazals.com/hume-daawa-tha-dekhenge-kyunkar-yaad-aate-hain/): हमें दावा था देखेंगे वो क्यूँकर याद आते हैं रग ए जाँ बन गए हैं अब फ़ुज़ूँ तर याद आते हैं, ख़फ़ा तो मुझ से रहते हैं मगर रहते हैं दिल में भी मैं अक्सर भूलता हूँ और वो अक्सर याद आते हैं, बुतों की बंदगी है शुक्रिया साने की सनअत का वो काफ़िर क्यों हुआ जिस को ये दिलबर याद आते हैं, मेरा माज़ी नज़र आया मुझे हाल ए हसीं हो कर जो उन के साथ देखे थे वो मंज़र याद आते हैं, मैं गुलचीं था बहार ए ज़िंदगी के गुल्सितानों का जो दिन फूलों में बीते थे वो अक्सर याद आते हैं, नशा उतरा मगर अब भी तुम्हारी मस्त आँखों से पिए थे जो मय ए उल्फ़त के साग़र याद आते हैं, दयार ए दूर में मैं तो नहीं आता हूँ याद उन को न जाने वो मुझे फिर क्यों बराबर याद आते हैं ? - [ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है](https://hindigazals.com/ye-baat-un-ki-tabiyat-pe-baar-guzri-hai/): ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? - [मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली](https://hindigazals.com/mujhe-talash-thi-jis-ki-wahi-kabhi-na-mili/): मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी तलाश में पैरों में पड़ गए छाले मगर ऐ मंज़िल ए मक़्सूद तू कभी न मिली, ख़ुशी से दोस्ती मेरी भी थी मगर एक दिन ख़फ़ा हुई वो कुछ ऐसी कि फिर कभी न मिली, वो जिस चराग़ के दम से मकान रौशन था उसी चराग़ को ख़ुद अपनी रौशनी न मिली, तुम्हारे हिज्र में ऐसा भी वक़्त आया है बदन टटोल के देखा तो नब्ज़ ही न मिली, ये जिस्म है कि फ़क़त शोर गुल है साँसों का ये आँख है कि कोई ख़्वाब देखती न मिली, दिल ओ दिमाग़ पे हावी रहा ग़म ए दौराँ ख़ुशी के साथ भी रह कर मुझे ख़ुशी न मिली, मुझे न मिल सका सूरज मेरे मुकद्दर का तेरा नसीब तुझे मेरी चाँदनी न मिली..!! - [ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है](https://hindigazals.com/ye-mohabbat-jo-mohabbat-se-kamaai-hui-hai/): ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक वही फूल मयस्सर न हुआ दामन को जिस की ख़ुशबू मेरी रग रग में समाई हुई है, जब भी आँखों ने सजाए है तुम्हारे सपने ज़ेहन और दिल में बहुत देर लड़ाई हुई है, दिल की चौखट पे जला रखे है आँखों ने चराग़ किस की आमद की अभी आस लगाई हुई है, उस की यादो से मुनव्वर है मेरे दिल का जहाँ आंसुओं से मेरी आँखों की सफ़ाई हुई है, ऐ मोहब्बत तेरे चेहरे पे उदासी क्यूँ है ? - [तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ](https://hindigazals.com/tu-phool-ki-maanind-na-shabnam-ki-tarah-aa/): तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ, हर मर्तबा आता है मह ए नौ की तरह तू इस बार ज़रा मेरी शब ए ग़म की तरह आ, हल करने हैं मुझ को कई पेचीदा मसाइल ऐ जान ए वफ़ा गेसू ए पुरख़म की तरह आ, ज़ख़्मों को गवारा नहीं यक रंगी ए हालात नश्तर की तरह आ कभी मरहम की तरह आ, नज़दीकी ओ दूरी की कशाकश को मिटा दे इस जंग में तू सुल्ह के परचम की तरह आ, माना कि मेरा घर तेरी जन्नत तो नहीं है दुनिया में मिरी लग़्ज़िश ए आदम की तरह आ, तू कुछ तो मेरे ज़ब्त ए मोहब्बत का सिला दे हंगामा ए फ़ना दीदा ए पुरनम की तरह आ..!! - [दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा](https://hindigazals.com/dil-se-agar-kabhi-tera-armaan-jayega/): दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा घर को लगा के आग ये मेहमान जाएगा, सब होंगे उस से अपने तआरुफ़ की फ़िक्र में मुझ को मेरे सुकूत से पहचान जाएगा, इस कुफ़्र ए इश्क़ से मुझे क्यूँ रोकते हो तुम ईमान वालो मेरा ही ईमान जाएगा, आज उस से मैं ने शिकवा किया था शरारतन किस को ख़बर थी इतना बुरा मान जाएगा ? - [डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं](https://hindigazals.com/doobne-wale-ki-mayyat-par-laakho-rone-wale-hain/): डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं फूट फूट कर जो रोते हैं वही डुबोने वाले हैं, किस किस को तुम भूल गए हो ग़ौर से देखो बादा कशो शीश महल के रहने वाले पत्थर ढोने वाले हैं, सोने का ये वक़्त नहीं है जाग भी जाओ बेख़बरो वर्ना हम तो तुम से ज़्यादा चैन से सोने वाले हैं, आज सुना कर अपना फ़साना हम ये करेंगे अंदाज़ा कितने दोस्त हैं हँसने वाले कितने रोने वाले हैं ? - [ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं](https://hindigazals.com/gam-har-ek-aankh-ko-chhalkaaye-zaruri-to-nahin/): ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं अब्र उठे और बरस जाए ज़रूरी तो नहीं, बर्क़ सय्याद के घर पर भी तो गिर सकती है आशियानों पे ही लहराए ज़रूरी तो नहीं, राहबर राह मुसाफ़िर को दिखा देता है वही मंज़िल पे पहुँच जाए ज़रूरी तो नहीं, नोक ए हर ख़ार ख़तरनाक तो होती है मगर सब के दामन से उलझ जाए ज़रूरी तो नहीं, ग़ुंचे मुरझाते हैं और शाख़ से गिर जाते हैं हर कली फूल ही बन जाए ज़रूरी तो नहीं..!! - [झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए](https://hindigazals.com/jhuthi-hi-tasalli-ho-kuch-dil-to-bahal-jaaye/): झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए धुंदली ही सही लेकिन एक शम्अ तो जल जाए, इस मौज की टक्कर से साहिल भी लरज़ता है कुछ रोज़ तो तूफ़ाँ की आग़ोश में पल जाए, मजबूरी ए साक़ी भी ऐ तिश्नालबो समझो वाइज़ का ये मंशा है मयख़्वारों में चल जाए, ऐ जल्वा ए जानाना फिर ऐसी झलक दिखला हसरत भी रहे बाक़ी अरमाँ भी निकल जाए, इस वास्ते छेड़ा है परवानों का अफ़्साना शायद तेरे कानों तक पैग़ाम ए अमल जाए, मयख़ाना ए हस्ती में मै कश वही मै कश है सँभले तो बहक जाए बहके तो सँभल जाए, हम ने तो फ़ना इतना मफ़्हूम ए ग़ज़ल समझा ख़ुद ज़िंदगी ए शाइर अशआर में ढल जाए..!! - [ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए](https://hindigazals.com/gam-e-hizraan-se-zara-yun-bhi-nibhaai-jaaye/): ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए महफ़िल ए ग़ैर सही आज सजाई जाए, इख़्तिलाफ़ात की बुनियाद है गहरी लेकिन इस पे नफ़रत की न दीवार उठाई जाए, पहले मंज़िल का हम अपनी तो तअय्युन कर लें फिर ज़माने को कोई राह दिखाई जाए, मय के बारे में ख़यालात बदल जाएँगे हज़रत ए शैख़ को थोड़ी सी पिलाई जाए, सब के आमाल पे तन्क़ीद है शेवा जिस का बात किरदार पे उस के भी उठाई जाए, यूँ ही अक़्वाम की तक़दीर सँवरती है फ़रोग़ नेमत ए इल्म पे कुछ बात चलाई जाए..!! - [फिरे राह से वो यहाँ आते आते](https://hindigazals.com/fire-raah-se-wo-yahan-aate-aate/): फिरे राह से वो यहाँ आते आते अजल मर रही तू कहाँ आते आते ? - [आप का एतिबार कौन करे](https://hindigazals.com/aap-ka-aitibar-kaun-kare/): आप का एतिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ? ज़िक्र ए मेहर ओ वफ़ा तो हम करते पर तुम्हें शर्मसार कौन करे ? - [उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं](https://hindigazals.com/uzr-aane-me-bhi-hai-aur-bulaate-bhi-nahin/): उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस ए तर्क ए मुलाक़ात बताते भी नहीं, मुंतज़िर हैं दम ए रुख़्सत कि ये मर जाए तो जाएँ फिर ये एहसान कि हम छोड़ के जाते भी नहीं, सर उठाओ तो सही आँख मिलाओ तो सही नशा ए मय भी नहीं नींद के माते भी नहीं, क्या कहा फिर तो कहो हम नहीं सुनते तेरी नहीं सुनते तो हम ऐसों को सुनाते भी नहीं, ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं, मुझ से लाग़र तेरी आँखों में खटकते तो रहे तुझ से नाज़ुक मेरी नज़रों में समाते भी नहीं, देखते ही मुझे महफ़िल में ये इरशाद हुआ कौन बैठा है उसे लोग उठाते भी नहीं, हो चुका क़त्अ तअल्लुक़ तो जफ़ाएँ क्यूँ हों ? - [ग़ज़ब किया तेरे वादे पे एतिबार किया](https://hindigazals.com/gazab-kiya-tere-waade-pe-aitibar-kiya/): ग़ज़ब किया तेरे वादे पे एतिबार किया तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया, किसी तरह जो न उस बुत ने एतिबार किया मेरी वफ़ा ने मुझे ख़ूब शर्मसार किया, हँसा हँसा के शब ए वस्ल अश्कबार किया तसल्लियाँ मुझे दे दे के बेक़रार किया, ये किस ने जल्वा हमारे सर ए मज़ार किया कि दिल से शोर उठा हाए बेक़रार किया, सुना है तेग़ को क़ातिल ने आबदार किया अगर ये सच है तो बे शुब्ह हम पे वार किया, न आए राह पे वो इज्ज़ बेशुमार किया शब ए विसाल भी मैं ने तो इंतिज़ार किया, तुझे तो वादा ए दीदार हम से करना था ये क्या किया कि जहाँ को उमीदवार किया, ये दिल को ताब कहाँ है कि हो मआल अंदेश उन्हों ने वादा किया इस ने एतिबार किया, कहाँ का सब्र कि दम पर है बन गई ज़ालिम ब तंग आए तो हाल ए दिल आश्कार किया, तड़प फिर ऐ दिल ए नादाँ कि ग़ैर कहते हैं अख़ीर कुछ न बनी सब्र इख़्तियार किया, मिले जो यार की शोख़ी से उस की बेचैनी तमाम रात दिल ए मुज़्तरिब को प्यार किया, भुला भुला के जताया है उन को राज़ ए निहाँ छुपा छुपा के मोहब्बत को आश्कार किया, न उस के दिल से मिटाया कि साफ़ हो जाता सबा ने ख़ाक परेशाँ मेरा ग़ुबार किया, हम ऐसे महव ए नज़ारा न थे जो होश आता मगर तुम्हारे तग़ाफ़ुल ने होशियार किया, हमारे सीने में जो रह गई थी आतिश ए हिज्र शब ए विसाल भी उस को न हमकनार किया, रक़ीब ओ शेवा ए उल्फ़त ख़ुदा की क़ुदरत है वो और इश्क़ भला तुम ने एतिबार किया, ज़बान ए ख़ार से निकली सदा ए बिस्मिल्लाह जुनूँ को जब सर ए शोरीदा पर सवार किया, तेरी निगह के तसव्वुर में हम ने ऐ क़ातिल लगा लगा के गले से छुरी को प्यार किया, ग़ज़ब थी कसरत ए महफ़िल कि मैं ने धोके में हज़ार बार रक़ीबों को हम कनार किया, हुआ है कोई मगर उस का चाहने वाला कि आसमाँ ने तेरा शेवा इख़्तियार किया, न पूछ दिल की हक़ीक़त मगर ये कहते हैं वो बे क़रार रहे जिस ने बे क़रार किया, जब उन को तर्ज़ ए सितम आ गए तो होश आया बुरा हो दिल का बुरे वक़्त होशियार किया, फ़साना ए शब ए ग़म उन को एक कहानी थी कुछ एतिबार किया कुछ न एतिबार किया, असीरी दिल ए आशुफ़्ता रंग ला के रही तमाम तुर्रा ए तर्रार तार तार किया, कुछ आ गई दावर ए महशर से है उम्मीद मुझे कुछ आप ने मेरे कहने का एतिबार किया, किसी के इश्क़ ए निहाँ में ये बदगुमानी थी कि डरते डरते ख़ुदा पर भी आश्कार किया, फ़लक से तौर क़यामत के बन न पड़ते थे अख़ीर अब तुझे आशोब ए रोज़गार किया, वो बात कर जो कभी आसमाँ से हो न सके सितम किया तो बड़ा तू ने इफ़्तिख़ार किया, बनेगा मेहर ए क़यामत भी एक ख़ाल ए सियाह जो चेहरा दाग़ ए सियह रू ने आश्कार किया..!! - [जाती हुई लड़की को सदा देना चाहिए](https://hindigazals.com/jaati-hui-ladki-ko-sada-dena-chahiye/): जाती हुई लड़की को सदा देना चाहिए घर हो तो बुरा क्या है पता देना चाहिए, होंटों के गुलाबों को चुरा लेने से पहले बालों में कोई फूल खिला देना चाहिए, डर है कहीं कमरे में न घुस आए ये मंज़र खिड़की को कहीं और हटा देना चाहिए, पर तोल के बैठी है मगर उड़ती नहीं है तस्वीर से चिड़िया को उड़ा देना चाहिए, सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए, मरने में मज़ा है मगर इतना तो नहीं है अल्वी तुम्हें क़ातिल को दुआ देना चाहिए..!! - [हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं](https://hindigazals.com/har-chand-jaagte-hai-par-soye-hue-se-hai/): हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं सब अपने अपने ख़्वाबों में खोए हुए से हैं, मैं शाम के हिसार में जकड़ा हुआ सा हूँ मंज़र मेरे लहू में डुबोए हुए से हैं, महसूस हो रहा है ये फूलों को देख कर जैसे तमाम रात के रोए हुए से हैं, एक डोर ही है दिन की महीनों की साल की इस में कहीं पे हम भी पिरोए हुए से हैं, अल्वी ये मोजिज़ा है दिसम्बर की धूप का सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं..!! - [और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी](https://hindigazals.com/aur-koi-chaara-na-tha-aur-koi-surat-na-thi/): और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी उस के रहे हो के हम जिस से मोहब्बत न थी, इतने बड़े शहर में कोई हमारा न था अपने सिवा आश्ना एक भी सूरत न थी, इस भरी दुनिया से वो चल दिया चुपके से यूँ जैसे किसी को भी अब उस की ज़रूरत न थी, अब तो किसी बात पर कुछ नहीं होता हमें आज से पहले कभी ऐसी तो हालत न थी, सब से छुपाते रहे दिल में दबाते रहे तुम से कहें किस लिए ग़म था वो दौलत न थी, अपना तो जो कुछ भी था घर में पड़ा था सभी थोड़ा बहुत छोड़ना चोर की आदत न थी, ऐसी कहानी का मैं आख़िरी किरदार था जिस में कोई रस न था कोई भी औरत न थी, शेर तो कहते थे हम सच है ये अल्वी मगर तुम को सुनाते कभी इतनी भी फ़ुर्सत न थी..!! - [हर एक झोंका नुकीला हो गया है](https://hindigazals.com/har-ek-jhoka-nukila-ho-gaya/): हर एक झोंका नुकीला हो गया है फ़ज़ा का रंग नीला हो गया है, अभी दो चार ही बूँदें गिरीं हैं मगर मौसम नशीला हो गया है, करें क्या दिल उसी को माँगता है ये साला भी हटीला हो गया है, ख़बर क्या थी कि नेकी बाँझ होगी बदी का तो क़बीला हो गया है, ख़ुदा रखे जवानी आ गई है गुनह बाँका सजीला हो गया है, न जाने छत पे क्या देखा था अल्वी बेचारा चाँद पीला हो गया है..!! - [दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ](https://hindigazals.com/din-bhar-ke-dahkte-hue-sooraj-se-lada-hoon/): दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ अब रात के दरिया में पड़ा डूब रहा हूँ, अब तक मैं वहीं पर हूँ जहाँ से मैं चला हूँ आवाज़ की रफ़्तार से क्यूँ भाग रहा हूँ ? - [यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की](https://hindigazals.com/yun-to-kam-kam-thi-mohabbat-us-ki/): यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की कम न थी फिर भी रिफ़ाक़त उस की, सारे दुख भूल के हँस लेता था ये भी थी एक करामत उस की, उलझनें और भी थीं उस के लिए एक मैं भी था मुसीबत उस की, पहले भी पीने को जी करता था मिल ही जाती थी इजाज़त उस की, ख़्वाब में जैसे चला करता हूँ देखता रहता हूँ सूरत उस की, नाम रहता है ज़बाँ पर उस का घर में रहती है ज़रूरत उस की, उस की आदत थी शरारत करना काश ये भी हो शरारत उस की, फैलते बढ़ते हुए बिस्तर में ढूँढता रहता हूँ क़ुर्बत उस की, एक बोसीदा सा घर छोड़ गई ले गई साथ वो जन्नत उस की..!! - [अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे](https://hindigazals.com/abhi-to-aur-bhi-din-barishon-ke-aane-the/): अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे, हिक़ारतें ही मिलीं हम को ज़ंग आलूदा दिलों में यूँ तो कई क़िस्म के ख़ज़ाने थे, ये दश्त तेल का प्यासा न था ख़ुदा वंदा यहाँ तो चार छे दरिया हमें बहाने थे, किसी से कोई तअल्लुक़ रहा न हो जैसे कुछ इस तरह से गुज़रते हुए ज़माने थे, परिंदे दूर फ़ज़ाओं में खो गए अल्वी उजाड़ उजाड़ दरख़्तों पे आशियाने थे..!! - [गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं](https://hindigazals.com/gulon-ke-darmiyan-achchi-lagi-hai/): गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं हमें ये तितलियाँ अच्छी लगी हैं, गली में कोई घर अच्छा नहीं था मगर कुछ खिड़कियाँ अच्छी लगी हैं, नहा कर भीगे बालों को सुखाती छतों पर लड़कियाँ अच्छी लगी हैं, हिनाई हाथ दरवाज़े से बाहर और उस में चूड़ियाँ अच्छी लगी हैं, बिछड़ते वक़्त ऐसा भी हुआ है किसी की सिसकियाँ अच्छी लगी हैं, हसीनों को लिए बैठें हैं अल्वी तभी तो कुर्सियाँ अच्छी लगी हैं..!! - [हज़ारों लाखों दिल्ली में मकाँ हैं](https://hindigazals.com/hazaaron-laakhon-dilli-me-makaan-hain/): हज़ारों लाखों दिल्ली में मकाँ हैं मगर पहचानने वाले कहाँ हैं ? - [ऑफ़िस में भी घर को खुला पाता हूँ मैं](https://hindigazals.com/office-me-bhi-ghar-ko-khula-paata-hoon/): ऑफ़िस में भी घर को खुला पाता हूँ मैं टेबल पर सर रख कर सो जाता हूँ मैं, गली गली मैं अपने आप को ढूँढता हूँ एक एक खिड़की में उस को पाता हूँ मैं, अपने सब कपड़े उस को दे आता हूँ उस का नंगा जिस्म उठा लाता हूँ मैं, बस के नीचे कोई नहीं आता फिर भी बस में बैठ के बेहद घबराता हूँ मैं, मरना है तो साथ साथ ही चलते हैं ठहर ज़रा घर जा के अभी आता हूँ मैं, गाड़ी आती है लेकिन आती ही नहीं रेल की पटरी देख के थक जाता हूँ मैं, अल्वी प्यारे सच सच कहना क्या अब भी उसी को रोता देख के याद आता हूँ मैं..?? - [इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो](https://hindigazals.com/is-shahar-me-kahin-pe-humara-makaan-bhi-ho/): इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो बाज़ार है तो हम पे कभी मेहरबाँ भी हो, जागें तो आस पास किनारा दिखाई दे दरिया हो पुरसुकून खुला बादबाँ भी हो, एक दोस्त ऐसा हो कि मेरी बात बात को सच मानता हो और ज़रा बदगुमाँ भी हो, रस्ते में एक पेड़ हो तन्हा खड़ा हुआ और उस की एक शाख़ पे एक आशियाँ भी हो, उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो, हम उस जगह चले हैं जहाँ ये ज़मीं नहीं अच्छा हो गर वहाँ पे नया आसमाँ भी हो..!! - [कल रात सूनी छत पे अजब सानेहा हुआ](https://hindigazals.com/kal-raat-sooni-chhat-pe-azab-saaneha-hua/): कल रात सूनी छत पे अजब सानेहा हुआ जाने दो यार कौन बताए कि क्या हुआ ? - [एक लड़का था एक लड़की थी](https://hindigazals.com/ek-ladka-tha-ek-ladki-thi-aage-allah-ki-marzi-thi/): एक लड़का था एक लड़की थी आगे अल्लाह की मर्ज़ी थी, पहला फूल खिला था दिल में लहू में ख़ुश्बू दौड़ गई थी, पहला साँस लिया था सुख का पहली बार हवा एक चली थी, अब क्या जानें लेकिन पहले चाँद पे एक बुढ़िया रहती थी, ये बाज़ार कहाँ था पहले यहाँ तो पहले एक गली थी, पानी में बिजली का घर था पत्थर में चिंगारी छुपी थी..!! - [कितना हसीन था तू कभी कुछ ख़याल कर](https://hindigazals.com/kitna-hasin-tha-tu-kabhi-kuch-khyal-kar/): कितना हसीन था तू कभी कुछ ख़याल कर अब और अपने आप को मत पाएमाल कर, मरने के डर से और कहाँ तक जियेगा तू जीने के दिन तमाम हुए इंतिक़ाल कर, एक याद रह गई है मगर वो भी कम नहीं एक दर्द रह गया है सो रखना सँभाल कर, देखा तो सब के सर पे गुनाहों का बोझ था ख़ुश थे तमाम नेकियाँ दरिया में डाल कर, ख़्वाजा के दर से कोई भी ख़ाली नहीं गया आया है इतने दूर तो अल्वी सवाल कर..!! - [आँख में दहशत न थी हाथ में ख़ंजर न था](https://hindigazals.com/aankh-me-dahshat-na-thi-haath-me-khanzar-na-tha/): आँख में दहशत न थी हाथ में ख़ंजर न था सामने दुश्मन था पर दिल में कोई डर न था, उस से भी मिल कर हमें मरने की हसरत रही उस ने भी जाने दिया वो भी सितमगर न था, एक पहाड़ी पे मैं बैठा रहा देर तक शौक़ से देखा करूँ ऐसा भी मंज़र न था, हम से जो आगे गए कितने मेहरबान थे दूर तलक राह में एक भी पत्थर न था, रात बहुत देर से आँख लगती थी ज़रा नींद में कमरा न था ख़्वाब में बिस्तर न था, शेर तो हम ने बहुत ठीक किया था मगर अब भी ग़लत था कहीं अब भी बराबर न था, सोचा था इस बार तो जा के ज़फ़र से मिलें क्या करें अल्वी मगर ऐसा मुक़द्दर न था..!! - [मैं अपना नाम तेरे जिस्म पर लिखा देखूँ](https://hindigazals.com/main-apna-naam-tere-jism-par-likha-dekhoon/): मैं अपना नाम तेरे जिस्म पर लिखा देखूँ दिखाई देगा अभी बत्तियाँ बुझा देखूँ, फिर उस को पाऊँ मेरा इंतिज़ार करते हुए फिर उस मकान का दरवाज़ा अधखुला देखूँ, घटाएँ आएँ तो घर घर को डूबता पाऊँ हवा चले तो हर एक पेड़ को गिरा देखूँ, किताब खोलूँ तो हर्फ़ों में खलबली मच जाए क़लम उठाऊँ तो काग़ज़ को फैलता देखूँ, उतार फेंकूँ बदन से फटी पुरानी क़मीज बदन क़मीज से बढ़ कर कटा फटा देखूँ, वहीं कहीं न पड़ी हो तमन्ना जीने की फिर एक बार उन्हीं जंगलों में जा देखूँ, वो रोज़ शाम को अल्वी इधर से जाती है तो क्या मैं आज उसे अपने घर बुला देखूँ..?? - [शरीफ़े के दरख़्तों में छुपा घर देख लेता हूँ](https://hindigazals.com/sharifon-ke-darakhton-me-chhupa-ghar-dekh-leta-hoon/): शरीफ़े के दरख़्तों में छुपा घर देख लेता हूँ मैं आँखें बंद कर के घर के अंदर देख लेता हूँ, उधर उस पार क्या है ये कभी सोचा नहीं मैं ने मगर मैं रोज़ खिड़की से समुंदर देख लेता हूँ, सड़क पे चलते फिरते दौड़ते लोगों से उकता कर किसी छत पर मज़े में बैठे बंदर देख लेता हूँ, ये सच है अपनी क़िस्मत कोई कैसे देख सकता है मगर मैं ताश के पत्ते उठा कर देख लेता हूँ, गली कूचों में चौराहों पे या बस की क़तारों में मैं उस चुप चाप सी लड़की को अक्सर देख लेता हूँ, चला जाऊँगा जैसे ख़ुद को तन्हा छोड़ कर अल्वी मैं अपने आप को रातों में उठ कर देख लेता हूँ..!! - [कभी तो ऐसा भी हो राह भूल जाऊँ मैं](https://hindigazals.com/kabhi-to-aisa-bhi-ho-raah-bhool-jaaoon-main/): कभी तो ऐसा भी हो राह भूल जाऊँ मैं निकल के घर से न फिर अपने घर में आऊँ मैं, बिखेर दे मुझे चारों तरफ़ ख़लाओं में कुछ इस तरह से अलग कर कि जुड़ न पाऊँ मैं, ये जो अकेले में परछाइयाँ सी बनती हैं बिखर ही जाएँगी लेकिन किसे दिखाऊँ मैं ? - [आग पानी से डरता हुआ मैं ही था](https://hindigazals.com/aag-paani-se-darta-hua-main-hi-tha/): आग पानी से डरता हुआ मैं ही था चाँद की सैर करता हुआ मैं ही था, सर उठाए खड़ा था पहाड़ों पे मैं पत्ती पत्ती बिखरता हुआ मैं ही था, मैं ही था उस तरफ़ ज़ख़्म खाया हुआ इस तरफ़ वार करता हुआ मैं ही था, जाग उठा था सुब्ह मौत की नींद से रात आई तो मरता हुआ मैं ही था, मैं ही था मंज़िलों पे पड़ा हाँफता रास्तों में ठहरता हुआ मैं ही था, मुझ से पूछे कोई डूबने का मज़ा पानियों में उतरता हुआ मैं ही था, मैं ही था अल्वी कमरे में सोया हुआ और गली से गुज़रता हुआ मैं ही था..!! - [क्यूँ न महकें गुलाब आँखों में ?](https://hindigazals.com/kyun-na-mahke-gulab-aankhon-me/): क्यूँ न महकें गुलाब आँखों में ? - [शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं](https://hindigazals.com/sharminda-apni-jeb-ko-karta-nahin-hoon/): शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं बाज़ार ए आरज़ू से गुज़रता नहीं हूँ मैं, पहचान ही न पाऊँ ख़ुद अपने ही अक्स को इतना भी आइने में सँवरता नहीं हूँ मैं, उन कामों की बनाता हूँ फ़िहरिस्त बार बार जो काम मुझ को करने हैं करता नहीं हूँ मैं..!! - [ऐसे न बिछड़ आँखों से अश्कों की तरह तू](https://hindigazals.com/aise-na-bichhad-aankhon-se-ashko-ki-tarah/): ऐसे न बिछड़ आँखों से अश्कों की तरह तू आ लौट के आ फिर तेरी यादों की तरह तू, सुख चैन मेरा लूटने वाले आ किसी दिन मुझ को भी चुरा ले मेरी नींदों की तरह तू, चाहा था बहुत मैं ने भुला दूँ तुझे लेकिन जाता ही नहीं दिल से उमीदों की तरह तू, मुँह फेर के जाना है तुझे जा तेरी मर्ज़ी मत रूठ मगर मुझ से नसीबों की तरह तू..!! - [जिस को भी देखो तेरे दर का पता पूछता है](https://hindigazals.com/jis-ko-bhi-dekho-tere-dar-ka-pata-puchta-hai/): जिस को भी देखो तेरे दर का पता पूछता है क़तरा क़तरे से समुंदर का पता पूछता है, ढूँढता रहता हूँ आईने में अक्सर ख़ुद को मेरा बाहर मेरे अंदर का पता पूछता है, ख़त्म होते ही नहीं संग किसी दिन उस के रोज़ वो एक नए सर का पता पूछता है, ढूँढते रहते हैं सब लोग लकीरों में जिसे वो मुक़द्दर भी सिकंदर का पता पूछता है, मुस्कुराते हुए मैं बात बदल देता हूँ जब कोई मुझ से मेरे घर का पता पूछता है, दर ओ दीवार हैं मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे क्या सुख़नवर से सुख़नवर का पता पूछता है..!! - [ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा](https://hindigazals.com/khazana-kaun-saa-us-paar-hoga/): ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा वहाँ भी रेत का अम्बार होगा, ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है ? - [सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया](https://hindigazals.com/safar-me-ab-ke-azab-tajraba-nikal-aaya/): सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया भटक गया तो नया रास्ता निकल आया, मेरे ही नाम की तख़्ती लगी थी जिस दर पर वो जब खुला तो किसी और का निकल आया, दुखों की झाड़ियाँ उगती चली गईं दिल में हर एक झाड़ी से जंगल घना निकल आया, एक और नाम जुड़ा दुश्मनों के नामों में एक और दोस्त मेरा आईना निकल आया, कुछ आज अश्कों की लज़्ज़त नई नई सी है पुराने ग़म का नया ज़ाइक़ा निकल आया, ये मेरा अक्स है या और है कोई मुझ में कि जिस का क़द मेरे क़द से बड़ा निकल आया, बढ़े कुछ इस तरह दोनों ही दोस्ती की तरफ़ कि दरमियाँ में नया फ़ासला निकल आया, दुआ सलाम से आगे जो थोड़ी बात बढ़ी जो उस का दुख था वही दुख मेरा निकल आया, मेरी ग़ज़ल में किसी बेवफ़ा का ज़िक्र न था न जाने कैसे तेरा तज़्किरा निकल आया..!! - [दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और](https://hindigazals.com/darwaze-ke-andar-ek-darwaz-aur/): दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और ? - [सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले](https://hindigazals.com/suna-hai-ye-jahan-achcha-tha-pahle/): सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन आता इस जहाँ में ? - [शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है](https://hindigazals.com/shauk-kee-had-ko-abhi-paar-kiya-jaana-hai/): शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है आइने में तेरा दीदार किया जाना है, हम तसव्वुर में बना बैठे हैं एक चारागर ख़ुद को जिस के लिए बीमार किया जाना है, दिल तो दुनिया से निकलने पे है आमादा मगर एक ज़रा ज़ेहन को तैयार किया जाना है, तोड़ के रख दिए बाक़ी तो अना ने सारे बुत बस एक अपना ही मिस्मार किया जाना है, देखनी है कभी आईने में अपनी सूरत एक मुख़ालिफ़ को तरफ़दार किया जाना है, मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है, ख़्वाबों और ख़्वाहिशों की बातों में आ कर कब तक ख़ुद को रुस्वा सर ए बाज़ार किया जाना है, एक ही बार में उक्ता से गए हो जिस से ये तमाशा तो कई बार किया जाना है, कौन पढ़ता है यहाँ खोल के अब दिल की किताब अब तो चेहरे को ही अख़बार किया जाना है..!! - [लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है](https://hindigazals.com/likh-likh-ke-aansuon-se-deewan-kar-liya/): लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर हटा दीं हम ने भी ज़ेहन से किताबें हम ने भी अपना जीना आसान कर लिया है, दुनिया में आँखें खोली हैं मूँदने की ख़ातिर आते ही लौटने का सामान कर लिया है, सब लोग इस से पहले कि देवता समझते हम ने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है, जिन नेकियों पे चल कर अज्दाद कितने ख़ुश थे हम ने उन्ही पे चल कर नुक़सान कर लिया है, हर बार अपने दिल की बातें ज़बाँ पे ला कर हम ने मुसीबतों को मेहमान कर लिया है, अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ फिर हम ने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है, एक दिल के टूटने पर रोता है कोई इतना झोंके को ख़ुद हमीं ने तूफ़ान कर लिया है, सोचा भी है कि दाना बनने की कोशिशों में क्या हाल अपना तू ने नादान कर लिया है, कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हम ने जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है..!! - [दूर रह कर भी मेरे दिल के पास है](https://hindigazals.com/door-rah-kar-bhi-mere-dil-ke-paas-hai/): दूर रह कर भी मेरे दिल के पास है तेरी यादों में हर पल का एहसास है, तेरी साँसों से महका हुआ हर चमन तेरे बिना जहाँ सारा वीरान उदास है, तेरी आँखों में मिलता है नूर ए हयात तेरे वादे ही तो मेरे जीने का विश्वास है, तेरे लफ़्ज़ों से सजती है मेरी हर ग़ज़ल तेरे होने से दिल में अजब सा उजास है, तेरे बिन तन्हाई भी करती है सवाल तेरी इनायत ही मेरी तमाम तलाश है, हमदम तेरा ज़िक्र है मेरी दुआओं में एक तेरी मोहब्बत ही मेरी हर साँस है..!! - [रंग मौसम का हरा था पहले](https://hindigazals.com/rang-mausam-ka-hara-tha-pahle/): रंग मौसम का हरा था पहले पेड़ ये कितना घना था पहले, मैं ने तो बाद में तोड़ा था इसे आईना मुझ पे हँसा था पहले, जो नया है वो पुराना होगा जो पुराना है नया था पहले, बाद में मैंने बुलंदी को छुआ अपनी नज़रों से गिरा था पहले..!! - [जो कहीं था ही नहीं उस को कहीं ढूँढना था](https://hindigazals.com/jo-kahin-tha-hi-nahin-us-ko-kahin-dhoondhna-tha/): जो कहीं था ही नहीं उस को कहीं ढूँढना था हम को एक वहम के जंगल में यक़ीं ढूँढना था, पहले तामीर हमें करना था अच्छा सा मकाँ फिर मकाँ के लिए अच्छा सा मकीं ढूँढना था, सब के सब ढूँढते फिरते थे उसे बन के हुजूम जिस को अपने में कहीं अपने तईं ढूँढना था, जुस्तुजू का एक अजब सिलसिला ता उम्र रहा ख़ुद को खोना था कहीं और कहीं ढूँढना था, नींद को ढूँड के लाने की दवाएँ थीं बहुत काम मुश्किल तो कोई ख़्वाब हसीं ढूँढना था, दिल भी बच्चे की तरह ज़िद पे अड़ा था अपना जो जहाँ था ही नहीं उस को वहीं ढूँढना था, हम भी जीने के लिए थोड़ा सुकूँ थोड़ा सा चैन ढूँढ सकते थे मगर हम को नहीं ढूँढना था..!! - [हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है](https://hindigazals.com/har-ek-saans-hi-hum-par-haram-ho-gayi-hai/): हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है, जब आई मौत तो राहत की साँस ली हम ने कि साँस लेने की ज़हमत तमाम हो गई है, किसी से गुफ़्तुगू करने को जी नहीं करता मेरी ख़मोशी ही मेरा कलाम हो गई है, परिंदे होते तो डाली पे लौट भी जाते हमें न याद दिलाओ कि शाम हो गई है, इधर तो रोज़ के मरने से ही नहीं फ़ुर्सत उधर वो ज़िंदगी फ़ुर्सत का काम हो गई है, हज़ारों आँसुओं के बाद एक ज़रा सी हँसी किसी ग़रीब की मेहनत का दाम हो गई है, बना न पाई कभी आदतों को अपना ग़ुलाम ये ज़िंदगी तो ख़ुद उन की ग़ुलाम हो गई है, पुरानी यादों ने जब भी लगा लिया फेरा इस उजड़े दिल में बड़ी धूमधाम हो गई है..!! - [दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ](https://hindigazals.com/din-ko-din-raat-ko-main-raat-na-likhne-paaoon/): दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ उनकी कोशिश है कि हालात न लिखने पाऊँ, हिन्दू को हिन्दू मुसलमान को लिखूँ मुस्लिम कभी इन दोनों को एक साथ न लिखने पाऊँ, बस क़लम बंद किए जाऊँ मैं उनकी हर बात दिल से जो उठती है वो बात न लिखने पाऊँ, सोच तो लेता हूँ क्या लिखना है पर लिखते समय काँपते क्यूँ है मेरे हाथ न लिखने पाऊँ ? - [यूँ देखिए तो आँधी में बस एक शजर गया](https://hindigazals.com/yun-dekhiye-to-aandhi-me-bas-ek-shazar-gaya/): यूँ देखिए तो आँधी में बस एक शजर गया लेकिन न जाने कितने परिंदों का घर गया, जैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्स सुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया, मैं ही सबब था अब के भी अपनी शिकस्त का इल्ज़ाम अब की बार भी क़िस्मत के सर गया..!! - [अब छत पे कोई चाँद टहलता ही नहीं है](https://hindigazals.com/ab-chhat-pe-koi-chaand-tahlta-hi-nahin/): अब छत पे कोई चाँद टहलता ही नहीं है दिल मेरा मगर पहलू बदलता ही नहीं है, कब से मैं यहाँ बुत बना बैठा हूँ सर ए राह बुत है कि शिवाले से निकलता ही नहीं है, सोने की जगह रोज़ बदलता हूँ मैं लेकिन वो ख़्वाब किसी तरह बदलता ही नहीं है, मैं खींचता रहता हूँ उसे दिल से शब ओ रोज़ वो तीर मेरे दिल से निकलता ही नहीं है..!! - [मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा](https://hindigazals.com/main-jis-jagah-bhi-rahoonga-wahi-pe/): मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा मेरा सितारा किसी दिन ज़मीं पे आएगा, लकीर खींच के बैठी है तिश्नगी मेरी बस एक ज़िद है कि दरिया यहीं पे आएगा, मुहीब साए बढ़े आते हैं हमारी तरफ़ कब एतिबार हमें दूरबीं पे आएगा, अब इस अदा से हवाएँ दिए बुझाएँगी कि इत्तिहाम भी ख़ानानशीं पे आएगा, कमान ए वक़्त ने हम को हदफ़ बनाया है कहीं से तीर चलेगा हमीं पे आएगा, उड़ा रहा हूँ ग़ुबारा मगर ख़बर है मुझे ज़रा सी देर में वापस ज़मीं पे आएगा..!! - [सड़क पे दौड़ते महताब देख लेता हूँ](https://hindigazals.com/sadak-pe-daudte-maahtab-dekh-leta-hoon/): सड़क पे दौड़ते महताब देख लेता हूँ मैं चलता फिरता हुआ ख़्वाब देख लेता हूँ, मेरी नज़र से परे सैकड़ों जहाँ होंगे मैं एक जहान तह ए आब देख लेता हूँ, मैं टूटे बिखरे हुए दोस्तों की बस्ती में नए निज़ाम के आदाब देख लेता हूँ, अजीब धुँद है मैं अपनी हार में आलम शिकस्त ए गुंबद ओ मेहराब देख लेता हूँ..!! - [कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है](https://hindigazals.com/kabhi-kabhi-kitna-nuqsan-uthana-padta-hai/): कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है ऐरों ग़ैरों का एहसान उठाना पड़ता है, टेढ़े मेढ़े रस्तों पर भी ख़्वाबों का पश्तारा तेरी ख़ातिर मेरी जान उठाना पड़ता है, कब सुनता है नाला कोई शोर शराबे में मजबूरी में भी तूफ़ान उठाना पड़ता है, कैसी हवाएँ चलने लगी हैं मेरे बाग़ों में फूलों को भी अब सामान उठाना पड़ता है, गुलदस्ते की ख़्वाहिश रखने वालों को अक्सर कोई ख़ार भरा गुलदान उठाना पड़ता है, याँ कोई तफ़रीक़ नहीं है शाह गदा सब को अपना बोझ दिल ए नादान उठाना पड़ता है, यूँ मायूस नहीं होते हैं कोई न कोई ग़म अच्छे अच्छों को हर आन उठाना पड़ता है, मक्कारों की इस दुनिया में कभी कभी आलम अच्छे लोगों को बोहतान उठाना पड़ता है..!! - [जल बुझा हूँ मैं मगर सारा जहाँ ताक में है](https://hindigazals.com/jal-bujha-hoon-main-magar-saara-jahan/): जल बुझा हूँ मैं मगर सारा जहाँ ताक में है कोई तासीर तो मौजूद मेरी ख़ाक में है, खेंचती रहती है हर लम्हा मुझे अपनी तरफ़ जाने क्या चीज़ है जो पर्दा ए अफ़्लाक में है, कोई सूरत भी नहीं मिलती किसी सूरत में कूज़ा गर कैसा करिश्मा तेरे इस चाक में है, कैसे ठहरूँ कि किसी शहर से मिलता ही नहीं एक नक़्शा जो मेरे दीदा ए नमनाक में है, ये इलाक़ा भी मगर दिल ही के ताबे ठहरा हम समझते थे अमाँ गोशा ए इदराक में है, क़त्ल होते हैं यहाँ नारा ए ऐलान के साथ वज़्अदारी तो अभी आलम ए सफ़्फ़ाक में है, कितनी चीज़ों के भला नाम तुझे गिनवाऊँ सारी दुनिया ही तो शामिल मेरी इम्लाक में है, राएगाँ कोई भी शय होती नहीं है आलम ग़ौर से देखिए क्या क्या ख़स ओ ख़ाशाक में है..!! - [ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से](https://hindigazals.com/zara-see-dhoop-zara-see-nami-ke-aane-se/): ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से मैं जी उठा हूँ ज़रा ताज़गी के आने से, उदास हो गए एक पल में शादमाँ चेहरे मेरे लबों पे ज़रा सी हँसी के आने से, दुखों के यार बिछड़ने लगे हैं अब मुझ से ये सानेहा भी हुआ है ख़ुशी के आने से, करख़्त होने लगे हैं बुझे हुए लहजे मेरे मिज़ाज में शाइस्तगी के आने से, बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से, यक़ीन होता नहीं शहर ए दिल अचानक यूँ बदल गया है किसी अजनबी के आने से, मैं रोते रोते अचानक ही हँस पड़ा आलम तमाश बीनों में संजीदगी के आने से..!! - [तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ](https://hindigazals.com/tere-khyal-ko-zanjeer-karta-rahta-hoon/): तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ मैं अपने ख़्वाब की ताबीर करता रहता हूँ, तमाम रंग अधूरे लगे तेरे आगे सो तुझ को लफ़्ज़ में तस्वीर करता रहता हूँ, जो बात दिल से ज़बाँ तक सफ़र नहीं करती उसी को शेर में तहरीर करता रहता हूँ, दुखों को अपने छुपाता हूँ मैं दफ़ीनों सा मगर ख़ुशी को हमागीर करता रहता हूँ, गुज़िश्ता रुत का अमीं हूँ नए मकान में भी पुरानी ईंट से तामीर करता रहता हूँ, मुझे भी शौक़ है दुनिया को ज़ेर करने का मैं अपने आप को तस्ख़ीर करता रहता हूँ, ज़मीन है कि बदलती नहीं कभी मेहवर मैं कैसी कैसी तदाबीर करता रहता हूँ ? - [देख रहा है दरिया भी हैरानी से](https://hindigazals.com/dekh-raha-hai-dariya-bhi-hairani-se/): देख रहा है दरिया भी हैरानी से मैं ने कैसे पार किया आसानी से, नदी किनारे पहरों बैठा रहता हूँ क्या रिश्ता है मेरा बहते पानी से ? - [क्यूँ आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ](https://hindigazals.com/kyun-aankhen-band-kar-ke/): क्यूँ आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ क्या मैं भी रफ़्ता रफ़्ता पत्थर में ढल रहा हूँ ? - [थपक थपक के जिन्हें हम सुलाते रहते हैं](https://hindigazals.com/thapak-thapak-ke-jinehn-hum-sulate/): थपक थपक के जिन्हें हम सुलाते रहते हैं वो ख़्वाब हम को हमेशा जगाते रहते हैं, उमीदें जागती रहती हैं सोती रहती हैं दरीचे शम्अ जलाते बुझाते रहते हैं, न जाने किस का हमें इंतिज़ार रहता है कि बाम ओ दर को हमेशा सजाते रहते हैं, किसी को ढूँढते हैं हम किसी के पैकर में किसी का चेहरा किसी से मिलाते रहते हैं, वो नक़्श ए ख़्वाब मुकम्मल कभी नहीं होता तमाम उम्र जिसे हम बनाते रहते हैं, उसी का अक्स हर एक रंग में झलकता है वो एक दर्द जिसे सब छुपाते रहते हैं, हमें ख़बर है कभी लौट कर न आएँगे गए दिनों को मगर हम बुलाते रहते हैं, ये खेल सिर्फ़ तुम्हीं खेलते नहीं आलम सभी ख़ला में लकीरें बनाते रहते हैं..!! - [तुम जिस को ढूँडते हो ये महफ़िल नहीं है वो](https://hindigazals.com/tum-jis-ko-dhoondhte-ho-ye-mahfil-nahi-hai/): तुम जिस को ढूँडते हो ये महफ़िल नहीं है वो लोगों के इस हुजूम में शामिल नहीं है वो, रस्तों के पेच ओ ख़म ने कहीं और ला दिया जाना हमें जहाँ था ये मंज़िल नहीं है वो, दरिया के रुख़ को मोड़ के आए तो ये खुला साहिल के रंग और हैं साहिल नहीं है वो, दुनिया में भाग दौड़ का हासिल यही तो है हासिल हर एक चीज़ है हासिल नहीं है वो, आलम दिल ए असीर को समझाऊँ किस तरह ? - [जब तक खुली नहीं थी असरार लग रही थी](https://hindigazals.com/jab-tak-khuli-nahin-thi-asrar-lag-rahi-thi/): जब तक खुली नहीं थी असरार लग रही थी ये ज़िंदगी मुझे भी दुश्वार लग रही थी, मुझ पर झुकी हुई थी फूलों की एक डाली लेकिन वो मेरे सर पर तलवार लग रही थी, छूते ही जाने कैसे क़दमों में आ गिरी वो जो फ़ासले से ऊँची दीवार लग रही थी, शहरों में आ के कैसे आहिस्ता रौ हुआ मैं सहरा में तेज़ अपनी रफ़्तार लग रही थी, लहरों के जागने पर कुछ भी न काम आई क्या चीज़ थी जो मुझ को पतवार लग रही थी ? - [किस लम्हे हम तेरा ध्यान नहीं करते](https://hindigazals.com/kis-lamhen-hum-tera-dhayan-nahi-karte/): किस लम्हे हम तेरा ध्यान नहीं करते हाँ कोई अहद ओ पैमान नहीं करते, हर दम तेरी माला जपते हैं लेकिन गलियों कूचों में एलान नहीं करते, अपनी कहानी दिल में छुपा कर रखते हैं दुनिया वालों को हैरान नहीं करते, एक कमरे को बंद रखा है बरसों से वहाँ किसी को हम मेहमान नहीं करते, एक जैसा दुख मिल कर बाँटा करते हैं एक दूजे पर हम एहसान नहीं करते, कुछ रस्ते मुश्किल ही अच्छे लगते हैं कुछ रस्तों को हम आसान नहीं करते, रस्ते में जो मिलता है मिल लेते हैं अच्छे बुरे की अब पहचान नहीं करते, जी करता है भालू बंदर नाम रखें कौन सी वहशत हम इंसान नहीं करते ? - [कहीं पे जिस्म कहीं पर ख़याल रहता है](https://hindigazals.com/kahin-pe-zism-kahin-par-khyal-rahta-hai/): कहीं पे जिस्म कहीं पर ख़याल रहता है मोहब्बतों में कहाँ एतिदाल रहता है, फ़लक पे चाँद निकलता है और दरिया में बला का शोर ग़ज़ब का उबाल रहता है, दयार ए दिल में भी आबाद है कोई सहरा यहाँ भी वज्द में रक़्साँ ग़ज़ाल रहता है, छुपा है कोई फ़ुसूँगर सराब आँखों में कहीं भी जाओ उसी का जमाल रहता है, तमाम होता नहीं इश्क़ ए ना तमाम कभी कोई भी उम्र हो ये लाज़वाल रहता है, विसाल ए जिस्म की सूरत निकल तो आती है दिलों में हिज्र का मौसम बहाल रहता है, ख़ुशी के लाख वसाएल ख़रीद लो आलम दिल ए शिकस्ता मगर पुरमलाल रहता है..!! - [हर घर में कोई तहख़ाना होता है](https://hindigazals.com/har-ghar-me-koi-tahkhana-hota-hai/): हर घर में कोई तहख़ाना होता है तहख़ाने में एक अफ़्साना होता है, किसी पुरानी अलमारी के ख़ानों में यादों का अनमोल ख़ज़ाना होता है, रात गए अक्सर दिल के वीरानों में एक साए का आना जाना होता है, बढ़ती जाती है बेचैनी नाख़ुन की जैसे जैसे ज़ख़्म पुराना होता है, दिल रोता है चेहरा हँसता रहता है कैसा कैसा फ़र्ज़ निभाना होता है, ज़िंदा रहने की ख़ातिर इन आँखों में कोई न कोई ख़्वाब सजाना होता है, तन्हाई का ज़हर तो वो भी पीते हैं जिन लोगों के साथ ज़माना होता है, सहरा से बस्ती में आ कर भेद खुला दिल के अंदर ही वीराना होता है, सरमस्ती में याद नहीं रखता कोई बज़्म से उठ कर वापस जाना होता है..!! - [अफ़्सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है](https://hindigazals.com/afsos-tumhen-kaar-ke-shishe-ka-hua-hai/): अफ़्सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है परवाह नहीं एक माँ का जो दिल टूट गया है, होता है असर तुम पे कहाँ नाला ए ग़म का बरहम जो हुई बज़्म ए तरब इस का गिला है, फ़िरऔन भी नमरूद भी गुज़रे हैं जहाँ में रहता है यहाँ कौन यहाँ कौन रहा है ? - [आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह](https://hindigazals.com/aag-faili-hui-kaali-ghataaon-ki-jagah/): आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह बद दुआएँ हैं लबों पर अब दुआओं की जगह, इंतिख़ाब ए अहल ए गुलशन पर बहुत रोता है दिल देख कर ज़ाग़ ओ ज़ग़्न को ख़ुशनवाओं की जगह, कुछ भी होता पर न होते पारा पारा जिस्म ओ जाँ राहज़न होते अगर उन रहनुमाओं की जगह, लुट गई इस दौर में अहल ए क़लम की आबरू बिक रहे हैं अब सहाफ़ी बेसवाओं की जगह, कुछ तो आता हम को भी जाँ से गुज़रने का मज़ा ग़ैर होते काश जालिब आश्नाओं की जगह..!! - [फ़ैज़ और फ़ैज़ का ग़म भूलने वाला है कहीं](https://hindigazals.com/faiz-aur-faiz-ka-gam-bhulne-wala-hai-kahin/): फ़ैज़ और फ़ैज़ का ग़म भूलने वाला है कहीं मौत ये तेरा सितम भूलने वाला है कहीं, हम से जिस वक़्त ने वो शाह ए सुख़न छीन लिया हम को वो वक़्त ए अलम भूलने वाला है कहीं, तेरे अश्क और भी चमकाएँगी यादें उस की हम को वो दीदा ए नम भूलने वाला है कहीं, कभी ज़िंदाँ में कभी दूर वतन से ऐ दोस्त जो किया उस ने रक़म भूलने वाला है कहीं, आख़िरी बार उसे देख न पाए जालिब ये मुक़द्दर का सितम भूलने वाला है कहीं..!! - [जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ](https://hindigazals.com/jivan-mujh-se-main-jivan-se-sharmata-hoon/): जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ मुझ से आगे जाने वालो में आता हूँ, जिन की यादों से रौशन हैं मेरी आँखें दिल कहता है उन को भी मैं याद आता हूँ, सुर से साँसों का नाता है तोड़ूँ कैसे ? - [इश्क में जब नफ़ा नुक़सान का हिसाब लगाया जायेगा](https://hindigazals.com/ishq-me-jab-nafa-nuqsan-ka-hisab-lagaya-jayega/): इश्क में जब नफ़ा नुक़सान का हिसाब लगाया जायेगा उस दिन सच्चे दिल टूटेंगे, ख़्वाबों को दफ़नाया जायेगा, मुहब्बत जब सच्चे जज़्बों से खाली हो जायेगा तब ये दर्द का दरिया बन कर बहाया जायेगा, जहाँ ख़्वाबों की बोलियाँ लगेगी किसी बाज़ार में वहां दिलों के टुकड़ों का भी जश्न मनाया जायेगा, इश्क की क़ीमत लगाना कब सीखा है ज़माने ने मगर जब लगाई गई, दिल का खून बहाया जायेगा, मुहब्बत को जो तिज़ारत की तरह तौला करते हैं इश्क़ में उन्हें हर मोड़ पे तन्हा ही छोड़ा जायेगा, जो लोग दिल के सौदागर बने हैं इस दुनियाँ में उन का हर एक रिश्ता ख़ुद ब ख़ुद छुटता जायेगा..!! - [दिल ए पुर शौक़ को पहलू में दबाए रखा](https://hindigazals.com/dil-e-pur-shauk-ko-pahlu-me-dabaye-rakha/): दिल ए पुर शौक़ को पहलू में दबाए रखा तुझ से भी हम ने तेरा प्यार छुपाए रखा, छोड़ इस बात को ऐ दोस्त कि तुझ से पहले हम ने किस किस को ख़यालों में बसाए रखा, ग़ैर मुमकिन थी ज़माने के ग़मों से फ़ुर्सत फिर भी हम ने तेरा ग़म दिल में बसाए रखा, फूल को फूल न कहते सो उसे क्या कहते क्या हुआ ग़ैर ने कॉलर पे सजाए रखा, जाने किस हाल में हैं कौन से शहरों में हैं वो ? - [अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ](https://hindigazals.com/ab-teri-zarurat-bhi-bahut-kam-hai-meri-jaan/): अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ अब शौक़ का कुछ और ही आलम है मेरी जाँ, अब तज़्किरा ए ख़ंदा ए गुल बार है जी पर जाँ वक़्फ़ ए ग़म ए गिर्या ए शबनम है मेरी जाँ, रुख़ पर तेरे बिखरी हुई ये ज़ुल्फ़ ए सियह ताब तस्वीर ए परेशानी ए आलम है मेरी जाँ, ये क्या कि तुझे भी है ज़माने से शिकायत ये क्या कि तेरी आँख भी पुरनम है मेरी जाँ, हम सादादिलों पर ये शब ए ग़म का तसल्लुत मायूस न हो और कोई दम है मेरी जाँ, ये तेरी तवज्जोह का है एजाज़ कि मुझ से हर शख़्स तेरे शहर का बरहम है मेरी जाँ, ऐ नुज़हत ए महताब तेरा ग़म है मेरी ज़ीस्त ऐ नाज़िश ए ख़ुर्शीद तेरा ग़म है मेरी जाँ..!! - [फिर कभी लौट कर न आएँगे](https://hindigazals.com/fir-kabhi-laut-kar-na-ayenge/): फिर कभी लौट कर न आएँगे हम तेरा शहर छोड़ जाएँगे, दूर उफ़्तादा बस्तियों में कहीं तेरी यादों से लौ लगाएँगे, शम ए माह ओ नुजूम गुल कर के आँसुओं के दिए जलाएँगे, आख़िरी बार एक ग़ज़ल सुन लो आख़िरी बार हम सुनाएँगे, सूरत ए मौजा ए हवा जालिब सारी दुनिया की ख़ाक उड़ाएँगे..!! - [वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा](https://hindigazals.com/wo-dekhne-mujhe-aana-to-chahta-hoga/): वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा मगर ज़माने की बातों से डर गया होगा, उसे था शौक़ बहुत मुझ को अच्छा रखने का ये शौक़ औरों को शायद बुरा लगा होगा, कभी न हद्द ए अदब से बढ़े थे दीदा ओ दिल वो मुझ से किस लिए किस बात पर ख़फ़ा होगा ? - [उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं](https://hindigazals.com/us-ranaut-se-wo-jite-hain-ki-marna-hi-nahin/): उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं तख़्त पर बैठे हैं यूँ जैसे उतरना ही नहीं, यूँ मह ओ अंजुम की वादी में उड़े फिरते हैं वो ख़ाक के ज़र्रों पे जैसे पाँव धरना ही नहीं, उन का दावा है कि सूरज भी उन्ही का है ग़ुलाम शब जो हम पर आई है उस को गुज़रना ही नहीं, क्या इलाज उस का अगर हो मुद्दआ उन का यही एहतिमाम रंग ओ बू गुलशन में करना ही नहीं, ज़ुल्म से हैं बरसर ए पैकार आज़ादी पसंद उन पहाड़ों में जहाँ पर कोई झरना ही नहीं, दिल भी उन के हैं सियह ख़ूराक ए ज़िंदाँ की तरह उन से अपना ग़म बयाँ अब हम को करना ही नहीं, इंतिहा कर लें सितम की लोग अभी हैं ख़्वाब में जाग उठे जब लोग तो उन को ठहरना ही नहीं..!! - [ये और बात तेरी गली में न आएँ हम](https://hindigazals.com/ye-aur-baat-teri-gali-me-na-aaye-hum/): ये और बात तेरी गली में न आएँ हम लेकिन ये क्या कि शहर तेरा छोड़ जाएँ हम, मुद्दत हुई है कू ए बुताँ की तरफ़ गए आवारगी से दिल को कहाँ तक बचाएँ हम ? - [झूठी ख़बरें गढ़ने वाले झूठे शेर सुनाने वाले](https://hindigazals.com/jhuthi-khabren-gadhne-wale-jhuthe-sher-sunane-wale/): झूठी ख़बरें गढ़ने वाले झूठे शेर सुनाने वाले लोगो सब्र कि अपने किए की जल्द सज़ा हैं पाने वाले, दर्द आँखों से बहता है और चेहरा सब कुछ कहता है ये मत लिखो वो मत लिखो आए बड़े समझाने वाले, ख़ुद काटेंगे अपनी मुश्किल ख़ुद पाएँगे अपनी मंज़िल राहज़नों से भी बदतर हैं राहनुमा कहलाने वाले, उन से प्यार किया है हम ने उन की राह में हम बैठे हैं नामुम्किन है जिन का मिलना और नहीं जो आने वाले, उन पर भी हँसती थी दुनिया आवाज़ें कसती थी दुनिया जालिब अपनी ही सूरत थे इश्क़ में जाँ से जाने वाले..!! - [ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है](https://hindigazals.com/khoob-aazadi-e-sahafat-hai/): ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है नज़्म लिखने पे भी क़यामत है, दावा जम्हूरियत का है हर आन ये हुकूमत भी क्या हुकूमत है ? - [कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें](https://hindigazals.com/kabhi-to-meharbaan-ho-kar-bula-le/): कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें ये महवश हम फ़क़ीरों की दुआ लें, न जाने फिर ये रुत आए न आए जवाँ फूलों की कुछ ख़ुश्बू चुरा लें, बहुत रोए ज़माने के लिए हम ज़रा अपने लिए आँसू बहा लें, हम उन को भूलने वाले नहीं हैं समझते हैं ग़म ए दौराँ की चालें, हमारी भी सँभल जाएगी हालत वो पहले अपनी ज़ुल्फ़ें तो सँभालें, निकलने को है वो महताब घर से सितारों से कहो नज़रें झुका लें, हम अपने रास्ते पर चल रहे हैं जनाब ए शैख़ अपना रास्ता लें, ज़माना तो यूँही रूठा रहेगा चलो जालिब उन्हें चल कर मना लें..!! - [बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू](https://hindigazals.com/bate-rahoge-to-apna-yunhi-bahega-lahoo/): बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू हुए न एक तो मंज़िल न बन सकेगा लहू, हो किस घमंड में ऐ लख़्त लख़्त दीदा-वरो तुम्हें भी क़ातिल ए मेहनतकशाँ कहेगा लहू, इसी तरह से अगर तुम अना परस्त रहे ख़ुद अपना राहनुमा आप ही बनेगा लहू, सुनो तुम्हारे गरेबान भी नहीं महफ़ूज़ डरो तुम्हारा भी एक दिन हिसाब लेगा लहू, अगर न अहद किया हम ने एक होने का ग़नीम सब का यूँही बेचता रहेगा लहू, कभी कभी मेरे बच्चे भी मुझ से पूछते हैं कहाँ तक और तू ख़ुश्क अपना ही करेगा लहू ? - [मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू](https://hindigazals.com/main-khush-nasibi-hoon-teri-mujhe-bhi-raas-hai-tu/): मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू तेरा लिबास हूँ मैं और मेरा लिबास है तू, अज़ीब शय है मुहब्बत कि हम कहाँ जाएँ तेरे पास हूँ मैं भी मेरे भी पास है तू, मैं ने ख़ुद को फ़रामोश किया तेरे लिए आम है सारा जहाँ मेरे लिए ख़ास है तू, बंद होंठों पर मेरे रेत जमी जाती है मेरे पास है फिर भी मेरी प्यास है तू, दरमियाँ तेरे मेरे जब से लोग आने लगे उस के बाद से मैं तन्हा और बे आस है तू, ज़माना हम को जुदा कर सके नहीं मुमकिन मुहब्बत में जो नाख़ुन हूँ मैं तो मास है तू, दूर हो कर भी नहीं है कोई दूरी तेरे क़रीब हूँ मैं मेरे भी पास है तू, ये कौन तेरे मेरे दरमियाँ है जानाँ कि मैं दर्द में हूँ और महो यास है तू, ज़िन्दगी मेरी तेरे गिर्द घूमती है फक़त आम है सारा जहाँ मेरे लिए एक ख़ास है तू, अज़ीब शय है मुहब्बत मैं कहीं चला जाऊँ तेरे क़रीब हूँ मैं और मेरी प्यास है तू..!! - [समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं](https://hindigazals.com/samndar-me-utarta-hoon-to-aankhen-bhig-jati-hain/): समन्दर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छीन गई जब से कोई भी लफ्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी यादों की ख़ुशबू खिड़कियों में रक्स करती हैं तेरे गम में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, न जाने हो गया हों इस क़दर हस्सास मैं कब से किसी से बात करता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मेरे दिल पर मैं जब भी हँसता हूँ तो आँखे भीग जाती हैं..!! - [उस ने जब मेरी तरफ प्यार से देखा होगा](https://hindigazals.com/us-ne-jab-meri-taraf-pyar-se-dekha-hoga/): उस ने जब मेरी तरफ प्यार से देखा होगा मेरे बारे में बड़े गौर से सोचा होगा, सुबह को जिस ने सजाई है हँसी होंठों पर रात भर उस को किसी गम ने सताया होगा, कर के वायदा आने का वो नहीं आया होगा अब नाम बदनाम ज़माने में वफ़ा का होगा, हँस के हम बात जो कर लेते हैं उन से समर हाल अपना वो समझ लेते हैं अच्छा होगा, हर दर्द को ऐ जान मैं अपने सीने में छुपा लूं काँटे तेरी राहों के मैं पलकों पे सजा लूं, बिछड़ी है मेरी नींद बिछड़ी हो तुम जब से जी चाहे तुझे रोज़ ख़्वाबों में ही बुला लूं, तू पास न आ, बस ज़रा दामन तो बढ़ा दे अश्को को कहाँ तक मैं अपनी आँखों में संभालूँ ? - [वही हालात हैं फ़क़ीरों के](https://hindigazals.com/wahi-haalaat-hai-fakiron-ke/): वही हालात हैं फ़क़ीरों के दिन फिरे हैं फ़क़त वज़ीरों के, अपना हल्क़ा है हल्क़ा ए ज़ंजीर और हल्क़े हैं सब अमीरों के, हर बिलावल है देस का मक़रूज़ पाँव नंगे हैं बेनज़ीरों के, वही अहल ए वफ़ा की सूरत ए हाल वारे न्यारे हैं बे ज़मीरों के, साज़िशें हैं वही ख़िलाफ़ ए अवाम मशवरे हैं वही मुशीरों के, बेड़ियाँ सामराज की हैं वही वही दिन रात हैं असीरों के..!! - [दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या](https://hindigazals.com/dil-par-jo-zakhm-hai-dikhaye-kisi-ko-kya/): दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या अपना शरीक ए दर्द बनाएँ किसी को क्या ? - [इस शहर ए ख़राबी में ग़म ए इश्क़ के मारे](https://hindigazals.com/is-shahar-e-kharabi-me-gam-eishq-ke-maare-zinda-hain/): इस शहर ए ख़राबी में ग़म ए इश्क़ के मारे ज़िंदा हैं यही बात बड़ी बात है प्यारे, ये हँसता हुआ चाँद ये पुरनूर सितारे ताबिंदा ओ पाइंदा हैं ज़र्रों के सहारे, हसरत है कोई ग़ुंचा हमें प्यार से देखे अरमाँ है कोई फूल हमें दिल से पुकारे, हर सुब्ह मेरी सुब्ह पे रोती रही शबनम हर रात मेरी रात पे हँसते रहे तारे, कुछ और भी हैं काम हमें ऐ ग़म ए जानाँ कब तक कोई उलझी हुई ज़ुल्फ़ों को सँवारे..!! - [कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ](https://hindigazals.com/kuch-log-khyalon-se-chale-jaayen-to-soyen/): कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ बीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ, चेहरे जो कभी हम को दिखाई नहीं देंगे आ आ के तसव्वुर में न तड़पाएँ तो सोएँ, बरसात की रुत के वो तरब रेज़ मनाज़िर सीने में न एक आग सी भड़काएँ तो सोएँ, सुब्हों के मुक़द्दर को जगाते हुए मुखड़े आँचल जो निगाहों में न लहराएँ तो सोएँ, महसूस ये होता है अभी जाग रहे हैं लाहौर के सब यार भी सो जाएँ तो सोएँ..!! - [फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल](https://hindigazals.com/fir-dil-se-aa-rahi-hai-sada-us-gali-me-chal/): फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल शायद मिले ग़ज़ल का पता उस गली में चल, कब से नहीं हुआ है कोई शेर काम का ये शेर की नहीं है फ़ज़ा उस गली में चल, वो बाम ओ दर वो लोग वो रुस्वाइयों के ज़ख़्म हैं सब के सब अज़ीज़ जुदा उस गली में चल, उस फूल के बग़ैर बहुत जी उदास है मुझ को भी साथ ले के सबा उस गली में चल, दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें दुनिया के मशवरों पे न जा उस गली में चल, बे नूर ओ बे असर है यहाँ की सदा ए साज़ था उस सुकूत में भी मज़ा उस गली में चल, जालिब पुकारती हैं वो शोला नवाइयाँ ये सर्द रुत ये सर्द हवा उस गली में चल..!! - [दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है](https://hindigazals.com/dushmanon-ne-jo-dushmani-ki-hai/): दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है दोस्तों ने भी क्या कमी की है, ख़ामुशी पर हैं लोग ज़ेर ए इताब और हम ने तो बात भी की है, मुतमइन है ज़मीर तो अपना बात सारी ज़मीर ही की है, अपनी तो दास्ताँ है बस इतनी ग़म उठाए हैं शाएरी की है, अब नज़र में नहीं है एक ही फूल फ़िक्र हम को कली कली की है, पा सकेंगे न उम्र भर जिस को जुस्तुजू आज भी उसी की है, जब मह ओ महर बुझ गए जालिब हम ने अश्कों से रौशनी की है..!! - [और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना](https://hindigazals.com/aur-sab-bhool-gaye-harf-e-sadakat-likhna/): और सब भूल गए हर्फ़ ए सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बग़ावत लिखना, लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना हम ने सीखा नहीं प्यारे ब इजाज़त लिखना, न सिले की न सताइश की तमन्ना हम को हक़ में लोगों के हमारी तो है आदत लिखना, हम ने जो भूल के भी शह का क़सीदा न लिखा शायद आया इसी ख़ूबी की बदौलत लिखना, इस से बढ़ कर मेरी तहसीन भला क्या होगी पढ़ के नाख़ुश हैं मेरा साहब ए सरवत लिखना, दहर के ग़म से हुआ रब्त तो हम भूल गए सर्व क़ामत को जवानी को क़यामत लिखना, कुछ भी कहते हैं कहीं शह के मुसाहिब जालिब रंग रखना यही अपना इसी सूरत लिखना..!! - [भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे](https://hindigazals.com/bhula-bhi-de-use-jo-baat-ho-gayi-pyare/): भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे नए चराग़ जला रात हो गई प्यारे, तेरी निगाह ए पशेमाँ को कैसे देखूँगा ? - [हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम](https://hindigazals.com/hujum-dekh-ke-rasta-nahi-badalte-hum/): हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम, हज़ार ज़ेर ए क़दम रास्ता हो ख़ारों का जो चल पड़ें तो इरादा नहीं बदलते हम, इसी लिए तो नहीं मोतबर ज़माने में कि रंग ए सूरत ए दुनिया नहीं बदलते हम, हवा को देख के जालिब मिसाल ए हम अस्राँ बजा ये ज़ोम हमारा नहीं बदलते हम..!! - [वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में](https://hindigazals.com/watan-ko-kuch-nahi-khatra-nizam-e-zar-hai-khatre-me/): वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में, जो बैठा है सफ़ ए मातम बिछाए मर्ग ए ज़ुल्मत पर वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश वर है ख़तरे में, अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में, जहाँ इक़बाल भी नज़्र ए ख़त ए तनसीख़ हो जालिब वहाँ तुझ को शिकायत है तेरा जौहर है ख़तरे में..!! - [अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं](https://hindigazals.com/apno-ne-wo-ranj-diye-hai-begaane-yaad-aate-hain/): अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद आते हैं, उस नगरी में क़दम क़दम पे सर को झुकाना पड़ता है उस नगरी में क़दम क़दम पर बुतख़ाने याद आते हैं, आँखें पुरनम हो जाती हैं ग़ुर्बत के सहराओं में जब उस रिमझिम की वादी के अफ़्साने याद आते हैं, ऐसे ऐसे दर्द मिले हैं नए दयारों में हम को बिछड़े हुए कुछ लोग पुराने याराने याद आते हैं, जिन के कारन आज हमारे हाल पे दुनिया हँसती है कितने ज़ालिम चेहरे जाने पहचाने याद आते हैं, यूँ न लुटी थी गलियों दौलत अपने अश्कों की रोते हैं तो हम को अपने ग़म ख़ाने याद आते हैं, कोई तो परचम ले कर निकले अपने गरेबाँ का जालिब चारों जानिब सन्नाटा है दीवाने याद आते हैं..!! - [दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं](https://hindigazals.com/dil-ki-baat-labon-par-la-kar-ab-tak-hum-dukh-sahte-hain/): दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं, बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदलीं लेकिन इन प्यासी आँखों से अब तक आँसू बहते हैं, एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं, जिन की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिन के लिए बदनाम हुए आज वही हम से बेगाने बेगाने से रहते हैं, वो जो अभी इस राहगुज़र से चाक गरेबाँ गुज़रा था उस आवारा दीवाने को जालिब जालिब कहते हैं..!! - [शेर से शायरी से डरते हैं](https://hindigazals.com/sher-se-shayari-se-darte-hain/): शेर से शायरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी हम तेरी दोस्ती से डरते हैं, दहर में आह ए बे कसाँ के सिवा और हम कब किसी से डरते हैं, हम को ग़ैरों से डर नहीं लगता अपने अहबाब ही से डरते हैं, दावर ए हश्र बख़्श दे शायद हाँ मगर मौलवी से डरते हैं, रूठता है तो रूठ जाए जहाँ उन की हम बेरुख़ी से डरते हैं, हर क़दम पर है मोहतसिब जालिब अब तो हम चाँदनी से डरते हैं..!! - [बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा](https://hindigazals.com/bewafa-tum-ko-bhulaane-me-takalluf-kaisa/): बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने में तकल्लुफ़ कैसा दीप छोटा सा जलाने में तकल्लुफ़ कैसा प्यार का गीत सुनाने में तकल्लुफ़ कैसा हाँ पसंद अपनी बताने में तकल्लुफ़ कैसा वो उदासी के समुंदर में अकेला है बहुत हौसला देने दिलाने में तकल्लुफ़ कैसा अपने गुलशन को मैं शादाब रखा करती हूँ घर का कचरा भी उठाने में तकल्लुफ़ कैसा मुझ को अक्सर वो यही बात कहा करता है हम से ही मिलने मिलाने में तकल्लुफ़ कैसा जो ‘शगुफ़्ता’ को ज़माना ये सताता है बहुत आँख से अश्क बहाने में तकल्लुफ़ कैसा..!! - [जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर](https://hindigazals.com/jal-rahe-hai-diye-munderon-par/) - [जब से आई है दीपावली](https://hindigazals.com/jab-se-aai-hai-deepawali/) - [दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ](https://hindigazals.com/deewali-ke-deep-jalayen-aa-jaao/) - [रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है](https://hindigazals.com/raat-kuch-taarik-bhi-hai-aur-kuch-raushan-bhi/) - [वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार](https://hindigazals.com/waqt-ka-maara-hua-insaan-ranaut-ka-shikaar/): वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार जिस की मेहनत का नतीजा अज़मत ए सरमायादार, अस्ल में हिन्दोस्ताँ का बादशह लेकिन ग़ुलाम ज़िंदगी की दूसरी मंज़िल में है गर्म ए ख़िराम, फिर रहा है चिलचिलाती धूप में दीवानावार बाल बच्चों का तसव्वुर कर रहा है बेक़रार, ख़ून पानी एक कर के दाम जब मिलते नहीं हाथ फैला कर भी क्या देगा कोई नान ए जवीं, इब्तिदा है तीसरे फ़ाक़े की घर में कुछ नहीं सोच कर कुछ घर की जानिब चल पड़ा मर्द ए हज़ीं, देखता क्या है कि बच्चा भूक से है बेक़रार जैसे कोई मार खा के भागने वाला शिकार, गोद में बिठला के माँ समझा रही है प्यार से आते ही होंगे तिरे अब्बा अभी बाज़ार से, उस से ये इफ़्लास का मंज़र न देखा जा सका बे तहाशा चीख़ मारी सर पटक कर मर गया, एक सन्नाटा ज़मीं से आसमाँ तक छा गया वक़्त के माथे पे हल्का सा पसीना आ गया, हैफ़ ऐ अर्ज़ ए मुक़द्दस मादर ए हिन्दोस्ताँ तेरे बच्चे और यूँ हो जाएँ बेनाम ओ निशाँ..!! - [सुनो मादर-ए-हिन्द के नौ-निहालो](https://hindigazals.com/suno-madar-e-hind-ke-nau-nihaalo/) - [घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन](https://hindigazals.com/ghar-ki-qismat-jagi-ghar-me-aaye-sajan/) - [घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में](https://hindigazals.com/ghut-gaya-andhere-ka-aaj-dam-akele-me/) - [राम के हिज्र में इक रोज़ भरत ने ये कहा](https://hindigazals.com/ram-ke-hizr-me-ek-roz-bharat-ne-ye-kaha/) - [इक प्रेम पुजारी आया है चरनों में ध्यान लगाने को](https://hindigazals.com/ek-prem-pujari-aaya-hai-charano-me-dhyan-lagaane-ko/) - [स्वराज का झंडा भारत में गड़वा दिया गाँधी बाबा ने](https://hindigazals.com/swaraj-ka-jhanda-bharat-me-gadwa-diya-gandhi-baba-ne/) - [दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात ओ ऐश है](https://hindigazals.com/doston-kya-kya-deewali-me-nashaat-o-aish-hai/): दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात ओ ऐश है सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय, इस तरह हैं कूचा ओ बाज़ार पर नक़्श ओ निगार हो अयाँ हुस्न ए निगारिसताँ की जिन से ख़ूब रे, गर्मजोशी अपने बा जाम ए चराग़ाँ लुत्फ़ से क्या ही रौशन कर रही है हर तरफ़ रोग़न की मय, माइल ए सैर ए चराग़ाँ ख़ल्क़ हर जा दम ब दम हासिल ए नज़्ज़ारा हुस्न ए शम्अ रू याँ पै ब पै, आशिक़ाँ कहते हैं माशूक़ों से बाइज्ज़ ओ नियाज़ है अगर मंज़ूर कुछ लेना तो हाज़िर हैं रूपए, गर मुकर्रर अर्ज़ करते हैं तो कहते हैं वो शोख़ हम से लेते हो मियाँ तकरार ए हुज्जत ता ब कै, कहते हैं अहल ए क़िमार आपस में गर्म ए इख़्तिलात हम तो डब में सौ रूपे रखते हैं तुम रखते हो के, जीत का पड़ता है जिस का दाँव वो कहता हूँ मैं सू ए दस्त ए रास्त है मेरे कोई फ़र्ख़न्दा पय, है दसहरे में भी यूँ गर फ़रहत ओ ज़ीनत नज़ीर पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा तर त्यौहार है..!! - [हर एक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का](https://hindigazals.com/har-ek-makaan-me-jala-fir-diya-deewali-ka/): हर एक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर एक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का, सभी के दिल में समाँ भा गया दिवाली का किसी के दिल को मज़ा ख़ुश लगा दिवाली का, अजब बहार का है दिन बना दिवाली का जहाँ में यारो अजब तरह का है ये त्यौहार, किसी ने नक़्द लिया और कोई करे है उधार खिलौने खेलों बताशों का गर्म है बाज़ार, हर एक दुकाँ में चराग़ों की हो रही है बहार सभों को फ़िक्र है अब जा ब जा दिवाली का, मिठाइयों की दुकानें लगा के हलवाई पुकारते हैं कि लाला दिवाली है आई, बताशे ले कोई बर्फ़ी किसी ने तुलवाई खिलौने वालों की उन से ज़ियादा बन आई, गोया उन्हों के वाँ राज आ गया दिवाली का..!! - [मेरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है](https://hindigazals.com/meri-saanso-ko-geet-aur-aatma-ko-saaz-deti-hai/): मेरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है ये दीवाली है सब को जीने का अंदाज़ देती है, हृदय के द्वार पर रह रह के देता है कोई दस्तक बराबर ज़िंदगी आवाज़ पर आवाज़ देती है, सिमटता है अंधेरा पाँव फैलाती है दीवाली हँसाए जाती है रजनी हँसे जाती है दीवाली, क़तारें देखता हूँ चलते फिरते माह पारों की घटाएँ आँचलों की और बरखा है सितारों की, वो काले काले गेसू सुर्ख़ होंट और फूल से आरिज़ नगर में हर तरफ़ परियाँ टहलती हैं बहारों की, निगाहों का मुक़द्दर आ के चमकाती है दीवाली पहन कर दीपमाला नाज़ फ़रमाती है दीवाली, उजाले का ज़माना है उजाले की जवानी है ये हँसती जगमगाती रात सब रातों की रानी है, वही दुनिया है लेकिन हुस्न देखो आज दुनिया का है जब तक रात बाक़ी कह नहीं सकते कि फ़ानी है, वो जीवन आज की रात आ के बरसाती है दीवाली पसीना मौत के माथे पे छलकाती है दीवाली, सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या उजाला हर तरफ़ है इस किनारे उस किनारे क्या ? - [रहोगे हम से कब तक बेख़बर से](https://hindigazals.com/rahoge-ham-se-kab-tak-bekhabar-se/): रहोगे हम से कब तक बेख़बर से जुदा होती नहीं दीवार दर से, मुसाफ़िर हाल क्या अपना सुनाए अभी लौटा नहीं अपने सफ़र से, हमेशा तो नहीं रहता है क़ाएम तअ’ल्लुक़ राह रौ का रहगुज़र से, मकानों से मकीं रुख़्सत हुए हैं उदासी झाँकती है बाम ओ दर से, अभी तक हूँ सफ़र में इर्तिक़ा के मुझे लगते थे रस्ते मुख़्तसर से, इसी मिट्टी से है पहचान मेरी मोहब्बत है मुझे भी अपने घर से, न जाने उन पे क्या गुज़री थी शाहिद जुदा पत्ते हुए थे जब शजर से..!! - [तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो](https://hindigazals.com/taskeen-na-ho-jis-me-wo-raaz-badal-daalo/): तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो जो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो, तुम ने भी सुनी होगी बड़ी आम कहावत है अंजाम का हो ख़तरा आगाज़ बदल डालो, पुर सोज़ दिलों को जो मुस्कान न दे पाए सुर ही न मिले जिस में वो साज़ बदल डालो, दुश्मन के इरादों को है ज़ाहिर अगर करना तुम खेल वही खेलो अंदाज़ बदल डालो, ऐ दोस्त करो हिम्मत कुछ दूर सवेरा है गर चाहते हो मंज़िल परवाज़ बदल डालो..!! - [मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है](https://hindigazals.com/mohabbat-khud-hi-apni-pardadar-e-raaz-hoti-hai/): मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे आवाज़ होती है, ब ज़ाहिर नग़्मा ए हस्ती भला मालूम होता है मगर हर साँस आवाज़ ए शिकस्त ए साज़ होती है, दिलों के मेल में रुस्वाइयाँ भी हो के रहती है कि टकराते हैं जब साग़र तो एक आवाज़ होती है, न हँसने का कोई मक़्सद न रोने का कोई मतलब वो दीवाने हैं जिन की ज़िंदगी एक राज़ होती है, छुपाए से लब ओ लहजा मोहब्बत का नहीं छुपता ज़माने से बहुत बदली हुई आवाज़ होती है, मैं रोता हूँ तो कोई दाद अश्कों की नहीं देता मैं हँसता हूँ तो दुनिया गोश बर आवाज़ होती है, गुनहगारों को ऐ शौक़ एक यही तस्कीन क्या कम हो ख़ता अश्कों से तर हो कर नज़र अंदाज़ होती है..!! - [अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है](https://hindigazals.com/amiron-ke-bure-avtar-ko-jo-thik-samjhe/): अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है मेरी हक़ बात को वो क़ाबिल ए तश्कीक समझे है, बहुत मुश्किल है जो उस की ग़रीबी दूर हो जाए अजब ख़ुद्दार है इमदाद को भी भीख समझे है, मेरे बारे में उस के कान भरता है कोई शायद बयाँ तौसीफ़ करता हूँ तो वो तज़हीक समझे है, तेरे ख़त तेरी तस्वीरें शिकस्ता दिल के कुछ टुकड़े तेरा दीवाना इन सब को तेरी तमलीक समझे है, मैं उस के हर गुमाँ का पास अक्सर रखा करता हूँ मेरा दिल अपने दिल के वो बहुत नज़दीक समझे है, चले है इस तरह जैसे चले तलवार पर कोई वो मेरी रहगुज़र को जाने क्यूँ बारीक समझे है ? - [जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता](https://hindigazals.com/juda-us-jism-se-ho-kar-kahin-tahlil-ho-jaata/): जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता फ़ना होते ही लाफ़ानी में मैं तब्दील हो जाता, मेरे पीछे अगर इबलीस को आने न देता तू सरापा में तेरे हर हुक्म की तामील हो जाता, जो होता इख़्तियार अपने मुक़द्दर को बदलने का तमन्नाओं की मैं एक सूरत ए तकमील हो जाता, मुझे पहचान कर कोई ज़माने को बता देता तो मिस्ल ए निकहत ए गुलज़ार मैं तर्सील हो जाता, करिश्मा ये भी हो जाता तेरे अदना तआ’वुन से मुझे तू सोचता तो मैं तेरी तख़्ईल हो जाता, ज़मीं प्यासी ज़मीर इंसान भी प्यासे नहीं रहते अगर दरिया मैं बन जाता अगर मैं झील हो जाता..!! - [इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं](https://hindigazals.com/is-tarah-gum-hoon-khyalon-me-kuch-ehsas-nahi/): इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं कौन है पास मेरे कौन मेरे पास नहीं, दर्द जब हद में रहे दर्द का भी लुत्फ़ मिले ये भी क्या ग़म है कि जिस ग़म का कुछ एहसास नहीं, इस तरह शौक़ ए मोहब्बत में न गुम हो कोई मुझ को उल्फ़त भी किसी से है ये एहसास नहीं, ये हैं उल्फ़त के करिश्मे कि इलाही तौबा यूँ मेरे पास हैं वो जैसे मेरे पास नहीं, काँटों को रौंदता मैं बढ़ता चला जाता हूँ शौक़ ए दीदार में मंज़िल का भी एहसास नहीं, सुब्ह का तारा भी मादूम हुआ जाता है शौक़ अब उस के करम की हमें कुछ आस नहीं..!! - [उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम](https://hindigazals.com/ujad-ujad-ke-sanvarti-hai-tere-hizr-kee-shaam/): उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम न पूछ कैसे गुज़रती है तेरे हिज्र की शाम ? - [निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है](https://hindigazals.com/nigaah-e-iltifaat-ab-badgumaan-malum-hoti-hai/): निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है मेरी हर बात दुनिया को गिराँ मालूम होती है, तड़प उठते हैं सज्दे रौशनी महसूस करता हूँ जबीं मेरी क़रीब ए आस्ताँ मालूम होती है, क़यामत है जवानी के दिनों का याद आ जाना चमन की सैर भी बार ए गराँ मालूम होती है, ग़म ओ अंदोह में ऐ काश सारी ज़िंदगी गुज़रे यही मुझ को हयात ए जाविदाँ मालूम होती है, तरी दिल में नहीं अब ख़ुश्क हैं अश्क ए मसर्रत भी हर एक उम्मीद गर्द ए कारवाँ मालूम होती है, निहाँ हैं उन के जल्वे आइना हैराँ है क़िस्मत का नज़र ना आश्ना ए इम्तिहाँ मालूम होती है, किसी ज़र्रे ने महफ़िल के कोई करवट नहीं बदली अभी बे कैफ़ मेरी दास्ताँ मालूम होती है, नज़र जलवों पे है और कुछ नज़र आता नहीं हम को कोई तो चीज़ है जो दरमियाँ मालूम होती है, जो दिल के राज़ थे क्यूँकर हुए आईना दुनिया पर ज़बान ए वक़्त तेरी ही ज़बाँ मालूम होती है, ज़बान ए हाल से जब वक़्त की बेदाद सुनता हूँ मुझे तो शौक़ अपनी दास्ताँ मालूम होती है..!! - [हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे](https://hindigazals.com/hum-to-har-gam-ko-jahan-ke-gam-e-jaanaan-samjhe/): हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे जब बढ़ा नश्शा तो हम बादा ए इरफ़ाँ समझे, जो बहारों को सहर कारी ए दौराँ समझे ज़िंदगानी को वही ख़्वाब ए परेशाँ समझे, फ़िक्र ए ईजाद ए सितम में वो झुकाए थे जबीं हम उन्हें अपनी जफ़ाओं पे पशेमाँ समझे, खा गया एक जहाँ मेरे तबस्सुम का फ़रेब जो मेरी तरह परेशाँ थे परेशाँ समझे, हम ने शिकवा न किया शौक़ किसी से ग़म का अपनी तक़दीर को अपने से गुरेज़ाँ समझे..!! - [भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें](https://hindigazals.com/bhadkaaye-meri-pyas-ko-aksar-teri-aankhen/): भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें सहरा मेरा चेहरा है समुंदर तेरी आँखें, फिर कौन भला दाद ए तबस्सुम उन्हें देगा रोएँगी बहुत मुझ से बिछड़ कर तेरी आँखें, ख़ाली जो हुई शाम ए ग़रीबाँ की हथेली क्या क्या न लुटाती रहीं गौहर तेरी आँखें, बोझल नज़र आती हैं ब ज़ाहिर मुझे लेकिन खुलती हैं बहुत दिल में उतर कर तेरी आँखें, अब तक मेरी यादों से मिटाए नहीं मिटता भीगी हुई एक शाम का मंज़र तेरी आँखें, मुमकिन हो तो एक ताज़ा ग़ज़ल और भी कह लूँ फिर ओढ़ न लें ख़्वाब की चादर तेरी आँखें, मैं संग सिफ़त एक ही रस्ते में खड़ा हूँ शायद मुझे देखेंगी पलट कर तेरी आँखें, यूँ देखते रहना उसे अच्छा नहीं मोहसिन वो काँच का पैकर है तो पत्थर तेरी आँखें..!! - [मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा](https://hindigazals.com/main-dil-pe-zabr-karunga-tujhe-bhula-dunga/): मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा, ये तीरगी मेरे घर का ही क्यूँ मुक़द्दर हो मैं तेरे शहर के सारे दिए बुझा दूँगा, हवा का हाथ बटाऊँगा हर तबाही में हरे शजर से परिंदे मैं ख़ुद उड़ा दूँगा, वफ़ा करूँगा किसी सोगवार चेहरे से पुरानी क़ब्र पे कतबा नया सजा दूँगा, इसी ख़याल में गुज़री है शाम ए दर्द अक्सर कि दर्द हद से बढ़ेगा तो मुस्कुरा दूँगा, तू आसमान की सूरत है गर पड़ेगा कभी ज़मीं हूँ मैं भी मगर तुझ को आसरा दूँगा, बढ़ा रही हैं मेरे दुख निशानियाँ तेरी मैं तेरे ख़त तेरी तस्वीर तक जला दूँगा, बहुत दिनों से मेरा दिल उदास है मोहसिन इस आइने को कोई अक्स अब नया दूँगा..!! - [तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा](https://hindigazals.com/tum-door-ho-to-pyaar-ka-mausam-na-aayega/): तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा किस की ज़ुल्फ़ घटाओं को देख कर एक जुर्म ए ख़ुश गवार का मौसम न आएगा, छलके शराब बर्क़ गिरे या जलें चराग़ ज़िक्र ए निगाह ए यार का मौसम न आएगा, वादा ख़िलाफ़ियों को तरस जाएगा यक़ीं रातों को इंतिज़ार का मौसम न आएगा, तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी हो जाएगी तवील एहसास के निखार का मौसम न आएगा..!! - [भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे](https://hindigazals.com/bhala-gamon-se-kahan-haar-jaane-wale-the/): भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने कर दिया ऐलान ए गुमरही वर्ना हमारे पीछे बहुत लोग आने वाले थे, उन्हें तो ख़ाक में मिलना ही था कि मेरे थे ये अश्क कौन से ऊँचे घराने वाले थे, उन्हें क़रीब न होने दिया कभी मैं ने जो दोस्ती में हदें भूल जाने वाले थे, मैं जिन को जान के पहचान भी नहीं सकता कुछ ऐसे लोग मेरा घर जलाने वाले थे, हमारा अलमिया ये था कि हमसफ़र भी हमें वही मिले जो बहुत याद आने वाले थे, ‘वसीम’ कैसी तअल्लुक़ की राह थी जिसमें वही मिले जो बहुत दिल दुखाने वाले थे..!! - [कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे](https://hindigazals.com/kabhi-jhidki-se-kabhi-pyar-se-samjhaate-rahe/): कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे हम गई रात पे दिल को लिए बहलाते रहे, अपने अख़्लाक़ की शोहरत ने अजब दिन दिखलाए वो भी आते रहे अहबाब भी साथ आते रहे, हम ने तो लुट के मोहब्बत की रिवायत रख ली उन से तो पोछिए वो किस लिए पछताते रहे ? - [इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत](https://hindigazals.com/insan-bhool-chuka-hai-insan-kee-qeemat/): इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत बाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत, इक्तिदार में आते है इख़्तियार की लालच में कुछ लोग लगा बैठे अपने ईमान की क़ीमत, तुमने तो मज़मून बना लिया खून से लिपटी लाश को एक माँ से पूछना एक जवान की क़ीमत, मेरी ही तरह आओ मैं हक़ की तरफ से हूँ शेख ने भी माँग ली आख़िर अपनी ज़बान की क़ीमत, उठा जब जनाज़ा तो बहुत से अपने पास पाए हमने शायद मुझसे ज्यादा थी मेरे मकान की क़ीमत, इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत बाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत..!! - [ज़िक्र ए शब ए फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी](https://hindigazals.com/zikr-e-shab-e-firaq-se-wahshat-use-bhi-thi/): ज़िक्र ए शब ए फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी मेरी तरह किसी से मोहब्बत उसे भी थी, मुझ को भी शौक़ था नए चेहरों की दीद का रस्ता बदल के चलने की आदत उसे भी थी, उस रात देर तक वो रहा महव ए गुफ़्तुगू मसरूफ़ मैं भी कम था फ़राग़त उसे भी थी, मुझ से बिछड़ के शहर में घुल मिल गया वो शख़्स हालाँकि शहर भर से अदावत उसे भी थी, वो मुझ से बढ़ के ज़ब्त का आदी था जी गया वर्ना हर एक साँस क़यामत उसे भी थी, सुनता था वो भी सब से पुरानी कहानियाँ शायद रफ़ाक़तों की ज़रूरत उसे भी थी, तन्हा हुआ सफ़र में तो मुझ पे खुला ये भेद साए से प्यार धूप से नफ़रत उसे भी थी, मोहसिन मैं उस से कह न सका यूँ भी हाल दिल दरपेश एक ताज़ा मुसीबत उसे भी थी..!! - [ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यूँ बुझ गया आवारगी](https://hindigazals.com/ye-dil-ye-pagal-dil-mera-kyun-bujh-gaya-awaragi/): ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यूँ बुझ गया आवारगी इस दश्त में एक शहर था वो क्या हुआ आवारगी ? - [उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ न हुआ कर](https://hindigazals.com/ujde-hue-logo-se-gurezaan-na-hua-kar/): उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ न हुआ कर हालात की क़ब्रों के ये कतबे भी पढ़ा कर, क्या जानिए क्यूँ तेज़ हवा सोच में गुम है ख़्वाबीदा परिंदों को दरख़्तों से उड़ा कर, उस शख़्स के तुम से भी मरासिम हैं तो होंगे वो झूट न बोलेगा मेरे सामने आ कर, हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर, वो आज भी सदियों की मसाफ़त पे खड़ा है ढूँडा था जिसे वक़्त की दीवार गिरा कर, ऐ दिल तुझे दुश्मन की भी पहचान कहाँ है तू हल्क़ा ए याराँ में भी मोहतात रहा कर, इस शब के मुक़द्दर में सहर ही नहीं मोहसिन देखा है कई बार चराग़ों को बुझा कर..!! - [दामन पे वो अश्कों की तहरीर नज़र आई](https://hindigazals.com/daaman-pe-ashko-ki-tahrir-nazar-aayi/): दामन पे वो अश्कों की तहरीर नज़र आई हर ग़म में मोहब्बत की तस्वीर नज़र आई, ये फ़स्ल ए बहाराँ का एजाज़ मआज़ अल्लाह ज़ंजीर न थी लेकिन ज़ंजीर नज़र आई, आईना ए इरफ़ाँ में जब हुस्न ए अज़ल देखा हर बर्ग की जुम्बिश में तक़दीर नज़र आई, ऐ शाम ए अलम रुक जा एक अश्क ने लौ दी है अब तुझ से निभाने की तदबीर नज़र आई, गुलशन की फ़ज़ाओं ने कैसा ये चलन बदला फूलों में भी काँटों की तासीर नज़र आई, हासिल है सुकूँ लेकिन बेताब निगाहें हैं आख़िर ये हमें किस की तस्वीर नज़र आई, नाकामी ए पैहम से जब टूट गई हिम्मत तस्कीन की एक सूरत तक़दीर नज़र आई, आईना ए गुलशन पर जब चश्म ए ख़िरद ठहरी फूलों के भी पैरों में ज़ंजीर नज़र आई, हम उन से शिकायत भी ऐ शौक़ कहाँ करते हर गाम पे जब अपनी तक़्सीर नज़र आई..!! - [क्यों न अपनी दास्ताँ बे रब्त अफ़्साना रहे](https://hindigazals.com/kyun-na-apni-dastaan-be-rabt-afsana-rahe/): क्यों न अपनी दास्ताँ बे रब्त अफ़्साना रहे तुम से हम मानूस हो कर ख़ुद से बेगाना रहे, सब्र की हद हो गई साक़ी इधर भी एक निगाह आख़िरश कब तक यूँही हाथों में पैमाना रहे, मैं तो अपनी रौ में कह गुज़रा हूँ दिल की दास्ताँ देखिए अब याद किस को मेरा अफ़्साना रहे, तौबा तौबा ये निगाह ए मस्त ये काफ़िर शबाब जो तुझे देखे वो सारी उम्र दीवाना रहे, वो मुझे देखा करें और मैं उन्हें देखा करूँ लुत्फ़ इसी में है कि यूँ ही दौर ए पैमाना रहे, हुस्न के साथ आ ही जाती है मोहब्बत को भी नींद शम्अ सो जाए तो क्यों बेदार परवाना रहे, किस ने दीवाना बनाया इस को क्या जाने वो शौक़ हाए वो ग़ाफ़िल जो ख़ुद अपने से बेगाना रहे..!! - [दिल में हर वक़्त ख़याल ए दर ए जानाना है](https://hindigazals.com/dil-me-har-waqt-khyal-e-dar-e-janaana-hai/): दिल में हर वक़्त ख़याल ए दर ए जानाना है यानी काबे के मुक़द्दर में सनम ख़ाना है, ज़ौक़ ए रंगीं मेरा आईना ए मयख़ाना है मय है शबनम मेरी और गुल मेरा पैमाना है, है वही दिल जो किसी शोले का मुहताज नहीं अपनी ही आग में जल जाए वो परवाना है, दिल में अरमानों के सूखे हुए कुछ फूल सही कोई ये तो न कहेगा कि ये वीराना है, अब ये आलम है मेरी तिश्नालबी का साक़ी अश्क आँखों में हैं और हाथ में पैमाना है, वो कहीं जल्वानुमा हो तो क़यामत हो जाए सारा आलम जिसे बे देखे ही दीवाना है, लग़्ज़िशों का मेरी अब तो है ये आलम ऐ शौक़ काँपते हाथों में टूटा हुआ पैमाना है..!! - [कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा](https://hindigazals.com/kaun-kahta-hai-ki-maut-aai-to-mar-jaaoonga/): कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा, तेरा दर छोड़ के मैं और किधर जाऊँगा घर में घिर जाऊँगा सहरा में बिखर जाऊँगा, तेरे पहलू से जो उठ्ठूँगा तो मुश्किल ये है सिर्फ़ एक शख़्स को पाऊँगा जिधर जाऊँगा, अब तेरे शहर में आऊँगा मुसाफ़िर की तरह साया ए अब्र की मानिंद गुज़र जाऊँगा, तेरा पैमान ए वफ़ा राह की दीवार बना वर्ना सोचा था कि जब चाहूँगा मर जाऊँगा, चारासाज़ों से अलग है मेरा मेआ'र कि मैं ज़ख़्म खाऊँगा तो कुछ और सँवर जाऊँगा, अब तो ख़ुर्शीद को गुज़रे हुए सदियाँ गुज़रीं अब उसे ढूँडने मैं ता ब सहर जाऊँगा, ज़िंदगी शम्अ की मानिंद जलाता हूँ नदीम बुझ तो जाऊँगा मगर सुब्ह तो कर जाऊँगा..!! - [जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी](https://hindigazals.com/jab-tera-huqm-mila-tark-e-muhabbat-kar-dee/): जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी दिल मगर इस पे वो धड़का कि क़यामत कर दी, तुझ से किस तरह मैं इज़हार ए तमन्ना करता लफ्ज़ जो सूझे भी तो म'आनी ने बगावत कर दी, मैं ने तो समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले तू ने तो जा कर जुदाई ही मेरी क़िस्मत कर दी, तुझ को पूजा है कि असनाम परस्ती की है मैं ने वहदत के मफ़ाहीम की कसरत कर दी, मुझ को दुश्मन के इरादों पे भी प्यार आता है तेरी उल्फ़त ने मुहब्बत मेरी आदत कर दी, पूछ बैठा हूँ मैं तुझ से ही तेरे कूचे का पता तेरे हालात ने ये कैसी तेरी सूरत कर दी ? - [कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है](https://hindigazals.com/koi-hindu-koi-muslim-koi-isaai-hai/): कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ ख़ार न थीं पहले इबादतगाहें ये अक़ीदे हैं या कि इंसान की तन्हाई है ? - [मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है](https://hindigazals.com/maayus-e-sham-e-gam-tujhe-is-ki-khabar-bhi-hai/): मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है तारीकियों की आड़ में नूर ए सहर भी है, मुमकिन नहीं है दीदा ओ दानिस्ता तर्क ए इश्क़ मजबूर सिर्फ़ दिल ही नहीं है नज़र भी है, ये मुनहसिर है आप पे जैसे भी देखिए ना मो'तबर भी है वो नज़र मो'तबर भी है, तू ही बता दे मुझ को कि सज्दे कहाँ करूँ माबैन ए दैर ओ का'बा तेरा संग ए दर भी है, तेरे जुनून ए शौक़ ने क्या गुल खिलाए हैं बेगाना ए बहार थे कुछ गुल ख़बर भी है, सब रह रव ए हयात हैं लेकिन नए नए मंज़िल वही है और वही रहगुज़र भी है, उस के करम का शुक्र कहाँ तक अदा हो शौक़ सोज़िश भी है ख़लिश भी है दर्द ए जिगर भी है..!! - [अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए](https://hindigazals.com/ahal-e-duniya-waaqif-e-asrar-e-pinha-ho-gaye/): अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए दास्तान ए ग़म सुना कर हम पशेमाँ हो गए, मेरे आँसू उन की आँखों में नुमायाँ हो गए अब परेशाँ करने वाले ख़ुद परेशाँ हो गए, पुर्सिश ए ग़म करने वाले बढ़ गया कुछ और ग़म चंद क़तरे आँसुओं के बढ़ के तूफ़ाँ हो गए, जो ख़ुलूस ए बंदगी के मुंतज़िर थे आज तक मेरे सज्दों से वो नक़्श ए पा नुमायाँ हो गए, बाग़बाँ से क्या शिकायत उस का दामन पाक है अब तो ख़ुद गुलचीं भी गुलशन के निगहबाँ हो गए, एक हमारी ही नज़र नाकाम ए साहिल क्या रही जाने कितने ही सफ़ीने नज़्र ए तूफ़ान हो गए, इश्क़ का अंजाम ऐ दिल कितना इबरतनाक है मेरी हालत देखने वाले परेशाँ हो गए, जुज़्व ए फ़ितरत कब बना दर्द ए मोहब्बत क्या ख़बर इस क़दर हम शौक़ महव ए हुस्न ए जानाँ हो गए..!! - [किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं](https://hindigazals.com/kis-ko-khushi-ke-saath-gam-e-do-jahan-nahi/): किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं वो कौन सी बहार है जिस की ख़िज़ाँ नहीं. - [ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी](https://hindigazals.com/khaaqzaade-khaaq-me-yaa-khaaq-par-hai-aaj-bhi/): ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी सामने एक कूज़ागर के चाक पर हैं आज भी, ये न जाना किस तरफ़ से आई चिंगारी मगर तोहमतें सारी ख़स ओ ख़ाशाक पर हैं आज भी, जिस तकब्बुर की बदौलत छिन गए उन के हुक़ूक़ इस के असरात ए रऊनत नाक पर हैं आज भी, मैं ने रत्तीभर निज़ाम ए फ़िक्र को बदला नहीं मुनहसिर अफ़्कार सब इदराक पर हैं आज भी, जो अज़ल से हैं सफ़ीर उर्यानियत के उन के भी ज़ाविए सब सोच के पोशाक पर हैं आज भी, मेरा चेहरा जैसा था वैसा दिखाया ऐ ज़मीर सब यक़ीन आईना ए बेबाक पर हैं आज भी..!! - [ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला](https://hindigazals.com/ye-kaisa-kaam-ae-dast-e-maseeh-kar-daala/): ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला जो दिल का ज़ख़्म था वो ही सहीह कर डाला, शब ए सियाह का चेहरा उदास देखा तो निकल के चाँद ने उस को मलीह कर डाला, ज़रा सा झाँक के तारीकियों से सूरज ने मलीह चेहरा ए शब को सबीह कर डाला, मैं कैसे अक़्ल का पैकर समझ लूँ इंसाँ को ? - [राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं](https://hindigazals.com/raahton-ke-dhoke-me-iztirab-dhoondhe-hain/): राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं हम ने अपनी ख़ातिर ही ख़ुद अज़ाब ढूँढे हैं, ये तो उस की आदत है रोज़ गुल मसलता है आज भी मसलने को कुछ गुलाब ढूँढे हैं, रात आँधी आने पर उड़ गए थे ख़ेमे सब ग़ाफ़िलों ने मुश्किल से कुछ तनाब ढूँढे हैं, तेरी हुक्मरानी भी ख़त्म होने वाली है हम ने कुछ किताबों में इंक़लाब ढूँढे हैं, मेरे कुछ सवालों के तुम ने एक मुद्दत में मसअलों से हट कर ही क्यूँ जवाब ढूँढे हैं ? - [क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो](https://hindigazals.com/qayamat-waqt-se-pahle-guzar-jaaye-to-achcha-ho/): क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो नज़र कुछ देर जल्वों पर ठहर जाए तो अच्छा हो, अगर ग़म ज़ब्त की हद से गुज़र जाए तो अच्छा हो फ़रेब ए रंग ओ बू दिल से उतर जाए तो अच्छा हो, मेरी बर्बादियाँ ही दर्स ए इबरत काश बन जाएँ किसी सूरत से ये दुनिया सँवर जाए तो अच्छा हो, मोहब्बत मोतक़िद कब तक रहेगी अश्क ओ शबनम की मेरा साग़र मय ए इरफ़ाँ से भर जाए तो अच्छा हो, ज़माना मेरे दिल की धड़कनों को खेल समझा है ये आलम ख़ैर से यूँही गुज़र जाए तो अच्छा हो, मुसीबत दर हक़ीक़त एक तम्हीद ए मसर्रत है मआल ए ग़म पे दुनिया की नज़र जाए तो अच्छा हो, नज़र आई तो है धुँदली सी एक तस्वीर साहिल पर कहीं अब दिल की कश्ती भी ठहर जाए तो अच्छा हो, फ़रेब ए हुस्न की रंगीनियाँ बिखरी हैं गुलशन में मोहब्बत बे नियाज़ाना गुज़र जाए तो अच्छा हो, ज़माना बाग़बाँ के ज़ुल्म पर तन्क़ीद करता है ज़रा मजबूरियों पर भी नज़र जाए तो अच्छा हो, जहाँ लाखों तमन्नाओं का ख़ूँ ग़म ने बहाया है वहीं जीने की ये हसरत भी मर जाए तो अच्छा हो, कहाँ तक शौक़ देखा जाए आईना फ़रेबों का अब इन आँखों से ये ख़्वाब ए सहर जाए तो अच्छा हो..!! - [जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए](https://hindigazals.com/jab-bhi-un-ke-hume-andaz-e-nazar-yaad-aaye/): जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए दिल पे एक चोट लगी दर्द ए जिगर याद आए, शब को याद आए कभी वक़्त ए सहर याद आए हम भुलाते ही रहे आप मगर याद आए, आह फिर होने लगी एक ख़लिश सी दिल में उन के मुबहम से इशारात ए नज़र याद आए, हाए क्या चीज़ मोहब्बत में है मजबूरी भी लाख चाहा वो न याद आएँ मगर याद आए, यूँ तो ये ज़ीस्त तुम्हारी है ख़ुशी से ले लो अश्क रो के न रुकेंगे हम अगर याद आए, अश्क छलके कभी होंटों पे मेरे आई हँसी जब वो याद आए ब अंदाज़ ए दिगर याद आए, हाए बस आने ही वाली थी हँसी होंटों पर मुझ को गुज़रे हुए अय्याम मगर याद आए, जब भी ऐ शौक़ ज़रा दिल को सुकूँ मिलने लगा हम को उस शौक़ के अंदाज़ ए नज़र याद आए..!! - [मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दा दार ए राज़ होती है](https://hindigazals.com/mohabbat-khud-hi-apni-parda-daar-e-raaz-hoti-hai/): मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दा दार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे आवाज़ होती है, ब ज़ाहिर नग़्मा ए हस्ती भला मालूम होता है मगर हर साँस आवाज़ ए शिकस्त ए साज़ होती है, दिलों के मेल में रुस्वाइयाँ भी हो के रहती है कि टकराते हैं जब साग़र तो एक आवाज़ होती है, न हँसने का कोई मक़्सद न रोने का कोई मतलब वो दीवाने हैं जिन की ज़िंदगी एक राज़ होती है, छुपाए से लब ओ लहजा मोहब्बत का नहीं छुपता ज़माने से बहुत बदली हुई आवाज़ होती है, मैं रोता हूँ तो कोई दाद अश्कों की नहीं देता मैं हँसता हूँ तो दुनिया गोश बर आवाज़ होती है, गुनहगारों को ऐ शौक़ एक यही तस्कीन क्या कम हो ख़ता अश्कों से तर हो कर नज़र अंदाज़ होती है..!! - [आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो](https://hindigazals.com/aarzoo-le-ke-koi-ghar-se-nikalte-kyun-ho/): आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो पाँव जुलते हैं तो फिर आग पे चलते क्यूँ हो ? - [तुझ से बिछड़ के यूँ तो बहुत जी उदास है](https://hindigazals.com/tujh-se-bichhad-ke-yun-to-bahut-jee-udaas-hai/): तुझ से बिछड़ के यूँ तो बहुत जी उदास है लेकिन ये लग रहा है कि तू मेरे पास है, दरिया दिखाई देता है हर एक रेगज़ार शायद कि इन दिनों मुझे शिद्दत की प्यास है, हैरत से सब को तकते हैं पत्थर बने हुए जादूगरों के शहर में अपना निवास है, तुम को सुना रहा है लतीफ़े जो रात दिन वो आदमी तो तुम से ज़ियादा उदास है, वीराँ है मेरा घर भी उसी तरह दोस्तो कॉलेज में जिस तरह कोई उर्दू क्लास है, पूछो कोई सवाल मिलेगा ग़लत जवाब वाली हर एक शख़्स यहाँ बदहवास है..!! - [दूर नज़रों से जो हो रहे हैं अभी एक दिन वो नज़ारे पलट आएँगे](https://hindigazals.com/door-nazaron-se-jo-ho-rahe-hai-abhi-ek-din-wo-nazaare-palat-aayenge/): दूर नज़रों से जो हो रहे हैं अभी एक दिन वो नज़ारे पलट आएँगे ग़म का सैलाब जिस दम उतर जाएगा सारे टूटे किनारे पलट आएँगे, चाहतों ने कतर डाले हैं इन के पर अब न जा पाएँगे ये परिंदे कहीं प्यार के मोती जूँ ही लुटाएगा तू ये मोहब्बत के मारे पलट आएँगे, हाजरा सी अगर है तेरी जुस्तुजू मेहरबाँ तुझ पे सहरा भी हो जाएगा प्यास तेरी बुझाने को ऐ तिश्नालब मीठे पानी के धारे पलट आएँगे, ज़िंदगानी का मौसम मेरे दोस्तो एक जैसा हमेशा तो रहता नहीं आए हैं बिन बुलाए जो रंज ओ अलम दिन ख़ुशी के भी प्यारे पलट आएँगे, उस के रहम ओ करम पर है मुझ को यक़ीं मेरी दुनिया भी एक दिन वो चमकाएगा नूर बिखरेगा दिल की ज़मीं पर ज़रूर आसमाँ पर सितारे पलट आएँगे, जो न फ़िरक़ा परस्ती हसद दुश्मनी और तअस्सुब को जड़ से मिटाया गया डर है झुलसाने को आश्ती की फ़ज़ा नफ़रतों के शरारे पलट आएँगे, मैं नहीं जानता मैं कहाँ था मगर शाद सरगोशियाँ कर रहा था कोई जा रहे हैं फ़लक से जो सू ए ज़मीं हश्र के दिन वो सारे पलट आएँगे..!! - [ग़म की अँधेरी रात की जाने सहर न आए क्यों](https://hindigazals.com/gam-ki-andheri-raat-ki-jaane-sahar-na-aaye-kyo/): ग़म की अँधेरी रात की जाने सहर न आए क्यों पहरों जले किसी का दिल ज़ख़्म उभर न आए क्यों ? - [हाए क्या हाल कर लिया दिल का](https://hindigazals.com/haaye-kya-haal-kar-liya-dil-ka/): हाए क्या हाल कर लिया दिल का ज़ख़्म अब तक नहीं सिया दिल का, आ के सूरत दिखा इन आँखों को बुझ न जाए कहीं दिया दिल का, कल तलक था वफ़ा का सौदाई आज पढ़ता है मर्सिया दिल का, तोले एहसास की कसौटी पर है जुदागाना ज़ाविया दिल का, कोई रफ वर्क का निशाँ भी नहीं ख़ाली ख़ाली है हाशिया दिल का, कामयाबी का इंहिसार उस पर हम को करना है तसफ़िया दिल का, प्यास लगती नहीं कभी उस को ख़ून जिस ने भी पी लिया दिल का, नस्र में गुफ़्तुगू करें क्यूँ कर ? - [हरी भरी थी टहनी सुर्ख़ गुलाब की भी](https://hindigazals.com/hari-bhari-thi-tahni-surkh-gulab-ki-bhi/): हरी भरी थी टहनी सुर्ख़ गुलाब की भी अजब कहानी थी सूखे तालाब की भी, आँख में एक सफ़र है रेगिस्तानों का एक मसाफ़त दरियाओं के ख़्वाब की भी, खुले रखो दरवाज़े अँधेरी रातों में कभी ज़रूर आएगी किरन महताब की भी, हँसती गाती आबादी को उजाड़ने में हालत ग़ैर हुई होगी सैलाब की भी, कब तक आख़िर दिल की बात न कहता जमाल हद होती है महफ़िल के आदाब की भी..!! - [जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए](https://hindigazals.com/jab-aaftab-na-nikala-to-raushni-ke-liye/): जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए जला के हम ने परिंदे फ़ज़ा में छोड़ दिए, तमाम उम्र रहीं ज़ेर ए लब मुलाक़ातें न उस ने बात बढ़ाई न हम ने होंट सिए, सुपुर्दगी का वो लम्हा कभी नहीं गुज़रा हज़ार बार मरे हम हज़ार बार जिए, हज़ार बार वो आया भी और चला भी गया एक उम्र बीत गई उस का एतिबार किए, ख़बर नहीं कि ख़ला किस जगह पे हो मौजूद ज़मीन पर भी क़दम फूँक फूँक कर रखिए, सफ़र भी दूर का है और कहीं नहीं जाना अब इब्तिदा इसे कहिए कि इंतिहा कहिए, हवा उठा न सकी बोझ अब्र का शहज़ाद ज़मीं के अश्क भी आख़िर समुंदरों ने पिए..!! - [लगे थे ग़म तुझे किस उम्र में ज़माने के](https://hindigazals.com/lage-the-gam-tujhe-kis-umr-me-zamane-ke/): लगे थे ग़म तुझे किस उम्र में ज़माने के वही तो दिन थे तेरे खेलने के खाने के, न जाने ख़ंदा लबी ज़हर ए ख़ंद कैसे हुई वही है तू वही अंदाज़ दिल दुखाने के, चराग़ जलता हुआ दूर ही से देख लिया रहे न हम तेरी महफ़िल में आने जाने के, फ़लक के पास मोहब्बत की एक किरन भी नहीं ज़मीन कहती है मुँह खोल दे ख़ज़ाने के, है शहर शहर वही जंगलों की वीरानी मिले हैं मुझ को शब ओ रोज़ किस ज़माने के, ये क़ाफ़िले ये चमकती हुई गुज़रगाहें हैं एहतिमाम बहुत दूर तक न जाने के, तलाश ए रिज़्क़ में हम ने चमन तो छोड़ दिया मगर दिलों में हैं तिनके भी आशियाने के..!! - [दरिया कभी एक हाल में बहता न रहेगा](https://hindigazals.com/dariya-kabhi-ek-haal-me-bahta-na-rahega/): दरिया कभी एक हाल में बहता न रहेगा रह जाऊँगा मैं और कोई मुझ सा न रहेगा, आसेब नज़र आते हैं दिन को भी यहाँ पर इस शहर में अब कोई अकेला न रहेगा, अच्छा है न देखेंगे न महसूस करेंगे आँखें न रहेंगी तो तमाशा न रहेगा, वो ख़ाक उड़ेगी कि न देखी न सुनी हो दीवाना तो क्या चीज़ है सहरा न रहेगा, ये अंजुमन आराई है एक रात की मेहमान ता सुब्ह कोई देखने वाला न रहेगा, तू कुछ भी हो कब तक तुझे हम याद करेंगे ता हश्र तो ये दिल भी धड़कता न रहेगा, क्या क्या नज़र आता था कि मौजूद नहीं है ये सोच के रोता हूँ कि क्या क्या न रहेगा ? - [मेरी ख़ातिर देर न करना और सफ़र करते जाना](https://hindigazals.com/meri-khatir-der-na-karna-aur-safar-karte-jaana/): मेरी ख़ातिर देर न करना और सफ़र करते जाना लेकिन छोड़ के जाने वालो एक नज़र करते जाना, हिज्र की शब के तारो तुम को डूब तो जाना है लेकिन मेरे दिल पर क्या गुज़री है उन को ख़बर करते जाना, हम से दर्द के मारों की मुख़्तारी क्या मजबूरी क्या जीना और न मरना लेकिन उम्र बसर करते जाना, इतना सुकूँ इतनी ख़ामोशी कैसे रात गुज़ारें हम जाते जाते महफ़िल ए दिल को ज़ेर ओ ज़बर करते जाना, रोती आँखें या हँसते लब आप भी एक सौदाई हैं चुप चुप रहना और तवाफ़ ए राहगुज़र करते जाना, और ज़रा चमका देना यादों के भड़कते शोलों को ऐ ग़म ए दौराँ ऐ ग़म ए जानाँ दिल पे असर करते जाना, किस को ख़बर शहज़ाद कि उन आँखों में कैसा जादू है कहना और न सुनना लेकिन दिल में घर करते जाना..!! - [जज़्बा ए शौक़ को इस तौर उभारा जाए](https://hindigazals.com/jazba-e-shauk-ko-is-taur-ubhaara-jaaye/): जज़्बा ए शौक़ को इस तौर उभारा जाए हम जिधर जाएँ उधर उन का नज़ारा जाए, आपसी रिश्तों की ख़ुशबू को कोई नाम न दो इस तक़द्दुस को न काग़ज़ पर उतारा जाए, सैकड़ों नाम तेरे और हैं बे नाम भी तू कौन से नाम से अब तुझ को पुकारा जाए ? - [मैं ने कब अपनी वफ़ाओं का सिला माँगा था](https://hindigazals.com/main-ne-kab-apni-wafaaon-ka-sila-maanga-tha/): मैं ने कब अपनी वफ़ाओं का सिला माँगा था एक तबस्सुम ही तेरा बहर ए ख़ुदा माँगा था, क्या ख़बर थी मेरी नींदें ही उजड़ जाएँगी मैं ने खोए हुए ख़्वाबों का पता माँगा था, दस्त ए गुल चीं ने भी गुलशन से वही फूल चुना मैं ने जिस गुल के लिए दस्त ए सबा माँगा था, शिद्दत ए ग़म में दुआ की थी तुझे भूलने की अब भरे ज़ख़्म तो नादिम हूँ ये क्या माँगा था, बस इसी बात पे बरहम है ज़माना मुझ से अपने बदख़्वाहों का भी मैं ने भला माँगा था, एक गुज़ारिश भी न हो पाई क़ुबूल उस के हुज़ूर ग़ालिबन मैं ने ही कुछ हद से सिवा माँगा था, चूड़ियाँ टूटीं तो ज़ख़्मों से लहू रंग हुई जिस हथेली ने ज़रा रंग ए हिना माँगा था, तू ने हर ग़म से नवाज़ा है तेरा ख़ास करम मुझ को तो ये भी नहीं याद कि क्या माँगा था ? - [ज़बाँ का पास है तो क़ौल सब निभाने हैं](https://hindigazals.com/zabaan-ka-paas-hai-to-qaul-sab-nibhaane-hain/): ज़बाँ का पास है तो क़ौल सब निभाने हैं अगर मुकरने पे आऊँ तो सौ बहाने हैं, तीर ए निगाह के रस्ते सभी नए हैं मगर हमारे तौर तरीक़े सभी पराए हैं, न रास आई हमें आप की अदा कोई सितम है उस पे कि हम आप के दिवाने हैं, ये क्या कि हौसला तुम ने अभी से हार दिया अभी तो वक़्त ने कुछ और गुल खिलाने हैं, सियाह रात की तारीकियाँ बजा लेकिन नवेली सुब्ह के मंज़र अजब सुहाने हैं, हर एक सम्त बलाओं का एक हुजूम सा है तमाम हौसले अब दिल को आज़माने हैं, नया तो कुछ भी नहीं तेरी दास्ताँ में चाँद वही हैं दर्द के क़िस्से वही फ़साने हैं..!! - [रंग हवा से छूट रहा है मौसम ए कैफ़ ओ मस्ती है](https://hindigazals.com/rang-hawa-se-choot-raha-hai-mausam-e-qaif-o-masti-hai/): रंग हवा से छूट रहा है मौसम ए कैफ़ ओ मस्ती है फिर भी यहाँ से हद्द ए नज़र तक प्यासों की एक बस्ती है, दिल जैसा अनमोल रतन तो जब भी गया बे राम गया जान की क़ीमत क्या माँगें ये चीज़ तो ख़ैर अब सस्ती है, दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई ख़्वाबों के बादल आते हैं लेकिन आग बरसती है, अफ़्सानों की क़िंदीलें हैं अनदेखीं मेहराबों में लोग जिसे सहरा कहते हैं दीवानों की बस्ती है..!! - [जितने वहशी हैं चले जाते हैं सहरा की तरफ़](https://hindigazals.com/jitne-wahashi-hai-chale-jaate-hai-sahra-kee-taraf/): जितने वहशी हैं चले जाते हैं सहरा की तरफ़ कोई जाता ही नहीं ख़ेमा ए लैला की तरफ़, हम हरीफ़ों की तमन्ना में मरे जाते हैं उँगलियाँ उठने लगीं दीदा ए बीना की तरफ़, हर तरफ़ सुब्ह ने एक जाल बिछा रखा है ओस की बूँद कहाँ जाती है दरिया की तरफ़, हम भी अमृत के तलबगार रहे हैं लेकिन हाथ बढ़ जाते हैं ख़ुद ज़हर ए तमन्ना की तरफ़..!! - [ऐब ये है कि अपने बारे में कम सोचते हो](https://hindigazals.com/aeb-ye-hai-ki-apne-baare-me-kam-sochte-ho/): ऐब ये है कि अपने बारे में कम सोचते हो मैं नहीं जो सोचते हो तो बस हम सोचते है, है तुम्हे भी हासिल ज़माने भर की खुशियाँ लेकिन तुम जब सोचते हो तो गम सोचते हो, हर दिन तामीर तो करते हो नए ख़्वाब को हर रात क्यूँ नहीं उठा था क़दम सोचते हो, एक तरफ़ ज़िगर रखते हो पत्थर पिघलाने का दूसरी तरफ़ क्यूँ मिला दिल नरम सोचते हो..!! - [ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है](https://hindigazals.com/ye-mohabbat-agar-zarurat-hai/): ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है ये ज़रूरत भी तो मोहब्बत है, मेरा भी दिल नहीं था रुकने का उस ने भी कह दिया इजाज़त है, शाइरों की नज़र से मत देखो दुनिया दर अस्ल ख़ूबसूरत है, तुम मुझे छोड़ कर चले जाओ मेरी क़ुर्बत अगर मुसीबत है, लौट आया मेरा अकेला पन अब किसी की कहाँ ज़रूरत है ? - [उस ने यूँ रास्ता दिया मुझ को](https://hindigazals.com/us-ne-yun-raasta-diya-mujh-ko/): उस ने यूँ रास्ता दिया मुझ को रास्ते से हटा दिया मुझ को, दूर करने के वास्ते ख़ुद से ख़ुद का ही वास्ता दिया मुझ को, मौत ही कुछ सुकून दे शायद ज़िंदगी ने थका दिया मुझ को, जब मेरे बाल ओ पर शिकस्ता हुए तब क़फ़स से उड़ा दिया मुझ को, जिस हवा ने मुझे जलाए रखा फिर उसी ने बुझा दिया मुझ को..!! - [उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा](https://hindigazals.com/umr-bhar-sine-me-ek-dard-dabaye-rakha/): उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम ओ गुमाँ कि वो फ़क़त मेरी है और उस ने भी भरम मेरा बनाए रखा, आँधियाँ शर्म से हो जाएँ न पानी पानी सर यही सोच के पेड़ों ने झुकाए रखा, वैसे हर बात से रखा उसे वाक़िफ़ हम ने लेकिन अफ़्साना ए उल्फ़त को छुपाए रखा, एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम एक रिश्ता जिसे ता उम्र निभाए रखा, कूज़ागर तुझ को बनाना ही नहीं था जब कुछ किस लिए चाक पे ता उम्र चढ़ाए रखा..!! - [लोग क्या से क्या न जाने हो गए](https://hindigazals.com/log-kya-se-kya-na-jaane-ho-gaye/): लोग क्या से क्या न जाने हो गए आज कल अपने ही बेगाने हो गए, बेसबब रहगुज़र में छोड़ जाना आजकल दोस्ती के मायने हो गए, आदमी टुकड़ो में इतने बँट चुका आदम के भी कितने घराने हो गए, वक़्त ने इस कदर की तब्दीलियाँ जो हकीक़त थे वो फ़साने हो गए..!! - [दे के चुभते हुए सवाल हवा](https://hindigazals.com/de-ke-chubhate-hue-sawal-hawa/): दे के चुभते हुए सवाल हवा ले गई मेरे तीस साल हवा, पाँव धरती से उठ रहे हैं मेरे हो सके तो मुझे सँभाल हवा, और फूँकेगा बस्तियाँ कितनी आग से तेरा इत्तिसाल हवा, तू कि जलते दिए बुझाती है मेरे ज़ख़्मों का इंदिमाल हवा, वो तो कहिए कि तेरा जिस्म नहीं तू भी हो जाती पाएमाल हवा, लौह ए मरक़द पे आब ए ज़र से लिखो हो गई है यहाँ निढाल हवा, हर क़दम देख भाल कर अंजुम बुन रही है अनोखे जाल हवा..!! - [न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से](https://hindigazals.com/na-mahlon-ki-bulandi-se-na-lafzon-ke-nagine-se/): न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है ‘घीसू’ के पसीने से, अब चर्चा में रोटी है मुहब्बत हाशिए पर है उतर आई ग़ज़ल इस दौर में कोठी के ज़ीने से, अदब का आईना उन तंग गलियों से गुज़रता है जहाँ बचपन सिसकता है लिपटकर माँ के सीने से, कि बहरे बेकराँ में ताक़यामत का सफ़र ठहरा जिसे साहिल की हसरत हो उतर जाए सफ़ीने से, अदीबों की नई पीढ़ी से ये मेरी गुज़ारिश है सँजोकर रखें धूमिल की विरासत को क़रीने से..!! - [वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग](https://hindigazals.com/vallah-kis-junoon-ke-sataye-hue-hai-log/): वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग, ये तिश्नगी गवाह है घायल है इनकी रूह चेहरे ही तबस्सुम से सजाए हुए हैं लोग, ग़ैरत मरी तो वाक़ई इंसान मर गया जीने की सिर्फ़ रस्म निभाए हुए हैं लोग, कहने को कह रहे हैं मुबारक हो नया साल खंज़र भी आस्तीं में छुपाए हुए हैं लोग..!! - [घर पे ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है](https://hindigazals.com/ghar-pe-thande-chulhe-par-agar-khaali-patili-hai/): घर पे ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओं कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है ? - [ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी](https://hindigazals.com/ye-amiron-se-humari-faislakun-jung-thi/): ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्जिद व मंदिर आ गए ? - [जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में](https://hindigazals.com/jo-ulajhkar-rah-gayi-hai-faailon-ke-jaal-me/): जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में ? - [जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे](https://hindigazals.com/jo-dalhauji-na-kar-paya-wo-ye-huqqam-kar-denge/): जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे, सुरा व सुंदरी के शौक़ में डूबे हुए रहबर दिल्ली को रंगीलेशाह का हम्माम कर देंगे, ये वंदेमातरम् का गीत गाते हैं सुबह उठकर मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे, सदन को घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे अगली योजना में घूसख़ोरी आम कर देंगे..!! - [उनका दावा मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया](https://hindigazals.com/unka-daava-muflisi-ka-morcha-sar-ho-gaya/): उनका दावा मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया पर हक़ीक़त ये है मौसम और बदतर हो गया, बंद कल को क्या किया मुखिया के खेतों में बेगार अगले दिन ही एक होरी और बेघर हो गया, जब हुई नीलाम कोठे पर किसी की आबरू फिर अहल्या का सरापा जिस्म पत्थर हो गया, रंग रोगन से पुता पहलू में लेकिन दिल नहीं आज का इंसान भी काग़ज़ का पैकर हो गया, माफ़ करिए सच कहूँ तो आज हिंदुस्तान में कोख ही ज़रख़ेज़ है, एहसास बंजर हो गया..!! - [भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है](https://hindigazals.com/bhukmari-kee-zad-me-hai-yaa-daar-ke-saaye-me-hai/) - [नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो](https://hindigazals.com/nilofar-shabnam-nahi-angaar-kee-baaten-karo/): नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो वक़्त के बदले हुए मेयार की बातें करो, भाप बन सकती नहीं पानी अगर हो नीम गर्म क्रांति लाने के लिए हथियार की बातें करो, आसमानी बाप से जब प्यार कर सकते नहीं इस ज़मीं के ही किसी किरदार की बातें करो, तर्क कर तन्क़ीद के जज़्बे को मर जाती है क़ौम ज़ुर्म है ठहराव अब रफ़्तार की बातें करो..!! - [वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन](https://hindigazals.com/vaampanthi-soch-ka-aayaam-hai-nagarjun/): वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन ज़िंदगी में आस्था का नाम है नागार्जुन, ग्रामगंधी सर्जना, उसमें जुलाहे का ग़ुरूर जितना अनगढ़ उतना ही अभिराम है नागार्जुन, हम तो कहते हैं बंगाल की खाँटी सुबह केरला की ख़ूबसूरत शाम है नागार्जुन, ख़ास इतना है कि सर आँखों पे है उसका वजूद मुफ़लिसों की झोपड़ी तक आम है नागार्जुन, इस अहद के साथ कि इस बार हारेगा यज़ीद कर्बला में युद्ध का पैग़ाम है नागार्जुन..!! - [इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है](https://hindigazals.com/indradhanushi-rang-me-mahki-hui-tahrir-hai/): इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है अमृता की शायरी एक बोलती तस्वीर है, टूटते रिश्तों की तल्ख़ी है मेरे अश्आर में वाक़ई पंजाब के माटी की ये तासीर है, दिल को तड़पाती है असफल प्यार की तीखी चुभन शबनमी होंठों पे गोया दास्तान ए हीर है, बारहा दुनिया में जिस औरत को रुस्वाई मिली तेरी नज़्मों में वो बर्ग ए गुल नहीं शमशीर है, गंगाजल से वोदका तक ये सफ़रनामा अदम अहल ए पंजाबी अदब में एक नई तामीर है..!! - [जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है](https://hindigazals.com/jiske-sammohan-me-pagal-dharti-hai-aakash-bhi-hai/): जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है एक पहेली सी से दुनिया, गल्प भी है, इतिहास भी है, चिंतन के सोपान पे चढ़कर चाँद सितारे छू आए लेकिन मन की गहराई में माटी की बू बास भी है, मानव मन के द्वंद्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे महारास की पृष्ठभूमि में ‘ओशो’ का संन्यास भी है, अमृत की बूँदे बरसी थीं तब हमने मुँह फेर लिया आज ख़ुशी से ज़हर पी रहे और इसका एहसास भी है, इंद्रधनुष के पुल से गुज़रकर उस बस्ती तक आए हैं जहाँ भूख की धूप सलोनी चंचल है बिंदास भी है, कंक्रीट के इस जंगल में फूल खिले पर ग्रंथ नहीं स्मृतियों की घाटी में यूँ कहने को मधुमास भी है..!! - [दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की](https://hindigazals.com/doston-ab-aur-kya-tauhin-hogi-reesh-kee/): दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की ब्रेसरी के हुक पे ठहरी चेतना रजनीश की, योग की पेचीदगी का हल मिले या न मिले आप सब सूरत से वाक़िफ़ हो गए इब्लीस की, मोहतरम यूँ पाँव लटकाए हुए हैं क़ब्र में चाहिए लड़की कोई सोलह, कोई उन्नीस की, फ़ल्सफ़े की रौशनी में रूह नंगी हो गई क्यूँ नहीं उठती है अब कोई नज़र तफ़्तीश की, जिस्म की घाटी में अब इल्हाम ढूँढ़ा जा रहा ये घिनौनी लत है कोरे गाँव के जगदीश की..!! - [अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है](https://hindigazals.com/achetan-man-me-pragya-kalpana-ki-lau-jalaati-hai/): अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है सहज अनुभूति के स्तर में कविता जन्म पाती है उठाता पाँव है विज्ञान संशय के अँधेरे में अचानक उस अँधेरे में ही बिजली कौंध जाती है अदम इस सभ्यता के पास देने को नहीं कुछ अब जो ये संतप्त मानव के लिए पेशाब लाती है..!! - [ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए](https://hindigazals.com/zindagi-dushwaar-hai-uff-ye-giraani-dekhiye/): ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! - [ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है](https://hindigazals.com/ye-samjhte-hain-khile-hain-to-fir-bikhrna-hai/): ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है पर अपने ख़ून से गुलशन में रंग भरना है, उससे मिलने को कई मोड़ से गुज़रना है अभी तो आग के दरिया में भी उतरना है, जिसके आने से बदल जाए ज़माने का निज़ाम ऐसे इंसान को इस ख़ाक से उभरना है, बह रहा दरिया इधर एक घूँट को तरसे उदय प्रताप जी वादे से ये मुकरना है..!! - [ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था](https://hindigazals.com/khwab-me-koi-mujh-ko-aas-dilane-baitha-tha/): ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था जागा तो मैं ख़ुद अपने ही सिरहाने बैठा था, यूँही रुका था दम लेने को, तुम ने क्या समझा ? - [यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है](https://hindigazals.com/yahan-taqarar-e-saaat-ke-siwa-kya-rah-gaya-hai/): यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है मुसलसल एक हालत के सिवा क्या रह गया है ? - [शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा](https://hindigazals.com/shikast-e-khwab-ka-humen-malal-kyun-nahi-raha/): शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा बिछड़ गए तो फिर तिरा ख़याल क्यूँ नहीं रहा ? - [बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से](https://hindigazals.com/batata-hai-mujhe-aaeena-kaisi-be-rukhi-se/): बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से कि मैं महरूम होता जा रहा हूँ रौशनी से, किसे इल्ज़ाम दूँ मैं राएगाँ होने का अपने कि सारे फ़ैसले मैं ने किए ख़ुद ही ख़ुशी से, हर एक लम्हे मुझे रहती है ताज़ा एक शिकायत कभी तुझ से कभी ख़ुद से कभी इस ज़िंदगी से, मुझे कल तक बहुत ख़्वाहिश थी ख़ुद से गुफ़्तुगू की मैं छुपता फिर रहा हूँ आज अपने आप ही से, वो बे कैफ़ी का आलम है कि दिल ये चाहता है कहीं रू पोश हो जाऊँ अचानक ख़ामुशी से, सुकून ए ख़ाना ए दिल के लिए कुछ गुफ़्तुगू कर अजब हंगामा बरपा है तेरी लब बस्तगी से, तअ’ल्लुक़ की यही सूरत रहेगी क्या हमेशा ? - [मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है](https://hindigazals.com/mere-khwabon-se-ojhal-us-ka-chehra-ho-gaya-hai/): मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है मैं ऐसा चाहता कब था पर ऐसा हो गया है, तअ’ल्लुक़ अब यहाँ कम है मुलाक़ातें ज़ियादा हुजूम ए शहर में हर शख़्स तन्हा हो गया है, तेरी तकमील की ख़्वाहिश तो पूरी हो न पाई मगर एक शख़्स मुझ में भी अधूरा हो गया है, जो बाग़ ए आरज़ू था अब वही है दश्त ए वहशत ये दिल क्या होने वाला था मगर क्या हो गया है ? - [कौन जात हो भाई ? दलित हैं साब !](https://hindigazals.com/kaun-jaat-ho-bhai-dalit-hai-saab/): कौन जात हो भाई? “दलित हैं साब!” नहीं मतलब किसमें आते हो? आपकी गाली में आते हैं गंदी नाली में आते हैं और अलग की हुई थाली में आते हैं साब! - [अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है](https://hindigazals.com/azab-hai-rang-e-chaman-jaa-baa-jaa-udaasi-hai/): अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है महक उदासी है बाद ए सबा उदासी है, नहीं नहीं ये भला किस ने कह दिया तुम से में ठीक ठाक हूँ हाँ बस ज़रा उदासी है, मैं मुब्तला कभी होता नहीं उदासी में मैं वो हूँ जिस में कि ख़ुद मुब्तला उदासी है, तबीब ने कोई तफ़्सील तो बताई नहीं बहुत जो पूछा तो इतना कहा उदासी है, गुदाज़ क़ल्ब ख़ुशी से भला किसी को मिला अज़ीम वस्फ़ ही इंसान का उदासी है, शदीद दर्द की रू है रवाँ रग ए जाँ में बला का रंज है बेइंतिहा उदासी है, फ़िराक़ में भी उदासी बड़े कमाल की थी पस ए विसाल तो इस से सिवा उदासी है, तुम्हें मिले जो ख़ज़ाने तुम्हें मुबारक हों मेरी कमाई तो ये बे बहा उदासी है, छुपा रही हो मगर छुप नहीं रही मेरी जाँ झलक रही है जो ज़ेर ए क़बा उदासी है, मुझे मसाइल ए कौन ओ मकाँ से क्या मतलब मेरा तो सब से बड़ा मसअला उदासी है, फ़लक है सर पे उदासी की तरह फैला हुआ ज़मीं नहीं है मेरे ज़ेर ए पा उदासी है, ग़ज़ल के भेस में आई है आज महरम ए दर्द सुख़न की ओढ़े हुए है रिदा उदासी है, अजीब तरह की हालत है मेरी बे अहवाल अजीब तरह की बे माजरा उदासी है, वो कैफ़ ए हिज्र में अब ग़ालिबन शरीक नहीं कई दिनों से बहुत बे मज़ा उदासी है, वो कह रहे थे कि शाइर ग़ज़ब का है इरफ़ान हर एक शेर में क्या ग़म है क्या उदासी है..!! - [एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा](https://hindigazals.com/ek-khwab-neend-ka-tha-sabab-jo-nahi-raha/): एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा उस का क़लक़ है ऐसा कि मैं सो नहीं रहा, वो हो रहा है जो मैं नहीं चाहता कि हो और जो मैं चाहता हूँ वही हो नहीं रहा, नम दीदा हूँ, कि तेरी ख़ुशी पर हूँ ख़ुश बहुत चल छोड़, तुझ से कह जो दिया, रो नहीं रहा, ये ज़ख़्म जिस को वक़्त का मरहम भी कुछ नहीं ये दाग़, सैल ए गिर्या जिसे धो नहीं रहा, अब भी है रंज, रंज भी ख़ासा शदीद है वो दिल को चीरता हुआ ग़म गो नहीं रहा, आबाद मुझ में तेरे सिवा और कौन है ? - [ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं](https://hindigazals.com/gamon-me-kuch-kami-yaa-kuch-izafa-kar-rahe-hain/): ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं समझ में कुछ नहीं आता कि हम क्या कर रहे हैं जो आता है नज़र में उस को ले आते हैं दिल में नई तरकीब से हम ख़ुद को तन्हा कर रहे हैं, नज़र करते हैं यूँ जैसे बिछड़ने की घड़ी हो सुख़न करते हैं ऐसे जैसे गिर्या कर रहे हैं, तुम्हारे ही तअल्लुक़ से तो हम हैं इस बदन में तुम्हारे ही लिए तो ये तमाशा कर रहे हैं, ज़वाल ए आमादगी अब गूँजती है धड़कनों में सो दिल से ख़्वाहिशों का बोझ हल्का कर रहे हैं, सुख़न तुम से हो या अहबाब से या अपने दिल से यही लगता है हम हर बात बेजा कर रहे हैं, तुम्हारी आरज़ू होने से पहले भी तो हम थे सो जैसे बन पड़े अब भी गुज़ारा कर रहे हैं, ज़रा पूछे कोई मादूम होते इन दुखों से हमें किस के भरोसे पर अकेला कर रहे हैं, हमें रोके हुए है पास ए नामूस ए मोहब्बत ये मत समझो कि हम दुनिया की पर्वा कर रहे हैं, ब जुज़ सीना ख़राशी कुछ नहीं आता है लेकिन ज़रा देखो तो हम ये काम कैसा कर रहे हैं, हमें इस काम की मुश्किल का अंदाज़ा है साहब बड़े अर्से से हम भी तर्क ए दुनिया कर रहे हैं, जो होगी सुब्ह तो तक़्सीम हो जाएँगे फिर हम ढली है शाम तो ख़ुद को इकट्ठा कर रहे हैं, जुनूँ से इतना देरीना तअल्लुक़ तोड़ देंगे ? - [उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं है](https://hindigazals.com/udaas-bas-aadatan-hoon-kuch-bhi-hua-nahi-hai/): उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं है यक़ीन मानो किसी से कोई गिला नहीं है, अधेड़ कर सी रहा हूँ बरसों से अपनी परतें नतीजतन ढूँडने को अब कुछ बचा नहीं है, ज़रा ये दिल की उमीद देखो यक़ीन देखो मैं ऐसे मासूम से ये कह दूँ ख़ुदा नहीं है, मैं अपनी मिट्टी से अपने लोगों से कट गया हूँ यक़ीनन इस से बड़ा कोई सानेहा नहीं है, तो क्या कभी मिल सकेंगे या बात हो सकेगी नहीं नहीं जाओ तुम कोई मसअला नहीं है, वो राज़ सीने में रख के भेजा गया था मुझ को वही जो इक राज़ मुझ पे अब तक खुला नहीं है, मैं बुग़्ज़ नफ़रत हसद मोहब्बत के साथ रखूँ नहीं मियाँ मेरे दिल में इतनी जगह नहीं है, चहार जानिब ये बे-यक़ीनी का घुप अँधेरा ये मेरी वहशत का इन्ख़िला है ख़ला नहीं है, उसी की ख़ुशबू से आज तक मैं महक रहा हूँ वो मुझ से बिछड़ा हुआ है लेकिन जुदा नहीं है, लिखा हुआ है तुम्हारे चेहरे पे ग़म तुम्हारा हमारी हालत भी ऐसी बे माजरा नहीं है, ये ताज़ा-कारी है तर्ज़-ए-एहसास का करिश्मा मिरे लुग़त में तो लफ़्ज़ कोई नया नहीं है. - [अब आ भी जाओ, बहुत दिन हुए मिले हुए भी](https://hindigazals.com/ab-aa-bhi-jaao-bahut-din-hue-mile-hue-bhi/): अब आ भी जाओ, बहुत दिन हुए मिले हुए भी भुला ही देंगे अगर दिल में कुछ गिले हुए भी, हमारी राह अलग है, हमारे ख़्वाब जुदा हम उन के साथ न होंगे, जो क़ाफ़िले हुए भी, हुजूम-ए-शहर-ए-ख़िरद में भी हम से अहल-ए-जुनूँ अलग दिखेंगे, गरेबाँ जो हों सिले हुए भी, हमें न याद दिलाओ हमारे ख़्वाब-ए-सुख़न कि एक उम्र हुए होंट तक हिले हुए भी, नज़र की, और मनाज़िर की बात अपनी जगह हमारे दिल के कहाँ अब, जो सिलसिले हुए भी, यहाँ है चाक-ए-क़फ़स से उधर इक और क़फ़स सो हम को क्या, जो चमन में हों गुल खुले हुए भी, हमें तो अपने उसूलों की जंग जीतनी है किसे ग़रज़, जो कोई फ़तह के सिले हुए भी..!! - [सभी ये पूछते रहते हैं क्या गुम हो गया है](https://hindigazals.com/sabhi-ye-puchte-rahte-hain-kya-gum-ho-gaya-hai/): सभी ये पूछते रहते हैं क्या गुम हो गया है बता दूँ? - [हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले](https://hindigazals.com/humen-nahi-aate-ye-kartab-naye-zamane-wale/): हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले हम तो सीधे लोग हैं यारो वही पुराने वाले, उन के होते कोई कमी है रातों की रौनक़ में यादें ख़्वाब दिखाने वाली ख़्वाब सुहाने वाले, कहाँ गईं रंगीन पतंगें लट्टू काँच के बँटे अब तो खेल भी बच्चों के हैं दिल दहलाने वाले, वो आँचल से ख़ुशबू की लपटें बिखराते पैकर वो चिलमन की ओट से चेहरे छब दिखलाने वाले, बाम पे जाने वाले जानें उस महफ़िल की बातें हम तो ठहरे उस कूचे में ख़ाक उड़ाने वाले, जब गुज़रोगे उन रस्तों से तपती धूप में तन्हा तुम्हें बहुत याद आएँगे हम साए बिछाने वाले, तुम तक शायद देर से पहुँचे मिरा मोहज़्ज़ब लहजा पहले ज़रा ख़ामोश तो हों ये शोर मचाने वाले, हम जो कहें सो कहने देना संजीदा मत होना हम तो हैं ही शा’इर बात से बात बनाने वाले, अच्छा पहली बार किसी को मेरी फ़िक्र हुई है मैं ने बहुत देखे हैं तुम जैसे समझाने वाले, ऐसे लबालब कब भरता है हर उम्मीद का कासा मुझ को हसरत से तकते हैं आने जाने वाले, सफ़्फ़ाकी में एक से हैं सब जिन के साथ भी जाओ का’बे वाले इस जानिब हैं वो बुत-ख़ाने वाले, मिरे शहर में माँग अब तो बस उन लोगों की है कफ़न बनाने वाले या मुर्दे नहलाने वाले, गीत रसीले बोल सजीले कहाँ सुनोगे अब तुम अब तो कहता है ‘इरफ़ान’ भी शे’र रुलाने वाले..!! - [मोहब्बत की रंगीनियाँ छोड़ आए](https://hindigazals.com/mohabbat-ki-ranginiya-chhod-aaye/): मोहब्बत की रंगीनियाँ छोड़ आए तेरे शहर में एक जहाँ छोड़ आए, पहाड़ों की वो मस्त शादाब वादी जहाँ हम दिल ए नग़्मा ख़्वाँ छोड़ आए, वो सब्ज़ा वो दरिया वो पेड़ों के साए वो गीतों भरी बस्तियाँ छोड़ आए, हसीं पनघटों का वो चाँदी सा पानी वो बरखा की रुत वो समाँ छोड़ आए, बहुत दूर हम आ गए उस गली से बहुत दूर वो आस्ताँ छोड़ आए, बहुत मेहरबाँ थीं वो गुल-पोश राहें मगर हम उन्हें मेहरबाँ छोड़ आए, बगूलों की सूरत यहाँ फिर रहे हैं नशेमन सर ए गुलसिताँ छोड़ आए, ये एजाज़ है हुस्न ए आवारगी का जहाँ भी गए दास्ताँ छोड़ आए, चले आए उन रह गुज़ारों से जालिब मगर हम वहाँ क़ल्ब ओ जाँ छोड़ आए..!! - [चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले](https://hindigazals.com/chalo-tum-ko-milata-hoon-main-us-mehman-se-pahle/): चलो तुम को मिलाता हूँ मैं उस मेहमान से पहले जो मेरे जिस्म में रहता था मेरी जान से पहले, मुझे जी भर के अपनी मौत को तो देख लेने दो निकल जाए न मेरी जान, मेरे अरमान से पहले, कोई ख़ामोश हो जाए तो उसकी ख़ामोशी से डर समन्दर चुप ही रहता है, किसी तूफ़ान से पहले, मेरी आँखों में आबी मोतियों का सिलसिला देखो ये माला रोज़ जपता हूँ मैं, एक मुस्कान से पहले, पुराना यार हूँ तेरा तो मेरा ये फ़र्ज़ बनता है तुझे होशियार कर दूँ मैं तेरे नुक़सान से पहले..!! - [अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है](https://hindigazals.com/apni-khabar-na-us-ka-pata-hai-ye-ishq-hai/): अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है जो था, नहीं है, और न था, है, ये इश्क़ है, पहले जो था, वो सिर्फ़ तुम्हारी तलाश थी लेकिन जो तुम से मिल के हुआ है, ये इश्क़ है, तश्कीक है, न जंग है माबैन ए अक़्ल ओ दिल बस ये यक़ीन है कि ख़ुदा है, ये इश्क़ है, बेहद ख़ुशी है, और है बेइंतिहा सुकून अब दर्द है, न ग़म, न गिला है, ये इश्क़ है, क्या रम्ज़ जाननी है तुझे अस्ल ए इश्क़ की ? - [क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में](https://hindigazals.com/kya-bataoon-ki-jo-hungama-bapa-hai-mujh-me/): क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में इन दिनों कोई बहुत सख़्त ख़फ़ा है मुझ में, उस की ख़ुशबू कहीं अतराफ़ में फैली हुई है सुब्ह से रक़्सकुनाँ बाद ए सबा है मुझ में, तेरी सूरत में तुझे ढूँड रहा हूँ मैं भी ग़ालिबन तू भी मुझे ढूँड रहा है मुझ में, एक ही सम्त हर एक ख़्वाब चला जाता है याद है या कोई नक़्श ए कफ़ ए पा है मुझ में, मेरी बेराह रवी इस लिए सरशार सी है मेरे हक़ में कोई मसरूफ़ ए दुआ है मुझ में, अपनी साँसों की कसाफ़त से गुमाँ होता है कोई इम्कान अभी ख़ाक हुआ है मुझ में, एक चुभन है कि जो बेचैन किए रहती है ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है मुझ में, या तो मैं ख़ुद ही रिहाई के लिए हूँ बेताब या गिरफ़्तार कोई मेरे सिवा है मुझ में, आईना इस की गवाही नहीं देता तो न दे वो ये कहता है कोई ख़ास अदा है मुझ में, हो गई दिल से तेरी याद भी रुख़्सत शायद आह ओ ज़ारी का अभी शोर उठा है मुझ में, मुझ में आबाद हैं एक साथ अदम और वजूद हस्त से बर सर ए पैकार फ़ना है मुझ में, मजलिस ए शाम ए ग़रीबाँ है बपा चार पहर मुस्तक़िल बस अभी माहौल ए अज़ा है मुझ में, हो गई शक़ तो बिल आख़िर ये अना की दीवार अपनी जानिब कोई दरवाज़ा खुला है मुझ में, ख़ूँ बहाता हुआ ज़ंजीर ज़नी करता हुआ कोई पागल है जो बेहाल हुआ है मुझ में, उस की ख़ुशबू से मोअत्तर है मेरा सारा वजूद तेरे छूने से जो एक फूल खिला है मुझ में, मुझ सा बे माया कहाँ और कहाँ ज़ोम ए कलाम ऐ मेरे रब्ब ए सुख़न तेरी अता है मुझ में, तेरे जाने से यहाँ कुछ नहीं बदला मसलन तेरा बख़्शा हुआ हर ज़ख़्म हरा है मुझ में, कैसे मिल जाती है आवाज़ ए अज़ाँ से हर सुब्ह रात भर गूँजने वाली जो सदा है मुझ में, कितनी सदियों से उसे ढूँड रहे हो बेसूद आओ अब मेरी तरफ़ आओ ख़ुदा है मुझ में, मुझ में जन्नत भी मेरी और जहन्नम भी मेरा जारी ओ सारी जज़ा और सज़ा है मुझ में, रौशनी ऐसे धड़कते तो न देखी थी कभी ये जो रह रह के चमकता है ये क्या है मुझ में ?? - [कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है](https://hindigazals.com/koi-mila-to-kisi-aur-ki-kami-hui-hai/): कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है सो दिल ने बे तलबी इख़्तियार की हुई है, जहाँ से दिल की तरफ़ ज़िंदगी उतरती थी निगाह अब भी उसी बाम पर जमी हुई है, है इंतिज़ार उसे भी तुम्हारी ख़ुशबू का हवा गली में बहुत देर से रुकी हुई है, तुम आ गए हो तो अब आईना भी देखेंगे अभी अभी तो निगाहों में रौशनी हुई है, हमारा इल्म तो मरहून ए लौह ए दिल है मियाँ किताब ए अक़्ल तो बस ताक़ पर धरी हुई है, बनाओ साए हरारत बदन में जज़्ब करो कि धूप सह्न में कब से यूँही पड़ी हुई है, नहीं नहीं मैं बहुत ख़ुश रहा हूँ तेरे बग़ैर यक़ीन कर कि ये हालत अभी अभी हुई है, वो गुफ़्तुगू जो मेरी सिर्फ़ अपने आप से थी तेरी निगाह को पहुँची तो शाइरी हुई है..!! - [कितना सुकूत है रसन ओ दार की तरफ़](https://hindigazals.com/kitna-sukut-hai-rasan-o-daar-ki-taraf/): कितना सुकूत है रसन ओ दार की तरफ़ आता है कौन जुरअत ए इज़हार की तरफ़, दश्त ए वफ़ा में आबला पा कोई अब नहीं सब जा रहे हैं साया ए दीवार की तरफ़, क़स्र ए शही से कहते हैं निकलेगा मेहर ए नौ अहल ए ख़िरद हैं इस लिए सरकार की तरफ़, वित्नाम ओ कोरिया से अदू को निकाल लें आएँगे लौट कर लब ओ रुख़्सार की तरफ़, बाक़ी जहाँ में रह गया ग़ालिब का नाम ही हर चंद एक हुजूम था अग़्यार की तरफ़..!! - [मावरा ए जहाँ से आए हैं](https://hindigazals.com/maavra-e-jahan-se-aaye-hain/): मावरा ए जहाँ से आए हैं आज हम ख़ुमसिताँ से आए हैं, इस क़दर बे-रुख़ी से बात न कर देख तो हम कहाँ से आए हैं हम से पूछो चमन पे क्या गुज़री हम गुज़र कर ख़िज़ाँ से आए हैं, रास्ते खो गए ज़ियाओं में ये सितारे कहाँ से आए हैं ? - [ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने](https://hindigazals.com/gazalen-to-kahi-hain-kuch-hum-ne-un-se/): ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या ? कल मिस्ल ए सितारा उभरेंगे हैं आज अगर पामाल तो क्या ? - [एक शख़्स बा ज़मीर मेरा यार मुसहफ़ी](https://hindigazals.com/ek-shaks-baa-zamir-mera-yaar-mushafee/): एक शख़्स बा ज़मीर मेरा यार मुसहफ़ी मेरी तरह वफ़ा का परस्तार मुसहफ़ी, रहता था कज कुलाह अमीरों के दरमियाँ यकसर लिए हुए मेरा किरदार मुसहफ़ी, देते हैं दाद ग़ैर को कब अहल ए लखनऊ कब दाद का था उन से तलबगार मुसहफ़ी ? - [घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी](https://hindigazals.com/ghar-ke-zindaan-se-use-fursat-mile-to-aaye-bhi/): घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी जाँ फ़ज़ा बातों से आ के मेरा दिल बहलाए भी, लग के ज़िंदाँ की सलाख़ों से मुझे वो देख ले कोई ये पैग़ाम मेरा उस तलक पहुँचाए भी, एक चेहरे को तरसती हैं निगाहें सुब्ह ओ शाम ज़ौ फ़िशाँ ख़ुर्शीद भी है चाँदनी के साए भी, सिसकियाँ लेती हवाएँ फिर रही हैं देर से आँसुओं की रुत मेरे अब गुलसिताँ से जाए भी, रोज़ हँसता है सलीबों से उधर माह ए मुनीर उस के पीछे कौन है वो छब मुझे दिखलाए भी..!! - [हर गाम पर थे शम्स ओ क़मर उस दयार में](https://hindigazals.com/har-gaam-par-the-shams-o-qamar-us-dayaar-me/): हर गाम पर थे शम्स ओ क़मर उस दयार में कितने हसीं थे शाम ओ सहर उस दयार में, वो बाग़ वो बहार वो दरिया वो सब्ज़ा ज़ार नश्शों से खेलती थी नज़र उस दयार में, आसान था सफ़र कि हर एक रहगुज़ार पर मिलते थे सायादार शजर उस दयार में, हर चंद थी वहाँ भी ख़िज़ाँ की उदास धूप दिल पर नहीं था ग़म का असर उस दयार में, महसूस हो रहा था सितारे हैं गर्द ए राह हम थे हज़ार ख़ाक बसर उस दयार में, जालिब यहाँ तो बात गरेबाँ तक आ गई रखते थे सिर्फ़ चाक जिगर उस दयार में..!! - [कैसे कहें कि याद ए यार रात जा चुकी बहुत](https://hindigazals.com/kaise-kahe-ki-yaad-e-yaar-raat-jaa-chuki-bahut/): कैसे कहें कि याद ए यार रात जा चुकी बहुत रात भी अपने साथ साथ आँसू बहा चुकी बहुत, चाँद भी है थका थका तारे भी हैं बुझे बुझे तेरे मिलन की आस फिर दीप जला चुकी बहुत, आने लगी है ये सदा दूर नहीं है शहर ए गुल दुनिया हमारी राह में काँटे बिछा चुकी बहुत, खुलने को है क़फ़स का दर पाने को है सुकूँ नज़र ऐ दिल ए ज़ार शाम ए ग़म हम को रुला चुकी बहुत, अपनी क़ियादतों में अब ढूंढेंगे लोग मंज़िलें राहज़नों की रहबरी राह दिखा चुकी बहुत..!! - [दयार ए दाग़ ओ बेख़ुद शहर ए देहली छोड़ कर तुझ को](https://hindigazals.com/dayaar-e-daag-o-bekhud-shahar-e-delhi-chhod-kar-tujh-ko/): दयार ए दाग़ ओ बेख़ुद शहर ए देहली छोड़ कर तुझ को न था मा’लूम यूँ रोएगा दिल शाम ओ सहर तुझ को, कहाँ मिलते हैं दुनिया को कहाँ मिलते हैं दुनिया में हुए थे जो अता अहल ए सुख़न अहल ए नज़र तुझ को, तुझे मरकज़ कहा जाता था दुनिया की निगाहों का मोहब्बत की नज़र से देखते थे सब नगर तुझ को, ब क़ौल ए मीर औराक़ ए मुसव्वर थे तेरे कूचे मगर हाए ज़माने की लगी कैसी नज़र तुझ को ? - [ग़ालिब ओ यगाना से लोग भी थे जब तन्हा](https://hindigazals.com/gaalib-o-yagaan-se-log-bhi-the-jab-tanha/): ग़ालिब ओ यगाना से लोग भी थे जब तन्हा हम से तय न होगी क्या मंज़िल ए अदब तन्हा, फ़िक्र ए अंजुमन किस को कैसी अंजुमन प्यारे अपना अपना ग़म सब का सोचिए तो सब तन्हा, सुन रखो ज़माने की कल ज़बान पर होगी हम जो बात करते हैं आज ज़ेर ए लब तन्हा, अपनी रहनुमाई में की है ज़िंदगी हम ने साथ कौन था पहले हो गए जो अब तन्हा, मेहर ओ माह की सूरत मुस्कुरा के गुज़रे हैं ख़ाक दान ए तीरा से हम भी रोज़ ओ शब तन्हा, कितने लोग आ बैठे पास मेहरबाँ हो कर हम ने ख़ुद को पाया है थोड़ी देर जब तन्हा, याद भी है साथ उन की और ग़म ए ज़माना भी ज़िंदगी में ऐ जालिब हम हुए हैं कब तन्हा..?? - [सर ए मिंबर वो ख़्वाबों के महल तामीर करते हैं](https://hindigazals.com/sar-e-mimber-wo-khwabon-ke-mahal-taamir-karte-hain/): सर ए मिंबर वो ख़्वाबों के महल तामीर करते हैं इलाज ए ग़म नहीं करते फ़क़त तक़रीर करते हैं, बहर आलम ख़ुदा का शुक्र कीजे उन का कहना है ख़ता करते हैं हम जो शिकवा ए तक़दीर करते हैं, हमारी शायरी में दिल धड़कता है ज़माने का वो नालाँ हैं हमारी लोग क्यों तौक़ीर करते हैं ? - [जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी](https://hindigazals.com/jahan-hai-mahbus-ab-bhi-hum-wo-haram-saraayen-nahi-rahengi/): जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी लरज़ते होंटों पे अब हमारे फ़क़त दुआएँ नहीं रहेंगी, ग़सब शुदा हक़ पे चुप न रहना हमारा मंशूर हो गया है उठेगा अब शोर हर सितम पर दबी सदाएँ नहीं रहेंगी, हमारे अज़्म ए जवाँ के आगे हमारे सैल ए रवाँ के आगे पुराने ज़ालिम नहीं टिकेंगे नई बलाएँ नहीं रहेंगी, ये क़त्ल गाहें ये अद्ल गाहें इन्हें भला किस तरह सराहें ग़ुलाम आदिल नहीं रहेंगे ग़लत सज़ाएँ नहीं रहेंगी, बने हैं जो ख़ादिमान ए मिल्लत वो करना सीखें हमारी इज़्ज़त वगर्ना उन के तनों पे भी ये सजी क़बाएँ नहीं रहेंगी..!! - [गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है](https://hindigazals.com/gulshan-ki-faza-dhuaan-dhuaan-hai/): गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है कहते हैं बहार का समाँ है, बिखरी हुई पत्तियाँ हैं गुल की टूटी हुई शाख़ ए आशियाँ है, जिस दिल से उभर रहे थे नग़्मे पहलू में वो आज नौहा ख़्वाँ है, हम ही नहीं पाएमाल तन्हा ऐ दोस्त तबाह एक जहाँ है, जालिब वो कहाँ है इश्क़ तेरा प्यारे वो ग़ज़ल तेरी कहाँ है..?? - [ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने](https://hindigazals.com/ye-ujde-baag-veerane-puraane/): ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने सुनाते हैं कुछ अफ़्साने पुराने, एक आह ए सर्द बन कर रह गए हैं वो बीते दिन वो याराने पुराने, जुनूँ का एक ही आलम हो क्यूँ कर नई है शम्अ परवाने पुराने, नई मंज़िल की दुश्वारी मुसल्लम मगर हम भी हैं दीवाने पुराने, मिलेगा प्यार ग़ैरों ही में जालिब कि अपने तो हैं बेगाने पुराने..!! - [उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए](https://hindigazals.com/us-gali-ke-logo-ko-munh-laga-ke-pachhtaye/): उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए एक दर्द की ख़ातिर कितने दर्द अपनाए, थक के सो गया सूरज शाम के धुँदलकों में आज भी कई ग़ुंचे फूल बन के मुरझाए, हम हँसे तो आँखों में तैरने लगी शबनम तुम हँसे तो गुलशन ने तुम पे फूल बरसाए, उस गली में क्या खोया उस गली में क्या पाया तिश्ना काम पहुँचे थे तिश्ना काम लौट आए, फिर रही हैं आँखों में तेरे शहर की गलियाँ डूबता हुआ सूरज फैलते हुए साए, जालिब एक आवारा उलझनों का गहवारा कौन उस को समझाए कौन उस को सुलझाए..?? - [लोक गीतों का नगर याद आया](https://hindigazals.com/lok-geeto-ka-nagar-yaad-aaya/): लोक गीतों का नगर याद आया आज परदेस में घर याद आया, जब चले आए चमन ज़ार से हम इल्तिफ़ात ए गुल ए तर याद आया, तेरी बेगाना निगाही सर ए शाम ये सितम ता ब सहर याद आया, हम ज़माने का सितम भूल गए जब तेरा लुत्फ़ ए नज़र याद आया, तो भी मसरूर था इस शब सर ए बज़्म अपने शेरों का असर याद आया, फिर हुआ दर्द ए तमन्ना बेदार फिर दिल ए ख़ाक बसर याद आया, हम जिसे भूल चुके थे जालिब फिर वही राहगुज़र याद आया..!! - [नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं](https://hindigazals.com/nazar-nazar-me-liye-tera-pyar-firte-hain/): नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं मिसाल ए मौज ए नसीम ए बहार फिरते हैं, तेरे दयार से ज़र्रों ने रौशनी पाई तेरे दयार में हम सोगवार फिरते हैं, ये हादिसा भी अजब है कि तेरे दीवाने लगाए दिल से ग़म ए रोज़गार फिरते हैं, लिए हुए हैं दो आलम का दर्द सीने में तेरी गली में जो दीवाना वार फिरते हैं, बहार आ के चली भी गई मगर जालिब अभी निगाह में वो लाला ज़ार फिरते हैं..!! - [शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ](https://hindigazals.com/shahar-veeraan-udaas-hain-galiyan/): शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ रहगुज़ारों से उठ रहा है धुआँ, आतिश ए ग़म में जल रहे हैं दयार गर्द आलूद है रुख़ ए दौराँ, बस्तियों पर ग़मों की यूरिश है क़र्या क़र्या है वक़्फ़ ए आह ओ फ़ुग़ाँ, सुब्ह बे नूर शाम बे माया लुट गई दौलत ए निगाह कहाँ ? - [तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग](https://hindigazals.com/tu-rang-hai-gubar-hai-teri-gali-ke-log/): तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग तो फूल है शरार हैं तेरी गली के लोग, तो रौनक़ ए हयात है तो हुस्न ए काएनात उजड़ा हुआ दयार हैं तेरी गली के लोग, तू पैकर ए वफ़ा है मुजस्सम ख़ुलूस है बदनाम ए रोज़गार हैं तेरी गली के लोग, रौशन तेरे जमाल से हैं मेहर ओ माह भी लेकिन नज़र पे बार हैं तेरी गली के लोग, देखो जो ग़ौर से तो ज़मीं से भी पस्त हैं यूँ आसमाँ शिकार हैं तेरी गली के लोग, फिर जा रहा हूँ तेरे तबस्सुम को लूट कर हर चंद होशियार हैं तेरी गली के लोग, खो जाएँगे सहर के उजालों में आख़िरश शम्अ’ सर ए मज़ार हैं तेरी गली के लोग..!! - [हम ने दिल से तुझे सदा माना](https://hindigazals.com/hum-ne-dil-se-tujhe-sada-maana/): हम ने दिल से तुझे सदा माना तू बड़ा था तुझे बड़ा माना, मीर ओ ग़ालिब के बाद अनीस के बाद तुझ को माना बड़ा बजा माना, तू कि दीवाना ए सदाक़त था तू ने बंदे को कब ख़ुदा माना, तुझ को परवाह न थी ज़माने की तू ने दिल ही का हर कहा माना, तुझ को ख़ुद पे था एतिमाद इतना ख़ुद ही को तो न रहनुमा माना, की न शब की कभी पज़ीराई सुब्ह को लाएक़ ए सना माना, हँस दिया सत्ह ए ज़ेहन ए आलम पर जब किसी बात का बुरा माना, यूँ तो शायर थे और भी ऐ जोश हम ने तुझ सा न दूसरा माना..!! - [तेरे माथे पे जब तक बल रहा है](https://hindigazals.com/tere-maathe-pe-jab-tak-bal-raha-hai/): तेरे माथे पे जब तक बल रहा है उजाला आँख से ओझल रहा है, समाते क्या नज़र में चाँद तारे तसव्वुर में तेरा आँचल रहा है, तेरी शान ए तग़ाफ़ुल को ख़बर क्या कोई तेरे लिए बे कल रहा है, शिकायत है ग़म ए दौराँ को मुझ से कि दिल में क्यूँ तेरा ग़म पल रहा है, तअज्जुब है सितम की आँधियों में चराग़ ए दिल अभी तक जल रहा है, लहू रोएँगी मग़रिब की फ़ज़ाएँ बड़ी तेज़ी से सूरज ढल रहा है, ज़माना थक गया जालिब ही तन्हा वफ़ा के रास्ते पर चल रहा है..!! - [क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में](https://hindigazals.com/kya-kya-log-guzar-jaate-hain-rang-birangi-kaaro-me/): क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में दिल को थाम के रह जाते हैं दिल वाले बाज़ारों में, ये बेदर्द ज़माना हम से तेरा दर्द न छीन सका हम ने दिल की बात कही है तीरों में तलवारों में, होंटों पर आहें क्यूँ होतीं आँखें निस दिन क्यूँ रोतीं कोई अगर अपना भी होता ऊँचे ओहदेदारों में, सद्र ए महफ़िल दाद जिसे दे दाद उसी को मिलती है हाए कहाँ हम आन फँसे हैं ज़ालिम दुनियादारों में, रहने को घर भी मिल जाता चाक ए जिगर भी सिल जाता जालिब तुम भी शेर सुनाते जा के अगर दरबारों में..!! - [हमें अब खो के कहता है मुझे तुम याद आते हो](https://hindigazals.com/hume-ab-kho-ke-kahta-hai-mujhe-tum-yaad-aate-ho/): हमें अब खो के कहता है मुझे तुम याद आते हो किसी का हो के कहता है मुझे तुम याद आते हो, समन्दर था तो ज़ोर ओ शोर से लहरें बहाता था अब क़तरा हो के कहता है मुझे तुम याद आते हो, बयाँ करते जो हाल ए दिल तो यूँ मुस्कुरा दिए अब वही रो के कहता है मुझे तुम याद आते हो, न पूछो उसकी बदनसीबी का आलम मेरे हमदम वो मुझ को खो के कहता है मुझे तुम याद आते हो..!! - [महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं](https://hindigazals.com/maahtab-sifat-log-yahan-khaaq-basar-hain/): महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं हम महव ए तमाशा ए सर ए राह गुज़र हैं, हसरत सी बरसती है दर ओ बाम पे हर सू रोती हुई गलियाँ हैं सिसकते हुए घर हैं, आए थे यहाँ जिन के तसव्वुर के सहारे वो चाँद वो सूरज वो शब ओ रोज़ किधर हैं ? - [जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है](https://hindigazals.com/jab-koi-kali-sehan-e-gulistan-me-khili-hai/): जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है शबनम मेरी आँखों में वहीं तैर गई है, जिस की सर ए अफ़्लाक बड़ी धूम मची है आशुफ़्ता सरी है मेरी आशुफ़्ता सरी है, अपनी तो उजालों को तरसती हैं निगाहें सूरज कहाँ निकला है कहाँ सुब्ह हुई है, बिछड़ी हुई राहों से जो गुज़रे हैं कभी हम हर गाम पे खोई हुई एक याद मिली है, एक उम्र सुनाएँ तो हिकायत न हो पूरी दो रोज़ में हम पर जो यहाँ बीत गई है, हँसने पे न मजबूर करो लोग हँसेंगे हालात की तफ़्सीर तो चेहरे पे लिखी है, मिल जाएँ कहीं वो भी तो उन को भी सुनाएँ जालिब ये ग़ज़ल जिन के लिए हम ने कही है..!! - [दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले](https://hindigazals.com/darakht-sookh-gaye-rook-gaye-nadi-naale/): दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले ये किस नगर को रवाना हुए हैं घर वाले ? - [दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो](https://hindigazals.com/dil-walon-kyun-dil-see-daulat-yun-be-kar-lutate-ho/): दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो क्यूँ इस अँधियारी बस्ती में प्यार की जोत जगाते हो ? - [यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो](https://hindigazals.com/yun-wo-zulmat-se-raha-dast-o-gareban-yaaro/): यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो उस से लर्ज़ां थे बहुत शब के निगहबाँ यारो, उस ने हर गाम दिया हौसला ए ताज़ा हमें वो न एक पल भी रहा हम से गुरेज़ाँ यारो, उस ने मानी न कभी तीरगी ए शब से शिकस्त दिल अँधेरों में रहा उस का फ़रोज़ाँ यारो, उस को हर हाल में जीने की अदा आती थी वो न हालात से होता था परेशाँ यारो, उस ने बातिल से न ता ज़ीस्त किया समझौता दहर में उस सा कहाँ साहब ए ईमाँ यारो, उस को थी कश्मकश ए दैर ओ हरम से नफ़रत उस सा हिन्दू न कोई उस सा मुसलमाँ यारो, उस ने सुल्तानी ए जम्हूर के नग़्मे लिखे रूह शाहों की रही उस से परेशाँ यारो, अपने अशआ’र की शम्ओं से उजाला कर के कर गया शब का सफ़र कितना वो आसाँ यारो, उस के गीतों से ज़माने को सँवारें यारो रूह ए साहिर को अगर करना है शादाँ यारो..!! - [हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले](https://hindigazals.com/hum-aawara-gaaon-gaaon-basti-basti-firne-wale/): हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले हम से प्रीत बढ़ा कर कोई मुफ़्त में क्यूँ ग़म को अपना ले ? - [कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़](https://hindigazals.com/kam-puraana-bahut-naya-tha-firaaq/): कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़ एक अजब रम्ज़ आशना था फ़िराक़, दूर वो कब हुआ निगाहों से धड़कनों में बसा हुआ है फ़िराक़, शाम ए ग़म के सुलगते सहरा में एक उमंडती हुई घटा था फ़िराक़, अम्न था प्यार था मोहब्बत था रंग था नूर था नवा था फ़िराक़, फ़ासले नफ़रतों के मिट जाएँ प्यार ही प्यार सोचता था फ़िराक़, हम से रंज ओ अलम के मारों को किस मोहब्बत से देखता था फ़िराक़, इश्क़ इंसानियत से था उस को हर तअस्सुब से मावरा था फ़िराक़..!! - [बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी](https://hindigazals.com/bahut-raushan-hai-sham-e-gam-humari/): बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी किसी की याद है हमदम हमारी, ग़लत है ला तअल्लुक़ हैं चमन से तुम्हारे फूल और शबनम हमारी, ये पलकों पर नए आँसू नहीं हैं अज़ल से आँख है पुरनम हमारी, हर एक लब पर तबस्सुम देखने की तमन्ना कब हुई है कम हमारी ? - [मुझे शौक़ था तेरे साथ का](https://hindigazals.com/mujhe-shauq-tha-tere-sath-ka/): मुझे शौक़ था तेरे साथ का जो न मिल सका चलो खैर है मेरी ज़िन्दगी भी गुज़र गई तू भी जा चुका, चलो खैर है, ये जो है बेबसी चारो सू और उलझे उलझे से तौर हैं तुझे सब ख़बर है पर तू नहीं तू न समझ सका, चलो खैर है, कभी तुम को ज़िद्द थी कि मैं मिलूँ कभी मैं ब ज़िद्द था कि तू मिले यूँ ही धीरे धीरे खत्म हुआ ये भी सिलसिला, चलो खैर है..!! - [मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने](https://hindigazals.com/meer-o-galib-bane-yagaana-bane/): मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने आदमी ऐ ख़ुदा ख़ुदा न बने, मौत की दस्तरस में कब से हैं ज़िंदगी का कोई बहाना बने, अपना शायद यही था जुर्म ऐ दोस्त बा वफ़ा बन के बे वफ़ा न बने, हम पे एक एतिराज़ ये भी है बे नवा हो के बे नवा न बने, ये भी अपना क़ुसूर क्या कम है किसी क़ातिल के हमनवा न बने, क्या गिला संगदिल ज़माने का आश्ना ही जब आश्ना न बने, छोड़ कर उस गली को ऐ जालिब एक हक़ीक़त से हम फ़साना बने..!! - [शेर होता है अब महीनों में](https://hindigazals.com/sher-hota-hai-ab-mahino-me/): शेर होता है अब महीनों में ज़िंदगी ढल गई मशीनों में, प्यार की रौशनी नहीं मिलती उन मकानों में उन मकीनों में, देख कर दोस्ती का हाथ बढ़ाओ साँप होते हैं आस्तीनों में, क़हर की आँख से न देख इन को दिल धड़कते हैं आबगीनों में, आसमानों की ख़ैर हो यारब एक नया अज़्म है ज़मीनों में, वो मोहब्बत नहीं रही जालिब हम सफ़ीरों में हम नशीनों में..!! - [ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए](https://hindigazals.com/ye-soch-kar-na-maaiel-e-fariyad-hum-hue/): ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए आबाद कब हुए थे कि बर्बाद हम हुए, होता है शाद काम यहाँ कौन बा ज़मीर नाशाद हम हुए तो बहुत शाद हम हुए, परवेज़ के जलाल से टकराए हम भी हैं ये और बात है कि न फ़रहाद हम हुए, कुछ ऐसे भा गए हमें दुनिया के दर्द ओ ग़म कू ए बुताँ में भूली हुई याद हम हुए, जालिब तमाम उम्र हमें ये गुमाँ रहा उस ज़ुल्फ़ के ख़याल से आज़ाद हम हुए..!! - [हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं](https://hindigazals.com/hum-ne-suna-tha-sahan-e-chaman-me-kaif-ke-badal-chhaye-hain/): हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं हम भी गए थे जी बहलाने अश्क बहा कर आए हैं, फूल खिले तो दिल मुरझाए शम्अ जले तो जान जले एक तुम्हारा ग़म अपना कर कितने ग़म अपनाए हैं, एक सुलगती याद चमकता दर्द फ़रोज़ाँ तन्हाई पूछ न उस के शहर से हम क्या क्या सौग़ातें लाए हैं, सोए हुए जो दर्द थे दिल में आँसू बन कर बह निकले रात सितारों की छाँव में याद वो क्या क्या आए हैं, आए भी सूरज डूब गया बे नूर उफ़ुक़ के सागर में आज भी फूल चमन में तुझ को बिन देखे मुरझाए हैं, एक क़यामत का सन्नाटा एक बला की तारीकी उन गलियों से दूर न हँसता चाँद न रौशन साए हैं, प्यार की बोली बोल न जालिब इस बस्ती के लोगों से हम ने सुख की कलियाँ खो कर दुख के काँटे पाए हैं..!! - [ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है](https://hindigazals.com/ye-jo-shab-ke-aewano-me-ek-hulchal-ek-hashr-bapa-hai/): ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है ये जो अंधेरा सिमट रहा है ये जो उजाला फैल रहा है, ये जो हर दुख सहने वाला दुख का मुदावा जान गया है मज़लूमों मजबूरों का ग़म ये जो मेरे शेरों में ढला है, ये जो महक गुलशन गुलशन है ये जो चमक आलम आलम है मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है..!! - [तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है](https://hindigazals.com/teri-ankhon-ka-azab-turfa-samaan-dekha-hai/): तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है एक आलम तेरी जानिब निगराँ देखा है, कितने अनवार सिमट आए हैं इन आँखों में एक तबस्सुम तेरे होंटों पे रवाँ देखा है, हम को आवारा ओ बेकार समझने वालो तुम ने कब इस बुत ए काफ़िर को जवाँ देखा है, सेहन ए गुलशन में कि अंजुम की तरबगाहों में तुम को देखा है कहीं जाने कहाँ देखा है, वही आवारा ओ दीवाना ओ आशुफ़्ता मिज़ाज हम ने जालिब को सर ए कू ए बुताँ देखा है..!! - [उस ने जब हँस के नमस्कार किया](https://hindigazals.com/us-ne-jab-hans-ke-namaskar-kiya/): उस ने जब हँस के नमस्कार किया मुझ को इंसान से अवतार किया, दश्त ए ग़ुर्बत में दिल ए वीराँ ने याद जमुना को कई बार किया, प्यार की बात न पूछो यारो हम ने किस किस से नहीं प्यार किया, कितनी ख़्वाबीदा तमन्नाओं को उस की आवाज़ ने बेदार किया, हम पुजारी हैं बुतों के जालिब हम ने का’बे में भी इक़रार किया..!! - [वो जो था वो कभी मिला ही नहीं](https://hindigazals.com/wo-jo-tha-wo-kabhi-mila-hi-nahin/): वो जो था वो कभी मिला ही नहीं सो गरेबाँ कभी सिला ही नहीं, उस से हर दम मोआ’मला है मगर दरमियाँ कोई सिलसिला ही नहीं, बे मिले ही बिछड़ गए हम तो सौ गिले हैं कोई गिला ही नहीं, चश्म ए मयगूँ से है मुग़ाँ ने कहा मस्त कर दे मगर पिला ही नहीं, तू जो है जान तू जो है जानाँ तू हमें आज तक मिला ही नहीं, मस्त हूँ मैं महक से उस गुल की जो किसी बाग़ में खिला ही नहीं, हाए जौन उस का वो पियाला ए नाफ़ जाम ऐसा कोई मिला ही नहीं, तू है एक उम्र से फ़ुग़ाँ पेशा अभी सीना तेरा छिला ही नहीं..!! - [दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया](https://hindigazals.com/dil-ne-wafa-ke-naam-par-kaar-e-wafa-nahi-kiya/): दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया ख़ुद को हलाक कर लिया ख़ुद को फ़िदा नहीं किया, ख़ीरा सरान ए शौक़ का कोई नहीं है जुम्बा दार शहर में इस गिरोह ने किस को ख़फ़ा नहीं किया, जो भी हो तुम पे मो’तरिज़ उस को यही जवाब दो आप बहुत शरीफ़ हैं आप ने क्या नहीं किया, निस्बत ए ‘इल्म है बहुत हाकिम ए वक़्त को अज़ीज़ उस ने तो कार ए जहल भी बे उलमा नहीं किया, जिस को भी शैख़ ओ शाह ने हुक्म ए ख़ुदा दिया क़रार हम ने नहीं क्या वो काम हाँ बा ख़ुदा नहीं किया..!! - [ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं](https://hindigazals.com/thik-hai-khud-ko-hum-badalte-hain/): ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद देखने वाले हाथ मलते हैं, है वो जान अब हर एक महफ़िल की हम भी अब घर से कम निकलते हैं, क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं, है उसे दूर का सफ़र दर पेश हम सँभाले नहीं सँभलते हैं, तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं, मैं उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जिस तरह बहलते हैं, है अजब फ़ैसले का सहरा भी चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं..!! - [सर ही अब फोड़िए नदामत में](https://hindigazals.com/sar-hi-ab-fodiye-nadamat-me/): सर ही अब फोड़िए नदामत में नींद आने लगी है फ़ुर्क़त में, हैं दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर सोचता हूँ तेरी हिमायत में, रूह ने इश्क़ का फ़रेब दिया जिस्म को जिस्म की अदावत में, अब फ़क़त आदतों की वर्ज़िश है रूह शामिल नहीं शिकायत में, इश्क़ को दरमियाँ न लाओ कि मैं चीख़ता हूँ बदन की उसरत में, ये कुछ आसान तो नहीं है कि हम रूठते अब भी हैं मुरव्वत में, वो जो ता’मीर होने वाली थी लग गई आग उस इमारत में, ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में, हासिल ए कुन है ये जहान ए ख़राब यही मुमकिन था इतनी उजलत में, फिर बनाया ख़ुदा ने आदम को अपनी सूरत पे ऐसी सूरत में, और फिर आदमी ने ग़ौर किया छिपकिली की लतीफ़ सनअ’त में, ऐ ख़ुदा जो कहीं नहीं मौजूद क्या लिखा है हमारी क़िस्मत में..?? - [बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच](https://hindigazals.com/bade-bane-the-jalib-sahab-pite-sadak-ke-beech/): बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच गोली खाई लाठी खाई गिरे सड़क के बीच, कभी गिरेबाँ चाक हुआ और कभी हुआ दिल ख़ून हमें तो यूँही मिले सुख़न के सिले सड़क के बीच, जिस्म पे जो ज़ख़्मों के निशाँ हैं अपने तमग़े हैं मिली है ऐसी दाद वफ़ा की किसे सड़क के बीच..!! - [जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो](https://hindigazals.com/jaagne-walo-ta-ba-sahar-khamosh-raho/): जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो कल क्या होगा किस को ख़बर ख़ामोश रहो, किस ने सहर के पाँव में ज़ंजीरें डालीं हो जाएगी रात बसर ख़ामोश रहो, शायद चुप रहने में इज़्ज़त रह जाए चुप ही भली ऐ अहल ए नज़र ख़ामोश रहो, क़दम क़दम पर पहरे हैं इन राहों में दार ओ रसन का है ये नगर ख़ामोश रहो, यूँ भी कहाँ बेताबी ए दिल कम होती है यूँ भी कहाँ आराम मगर ख़ामोश रहो, शेर की बातें ख़त्म हुईं इस आलम में कैसा जोश और किस का जिगर ख़ामोश रहो..!! - [कोई हालत नहीं ये हालत है](https://hindigazals.com/koi-halat-nahi-ye-halat-hain/): कोई हालत नहीं ये हालत है ये तो आशोब नाक सूरत है, अंजुमन में ये मेरी ख़ामोशी बुर्दबारी नहीं है वहशत है, तुझ से ये गाह गाह का शिकवा जब तलक है बसा ग़नीमत है, ख़्वाहिशें दिल का साथ छोड़ गईं ये अज़िय्यत बड़ी अज़िय्यत है, लोग मसरूफ़ जानते हैं मुझे याँ मेरा ग़म ही मेरी फ़ुर्सत है, तंज़ पैराया ए तबस्सुम में इस तकल्लुफ़ की क्या ज़रूरत है ? - [चलो बाद ए बहारी जा रही है](https://hindigazals.com/chalo-baad-e-bahaari-jaa-rahi-hai/): चलो बाद ए बहारी जा रही है पिया जी की सवारी जा रही है, शुमाल ए जावेदान ए सब्ज़ ए जाँ से तमन्ना की अमारी जा रही है, फ़ुग़ाँ ऐ दुश्मन ए दार ए दिल ओ जाँ मेरी हालत सुधारी जा रही है, है पहलू में टके की एक हसीना तेरी फ़ुर्क़त गुज़ारी जा रही है, जो इन रोज़ों मेरा ग़म है वो ये है कि ग़म से बुर्दबारी जा रही है, है सीने में अजब एक हश्र बरपा कि दिल से बेक़रारी जा रही है, मैं पैहम हार कर ये सोचता हूँ वो क्या शय है जो हारी जा रही है, दिल उस के रू ब रू है और गुमसुम कोई अर्ज़ी गुज़ारी जा रही है, वो सय्यद बच्चा हो और शैख़ के साथ मियाँ इज़्ज़त हमारी जा रही है, है बरपा हर गली में शोर ए नग़्मा मेरी फ़रियाद मारी जा रही है, वो याद अब हो रही है दिल से रुख़्सत मियाँ प्यारों की प्यारी जा रही है, दरेग़ा तेरी नज़दीकी मियाँ जान तेरी दूरी पे वारी जा रही है, बहुत बदहाल हैं बस्ती तेरे लोग तो फिर तू क्यूँ सँवारी जा रही है ? - [ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया](https://hindigazals.com/zabt-kar-ke-hansi-ko-bhul-gaya/): ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया मैं तो उस ज़ख़्म ही को भूल गया, ज़ात दर ज़ात हमसफ़र रह कर अजनबी अजनबी को भूल गया, सुब्ह तक वज्ह ए जाँ कनी थी जो बात मैं उसे शाम ही को भूल गया, अहद ए वाबस्तगी गुज़ार के मैं वज्ह ए वाबस्तगी को भूल गया, सब दलीलें तो मुझ को याद रहीं बहस क्या थी उसी को भूल गया, क्यूँ न हो नाज़ इस ज़ेहानत पर एक मैं हर किसी को भूल गया, सब से पुरअम्न वाक़िआ ये है आदमी आदमी को भूल गया, क़हक़हा मारते ही दीवाना हर ग़म ए ज़िंदगी को भूल गया, ख़्वाब हा ख़्वाब जिस को चाहा था रंग हा रंग उसी को भूल गया, क्या क़यामत हुई अगर एक शख़्स अपनी ख़ुश क़िस्मती को भूल गया, सोच कर उस की ख़ल्वत अंजुमनी वाँ मैं अपनी कमी को भूल गया, सब बुरे मुझ को याद रहते हैं जो भला था उसी को भूल गया, उन से वा’दा तो कर लिया लेकिन अपनी कम फ़ुर्सती को भूल गया, बस्तियो अब तो रास्ता दे दो अब तो मैं उस गली को भूल गया, उस ने गोया मुझी को याद रखा मैं भी गोया उसी को भूल गया, या’नी तुम वो हो वाक़ई ? - [बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं](https://hindigazals.com/bada-ehsan-farma-rahe-hain/): बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं, नहीं तर्क ए मोहब्बत पर वो राज़ी क़यामत है कि हम समझा रहे हैं, यक़ीं का रास्ता तय करने वाले बहुत तेज़ी से वापस आ रहे हैं, ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं, तअ’ज्जुब है कि इश्क़ ओ आशिक़ी से अभी कुछ लोग धोका खा रहे हैं, तुम्हें चाहेंगे जब छिन जाओगी तुम अभी हम तुम को अर्ज़ां पा रहे हैं, किसी सूरत उन्हें नफ़रत हो हम से हम अपने ऐब ख़ुद गिनवा रहे हैं, वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में मेरी आँखों में आँसू आ रहे हैं, दलीलों से उसे क़ाइल किया था दलीलें दे के अब पछता रहे हैं, तेरी बाँहों से हिजरत करने वाले नए माहौल में घबरा रहे हैं, ये जज़्ब ए इश्क़ है या जज़्बा ए रहम तेरे आँसू मुझे रुलवा रहे हैं, अजब कुछ रब्त है तुम से कि तुम को हम अपना जान कर ठुकरा रहे हैं, वफ़ा की यादगारें तक न होंगी मेरी जाँ बस कोई दिन जा रहे हैं..!! - [किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे](https://hindigazals.com/kis-se-izhar-e-muddaa-kije/): किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे ? हो न पाया ये फ़ैसला अब तक आप कीजे तो क्या किया कीजे ? - [आदमी वक़्त पर गया होगा](https://hindigazals.com/aadmi-waqt-par-gaya-hoga/): आदमी वक़्त पर गया होगा वक़्त पहले गुज़र गया होगा, वो हमारी तरफ़ न देख के भी कोई एहसान धर गया होगा, ख़ुद से मायूस हो के बैठा हूँ आज हर शख़्स मर गया होगा, शाम तेरे दयार में आख़िर कोई तो अपने घर गया होगा, मरहम ए हिज्र था अजब इक्सीर अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा..!! - [बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या](https://hindigazals.com/bahut-dil-ko-kushada-kar-liya-kya/): बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या ज़माने भर से वा’दा कर लिया क्या ? तो क्या सचमुच जुदाई मुझ से कर ली तो ख़ुद अपने को आधा कर लिया क्या ? - [हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं](https://hindigazals.com/haal-ye-hai-ki-khwahish-e-pursish-e-haal-bhi-nahin/): हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं उस का ख़याल भी नहीं अपना ख़याल भी नहीं, ऐ शजर ए हयात ए शौक़ ऐसी ख़िज़ाँ रसीदगी पोशिश ए बर्ग ओ गुल तो क्या जिस्म पे छाल भी नहीं, मुझ में वो शख़्स हो चुका जिस का कोई हिसाब था सूद है क्या ज़ियाँ है क्या इस का सवाल भी नहीं, मस्त हैं अपने हाल में दिल ज़दगान ओ दिलबराँ सुल्ह ओ सलाम तो कुजा बहस ओ जिदाल भी नहीं, तू मेरा हौसला तो देख दाद तो दे कि अब मुझे शौक़ ए कमाल भी नहीं ख़ौफ़ ए ज़वाल भी नहीं, ख़ेमागाह ए निगाह को लूट लिया गया है क्या आज उफ़ुक़ के दोष पर गर्द की शाल भी नहीं, उफ़ ये फ़ज़ा ए एहतियात ता कहीं उड़ न जाएँ हम बाद ए जुनूब भी नहीं बाद ए शिमाल भी नहीं, वजह ए म’आश ए बे दिलाँ यास है अब मगर कहाँ उस के वरूद का गुमाँ फ़र्ज़ ए मुहाल भी नहीं, ग़ारत ए रोज़ ओ-शब तो देख वक़्त का ये ग़ज़ब तो देख कल तो निढाल भी था मैं आज निढाल भी नहीं, मेरे ज़मान ओ ज़ात का है ये मुआमला कि अब सुब्ह ए फ़िराक़ भी नहीं शाम ए विसाल भी नहीं, पहले हमारे ज़ेहन में हुस्न की एक मिसाल थी अब तो हमारे ज़ेहन में कोई मिसाल भी नहीं, मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं..!! - [सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई](https://hindigazals.com/sina-dahak-raha-ho-to-kya-chup-rahe-koi/) - [उस के पहलू से लग के चलते हैं](https://hindigazals.com/us-ke-pahlu-se-lag-ke-chalte-hai/) - [ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो](https://hindigazals.com/ye-gam-kya-dil-ki-adat-hai-nahi-to/): ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो, किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो, है वो एक ख़्वाब ए बेताबीर उस को भुला देने की नीयत है नहीं तो, किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो, तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो, हम आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो, हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो, अज़िय्यत नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो, तू रहता है ख़याल ओ ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो, सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ से ख़ूबसूरत है नहीं तो..!! - [अपने सब यार काम कर रहे हैं](https://hindigazals.com/apne-sab-yaar-kaam-kar-rahe-hain/): अपने सब यार काम कर रहे हैं और हम हैं कि नाम कर रहे हैं, तेग़बाज़ी का शौक़ अपनी जगह आप तो क़त्ल ए आम कर रहे हैं, दाद ओ तहसीन का ये शोर है क्यूँ ? - [शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें](https://hindigazals.com/sharmindagi-hai-hum-ko-bahut-hum-mile-tumhen/): शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें तुम सर ब सर ख़ुशी थे मगर ग़म मिले तुम्हें, मैं अपने आप में न मिला इस का ग़म नहीं ग़म तो ये है कि तुम भी बहुत कम मिले तुम्हें, है जो हमारा एक हिसाब उस हिसाब से आती है हम को शर्म कि पैहम मिले तुम्हें, तुम को जहान ए शौक़ ओ तमन्ना में क्या मिला हम भी मिले तो दरहम ओ बरहम मिले तुम्हें, अब अपने तौर ही में नहीं तुम सो काश कि ख़ुद में ख़ुद अपना तौर कोई दम मिले तुम्हें, इस शहर ए हीला जू में जो महरम मिले मुझे फ़रियाद जान ए जाँ वही महरम मिले तुम्हें, देता हूँ तुम को ख़ुश्की ए मिज़्गाँ की मैं दुआ मतलब ये है कि दामन ए पुरनम मिले तुम्हें, मैं उन में आज तक कभी पाया नहीं गया जानाँ जो मेरे शौक़ के आलम मिले तुम्हें, तुम ने हमारे दिल में बहुत दिन सफ़र किया शर्मिंदा हैं कि उस में बहुत ख़म मिले तुम्हें, यूँ हो कि और ही कोई हव्वा मिले मुझे हो यूँ कि और ही कोई आदम मिले तुम्हें..!! - [अभी एक शोर सा उठा है कहीं](https://hindigazals.com/abhi-ek-shor-saa-utha-hai-kahin/): अभी एक शोर सा उठा है कहीं कोई ख़ामोश हो गया है कहीं, है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं, तुझ को क्या हो गया कि चीज़ों को कहीं रखता है ढूँढता है कहीं, जो यहाँ से कहीं न जाता था वो यहाँ से चला गया है कहीं, आज शमशान की सी बू है यहाँ क्या कोई जिस्म जल रहा है कहीं, हम किसी के नहीं जहाँ के सिवा ऐसी वो ख़ास बात क्या है कहीं, तू मुझे ढूँड मैं तुझे ढूँडूँ कोई हम में से रह गया है कहीं, कितनी वहशत है दरमियान ए हुजूम जिस को देखो गया हुआ है कहीं, मैं तो अब शहर में कहीं भी नहीं क्या मेरा नाम भी लिखा है कहीं, इसी कमरे से कोई हो के विदाअ इसी कमरे में छुप गया है कहीं, मिल के हर शख़्स से हुआ महसूस मुझ से ये शख़्स मिल चुका है कहीं..!! - [एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है](https://hindigazals.com/ek-hi-muzda-subah-laati-hai/): एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है धूप आँगन में फैल जाती है, रंग ए मौसम है और बाद ए सबा शहर कूचों में ख़ाक उड़ाती है, फ़र्श पर काग़ज़ उड़ते फिरते हैं मेज़ पर गर्द जमती जाती है, सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर अब किसे रात भर जगाती है, मैं भी इज़्न ए नवा गरी चाहूँ बे दिली भी तो लब हिलाती है, सो गए पेड़ जाग उठी ख़ुश्बू ज़िंदगी ख़्वाब क्यूँ दिखाती है, उस सरापा वफ़ा की फ़ुर्क़त में ख़्वाहिश ए ग़ैर क्यूँ सताती है, आप अपने से हमसुख़न रहना हमनशीं साँस फूल जाती है, क्या सितम है कि अब तेरी सूरत ग़ौर करने पे याद आती है, कौन इस घर की देख भाल करे रोज़ एक चीज़ टूट जाती है..!! - [क्या दौर था फ़ुर्सतों में बस यही काम होना](https://hindigazals.com/kya-daur-tha-fursaton-me-bas-yahi-kaam-hona/): क्या दौर था फ़ुर्सतों में बस यही काम होना आँखों में सूरत तेरी होंठों पर तेरा नाम होना, हसीं ख़्यालों की दुनिया में बसा कर तुझे चलते फिरते उठते बैठते तुझ से हम कलाम होना, तुम्हारी सहर अंगेज़ क़ुर्बत की हसीं क़ैद में वो शाम से सुबह वो सुबह से शाम होना, बारहा मुझ से दिल का हाल कहते हुए मुँह से निकले तेरे जुमलों का वो न तमाम होना, ये भी सच है कि मुहब्बत में खो जाता है आराम सुकूं भी देता है पर मुहब्बत में बे आराम होना..!! - [चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया](https://hindigazals.com/choor-tha-zakhmon-se-dil-zakhmi-jigar-bhi-ho-gaya/): चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया उस को रोते थे कि सूना ये नगर भी हो गया, लोग उसी सूरत परेशाँ हैं जिधर भी देखिए और वो कहते हैं कोह ए ग़म तो सर भी हो गया, बाम ओ दर पर है मुसल्लत आज भी शाम ए अलम यूँ तो इन गलियों से ख़ुर्शीद ए सहर भी हो गया, उस सितमगर की हक़ीक़त हम पे ज़ाहिर हो गई ख़त्म ख़ुश फ़हमी की मंज़िल का सफ़र भी हो गया..!! - [कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए](https://hindigazals.com/kaun-bataye-kaun-sujhaye-kaun-se-des-sidhar-gaye/): कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए उन का रस्ता तकते तकते नैन हमारे हार गए, काँटों के दुख सहने में तस्कीन भी थी आराम भी था हँसने वाले भोले भाले फूल चमन के मार गए, एक लगन की बात है जीवन एक लगन ही जीवन है पूछ न क्या खोया क्या पाया क्या जीते क्या हार गए ? - [न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में](https://hindigazals.com/na-dagmagaye-kabhi-hum-wafa-ke-raste-me/): न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में चराग़ हम ने जलाए हवा के रस्ते में, किसे लगाए गले और कहाँ कहाँ ठहरे हज़ार ग़ुंचा ओ गुल हैं सबा के रस्ते में, ख़ुदा का नाम कोई ले तो चौंक उठते हैं मिले हैं हम को वो रहबर ख़ुदा के रस्ते में, कहीं सलासिल ए तस्बीह और कहीं ज़ुन्नार बिछे हैं दाम बहुत मुद्दआ के रस्ते में, अभी वो मंज़िल ए फ़िक्र ओ नज़र नहीं आई है आदमी अभी जुर्म ओ सज़ा के रस्ते में, हैं आज भी वही दार ओ रसन वही ज़िंदाँ हर एक निगाह ए रुमूज़ आश्ना के रस्ते में, ये नफ़रतों की फ़सीलें जहालतों के हिसार न रह सकेंगे हमारी सदा के रस्ते में, मिटा सके न कोई सैल ए इंक़लाब जिन्हें वो नक़्श छोड़े हैं हम ने वफ़ा के रस्ते में, ज़माना एक सा जालिब सदा नहीं रहता चलेंगे हम भी कभी सर उठा के रस्ते में..!! - [ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम](https://hindigazals.com/zarre-hi-sahi-koh-se-takra-to-gaye-hum/): ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम दिल ले के सर ए अर्सा ए ग़म आ तो गए हम, अब नाम रहे या न रहे इश्क़ में अपना रूदाद ए वफ़ा दार पे दोहरा तो गए हम, कहते थे जो अब कोई नहीं जाँ से गुज़रता लो जाँ से गुज़र कर उन्हें झुटला तो गए हम, जाँ अपनी गँवा कर कभी घर अपना जला कर दिल उन का हर एक तौर से बहला तो गए हम, कुछ और ही आलम था पस ए चेहरा ए याराँ रहता जो यूँही राज़ उसे पा तो गए हम, अब सोच रहे हैं कि ये मुमकिन ही नहीं है फिर उन से न मिलने की क़सम खा तो गए हम, उठे कि न उठे ये रज़ा उन की है जालिब लोगों को सर ए दार नज़र आ तो गए हम..!! - [गाहे गाहे बस अब यही हो क्या](https://hindigazals.com/gaahe-gaahe-bas-ab-yahi-ho-kya/): गाहे गाहे बस अब यही हो क्या तुम से मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या ? मिल रही हो बड़े तपाक के साथ मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या ? - [बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ](https://hindigazals.com/baaten-to-kuch-aisi-hai-ki-khud-se-bhi-na-ki-jaayen/): बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ सोचा है ख़मोशी से हर एक ज़हर को पी जाएँ, अपना तो नहीं कोई वहाँ पूछने वाला उस बज़्म में जाना है जिन्हें अब तो वही जाएँ, अब तुझ से हमें कोई तअल्लुक़ नहीं रखना अच्छा हो कि दिल से तेरी यादें भी चली जाएँ, एक उम्र उठाए हैं सितम ग़ैर के हम ने अपनों की तो एक पल भी जफ़ाएँ न सही जाएँ, जालिब ग़म ए दौराँ हो कि याद ए रुख़ ए जानाँ तन्हा मुझे रहने दें मेरे दिल से सभी जाएँ..!! - [रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम](https://hindigazals.com/rang-parahan-ka-khushboo-zulf-lahrane-ka-naam/) - [वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता](https://hindigazals.com/wo-shakhs-ki-main-jis-se-mohabbat-nahi-karta/): वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा ही गया हूँ तो मुझे दार पे खींचो सच्चा हूँ मगर अपनी वकालत नहीं करता, क्यूँ बख़्श दिया मुझ से गुनहगार को मौला मुंसिफ़ तो किसी से भी रिआ’यत नहीं करता, घर वालों को ग़फ़लत पे सभी कोस रहे हैं चोरों को मगर कोई मलामत नहीं करता, किस क़ौम के दिल में नहीं जज़्बात ए बराहीम किस मुल्क पे नमरूद हुकूमत नहीं करता ? - [ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे](https://hindigazals.com/ye-to-nahi-ki-tum-se-mohabbat-nahi-mujhe/): ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे इतना ज़रूर है कि शिकायत नहीं मुझे, मैं हूँ कि इश्तियाक़ में सर ता क़दम नज़र वो हैं कि एक नज़र की इजाज़त नहीं मुझे, आज़ादी ए गुनाह की हसरत के साथ साथ आज़ादी ए ख़याल की जुरअत नहीं मुझे, दूभर है गरचे जौर‌‌‌‌ ए अज़ीज़ाँ से ज़िंदगी लेकिन ख़ुदा गवाह शिकायत नहीं मुझे, जिस का गुरेज़ शर्त हो तक़रीब ए दीद में इस होश इस नज़र की ज़रूरत नहीं मुझे, जो कुछ गुज़र रही है ग़नीमत है हमनशीं अब ज़िंदगी पे ग़ौर की फ़ुर्सत नहीं मुझे, मैं क्यूँ किसी के अहद ए वफ़ा का यक़ीं करूँ इतनी शदीद ग़म की ज़रूरत नहीं मुझे, सज्दे मेरे ख़याल ए जज़ा से हैं मावरा मक़्सूद बंदगी से तिजारत नहीं मुझे, मैं और दे सकूँ न तेरे ग़म को ज़िंदगी ऐसी तो ज़िंदगी से मोहब्बत नहीं मुझे, एहसान कौन मुझ से सिवा है मेरा अदू अपने सिवा किसी से शिकायत नहीं मुझे..!! - [पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं](https://hindigazals.com/pursish-e-gam-ka-shukriya-kya-tujhe-aagahi-nahi/): पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं तेरे बग़ैर ज़िंदगी दर्द है ज़िंदगी नहीं, देख के ख़ुश्क ओ ज़र्द फूल दिल है कुछ इस तरह मलूल जैसे मेरी ख़िज़ाँ के बाद दौर ए बहार ही नहीं, दौर था एक गुज़र चुका नशा था एक उतर चुका अब वो मक़ाम है जहाँ शिकवा ए बे रुख़ी नहीं, इशरत ए ख़ुल्द के लिए ज़ाहिद ए कज नज़र झुके मशरब ए इश्क़ में तो ये जुर्म है बंदगी नहीं, तेरे सिवा करूँ पसंद क्या तेरी काएनात में दोनों जहाँ की नेमतें क़ीमत ए बंदगी नहीं, लाख ज़माना ज़ुल्म ढाए वक़्त न वो ख़ुदा दिखाए जब मुझे हो यक़ीं कि तू हासिल ए ज़िंदगी नहीं, दिल की शगुफ़्तगी के साथ राहत ए मयकदा गई फ़ुर्सत ए मयकशी तो है हसरत ए मयकशी नहीं, अश्क ए रवाँ की आब ओ ताब कर न अवाम में ख़राब अज़्मत ए इश्क़ को समझ गिर्या ए ग़म हँसी नहीं, अर्सा ए फ़ुर्क़त ओ फ़िराक़ ऐसा तवील तो न था भूल रहे हो तुम मुझे मैं कोई अजनबी नहीं, ज़ख़्म पे ज़ख़्म खा के जी अपने लहू के घूँट पी आह न कर लबों को सी इश्क़ है दिललगी नहीं, एक वो रात थी कि जब था मेरे घर वो माहताब एक ये रात है कि अब चाँद है चाँदनी नहीं, मुज़्दा कि ना मुराद ए इश्क़ तेरी ग़ज़ल का है वो रंग वो भी पुकार उठे कि ये सेहर है शायरी नहीं..!! - [यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे](https://hindigazals.com/yun-na-mil-mujh-se-khafa-ho-jaise/): यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे साथ चल मौज ए सबा हो जैसे, लोग यूँ देख के हँस देते हैं तू मुझे भूल गया हो जैसे, इश्क़ को शिर्क की हद तक न बढ़ा यूँ न मिल हम से ख़ुदा हो जैसे, मौत भी आई तो इस नाज़ के साथ मुझ पे एहसान किया हो जैसे, ऐसे अंजान बने बैठे हो तुम को कुछ भी न पता हो जैसे, हिचकियाँ रात को आती ही रहीं तू ने फिर याद किया हो जैसे, ज़िंदगी बीत रही है दानिश एक बे जुर्म सज़ा हो जैसे..!! - [न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को](https://hindigazals.com/na-siyo-honth-na-khwabon-me-sada-do-hum-ko/): न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को मस्लहत का ये तक़ाज़ा है भुला दो हम को, जुर्म ए सुक़रात से हट कर न सज़ा दो हम को ज़हर रखा है तो ये आब ए बक़ा दो हम को, बस्तियाँ आग में बह जाएँ कि पत्थर बरसें हम अगर सोए हुए हैं तो जगा दो हम को, हम हक़ीक़त हैं तो तस्लीम न करने का सबब हाँ अगर हर्फ़ ए ग़लत हैं तो मिटा दो हम को, ख़िज़्र मशहूर हो इल्यास बने फिरते हो कब से हम गुम हैं हमारा तो पता दो हम को, ज़ीस्त है इस सहर ओ शाम से बेज़ार ओ ज़ुबूँ लाला ओ गुल की तरह रंग ए क़बा दो हम को, शोरिश ए इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक सोच कर जुर्म ए तमन्ना की सज़ा दो हम को, जुरअत ए लम्स भी इम्कान ए तलब में है मगर ये न हो और गुनहगार बना दो हम को, क्यूँ न उस शब से नए दौर का आग़ाज़ करें बज़्म ए ख़ूबाँ से कोई नग़्मा सुना दो हम को, मक़्सद ए ज़ीस्त ग़म ए इश्क़ है सहरा हो कि शहर बैठ जाएँगे जहाँ चाहो बिठा दो हम को, हम चटानें हैं कोई रेत के साहिल तो नहीं शौक़ से शहर पनाहों में लगा दो हम को, भीड़ बाज़ार ए-समा’अत में है नग़्मों की बहुत जिस से तुम सामने उभरो वो सदा दो हम को, कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम तुम ये इंसाफ़ से सोचो तो दुआ दो हम को, आज माहौल को आराइश ए जाँ से है गुरेज़ कोई दानिश की ग़ज़ल ला के सुना दो हम को..!! - [मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा](https://hindigazals.com/mere-junoon-ka-nateeja-zarur-nikalega/): मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा, गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा, उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा, यक़ीं न आए तो एक बात पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा, उस आस्तीन से अश्कों को पोछने वाले उस आस्तीन से ख़ंजर ज़रूर निकलेगा..!! - [जो दे रूह को सुकून वो है मेरे लिए तेरा प्यार](https://hindigazals.com/jo-de-rooh-ko-sukun-wo-hai-mere-liye-tera-pyar/): जो दे रूह को सुकून वो है मेरे लिए तेरा प्यार मेरे ज़ेहन ओ दिल का नूर है मेरे लिए तेरा प्यार, ज़िन्दगी के हर एक मोड़ पर संभाल लेता है मेरे हर ख़्वाबों की ताबीर है मेरे लिए तेरा प्यार, फ़साने लाख हों और दावेदार दुनिया में हज़ार मगर मेरे दिल का एक ही हक़दार है तेरा प्यार, सफ़र में जब भी दर्द मिले और दिल हो जाए बेकरार मरहम बनकर दिल पे उतरता है मेरे लिए तेरा प्यार, आहट से महक उठे मेरी सांसों का हर एक गुज़र जैसे ख़ुशबू ए गुलशन सा बिखर जाए तेरा प्यार, जहाँ में और क्या चाहिए, चाहे जो हो मेरी क़िस्मत क़ुदरत का सबसे हसीं इनाम है मेरे लिए तेरा प्यार, नहीं है डर कोई भी अब, न कोई ग़म का इश्तिहार, तू साथ रहे तो बस काफी है मेरे लिए तेरा प्यार..!! - [जो तेरे देखने से निकले हैं](https://hindigazals.com/jo-tere-dekhne-se-nikale-hain/): जो तेरे देखने से निकले हैं वो भी दिन क्या मज़े से निकले हैं, वो कहाँ नज़्र जाँ करें अपनी जो परिंदे दीये से निकले हैं, जो किसी सम्त भी नहीं जाते हम उसी रास्ते से निकले हैं, ज़ीस्त को पढ़ के ये हुआ रौशन मत्न सब हाशिए से निकले हैं, सारे अरमान आँधियों के सलीम मेरे पर टूटने से निकले हैं..!! - [फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे](https://hindigazals.com/faza-me-chhaaye-hue-hai-udaas-sannate/): फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे हों जैसे ज़ुल्मत ए शब का लिबास सन्नाटे, तेरे ख़याल की आहट ने सर्द कर डाला सुलग रहे थे अभी आस पास सन्नाटे, ख़ुदी के नन्हे फ़रिश्तों को लोरियाँ दे कर जगा न दें कहीं जिस्मों की प्यास सन्नाटे, उठाओ संग ए सदा और ज़ोर से फेंको बिखर ही जाएँगे ये बे क़यास सन्नाटे, ये अहल ए ज़र्फ़ की हिम्मत को आज़माते हैं हर एक दिल को नहीं आते रास सन्नाटे, सलीम शाम की तारीकियाँ बढ़ाते हैं यही दरख़्त पे लटके उदास सन्नाटे..!! - [बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं](https://hindigazals.com/barhana-shakhon-pe-kab-faakhtayen-aati-hain/): बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं मैं वो शजर हूँ कि जिस में बलाएँ आती हैं, ये कौन मेरे लहू में दिए जलाता है बदन से छन के ये कैसी शुआएँ आती हैं, मुझे सनद की ज़रूरत नहीं है नाक़िद से मेरी ग़ज़ल पे हसीनों की राएँ आती हैं, ख़ुदा से जिन का तअ’ल्लुक़ नहीं बचा कोई सफ़र में याद उन्हें भी दुआएँ आती हैं, उन्हें ख़बर ही नहीं कब का बुझ चुका हूँ मैं मेरी तलाश में अब तक हवाएँ आती हैं, मैं चीख़ता हूँ किसी दश्त ए बे अमाँ में सलीम फिर उस के बा’द मुसलसल सदाएँ आती हैं..!! - [मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ](https://hindigazals.com/meri-anaa-ka-asasa-zarur-khaq-hua/): मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ मगर ख़ुशी है कि तेरे हुज़ूर ख़ाक हुआ, मुझे बदन के बिखरने का ग़म नहीं लेकिन मलाल ये है दिल ए ना सुबूर ख़ाक हुआ, मैं अपनी ख़ाक से रौशन हुआ जो सूरत ए मुश्क तमाम मौसम ए गुल का ग़ुरूर ख़ाक हुआ, बिछड़ के तुझ से ये कम तो नहीं ज़ियाँ मेरा हर एक मंज़र ए नज़दीक ओ दूर ख़ाक हुआ, ये कैसा क़हत मेरे ज़ेहन ओ दिल पे आया है सलीम मेरी ग़ज़ल का शुऊ’र ख़ाक हुआ..!! - [शजर तो कब का कट के गिर चुका है](https://hindigazals.com/shajar-to-kab-ka-kat-ke-gir-chuka-hai/): शजर तो कब का कट के गिर चुका है परिंदा शाख़ से लिपटा हुआ है, समुंदर साहिलों से पूछता है तुम्हारा शहर कितना जागता है ? - [होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले](https://hindigazals.com/hontho-se-lafz-zehan-se-afqaar-chheen-le/): होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले मुझ से मेरा वसीला ए इज़हार छीन ले, नस्लें तबाह होंगी क़बीलों की जंग में जा बढ़ के अपने बाप से तलवार छीन ले, ना क़दरियों की अंधी गुफा सामने है फिर दीमक ही मेरे हाथ से शहकार छीन ले, अंजाम ख़ुद कुशी न सही फिर भी ऐ नदीम मुझ से मेरी कहानी का किरदार छीन ले, दरिया के उस तरफ़ तो अकेला नहीं सलीम तुझ को जो छीनना हो इसी पार छीन ले..!! - [लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना](https://hindigazals.com/lahuluhaan-paro-par-udaan-rakh-dena/): लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना शिकस्तगी में नया इम्तिहान रख देना, मेरे बदन पे लबों के निशान रख देना नई ज़मीं पे नया आसमान रख देना, अगर कभी मेरा सच जानने की ख़्वाहिश हो किसी भी शख़्स के मुँह में ज़बान रख देना, हमारे घर की ये दीवार कितनी तन्हा है जो हो सके तो कोई साएबान रख देना, लड़ाई में जो किसी का सुहाग चीख़ उठे सलीम हाथ से तीर ओ कमान रख देना..!! - [बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं](https://hindigazals.com/badan-darida-hoon-yaaro-shikasta-paa-hoo-main/): बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं कि जैसे अपने बुज़ुर्गों की बददुआ हूँ मैं, वो शख़्स तो किसी अंधी सुरंग जैसा है और उस से ज़िंदा निकलने का रास्ता हूँ मैं, वो हमसफ़र ही नहीं मानता मुझे अपना ये जानता हूँ मगर साथ चल रहा हूँ मैं, ये भूल जाओ कि तुम मुझ को भूल जाओगे कभी तो तुम से मिलूँगा कि हादिसा हूँ मैं, मेरी शनाख़्त मेरा चेहरा गर भी कर न सका सलीम इतनी बुलंदी से गिर पड़ा हूँ मैं..!! - [बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया](https://hindigazals.com/be-hisi-chehre-kee-lahze-kee-udaasi-le-gaya/): बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया वो मेरे अंदर की सारी बद हवासी ले गया, फ़स्ल शो’लों की उगाना चाहता था शहर में माँग कर जो आग कल मुझ से ज़रा सी ले गया, सुब्ह के अख़बार की सुर्ख़ी ने चौंकाया मगर रात का एक ख़्वाब सारी बद हवासी ले गया, आज तो सूरज भी मेरे बाद ही जागा सलीम कौन फिर गुलदान के सब फूल बासी ले गया..?? - [वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है](https://hindigazals.com/wo-muhabbat-bhi-mausam-ki-tarah-nibhata-hai/): वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है कभी बरसता है कभी बूँद बूँद को तरसाता है, पल में कहता है ज़माने में फक़त तेरे हैं पल में इज़हार ए मुहब्बत से मुक़र जाता है, भरी महफ़िल में दुश्मनों की तरह मिलता है और दुआओं में मेरा ही नाम लिए जाता है, दयार ए गैर में मुझ को ही तलाश करता है गर मिलूँ तो पास से चुप चाप गुज़र जाता है, लाख मौसम की तरह रंग बदलता रहे मगर आज भी टूट के शिद्दत से हमें ही चाहता है..!! - [उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में](https://hindigazals.com/use-hum-yaad-aate-hain-faqat-fursat-ke-lamhon-me/): उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में मगर ये बात भी सच है उसे फ़ुर्सत नहीं मिलती, हम तस्लीम करते हैं हमें फ़ुर्सत नहीं मिलती मगर जब याद करते हैं ज़माना भूल जाते हैं, ज़माना भूल जाते हैं तेरी एक दीद की खातिर ख्यालों से निकलते हैं तो है तो सदियाँ बीत जाती हैं, सदियाँ बीत जाती हैं ख़्यालों से निकलने में मगर जब याद आती है तो आँखें भीग जाती हैं..!! - [चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं](https://hindigazals.com/charagon-se-hawayen-lad-rahi-hain/): चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं कि ख़ुद बच्चों से माएँ लड़ रही हैं, नशेमन तो उजाड़े थे हवा ने शजर से फ़ाख़ताएँ लड़ रही हैं, नई तहज़ीब की बे रह रवी पर पुरानी दाश्ताएँ लड़ रही हैं, बरहना हो गए किरदार सारे कि आपस में कथाएँ लड़ रही हैं, झगड़ कर हो चुके हैं दोस्त बच्चे अभी तक मामताएँ लड़ रही हैं..!! - [ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है](https://hindigazals.com/taa-hadd-e-nazar-koi-bhi-dam-saaz-nahi-hai/): ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है या फिर मेरी चीख़ों में ही आवाज़ नहीं है, हंगामे हैं इस दर्जा बपा ख़ल्वत ए जाँ में अब दिल के धड़कने की भी आवाज़ नहीं है, शायद मैं उसी एक कहानी का हूँ किरदार अंजाम है जिस का मगर आग़ाज़ नहीं है, अल्लाह ये क्या मंज़िल ए अर्ज़ानी ए जाँ है क़ातिल हैं हर एक मोड़ पे दम साज़ नहीं है, जो ख़त है लिफ़ाफ़े में उसे ग़ौर से पढ़िए चेहरा मेरे हालात का ग़म्माज़ नहीं है..!! - [बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे](https://hindigazals.com/bachche-kee-zidd-ko-ab-to-mera-etibar-de/): बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे ऐ आसमाँ ये चाँद मेरे घर उतार दे, चोरी करूँ तो हाथ मेरे काट दे मगर पहले ख़ुदा ए वक़्त मुझे रोज़गार दे, ठुकरा न दूँ मैं ग़ैर के हाथों मिली शिकस्त मुझ को भी मेरी नस्ल ही मुजरिम क़रार दे, यारब जुनून ए इश्क़ से महरूम रख मुझे या मेरी वहशतों को नए रेग ज़ार दे..!! - [होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है](https://hindigazals.com/hosh-walon-ko-khabar-kya-be-khudi-kya-cheej-hai/): होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है, उन से नज़रें क्या मिलीं रौशन फ़ज़ाएँ हो गईं आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है, बिखरी ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है, हम लबों से कह न पाए उन से हाल ए दिल कभी और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है..!! - [सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है](https://hindigazals.com/sadaqat-ka-jo-paigambar-raha-hai/): सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है वो अब सच बोलने से डर रहा है, कहानी हो रही है ख़त्म शायद कोई किरदार मुझ में मर रहा है, ज़रा सी देर को आँधी रुकी है परिंदा फिर उड़ानें भर रहा है, मेरे अहबाब खो जाएँगे एक दिन मुझे ये वहम सा अक्सर रहा है, लगी है रौशनी की शर्त शब से सितारा जुगनुओं से डर रहा है..!! - [मेज़ चेहरा किताब तन्हाई](https://hindigazals.com/maze-chehra-kitab-tanhaai/): मेज़ चेहरा किताब तन्हाई बन न जाए अज़ाब तन्हाई, कर रहे थे सवाल सन्नाटे दे रही थी जवाब तन्हाई, आँख से टूट कर गिरे आँसू हो गई बे नक़ाब तन्हाई, वस्ल के एक एक लम्हे का माँगती है हिसाब तन्हाई, आहटों को भी क़त्ल कर देगी दूर तक कामयाब तन्हाई, चंद बे चेहरा साअ’तों का सलीम सह रही है अज़ाब तन्हाई..!! - [मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया](https://hindigazals.com/mujh-ko-saza-e-maut-ka-dhoka-diya-gaya/): मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया मेरा वजूद मुझ में ही दफ़ना दिया गया, बोलो तुम्हारी रीढ़ की हड्डी कहाँ गई क्यूँ तुम को ज़िंदगी का तमाशा दिया गया ? - [दिल ग़म ए रोज़गार से निकला](https://hindigazals.com/dil-gam-e-rozgaar-se-nikla/): दिल ग़म ए रोज़गार से निकला किस घने ख़ारज़ार से निकला, हम-सफ़र हो गए मह ओ अंजुम मैं जो अपने हिसार से निकला, शोर था लाठियों का सड़कों पर साँप घर की दरार से निकला, जिस को काँटा समझ रहे थे लोग उस का रिश्ता बहार से निकला, कर गया मुंतशिर निज़ाम ए जहाँ जो भी ज़र्रा क़तार से निकला, हो गया बहर ए बे कराँ वो सलीम जो भी दरिया कनार से निकला..!! - [ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में](https://hindigazals.com/khushboo-jaise-log-mile-afsaane-me/): ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में, शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में, रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में, जाने किस का ज़िक्र है इस अफ़्साने में दर्द मज़े लेता है जो दोहराने में, दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है किस की आहट सुनता हूँ वीराने में, हम इस मोड़ से उठ कर अगले मोड़ चले उन को शायद उम्र लगेगी आने में..!! - [इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं](https://hindigazals.com/in-aankhon-kee-masti-ke-mastaane-hazaron-hain/): इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं इन आँखों से वाबस्ता अफ़्साने हज़ारों हैं, एक तुम ही नहीं तन्हा उल्फ़त में मेरी रुस्वा इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं, एक सिर्फ़ हमीं मय को आँखों से पिलाते हैं कहने को तो दुनिया में मयख़ाने हज़ारों हैं, इस शम ए फ़रोज़ाँ को आँधी से डराते हो इस शम ए फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं..!! - [किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी](https://hindigazals.com/kisi-ka-yun-to-hua-kaun-umr-bhar-fir-bhi/): किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी, हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है नई नई सी है कुछ तेरी रहगुज़र फिर भी, कहूँ ये कैसे इधर देख या न देख उधर कि दर्द दर्द है फिर भी नज़र नज़र फिर भी, ख़ुशा इशारा ए पैहम ज़हे सुकूत ए नज़र दराज़ हो के फ़साना है मुख़्तसर फिर भी, झपक रही हैं ज़मान ओ मकाँ की भी आँखें मगर है क़ाफ़िला आमादा ए सफ़र फिर भी, शब ए फ़िराक़ से आगे है आज मेरी नज़र कि कट ही जाएगी ये शाम ए बे सहर फिर भी, कहीं यही तो नहीं काशिफ़ ए हयात ओ ममात ये हुस्न ओ इश्क़ ब ज़ाहिर हैं बे ख़बर फिर भी, पलट रहे हैं ग़रीब उल वतन पलटना था वो कूचा रू कश ए जन्नत हो घर है घर फिर भी, लुटा हुआ चमन ए इश्क़ है निगाहों को दिखा गया वही क्या क्या गुल ओ समर फिर भी, ख़राब हो के भी सोचा किए तेरे महजूर यही कि तेरी नज़र है तेरी नज़र फिर भी, हो बे नियाज़ ए असर भी कभी तेरी मिट्टी वो कीमिया ही सही रह गई कसर फिर भी, लिपट गया तेरा दीवाना गरचे मंज़िल से उड़ी उड़ी सी है ये ख़ाक ए रहगुज़र फिर भी, तेरी निगाह से बचने में उम्र गुज़री है उतर गया रग ए जाँ में ये नेश्तर फिर भी, ग़म ए फ़िराक़ के कुश्तों का हश्र क्या होगा ये शाम ए हिज्र तो हो जाएगी सहर फिर भी, फ़ना भी हो के गिराँ-बारी ए हयात न पूछ उठाए उठ नहीं सकता ये दर्द ए सर फिर भी, सितम के रंग हैं हर इल्तिफ़ात ए पिन्हाँ में करम नुमा हैं तेरे जौर सर ब सर फिर भी, ख़ता मुआफ़ तेरा अफ़्व भी है मिस्ल ए सज़ा तेरी सज़ा में है एक शान ए दर-गुज़र फिर भी, अगरचे बे ख़ुदी ए इश्क़ को ज़माना हुआ फ़िराक़ करती रही काम वो नज़र फिर भी..!! - [कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार](https://hindigazals.com/koi-jo-rahta-hai-rahne-do-maslahat-ka-shikaar/): कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार चलो कि जश्न ए बहाराँ मनाएँगे सब यार, चलो निखारेंगे अपने लहू से आरिज़ ए गुल यही है रस्म ए वफ़ा और मनचलों का शिआ’र, जो ज़िंदगी में है वो ज़ह्र हम भी पी डालें चलो हटाएँगे पलकों से रास्तों के ख़ार, यहाँ तो सब ही सितम दीदा ग़म गज़ीदा हैं करेगा कौन भला ज़ख़्म हा ए दिल का शुमार, चलो कि आज रखी जाएगी निहाद ए चमन चलो कि आज बहुत दोस्त आएँगे सर ए दार..!! - [दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं](https://hindigazals.com/do-javaan-dilo-ka-gam-dooriyan-samjhti-hain/): दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं, तुम तो खुद ही कातिल हो तुम ये बात क्या जानो क्यूँ हुआ मैं दीवाना ? - [ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है](https://hindigazals.com/taaqten-tumhari-hain-aur-khuda-humara-hai/): ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, आप की ग़ुलामी का बोझ हम न ढोएँगे आबरू से मरने का फ़ैसला हमारा है, उम्र भर तो कोई भी जंग लड़ नहीं सकता तुम भी टूट जाओगे तजुर्बा हमारा है, अपनी रहनुमाई पर अब ग़ुरूर मत करना आप से बहुत आगे नक़्श ए पा हमारा है..!! - [आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई](https://hindigazals.com/aankh-bhar-aayi-kisi-se-jo-mulaqat-hui/): आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी डूबा कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं जिस जगह बुझ गए आँखों के दीये रात हुई, कोई हसरत कोई अरमाँ कोई ख़्वाहिश ही न थी ऐसे आलम में मेरी ख़ुद से मुलाक़ात हुई, हो गया अपने पड़ोसी का पड़ोसी दुश्मन आदमिय्यत भी यहाँ नज़्र ए फ़सादात हुई, इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं जीतने का जहाँ मौक़ा था वहीं मात हुई, इस तरह गुज़रा है बचपन कि खिलौने न मिले और जवानी में बुढ़ापे से मुलाक़ात हुई..!! - [ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है](https://hindigazals.com/zulf-o-rukh-ke-saaye-me-zindagi-guzari-hai/): ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़म गुसार चेहरों पर ए’तिबार मत करना शहर में सियासत के दोस्त भी शिकारी है, मोड़ लेने वाली है, ज़िंदगी कोई शायद अब के फिर हवाओं में एक बे क़रारी है, हाल ख़ूँ में डूबा है कल न जाने क्या होगा अब ये ख़ौफ़ ए मुस्तक़बिल ज़ेहन ज़ेहन तारी है, मेरे ही बुज़ुर्गों ने सर बुलंदियाँ बख़्शीं मेरे ही क़िबले पर मश्क़ ए संग बारी है, एक अजीब ठंडक है इस के नर्म लहजे में लफ़्ज़ लफ़्ज़ शबनम है बात बात प्यारी है, कुछ तो पाएँगे उस की क़ुर्बतों का ख़म्याज़ा दिल तो हो चुके टुकड़े अब सरों की बारी है, बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुँवारी है, कह दो मीर ओ ग़ालिब से हम भी शेर कहते हैं वो सदी तुम्हारी थी ये सदी हमारी है, कर्बला नहीं लेकिन झूठ और सदाक़त में कल भी जंग जारी थी अब भी जंग जारी है, गाँव में मोहब्बत की रस्म है अभी मंज़र शहर में हमारे तो जो भी है मदारी है..!! - [ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना](https://hindigazals.com/khyal-o-khwab-me-hona-sada-e-baad-me-rahna/): ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना किसी की आस में जीना किसी की याद में रहना, पुर असरारी अजब सी है तेरी वीरान आँखों में तुझे भी रास आया ख़ाना ए बर्बाद में रहना, मोहब्बत एक बहर ए बे कराँ है और मोहब्बत में कहीं पर क़ैद होना है दिल ए आज़ाद में रहना, किसी की याद है उलझी हुई साँसों की डोरी से किसी के हिज्र में है अर्सा ए फ़रियाद में रहना, तो फिर हिज्र ओ विसाल ओ रंज ओ ग़म सारे इज़ाफ़ी हैं जो हासिल है वफ़ा को इश्क़ की बुनियाद में रहना, जफ़ा की एक सी रस्में ही इंसाँ का मुक़द्दर हैं किसी कूफ़ा में जीना हो या कि बग़दाद में रहना, किसी से क्या शिकायत ज़िंदगी को रास आया है जफ़ा के शहर में दश्त ए सितम ईजाद में रहना..!! - [रात दरपेश थी मुसाफ़िर को](https://hindigazals.com/raat-darpesh-thi-musafir-ko-neend-kyo-aa-gayi/): रात दरपेश थी मुसाफ़िर को नींद क्यों आ गई मुसाफ़िर को ? - [हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे](https://hindigazals.com/hizr-ke-mausam-e-tanhaai-ke-dukh-dekhe/): हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे एक चेहरे के पीछे कितने दुख देखे, एक सन्नाटा पहरों ख़ून रुलाता है एक आवाज़ की ख़ातिर कैसे दुख देखे, मैं भी अपनी ज़ात में तन्हा फिरता हूँ तुम ने भी बे ख़्वाब रुतों के दुख देखे, जिन बच्चों ने हँसना भी न सीखा था उन बच्चों ने सब से पहले दुख देखे, तुम को देखा है तो ये महसूस हुआ कैसे मुरझाते हैं चेहरे दुख देखे, हम दोनों ने एक दूजे को जान लिया हम दोनों ने एक दूजे के दुख देखे, जिस को जीना है दुनिया में दस्तूरन लाज़िम है वो सब से पहले दुख देखे, अब लोगों के चेहरों पर ये लिखा है इन लोगों ने सुख के बदले दुख देखे, हम लोगों का बचपन कैसा बचपन था हम लोगों ने कैसे कैसे दुख देखे, रात गए तक मैं ने उस की यादों में जैसे शे’र लिखे थे वैसे दुख देखे, दानिश कैसा कर्ब छुपाए फिरता है शे’र कहे रातों को जागे दुख देखे, दानिश हम ने जिस रुत में जीना सीखा वो रुत गुज़री सपने टूटे दुख देखे..!! - [ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब](https://hindigazals.com/ye-kya-rut-hai-ab-kee-rut-me-dekhe-zard-gulab/): ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब चेहरे सूखे फूल ख़िज़ाँ के आँखें ज़र्द गुलाब, फूल से बच्चे भी ख़्वाबों के ईंधन बनते जाएँ देखें कैसी रुत फूलों की ओढें ज़र्द गुलाब, एक अलामत हो गई अपने ख़्वाबों की तफ़्सीर सोचें अपने ख़्वाबों को तो लिक्खें ज़र्द गुलाब, दीवारों पर अपनी नस्ल का नौहा लिखते जाएँ जिस के दिन भी ज़हरीले हैं रातें ज़र्द गुलाब, झूट के ज़हरीले पंजों में जकड़े मुर्दा लोग बातें उड़ती ख़ुशबू जैसी सोचें ज़र्द गुलाब, अब आँगन में सन्नाटे की डायन नाचे गाए अब बच्चों के बदले घर में खेलें ज़र्द गुलाब, आने वाले शायद अपने दुख को समझेंगे दानिश यार किताबों में हम रखे ज़र्द गुलाब..!! - [गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ](https://hindigazals.com/gardish-e-sagar-subu-ke-darmiyan/): गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ ज़िंदगी है हाओ हू के दरमियाँ, ज़ख़्म और पोशाक भी रखे गए आइना और आब जू के दरमियाँ, तीसरा रस्ता किधर को जाए है आरज़ू और जुस्तुजू के दरमियाँ, कितनी बे मा’नी सी है ये ज़िंदगी ख़ामोशी और गुफ़्तुगू के दरमियाँ, ज़िंदगी तरजीह किस को देती है सब्ज़ रू और ख़ुश गुलू के दरमियाँ, याद की एक अजनबी परछाईं है रंग ओ बू ओ काख़ ओ कू के दरमियाँ, वक़्त से बच कर निकल जाऊँ कहीं एक दर है चार सू के दरमियाँ, मेरा चेहरा दूसरों से मुख़्तलिफ़ फ़र्क़ है क्या ये लहू के दरमियाँ..!! - [दिल को तेरे ध्यान में रखा](https://hindigazals.com/dil-ko-tere-dhyaan-me-rakha/): दिल को तेरे ध्यान में रखा शोर सूने मकान में रखा, हर तरफ़ आइने बिछाए और एक चेहरा जहान में रखा, एक आँसू छुपाया मुट्ठी में एक समुंदर मकान में रखा, एक मोहब्बत जगाई सीने में आग को ख़ाक दान में रखा, जान रखी तुम्हारी चौखट पर दिल को तेरी अमान में रखा, धूप फैली हुई थी आँखों में ख़्वाब को साएबान में रखा, पाँव की बे सबात वहशत को गर्दिश ए आसमान में रखा, ख़ाक होने तलक मेरे दिल ने मुझ को वहम ओ गुमान में रखा..!! - [वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के](https://hindigazals.com/wo-door-khwabon-ke-saahilon-me-azaab-kis-ke-hain-khwab-kis-ke/): वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के ये कौन जाने कि अब रुतों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के ? - [जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या](https://hindigazals.com/jahan-vaham-o-gumaan-ho-jayega-kya/): जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ? सितारे धूल और मिट्टी बनेंगे समुंदर आसमाँ हो जाएगा क्या ? - [कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है](https://hindigazals.com/koi-saya-achche-saaee-dhoop-bahut-hai/): कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है मर जाऊँगा अच्छे साईं धूप बहुत है, साँवली रुत में ख़्वाब जले तो आँख खुली है मैं ने देखा अच्छे साईं धूप बहुत है, अब के मौसम यही रहे तो मर जाएगा एक एक लम्हा अच्छे साईं धूप बहुत है, कोई ठिकाना बख़्श उसे जो घूम रहा है मारा मारा अच्छे साईं धूप बहुत है, एक तो दिल के रस्ते भी दुश्वार बहुत हैं फिर मैं प्यासा अच्छे साईं धूप बहुत है, कोई साया आग में जलने वालों पर भी कोई पुर्वा अच्छे साईं धूप बहुत है, रात को एक पागल ने शहर की दीवारों पर ख़ून से लिखा अच्छे साईं धूप बहुत है, अच्छे साईं मान लिया दुनिया है रौशन लेकिन ये क्या अच्छे साईं धूप बहुत है, कौन था जिस से दिल की हालत कह पाता मैं किस से कहता अच्छे साईं धूप बहुत है..?? - [उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को](https://hindigazals.com/ujaad-ankhon-me-rat-jagon-ka-azaab-utra-hai-neem-shab-ko/): उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को जो दर्द जागा है शाम ढलते तो शेर लिखा है नीम शब को, मैं ख़ाली कमरे के सर्द गोशे में रोज़ तन्हा ये सोचता हूँ ये कौन हँसता है दिन ढले तक ये कौन रोता है नीम शब को, हमारे बच्चों की सब्ज़ आँखों में रौशनी के कँवल नहीं हैं उदास साया सा रोज़ आकर ये मुझ से कहता है नीम शब को, दुआएँ ले कर हम अपने होंटों पे जाने किस सुख के मुंतज़िर हैं हमें ख़बर है कि इस नगर में अज़ाब उतरा है नीम शब को, दहकते सूरज का ज़ुल्म कच्चे घरों के बासी ही झेलते हैं ये बात सोची नहीं थी दिन में जो ख़्वाब देखा है नीम शब को, किसे ख़बर है ये कौन सी शय वजूद ए शम्अ को चाटती है ये देखते हैं कि एक साया लरज़ता रहता है नीम शब को, तुम्हारी यादों की धीमी लय है या मैं हूँ या फिर कोई नहीं है तो सूने आँगन में कौन आकर दिया जलाता है नीम शब को, ये आगही के उदास लम्हों में कर्ब क्या है अज़ाब क्या है वो जानता है जो अपने रब की तरह से तन्हा है नीम शब को, तुम अपने सारे गुज़शता लम्हे भुला ही देना मगर ये करना उसे दुआओं में याद रखना जो तुम को रोता है नीम शब को, अगर कभी तुम मिलोगे उस से ये जान लो नून मीम दानिश वो आदमी है जो दर्द पाता है ख़्वाब बोता है नीम शब को..!! - [वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा](https://hindigazals.com/wo-kisi-bhi-aks-e-jamal-me-nahi-ayega/): वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा वो जवाब है तो सवाल में नहीं आएगा, नहीं आएगा वो किसी भी हर्फ़ ओ बयान में वो किसी नज़ीर ओ मिसाल में नहीं आएगा, उसे ढालना है ख़याल में किसी और ढब वो शबाहत ओ ख़द ओ ख़ाल में नहीं आएगा, वो जो शहसवार है तेग़ ज़न रह ए ज़िंदगी मेरे साथ वक़्त ए ज़वाल में नहीं आएगा, यहाँ कौन था जो सलामती से गुज़र गया यहाँ कौन है जो वबाल में नहीं आएगा ? - [गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है](https://hindigazals.com/galiyon-ki-bas-khaaq-uda-ke-jaana-hai/): गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है हम को भी आवाज़ लगा के जाना है, रस्ते में दीवार है टूटे ख़्वाबों की हम को वो दीवार गिरा के जाना है, हम भी एक दिन आएगा जब जाएँगे हम को भी ये रस्म निभा के जाना है, जो भी है वो सब मिट्टी हो जाएगा हम को बस एक ख़्वाब बचा के जाना है, मेरे अंदर सदियों की ख़ामोशी है तुम को वो आवाज़ सुना के जाना है, तुम को भी एक ख़्वाब मुकम्मल करना था हम को भी तस्वीर बना के जाना है..!! - [जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं](https://hindigazals.com/jinhen-hum-kah-nahi-paaye-wo-baaten-yaad-aati-hain/): जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं गुज़शता ना मुलाक़ातों की यादें याद आती हैं, कभी वीरान रस्तों पर कभी तन्हाई की चुप में वो चेहरा बात करता है वो आँखें याद आती हैं, कभी आए नहीं वो दिन जो अक्सर साथ चलते हैं गुज़ारी जो नहीं हम ने वो रातें याद आती हैं, जहाँ रखा नहीं पाँव वो रस्ता साथ चलता है जिन्हें सोचा नहीं दिल ने वो राहें याद आती हैं..!! - [यादें पागल कर देती हैं](https://hindigazals.com/yaaden-pagal-kar-deti-hain/): यादें पागल कर देती हैं बातें पागल कर देती हैं, चेहरा होश उड़ा देता है आँखें पागल कर देती हैं, तन्हा चलने वालों को ये राहें पागल कर देती हैं, दिन तो ख़ैर गुज़र जाता है रातें पागल कर देती हैं..!! - [तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता](https://hindigazals.com/tera-khyal-bahut-der-tak-nahi-rahta/): तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता, उदास करती है अक्सर तुम्हारी याद मुझे मगर ये हाल बहुत देर तक नहीं रहता, मैं रेज़ा रेज़ा तो होता हूँ हर शिकस्त के बा’द मगर निढाल बहुत देर तक नहीं रहता, जवाब मिल ही तो जाता है एक चुप ही न हो कोई सवाल बहुत देर तक नहीं रहता, मैं जानता हूँ कि सूरज हूँ डूब जाऊँ भी तो मुझे ज़वाल बहुत देर तक नहीं रहता..!! - [देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए](https://hindigazals.com/dekhe-hue-kisi-ko-bahut-din-guzar-gaye/): देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए इस दिल की बेबसी को बहुत दिन गुज़र गए, हर शब छतों पे चाँद उतरता तो है मगर इस घर में चाँदनी को बहुत दिन गुज़र गए, कोई जवाज़ ढूँड ग़म ए ना शनास का बे वज्ह बेकली को बहुत दिन गुज़र गए, अब तक अकेलेपन का मुसलसल अज़ाब है दुनिया से दोस्ती को बहुत दिन गुज़र गए, तेरी रिफाक़तें तो मुक़द्दर में ही न थीं अब अपनी ही कमी को बहुत दिन गुज़र गए, मुद्दत हुई है टूट के रोया नहीं हूँ मैं इस चैन की घड़ी को बहुत दिन गुज़र गए, वो जागती हवेली भी वीरान हो गई उस नुक़रई हँसी को बहुत दिन गुज़र गए, वो क़हक़हे भी वक़्त के सहरा में खो गए गलियों की ख़ामुशी को बहुत दिन गुज़र गए, मुद्दत हुई कि रात का वो जागना गया इस रंज ए आशिक़ी को बहुत दिन गुज़र गए, जो एतिबार ए ज़ख़्म हुनर ने अता किया दानिश वो शायरी को बहुत दिन गुज़र गए..!! - [आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी](https://hindigazals.com/aap-ki-aankh-agar-aaj-gulabi-hogi/): आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी मेरी सरकार बड़ी सख़्त ख़राबी होगी, मोहतसिब ने ही पढ़ा होगा मक़ाला पहले मेरी तक़रीर ब हर हाल जवाबी होगी, आँख उठाने से भी पहले ही वो होंगे ग़ाएब क्या ख़बर थी कि उन्हें इतनी शिताबी होगी, हर मोहब्बत को समझता है वो नॉवेल का वरक़ उस परी ज़ाद की ता’लीम किताबी होगी, शैख़ जी हम तो जहन्नम के परिंदे ठहरे आप के पास तो फ़िरदौस की चाबी होगी, कर दिया मूसा को जिस चीज़ ने बेहोश अदम बे नक़ाबी नहीं वो नीम हिजाबी होगी..!! - [ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ](https://hindigazals.com/khaali-hai-abhi-jaam-main-kuch-soch-raha-hoon/): ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ ऐ गर्दिश ए अय्याम मैं कुछ सोच रहा हूँ, साक़ी तुझे एक थोड़ी सी तकलीफ़ तो होगी साग़र को ज़रा थाम मैं कुछ सोच रहा हूँ, पहले बड़ी रग़बत थी तेरे नाम से मुझ को अब सुन के तेरा नाम मैं कुछ सोच रहा हूँ, इदराक अभी पूरा तआ’वुन नहीं करता दय बादा ए गुलफ़ाम मैं कुछ सोच रहा हूँ, हल कुछ तो निकल आएगा हालात की ज़िद का ऐ कसरत ए आलाम मैं कुछ सोच रहा हूँ, फिर आज अदम शाम से ग़मगीं है तबीअत फिर आज सर ए शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ..!! - [साक़ी शराब ला कि तबीअ’त उदास है](https://hindigazals.com/saaqi-sharab-laa-ki-tabiyat-udaas-hai/): साक़ी शराब ला कि तबीअ’त उदास है मुतरिब रुबाब उठा कि तबीअ’त उदास है, रुक रुक के साज़ छेड़ कि दिल मुतमइन नहीं थम थम के मय पिला कि तबीअ’त उदास है, चुभती है क़ल्ब ओ जाँ में सितारों की रौशनी ऐ चाँद डूब जा कि तबीअ’त उदास है, मुझ से नज़र न फेर कि बरहम है ज़िंदगी मुझ से नज़र मिला कि तबीअ’त उदास है, शायद तेरे लबों की चटक से हो जी बहाल ऐ दोस्त मुस्कुरा कि तबीअ’त उदास है, है हुस्न का फ़ुसूँ भी इलाज ए फ़सुर्दगी रुख़ से नक़ाब उठा कि तबीअ’त उदास है, मैं ने कभी ये ज़िद तो नहीं की पर आज शब ऐ महजबीं न जा कि तबीअ’त उदास है, इमशब गुरेज़ ओ रम का नहीं है कोई महल आग़ोश में दर आ कि तबीअ’त उदास है, कैफ़िय्यत ए सुकूत से बढ़ता है और ग़म क़िस्सा कोई सुना कि तबीअ’त उदास है, यूँही दुरुस्त होगी तबीअ’त तेरी अदम कमबख़्त भूल जा कि तबीअ’त उदास है, तौबा तो कर चुका हूँ मगर फिर भी ऐ अदम थोड़ा सा ज़हर ला कि तबीअ’त उदास है..!! - [हँस के बोला करो बुलाया करो](https://hindigazals.com/hans-ke-bola-karo-bulaya-karo/): हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो, मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर रूप बढ़ता है मुस्कुराया करो, हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूठीं क़समें ज़रूर खाया करो, हुक्म करना भी एक सख़ावत है हम को ख़िदमत कोई बताया करो, बात करना भी बादशाहत है बात करना न भूल जाया करो, ताकि दुनिया की दिलकशी न घटे नित नए पैरहन में आया करो, हम हसद से अदम नहीं कहते उस गली में बहुत न जाया करो..!! - [जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं](https://hindigazals.com/jab-tere-nain-muskurate-hain/): जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं, क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर भूल कर आ गए हैं जाते हैं, कश्तियाँ यूँ भी डूब जाती हैं नाख़ुदा किस लिए डराते हैं ? - [अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ](https://hindigazals.com/agarche-main-chattan-sa-aadmi-raha-hoon/): अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ मगर तेरे बाद हौसला है कि जी रहा हूँ, वो रेज़ा रेज़ा मेरे बदन में उतर रहा है मैं क़तरा क़तरा उसी की आँखों को पी रहा हूँ, तेरी हथेली पे किस ने लिखा है क़त्ल मेरा मुझे तो लगता है मैं तेरा दोस्त भी रहा हूँ, खुली हैं आँखें मगर बदन है तमाम पत्थर कोई बताए मैं मर चुका हूँ कि जी रहा हूँ, कहाँ मिलेगी मिसाल मेरी सितमगरी की कि मैं गुलाबों के ज़ख़्म काँटों से सी रहा हूँ, न पूछ मुझ से कि शहर वालों का हाल क्या था कि मैं तो ख़ुद अपने घर में भी दो घड़ी रहा हूँ, मिला तो बीते दिनों का सच उस की आँख में था वो आश्ना जिस से मुद्दतों अजनबी रहा हूँ, भुला दे मुझ को कि बेवफ़ाई बजा है लेकिन गँवा न मुझ को कि मैं तिरी ज़िंदगी रहा हूँ, वो अजनबी बन के अब मिले भी तो क्या है मोहसिन ये नाज़ कम है कि मैं भी उस का कभी रहा हूँ..!! - [तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है](https://hindigazals.com/tere-badan-se-jo-chhoo-kar-idhar-bhi-aata-hai/): तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल ए रंग वो झोंका नज़र भी आता है, तमाम शब जहाँ जलता है एक उदास दिया हवा की राह में एक ऐसा घर भी आता है, वो मुझ को टूट के चाहेगा छोड़ जाएगा मुझे ख़बर थी उसे ये हुनर भी आता है, उजाड़ बन में उतरता है एक जुगनू भी हवा के साथ कोई हम सफ़र भी आता है, वफ़ा की कौन सी मंज़िल पे उस ने छोड़ा था कि वो तो याद हमें भूल कर भी आता है, जहाँ लहू के समुंदर की हद ठहरती है वहीं जज़ीरा ए लाल ओ गुहर भी आता है, चले जो ज़िक्र फ़रिश्तों की पारसाई का तो ज़ेर ए बहस मक़ाम ए बशर भी आता है, अभी सिनाँ को सँभाले रहें अदू मेरे कि उन सफ़ों में कहीं मेरा सर भी आता है, कभी कभी मुझे मिलने बुलंदियों से कोई शुआ ए सुब्ह की सूरत उतर भी आता है, इसी लिए मैं किसी शब न सो सका मोहसिन वो माहताब कभी बाम पर भी आता है..!! - [आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म](https://hindigazals.com/aapki-aankh-se-gahra-hai-meri-rooh-ka-zakhm/): आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म आप क्या सोच सकेंगे मेरी तन्हाई को ? - [अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा](https://hindigazals.com/ab-wo-toofaan-hai-na-wo-shor-hawaon-jaisa/): अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा दिल का आलम है तेरे बाद ख़लाओं जैसा, काश दुनिया मेरे एहसास को वापस कर दे ख़ामुशी का वही अंदाज़ सदाओं जैसा, पास रह कर भी हमेशा वो बहुत दूर मिला उस का अंदाज़ ए तग़ाफ़ुल था ख़ुदाओं जैसा, कितनी शिद्दत से बहारों को था एहसास ए मआ’ल फूल खिल कर भी रहा ज़र्द ख़िज़ाओं जैसा, क्या क़यामत है कि दुनिया उसे सरदार कहे जिस का अंदाज़ ए सुख़न भी हो गदाओं जैसा, फिर तेरी याद के मौसम ने जगाए महशर फिर मेरे दिल में उठा शोर हवाओं जैसा, बारहा ख़्वाब में पा कर मुझे प्यासा मोहसिन उस की ज़ुल्फ़ों ने किया रक़्स घटाओं जैसा..!! - [एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया](https://hindigazals.com/ek-pal-me-zindagi-bhar-ki-udasi-de-gaya/): एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया, नोच कर शाख़ों के तन से ख़ुश्क पत्तों का लिबास ज़र्द मौसम बाँझ रुत को बे लिबासी दे गया, सुब्ह के तारे मेरी पहली दुआ तेरे लिए तू दिल ए बे सब्र को तस्कीं ज़रा सी दे गया, लोग मलबों में दबे साए भी दफ़नाने लगे ज़लज़ला अहल ए ज़मीं को बद हवासी दे गया, तुंद झोंके की रगों में घोल कर अपना धुआँ एक दिया अंधी हवा को ख़ुद शनासी दे गया, ले गया मोहसिन वो मुझ से अब्र बनता आसमाँ उस के बदले में ज़मीं सदियों की प्यासी दे गया..!! - [दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले](https://hindigazals.com/dil-me-bando-ke-bahut-khauf-e-khuda-tha-pahle/): दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले, राम के राज की तस्वीर थी अपनी धरती मसलक ए फ़िक्र ओ अमल उन्स ओ वफ़ा था पहले, एक इंसान से बे वज्ह हो इंसान को बैर ये वतीरा कभी देखा न सुना था पहले, हिंदू ओ मुस्लिम ओ ईसाई ओ सिख मेल से थे आपसी प्रेम का उल्फ़त का मज़ा था पहले, क़ौमी यकजेहती का आदर्श था ये भारतवर्ष हम ने पैग़ाम ए विला सब को दिया था पहले, बादशाह और गदा सब के बराबर थे हुक़ूक़ न्याय में कोई भी छोटा न बड़ा था पहले, रास्तगोई थी यहाँ ग़ैर मुक़फ़्फ़ल थे मकाँ देश में ऐसा भी एक दौर रहा था पहले, देश में फिर से मोहब्बत हो रवादारी हो काश आ जाए ज़माना जो रहा था पहले, मौजज़न रहता था तूफ़ान-ए-उख़ूवत ऐ मौज दिल में तूफ़ान मोहब्बत का बसा था पहले..!! - [कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था](https://hindigazals.com/kabhi-pahli-baar-school-jaane-me-dar-lagta-tha/): कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था आज अकेले ही ज़माना घूम लेते हैं, पहले फर्स्ट आने के लिए पढ़ा करते थे आज कमाने के लिए पढ़ते हैं, कभी छोटी सी चोट लगने पे रो देते थे आज दिल टूट जाने पे भी संभल जाते हैं, पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे आज दोस्त हमारी यादों में रहते हैं, पहले लड़ना मरना रोज़ का काम होता था आज एक बार लड़ते हैं तो रिश्ते खो जाते हैं, सच हैं ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया जाने कब हम को वक़्त ने इतना बड़ा बना दिया..!! - [जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ](https://hindigazals.com/jab-se-us-ne-shahar-ko-chhoda-har-rasta-sunsan-hua/): जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का एक जैसा नुक़सान हुआ, ये दिल ये आसेब की नगरी मस्कन सोचूँ वहमों का सोच रहा हूँ इस नगरी में तू कब से मेहमान हुआ ? - [हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है](https://hindigazals.com/har-ek-shakl-me-surat-nayi-malal-kee-hai/): हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है हमारे चारों तरफ़ रौशनी मलाल की है, हम अपने हिज्र में तेरा विसाल देखते हैं यही ख़ुशी की है साअत, यही मलाल की है, हमारे ख़ाना ए दिल में नहीं है क्या क्या कुछ ये और बात कि हर शय इसी मलाल की है, अभी से शौक़ की आज़ुर्दगी का रंज न कर कि दिल को ताब ख़ुशी की न थी मलाल की है, किसी का रंज हो, अपना समझने लगते हैं वबाल ए जाँ ये कुशादा दिली मलाल की है, नहीं है ख़्वाहिश ए आसूदगी ए वस्ल हमें जवाज़ ए इश्क़ तो बस तिश्नगी मलाल की है, गुज़िश्ता रात कई बार दिल ने हम से कहा कि हो न हो ये घुटन आख़िरी मलाल की है, रगों में चीख़ता फिरता है एक सैल ए जुनूँ अगरचे लहजे में शाइस्तगी मलाल की है, अजीब होता है एहसास का तलव्वुन भी अभी ख़ुशी की ख़ुशी थी, अभी मलाल की है, ये किस उमीद पे चलने लगी है बाद ए मुराद ? - [सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की](https://hindigazals.com/sukhan-ke-shauq-me-tauheen-harf-ki-nahi-kee/): सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की कि हम ने दाद की ख़्वाहिश में शाएरी नहीं की, जो ख़ुदपसंद थे उन से सुख़न किया कम कम जो कज कुलाह थे उन से तो बात भी नहीं की, कभी भी हम ने न की कोई बात मस्लहतन मुनाफ़िक़त की हिमायत, नहीं, कभी नहीं की, दिखाई देता कहाँ फिर अलग से अपना वजूद सो हम ने ज़ात की तफ़्हीम आख़िरी नहीं की, उसे बताया नहीं है कि मैं बदन में नहीं जो बात सब से ज़रूरी है वो अभी नहीं की, ब नाम ए ख़ुश नफ़सी हम तो आह भरते रहे कि सिर्फ़ रंज किया हम ने, ज़िंदगी नहीं की, हमेशा दिल को मयस्सर रही है दौलत ए हिज्र जुनूँ के रिज़्क़ में उस ने कभी कमी नहीं की, ब सद ख़ुलूस उठाता रहा सभी के ये नाज़ हमारे दिल ने हमारी ही दिलबरी नहीं की, जिसे वतीरा बनाए रही वो चश्म ए ग़ज़ाल वो बेरुख़ी की सुहुलत हमें भी थी, नहीं की, है एक उम्र से मामूल रोज़ का इरफ़ान दुआ ए रद्द ए अना हम ने आज ही नहीं की..!! - [इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना](https://hindigazals.com/ishq-gar-haath-chhudaye-to-chhudane-dena/) - [सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है](https://hindigazals.com/sarfaroshi-ki-tamanna-ab-humare-dil-me-hai/): सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए क़ातिल में है, ऐ शहीद ए मुल्क ओ मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार ले तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है, वाए क़िस्मत पाँव की ऐ ज़ोफ़ कुछ चलती नहीं कारवाँ अपना अभी तक पहली ही मंज़िल में है, रहरव ए राह ए मोहब्बत रह न जाना राह में लज़्ज़त ए सहरा नवर्दी दूरी ए मंज़िल में है, शौक़ से राह ए मोहब्बत की मुसीबत झेल ले एक ख़ुशी का राज़ पिन्हाँ जादा ए मंज़िल में है, आज फिर मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार बार आएँ वो शौक़ ए शहादत जिन के जिन के दिल में है, मरने वालो आओ अब गर्दन कटाओ शौक़ से ये ग़नीमत वक़्त है ख़ंजर कफ़ ए क़ातिल में है, माने ए इज़हार तुम को है हया, हम को अदब कुछ तुम्हारे दिल के अंदर कुछ हमारे दिल में है, मयकदा सुनसान ख़ुम उल्टे पड़े हैं जाम चूर सर निगूँ बैठा है साक़ी जो तेरी महफ़िल में है, वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है ? - [मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते](https://hindigazals.com/mazlis-e-gam-na-koi-bazm-e-tarab-kya-karte/): मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब, क्या करते ? ये तो अच्छा क्या तन्हाई की आदत रखी तब उसे छोड़ दिया होता तो अब क्या करते ? - [वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया](https://hindigazals.com/wo-charag-e-jaan-ki-charag-tha-khin-rahguzar-me-bujh-gaya/): वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस ए क़रार में बुझ गया, मुझे क्या ख़बर थी तेरी जबीं की वो रौशनी मेरे दम से थी मैं अजीब सादा मिज़ाज था तेरे ए’तिबार में बुझ गया, मुझे रंज है कि मैं मौसमों की तवक़्क़ुआत से कम रहा मेरी लौ को जिस में अमाँ मिली मैं उसी बहार में बुझ गया, वो जो लम्स मेरी तलब रहा वो झुलस गया मेरी खोज में सो मैं उस की ताब न ला सका कफ़ ए दाग़दार में बुझ गया, जिन्हें रौशनी का लिहाज़ था जिन्हें अपने ख़्वाब पे नाज़ था मैं उन्ही की सफ़ में जला किया मैं उसी क़तार में बुझ गया..!! - [मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है](https://hindigazals.com/mere-siwa-bhi-koi-giraftar-mujh-me-hai/): मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है या फिर मेरा वजूद ही बेज़ार मुझ में है, मेरी ग़ज़ल किसी के तकल्लुम की बाज़गश्त एक यार ए ख़ुश कलाम ओ तरहदार मुझ में है, हद है कि तू न मेरी अज़िय्यत समझ सका शायद कोई बला का अदाकार मुझ में है, जिस का वजूद वक़्त से पहले की बात है वो भी अदम से बरसर ए पैकार मुझ में है, तू है कि तेरी ज़ात का इक़रार हर नफ़स मैं हूँ कि मेरी ज़ात का इंकार मुझ में है, तुझ से न कुछ कहा तो किसी से न कुछ कहा कितनी शदीद ख़्वाहिश ए इज़हार मुझ में है, मैं क्या हूँ काएनात में कुछ भी नहीं हूँ मैं फिर क्यूँ इसी सवाल की तकरार मुझ में है ? - [चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है](https://hindigazals.com/chup-hai-aagaz-me-fir-shor-e-ajal-padta-hai/): चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है और कहीं बीच में इम्कान का पल पड़ता है, एक वहशत है कि होती है अचानक तारी एक ग़म है कि यकायक ही उबल पड़ता है, याद का फूल महकते ही नवाह ए शब में कोई ख़ुशबू से मुलाक़ात को चल पड़ता है, हुजरा ए ज़ात में सन्नाटा ही ऐसा है कि दिल ध्यान में गूँजती आहट पे उछल पड़ता है, रोक लेता है अबद वक़्त के उस पार की राह दूसरी सम्त से जाऊँ तो अज़ल पड़ता है, साअतों की यही तकरार है जारी हर दम मेरी दुनिया में कोई आज, न कल पड़ता है, ताब ए यक लहज़ा कहाँ हुस्न ए जुनूँ ख़ेज़ के पेश साँस लेने से तवज्जोह में ख़लल पड़ता है, मुझ में फैली हुई तारीकी से घबरा के कोई रौशनी देख के मुझ में से निकल पड़ता है, जब भी लगता है सुख़न की न कोई लौ है न रौ दफ़अतन हर्फ़ कोई ख़ूँ में मचल पड़ता है, ग़म छुपाए नहीं छुपता है करूँ क्या इरफ़ान नाम लूँ उस का तो आवाज़ में बल पड़ता है..!! - [मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए](https://hindigazals.com/mohabbat-me-wafadari-se-bachiye/): मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए जहाँ तक हो अदाकारी से बचिए, हर एक सूरत भली लगती है कुछ दिन लहू की शो’बदा कारी से बचिए, शराफ़त आदमियत दर्द मंदी बड़े शहरों में बीमारी से बचिए, ज़रूरी क्या हर एक महफ़िल में बैठें तकल्लुफ़ की रवा दारी से बचिए, बिना पैरों के सर चलते नहीं हैं बुज़ुर्गों की समझदारी से बचिए..!! - [मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं](https://hindigazals.com/mutthi-bhar-logo-ke-hathon-me-lakhon-ki-taqdeeren-hain/): मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन ज़ंजीरें हैं, आज और कल की बात नहीं है सदियों की तारीख़ यही है हर आँगन में ख़्वाब हैं लेकिन चंद घरों में ताबीरें हैं, जब भी कोई तख़्त सजा है मेरा तेरा ख़ून बहा है दरबारों की शान ओ शौकत मैदानों की शमशीरें हैं, हर जंगल की एक कहानी वो ही भेंट वही क़ुर्बानी गूँगी बहरी सारी भेड़ें चरवाहों की जागीरें हैं..!! - [रात के बाद नए दिन की सहर आएगी](https://hindigazals.com/raat-ke-baad-naye-din-ki-sahar-ayegi/): रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी, हँसते हँसते कभी थक जाओ तो छुप के रो लो ये हँसी भीग के कुछ और चमक जाएगी, जगमगाती हुई सड़कों पे अकेले न फिरो शाम आएगी किसी मोड़ पे डस जाएगी, और कुछ देर यूँही जंग सियासत मज़हब और थक जाओ अभी नींद कहाँ आएगी, मेरी ग़ुर्बत को शराफ़त का अभी नाम न दे वक़्त बदला तो तिरी राय बदल जाएगी, वक़्त नदियों को उछाले कि उड़ाए पर्बत उम्र का काम गुज़रना है गुज़र जाएगी..!! - [कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत](https://hindigazals.com/kath-putli-hai-ya-jivan-hai-jite-jaao-socho-mat/): कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ सोचो मत, लिखा हुआ किरदार कहानी में ही चलता फिरता है कभी है दूरी कभी मिलन है जीते जाओ सोचो मत, नाच सको तो नाचो जब थक जाओ तो आराम करो टेढ़ा क्यूँ घर का आँगन है जीते जाओ सोचो मत, हर मज़हब का एक ही कहना जैसा मालिक रक्खे रहना जब तक साँसों का बंधन है जीते जाओ सोचो मत, घूम रहे हैं बाज़ारों में सरमायों के आतिश दान किस भट्टी में कौन ईंधन है जीते जाओ सोचो मत..!! - [वतन की सरज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं](https://hindigazals.com/watan-ki-sarzamin-se-ishq-o-ulfat-hum-bhi-rakhte-hain/): वतन की सरज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं, ज़रूरत हो तो मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं ये जुरअत ये शुजाअत ये बसालत हम भी रखते हैं, ज़माने को हिला देने के दावे बाँधने वालो ज़माने को हिला देने की ताक़त हम भी रखते हैं, बला से हो अगर सारा जहाँ उन की हिमायत पर ख़ुदा ए हर दो आलम की हिमायत हम भी रखते हैं, बहार ए गुलशन ए उम्मीद भी सैराब हो जाए करम की आरज़ू ऐ अब्र ए रहमत हम भी रखते हैं, गिला ना मेहरबानी का तो सब से सुन लिया तुम ने तुम्हारी मेहरबानी की शिकायत हम भी रखते हैं, भलाई ये कि आज़ादी से उल्फ़त तुम भी रखते हो बुराई ये कि आज़ादी से उल्फ़त हम भी रखते हैं, हमारा नाम भी शायद गुनहगारों में शामिल हो जनाब ए जोश से साहब सलामत हम भी रखते हैं..!! - [न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है](https://hindigazals.com/na-jaane-kaun-saa-manzar-nazar-me-rahta-hai/): न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है, लड़ाई देखे हुए दुश्मनों से मुमकिन है मगर वो ख़ौफ़ जो दीवार ओ दर में रहता है, ख़ुदा तो मालिक ओ मुख़्तार है कहीं भी रहे कभी बशर में कभी जानवर में रहता है, अजीब दौर है ये तयशुदा नहीं कुछ भी न चाँद शब में न सूरज सहर में रहता है, जो मिलना चाहो तो मुझ से मिलो कहीं बाहर वो कोई और है जो मेरे घर में रहता है, बदलना चाहो तो दुनिया बदल भी सकती है अजब फ़ुतूर सा हर वक़्त सर में रहता है..!! - [इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी](https://hindigazals.com/insan-me-haiwan-yahan-bhi-hai-wahan-bhi/): इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँ ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी, हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी, रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी, उठता है दिल ओ जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही ये मीर का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी..!! - [देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ](https://hindigazals.com/dekha-hua-saa-kuch-hai-to-socha-hua-saa-kuch/): देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ, होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं जंगल सा फैल जाता है खोया हुआ सा कुछ, साहिल की गीली रेत पे बच्चों के खेल सा हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ, फ़ुर्सत ने आज घर को सजाया कुछ इस तरह हर शय से मुस्कुराता है रोता हुआ सा कुछ, धुँदली सी एक याद किसी क़ब्र का दिया और मेरे आस पास चमकता हुआ सा कुछ..!! - [ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे](https://hindigazals.com/zameen-dee-hai-to-thoda-saa-aasmaan-bhi-de/): ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे मेरे ख़ुदा मेरे होने का कुछ गुमान भी दे, बना के बुत मुझे बीनाई का अज़ाब न दे ये ही अज़ाब है क़िस्मत तो फिर ज़बान भी दे, ये काएनात का फैलाव तो बहुत कम है जहाँ समा सके तन्हाई वो मकान भी दे, मैं अपने आप से कब तक किया करूँ बातें मेरी ज़बाँ को कभी कोई तर्जुमान भी दे, फ़लक को चांद सितारे नवाज़ने वाले मुझे चराग़ जलाने को साएबान भी दे..!! - [गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया](https://hindigazals.com/girja-me-mandiron-me-azaanon-me-bat-gaya/): गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, इक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया, पहले तलाशा खेत फिर दरिया की खोज की बाक़ी का वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया, जब तक था आसमान में सूरज सभी का था फिर यूँ हुआ वो चंद मकानों में बट गया, हैं ताक में शिकारी निशाना हैं बस्तियाँ आलम तमाम चंद मचानों में बट गया, ख़बरों ने की मुसव्वरी ख़बरें ग़ज़ल बनीं ज़िंदा लहू तो तीर कमानों में बट गया..!! - [अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे](https://hindigazals.com/ashk-e-naadaan-se-kaho-baad-me-pachhtayenge/): अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे आप गिर कर मेरी आँखों से किधर जाएँगे ? - [हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा](https://hindigazals.com/har-ghadi-khud-se-uljhna-hai-muqaddar-mera/): हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा, किस से पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा, एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा, मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा, आइना देख के निकला था मैं घर से बाहर आज तक हाथ में महफ़ूज़ है पत्थर मेरा..!! - [ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में](https://hindigazals.com/ye-kaisi-kashmaksh-hai-zindagi-me/): ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में किसी को ढूँडते हैं हम किसी में, जो खो जाता है मिल कर ज़िंदगी में ग़ज़ल है नाम उस का शाएरी में, निकल आते हैं आँसू हँसते हँसते ये किस ग़म की कसक है हर ख़ुशी में, कहीं चेहरा कहीं आँखें कहीं लब हमेशा एक मिलता है कई में, चमकती है अंधेरों में ख़मोशी सितारे टूटते हैं रात ही में, सुलगती रेत में पानी कहाँ था कोई बादल छुपा था तिश्नगी में, बहुत मुश्किल है बंजारा मिज़ाजी सलीक़ा चाहिए आवारगी में..!! - [घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे](https://hindigazals.com/ghar-se-nikale-to-ho-socha-bhi-kidhar-jaaoge/): घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ नहीं लफ़्ज़ों पे भरोसा करना घर की दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे, शाम होते ही सिमट जाएँगे सारे रस्ते बहते दरिया से जहाँ होगे ठहर जाओगे, हर नए शहर में कुछ रातें कड़ी होती हैं छत से दीवारें जुदा होंगी तो डर जाओगे, पहले हर चीज़ नज़र आएगी बे मा’नी सी और फिर अपनी ही नज़रों से उतर जाओगे..!! - [कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया](https://hindigazals.com/koshish-ke-bavjood-ye-ilzam-rah-gaya/): कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया, छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था आग़ाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया, उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए दहशत गरों के हाथ में इस्लाम रह गया, उस का क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया, अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया..!! - [हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो](https://hindigazals.com/har-ek-ghar-me-diya-bhi-jale-anaj-bhi-ho/): हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो, रहेगी वा’दों में कब तक असीर ख़ुशहाली हर एक बार ही कल क्यूँ कभी तो आज भी हो, न करते शोर शराबा तो और क्या करते तुम्हारे शहर में कुछ और काम काज भी हो, हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो, बदल रहे हैं कई आदमी दरिंदों में मरज़ पुराना है इस का नया इलाज भी हो, अकेले ग़म से नई शाइरी नहीं होती ज़बान ए मीर में ग़ालिब का इम्तिज़ाज भी हो..!! - [कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है](https://hindigazals.com/koi-hindu-koi-muslim-koi-eesaai-hai/): कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ ख़ार न थीं पहले इबादत गाहें ये अक़ीदे हैं कि इंसान की तन्हाई है, तीन चौथाई से ज़ाइद हैं जो आबादी में उन के ही वास्ते हर भूक है महँगाई है, देखे कब तलक बाक़ी रहे सज धज उस की आज जिस चेहरा से तस्वीर उतरवाई है, अब नज़र आता नहीं कुछ भी दुकानों के सिवा अब न बादल हैं न चिड़ियाँ हैं न पुर्वाई है..!! - [काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में](https://hindigazals.com/kaajoo-bhune-plate-me-whisky-gilas-me/): काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में, पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैत इतना असर है खादी के उजले लिबास में, आज़ादी का ये जश्न मनाएँ वो किस तरह ? - [जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में](https://hindigazals.com/jitne-haramkhor-the-kurbo-jawar-me/): जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ जिनका रिकॉर्ड था वे चौधरी बने हैं उमर के उतार में, फ़ौरन खजूर छाप के परवान चढ़ गई जो भी ज़मीन ख़ाली पड़ी थी कछार में, बंजर ज़मीन पट्टे में जो दे रहे हैं आप ये रोटी का टुकड़ा है मियादी बुख़ार में, जब दस मिनट की पूजा में घंटों गुज़ार दें समझो कोई ग़रीब फँसा है शिकार में..!! - [पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो](https://hindigazals.com/pahle-janab-koi-shigufa-uchhal-do/): पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ क़ौम की गर्दन डल डाल दो, रिश्वत को हक़ समझ के जहाँ ले रहे हों लोग है और कोई मुल्क तो उसकी मिसाल दो ? - [आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा](https://hindigazals.com/aadmi-hi-aadmi-ke-beech-me-aane-laga/): आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा फिर वही गुज़रा ज़माना ख़ुद को दुहराने लगा, एक अदना सा इशारा उसने क्या है कर दिया बस्तियों पर बस्तियों का ख़ौफ़ मंडराने लगा, फिर लिखेगा दास्ताँ, जो है हक़ीक़त ही नहीं फिर सियासी भाव में उसका क़लम जाने लगा, है बग़ावत ये तो लो, हमने बग़ावत कर ही दी देखिए, शीशे में छिपकर कोई चिल्लाने लगा..!! - [अक़्ल बड़ी है या फिर भालू दानिश वाले ग़ौर करें](https://hindigazals.com/aql-badi-hai-yaa-fir-bhaloo-danish-wale-gaur-kare/): अक़्ल बड़ी है या फिर भालू दानिश वाले ग़ौर करें शाख़ पे बैठा है क्यों उल्लू दानिश वाले ग़ौर करें, जिसका जुर्म उसी का थाना वही पार्टी सत्ता में दाँव उसी में है क्यों चालू दानिश वाले ग़ौर करें, पढ़े लिखे खाते पीते मोटे ताज़े लड़की लड़के बदबू को कहते हैं ख़ुशबू दानिश वाले ग़ौर करें, ग़ुंडो की अज़मत के आगे इंक़लाब छुटभैया है किस उसूल का है ये पहलू दानिश वाले ग़ौर करें, जिसके पास मिले चिकनाई वही पार्टी अच्छी है लेनिन से ऊँचा है लालू दानिश वाले ग़ौर करें..!! - [चलो चलके मनाया जाए उसको](https://hindigazals.com/chalo-chalke-manaya-jaaye-usko/): चलो चलके मनाया जाए उसको गले से फिर लगाया जाए उसको, सियासत आदमी को बाँटती है ये सच अब तो बताया जाए उसको, वो चेहरा हो कि कोई ख़्वाब मीठा निगाहों में बसाया जाए उसको, बहुत ख़ामोश हो बच्चा जो कोई न तन्हा छोड़ जाया जाए उसको, परिंदे पर शिकारी की नज़र है अभी कुछ पल उड़ाया जाए उसको, कहाँ महफ़ूज़ आख़िर रह सकेगा वो इंसा है बताया जाए उसको, बहुत नज़दीक रहता है मेरे वो ज़रा सा आज़माया जाए उसको..!! - [भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो](https://hindigazals.com/bhookh-ke-ehsas-ko-sher-o-sukhan-tak-le-chalo/): भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़्लिसों की अंजुमन तक ले चलो, जो ग़ज़ल माशूक़ के जलवों से वाक़िफ़ हो गई उसको अब बेवा के माथे की शिकन तक ले चलो, मुझको सब्र ओ ज़ब्त की तालीम देना बाद में पहले अपनी रहबरी को आचरन तक ले चलो, ख़ुद को ज़ख़्मी कर रहे हैं ग़ैर के धोखे में लोग इस शहर को रोशनी के बाँकपन तक ले चलो..!! - [वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं](https://hindigazals.com/ved-me-jinka-hawala-haashiye-par-bhi-nahi/): वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं वे अभागे आस्था विश्वास लेकर क्या करें ? लोक रंजन हो जहाँ शंबूक वध की आड़ में उस व्यवस्था का घृणित इतिहास लेकर क्या करें ? - [सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं](https://hindigazals.com/sau-me-sattar-aadmi-filhal-jab-naashaad-hain/): सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है ? - [आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे](https://hindigazals.com/aankh-par-patti-rahe-aur-aql-par-taala-rahe/): आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे, देखने को दे उन्हें अल्लाह कंप्यूटर की आँख सोचने को कोई बाबा बाल्टीवाला रहे, तालिब ए शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे, एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छै चमचे रहें माइक रहे माला रहे..!! - [तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है](https://hindigazals.com/tumhari-faaielon-me-gaaon-ka-musam-gulabi-hai/): तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आँकड़ें झूठे हैं ये दावा किताबी है, उधर जम्हूरियत ढोल पीटे जा रहे हैं वो इधर पर्दे के पीछे बर्बरीयत है नवाबी है, लगी है होड़ सी देखो अमीरी और ग़रीबी में ये पूँजीवाद के ढाँचे की बुनियादी ख़राबी है, तुम्हारी मेज़ चाँदी की तुम्हारे जाम सोने के यहाँ ज़ुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है..!! - [नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ](https://hindigazals.com/naye-kapde-badal-kar-jaaoon-kahan/): नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए ? वो शख़्स तो शहर ही छोड़ गया मैं बाहर जाऊँ किस के लिए ? - [निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं](https://hindigazals.com/niyyat-e-shauq-bhar-na-jaaye-kahin/): निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं तू भी दिल से उतर न जाए कहीं, आज देखा है तुझ को देर के ब’अद आज का दिन गुज़र न जाए कहीं, न मिला कर उदास लोगों से हुस्न तेरा बिखर न जाए कहीं, आरज़ू है कि तू यहाँ आए और फिर उम्र भर न जाए कहीं, जी जलाता हूँ और सोचता हूँ राएगाँ ये हुनर न जाए कहीं, आओ कुछ देर रो ही लें नासिर फिर ये दरिया उतर न जाए कहीं..!! - [दिल धड़कने का सबब याद आया](https://hindigazals.com/dil-dhadakane-ka-sabab-yaad-aaya/): दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त तू मुसीबत में अजब याद आया, दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से फिर तेरा वादा ए शब याद आया, तेरा भूला हुआ पैमान ए वफ़ा मर रहेंगे अगर अब याद आया, फिर कई लोग नज़र से गुज़रे फिर कोई शहर ए तरब याद आया, हाल ए दिल हम भी सुनाते लेकिन जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया, बैठ कर साया ए गुल में नासिर हम बहुत रोए वो जब याद आया..!! - [दिल में एक लहर सी उठी है अभी](https://hindigazals.com/dil-me-ek-lahar-see-uthi-hai-abhi-2/): दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी और ये चोट भी नई है अभी, शोर बरपा है ख़ाना ए दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी, भरी दुनिया में जी नहीं लगता जाने किस चीज़ की कमी है अभी, तू शरीक ए सुख़न नहीं है तो क्या हम सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी, याद के बे निशाँ जज़ीरों से तेरी आवाज़ आ रही है अभी, शहर की बे चराग़ गलियों में ज़िंदगी तुझ को ढूँडती है अभी, सो गए लोग उस हवेली के एक खिड़की मगर खुली है अभी, तुम तो यारो अभी से उठ बैठे शहर में रात जागती है अभी, वक़्त अच्छा भी आएगा नासिर ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी..!! - [सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है](https://hindigazals.com/suna-hai-jab-se-ki-tum-ko-bhi-gam-gavara-hai/): सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है, कभी जो सुनता हूँ आवाज़ ए बाज़गश्त अपनी तो सोचता हूँ कि तुम ने मुझे पुकारा है, कहाँ गई मेरी ज़िंदा दिली मैं क्यों सोचूँ ? - [वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है](https://hindigazals.com/wo-hans-dete-hain-jab-mahfil-me-mera-naam-aata-hai/): वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम आता है, ग़म ए दौर ए मय ओ साग़र से बाला है मेरी रिंदी जो उठ जाती हैं वो नज़रें तो मुझ तक जाम आता है, किसी की हर अदा ए सर्द मेहरी को ख़ुदा रखे न हँसना काम आता है न रोना काम आता है, ये कौन आहू मिज़ाज ओ गेसू ए मुश्कीं ब दोश आया कि देखे से ज़बानों पर ख़ुदा का नाम आता है, बहार ए नौ भी आए लेकिन अब के देखना ये है गरेबाँ काम आता है कि दामाँ काम आता है, ये देखें ख़ंदा ए गुल का तमाशा देखने वाले हँसी की आड़ ले कर मौत का पैग़ाम आता है, बहार ए लाला ओ गुल पर मुझे हक़ हो न हो लेकिन चमन के रहने वालों में तो मेरा नाम आता है, रईस उस ने तो कुछ ऐसा भुलाया है कि क्या कहिए मगर उस का तसव्वुर है कि सुब्ह ओ शाम आता है..!! - [कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?](https://hindigazals.com/kaun-kahta-hai-ki-pee-kar-door-ho-jate-hai-gam/): कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? - [क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए](https://hindigazals.com/kya-kya-na-saamne-se-zamane-guzar-gaye/): क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए, बेताब दिल के सामने और मस्लहत की बात चाहा न जाएँ बज़्म में उन की मगर गए, सुनते हैं दिन शबाब के जान ए हयात हैं लेकिन वो सुब्ह ओ शाम जो रो कर गुज़र गए, क्या क्या मज़े उठाए हैं ज़ब्त ए मलाल में दिल ख़ून हो गया है जो आँसू ठहर गए, डरता हूँ मैं कि ज़ब्त का दामन न छूट जाए बंदा नवाज़ आप तो हद से गुज़र गए, कुछ कम नहीं ये अज़्मत ए आवारगान ए इश्क़ दुनिया ने उँगलियाँ तो उठाईं जिधर गए, देखा रईस तू ने ज़माने का ये तरीक़ अपने भी आज आँख बचा कर गुज़र गए..!! - [आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए](https://hindigazals.com/aaraaeesh-e-bahaar-ka-saamaan-kahan-se-aaye/): आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ मिले तो दौलत ए कौनैन भी निसार लेकिन सवाल ये है कि इंसाँ कहाँ से आए ? - [मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे](https://hindigazals.com/main-hazar-baar-chahoon-ki-wo-muskura-ke-dekhe/): मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के देखे ? - [सब को मा’लूम है ये बात कहाँ](https://hindigazals.com/sab-ko-malum-hai-ye-baat-kahan/): सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही कहा जाए मैं कहाँ उन का इल्तिफ़ात कहाँ ? - [कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के](https://hindigazals.com/kal-tak-ye-phool-rooh-e-ravan-the-bahar-ke/): कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के, देखा तो ज़र्रे ज़र्रे में जल्वे हैं यार के पछता रहा हूँ दैर ओ हरम में गुज़ार के, इस का तो ग़म नहीं कि नशेमन उजड़ गया इस का क़लक़ रहेगा कि दिन थे बहार के, ग़म से कभी गुरेज़ कभी साज़ बाज़ है हालात क्या बताऊँ दिल ए बेक़रार के, आए हैं मुद्दतों में जो दम भर के वास्ते हालात पूछते हैं शब ए इंतिज़ार के, क़ुर्बान जाऊँ हुस्न ए तसव्वुर के ऐ रईस पेश ए नज़र ख़िज़ाँ में हैं ख़ाके बहार के..!! - [क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस](https://hindigazals.com/kya-abhi-kahiyega-mujh-ko-apna-saudaai-ki-bas/): क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि बस, चौदहवीं का चाँद फूलों की महक ठंडी हवा रात उस काफ़िर अदा की ऐसी याद आई कि बस, हम को तो मंज़ूर है ही अपनी तस्कीन ए नज़र है मगर उन को भी वो शौक़ ए ख़ुद आराई कि बस, जब मुझे देखा उन्हें शर्म आ गई घबरा गए वो हुई है ख़ैर से दोनों कि रुस्वाई कि बस, अब भी कोह ए तूर पर गोया ज़बान ए हाल से है कोई और उस के जल्वे का तमन्नाई कि बस, चाक करने ही को था मैं दामन ए होश ओ ख़िरद जाने किस की मेरे कानों में सदा आई कि बस, आज वहशत से मिरी घबरा गए वो भी रईस आज तो ख़ुद पर मुझे इतनी हँसी आई कि बस..!! - [हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है](https://hindigazals.com/hum-ahal-e-dil-ka-samajhiye-qarar-baaqi-hai/): हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही रह गईं बीमार ए हिज्र की आँखें हयात बीत गई इंतिज़ार बाक़ी है, तबाहियों के सिले में सुकून ए दिल के लिए तसव्वुर ए निगह ए शर्मसार बाक़ी है, लहू के फूल खिले हैं रविश रविश देखो मेरे चमन में अभी तक बहार बाक़ी है, अगर इधर से कोई कारवाँ नहीं गुज़रा तो फिर ये राह में कैसा ग़ुबार बाक़ी है ? - [कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत](https://hindigazals.com/kam-mayassar-ho-jo-hoti-hai-usi-kee-qeemat/): कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत, पैरवी ए दिल ए नादाँ का सलीक़ा है जिन्हें उन से पूछे कोई बे राह रवी की क़ीमत, तुम ने हँसते मुझे देखा है तुम्हें क्या मालूम करनी पड़ती है अदा कितनी हँसी की क़ीमत, एहतिराम अपना ही ख़ुद जिस की निगाहों में न हो क्या भला उस की निगाहों में किसी की क़ीमत ? - [नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है](https://hindigazals.com/nazar-me-sab-kee-meri-be-khudi-ka-aalam-hai/): नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है, अजीब शय है ये नैरंगी ए ज़माना भी किसी का कोई नहीं है किसी का आलम है, मैं अब हक़ीक़त ए दुनिया समझ गया शायद ख़ुद अपने आप से बेगानगी का आलम है, हर एक देख रहा है मेरे तबस्सुम को किसे ख़बर जो मेरी ज़िंदगी का आलम है, मुझे अज़ीज़ है अब यूँ रईस नाकामी सुना है ग़म से गुज़र कर ख़ुशी का आलम है..!! - [जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं](https://hindigazals.com/jab-se-dil-me-tere-bakhshe-hue-gam-thahre-hain/): जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं, ग़म कि हर दौर में ठहराए गए हासिल ए ज़ीस्त और इस दौर में हम साहब ए ग़म ठहरे हैं, हम तेरी राह में उठे हैं बड़े अज़्म के साथ गर्दिश ए दहर भी ठहरी है जो हम ठहरे हैं, शौक़ ए आवारगी ओ ज़ौक़ तलब के क़ुर्बां उठ गए हैं तो कहाँ अपने क़दम ठहरे हैं, मैं तसव्वुर से कभी जिन के लरज़ उठता था वही हालात मोहब्बत का भरम ठहरे हैं, मग़्फ़िरत ही सही मयख़ाना ओ मय के मा’नी कि यहाँ आज सफ़ीरान ए हरम ठहरे हैं, सिर्फ़ आँखों ही में कम रुक न सके मेरी रईस मेरे आँसू किसी दामन में भी कम ठहरे हैं..!! - [तरह तरह के सवालात करते रहते हैं](https://hindigazals.com/tarah-tarah-ke-swalat-karte-rahte-hain/): तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई है हमें जब से दौलत ए एहसास ग़मों से सब के मुलाक़ात करते रहते हैं, ख़ुशी में ख़ुश हूँ मैं जिन की उन्हें ये क्या मालूम कि ख़ुदकुशी मेरे जज़्बात करते रहते हैं, नसीहतें न करें अब तो क्या करें कि रईस यूँही तलाफ़ी ए माफ़ात करते रहते हैं..!! - [नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची](https://hindigazals.com/niyaz-e-ishq-se-naaz-e-butaan-tak-baat-ja-pahunchi/): नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात जा पहुँची, मोहब्बत में कहीं एक राज़ दाँ तक बात जा पहुँची बस अब क्या था ज़माने की ज़बाँ तक बात जा पहुँची, ज़माना ताड़ लेगा मैं न कहता था ये अब समझे मुझे दीवाना कहने से कहाँ तक बात जा पहुँची ? - [क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है](https://hindigazals.com/kya-kahe-ye-zabr-kaisa-zindagi-ke-sath-hai/): क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के साथ है, ज़िंदा रखने की रिवायत आस्तीं के साँप की एक न एक हमदर्द भी हर आदमी के साथ है, अपनी अपनी मस्लहत है अपना अपना है मफ़ाद वर्ना इस दुनिया में कब कोई किसी के साथ है ? - [ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना](https://hindigazals.com/khud-apni-zillat-o-khwari-na-karna/): ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते हो किसी की भी दिल आज़ारी न करना, अगर तौफ़ीक़ हो सच बोलने की तो अपनी भी तरफ़दारी न करना, तुम्हें हम जानते पहचानते हैं कभी हम से अदाकारी न करना किसी के साथ कर लेना इबादत हर एक के साथ मयख़्वारी न करना, न गिर जाना रईस अपनी नज़र से कभी तौहीन ए ख़ुद्दारी न करना..!! - [दिल में मेरे अरमान बहुत हैं](https://hindigazals.com/dil-me-mere-arman-bahut-hain/): दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप अभी नादान बहुत हैं, ऐसे ही हँस कर दिल रख लो वैसे तो अरमान बहुत हैं, है तो उन का नाम लबों पर इतने भी औसान बहुत हैं, ग़ौर करोगे तो काँटों के गुलशन पर एहसान बहुत हैं..!! - [जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग](https://hindigazals.com/jaise-koi-rabt-nahi-ho-jaise-ho-anjane-log/): जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने लोग, मुँह से बात निकलते ही सौ गढ़ लेंगे अफ़्साने लोग बैठे बैठे बुन लेते हैं कैसे ताने बाने लोग, दैर ओ हरम ही से दुनिया को होश की राहें मिलती हैं दैर ओ हरम के नाम पे ही बन जाते हैं दीवाने लोग, कोई उन्हें भी तो समझाए कोई कुछ उन से भी कहे जब देखो तब आ जाते हैं मुझ को ही समझाने लोग, हज़रत ए ज़ाहिद समझा दें तो तौबा कर लूँ मैं भी रईस बादल क्यों छा जाते हैं जब जाते हैं मयख़ाने लोग..!! - [अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब](https://hindigazals.com/apni-ankhen-hain-aur-tumhare-khwab/): अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब कितने पुर कैफ़ हैं हमारे ख़्वाब, उन के हक़ में बड़ा सहारा हैं देखते हैं जो बे सहारे ख़्वाब, हासिल ए ज़िंदगी जिन्हें कहिए कुछ हमारे हैं कुछ तुम्हारे ख़्वाब, यूँही बनते बिगड़ते रहते हैं गर्दिश ए वक़्त के सहारे ख़्वाब, हाँ न टूटे तिलिस्म ए ख़ुशफ़हमी यूँही देखो रईस प्यारे ख़्वाब..!! - [वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए](https://hindigazals.com/wo-sangdil-to-faqat-dekhne-se-toot-gaye/): वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए ये देखने में हमारे पसीने छूट गए, उन्हें हमारे सिवा क़ाफ़िले से कुछ न मिला मगर लुटेरे हमारा भरम तो लूट गए, तुम्हारी दीद का दरवाज़ा खटखटाया ज़रूर मैं क्या करूँ कि निगाहों के हाथ टूट गए, तुम्हारे दश्त से कुछ ख़ास हाथ आया नहीं ज़रा से आबले लाए थे वो भी फूट गए, न खाईं ठोकरें उस की गली के पत्थरों से गुज़रने वालो तुम्हारे नसीब फूट गए..!! - [दिल इतना खो गया आराइशों में](https://hindigazals.com/dil-itna-kho-gaya-aaraaeesho-me/): दिल इतना खो गया आराइशों में तेरी ख़्वाहिश नहीं है ख़्वाहिशों में, तेरी यादें हैं और आँसू हमारे चिताएँ जल रही हैं बारिशों में, हमारी रूह घुट के मर गई है हमारे जिस्म की गुंजाइशों में, हम अपने क़त्ल का ज़िम्मा किसे दें है सारा शहर ही फ़रमाइशों में..!! - [किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं](https://hindigazals.com/kis-taraf-kafila-jana-hai-kahan-dekhte-hain/): किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं, ऐसा माहौल बना रक्खा है दरवाज़े पर आते जाते हुए सब मेरा मकाँ देखते हैं, जंग बीनाई को किस मोड़ पे ले आई है आसमाँ देखना चाहें तो धुआँ देखते हैं, लोग कहते हैं तू मौजूद नहीं दुनिया में हम को फिर भी नज़र आता है जहाँ देखते हैं, पैरहन देख रहे हैं ये सभी लोग मेरा तुम तो कहते थे कि अंदाज़ ए बयाँ देखते हैं..!! - [हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता](https://hindigazals.com/haath-aankhon-pe-rakh-lene-se-khatra-nahi-jaata/): हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की तराज़ू में तो अज़्मत नहीं तुलती फ़ीते से तो किरदार को नापा नहीं जाता, फ़रमान से पेड़ों पे कभी फल नहीं लगते तलवार से मौसम कोई बदला नहीं जाता, चोर अपने घरों में तो नहीं नक़्ब लगाते अपनी ही कमाई को तो लूटा नहीं जाता, औरों के ख़यालात की लेते हैं तलाशी और अपने गरेबान में झाँका नहीं जाता, फ़ौलाद से फ़ौलाद तो कट सकता है लेकिन क़ानून से क़ानून को बदला नहीं जाता, ज़ुल्मत को घटा कहने से बारिश नहीं होती शो’लों को हवाओं से तो ढाँपा नहीं जाता, तूफ़ान में हो नाव तो कुछ सब्र भी आ जाए साहिल पे खड़े हो के तो डूबा नहीं जाता, दरिया के किनारे तो पहुँच जाते हैं प्यासे प्यासों के घरों तक कोई दरिया नहीं जाता, अल्लाह जिसे चाहे उसे मिलती है मुज़फ़्फ़र इज़्ज़त को दुकानों से ख़रीदा नहीं जाता..!! - [खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें](https://hindigazals.com/khula-hai-jhooth-ka-bazar-aao-sach-bolen/): खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया है इंसानियत की क़द्रों पर यही है मौक़ा ए इज़हार आओ सच बोलें, हमें गवाह बनाया है वक़्त ने अपना ब नाम ए अज़्मत ए किरदार आओ सच बोलें, सुना है वक़्त का हाकिम बड़ा ही मुंसिफ़ है पुकार कर सर ए दरबार आओ सच बोलें, तमाम शहर में क्या एक भी नहीं मंसूर कहेंगे क्या रसन ओ दार आओ सच बोलें, बजा कि ख़ू ए वफ़ा एक भी हसीं में नहीं कहाँ के हम भी वफ़ादार आओ सच बोलें, जो वस्फ़ हम में नहीं क्यूँ करें किसी में तलाश अगर ज़मीर है बेदार आओ सच बोलें, छुपाए से कहीं छुपते हैं दाग़ चेहरे के नज़र है आइना बरदार आओ सच बोलें, क़तील जिन पे सदा पत्थरों को प्यार आया किधर गए वो गुनहगार आओ सच बोलें..!! - [रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर](https://hindigazals.com/rakha-nahi-tha-tu-ne-mera-dil-sambhal-kar/): रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर अब कुछ न कर सकेगा लिहाज़ा मलाल कर, रक़्साँ थी शब को धूप तुम्हारे ख़याल की फ़ुर्सत का चाँद बैठ गया दिल सँभाल कर, बाहर निकल के देख अँधेरों से एक बार रखा है रौशनी ने कलेजा निकाल कर, कहते हैं दिल जिसे कहीं मौजूद ही नहीं देखा है मैं ने बारहा सीना खँगाल कर, बाब ए क़फ़स खुला था रिहा तब न हो सके अब क्या करें ज़मीन से रस्ता निकाल कर ? - [जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं](https://hindigazals.com/janab-e-aali-bichhadne-kee-koi-baat-nahi/): जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं हमारे सीने में एक दिल है पाँच सात नहीं, बहुत झिझक के किया है मुसाफ़हा तुम ने तुम्हारे हाथ में शायद तुम्हारा हाथ नहीं, ज़माने भर से तअल्लुक़ की पर्दादारी है किसे बताएँ कि अब तू हमारे साथ नहीं, हमारी ज़ात से बाहर हमें तलाश करो हमारी ज़ात के अंदर हमारी ज़ात नहीं, मैं चाहता हूँ तअल्लुक़ बहाल करना मगर तुम्हारा दिल ही नहीं है तो कोई बात नहीं, हम अपने पैरों को ये बात कैसे समझाएँ अब उस गली में हमारे मुआमलात नहीं..!! - [हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे](https://hindigazals.com/haqim-e-shahar-ke-andaz-hai-hinda-jaise/): हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे हम तो हाथों में थमा देंगे कलेजा जैसे, सख़्त मुश्किल था मुझे छोड़ के आना तुझ को सुकड़ी गलियों से निकलता है जनाज़ा जैसे, यूँ दिलाया है उसे अपनी मोहब्बत का यक़ीन मुंकिर ए दीं को पढ़ाया गया कलमा जैसे, उस का झुँझलाना तो बनता था कि मैं ने उस को ऐसे देखा कभी देखा ही नहीं था जैसे, ज़िंदगी साथ तेरे इतनी हसीं लगती है धूप में बैठा हुआ दूध मुँह बच्चा जैसे, ज़िंदगी घूम रही है तेरी यादें ले कर मौत के घर में टहलती हुई बेवा जैसे..!! - [यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है](https://hindigazals.com/yun-bharam-apni-ameeree-ka-bana-rakha-hai/): यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है घर तो ख़ाली है मगर ताला लगा रखा है, आल ए मक़्तूल तो मक़्तल में खड़ी है ख़ामोश आप ने किस लिए हंगामा मचा रखा है ? - [करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी](https://hindigazals.com/karta-hai-koi-ab-bhi-paziraaee-humari/): करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी, हम देख के दुनिया भी तुझे देख न पाए बेकार पड़ी रह गई बीनाई हमारी, लगता है बिछड़ कर भी नज़र आते रहेंगे है उस के महल्ले में शनासाई हमारी, हम तेरे ख़यालों में भटकते रहे बेजा आवाज़ लगाती रही तन्हाई हमारी, अब सब से मुसव्विर का पता पूछ रहा है इतनी उसे तस्वीर पसंद आई हमारी, रुस्वाई पे हम नाज़ करें क्यों न बताएँ जब आप से मंसूब है रुस्वाई हमारी..!! - [चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ](https://hindigazals.com/chashm-dekhoon-na-main-us-kee-na-hee-abroo-dekhoon/): चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में हर सू देखूँ ? इस भरे शहर में बस एक ही सौदागर है अब मैं सामान खरीदूँ कि तराज़ू देखूँ ? - [वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में](https://hindigazals.com/wo-aa-ke-baithe-the-jis-waqt-aashiyane-me/): वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में अमीर झाँक रहे थे ग़रीब ख़ाने में, हज़ार क़ाफ़िले गुज़रे हैं सामने से मगर मैं रह गया हूँ तुम्हें देखने दिखाने में, तमाम उम्र बिछड़ने से ख़ौफ़ खाया मगर ज़रा सी देर लगी अस्थियाँ बहाने में, हमारे दिल को सुकून आ गया है जब से मियाँ मची हुई है अजब हड़बड़ी ज़माने में, ख़ुदा के वास्ते चेहरा सँभाल कर रखना लगा हुआ है कोई आइना बनाने में..!! - [ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त](https://hindigazals.com/zindagi-aise-chal-rahi-hai-dost/): ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त जैसे मय्यत निकल रही है दोस्त, आज जाना है ग़म की महफ़िल में शक्ल कपड़े बदल रही है दोस्त, बेवफ़ा तुम हो बेवफ़ा हम हैं बर्फ़ पर नाव चल रही है दोस्त, होश नीचे गिराएगा उस को नींद रस्सी पे चल रही है दोस्त, ये उदासी हमारी आँखों में कितने नाज़ों से पल रही है दोस्त आग कैसे बुझेगी पानी से आग पानी में जल रही है दोस्त..!! - [आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे](https://hindigazals.com/aankh-se-kaise-kahoon-ab-bhi-andhera-dekhe/): आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे मुद्दतें बीत गईं धूप का जल्वा देखे, दो गिलासों में समुंदर तो नहीं आ सकता ये नज़र तुझ को अगर देखे तो कितना देखे ? - [तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है](https://hindigazals.com/tu-to-tanha-sar-e-bazar-nikal-jaata-hai/): तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है देखते देखते माहौल बदल जाता है, तुम ने हर बार मेरे इश्क़ का इंकार किया इतनी कोशिश में फटा नोट भी चल जाता है, जब भी लगती है भनक आप से मंसूब हूँ मैं सामने वाले का लहजा ही बदल जाता है, देर तक रह नहीं पाती तेरे चेहरे पे नज़र इस चढ़ाई पे मेरा पाँव फिसल जाता है, धूप से हाथ छुड़ाया तो हमें इल्म हुआ साया औक़ात से बाहर भी निकल जाता है..!! - [तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले](https://hindigazals.com/tu-mujhe-yaad-kare-aisa-tareeqa-nikale/): तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले मेरी यकतरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले, तेरी आँखों में दिखाई दे मोहब्बत मेरी बे नमाज़ी तेरे बस्ते से मुसल्ला निकले, वर्ना हम कब के चट्टानों में फँसे मर जाते पाँव काटे तो तेरे दश्त से ज़िंदा निकले, जंग में कौन निकलता है घरों से बाहर तू ने आवाज़ लगाई थी लिहाज़ा निकले, तेरी राहों में भटकते हुए मौत आ जाए और ऐसे में मेरी जेब से नक़्शा निकले, इतनी ख़ामोशी से निकले हैं तेरे शोर से हम जैसे बाज़ार के मजमा से जनाज़ा निकले, आज आऊँगा तेरे पास मोहब्बत ले कर मुद्दतें हो गईं इज़्ज़त का जनाज़ा निकले..!! - [दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद](https://hindigazals.com/dil-kisi-ka-na-hua-ek-kharidar-ke-baad/): दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद यहाँ लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बाद, क़त्ल कर के भी हमें दिल नहीं भरता उन का लात भी मारते हैं जिस्म पे तलवार के बाद, ख़ुद को बदबख़्त कहूँ या मैं कहूँ ख़ुशक़िस्मत मेरी बीनाई गई है तेरे दीदार के बाद, शहर ख़ाली न हो ये सोच के हम ख़ाना बदोश जम हो जाते हैं हर रात को बाज़ार के बाद, सिर्फ़ पछतावा हुआ है हमें तुझ से मिल कर कभी गुफ़्तार से पहले कभी गुफ़्तार के बाद..!! - [रह रह के याद आती है उस शर्मसार की](https://hindigazals.com/rah-rah-ke-yaad-aati-hai-us-sharmsar-kee/): रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि गिर न जाए मोहब्बत का आशियाँ मिट्टी खिसक रही है मिरे एतिबार की, मुरझा रहा है दिल में तेरी याद का दरख़्त क्या धूप पड़ रही है तेरे इंतिज़ार की, एक तुझ को देखना ही मेरा काम काज था क्यों धज्जियाँ उड़ा दीं मेरे रोज़गार की, वो शख़्स आ के मेरे महल्ले में बस गया मुझ पर निगाह पड़ गई परवरदिगार की..!! - [हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए](https://hindigazals.com/hum-ek-roz-us-ko-bhulaane-nikal-gaye/): हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए जब आए लौट कर तो ज़माने निकल गए, एक शख़्स जा रहा था हमारे ज़मीन से हम आसमान सर पे उठाने निकल गए, तू तो ख़मोश हो गया फिर हम गली गली तेरी तरफ़ का शोर मचाने निकल गए, जब जब हमारे हाथ में आए हमारे पाँव उन की गली में ख़ाक उड़ाने निकल गए, उस कमसुख़न ने आज बहुत खुल के बात की मुफ़्लिस की झोपड़ी से ख़ज़ाने निकल गए, बिल्कुल नई ज़बान थी उस के कलाम में लेकिन हमारे कान पुराने निकल गए, जब जब भी याद आईं तुम्हारी हथेलियाँ हम दोस्तों से हाथ मिलाने निकल गए..!! - [शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम](https://hindigazals.com/sharmindagi-me-umr-basar-kar-rahe-hain-hum/): शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम, पीना करो न बंद मुलाक़ात की शराब मुद्दत के बाद तुम पे असर कर रहे हैं हम, ऐसे भटक रहे हैं तुम्हारी तलाश में दुनिया को लग रहा है सफ़र कर रहे हैं हम, दिल सारी बात भूल गया सोचना भी मत हँस हँस के तुझ से बात अगर कर रहे हैं हम, तू शहर में नहीं है मगर इस के बावजूद तेरी गली से रोज़ गुज़र कर रहे हैं हम..!! - [अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले](https://hindigazals.com/ab-kahan-dost-mile-saath-nibhane-wale/): अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले सब ने सीखे हैं अब आदाब ज़माने वाले, दिल जलाओ या दिए आँखों के दरवाज़े पर वक़्त से पहले तो आते नहीं आने वाले, अश्क बन के मैं निगाहों में तेरी आऊँगा ऐ मुझे अपनी निगाहों से गिराने वाले, वक़्त बदला तो उठाते हैं अब उँगली मुझ पर कल तलक हक़ में मेरे हाथ उठाने वाले, वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता दर्द कुछ होते हैं ता उम्र रुलाने वाले, एक नज़र देख तू मजबूरियाँ भी तो मेरी ऐ मेंरी लग़्ज़िशों पर आँख टिकाने वाले, कौन कहता है बुरे काम का फल भी है बुरा देख मसनद पे हैं मस्जिद को गिराने वाले, ये सियासत है कि लानत है सियासत पे सदा ख़ुद हैं मुजरिम बने क़ानून बनाने वाले..!! - [ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा](https://hindigazals.com/ye-mohabbat-ka-fasana-bhi-badal-jayega/): ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा, आज कल में कोई तूफ़ान है उठने वाला हम ग़रीबों का ठिकाना भी बदल जाएगा, मुझ से लिल्लाह न सरकार छुड़ाएँ दामन आप बदले तो ज़माना भी बदल जाएगा, फिर बहार आई है गुलशन का नज़ारा कर लो वर्ना ये वक़्त सुहाना भी बदल जाएगा, मुफ़्लिसी मसनद ए ज़रदार पे क़ाबिज़ होगी महल बदलेगा ज़माना भी बदल जाएगा, किस को मालूम था अंजाम ये होगा अज़हर घर बदलते ही घराना भी बदल जाएगा..!! - [बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया](https://hindigazals.com/bazm-e-takallufaat-sajaane-me-rah-gaya/): बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया, तासीर के लिए जहाँ तहरीफ़ की गई एक झोल बस वहीं पे फ़साने में रह गया, सब मुझ पे मोहर ए जुर्म लगाते चले गए मैं सब को अपने ज़ख़्म दिखाने में रह गया, ख़ुद हादसा भी मौत पे उस की था दम ब ख़ुद वो दूसरों की जान बचाने में रह गया, अब अहल ए कारवाँ पे लगाता है तोहमतें वो हम सफ़र जो हीले बहाने में रह गया, मैदान ए कार ज़ार में आए वो क़ौम क्या जिस का जवान आईना ख़ाने में रह गया, वो वक़्त का जहाज़ था करता लिहाज़ क्या मैं दोस्तों से हाथ मिलाने में रह गया, सुनता नहीं है मुफ़्त जहाँ बात भी कोई मैं ख़ाली हाथ ऐसे ज़माने में रह गया, बाज़ार ए ज़िंदगी से क़ज़ा ले गई मुझे ये दौर मेरे दाम लगाने में रह गया, ये भी है एक कार ए नुमायाँ हफ़ीज का क्या सादा लौह कैसे ज़माने में रह गया..!! - [पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन](https://hindigazals.com/paa-ba-gil-sab-hai-rihaaee-kee-kare-tadbeer-kaun/): पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन दस्त बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन ? - [मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया](https://hindigazals.com/meri-saari-zindagi-ko-be-samar-us-ne-kiya/): मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया उम्र मेरी थी मगर उस को बसर उस ने किया, मैं बहुत कमज़ोर था इस मुल्क में हिजरत के बा’द पर मुझे इस मुल्क में कमज़ोर तर उस ने किया, राहबर मेरा बना गुमराह करने के लिए मुझ को सीधे रास्ते से दर ब दर उस ने किया, शहर में वो मो’तबर मेरी गवाही से हुआ फिर मुझे इस शहर में ना मो’तबर उस ने किया, शहर को बरबाद कर के रख दिया उस ने मुनीर शहर पर ये ज़ुल्म मेरे नाम पर उस ने किया..!! - [जब ख़िलाफ़ ए मस्लहत जीने की नौबत आई थी](https://hindigazals.com/jab-khilaf-e-maslahat-jeene-kee-naubat-aayi-thee/): जब ख़िलाफ़ ए मस्लहत जीने की नौबत आई थी डूब मरते डूब मरने में अगर दानाई थी, मैं तो हर मुमकिन उसे लाता रहा तेरे क़रीब क्या करूँ ऐ दिल तेरी तक़दीर में तन्हाई थी, ख़ौफ़ का इफ़रीत साँसें ले रहा था दश्त में रात के चेहरे पे सन्नाटे की दहशत छाई थी, एक ये नौबत कि वहशत ढूँढता फिरता हूँ मैं एक वो मौसम कि गुलशन की हुआ सहराई थी, आसमाँ से गिर रही थी शोख़ रंगों की फुवार मेरी आँखों में तेरे दीदार की रा’नाई थी, शब गज़ीदों से हिसाब ए ग़म चुकाने के लिए तुम न आए थे मगर सुब्ह ए क़यामत आई थी, मैं किधर जाता कि हर जानिब ज़बान ए ख़ल्क़ थी मैं कहाँ छुपता कि मेरे खोज में रुस्वाई थी, दहर में मशहूर थी शाहिद मेरी बे चारगी और अन-देखे जहानों पर मेरी दाराई थी..!! - [सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी](https://hindigazals.com/sada-rahegi-yahi-rawani-ravan-hai-paani/): सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी बहाओ इस का है जावेदानी रवाँ है पानी, बहाव में बह रहे हैं मौसम निगाह मंज़र बहाए जाता है सब को पानी रवाँ है पानी, कभी थे इन रास्तों में क़र्ये मकान चेहरे ये दास्ताँ है मगर पुरानी रवाँ है पानी, न अब वो साहिल न अब वो हस्ती न वो फ़सीलें न उस ज़मीं की कोई निशानी रवाँ है पानी वहाँ वो अक़्लीम जिस पे सिक्का रवाँ था अपना यहाँ हवाओं की हुक्मरानी रवाँ है पानी, वो रात दिन भी इसी रवानी में बह चुके हैं बिखर चुकीं वो रुतें सुहानी रवाँ है पानी, यहाँ मैं दोहरा रहा हूँ पहले सफ़र की बातें मगर कहाँ अब वो शादमानी रवाँ है पानी, ये अश्क धुँदला रहे हैं पैहम मिटा रहे हैं निगाह में याद की कहानी रवाँ है पानी, वो महफ़िलें हैं न अब वो साथी रहे हैं बाक़ी न अब वो बचपन न वो जवानी रवाँ है पानी..!! - [मय ए फ़राग़त का आख़िरी दौर चल रहा था](https://hindigazals.com/may-e-faragat-ka-aakhiri-daur-chal-raha-tha/): मय ए फ़राग़त का आख़िरी दौर चल रहा था सुबू किनारे विसाल का चाँद ढल रहा था, वो साज़ की लय कि नाचता था लहू रगों में वो हिद्दत ए मय कि लम्हा लम्हा पिघल रहा था, फ़ज़ा में लहरा रहे थे अफ़्सुर्दगी के साए अजब घड़ी थी कि वक़्त भी हाथ मल रहा था, सकूँ से महरूम थीं तरब गाह की नशिस्तें कि एक नया इज़्तिराब जिस्मों में चल रहा था, निगाहें दावत की मेज़ से दूर खो गई थीं तमाम ज़ेहनों में एक साया सा चल रहा था, हवा ए ग़ुर्बत की लहर अन्फ़ास में रवाँ थी नए सफ़र का चराग़ सीनों में जल रहा था, भड़क रही थी दिलों में हसरत की प्यास लेकिन वहीं नई आरज़ू का चश्मा उबल रहा था, बदन पे तारी था ख़ौफ़ गहरे समुंदरों का रगों में शौक़ ए शनावरी भी मचल रहा था, न जाने कैसा था इंक़लाब ए सहर का आलम बदल रही थी नज़र कि मंज़र बदल रहा था..!! - [हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का](https://hindigazals.com/har-dam-taraf-hai-waise-mizaz-karakht-ka/): हर दम तरफ़ है वैसे मिज़ाज करख़्त का टुकड़ा मेरा जिगर है कहो संग सख़्त का, सब्ज़ान इन रू की जहाँ जल्वा गाह थी अब देखिए तो वाँ नहीं साया दरख़्त का, जों बर्ग हा ए लाला परेशान हो गया मज़कूर क्या है अब जिगर लख़्त लख़्त का ? - [एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है](https://hindigazals.com/ek-lafz-e-mohabbat-ka-adna-ye-fasana-hai/): एक लफ़्ज़ ए मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल ए आशिक़ फैले तो ज़माना है, ये किस का तसव्वुर है ये किस का फ़साना है जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है, दिल संग ए मलामत का हर चंद निशाना है दिल फिर भी मेरा दिल है दिल ही तो ज़माना है, हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है, वो और वफ़ा दुश्मन मानेंगे न माना है सब दिल की शरारत है आँखों का बहाना है, शायर हूँ मैं शायर हूँ मेरा ही ज़माना है फ़ितरत मेरा आईना क़ुदरत मेरा शाना है, जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है, क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है हम ख़ाक नशीनों की ठोकर में ज़माना है, आग़ाज़ ए मोहब्बत है आना है न जाना है अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है, आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है, हम दर्द ब दिल नालाँ वो दस्त ब दिल हैराँ ऐ इश्क़ तो क्या ज़ालिम तेरा ही ज़माना है, या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है ऐ इश्क़ ए जुनूँ पेशा हाँ इश्क़ ए जुनूँ पेशा आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है, थोड़ी सी इजाज़त भी ऐ बज़्म गह ए हस्ती आ निकले हैं दम भर को रोना है रुलाना है, ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे एक आग का दरिया है और डूब के जाना है, ख़ुद हुस्न ओ शबाब उन का क्या कम है रक़ीब अपना जब देखिए अब वो हैं आईना है शाना है, तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म ए जानाँ एक नक़्श छुपाना है एक नक़्श दिखाना है, ये हुस्न ओ जमाल उन का ये इश्क़ ओ शबाब अपना जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है, मुझ को इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना अब आए वो अब आए लाज़िम उन्हें आना है, ख़ुद्दारी ओ महरूमी महरूमी ओ ख़ुद्दारी अब दिल को ख़ुदा रखे अब दिल का ज़माना है, अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में मासूम मोहब्बत का मासूम फ़साना है, आँसू तो बहुत से हैं आँखों में जिगर लेकिन बंध जाए सो मोती है रह जाए सो दाना है..!! - [किसी रांझे से इतना दूर कहाँ कोई हीर रहती है](https://hindigazals.com/kisi-raanjhe-se-itna-door-kahan-koi-heer-rahti-hai/): किसी रांझे से इतना दूर कहाँ कोई हीर रहती है मैं अब लाहौर रहता हूँ, वो अब कश्मीर रहती है, सियासी ज़ुल्म के चलते जो हम बिछड़े सैंतालिस में उस मंज़र की मेरे दिल में अब भी तस्वीर रहती है, सरहद से लौट आये सब लिखे जो राब्ते को ख़त दराज़ों में मोहब्बत की मिटी तहरीर रहती है, मिलेंगे हम कभी इस आस को दफ़ना दिया कब का किसी गोशे में क़ैद हो कर मेरी तक़दीर रहती है, ईद की रस्म अदा सारी बिन उसके हो ही जाती है हमेशा की तरह अक्सर बस फीकी खीर रहती है, कभी तो आयेगा वो दिन जिस पल साथ हम होंगे दिलासे को जो देता दिल यही तक़रीर रहती है, मेहज़ माशूक कह कर तुम उसे करना नहीं रुसवा किसी के इश्क़ की समझो वहाँ जागीर रहती है, ख़बर है वो भी लिखती है उसे भी शायरी का शौक़ अशज रहता जौन के देश वो मुल्क ए मीर रहती है..!! - [नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ](https://hindigazals.com/nekiyo-ke-zumre-me-bhi-ye-kaam-kar-jaao/): नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ मुस्कुरा के थोड़ा सा मेरे ज़ख़्म भर जाओ, कितने ग़म बदामाँ हो सुब्ह से परेशाँ हो शाम आने वाली है अब उठो सँवर जाओ, ज़िंदगी जो करनी है मुस्कुरा के दिन काटो वर्ना सब से मुँह मोड़ो ज़हर खा के मर जाओ, गो मगो में ज़हमत है सोचना क़यामत है जिस तरफ़ कहे जज़्बा बे धड़क उधर जाओ, सच भी अब फ़साना है हाए क्या ज़माना है सब को फूल दो लेकिन आप बे समर जाओ, वो भी सहमा सहमा है प्यार के नताएज से बेहतरीन मौक़ा है तुम भी एक मुकर जाओ, मैं तो रात काटूँगा घूम फिर के सड़कों पर कोई मुंतज़िर होगा तुम तो अपने घर जाओ..!! - [उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से](https://hindigazals.com/un-labon-kee-yaad-aayi-gul-ke-muskuraane-se/): उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से ज़ख़्म ए दिल उभर आए फिर बहार आने से, जाने थी गुरेज़ उन को या कि शर्म महफ़िल में रात मुझ से कतराए वो नज़र मिलाने से, राज़ जो छुपाए थे आज सब पे ज़ाहिर हैं कुछ मेरी कहानी से कुछ तेरे फ़साने से, हाल जो हमारा है सब तो उन पे रौशन है फिर बताऊँ क्या होगा हाल ए दिल सुनाने से, उन को हम से क्या मतलब हम को क्या ग़रज़ तर्क ए इश्क़ कर बैठे हम तो एक ज़माने से..!! - [दिल की बर्बादी में शामिल थी रज़ा आँखों की](https://hindigazals.com/dil-kee-barbadi-me-shamil-thi-raza-ankhon-kee/): दिल की बर्बादी में शामिल थी रज़ा आँखों की इस की पादाश में काम आई ज़िया आँखों की, आँख माहौल से जब तर्क ए तअ’ल्लुक़ कर ले ग़ौर कीजे तो वो होती है अना आँखों की, ज़ेर ए लब मौज ए तबस्सुम न अरूसाना लिबास हुस्न ए मा’सूम की पहचान हया आँखों की, हाल ए दिल लफ़्ज़ों का मुहताज है ये किस ने कहा कोई समझे तो ये आँसू हैं सदा आँखों की, हम को ले डूबेगा ये ज़ाहिर ओ बातिन का तज़ाद रूह का कर्ब जुदा राह जुदा आँखों की, गौहर ए अश्क को अर्ज़ां नहीं करते ये लोग क़द्र पहचानते हैं अहल ए वफ़ा आँखों की, आँखों वालों ने उड़ाया है अँधेरों का मज़ाक़ रौशनी छीन न ले उन से ख़ुदा आँखों की, इस को क्या कहते हैं इक़बाल मैं किस से पूछूँ हुस्न ख़ुद दाद तलब और ख़ता आँखों की..!! - [बहार की धूप में नज़ारे हैं उस किनारे](https://hindigazals.com/bahaar-kee-dhoop-me-nazaare-hai-us-kinare/): बहार की धूप में नज़ारे हैं उस किनारे सफ़ेद पानी के सब्ज़ धारे हैं उस किनारे, वहाँ की सुब्हों का रंग है फ़ाख़्ताओं जैसा हमेश्गी के निशान सारे हैं उस किनारे, फ़ज़ा फ़रिश्तों के नूर से जगमगा रही है धुले हुए आसमान सारे हैं उस किनारे, वहाँ की रातों में ख़्वाब हैं कीमिया गरों के रवाँ मेरी रूह के सितारे हैं उस किनारे, फ़ज़ाओं में कश्फ़ के दिए झिलमिला रहे हैं हवाओं में ग़ैब के इशारे हैं उस किनारे, वहाँ है फ़ैज़ान आसमाँ की ज़ियाफ़तों का फ़लक ने नेमत के ख़्वाँ उतारे हैं उस किनारे, वहाँ हैं अंगूर के चमन देवियों के दर्शन बहिश्त के एहतिमाम सारे हैं उस किनारे, किसान दिल शाद खेत आबाद हैं वहाँ के सफ़ेद भेड़ें हैं सब्ज़ चारे हैं उस किनारे, यहाँ ये ख़ामोश मातमी सोगवार साहिल वहाँ गडरियों के गीत प्यारे हैं उस किनारे..!! - [मुद्दत हुई अपनी आँखों को](https://hindigazals.com/muddat-hui-apni-ankhon-ko/): मुद्दत हुई अपनी आँखों को क्यों अश्क फ़िशानी याद आई ? क्या दिल ने उन्हें फिर याद किया फिर भूली कहानी याद आई ? - [जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ](https://hindigazals.com/jashn-e-gam-haa-dil-manaata-hoon/): जश्न ए ग़म हा ए दिल मनाता हूँ चोट खाता हूँ मुस्कुराता हूँ, हादसों से गुज़रता जाता हूँ जज़्बा ए दिल को आज़माता हूँ, अश्क ए ग़म की लतीफ़ शबनम से तेरी यादों के गुल खिलाता हूँ, ग़म ए दौराँ की तेज़ आँधी में दीप उम्मीद के जलाता हूँ, सामना जब भी उन का हो शाहीन बात कहने की भूल जाता हूँ..!! - [हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे](https://hindigazals.com/hum-bichhad-ke-tum-se-baadal-kee-tarah-rote-rahe/): हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते रहे, ज़िंदगी ने हाथ से ख़ंजर न रखा एक पल हम क़तील ए ग़म्ज़ा ओ नाज़ ए बुताँ होते रहे, लोक लहजे का सुहाना पन सुख़न की नग़्मगी शहर की आबादियों के शोर में खोते रहे, क्यूँ मता ए दिल के लुट जाने का कोई ग़म करे शहर ए दिल्ली में तो ऐसे वाक़िए होते रहे, सुर्ख़ियाँ अख़बार की गलियों में ग़ुल करती रहीं लोग अपने बंद कमरों में पड़े सोते रहे, महफ़िलों में हम रफ़ीक़ ओ राज़ दाँ समझे गए घर के आँगन में मगर तन्हाइयाँ बोते रहे..!! - [दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं](https://hindigazals.com/dil-ke-taataar-me-yaado-ke-ab-aahoo-bhi-nahi/): दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू भी नहीं, दश्त ए तन्हाई में आवाज़ के घुँगरू भी नहीं और ऐसा भी कि सन्नाटे का जादू भी नहीं, ज़िंदगी जिन की रिफ़ाक़त पे बहुत नाज़ाँ थी उन से बिछड़ी तो कोई आँख में आँसू भी नहीं, चाहते हैं रह ए मयख़ाना न क़दमों को मिले लेकिन इस शोख़ी ए रफ़्तार पे क़ाबू भी नहीं, तल्ख़ियाँ नीम के पत्तों की मिली हैं हर सू ये मेरा शहर किसी फूल की ख़ुशबू भी नहीं, जाने क्या सोच के हम रुक गए वीरानों में परतव ए रुख़ भी नहीं साया ए गेसू भी नहीं, हुस्न ए इमरोज़ को तश्बीहों में तौलें कैसे अब वो पहले से ख़म ए काकुल ओ अबरू भी नहीं, हम ने पाई है उन अशआर पे भी दाद ज़ुबैर जिन में उस शोख़ की तारीफ़ के पहलू भी नहीं..!! - [ज़माने में कहीं दिल को लगाना भी ज़रूरी था](https://hindigazals.com/zamane-me-kahin-dil-ko-lagana-bhi-zaruri-tha/): ज़माने में कहीं दिल को लगाना भी ज़रूरी था ग़लत कुछ भी नहीं लेकिन छुपाना भी ज़रूरी था, ग़म ए दौराँ में हम को मुस्कुराना भी ज़रूरी था कि काँटों से हमें दामन बचाना भी ज़रूरी था, ज़माना क्या कहेगा ये नहीं सोचा कभी हम ने जो था दिल में हमारे वो बताना भी ज़रूरी था, हमें पत्थर भी खाने थे हमें गाली भी खानी थी मगर दुनिया को आईना दिखाना भी ज़रूरी था, हमें हँसते हुए बस देखता तो रूठ जाता वो हमें हँसते हुए आँसू बहाना भी ज़रूरी था, न हम सोए न वो सोए न आई नींद दोनों को मगर जलते चराग़ों को बुझाना भी ज़रूरी था..!! - [ज़िक्र होता है उस परी वश का](https://hindigazals.com/zikr-hota-hai-us-pari-vash-ka/): ज़िक्र होता है उस परी वश का जब भी महफ़िल में बात होती है, उस की यादों की अंजुमन ही में दिन गुज़रता है और रात होती है, सदक़े उतरी है ज़ीस्त इस दिल के रूह की है मफ़ारिक़त तन से, इल्तिहाब ए वजूद ख़त्म हुआ ग़म से दिल को नजात होती है, लाख पहरे भी हों तो महफ़िल में बात करने से कैसे रोकेंगे ? - [ज़िंदगी भी अजब तमाशा है](https://hindigazals.com/zindagi-bhi-azab-tamasha-hai/): ज़िंदगी भी अजब तमाशा है कभी आशा कभी निराशा है, जिस में करती हैं गुफ़्तुगू आँखें वो मोहब्बत की एक भाषा है, ज़ुल्मत ए ग़म है छट ही जाएगी तुझ को ऐ दोस्त क्यों निराशा है ? - [तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ](https://hindigazals.com/tadap-raha-hai-dil-e-be-qarar-aa-jaao/): तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ बस एक बार ऐ जान ए बहार आ जाओ, तुम्हारे आने से लौट आएगी चमन में बहार ख़िज़ाँ उड़ाने लगी है ग़ुबार आ जाओ, लगा दी आग गुलिस्ताँ में दुश्मनों ने मगर बुझाएँ आग जो हैं जाँ निसार आ जाओ, हैं घर के सारे दरीचे ही वा तुम्हारे लिए तसव्वुरात की दुनिया में यार आ जाओ, न छूट जाए कहीं अब ये ज़ब्त का दामन न जाओ रूठ के जान ए बहार आ जाओ, सहर का तारा भी शाहीन कह रहा है यही गुज़र न जाए शब ए इंतिज़ार आ जाओ..!! - [जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद](https://hindigazals.com/jab-bhi-khalwat-me-meri-shama-jali-shaam-ke-baad/): जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद दिल के दरवाज़े पे दस्तक सी हुई शाम के बाद, चाँद तारों की जो महफ़िल थी सजी शाम के बाद मुझ को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद, दिन तो ख़ामोश गुज़र जाता है अपना लेकिन आ ही जाती है मगर याद तेरी शाम के बाद, जान ए मन कुछ तो इलाज ए ग़म ए दौराँ करना वर्ना बढ़ जाएगी अफ़्सुर्दा दिली शाम के साथ, शैख़ की बात पे जो कर ली थी तौबा हम ने आप के आते ही वो टूट गई शाम के बाद, वो भी अब तक नहीं आए न पयाम आया है फ़ोन की लाइन भी फिर टूट गई शाम के बाद, मेरी तन्हाई भी शाहीन बनी है दुश्मन मुझ को नागिन की तरह डसने लगी शाम के बाद..!! - [पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख](https://hindigazals.com/poshida-sab-kee-aankh-se-dil-kee-kitab-rakh/): पोशीदा सब की आँख से दिल की किताब रख मुमकिन हो गर तो ज़ख़्म के बदले गुलाब रख, एहसान करके भूल जा एहसान मत जता किस किस को क्या दिया है कभी मत हिसाब रख, सेहन ए चमन के ग़ुंचों में तक़्सीम कर ख़ुशी शबनम की तरह क़ल्ब की आँखें पुर आब रख, दीमक ज़दा कुतुब से न अलमारियाँ सजा पढ़ने को तजरबात की ज़िंदा किताब रख, नाकामियों की धूप में कटती है ज़िंदगी दिल के सुकून के लिए आँखों में ख़्वाब रख, हर ज़र्रा को चमकने का अंदाज़ बख़्श दे हर सुब्ह ए नौ के वास्ते एक आफ़्ताब रख, शाहीन ज़िंदगी को बनाना हो कामयाब ख़िश्त ए सवाल के लिए संग ए जवाब रख..!! - [मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना](https://hindigazals.com/mujhe-tum-shohraton-ke-darmiyan-gumnam-likh-dena/): मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये सारा हिज्र का मौसम ये सारी ख़ाना वीरानी इसे ऐ ज़िंदगी मेरे जुनूँ के नाम लिख देना, तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना मेरी आँखों पे अपनी दीद की एक शाम लिख देना, मेरे अंदर पनाहें ढूँढती फिरती है ख़ामोशी लब ए गोया मेरे अंदर भी एक कोहराम लिख देना, वो मौसम जा चुका जिस में परिंदे चहचहाते थे अब इन पेड़ों की शाख़ों पर सुकूत ए शाम लिख देना, शबिस्तानों में लौ देते हुए कुंदन से जिस्मों पर हवा की उँगलियों से वस्ल का पैग़ाम लिख देना..!! - [कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली](https://hindigazals.com/kabhi-khirad-se-kabhi-dil-se-dosti-kar-lee/): कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली न पूछ कैसे बसर हम ने ज़िंदगी कर ली, अँधेरी रात का मंज़र भी ख़ूब था लेकिन तुम आ गए तो चराग़ों में रौशनी कर ली, तुम्हारा जिस्म है जाड़ों का सर्द सन्नाटा हरारतों से कहाँ तुम ने दोस्ती कर ली, हुज़ूर ए दोस्त अजब हादिसा हुआ यारो हर एक हर्फ़ ए शिकायत ने ख़ुदकुशी कर ली, लिए फिरे हैं बहुत तुम को दिल की गलियों में इस एक बात पे दुनिया ने दुश्मनी कर ली, हर एक मोड़ पे ख़ंजर ब कफ़ थी तन्हाई ग़रीब ए शहर ने घबरा के ख़ुदकुशी कर ली..!! - [बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो](https://hindigazals.com/bichhadte-daamnon-me-phool-kee-kuch-pattiyan-rakh-do/): बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक जाती हैं तुम से दूर चेहरों के तआक़ुब में जो तुम चाहो मेरी आँखों पे अपनी उँगलियाँ रख दो, बरसते बादलों से घर का आँगन डूब तो जाए अभी कुछ देर काग़ज़ की बनी ये कश्तियाँ रख दो, धुआँ सिगरेट का बोतल का नशा सब दुश्मन ए जाँ हैं कोई कहता है अपने हाथ से ये तल्ख़ियाँ रख दो, बहुत अच्छा है यारो महफ़िलों में टूट कर मिलना कोई बढ़ती हुई दूरी भी अपने दरमियाँ रख दो, नुक़ूश ए ख़ाल ओ ख़द में दिल नवाज़ी की अदा कम है हिजाब आमेज़ आँखों में भी थोड़ी शोख़ियाँ रख दो, हमीं पर ख़त्म क्यूँ हो दास्तान ए ख़ाना वीरानी जो घर सहरा नज़र आए तो उस में बिजलियाँ रख दो..!! - [ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ](https://hindigazals.com/gurub-e-shaam-hi-se-khud-ko-yun-mahsus-karta-hoon/): ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दीया हूँ और हवा की ज़द पे रखा हूँ, चमकती धूप तुम अपने ही दामन में न भर लेना मैं सारी रात पेड़ों की तरह बारिश में भीगा हूँ, ये किस आवाज़ का बोसा मेरे होंटों पे काँपा है मैं पिछली सब सदाओं की हलावत भूल बैठा हूँ, बिछड़ के तुम से मैं ने भी कोई साथी नहीं ढूँढा हुजूम ए रहगुज़र में दूर तक देखो अकेला हूँ, कोई टूटा हुआ रिश्ता न दामन से उलझ जाए तुम्हारे साथ पहली बार बाज़ारों में निकला हूँ, मैं गिर के टूट जाऊँ या कोई मेहराब मिल जाए न जाने कब से हाथों में खिलौना बन के जीता हूँ..!! - [अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो](https://hindigazals.com/apne-ghar-ke-dar-o-deewar-ko-ooncha-na-karo/): अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो, जो न एक बार भी चलते हुए मुड़ के देखें ऐसी मग़रूर तमन्नाओं का पीछा न करो, हो अगर साथ किसी शोख़ की ख़ुशबू ए बदन राह चलते हुए मह पारों को देखा न करो, कल न हो ये कि मकीनों को तरस जाए ये दिल दिल के आसेब का हर एक से चर्चा न करो, इश्क़ आसार ज़ुलेखाओं की इस बस्ती में साहिबो पाकी ए दामाँ पे भरोसा न करो..!! - [मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू](https://hindigazals.com/meri-ankhon-ko-bakhshe-hain-aansoon/): मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू दिल को दाग़ ए अलम दे गए हैं, इस इनायत पे क़ुर्बान जाऊँ प्यार माँगा था ग़म दे गए हैं, देने आए थे हम को तसल्ली वो तसल्ली तो क्या हम को देते, तोड़ कर का’बा ए दिल हमारा हसरतों के सनम दे गए हैं, दिल तड़पता है फ़रियाद कर के आँख डरती है आँसू बहा के, ऐसी उल्फ़त से वो जाते जाते मुझ को अपनी क़सम दे गए हैं, मरहबा मयकशों का मुक़द्दर अब तो पीना इबादत है अनवर, आज रिंदों को पीने की दावत वाइ’ज़ ए मोहतरम दे गए हैं..!! - [हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे](https://hindigazals.com/haqiqat-ka-agar-afsana-ban-jaaye-to-kya-kijiye/): हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे गले मिल कर भी वो बेगाना बन जाए तो क्या कीजे ? - [ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा’द](https://hindigazals.com/laa-pila-de-saaqiya-paimana-paimane-ke-baad/): ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा’द बात मतलब की करूँगा होश आ जाने के बा’द, जो जलाता है किसी को ख़ुद भी जलता है ज़रूर शम्अ’ भी जलती रही परवाना जल जाने के बा’द, दिल मेरा लेने की ख़ातिर मिन्नतें क्या क्या न कीं कैसे नज़रें फेर लीं मतलब निकल जाने के बा’द, उठ चलो बस ए ज़फ़र इस महफ़िल ए अग़्यार से वर्ना पीनी ही पड़ेगी दौर चल जाने के बा’द..!! - [मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने](https://hindigazals.com/mohabbat-hi-na-jo-samjhe-wo-zalim-pyar-kya-jaane/): मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने निकलती दिल के तारों से जो है झंकार क्या जाने ? - [तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया](https://hindigazals.com/tu-ne-apna-jalwa-dikhaane-ko-jo-naqab-munh-se-utha-diya/): तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया वहीं महव ए हैरत ए बे ख़ुदी मुझे आइना सा बना दिया, वो जो नक़्श ए पा की तरह रही थी नुमूद अपने वजूद की सो कशिश ने दामन ए नाज़ की उसे भी ज़मीं से मिटा दिया, रग ओ पै में आग भड़क उठी फुंके है पड़ा ये सभी बदन मुझे साक़िया मय ए आतिशीं का ये जाम कैसा पिला दिया, जभी जा के मकतब ए इश्क़ में सबक़ ए मक़ाम ए फ़ना लिया जो लिखा पढ़ा था नियाज़ ने सो वो साफ़ दिल से भुला दिया..!! - [कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही](https://hindigazals.com/kahan-galat-galat-to-chupana-sahi-sahi/): कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही, ये सुब्ह सुब्ह चेहरे की रंगत उड़ी हुई कल रात तुम कहाँ थे बताना सही सही, दिल ले के मेरा हाथ में कहते हैं मुझ से वो क्या लोगे इस का दाम बताना सही सही, आँखें मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम ए मय साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही सही, ऐ मय फ़रोश भीड़ है तेरी दुकान पर गाहक हैं हम भी माल दिखाना सही सही, हम तो जान ओ दिल से फ़क़त आप के है बस क्या आप भी हैं हमारे बताना सही सही..?? - [फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा](https://hindigazals.com/firoon-dhoondhta-maykada-tauba-tauba/): फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा मुझे आज कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है, सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती मुझे मय कशी की ज़रूरत नहीं है, ये तर्क ए तअ’ल्लुक़ का क्या तज़्किरा है तुम्हारे सिवा कोई अपना नहीं है, अगर तुम कहो तो मैं ख़ुद को भुला दूँ तुम्हें भूल जाने की ताक़त नहीं है, हमेशा मेरे सामने से गुज़रना निगाहें चुरा कर मुझे देख लेना, मेरी जान तुम मुझ को इतना बता दो ये क्या चीज़ है गर मोहब्बत नहीं है, हज़ारों तमन्नाएँ होती हैं दिल में अभी तो बस एक तमन्ना यही है, मुझे एक दफ़ा अपना कह के पुकारो बस इस के सिवा कोई हसरत नहीं है..!! - [फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना](https://hindigazals.com/fasl-e-gul-hai-saja-hai-maykhana/): फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना चल मेरे दिल खुला है मयख़ाना, शाम के वक़्त बैठने के लिए सब से अच्छी जगह है मयख़ाना, ख़त है शायद किसी शराबी का ख़त के ऊपर लिखा है मयख़ाना, किस तरह छोड़ दूँ इसे वाइज़ मुश्किलों से मिला है मयख़ाना, ज़िंदगी जब गुज़ारनी है कहीं यार फिर क्या बुरा है मयख़ाना, जब से वो आँख है ख़फ़ा हम से यूँ लगे है ख़फ़ा है मयख़ाना..!! - [सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा](https://hindigazals.com/sahar-qareeb-hai-taaro-ka-haal-kya-hoga/): सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा अब इंतिज़ार के मारों का हाल क्या होगा ? तेरी निगाह ने ज़ालिम कभी है ये सोचा तेरी निगाह के मारों का हाल क्या होगा ? - [गुलाब आँखें शराब आँखें](https://hindigazals.com/gulab-aankhen-sharab-aankhen/): गुलाब आँखें शराब आँखें यही तो हैं ला जवाब आँखें, इन्हीं में उल्फ़त इन्हीं में नफ़रत सवाल आँखें जवाब आँखें, कभी नज़र में बला की शोख़ी कभी सरापा हिजाब आँखें, कभी छुपाती हैं हाल दिल के कभी हैं दिल की किताब आँखें, किसी ने देखीं तो झील जैसी किसी ने पाईं शराब आँखें, वो आए तो लोग मुझ से बोले हुज़ूर आँखें जनाब आँखें..!! - [निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं](https://hindigazals.com/nigaah-barq-nahi-chehra-aftab-nahi/): निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं, गुनह गुनह न रहा इतनी बादा नोशी की अब एक शग़्ल है कुछ लज़्ज़त ए शराब नहीं, हमें तो दूर से आँखें दिखाई जाती हैं नक़ाब लिपटी है उस पर कोई इताब नहीं, पिए बग़ैर चढ़ी रहती है हसीनों को वहाँ शबाब है क्या कम अगर शराब नहीं, बहार देता है छन छन के नूर चेहरे का सर ए नक़ाब है जो कुछ तह ए नक़ाब नहीं, वो अपने अक्स को आवाज़ दे के कहते हैं तेरा जवाब तो मैं हूँ मेरा जवाब नहीं, उसे भी आप के होंटों का पड़ गया चसका हज़ार छोड़िए छुटने की अब शराब नहीं, बुतों से पर्दा उठाने की बहस है बेकार खुली दलील है काबा भी बे नक़ाब नहीं, जलील ख़त्म न हो दौर ए जाम ए मीनाई कि इस शराब से बढ़ कर कोई शराब नहीं..!! - [दिल गया दिल लगी नहीं जाती](https://hindigazals.com/dil-gaya-dil-lagi-nahi-jaati/): दिल गया दिल लगी नहीं जाती रोते रोते हँसी नहीं जाती, आँखें साक़ी की जब से देखी हैं हम से दो घूँट पी नहीं जाती, कभी हम भी तड़प में बिजली थे अब तो करवट भी ली नहीं जाती, उन को सीने से भी लगा देखा हाए दिल की लगी नहीं जाती, बात करते वो क़त्ल करता है बात भी जिस से की नहीं जाती, आप में आए भी तो क्या आए लज़्ज़त ए बे ख़ुदी नहीं जाती, हैं वही मुझ से काविशें दिल की दोस्त की दुश्मनी नहीं जाती, हो गए फूल ज़ख़्म ए दिल खिल कर नहीं जाती हँसी नहीं जाती..!! - [ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है](https://hindigazals.com/zamana-hai-ki-guzra-jaa-raha-hai/): ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है ये दरिया है कि बहता जा रहा है, वो उट्ठे दर्द उठा हश्र उठा मगर दिल है कि बैठा जा रहा है, लगी थी उन के क़दमों से क़यामत मैं समझा साथ साया जा रहा है, ज़माने पर हँसे कोई कि रोए जो होना है वो होता जा रहा है, मेरे दाग़ ए जिगर को फूल कह कर मुझे काँटों में खींचा जा रहा है, बहार आई कि दिन होली के आए गुलों में रंग खेला जा रहा है, रवाँ है उम्र और इंसान ग़ाफ़िल मुसाफ़िर है कि सोता जा रहा है, सर ए मय्यत है ये इबरत का नौहा मोहब्बत का जनाज़ा जा रहा है, जलील अब दिल को अपना दिल न समझो कोई कर के इशारा जा रहा है..!! - [बात साक़ी की न टाली जाएगी](https://hindigazals.com/baat-saaqee-kee-na-taali-jayegi/): बात साक़ी की न टाली जाएगी कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी, वो सँवरते हैं मुझे इस की है फ़िक्र आरज़ू किस की निकाली जाएगी, दिल लिया पहली नज़र में आप ने अब अदा कोई न ख़ाली जाएगी, आते आते आएगा उन को ख़याल जाते जाते बे ख़याली जाएगी, क्या कहूँ दिल तोड़ते हैं किस लिए आरज़ू शायद निकाली जाएगी, गर्मी ए नज़्ज़ारा बाज़ी का है शौक़ बाग़ से नर्गिस निकाली जाएगी, देखते हैं ग़ौर से मेरी शबीह शायद उस में जान डाली जाएगी, ऐ तमन्ना तुझ को रो लूँ शाम ए वस्ल आज तू दिल से निकाली जाएगी, फ़स्ल ए गुल आई जुनूँ उछला जलील अब तबीअ’त कुछ सँभाली जाएगी..!! - [अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का](https://hindigazals.com/adaa-se-dekh-lo-jaata-rahe-gila-dil-ka/): अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का बस एक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का, सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का हुआ तुम्हारे बिगड़ने से फ़ैसला दिल का, बहार आते ही कुंज ए क़फ़स नसीब हुआ हज़ार हैफ़ कि निकला न जो सिला दिल का, जो ये निशाना उड़ा दो तो समझें तीर फ़गन बहुत है नावक ए मिज़्गाँ से फ़ासला दिल का, इलाही ख़ैर हो कुछ आज रंग बे ढब है टपक रहा है कई दिन से आबला दिल का, चला है छोड़ के तन्हा किधर तसव्वुर ए यार शब ए फ़िराक़ में था तुझ से मश्ग़ला दिल का, वो रिंद हूँ कि मुझे हथकड़ी से बै’अत है बला है गेसू ए जानाँ से सिलसिला दिल का, फिरा जो कूचा ए काकुल से कोई पूछेंगे सुना है लुट गया रस्ते में क़ाफ़िला दिल का, उमीद ए सुब्ह में करता हूँ चाक दामन ए शब जुनूँ में रोज़ निकाला है मश्ग़ला दिल का, वो ज़ुल्म करते हैं हम पर तो लोग कहते हैं ख़ुदा बुरे से न डाले मु’आमला दिल का, हज़ार फ़स्ल ए गुल आए जुनूँ वो जोश कहाँ गया शबाब के हमराह वलवला दिल का, ख़ुदा के हाथ है अपना अब ऐ ‘क़लक़’ इंसाफ़ बुतों से हश्र में होगा मुक़ाबला दिल का..!! - [हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना](https://hindigazals.com/haya-se-sar-jhuka-lena-adaa-se-muskura-dena/): हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना, ये तर्ज़ एहसान करने का तुम्हीं को ज़ेब देता है मरज़ में मुब्तला कर के मरीज़ों को दवा देना, बलाएँ लेते हैं उन की हम उन पर जान देते हैं ये सौदा दीद के क़ाबिल है क्या लेना है क्या देना, ख़ुदा की याद में महवियत ए दिल बादशाही है मगर आसाँ नहीं है सारी दुनिया को भुला देना..!! - [हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो](https://hindigazals.com/hoon-main-parwana-magar-shama-to-ho-raat-to-ho/): हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो हो, दिल भी हाज़िर सर ए तस्लीम भी ख़म को मौजूद कोई मरकज़ हो कोई क़िबला ए हाजात तो हो, दिल तो बेचैन है इज़हार ए इरादत के लिए किसी जानिब से कुछ इज़हार ए करामात तो हो, दिल कुशा बादा ए साफ़ी का किसे ज़ौक़ नहीं बातिन अफ़रोज़ कोई पीर ए ख़राबात तो हो, गुफ़्तनी है दिल ए पुर दर्द का क़िस्सा लेकिन किस से कहिए कोई मुस्तफ़्सिर ए हालात तो हो, दास्तान ए ग़म ए दिल कौन कहे कौन सुने बज़्म में मौक़ा ए इज़हार ए ख़यालात तो हो, वादे भी याद दिलाते हैं गिले भी हैं बहुत वो दिखाई भी तो दें उन से मुलाक़ात तो हो, कोई वाइ’ज़ नहीं फ़ितरत से बलाग़त में सिवा मगर इंसान में कुछ फ़हम ए इशारात तो हो..!! - [एक बोसा दीजिए मेरा ईमान लीजिए](https://hindigazals.com/ek-bosa-dijiye-mera-eemaan-lijiye/): एक बोसा दीजिए मेरा ईमान लीजिए गो बुत हैं आप बहर ए ख़ुदा मान लीजिए, दिल ले के कहते हैं तेरी ख़ातिर से ले लिया उल्टा मुझी पे रखते हैं एहसान लीजिए, ग़ैरों को अपने हाथ से हँस कर खिला दिया मुझ से कबीदा हो के कहा पान लीजिए, मरना क़ुबूल है मगर उल्फ़त नहीं क़ुबूल दिल तो न दूँगा आप को मैं जान लीजिए, हाज़िर हुआ करूँगा मैं अक्सर हुज़ूर में आज अच्छी तरह से मुझे पहचान लीजिए..!! - [बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी](https://hindigazals.com/bahut-raha-hai-kabhi-lutf-e-yaar-hum-par-bhi/): बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी गुज़र चुकी है ये फ़स्ल ए बहार हम पर भी, उरूस ए दहर को आया था प्यार हम पर भी ये बेसवा थी किसी शब निसार हम पर भी, बिठा चुका है ज़माना हमें भी मसनद पर हुआ किए हैं जवाहिर निसार हम पर भी, अदू को भी जो बनाया है तुम ने महरम ए राज़ तो फ़ख़्र क्या जो हुआ ए’तिबार हम पर भी, ख़ता किसी की हो लेकिन खुली जो उन की ज़बाँ तो हो ही जाते हैं दो एक वार हम पर भी, हम ऐसे रिंद मगर ये ज़माना है वो ग़ज़ब कि डाल ही दिया दुनिया का बार हम पर भी, हमें भी आतिश ए उल्फ़त जला चुकी अकबर हराम हो गई दोज़ख़ की नार हम पर भी..!! - [देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई](https://hindigazals.com/dekha-jo-husn-e-yaar-tabiyat-machal-gayi/): देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई आँखों का था क़ुसूर छुरी दिल पे चल गई, हम तुम मिले न थे तो जुदाई का था मलाल अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई, साक़ी तेरी शराब जो शीशे में थी पड़ी साग़र में आ के और भी साँचे में ढल गई, दुश्मन से फिर गई निगह ए यार शुक्र है एक फाँस थी कि दिल से हमारे निकल गई, पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर जलील बादल का रंग देख के नीयत बदल गई..!! - [शाम से आँख में नमी सी है](https://hindigazals.com/shaam-se-aankh-me-nami-see-hai/): शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है, दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है, कौन पथरा गया है आँखों में बर्फ़ पलकों पे क्यूँ जमी सी है ? - [दिल में एक लहर सी उठी है अभी](https://hindigazals.com/dil-me-ek-lahar-see-uthi-hai-abhi/): दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी और ये चोट भी नई है अभी, शोर बरपा है ख़ाना ए दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी, भरी दुनिया में जी नहीं लगता जाने किस चीज़ की कमी है अभी, तू शरीक ए सुख़न नहीं है तो क्या हम सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी, याद के बे निशाँ जज़ीरों से तेरी आवाज़ आ रही है अभी, शहर की बे चराग़ गलियों में ज़िंदगी तुझ को ढूँढती है अभी, सो गए लोग उस हवेली के एक खिड़की मगर खुली है अभी, तुम तो यारो अभी से उठ बैठे शहर में रात जागती है अभी, वक़्त अच्छा भी आएगा नासिर ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी..!! - [हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल](https://hindigazals.com/hum-hai-aur-un-kee-khushi-hai-aaj-kal/): हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल ज़िंदगी ही ज़िंदगी है आज कल, ग़म का हर आलम नया है इन दिनों दिल की हर दुनिया नई है आज कल, उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की याद वक़्त कितना क़ीमती है आज कल, चाँद भी है सोगवार ए हिज्र दोस्त फीकी फीकी चाँदनी है आज कल, जल रही है दिल में शम ए आरज़ू ग़म कदे में रौशनी है आज कल, तू है और दरिया दिली है साक़िया मैं हूँ और तिश्ना लबी है आज कल, बे क़रारी करवटों पर करवटें दिल का आलम दीदनी है आज कल, अर्ज़ ए ग़म पर मुस्कुराते भी नहीं बरहमी सी बरहमी है आज कल, हासिल ए तर्क ए मोहब्बत देखना अंजुमन सूनी पड़ी है आज कल, दिल में और मायूसियों में ऐ शकील इत्तिहाद ए बाहमी है आज कल..!! - [उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है](https://hindigazals.com/udaasi-aasmaan-hai-dil-mera-kitna-akela-hai/): उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंठ रख देना यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है, तुम्हारे शहर के सारे दिए तो सो गए कब के हवा से पूछना दहलीज़ पे ये कौन जलता है ? - [लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला](https://hindigazals.com/lahra-ke-jhoom-jhoom-ke-laa-muskura-ke-laa/): लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला फूलों के रस में चाँद की किरनें मिला के ला, कहते हैं उम्र ए रफ़्ता कभी लौटती नहीं जा मय कदे से मेरी जवानी उठा के ला, साग़र शिकन है शैख़ ए बला नोश की नज़र शीशे को ज़ेर ए दामन ए रंगीं छुपा के ला, क्यूँ जा रही है रूठ के रंगीनी ए बहार जा एक मर्तबा उसे फिर वर्ग़ला के ला, देखी नहीं है तू ने कभी ज़िंदगी की लहर अच्छा तो जा अदम की सुराही उठा के ला..!! - [मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो](https://hindigazals.com/mere-hi-lahoo-par-guzar-auqaat-karo-ho/): मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन एक सितम एक सितम रात करो हो वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो, हम ख़ाकनशीं तुम सुख़न आरा ए सर ए बाम पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो ? - [ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते](https://hindigazals.com/ye-tujh-se-aashna-duniya-se-begaane-kahan-jaate/): ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते तेरे कूचे से उठते भी तो दीवाने कहाँ जाते, क़फ़स में भी मुझे सय्याद के हाथों से मिलते हैं मेरी तक़दीर के लिखे हुए दाने कहाँ जाते, न छोड़ा ज़ब्त ने दामन नहीं तो तेरे सौदाई हुजूम ए ग़म से घबरा कर ख़ुदा जाने कहाँ जाते, मैं अपने आँसुओं को कैसे दामन में छुपा लेता जो पलकों तक चले आए वो अफ़्साने कहाँ जाते, तुम्हारे नाम से मंसूब हो जाते हैं दीवाने ये अपने होश में होते तो पहचाने कहाँ जाते, अगर कोई हरीम ए नाज़ के पर्दे उठा देता तो फिर काबा कहाँ रहता सनम-ख़ाने कहाँ जाते, नहीं था मुस्तहिक़ मख़मूर रिंदों के सिवा कोई न होते हम तो फिर लबरेज़ पैमाने कहाँ जाते..!! - [जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद](https://hindigazals.com/jis-ko-itna-chaha-main-ne-jis-ko-gazal-me-likha-chaand/): जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद छोड़ गया है मुझ को कैसे आज वो मेरा अपना चाँद, अपने चाँद की सोचों में गुम बैठा था तन्हाई में जाने मेरे दिल के सूने आँगन में कब निकला चाँद, छुप जाए कभी सामने आए खेले आँख मिचोली क्यों मेरी जान मुझे लगता है बिल्कुल तेरे जैसा चाँद, दुख हो सुख हो रंज ख़ुशी हो मुश्किल हो या आसानी हर मौसम में साथ निभाए मेरा यार पुराना चाँद, नफ़सा नफ़सी का आलम है सब को अपनी फ़िक्र पड़ी अपनी धरती अपना अम्बर अपना सूरज अपना चाँद, चेहरों से ख़ुशियाँ ओझल हैं और ग़मों से दिल बोझल अब के अपने देस में निकला ईद पे जाने कैसा चाँद..!! - [जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है](https://hindigazals.com/jise-khud-se-judaa-rakha-nahin-hai/): जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है वो मेरा है मगर मेरा नहीं है, जिसे खोने का मुझ को डर है इतना उसे मैं ने अभी पाया नहीं है, नुक़ूश अब ज़ेहन से मिटने लगे हैं बहुत दिन से उसे देखा नहीं है, सुना है फूल अब खिलते नहीं हैं तो क्या खुल कर वो अब हँसता नहीं है, नगर छोड़ा है जब से उस ग़ज़ल ने कोई शाइ’र ग़ज़ल कहता नहीं है, तेरी यादों से रौशन है मेरा दिल ये वो सूरज है जो ढलता नहीं है, मेरी आँखों का ये दरिया अजब है कि बहता है तो फिर थमता नहीं है, ख़ुशी का हो कोई या ग़म का लम्हा गुज़र जाता है क्यों रुकता नहीं है ? - [मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे](https://hindigazals.com/main-jo-kahta-hoon-tu-kajravee-chhod-de/): मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे, मैं ये कहता हूँ मुझ को दिवाना बना वो ये कहती है दीवानगी छोड़ दे, जब मैं तारीफ़ करता हूँ उस की कभी तब वो कहती है बस शाइ’री छोड़ दे, जब कभी दिल की बातें बताता हूँ मैं तब वो कहती है अब दिल लगी छोड़ दे, जब मैं कहता हूँ है जान हाज़िर मेरी वो ये कहती है अब जाँ मेरी छोड़ दे, जब मैं कहता हूँ जीना है मुश्किल बहुत तब वो कहती है जा ज़िंदगी छोड़ दे..!! - [मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर](https://hindigazals.com/main-ne-dekha-hai-kaisa-ye-sapna-naya-raat-ke-is-pahar/): मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर मुझ से बिछड़ा हुआ कोई अपना मिला रात के इस पहर, नींद क्यों उड़ गई चैन क्यों खो गया रात के इस पहर ये अचानक मेरे साथ क्या हो गया रात के इस पहर ? - [अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी](https://hindigazals.com/ab-ijazat-de-ki-main-hoon-jaan-ba-lab-ae-zindagi/): अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी मौत आती है बस अब हद्द ए अदब ऐ ज़िंदगी, किस लिए अब तक जिया हूँ और क्यों ज़िंदा रहूँ अपने होने का बता मुझ को सबब ऐ ज़िंदगी, क्यों बनी है जान की दुश्मन मेरी मुझ को बता तेरे पीछे मैं भला भागा हूँ कब ऐ ज़िंदगी ? - [मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी](https://hindigazals.com/musalsal-mujh-pe-ye-teri-inayat-maar-daalegi/): मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए शहर का क्या इस को ग़ुर्बत मार डालेगी अमीर ए शहर को दौलत की चाहत मार डालेगी, सड़क पर पाया जाएगा किसी दिन मेरा भी लाशा मुझे सच बोलते रहने की आदत मार डालेगी, ये तेरी दस्त गीरी एक दिन ले डूबेगी मुझ को मेरी हर बात पर तेरी हिमायत मार डालेगी, अगर चाहत की शिद्दत दिन ब दिन बढ़ती रही यूँ ही सबीह ए नीम जाँ तुझ को मोहब्बत मार डालेगी..!! - [गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर](https://hindigazals.com/girne-wali-hai-bahut-jald-ye-sarkar-huzoor/): गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर, कारवाँ यूँही भटकता रहे हर बार हुज़ूर नेक निय्यत न हों गर क़ाफ़िला ए सालार हुज़ूर, वो जो अज़ ख़ुद ही बने बैठे हैं सरदार हुज़ूर वक़्त एक दिन उन्हें लाएगा सर ए दार हुज़ूर, ख़ुद को देते हैं वो धोका यूँही बेकार हुज़ूर जो ख़ताओं का नहीं करते हैं इक़रार हुज़ूर, सामने आ के रहे सच सर ए बाज़ार हुज़ूर कोई कितना ही करे झूट का प्रचार हुज़ूर..!! - [रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर](https://hindigazals.com/rah-gaya-duniya-me-wo-ban-kar-tamasha-umr-bhar/): रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र भर, तुम अमीर ए शहर के घर को जला कर देखना घर में हो जाएगा मुफ़्लिस के उजाला उम्र भर, ऐसा लगता है कि अब वो क़ब्र तक जाएगी साथ दिल के ख़ानों में निहाँ थी जो तमन्ना उम्र भर, क़र्ज़ मेरी क़ौम वो कैसे चुकाएगी भला सूद ख़ुद को बेच कर जिस का उतार उम्र भर, जानता हूँ मुझ को डस लेगा वो मार ए आस्तीं जिस को अपना ख़ूँ पिला कर मैं ने पाला उम्र भर, ज़िंदगी ने’मत थी जिस को पा के तुम ख़ुश थे सबीह अब कहो क्या ज़िंदगी से तुम ने पाया उम्र भर..!! - [यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता](https://hindigazals.com/yun-shahar-ke-bazaar-me-kya-kya-nahin-milta/): यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता पर हुस्न में सानी कोई तेरा नहीं नहीं मिलता, जो कुछ दिल ए नाकाम ने चाहा नहीं मिलता मंज़िल नहीं मिलती कभी रस्ता नहीं मिलता, लहजा नहीं मिलता कभी चेहरा नहीं मिलता दुनिया में हमें एक भी तुम सा नहीं मिलता, छोड़ा है जो एक घर को तो दूजा नहीं मिलता अब दिल सा तेरे कोई ठिकाना नहीं मिलता, आती है ख़ुशी गर तो वो मिलती है अधूरी ग़म जब कभी मिलता है अकेला नहीं मिलता..!! - [सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए](https://hindigazals.com/sochta-hoon-main-ki-kuch-is-tarah-rona-chahiye/): सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए अपने अश्कों से तेरा दामन भिगोना चाहिए, ज़िंदगी की राह पर कैसे अकेले हम चलें इस सफ़र में हमसफ़र कोई तो होना चाहिए, दिल बहुत छोटा है मेरा और जहाँ में ग़म बहुत मैं परेशाँ हूँ किसे कैसे समोना चाहिए, बच्चा रोता है मगर रोता है वो तक़दीर पर माँ समझती है कि मुन्ने को खिलौना चाहिए, अजनबी बिस्तर ये बोला रात के पिछले पहर ऐ सबीह ए बे वतन अब तुझ को सोना चाहिए..!! - [ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी](https://hindigazals.com/khatm-shor-e-tufaan-tha-door-thi-siyaahi-bhi/): पस्ती ए ज़मीं से है रिफ़अत ए फ़लक क़ाएम मेरी ख़स्ता हाली से तेरी कज कुलाही भी, शम्अ भी उजाला भी मैं ही अपनी महफ़िल का मैं ही अपनी मंज़िल का राहबर भी राही भी, गुम्बदों से पलटी है अपनी ही सदा मजरूह मस्जिदों में की मैं ने जा के दाद ख़्वाही भी..!! - [चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए](https://hindigazals.com/chaman-hai-maqtal-e-nagma-ab-aur-kya-kahiye/): पुकारिए कफ़ ए क़ातिल को अब मआलिज ए दिल बढ़े जो नाख़ुन ए ख़ंजर गिरह कुशा कहिए, पड़े जो संग तो कहिए उसे निवाला ए ज़र लगे जो ज़ख़्म बदन पर उसे क़बा कहिए, फ़साना जब्र का यारों की तरह क्यूँ मजरूह ? - [ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है](https://hindigazals.com/khanzar-kee-tarah-boo-e-saman-tej-bahut-hai/): ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है, रास आए तो है छाँव बहुत बर्ग ओ शजर की हाथ आए तो हर शाख़ समर रेज़ बहुत है, लोगो मेरी गुलकारी ए वहशत का सिला क्या दीवाने को एक हर्फ़ ए दिल आवेज़ बहुत है, मुनइम की तरह पीर ए हरम पीते हैं वो जाम रिंदों को भी जिस जाम से परहेज़ बहुत है, मस्लूब हुआ कोई सर ए राह ए तमन्ना आवाज़ ए जरस पिछले पहर तेज़ बहुत है, मजरूह सुने कौन तेरी तल्ख़ नवाई गुफ़्तार ए अज़ीज़ाँ शकर आमेज़ बहुत है..!! - [इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए](https://hindigazals.com/is-baag-me-wo-sang-ke-qaabil-kaha-na-jaaye/): इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा न जाए, शाख़ों पे नोक ए तेग़ से क्या क्या खिले हैं फूल अंदाज़ ए लाला कारी ए क़ातिल कहा न जाए, किस के लहू के रंग हैं ये ख़ार शोख़ रंग क्या गुल कतर गई रह ए मंज़िल कहा न जाए, बाराँ के मुंतज़िर हैं समुंदर पे तिश्नालब अहवाल ए मेज़बानी ए साहिल कहा न जाए, मेरे ही संग ओ ख़िश्त से तामीर ए बाम ओ दर मेरे ही घर को शहर में शामिल कहा न जाए, ज़िंदाँ खुला है जब से हुए हैं रिहा असीर हर गाम है वो शोर ए सलासिल कहा न जाए, हम अहल ए इश्क़ में नहीं हर्फ़ ए गुनह से कम वो हर्फ़ ए शौक़ जो सर ए महफ़िल कहा न जाए, जिस हाथ में है तेग़ ए जफ़ा उस का नाम लो मजरूह से तो साए को क़ातिल कहा न जाए..!! - [आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला](https://hindigazals.com/aa-hi-jayegi-sahar-matla-e-imkaan-to-khula/): आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला न सही बाब ए क़फ़स रौज़न ए ज़िंदाँ तो खुला, ले के आई तो सबा उस गुल ए चीनी का पयाम वो सही ज़ख़्म की सूरत लब ए ख़ंदाँ तो खुला, सैल ए रंग आ ही रहेगा मगर ऐ किश्त ए चमन ज़र्ब ए मौसम तो पड़ी बंद ए बहाराँ तो खुला, दिल तलक पहुँचे न पहुँचे मगर ऐ चश्म ए हयात बाद मुद्दत के तेरा पंजा ए मिज़्गाँ तो खुला, दर्द का दर्द से रिश्ता है चलो ऐ मजरूह आज यारों से ये एक उक़्दा ए आसाँ तो खुला..!! - [अल्फाज़ के झूठे बंधन में](https://hindigazals.com/alfaaz-ke-jhuthe-bandhan-me/): अल्फाज़ के झूठे बंधन में आगाज़ के गहरे परों में हर शख्स मुहब्बत करता है, हालाकिं मुहब्बत कुछ भी नहीं सब झूठे रिश्ते नाते हैं सब दिल रखने की बातें हैं, कब कौन किसी का होता है ? - [आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से](https://hindigazals.com/aa-nikal-ke-maidaan-me-do-rukhi-ke-khaane-se/): आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से काम चल नहीं सकता अब किसी बहाने से, अहद ए इंक़लाब आया दौर ए आफ़्ताब आया मुंतज़िर थीं ये आँखें जिस की एक ज़माने से, अब ज़मीन गाएगी हल के साज़ पर नग़्मे वादियों में नाचेंगे हर तरफ़ तराने से, अहल ए दिल उगाएँगे ख़ाक से मह ओ अंजुम अब गुहर सुबुक होगा जौ के एक दाने से, मनचले बुनेंगे अब रंग ओ बू के पैराहन अब सँवर के निकलेगा हुस्न कारख़ाने से, आम होगा अब हमदम सब पे फ़ैज़ फ़ितरत का भर सकेंगे अब दामन हम भी इस ख़ज़ाने से, मैं कि एक मेहनतकश मैं कि तीरगी दुश्मन सुब्ह ए नौ इबारत है मेरे मुस्कुराने से, ख़ुद कुशी ही रास आई देख बद नसीबों को ख़ुद से भी गुरेज़ाँ हैं भाग कर ज़माने से, अब जुनूँ पे वो साअत आ पड़ी कि ऐ मजरूह आज ज़ख़्म ए सर बेहतर दिल पे चोट खाने से..!! - [कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने](https://hindigazals.com/kahin-be-khyaal-ho-kar-yunhi-chhoo-liya-kisi-ne/): कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे ख़ुदी ने, मेरे दिल मैं कौन है तू कि हुआ जहाँ अँधेरा वहीं सौ दिये जलाए तेरे रुख़ की चाँदनी ने, कभी इस परी का है कुछ कभी उस हसीं की महफ़िल मुझे दर ब दर फिराया मेरे दिल की सादगी ने, है भला सा नाम उस का मैं अभी से क्या बताऊँ किया बे क़रार हँस कर मुझे एक आदमी ने, अरे मुझ पे नाज़ वालो ये नियाज़ मंदियाँ क्यों है यही करम तुम्हारा तो मुझे न दोगे जीने..!! - [अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें](https://hindigazals.com/ahal-e-tufaan-aaoo-dil-walon-ka-afsana-kahe/): अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें मौज को गेसू भँवर को चश्म ए जानाना कहें, दार पर चढ़ कर लगाएँ नारा ए ज़ुल्फ़ ए सनम सब हमें बाहोश समझें चाहे दीवाना कहें, यार ए नुक्ता दाँ किधर है फिर चलें उस के हुज़ूर ज़िंदगी को दिल कहें और दिल को नज़राना कहें, थामें उस बुत की कलाई और कहें इस को जुनूँ चूम लें मुँह और इसे अंदाज़ ए रिंदाना कहें, सुर्ख़ी ए मय कम थी मैं ने छू लिए साक़ी के होंट सर झुका है जो भी अब अरबाब ए मयख़ाना कहें, तिश्नगी ही तिश्नगी है किस को कहिए मयकदा लब ही लब हम ने तो देखे किस को पैमाना कहें, पारा ए दिल है वतन की सरज़मीं मुश्किल ये है शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें, ऐ रुख़ ए ज़ेबा बता दे और अभी हम कब तलक तीरगी को शम ए तन्हाई को परवाना कहें, आरज़ू ही रह गई मजरूह कहते हम कभी एक ग़ज़ल ऐसी जिसे तस्वीर ए जानाना कहें..!! - [डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को](https://hindigazals.com/dara-ke-mauj-o-talatum-se-hum-nasheenon-ko/): डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, शराब हो ही गई है ब क़द्र ए पैमाना ब अज़्म ए तर्क निचोड़ा जब आस्तीनों को, जमाल ए सुब्ह दिया रू ए नौ बहार दिया मेरी निगाह भी देता ख़ुदा हसीनों को, हमारी राह में आए हज़ार मयख़ाने भुला सके न मगर होश के क़रीनों को, कभी नज़र भी उठाई न सू ए बादा ए नाब कभी चढ़ा गए पिघला के आबगीनों को, यही जहाँ है जहन्नम यही जहाँ फ़िरदौस बताओ आलम ए बाला के सैर बीनों को, हुए हैं क़ाफ़िले ज़ुल्मत की वादियों में रवाँ चराग़ ए राह किए ख़ूँ चकाँ जबीनों को, तुझे न माने कोई तुझ को इस से क्या मजरूह चल अपनी राह भटकने दे नुक्ता चीनों को..!! - [उठाए जा उन के सितम और जिए जा](https://hindigazals.com/uthaye-jaa-un-ke-sitam-aur-jiye-jaa/): उठाए जा उन के सितम और जिए जा यूँ ही मुस्कुराए जा आँसू पिए जा, यही है मोहब्बत का दस्तूर ऐ दिल वो ग़म दे तुझे तू दुआएँ दिए जा, कभी वो नज़र जो समाई थी दिल में उसी एक नज़र का सहारा लिए जा, सताए ज़माना सितम ढाए दुनिया मगर तू किसी की तमन्ना किए जा..!! - [तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी](https://hindigazals.com/taqdeer-ka-shikwa-be-maani/): तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो कोई मजबूर नहीं, ये महफ़िल ए अहल ए दिल है यहाँ हम सब मयकश हम सब साक़ी, तफ़रीक़ करें इंसानों में इस बज़्म का ये दस्तूर नहीं, जन्नत ब निगह तसनीम ब लब अंदाज़ उस के ऐ शैख़ न पूछ, मैं जिस से मोहब्बत करता हूँ इंसाँ है ख़याली हूर नहीं, वो कौन सी सुब्हें हैं जिन में बेदार नहीं अफ़्सूँ तेरा, वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं, सुनते हैं कि काँटे से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने, कहता है मगर ये अज़्म ए जुनूँ सहरा से गुलिस्ताँ दूर नहीं, मजरूह उठी है मौज ए सबा आसार लिए तूफ़ानों के, हर क़तरा ए शबनम बन जाए एक जू ए रवाँ कुछ दूर नहीं..!! - [निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने](https://hindigazals.com/nigaah-e-saaqee-e-na-meharbaan-ye-kya-jaane/): निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने, मिली जब उन से नज़र बस रहा था एक जहाँ हटी निगाह तो चारों तरफ़ थे वीराने, हयात लग़्ज़िश ए पैहम का नाम है साक़ी लबों से जाम लगा भी सकूँ ख़ुदा जाने, तबस्सुमों ने निखारा है कुछ तो साक़ी के कुछ अहल ए ग़म के सँवारे हुए हैं मयख़ाने, ये आग और नहीं दिल की आग है नादाँ चराग़ हो कि न हो जल बुझेंगे परवाने, फ़रेब ए साक़ी ए महफ़िल न पूछिए मजरूह शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने..!! - [गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है](https://hindigazals.com/go-raat-meri-subah-kee-marham-to-nahi-hai/): गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है सूरज से तेरा रंग ए हिना कम तो नहीं है, कुछ ज़ख़्म ही खाएँ चलो कुछ गुल ही खिलाएँ हर चंद बहाराँ का ये मौसम तो नहीं है, चाहे वो किसी का हो लहू दामन ए गुल पर सय्याद ये कल रात की शबनम तो नहीं है, इतनी भी हमें बंदिश ए ग़म कब थी गवारा पर्दे में तेरी काकुल ए पुरख़म तो नहीं है, अब कारगह ए दहर में लगता है बहुत दिल ऐ दोस्त कहीं ये भी तेरा ग़म तो नहीं है, सहरा में बगूला भी है मजरूह सबा भी हम सा कोई आवारा ए आलम तो नहीं है..!! - [सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं](https://hindigazals.com/soo-e-maqtal-ki-paye-sair-e-chaman-jaate-hain/): सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं अहल ए दिल जाम ब कफ़ सर ब कफ़न जाते हैं, आ गई फ़स्ल ए जुनूँ कुछ तो करो दीवानो अब्र सहरा की तरफ़ साया फ़गन जाते हैं, उस को देखा नहीं तुम ने कि यही कूचा ओ राह शाख़ ए गुल शोख़ी ए रफ़्तार से बन जाते हैं, वो अगर बात न पूछे तो करें क्या हम भी आप ही रूठते हैं आप ही मन जाते हैं, बुलबुलो अपनी नवा फ़ैज़ है उन आँखों का जिन से हम सीखने अंदाज़ ए सुख़न जाते हैं, जो ठहरती तो ज़रा चलते सबा के हमराह यूँ भी हम रोज़ कहाँ सू ए चमन जाते हैं, लुट गया क़ाफ़िला ए अहल ए जुनूँ भी शायद लोग हाथों में लिए तार ए रसन जाते हैं, रोक सकता हमें ज़िंदान ए बला क्या मजरूह हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं..!! - [रहते थे कभी जिन के दिल में हम](https://hindigazals.com/rahte-the-kabhi-jin-ke-dil-me-hum/): रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उन्ही के कूचे में हम आज गुनहगारों की तरह, दावा था जिन्हें हमदर्दी का ख़ुद आ के न पूछा हाल कभी, महफ़िल में बुलाया है हम पे हँसने को सितमगारों की तरह, बरसों के सुलगते तुम मन पर अश्कों के तो छींटे दे न सके, तपते हुए दिल के ज़ख़्मों पर बरसे भी तो अंगारों की तरह, सौ रूप भरे जीने के लिए बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिए, ठोकर न लगाना हम ख़ुद हैं गिरती हुई दीवारों की तरह..!! - [मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है](https://hindigazals.com/mujh-se-kaha-jibril-e-junoon-ne-ye-bhi-vahee-e-ilaahi-hai/): मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए दिल है बाक़ी सब गुमराही है, वो जो हुए फ़िरदौस बदर तक़्सीर थी वो आदम की मगर मेरा अज़ाब ए दर बदरी मेरी ना कर्दा गुनाही है, संग तो कोई बढ़ के उठाओ शाख़ ए समर कुछ दूर नहीं जिस को बुलंदी समझे हो उन हाथों की कोताही है, फिर कोई मंज़र फिर वही गर्दिश क्या कीजे ऐ कू ए निगार मेरे लिए ज़ंजीर ए गुलू मेरी आवारा निगाही है, बहर ए ख़ुदा ख़ामोश रहो बस देखते जाओ अहल ए नज़र क्या लग़ज़ीदा क़दम हैं उस के क्या दुज़दीदा निगाही है, दीद के क़ाबिल है तो सही मजरूह तेरी मस्ताना रवी गर्द ए हवा है रख़्त ए सफ़र रस्ते का शजर हमराही है..!! - [हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे](https://hindigazals.com/humen-shuoor-e-junoon-hai-ki-jis-chaman-me-rahe/): हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे, तू ऐ बहार ए गुरेज़ाँ किसी चमन में रहे मेरे जुनूँ की महक तेरे पैरहन में रहे, मुझे नहीं किसी उसलूब ए शाइरी की तलाश तेरी निगाह का जादू मेरे सुख़न में रहे, न हम क़फ़स में रुके मिस्ल ए बू ए गुल सय्याद न हम मिसाल ए सबा हल्क़ा ए रसन में रहे, खुले जो हम तो किसी शोख़ की नज़र में खुले हुए गिरह तो किसी ज़ुल्फ़ की शिकन में रहे, सरिश्क रंग न बख़्शे तो क्यूँ हो बार ए मिज़ा लहू हिना नहीं बनता तो क्यूँ बदन में रहे ? - [दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ](https://hindigazals.com/dushman-ke-dosti-hai-ab-ahal-e-watan-ke-saath/): दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के साथ, सर पर हवा ए ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ, किस ने कहा कि टूट गया ख़ंजर ए फ़रंग सीने पे ज़ख़्म ए नौ भी है दाग़ ए कुहन के साथ, झोंके जो लग रहे हैं नसीम ए बहार के जुम्बिश में है क़फ़स भी असीर ए चमन के साथ, मजरूह क़ाफ़िले की मेरे दास्ताँ ये है रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ..!! - [अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें](https://hindigazals.com/ab-ahal-e-dard-ye-jeene-ka-ehtimam-karen/): अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें, फ़रेब खा के उन आँखों का कब तलक ऐ दिल शराब ए ख़ाम पिएँ रक़्स ए ना तमाम करें, ग़म ए हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तेरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें, न माँगूँ बादा ए गुल गूँ से भीक मस्ती की अगर तेरे लब ए लालीं मेरा ये काम करें, न देखें दैर ओ हरम सू ए रह रवान ए हयात ये क़ाफ़िले तो न जाने कहाँ क़याम करें ? - [मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए](https://hindigazals.com/mujhe-sahal-ho-gayi-manzilen-wo-hawa-ke-rukh-bhi-badal-gaye/): मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया कि चराग़ राह में जल गए, वो लजाए मेरे सवाल पर कि उठा सके न झुका के सर उड़ी ज़ुल्फ़ चेहरे पे इस तरह कि शबों के राज़ मचल गए, वही बात जो वो न कह सके मेरे शेर ओ नग़्मा में आ गई वही लब न मैं जिन्हें छू सका क़दह ए शराब में ढल गए, वही आस्ताँ है वही जबीं वही अश्क है वही आस्तीं दिल ए ज़ार तू भी बदल कहीं कि जहाँ के तौर बदल गए, तुझे चश्म ए मस्त पता भी है कि शबाब गर्मी ए बज़्म है तुझे चश्म ए मस्त ख़बर भी है कि सब आबगीने पिघल गए, मेरे काम आ गईं आख़िरश यही काविशें यही गर्दिशें बढ़ीं इस क़दर मेरी मंज़िलें कि क़दम के ख़ार निकल गए..!! - [किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे](https://hindigazals.com/kisi-ne-bhi-to-na-dekha-nigaah-bhar-ke-mujhe/): किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर के मुझे, सबा भी लाई न कोई पयाम अपनों का सुना रही है फ़साने इधर उधर के मुझे, मुआ’फ़ कीजे जो मैं अजनबी हूँ महफ़िल में कि रास्ते नहीं मालूम इस नगर के मुझे, वो दर्द है कि जिसे सह सकूँ न कह पाऊँ मिलेगा चैन तो अब जान से गुज़र के मुझे..!! - [ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें](https://hindigazals.com/ye-ruke-ruke-se-aansoon-ye-dabi-dabi-see-aahen/): ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें, कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश ए दश्त ए रहबर कहीं जगमगा उठी हैं मेरे नक़्श ए पा से राहें, तेरे ख़ानुमाँ ख़राबों का चमन कोई न सहरा ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इन की बारगाहें, कभी जादा ए तलब से जो फिरा हूँ दिल शिकस्ता तेरी आरज़ू ने हँस कर वहीं डाल दी हैं बाँहें, मेरे अहद में नहीं है ये निशान ए सरबुलंदी ये रंगे हुए अमामे ये झुकी झुकी कुलाहें..!! - [शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं](https://hindigazals.com/shaam-e-gam-kee-qasam-aaj-gamgeen-hain/): शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम, दिल परेशान है रात वीरान है देख जा किस तरह आज तन्हा हैं हम, चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं मार डाले न दर्द ए जुदाई कहीं, रुत हसीं है तो क्या चाँदनी है तो क्या चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम, अब तो आ जा कि अब रात भी सो गई ज़िंदगी ग़म के सहराओं में खो गई, ढूँढती है नज़र तू कहाँ है मगर देखते देखते आया आँखों में दम..!! - [मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते](https://hindigazals.com/masarraton-ko-ye-ahal-e-hawas-na-kho-dete/): मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो देते, कहाँ वो शब कि तेरे गेसुओं के साए में ख़याल ए सुब्ह से हम आस्तीं भिगो देते, बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते, बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना किनारे वाले सफ़ीना मेरा डुबो देते, जो देखते मेरी नज़रों पे बंदिशों के सितम तो ये नज़ारे मेरी बेबसी पे रो देते, कभी तो यूँ भी उमँडते सरिश्क ए ग़म मजरूह कि मेरे ज़ख़्म ए तमन्ना के दाग़ धो देते..!! - [हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो](https://hindigazals.com/hum-ko-junoon-kya-sikhlaate-ho/): हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा, चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़्यादा, चाक ए जिगर मोहताज ए रफ़ू है आज तो दामन सर्फ़ ए लहू है, एक मौसम था हम को रहा है शौक़ ए बहाराँ तुम से ज़्यादा, अहद ए वफ़ा यारों से निभाएँ नाज़ ए हरीफ़ाँ हँस के उठाएँ, जब हमें अरमाँ तुम से सिवा था अब हैं पशेमाँ तुम से ज़्यादा, हम भी हमेशा क़त्ल हुए और तुम ने भी देखा दूर से लेकिन, ये न समझना हम को हुआ है जान का नुक़साँ तुम से ज़्यादा, जाओ तुम अपने बाम की ख़ातिर सारी लवें शम्ओं की कतर लो, ज़ख़्म के मेहर ओ माह सलामत जश्न ए चराग़ाँ तुम से ज़्यादा, देख के उलझन ज़ुल्फ़ ए दोता की कैसे उलझ पड़ते हैं हवा से, हम से सीखो हम को है यारो फ़िक्र ए निगाराँ तुम से ज़्यादा, ज़ंजीर ओ दीवार ही देखी तुम ने तो मजरूह मगर हम, कूचा कूचा देख रहे हैं आलम ए ज़िंदाँ तुम से ज़्यादा..!! - [जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले](https://hindigazals.com/jala-ke-mishaal-e-jahan-hum-junoon-sifaat-chale/): जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार ए शाम नहीं मंज़िल ए सहर भी नहीं अजब नगर है यहाँ दिन चले न रात चले, हमारे लब न सही वो दहान ए ज़ख़्म सही वहीं पहुँचती है यारो कहीं से बात चले, सुतून ए दार पे रखते चलो सरों के चराग़ जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले, हुआ असीर कोई हमनवा तो दूर तलक ब पास ए तर्ज़ ए नवा हम भी साथ साथ चले, बचा के लाए हम ऐ यार फिर भी नक़्द ए वफ़ा अगरचे लुटते रहे रहज़नों के हाथ चले, फिर आई फ़स्ल कि मानिंद बर्ग ए आवारा हमारे नाम गुलों के मुरासलात चले, क़तार ए शीशा है या कारवान ए हम सफ़राँ ख़िराम ए जाम है या जैसे काएनात चले, भुला ही बैठे जब अहल ए हरम तो ऐ मजरूह बग़ल में हम भी लिए एक सनम का हाथ चले..!! - [तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा](https://hindigazals.com/tujhe-kya-sunaaoon-main-dilruba/): तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है, तेरी एक निगाह की बात है मेरी ज़िंदगी का सवाल है, मेरी हर ख़ुशी तेरे दम से है मेरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है, तेरे दर्द से रहे बे ख़बर मेरे दिल की कब ये मजाल है ? - [ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो](https://hindigazals.com/ae-dil-mujhe-aisi-jagah-le-chal-jahan-koi-na-ho/): ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न हो, जा कर कहीं खो जाऊँ मैं नींद आए और सो जाऊँ मैं दुनिया मुझे ढूँडे मगर मेरा निशाँ कोई न हो, उल्फ़त का बदला मिल गया वो ग़म लुटा वो दिल गया चलना है सब से दूर दूर अब कारवाँ कोई न हो..!! - [आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख](https://hindigazals.com/aah-e-jaan-soz-kee-mahrumi-e-taaseer-na-dekh/): आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न देख, हादसे और भी गुज़रे तेरी उल्फ़त के सिवा हाँ मुझे देख मुझे अब मेरी तस्वीर न देख, ये ज़रा दूर पे मंज़िल ये उजाला ये सुकूँ ख़्वाब को देख अभी ख़्वाब की ताबीर न देख, देख ज़िंदाँ से परे रंग ए चमन जोश ए बहार रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख, कुछ भी हूँ फिर भी दुखे दिल की सदा हूँ नादाँ मेरी बातों को समझ तल्ख़ी ए तक़रीर न देख, वही मजरूह वही शाइर ए आवारा मिज़ाज कोई उठा है तेरी बज़्म से दिलगीर न देख..!! - [हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे](https://hindigazals.com/humare-baad-ab-mahfil-me-afsaane-bayaan-honge/): हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे, इसी अंदाज़ से झूमेगा मौसम गाएगी दुनिया मोहब्बत फिर हसीं होगी नज़ारे फिर जवाँ होंगे, न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे..!! - [कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा](https://hindigazals.com/koi-humdam-na-raha-koi-sahara-na-raha/): कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे जो मुझे राह दिखा दे वही तारा न रहा, ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुम से तुम मेरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा, क्या बताऊँ मैं कहाँ यूँही चला जाता हूँ जो मुझे फिर से बुला ले वो इशारा न रहा..!! - [हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह](https://hindigazals.com/hum-hain-mataa-e-koocha-o-bazaar-kee-tarah/): हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह, इस कू ए तिश्नगी में बहुत है कि एक जाम हाथ आ गया है दौलत ए बेदार की तरह, वो तो कहीं है और मगर दिल के आस पास फिरती है कोई शय निगह ए यार की तरह, सीधी है राह ए शौक़ पे यूँही कहीं कहीं ख़म हो गई है गेसू ए दिलदार की तरह, बे तेशा ए नज़र न चलो राह ए रफ़्तगाँ हर नक़्श ए पा बुलंद है दीवार की तरह, अब जा के कुछ खुला हुनर ए नाख़ुन ए जुनूँ ज़ख़्म ए जिगर हुए लब ओ रुख़्सार की तरह, मजरूह लिख रहे हैं वो अहल ए वफ़ा का नाम हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह..!! - [यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं](https://hindigazals.com/yun-to-apas-me-bigadte-hai-khafa-hote-hain/): यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं, हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं, हाल ए दिल मुझ से न पूछो मेरी नज़रें देखो राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं, मिलने को यूँ तो मिला करती हैं सब से आँखें दिल के आ जाने के अंदाज़ जुदा होते हैं, ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं..!! - [जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया](https://hindigazals.com/jab-hua-irfaan-to-gam-aaraam-e-jaan-banta-gaya/): जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया सोज़ ए जानाँ दिल में सोज़ ए दीगराँ बनता गया, रफ़्ता रफ़्ता मुंक़लिब होती गई रस्म ए चमन धीरे धीरे नग़्मा ए दिल भी फ़ुग़ाँ बनता गया, मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया, मैं तो जब जानूँ कि भर दे साग़र ए हर ख़ास ओ आम यूँ तो जो आया वही पीर ए मुग़ाँ बनता गया, जिस तरफ़ भी चल पड़े हम आबला पायान ए शौक़ ख़ार से गुल और गुल से गुलसिताँ बनता गया, शरह ए ग़म तो मुख़्तसर होती गई उस के हुज़ूर लफ़्ज़ जो मुँह से न निकला दास्ताँ बनता गया, दहर में मजरूह कोई जावेदाँ मज़मूँ कहाँ मैं जिसे छूता गया वो जावेदाँ बनता गया..!! - [अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना](https://hindigazals.com/ab-tum-ko-hee-savan-ka-sandesaa-nahi-banana/): अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना मुझ को भी किसी और का रस्ता नहीं बनना, कहती है कि आँखों से समुंदर को निकालो हँसती है कि तुम से तो किनारा नहीं बनना, मोहतात है इतनी कि कभी ख़त नहीं लिखती कहती है मुझे औरों के जैसा नहीं बनना, तस्वीर बनाऊँ तो बिगड़ जाती है मुझ से ऐसा नहीं बनना मुझे वैसा नहीं बनना, इस तरह के लब कौन तराशेगा दोबारा इस तरह का चेहरा तो किसी का नहीं बनना, चेहरे पे किसी और की पलकें नहीं झुकती आँखों में किसी और का नक़्शा नहीं बनना, मैं सोच रहा हूँ कि मैं हूँ भी कि नहीं हूँ तुम ज़िद पे अड़ी हो कि किसी का नहीं बनना, मैं रात की ईंटें तो बहुत जोड़ रहा हूँ पर मुझ से तेरे दिन का दरीचा नहीं बनना, इंकार तो यूँ करती है जैसे कि कभी भी छाँव नहीं बनना उसे साया नहीं बनना, इस दर्द की तहवील में रहते हुए हम को चुपचाप बिखरना है तमाशा नहीं बनना, उस ने मुझे रखना ही नहीं आँखों में आमिर और मुझ से कोई और ठिकाना नहीं बनना..! - [अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है](https://hindigazals.com/adaa-hai-khwab-hai-taskeen-hai-tamaasha-hai/): अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बे तहाशा है, ज़रा सी चाय गिरी और दाग़ दाग़ वरक़ ये ज़िंदगी है कि अख़बार का तराशा है, तुम्हारा बोलता चेहरा पलक से छू छू कर ये रात आईना की है ये दिन तराशा है, तेरे वजूद से बारा दरी दमक उठी कि फूल पल्लू सरकने से इर्तिआशा है, मैं बे ज़बाँ नहीं जो बोलता हूँ लिख लिख कर मेरी ज़बान तले ज़हर का बताशा है, तुम्हारी याद के चर्कों से लख़्त लख़्त है जी कि ख़ंजरों से किसी ने बदन को क़ाशा है, जहान भर से जहाँगर्द देखने आएँ कि पुतलियों का मेरे मुल्क में तमाशा है..!! - [एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ](https://hindigazals.com/ek-vazeefa-hai-kisi-dard-ka-dohraya-hua/): एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ, ये तेरे इश्क़ की मीक़ात ये होनी की अदा धूप के शीशे में एक ख़्वाब सा फैलाया हुआ, बाँध लेते हैं गिरह में उसी मंज़र की धनक हम ने मेहमान को कुछ देर है ठहराया हुआ, ताइरो अब्र ओ हवा भी हैं इसी उलझन में कैसे दो होंटों ने एक बाग़ है दहकाया हुआ, छेद हैं उम्र की पोशाक पे तन्हाई के ख़ुशनुमा क़रियों में हूँ आप से उकताया हुआ, रात आती है तो रख देती है फाहा दिल पर वर्ना इस दश्त का हर पेड़ है ज़ख़माया हुआ, हड्डियाँ जोड़ के तरतीब से उस ने आमिर ख़्वाब का लट्ठा है इस रूह को पहनाया हुआ..!! - [रस्ते में अजब आसार मिले](https://hindigazals.com/raste-me-azab-aasaar-mile/): रस्ते में अजब आसार मिले जूँ कोई पुराना यार मिले, जिस तरह कड़कती धूपों में दो जिस्मों को दीवार मिले, जिस तरह मुसाफ़िर गाड़ी में एक रिश्ते की महकार मिले, जिस तरह पुराने कपड़ों से एक चूड़ी खुशबू दार मिले, जिस तरह अँधेरे खेतों में एक रुत मशअ’ल बरदार मिले, जिस तरह कोई हँसमुख बालक जिस तरह ग़सीली नार मिले, जिस तरह इकहरे भादों से एक पानी की बौछार मिले, जूँ एक सीपी में ला’ल पड़े जूँ मोती दजला पार मिले, जूँ घाव भरे नासूर सा एक जूँ सपनों को चहकार मिले, जिस तरह यतीमी को आमिर एक भरा पुरा संसार मिले..!! - [मिट्टी की सुराही है पानी की गवाही है](https://hindigazals.com/mitti-kee-suraahi-hai-paani-kee-gawaahi-hai/): मिट्टी की सुराही है पानी की गवाही है उश्शाक़ नहीं हम लोग पर रंग तो काही है, हर ग़ुंचा ए लब दरबाँ हर शाख़ सिपाही है सब्ज़े पे खिंचा नक़्शा और सुर्ख़ सियाही है, एक साँवली पतझड़ के पुश्ते पे तबाही है उधड़ी हुई क़ब्रों पर कत्बों की मनाही है, ऐ काँच की सी पिंडली ये शहर ए सबा ही है..!! - [जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया](https://hindigazals.com/jab-raat-gaye-teri-yaad-aayi-sau-tarah-se-jee-ko-bahlaya/): जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया कभी अपने ही दिल से बातें कीं कभी तेरी याद को समझाया, यूँही वक़्त गँवाया मोती सा यूँही उम्र गँवाई सोना सी सच कहते हो तुम हम सुख़नो इस इश्क़ में हम ने क्या पाया ? - [वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे](https://hindigazals.com/wo-is-adaa-se-jo-aaye-to-kyun-bhala-na-lage/): वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न लगे, कभी वो ख़ास इनायत कि सौ गुमाँ गुज़रे कभी वो तर्ज़ ए तग़ाफ़ुल कि महरमाना लगे, वो सीधी सादी अदाएँ कि बिजलियाँ बरसें वो दिल बराना मुरव्वत कि आशिक़ाना लगे, दिखाऊँ दाग़ ए मोहब्बत जो नागवार न हो सुनाऊँ क़िस्सा ए फ़ुर्क़त अगर बुरा न लगे, बहुत ही सादा है तू और ज़माना है अय्यार ख़ुदा करे कि तुझे शहर की हवा न लगे, बुझा न दें ये मुसलसल उदासियाँ दिल को वो बात कर कि तबीअत को ताज़ियाना लगे, जो घर उजड़ गए उन का न रंज कर प्यारे वो चारा कर कि ये गुलशन उजाड़ सा न लगे, इताब ए अहल ए जहाँ सब भुला दिए लेकिन वो ज़ख़्म याद हैं अब तक जो ग़ाएबाना लगे, वो रंग दिल को दिए हैं लहू की गर्दिश ने नज़र उठाऊँ तो दुनिया निगार ख़ाना लगे, अजीब ख़्वाब दिखाते हैं ना ख़ुदा हम को ग़रज़ ये है कि सफ़ीना किनारे जा न लगे, लिए ही जाती है हरदम कोई सदा नासिर ये और बात सुराग़ ए निशान ए पा न लगे..!! - [तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई](https://hindigazals.com/teri-zulfon-ke-bikharne-ka-sabab-hai-koi/): तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच आती है तेरे जिस्म की उर्यानी से पैरहन है कि सुलगती हुई शब है कोई, होश उड़ाने लगीं फिर चाँद की ठंडी किरनें तेरी बस्ती में हूँ या ख़्वाब ए तरब है कोई, गीत बुनती है तेरे शहर की भरपूर हवा अजनबी मैं ही नहीं तू भी अजब है कोई, लिए जाती हैं किसी ध्यान की लहरें नासिर दूर तक सिलसिला ए ताक ए तरब है कोई..!! - [किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे](https://hindigazals.com/kisi-kali-ne-bhi-dekha-na-aankh-bhar-ke-mujhe/): किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे गुज़र गई जरस ए गुल उदास कर के मुझे, मैं सो रहा था किसी याद के शबिस्ताँ में जगा के छोड़ गए क़ाफ़िले सहर के मुझे, मैं रो रहा था मुक़द्दर की सख़्त राहों में उड़ा के ले गए जादू तिरी नज़र के मुझे, मैं तेरे दर्द की तुग़्यानियों में डूब गया पुकारते रहे तारे उभर उभर के मुझे, तिरे फ़िराक़ की रातें कभी न भूलेंगी मज़े मिले उन्हीं रातों में उम्र भर के मुझे, ज़रा सी देर ठहरने दे ऐ ग़म ए दुनिया बुला रहा है कोई बाम से उतर के मुझे, फिर आज आई थी इक मौज ए हवा ए तरब सुना गई है फ़साने इधर उधर के मुझे..!! - [आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो](https://hindigazals.com/aaraaeesh-e-khyal-bhi-ho-dilkusha-bhi-ho/): आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो वो दर्द अब कहाँ जिसे जी चाहता भी हो, ये क्या कि रोज़ एक सा ग़म एक सी उमीद इस रंज ए बेख़ुमार की अब इंतिहा भी हो, ये क्या कि एक तौर से गुज़रे तमाम उम्र जी चाहता है अब कोई तेरे सिवा भी हो, टूटे कभी तो ख़्वाब ए शब ओ रोज़ का तिलिस्म इतने हुजूम में कोई चेहरा नया भी हो, दीवानगी ए शौक़ को ये धुन है इन दिनों घर भी हो और बे दर ओ दीवार सा भी हो, जुज़ दिल कोई मकान नहीं दहर में जहाँ रहज़न का ख़ौफ़ भी न रहे दर खुला भी हो, हर ज़र्रा एक महमिल ए इबरत है दश्त का लेकिन किसे दिखाऊँ कोई देखता भी हो, हर शय पुकारती है पस ए पर्दा ए सुकूत लेकिन किसे सुनाऊँ कोई हमनवा भी हो, फ़ुर्सत में सुन शगुफ़्तगी ए ग़ुंचे की सदा ये वो सुख़न नहीं जो किसी ने कहा भी हो, बैठा है एक शख़्स मिरे पास देर से कोई भला सा हो तो हमें देखता भी हो, बज़्म ए सुख़न भी हो सुख़न ए गर्म के लिए ताऊस बोलता हो तो जंगल हरा भी हो..!! - [शहर सुनसान है किधर जाएँ](https://hindigazals.com/shahar-sunsan-hai-kidhar-jaayen/): शहर सुनसान है किधर जाएँ ख़ाक हो कर कहीं बिखर जाएँ रात कितनी गुज़र गई लेकिन इतनी हिम्मत नहीं कि घर जाएँ, यूँ तेरे ध्यान से लरज़ता हूँ जैसे पत्ते हवा से डर जाएँ, उन उजालों की धुन में फिरता हूँ छब दिखाते ही जो गुज़र जाएँ, रैन अँधेरी है और किनारा दूर चाँद निकले तो पार उतर जाएँ..!! - [तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें](https://hindigazals.com/tum-aa-gaye-ho-to-kyun-intizar-e-shaam-karen/): तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें कहो तो क्यूँ न अभी से कुछ एहतिमाम करें, ख़ुलूस ओ मेहर ओ वफ़ा लोग कर चुके हैं बहुत मेरे ख़याल में अब और कोई काम करें, ये ख़ास ओ आम की बेकार गुफ़्तुगू कब तक क़ुबूल कीजिए जो फ़ैसला अवाम करें, हर आदमी नहीं शाइस्ता ए रुमूज़ ए सुख़न वो कम सुख़न हो मुख़ातब तो हम कलाम करें, जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही अब इतनी बात पे क्या ज़िंदगी हराम करें, ख़ुदा अगर कभी कुछ इख़्तियार दे हम को तू पहले ख़ाक नशीनों का इंतिज़ाम करें, रह ए तलब में जो गुमनाम मर गए नासिर मता ए दर्द उन्ही साथियों के नाम करें..!! - [देख मोहब्बत का दस्तूर](https://hindigazals.com/dekh-mohabbat-ka-dastoor/): देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर, तन्हा तन्हा फिरते हैं दिल वीराँ आँखें बेनूर, दोस्त बिछड़ते जाते हैं शौक़ लिए जाता है दूर, हम अपना ग़म भूल गए आज किसे देखा मजबूर ? - [कौन उस राह से गुज़रता है](https://hindigazals.com/kaun-us-raah-se-guzarta-hai/): कौन उस राह से गुज़रता है दिल यूँही इंतिज़ार करता है, देख कर भी न देखने वाले दिल तुझे देख देख डरता है, शहर ए गुल में कटी है सारी रात देखिए दिन कहाँ गुज़रता है, ध्यान की सीढ़ियों पे पिछले पहर कोई चुपके से पाँव धरता है, दिल तो मेरा उदास है नासिर शहर क्यूँ साएँ साएँ करता है..?? - [तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई](https://hindigazals.com/tere-khyal-se-lau-de-uthi-hai-tanhaai/): तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई शब ए फ़िराक़ है या तेरी जल्वा आराई, तू किस ख़याल में है मंज़िलों के शैदाई उन्हें भी देख जिन्हें रास्ते में नींद आई, पुकार ऐ जरस ए कारवान ए सुब्ह ए तरब भटक रहे हैं अँधेरों में तेरे सौदाई, ठहर गए हैं सर ए राह ख़ाक उड़ाने को मुसाफ़िरों को न छेड़ ऐ हवा ए सहराई, रह ए हयात में कुछ मरहले तो देख लिए ये और बात तेरी आरज़ू न रास आई, ये सानिहा भी मोहब्बत में बार हा गुज़रा कि उस ने हाल भी पूछा तो आँख भर आई, दिल ए फ़सुर्दा में फिर धड़कनों का शोर उठा ये बैठे बैठे मुझे किन दिनों की याद आई, मैं सोते सोते कई बार चौंक चौंक पड़ा तमाम रात तेरे पहलुओं से आँच आई, जहाँ भी था कोई फ़ित्ना तड़प के जाग उठा तमाम होश थी मस्ती में तेरी अंगड़ाई, खुली जो आँख तो कुछ और ही समाँ देखा वो लोग थे न वो जलसे न शहर ए रानाई, वो ताब ए दर्द वो सौदा ए इंतिज़ार कहाँ उन्ही के साथ गई ताक़त ए शकेबाई, फिर उस की याद में दिल बे क़रार है नासिर बिछड़ के जिस से हुई शहर शहर रुस्वाई..!! - [कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे](https://hindigazals.com/kashti-hawas-hawaaon-ke-rukh-par-utaar-de/): कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त की उड़ान है शोख़ी शबाब की उस छत पे आज तू ये कबूतर उतार दे, मैं इतना बद मआ’श नहीं या’नी खुल के बैठ चुभने लगी है धूप स्वेटर उतार दे, दिन रात यूँ न ख़ौफ़ का गट्ठर उठाए फिर ये बोझ अपने सर से झटक कर उतार दे, उस की ही आब ओ ताब से रौशन हो रेग ए दिल ये तेग़ मेरे सीने के अंदर उतार दे, चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें दीवार से पुराना कैलेंडर उतार दे, ये बात ज़र्फ़ की नहीं है मावरा ए ज़र्फ़ चाहे तो इस कुएँ में समुंदर उतार दे, लोगों के साथ मेरी लड़ाई है आज-कल बेहतर है मुझ को शहर से बाहर उतार दे तू ख़ुद तो सात पर्दों में मस्तूर है ज़फ़र मल्बूस तेरे आगे वो क्यूँकर उतार दे..?? - [उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर](https://hindigazals.com/umr-bhar-chalte-rahe-hum-waqt-kee-talwar-par/): उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर, चाहने वाले की एक ग़लती से बरहम हो गया फ़ख़्र था कितना उसे ख़ुद प्यार के मेआ’र पर, रात गहरी मेरी तन्हाई का सागर और फिर तेरी यादों के सुलगते दीप हर मंजधार पर, शाम आई और सब शाख़ों की गलियाँ सो गईं मौत का साया सा मंडलाने लगा अश्जार पर, ख़ल्वत ए शब में ये अक्सर सोचता क्यूँ हूँ कि चाँद नूर का बोसा है गोया रात के रुख़्सार पर, साल ए नौ आता है तो महफ़ूज़ कर लेता हूँ मैं कुछ पुराने से कैलन्डर ज़ेहन की दीवार पर, ज़िंदगी आज़ाद पहले यूँ कभी तन्हा न थी आदमी बहता था यूँही वक़्त की रफ़्तार पर..!! - [ख़्वाब में मंज़र रह जाता है](https://hindigazals.com/khwab-me-manzar-rah-jata-hai/): ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में हाथ में पत्थर रह जाता है, रोज़ किसी हैरत का धब्बा आईने पर रह जाता है, दिल में बसने वाला एक दिन जेब के अंदर रह जाता है, नदिया पर मिलने का वा’दा मेज़ के ऊपर रह जाता है, साल गुज़र जाता है सारा और कैलन्डर रह जाता है, आँगन की ख़्वाहिश में कोई बाम के ऊपर रह जाता है, लग जाती है नाव उस पार और समुंदर रह जाता है, रुख़्सत होते होते कोई दरवाज़े पर रह जाता है..!! - [तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है](https://hindigazals.com/taar-e-shabnam-kee-tarah-soorat-e-khas-tutati-hai/): तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती है, आरज़ूओं का हुजूम और ये ढलती हुई उम्र साँस उखड़ती है न ज़ंजीर ए हवस टूटती है, गर्द इतनी कि सुझाई नहीं देता कुछ भी शोर इतना है कि आवाज़ ए जरस टूटती है, मुंहदिम होता चला जाता है दिल साल ब साल ऐसा लगता है गिरह अब के बरस टूटती है, बू ए गुल आए न आए मगर उश्शाक़ के बीच इतनी वहशत है कि दीवार ए क़फ़स टूटती है, ज़िक्र अस्मा ए इलाही का है फ़ैज़ान कि अब दम उलझता है न तस्बीह ए नफ़स टूटती है..!! - [गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने](https://hindigazals.com/girafta-dil-hai-bahut-aaj-tere-deewane/): गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें थके थके से ख़याल बुझे बुझे से निगाहों में ग़म के अफ़्साने, हज़ार शुक्र कि हम ने ज़बाँ से कुछ न कहा ये और बात कि पूछा न अहल ए दुनिया ने, ब क़द्र ए तिश्नालबी पुर्सिश ए वफ़ा न हुई छलक के रह गए तेरी नज़र के पैमाने, ख़याल आ गया मानूस रहगुज़ारों का पलट के आ गए मंज़िल से तेरे दीवाने, कहाँ है तू कि तेरे इंतिज़ार में ऐ दोस्त तमाम रात सुलगते हैं दिल के वीराने, उमीद ए पुर्सिश ए ग़म किस से कीजिए नासिर जो अपने दिल पे गुज़रती है कोई क्या जाने..?? - [मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा](https://hindigazals.com/main-usse-juda-wo-mujhse-juda/): मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा ये दोनों बातें एक सी हैं, आकाश में चाँद भी तारे भी दोनों की रातें एक सी हैं, ये बात अलग आकाश था वो मैं धरती था वो नभ मेरा, अब किस से मैं ये बतलाऊँ आकाश रहा ना अब मेरा, तारा टूटे तो दुआ करूँ वो ठीक रहे ख़ुशहाल रहे, कैसा भी पिछला साल गया ये साल तो अच्छा साल रहे..!! - [यकुम जनवरी है नया साल है](https://hindigazals.com/yakum-janvari-hai-naya-saal-hai/): यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है ? - [जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी](https://hindigazals.com/jis-taraf-chahoon-pahunch-jaaoon-masafat-kaisi/): जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों की समाअत गई गोयाई भी क़िस्सा गो तू ने सुनाई थी हिकायत कैसी ? - [रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में](https://hindigazals.com/raqs-karne-ka-mila-huqm-jo-dariyaaon-me/): रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में, उन को भी है किसी भीगे हुए मंज़र की तलाश बूँद तक भी न बो सके जो कभी सहराओं में, ए मेरे हम सफ़रो तुम भी थके हारे हो धूप की तुम तो मिलावट न करो छाँव में, जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज बट न जाए तेरा बीमार मसीहाओं में, हौसला किस में है यूसुफ़ की ख़रीदारी का अब तो महँगाई के चर्चे हैं ज़ुलेख़ाओं में, जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है उस को दफ़नाओ मेरे हाथ की रेखाओं में, वो ख़ुदा है किसी टूटे हुए दिल में होगा मस्जिदों में उसे ढूँडो न कलीसाओं में, हम को आपस में मोहब्बत नहीं करने देते एक यही ऐब है इस शहर के दानाओं में, मुझ से करते हैं क़तील इस लिए कुछ लोग हसद क्यूँ मेरे शेर हैं मक़्बूल हसीनाओं में..!! - [हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर](https://hindigazals.com/har-chauk-pe-bhashan-hai-har-manch-pe-qasam-ka-shor/): हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर पर रोटी की कतार में आज भी वही हैरानी होगी, तख़्त भी बदल जाएँगे चेहरे भी नए आ जाएँगे सत्ता की फ़ितरत मगर सदियों से सियानी होगी, क़ाग़ज़ पे सुनहरे ख़्वाब मगर ज़मीं पे धूल ही धूल विकास की तस्वीर फिर से सिर्फ़ ज़ुबानी होगी, आवाज़ जो उठेगी वो पहले ही कुचल दी जाएगी ख़ामोशी यहाँ जनता की सबसे बड़ी कहानी होगी, इंक़लाब के नारे हैं, पर डर की निगहबानी है क़ानून की आँखों पर पट्टी सियासी मेहरबानी होगी, अहल ए चमन पूछते हैं तो कहते हैं सब्र रखना होगा ये जुमला भी हुकूमत की एक पुरानी निशानी होगी..!! - [फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए](https://hindigazals.com/fir-savan-rut-kee-pawan-chali-tum-yaad-aaye/): फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए, फिर कूजें बोलीं घास के हरे समुंदर में रुत आई पीले फूलों की तुम याद आए, फिर कागा बोला घर के सूने आँगन में फिर अमृत रस की बूँद पड़ी तुम याद आए, पहले तो मैं चीख़ के रोया और फिर हँसने लगा बादल गरजा बिजली चमकी तुम याद आए, दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए..!! - [मुसलसल बेकली दिल को रही है](https://hindigazals.com/musalsal-bekali-dil-ko-rahi-hai/): मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है, मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा मारा मारा ये बस्ती चैन से क्यूँ सो रही है ? - [गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल](https://hindigazals.com/gali-gali-meri-yaad-bichhee-hai/): गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल मुझ से इतनी वहशत है तो मेरी हदों से दूर निकल, एक समय तेरा फूल सा नाज़ुक हाथ था मेरे शानों पर एक ये वक़्त कि मैं तन्हा और दुख के काँटों का जंगल, याद है अब तक तुझ से बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल, मैं तो एक नई दुनिया की धुन में भटकता फिरता हूँ मेरी तुझ से कैसे निभेगी एक हैं तेरे फ़िक्र ओ अमल, मेरा मुँह क्या देख रहा है देख इस काली रात को देख मैं वही तेरा हमराही हूँ साथ मेरे चलना हो तो चल..!! - [सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं](https://hindigazals.com/safar-e-manzil-e-shab-yaad-nahi/): सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं लोग रुख़्सत हुए कब याद नहीं, अव्वलीं क़ुर्ब की सरशारी में कितने अरमाँ थे जो अब याद नहीं, दिल में हर वक़्त चुभन रहती थी थी मुझे किस की तलब याद नहीं, वो सितारा थी कि शबनम थी कि फूल एक सूरत थी अजब याद नहीं, कैसी वीराँ है गुज़र गाह ए ख़याल जब से वो आरिज़ ओ लब याद नहीं, भूलते जाते हैं माज़ी के दयार याद आएँ भी तो सब याद नहीं, ऐसा उलझा हूँ ग़म ए दुनिया में एक भी ख़्वाब ए तरब याद नहीं, रिश्ता ए जाँ था कभी जिस का ख़याल उस की सूरत भी तो अब याद नहीं, ये हक़ीक़त है कि अहबाब को हम याद ही कब थे जो अब याद नहीं, याद है सैर ए चराग़ाँ नासिर दिल के बुझने का सबब याद नहीं..!! - [नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है](https://hindigazals.com/nasir-kya-kahta-firta-hai-kuch-na-suno-to-behtar-hai/): नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है दीवाना है दीवाने के मुँह न लगो तो बेहतर है, कल जो था वो आज नहीं जो आज है कल मिट जाएगा रूखी सूखी जो मिल जाए शुक्र करो तो बेहतर है, कल ये ताब ओ तवाँ न रहेगी ठंडा हो जाएगा लहू नाम ए ख़ुदा हो जवान अभी कुछ कर गुज़रो तो बेहतर है, क्या जाने क्या रुत बदले हालात का कोई ठीक नहीं अब के सफ़र में तुम भी हमारे साथ चलो तो बेहतर है, कपड़े बदल कर बाल बना कर कहाँ चले हो किस के लिए रात बहुत काली है नासिर घर में रहो तो बेहतर है..!! - [नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा](https://hindigazals.com/nateeja-fir-wahi-hoga-suna-hai-saal-badlega/): नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा, बदलना है तो दिन बदलो बदलते क्यूँ हो हिंदिसे को ? - [पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था](https://hindigazals.com/pichhle-baras-tum-saath-the-mere-aur-december-tha/): पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था, चाँदनी रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था, बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था, भीगी ज़ुल्फ़ें भीगा आँचल नींद थी आँखों में कुछ ऐसे हालात थे मेरे और दिसम्बर था, धीरे धीरे भड़क रही थी आतिश दान की आग बहके हुए जज़्बात थे मेरे और दिसम्बर था, प्यार भरी नज़रों से फ़रह जब उस ने देखा था बस वो ही लम्हात थे मेरे और दिसम्बर था..!! - [नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से](https://hindigazals.com/nahi-kaam-rakhna-koi-dil-lagi-se-yakum-janwari-se/): नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से गुज़रना नहीं अब तुम्हारी गली से यकुम जनवरी से, गुज़िश्ता बरस सब के नख़रे उठाए मगर कुछ न पाया नहीं मुझ को करनी मोहब्बत किसी से यकुम जनवरी से, दिसम्बर के आख़िर में अपने गुनाहों से तौबा करूँगा फ़रिश्ता ही बन जाउँगा आदमी से यकुम जनवरी से, ख़ुशी क्या मनाऊँ कि दिल ग़मज़दा है नए साल पर भी कि एक कम हुआ है बरस ज़िंदगी से यकुम जनवरी से..!! - [ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है](https://hindigazals.com/ae-naye-saal-bata-tujh-me-nayapan-kya-hai/): ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यों शोर मचा रखा है ? - [एक बरस और कट गया शारिक़](https://hindigazals.com/ek-baras-aur-kat-gaya-shariq/): एक बरस और कट गया शारिक़ रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए, सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए यार को भूलने से डरते हुए, और सब से बड़ा कमाल है ये साँसें लेने से दिल नहीं भरता, अब भी मरने को जी नहीं करता एक बरस और कट गया..!! - [मुबारक मुबारक नया साल सब को](https://hindigazals.com/mubarak-mubarak-naya-saal-sab-ko/): मुबारक मुबारक नया साल सब को न चाहा था हम ने तू हम से जुदा हो, मगर किस ने रोका है बहती हवा को जो हम चाहते हैं वो कैसे भला हो, ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को मुबारक मुबारक नया साल सब को, मुबारक घड़ी में ये हम अहद कर लें ब सद शान हम ज़िंदगी में सँवर लें, गुलों की तरह गुलिस्ताँ में निखर लें बनें हम भी सूरज गगन में उभर लें, मुबारक मुबारक नया साल सब को अँधेरों ने लूटी उजालों की दौलत, उड़ा ले गया वक़्त एक ख़्वाब ए राहत न लौटेगी बीती हुई कोई साअत, जो अब भी न जागे तो होगी क़यामत मुबारक मुबारक नया साल सब को, उमीदें हैं राहें अज़ाएम सवारी ख़बर दे रही है ये बाद ए बहारी, महकती हुई मंज़िलें प्यारी प्यारी कि सदियों से तकती हैं राहें हमारी, मुबारक मुबारक नया साल सब को मुबारक मुबारक नया साल सब को..!! - [गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की](https://hindigazals.com/guftagoo-jo-hoti-hai-saal-e-nau-se-ambar-kee/): गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की गर्म होने लगती हैं सर्दियाँ दिसम्बर की, जाने वाले लम्हे तो लौट कर नहीं आते कारोबार ए दुनिया के पर ये रुक नहीं पाते, क्यों न मसअले सारे इस तरह से हल कर लें साल ए नौ के हर पल को प्यार की ग़ज़ल कर लें, सज्दा ए मोहब्बत से आओ मो’तबर कर दें साल ए नौ के आँगन को ख़ुशबुओं का घर कर दें, तन बदन उम्मीदों के फिर से महके महके हैं रुख़ नई तमाज़त से ख़्वाहिशों के दहके हैं, एक नया वरक़ खोलें हम किताब ए हस्ती का दिल सबक़ पढ़ें फिर से ज़िंदगी की मस्ती का, दिल से दिल के मिलने की नुक़रई सदाएँ हों रंग ए इश्क़ ओ उल्फ़त की रेशमी हवाएँ हों, दिल के साज़ से फूटें यूँ मोहब्बतों के सुर हों ख़ुशी के ख़्वाबों के सुर हक़ीक़तों के सुर, अम्न और तहफ़्फ़ुज़ से शाद फिर रहें हम सब नफ़रतें न बाँटें अब मुल्क क़ौम और मज़हब, दहशतों की लाशों पर अम्न की रिदा डालें और ख़िज़ाँ के मौसम को फ़स्ल ए गुल बना डालें, साल ए नौ की आमद पर मुश्किलें सभी हारें इतनी हों अँधेरों पर रौशनी की यलग़ारें, मंदिर ओ मसाजिद सब अम्न के हों गहवारे ख़्वाब अलीना इंसाँ के हों कभी न बंजारे..!! - [सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया](https://hindigazals.com/sahar-ne-masarrat-ka-nagma-sunaya/): सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया फ़ज़ा ने गुलिस्ताँ का दामन सजाया, हवाओं ने अख़्लाक़ का गीत गाया निगाहों से माज़ी का पर्दा उठाया, नया साल आया नया साल आया मसर्रत मसर्रत के गुन गा रही है, मुसावात के फूल बरसा रही है सदा ए सलामत रवी आ रही है, ज़मीं मुस्कुराई फ़लक मुस्कुराया नया साल आया नया साल आया, ये हिन्दोस्ताँ एक आवाज़ होगा अब इंसान इंसान का दमसाज़ होगा, नए दौर का फिर से आग़ाज़ होगा नया सन नई रुत का पैग़ाम लाया, नया साल आया नया साल आया तअ’स्सुब की परछाइयाँ अब न होंगी, वो पिछली सफ़ आराइयाँ अब न होंगी ज़माने में रुस्वाइयाँ अब न होंगी, मोहब्बत का माहौल हर सम्त छाया नया साल आया नया साल आया, न आइंदा आपस में रख़्ने पड़ेंगे न आइंदा अपनी ज़िदों पर अड़ेंगे, लईक़ अब न आपस में इंसाँ लड़ेंगे यकुम जनवरी ने ये मुज़्दा सुनाया. - [हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे](https://hindigazals.com/hum-bichhad-ke-tum-se-baadal-kee-tarah/): हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते रहे, ज़िंदगी ने हाथ से ख़ंजर न रखा एक पल हम क़तील ए ग़म्ज़ा ओ नाज़ ए बुताँ होते रहे, लोक लहजे का सुहाना पन सुख़न की नग़्मगी शहर की आबादियों के शोर में खोते रहे, क्यूँ मता ए दिल के लुट जाने का कोई ग़म करे शहर ए दिल्ली में तो ऐसे वाक़िए होते रहे, सुर्ख़ियाँ अख़बार की गलियों में ग़ुल करती रहीं लोग अपने बंद कमरों में पड़े सोते रहे, महफ़िलों में हम रफ़ीक़ ओ राज़ दाँ समझे गए घर के आँगन में मगर तन्हाइयाँ बोते रहे..!! - [दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं](https://hindigazals.com/dil-ke-tatar-me-yaadon-ke-ab-aahoo-bhi-nahin/): दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू भी नहीं, दश्त ए तन्हाई में आवाज़ के घुँगरू भी नहीं और ऐसा भी कि सन्नाटे का जादू भी नहीं, ज़िंदगी जिन की रिफ़ाक़त पे बहुत नाज़ाँ थी उन से बिछड़ी तो कोई आँख में आँसू भी नहीं, चाहते हैं रह ए मयख़ाना न क़दमों को मिले लेकिन इस शोख़ी ए रफ़्तार पे क़ाबू भी नहीं, तल्ख़ियाँ नीम के पत्तों की मिली हैं हर सू ये मेरा शहर किसी फूल की ख़ुशबू भी नहीं, जाने क्या सोच के हम रुक गए वीरानों में परतव ए रुख़ भी नहीं साया ए गेसू भी नहीं, हुस्न ए इमरोज़ को तश्बीहों में तौलें कैसे अब वो पहले से ख़म ए काकुल ओ अबरू भी नहीं, हम ने पाई है उन अशआर पे भी दाद ज़ुबैर जिन में उस शोख़ की तारीफ़ के पहलू भी नहीं..!! - [वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं](https://hindigazals.com/wo-dilnawaz-hai-lekin-nazar-shanas-nahin/): वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ पर कई सवाल मगर मेरे लिए कोई शायान ए इल्तिमास नहीं, तेरे जिलौ में भी दिल काँप काँप उठता है मेरे मिज़ाज को आसूदगी भी रास नहीं, कभी कभी जो तेरे क़ुर्ब में गुज़ारे थे अब उन दिनों का तसव्वुर भी मेरे पास नहीं, गुज़र रहे हैं अजब मरहलों से दीदा ओ दिल सहर की आस तो है ज़िंदगी की आस नहीं, मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए बहुत दिनों से तबीअ’त मेरी उदास नहीं..!! - [कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें](https://hindigazals.com/kuch-yaadgaar-e-shahar-e-sitamgar-hi-le-chale/): कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं इस गली में तो पत्थर ही ले चलें, यूँ किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफ़र सर पर ख़याल ए यार की चादर ही ले चलें, रंज ए सफ़र की कोई निशानी तो पास हो थोड़ी सी ख़ाक ए कूचा ए दिलबर ही ले चलें, ये कह के छेड़ती है हमें दिल गिरफ़्तगी घबरा गए हैं आप तो बाहर ही ले चलें, इस शहर ए बे चराग़ में जाएगी तू कहाँ आ ऐ शब ए फ़िराक़ तुझे घर ही ले चलें..!! - [क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे](https://hindigazals.com/kya-zamana-tha-ki-hum-roz-mila-karte-the/): क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ तन्हाइयाँ सर फोड़ के सो जाती हैं इन मकानों में अजब लोग रहा करते थे, कर दिया आज ज़माने ने उन्हें भी मजबूर कभी ये लोग मेरे दुख की दवा करते थे, देख कर जो हमें चुप चाप गुज़र जाता है कभी उस शख़्स को हम प्यार किया करते थे, इत्तिफ़ाक़ात ए ज़माना भी अजब हैं नासिर आज वो देख रहे हैं जो सुना करते थे..!! - [मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना](https://hindigazals.com/mujhe-tum-shohraton-ke-darmiyan-gumnam/): मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये सारा हिज्र का मौसम ये सारी ख़ाना वीरानी इसे ऐ ज़िंदगी मेरे जुनूँ के नाम लिख देना, तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना मेरी आँखों पे अपनी दीद की एक शाम लिख देना, मेरे अंदर पनाहें ढूँढती फिरती है ख़ामोशी लब ए गोया मेरे अंदर भी एक कोहराम लिख देना, वो मौसम जा चुका जिस में परिंदे चहचहाते थे अब इन पेड़ों की शाख़ों पर सुकूत ए शाम लिख देना, शबिस्तानों में लौ देते हुए कुंदन से जिस्मों पर हवा की उँगलियों से वस्ल का पैग़ाम लिख देना..!! - [कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली](https://hindigazals.com/kabhi-khirad-se-kabhi-dil-se-dosti/): कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली न पूछ कैसे बसर हम ने ज़िंदगी कर ली, अँधेरी रात का मंज़र भी ख़ूब था लेकिन तुम आ गए तो चराग़ों में रौशनी कर ली, तुम्हारा जिस्म है जाड़ों का सर्द सन्नाटा हरारतों से कहाँ तुम ने दोस्ती कर ली, हुज़ूर ए दोस्त अजब हादिसा हुआ यारो हर एक हर्फ़ ए शिकायत ने ख़ुदकुशी कर ली, लिए फिरे हैं बहुत तुम को दिल की गलियों में इस एक बात पे दुनिया ने दुश्मनी कर ली, हर एक मोड़ पे ख़ंजर ब कफ़ थी तन्हाई ग़रीब ए शहर ने घबरा के ख़ुदकुशी कर ली..!! - [बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो](https://hindigazals.com/bichhadte-daamnon-me-phool-kee-kuch-pattiyan/): बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक जाती हैं तुम से दूर चेहरों के तआक़ुब में जो तुम चाहो मेरी आँखों पे अपनी उँगलियाँ रख दो, बरसते बादलों से घर का आँगन डूब तो जाए अभी कुछ देर काग़ज़ की बनी ये कश्तियाँ रख दो, धुआँ सिगरेट का बोतल का नशा सब दुश्मन ए जाँ हैं कोई कहता है अपने हाथ से ये तल्ख़ियाँ रख दो, बहुत अच्छा है यारो महफ़िलों में टूट कर मिलना कोई बढ़ती हुई दूरी भी अपने दरमियाँ रख दो, नुक़ूश ए ख़ाल ओ ख़द में दिल नवाज़ी की अदा कम है हिजाब आमेज़ आँखों में भी थोड़ी शोख़ियाँ रख दो, हमीं पर ख़त्म क्यूँ हो दास्तान ए ख़ाना वीरानी जो घर सहरा नज़र आए तो उस में बिजलियाँ रख दो..!! - [ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ](https://hindigazals.com/gurub-e-shaam-hi-se-khud-ko-yun-mahsus/): ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दिया हूँ और हवा की ज़द पे रखा हूँ, चमकती धूप तुम अपने ही दामन में न भर लेना मैं सारी रात पेड़ों की तरह बारिश में भीगा हूँ, ये किस आवाज़ का बोसा मिरे होंटों पे काँपा है मैं पिछली सब सदाओं की हलावत भूल बैठा हूँ, बिछड़ के तुम से मैं ने भी कोई साथी नहीं ढूँडा हुजूम ए रहगुज़र में दूर तक देखो अकेला हूँ, कोई टूटा हुआ रिश्ता न दामन से उलझ जाए तुम्हारे साथ पहली बार बाज़ारों में निकला हूँ, मैं गिर के टूट जाऊँ या कोई मेहराब मिल जाए न जाने कब से हाथों में खिलौना बन के जीता हूँ..!! - [अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो](https://hindigazals.com/apne-ghar-ke-dar-o-deewar-ko-ooncha-na/): अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो, जो न एक बार भी चलते हुए मुड़ के देखें ऐसी मग़रूर तमन्नाओं का पीछा न करो, हो अगर साथ किसी शोख़ की ख़ुशबू ए बदन राह चलते हुए मह पारों को देखा न करो, कल न हो ये कि मकीनों को तरस जाए ये दिल दिल के आसेब का हर एक से चर्चा न करो, इश्क़ आसार ज़ुलेखाओं की इस बस्ती में साहिबो पाकी ए दामाँ पे भरोसा न करो..!! - [दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया](https://hindigazals.com/dayaar-e-dil-kee-raat-me-charag-saa-jala-gaya/): दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया, वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब ए दुश्मनाँ हुई वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया, जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द ए ज़िंदगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया, पुकारती हैं फ़ुर्सतें कहाँ गईं वो सोहबतें ज़मीं निगल गई उन्हें कि आसमान खा गया, ये सुब्ह की सफ़ेदियाँ ये दोपहर की ज़र्दियाँ अब आइने में देखता हूँ मैं कहाँ चला गया ? - [गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो](https://hindigazals.com/gaye-dino-ka-suraag-le-kar-kidhar-se-aaya-kidhar-gaya-wo/): गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो, बस एक मोती सी छब दिखा कर बस एक मीठी सी धुन सुना कर सितारा ए शाम बन के आया ब रंग ए ख़्वाब ए सहर गया वो, ख़ुशी की रुत हो कि ग़म का मौसम नज़र उसे ढूँडती है हर दम वो बू ए गुल था कि नग़्मा ए जाँ मेरे तो दिल में उतर गया वो, न अब वो यादों का चढ़ता दरिया न फ़ुर्सतों की उदास बरखा यूँही ज़रा सी कसक है दिल में जो ज़ख़्म गहरा था भर गया वो, कुछ अब सँभलने लगी है जाँ भी बदल चला दौर ए आसमाँ भी जो रात भारी थी टल गई है जो दिन कड़ा था गुज़र गया वो, बस एक मंज़िल है बुल हवस की हज़ार रस्ते हैं अहल ए दिल के यही तो है फ़र्क़ मुझ में उस में गुज़र गया मैं ठहर गया वो, शिकस्ता पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ जो क़ाफ़िला मेरा हमसफ़र था मिसाल ए गर्द ए सफ़र गया वो, मेरा तू ख़ूँ हो गया है पानी सितमगरों की पलक न भीगी जो नाला उठा था रात दिल से न जाने क्यूँ बेअसर गया वो ? - [वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए](https://hindigazals.com/wo-saahilon-pe-gaane-wale-kya-hue/): वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए ? वो सुब्ह आते आते रह गई कहाँ जो क़ाफ़िले थे आने वाले क्या हुए ? - [तेरे आने का धोका सा रहा है](https://hindigazals.com/tere-aane-ka-dhoka-saa-raha-hai/): तेरे आने का धोका सा रहा है दिया सा रात भर जलता रहा है, अजब है रात से आँखों का आलम ये दरिया रात भर चढ़ता रहा है, सुना है रात भर बरसा है बादल मगर वो शहर जो प्यासा रहा है, वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का जो पिछली रात से याद आ रहा है, किसे ढूँढोगे इन गलियों में नासिर चलो अब घर चलें दिन जा रहा है..!! - [होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी](https://hindigazals.com/hoti-hai-tere-naam-se-wahshat-kabhi-kabhi/): होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबी’अत कभी कभी, ऐ दिल किसे नसीब ये तौफ़ीक़ ए इज़्तिराब मिलती है ज़िंदगी में ये राहत कभी कभी, तेरे करम से ऐ अलम ए हुस्न आफ़रीं दिल बन गया है दोस्त की ख़ल्वत कभी कभी, जोश ए जुनूँ में दर्द की तुग़्यानियों के साथ अश्कों में ढल गई तेरी सूरत कभी कभी, तेरे क़रीब रह के भी दिल मुतमइन न था गुज़री है मुझ पे ये भी क़यामत कभी कभी, कुछ अपना होश था न तुम्हारा ख़याल था यूँ भी गुज़र गई शब ए फ़ुर्क़त कभी कभी, ऐ दोस्त हम ने तर्क ए मोहब्बत के बावजूद महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी..!! - [कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले](https://hindigazals.com/kuch-is-ada-se-gam-e-zindagi-ke-saath-chale/): कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले कि जैसे कोई किसी अजनबी के साथ चले, क़दम क़दम ग़म ए कौन ओ मकाँ भुलाए हुए जो मेरे साथ चले वो ख़ुशी के साथ चले, ख़िरद को राह रवी का शु’ऊर आ जाए ज़रा सी दूर वो दीवानगी के साथ चले, जो हमसफ़र नहीं कोई तो अपना साया है ये आसरा तो है जैसे किसी के साथ चले, सुरूर ओ कैफ़ की राहें बहुत ही नाज़ुक हैं उन्हीं का ज़िक्र ज़रा मयकशी के साथ चले, रह ए हयात में वो तज्रबे हुए हैं कि बस हर एक सोच समझ कर किसी के साथ चले, ख़याल अपना तो ये है कि दास्तान ए हयात रईस कुछ भी हो ज़िंदादिली के साथ चले..!! - [ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो](https://hindigazals.com/ye-raat-tumhari-hai-chamakte-raho-taaro/): ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो वो आएँ न आएँ मगर उम्मीद न हारो, शायद किसी मंज़िल से कोई क़ाफ़िला आए आशुफ़्ता सरो सुब्ह तलक यूँही पुकारो, दिन भर तो चले अब ज़रा दम ले के चलेंगे ऐ हम सफ़रो आज यहीं रात गुज़ारो, ये आलम ए वहशत है तो कुछ हो ही रहेगा मंज़िल न सही सर किसी दीवार से मारो, ओझल हुए जाते हैं निगाहों से दो आलम तुम आज कहाँ हो ग़म ए फ़ुर्क़त के सहारो, खोया है उसे जिस का बदल कोई नहीं है ये बात मगर कौन सुने लाख पुकारो..!! - [हुस्न को दिल में छुपा कर देखो](https://hindigazals.com/husn-ko-dil-me-chhupa-kar-dekho/): हुस्न को दिल में छुपा कर देखो ध्यान की शम्अ’ जला कर देखो, क्या ख़बर कोई दफ़ीना मिल जाए कोई दीवार गिरा कर देखो, फ़ाख़्ता चुप है बड़ी देर से क्यूँ सर्व की शाख़ हिला कर देखो, क्यूँ चमन छोड़ दिया ख़ुश्बू ने फूल के पास तो जा कर देखो, नहर क्यूँ सो गई चलते चलते कोई पत्थर ही गिरा कर देखो, दिल में बेताब हैं क्या क्या मंज़र कभी इस शहर में आ कर देखो, इन अँधेरों में किरन है कोई शब ए ज़ूद आँख उठा कर देखो..!! - [ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई](https://hindigazals.com/ye-bhi-kya-shaam-e-mulaqat-aayee/): ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई लब पे मुश्किल से तेरी बात आई, सुब्ह से चुप हैं तेरे हिज्र नसीब हाए क्या होगा अगर रात आई, बस्तियाँ छोड़ के बरसे बादल किस क़यामत की ये बरसात आई, कोई जब मिल के हुआ था रुख़्सत दिल ए बेताब वही रात आई, साया ए ज़ुल्फ़ ए बुताँ में नासिर एक से एक नई रात आई..!! - [सुनाता है कोई भोली कहानी](https://hindigazals.com/sunaata-hai-koi-bholi-kahani/): सुनाता है कोई भोली कहानी महकते मीठे दरियाओं का पानी, यहाँ जंगल थे आबादी से पहले सुना है मैं ने लोगों की ज़बानी, यहाँ एक शहर था शहर ए निगाराँ न छोड़ी वक़्त ने इस की निशानी, मैं वो दिल हूँ दबिस्तान ए अलम का जिसे रोएगी बरसों शादमानी, तहय्युर ने उसे देखा है अक्सर ख़िरद कहती है जिस को ला मकानी, ख़यालों ही में अक्सर बैठे बैठे बसा लेता हूँ एक दुनिया सुहानी, हुजूम ए नश्शा ए फ़िक्र ए सुख़न में बदल जाते हैं लफ़्ज़ों के मआ’नी, बता ऐ ज़ुल्मत ए सहरा ए इम्काँ कहाँ होगा मेरे ख़्वाबों का सानी, अँधेरी शाम के पर्दों में छुप कर किसे रोती है चश्मों की रवानी, किरन परियाँ उतरती हैं कहाँ से कहाँ जाते हैं रिसते कहकशानी ? - [पत्थर का वो शहर भी क्या था](https://hindigazals.com/patthar-ka-wo-shahar-bhi-kya-tha/): पत्थर का वो शहर भी क्या था शहर के नीचे शहर बसा था, पेड़ भी पत्थर फूल भी पत्थर पत्ता पत्ता पत्थर का था, चाँद भी पत्थर झील भी पत्थर पानी भी पत्थर लगता था, लोग भी सारे पत्थर के थे रंग भी उन का पत्थर सा था, पत्थर का एक साँप सुनहरा काले पत्थर से लिपटा था, पत्थर की अंधी गलियों में मैं तुझे साथ लिए फिरता था, गूँगी वादी गूँज उठती थी जब कोई पत्थर गिरता था..!! - [फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के](https://hindigazals.com/phool-khushboo-se-juda-hai-ab-ke-yaaro/): फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के यारो ये कैसी हवा है अब के ? - [मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले](https://hindigazals.com/mumkin-nahi-mataa-e-sukhan-mujh-se-cheen-le/): मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कुंज ए चमन मुझ से छीन ले, गर एहतिराम ए रस्म ए वफ़ा है तो ऐ ख़ुदा ये एहतिराम ए रस्म ए कोहन मुझ से छीन ले, मंज़र दिल ओ निगाह के जब हो गए उदास ये बे फ़ज़ा इलाक़ा ए तन मुझ से छीन ले, गुल रेज़ मेरी नाला कशी से है शाख़ शाख़ गुलचीं का बस चले तो ये फ़न मुझ से छीन ले, सींची हैं दिल के ख़ून से मैं ने ये कियारियाँ किस की मजाल मेरा चमन मुझ से छीन ले..!! - [ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा](https://hindigazals.com/zabaan-sukhan-ko-sukhan-baankpan-ko-tarsega/): ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही तेरे दौर में साक़ी ये दौर मेरी शराब ए कुहन को तरसेगा, मुझे तो ख़ैर वतन छोड़ कर अमाँ न मिली वतन भी मुझ से ग़रीब उल वतन को तरसेगा, इन्ही के दम से फ़रोज़ाँ हैं मिल्लतों के चराग़ ज़माना सुहबत ए अरबाब ए फ़न को तरसेगा, बदल सको तो बदल दो ये बाग़बाँ वर्ना ये बाग़ साया ए सर्व ओ समन को तरसेगा, हवा ए ज़ुल्म यही है तो देखना एक दिन ज़मीन पानी को सूरज किरन को तरसेगा..!! - [तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं](https://hindigazals.com/teri-nigaah-ke-jaadoo-bikharte-jaate-hain/): तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं, तेरे बग़ैर वो दिन भी गुज़र गए आख़िर तेरे बग़ैर ये दिन भी गुज़रते जाते हैं, लिए चलो मुझे दरिया ए शौक़ की मौजो कि हमसफ़र तो मेरे पार उतरते जाते हैं, तमाम उम्र जहाँ हँसते खेलते गुज़री अब उस गली में भी हम डरते डरते जाते हैं, मैं ख़्वाहिशों के घरौंदे बनाए जाता हूँ वो मेहनतें मेरी बर्बाद करते जाते हैं..!! - [नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं](https://hindigazals.com/naseeb-e-ishq-dil-e-be-qarar-bhi-to-nahi/): नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार भी तो नहीं, तलाफ़ी ए सितम ए रोज़गार कौन करे ? - [बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले](https://hindigazals.com/bane-banaye-hue-raaston-pe-jaa-nikale/): बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले ये हमसफ़र मेरे कितने गुरेज़ पा निकले, चले थे और किसी रास्ते की धुन में मगर हम इत्तिफ़ाक़ से तेरी गली में आ निकले, ग़म ए फ़िराक़ में कुछ देर रो ही लेने दो बुख़ार कुछ तो दिल ए बे क़रार का निकले, नसीहतें हमें करते हैं तर्क ए उल्फ़त की ये ख़ैर ख़्वाह हमारे किधर से आ निकले ? - [ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा](https://hindigazals.com/khwab-me-raat-hum-ne-kya-dekha/): ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा आँख खुलते ही चाँद सा देखा, कियारियाँ धूल से अटी पाईं आशियाना जला हुआ देखा, फ़ाख़्ता सर निगूँ बबूलों में फूल को फूल से जुदा देखा, उस ने मंज़िल पे ला के छोड़ दिया उम्र भर जिस का रास्ता देखा, हम ने मोती समझ के चूम लिया संग रेज़ा जहाँ पड़ा देखा, कम नुमा हम भी हैं मगर प्यारे कोई तुझ सा न ख़ुद नुमा देखा..!! - [साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन](https://hindigazals.com/saaz-e-hastee-kee-sada-gaur-se-sun/): साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन क्यूँ है ये शोर बपा ग़ौर से सुन, दिन के हंगामों को बे कार न जान शब के पर्दों में है क्या ग़ौर से सुन, चढ़ते सूरज की अदा को पहचान डूबते दिन की निदा ग़ौर से सुन, क्यूँ ठहर जाते हैं दरिया सर ए शाम रूह के तार हिला ग़ौर से सुन, यास की छाँव में सोने वाले जाग और शोर ज़रा ग़ौर से सुन, हर नफ़स दाम ए गिरफ़्तारी है नौ गिरफ़्तार ए बला ग़ौर से सुन, दिल तड़प उठता है क्यूँ आख़िर ए शब दो घड़ी कान लगा ग़ौर से सुन, उसी मंज़िल में हैं सब हिज्र ओ विसाल रह रव ए आबला पा ग़ौर से सन, उसी गोशे में हैं सब दैर ओ हरम दिल सनम है कि ख़ुदा ग़ौर से सुन, का’बा सुनसान है क्यूँ ऐ वाइ’ज़ हाथ कानों से उठा ग़ौर से सुन, मौत और ज़ीस्त के असरार ए रुमूज़ आमिरी बज़्म में आ ग़ौर से सुन, क्या गुज़रती है किसी के दिल पर ? - [इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है](https://hindigazals.com/in-sahme-hue-shaharon-kee-fazaa-kuch-kahti-hai/): इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है कभी तुम भी सुनो ये धरती क्या कुछ कहती है, ये ठिठुरी हुई लम्बी रातें कुछ पूछती हैं ये ख़ामोशी आवाज़ नुमा कुछ कहती है, सब अपने घरों में लम्बी तान के सोते हैं और दूर कहीं कोयल की सदा कुछ कहती है, जब रात को तारे बारी बारी जागते हैं कई डूबे हुए तारों की निदा कुछ कहती है, कभी भोर भए कभी शाम पड़े कभी रात गए हर आन बदलती रुत की हवा कुछ कहती है, मेहमान हैं हम मेहमान सरा है ये नगरी मेहमानों को मेहमान सरा कुछ कहती है, बेदार रहो बेदार रहो बेदार रहो ऐ हम सफ़रो आवाज़ ए दरा कुछ कहती है, नासिर आशोब ए ज़माना से ग़ाफ़िल न रहो कुछ होता है जब ख़ल्क़ ए ख़ुदा कुछ कहती है..!! - [किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है](https://hindigazals.com/kisi-ka-dard-ho-dil-be-qarar-apna-hai/): किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है हवा कहीं की हो सीना फ़िगार अपना है, हो कोई फ़स्ल मगर ज़ख़्म खुल ही जाते हैं सदा बहार दिल ए दाग़ दार अपना है, बला से हम न पिएँ मय कदा तो गर्म हुआ ब क़द्र ए तिश्नगी रंज ए ख़ुमार अपना है, जो शाद फिरते थे कल आज छुप के रोते हैं हज़ार शुक्र ग़म ए पाएदार अपना है, इसी लिए यहाँ कुछ लोग हम से जलते हैं कि जी जलाने में क्यूँ इख़्तियार अपना है, न तंग कर दिल ए महज़ूँ को ऐ ग़म ए दुनिया ख़ुदाई भर में यही ग़म गुसार अपना है, कहीं मिला तो किसी दिन मना ही लेंगे उसे वो ज़ूद रंज सही फिर भी यार अपना है, वो कोई अपने सिवा हो तो उस का शिकवा करूँ जुदाई अपनी है और इंतिज़ार अपना है, न ढूँढ नासिर ए आशुफ़्ता हाल को घर में वो बू ए गुल की तरह बे क़रार अपना है..!! - [ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे](https://hindigazals.com/ye-shab-ye-khyaal-o-khwab-tere/): ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे क्या फूल खिले हैं मुँह अँधेरे, शोले में है एक रंग तेरा बाक़ी हैं तमाम रंग मेरे, आँखों में छुपाए फिर रहा हूँ यादों के बुझे हुए सवेरे, देते हैं सुराग़ फ़स्ल ए गुल का शाख़ों पे जले हुए बसेरे, मंज़िल न मिली तो क़ाफ़िलों ने रस्ते में जमा लिए हैं डेरे, जंगल में हुई है शाम हम को बस्ती से चले थे मुँह अँधेरे, रूदाद ए सफ़र न छेड़ नासिर फिर अश्क न थम सकेंगे मेरे..!! - [कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश](https://hindigazals.com/kaarvaan-sust-raahbar-khamosh/): कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश कैसे गुज़रेगा ये सफ़र ख़ामोश, तुझे कहना है कुछ मगर ख़ामोश देख और देख कर गुज़र ख़ामोश, यूँ तेरे रास्ते में बैठा हूँ जैसे एक शम ए रहगुज़र ख़ामोश, तू जहाँ एक बार आया था एक मुद्दत से है वो घर ख़ामोश, उस गली के गुज़रने वालों को तकते रहते हैं बाम ओ दर ख़ामोश, उठ गए कैसे कैसे प्यारे लोग हो गए कैसे कैसे घर ख़ामोश, ये ज़मीं किस के इंतिज़ार में है क्या ख़बर क्यूँ है ये नगर ख़ामोश, शहर सोता है रात जाती है कोई तूफ़ाँ है पर्दा दर ख़ामोश, अब के बेड़ा गुज़र गया तो क्या हैं अभी कितने ही भँवर ख़ामोश, चढ़ते दरिया का डर नहीं यारो मैं हूँ साहिल को देख कर ख़ामोश, अभी वो क़ाफ़िले नहीं आए अभी बैठें न हम सफ़र ख़ामोश, हर नफ़स इक पयाम था नासिर हम ही बैठे रहे मगर ख़ामोश..!! - [दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई](https://hindigazals.com/dafaatan-dil-me-kisi-yaad-ne-lee-angdaaee/): दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई इस ख़राबे में ये दीवार कहाँ से आई ? - [यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए](https://hindigazals.com/yun-tere-husn-kee-tasveer-gazal-me-aaye/): यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए जैसे बिल्क़ीस सुलेमाँ के महल में आए, जब्र से एक हुआ ज़ाएक़ा ए हिज्र ओ विसाल अब कहाँ से वो मज़ा सब्र के फल में आए ? - [दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे](https://hindigazals.com/dard-kam-hone-laga-aao-ki-kuch-raat-kate/): दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे ग़म की मीआ’द बढ़ा जाओ कि कुछ रात कटे, हिज्र में आह ओ बुका रस्म ए कुहन है लेकिन आज ये रस्म ही दुहराओ कि कुछ रात कटे, यूँ तो तुम रौशनी ए क़ल्ब ओ नज़र हो लेकिन आज वो मो’जिज़ा दिखलाओ कि कुछ रात कटे, दिल दुखाता है वो मिल कर भी मगर आज की रात उसी बे दर्द को ले आओ कि कुछ रात कटे, दम घुटा जाता है अफ़्सुर्दा दिली से यारो कोई अफ़्वाह ही फैलाओ कि कुछ रात कटे, मैं भी बेकार हूँ और तुम भी हो वीरान बहुत दोस्तो आज न घर जाओ कि कुछ रात कटे, छोड़ आए हो सर ए शाम उसे क्यूँ नासिर ? - [कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत](https://hindigazals.com/kal-jinhen-zindagi-thee-raas-bahut/): कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत आज देखा उन्हें उदास बहुत, रफ़्तगाँ का निशाँ नहीं मिलता एक रही है ज़मीन घास बहुत, क्यूँ न रोऊँ तेरी जुदाई में ? - [सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा](https://hindigazals.com/sar-me-jab-ishq-ka-sauda-na-raha/): सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा क्या कहें ज़ीस्त में क्या क्या न रहा, अब तो दुनिया भी वो दुनिया न रही अब तेरा ध्यान भी उतना न रहा, क़िस्सा ए शौक़ सुनाऊँ किस को ? - [जब ज़रा तेज़ हवा होती है](https://hindigazals.com/jab-zara-tez-hawa-hoti-hai/): जब ज़रा तेज़ हवा होती है कैसी सुनसान फ़ज़ा होती है, हम ने देखे हैं वो सन्नाटे भी जब हर एक साँस सदा होती है, दिल का ये हाल हुआ तेरे बाद जैसे वीरान सरा होती है, रोना आता है हमें भी लेकिन इस में तौहीन ए वफ़ा होती है, मुँह अँधेरे कभी उठ कर देखो क्या तर ओ ताज़ा हवा होती है, अजनबी ध्यान की हर मौज के साथ किस क़दर तेज़ हवा होती है, ग़म के बे नूर गुज़रगाहों में एक किरन ज़ौक़ फ़ज़ा होती है, ग़म गुसार ए सफ़र ए राह ए वफ़ा मिज़ा ए आबला पा होती है, गुलशन ए फ़िक्र की मुँह बंद कली शब ए महताब में वा होती है, जब निकलती है निगार ए शब ए गुल मुँह पे शबनम की रिदा होती है, हादसा है कि ख़िज़ाँ से पहले बू ए गुल गुल से जुदा होती है, एक नया दौर जनम लेता है एक तहज़ीब फ़ना होती है, जब कोई ग़म नहीं होता नासिर बेकली दिल की सिवा होती है..!! - [याद आता है रोज़ ओ शब कोई](https://hindigazals.com/yaad-aata-hai-roz-o-shab-koi/): याद आता है रोज़ ओ शब कोई हम से रूठा है बे सबब कोई, लब ए जू छाँव में दरख़्तों की वो मुलाक़ात थी अजब कोई, जब तुझे पहली बार देखा था वो भी था मौसम ए तरब कोई, कुछ ख़बर ले कि तेरी महफ़िल से दूर बैठा है जाँ ब लब कोई, न ग़म ए ज़िंदगी न दर्द ए फ़िराक़ दिल में यूँही सी है तलब कोई, याद आती हैं दूर की बातें प्यार से देखता है जब कोई, चोट खाई है बार हा लेकिन आज तो दर्द है अजब कोई, जिन को मिटना था मिट चुके नासिर उन को रुस्वा करे न अब कोई..!! - [कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले](https://hindigazals.com/kuch-to-ehsas-e-ziyaan-tha-pahle/): कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले दिल का ये हाल कहाँ था पहले, अब तो झोंके से लरज़ उठता हूँ नश्शा ए ख़्वाब ए गिराँ था पहले, अब तो मंज़िल भी है ख़ुद गर्म ए सफ़र हर क़दम संग ए निशाँ था पहले, सफ़र ए शौक़ के फ़रसंग न पूछ वक़्त बे क़ैद मकाँ था पहले, ये अलग बात कि ग़म रास है अब उस में अंदेशा ए जाँ था पहले, यूँ न घबराए हुए फिरते थे दिल अजब कुंज ए अमाँ था पहले, अब भी तू पास नहीं है लेकिन इस क़दर दूर कहाँ था पहले ? - [अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को](https://hindigazals.com/avvalee-chaand-ne-kya-baat-sujhaaee-mujh-ko/): अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को याद आई तेरी अंगुश्त ए हिनाई मुझ को, सर ए ऐवान ए तरब नग़्मा सरा था कोई रात भर उस ने तेरी याद दिलाई मुझ को, देखते देखते तारों का सफ़र ख़त्म हुआ सो गया चाँद मगर नींद न आई मुझ को, इन्ही आँखों ने दिखाए कई भरपूर जमाल इन्हीं आँखों ने शब ए हिज्र दिखाई मुझ को, साए की तरह मेरे साथ रहे रंज ओ अलम गर्दिश ए वक़्त कहीं रास न आई मुझ को, धूप इधर ढलती थी दिल डूबता जाता था इधर आज तक याद है वो शाम ए जुदाई मुझ को, शहर ए लाहौर तेरी रौनक़ें दाइम आबाद तेरी गलियों की हवा खींच के लाई मुझ को..!! - [कब तलक मुद्दआ कहे कोई](https://hindigazals.com/kab-talak-muddaa-kahe-koi/): कब तलक मुद्दआ कहे कोई न सुनो तुम तो क्या कहे कोई ? - [तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं](https://hindigazals.com/tere-milne-ko-bekal-ho-gaye-hain/): तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं मगर ये लोग पागल हो गए हैं, बहारें ले के आए थे जहाँ तुम वो घर सुनसान जंगल हो गए हैं, यहाँ तक बढ़ गए आलाम ए हस्ती कि दिल के हौसले शल हो गए हैं, कहाँ तक ताब लाए ना तवाँ दिल कि सदमे अब मुसलसल हो गए हैं, निगाह ए यास को नींद आ रही है मिज़ा पर अश्क बोझल हो गए हैं, उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना यहाँ जो हादसे कल हो गए हैं, जिन्हें हम देख कर जीते थे नासिर वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं..!! - [ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती](https://hindigazals.com/khuda-ke-ghar-sadak-koi-nahi-jaati/): ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती, चली जाती है हँसने और हँसाने से दवा खाने से बीमारी नहीं जाती, ज़ियादा सोचने से नींद जाती है मगर इस से परेशानी नहीं जाती, मुआ’फ़ी माँ ने दे दी ख़्वाब में आ कर मगर सर से पशेमानी नहीं जाती, उसे जाने दिया रोका नहीं मैं ने कभी उस की ये हैरानी नहीं जाती, मोहब्बत हो गई तो हो गई आतिश कभी ये वाली बीमारी नहीं जाती..!! - [बे सबब ही इधर उधर जाता](https://hindigazals.com/be-sabab-hee-idhar-udhar-jaata/): बे सबब ही इधर उधर जाता तुम नहीं होते तो बिखर जाता, फूल की तरह तुम अगर खिलते इत्र की तरह मैं बिखर जाता, ख़्वाब देखे थे हर जगह हम ने छोड़ कर शहर ये किधर जाता, बात ये है कि ये जुदाई है हादिसा होता तो गुज़र जाता, फिर जुदा होना होता ना मुम्किन जिस्म में जिस्म गर उतर जाता..!! - [बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं](https://hindigazals.com/bahut-paper-pe-chhapne-hai-to-thappa-kaat-lete-hain/): बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं पिता जी मर गए हैं तो अँगूठा काट लेते हैं, मुकम्मल हो नहीं पाया वो हिस्सा काट लेते हैं कहानी से मोहब्बत वाला क़िस्सा काट लेते हैं, हमारे हाथ के पोरों पे कोई घाव क्या देता हमीं हैं वे जो नाख़ूनों को गहरा काट लेते हैं, मोहब्बत के महीने को अकेले जब निकाला है तुम्हारी ज़िंदगी से ये महीना काट लेते हैं..!! - [भला कब मैं निशाने पर नहीं आया](https://hindigazals.com/bhala-kab-main-nishaane-par-nahi-aaya/): भला कब मैं निशाने पर नहीं आया मेरे हाथों में पर पत्थर नहीं आया, मैं तौबा दोस्ती से कर तो लूँ लेकिन हमेशा पीठ पे ख़ंजर नहीं आया, कहीं ठहरे नहीं फिर भी शिकायत है सफ़र में ख़ुशनुमा मंज़र नहीं आया, निभाई है मोहब्बत उम्र-भर आतिश मोहब्बत में कभी अंतर नहीं आया..!! - [गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग](https://hindigazals.com/gali-gali-aabaad-thi-jin-se-kahan-gaye-wo-log/): गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला सोग, सारा सारा दिन गलियों में फिरते हैं बेकार रातों उठ उठ कर रोते हैं इस नगरी के लोग, सहमे सहमे से बैठे हैं रागी और फ़नकार भोर भए अब इन गलियों में कौन सुनाए जोग, जब तक हम मसरूफ़ रहे ये दुनिया थी सुनसान दिन ढलते ही ध्यान में आए कैसे कैसे लोग ? - [शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता](https://hindigazals.com/shajar-jis-pe-main-rahta-hoon-use-kaata-nahi-karta/): शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता मैं आतिश मुल्क से सपने में भी धोका नहीं करता, बनाते कैसे हैं मिट्टी से सोना मुझ को आता है मगर मैं दोस्तो ऐसा कोई दावा नहीं करता, भुला देते हैं लोग अक्सर मोहब्बत में किए वा’दे तभी तो जान मैं तुम से कोई वादा नहीं करता, मैं एक बूढ़ा शजर जिस को जवाँ रखा परिंदों ने तभी तो मैं परिंदों से कोई शिकवा नहीं करता, उड़ानें देखनी हैं गर तो मेरी शाइ’री देखो परिंदा हूँ मैं पर ऐसा कभी दावा नहीं करता..!! - [इश्क़ से दिल को ऊबा देखा](https://hindigazals.com/ishq-se-dil-ko-oobaa-dekha/): इश्क़ से दिल को ऊबा देखा जिस्म का जब से सौदा देखा, भूका हम ने राजा देखा सागर को भी प्यासा देखा, दुनिया देखी कब बच्चों ने सी सी प्लस प्लस जावा देखा, उम्मीदें माँ बाप की देखीं बच्चों का जब बस्ता देखा, शाही पथ का लालच मत कर सच्चा रस्ता कच्चा देखा, बदल के देखा हम ने फिर भी राजा लेकिन बहरा देखा, तू प्यारा है क्यूँ कि मैं ने तुझ में अपना साया देखा, बात अगर चुभ जाए आतिश वार उस का फिर गहरा देखा..!! - [ख़ुद को बीमार मत किया कर यार](https://hindigazals.com/khud-ko-bimar-mat-kiya-kar-yaar/): ख़ुद को बीमार मत किया कर यार डूब कर प्यार मत किया कर यार, जब मदद चाहे कोई ग़ैरत मंद तब तू इंकार मत किया कर यार, दिल को जाना जहाँ है जाने दो दिल से तकरार मत किया कर यार, ख़ुद के खाने के लाले पड़ जाएँ इतना उपकार मत किया कर यार..!! - [कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला](https://hindigazals.com/koshishe-kar-lo-main-badal-nahi-hone-wala/): कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला बरसों बे वज्ह यूँ पागल नहीं होने वाला, शर्त ये है कि हमारे ही तरह हो जाओ यार सोना हूँ मैं पीतल नहीं होने वाला, ख़्वाब टूटा तो नया ख़्वाब दिखाते क्यों हो ख़्वाब ये भी तो मुकम्मल नहीं होने वाला, चाहिए पेड़ उगाने के अलावा भी कुछ बाग़ पेड़ों से तो जंगल नहीं होने वाला..!! - [सब पुराने ख़याल बदलो यार](https://hindigazals.com/sab-puraane-khyaal-badlo-yaar/): सब पुराने ख़याल बदलो यार वक़्त बदला है साल बदलो यार, मात हर बार थोड़ी खाऊँगा वक़्त के साथ चाल बदलो यार, एक थप्पड़ अभी लगेगा और इस लिए अपना गाल बदलो यार, कर नहीं सकती मैं अभी शादी इस का मतलब सवाल बदलो यार, फिर से इस में नहीं फँसूँगा मैं इस लिए अपना जाल बदलो यार..!! - [क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ](https://hindigazals.com/kya-hai-unchaaee-mohabbat-kee-batate-jaao/): क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ पंछियों उड़ के यूँ ही ख़्वाब दिखाते जाओ, पेड़ पत्थर का जवाब आज भी देते फल से चोट खाओ भले पर रिश्ते निभाते जाओ, यूँ भी पैग़ाम मोहब्बत का पहुँच जाएगा साथ इंसाँ के परिंदों को बसाते जाओ, शहर में काम बहुत सारे समय लेकिन कम मत करो बात मगर हाथ हिलाते जाओ, एक दो मत भेद तो हर घर में हुआ करते हैं इन को नेता जी हवा मत दो बुझाते जाओ, गाँव में नाव थी काग़ज़ की सफ़र आसाँ था एक मुसाफ़िर हूँ यहाँ राह दिखाते जाओ, गालियाँ ऐसे ही दो मुझ को हमेशा आतिश ग़लतियाँ मेरी इसी तरह बताते जाओ..!! - [दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले](https://hindigazals.com/dil-me-hai-kya-azaab-kahe-to-pata-chale/): दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले दीवार ख़ामोशी की ढहे तो पता चले, सब कुछ ही बाँटने को चली आती क्यूँ नदी ? - [दर्द से दिल ने वास्ता रखा](https://hindigazals.com/dard-se-dil-ne-vaasta-rakha/): दर्द से दिल ने वास्ता रखा वक़्त बदलेगा हौसला रखा, रो दिए मेरे हाल पे पंछी चुगने जब सिर्फ़ बाजरा रखा, मैं परिंदा बना हूँ जब से तू सरहदों से न वास्ता रखा, धोका अक्सर मिले है अपनों से अपनों से थोड़ा फ़ासला रखा, ताकि निकलें नहीं मेरे आँसू दर्द सहने का सिलसिला रखा, मंदिरों मस्जिदों में ढूँढे कौन इस लिए दिल में एक ख़ुदा रखा, तोड़ देते जो हौसला आतिश उन ख़यालों से फ़ासला रखा..!! - [उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं](https://hindigazals.com/ulfaton-ka-khuda-nahin-hoon-main/): उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं रंज ओ ग़म से जुदा नहीं हूँ मैं, एक अर्सा हुआ गए उस को अब तो उस का पता नहीं हूँ मैं, कलयुगी सोच से हूँ प्रदूषित कोई ताज़ा हवा नहीं हूँ मैं, ख़र्चों के बोझ ने कमर तोड़ी शौक़ से कुइ झुका नहीं हूँ मैं, बेवफ़ा बा वफ़ा नहीं होगा इश्क़ की कीमिया नहीं हूँ मैं, चंद सिक्के हैं लोगों की क़ीमत शुक्र है कि बिका नहीं हूँ मैं, धर्म और ज़ात की जकड़ ऐसी पर तो हैं पर उड़ा नहीं हूँ मैं..!! - [बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले](https://hindigazals.com/baat-bachchon-kee-thi-ladne-ko-sayaane-nikale/): बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले फिर अजब क्या है कि बच्चे भी लड़ाके निकले, ध्यान माँ रखती थी मेरा वो ज़माने निकले हैं यूँ अब रोज़ सवेरे से कमाने निकले, आम के बाग़ से जब से हैं परिंदे ग़ाएब बा’द उस के कहाँ फिर आम रसीले निकले, पोटली जिस के लिए लड़ती रहीं औलादें माँ की उस पोटली में सिर्फ़ झरोके निकले, ये तो कलयुग है खरा इस में नहीं हैं कोई मुझ को शिकवा नहीं सिक्के मिरे खोटे निकले, फिर ग़रीबों की शिकायत का ख़ुदा हाफ़िज़ हैं जब वज़ीरों के अमीरों ही से रिश्ते निकले, गर्द जब साफ़ हुई सब ने ये मंज़र देखा जो नज़र आते थे ऊँचे वही बौने निकले, इब्तिदा फिर से है एक और सफ़र की आतिश बा’द मरने के भले पैरों से जूते निकले..!! - [काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता](https://hindigazals.com/kaash-main-tujh-saa-bewafa-hota/): काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता फिर मुझे तुझ से क्या गिला होता ? - [इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है](https://hindigazals.com/is-jaada-e-ushshaaq-kee-taqdeer-azab-hai/): इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है, बे वक़अत ओ कम माया सही ख़्वाब हमारे ख़्वाबों से अलग होने की ता’ज़ीर अजब है, मैं शे’र कहूँ और तेरे नाम पे रो दूँ ये रंज का पैरा ए दिलगीर अजब है, आँखों में बिछे सुरमई मख़मल की अदा और महमिल में फटे होंटों की तहक़ीर अजब है, हर ईंट मेरी नज़्म को देती है दिलासा ये कुंज ए ग़ज़ल सहन ए मज़ा मीर अजब है, दाग़ों की बहारों से मोअ’त्तर है कोई जिस्म और इस्म पढ़े जाने में ताख़ीर अजब है, ये ख़ाक बसर हुस्न ये महताब की टहनी रौंदी हुई सब्ज़े की ये जागीर अजब है, नीलाए हुए सेहनों की बस्ती में है कोहराम दरयाफ़्ता सय्यारे की तस्ख़ीर अजब है, दिल सकते के आलम से निकलता नहीं आमिर एक बात के सह जाने की तासीर अजब है..!! - [गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब](https://hindigazals.com/gale-se-der-talak-lag-ke-royen-abr-o-sahaab/): गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब हटा दिए हैं ज़मान ओ मकाँ के हम ने हिजाब, लहद की मिट्टी की तक़दीर की अमान मैं दूँ सफ़ेद लट्ठे में कफ़ना के सुर्ख़ शाख़ ए गुलाब, मैं आसमान तेरे जिस्म पे बिछा देता मगर ये नील में चादर बनी नहीं कमख़ाब, तेरा वो रातों को उठ कर सिसक सिसक रोना लहू में नींद की टीसें पलक पे इज्ज़ के ख़्वाब, तेरे जलाए दियों में भड़कती आग का फेर ज़मीं की रेहल पे रक्खे न रौशनी की किताब, हवा बहिश्त के बाग़ों की ज़ुल्फ़ ज़ुल्फ़ फिरे तेरी लहद तेरे बालीं के गर्द जू ए शराब, कमान खींच ज़माने की सू ए सीना ज़नाँ ऐ फ़र्क़ ए नाज़ गले से उतार तौक़ ए ग़याब, मैं एक यख़-ज़दा माथे को चूम कर दम ए सुब्ह तेरी ज़मीनों से गुज़रूँगा ऐ जहान ए ख़राब, मशक़्क़ती हैं तेरे काख़ ओ कू ए हिज्र के हम ऐ कारख़ाना ए अफ़्लाक ओ ख़ाक ओ आब ओ सराब, ये तंग ओ तार गढ़ा नूर से भरे आमिर सदा रहे तेरे हुजरे में हाला ए माहताब..!! - [जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है](https://hindigazals.com/junun-e-dil-na-sirf-itna-ki-ek-gul-pairahan-tak-hai/): जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला दार ओ रसन तक है, मगर ऐ हम-क़फ़स कहती है शोरीदा सरी अपनी ये रस्म ए क़ैद ओ ज़िंदाँ एक दीवार ए कुहन तक है, कहाँ बच कर चली ऐ फ़स्ल ए गुल मुझ आबला पा से मेरे क़दमों की गुलकारी बयाबाँ से चमन तक है, मैं क्या क्या जुरआ ए ख़ूँ पी गया पैमाना ए दिल में बला नोशी मेरी क्या एक मय ए साग़र शिकन तक है, न आख़िर कह सका उस से मेरा हाल ए दिल ए सोज़ाँ मह ए ताबाँ कि जो उस का शरीक ए अंजुमन तक है, नवा है जावेदाँ मजरूह जिस में रूह ए साअत हो कहा किस ने मेरा नग़्मा ज़माने के चलन तक है..!! - [आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में](https://hindigazals.com/aabla-paa-koi-guzaara-tha-jo-pichhle-san-me/): आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन में, देखना रंग ए बदन यार के पैराहन में चाँदनी दूध सी छिटकी है मेरे आँगन में, देखना दीदावरो आमद ए तूफ़ान तो नहीं टपकी है दर्द की एक बूँद मेरे दामन में, मैं हम आग़ोश ए सनम था मगर ए पीर ए हरम ये शिकन कैसे पड़ी आप के पैरहन में, कुछ न कुछ आज असीरों ने कहा तो है ज़रूर एक एक गुल से लिपटती है सबा गुलशन में, सहल इतने भी नहीं ऐ सितम ईजाद कि हम थाम लेते हैं गरेबान दिवाने पन में, सर तस्लीम नहीं बाज़ू ए क़ातिल का जवाब आख़िरश मारे गए ख़ुद भी मसीहा अन में, जा रहे हो तो ज़रा देखना तुम भी मजरूह मेरी आँखें वहीं ज़िंदाँ के किसी रौज़न में..!! - [वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है](https://hindigazals.com/wo-jis-pe-tumhen-sham-e-sar-e-rah-ka-gumaan-hai/): वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही ज़बाँ है, अब हाथ हमारे है इनाँ रख़्श ए जुनूँ की अब सर पे हमारे कुलह ए संग ए बुताँ है, बस फेर के मुँह ख़ार क़दम खींच रहे थे देखा तो निहाँ क़ाफ़िला ए हम सफ़राँ है, चुभते ही बनी ख़ार सिफ़त पा ए ख़िज़ाँ में क्या कीजे बहुत हम को ग़म ए लाला रुख़ाँ है, काम आए बहुत लोग सर ए मक़्तल ए ज़ुल्मात ऐ रौशनी ए कूचा ए दिल दार कहाँ है, ऐ फ़स्ल ए जुनूँ हम को पए शग़्ल ए गरेबाँ पैवंद ही काफ़ी है अगर जामा गिराँ है, मजरूह कहाँ से गुहर ए गंदुम ओ जौ लाएँ अपनी तो गिरह में यही चश्म ए निगराँ है..!! - [सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी](https://hindigazals.com/sikhaayen-dast-e-talab-ko-adaa-e-babakee/): सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम रह चुके तोड़ें ये बंद ए रुस्वाई कुछ अपने बाज़ू ए मेहनत का एहतिराम करें, ज़मीं को मिल के सँवारें मिसाल ए रू ए निगार रुख़ ए निगार से रौशन चराग़ ए बाम करें, फिर उठ के गर्म करें कारोबार ए ज़ुल्फ़ ओ जुनूँ फिर अपने साथ उसे भी असीर ए दाम करें, मेरी निगाह में है अर्ज़ ए मास्को मजरूह वो सरज़मीं कि सितारे जिसे सलाम करें..!! - [दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही](https://hindigazals.com/dast-e-munaeem-meri-mehnat-ka-kharidar-sahi/): दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही कोई दिन और मैं रुस्वा सर ए बाज़ार सही, फिर भी कहलाऊँगा आवारा ए गेसू ए बहार मैं तेरा दाम ए ख़िज़ाँ लाख गिरफ़्तार सही, जस्त करता हूँ तो लड़ जाती है मंज़िल से नज़र हाइल ए राह कोई और भी दीवार सही, ग़ैरत ए संग है साक़ी ये गुलू ए तिश्ना तेरे पैमाने में जो मौज है तलवार सही, मैं ने देखी देखी उसी में ग़म ए दौराँ की झलक बे ख़बर रंग ए जहाँ से निगह ए यार सही, उन से बिछड़े हुए मजरूह ज़माना गुज़रा अब भी होंटों में वही गर्मी ए रुख़्सार सही..!! - [मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है](https://hindigazals.com/mujh-se-kaha-zibreel-e-junoon-ne-ye-bhi-vahee-e-ilaahi-hai/): मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए दिल है बाक़ी सब गुमराही है, वो जो हुए फ़िरदौस बदर तक़्सीर थी वो आदम की मगर मेरा अज़ाब ए दर बदरी मेरी ना कर्दा गुनाही है, संग तो कोई बढ़ के उठाओ शाख़ ए समर कुछ दूर नहीं जिस को बुलंदी समझे हो इन हाथों की कोताही है, फिर कोई मंज़र फिर वही गर्दिश क्या कीजे ऐ कू ए निगार मेरे लिए ज़ंजीर ए गुलू मेरी आवारा-निगाही है, बहर ए ख़ुदा ख़ामोश रहो बस देखते जाओ अहल ए नज़र क्या लग़ज़ीदा क़दम हैं उस के क्या दुज़दीदा निगाही है, दीद के क़ाबिल है तो सही मजरूह तेरी मस्ताना रवी गर्द ए हवा है रख़्त ए सफ़र रस्ते का शजर हम राही है..!! - [दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे](https://hindigazals.com/dast-e-pur-khoon-ko-kaf-e-dast-e-nigaaraan-samjhe/): दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे क़त्ल गह थी जिसे हम महफ़िल ए याराँ समझे, कुछ भी दामन में नहीं ख़ार ए मलामत के सिवा ऐ जुनूँ हम भी किसे कू ए बहाराँ समझे, टूटे धागे ही से करते हैं रफ़ू चाक ए जिगर कौन बेचारगी ए सीना फ़िगाराँ समझे, हाँ वो बेदर्द तो बेगाना ही अच्छा यारो जो न तौक़ीर ए ग़म ए दर्द गुसाराँ समझे, ख़ंदा ज़न उस पे रहे हल्क़ा ए ज़ंजीर ए जुनूँ जो न कुछ मंज़िलत ए सिलसिला दाराँ समझे, आज से हम ने भी ज़ख़्मों को तबस्सुम जाना रज़्म को बज़्म गह ए लाला एज़ाराँ समझे, तोड़ दें हम जो न तलवार तो कहिए मजरूह तेग़ ज़न क्या हुनर ए ज़ख़्म शिआराँ समझे..!! - [मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो](https://hindigazals.com/mere-pichhe-ye-to-muhaal-hai-ki-zamana-garm-e-safar-na-ho/): मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो कि नहीं मेरा कोई नक़्श ए पा जो चिराग़ ए राहगुज़र न हो, रुख़ ए तेग़ से जो न हो कभी सहर ऐसी कोई नहीं मेरी नहीं ऐसी एक भी शाम जो तह ए ज़ुल्फ़ ए दार बसर न हो, मेरे हाथ हैं तो लूँगा ख़ुद मैं अब अपना साक़ी ए मयकदा ख़ुम ए ग़ैर से तो ख़ुदा करे लब ए जाम भी मेरा तर न हो, मैं हज़ार शक्ल बदल चुका चमन ए जहाँ में सुन ऐ सबा कि जो फूल है तेरे हाथ में ये मेरा ही लख़्त ए जिगर न हो, जिन्हें सब समझते हैं मेहर ओ मह न हों सिर्फ़ चंद नुक़ूश ए पा जिसे कहते हैं कुर्रा ए ज़मीं फ़क़त एक संग ए सफ़र न हो, तेरे पा ज़मीं पे रुके रुके तेरा सर फ़लक पे झुका झुका कोई तुझ से भी है अज़ीम तर यही वहम तुझ को मगर न हो, शब ए ज़ुल्म नरग़ा ए राहज़न से पुकारता है कोई मुझे मैं फ़राज़ ए दार से देख लूँ कहीं कारवान ए सहर न हो..!! - [जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में](https://hindigazals.com/jis-dam-ye-suna-hai-subh-e-watan-mahbus-fazaa-e-zindaan-me/): जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में जैसे कि सबा ऐ हम क़फ़सो बेताब हम आए ज़िंदाँ में, हो तेग़ ए असर ज़ंजीर ए क़दम फिर भी हैं नक़ीब ए मंज़िल हम ज़ख़्मों से चराग़ ए राहगुज़र बैठे हैं जलाए ज़िंदाँ में, सद चाक क़बा ए अम्न ओ सुकूँ उर्यां है अहिंसाई का जुनूँ कुछ ख़ूँ से शहीदों ने अपने वो गुल हैं खिलाए ज़िंदाँ में, ये जब्र ए सियासत ये इंसाँ मज़लूम आहें मजबूर फ़ुग़ाँ ज़ख़्मों की महक दाग़ों का धुआँ मत पूछ फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में, ग़ैरों की ख़लिश अपनों की लगन सोज़ ए ग़म ए जानाँ दर्द ए वतन क्या कहिए कि हम हैं किस किस को सीने से लगाए ज़िंदाँ में, गुल बनती है शायद ख़ाक ए वतन शायद कि सफ़र करती है ख़िज़ाँ ख़ुशबू ए बहाराँ मिलती है कुछ दिन से हवा ए ज़िंदाँ में, मुजरिम थे जो हम सो क़ैद हुए सय्याद मगर अब ये तो बता हर वक़्त ये किस को ढूँडते हैं दीवार के साए ज़िंदाँ में, जिस्मों पे ये किस का नाम ए सियह लिख देते हैं कोड़ों के निशाँ हैं ताक में किस की ज़ंजीरें अब आँख लगाए ज़िंदाँ में, रफ़्तार ए ज़माना लय जिन की गाती है गुल ए नग़्मा जिन का हम गाते हैं उन आवाज़ों से आवाज़ मिलाए ज़िंदाँ में..!! - [हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए](https://hindigazals.com/ho-jo-saare-dast-o-paa-hain-khoon-me-nahlaaye-hue/): हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए हम भी हैं ऐ दिल बहाराँ की क़सम खाए हुए, ख़ब्त है ऐ हमनशीं अक़्ल ए हरीफ़ान ए बहार है ख़िज़ाँ इन की इन्हें आईना दिखलाए हुए, क्या है ज़िक्र ए आतिश ओ आहन कि गद्दारान ए गूल मारते हैं हाथ अंगारों पे घबराए हुए, ज़िंदगी की क़द्र सीखी शुक्रिया तेग़ ए सितम हाँ हमें थे कल तलक जीने से उकताए हुए, सैर ए साहिल कर चुके ऐ मौज ए साहिल सर न मार तुझ से क्या बहलेंगे तूफ़ानों के बहलाए हुए, है यही एक कारोबार ए नग़्मा ओ मस्ती कि हम या ज़मीं पर या सर ए अफ़्लाक हैं छाए हुए, साज़ उठाया जब तो गरमाते फिरे ज़र्रों के दिल जाम हाथ आया तो महर ओ मह के हमसाए हुए, दश्त ओ दर बनने को हैं मजरूह मैदान ए बहार आ रही है फ़स्ल ए गुल परचम को लहराए हुए..!! - [डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को](https://hindigazals.com/dara-ke-mauj-o-talatum-se-hum-nasheeno/): डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, जमाल ए सुब्ह दिया रू ए नौ बहार दिया मेरी निगाह भी देता ख़ुदा हसीनों को, हमारी राह में आए हज़ार मयख़ाने भुला सके न मगर होश के क़रीनों को, कभी नज़र भी उठाई न सू ए बादा ए नाब कभी चढ़ा गए पिघला के आबगीनों को, यही जहाँ है जहन्नम यही जहाँ फ़िरदौस बताओ आलम ए बाला के सैर बीनों को, हुए हैं क़ाफ़िले ज़ुल्मत की वादियों में रवाँ चराग़ ए राह किए ख़ूँ चकाँ जबीनों को, तुझे न माने कोई तुझ को इस से क्या मजरूह चल अपनी राह भटकने दे नुक्ता चीनों को..!! - [वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए](https://hindigazals.com/wo-to-gaya-ye-deeda-e-khoon-baar-dekhiye/): वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए, दिखला के वो तो ले भी गया शोख़ी ए ख़िराम अब तक हैं रक़्स में दर ओ दीवार देखिए, उक्ता के हम ने तोड़ी थी ज़ंजीर ए नाम ओ नंग अब तक फ़ज़ा में है वही झंकार देखिए, सीने में छुप गया है तुलू ए सहर के साथ अब शाख़ ए दिल पे वो गुल ए रुख़्सार देखिए, बर्क़ ए तपीदा बाद ए सबा शोला और हम हैं कैसे कैसे उस के गिरफ़्तार देखिए, पहले भी तेज़ रौ थे पर उस दिल नशीं के साथ ये चश्म ए नम ये मस्ती ए रफ़्तार देखिए, मजरूह के लबों से ये ख़ुश्बू न जा सकी बख़्शी जो उस ने दौलत ए बेदार देखिए..!! - [अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे](https://hindigazals.com/adaa-e-tool-e-sukhan-kya-wo-ikhtiyaar-kare/): अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे जो अर्ज़ ए हाल ब तर्ज़ ए निगाह ए यार करे, बहुत ही तल्ख़ नवा हूँ मगर अज़ीज़ ए वतन मैं क्या करूँ जो तेरा दर्द बे क़रार करे, क़दम को फ़ैज़ ए जुनूँ से वो हौसला है नसीब जो ख़ार ए राह को भी शम ए रहगुज़ार करे, जगाएँ हम सफ़रों को उठाएँ परचम ए शौक़ न जाने कब हो सहर कौन इंतिज़ार करे ? - [जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं](https://hindigazals.com/jalwa-e-gul-ka-sabab-deedaa-e-tar-hai-ki-nahi/): जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं मेरी आहों से बहाराँ की सहर है कि नहीं, राह ए गुम कर्दा हूँ कुछ उस को ख़बर है कि नहीं उस की पलकों पे सितारों का गुज़र है कि नहीं, दिल से मिलती तो है एक राह कहीं से आ कर सोचता हूँ ये तेरी राहगुज़र है कि नहीं, तेज़ हो दस्त ए सितम दे भी शराब ऐ साक़ी तेग़ गर्दन पे सही जाम सिपर है कि नहीं, मैं जो कहता था सो ऐ रहबर ए कोताह ख़िराम तेरी मंज़िल भी मेरी गर्द ए सफ़र है कि नहीं, अहल ए तक़दीर ये है मोजज़ा ए दस्त ए अमल जो ख़ज़फ़ मैं ने उठाया वो गुहर है कि नहीं, देख कलियों का चटकना सर ए गुलशन सय्याद सब की और सब से जुदा अपनी डगर है कि नहीं, हम रिवायात के मुनकिर नहीं लेकिन मजरूह ज़मज़मा संज मेरा ख़ून ए जिगर है कि नहीं..!! - [ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए](https://hindigazals.com/ba-naam-e-koocha-e-dildar-gul-barse-ki-sang-aaye/): ब नाम ए कूचा ए दिलदार गुल बरसे कि संग आए हँसा है चाक ए पैराहन न क्यूँ चेहरे पे रंग आए ? - [सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में](https://hindigazals.com/siskiyon-hichkiyon-aahon-kee-farawani-me/): सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में उलझनें कितनी हैं इस इश्क़ की आसानी में, ये तेरे बालों का तालाब की तह को छूना हालत ए ख़्वाब में या आलम ए उर्यानी में, बे हिजाबाना किसी लहर का तुझ तक आना फिर तिरे जिस्म का बह जाना घने पानी में, कहकशाओं का ग़ज़ालों का ग़ज़ल ज़ादों का दूर ओ नज़दीक से आना तेरी मेहमानी में, रात का झुकना तेरी पुश्त पे दिलदारी को बाग़ के पेड़ों का आ जाना रजज़ ख़्वानी में, बाम ओ दर देखते जाते हैं खड़े सकते में एक सितारे का तवारुद तेरी पेशानी में, मरमरीं उँगलियाँ एक दिल पे लिखें हाल ए हिना फूल आवाज़ का खिल जाए पशेमानी में, चाँद मख़रूती उभारों पे शुआएँ फेंके इस क़दर महव तुझे देख के हैरानी में, साया ए साबित ओ सय्यार के हाले में चलूँ और जहानों में रहूँ तेरी निगहबानी में..!! - [दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं](https://hindigazals.com/dil-yaar-ka-takht-hua-hi-nahin/): दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं जीवन ख़ुश बख़्त हुआ ही नहीं, इसे तोड़ना भी तो नर्मी से ये दिल कभी सख़्त हुआ ही नहीं, आँखों ने बहुत इसरार किया सपना दो लख़्त हुआ ही नहीं, हम हँस कर उसे रुला देते वो और करख़्त हुआ ही नहीं, तुझ शहर तुझे हम आ मिलते कोई साज़ ओ रख़्त हुआ ही नहीं, हम छाँव बिछाते दूर तलक कोई हर्फ़ दरख़्त हुआ ही नहीं, मिट्टी के माधो रहे सदा हम सा कज बख़्त हुआ ही नहीं..!! - [कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो](https://hindigazals.com/kanval-jo-wo-kanaar-e-aabjoo-na-ho/): कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो किसी भी अप्सरा से गुफ़्तुगू न हो, क़ज़ा हुआ है एक जिस्म ए बे तरह कहीं हमारी आँख बे वज़ू न हो, हथेलियों में भर के बात तो करें चराग़ को मुकालमे की ख़ू न हो, दमक रहा है केसरी हिजाब से इस आईने में कोई हू ब हू न हो, मैं क्या करूँगा रह के इस जहान में जहाँ पे एक ख़्वाब की नुमू न हो..!! - [कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने](https://hindigazals.com/kahaniyon-ne-zara-kheench-kar-badan-apne/): कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें खुले गले के फ़िराक़ ये लड़कियाँ हैं बदलती हैं पैरहन अपने, ग़दर के फूल सजाती हैं ऐसे बालों में सँभाल सकती हों जैसे भरे बदन अपने, अजब भड़क है शराबों की और आँखों की बला है हुस्न बिदकने लगे हैं बन अपने, पराए दर्द की ठिकरी से घर करें रौशन कि सिफ़्लगी की रियाज़त में हैं मगन अपने, ये इंकिसार के पुतले ये सीम ओ ज़र की सना ये मस्ख़रे हैं कि चोले में गोरकन अपने, हमें निकालो घरों की कमीन गाहों से लहू के रम से दहकने लगे ख़ुतन अपने, हम एहतियाज के हुजरों से रिज़्क़ चुनते हुए ज़मीं के ख़्वान पे रखने लगे लगन अपने, ये आरज़ूओं के चक़माक़ से जले सीने जो आतिशीं हैं मगर नोचते हैं तन अपने, यहाँ ज़मीन पे बलवे यहाँ ज़मीं पे फ़साद निकाल रखते हैं संदूक़ से कफ़न अपने, वो बास दूर के ख़तों की औरतों में उड़ी जिसे जहाज़ों में लाए थे हम सुख़न अपने..!! - [सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी](https://hindigazals.com/sabz-hiqayat-surkh-kahani/): सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी तेरे आँचल की मेहमानी, सहज सहज उस हुस्न का चलना उस पे अंधी शब तूफ़ानी, एक मिसरा वो जिस्म इकहरा दूजा मेरे लब दहक़ानी, जिल्द सुनहरी होंट पियाज़ी इस पे ख़्वाहिश की अर्ज़ानी, बालों का घनघोर अंधेरा उभरी ईंटों की हैरानी, पिंडली से टकराती पिंडली उतरन की फ़ित्ना सामानी, एक लड़की के दूपट्टे पर हम ने एक रुत है फैलानी, अंगूरों की बेल से शब भर बातें करती है वीरानी, पुश्त ये नील पड़े हों जैसे जलता है पाताल में पानी, दो जिस्मों की आँख अनोखी ख़्वाब और ख़्वाहिश की यकजानी, ओस के भाले रूह के छाले छाले सा एक दिल सैलानी, कैसे दिल मसले जाता है गदला दिन कौड़ी यर्क़ानी, एक तावीज़ का सब्ज़ा दिल पर एक हिकायत रात की रानी, देख दिलासों वाला कासा इश्क़ की दमड़ी की हैरानी, सावन के छज्जे पर आमिर एक भी बूँद नहीं बारानी..!! - [ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे](https://hindigazals.com/khyaal-tha-ki-tujhe-paa-ke-khud-ko-dhoondhenge/): ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से भी गए, बिछड़ के खत भी न लिखे उदास यारों ने कभी कभी की अधूरी सी बात से भी गए, वो शाख शाख लचकते हुए बदन मोहसिन मुझे तो मिल न सके तेरे हाथ से भी गए..!! - [लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं](https://hindigazals.com/lahoo-me-rang-e-sukhan-us-ka-bhar-ke-dekhte-hain/): लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के देखते हैं, मुलाएमत है ग़ज़ल की सी उस की बातों में ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं, सहीफ़ा ए लब ओ रुख़्सार ओ पैरहन उस का तिलावतों में हैं पत्ते शजर के देखते हैं, बला के नामे हैं दो सीपयाई आँखों में गुरेज़ ओ गर्दिश ओ ग़म्ज़े नज़र के देखते हैं, बलाएँ लेते हुए हुस्न ए बे निहायत की तेरी तरफ़ तेरे उश्शाक़ डर के देखते हैं, चराग़ते हैं किसी नज़्म के घने अबरू किसी ग़ज़ल की जुदाई में मर के देखते हैं, ठहर गया हो न आवाज़ ए पा तेरी सुन कर सो दिल पे रा’शा ज़दा हाथ धर के देखते हैं, करख़्तगी है न ख़ुद रफ़्तगी न फ़हमाइश मिज़ाज बदले हुए हम सफ़र के देखते हैं, रुके हुए हैं बहुत लोग देखने के लिए सो हम भी शो’बदे उस ख़्वाबगर के देखते हैं, भरी है रंज की बारिश से उम्र की कारेज़ हम एक कोने में बैठे हैं घिर के देखते हैं, अब उठ भी जाए कोई ख़्वाब गाह ए गिर्या से वो पौ फटी वो मनारे सहर के देखते हैं, ये सीमयाई बदन ख़्वाब ए नीम शब तो नहीं सो ख़ाल ओ ख़द की तमाज़त को डर के देखते हैं, ऐ तेरे सब्ज़ा ए रुख़्सार की दिल आवेज़ी नवाह ए चश्म से आँसू गुज़र के देखते हैं, कटी है उम्र ग़ज़ल ज़ाद गाँ की सोहबत में उन्ही के कूचे में आख़िर बिखर के देखते हैं, मशक़्क़ती हैं तेरे काख़ ओ कू ए हिज्र के हम शराब ए हिज्र प्याले में भर के देखते हैं, झुकाए काँधों को उश्शाक़ पा ब गिल की तरह निढाल प्यास से हम लोग थर के देखते हैं, बला का क़हत है सैलाब है तअत्तुल है कोई वतन है मनाज़िर ग़दर के देखते हैं, हो इज़्न संग ए लहद के तवाफ़ का आमिर तुयूर उड़ते हुए काशग़र के देखते हैं, चली है तोहमत ओ तकज़ीब की हवा आमिर सो शहर ए ख़ाक ओ ख़बर में ठहर के देखते हैं..!! - [लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से](https://hindigazals.com/lahoo-rago-me-sambhaala-nahi-gaya-mujh-se/): लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों में भरता मैं लोच सावन का वो संग मोम में ढाला नहीं गया मुझ से, मैं ख़्वाब पढ़ता था हमसायगी की अबजद से मगर वो हुस्न ख़याला नहीं गया मुझ से, वही है मेरे लहू में चमक उलूही सी समय उजालने वाला नहीं गया मुझ से, फ़िराक़ कहती थीं नेपाली नद्दियाँ आमिर मगर शिकोह ए हिमाला नहीं गया मुझ से..!! - [सर को आवाज़ से वहशत ही सही](https://hindigazals.com/sar-ko-aawaz-se-wahshat-hi-sahi/): सर को आवाज़ से वहशत ही सही और वहशत में अज़िय्यत ही सही, ख़ाक ज़ादी तेरे उश्शाक़ बहुत मैं तेरी याद से ग़ारत ही सही, वो कहाँ हैं कि जो मस्लूब न थे मेरी मिट्टी में बग़ावत ही सही, आह ओ आहंग ओ इहानत के कनार ऐ मेरी प्यास पे तोहमत ही सही, ख़ुद से मीसाक़ ग़लत था मेरा ऐ तेरे ख़्वाब ज़रूरत ही सही, इश्क़ ऐ इश्क़ अज़ादार हूँ मैं दोश पे बार ए हज़ीमत ही सही, फिर किसी ख़्वाब की बैअ’त कर लें फिर किसी दुख की तिलावत ही सही, एक ख़्वाहिश कि जिसे सींच सकें राइगानी की रियाज़त ही सही, हम से कुछ और तो क्या होना है एक तेरे ग़म की हिफ़ाज़त ही सही, लौटते हैं कि बुलाता है कोई बारिश ए संग ए मलामत ही सही, टूटते हैं कि नशा टूटता है ख़ुद से मिलने में अज़िय्यत ही सही, अब किसी और की ख़्वाहिश ही कहाँ अब तेरे हिज्र से फ़ुर्सत ही सही, काग़ज़ी शहर उड़े जाते हैं वो आसमानों की रिफ़ाक़त ही सही..!! - [ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं](https://hindigazals.com/ye-tere-husn-ka-aaveza-jo-mahtab-nahin/): ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं का’बा ए इश्क़ नहीं रौज़ा ए यक ख़्वाब नहीं, एक कोलाज़ बनाती है तेरी ख़ामोशी ख़त ए इंकार नहीं सूरत ए ईजाब नहीं, कोहर की रेहल पे और धुँद के जुज़दान में वो एक सहीफ़ा है कि जिस पर कोई एराब नहीं, एक कहानी के पस ओ पेश तेरी आहट है घास के कुंज नहीं काई के तालाब नहीं, तेरे पा पोश मेरा तकिया तेरा जिस्म ए हरम इस से ज़ियादा तो निगह वाक़िफ़ ए आदाब नहीं, आइनों की है कोई बाढ़ मिरे रस्ते में सद्द ए अफ़्लाक नहीं चादर ए अस्बाब नहीं, शक्ल जो मुझ पे परिस्तान के दर खोलती है रौनक़ ए हुजरा नहीं ज़ीनत ए मेहराब नहीं, ये ज़मानों की अदाएँ ये जहानों का सुलूक ऐसे लोगों से जो इस अहद में कमयाब नहीं, दिल बहे जाता है किस रौ के बहाव में कि वो शिद्दत ए हिज्र नहीं तुंदी ए सैलाब नहीं, तेरी आँखों में मिरी नींद का तेज़ाब नहीं तेरे होंटों पे मिरे होंट हैं और ख़्वाब नहीं, ख़ून से अट गईं शाहराहें पेशावर तेरी दोश पे दर्रों के अब चादर ए कम ख़्वाब नहीं..!! - [है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए](https://hindigazals.com/hai-khushi-se-kis-tarah-gam-ka-khasaara-dekhiye/): है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर चाहें तो ये जिंस ए वफ़ा भी आम हो रिश्ता ए मुबहम है अब एक इस्तिआरा देखिए, ये हिसार ए इश्क़ भी है एक हिसार ए ख़ुशनुमा ख़ुद चुना है गिर्द अपने ईंट गारा देखिए, था यक़ीन लंगड़ा उधर और प्यार अंधा था इधर पाँव लंगड़े को मिला अंधे को तारा देखिए, शम्स छुप सकता है जिस के एक इशारे से अगर चाँद भी हो सकता है फिर पारा पारा देखिए..!! - [जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव](https://hindigazals.com/jab-shahar-e-dil-me-pad-gaye-us-zar-badan-ke-paanv/): जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव पड़ते नहीं ज़मीन पे अब इस चमन के पाँव, वो कौन आज रातों में घर से निकल पड़ा उठने लगे हैं शहर की सम्त आज बन के पाँव, लाओ तो धो दूँ अश्क से वो पाँव मैं ज़रा तेरी गली से आए हैं उस बरहमन के पाँव, कहता हूँ दिल में आने को आता नहीं है वो रखता नहीं है सिल पे वो अपने सनम के पाँव, आया तो दिल में बैठ गया बन के देवता उठे नहीं हैं इश्क़ ए दिल ए बुत शिकन के पाँव, इरफ़ान ए इश्क़ तोड़ दे ज़ंजीर ए फ़े’ल को रुक जाएँ अपने आप ही आवागवन के पाँव, अब तक है क़ल्ब ए शम्स से रौशन ये ख़ल्क़ बस एक बार पड़ गए थे जो शो’ला-बदन के पाँव, सारे तमद्दुनों का है ख़तरे में अब वजूद थमते नहीं हैं पर कभी गंग ओ जमन के पाँव..!! - [शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई](https://hindigazals.com/shigaaf-e-khana-e-dil-se-hi-raushni-aayi/): शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई उसे तो आना था हर हाल में चली आई, कहीं ख़ुदा न बने मुझ से ख़ौफ़ ए हिज्र ए अज़ीज़ कभी रुलाई कभी सोच के हँसी आई, उछल रही थीं बहुत मछलियाँ सी आँखों में जो डाला जाल तो खिंचती हुई नदी आई, हवा के हाथ जले एक दिया जलाने में वो सारी बस्ती जलाती हुई चली आई, वो अपने साथ कई साए ले के डूबेगा यही उमीद दर ए शम्स से लगी आई..!! - [जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते](https://hindigazals.com/jo-samjhaate-bhi-aa-kar-vaaieez-e-barham-to-kya-karte/): जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ का ग़म तो क्या करते ? - [आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था](https://hindigazals.com/aakhir-gam-e-jaanaan-ko-ae-dil-badh-kar-gam-e-dauraan-hona-tha/): आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना था दरिया इस मौज को तूफ़ाँ होना था, हर मोड़ पे मिल जाते हैं अभी फ़िरदौस ओ जिनाँ के शैदाई तुझ को तो अभी कुछ और हसीं ऐ आलम ए इम्काँ होना था, वो जिस के गुदाज़ ए मेहनत से पुर नूर शबिस्ताँ है तेरा ऐ शोख़ उसी बाज़ू पे तेरी ज़ुल्फ़ों को परेशाँ होना था, आती ही रही है गुलशन में अब के भी बहार आई है तो क्या है यूँ कि क़फ़स के गोशों से एलान ए बहाराँ होना था, आया है हमारे मुल्क में भी एक दौर ए ज़ुलेख़ाई यानी अब वो ग़म ए ज़िंदाँन देते हैं जिन को ग़म ए ज़िंदाँ होना था, अब खुल के कहूँगा हर ग़म ए दिल मजरूह नहीं वो वक़्त कि जब अश्कों में सुनाना था मुझ को आहों में ग़ज़ल ख़्वाँ होना था..!! - [एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ](https://hindigazals.com/ek-chhota-saa-khwab-tha-jo-poora-nahi-hua/): एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ वो शख्स मेरा हो कर भी मेरा नहीं हुआ, आज भी ये याद करते हुए रोता हूँ क्यूँ किसी और का हुआ और मेरा नहीं हुआ ? - [हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए](https://hindigazals.com/hum-ne-kab-chaaha-ki-wo-shakhs-humara-ho-jaaye/): हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो जाए, हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है तुम जिसे हाथ लगा दो वो तुम्हारा हो जाए, तुम को लगता है कि तुम जीत गए हो मुझ से है यही बात तो फिर खेल दुबारा हो जाए, है मोहब्बत भी अजब तर्ज़ ए तिजारत कि यहाँ हर दुकाँ दार ये चाहे कि ख़सारा हो जाए..!! - [सूरज उस के घर की कोई खिड़की है](https://hindigazals.com/sooraj-us-ke-ghar-kee-koi-khidki-hai/): सूरज उस के घर की कोई खिड़की है सुब्ह खुले तो शाम को बँद हो जाती है, नस्ल ए आदम जिस के पीछे है पागल दुनिया जन्नत से भागी एक लड़की है, इश्क़ भी फ़र्ज़ है तेरे इंसाँ होने का शादी भी सामाजिक ज़िम्मेदारी है, नीला दुपट्टा याद है क्या तुम को उस का आसमान के सीने पर जो भारी है, दिल से आँखों तक एक नद्दी है जिस में हर दम उल्टी गंगा बहती रहती है, दुनिया है एहसास का एक बेकल दरिया इश्क़ तो पार उतरने की तय्यारी है, आग लगी है दिल में फिर भी ग़म है मकीन जैसे तितली अंगारे पर बैठी है, काँटे तो चुभते हैं केवल पाँव में फूलों की दिल के छालों से यारी है, राम नहीं हूँ मैं न तो वो ही है सीता पागल लड़की सारी बात समझती है, शम्स हवा में रहने से तो लाख गुना बेहतर है वो शख़्स कि जिस पर मिट्टी है..!! - [क्या अंधेरा है क्या उजाला है](https://hindigazals.com/kya-andhera-hai-kya-ujaala-hai/): क्या अंधेरा है क्या उजाला है ये नज़रिये का बस हवाला है, रंग बस एक ही है दुनिया में इश्क़ ने हुस्न पर जो डाला है, रोज़ सूरज सहर में घर आए शाम को रोज़ घर निकाला है, हैं धनक में जो दिखते सातों रंग वो तबस्सुम ने तेरे डाला है, कौन खोलेगा दिल का वो कमरा नाम का तेरे जिस पे ताला है, ज़िंदगी की किताब का पन्ना एक उजला है एक काला है, शम्स कहती है जिस को ये दुनिया वो मेरे दिल का एक छाला है..!! - [जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे](https://hindigazals.com/junglon-me-jo-khuda-titliyan-mahfooz-rakhe/): जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे, मैं ने एक फ़स्ल उगा रखी है दर्द ए दिल की मेरी आँखों में क़ज़ा बदलियाँ महफ़ूज़ रखे, बादबाँ खोल दिया हम ने फ़लक को कह दो आँधियाँ वाँधियाँ ये बिजलियाँ महफ़ूज़ रखे, दश्त ओ सहरा में रखे इश्क़ को ज़िंदा जो वो शहर के बीच में वीरानियाँ महफ़ूज़ रखे, जब क़फ़स दे ही दिया है मेरी क़िस्मत में तब वहशत ए इश्क़ से ये तीलियाँ महफ़ूज़ रखे..!! - [मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा](https://hindigazals.com/mujhe-yaqeen-hai-koi-raasta-to-nikalega/): मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा, मैं रेगज़ारों में दरिया तलाश करता हूँ मेरी तलाश से एक सिलसिला तो निकलेगा, किताब ए ज़ीस्त के पन्ने पलट रहा हूँ मैं किसी वरक़ से कोई फ़ल्सफ़ा तो निकलेगा, दिए दिखाते रहो दिन में ऐसे सूरज को जो उस के दिल में अंधेरा हुआ तो निकलेगा, ये सोच कर के चमन में लगा दी आग उस ने के इस में कोई परिंदा हुआ तो निकलेगा, सदाएँ देना मेरा काम है करूँगा मैं कोई पहाड़ मेरा हमनवा तो निकलेगा, मैं सारे शहर को ख़्वाबीदा छोड़ कर निकला के आँख खुलने पे एक रहनुमा तो निकलेगा, चलो भी शम्स उठो जुगनुओं की महफ़िल से तुम्हारे बा’द कोई मुद्द’आ तो निकलेगा..!! - [अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया](https://hindigazals.com/apna-tumhen-banana-tha-kah-kar-bana-liya/): अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया तर्ज़ ए वफ़ा का एक नया दफ़्तर बना लिया, दुनिया को ग़म का दरिया कहा अहल ए इल्म ने हम ने तुम्हारी याद को गौहर बना लिया, हाथों में उस का हाथ लिया और इस तरह ख़ुद को रह ए वफ़ा का सिकंदर बना लिया, मेरे लहू में लम्स तेरा दौड़ता है यूँ सीना से दिल निकाल के सागर बना लिया, ठोकर लगा दी राह में जिस दर को आप ने उस दर को सब ने मील का पत्थर बना लिया, अहद ए विसाल उन से क़यामत के रोज़ था तो वक़्त ए हिज्र शम्स ने महशर बना लिया..!! - [वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना](https://hindigazals.com/vasl-kee-aakhiri-manzil-hai-fana-ho-jaana/): वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना तुझ से मिल कर तेरे बंदे का ख़ुदा हो जाना, शम्अ से मिल के ज़रा देख तो परवाने का रंग कितना मुश्किल है कोई फ़र्क़ ज़रा हो जाना, हम तो परछाई हैं बस इश्क़ की ऐ तेग़ ए वक़्त हम को काटे से भला इश्क़ का क्या हो जाना, ज़िंदगी को तो समझते हैं हम एक चाल तेरी मौत है इस का जवाब उस पे फ़िदा हो जाना, मुश्तरी ज़ोहरा ज़ुहल शम्स ओ हिलाल ओ मिर्रीख़ तेरे कूचे को है यूँ राह ए वफ़ा हो जाना..!! - [भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ](https://hindigazals.com/bhatakta-hoon-magar-khoya-nahi-hoon/): भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ बनाई राह पे चलता नहीं हूँ, मुझे रंगने की कोशिश मत करो तुम मैं माज़ी का कोई पन्ना नहीं हूँ, मुझे ही लोग खो देते हैं अक्सर किसी को मैं कभी खोता नहीं हूँ, मैं शामिल हूँ फ़क़ीरों की ख़ुशी में मैं सिक्का हूँ मगर खोटा नहीं हूँ, नहा लेता हूँ जा कर मयकदे में लहू से हाथ मैं धोता नहीं हूँ, ग़ज़ल के गाँव में सब हैं मुनाफ़िक़ किसी के घर मैं अब जाता नहीं हूँ, बिछा कर जिस्म की चादर वो बोला समझते हो जो तुम वैसा नहीं हूँ, मेरी क़ीमत गिरा सकते नहीं तुम मैं इंसाँ हूँ कोई रुपया नहीं हूँ..!! - [दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं](https://hindigazals.com/daar-o-rasan-pe-har-koi-mansoor-to-nahin/): दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं झुलसे हुए पहाड़ सभी तूर तो नहीं, ईसा नफ़स है इश्क़ अगर ये बताइए कि है कभी सलीब से वो दूर तो नहीं, हैं राहज़न ये साँसें मेरी क्या बताऊँ मैं फिर भी सफ़र हयात का मजबूर तो नहीं, ये रौशनी क़सीदा है तेरे ज़ुहूर का आँखों से दिख सके वो तिरा नूर तो नहीं, पत्थर गले में बाँध के दरिया में डूब जा ऐ शम्स तेरा इश्क़ उसे मंज़ूर तो नहीं..!! - [मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा](https://hindigazals.com/mohabbat-me-shab-e-tareek-e-hizraan-kaun-dekhega/): मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा हमीं देखेंगे ये ख़्वाब ए परेशाँ कौन देखेगा ? - [शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी](https://hindigazals.com/shamaa-se-ye-kah-rahi-hai-khaaq-e-parwana-abhi/): शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी रात आख़िर हो गई बाक़ी है अफ़्साना अभी, ख़त्म हो जाएगी इस के बा’द तफ़्सीर ए हयात ज़िंदगी कहने को है एक और अफ़्साना अभी, बाल तो आ ही गया अब टूटने की देर है और एक सदमे का है मुहताज पैमाना अभी, क़ैद पीने की नहीं पी कर बहकना जुर्म है हम ने समझा ही नहीं दस्तूर ए मयख़ाना अभी, आज तो शायद थके हारों की मंज़िल आ गई और थोड़ी दूर चल ऐ अज़्म ए मर्दाना अभी, उस के हाथों से कहीं दामन छुड़ाया जाएगा तुम ने देखा ही नहीं है कोई दीवाना अभी, देख ऐ रहरौ पहुँचना है हरीम ए नाज़ तक का’बा रोकेगा तुझे रोकेगा बुतख़ाना अभी, ज़ेहन में अब भी उभर आते हैं देरीना नुक़ूश हँसते हँसते रो लिया करता है दीवाना अभी, तू ग़म ए दुनिया से ऐ मख़मूर घबराता है क्यों तेरी जानिब है निगाह ए पीर ए मयख़ाना अभी..!! - [चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे](https://hindigazals.com/chuna-tha-un-kee-mohabbat-ne-aazma-ke-mujhe/): चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे सुपुर्द ए ख़ाक किया आदमी बना के मुझे, मैं अपने दिल में ख़ुद अपनी वफ़ा पे नादिम हूँ उन्हें ख़ुशी न हुई ख़ाक में मिला के मुझे, लगी में और लगाती है ख़ाक परवाना मआल ए सोज़ ए मोहब्बत दिखा दिखा के मुझे, ये मेरे दर्द ए तमन्ना की आज़माइश है क़फ़स में छोड़ दिया गुलसिताँ से ला के मुझे, वो बज़्म और मेरे बा’द जगमगा उट्ठी बहुत चराग़ जलाए गए बुझा के मुझे, नियाज़ मंद हूँ तौफ़ ए हरम भी कर लूँगा जो वक़्त मिल गया सज्दों से नक़्श ए पा के मुझे, बड़ा करम हो जो ऐसे में याद आ जाओ सता रहे हैं बहुत नक़्श मा सिवा के मुझे, ये एक दिन का नहीं उम्र भर का रोना है ख़ुदा के वास्ते देखो न मुस्कुरा के मुझे, फ़रोग़ देंगे कभी शमअ ए अंजुमन की तरह अभी तो देख रहे हैं जला जला के मुझे, मुदाम रहता है मख़मूर कैफ़ का आलम करम किया मेरे साक़ी ने मय पिला के मुझे..!! - [बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए](https://hindigazals.com/badh-kar-kisi-se-haath-milaane-nahin-gaye/): बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए, दालान अपनी छान के बैठे तमाम उम्र चक्कर किसी महल का लगाने नहीं गए, जब भी गए तो बैठ गए पाँव के तले ग़लती से भी बड़ों के सिरहाने नहीं गए, महफ़िल में तेरी शोर है मेरे ही नाम का जाने के बाद भी वो फ़साने नहीं गए, अपने हुनर से शम्स थे जुगनू थे जो भी थे फोटो किसी के साथ खिंचाने नहीं गए..!! - [रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई](https://hindigazals.com/rassi-to-jal-gayi-magar-aiethan-nahi-gayi/): रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई चाहत तुम्हारी यूँ दम ए कुश्तन नहीं गई, तुम चाहते नहीं थे हमें फिर ये क्यों हुआ अब भी तुम्हारी आँखों की उलझन नहीं गई, करवट बदल के काटी थी हर शब तेरे बग़ैर आदत वो अब भी छोड़ के मदफ़न नहीं गई, सारी ख़ुदाई वैसे लगी तो रही मगर इस दिल से तेरी याद भी दुश्मन नहीं गई, एक बुत के इश्क़ में तू करे है ख़ुदा ख़ुदा ऐ शम्स तेरी ज़ात ए बरहमन नहीं गई..!! - [तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी](https://hindigazals.com/tum-se-vabasta-hai-meri-maut-meri-zindagi/): तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी जिस्म से अपने कभी साया जुदा होता नहीं, इस तरह फ़रियाद करने को कलेजा चाहिए अब कोई गुलशन में मेरा हमनवा होता नहीं, वो मोहब्बत आफ़रीं देता है हस्ब ए ज़र्फ़ ए इश्क़ फिर किसी से भी तलबगार ए वफ़ा होता नहीं, एक तख़य्युल है कि जिस में महव है मेरा दिमाग़ एक तसव्वुर ये जो आँखों से जुदा होता नहीं, सई ए फ़हम ए ज़ात ए बारी और ये महदूद अक़्ल जिस का हासिल कुछ भी हैरत के सिवा होता नहीं, अशरफ़ उल मख़्लूक़ कहते हैं उसी मजबूर को जिस का कोई काम बे दस्त ए दुआ होता नहीं, जितने अरमाँ दिल में थे मख़मूर सब मौजूद हैं एक भी तो अपने मरकज़ से जुदा होता नहीं..!! - [दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती](https://hindigazals.com/dalayel-se-khuda-tak-aql-e-insani-nahin-jaati/): दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती वो एक ऐसी हक़ीक़त है जो पहचानी नहीं जाती, इसे तो राह में अरबाब ए हिम्मत छोड़ देते हैं किसी के साथ मंज़िल तक तन आसानी नहीं जाती, किसे मिलती हैं वो आँखें मोहब्बत में जो रोती हैं मुबारक हैं वो आँसू जिन की अर्ज़ानी नहीं जाती, उभरता ही नहीं दिल डूब कर बहर ए मोहब्बत में जब आ जाती है इस दरिया में तुग़्यानी नहीं जाती, गदाई में भी मुझ पर शान ए इस्तिग़ना बरसती है मेरे सर से हवा ए ताज ए सुल्तानी नहीं जाती, मुक़ीम ए दिल हैं वो अरमान जो पूरे नहीं होते ये वो आबाद घर है जिस की वीरानी नहीं जाती, कुछ ऐसा परतव ए हुस्न ए अज़ल ने कर दिया रौशन क़यामत तक तो अब ज़र्रों की ताबानी नहीं जाती, कुछ ऐसे बरगुज़ीदा लोग भी हैं जिन के हाथों से छुड़ा कर अपना दामन पाक दामनी नहीं जाती, हुजूम ए यास में भी ज़िंदगी पर मुस्कुराता हूँ मुसीबत में भी मेरी ख़ंदा पेशानी नहीं जाती..!! - [हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे](https://hindigazals.com/hazar-ranj-ho-dil-laakh-dard-mand-rahe/): हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे ख़याल पस्त न हो हौसला बुलंद रहे, ग़म ए फ़िराक़ में दिल क्यूँ न दर्द मंद रहे ? - [रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़](https://hindigazals.com/rukh-har-ek-teer-e-nazar-ka-hai-mere-dil-kee-taraf/): रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़ आने वाले आ रहे हैं अपनी मंज़िल की तरफ़, डूबने वाले की मायूसी पे दिल थर्रा गया किस निगाह ए यास से देखा था साहिल की तरफ़, सच है एक उजड़ी हुई दुनिया के क्या लैल ओ नहार तुम से भी अब तो न देखा जाएगा दिल की तरफ़, किस फ़सुर्दा-ख़ातिरी से रात भर जलती रही देर तक देखा किए हम शम ए महफ़िल की तरफ़, अपनी मर्ज़ी से नहीं अपने इरादे से नहीं हर मुसाफ़िर के क़दम उठते हैं मंज़िल की तरफ़, तुम को क्या मालूम क्या बनती है दिल पर इश्क़ में आइना ले कर ज़रा देखो मुक़ाबिल की तरफ़, हो गया मख़मूर राज़ ए ज़िंदगी का इंकिशाफ़ मौज आती है फ़ना होने को साहिल की तरफ़..!! - [मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है](https://hindigazals.com/mohabbat-ehtimam-e-daar-bhi-hai/): मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है मोहब्बत मिस्र का बाज़ार भी है, मोहब्बत मुस्तक़िल आज़ार भी है ये गुलशन वादी ए पुर ख़ार भी है, वो तूफ़ाँ जो डुबो देता है अक्सर इसी तूफ़ाँ से बेड़ा पार भी है, ख़ुदी की हद में है मजबूर इंसान ख़ुदी मिट जाए तो मुख़्तार भी है, हरीम ए दिल में भी है जल्वा फ़रमा मेरा यूसुफ़ सर ए बाज़ार भी है, न क्यों मर जाइए मरने से पहले यही होना मआल ए कार भी है, मेरा चाक ए गरेबाँ सीने वाले ये दिल में ज़ख़्म ए दामन दार भी है, ज़माने को शिकायत है वफ़ा की ज़माना ख़ुद वफ़ा बेज़ार भी है, मेरी नाकामियाँ शाहिद हैं इस की मैं अब समझा कि तू मुख़्तार भी है, मेरे दिल की तमन्नाएँ न पूछो ये नादाँ ‘आफ़ियत बेज़ार भी है, कोई हद भी वफ़ा के इम्तिहाँ की सताने का कोई मे’यार भी है, ये कहती है सदा ए लन तरानी किसी में ताक़त ए दीदार भी है, नहीं बहका कभी मख़मूर पी कर ये दीवाना भी है हुशियार भी है..!! - [एक बिखरते आशियाँ की बात है](https://hindigazals.com/ek-bikharte-aashiyaan-kee-baat-hai/): एक बिखरते आशियाँ की बात है एक शिकस्ता साएबाँ की बात है, मेरे माथे के निशाँ की बात है उन के संग ए आस्ताँ की बात है, दर्द ओ ग़म के क़ाफ़िले का ज़िक्र है अश्क की मौज ए रवाँ की बात है, रूह का रिश्ता है ये तेरा मेरा ये भला कब जिस्म ओ जाँ की बात है, लोग जो कहते हैं तुम को बेवफ़ा तुम बताओ ये कहाँ की बात है, ज़ख़्म भर कर फिर हरे कैसे हुए बस कफ़ ए चारा गराँ की बात है, सच वही है जो अभी मैं ने कहा बाक़ी ज़ेब ए दास्ताँ की बात है..!! - [दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता](https://hindigazals.com/duee-ka-tazkira-tauhid-me-paya-nahi-jaata/): दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता जहाँ मेरी रसाई है मेरा साया नहीं जाता, मेरे टूटे हुए पा ए तलब का मुझ पे एहसाँ है तुम्हारे दर से उठ कर अब कहीं जाया नहीं जाता, मोहब्बत हो तो जाती है मोहब्बत की नहीं जाती ये शो’ला ख़ुद भड़क उठता है भड़काया नहीं जाता, फ़क़ीरी में भी मुझ को माँगने से शर्म आती है सवाली हो के मुझ से हाथ फैलाया नहीं जाता, चमन तुम से इबारत है बहारें तुम से ज़िंदा हैं तुम्हारे सामने फूलों से मुरझाया नहीं जाता, मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता, तकल्लुफ़ बर तरफ़ तुम कैसे मा’बूद ए मोहब्बत हो कि एक दीवाना तुम से होश में लाया नहीं जाता, मोहब्बत अस्ल में मख़मूर वो राज़ ए हक़ीक़त है समझ में आ गया है फिर भी समझाया नहीं जाता..!! - [किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता](https://hindigazals.com/kise-apna-banayen-koi-is-qaabil-nahin-milta/): किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, मोहब्बत का सिला ईसार का हासिल नहीं मिलता वो नज़रें बार हा मिलती हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, तुम्हारा रूठना तम्हीद थी अफ़्साना ए ग़म की ज़माना हो गया हम से मिज़ाज ए दिल नहीं मिलता, जहाँ तक देखता हूँ मैं जहाँ तक मैं ने समझा है कोई तेरे सिवा तारीफ़ के क़ाबिल नहीं मिलता, हरम की मंज़िलें हों या सनम ख़ाने की राहें हों ख़ुदा मिलता नहीं जब तक मक़ाम ए दिल नहीं मिलता, मुसाफ़िर अपनी मंज़िल पर पहुँच कर चैन पाते हैं वो मौजें सर पटकती हैं जिन्हें साहिल नहीं मिलता, हम अपना ग़म लिए बैठे हैं उस बज़्म ए तरब में भी किसी नग़्मे से अब मख़मूर साज़ ए दिल नहीं मिलता..!! - [ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता](https://hindigazals.com/khuda-jab-tak-na-chahe-aadmi-se-kuch-nahin-hota/): ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता मुझे मालूम है मेरी ख़ुशी से कुछ नहीं होता, मोहब्बत जज़्बा ए ईसार से परवान चढ़ती है ख़ुलूस ए दिल न हो तो दोस्ती से कुछ नहीं होता, वहाँ तेरा करम तेरा भरोसा काम आता है जहाँ मजबूर हो कर आदमी से कुछ नहीं होता, ज़िया ए शम्स भी मौजूद है नूर ए क़मर भी है बसीरत ही न हो तो रौशनी से कुछ नहीं होता, ग़रज़ तेरे सिवा हर एक को मजबूर पाता हूँ भरोसा जिस पे करता हूँ उसी से कुछ नहीं होता, ख़ुद अपने हाल से उलझे हुए हैं तेरे दीवाने हँसे जाए ज़माने की हँसी से कुछ नहीं होता, मोहब्बत बद गुमाँ हो जाए तो ज़िंदा नहीं रहती असर दिल पर तुम्हारी बे रुख़ी से कुछ नहीं होता..!! ## Pages - [Terms & Conditions](https://hindigazals.com/terms-conditions/): These Terms and Conditions govern your use of hindigazals.com (referred to as “the Website”). - [Privacy Policy](https://hindigazals.com/privacy-policy/): At Hindi Gazals, accessible from hindigazals.com, we are committed to protecting your privacy. - [Disclaimer](https://hindigazals.com/disclaimer/): This Disclaimer governs your use of hindigazals.com (hereafter referred to as “the Website”). By using this site, you accept this disclaimer in full. - [Contact](https://hindigazals.com/contact/): We’d love to hear from you! Whether you have a question, feedback, or would like to collaborate, feel free to reach out. - [About](https://hindigazals.com/about/): Welcome to Hindi Gazals — where timeless verses meet modern hearts. ## Optional - [Agent (MCP protocol)](websites-agents.hostinger.com/hindigazals.com/mcp) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)